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  • 7 अक्टूबर को निकलेगी ‘सेवा ज्योति कलश यात्रा’, गांव-गांव पहुंचेगा विकसित भारत का संकल्प

    7 अक्टूबर को निकलेगी ‘सेवा ज्योति कलश यात्रा’, गांव-गांव पहुंचेगा विकसित भारत का संकल्प

    7 अक्टूबर को निकलेगी ‘सेवा ज्योति कलश यात्रा’

    गांव-गांव पहुंचेगा विकसित भारत का संकल्प

    भोपाल 

    विकसित भारत के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाने और सरकार की उपलब्धियों एवं जनकल्याणकारी योजनाओं का संदेश गांव-गांव तक पहुंचाने के उद्देश्य से ‘सेवा ज्योति कलश यात्रा–विकसित भारत का संकल्प’ का आयोजन 7 अक्टूबर 2026 को किया जाएगा। यात्रा जिले के कस्बों, गांवों और ग्रामीण क्षेत्रों से होते हुए विधानसभा तथा वहां से जिला मुख्यालय पहुंचेगी, जहां इसका भव्य समापन होगा।

    गांव-गांव पहुंचेगी यात्रा

    जिले की प्रत्येक विधानसभा से एक सेवा ज्योति कलश यात्रा निकाली जाएगी। यात्रा का मार्ग इस प्रकार निर्धारित किया जाएगा कि वह विधानसभा क्षेत्र के अधिक से अधिक कस्बों और गांवों से होकर गुजरे और आमजन को इससे जोड़ा जा सके। यात्रा में कलश एवं कृत्रिम मशाल प्रमुख आकर्षण होंगे। साथ ही एक प्रचार वाहन के माध्यम से सरकार की उपलब्धियों, विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी लोगों तक पहुंचाई जाएगी।

    विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न गांवों और कस्बों से होते हुए यात्रा विधानसभा मुख्यालय पहुंचेगी, जहां स्थानीय स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसके बाद सभी यात्राएं जिला मुख्यालय पहुंचकर एक बड़े आयोजन में शामिल होंगी।

    जिला मुख्यालय पर होगा भव्य समापन

    प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का जिला मुख्यालय पर यात्रा के समापन अवसर पर वर्चुअल संबोधन होगा। इस कार्यक्रम में जिले के केंद्रीय मंत्री, राज्य सरकार के मंत्री और सांसद शामिल होंगे। साथ ही विधायक, जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में आमजन की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी।

    समापन कार्यक्रम में जिले की विकास यात्रा और सरकार की उपलब्धियों को प्रदर्शित किया जाएगा। उपस्थित जनसमूह को जिला विकास पुस्तिका भी वितरित की जाएगी। यात्रा के लिए रूट, कलश, प्रचार वाहन, सुरक्षा, यातायात एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं पहले से सुनिश्चित की जाएंगी।

    ‘सेवा ज्योति कलश यात्रा’ का उद्देश्य केवल एक यात्रा निकालना नहीं, बल्कि गांव-गांव तक विकास का संदेश पहुंचाते हुए आमजन को ‘विकसित भारत’ के संकल्प से जोड़ना है। 

  • माफिया की तरह समाप्त हो गया इंसेफेलाइटिस : मुख्यमंत्री

    माफिया की तरह समाप्त हो गया इंसेफेलाइटिस : मुख्यमंत्री

    माफिया की तरह समाप्त हो गया इंसेफेलाइटिस : मुख्यमंत्री

    आईएमए गोरखपुर के चैरिटेबल ब्लड बैंक का सीएम योगी ने किया उद्घाटन

    साढ़े नौ वर्ष पूर्व इंसेफेलाइटिस से दम तोड़ते बचपन को देख चिंतित रहते थे अभिभावक: मुख्यमंत्री
     
    प्रदेश में 75 जिले, मेडिकल कॉलेजों की संख्या 85 हुई : सीएम योगी

    प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों में डायलिसिस यूनिट शुरू कर रही सरकार : सीएम योगी

    गोरखपुर
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि साढ़े नौ वर्ष पहले पूर्वी उत्तर प्रदेश में इंसेफेलाइटिस से तड़पते बच्चों और दम तोड़ते बचपन को देखकर हर जागरूक माता-पिता चिंतित रहता था। पर, अब यह चिंता खत्म हो चुकी है। उन्होंने कहा कि माफिया और मच्छर की तरह इंसेफेलाइटिस भी समाप्त हो गया है। अब हम नए युग में नए गोरखपुर और नए उत्तर प्रदेश का दर्शन कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों में दस-दस बेड की डायलिसिस यूनिट की सुविधा शुरू कर रही है।

    सीएम योगी बुधवार पूर्वाह्न इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) गोरखपुर की तरफ से संचालित चैरिटेबल ब्लड बैंक के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने फीता काटकर चैरिटेबल ब्लड सेंटर का उद्घाटन किया और सेंटर का भ्रमण कर वहां उपलब्ध सुविधाओं, उपकरणों और व्यवस्थाओं की जानकारी ली।

    उद्घाटन समारोह के मंच से पूर्वी उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं में आए सकारात्मक परिवर्तन का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि साढ़े नौ वर्ष पहले गोरखपुर का बीआरडी मेडिकल कॉलेज ही इस क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं का प्रमुख केंद्र था। स्थिति यह थी कि एक ही बेड पर चार-चार मरीज तक भर्ती रहते थे। तीसरी मंजिल पर इंसेफेलाइटिस वार्ड था और वहां पंखे, शौचालय एवं अन्य जरूरी सुविधाओं का अभाव था। उन्होंने कहा कि पहले जो बीआरडी मेडिकल कॉलेज स्वयं अस्वस्थ था, आज वही सुपर स्पेशियलिटी सेंटर और इंसेफेलाइटिस समेत विभिन्न बीमारियों के उपचार का प्रमुख केंद्र बन गया है।
     
    मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरखपुर में एम्स भी स्थापित हो चुका है। महाराजगंज, कुशीनगर, देवरिया, सिद्धार्थनगर, बस्ती, बलरामपुर, बहराइच, गोंडा, अयोध्या और अंबेडकरनगर समेत विभिन्न जिलों में मेडिकल कॉलेज शुरू हो चुके हैं। प्रदेश में 75 जिले हैं, जबकि मेडिकल कॉलेजों की संख्या 85 हो गई है। दो एम्स भी संचालित हैं। एमबीबीएस की सीटें 4600 से बढ़कर 13500 से अधिक हो चुकी हैं और पीजी की सीटें दोगुनी हुई हैं। नर्सिंग और पैरामेडिकल शिक्षा का भी विस्तार किया जा रहा है।
     
    कभी दुर्दांत माफिया थे जिलों की पहचान, डॉक्टर होते थे उनके शिकार
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि एक समय प्रदेश के प्रत्येक जिले की पहचान किसी न किसी दुर्दांत माफिया से जुड़ गई थी। डॉक्टर उनके शिकार बनते थे। गोरखपुर में डॉक्टरों का अपहरण होता था, उनसे रंगदारी मांगी जाती थी, धमकी भरे फोन आते थे और उनके चेंबर में घुसकर मारपीट की जाती थी। इन घटनाओं के खिलाफ उन्हें चिकित्सकों के साथ सड़कों पर आंदोलन करना पड़ता था। उन्होंने कहा कि आज गोरखपुर के साथ पूरे प्रदेश में चिकित्सक, व्यापारी और नागरिक स्वयं को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। अब प्रदेश की पहचान माफिया से नहीं बल्कि 'वन डिस्ट्रिक्ट, वन मेडिकल कॉलेज' के लक्ष्य से बन रही है।

