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  • छत्तीसगढ़ की खनिज ताकत बनेगी विकास का आधार: मुख्यमंत्री साय

    छत्तीसगढ़ की खनिज ताकत बनेगी विकास का आधार: मुख्यमंत्री साय

    रायपुर

    मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज अपने निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग द्वारा चयनित नव नियुक्त खनि निरीक्षकों को नियुक्ति पत्र प्रदान किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ खनिज संपदा की दृष्टि से देश के सबसे समृद्ध राज्यों में से एक है और खनिज प्रशासन के प्रभावी संचालन में मैदानी अमले की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।

    मुख्यमंत्री  साय ने नव चयनित खनि निरीक्षकों को बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि युवाओं पर ही देश और प्रदेश का भविष्य निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि खनिज विभाग में नई नियुक्तियों से विभागीय कार्यबल मजबूत होगा तथा खनिज अन्वेषण और खनन गतिविधियों को और गति मिलेगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि नवनियुक्त खनि निरीक्षक अपने दायित्वों का समुचित निर्वहन करते हुए खनिज प्रशासन से जुड़े कार्यों के प्रभावी क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती लौह अयस्क, कोयला, बॉक्साइट, लाइमस्टोन, टिन, डायमंड, गोल्ड और लिथियम सहित विभिन्न खनिज संपदाओं से परिपूर्ण है। खनिज राज्य के राजस्व का प्रमुख स्रोत भी हैं और सरकार खनिज राजस्व में वृद्धि के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री  साय ने नवनियुक्त अधिकारियों को खनिज राजस्व वृद्धि में सक्रिय योगदान देने के लिए प्रेरित किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि खनि निरीक्षक के रूप में आप सभी के ऊपर बड़ी जिम्मेदारी है। पारदर्शिता, ईमानदारी और निष्ठा के साथ कार्य करते हुए राज्य के संसाधनों के संरक्षण और सुव्यवस्थित उपयोग में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।

    उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग द्वारा 15 अक्टूबर 2025 को 33 खनि निरीक्षकों की चयन सूची जारी की गई थी। खनिज साधन विभाग द्वारा 19 फरवरी 2026 को कुल 32 खनि निरीक्षकों की नियुक्ति आदेश जारी किए गए, जिनमें से 30 नव चयनित खनि निरीक्षकों को आज मुख्यमंत्री द्वारा नियुक्ति पत्र प्रदान किया गया।

    इस अवसर पर छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष  सौरभ सिंह, सचिव खनिज साधन विभाग  पी. दयानंद, संचालक भौमिकी एवं खनिकर्म  रजत बंसल सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

  • निरंतर डायलिसिस सेवाओं से किडनी मरीजों को राहत, निःशुल्क योजना बनी संबल

    निरंतर डायलिसिस सेवाओं से किडनी मरीजों को राहत, निःशुल्क योजना बनी संबल

    रायपुर.

    प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों के सकारात्मक परिणाम अब ग्रामीण अंचलों में भी दिखाई देने लगे हैं। विशेष रूप से किडनी रोग से जूझ रहे मरीजों के लिए संचालित निःशुल्क डायलिसिस सुविधा उपचार का महत्वपूर्ण आधार बनकर उभर रही है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मरीजों को नियमित उपचार उपलब्ध हो पा रहा है और उन्हें बड़े शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ रहा है।

    गरियाबंद जिले के देवभोग क्षेत्र में किडनी रोग लंबे समय से एक गंभीर चुनौती रहा है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की सक्रियता और शासन की पहल से उपचार व्यवस्था अधिक संगठित और सुलभ हुई है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र देवभोग में डायलिसिस सेवाएं नियमित रूप से संचालित हो रही हैं, जिसका सीधा लाभ क्षेत्र के मरीजों को मिल रहा है।

    स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, बीते 10 दिनों में यहां कुल 95 डायलिसिस सत्र आयोजित किए गए हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि औसतन प्रतिदिन लगभग 10 मरीजों को डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। निरंतर उपचार व्यवस्था से मरीजों को समय पर चिकित्सा सहायता मिल रही है और उनकी स्थिति की नियमित निगरानी भी की जा रही है।

