Author: Admin

  • दो साल में MP की सड़कों से खत्म होंगे आवारा मवेशी, विधानसभा में BJP सरकार का दावा

    दो साल में MP की सड़कों से खत्म होंगे आवारा मवेशी, विधानसभा में BJP सरकार का दावा

     भोपाल

    मध्य प्रदेश सरकार ने भरोसा दिलाया कि दो साल बाद राज्य की सड़कों पर कोई आवारा मवेशी घूमता हुआ नहीं दिखेगा. सरकार का यह भरोसा तब आया जब कुछ कांग्रेसी MLA ने आवारा मवेशियों की वजह से होने वाले सड़क हादसों पर चिंता जताई.

    कांग्रेस MLA अजय सिंह और कैलाश कुशवाहा ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए यह मुद्दा उठाया और कहा कि मध्य प्रदेश में आवारा मवेशियों की समस्या गंभीर हो गई है.

    उन्होंने कहा कि सरकार के  करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद राज्य में लगभग 10 लाख आवारा मवेशी सड़कों पर घूम रहे हैं, जिससे किसानों की फसलों को भारी नुकसान हो रहा है, नेशनल हाईवे और दूसरी सड़कों पर ट्रैफिक में रुकावट आ रही है और हादसों की घटनाएं बढ़ रही हैं.

    सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार की लापरवाही की वजह से इस समस्या को ठीक से हल नहीं किया जा रहा है, जिससे किसानों और दूसरे लोगों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. 

    'जुर्माना और नई नीति से होगा समाधान'

    जवाब देते हुए राज्य के पशुपालन और डेयरी मंत्री लखन पटेल ने कहा कि आवारा पशुओं का मैनेजमेंट ग्रामीण इलाकों में पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग और शहरी इलाकों में शहरी और आवास विकास विभाग की जिम्मेदारी है, और संबंधित विभाग लगातार कार्रवाई कर रहे हैं.

    मंत्री ने कहा कि 2025 में राज्य में शहरी निकायों द्वारा लगभग 78 हजार 153 आवारा पशु पकड़े गए और इन पशुओं के मालिकों पर कुल 25 लाख 58 हजार 753 रुपये का जुर्माना लगाया गया. राज्य में कुल 3 हजार 40 गौशालाएं चल रही हैं, जिनमें मुख्यमंत्री गौ सेवा योजना के तहत 2 हजार 325 गैर-सरकारी संगठनों द्वारा 703 और शहरी निकायों द्वारा 12 शामिल हैं.

    पटेल ने कहा कि लगभग 4.80 लाख आवारा पशुओं को गौशालाओं में ले जाया गया है और उनका मैनेजमेंट एक लगातार चलने वाला प्रोसेस है.

    मंत्री ने सदन को बताया कि राज्य सरकार ने 'मध्य प्रदेश में आत्मनिर्भर गाय आश्रय स्थलों की स्थापना राज्य नीति-2025' को मंजूरी दे दी है. इसका मकसद ऐसी आश्रय इकाइयों को आत्मनिर्भर बनाना और रोजगार के मौके पैदा करना है, साथ ही बेसहारा मवेशियों का बेहतर मैनेजमेंट करना है.

    उन्होंने कहा कि इस नीति के तहत, कम से कम 5000 मवेशियों की क्षमता वाले आत्मनिर्भर गाय आश्रय (कामधेनु निवास) के लिए कम से कम 130 एकड़ रेवेन्यू जमीन दी गई है, जिसमें से 5 एकड़ जमीन का इस्तेमाल कमर्शियल गतिविधियों के लिए किया जा सकता है.

    मंत्री के अनुसार, गाय आश्रय स्थलों में मौजूद मवेशियों के रखरखाव के लिए अनुदान राशि 20 रुपये से बढ़ाकर 40 रुपये प्रति जानवर प्रति दिन कर दी गई है.

    पटेल ने कहा, "अगले दो सालों में जब नई गाय आश्रय स्थल बन जाएंगी और व्यवस्था हो जाएगी, तो बेसहारा मवेशी सड़कों पर नहीं दिखेंगे. मेरा विश्वास कीजिए. दो साल बाद, सड़कों पर एक भी गाय नहीं दिखेगी." 

    विधानसभा स्पीकर की टिप्पणी

    मध्य प्रदेश विधानसभा के स्पीकर नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि गौशालाओं को कमर्शियली आत्मनिर्भर बनाने की जरूरत है, साथ ही गौ रक्षा और सेवा के जरिए उन्हें बढ़ावा देने की भी जरूरत है. उन्होंने कहा कि देश की पहली गौ अभ्यारण्य पहले शाजापुर में बनाई गई थी, लेकिन इस एरिया में अभी और काम करने की ज़रूरत है.

    तोमर ने कहा कि इस समस्या के परमानेंट समाधान के लिए सरकार और सभी स्टेकहोल्डर्स को मिलकर गंभीर कोशिशें करनी होंगी.

  • 17 मार्च को नई‑जनरेशन Renault Duster लॉन्च, जानें क्या खास फीचर्स मिलने वाले हैं

    17 मार्च को नई‑जनरेशन Renault Duster लॉन्च, जानें क्या खास फीचर्स मिलने वाले हैं

    मुंबई 
     कार निर्माता कंपनी Renault India भारतीय बाजार में अपनी सबसे लोकप्रिय एसयूवी रही, Renault Duster को एक बार से लॉन्च करने वाली है. ताजा जानकारी के अनुसार भारत में इस एसयूवी को 17 मार्च, 2026 को उतारा जाएगा, जो अपने थर्ड-जेनरेशन अवतार में होगी. इंडिया-स्पेक Renault Duster को बीती 26 जनवरी, 2026 को पेश किया गया था.

    आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इसकी पिछली जनरेशन की बिक्री साल 2022 में बंद कर दी गई थी, जिसके बाद अब इस मिडसाइज़ SUV की वापसी हो रही है. नई Duster, कंपनी के लिए एक ज़रूरी मॉडल है, जिसके बारे में मैन्युफैक्चरर को उम्मीद है कि यह धीरे-धीरे भारत में बेस्टसेलिंग कारों की लिस्ट में वापस आ जाएगी.

    2026 Renault Duster पावरट्रेन विकल्प
    इंजन की बात करें तो भारत में, Renault Duster दो टर्बो-पेट्रोल इंजन और एक स्ट्रॉन्ग-हाइब्रिड पेट्रोल पावरट्रेन के ऑप्शन के साथ उतारा जाएगा. टर्बो-पेट्रोल इंजन में Renault Kiger में मिलने वाला छोटा 1.0-लीटर टर्बो-पेट्रोल इंजन शामिल है, जो 100hp की पावर देता है. इसके अलावा, इसमें सेगमेंट-बेस्ट 1.3-लीटर टर्बो-पेट्रोल इंजन मिलेगा, जो 163hp की पावर प्रदान करेगा. दोनों इंजन के साथ 6-स्पीड मैनुअल ट्रांसमिशन मिलेगा, लेकिन बड़े इंजन के साथ 6-स्पीड DCT ऑप्शन भी मिलेगा.

    इसके अलावा, साल 2026 की दिवाली के आस-पास एक नया 1.8-लीटर स्ट्रॉन्ग-हाइब्रिड पेट्रोल इंजन लाइनअप में शामिल किया जाएगा, जो 109hp की पावर प्रदान करेगा. यह 49hp इलेक्ट्रिक मोटर और 20hp हाइब्रिड स्टार्टर जनरेटर के साथ काम करता है, जो 1.4kWh (280V) बैटरी से चलता है. कंबाइंड सिस्टम आउटपुट 160hp पावर का है.

    2026 Renault Duster का एक्सटीरियर
    डिजाइन की बात करें तो इंडिया-स्पेसिफिक डस्टर का ओवरऑल लुक तीसरी जेनरेशन के ग्लोबल-स्पेसिफिक मॉडल जैसा ही है, लेकिन Renault ने इंडियन मॉडल में लोकल पसंद के हिसाब से कुछ बदलाव किए हैं. इस कार में एक है रीडिजाइन की गई हेडलाइट्स लगाई है, जिनमें आइब्रो के आकार की LED डे-टाइम रनिंग लैंप (DRLs) मिलती हैं, जो टर्न इंडिकेटर का भी काम करती हैं.

    कार के ग्रिल का डिज़ाइन भी अलग है और इसमें एक बड़ा Duster बैज दिया गया है, जिससे फ्रंट एंड से Renault लोगो को पूरी तरह हटा दिया गया है. इसके अलावा, फ्रंट बंपर में पहली जेनरेशन के मॉडल की तरह उभरा हुआ सिल्वर सराउंड दिया गया है, और बंपर के किनारों पर पिक्सेल के आकार की फॉग लैंप लगाई गई हैं.

    साइड प्रोफाइल की बात करें तो, नई Renault Duster में व्हील आर्च और बॉडी के निचले हिस्से पर रग्ड ब्लैक क्लैडिंग लगाई गई है. पीछे के दरवाज़े के हैंडल C-पिलर पर लगे हैं.

    कंपनी ने इस कार में फंक्शनल ब्लैक रूफ रेल्स दी हैं, जिनकी लोड उठाने की क्षमता 50kg है, साथ ही 18-इंच तक के ब्लैक अलॉय व्हील्स और 212mm का ग्राउंड क्लीयरेंस दिया गया है. इंडिया-स्पेक मॉडल की कुछ खास डिटेल्स में फ्रंट फेंडर्स पर हिमालयन मोटिफ्स और बॉडी क्लैडिंग पर एक पीली पट्टी है, जिस पर ‘आइकॉनिक’ लिखा हुआ है.

    रियर प्रोफाइल की बात करें तो, पीछे ट्राई-एंगुलर टेल-लाइट्स एक LED लाइट बार से जोड़ी गई हैं, जो ग्लोबल-स्पेक मॉडल में नहीं है. कंपनी ने नई Renault Duster में रूफ-माउंटेड स्पॉइलर भी दिया है, और लाइसेंस प्लेट ब्रैकेट को एक यूनिक टेक्सचर्ड फिनिश दिया गया है.

    2026 Renault Duster का इंटीरियर
    एक्सटीरियर की तरह ही, कंपनी ने कार के अंदर भी भारतीय ग्राहकों की पसंद का ख्याल रखा है और इसे भी यूरोपियन-स्पेक मॉडल से काफी अलग बनाया है. इंडिया-स्पेक Renault Duster में पूरी तरह से यूनिक डैशबोर्ड मिलता है, जिसमें डुअल-स्क्रीन सेटअप, प्रीमियम दिखने वाले ट्रिम इंसर्ट और सॉफ्ट-टच मटीरियल इस्तेमाल किया गया है.

    इसमें सिल्वर ट्रिम्स और कंट्रास्ट ग्रीन स्टिचिंग का भरपूर इस्तेमाल किया गया है, जो केबिन को और भी आकर्षक बनाते हैं. सबसे ज़रूरी बात, इसके इंटीरियर में डिजिटल और फिजिकल कंट्रोल्स के बीच अच्छा बैलेंस रखा गया है, जिसमें ज़रूरी गाड़ी के फंक्शन्स के लिए सेंटर कंसोल पर बटन्स का एक सेट है.