    बनाया नहीं जा सकता खून, रक्तदान संवेदना का प्रतीक
    रक्तदान के महत्व को समझाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, तकनीक, दवाएं और संसाधन तो उपलब्ध कराए जा सकते हैं लेकिन खून बनाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि रक्तदान उस संवेदना का प्रतीक है, जिसके माध्यम से एक व्यक्ति किसी जरूरतमंद को नया जीवन देता है। उन्होंने इस बात पर चिंता भी जाहिर की कि रक्त की मांग के अनुरूप आपूर्ति नहीं हो पाती है। सीएम ने कहा कि इसके लिए चिकित्सकों को स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति लोगों को प्रेरित करना चाहिए। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर समय-समय पर रक्तदान की अपील और जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए।

    पेशेवर रक्तदाताओं पर प्रभावी अंकुश जरूरी
    सीएम योगी ने पेशेवर रक्तदाताओं को लेकर भी आगाह किया। कहा कि विभिन्न बीमारियों से ग्रसित पेशेवर रक्तदाताओं पर प्रभावी अंकुश नहीं लगाया गया तो संक्रमण का गंभीर संकट पैदा हो सकता है। ऐसी गतिविधियों को शासन-प्रशासन के संज्ञान में लाने के साथ चिकित्सकों को जागरूकता कार्यक्रमों से भी जुड़ना चाहिए।

    आईएमए के सामाजिक सरोकारों की सराहना की सीएम ने
    अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने आईएमए के सामाजिक सरोकारों की मुक्तकंठ से सराहना की। कहा कि आईएमए केवल प्रैक्टिस करने वाले चिकित्सकों की संस्था मात्र ही नहीं है। इसने गोरखपुर में निशुल्क ओपीडी के बाद चैरिटेबल ब्लड सेंटर शुरू करके उसने सामाजिक उत्तरदायित्व का उदाहरण प्रस्तुत किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी संस्था की वास्तविक पहचान इससे होती है कि वह अपनी विशेषज्ञता का लाभ समाज के अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति तक पहुंचाने में कितना योगदान देती है। उन्होंने कहा कि 2017-18 में गोरखपुर के सीतापुर आई हॉस्पिटल में आईएमए ने निशुल्क ओपीडी शुरू की थी। इसके बाद आईएमए ने अपने कार्यालय के लिए भूमि मांगी तो गोरखपुर विकास प्राधिकरण के माध्यम से भूखंड उपलब्ध कराने में मदद की गई। आईएमए ने इस भूखंड का बेहतर उपयोग करते हुए चैरिटेबल ब्लड सेंटर स्थापित किया है, जो पूर्वी उत्तर प्रदेश के जरूरतमंद मरीजों को रक्त उपलब्ध कराने में योगदान देगा।

    गुरु गोरखनाथ चिकित्सालय का उल्लेख कर चैरिटी का मॉडल बताया
    मुख्यमंत्री ने अपने गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज के सानिध्य में गुरु गोरखनाथ चिकित्सालय की शुरुआत का जिक्र करते हुए कहा कि पहले 10 बेड से अस्पताल शुरू करने की चर्चा हुई थी, लेकिन गोरखपुर के चिकित्सकों के सहयोग से शुरुआत में ही इसे 100 बेड का अस्पताल बनाया गया। इस चिकित्सालय ने दिखाया कि चैरिटी में भी अस्पताल, ब्लड बैंक और आईसीयू सफलतापूर्वक संचालित हो सकते हैं। यहां ब्लड सेपरेटर, एफेरेसिस और डायलिसिस जैसी सुविधाएं विकसित हुईं। उन्होंने कहा कि जिस डायलिसिस के लिए कभी लोगों को लखनऊ या बीएचयू जाना पड़ता था, आज गोरखपुर में गुणवत्तापूर्ण सुविधा उपलब्ध है। सीएम ने बताया कि सरकार ने प्रदेश के जिला अस्पतालों में भी निशुल्क डायलिसिस की व्यवस्था करने का कार्य प्रारंभ कर दिया है।

    स्वास्थ्य सेवाओं की उत्कृष्टता के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। बताया कि आईआईटी कानपुर के सहयोग से मेडटेक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित किया जा रहा है। इसके अलावा एसजीपीजीआई लखनऊ में भी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पर काम हो रहा है।

    स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊंचाई पर पहुंचाया सीएम योगी ने : डॉ. शुक्ला
    चैरिटेबल ब्लड सेंटर के उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री एवं अन्य अभ्यागतों का स्वागत करते हुए आईएमए गोरखपुर के अध्यक्ष डॉ. आरपी शुक्ला ने कहा कि सीएम योगी ने अपने विजन से गोरखपुर और प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊंचाई पर पहुंचाया है। मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में गोरखपुर मेडिकल हब और मेडिकल टूरिज्म का नया केंद्र बन रहा है। उन्होंने बताया कि आईएमए के 400 यूनिट की क्षमता वाले इस चैरिटेबल ब्लड सेंटर का संकल्प है कि रक्त के अभाव में किसी की मृत्यु न होने दी जाए। समारोह को महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव और गोरखपुर ग्रामीण के विधायक विपिन सिंह ने भी संबोधित किया। आभार ज्ञापन आईएमए गोरखपुर के पूर्व अध्यक्ष डॉ. डीके सिंह और संचालन आईएमए गोरखपुर के सचिव डॉ. वाई सिंह ने किया।

    इस अवसर पर एमएलसी एवं भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र सिंह, विधायक डॉ. विमलेश पासवान, प्रदीप शुक्ल, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारू चौधरी, भाजपा के जिलाध्यक्ष जनार्दन तिवारी, महानगर अध्यक्ष रमेश प्रताप गुप्ता, आईएमए गोरखपुर के संयुक्त सचिव डॉ. दिनेश चंद्रा, गुरु गोरखनाथ ब्लड बैंक के प्रभारी डॉ. अवधेश अग्रवाल, डॉ. महेंद्र अग्रवाल, डॉ. अमरेश सिंह, डॉ. सीएम सिन्हा, डॉ. शिवशंकर शाही, डॉ. बबिता शुक्ला सहित बड़ी संख्या में चिकित्सक उपस्थित रहे।

    नन्ही बच्ची को दुलारा, दिया आशीर्वाद
    निरीक्षण के दौरान परिसर में मौजूद एक नन्ही बच्ची पर मुख्यमंत्री योगी की नजर पड़ी। उन्होंने बच्ची से आत्मीयता से बातचीत की, उसका हालचाल पूछा और स्नेह व आशीर्वाद दिया।

     

  • उज्जैन में 7 लाख दीपों से बनेगी PM मोदी की आकृति, 45 हजार लीटर तेल से जगमगाएंगे घाट

    उज्जैन में 7 लाख दीपों से बनेगी PM मोदी की आकृति, 45 हजार लीटर तेल से जगमगाएंगे घाट

    उज्जैन 
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस 17 सितंबर से शुरू हो रहे 'सेवा से संकल्प अभियान' के तहत एमपी के उज्जैन में गुरुवार शाम 7 बजे भव्य दीपेंसव 'आशीर्वाद का दिया' आयोजित होगा। शिप्रा के घाटों और श्री महाकाल लोक में 25 लाख से अधिक दीपक एक साथ प्रज्ज्वलित किए जाएंगे। आयोजन के जरिए उज्जैन एक बार फिर सर्वाधिक दीप प्रज्वलित करने का विश्व कीर्तिमान बनाने का दावा भी कर सकता है। इसके साथ ही कार्तिक मेला ग्राउंड में करीब सात लाख दीपों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आकृति बनाने की तैयारी है।

