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  • विकास की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है छत्तीसगढ़, निवेश के लिए है असीम संभावनाएं – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

    विकास की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है छत्तीसगढ़, निवेश के लिए है असीम संभावनाएं – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

    विकास की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है छत्तीसगढ़, निवेश के लिए है असीम संभावनाएं – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

    छत्तीसगढ़ के प्राकृतिक सौंदर्य, समृद्ध जनजातीय संस्कृति और अनछुए पर्यटन स्थलों से दुनिया को परिचित कराने की है जरूरत

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय विकसित छत्तीसगढ़ कॉन्क्लेव 2026 में हुए शामिल

    रायपुर,
     प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने देश को 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य दिया है। एक ऐसा भारत जिसकी ओर दुनिया चुनौतियों के समाधान की उम्मीद से देख रही है। विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में हमारा छत्तीसगढ़ राज्य अहम भूमिका निभाने में सक्षम है। हमारे पास देश की तरक्की को गति देने वाले सभी जरूरी संसाधन हैं। उच्च गुणवत्ता के बहुमूल्य खनिज,बिजली के साथ ही हमारे पास स्किल्ड वर्क फोर्स है।  उक्त बातें मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज नवा रायपुर में आयोजित इकोनामिक टाइम्स द्वारा आयोजित विकसित छत्तीसगढ़ कॉन्क्लेव 2026 में कही।

    उन्होंने बताया विकसित भारत 2047 के अनुरूप ही हमने विकसित छत्तीसगढ़ 2047 बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रहे है। हमनें इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए विजन डॉक्यूमेंट 2047 तैयार किए है जिसके अनुरूप हमारी सरकार समयबद्ध रूप से मिशन मोड में कार्य कर रही है।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा विकसित भारत की भव्य इमारत स्टील से तैयार होगी। छत्तीसगढ़ अभी देश का 20 प्रतिशत स्टील उत्पादित करता है। चिनाब नदी पर बना देश का सबसे ऊंचा पुल छत्तीसगढ़ के फौलादी स्टील से तैयार हुआ है।  माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी स्टील निर्यात को बढ़ावा देने के लिए लगातार नीतिगत प्रयास कर रहे हैं। हमने प्रदेश में स्टील के उत्पादन का लक्ष्य वर्ष 2030 तक 45 मिलियन टन करने का रखा है। विकसित भारत के ग्रोथ इंजन को पावर चाहिए। छत्तीसगढ़ देश के 20 प्रतिशत कोयले का उत्पादन करता है। हम 30 हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन करते हैं। हमने एनर्जी समिट किया,जिसमें साढ़े तीन लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव आये, जिन पर काम हो रहा है। कुछ ही वर्षों में 60 हजार मेगावाट विद्युत उत्पादन का लक्ष्य पूरा हो जाएगा।

    उन्होंने आगे कहा आज छत्तीसगढ़ का कोर सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है। इसके पीछे बड़ी वजह हमारी नई औद्योगिक नीति है। हमने निवेश पर आकर्षक सब्सिडी दी है। कोई अपना उद्यम लगाना चाहे तो उनके लिए अनेक तरह के प्रोत्साहन हैं। पूंजी निवेश पर सब्सिडी है, ब्याज पर सब्सिडी है, कोई टेक्नालाजी खरीदना चाहे तो उस पर सब्सिडी है। स्टांप ड्यूटी में छूट है। हमनें खासकर पावर,आईटी, स्टील, टेक्सटाइल,फार्मा, फूड प्रोसेसिंग जैसे सेक्टर को विशेष प्रोत्साहित कर रहे है।
    नई उद्योग नीति के तहत अब तक हमें 8 लाख 23 हजार करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिल चुके हैं।

    आज हमारे लिए सबसे बड़ी उपलब्धि प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में नक्सल मुक्त भारत का स्वप्न साकार हुआ है। छत्तीसगढ़ के बस्तर ने लंबे समय तक माओवाद का दंश झेला, लेकिन अब यह क्षेत्र इको टूरिज्म के लिए नया डेस्टिनेशन बनकर उभरा है। छत्तीसगढ़ में प्राकृतिक सौंदर्य, समृद्ध जनजातीय संस्कृति और अद्भुत जैव विविधता से भरपूर बस्तर में पर्यटन की असीम संभावनाएं हैं। लंबे समय तक नक्सलवाद के कारण राष्ट्रीय स्तर पर बस्तर की पहचान उसकी वास्तविक खूबसूरती और सांस्कृतिक समृद्धि के अनुरूप नहीं बन पाई। अब परिस्थितियां तेजी से बदली हैं और बस्तर शांति, विश्वास, विकास और पर्यटन की नई पहचान के साथ आगे बढ़ने के लिए तैयार है। बस्तर की इस बदलती तस्वीर को देश-दुनिया तक पहुंचाने में मीडिया महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

    उन्होंने कहा कि बीते चार दशकों में बस्तर का नाम राष्ट्रीय मीडिया में अधिकांशतः नक्सलवाद और हिंसा से जुड़ी घटनाओं के संदर्भ में सामने आता रहा। इससे बस्तर की वास्तविक पहचान कहीं पीछे छूट गई। अब नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक सफलता और क्षेत्र में स्थापित हो रहे शांति के वातावरण ने बस्तर के विकास के लिए नए द्वार खोले हैं। सड़क, संचार, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के साथ पर्यटन क्षेत्र में भी नई संभावनाएं आकार ले रही हैं।
    मुख्यमंत्री साय ने कहा आप सभी बस्तर की वास्तविक खूबसूरती और वहां हो रहे बदलावों से परिचित हैं। राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय मीडिया के माध्यम से जब बस्तर के प्राकृतिक सौंदर्य, संस्कृति और पर्यटन स्थलों की सकारात्मक कहानियां देश के सामने आएंगी तो लोगों की बस्तर के प्रति धारणा भी बदलेगी। उन्होंने कहा कि बस्तर को अब नक्सलवाद नहीं, बल्कि उसकी प्रकृति, संस्कृति, पर्यटन और विकास के लिए जाना जाए – यह हम सभी का प्रयास होना चाहिए। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पर्यटन केवल किसी क्षेत्र की पहचान को विस्तार देने का माध्यम नहीं है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का भी बड़ा आधार है। बस्तर में पर्यटन बढ़ने से होटल, होम-स्टे, परिवहन, स्थानीय खान-पान, हस्तशिल्प, गाइड सेवा सहित अनेक क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर पैदा होंगे। विशेष रूप से स्थानीय युवाओं और महिलाओं को इसका सीधा लाभ मिलेगा। बस्तर के हस्तशिल्प, वनोपज और स्थानीय उत्पादों को भी पर्यटन के माध्यम से बड़ा बाजार मिल सकेगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार बस्तर में शांति और विकास को स्थायी स्वरूप देने के साथ पर्यटन की संभावनाओं को भी विस्तार देने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा प्रयास है कि देश-दुनिया से पर्यटक निर्भय होकर बस्तर आएं, यहां की प्राकृतिक सुंदरता और विशिष्ट संस्कृति को करीब से देखें तथा एक नए और बदलते बस्तर का अनुभव लेकर लौटें।

    छत्तीसगढ़ मध्य भारत में हमारी विशिष्ट भौगोलिक स्थिति, 3500 किलोमीटर से अधिक फैले हमारे राष्ट्रीय राजमार्ग और देश के सबसे तेजी से विकसित होते रेल नेटवर्क के चलते छत्तीसगढ़ पर अब सबकी नजर है। लाजिस्टिक के लिए हमारा प्रदेश बहुत उपयुक्त है। यहां से देश के हर कोने में आपूर्ति सबसे आसान है। हमने लाजिस्टिक नीति भी तैयार की है