    2026 Renault Duster के फीचर्स
    इसमें मिलने वाले फीचर्स की बात करें तो नई Renault Duster में वायरलेस एंड्रॉयड ऑटो और Apple CarPlay के साथ 10.1-इंच का टचस्क्रीन, 10.25-इंच का डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर, पैनोरमिक सनरूफ, वायरलेस फोन चार्जर और डुअल-ज़ोन क्लाइमेट कंट्रोल दिया गया है. इसमें पावर्ड टेलगेट और 6-वे पावर्ड और वेंटिलेटेड फ्रंट सीट्स भी दी गई हैं.

    2026 Renault Duster के सेफ्टी फीचर्स
    कार में सेफ्टी फीचर्स की भी भरमार दी गई है. कार में छह एयरबैग (स्टैंडर्ड), एक 360-डिग्री कैमरा, आगे और पीछे पार्किंग सेंसर, एक टायर-प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम (TPMS), लेवल-2 ADAS, इलेक्ट्रॉनिक पार्किंग ब्रेक और चारों व्हील्स पर डिस्क ब्रेक लगाए गए हैं.

    खास बात यह भी है कि Renault Duster भारत में पहली Renault कार है, जिसमें ADAS सूट मिलता है. Renault ने जानकारी दी कि वह नई Duster के साथ पूरे 5-स्टार क्रैश सेफ्टी रेटिंग हासिल करने का लक्ष्य रखेगी और क्लास में सबसे अच्छी 7-साल/1,50,000 किमी की स्टैंडर्ड वारंटी देगी.

  • भोपाल मंडल से होली पर चार जोड़ी स्पेशल ट्रेनें चलेंगी, यात्रियों के लिए जानकारी जरूरी

    भोपाल मंडल से होली पर चार जोड़ी स्पेशल ट्रेनें चलेंगी, यात्रियों के लिए जानकारी जरूरी

    भोपाल
     मध्यप्रदेश के रहवासियों के अच्छी खबर है। होली त्यौहार पर रेल में यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए भोपाल रेल मंडल से चार जोड़ी स्पेशल ट्रेनें चलेंगी। रीवा, भोपाल और दानापुर के लिए स्पेशल ट्रेनें चलेंगी। रेलवे के इस फैसले से यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।

    रीवा- रानी कमलापति रेलवे स्टेशन सुपरफास्ट स्पेशल चलेगी। गाड़ी संख्या (02192/02191) 28 फरवरी 2026 को एक-एक ट्रिप चलेगी।

    गाड़ी संख्या 02186/02185 नंबर की ट्रेन 2 और 3 मार्च 2026 को दो-दो ट्रिप संचालित होगी। भोपाल-रीवा स्पेशल (01704/01703) 5 मार्च 2026 को एक ट्रिप करेगी।

    रानी कमलापति-दानापुर स्पेशल (01667/01668) 27 फरवरी व 2 मार्च को चलेगी। रानी कमलापति-दानापुर वापसी में 28 फरवरी और 3 मार्च को चलेगी।

    ये स्पेशल ट्रेनें चलेंगी

        गाड़ी संख्या 02192/02191 रीवा-रानी कमलपति-रीवा सुपरफास्ट स्पेशल ट्रेन 1-1 फेरा लगाएगी। गाड़ी संख्या 02192 रीवा से रानी कमलापति स्पेशल ट्रेन 28 फरवरी को रीवा से दोपहर 12.30 बजे प्रस्थान कर उसी रात में 9.15 बजे रानी कमलापति स्टेशन पहुंचेगी।

        इसी प्रकार गाड़ी संख्या 02191 रानी कमलापति से रीवा स्पेशल ट्रेन 28 फरवरी को रानी कमलापति स्टेशन से रात 10.15 बजे प्रस्थान कर अगले दिन सुबह 7: 30 बजे रीवा स्टेशन पहुंचेगी।

        गाड़ी संख्या 02186 रीवा से रानी कमलापति स्पेशल ट्रेन 2 एवं 3 मार्च को रीवा से दोपहर 12.30 बजे प्रस्थान कर उसी रात में 9.15 बजे रानी कमलापति स्टेशन पहुंचेगी।

        इसी प्रकार गाड़ी संख्या 02185 रानी कमलापति से रीवा स्पेशल ट्रेन 2-3 मार्च को रानी कमलापति स्टेशन से रात 10.15 बजे प्रस्थान कर अगले दिन सुबह 7.30 बजे रीवा स्टेशन पहुंचेगी।

        गाड़ी संख्या 01704 भोपाल से रीवा स्पेशल ट्रेन 5 मार्च को भोपाल से सुबह 10.30 बजे प्रस्थान कर उसी दिन रात में 8.45 बजे रीवा स्टेशन पहुंचेगी।

        इसी प्रकार गाड़ी 01703 रीवा से भोपाल स्पेशल ट्रेन 5 मार्च को रीवा स्टेशन से रात 10.20 बजे प्रस्थान कर दूसरे दिन सुबह 9.05 बजे भोपाल स्टेशन पहुंचेगी।

        गाड़ी संख्या 01667 रानी कमलापति-दानापुर स्पेशल ट्रेन 27 फरवरी एवं 2 मार्च को रानी कमलापति से दोपहर 2.25 बजे प्रस्थान कर दूसरे दिन दूसरे दिन सुबह 8.45 बजे दानापुर स्टेशन पहुंचेगी।

        इसी प्रकार गाड़ी संख्या 01668 दानापुर-रानी कमलापति स्पेशल ट्रेन 28 फरवरी एवं 3 मार्च को दानापुर स्टेशन से सुबह 11.15 बजे प्रस्थान कर अगले दिन सुबह 8.55 बजे रानी कमलापति स्टेशन पहुंचेगी।

