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  • छत्तीसगढ़ में सुघ्घर छत्तीसगढ़ अभियान की उच्चस्तरीय समीक्षा, मुख्य सचिव ने योजनाओं के क्रियान्वयन का लिया जायजा।

    छत्तीसगढ़ में सुघ्घर छत्तीसगढ़ अभियान की उच्चस्तरीय समीक्षा, मुख्य सचिव ने योजनाओं के क्रियान्वयन का लिया जायजा।

    रायपुर 

    छत्तीसगढ़ में सुघ्घर छत्तीसगढ़ अभियान की प्रगति तेज

    छत्तीसगढ़ शासन द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों के अंतिम व्यक्ति और प्रत्येक पात्र परिवार तक जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुँचाने के उद्देश्य से शुरू किए गए महत्वाकांक्षी सुघ्घर छत्तीसगढ़ अभियान की प्रगति को लेकर आज उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। मुख्य सचिव ने इस दौरान सुघ्घर छत्तीसगढ़ डैश-बोर्ड पर दर्ज योजनाओं के क्रियान्वयन और पात्र हितग्राहियों को लाभान्वित किए जाने की चल रही कार्रवाई की विस्तार से समीक्षा की।

    डैश-बोर्ड के माध्यम से पारदर्शिता और निगरानी

    सुघ्घर छत्तीसगढ़ ग्रामीण योजना के तहत शासन की विभिन्न योजनाओं के सभी पात्र हितग्राहियों को लाभान्वित करने के लिए एक विशेष राज्य-स्तरीय डैश-बोर्ड तैयार किया गया है। इस डैश-बोर्ड पर राज्य एवं केंद्र शासन की हितग्राही मूलक योजनाओं के सर्वेक्षित हितग्राहियों की सूची दर्ज है। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए हैं कि इस राज्य-स्तरीय डैश-बोर्ड में शासन की सभी योजनाओं की जिलेवार संतृप्ति का स्पष्ट विवरण होना चाहिए, ताकि पारदर्शिता और त्वरित गति से योजनाओं का क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।

    प्रमुख योजनाओं की समीक्षा

    बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने निम्नलिखित प्रमुख योजनाओं के संतृप्तिकरण की स्थिति पर अधिकारियों से विस्तृत जानकारी ली। प्रधानमंत्री किसान योजना एवं मृदा स्वास्थ्य कार्ड, राशन कार्ड एवं मुफ्त राशन वितरण, जॉब कार्ड एवं प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), महतारी वंदन योजना, कौशल विकास कार्यक्रम, प्रधानमंत्री जन-धन योजना व अन्य हितग्राही मूलक योजनाओं के साथ ही, भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा आयोजित बैठक के कार्यवाही विवरण के अनुसार संतृप्ति अभियान की प्रगति, ग्रेन्यूल आंकड़ों, बस्तर संभाग के अंतर्गत संतृप्तिकरण, नियद नेल्ला नार-2.0 और सुघ्घर छत्तीसगढ़ पोर्टल में राशन कार्ड के आधार पर हितग्राहियों की सूची की भी गहन समीक्षा की गई।

    इस उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा, सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव श्री अंकित आनंद, सुशासन एवं अभिसरण और सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग के संयुक्त सचिव श्री मयंक अग्रवाल सहित पंचायत एवं ग्रामीण विकास और अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

     

  • ICC T20 रैंकिंग में भारत का जलवा, अभिषेक शर्मा दूसरे नंबर पर; बुमराह-वरुण को भी फायदा

    ICC T20 रैंकिंग में भारत का जलवा, अभिषेक शर्मा दूसरे नंबर पर; बुमराह-वरुण को भी फायदा

    नई दिल्ली
    आईसीसी की ताजा टी20 रैंकिंग में भारत के खिलाड़ियों को जबरदस्त फायदा हुआ है। बल्लेबाजों में ईशान किशन टॉप पर बने हुए हैं। वहीं, अभिषेक शर्मा एक स्थान के फायदे के साथ पाकिस्तान के शाहिबजादा फरहान को पीछे छोड़ दूसरे स्थान पर पहुंच गए हैं। अब इन दोनों खिलाड़ियों के बीच पहले पायदान के लिए मुकाबला होगा। दोनों के बीच 51 रेटिंग प्वाइंट का अंतर है। अभिषेक ने है। संजू सैमसन को भी 4 पायदान का फायदा हुआ है। वह बल्लेबाजों की रैंकिंग में 30वें स्थान पर पहुंच गए हैं।

    गेंदबाजों में जसप्रीत बुमराह को 7 पायदान का फायदा हुआ है और वह 10वें स्थान पर पहुंच गए हैं। वरुण चक्रव्रती दो स्थान के सुधार के साथ टी20 के टॉप 5 गेंदबाजों में शामिल हो गए हैं। अर्शदीप सिंह को 11 स्थान का फायदा हुआ है और वह 14वें स्थान पर पहुंच गए हैं। अक्षर पटेल को भी 6 स्थान का फायदा मिला है और वह गेंदबाजों की रैंकिंग में 27वें स्थान पर आ गए हैं।

    ऑस्ट्रेलिया के खिलाड़ियों को भी फायदा
    जिम्बाब्वे के खिलाफ वनडे मैच में 59 रन से जीत हासिल करने वाली ऑस्ट्रेलिया टीम के खिलाड़ियों को भी आईसीसी रैंकिंग में फायदा हुआ है। 5 विकेट लेने वाले नेथन एलिस को 20 पायदान की छलांग लगाकर गेंदबाजों की रैंकिंग में 20वें स्थान पर आ गए हैं। वहीं, मैथ्यू रेनशॉ ने शतकीय पारी खेलकर टीम को जीत दिलाई थी। वह अब तक टॉप 100 में शामिल नहीं थे। अब वह वनडे में बल्लेबाजों की रैंकिंग में 68वें स्थान पर पहुंच गए हैं। इसके अलावा कूपर कॉनोली 9 स्थान के सुधार के साथ 77वें पायदान पर पहुंच गए हैं।

    टेस्ट रैंकिंग में रॉबिन्सन का जलवा
    टेस्ट रैंकिंग में ओली रॉबिन्सन ने करियर की सर्वश्रेष्ठ रैंकिंग हासिल की है। उन्हें 2 पायदान का फायदा हुआ है और वह टेस्ट में गेंदबाजों की रैंकिंग में तीसरे स्थान पर आ गए हैं। पाकिस्तान के खिलाफ तीन टेस्ट की सीरीज में उन्होंने 21 विकेट लिए थे। जोश टंग को भी 2 पायदान का फायदा हुआ है और वह 11वें नंबर पर आ गए हैं। यह उनके करियर की भी सर्वश्रेष्ठ रैंकिंग है। पाकिस्तान के बाबर आजम को भी 2 पायदान का फायदा हुआ है और टेस्ट बल्लेबाजों की रैंकिंग में वह 13वें स्थान पर आ गए हैं।