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की सार्वजनिक सेवा के 25 वर्षों की यात्रा सेवा, सुशासन, गरीब कल्याण और राष्ट्र निर्माण को समर्पित रही है। इस अवधि में देश ने विकास और जनकल्याण के अनेक क्षेत्रों में व्यापक परिवर्तन देखा है। गरीबों के पक्के आवास से लेकर स्वच्छ पेयजल, बिजली, स्वास्थ्य सुविधाओं, स्वच्छता, वित्तीय समावेशन और बुनियादी अधोसंरचना तक जनकल्याणकारी योजनाओं ने करोड़ों लोगों के जीवन में बदलाव लाने का कार्य किया है।

    इस अवसर पर इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सलाहकार आर.कृष्णा दास, जनसंपर्क आयुक्त रजत बंसल सहित गणमान्य गण उपस्थित थे।

  • ऋषिगालव महाविद्यालय में टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत जागरूकता व्याख्यान, पूर्व एनसीसी कैडेट के लेफ्टिनेंट बनने पर भव्य स्वागत

    ऋषिगालव महाविद्यालय में टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत जागरूकता व्याख्यान, पूर्व एनसीसी कैडेट के लेफ्टिनेंट बनने पर भव्य स्वागत

    मुरैना
     ऋषिगालव महाविद्यालय में शुक्रवार को टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत जागरूकता व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुरैना स्वास्थ्य विभाग के स्वास्थ्य अधिकारी अवधेश शर्मा (District Coordinator TB PMDT), योगेंद्र सिंह कुशवाहा (incharge sts tu morena) एवं Govind senthiya (District Coordinator Hindustan wellness ngo ) ने विद्यार्थियों को टीबी रोग के लक्षण, बचाव, जांच एवं उपचार के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों से टीबी के प्रति स्वयं जागरूक होने के साथ-साथ समाज में भी जागरूकता फैलाने का आह्वान किया।

    इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य आई. ए. गौरी, एनसीसी अधिकारी लेफ्टिनेंट मुश्ताक अली, प्रोफेसर डॉ. पी. के. चतुर्वेदी, चीफ ऑफिसर प्रदीप शर्मा एवं केयरटेकर अजय कुमार राजपूत और लगभग 150 से अधिक एनसीसी कैडेट उपस्थित रहे। कार्यक्रम को सफलतापूर्वक संचालित एवं लीड करने के लिए 8 एमपी बटालियन एनसीसी के कमान अधिकारी कर्नल सुमित दुआ के आदेश अनुसार  ग्वालियर से हवलदार प्रभु सिंह एवं हवलदार चिरेंद्र सिंह मुरैना पहुंचे। हवलदार प्रभु सिंह ने बताया कि वह अभी मुरैना शहर में दो दिन रहेंगे और एनसीसी कैडेट के साथ और अपनी टीम के साथ मुरैना शहर के हर एक ब्लॉक में घर-घर जाकर टीबी मुक्त भारत अभियान चलाएंगे। 

    इसके पश्चात महाविद्यालय के लिए गौरव का क्षण उस समय आया, जब महाविद्यालय के पूर्व एनसीसी कैडेट सीनियर अंडर ऑफिसर शिवकुमार सिकरवार लेफ्टिनेंट बनने के बाद पहली बार कॉलेज पहुंचे। उनके आगमन पर महाविद्यालय परिवार एवं एनसीसी कैडेटों द्वारा उनका भव्य स्वागत किया गया।

    महाविद्यालय के प्राचार्य आई. ए. गौरी, प्रोफेसर डॉ. पी. के. चतुर्वेदी एवं एनसीसी अधिकारी लेफ्टिनेंट मुश्ताक अली ने उनका स्वागत करते हुए उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर एनसीसी से जुड़े कैडेटों एवं विद्यार्थियों में विशेष उत्साह देखने को मिला।

    वक्ताओं ने कहा कि किसी पूर्व एनसीसी कैडेट का लेफ्टिनेंट बनकर अपने महाविद्यालय में लौटना वर्तमान कैडेटों के लिए प्रेरणा का विषय है। यह उपलब्धि युवाओं को अनुशासन, नेतृत्व, समर्पण और राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करती है।

    महाविद्यालय में आयोजित दोनों कार्यक्रमों में एनसीसी एवं महाविद्यालय परिवार की सक्रिय सहभागिता रही।

  • उल्टी के डर से महिला ने कराया अबॉर्शन, सुनाई प्रेग्नेंसी की हैरान करने वाली कहानी

    उल्टी के डर से महिला ने कराया अबॉर्शन, सुनाई प्रेग्नेंसी की हैरान करने वाली कहानी

    लंदन 
    प्रेग्नेंसी की खबर सुनकर ज्यादातर कपल्स खुश होते हैं. लंबे समय से बच्चे का इंतजार कर रहे हों तो यह पल उनके लिए और भी खास होता है. लेकिन ब्रिटेन की ब्रायोनी ट्वाइडल के लिए प्रेग्नेंट होना खुशी के बजाय डर और घबराहट लेकर आया. वजह थी उनकी उल्टी से जुड़ी ऐसी फोबिया, जिससे वह करीब 25 साल से जूझ रही थीं। 

    द सन की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रायोनी को उल्टी से इतना ज्यादा डर लगता था कि किसी दूसरे व्यक्ति को उल्टी करते देखकर उन्हें पैनिक अटैक तक आ जाता था. प्रेग्नेंसी के शुरुआती दिनों में लगातार जी मिचलाने की समस्या ने उनके पुराने डर को फिर से बुरी तरह बढ़ा दिया. हालात यहां तक पहुंच गए कि उन्हें अपनी जिंदगी खत्म करने जैसे ख्याल आने लगे। 

    आखिरकार, प्रेग्नेंसी के आठवें हफ्ते में उन्होंने अबोर्शन कराने का फैसला किया. यह फैसला उनके और उनके पति दोनों के लिए बेहद मुश्किल था, क्योंकि वे इस बच्चे को चाहते थे. करीब दो साल बाद ब्रायोनी ने अपनी कहानी इसलिए साझा की है, ताकि ऐसी ही परेशानी से जूझ रही दूसरी महिलाएं खुद को अकेला न समझें। 

    बचपन से ही था उल्टी का डर
    ब्रायोनी बताती हैं कि उन्हें ठीक से याद नहीं कि उल्टी से डर कब शुरू हुआ. लेकिन आठ साल की उम्र की एक घटना उन्हें आज भी याद है. वह अपनी मां की कार की पिछली सीट पर बैठी थीं, तभी उनके एक दोस्त ने उनके सामने उल्टी कर दी। 

    इसके बाद परिवार के साथ सफर के दौरान उनके भाई को होने वाली ट्रैवल सिकनेस ने भी इस डर को और बढ़ाया. धीरे-धीरे उल्टी से बचना उनकी जिंदगी का हिस्सा बन गया. वह थीम पार्क जाने से बचती थीं और शराब पीने से भी परहेज करती थीं, ताकि उन्हें खुद उल्टी न हो. अगर किसी सोशल इवेंट में जाने से पहले उन्हें पता चल जाता कि वहां किसी को हाल ही में नोरोवायरस हुआ था, तो वह कार्यक्रम में जाना ही छोड़ देती थीं. ब्रायोनी को सिर्फ दूसरे लोगों के उल्टी करने से ही डर नहीं लगता था, बल्कि खुद बीमार होकर उल्टी करने का भी उन्हें बहुत डर था। 

    क्या है इमेटोफोबिया?
    उल्टी के इस असामान्य और बेहद तेज डर को इमेटोफोबिया कहा जाता है. ब्रायोनी के मुताबिक, उन्हें लंबे समय तक लगता था कि शायद वह अकेली हैं जिन्हें इस तरह का डर है। 