    यात्री इन ट्रेनों का आरक्षण किसी भी कंप्यूटरीकृत केंद्र या इंडियन रेलवे केटरिंग एंड ट्यूरिज्म कोर्पोरेशन (IRCTC) की वेबसाइट के माध्यम से कर सकते हैं। ठहराव संबंधी अधिक जानकारी स्टेशन या रेल मदद 139 से प्राप्त की जा सकती है।

     

  • बांधवगढ़ में ढाई महीने में 8 बाघों की मौत, आधे मामलों का पैटर्न एक जैसा, हाईकोर्ट में उठा शिकार का सवाल

    बांधवगढ़ में ढाई महीने में 8 बाघों की मौत, आधे मामलों का पैटर्न एक जैसा, हाईकोर्ट में उठा शिकार का सवाल

    जबलपुर
    मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर की ओर से एक स्टेटस रिपोर्ट जमा की गई. इस रिपोर्ट ने राज्य के वन्यजीव संरक्षण के दावों की पोल खोल दी है. रिपोर्ट के अनुसार, 21 नवंबर 2025 से 2 फरवरी 2026 के बीच रिजर्व और उसके आसपास के इलाकों में कुल 8 बाघों की मृत्यु हुई.

    रिपोर्ट में कहा गया है कि बाघ अभ्यारण्य के भीतर चारों बाघों की मौत का कारण प्राकृतिक था, जबकि शेष चार बाघों की मौत सामान्य वन क्षेत्र में बिजली के झटके से हुई. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सभी बाघों के शव पूरी तरह से सुरक्षित थे.

    इस रिपोर्ट में बाघों की मौतों को दो हिस्सों में बांटा गया है. इसमें बताया गया है कि टाइगर रिजर्व के अंदर 4 मौतें हुई हैं. यहां हुईं सभी मौतें 'प्राकृतिक' बताई गई हैं. इनमें से 2 बाघ आपसी लड़ाई में मारे गए, एक की बीमारी से मौत हुई और एक कुएं में डूब गया. जबकि 4 मौतें जनरल फॉरेस्ट एरिया में हुईं. रिजर्व के बाहर सामान्य वन क्षेत्र में हुई ये सभी चार मौतें करंट लगने के कारण हुईं.

    'संदिग्ध हालात' पर सवाल
    वाइल्डलाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे की ओर से दायर याचिका में राज्य सरकार और वन विभाग पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं. याचिका के अनुसार, 2025 में मध्य प्रदेश में 54 बाघों की मौत हुई, जो प्रोजेक्ट टाइगर शुरू होने के बाद से एक साल में सबसे बड़ा आंकड़ा है. आरोप है कि शिकारी बिजली के तारों का खुलेआम इस्तेमाल कर रहे हैं और विभाग का सर्विलांस सिस्टम पूरी तरह फेल हो चुका है. याचिकाकर्ता का दावा है कि अधिकारी अक्सर संदिग्ध मौतों को Territorial fight बताकर पल्ला झाड़ लेते है. 

    बिजली विभाग को चेतावनी
    स्टेटस रिपोर्ट में कहा गया है कि वन विभाग ने बिजली विभाग को बार-बार पत्र लिखे हैं ताकि संवेदनशील इलाकों में बिजली की लाइनों को मजबूत किया जा सके और वाइल्डलाइफ स्टैंडर्ड का पालन हो, ताकि करंट लगने की घटनाओं को रोका जा सके.

    मध्य प्रदेश में बाघों की स्थिति 
    कुल बाघ (MP): 785
    भारत में कुल बाघ: 3,167
    2025 में मौतें: 54 (याचिका के अनुसार)
    जनवरी 2026 (प्रथम सप्ताह): 6 बाघों की मौत

  • महाकाल के आंगन से शुरू होगा रंगोत्सव, संध्या आरती के बाद प्रज्वलित होगी आस्था की अग्नि

    महाकाल के आंगन से शुरू होगा रंगोत्सव, संध्या आरती के बाद प्रज्वलित होगी आस्था की अग्नि

    उज्जैन
     धर्मनगरी उज्जैन में रंगोत्सव की शुरुआत इस बार भी परंपरा और आध्यात्म के संग होगी। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में 02 मार्च को संध्या आरती के बाद प्राचीन परंपरा अनुसार होलिका दहन किया जाएगा। मान्यता है कि विश्व में सबसे पहले बाबा महाकाल के आंगन में ही होलिका प्रज्वलित होती है और यहीं से रंगों के पर्व का शुभारंभ माना जाता है ।
    संध्या आरती के दौरान सबसे पहले भगवान महाकाल को हर्बल गुलाल अर्पित किया जाएगा और परंपरानुसार शक्कर की माला पहनाई जाएगी। इसके बाद मंदिर प्रांगण में ओंकारेश्वर मंदिर के सामने विधिवत पूजन-अर्चन कर होलिका दहन होगा।

    03 मार्च को धुलेंडी पर्व पर तड़के 4 बजे होने वाली भस्म आरती में सबसे पहले मंदिर के पुजारी और पुरोहित बाबा महाकाल को हर्बल गुलाल अर्पित करेंगे। भक्ति का यह अद्भुत संगम श्रद्धालुओं के लिए अलौकिक अनुभव होगा।

    इसी क्रम में 04 मार्च 2026 से चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से अश्विन पूर्णिमा तक आरतीयों के समय में परंपरानुसार परिवर्तन लागू होगा। नई समय-सारिणी के अनुसार, भस्म आरती प्रातः 4 से 6 बजे तक, दद्योदक आरती 7 से 7:45 बजे तक, भोग आरती 10 से 10:45 बजे तक, संध्या पूजन 5 से 5:45 बजे तक, संध्या आरती 7 से 7:45 बजे तक और शयन आरती रात्रि 10:30 से 11 बजे तक संपन्न होगी।

  • सरकार का बड़ा ऐलान: 1 अप्रैल से पूरे देश में E20 एथेनॉल ब्लेंड पेट्रोल की बिक्री