    किडनी रोगियों के लिए डायलिसिस एक जीवनरक्षक प्रक्रिया है, जिसे लंबे समय तक नियमित रूप से कराना आवश्यक होता है। इस संदर्भ में प्रदेश सरकार द्वारा अस्पतालों में निःशुल्क डायलिसिस सुविधा उपलब्ध कराना स्वास्थ्य तंत्र की एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो रही है। इससे दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले मरीजों के लिए उपचार की राह काफी आसान हुई है।

    प्रदेश स्तर पर भी डायलिसिस सेवाओं के विस्तार, आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता तथा चिकित्सा दल की सक्रियता के कारण उपचार व्यवस्था अधिक प्रभावी हो रही है। स्वास्थ्य विभाग अब केवल उपचार तक सीमित न रहकर मरीजों की समय पर पहचान, नियमित जांच और सतत उपचार व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दे रहा है।

    देवभोग में 10 दिनों के भीतर किए गए 95 डायलिसिस सत्र इस बात का संकेत हैं कि क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में निरंतर प्रयास जारी हैं। निःशुल्क डायलिसिस योजना न केवल मरीजों के लिए राहत का माध्यम बनी है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच को भी मजबूत कर रही है।

    डायलिसिस सेवाओं के सुचारू संचालन के लिए आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता, उपकरणों के नियमित रखरखाव और मरीजों की सतत निगरानी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। साथ ही, लोगों को समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराने और किडनी रोग के प्रति जागरूक रहने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है, ताकि गंभीर स्थितियों से समय रहते बचाव किया जा सके।

  • पूर्व प्रेमी से विवाद: कुत्ते ‘हेनरी’ को लेकर हाईकोर्ट पहुंचीं महुआ मोइत्रा

    पूर्व प्रेमी से विवाद: कुत्ते ‘हेनरी’ को लेकर हाईकोर्ट पहुंचीं महुआ मोइत्रा

    नई दिल्ली
    TMC नेता महुआ मोइत्रा ने अपने पालतू रॉटवीलर कुत्ते 'हेनरी' की कस्टडी के लिए दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। जय अनंत देहाद्रई के साथ चल रहे इस अनोखे कानूनी विवाद की पूरी जानकारी पढ़ें। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की लोकसभा सांसद महुआ मोइत्रा और उनके पूर्व प्रेमी जय अनंत देहाद्रई के बीच कानूनी लड़ाई अब उनके पालतू कुत्ते 'हेनरी' (रॉटवीलर नस्ल) की कस्टडी तक पहुंच गई है। महुआ मोइत्रा ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने साकेत कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसने उन्हें उनके पालतू कुत्ते हेनरी की अंतरिम कस्टडी देने से इनकार कर दिया था।

    गुरुवार को जस्टिस मनोज कुमार ओहरी ने इस याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने महुआ के पूर्व प्रेमी और वकील जय अनंत देहाद्रई को नोटिस जारी कर उनका जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 29 अप्रैल को तय की गई है। सुनवाई के दौरान देहाद्रई व्यक्तिगत रूप से पेश हुए और उन्होंने तर्क दिया कि मोइत्रा की इस याचिका को शुरुआत में ही खारिज कर दिया जाना चाहिए।

    कैश-फॉर-क्वेरी मामला
    यह पालतू कुत्ते का विवाद दोनों के बीच चल रही एक बड़ी कानूनी और राजनीतिक जंग का हिस्सा है। विवाद की शुरुआत तब हुई जब देहाद्रई ने आरोप लगाया कि महुआ मोइत्रा ने संसद में सवाल पूछने के बदले व्यवसायी दर्शन हिरानंदानी से रिश्वत ली थी।

    गंभीर आरोप: देहाद्रई और भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने दावा किया था कि मोइत्रा ने अपने लोकसभा के लॉगिन क्रेडेंशियल हिरानंदानी को दिए थे, ताकि वह अपनी पसंद के सवाल सीधे पोस्ट कर सकें। आरोप है कि उनके द्वारा पूछे गए 61 सवालों में से 50 हिरानंदानी से संबंधित थे।

    संसद से निष्कासन: इन आरोपों के आधार पर लोकसभा की आचार समिति ने जांच की और उन्हें निष्कासित करने की सिफारिश की। परिणामस्वरूप, 8 दिसंबर, 2023 को महुआ मोइत्रा को संसद से निष्कासित कर दिया गया।