    बाद में जब उन्हें इसके बारे में पता चला तो उन्हें मालूम हुआ कि वह अकेली नहीं हैं. उनके मुताबिक, अनुमान है कि करीब 2 से 7 फीसदी लोगों को किसी न किसी स्तर पर इमेटोफोबिया हो सकता है. इनमें महिलाओं की संख्या काफी ज्यादा बताई जाती है और यह डर अक्सर बचपन के आसपास शुरू हो जाता है। 

    ब्रायोनी ने इस डर को काबू करने की कोशिश भी की. करीब 20 की उम्र के आखिरी वर्षों में उन्होंने NHS के जरिए CBT यानी कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी ली. थेरेपी के दौरान उन्हें धीरे-धीरे उस चीज का सामना कराया गया जिससे वह सबसे ज्यादा डरती थीं। 

    शुरुआत में उन्हें एक रोलरकोस्टर पर उल्टी करती लड़की का वीडियो दिखाया गया. वीडियो देखते हुए वह रोने लगीं और उन्हें पैनिक अटैक आया. लेकिन उन्होंने वही वीडियो बार-बार देखा और धीरे-धीरे उनका डर कम होने लगा. इसके बाद उन्हें एक कार में बैठकर उल्टी जैसी दिखने वाली चीज के साथ अपने डर का सामना करने की एक्सरसाइज भी कराई गई। 

    जनवरी 2024 में शादी के करीब दो साल बाद ब्रायोनी को लगा कि अब वह मानसिक रूप से बच्चे के लिए तैयार हैं. उन्होंने और उनके पति ने परिवार बढ़ाने की कोशिश शुरू की। 
    लेकिन इसी दौरान उनकी जिंदगी में कई परेशानियां भी आईं. मार्च में उन्हें पता चला कि उनके पिता को आंत का कैंसर है और उनकी दादी को ब्रेस्ट कैंसर है। 

    इसी दौरान उनके पति एक वीकेंड पर दोस्तों के साथ बाहर गए हुए थे और ब्रायोनी को नोरोवायरस हो गया. वह परिवार के दूसरे लोगों को संक्रमित नहीं करना चाहती थीं, इसलिए अकेले ही बीमारी से जूझने की कोशिश करती रहीं. लेकिन करीब 24 घंटे बाद उन्होंने अपने पति से घर लौटने को कहा। 

    बचपन के बाद पहली बार उन्हें इतनी ज्यादा उल्टी हुई कि वह खुद को रोक नहीं पाईं. करीब पांच बार उन्हें उल्टी हुई. लेकिन इस बार उन्हें कुछ अलग महसूस हो रहा था. उल्टी और मितली की समस्या जैसे खत्म ही नहीं हो रही थी. तभी उन्हें पता चला कि उनका पीरियड करीब दो हफ्ते लेट है. वह प्रेग्नेंट थीं। 

    ब्रायोनी ने जैसे ही परिवार को प्रेग्नेंसी की खबर दी, सभी बहुत खुश हुए. परिवार पहले ही कई मुश्किलों से गुजर रहा था और ब्रायोनी चाहती थीं कि यह खबर सबके लिए खुशी लेकर आए. लेकिन उनके मन में कुछ और ही चल रहा था। 

    उन्हें डर था कि प्रेग्नेंसी के साथ होने वाली मॉर्निंग सिकनेस कहीं उनके पुराने इमेटोफोबिया को फिर से न जगा दे. उन्होंने लगातार जी मिचलाने से बचने के लिए रात के दो बजे तक बैगल्स और अंगूर खाने जैसी चीजें भी आजमाईं. उल्टी भले ही नहीं हो रही थी, लेकिन लगातार तेज मितली उन्हें परेशान कर रही थी। 

    प्रेग्नेंसी के सातवें हफ्ते में उनकी हालत इतनी खराब हो गई कि वह डॉक्टर के पास पहुंचीं. वह मदद चाहती थीं, लेकिन उनके मुताबिक उन्हें उस समय एंटी-सिकनेस दवा नहीं दी गई और अदरक आजमाने की सलाह दी गई. ब्रायोनी के लिए यह काफी निराशाजनक था। 

    लगातार डर, मितली और नींद की कमी ने उनकी मानसिक हालत को और खराब कर दिया. ब्रायोनी बताती हैं कि उन्हें लगने लगा था कि वह अब आगे नहीं चल पाएंगी. उनके पति ने भी महसूस किया कि उनकी हालत गंभीर होती जा रही है. उन्होंने क्राइसिस हेल्पलाइन से संपर्क किया, लेकिन उन्हें लगा कि वहां मौजूद लोग इमेटोफोबिया और उनकी स्थिति की गंभीरता को समझ नहीं पा रहे थे। 

    तभी उनके पति ने उनसे कहा कि उन्हें इस प्रेग्नेंसी को जारी रखने के लिए खुद को मजबूर करने की जरूरत नहीं है. उनका कहना था कि ब्रायोनी की सुरक्षा सबसे पहले है. अबोर्शन का विकल्प सामने रखना बच्चे को लेकर कोई दबाव नहीं था, बल्कि उनकी हालत को देखते हुए एक रास्ता था। 

    ब्रायोनी के लिए यह सुनना बेहद मुश्किल था. वह इस बच्चे को चाहती थीं. प्रेग्नेंसी प्लान की गई थी और दोनों पति-पत्नी परिवार शुरू करना चाहते थे. लेकिन उनकी मानसिक हालत तेजी से बिगड़ रही थी। 

    मार्च 2024 में, प्रेग्नेंसी के करीब आठवें हफ्ते में ब्रायोनी ने अबोर्शन कराने का फैसला किया. वह बताती हैं कि क्लिनिक में मौजूद स्टाफ ने उनका पूरा साथ दिया. वह वहां बैठकर रो रही थीं और खुद को लेकर शर्म महसूस कर रही थीं. स्टाफ ने उनसे बार-बार पूछा कि क्या वह इस फैसले को लेकर निश्चित हैं। 

    लेकिन ब्रायोनी को लग रहा था कि उनके पास दूसरा रास्ता नहीं बचा है. अबोर्शन के बाद कुछ दिनों में उनकी लगातार रहने वाली मितली खत्म हो गई. उन्हें लगा कि उनका दिमाग फिर से सामान्य स्थिति में लौट रहा है। 

    लेकिन इसका मतलब यह नहीं था कि दर्द खत्म हो गया. वह उस बच्चे के खोने का दुख भी महसूस कर रही थीं, जिसे वह और उनके पति दोनों चाहते थे. ब्रायोनी कहती हैं कि उनके लिए यह फैसला सही था, लेकिन इससे बच्चे को खोने का दुख कम नहीं हुआ। 

    बाद में भी डर से लड़ने की कोशिश जारी रखी
    अबोर्शन के बाद ब्रायोनी के मन में शर्म और अपराधबोध बना रहा. उन्हें डर था कि अगर लोगों को उनकी कहानी पता चली तो वे उन्हें जज करेंगे. इसके बाद उन्होंने हिप्नोथेरेपी और CBT की मदद ली। 

    एक बार तो उन्होंने ऐसी एक्सरसाइज भी की जिसमें उन्हें एक कुर्सी पर घुमाया गया और ज्यादा से ज्यादा नींबू पानी पिलाया गया, ताकि मितली जैसी भावना पैदा हो और वह अपने डर का सामना कर सकें। 

    फिर 2025 में उनकी मुलाकात थेरेपिस्ट सैली बेकर से हुई. ब्रायोनी के मुताबिक, उन्होंने पहले उनकी एंग्जायटी पर काम किया और फिर प्रेग्नेंसी के दौरान आए विचारों और भावनाओं को समझने में मदद की। 