    सरकार का बड़ा ऐलान: 1 अप्रैल से पूरे देश में E20 एथेनॉल ब्लेंड पेट्रोल की बिक्री

     नई दिल्ली

    केंद्र सरकार ने पेट्रोल को लेकर एक अहम फैसला लिया है, जिसका सीधा असर आम लोगों और ऑटोमोबाइल सेक्टर पर पड़ेगा. केंद्र सरकार ने तेल बेचने वाली कंपनियों को साफ निर्देश दिया है कि 1 अप्रैल 2026 से देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एथेनॉल ब्लेंडेड (E20)  पेट्रोल बेचा जाए. इस पेट्रोल में अधिकतम 20 प्रतिशत इथेनॉल होगा और इसका न्यूनतम रिसर्च ऑक्टेन नंबर यानी RON 95 होना जरूरी होगा. 

    यह आदेश केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की ओर से जारी किया गया है. 17 फरवरी को जारी नोटिफिकेशन में मंत्रालय ने कहा है कि तेल कंपनियां वही पेट्रोल सप्लाई करें जो E20 मानकों पर खरा उतरता हो. यह पेट्रोल ब्यूरो ऑफ इंडिया स्टैंडर्ड (BIS) के तय मानकों के अनुसार होना चाहिए और पूरे देश में एक समान क्वॉलिटी के साथ उपलब्ध कराया जाना होगा. हालांकि कुछ खास हालात में सीमित समय के लिए कुछ इलाकों को छूट दी जा सकती है.

    क्या है E20 फ्यूल

    E20 फ्यूल एक ऐसा पेट्रोल मिश्रण है जिसमें 20 फीसदी एथेनॉल और 80 फीसदी पारंपरिक पेट्रोल होता है. इथेनॉल एक बायो-फ्यूल है जो मुख्य रूप से गन्ने, मक्का या अन्य फसलों से बनाया जाता है, और इसे फॉसिल फ्यूल पर निर्भरता घटाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. सरकार का उद्देश्य E20 को बढ़ावा देकर प्रदूषण कम करना और किसानों को फसल से अतिरिक्त आमदनी देना है. भारत ने जून 2022 में ही 10 प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य तय समय से पहले हासिल कर लिया था, जिसके बाद सरकार ने 20 प्रतिशत का लक्ष्य 2025-26 तक तय किया.

    RON 95 क्यों है अहम

    रिसर्च ऑक्टेन नंबर यानी RON यह बताता है कि पेट्रोल इंजन में नॉकिंग के अगेंस्ट कितना मजबूत है. नॉकिंग से इंजन को नुकसान और पावर लॉस हो सकता है. ज्यादा RON वाला पेट्रोल प्रेशन में भी स्टेबल रहता है. इथेनॉल का ऑक्टेन रेटिंग करीब 108 होता है, इसलिए जब इसे पेट्रोल में मिलाया जाता है तो फ्यूल क्वॉलिटी और गुणवत्ता बेहतर हो जाती है. RON 95 का नियम यह तय करेगा कि इंजन सेफ रहे और बेहतर परफॉर्मेंस दे.

    तेल मंत्रालय के अनुसार इथेनॉल ब्लेंडिंग की वजह से 2014-15 से अब तक भारत को 1.40 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है. कच्चे तेल के आयात में कमी आई है.  नया नियम लागू होने के बाद यह फायदा और बढ़ने की उम्मीद है. साथ ही प्रदूषण घटेगा और सस्टेनेबल मोबिलिटी की दिशा में भारत एक और मजबूत कदम आगे बढ़ाएगा.
    वाहनों पर क्या पड़ेगा असर

    ऑटो इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि 2023 के बाद के बने ज्यादातर वाहन E20 पेट्रोल के लिए तैयार हैं. इन गाड़ियों में किसी बड़े बदलाव की जरूरत नहीं पड़ेगी. हालांकि पुराने वाहनों के कुछ यूजर्स का कहना है कि E20 पेट्रोल से माइलेज में 3 से 7 प्रतिशत तक की कमी आई है. इसके अलावा कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर E20 फ्यूल के इस्तेमाल के बाद वाहनों में समय से पहले पार्ट्स डैमेज होने की भी शिकायत की है. जिससे व्हीकल मेंटनेंस बढ़ा है. पुराने वाहनों के इंजन और फ्यूल सिस्टम इस हाई इथेनॉल ब्लेंडिंग के लिए डिज़ाइन नहीं किए गए है, जिसके कारण कई बार माइलेज घटने और स्टार्टिंग को लेकर  दिक्कतें सामने आती रही हैं.

    इस बीच कुछ वाहन निर्माताओं ने पुराने वाहनों के लिए E20 कन्वर्जन किट को बाजार में उतारा है. ताकि एथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल से वाहन के इंजन कंपोनेंट को होने वाले संभावित नुकसान को कम किया जा सके. कंपनियों का दावा है कि, ये कन्वर्जन किट न केवल वाहनों के परफॉर्मेंस को बेहतर बनाएगा बल्कि माइलेज को भी कम होने से रोकेगा. रॉयल एनफील्ड ने हाल ही में बुलेट, क्लासिक और थंडरबर्ड जैसी पुरानी BS3 और BS4 मॉडल्स के लिए ये किट लॉन्च किया है. 

  • इज़राइल में PM मोदी ने देखा Future Tech, AI और हेल्थ टेक में भारत में क्या होगा बदलाव

    इज़राइल में PM मोदी ने देखा Future Tech, AI और हेल्थ टेक में भारत में क्या होगा बदलाव

    नई दिल्ली
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन दिनों इजराइल के दौरे पर हैं. यरुशलम में उन्होंने एक टेक्नोलॉजी प्रदर्शनी का दौरा किया. इस प्रदर्शनी में इजराइल की कई स्टार्टअप और टेक कंपनियों ने अपने नए प्रोडक्ट और रिसर्च दिखाए.