    जनभागीदारी से होने वाले आयोजन में करीब 25 हजार वॉलेंटियर्स की तैनाती की जा रही है। दीप प्रज्वलन के लिए करीब 45 हजार लीटर खाद्य तेल और एक हजार किलो कपूर की व्यवस्था की गई है। कपूर का उपयोग रुई की बत्ती में किया जाएगा, ताकि दीपक आसानी से प्रज्वलित हो सकें। इसके अलावा 53 हजार मोमबत्तियां और 10 हजार माचिस की व्यवस्था भी की गई है।
    7 सेक्टर, 250 सब-सेक्टर में बंटा क्षेत्र

    दीपोत्सव के लिए शिप्रा किनारे के क्षेत्र को सात सेक्टर और 250 सब-सेक्टर में बांटा गया है। इनमें 11 हजार से अधिक ब्लॉक बनाए गए हैं। प्रत्येक ब्लॉक में 225 दीपक लगाए जाएंगे। मंगलवार तक 15 लाख से अधिक दीपक बॉक्स में पैक किए जा चुके थे और इन्हें ट्रैक्टरों के जरिए घाटों तक पहुंचाने का काम शुरू कर दिया गया। अतिरिक्त दीपकों के बॉक्स भी तैयार किए जा रहे है, ताकि जरूरत पड़ने पर इनका उपयोग किया जा सके। सात सेक्टरों में केदारेश्वर घाट से दत्त अखाड़ा होते हुए गुरु नानक घाट, सुनहरी घाट से रामघाट होते हुए नरसिंह घाट ब्रिज, नरसिंह घाट ब्रिज से कर्कराज मंदिर, माली कैफे से भूखी माता, भूखी माता से लालपुल, लालपुल से गऊघाट और कर्कराज मंदिर से लालपुल तक का क्षेत्र शामिल है।

     13 हजार फाइबर शीट मंगाई
    बारिश से बचाव के लिए फाइबर शीट-बारिश की संभावना को देखते हुए प्रत्येक ब्लॉक को ढंकने की व्यवस्था की गई है। इसके लिए करीब 13 हजार फाइबर शीट मंगाई गई है। बारिश होने पर वॉलेंटियर्स की मदद से दीपों वाले ब्लॉकों को शीट से ढंका जाएगा। बुधवार से ब्लॉकों में दीपक जमाने का काम शुरू किया जाएगा। अयोध्या के रिकॉर्ड को चुनौती-उज्जैन इस आयोजन के जरिए दीप प्रज्वलन का विश्व रिकॉर्ड बनाने की तैयारी में है। वर्तमान रिकॉर्ड अयोध्या के नाम है, जहां 26 लाख 17 हजार 215 दीपक एक साथ प्रज्वलित किए गए थे। उज्जैन भी 25 लाख से अधिक दीप प्रज्वलित कर इस रिकॉर्ड को चुनौती देने की तैयारी में है। इससे पहले 2023 में महाशिवरात्रि पर उज्जैन में 18 लाख 82 हजार 229 दीप प्रज्वलित किए गए थे।

    आज होगा ट्रायल
    कलेक्टर रौशनकुमार सिंह ने मंगलवार को तैयारियों की समीक्षा कर अधिकारियों को समन्वय, अनुशासन और समयबद्धता के साथ काम करने के निर्देश दिए। बुधवार दोपहर 12 बजे दीपोत्सव का ट्रायल होगा। इसमें दीप प्रज्वलन सहित अन्य व्यवस्थाओं का परीक्षण कर कमियां दूर की जाएंगी। 17 सितंबर को दोपहर 1 बजे सेक्टर व सब-सेक्टर अधिकारी और वॉलेंटियर्स अपनी टीमों के साथ निर्धारित घाटों पर पहुंचेंगे। सभी वॉलेंटियर्स को आईडी दिए जाएंगे।

     

     हर गांव को 500 दीप जलाने का जिम्मा, फोटो-रील भी अपलोड करने होंगे

    र पंचायत में कम से कम 500 दीपक जलाने का लक्ष्य दिया है। साथ ही इनकी रील और फोटो वीडियो भी पोर्टल पर अपलोड करने के लिए कहा गया है। जनपद पंचायत के आदेश में कलेक्टर के आदेश (बकायदा क्रमांक) का जिक्र है। वहीं जिले में इस अभियान के तहत करीब 5 लाख दीप जलाने की तैयारी है।

    पंधाना जनपद पंचायत सीईओ शुभम निमामे ने कहा कि शासन के आदेश अनुसार निचले स्तर पर आदेश जारी किए हैं। जनपद पंचायत स्तर पर कलेक्टर कार्यालय से निर्देश आए थे।

    17 सितंबर को शाम 7 बजे होगा दीप प्रज्ज्वलन
    जनपद पंचायत सीईओ कार्यालय से 15 सितंबर को जारी आदेश के अनुसार, 17 सितंबर 2026 को शाम 7 बजे ग्राम पंचायत मुख्यालय, गांवों के प्रमुख स्थानों और शासकीय परिसरों में दीप जलाए जाएंगे।

    कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, कर्मचारियों और ग्रामीणों की सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। आयोजन में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका, आशा कार्यकर्ता, शिक्षक, स्व-सहायता समूह की महिलाएं, ग्राम कोटवार और एएनएम का सहयोग भी लिया जाएगा।

    इन जगहों पर जलाए जाएंगे दीप
    दीप प्रज्ज्वलन के लिए पीएम आवास योजना की कॉलोनियां और मोहल्ले, अमृत सरोवर, जल संरचनाएं, नवनिर्मित पुल-बांध, जन-औषधि केंद्र, आयुष्मान सूचीबद्ध अस्पताल, एक्स-रे केंद्र, स्कूल, कॉलेज और अन्य शैक्षणिक संस्थान चिन्हित किए गए हैं।

    इसके अलावा मंदिर, घाट, आध्यात्मिक केंद्र, पंचायत भवन, सामुदायिक केंद्र, ऊर्जा और नवीकरणीय ऊर्जा से जुड़ी परियोजनाएं, पर्यटन और आध्यात्म से जुड़े प्रमुख स्थल, नगरीय व ग्रामीण विकास की परियोजनाएं तथा जल संसाधन और नर्मदा घाटी विकास से जुड़ी परियोजनाओं को भी कार्यक्रम में शामिल किया गया है।

    इन वर्गों को भी कार्यक्रम से जोड़ने का लक्ष्य दिया
    आदेश में अलग-अलग वर्गों की सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश हैं। इसमें राशन कार्डधारी, युवा विद्यार्थी, किसान, व्यापारी, लघु उद्यमी, स्टार्टअप, पशुपालक, मधुमक्खी पालक परिवार, असंगठित क्षेत्र के श्रमिक, जनजातीय व वनवासी परिवार शामिल हैं।

    इसके साथ महिला स्व-सहायता समूह, लाड़ली बहना योजना के हितग्राही, पीएम आवास योजना और स्वामित्व योजना के लाभार्थी, पथ विक्रेता, पारंपरिक कारीगर, आशा व आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, पूर्व सैनिक और दिव्यांगजन को भी जोड़ा जाएगा।