    उन्होंने टीवी मेडिक डॉ. निगहत आरिफ से भी बात की. ब्रायोनी के मुताबिक, डॉक्टर ने बताया कि उनकी स्थिति में उन्हें एंटी-सिकनेस दवाओं की मदद मिल सकती थी. उन्हें प्रेग्नेंसी सिकनेस सपोर्ट नाम की संस्था के बारे में भी पता चला, जो प्रेग्नेंसी के दौरान गंभीर सिकनेस से जूझ रही महिलाओं की मदद करती है। 

    फिर दोबारा प्रेग्नेंट हुईं, इस बार दवाएं भी मिलीं
    इन तमाम अनुभवों के बाद ब्रायोनी और उनके पति ने दोबारा बच्चा प्लान करने का फैसला किया. इस साल की शुरुआत में वह फिर प्रेग्नेंट हुईं. उस वक्त उनकी उम्र 36 साल थी। 

    इस बार भी प्रेग्नेंसी का पहला ट्राइमेस्टर आसान नहीं था. पुराने डर बार-बार सामने आ रहे थे और उन्हें चिंता थी कि कहीं पिछली कहानी फिर से न दोहराई जाए. लेकिन इस बार उन्होंने अलग-अलग डॉक्टरों और एक ऑब्स्टेट्रिशियन से मदद ली. उन्हें जरूरत के मुताबिक एंटी-सिकनेस दवाएं मिलीं। 

    पहले 12 हफ्ते उनके लिए भावनात्मक रूप से बेहद मुश्किल रहे. कई बार वह रोईं और डर भी लगा. लेकिन मेडिकल सपोर्ट और दवाओं की मदद से वह इस दौर से निकल गईं. अब वह अपनी प्रेग्नेंसी के दूसरे ट्राइमेस्टर में हैं.ब्रायोनी मानती हैं कि वह कभी-कभी सोचती हैं कि अगर पहली प्रेग्नेंसी जारी रहती तो आज क्या होता. लेकिन फिलहाल उनका ध्यान अपनी मौजूदा प्रेग्नेंसी और आने वाले बच्चे पर है। 

    'मदद मांगने में शर्म नहीं करनी चाहिए'
    ब्रायोनी की कहानी सिर्फ अबोर्शन की कहानी नहीं है. यह एक ऐसे डर की कहानी भी है, जो किसी व्यक्ति की रोजमर्रा की जिंदगी को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है. वह चाहती हैं कि इमेटोफोबिया या गंभीर प्रेग्नेंसी सिकनेस से जूझ रही महिलाएं अपनी परेशानी को छिपाएं नहीं। 

    उनका कहना है कि मदद मांगना कमजोरी नहीं है. अगर कोई महिला लगातार उल्टी, मितली, डर या मानसिक परेशानी से जूझ रही है तो उसे डॉक्टर से बात करनी चाहिए और उपलब्ध मेडिकल व मानसिक स्वास्थ्य सहायता के बारे में जानकारी लेनी चाहिए। 
    ब्रायोनी के अनुभव में सबसे अहम बात यही है कि प्रेग्नेंसी के दौरान शारीरिक परेशानी और मानसिक तनाव को अलग-अलग करके नहीं देखा जा सकता. सही समय पर मदद मिलने से स्थिति को संभालना आसान हो सकता है। 

  • इजरायली हमले में क्षतिग्रस्त परमाणु सेंटर को तीसरी बार बना रहा ईरान, तेजी से चल रहा काम

    इजरायली हमले में क्षतिग्रस्त परमाणु सेंटर को तीसरी बार बना रहा ईरान, तेजी से चल रहा काम

    तेहरान 
    ईरान के पारचिन सैन्य परिसर में स्थित तालेगान-2 लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय केंद्र रहा है. पश्चिमी खुफिया एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के अनुसार, यह जगह ईरान के पुराने अमाड परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी हुई थी. वहां उच्च विस्फोटक परीक्षण किए जाने के आरोप लगे थे, जो परमाणु हथियार के डिजाइन से संबंधित हो सकते थे। 

    ईरान हमेशा से इन आरोपों से इनकार करता आया है. कहता है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण है. इस स्थल की भूमिगत कक्ष और संरचनाएं विशेषज्ञों के लिए संदेह का विषय बनी रहीं. पारचिन परिसर स्वयं सैन्य गतिविधियों का बड़ा केंद्र माना जाता है, इसलिए यहां कोई भी गतिविधि तुरंत नजर में आ जाती है। 

    अक्टूबर 2024 और मार्च 2026 में इजरायली हमलों ने तालेगान-2 स्थल को भारी नुकसान पहुंचाया. इन हमलों में ऊपर की संरचनाएं नष्ट हो गईं और भूमिगत कक्ष में छेद हो गए. यह पहली बार नहीं था जब यह जगह निशाने पर आई. विशेषज्ञों के अनुसार यह विनाश और फिर से निर्माण का तीसरा चक्र है। 

    हर बार हमले के बाद ईरान ने स्थल को फिर से खड़ा करने की कोशिश की है. मार्च 2026 के हमले के बाद जून में मरम्मत का काम शुरू हुआ. सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि ईरान अब सिर्फ मरम्मत नहीं कर रहा, बल्कि अतिरिक्त सुरक्षा उपाय भी जोड़ रहा है।  

    इनमें विस्फोट से बचाव के लिए विशेष सुरक्षा परतें, कंक्रीट के एप्रन और छेदों पर ढक्कन जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं. ये कदम दर्शाते हैं कि ईरान इस स्थल को लंबे समय तक चालू रखना चाहता है और भविष्य के संभावित हमलों से बचाने की तैयारी कर रहा है। 

    फिर से निर्माण की तेजी और सुरक्षा उपायों का महत्व
    जून से शुरू हुए मरम्मत कार्य में तेजी देखी जा रही है. भूमिगत कक्ष के क्षतिग्रस्त हिस्सों को ढकने और मजबूत करने का काम चल रहा है. कंक्रीट की परतें और सुरक्षात्मक ढांचे जोड़ने से यह साफ है कि ईरान सिर्फ पुरानी स्थिति बहाल नहीं कर रहा, बल्कि स्थल को और मजबूत बना रहा है। 

    इंस्टीट्यूट फॉर साइंस एंड इंटरनेशनल सिक्योरिटी जैसे संगठनों ने इस पैटर्न को गहरी चिंता का विषय बताया है. उनका कहना है कि बार-बार विनाश के बावजूद स्थल को फिर से खड़ा करना सामान्य सैन्य गतिविधि से ज्यादा गंभीर संकेत दे सकता है. हालांकि, सैटेलाइट तस्वीरों से यह तय नहीं किया जा सकता कि वर्तमान काम किसी परमाणु संबंधित गतिविधि से जुड़ा है या नहीं. केवल संरचनात्मक बदलाव ही नजर आ रहे हैं. ईरान का पक्ष है कि ये सब सामान्य रक्षात्मक मरम्मत हैं और उसके परमाणु प्रयास शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए हैं। 

    यह घटना ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर लंबे समय से चली आ रही बहसों को फिर से ताजा कर देती है. आईएईए लगातार ईरान से ज्यादा पारदर्शिता की मांग करता रहा है. पश्चिमी देश और इजरायल मानते हैं कि अतीत में उच्च विस्फोटक परीक्षणों का मकसद परमाणु हथियार की क्षमता विकसित करना था। 

    ईरान इन आरोपों को राजनीतिक दबाव बताता है. बार-बार हमले और पुनर्निर्माण का सिलसिला क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकता है. अगर यह स्थल वाकई किसी संवेदनशील गतिविधि के लिए इस्तेमाल होता रहा हो, तो उसकी बहाली से परमाणु अप्रसार के प्रयासों पर असर पड़ सकता है. दूसरी तरफ, अगर यह सिर्फ सैन्य विस्फोटक परीक्षण स्थल है, तो भी इसकी सुरक्षा बढ़ाया जाना ईरान की रक्षात्मक रणनीति का हिस्सा माना जा सकता है।  