    यहां AI, हेल्थ-टेक, साइबर सिक्योरिटी, क्वांटम कंप्यूटिंग, एग्री-टेक और वॉटर मैनेजमेंट से जुड़ी टेक्नोलॉजी रखी गई थी. मोदी ने अलग-अलग स्टॉल पर जाकर डेमो देखे और कंपनियों के फाउंडर्स से बातचीत की.

    इजराइल लंबे समय से टेक और स्टार्टअप के लिए जाना जाता है. साइबर सिक्योरिटी और डिफेंस टेक में इजराइल की कंपनियों की पकड़ मानी जाती है. भारत पहले से इन सेक्टर में इजराइल के साथ काम कर रहा है.

    ऐसे में इस तरह की प्रदर्शनी में जाना एक संकेत है कि भारत नई टेक्नोलॉजी को समझना और अपनाना चाहता है. खासकर AI और हेल्थ-टेक जैसे सेक्टर भारत के लिए आने वाले सालों में अहम होने वाले हैं.

    पीएम मोदी ने वहां मौजूद कंपनियों से कहा कि वे भारत में अपने सॉल्यूशन लाने पर विचार करें. भारत में डिजिटल हेल्थ, स्मार्ट एग्रीकल्चर और साइबर सिक्योरिटी की जरूरत तेजी से बढ़ रही है.

    गांवों में हेल्थ सर्विस पहुंचाने के लिए AI टूल्स और रिमोट मॉनिटरिंग जैसे समाधान काम आ सकते हैं. खेती में डेटा और सेंसर्स के जरिए पानी और खाद का सही इस्तेमाल भी एक बड़ा मुद्दा है. प्रदर्शनी में दिखाए गए कई प्रोडक्ट इन समस्याओं से जुड़े थे.

    हालांकि इस दौरे के दौरान अब तक AI और साइबर सिक्योरिटी से जुड़ा कोई बड़ा करार या डील सामने नहीं आई है. अभी तक सिर्फ बातचीत और संभावनाओं की बात हुई है. सरकारी बयान में भी किसी MoU या एग्रीमेंट का जिक्र नहीं है.

    इसका मतलब यह है कि फिलहाल यह एक शुरुआती कदम है. असली टेस्ट तब होगा जब इन कंपनियों के साथ भारत में पायलट प्रोजेक्ट शुरू होंगे या कोई ठोस पार्टनरशिप सामने आएगी. पहले भी कई टेक डेमो दिखाए गए हैं, लेकिन वे जमीन पर उतरने में वक्त लेते हैं या कभी-कभी फाइलों में ही अटक जाते हैं.

    गौरतलब है कि भारत और इजराइल के रिश्ते बीते कुछ सालों में मजबूत हुए हैं. डिफेंस और टेक्नोलॉजी में दोनों देशों का सहयोग बढ़ा है. सोशल मीडिया पर पीएम मोदी की पोस्ट से यह साफ है कि वे इस दौरे को इनोवेशन और युवाओं से जोड़कर दिखा रहे हैं.

    उन्होंने इजराइल के युवाओं के काम की तारीफ की और कहा कि इस तरह की टेक्नोलॉजी भविष्य की जरूरतों से जुड़ी है. लेकिन जमीन पर सवाल यह है कि क्या भारत इन टेक्नोलॉजी को अपने सिस्टम में तेजी से अपना पाएगा. भारत में रेगुलेशन, लोकल मैन्युफैक्चरिंग और डेटा पॉलिसी जैसे मुद्दे अक्सर किसी विदेशी टेक को अपनाने में देरी करते हैं.

    कुल मिलाकर यह दौरा एक संकेत देता है कि भारत टेक्नोलॉजी के मोर्चे पर इजराइल जैसे देशों से सीखना चाहता है. अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि इससे तुरंत कोई बड़ा बदलाव आएगा. फिलहाल यह एक शोकेस विजिट है. असली कहानी तब बनेगी जब इन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल भारत के अस्पतालों, खेतों और डिजिटल सिस्टम में दिखने लगेगा. तभी यह दौरा केवल तस्वीरों और बयानों से आगे बढ़कर असली असर दिखा पाएगा.

  • ऑपरेशन सिंदूर में आई कमी पर तेजस ने दिखाई F-35 जैसी ताकत, चीनी PL-15 पल में बेकार

    ऑपरेशन सिंदूर में आई कमी पर तेजस ने दिखाई F-35 जैसी ताकत, चीनी PL-15 पल में बेकार

    नई दिल्ली

    बीते साल ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने पाकिस्तान को एक से बढ़कर एक गहरे जख्म दिए थे. लेकिन, 72 घंटे तक चली इस जंग में भारत को भी काफी कुछ सीखने को मिला था. भारत को अपनी कमी को परखने का मौका मिला था. इस जंग में पाकिस्तान ने जिस तरह से भारत के खिलाफ चीनी हथियारों का इस्तेमाल किया, उससे चिंता बढ़नी लाजिमी है. उसने चीनी हथियारों से भारत के सैन्य ठिकानों पर हमले की कोशिश की. हालांकि भारत के बेहद मजबूत सुरक्षा घेरे ने इन तमाम हथियारों को आसमान में ही तबाह कर दिया था.