    मोइत्रा का बचाव: उन्होंने सभी आरोपों को खारिज करते हुए इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया। उन्होंने स्वीकार किया कि हिरानंदानी उनके मित्र हैं, लेकिन किसी भी तरह के 'क्विड प्रो क्वो' (लेन-देन) से इनकार किया।

    मानहानि का मुकदमा और कोर्ट की टिप्पणी
    महुआ मोइत्रा ने देहाद्रई और निशिकांत दुबे के खिलाफ मानहानि का मुकदमा भी दायर किया था। हालांकि, मार्च 2024 में दिल्ली उच्च न्यायालय ने उन्हें अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने तब कहा था कि यह आरोप पूरी तरह से गलत नहीं हैं कि मोइत्रा ने अपने लॉगिन क्रेडेंशियल शेयर किए और उपहार स्वीकार किए। फिलहाल यह मुख्य मामला अभी भी अदालत में लंबित है।

     

  • लक्ष्य कप का 16वां संस्करण: देश के टॉप एयर राइफल निशानेबाज एक मंच पर

    लक्ष्य कप का 16वां संस्करण: देश के टॉप एयर राइफल निशानेबाज एक मंच पर

    मुंबई
    भारत के शीर्ष 20 रैंक्ड 10 मीटर एयर राइफल निशानेबाज 16वें आरआर लक्ष्य कप में प्रतिस्पर्धा करेंगे। यह टूर्नामेंट आरआर ग्लोबल द्वारा संचालित है और लक्ष्य शूटिंग क्लब, करनाला स्पोर्ट्स अकादमी, पनवेल, नवी मुंबई में आयोजित होगा। केवल आमंत्रण आधारित यह प्रतियोगिता 21 और 22 फ़रवरी को आयोजित की जाएगी। इसमें जूनियर और सीनियर वर्ग के प्रमुख खिलाड़ी एक पेशेवर ढंग से संचालित, अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप प्रतियोगिता में भाग लेंगे। इसमें पुरुषों और महिलाओं के लिए समान पोडियम अवसर होंगे, साथ ही शीर्ष स्थान पाने वालों के लिए नकद पुरस्कार और उपकरण पुरस्कार भी दिए जाएंगे।
    प्रतियोगिता में किरण जाधव (वर्तमान नेशनल चैंपियन और वर्ल्ड चैंपियनशिप पदक विजेता), सोनम मस्कर (आईएसएसएफ वर्ल्ड कप पदक विजेता), पार्थ माने (वर्तमान नेशनल गेम्स चैंपियन और जूनियर वर्ल्ड चैंपियन), राजश्री संचेटी (अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज और पूर्व नेशनल चैंपियन) और ओजस्वी ठाकुर (एशियन चैंपियनशिप यूथ स्वर्ण पदक विजेता) जैसे शीर्ष दावेदार हिस्सा लेंगे। सीनियर चैंपियन को 1.5 लाख रुपये और रोटेटिंग सिल्वर ट्रॉफी दी जाएगी, जो फिलहाल नेवी के किरण जाधव के पास है। जूनियर चैंपियन को 75,000 रुपये दिए जाएंगे। अन्य पोडियम फिनिशर्स के लिए भी अतिरिक्त नकद पुरस्कार होंगे। खिलाड़ियों को उपकरण साझेदार कैपापी स्पोर्ट्स और एक्सेसरीज साझेदार टिरो स्पोर्ट्स की ओर से शूटिंग उपकरण और सहायक सामग्री जीतने का अवसर भी मिलेगा।

     

  • होलिका दहन में क्या अर्पित किया जाता है? जानिए प्रसाद घर लाने के नियम और मान्यताएँ

    होलिका दहन में क्या अर्पित किया जाता है? जानिए प्रसाद घर लाने के नियम और मान्यताएँ

    हर साल फाल्गुन माह की पूर्णिमा के दिन होली का त्योहार मनाया जाता है. इस दिन पूरे देश रंग और गुलाल बिखरे नजर आते हैं. होली के दिन आपसी मतभेद भूलकर लोग एक दूसरे को रंग और गुलाल लगाते हैं. साथ ही एक दूसरे को लगे लगाते हैं. पूरा देश होली के पर्व का इंजार बेसब्र होकर करता है. वहीं हर साल फाल्गुन माह की पूर्णिमा की रात को होलिका दहन का भी पर्व मनाया जाता है.