    वैश्विक स्तर पर यह घटना तेल बाजार, क्षेत्रीय सुरक्षा और कूटनीतिक वार्ताओं को प्रभावित कर सकती है. संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरोपीय संघ और अन्य देश आईएईए की रिपोर्टों पर नजर रखे हुए हैं. ईरान अगर अंतरराष्ट्रीय निगरानी बढ़ाने को तैयार नहीं होता, तो प्रतिबंधों या अन्य दबाव बढ़ने की आशंका बनी रहती है. साथ ही, बार-बार होने वाले हमले मध्य पूर्व में संघर्ष को नया रूप भी दे सकते हैं। 

    आगे की निगरानी
    तालेगान-2 स्थल का तेजी से पुनर्निर्माण ईरान की दृढ़ता को दिखाता है कि वह बाहरी हमलों के बावजूद अपनी सैन्य सुविधाओं को बनाए रखना चाहता है. सुरक्षा उपायों का विस्तार इस बात का संकेत है कि भविष्य के खतरों को लेकर तैयारी की जा रही है. विशेषज्ञों की चिंता जायज है क्योंकि इतिहास में यह जगह संदेह के घेरे में रही है. फिर भी, वर्तमान तस्वीरों से परमाणु गतिविधि की पुष्टि नहीं होती। 

    आने वाले महीनों में सैटेलाइट निगरानी, आईएईए की जांच और कूटनीतिक विकास तय करेंगे कि यह पुनर्निर्माण कितना सामान्य है या कितना चिंताजनक. फिलहाल यह घटना ईरान-इजरायल तनाव और परमाणु मुद्दे की जटिलता को एक बार फिर रेखांकित करती है. अंतरराष्ट्रीय समुदाय को सतर्क रहकर तथ्यों पर आधारित प्रतिक्रिया देनी होगी ताकि तनाव और न बढ़े। 

  • हाई कोर्ट के आदेश के बाद भी श्रमिक को नौकरी पर नहीं लिया, मंडी समिति को देने होंगे ₹6.44 लाख

    हाई कोर्ट के आदेश के बाद भी श्रमिक को नौकरी पर नहीं लिया, मंडी समिति को देने होंगे ₹6.44 लाख

    ग्वालियर
     बहाली का आदेश होने के बावजूद श्रमिक को सेवा में वापस नहीं लेने के मामले में कृषि उपज मंडी समिति को अब 6 लाख 44 हजार 137 रुपये का भुगतान करना होगा।मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने मंडी समिति की रिट अपील खारिज करते हुए एकल पीठ के आदेश को बरकरार रखा है। न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की युगलपीठ ने 17 सितंबर को कृषि उपज मंडी समिति की अपील पर सुनवाई की।

    श्रम न्यायालय ने दिया था बहाली का आदेश
    मामला राकेश सक्सेना से जुड़ा है। श्रम न्यायालय क्रमांक-1, ग्वालियर ने एक फरवरी 2003 को आदेश जारी कर राकेश सक्सेना को बिना पिछले वेतन के सेवा में बहाल करने का निर्देश दिया था। यह आदेश हाई कोर्ट तक पहुंचा, लेकिन बरकरार रहा। इसके बावजूद उनकी बहाली नहीं की गई और वे 31 अगस्त 2007 को सेवानिवृत्त हो गए।

    वेतन के लिए श्रम न्यायालय में दिया आवेदन
    इसके बाद राकेश सक्सेना ने औद्योगिक विवाद अधिनियम की धारा 33-सी(2) के तहत श्रम न्यायालय में आवेदन देकर बहाली के आदेश से सेवानिवृत्ति तक के वेतन की मांग की। उन्होंने इसकी गणना भी प्रस्तुत की। मंडी समिति ने श्रम न्यायालय में लिखित जवाब दिया, लेकिन गणना पर कोई आपत्ति नहीं की।

    हाई कोर्ट में दी थी चुनौती
    श्रम न्यायालय ने 6 लाख 44 हजार 137 रुपये भुगतान का आदेश दिया। मंडी समिति ने इसे हाई कोर्ट में चुनौती दी। सुनवाई के दौरान उसके अधिवक्ता ने स्वीकार किया कि गणना पर श्रम न्यायालय में कोई विवाद नहीं किया गया था। अब अलग गणना पत्र के जरिए आपत्ति की जा रही है।

     

  • PM Kisan 24वीं किस्त से पहले कर लें ये 3 काम, तभी खाते में आएंगे ₹2,000

    PM Kisan 24वीं किस्त से पहले कर लें ये 3 काम, तभी खाते में आएंगे ₹2,000

     नई दिल्ली
    आप भी प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 24वीं किस्त का इंतजार कर रहे हैं? अगर चाहते हैं कि ₹2,000 की ये किस्त बिना किसी रुकावट के आपके खाते में पहुंचे, तो सिर्फ तारीख का इंतजार न करें. इसके लिए अभी कुछ जरूरी चीजें चेक कर लें. ई-केवाईसी (e-KYC), जमीन का सत्यापन और आधार से बैंक अकाउंट की लिंकिंग में कोई कमी रह गई तो किस्त अटक सकती है। 

    प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की किस्तें आम तौर पर करीब चार महीने के अंतराल पर जारी की जाती हैं. 23वीं किस्त 20 जून 2026 को जारी की गई थी. ऐसे में अगली यानी 24वीं किस्त अक्टूबर में जारी होने की संभावना जताई जा रही है. हालांकि, अभी सरकार की ओर से 24वीं किस्त जारी करने की कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं की गई है। 

    इसलिए किसानों को आधिकारिक तारीख का इंतजार करने के साथ-साथ अपने रिकॉर्ड भी चेक कर लेने चाहिए. अगर योजना से जुड़ी जरूरी प्रक्रिया पूरी नहीं है, तो किस्त के भुगतान में परेशानी हो सकती है। 

    पहला काम: ई-केवाईसी जरूर करा लें
    अगर आपने अभी तक ई-केवाईसी नहीं कराई है, तो इसे जल्द पूरा कर लें. पीएम किसान योजना के लाभार्थियों के लिए ई-केवाईसी जरूरी है. ई-केवाईसी पूरी नहीं होने पर किस्त का भुगतान अटक सकता है. पीएम किसान की आधिकारिक वेबसाइट या मोबाइल ऐप के जरिए ई-केवाईसी की स्थिति चेक कर सकते हैं. अगर आपको ऑनलाइन प्रक्रिया में परेशानी हो रही है, वे नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) की मदद भी ले सकते हैं। 

    दूसरा काम: लैंड वेरिफिकेशन चेक करें
    किस्त के लिए जमीन से जुड़े रिकॉर्ड का सही होना भी जरूरी है. पीएम किसान के तहत लाभ उन्हीं किसान परिवारों को मिलता है जिनके नाम खेती योग्य जमीन का रिकॉर्ड दर्ज है. इसलिए किसान यह जांच लें कि योजना में दर्ज जमीन की जानकारी सही है या नहीं और जमीन का सत्यापन पूरा हुआ है या नहीं। 

    अगर जमीन के रिकॉर्ड में नाम, खाता या दूसरी जानकारी को लेकर कोई गड़बड़ी है, तो उसे संबंधित राज्य के राजस्व विभाग या संबंधित अधिकारी के जरिए ठीक कराया जा सकता है. जमीन से जुड़ी जानकारी का सत्यापन पूरा नहीं होने पर भी किस्त प्रभावित हो सकती है। 