  • योगी सरकार का भूजल बचाने पर फोकस, कानपुर से प्रयागराज के बीच मिली 200 किमी लंबी भूमिगत प्राचीन नदी

    योगी सरकार का भूजल बचाने पर फोकस, कानपुर से प्रयागराज के बीच मिली 200 किमी लंबी भूमिगत प्राचीन नदी

    लखनऊ
     योगी सरकार ने प्रदेश में भूजल संरक्षण और लंबे समय की जल सुरक्षा के लिए वैज्ञानिक तरीके से काम तेज कर दिया है। इसी कड़ी में गंगा-यमुना दोआब में 1.65 करोड़ रुपये की ‘प्रबंधित जलभृत पुनर्भरण (एमएआर) परियोजना’ शुरू की गई है। तीन साल की इस परियोजना के तहत बारिश के पानी को जमीन के अंदर मौजूद जलभृतों (भूमिगत जल भंडार) तक पहुंचाकर भूजल का पुनर्भरण किया जाएगा। परियोजना की सबसे अहम कड़ी कानपुर से प्रयागराज के बीच करीब 200 किलोमीटर लंबी भूमिगत प्राचीन नदी/पैलियोचैनल प्रणाली की पहचान हुई है। वैज्ञानिकों के मुताबिक ये पुराने नदी मार्ग आज भी जमीन के अंदर पानी के आने-जाने में मददगार हो सकते हैं।

    200 किमी लंबी प्राचीन नदी का मिला रास्ता
    नमामि गंगे और ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के विशेष सचिव एवं निदेशक, भूगर्भ जल विभाग डॉ. राजेश कुमार प्रजापति ने कहा कि वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर), राष्ट्रीय भूभौतिकीय अनुसंधान संस्थान (एनसीआरआई) हैदराबाद के वैज्ञानिकों ने आधुनिक तकनीक के जरिए गंगा-यमुना दोआब के नीचे मौजूद जलभृतों और प्राचीन नदी प्रणालियों का अध्ययन किया है। इसके लिए हवाई भू-भौतिकीय सर्वेक्षण और बोरहोल लॉगिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया।

    इस अध्ययन में प्रयागराज से कानपुर के बीच करीब 200 किलोमीटर लंबी भूमिगत प्राचीन नदी यानि पैलियोचैनल प्रणाली की पहचान हुई है। आसान भाषा में कहें तो जमीन के नीचे पुराने नदी मार्गों के निशान मिले हैं, जो आज भी भूजल के प्रवाह में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

    जलभृतों तक पहुंचेगा बारिश का पानी
    परियोजना का सीधा उद्देश्य बारिश के पानी को बेकार बहने से रोककर उसे जमीन के अंदर मौजूद जलभृतों तक पहुंचाना है। जलभृत जमीन के नीचे पानी जमा रखने वाली प्राकृतिक परतें होती हैं। इन्हीं से कुओं और नलकूपों के जरिए भूजल मिलता है। वैज्ञानिक अध्ययन से यह समझने में मदद मिलेगी कि बारिश का पानी जमीन के अंदर कहां और किस रास्ते आसानी से पहुंच सकता है। इसी आधार पर पुनर्भरण के लिए उपयुक्त स्थानों का चयन किया जाएगा।

    छह स्थानों से शुरू होगा पायलट प्रोजेक्ट
    राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के वित्तीय सहयोग से भूगर्भ जल विभाग, उत्तर प्रदेश द्वारा इस परियोजना को लागू किया जा रहा है। इसकी कुल लागत 1.65 करोड़ रुपये और अवधि तीन वर्ष है। पहले चरण में छह स्थानों का चयन किया गया है। यहां पायलट अध्ययन के साथ भूजल पुनर्भरण की संरचनाएं बनाई जाएंगी। इन संरचनाओं के जरिए पानी को जमीन के अंदर पहुंचाया जाएगा और इसके परिणामों की लगातार निगरानी की जाएगी।

    पहले परिणाम देखे जाएंगे, फिर बढ़ेगा दायरा
    छह पायलट स्थानों पर यह देखा जाएगा कि पुनर्भरण संरचनाओं से भूजल स्तर पर कितना असर पड़ता है और स्थानीय जलभृत बारिश के पानी को किस तरह ग्रहण करता है। इससे यह भी पता चलेगा कि अलग-अलग स्थानों पर कौन-सी पुनर्भरण व्यवस्था ज्यादा प्रभावी रहती है। पायलट चरण से मिलने वाले परिणामों के आधार पर परियोजना को गंगा-यमुना दोआब के दूसरे उपयुक्त स्थानों तक बढ़ाया जाएगा। इससे भविष्य में बड़े क्षेत्र में भूजल पुनर्भरण की योजनाएं तैयार करने में मदद मिलेगी।

    नदी और भूजल के संबंध की भी होगी निगरानी
    एनजीआरआई के अध्ययन में गंगा और यमुना नदियों तथा जमीन के अंदर मौजूद प्रमुख जलभृतों के बीच हाइड्रोजियोलॉजिकल संबंध के संकेत मिले हैं। प्राचीन नदी मार्ग भी जलभृतों के भीतर भूजल के प्रवाह के महत्वपूर्ण रास्ते हो सकते हैं। इस परियोजना से नदी, बारिश के पानी, भूजल और प्राचीन नदी मार्गों के बीच संबंध को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलेगी। यही जानकारी आगे भूजल संरक्षण की योजनाओं के लिए उपयोगी होगी।

    वैज्ञानिक निगरानी से मजबूत होगी जल सुरक्षा
    नमामि गंगे, अतिरिक्त परियोजना निदेशक प्रभाष कुमार ने कहा कि परियोजना में एनजीआरआई के तकनीकी सहयोग से भूजल की निगरानी, शोध एवं विकास और पुनर्भरण संरचनाओं के प्रभाव का वैज्ञानिक आकलन किया जाएगा। इसके साथ लोगों को भूजल संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिए सूचना, शिक्षा और संचार (आईईसी) गतिविधियां भी संचालित की जाएंगी।

  • अजीत अगरकर की चयन समिति में आखिरी बैठक, वेस्टइंडीज सीरीज के लिए टीम का होगा ऐलान