    इस जंग से भारत ने बड़ी सीख ली. सबसे बड़ी सीख यह थी कि भविष्य में पाकिस्तान और चीन को अलग-अलग कर नहीं देखा जाना चाहिए. इस वक्त पाकिस्तान चीन का पूरी तरह पिछलग्गू देश बन चुका है. चीन के लिए भी पाकिस्तान एक बड़ा बाजार बनकर उभरा है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने भारतीय इलाके पर चीनी बीवीआर मिसाइलें पीएल-15 का इस्तेमाल किया था. भारतीय क्षेत्र में इस मिसाइल के मलबे मिले थे. पीएल-15 बेहद आधुनिक बीवीआर मिसाइलें हैं, जिनकी रेंज करीब 250 किमी है. इन मिसाइलों को फाइटर जेट्स से दागा जाता है और ये नजर आने से पहले ही लक्ष्य को भेद देती है. सैन्य एक्सपर्ट मानते हैं कि पाकिस्तान ने चीनी के 4.5 जेन के फाइटर जेट जे-17 से इनको फायर किया होगा.
    भारत की बीवीआर मिसाइलें

    खैर, अब इस बात को नहीं विराम देते हैं. दरअसल, आज की कहानी इसी पीएल-15 मिसाइलों से जुड़ी हैं. भारत के पास पीएल-15 के मुकाबले के लिए देसी अस्त्र मार्क-1 मिसाइलें हैं. ये बीवीआर श्रेणी की शानदार मिसाइलें हैं लेकिन, मौजूदा वक्त में इनकी रेंज थोड़ी कम है. अस्त्र मार्क-1 की रेंज करीब 160 किमी है. इसके साथ ही डीआरडीओ इसको एईएसए रडार और डूअल पल्स मोटर टेक्नोलॉजी से लैस कर रहा है. साथ ही भारत अस्त्र मार्क-2 पर भी काम कर रहा है. इसके अलावा अस्त्र मार्क-3 पर भी काम चल रहा है. लेकिन, पीएम-15 के मुकाबले अभी भी ये तकनीकी रूप से थोड़ा पीछे हैं. भारत फ्रांस से खरीदे गए राफेल विमानों में मेटियोर मिसाइलों का इस्तेमाल करता है. ये भी बीवीआर मिसाइलें हैं. इनमें रैमजेट इंजल लगे होते हैं, जिससे ये मिसाइले बेहद हाईस्पीड से वार करती हैं. बावजूद इसके चीन के पीएल-15 और उसके भविष्य के और एडवांस वैरिएंट को तकनीकी रूप से थोड़ी बढ़त हासिल है. ऐसे में भारत अपने पुराने और भरोसेमंद दोस्त रूस के साथ भी आर-37एम बीवीआर मिसाइलों को लेकर बातचीत कर रहा है. ये मिसाइलें 300 किमी तक मार कर सकती हैं. ये वार-टेस्टेड मिसाइलें हैं और ये हर एक मामले में चीनी पीएल-15 और उसके एडवांस वर्जन पीएल-17 को टक्कर देने में सक्षम हैं.
    तेजस भारत द्वारा निर्मित एक बेहद हल्का 4.5 जेन फाइटर जेट है.

    इजरायली स्काई स्टिंग मिसाइलें

    लेकिन, इतना सब होने के बावजूद भारत किसी एक पर निर्भर नहीं रहना चाहता. भारत के पास अपना देसी बीवीआर अस्त्र सीरीज की मिसाइलें हैं. उसके पास राफेल के लिए मेटियोर मिसाइलें है. रूसी आर-37एम को लेकर बातचीत चल रही है. लेकिन, वह एक और सिस्टम की तलाश में है जो और भी एडवांस हो. यह तलाश इजरायली बीवीआर मिसाइल के साथ पूरी होती है. इजरायल के ये बीवीआर मिसाइलें एआई इनेबल्ड हैं. यह 6th जेन की मिसाइलें हैं. यानी दुनिया में अभी इसके टक्कर की बीवीआर मिसाइलें नहीं हैं. ये बेहद हल्क और लंबी दूरी तक वार करने में सक्षम हैं. भारत इन मिसाइलों को अपने देसी हल्के तेजस फाइटर जेट्स में लगाना चाहता है. इसका नाम स्काई स्टिंग है. इसको इजरायल की सरकारी कंपनी राफेल एडवांस डिफेंस सिस्टम्स (Rafael Advanced Defense Systems) डेवलप कर रही है. अगर यह यह डील हो जाती है तो भारत के हल्के तेजस विमान भी बेहद घातक बन जाएंगे.

    राफेल एडवांस सिस्टम ने इस स्काई स्टिंग को कुछ इस तरह से डिजाइन किया है जिससे कि वह किसी भी पश्चिमी फाइटर जेट्स के साथ आसानी से लिंक किया जा सके. इसमें अमेरिका की सबसे एडवांस फिफ्थ जेन फाइटर जेट एफ-35 भी शामिल है. हालांकि एफ-35 में इस मिसाइल को इंटीग्रेट करने के लिए जेट की निर्माता कंपनी लॉकहीड मार्टिन से अनुमति लेनी होगी. फिलहाल के लिए इसको भारतीय फाइटर जेट तेजस और सुखोई के साथ इंटीग्रेट करने की बाचतीच चल रही है.