    तीसरा काम: आधार-बैंक खाता लिंकिंग
    पीएम किसान की रकम सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है. इसके लिए बैंक खाते का आधार से लिंक यानी आधार सीडेड होना जरूरी है. अगर आपका बैंक खाता आधार से लिंक नहीं है, तो किस्त के भुगतान में दिक्कत आ सकती है. किसान अपने बैंक में जाकर आधार लिंकिंग की स्थिति चेक करा सकते हैं. साथ ही यह भी देख लें कि पीएम किसान सम्मान निधि योजना में दर्ज बैंक खाते की जानकारी सही है या नहीं. खाते में नाम या दूसरे विवरण में गलती होने पर भी भुगतान अटक सकता है। 

    पैसा नहीं आया तो ऐसे चेक करें स्टेटस
    अगर 24वीं किस्त जारी होने के बाद आपके खाते में पैसा नहीं आता है, तो सबसे पहले पीएम किसान की आधिकारिक वेबसाइट पर अपना लाभार्थी स्टेटस चेक करें. वहां भुगतान की स्थिति और बैंक से जुड़ी जानकारी देखी जा सकती है. किसान यह भी जांच सकते हैं कि उनका नाम बेनिफिशियरी लिस्ट (लाभार्थी सूची) में है या नहीं. अगर कोई जानकारी गलत है या जरूरी प्रक्रिया अधूरी है, तो उसे संबंधित विभाग के जरिए ठीक कराया जा सकता है। 

    क्या है प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि?
    प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना यानी PM-KISAN फरवरी 2019 में शुरू की गई थी. इस योजना का उद्देश्य पात्र किसान परिवारों को खेती से जुड़ी जरूरतों के लिए आर्थिक मदद देना है. शुरुआत में यह योजना छोटे और सीमांत किसानों के लिए थी, लेकिन बाद में इसका दायरा बढ़ाकर खेती योग्य जमीन रखने वाले सभी पात्र किसान परिवारों तक किया गया. इसके तहत पात्र किसान परिवार को सालाना ₹6,000 दिए जाते हैं. यह रकम ₹2,000 की तीन बराबर किस्तों में सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है. इस योजना का लाभ लेने के लिए किसान परिवार के नाम खेती योग्य जमीन का रिकॉर्ड होना चाहिए और लाभार्थी का सत्यापन राज्य या केंद्रशासित प्रदेश की ओर से किया जाता है। 

    कुछ श्रेणियों के लोगों को योजना से बाहर रखा गया है, जैसे कुछ संवैधानिक पदों पर रहने वाले व्यक्ति, सरकारी कर्मचारी और आयकर देने वाले लोग. लाभ लेने के लिए आधार से जुड़ी जानकारी, बैंक खाता, जमीन का रिकॉर्ड और ई-केवाईसी जैसी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी करनी होती हैं. 20 जून 2026 को जारी 23वीं किस्त में 9.44 करोड़ से ज्यादा किसानों को करीब ₹18,880 करोड़ की राशि दी गई थी. योजना की शुरुआत से 23 किस्तों में अब तक ₹4.46 लाख करोड़ से ज्यादा की रकम किसानों को दी जा चुकी है। 

     

  • Oscars 2027 के लिए भारत की ओर से चुनी गई मराठी फिल्म, IMDb पर मिली 8.9 की रेटिंग

    Oscars 2027 के लिए भारत की ओर से चुनी गई मराठी फिल्म, IMDb पर मिली 8.9 की रेटिंग

    मुंबई 

    फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया (FFI) ने उस फिल्म के नाम का ऐलान कर दिया है, जिसे ऑस्कर 2027 के लिए भारत की ओर से भेजा जाएगा। इस बार भारत की आधिकारिक प्रविष्टि बनने की रेस में देशभर की कुल 33 फिल्में शामिल थीं। इन फिल्मों में से FFI ने IMDb पर 8.9 रेटिंग वाली मराठी थ्रिलर फिल्म को चुना है।

    क्या है इस फिल्म का नाम?
    शुक्रवार को फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया ने घोषणा की कि मराठी थ्रिलर फिल्म ‘गोंधळ’ ऑस्कर 2027 के लिए भारत की आधिकारिक प्रविष्टि होगी। संतोष डावखर के निर्देशन में बनी यह फिल्म 99वें अकादमी पुरस्कार (Oscars) में ‘बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म’ कैटेगरी में भारत का प्रतिनिधित्व करेगी।

    क्या है इस फिल्म की कहानी?
    फिल्म की कहानी एक नवविवाहित जोड़े के इर्द-गिर्द घूमती है और पूरी कहानी एक ही रात में होने वाले पारंपरिक महाराष्ट्रीयन ‘गोंधळ’ अनुष्ठान के दौरान सामने आती है। शुरुआत में यह रात एक सामान्य धार्मिक आयोजन जैसी लगती है, लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, रिश्तों से जुड़े पुराने राज, प्यार, जुनून और सत्ता की लड़ाई सामने आने लगती है।

    गोंधल क्या होता है?
    महाराष्ट्र में गोंधळ एक पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान है, जो आमतौर पर देवी-देवताओं की आराधना और उनका आशीर्वाद लेने के लिए किया जाता है। इसमें विशेष तरह के गीत, वाद्ययंत्र, कथाएं और पूजा की रस्में शामिल होती हैं। कई परिवारों में शादी या किसी अन्य शुभ अवसर पर भी गोंधळ कराया जाता है। फिल्म इसी धार्मिक और सांस्कृतिक माहौल को अपनी कहानी का अहम हिस्सा बनाती है।

    फिल्म की स्टार कास्ट
    फिल्म के लेखक और निर्देशक संतोष डावखर हैं। इसमें इशिता देशमुख ने सुमन, योगेश सोहनी ने आनंद, किशोर कदम ने भिवाबा, निषाद भोईर ने सर्जेराव और सुरेश विश्वकर्मा ने पाटिल का किरदार निभाया है। फिल्म का संगीत दिग्गज संगीतकार इलैयाराजा ने दिया है।

    मिल चुके हैं कई सारे अवॉर्ड्स
    ‘गोंधळ’ इससे पहले कई प्रतिष्ठित फिल्म समारोहों में अपनी छाप छोड़ चुकी है। 56वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (IFFI) 2025 में संतोष डावखर को फिल्म के लिए बेस्ट डायरेक्टर का ‘रजत मयूर’ पुरस्कार मिला था। इसके अलावा फिल्म ने बेंगलुरु अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में FIPRESCI पुरस्कार भी जीता है। पुणे अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (PIFF) में भी फिल्म को कई प्रमुख सम्मान मिल चुके हैं।

    ओटीटी पर देख सकते हैं यह फिल्म?
    ‘गोंधळ’ साल 2025 में रिलीज हुई थी, लेकिन अभी तक इसे किसी ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज नहीं किया गया है।

    33 फिल्मों के बीच से हुआ चयन
    दिलचस्प बात यह है कि ऑस्कर 2027 में भारत की आधिकारिक प्रविष्टि बनने की रेस में कुल 33 फिल्में शामिल थीं। इनमें 14 हिंदी फिल्में थीं। इसके अलावा मराठी, तेलुगू और गुजराती की 4-4 फिल्में, तमिल की 3 फिल्में, मलयालम और नागामीज की 1-1 फिल्म और एक साइलेंट (मूक) फिल्म भी इस रेस में शामिल थी। इन सभी को पीछे छोड़ते हुए ‘गोंधळ’ को भारत की आधिकारिक एंट्री के तौर पर चुना गया है।

  • पिछले 12 वर्षों में 2.24 करोड़ से अधिक अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को 7 हजार 788 करोड़ रुपये से अधिक की छात्रवृत्ति वितरित

    पिछले 12 वर्षों में 2.24 करोड़ से अधिक अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को 7 हजार 788 करोड़ रुपये से अधिक की छात्रवृत्ति वितरित

    पिछले 12 वर्षों में 2.24 करोड़ से अधिक अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को 7 हजार 788 करोड़ रुपये से अधिक की छात्रवृत्ति वितरित