    अजीत अगरकर की चयन समिति में आखिरी बैठक, वेस्टइंडीज सीरीज के लिए टीम का होगा ऐलान

    पटना
    बीसीसीआई चयन समिति की बैठक दिल्ली में चल रही है। बैठक खत्म होने के बाद वेस्टइंडीज के साथ वनडे सीरीज के लिए भारतीय टीम का ऐलान किया जाएगा। वनडे टीम में रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे दिग्गज खिलाड़ियों का खेलना तय है, लेकिन मुख्य चयनकर्ता अगली बार इस मीटिंग में नहीं होंगे। अजीत अगरकर मुख्य चयनकर्ता के रूप में आखिरी बार चयन समिति की बैठक में शामिल हो रहे हैं और टीम चुन रहे हैं। बीसीसीआई के साथ अजीत अगरकर का कॉन्ट्रैक्ट इसी महीने खत्म हो रहा है।

    पहले खबरें आई थीं कि अजीत अगरकर का कॉन्ट्रैक्ट आगे बढ़ाया जा सकता है और वह 2027 वनडे विश्व कप तक चयन समिति के अध्यक्ष बने रहेंगे। हालांकि, वनडे टीम में रोहित शर्मा की जगह को लेकर अजीत अगरकर और बीसीसीआई के अधिकारियों के बीच असहमति हुई। इसके बाद चयन समिति से उनकी छुट्टी हो रही है।

    अब लक्ष्मण को मिल सकता है मौका
    कयास लगाए जा रहे हैं कि अजीत अगरकर के बाद एनसीए प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण को मुख्य चयनकर्ता बनाया जा सकता है। लक्ष्मण लंबे समय से एनसीए हेड के रूप में काम कर रहे हैं। ऐसे में उनकी जिम्मेदारी बैकअप कोच की भी होती है। वह एशियन गेम्स के दौरान भी भारत की टी20 टीम के साथ नजर आएंगे, क्योंकि इसी समय दूसरी टीम वेस्ट इंडीज के खिलाफ वनडे मैच खेलेगी। मुख्य कोच गंभीर वनडे टीम के साथ होंगे।

    टी20 में शानदार प्रदर्शन
    अजीत अगरकर 4 जुलाई 2023 को भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य चयनकर्ता बने थे। इसके बाद से भारत ने 2024 टी20 विश्व कप, चैंपियंस ट्रॉफी और 2026 टी20 विश्व कप जीता है। इस दौरान टीम इंडिया दो बार एशिया कप जीतने में भी सफल रही है, लेकिन टेस्ट में भारत का प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा है। खासकर घरेलू सीरीज में स्पिन के खिलाफ भारतीय बल्लेबाजों को परेशानी आ रही थी। वहीं, गेंदबाज भी विपक्षी टीमों की तुलना में फीके साबित हो रहे थे। ऐसे में नए चयनकर्ता के सामने टेस्ट टीम को बेहतर करने की जिम्मेदारी होगी।

    9 साल का था अगरकर का करियर
    अजीत अगरकर ने 1998 से 2007 के बीच 26 टेस्ट, 191 वनडे और 4 टी20 खेले। टेस्ट में 1 शतक की मदद से 571 रन और 58 विकेट, वनडे में 3 अर्धशतक की मदद से 1,269 रन और 288 विकेट, और टी20 में 3 विकेट उनके नाम दर्ज हैं। संन्यास के बाद अगरकर कोचिंग और कमेंट्री के क्षेत्र में भी सक्रिय रहे। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि क्रिकेट खेलने, कमेंट्री करने और टीम चुनने में सबसे मुश्किल काम टीम का चयन करना है।

  • रायपुर : सेवा संकल्प अभियान के प्रथम दिवस जशपुर में जगमगाएंगे 5 लाख से अधिक आशीर्वाद के दीप

    रायपुर : सेवा संकल्प अभियान के प्रथम दिवस जशपुर में जगमगाएंगे 5 लाख से अधिक आशीर्वाद के दीप

    रायपुर : सेवा संकल्प अभियान के प्रथम दिवस जशपुर में जगमगाएंगे 5 लाख से अधिक आशीर्वाद के दीप

    17 सितंबर को शाम 7 बजे रणजीता स्टेडियम, गौरव पथ, महाराजा चौक, दिलीप सिंह जूदेव प्रतिमा एवं बिरसा मुंडा चौक सहित जिलेभर में होगा दीप प्रज्वलन

    अमृत सरोवरों, प्रधानमंत्री आवास, महतारी वंदन हितग्राहियों, बिहान समूहों और शासकीय संस्थानों में भी प्रज्वलित होंगे दीप

    रायपुर

    सेवा, सुशासन और समर्पण के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर जशपुर जिले में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक ‘सेवा संकल्प अभियान’ का आयोजन किया जा रहा है। अभियान के तहत जिले में विभिन्न जनकल्याणकारी एवं जनभागीदारी आधारित गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। अभियान के प्रथम दिवस 17 सितंबर को शाम 7 बजे जिले में 5 लाख से अधिक आशीर्वाद के दीप प्रज्वलित करने का लक्ष्य रखा गया है।

        सेवा संकल्प अभियान के प्रथम दिवस जिले के प्रमुख सार्वजनिक स्थलों रणजीता स्टेडियम, गौरव पथ, महाराजा चौक, दिलीप सिंह जूदेव प्रतिमा चौक और बिरसा मुंडा चौक सहित सभी विकासखंडों, नगरीय निकायों एवं ग्राम पंचायतों में दीप प्रज्वलन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों के माध्यम से जिलेवासी सेवा, सुशासन और जनभागीदारी के संकल्प के साथ अभियान से जुड़ेंगे।

        अभियान को व्यापक जनभागीदारी से जोड़ने के लिए जिले के सभी अमृत सरोवरों, प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों, महतारी वंदन योजना के हितग्राहियों, बिहान समूह की महिलाओं सहित शासकीय कार्यालयों एवं विभिन्न संस्थाओं में भी दीप प्रज्वलित किए जाएंगे। इसके साथ ही नागरिकों से अपने घरों और सार्वजनिक स्थलों पर दीप प्रज्वलित कर अभियान में सहभागी बनने की अपील की गई है।

        कलेक्टर रोहित व्यास ने सभी विभागों को बेहतर आपसी समन्वय के साथ अभियान के लिए निर्धारित कैलेंडर के अनुरूप कार्यक्रमों का प्रभावी आयोजन एवं क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि सेवा संकल्प अभियान जनभागीदारी से जुड़ा महत्वपूर्ण अभियान है, इसलिए इसकी सभी पहलों की समयबद्ध तैयारी करते हुए निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जाए।

        कलेक्टर ने अभियान के तहत आयोजित होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों में अधिक से अधिक नागरिकों की सहभागिता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। उन्होंने अभियान के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों एवं आयोजित गतिविधियों की फोटो और वीडियो सहित जानकारी निर्धारित गूगल ड्राइव में नियमित रूप से अपलोड करने के निर्देश दिए, ताकि अभियान की गतिविधियों का समुचित दस्तावेजीकरण एवं संधारण किया जा सके।