    फोटो-वीडियो और रील पोर्टल पर करनी होगी अपलोड
    कार्यक्रम के दौरान फोटो, वीडियो और रील तैयार कर निर्धारित वेबसाइट www.modiat25.in पर अपलोड करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे गांवों में होने वाले कार्यक्रम का डिजिटल रिकॉर्ड भी तैयार होगा।

    आयोजन के दौरान ग्रामीणों को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री का ऑडियो संदेश भी सुनाया जाएगा। इसमें दीप प्रज्ज्वलन की अपील की गई है। सीईओ ने मैदानी अमले को समय पर उपस्थित रहकर कार्यक्रम का समन्वय और आयोजन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

    जिले के 27 प्रमुख स्थलों पर भी जलेंगे दीप
    पंचायतों के अलावा जिले के 27 प्रमुख आइकॉनिक स्थलों पर भी विशेष दीप प्रज्ज्वलन होगा। इनमें धार्मिक, ऐतिहासिक और सार्वजनिक महत्व के स्थान शामिल हैं।

    नगरीय क्षेत्र में भी हर वार्ड में कार्यक्रम कराने की तैयारी है। इसके लिए कर्मचारियों की वार्डवार ड्यूटी लगाई जाएगी। मंदिर, व्यावसायिक प्रतिष्ठान, घाट, बाजार, पीएम आवास की कॉलोनियां, पंचायत भवन, सामुदायिक केंद्र, स्कूल-कॉलेज और सरकारी कार्यालयों को भी कार्यक्रम से जोड़ा जाएगा।

    सीएम करेंगे शुभारंभ
    कार्यक्रम को लेकर संभागायुक्त आशीष सिंह और एडीजीपी राकेश गुप्ता ने मंगलवार को रामघाट और दत्त अखाड़ा घाट का निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव दीप जलाकर कार्यक्रम का शुभारंभ करेंगे। अधिकारियों ने सभी सेक्टरों में मेडिकल टीम, बड़ी स्क्रीन और आपातकालीन व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। कार्यक्रम से पहले रिहर्सल भी होगी।

    ये भी जानिए

    दीपक- 25 लाख
    सेक्टर- सात
    सब सेक्टर- 250
    ब्लॉक- 11 हजार
    एक ब्लॉक दीये- 225
    वालेंटियर- 25 हजार
    तेल- 45 हजार लीटर
    मोमबत्ती- 53 हजार
    कपूर- 1 हजार किलो
    माचिस- 10 हजार

  • गांधी जयंती से प्रदेशभर में मनाया जाएगा ‘मद्य निषेध सप्ताह’

    गांधी जयंती से प्रदेशभर में मनाया जाएगा ‘मद्य निषेध सप्ताह’

    गांधी जयंती से प्रदेशभर में मनाया जाएगा ‘मद्य निषेध सप्ताह’

    2 से 8 अक्टूबर तक होंगी जन-जागरूकता गतिविधियां, नशामुक्ति के लिए दिलाई जाएगी ऑनलाइन शपथ
    विद्यालयों, महाविद्यालयों और ग्राम सभाओं से लेकर महिला स्व-सहायता समूहों तक होगी सहभागिता

    भोपाल 

    राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 157वीं जयंती के अवसर पर मध्यप्रदेश में 2 से 8 अक्टूबर 2026 तक “मद्य निषेध सप्ताह” मनाया जाएगा। सप्ताह के दौरान प्रदेश के सभी जिलों में नशामुक्ति रैली, नुक्कड़ नाटक, प्रदर्शनी, प्रतियोगिताएं, स्वास्थ्य परीक्षण शिविर, ग्राम सभाएं, सांस्कृतिक कार्यक्रम और ऑनलाइन शपथ सहित विभिन्न जन-जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।

    सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग आयुक्त के.जी. तिवारी ने सभी कलेक्टरों, जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों तथा विभागीय संयुक्त एवं उप संचालकों को सप्ताह के आयोजन के संबंध में विस्तृत निर्देश जारी किए हैं। कार्यक्रमों में विभाग से मान्यता प्राप्त अशासकीय संस्थाओं, सामाजिक एवं स्वयंसेवी संगठनों, आध्यात्मिक संस्थाओं तथा नशामुक्ति के क्षेत्र में कार्य कर रहे संगठनों का सहयोग लिया जाएगा।

    मद्य निषेध सप्ताह का प्रमुख उद्देश्य समाज में बढ़ती मद्यपान की प्रवृत्ति तथा नशीली दवाओं और मादक पदार्थों के सेवन से होने वाली गंभीर बीमारियों एवं दुष्परिणामों के प्रति युवाओं, विद्यार्थियों और नागरिकों को जागरूक करना है। सप्ताह के दौरान स्कूलों और महाविद्यालयों के विद्यार्थियों सहित विभिन्न वर्गों को “नशा न करेंगे, न करने देंगे” की शपथ भी दिलाई जाएगी।

    2 अक्टूबर : नशामुक्ति रैली और प्रदर्शनी

    सप्ताह के पहले दिन महात्मा गांधी जयंती पर नशामुक्ति के लिए जन-जागरूकता रैलियां निकाली जाएंगी और नुक्कड़ नाटकों का मंचन किया जाएगा। नशे के दुष्परिणामों की जानकारी देने के लिए नशामुक्ति पर आधारित पोस्टर, फोटो और चित्र प्रदर्शनी लगाई जाएगी। कार्यक्रमों में शामिल नागरिकों को नशा नहीं करने की ऑनलाइन शपथ दिलाई जाएगी।

    3 अक्टूबर : शैक्षणिक प्रतियोगिताएं और स्वास्थ्य परीक्षण शिविर

    दूसरे दिन स्थानीय विद्यालयों और महाविद्यालयों में नशामुक्ति विषय पर विभिन्न प्रतियोगिताएं, संवाद तथा संगोष्ठियां आयोजित की जाएंगी। स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और आवासीय नशामुक्ति केंद्रों में नशा पीड़ित व्यक्तियों के लिए विशेष स्वास्थ्य परीक्षण एवं परामर्श शिविर लगाए जाएंगे।

    शिविरों में नशा पीड़ितों की एचआईवी-एड्स, टीबी और हेपेटाइटिस जैसी बीमारियों की स्क्रीनिंग की जाएगी। जांच में पॉजिटिव पाए गए व्यक्तियों के समुचित उपचार की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी।

    4 अक्टूबर : ग्राम सभाओं में नशामुक्त गांव का संकल्प

    तीसरे दिन ग्राम सभाओं में गांवों को नशामुक्त बनाने के संबंध में प्रस्ताव पारित किए जाएंगे। पारित प्रस्तावों का पालन सुनिश्चित करने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में नशामुक्ति संबंधी साहित्य, पोस्टर, पेम्फलेट और अन्य प्रचार सामग्री का वितरण किया जाएगा। ग्राम सभाओं में उपस्थित ग्रामीणों को नशामुक्ति की ऑनलाइन शपथ भी दिलाई जाएगी।

    5 अक्टूबर : सोशल मीडिया के माध्यम से जागरूकता

    चौथे दिन ग्राम और नगरीय स्तर पर स्थानीय व्हाट्सऐप समूह बनाए जाएंगे। इन समूहों के माध्यम से नशामुक्ति के संदेश, जागरूकता सामग्री और लघु फिल्में नागरिकों तक पहुंचाई जाएंगी। सोशल मीडिया के माध्यम से विशेष रूप से युवाओं और विद्यार्थियों को अभियान से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