    रात को हालिका दहन के बाद ही सुबह रंगों की होली खेली जाती है. बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में होलिका दहन का पर्व मनाया जाता है. मान्यता है कि होलिका दहन की अग्नि में जीवन के सभी दुख और नकारात्मकता जलकर भस्म हो जाती है. फाल्गुन मास की पूर्णिमा की रात शुभ मुहूर्त में होलिका दहन किया जाता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि होलका दहन में क्या-क्या चीजें अर्पित की जाती हैं? साथ ही जानते हैं कि होलिका दहन का प्रसाद घर ला सकते हैं या नहीं

    होलिका दहन 2026 कब है?
    द्रिक पंचांग के अनुसार, इस बार फाल्गुन पूर्णिमा की तिथि की शुरुआत 02 मार्च 2026 की शाम को 05 बजकर 55 मिनट पर होगी. इस तिथि का समापन 03 मार्च की शाम 5 बजकर 07 मिनट तक रहेगी. ऐसे में होलिका दहन का पर्व 3 मार्च 2026 को मनाया जाएगा. 04 मार्च को रंगों की होली खेली जाएगी.

    होलिका दहन में क्या चीजें की जाती हैं अर्पित?
    पूजा के दौरान जलती हुई अग्नि यानी होलिका में नारियल, उपले, नई फसल, गेंहू, गुलाल, चावल, जौ, रोली, अक्षत, बताशे, फूल, हल्दी की गांठ और कपूर आदि पूजा सामग्री अर्पित की जाती है. साथ ही बुराई पर अच्छाई की जीत का आशीर्वाद मांगा जाता है.

    होलिका दहन का प्रसाद क्या है?
    जो चीजें होलिका में अर्पित की जाती हैं, वही होलिका दहन का प्रसाद होता है. इसके अलावा अंत में बची हुई होलिका की राख भी बेहद शुभ मानी जाती है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, होलिका की राख को घर के मंदिर या तिजोरी में रखना चाहिए. साथ ही माथे पर लगाना चाहिए. इससे सेहत अच्छी रहती है.

    क्या होलिका दहन का प्रसाद घर ला सकते हैं?
    धार्मिक मान्यता के अनुसार, होलिका दहन का प्रसाद घर लाया जा सकता है. गेहूं, चने, नारियल, बताशे, नई फसल, चावल और जौ आदि प्रसाद को दोस्तों और परिवार वालों के बीच वितरित करना चाहिए. इससे नकारात्मकता दूर रहती है.

  • राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम ‘चिरायु’ का कमाल: जन्मजात बधिर तीन बच्चों को एम्स रायपुर में नई सुनवाई

    राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम ‘चिरायु’ का कमाल: जन्मजात बधिर तीन बच्चों को एम्स रायपुर में नई सुनवाई

    रायपुर

    राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (चिरायु) का असर: जन्मजात बधिरता से जूझ रहे तीन बच्चों का एम्स रायपुर में सफल कॉक्लियर इंप्लांट राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (चिरायु) का असर: जन्मजात बधिरता से जूझ रहे तीन बच्चों का एम्स रायपुर में सफल कॉक्लियर इंप्लांट

    सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण और बाल स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर राज्य शासन की महत्वाकांक्षी पहल ने एक बार फिर ठोस परिणाम दिए हैं। जन्मजात बधिरता से जूझ रहे तीन मासूम बच्चों का सफल कॉक्लियर इंप्लांट ऑपरेशन अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान रायपुर में संपन्न हुआ है। स्वास्थ्य विभाग की चिरायु टीम द्वारा समय पर पहचान और समन्वित प्रयासों के कारण इन बच्चों को निःशुल्क उन्नत उपचार उपलब्ध हो सका। वर्तमान में तीनों बच्चे स्वस्थ हैं और चिकित्सकीय देखरेख में हैं।