        जिला प्रशासन ने जिलेवासियों से अपील की है कि 17 सितंबर को शाम 7 बजे अपने घरों, ग्रामों, कार्यालयों एवं सार्वजनिक स्थलों पर दीप प्रज्वलित कर सेवा संकल्प अभियान में सहभागी बनें और जनभागीदारी के इस अभियान को सफल बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।

  • कारगिल, POK और सर क्रीक को पाकिस्तान को सौंपने की थी तैयारी? BJP सांसद का बड़ा दावा

    कारगिल, POK और सर क्रीक को पाकिस्तान को सौंपने की थी तैयारी? BJP सांसद का बड़ा दावा

    नई दिल्ली

    भारतीय जनता पार्टी के सांसद निशिकांत दुबे ने बुधवार को जुलाई 2006 में मुंबई ट्रेन बम धमाकों के बाद सीमा पार आतंकवाद से निपटने के तरीके को लेकर कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधा। एक्स पर एक पोस्ट में दुबे ने पिछली यूपीए सरकार के डिप्लोमैटिक रुख की तुलना मौजूदा सरकार के रुख से किया। उन्होंने कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन पर आरोप लगाया कि उसने निर्णायक सैन्य कार्रवाई करने के बजाय अमेरिकी डिप्लोमैटिक दबाव के आगे घुटने टेक दिए। दुबे ने दावा किया कि कांग्रेस ने हवाना बैठक में कारगिल, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर और सर क्रीक को पाकिस्तान को सौंपने का फैसला कर लिया था।

    कांग्रेस अमेरिकी दबाव में काम कर रही थी
    दुबे ने 16 सितंबर 2006 को हवाना में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक का जिक्र करते हुए इसे विदेशी दबाव में की गई कोशिश बताया। उन्होंने कहा कि इसी दिन तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के बीच अमेरिकी दबाव में बैठक हुई थी। जुलाई 2006 में मुंबई की लोकल ट्रेनों में सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे, जिनमें कम से कम 200 लोगों की जान चली गई थी। हजारों लोग विकलांग और घायल हो गए थे। पूरे भारत में पाकिस्तान के खिलाफ हमले का माहौल बन गया था। लेकिन, सोनिया गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस कमजोर, बेबस और अमेरिकी दबाव में काम कर रही थी। पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देने के बजाय सोनिया गांधी जी के नेतृत्व में कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने अपनी अगस्त की बैठक में यह फैसला किया कि बातचीत के जरिए समझौता किया जाएगा।

    विकिलीक्स के खुलासों का हवाला
    विकिलीक्स के खुलासों का हवाला देते हुए दुबे ने आरोप लगाया कि यूपीए नेतृत्व व्यापक कूटनीतिक समझौतों के तहत कारगिल, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर और सर क्रीक के मामले में रियायतें देने के लिए तैयार था। 22 सितंबर 2006 को वाशिंगटन में अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश और दक्षिण एशियाई नेताओं के बीच हुई बैठकों के ऐतिहासिक रिकॉर्ड का जिक्र करते हुए दुबे ने दावा किया कि द्विपक्षीय बातचीत की जानकारी भारत-अमेरिका परमाणु समझौते के तहत सौंपी गई थी।

    पूरी जानकारी राष्ट्रपति बुश को सौंप दी
    भाजपा सांसद ने कहा कि यह सुनकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे कि हमने 2006 की हवाना बैठक में ही कारगिल, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर और सर क्रीक को पाकिस्तान को सौंपने का फैसला कर लिया था। इस बैठक के ठीक बाद 22 सितंबर 2006 को पाकिस्तानी राष्ट्रपति परवेज और भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अमेरिका पहुंचे और बातचीत की पूरी जानकारी राष्ट्रपति बुश को सौंप दी। हमने परमाणु समझौते में ही अपनी संप्रभुता अमेरिका को सौंपने का फैसला कर लिया था और बदले में अपना कारगिल और कश्मीर भी।

    राहुल गांधी से जवाब मांगा
    दोनों दौर की तुलना करते हुए दुबे ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से 2006 में पाकिस्तान के साथ हुई कूटनीतिक बातचीत और 2025 के पहलगाम आतंकी हमले पर मौजूदा सरकार की प्रतिक्रिया के बीच के अंतर पर जवाब मांगा। पहलगाम हमले के बाद सेना ने सीमा पार आतंकी ठिकानों को निशाना बनाते हुए 'ऑपरेशन सिंदूर' चलाया था। दुबे ने कहा कि राहुल गांधी को जनता को 2025 की पहलगाम घटना और उसके बाद हुए 'ऑपरेशन सिंदूर' की तुलना 2006 के मुंबई धमाकों और उसके बाद पाकिस्तान के साथ हुई गले मिलने की घटनाओं को समझाना चाहिए।

  • पीएम मोदी के सेवा के 25 वर्ष: गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में 17 सितंबर से ‘सेवा संकल्प अभियान’ का आगाज।

    पीएम मोदी के सेवा के 25 वर्ष: गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में 17 सितंबर से ‘सेवा संकल्प अभियान’ का आगाज।

    रायपुर, 

    प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में सेवा और समर्पण के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर प्रदेश में ‘सेवा संकल्प अभियान’ का आयोजन किया जा रहा है। सेवा, समर्पण और जनभागीदारी की भावना को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से संचालित इस अभियान के अंतर्गत गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में स्वास्थ्य सेवा से जुड़ी दो महत्वपूर्ण पहलें आयोजित की जा रही हैं। अभियान के तहत 17 सितंबर को पेंड्रा में रक्तदान शिविर तथा 20 सितंबर को जिला चिकित्सालय में विशेष मेगा स्वास्थ्य शिविर आयोजित होगा। इन आयोजनों के माध्यम से जिलेवासियों को रक्तदान जैसे जीवनदायी कार्य से जुड़ने के साथ ही विशेषज्ञ चिकित्सकों से निःशुल्क स्वास्थ्य परामर्श एवं जांच की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

    17 सितंबर को पेंड्रा में रक्तदान शिविर

    सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत 17 सितंबर को दोपहर 3 बजे से मल्टीपरपज हायर सेकेंडरी स्कूल, पेंड्रा में रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाएगा। शिविर के माध्यम से नागरिकों को स्वैच्छिक रक्तदान के लिए प्रेरित किया जाएगा। रक्तदान किसी जरूरतमंद मरीज के लिए जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा नागरिकों से इस मानवीय पहल में अधिक से अधिक सहभागिता की अपील की गई है।

    शिविर के सफल एवं सुव्यवस्थित आयोजन के लिए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा आवश्यक चिकित्सा व्यवस्था, सामग्री, उपकरण तथा स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सौंपे गए दायित्वों का प्रभावी ढंग से निर्वहन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