    6 अक्टूबर : महिला स्व-सहायता समूहों की भागीदारी

    पांचवें दिन महिला स्व-सहायता समूहों और शौर्या दलों द्वारा स्थानीय स्तर पर नशामुक्ति संदेश के प्रचार-प्रसार के लिए अभियान चलाया जाएगा। महिलाओं को परिवार और समाज में नशे के कारण होने वाले आर्थिक, सामाजिक एवं स्वास्थ्य संबंधी दुष्परिणामों की जानकारी दी जाएगी। महिला समूह समुदाय को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करेंगे।

    7 अक्टूबर : स्कूल-कॉलेजों में ऑनलाइन शपथ

    छठवें दिन ग्राम एवं नगरीय क्षेत्रों में नशामुक्ति अभियान के लिए तैयार किए गए स्थानीय मास्टर वॉलंटियर और “नशामुक्ति मित्र” स्कूलों एवं महाविद्यालयों में विद्यार्थियों को अनिवार्य रूप से ऑनलाइन नशामुक्ति शपथ दिलाएंगे। युवाओं को नशे से दूर रहने तथा अपने परिवार और परिचितों को भी इसके लिए प्रेरित करने का संकल्प दिलाया जाएगा।

    8 अक्टूबर : जिला मुख्यालयों पर समापन समारोह

    मद्य निषेध सप्ताह के अंतिम दिन सभी जिला मुख्यालयों पर जिलास्तरीय समापन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें नशामुक्ति पर आधारित नाटक, नृत्य, संगीत और अन्य कलात्मक प्रस्तुतियां होंगी। सप्ताह के दौरान आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया जाएगा। सभी प्रतिभागियों को सहभागिता प्रमाण-पत्र भी प्रदान किए जाएंगे।

    ऑनलाइन पोर्टल पर दिलाई जाएगी शपथ

    सप्ताह के प्रत्येक दिन आयोजित कार्यक्रमों में शामिल विद्यार्थियों, युवाओं, महिलाओं और नागरिकों को भारत सरकार के नशामुक्त भारत अभियान के ऑनलाइन पोर्टल पर ई-प्लेज के माध्यम से नशा नहीं करने की शपथ दिलाई जाएगी।

    जिला प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि कार्यक्रमों में स्वास्थ्य, स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, नगरीय प्रशासन एवं विकास, महिला एवं बाल विकास, पुलिस तथा जनसम्पर्क विभाग सहित संबंधित संस्थाओं का सहयोग लिया जाए। जिलों को आयोजित गतिविधियों का प्रतिवेदन फोटोग्राफ सहित सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण संचालनालय को भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं।

     

  • Bigg Boss 20 में माही विज-आम्रपाली दुबे की भिड़ंत, भोजपुरी पहचान पर कमेंट से गरमाया माहौल

    Bigg Boss 20 में माही विज-आम्रपाली दुबे की भिड़ंत, भोजपुरी पहचान पर कमेंट से गरमाया माहौल

    बिग बॉस 20' के घर में कंटेस्टेंट्स के बीच दोस्ती और तकरार का सिलसिला लगातार देखने के लिए मिल रहा है। शो में माही विज और आम्रपाली दुबे के बीच पहले से चल रहा तनाव अब एक बार फिर खुलकर सामने आया है। इस बार दोनों के बीच विवाद की शुरुआत किचन में चिकन बनाने को लेकर हुई, लेकिन देखते ही देखते मामला इतना बढ़ गया कि दोनों ने एक-दूसरे पर तीखे कमेंट करने शुरू कर दिए।बहस के दौरान माही ने आम्रपाली की भोजपुरी पहचान को लेकर कुछ बातें कह दी। इसके बाद घर का माहौल काफी गरमा गया और दोनों की नाराजगी साफ नजर आई।

    माही का दखल देना आम्रपाली को पसंद नहीं आया
    दरअसल, 'बिग बॉस' के घर में खाना बनाने की जिम्मेदारी को लेकर अक्सर कंटेस्टेंट्स के बीच बहस देखने को मिलती है। हालिया घटना भी किचन से ही शुरू हुई। आम्रपाली दुबेकुकिंग कर रही थीं। इसी दौरान माही विज आईं और कुछ सवाल करने लगीं। खाना बनाने के दौरान माही का दखल देना आम्रपाली को पसंद नहीं आया और उन्होंने इस पर आपत्ति जताई।

    आम्रपाली ने दिया माही को जवाब
    आम्रपाली का कहना था कि अगर वह किचन की जिम्मेदारी संभाल रही हैं तो उन्हें अपने तरीके से खाना बनाने दिया जाना चाहिए। उन्हें यह बात भी खटकी कि माही खुद खाना नहीं बनाती, लेकिन कुकिंग के तरीके पर लगातार सवाल उठा रही हैं। इसी बात को लेकर दोनों के बीच बहस बढ़ती गई और बातचीत तीखे शब्दों तक पहुंच गई।

    माही विज ने कहा- मेरे घर पर कुक है
    विवाद के बाद माही विज काफी गुस्से में नजर आईं। वह घर के दूसरे सदस्यों के सामने अपनी नाराजगी जाहिर करती दिखीं और इस दौरान रो भी पड़ी। माही ने अपने घर में कुक होने की बात करते हुए कहा, 'मुझे नहीं आता खाना बनाना। मेरे घर पर कुक है। मैंने कुक रखने के लिए बहुत मेहनत की है।'
    मुझे नहीं आता खाना बनाना। मेरे घर पर कुक है। मैंने कुक रखने के लिए बहुत मेहनत की है।

    'मेरी जूती, मैं उन्हें दो मिनट में खत्म कर दूं'
    इसके बाद माही ने अपने खिलाफ हो रही बातों पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, 'वे बहुत घटिया हैं। मेरी जूती, मैं उन्हें दो मिनट में खत्म कर दूंगी।' मामला यहीं नहीं रुका। बहस के दौरान माही ने कहा, 'थूकते होंगे भोजपुरी के लोग इस पर।'

    माही बोलीं- तुम मेरे लिए मायने ही नहीं रखतीं
    वहीं, आम्रपाली ने भी माही को जवाब देने में कोई कसर नहीं छोड़ी। किचन में उन्होंने माही से खाना बनाते समय वहां से दूर रहने को कहा। इस पर माही ने जवाब दिया, 'तुम मेरे लिए मायने ही नहीं रखतीं।' इसके बाद आम्रपाली ने माही की कुकिंग को लेकर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि जब माही खाना बनाती हैं तो 16 लोगों के लिए भी खाना पूरा नहीं पड़ता।

     

  • त्योहारी सीजन में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए बिलासपुर पुलिस ने गुंडे-बदमाशों की कराई परेड।

    त्योहारी सीजन में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए बिलासपुर पुलिस ने गुंडे-बदमाशों की कराई परेड।

    बिलासपुर 
    आगामी त्योहारों के दौरान जिले में शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने असामाजिक तत्वों और निगरानीशुदा बदमाशों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। एसएसपी के निर्देश पर जिले के सभी थाना क्षेत्रों में गुंडा एवं निगरानी बदमाशों को तलब कर उनकी परेड कराई गई।

    उन्हें त्योहारों के दौरान किसी भी तरह की अशांति या उपद्रव से दूर रहने की सख्त हिदायत दी गई। एएसपी पंकज पटेल ने बताया कि एसएसपी रजनेश सिंह ने आगामी गणेश पूजा, नवरात्र, दशहरा और दीपावली को देखते हुए सभी राजपत्रित अधिकारियों और थाना प्रभारियों को आवश्यक निर्देश दिए हैं। इसके तहत थाना क्षेत्रों में दर्ज गुंडा एवं निगरानी बदमाशों की जानकारी जुटाकर उन्हें तलब किया गया।