    आंगनबाड़ी से सुपर स्पेशियलिटी तक सुदृढ़ स्वास्थ्य श्रृंखला

    कबीरधाम जिले के स/लोहारा विकासखंड स्थित ग्राम चिलमखोदरा निवासी धैर्य मरकाम (पिता– श्यामू मरकाम) जन्म से श्रवण बाधा से पीड़ित थे। चिरायु टीम ‘ए’ स/लोहारा द्वारा नियमित स्क्रीनिंग के दौरान समस्या की समय रहते पहचान की गई। आवश्यक चिकित्सकीय परीक्षण एवं रेफरल प्रक्रिया के बाद 16 फरवरी 2026 को AIIMS Raipur में उनका कॉक्लियर इंप्लांट सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। वर्तमान में बालक चिकित्सकीय निगरानी में है।

    इसी क्रम में कोरबा जिले के बालको क्षेत्र निवासी ढाई वर्षीय नक्ष कोशले  की श्रवण समस्या का पता भी प्रारंभिक जांच के दौरान चला। विशेषज्ञ परामर्श के पश्चात 14 फरवरी 2026 को AIIMS Raipur में सर्जरी की गई। चिकित्सकों के अनुसार बालक स्वस्थ है तथा नियमित फॉलो-अप जारी है।

    सक्ति जिले के जैजैपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम हसौद की तीक्षिका साहू में भी जन्मजात बधिरता की पुष्टि आंगनबाड़ी स्तर पर स्क्रीनिंग के दौरान हुई। चिरायु टीम जैजैपुर द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए प्रकरण को उच्च संस्थान में रेफर किया गया। 17 फरवरी 2026 को AIIMS Raipur में सफल कॉक्लियर इंप्लांट के उपरांत अब तीक्षिका स्वस्थ हैं और स्पीच थेरेपी के माध्यम से श्रवण एवं भाषाई विकास की दिशा में निरंतर प्रगति कर रही हैं।

    शासन की संवेदनशीलता और स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता

    इन तीनों मामलों में यह स्पष्ट हुआ है कि यदि समय रहते जांच, परामर्श और उपचार उपलब्ध हो तो जन्मजात श्रवण बाधा जैसी गंभीर समस्या का भी प्रभावी समाधान संभव है। चिरायु टीम की सतत स्क्रीनिंग, आंगनबाड़ी स्तर पर पहचान और उच्च संस्थान में निःशुल्क उपचार की व्यवस्था ने इन परिवारों को नई उम्मीद दी है।

    परिजनों ने शासन और स्वास्थ्य विभाग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस सहयोग ने उनके बच्चों का भविष्य बदल दिया।

    विशेषज्ञों का कहना है कि कॉक्लियर इंप्लांट जैसी जटिल और महंगी सर्जरी सामान्य परिवारों के लिए अत्यंत कठिन होती है। किंतु शासन की महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य योजनाओं के अंतर्गत यह उपचार निःशुल्क संभव हुआ। आंगनबाड़ी स्तर पर स्क्रीनिंग, जिला स्तरीय चिकित्सा परीक्षण और सुपर स्पेशियलिटी संस्थान में समयबद्ध सर्जरी यह संपूर्ण तंत्र राज्य की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

  • याचिका देखते ही बोले CJI सूर्यकांत – भगवान बचाए, सुनवाई से किया साफ इनकार

    याचिका देखते ही बोले CJI सूर्यकांत – भगवान बचाए, सुनवाई से किया साफ इनकार

    नई दिल्ली
    सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत एक याचिका देखकर भड़क गए। उन्होंने यह तक कह दिया कि याचिकाओं के कानून को भगवान बचाए। इतना ही नहीं उन्होंने याचिकाकर्ता को भी जमकर फटकार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को रद्द कर दिया। साथ ही इसकी वजहें भी गिनाईं हैं।

    बार एंड बेंच के अनुसार, CJI सूर्यकांत ने PIL यानी जनहित याचिका को सुनने से मना कर दिया। अदालत ने इसकी वजह याचिका का अस्पष्ट होना बताया है। CJI ने कहा, 'अगर भारत के शीर्ष न्यायालय के सामने याचिकाओं का ऐसा स्तर है, तो भगवान याचिका के कानून को बचाए।'

    AI से याचिकाएं लिखने पर भी जताई थी नाराजगी
    मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने AI से याचिकाएं लिखने की आदत पर चिंता जाहिर की थी। पीठ शिक्षाविद रूप रेखा वर्मा की एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस बी वी नागरत्ना और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा, 'हम यह देखकर परेशान हैं कि कुछ वकीलों ने याचिकाओं का मसौदा तैयार करने के लिए एआई का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। यह बिल्कुल अनुचित है।'

    जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि उन्हें हाल में 'मर्सी बनाम मैनकाइंड' नाम का एक ऐसा केस मिला जो अस्तित्व में है ही नहीं। प्रधान न्यायाधीश ने ऐसे ही एक मामले का जिक्र किया और कहा कि जस्टिस दीपांकर दत्ता की अदालत में, 'एक नहीं बल्कि ऐसे कई फैसलों का हवाला दिया गया था।'

    न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा कि कई बार, जिन फैसलों का जिक्र किया जाता है वे सही होते हैं, लेकिन उन फैसलों के साथ फर्जी उद्धरण जोड़ दिए जाते हैं और इससे उनकी विषयवस्तु का सत्यापन करना बहुत मुश्किल हो जाता है। न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा, 'इससे न्यायाधीशों पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है।'

    इस बीच, न्यायमूर्ति बागची ने विधिक मसौदा तैयार करने की कला में गिरावट पर दुख जताया और कहा कि कई विशेष अनुमति याचिकाओं में ज्यादातर पिछले फैसलों के लंबे उद्धरण होते हैं, जिनमें कानूनी आधारों की मौलिक जानकारी बहुत कम होती है।

     

  • ऑफिस टेंशन से छुटकारा: डेस्क पर करें ये 3 आसान वास्तु उपाय

    ऑफिस टेंशन से छुटकारा: डेस्क पर करें ये 3 आसान वास्तु उपाय

    आज के भागदौड़ भरी जिंदगी में ऑफिस का तनाव और काम का दबाव एक ऐसी सच्चाई बन गया है, जिससे लगभग हर कामकाजी व्यक्ति जूझ रहा है। कई बार हम दिन-रात मेहनत करते हैं, फिर भी परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं मिलते। कभी काम का बोझ पहाड़ जैसा लगने लगता है, तो कभी बॉस के साथ बिना वजह की अनबन मानसिक शांति छीन लेती है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, हम जिस स्थान पर बैठकर अपने दिन के 8 से 9 घंटे बिताते हैं, वहां की ऊर्जा सीधे तौर पर हमारे सोचने की क्षमता और प्रदर्शन को प्रभावित करती है। एक अव्यवस्थित डेस्क या गलत दिशा में बैठना न केवल आपके काम में बाधा डालता है, बल्कि नकारात्मकता को भी आमंत्रित करता है। यदि आप भी ऑफिस में भारीपन महसूस करते हैं, तो अपनी डेस्क पर ये 3 छोटे वास्तु बदलाव करें, जो आपके करियर की दिशा बदल सकते हैं।

    बैठने की दिशा और डेस्क की स्थिति
    वास्तु में दिशाओं का बहुत महत्व है। यदि आपकी पीठ ऑफिस के मुख्य दरवाजे की ओर है, तो यह तनाव और असुरक्षा की भावना पैदा करता है। हमेशा कोशिश करें कि काम करते समय आपका चेहरा उत्तर (North) या पूर्व (East) दिशा की ओर हो। उत्तर दिशा धन और अवसरों की मानी जाती है, जबकि पूर्व दिशा नई ऊर्जा और रचनात्मकता लाती है। अपनी पीठ के पीछे एक मजबूत दीवार रखें, यह आपको मानसिक सहारा और आत्मविश्वास प्रदान करती है।

    डेस्क पर बांस का पौधा या क्रिस्टल रखे
    आपकी डेस्क पर रखी चीजें आपकी मानसिक स्थिति को प्रभावित करती हैं। एक बिखरी हुई और अव्यवस्थित मेज मानसिक भ्रम पैदा करती है। अपनी डेस्क के उत्तर-पूर्वी कोने में एक छोटा Lucky Bamboo का पौधा रखें। यह न केवल हवा को शुद्ध करता है, बल्कि आपके आस-पास की नकारात्मक ऊर्जा को भी सोख लेता है। यदि बॉस के साथ रिश्ते तनावपूर्ण हैं, तो डेस्क पर एक क्रिस्टल ग्लोब या क्विंट्ज़ क्रिस्टल रखें। यह Communication में सुधार लाता है और बिगड़े हुए रिश्तों को संभालने में मदद करता है।