    20 सितंबर को जिला चिकित्सालय में विशेष मेगा स्वास्थ्य शिविर

    अभियान के अगले चरण में 20 सितंबर को सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक जिला चिकित्सालय में विशेष मेगा स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया जाएगा। शिविर में अपोलो हॉस्पिटल बिलासपुर सहित विभिन्न विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा जिलेवासियों को निःशुल्क स्वास्थ्य परामर्श एवं जांच की सुविधा प्रदान की जाएगी।

    कलेक्टर श्री विजय दयाराम के. के मार्गदर्शन एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रामेश्वर शर्मा के निर्देशन में आयोजित इस शिविर का प्रमुख उद्देश्य जिले के दूरस्थ एवं ग्रामीण क्षेत्रों सहित अधिक से अधिक नागरिकों तक विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना है। शिविर में एक ही स्थान पर विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं के संबंध में विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श लेने और आवश्यक स्वास्थ्य जांच कराने की सुविधा मिलेगी।
    हृदय, किडनी, मेडिसिन और नेत्र रोग विशेषज्ञ देंगे परामर्श

    मेगा स्वास्थ्य शिविर में अपोलो हॉस्पिटल बिलासपुर के विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा हृदय रोग, किडनी रोग, मेडिसिन एवं नेत्र रोग सहित विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं से संबंधित जांच और चिकित्सकीय परामर्श प्रदान किया जाएगा। मरीजों की स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार उन्हें आगे की जांच, उपचार तथा आवश्यक चिकित्सकीय सेवाओं के संबंध में उचित मार्गदर्शन भी दिया जाएगा।

    विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता से ऐसे मरीजों को विशेष लाभ मिलेगा, जिन्हें किसी विशिष्ट स्वास्थ्य समस्या के लिए विशेषज्ञ परामर्श की आवश्यकता है। शिविर के माध्यम से प्रारंभिक स्तर पर स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की पहचान करने और समय पर उचित उपचार की दिशा में आगे बढ़ने में सहायता मिलेगी।

    परिवार सहित स्वास्थ्य परीक्षण कराने की अपील

    जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग ने जिलेवासियों से अपील की है कि वे स्वयं के साथ अपने परिवार के सदस्यों, बुजुर्गों एवं बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कराने के लिए मेगा स्वास्थ्य शिविर में उपस्थित हों और विशेषज्ञ चिकित्सकों से निःशुल्क परामर्श एवं जांच का लाभ उठाएं। नियमित एवं समय पर स्वास्थ्य जांच से कई गंभीर बीमारियों की प्रारंभिक पहचान में मदद मिल सकती है, जिससे समय पर उपचार शुरू करने में सुविधा होती है।

    ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत आयोजित ये दोनों आयोजन जिले में सेवा, स्वास्थ्य जागरूकता और जनभागीदारी को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सेवा और समर्पण के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित अभियान में स्वास्थ्य सेवा के माध्यम से जनसेवा की भावना को आगे बढ़ाया जा रहा है। रक्तदान के माध्यम से जहां नागरिक जरूरतमंदों के जीवन बचाने में योगदान दे सकेंगे, वहीं मेगा स्वास्थ्य शिविर के माध्यम से विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं लोगों के और करीब पहुंचेंगी।

  • गोल्ड पर बड़ी खबर! त्योहार से पहले BIS ने बढ़ाया हॉलमार्किंग चार्ज, अब ₹75 देना होगा

    गोल्ड पर बड़ी खबर! त्योहार से पहले BIS ने बढ़ाया हॉलमार्किंग चार्ज, अब ₹75 देना होगा

    मुंबई 
    त्योहारों और शादी के सीजन से ठीक पहले सोना-चांदी खरीदने वालों को झटका लगने वाला है। ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) ने गोल्ड और सिल्वर ज्वेलरी की हॉलमार्किंग फीस अब 45 रुपये से बढ़ाकर 75 रुपये कर दी गई है। सरकार ने हॉलमार्किंग कराने की कॉस्ट तीन गुना बढ़ा दी है। यानी एक झटके में करीब 67 फीसदी की बढ़ोतरी। नए सिस्टम के तहत अब गोल्ड ज्वेलरी के हर आर्टिकल की हॉलमार्किंग के लिए 75 रुपये चुकाने होंगे। सोने के भाव पहले ही ऊंचे स्तर पर हैं और अब हॉलमार्किंग फीस में बदलाव ऐसे समय हुआ है, जब नवरात्रि, दशहरा और दिवाली के लिए ज्वेलर्स अपनी तैयारियां तेज कर रहे हैं।

    कब से लागू हुई नई हॉलमार्किंग फीस?
    BIS ने ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (हॉलमार्किंग) रेगुलेशन, 2026 में रिवीजन किया है। इससे जुड़ा नोटिफिकेशन 14 सितंबर 2026 को जारी किया गया और नई फीस आधिकारिक गजट में नोटिफिकेशन प्रकाशित होने की तारीख से प्रभावी हो गई है। नए नियमों के मुताबिक ज्वेलर्स को मान्यता प्राप्त हॉलमार्किंग सेंटर्स (AHCs) पर गोल्ड के हर एक आर्टिकल के लिए 75 रुपये की हॉलमार्किंग फीस देनी होगी। एक कंसाइनमेंट पर न्यूनतम चार्ज 200 रुपये होगा। वहीं, चांदी के प्रत्येक आर्टिकल के लिए हॉलमार्किंग फीस 35 रुपये तय की गई है। सिल्वर आर्टिकल के एक कंसाइनमेंट पर कम से कम 150 रुपये का शुल्क देना होगा।

    इसके अलावा भी लगेगा चार्ज
    नोटिफिकेशन के मुताबिक हॉलमार्किंग सेंट की ओर से बीआईएस के लिए भी एक शुल्क लिया जाएगा। गोल्ड आर्टिकल पर यह 7.50 रुपये प्रति आर्टिकल होगा और एक कंसाइनमेंट के लिए न्यूनतम 20 रुपये देने होंगे। सिल्वर के मामले में यह शुल्क 3.50 रुपये प्रति आर्टिकल और न्यूनतम 15 रुपये प्रति कंसाइनमेंट होगा। लागू टैक्स इसके एक्स्ट्रा होंगे।

    ज्वेलरी पर कितना लगता है GST?
    कीमती मेटल की ज्वेलरी पर 3 फीसदी जीएसटी लगता है। राज्य के अंदर सेल होने पर इसमें 1.5 फीसदी CGST और 1.5 फीसदी SGST शामिल है, जबकि इंटर-स्टेट खरीद पर 3 फीसदी IGST लगता है। गोल्ड की प्योरिटी अलग होने पर भी जीएसटी की यह दर नहीं बदलती। सितंबर से ज्वेलरी मार्केट में फेस्टिव डिमांड की तैयारियां तेज होने लगती हैं। इसके बाद नवरात्रि, दशहरा, दिवाली और फिर वेडिंग सीजन आता है। ऐसे में हॉलमार्किंग फीस में बदलाव ज्वेलर्स की लागत में एक और फैक्टर जोड़ सकता है। ये ऐसे समय में किया गया है जब देश में पहले ही 10 ग्राम सोने का भाव 1,51,894 रुपये है।