    जुटाकर उन्हें तलब किया गया।

    अधिकारियों ने बदमाशों से उनके वर्तमान कार्य और गतिविधियों के संबंध में जानकारी ली। परेड के दौरान पुलिस ने स्पष्ट किया कि त्योहारों के समय किसी भी व्यक्ति द्वारा कानून व्यवस्था बिगाड़ने, विवाद करने या शांति भंग करने का प्रयास किया गया तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    पुलिस ने बदमाशों से अपने परिवार के साथ शांतिपूर्वक त्योहार मनाने और किसी विवाद में शामिल नहीं होने की अपील भी की। अधिकारियों को सक्रिय बदमाशों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई कर इस्तगासा तैयार करने और बाउंड ओवर की कार्रवाई के लिए प्रतिवेदन भेजने को कहा गया है।
    पुलिस का उद्देश्य त्योहारों के दौरान संवेदनशील इलाकों में किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति बनने से पहले ही प्रभावी नियंत्रण कायम करना है।

    किन त्योहारों पर रहेगी खास नजर

    आने वाले दिनों में गणेश पूजा, नवरात्रि, दशहरा और दीपावली जैसे प्रमुख त्योहार मनाए जाएंगे। इन आयोजनों के दौरान बड़ी संख्या में लोग धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल होते हैं। ऐसे में पुलिस ने कानून व्यवस्था को लेकर पहले से तैयारी शुरू कर दी है। अधिकारियों ने थाना प्रभारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए सतर्क रहने को कहा है।
    त्योहारों के दौरान विवाद की आशंका वाले स्थानों और लोगों की गतिविधियों पर नजर रखने के साथ आवश्यकतानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस का फोकस किसी घटना के बाद कार्रवाई करने के बजाय पहले से रोकथाम पर है।

    सक्रिय बदमाशों पर होगी प्रतिबंधात्मक कार्रवाई

    पुलिस ने केवल समझाइश तक कार्रवाई सीमित नहीं रखने के संकेत दिए हैं। सक्रिय पाए जाने वाले बदमाशों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए संबंधित थाना स्तर पर इस्तगासा तैयार कर बाउंड ओवर की कार्रवाई के लिए प्रतिवेदन भेजा जाएगा।
    बाउंड ओवर की प्रक्रिया का उद्देश्य संबंधित व्यक्ति को भविष्य में शांति भंग करने वाली गतिविधियों से दूर रखना है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि त्योहारों के दौरान उपद्रव या शांति भंग करने की कोशिश को गंभीरता से लिया जाएगा। ऐसे मामलों में परिस्थितियों के अनुसार संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। 

  • गोरखपुर में मिनी नंदिनी योजना का बढ़ा दायरा, 20 नए लाभार्थी जुड़े; संख्या 26 हुई

    गोरखपुर में मिनी नंदिनी योजना का बढ़ा दायरा, 20 नए लाभार्थी जुड़े; संख्या 26 हुई

    गोरखपुर
     पशुपालन विभाग के नंद बाबा दुग्ध विकास मिशन योजना (Nand Baba Mission) के अंतर्गत संचालित मिनी नंदिनी कृषक समृद्धि योजना (Mini Nandini Scheme) में पिछले सत्र के 20 और लोगों को शामिल कर लिया गया है। ऐसे में अब लाभार्थियों की संख्या 26 हो गई है। इसमें से छह लोगों ने अपने खर्च पर योजना संचालित करने की सहमति प्रदान की है।

    सत्र 2025-26 में मिनी नंदिनी कृषक समृद्धि योजना में शामिल होने के लिए 42 लोगों ने आवेदन किया था। ई लाटरी के माध्यम से छह लोगों का चयन किया गया। शेष लोगों को प्रतिक्षा सूची में रखा गया था। इसी जुलाई में शासन की ओर से प्रतीक्षारत लोगों को योजना में शामिल करते हुए लाभ देने के आदेश दिए गए।

    अंतिम तिथि 12 सितंबर तक 20 लोगों ने बैंक के सहमति पत्र व निजी व्यवस्था से योजना में शामिल होने की औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं। छह लोग अपनी निजी व्यवस्था से डेयरी के संचालन की सहमति दिए हैं। इस सत्र में अब योजना के कुल 26 लाभार्थी हो गए हैं।

    यह है योजना
    मिनी नंदिनी कृषक समृद्धि योजना में देसी नस्ल की 10 गाय का पालन करना है। इसे प्रदेश के बाहर से लाना होता है। 23.60 लाख रुपये की योजना में सरकार की ओर से 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है। शेष रकम लाभार्थी को स्वयं खर्च करना है। इतने रुपये की उसे बैंक गारंटी देनी होती है या अपने खाते में बैलेंस रखना पड़ता है। अनुदान की राशि दो किस्तों में दी जाती है।

    प्रदेश सरकार दुग्ध विकास को बढ़ावा देने में जुटी है। कृषि के साथ पशुपालन को जोड़ा जा रहा है। पिछले सत्र के प्रतीक्षा सूची के अधिक से अधिक लोगों को योजना का लाभ देने का आदेश दिया गया था। निर्धारित तिथि तक 20 लोगों ने औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं। उन्हें योजना में शामिल कर लिया गया है।

    – डा. धर्मेंद्र पांडेय, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी

  • शाहिद आफरीदी के महिलाओं वाले बयान पर भड़के आकाश चोपड़ा, बोले- ऐसी सोच से क्रिकेट नहीं बढ़ेगा

    शाहिद आफरीदी के महिलाओं वाले बयान पर भड़के आकाश चोपड़ा, बोले- ऐसी सोच से क्रिकेट नहीं बढ़ेगा

    नई दिल्ली
    पाकिस्तान क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान शाहिद आफरीदी का महिलाओं को लेकर दिया गया एक बयान इन दिनों सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है. अब इस पर पूर्व भारतीय क्रिकेटर और जाने-माने एनालिस्ट आकाश चोपड़ा ने अपनी बात रखी है.

    आफरीदी के बयान में कहा गया कि हमारे यहां की महिलाएं सिर्फ रोटियां अच्छी बना सकती हैं, इन्हें क्रिकेट नहीं खेलना चाहिए. इस बयान पर आकाश चोपड़ा का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया.

    अपने यूट्यूब चैनल पर इस मुद्दे पर खुलकर बात करते हुए आकाश चोपड़ा ने कहा कि जब उन्होंने पहली बार यह खबर पढ़ी तो उन्हें लगा कि शायद यह किसी एआई (AI) का कमाल होगा या कोई फर्जी बयान होगा. लेकिन जब पता चला कि यह सच है तो उन्होंने आफरीदी को आड़े हाथों लिया.

    आकाश ने तंज कसते हुए कहा कि अगर आपके देश की महिलाएं क्रिकेट नहीं खेल सकतीं तो फिर आप कैसे खेल लेते हैं? आप इसलिए अच्छा खेल रहे हैं क्योंकि आपको बचपन से खेलने का मौका मिला है. उन्होंने माना कि पाकिस्तान की महिला टीम अभी उतना अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रही है, लेकिन इसकी वजह यह नहीं है कि महिलाएं क्रिकेट नहीं खेल सकतीं.