    गैजेट्स और फाइलों का सही प्रबंधन
    अक्सर हम अपनी डेस्क पर इलेक्ट्रॉनिक सामान और पुरानी फाइलों का ढेर लगा लेते हैं, जिससे ऊर्जा का प्रवाह रुक जाता है। वास्तु के अनुसार, कंप्यूटर, लैपटॉप या मोबाइल जैसे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स को डेस्क के दक्षिण-पूर्व (South-East) कोने में रखना चाहिए। यह अग्नि की दिशा है जो आपको ऊर्जावान बनाए रखती है। काम पूरा होने के बाद अपनी मेज को साफ करना न भूलें। रुकी हुई फाइलें और बंद पड़ी घड़ियां या पेन तरक्की में बाधा बनते हैं। अपनी टेबल के Central Space हमेशा खाली रखें ताकि विचारों का आदान-प्रदान सुगम हो सके।

  • उप मुख्यमंत्री ने बम्हनी में लोधी समाज के सामुदायिक भवन का किया भूमिपूजन

    उप मुख्यमंत्री ने बम्हनी में लोधी समाज के सामुदायिक भवन का किया भूमिपूजन

    रायपुर.

    बम्हनी में शुरू होगा अटल डिजिटल सुविधा केंद्र, बुजुर्गों-महिलाओं को मिलेगी बड़ी राहत

    उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने आज कबीरधाम जिले के ग्राम बम्हनी में लोधी समाज के लिए 20 लाख रुपये की लागत से बनने वाले सामुदायिक भवन निर्माण कार्य का भूमि पूजन किया। लंबे समय से समाज के लोगों को अपने सामाजिक और पारिवारिक कार्यक्रमों के लिए उचित स्थान की आवश्यकता थी, जिसे उप मुख्यमंत्री की पहल से अब यह भवन पूरा होगा।

    बम्हनी में शुरू होगा अटल डिजिटल सुविधा केंद्र, बुजुर्गों-महिलाओं को मिलेगी बड़ी राहत
          
    इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने उपस्थित लोधी समाज के लोगों को बधाई देते हुए कहा कि इस भवन का सभी लोगों के काम के लिए मिल-जुलकर उपयोग करें। यह भवन समाज के कार्यक्रम, बैठक, शादी-विवाह और अन्य आयोजनों के लिए बहुत काम आएगा। इससे पूरे गांव के लोगों को भी सुविधा मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार गांवों में जरूरी सुविधाएं बढ़ाने और विकास के लिए लगातार काम कर रही है। इस दौरान उन्होंने ग्राम बम्हनी में अटल डिजिटल सुविधा केंद्र प्रारंभ करने के निर्देश दिए।

    उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि नई सरकार बनने के बाद प्रदेश में 18 लाख आवास स्वीकृत किए गए हैं। केवल ग्राम बम्हनी में ही पिछले दो वर्षों में 113 आवास स्वीकृत हुए, जिनमें से 84 आवास का निर्माण पूरा हो चुका है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की बैठकों और गतिविधियों के लिए गांव में महतारी सदन का निर्माण कराया गया है। प्रदेश भर में ऐसे महतारी सदनों का निर्माण ग्राम पंचायतों में किया जा रहा है, ताकि महिलाओं को एक सुरक्षित और सुविधाजनक स्थान मिल सके।
        
    उप मुख्यमंत्री ने बताया कि ग्राम पंचायतों में अटल डिजिटल सुविधा केंद्र भी शुरू किए जा रहे हैं, जहां महिलाओं, बुजुर्गों और दिव्यांगजनों को गांव में ही पैसा निकालने सहित अन्य सुविधाएं मिल रही हैं। उन्होंने बम्हनी में भी एक सप्ताह के भीतर यह केंद्र शुरू करने के निर्देश सीईओ जनपद पंचायत को दिए। इस दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष  ईश्वरी साहू, जिला पंचायत सदस्य डॉ वीरेन्द्र साहू, युवा प्रदेशाध्यक्ष लोधी समाज  सुरेश सिंगौर, जिला लोधी समाज अध्यक्ष  संतोष कौशिक, सहित अन्य जनप्रतिनिधि और समाज के पदाधिकारी उपस्थित रहे।