    हल्की ज्वेलरी पर ज्यादा पड़ेगा असर
    फीस बढ़ने का असर खासतौर पर हल्की और कम कीमत वाली ज्वेलरी पर ज्यादा पड़ सकता है। इसकी वजह यह है कि हॉलमार्किंग शुल्क वजन के हिसाब से नहीं, बल्कि प्रति आर्टिकल लगाया जाता है। यानी 1 ग्राम की ज्वेलरी और ज्यादा वजन वाले आर्टिकल पर भी 75 रुपये का समान शुल्क लगेगा। राजेश रोकड़े ने कहा कि जीजेसी का कहना है कि सोने की कीमतें पहले से ऊंचे स्तर पर हैं। ऐसे में प्रति आर्टिकल तय शुल्क बढ़ने से छोटे और मास-मार्केट ग्राहकों के लिए लागत का असर ज्यादा हो सकता है।

    ज्वैलर्स एसोसिएशन कर रही हैं विरोध
    ऑल इंडिया जेम एंड ज्वैलरी डोमेस्टिक काउंसिल (GJC) ने सरकार के इस फैसले पर आपत्ति जताई है। एसोसिएशन का कहना है कि सरकार को इसे तुरंत वापस लेना चाहिए या समीक्षा करनी चाहिए। GJC का कहना है कि जब हॉलमार्किंग अनिवार्य है, तो इसकी लागत बढ़ाने के बजाय सिस्टम में मौजूद फर्जी हॉलमार्किंग और दूसरी गड़बड़ियों पर पहले सख्ती होनी चाहिए। जीजेसी ने कहा कि वह हॉलमार्किंग के खिलाफ नहीं है। संगठन इसे सोने की शुद्धता, पारदर्शिता और ग्राहकों के भरोसे के लिए जरूरी मानता है। लेकिन करीब 67 फीसदी की सीधे बढ़ोतरी को लेकर संगठन ने सवाल उठाए हैं।

    60 करोड़ से ज्यादा ज्वेलरी हो चुकी हॉलमार्क
    जीजेसी के मुताबिक सरकारी आंकड़ों के अनुसार 1 जुलाई 2021 से 5 मार्च 2026 के बीच 60 करोड़ से ज्यादा सोने के आर्टिकल HUID के साथ हॉलमार्क किए जा चुके हैं। वहीं, मार्च 2026 तक अनिवार्य हॉलमार्किंग का दायरा बढ़कर 380 जिलों तक पहुंच गया था।

    हॉलमार्किंग फीस में कितना बदलाव हुआ?

    आभूषण    पुरानी फीस    नई फीस
    सोना    ₹45 प्रति आर्टिकल    ₹75 प्रति आर्टिकल
    चांदी    ₹35 प्रति आर्टिकल    ₹35 प्रति आर्टिकल

    BIS के नियमों के मुताबिक हॉलमार्किंग शुल्क प्रति आर्टिकल होता है, न कि आभूषण के वजन के हिसाब से। 

    ग्राहक के लिए हॉलमार्किंग क्यों जरूरी है?
    हॉलमार्किंग का उद्देश्य सोने की शुद्धता को लेकर ग्राहक को भरोसा देना है. BIS के अनुसार हॉलमार्क यह सुनिश्चित करने में मदद करता है कि ग्राहक को बताई गई शुद्धता के अनुरूप सोना मिले. सोने का गहना खरीदते समय ग्राहक BIS मार्क, शुद्धता और HUID जरूर जांच सकता है. BIS Care App के जरिए HUID की जानकारी भी सत्यापित की जा सकती है। 

    हाल में BIS ने चेन्नई में बिना हॉलमार्क के बिक्री के लिए रखे गए करीब 804 ग्राम सोने के आभूषण जब्त किए थे. इससे त्योहारों के सीजन में गहने खरीदते समय हॉलमार्क और बिल की जांच करने की अहमियत भी बढ़ जाती है। 

    सोना खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान
    ग्राहक गहना खरीदने से पहले उसका वजन, शुद्धता, HUID और BIS हॉलमार्क जरूर जांचें. साथ ही ज्वेलर से पूरा और वैध बिल लें। 

    ज्वैलर्स एसोसिएशन ने सरकार से क्या मांग की?
    GJC के चेयरमैन राजेश रोकड़े के मुताबिक जब हॉलमार्किंग का कारोबार और वॉल्यूम लगातार बढ़ा है, तो इससे AHCs को बड़े स्तर पर काम करने का फायदा और लागत में कमी लानी चाहिए थी। ऐसे में फीस बढ़ाने से पहले इसकी वास्तविक लागत को ट्रांसपेरेंट बनाने की जरूरी है। राजेश रोकड़े ने कहा कि इंडस्ट्री हॉलमार्किंग का समर्थन करता है, लेकिन लागत में करीब 67 फीसदी बढ़ोतरी करने से पहले समीक्षा होनी चाहिए।

    जीजेसी ने हॉलमार्किंग सिस्टम में मौजूद कथित गड़बड़ियों को लेकर भी चिंता जताई है। संगठन के मुताबिक बीआईएस की कार्रवाई में फर्जी हॉलमार्किंग, बिना अनुमति चल रहे सेंटर और वैध HUID के बिना ज्वेलरी जैसे मामले सामने आते रहे हैं। GJC का कहना है कि ऐसे मामलों पर निगरानी और कार्रवाई मजबूत करना ज्यादा जरूरी है।

  • आंगनवाड़ी, प्राथमिक विद्यालयों में स्क्रीनिंग कैम्प लगाए : राज्यपाल पटेल

    आंगनवाड़ी, प्राथमिक विद्यालयों में स्क्रीनिंग कैम्प लगाए : राज्यपाल पटेल

    आंगनवाड़ी, प्राथमिक विद्यालयों में स्क्रीनिंग कैम्प लगाए : राज्यपाल पटेल

    रोगों की जागरूकता प्रयासों में विद्यार्थियों को जोड़े
    राष्ट्रीय सिकल सेल उन्मूलन 2047 और राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन समीक्षा बैठक हुई

    भोपाल

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि सिकल सेल की स्क्रीनिंग में बच्चों की जाँच को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्राथमिक विद्यालय और आंगनवाड़ी केन्द्रों में कैम्प लगाकर स्क्रीनिंग का कार्य किया जाना चाहिए। राज्यपाल पटेल बुधवार को लोकभवन में राष्ट्रीय सिकल सेल उन्मूलन 2047 और राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में उपमुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल, उच्च शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार भी मौजूद थे। राज्यपाल ने बैठक उपरांत जनजातीय कार्य विभाग के साथ की धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान एवं पी.एम. जनमन योजना की समीक्षा की।