    प्राथमिक शिक्षा से विदेश अध्ययन तक विद्यार्थियों को मिल रहा आर्थिक सहायता का संबल

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार अनुसूचित जाति वर्ग के विद्यार्थियों को शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च, तकनीकी, व्यावसायिक एवं विदेश अध्ययन तक विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

    प्रदेश में वर्ष 2014-15 से वर्ष 2025-26 तक अनुसूचित जाति के कुल 2 करोड़ 24 लाख 59 हजार 478 विद्यार्थियों को विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं के माध्यम से 7 हजार 788 करोड़ रुपये से अधिक की राशि वितरित की जा चुकी है। छात्रवृत्ति की राशि डीबीटी (प्रत्यक्ष लाभ अंतरण) के माध्यम से पात्र विद्यार्थियों के बैंक खातों में अंतरित की जा रही है।

    राज्य छात्रवृत्ति से 1 करोड़ 40 लाख से अधिक विद्यार्थियों को मिला लाभ

    अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को प्रारंभिक स्तर से ही शिक्षा से जोड़ने और उनकी शैक्षणिक निरंतरता बनाए रखने के लिए राज्य छात्रवृत्ति योजना संचालित की जा रही है। वर्ष 2014-15 से अब तक कक्षा पहली से आठवीं तक के 1 करोड़ 40 लाख 41 हजार 131 विद्यार्थियों को 466 करोड़ 93 लाख रुपये से अधिक की छात्रवृत्ति प्रदान की गई है। योजना के अंतर्गत कक्षा पहली से पांचवीं तक की बालिकाओं को 10 माह की अवधि के लिए 250 रुपये प्रतिमाह, कक्षा छठवीं से आठवीं तक के बालकों को 200 रुपये प्रतिमाह और बालिकाओं को 600 रुपये प्रतिमाह छात्रवृत्ति प्रदान की जा रही है। यह राशि शत-प्रतिशत राज्य शासन द्वारा वहन की जाती है।

    प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति से 35 लाख से अधिक विद्यार्थियों को मिला शैक्षणिक संबल

    कक्षा 9वीं एवं 10वीं के विद्यार्थियों की शिक्षा में निरंतरता बनाए रखने के लिए प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना संचालित की जा रही है। वर्ष 2014-15 से अब तक योजना के अंतर्गत 35 लाख 73 हजार 613 विद्यार्थियों को 993 करोड़ 71 लाख रुपये से अधिक की राशि वितरित की गई है। योजना के अंतर्गत 2.50 लाख रुपये से अधिक वार्षिक आय वाले पालकों के बालकों को 600 रुपये और बालिकाओं को 1,200 रुपये 10 माह के लिए प्रदान किए जाते हैं। वहीं 2.50 लाख रुपये तक की वार्षिक आय सीमा वाले परिवारों के छात्रावासी विद्यार्थियों को 7 हजार रुपये तथा गैर-छात्रावासी विद्यार्थियों को 3 हजार 500 रुपये वार्षिक अकादमिक भत्ता दिया जाता है।

    कक्षा 11वीं-12वीं के विद्यार्थियों को 620 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता

    उच्चतर माध्यमिक शिक्षा तथा पॉलिटेक्निक डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में विद्यार्थियों की शैक्षणिक निरंतरता बनाए रखने के लिए पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति समूह-4 संचालित की जा रही है। इसके अंतर्गत अब तक 21 लाख 11 हजार 249 छात्र-छात्राओं को 620 करोड़ रुपये से अधिक की छात्रवृत्ति वितरित की जा चुकी है। केंद्र एवं राज्य शासन के 60:40 अनुपात में संचालित इस योजना के अंतर्गत कक्षा 11वीं-12वीं के गैर-छात्रावासी विद्यार्थियों को 2 हजार 500 रुपये और छात्रावासी विद्यार्थियों को 4 हजार रुपये वार्षिक अकादमिक भत्ता दिया जा रहा है।

    उच्च, तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा के लिए 5 हजार 708 करोड़ रुपये से अधिक की छात्रवृत्ति

    अनुसूचित जाति वर्ग के विद्यार्थियों की उच्च, तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा में भागीदारी बढ़ाने के लिए पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत महाविद्यालयीन एवं विश्वविद्यालयीन स्तर के 27 लाख 33 हजार 485 छात्र-छात्राओं को 5 हजार 708 करोड़ रुपये से अधिक की छात्रवृत्ति एवं शिक्षण शुल्क प्रतिपूर्ति का लाभ दिया गया है।

    समूह-1 में एमबीबीएस, इंजीनियरिंग, एमडी, एमएस, एमबीए, एमसीए, एमफिल, पीएचडी आदि पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों को शिक्षण शुल्क के साथ गैर-छात्रावासी विद्यार्थियों को 7 हजार रुपये तथा छात्रावासी विद्यार्थियों को 13 हजार 500 रुपये वार्षिक अकादमिक भत्ता दिया जाता है। समूह-2 में बी.फार्मा, नर्सिंग, होटल मैनेजमेंट, एमएससी, एमकॉम, एमएड आदि पाठ्यक्रमों के लिए गैर-छात्रावासी विद्यार्थियों को 6 हजार 500 रुपये एवं छात्रावासी विद्यार्थियों को 9 हजार 500 रुपये तथा समूह-3 में बीए, बीएससी, बीकॉम, बीएड आदि पाठ्यक्रमों के लिए गैर-छात्रावासी विद्यार्थियों को 3 हजार रुपये एवं छात्रावासी विद्यार्थियों को 6 हजार रुपये वार्षिक अकादमिक भत्ता दिया जाता है। शासकीय शिक्षण संस्थाओं में अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए शुल्क भुगतान के संबंध में आय सीमा का बंधन समाप्त कर दिया गया है।

    विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति से विद्यार्थियों को मिल रहे उच्च शिक्षा के वैश्विक अवसर

    अनुसूचित जाति वर्ग के मेधावी विद्यार्थियों को विदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के अवसर उपलब्ध कराने के लिए ‘विदेश में उच्च शिक्षा ग्रहण करने हेतु छात्रवृत्ति योजना’ संचालित की जा रही है। योजना के अंतर्गत प्रतिवर्ष 50 प्रतिभावान विद्यार्थियों का चयन किया जाता है। पात्र विद्यार्थियों के पालकों की वार्षिक आय सीमा 8 लाख रुपये तक निर्धारित है।

    योजना के माध्यम से अब तक 150 से अधिक शोधार्थी एवं विद्यार्थी अमेरिका, इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया, रूस, स्विट्जरलैंड, पोलैंड, चीन, मलेशिया और सिंगापुर सहित विभिन्न देशों में अध्ययन कर चुके हैं। योजना के अंतर्गत इंजीनियरिंग, प्योर एवं एप्लाइड साइंस, एग्रीकल्चर, मेडिकल, मैनेजमेंट, इंटरनेशनल कॉमर्स, लॉ, फॉरेस्ट्री एवं मानविकी विषयों में अध्ययन के लिए शिक्षण शुल्क, मेडिकल इंश्योरेंस, वीजा शुल्क, निर्वाह भत्ता एवं हवाई यात्रा का किराया राज्य शासन द्वारा वहन किया जाता है।

     

  • क्वालिटी टेस्ट में फेल हुईं पैरासिटामोल और BP की दवा, अस्पतालों में इस्तेमाल पर लगी रोक

    क्वालिटी टेस्ट में फेल हुईं पैरासिटामोल और BP की दवा, अस्पतालों में इस्तेमाल पर लगी रोक