    असली कमी तो वहां के सिस्टम में है. उन्हें सही सुविधाएं और मौके देने की जरूरत है. यह कहना कि उनका काम सिर्फ घर संभालना और रोटियां बनाना है ये काफी गलत है. आकाश चोपड़ा गुस्से में इतने आगे बढ़ गए कि उन्होंने यहां तक कह दिया कि मेरे भाई… नहीं सॉरी, मेरा भाई नहीं है तू यार! अगर ऐसी घटिया बात करोगे तो मैं तुझे भाई कैसे बोल सकता हूं?

    लड़कियां कर सकती है कमाल
    उन्होंने आगे चुनौती देते हुए कहा कि पाकिस्तान की लड़कियों को एक बार लड़कों के बराबर मौके और सुविधाएं देकर तो देखिए. हो सकता है कि वे लड़कों से भी बेहतर खेल कर दिखाएं और इस बात से उन्हें बिल्कुल भी हैरानी नहीं होगी. आकाश ने तंज कसा कि अगर देश में ऐसी ही दकियानूसी सोच बनी रहेगी तो पहले ही बदहाल चल रहा पुरुषों का क्रिकेट और नीचे चला जाएगा और लड़कियों को तो कभी आगे बढ़ने ही नहीं दिया जाएगा.

    PCB और मोहसिन नकवी पर भी कसा तंज
    बातचीत के दौरान आकाश चोपड़ा ने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) और वहां के मौजूदा हालातों पर भी जमकर निशाना साधा. उन्होंने हाल ही में पाकिस्तान की महिला टीम पर एशिया कप सेमीफाइनल में धीमे ओवर रेट की वजह से लगे 50 प्रतिशत जुर्माने और पुरुष टीम के WTC पॉइंट्स काटे जाने का भी जिक्र किया.

    आकाश ने चुटकी लेते हुए कहा कि वहां के बोर्ड के मुखिया मोहसिन नकवी को तो बस हर जगह जाकर ट्रॉफी देने की जिद से ही फुर्सत नहीं मिल रही है. पाकिस्तान क्रिकेट की हालत इस समय कंगाली में आटा गीला जैसी हो चुकी है, जहां टीम जीत से ज्यादा अपने कटे हुए पॉइंट्स को लेकर चर्चा में रहती है.

  • योगी सरकार की सेवा, सुशासन और जनकल्याण की उपलब्धियों को जन-जन तक पहुंचाएगा ‘सेवा संकल्प अभियान’

    योगी सरकार की सेवा, सुशासन और जनकल्याण की उपलब्धियों को जन-जन तक पहुंचाएगा ‘सेवा संकल्प अभियान’

    लखनऊ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में सेवा, सुशासन, जनकल्याण और विकास की उपलब्धियों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक ‘सेवा संकल्प अभियान’ चलेगा। एक माह के अभियान के जरिए योगी सरकार की योजनाओं से लाभान्वित नागरिकों की सफलता की कहानियां सामने लाने के साथ प्रदेशवासियों को ‘विकसित भारत-2047’ के सामूहिक राष्ट्रीय संकल्प से जोड़ा जाएगा। अभियान के प्रभारी एवं उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय के मार्गदर्शन में शासन से जनपद स्तर तक त्रिस्तरीय समन्वय व्यवस्था बनाई गई है।

    अभियान में केंद्र सरकार के 12 वर्षों और राज्य सरकार के 10 वर्षों के विकास कार्यों से आए बदलावों को प्रस्तुत करने पर जोर रहेगा। केंद्र एवं राज्य की योजनाओं से जुड़े लाभार्थियों का त्रिस्तरीय डेटा बैंक तैयार होगा। कुल 4.19 करोड़ परिवारों और 15.74 करोड़ लाभार्थियों को जोड़ने का लक्ष्य है। इसमें ग्रामीण क्षेत्र के 3.51 करोड़ परिवार व 13.01 करोड़ लाभार्थी तथा शहरी क्षेत्र के 0.68 करोड़ परिवार व 2.73 करोड़ लाभार्थी शामिल हैं।

    12 कार्यक्रमों से पहुंचेगा सेवा का संदेश
    अभियान में ‘आशीर्वाद का दीया’, ‘मेरे सपनों का भारत: चित्र सेवा’, ‘नमो सेवा-अनकही कहानियां’, ‘आंगन मिलन सेवा’, ‘सेवा की कहानी’, ‘सेवा ज्योति कलश यात्रा’, ‘वडनगर से वाराणसी यात्रा’, ‘सेवा मेरा योगदान’, ‘सेवा सेतु अभियान’, ‘सेवा के रंग, राष्ट्र के संग’, ‘सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज’ और ‘सुशासन सेवा संवाद’ आयोजित होंगे।

    17 सितंबर को ‘सेवा दिवस-आशीर्वाद का दीया’ से शुरुआत होगी। शाम सात बजे घरों और प्रतिष्ठानों पर दीप प्रज्वलन कर सेवा एवं विकसित भारत के संकल्प से जुड़ने का आह्वान किया जाएगा। अस्पतालों में फल वितरण, रक्तदान शिविर, विश्वकर्मा जयंती पर टूल किट वितरण तथा चयनित विकास एवं अवस्थापना परियोजना स्थलों पर दीप प्रज्वलन होगा।

    ‘मेरे सपनों का भारत: चित्र सेवा’ के तहत 17 सितंबर से 7 अक्टूबर तक विद्यालयों में कक्षा 5 से 8 के लिए चित्रकला तथा कक्षा 9 से 12 के लिए चित्रकला एवं भाषण प्रतियोगिताएं होंगी। उच्च शिक्षण संस्थानों में चित्रकला, भाषण और वाद-विवाद प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। जिला स्तरीय प्रदर्शनी के बाद 7 अक्टूबर को राज्य स्तरीय प्रदर्शनी होगी। उत्कृष्ट प्रतिभागियों को मुख्यमंत्री के डिजिटल हस्ताक्षरयुक्त प्रमाण-पत्र एवं पुरस्कार दिए जाएंगे।

    नुक्कड़ नाटक और डिजिटल कहानियों से जनजागरण
    ‘नमो सेवा-अनकही कहानियां’ के तहत प्रत्येक जनपद में 18 से 20 कलाकारों की सांस्कृतिक टोलियां गठित होंगी। प्रत्येक विधानसभा में सात कार्यक्रम होंगे। ग्राम पंचायतों, सामुदायिक केंद्रों, विद्यालयों और सार्वजनिक स्थलों पर 25 से 30 मिनट की प्रस्तुति के जरिए जनकल्याणकारी योजनाओं और विकास की कहानी पहुंचाई जाएगी।

    ‘सेवा की कहानी’ डिजिटल एवं रील अभियान में 25 लाख लाभार्थियों के जीवन में आए बदलाव पर 60 सेकंड की रील्स तैयार होंगी। आवास, विद्यालय, पंचायत भवन, पुस्तकालय, एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, इनलैंड पोर्ट, मेट्रो, आरआरटीएस और विश्वविद्यालयों से जुड़ी विकास कहानियां प्रदर्शित की जाएंगी। 25 सितंबर से 7 अक्टूबर तक ‘आंगन मिलन सेवा’ में प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र पर तीन दिवसीय उत्सव एवं संवाद होगा। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं, आशा दीदियों और उत्कृष्ट लाभार्थी माताओं का सम्मान किया जाएगा। पोषण, स्वास्थ्य एवं महिला योजनाओं की जानकारी के साथ हेल्दी बेबी शो, बच्चों को कॉमिक बुक्स, खिलौने, फल-मिठाई, अतिरिक्त पोषाहार एवं सामग्री वितरण होगा।