    सहकारिता से युवाओं को रोजगार और गांव को मिलेगा विकास का नया रास्ता– उप मुख्यमंत्री
        
    उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि सहकारिता के माध्यम से आज कई तरह के काम किए जा सकते हैं और इससे युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि कवर्धा क्षेत्र की महिलाएं और पशुपालक गुजरात के बनासकांठा जिले का भ्रमण कर वहां की डेयरी व्यवस्था और सहकारी गतिविधियों को देखकर आए हैं।
        
    उन्होंने यह भी बताया कि वे स्वयं भी वहां की डेयरी संस्थाओं का कार्य देखने गए थे और वहां से कई उपयोगी अनुभव प्राप्त हुए। उन्होंने कहा कि सहकारिता के माध्यम से दुग्ध उत्पादन, पशुपालन, कृषि और अन्य क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर काम किया जा सकता है, जिससे लोगों की आय बढ़ेगी और गांव की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। उन्होंने भ्रमण के दौरान मिले अनुभव को साझा करते हुए कहा कि यदि गांव के लोग मिलकर सहकारी रूप से काम करें तो वे आत्मनिर्भर बन सकते हैं और आगे बढ़ सकते हैं।

  • अयोध्या दर्शन पर नहीं लगेगा कोई शुल्क, केशव प्रसाद मौर्य ने सदन में किया साफ

    अयोध्या दर्शन पर नहीं लगेगा कोई शुल्क, केशव प्रसाद मौर्य ने सदन में किया साफ

    लखनऊ
    उत्तर प्रदेश विधान परिषद में काशी और अयोध्या में सुगम दर्शन शुल्क को लेकर उठे सवालों पर सरकार ने स्पष्ट किया कि श्रीराम मंदिर अयोध्या में सुगम दर्शन के लिए कोई शुल्क निर्धारित नहीं है, जबकि काशी विश्वनाथ मंदिर में शुल्क निर्धारण का अधिकार संबंधित न्यास परिषद के पास है। उप मुख्यमंत्री एवं सदन के नेता केशव प्रसाद मौर्य ने प्रश्नों का उत्तर देते हुए कहा कि वाराणसी स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर का संचालन मंदिर न्यास परिषद द्वारा किया जाता है और सुगम दर्शन शुल्क से जुड़े सभी निर्णय भी वही लेती है। इसके विपरीत राम मंदिर अयोध्या में सुगम दर्शन के लिए कोई शुल्क लागू नहीं है। उन्होंने सदन को अवगत कराया कि जनवरी 2025 से जनवरी 2026 के बीच काशी में सुगम दर्शन के लिए लगभग 10.7 लाख श्रद्धालुओं को दर्शन पर्ची जारी की गई। उन्होंने कहा कि सामान्यत: प्रदेश के मंदिरों में सुगम दर्शन शुल्क लागू करने का निर्णय संबंधित ट्रस्ट या मंदिर प्रबंधन द्वारा लिया जाता है, जबकि राज्य सरकार सुरक्षा, यातायात प्रबंधन और बुनियादी सुविधाओं की निगरानी करती है। उप मुख्यमंत्री ने बताया कि काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर बनने के बाद श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2017 में जहां लगभग 77 लाख श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे थे, वहीं वर्ष 2025 में यह संख्या बढ़कर 17 करोड़ से अधिक हो गई।
    उन्होंने यह भी कहा कि विदेशी श्रद्धालुओं की संख्या में भी इजाफा हुआ है। वर्ष 2014 में लगभग 28 हजार विदेशी श्रद्धालु आए थे, जबकि वर्ष 2024 में यह संख्या करीब 3.99 लाख और वर्ष 2025 में 3.21 लाख रही। मौर्य ने कहा कि काशी, अयोध्या और प्रयागराज सहित प्रदेश के सभी प्रमुख तीर्थ स्थलों पर बढ़ती श्रद्धालु संख्या बेहतर व्यवस्थाओं और सुविधाओं का प्रमाण है। सरकार तीर्थ स्थलों की पवित्रता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी प्रकार की अनियमितता पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देकर राज्य की अर्थव्यवस्था को और सशक्त करना सरकार की प्राथमिकता है।