  • RSS की सबसे पावरफुल बैठक में पहली बार शामिल होंगे Nitin Naveen, BJP में बड़े बदलाव की तैयारी

    RSS की सबसे पावरफुल बैठक में पहली बार शामिल होंगे Nitin Naveen, BJP में बड़े बदलाव की तैयारी

    नई दिल्ली

    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था 'अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा' की महत्वपूर्ण बैठक अगले महीने हरियाणा के समालखा में आयोजित होने जा रही है। इस बैठक में भारतीय जनता पार्टी के नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन पहली बार शिरकत करेंगे। संघ के शताब्दी वर्ष और आगामी राजनीतिक परिदृश्य को देखते हुए इस तीन दिवसीय समागम को बेहद अहम माना जा रहा है।

    जनवरी 2026 में भाजपा की कमान संभालने के बाद नितिन नवीन का यह पहला आधिकारिक संघ दौरा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस बैठक से पहले भाजपा के संगठनात्मक ढांचे में कुछ बड़े फेरबदल हो सकते हैं। माना जा रहा है कि समालखा बैठक में भाजपा के प्रतिनिधि मंडल में कई नए चेहरे देखने को मिल सकते हैं। यह बदलाव आगामी चुनावों और संगठन को नई ऊर्जा देने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

    सूत्रों के अनुसार, समालखा बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु संघ के शताब्दी वर्ष (1925-2025) से संबंधित कार्यक्रमों की समीक्षा करना है। देश भर में चलाए गए विभिन्न अभियानों, गृह-संपर्क और शताब्दी निमित्त आयोजनों से प्राप्त अनुभवों को यहां साझा किया जाएगा। संघ नेतृत्व यह देखेगा कि शताब्दी वर्ष के लक्ष्यों को किस हद तक हासिल किया गया है और आम जनमानस के बीच संघ की पहुंच कितनी बढ़ी है।

    प्रतिनिधि सभा की इस बैठक में वर्ष 2025-26 के दौरान किए गए कार्यों का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया जाएगा। इसके साथ ही, आगामी वर्ष के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों और कार्ययोजनाओं पर भी विस्तार से चर्चा होगी। बैठक के दौरान सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर प्रस्ताव पारित होने की उम्मीद है।
    मंथन में शामिल होंगे दिग्गज

    इस बैठक में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले सहित संघ के सभी शीर्ष पदाधिकारी मौजूद रहेंगे। साथ ही, भाजपा सहित संघ से प्रेरित विभिन्न 32 संगठनों के प्रमुख पदाधिकारी भी इस विचार-मंथन का हिस्सा बनेंगे।

  • Dhar Bhojshala विवाद: कमाल मौला दरगाह के निर्माण में मंदिर अवशेषों के इस्तेमाल का दावा

    Dhar Bhojshala विवाद: कमाल मौला दरगाह के निर्माण में मंदिर अवशेषों के इस्तेमाल का दावा

    धार 
    भोजशाला को लेकर एएसआई ने कोर्ट में दो हजार पेज की रिपोर्ट पेश की है। इस रिपोर्ट में खुदाई के दौरान मिली मूर्तियों, सिक्कों और अन्य अवशेषों का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार परमारकालीन भवन की नींव के पत्थरों पर बाद में निर्माण किया गया। सर्वे में पाए गए स्तंभों और उनकी वास्तुकला के आधार पर कहा गया है कि ये स्तंभ मूल रूप से मंदिर का हिस्सा थे, जिन्हें बाद में मस्जिद निर्माण के दौरान फिर से उपयोग में लिया गया।

    रिपोर्ट के अनुसार चारों दिशाओं में खड़े 106 तथा आड़े 82, इस प्रकार कुल 188 स्तंभ मिले हैं। इन सभी की वास्तुकला से यह संकेत मिलता है कि वे मूल रूप से मंदिरों का हिस्सा थे। स्तंभों पर उकेरी गई देवताओं और मनुष्यों की आकृतियों को औजारों से खंडित किया गया है। याचिकाकर्ता आशीष गोयल का कहना है कि रिपोर्ट में कई ऐसे तथ्य हैं जो दर्शाते हैं कि मंदिर के हिस्सों का उपयोग दरगाह निर्माण में किया गया। 

    भोजशाला की दीवारों पर देवताओं की आकृतियां भी मिली हैं। सर्वे में पूर्व में परिसर से निकालकर मांडू के संग्रहालय में सुरक्षित रखी गई मूर्तियों को भी शामिल किया गया है। इन्हें संरक्षण की दृष्टि से वहां रखा गया था। खुदाई में प्राप्त कलाकृतियां संगमरमर, नरम पत्थर, बलुआ पत्थर और चूना पत्थर से निर्मित हैं।
     
    इन कलाकृतियों में गणेश, नृसिंह, भैरव, अन्य देवी-देवताओं तथा पशु आकृतियों के चिह्न पाए गए हैं। सर्वे में दो ऐसे स्तंभ भी मिले हैं जिन पर ‘ऊँ सरस्वतै नमः’ अंकित है। रिपोर्ट के पृष्ठ संख्या 148 पर उल्लेख है कि भोजशाला में मौजूद स्तंभों की वास्तुकला यह दर्शाती है कि वे पहले मंदिर का हिस्सा थे और मस्जिद निर्माण के दौरान उन्हें बेसाल्ट के ऊंचे चबूतरों पर फिर से स्थापित किया गया। इस हिस्से में एक स्तंभ पर देवी-देवता की छवि भी है।
     
    सर्वे रिपोर्ट के अनुसार पूर्वी भाग में स्तंभों की कतार में लगे एक बड़े शिलालेख में प्राकृत भाषा में दो कविताएं अंकित हैं, जिनमें प्रत्येक में 109 छंद हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पश्चिम दिशा में स्थित मेहराब की दीवारें बेसाल्ट से बने चबूतरे से सटी हुई हैं, जिसके नीचे नक्काशी मौजूद है। चबूतरे और मेहराब की दीवारों की निर्माण शैली अलग-अलग बताई गई है।

    यह पहली बार नहीं है जब भोजशाला का सर्वे हुआ है। अंग्रेज शासन काल में भी इसका सर्वे किया गया था। इसके अतिरिक्त वर्ष 1987 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा किए गए उत्खनन में भोजशाला से हिंदू धर्म से संबंधित 32 मूर्तियां प्राप्त हुई थीं। रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला गया है कि कमाल मौलाना दरगाह के निर्माण में पहले से मौजूद मंदिर के हिस्सों का उपयोग किया गया था।