    राज्यपाल पटेल ने कहा कि सिकल सेल और क्षय रोग उन्मूलन प्रयासों में जन प्रतिनिधियों का सहयोग प्राप्त किया जाना चाहिए। उन्होंने विभागीय अधिकारियों से अपेक्षा की है कि सांसद, विधायक से सम्पर्क कर उनके क्षेत्र में सिकल एवं क्षय रोग उन्मूलन अभियान के लिए आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था और स्वास्थ्य शिविरों के आयोजन में आवश्यक वित्तीय सहयोग प्राप्त करने का प्रयास करें। राज्यपाल पटेल ने कहा कि सिकल सेल और क्षय रोग उन्मूलन प्रयासों में जागरूकता सबसे महत्वपूर्ण घटक है। जरूरी है कि जागरूकता प्रयासों में युवाओं को सहयोगी बनाया जाए। उन्होंने विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों में छात्रों के बीच जाने और उन्हें सिकल मित्र बनने के लिए प्रेरित करने के लिए कहा है। उन्होंने कहा कि क्षय रोग 6 माह में पूरी तरह से ठीक हो सकता है। आवश्यकता रोगी द्वारा नियमित रूप से औषधि का सेवन किया जाए। उन्होंने रोगियों के औषधि सेवन की मॉनिटरिंग की जरूरत भी बताई। राज्यपाल पटेल ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रकाशनों का लोकार्पण किया।

    उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने बताया कि प्रदेश में कुल एक करोड़ 34 लाख की सिकल सेल रोग की स्क्रीनिंग हो चुकी है। इनमें से 92 प्रतिशत को जेनेटिक कार्ड का वितरण किया जा चुका है। सिकल मित्र पहल के अंतर्गत 4,825 मित्र बनाएं गए। उनकी संख्या को बढ़ाने के बहुआयामी प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश की टी.बी. रोग मुक्त रोगियों की दर 89 प्रतिशत हो गई है। मृत्यु दर में भी कमी आयी है।

    आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार ने बताया कि विभाग द्वारा 30 हजार से अधिक सिकल सेल रोगियों को डोर-टू-डोर जाकर दवा का वितरण किया जा रहा है। सिकल सेल प्रभावित व्यक्तियों से भी सम्पर्क किया जाता है। उन्होंने कहा कि सिकल मित्र बनाने के लिए महाविद्यालयों के छात्रों, राष्ट्रीय सेवा योजना के सदस्यों को प्रेरित करने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे। इसका प्रारंभ सिकल सेल प्रभावित जिलों बड़वानी, धार और अनूपपुर से किया जाएगा।

    बैठक में जनजातीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष दीपक खांडेकर, राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, आयुष विभाग के प्रमुख सचिव शोभित जैन, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव सुखवीर सिंह, राज्यपाल के उप सचिव सुनील दुबे, सचिव जनजाति प्रकोष्ठ श्रीमती मीनाक्षी सिंह सहित प्रकोष्ठ के सदस्य एवं अन्य विभागीय अधिकारी मौजूद थे।  

    राज्यपाल ने जनजातीय विकास योजनाओं की समीक्षा की

    राज्यपाल पटेल ने जनजातीय कार्य विभाग के साथ की धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान एवं पीएम जनमन योजना की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि बच्चे देश का भविष्य होते हैं। बच्चों के विकास और कल्याण के कार्यों को प्राथमिकता दी जाए। उनकी गुणवत्ता उत्कृष्ट हो। अधिकारी क्षेत्र भ्रमण कर कार्यों की नियमित निगरानी करें। उन्होंने पी.एम. जनमन योजना के विभिन्न घटकों की जानकारी प्राप्त की। उनको हितग्राही मूलक योजनाओं की शत प्रतिशत उपलब्धि की जानकारी दी गई। राज्यपाल ने योजना अंतर्गत 9 विभागों की 11 अधोसंरचनात्मक योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत 17 विभागों की 25 योजनाओं की अद्यतन स्थिति के विषय में भी जानकारी प्राप्त की।

    इस अवसर पर जनजातीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष दीपक खांडेकर, राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, जनजातीय कार्य विभाग के प्रमुख सचिव गुलशन बामरा, राज्यपाल के उप सचिव सुनील दुबे, सचिव जनजाति प्रकोष्ठ श्रीमती मीनाक्षी सिंह सहित प्रकोष्ठ के सदस्य एवं अन्य विभागीय अधिकारी मौजूद थे।

     

  • यूपी में पंचायत सहायकों का मानदेय 50% बढ़ा, अब हर महीने मिलेंगे ₹9 हजार

    यूपी में पंचायत सहायकों का मानदेय 50% बढ़ा, अब हर महीने मिलेंगे ₹9 हजार

    लखनऊ
    Panchayat Sahayak Salary Hike: यूपी के पंचायत सहायकों के लिए बड़ी खबर है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के 57 हजार से अधिक पंचायत सहायकों के मानदेय में 50 फीसदी की बढ़ोतरी करने का फैसला किया है. अभी तक पंचायत सहायकों को हर महीने 6 हजार रुपये मानदेय मिलता था, जिसे अब बढ़ाकर 9 हजार रुपये प्रतिमाह किया जाएगा. यानी हर महीने 3 हजार रुपये की बढ़ोतरी होगी. सिर्फ मानदेय ही नहीं, पंचायत सहायकों के लिए सेवा सुरक्षा, कैशलेस उपचार और महिला पंचायत सहायकों को मातृत्व अवकाश जैसी सुविधाओं का भी ऐलान किया गया है. आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमों को वापस लेने और कार्रवाई के चलते हटाए गए पंचायत सहायकों को दोबारा बहाल करने की बात भी कही गई है। 

    पंचायत सहायकों की मांगों को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से वार्ता के बाद पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने बुधवार को आंदोलन का नेतृत्व कर रहे पंचायत सहायकों के प्रतिनिधियों से बातचीत की. इसके बाद प्रतिनिधियों की मौजूदगी में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पंचायत सहायकों के हित में लिए गए फैसलों की जानकारी दी गई। 