    सेवा ज्योति कलश यात्रा से विकसित भारत का संकल्प
    7 अक्टूबर को ‘सेवा ज्योति कलश यात्रा-विकसित भारत का संकल्प’ आयोजित होगी। प्रमुख चौराहों पर सेवा कलश स्थापित किए जाएंगे। पैदल, साइकिल और बाइक रैलियों से नागरिक मुख्य आयोजन स्थल पहुंचेंगे। ‘वडनगर से वाराणसी यात्रा’ में 17 सितंबर से 7 अक्टूबर तक उत्तर प्रदेश की 10 नदियों का जल लेकर 10 टोलियां काशी से वडनगर, गुजरात जाएंगी। मार्ग के जनपदों में चौपाल, जनसंवाद और विकास यात्रा पर आधारित फिल्म प्रदर्शन होंगे।

    ‘सेवा मेरा योगदान’ में नागरिक 25 सेवा गतिविधियों में से किसी एक से जुड़ेंगे। रक्तदान, वृक्षारोपण, स्वच्छता, स्वास्थ्य जांच, गांव गोद लेना, योग-ध्यान, महिला स्वास्थ्य, शिक्षा सहयोग, करियर काउंसलिंग, वरिष्ठ नागरिकों की डिजिटल साक्षरता, अंगदान, पोषण, सड़क सुरक्षा, जल संरक्षण, साइबर सुरक्षा, फिट इंडिया, दिव्यांगजन सहयोग, मतदाता जागरूकता, वोकल फॉर लोकल और सरकारी योजनाओं की जागरूकता इसमें शामिल हैं। प्रत्येक विधानसभा में न्यूनतम दो स्थलों के कायाकल्प का लक्ष्य है।

    सेवा सेतु शिविरों में मौके पर मिलेंगी योजनाओं की सुविधाएं

    ‘सेवा सेतु अभियान’ के तहत विकासखंड एवं नगरीय निकाय स्तर पर पांच से सात दिवसीय बहुउद्देशीय शिविर होंगे। एक ही स्थान पर योजनाओं की जानकारी, पात्र नागरिकों के आवेदन, पात्रता सत्यापन और स्वीकृति की प्रक्रिया सुनिश्चित की जाएगी। स्वास्थ्य मेले, प्रत्येक विधानसभा में दिव्यांग कल्याण शिविर और मतदाता पंजीकरण पर भी जोर रहेगा। ‘सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज’ में युवाओं की राष्ट्रीय स्तर के इनोवेशन चैलेंज में भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। विश्वविद्यालयों, इंजीनियरिंग कॉलेजों, आईटीआई और पॉलीटेक्निक में ओरिएंटेशन एवं मोटिवेशन कार्यक्रम होंगे।

    1.25 लाख जनप्रतिनिधि लेंगे विकसित भारत का संकल्प
    17 अक्टूबर को ‘सुशासन सेवा संवाद’ के साथ अभियान का समापन होगा। ग्राम प्रधान, सरपंच और अन्य जनप्रतिनिधि सेवा एवं सुशासन के 25 वर्षों के अवसर पर प्रधानमंत्री का सम्मान करेंगे तथा विकसित भारत-2047 का संकल्प लेंगे। लगभग 1.25 लाख जनप्रतिनिधियों द्वारा संकल्प एवं वंदे मातरम् गायन की योजना है। ऐतिहासिक स्मारकों और पर्यटन स्थलों पर विकास यात्रा दर्शाने वाले लेजर शो होंगे। प्रमुख तीर्थस्थलों एवं शक्तिपीठों में महायज्ञ एवं विशेष अनुष्ठान प्रस्तावित हैं।
    17 अक्टूबर को ‘सुशासन सेवा संवाद’ के साथ अभियान का समापन होगा। ग्राम प्रधान, सरपंच और अन्य जनप्रतिनिधि सेवा एवं सुशासन के 25 वर्षों के अवसर पर प्रधानमंत्री का सम्मान करेंगे तथा विकसित भारत-2047 का संकल्प लेंगे। लगभग 1.25 लाख जनप्रतिनिधियों द्वारा संकल्प एवं वंदे मातरम् गायन की योजना है। ऐतिहासिक स्मारकों और पर्यटन स्थलों पर विकास यात्रा दर्शाने वाले लेजर शो होंगे। प्रमुख तीर्थस्थलों एवं शक्तिपीठों में महायज्ञ एवं विशेष अनुष्ठान प्रस्तावित हैं।

  • दिल्ली के स्मारकों के संरक्षण के लिए मिलेगी ₹2 करोड़ तक की मदद, सरकार ने शुरू की प्रक्रिया

    दिल्ली के स्मारकों के संरक्षण के लिए मिलेगी ₹2 करोड़ तक की मदद, सरकार ने शुरू की प्रक्रिया

    नई दिल्ली
    दिल्ली के स्मारकों के संरक्षण के लिए दिल्ली सरकार ने वित्तीय सहायता देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुरातत्व विभाग ने गैर सरकारी संगठनों, न्यास, फाउंडेशन और शैक्षणिक संस्थानों से आवेदन मांगे हैं।

    दिल्ली मुख्यमंत्री विरासत नवोत्थान योजना के तहत परियोजनाओं के लिए अधिकतम दो करोड़ रुपये तक सहायता दी जाएगी। स्मारकों के संरक्षण के लिए अनुदान देने संबंधी आदेश दिल्ली सरकार ने जारी कर दिया है।

    पुरातत्व विभाग ने पात्र संस्थाओं से वित्तीय सहायता के लिए आवेदन मांगे हैं। यह सहायता दिल्ली मुख्यमंत्री विरासत नवोत्थान योजना के तहत दी जाएगी।

    सामान्य प्रोजेक्ट में 75% खर्च सरकार का
    अनुदान योजना के तहत किसी परियोजना के लिए अधिकतम दो करोड़ रुपये प्रति वित्तीय वर्ष तक सहायता दी जा सकेगी। सामान्य परियोजनाओं में विभाग और संबंधित संस्था के बीच खर्च का अनुपात 75:25 रहेगा।

    महत्वपूर्ण स्मारकों से जुड़े संरक्षण कार्यों में सरकार 90 प्रतिशत और संबंधित संस्था 10 प्रतिशत खर्च वहन करेगी। वहीं सरकारी संस्थानों की परियोजनाओं का 100 प्रतिशत खर्च सरकार उठाएगी।

    जरूरत पर दो करोड़ की सीमा बढ़ेगी
    योजना में संरक्षण कार्य की आवश्यकता को देखते हुए दो करोड़ रुपये की अधिकतम सीमा बढ़ाने का भी प्रविधान है। इसके लिए सिफारिश समिति की अनुशंसा जरूरी होगी। सरकार ने कुछ दिन पहले ही स्मारकों के संरक्षण के लिए सहायता अनुदान योजना की अधिसूचना जारी की थी।

    दर्पण पोर्टल पर पंजीकरण जरूरी किया
    वित्तीय सहायता के लिए पात्र संस्थाओं को दिल्ली सरकार के पुरातत्व विभाग के निदेशक के नाम से जारी पोर्टल के माध्यम से आनलाइन आवेदन करना होगा। विश्वविद्यालय और सरकारी अथवा स्वायत्त संस्थाएं रजिस्ट्रार या विभागाध्यक्ष के माध्यम से आवेदन कर सकेंगी।

    गैर सरकारी संगठनों, न्यास और फाउंडेशन आदि के लिए भारत सरकार के दर्पण पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य किया गया है।