    नागपुर
    नागपुर में महाराष्ट्र फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) की क्वालिटी टेस्ट में दो आम इस्तेमाल होने वाली दवाएं पैरासिटामोल और ब्लड प्रेशर की एक दवा फेल हो गई हैं. इसके बाद सरकारी अस्पतालों ने इनको मरीजों को देने पर रोक लगा दी है औरस्टॉक को वापस मंगा लिया है. ये दवाएं गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (GMCH) और इंदिरा गांधी गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल को सप्लाई की गई थीं. इस घटना ने दवाओं की क्वालिटी और उन्हें लेने से पहले टैबलेट की जांच करने की अहमियत को लेकर चिंता बढ़ा दी है। 

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, FDA ने रूटीन टेस्टिंग के दौरान सैंपल लिए थे. टेस्ट के नतीजों के बाद प्रभावित स्टॉक का डिस्ट्रीब्यूशन रोकने और उसे वापस मंगाने के निर्देश दिए गए. इन दवाओं में पैरासिटामोल 500 mg और टेल्मिसार्टन 40 mg शामिल थीं, जिसका इस्तेमाल हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने के लिए किया जाता है. रिपोर्ट्स में बताया गया है कि दवाएं इंदौर की एक दवा कंपनी ने बनाई थी। 

    1.25 लाख पैरासिटामोल टैबलेट वापस मंगवा ली गईं

    TOI की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अस्पताल को FDA से सूचना मिलने के बाद लगभग 1.25 लाख पैरासिटामोल टैबलेट वापस मंगवा ली गईं. ये टैबलेट जुलाई में सप्लाई की गई थीं और टेस्ट के नतीजे मिलने के बाद अस्पताल ने इनका मरीजों को देने पर रोक लगा दी है. जिन पैरासिटामोल टैबलेट की बात हो रही है, उन्हें 'Parasev 500' के नाम से बेचा गया था और वे बैच नंबर PTTC-108 की थीं. सैंपल के ज़रूरी क्वालिटी स्टैंडर्ड्स पर खरा न उतरने के बाद, एहतियात के तौर पर बाकी स्टॉक वापस मंगा लिया गया. दोनों अस्पतालों ने कुल मिलाकर एक लाख से ज्यादा टैबलेट खरीदी थीं, जबकि अकेले GMCH के पास वापस मंगाए जाने के समय प्रभावित स्टॉक में से लगभग 25,000 टैबलेट मौजूद थीं। 

    दूसरी दवा टेल्मिसार्टन 40 mg थी, जो आमतौर पर हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने के लिए दी जाती है. प्रभावित बैच की पहचान CHPLT 416 के तौर पर की गई. टैबलेट पर दिखने वाले दागों के अलावा, यह दवा डिसोल्यूशन टेस्ट में भी फेल हो गई. यह जरूरी है क्योंकि दवा के सही ढंग से काम करने के लिए टैबलेट का अपना एक्टिव इंग्रीडिएंट ठीक से रिलीज करना ज़रूरी होता है. अस्पतालों को निर्देश दिया गया कि वे इसका वितरण रोक दें और वार्ड व फार्मेसी से उपलब्ध स्टॉक वापस मंगा लें.इन दवाओं को खराब क्लालिटी का बताया गया है, हालांकि ये नकली नहीं है। 

    घटिया और नकली दवा में होता है अंतर
    घटिया दवा एक असली दवा होती है जो जरूरी क्वालिटी स्टैंडर्ड्स पर खरी नहीं उतरती. इसमें दवा के रूप-रंग, असर, शुद्धता, घुलने की क्षमता, स्टेबिलिटी या क्वालिटी से जुड़े दूसरे पैरामीटर्स में कमी हो सकती है, 
    वहीं, नकली दवा में गलत इंग्रीडिएंट हो सकता है, एक्टिव इंग्रीडिएंट बहुत कम या बिल्कुल नहीं हो सकता है, या फिर उसकी पहचान या बनाने वाली कंपनी के बारे में गलत जानकारी हो सकती है। 

  • 15 वर्ष में पिछड़ा वर्ग के 5 करोड़ से अधिक विद्यार्थी लाभांवित, 13 हजार करोड़ से अधिक की राशि स्वीकृत

    15 वर्ष में पिछड़ा वर्ग के 5 करोड़ से अधिक विद्यार्थी लाभांवित, 13 हजार करोड़ से अधिक की राशि स्वीकृत

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दूरदर्शी नेतृत्व और निर्णयों के फलस्वरूप प्रदेश में पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों को शिक्षा के हर स्तर पर अभूतपूर्व प्रोत्साहन और वित्तीय सहयोग मिल रहा है। पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों को राज्य सरकार द्वारा प्राथमिक शिक्षा से विदेश अध्ययन के लिये छात्रवृत्ति, नि:शुल्क कोचिंग और प्रशिक्षण जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं में पिछले 15 वर्षों में 13 हजार 156 करोड़ 51 लाख से अधिक की वित्तीय सहायता दी गई है। योजनाओं से लगभग 5 करोड़ 34 लाख 39 हजार 54 से अधिक विद्यार्थी लाभांवित हुए।

    प्री एवं पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति से शिक्षा का सशक्तिकरण

    स्कूली स्तर पर ड्रॉप-आउट दर को समाप्त करने और बच्चों की पढ़ाई निरंतर बनाए रखने के लिए संचालित प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत वर्ष 2012-13 से 2026-27 तक पिछड़ा वर्ग के 4 करोड़ 50 लाख से अधिक विद्यार्थियों को ₹ 2,535 करोड़ से अधिक की छात्रवृत्ति वितरित की जा चुकी है। इसके साथ ही स्कूली शिक्षा में उत्कृष्ट अंक लाने वाले होनहारों को 'प्रावीण्य (मेधावी) छात्रवृत्ति योजना' के तहत पिछड़ा वर्ग के 2,185 विद्यार्थियों को 1 करोड़ 69 लाख रूपये की राशि दी गई है। उच्च एवं व्यावसायिक शिक्षा में कॉलेज स्तर के छात्रों को राहत देते हुए 'पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना' के तहत वर्ष 2012-13 से 2026-27 के दौरान इसी वर्ग के 84.22 लाख विद्यार्थियों को ₹10,467 करोड़ की राशि से संबल प्रदान किया गया है।

    प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए नि:शुल्क कोचिंग, प्रोत्साहन और कौशल विकास

    पिछड़ा वर्ग के युवाओं को प्रशासनिक और प्रतियोगी सेवाओं में सफलता दिलाने के लिए राज्य सरकार द्वारा विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। वर्ष 2021-22 में प्रारंभ की गई 'सरदार पटेल कोचिंग प्रशिक्षण योजना' के तहत 11,174 शिक्षित युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए 23 करोड़ 9 लाख रूपये के व्यय से निशुल्क कोचिंग दी गई है। इसी प्रकार संघ एवं राज्य लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं में सफलता प्राप्त करने वाले 3,354 पिछड़ा वर्ग अभ्यर्थियों को 'सिविल सेवा प्रोत्साहन योजना' के तहत 7 करोड़ 64 लाख रूपये की राशि प्रदान की गई। इसके अलावा वर्ष 2026-27 से युवाओं के सर्वांगीण प्रशिक्षण के लिए शुरू की गई 'शौर्य संकल्प प्रशिक्षण योजना' के अंतर्गत रू 4 करोड़ 83 लाख राशि का व्यय कर 3,827 युवाओं को सफलता पूर्वक प्रशिक्षित किया गया है।

    विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति योजना' से वैश्विक पटल पर साकार होते सपने

    'पिछड़ा वर्ग विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति योजना' में प्रतिष्ठित विदेशी विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए वर्ष 2008-09 से लेकर अब तक पिछड़ा वर्ग के कुल 341 विद्यार्थियों को 122 करोड़ 9 लाख रूपये का वित्तीय अनुदान देकर विदेशों में पढ़ने का मार्ग प्रशस्त किया गया है।