    6 हजार की जगह अब मिलेंगे 9 हजार रुपये
    पंचायत सहायकों को अभी तक 6 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाता है. सरकार के नए फैसले के बाद यह राशि बढ़कर 9 हजार रुपये प्रति माह हो जाएगी. इस तरह पंचायत सहायकों के मानदेय में सीधे 3 हजार रुपये महीने की बढ़ोतरी होगी. प्रतिशत के हिसाब से देखें तो यह 50 फीसदी की वृद्धि है. इस फैसले का लाभ उत्तर प्रदेश के 57 हजार से अधिक पंचायत सहायकों को मिलेगा. पंचायत स्तर पर काम करने वाले इन सहायकों के लिए लंबे समय से मानदेय और दूसरी सुविधाओं को लेकर मांगें सामने आती रही हैं. अब सरकार की ओर से मानदेय बढ़ाने के साथ दूसरी मांगों पर भी फैसले किए गए हैं। 

    सीधे बैंक खाते में पहुंचेगा बढ़ा हुआ मानदेय
    अभी पंचायत सहायकों का मानदेय राज्य वित्त आयोग की धनराशि से दिया जाता है. अब इसमें बदलाव किया जाएगा. सरकार की ओर से बताया गया है कि कैबिनेट से स्वीकृति लेकर डीबीटी यानी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर की व्यवस्था लागू की जाएगी. इसके बाद पंचायत सहायकों को मिलने वाला 9 हजार रुपये का मानदेय सीधे उनके बैंक खातों में भेजा जाएगा. इससे मानदेय भुगतान की व्यवस्था सीधे बैंक खाते से जोड़ दी जाएगी. प्रदेश के 57 हजार से अधिक पंचायत सहायकों को इसका लाभ मिलेगा। 

    प्रधान और पंचायत सचिव मनमाने तरीके से नहीं हटा सकेंगे
    पंचायत सहायकों के लिए सिर्फ मानदेय बढ़ाने का फैसला नहीं हुआ है. सेवा सुरक्षा को लेकर भी महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है. अब ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव अपने स्तर से किसी पंचायत सहायक को नहीं हटा सकेंगे. पंचायत सहायक को सेवा से हटाने के लिए एक निर्धारित प्रक्रिया अपनानी होगी. इसके लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की जाएगी. किसी पंचायत सहायक को हटाने का फैसला यही कमेटी कर सकेगी. यानी पंचायत सहायक की सेवा समाप्त करने का फैसला अब ग्राम प्रधान या पंचायत सचिव के स्तर पर अकेले नहीं लिया जा सकेगा. इसके लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली कमेटी की भूमिका होगी। 

    आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमे भी होंगे वापस
    पंचायत सहायकों के आंदोलन से जुड़ा एक और बड़ा फैसला किया गया है. सरकार ने बताया है कि आंदोलन के दौरान जिन पंचायत सहायकों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए हैं, उन्हें वापस लिया जाएगा. इसके साथ ही आंदोलन के दौरान कार्रवाई करते हुए जिन पंचायत सहायकों को हटा दिया गया था, उन्हें भी दोबारा बहाल किया जाएगा. इस फैसले के बाद आंदोलन से जुड़े पंचायत सहायकों को राहत मिलने की उम्मीद है. सरकार ने मानदेय के साथ उनकी सेवा से जुड़े मुद्दे पर भी फैसला लिया है. महिला पंचायत सहायकों के लिए भी सरकार ने अहम सुविधा का ऐलान किया है. अब महिला पंचायत सहायकों को मातृत्व अवकाश की सुविधा मिलेगी. इससे महिला कर्मचारियों को मातृत्व के दौरान काम से संबंधित परिस्थितियों में राहत मिलेगी. पंचायत स्तर पर काम करने वाली महिला सहायकों के लिए यह सुविधा उनके सेवा लाभों से जुड़ा महत्वपूर्ण बदलाव है। 

    पंचायत सहायकों को कैशलेस उपचार की सुविधा
    पंचायत सहायकों के लिए कैशलेस उपचार की सुविधा भी देने का फैसला किया गया है. इस व्यवस्था के तहत पंचायत सहायकों को उपचार के लिए कैशलेस सुविधा का लाभ मिलेगा. यानी मानदेय बढ़ाने के साथ सरकार ने उनके स्वास्थ्य से जुड़ी सुविधा को भी फैसलों में शामिल किया है. इससे पंचायत सहायकों को इलाज के दौरान आर्थिक सहायता और सुविधा मिलने की व्यवस्था तैयार होगी। 

    बातचीत के बाद हुआ फैसलों का ऐलान
    पंचायत सहायकों की मांगों को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बातचीत के बाद पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने बुधवार को आंदोलन का नेतृत्व कर रहे पंचायत सहायकों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की. प्रतिनिधियों के साथ बातचीत के बाद उनके हित में लिए गए फैसलों की जानकारी प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से दी गई. इसमें मानदेय बढ़ाने से लेकर सेवा सुरक्षा, मुकदमे वापस लेने, दोबारा बहाली, महिला पंचायत सहायकों के लिए मातृत्व अवकाश और कैशलेस उपचार जैसी सुविधाओं की जानकारी दी गई। 

    पंचायत सहायकों के लिए क्या-क्या बदला?

    – मानदेय 6,000 से बढ़कर 9,000 रुपये प्रतिमाह

    – मानदेय में 50 फीसदी बढ़ोतरी

    – 57 हजार से अधिक पंचायत सहायकों को लाभ

    – डीबीटी के जरिए बैंक खाते में भुगतान की तैयारी

    – ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव अकेले सेवा से नहीं हटा सकेंगे

    – जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कमेटी हटाने का फैसला करेगी

    – आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमे वापस होंगे

    – कार्रवाई में हटाए गए पंचायत सहायक बहाल होंगे

    – महिला पंचायत सहायकों को मातृत्व अवकाश

    – पंचायत सहायकों को कैशलेस उपचार की सुविधा

    कई दिनों से दे रहे थे धरना : 
    राजधानी लखनऊ के इको गार्डन में पंचायत सहायक कई दिनों से मानदेय बढ़ोतरी और सेवा सुरक्षा की मांग को लेकरधरने पर डटे हुए थे. सोमवार को ही प्रदेश के कोने-कोने से हजारों की संख्या में पहुंचे कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का साफ आरोप था कि वे ग्राम पंचायतों में डिजिटल पोर्टल के संचालन से लेकर हर जरूरी प्रशासनिक काम अकेले संभालते हैं, लेकिन इसके एवज में उन्हें महीने का महज 6 हजार रुपये दिया जा रहा है. कर्मचारियों ने इसे सीधी तौर पर 'मजदूरी से भी बदतर शोषण' करार दिया था. पंचायत सहायकों की दो-टूक मांग थी कि उनका मानदेय बढ़ाकर कम से कम 30 हजार रुपये प्रतिमाह किया जाए या नियमानुसार न्यूनतम वेतनमान लागू हो. वहीं सोमवार को सिराथू विधायक पल्लवी पटेल भी धरना स्थल पर पहुंचीं और पंचायत सहायकों की मांगों को पूरी तरह जायज ठहराते हुए उनके समर्थन का खुला ऐलान कर दिया था।