Author: Admin

  • मध्यप्रदेश में बनेगी ‘सेवा के रंग—राष्ट्र के संग’ की विराट तस्वीर

    मध्यप्रदेश में बनेगी ‘सेवा के रंग—राष्ट्र के संग’ की विराट तस्वीर

    मध्यप्रदेश में बनेगी ‘सेवा के रंग—राष्ट्र के संग’ की विराट तस्वीर 

    भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, झाबुआ और आलीराजपुर में हजारों नागरिक बनाएंगे ह्यूमन रंगोली
    ड्रोन कैमरे से दर्ज होगा जनभागीदारी का भव्य दृश्य

    भोपाल

    सेवा, सहभागिता और राष्ट्र निर्माण के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश में सेवा संकल्प अभियान के अवसर पर 9 और 10 अक्टूबर को विशेष आयोजन किया जाएगा। ‘सेवा के रंग—राष्ट्र के संग’ थीम पर प्रदेश के छह जिलों में बड़े मैदानों पर विशाल ह्यूमन रंगोली बनाई जाएगी। इस अनूठे आयोजन में बड़ी संख्या में नागरिकों की सहभागिता होगी और मानव रंगोली के माध्यम से सेवा, राष्ट्रभावना, स्थानीय संस्कृति तथा विकसित भारत के संकल्प को साकार किया जाएगा।

    भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, झाबुआ और आलीराजपुर में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में जनभागीदारी को प्रमुख आधार बनाया गया है। हजारों नागरिक एक निर्धारित स्वरूप में एक साथ खड़े होकर ऐसी जीवंत मानव रंगोली का निर्माण करेंगे, जिसे ऊपर से देखने पर एक विशाल चित्र और संदेश के रूप में देखा जा सकेगा। आयोजन के दौरान ड्रोन कैमरों के माध्यम से इस पूरे दृश्य को रिकॉर्ड किया जाएगा।

    सेवा से राष्ट्र निर्माण तक पहुंचेगा संदेश

    ‘सेवा के रंग—राष्ट्र के संग’ कार्यक्रम का उद्देश्य सेवा को केवल एक गतिविधि के रूप में नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्र निर्माण की भावना से जोड़ना है। आयोजन में स्थानीय कला और लोक-संस्कृति को भी स्थान दिया जाएगा। इसके साथ विकसित भारत के संकल्प और देश की प्रगति का संदेश भी मानव रंगोली के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा।

    स्थानीय संस्कृति और आधुनिक तकनीक का संगम

    आयोजन में मध्यप्रदेश की स्थानीय कला एवं लोक-संस्कृति को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ने की योजना है। विशाल मानव रंगोली के निर्माण के दौरान ड्रोन शूटिंग के जरिए ऊपर से पूरे आयोजन की तस्वीर सामने आएगी। इससे अलग-अलग जिलों में होने वाली जनभागीदारी का व्यापक दृश्य तैयार होगा और सेवा संकल्प का संदेश व्यापक स्तर तक पहुंचाया जा सकेगा।

    ‘सेवा के रंग—राष्ट्र के संग’ कार्यक्रम के लिए राज्य स्तर पर नोडल अनुसूचित जाति मंत्री श्री नागर सिंह चौहान रहेंगे। राज्य प्रभारी अधिकारी की जिम्मेदारी महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव श्रीमती जी.वी. रश्मि को दी गई है। महिला एवं बाल विकास विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है, जबकि जनसंपर्क विभाग और संबंधित छह जिलों का जिला प्रशासन आयोजन में सहयोगी भूमिका निभाएगा।

  • MP के मेधावी छात्रों को CM यादव देंगे स्कूटी की सौगात, 7400 से ज्यादा विद्यार्थी होंगे लाभान्वित

    MP के मेधावी छात्रों को CM यादव देंगे स्कूटी की सौगात, 7400 से ज्यादा विद्यार्थी होंगे लाभान्वित

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश के मेधावी विद्यार्थियों को आज शनिवार को देंगे स्कूटी की सौगात

    7400 से अधिक मेधावी विद्यार्थी होंगे लाभांवित
    भोपाल के शासकीय सुभाष उत्कृष्ट विद्यालय में होगा राज्य स्तरीय कार्यक्रम

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रदेश के मेधावी विद्यार्थियों को शनिवार को बड़ी सौगात देंगे। शासकीय हायर सेकंडरी स्कूलों में कक्षा 12वीं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को 19 सितंबर को ई-स्कूटी का वितरण करेंगे। यह स्कूटी  "मुख्यमंत्री स्कूटी योजना ’ अंतर्गत दी जाएगी। इससे विद्यार्थियों की उच्च शिक्षा की राह आसान होगी। साथ ही, कॉलेज आने-जाने में भी सहूलियत होगी। राज्य स्तरीय स्कूटी वितरण का कार्यक्रम शासकीय सुभाष उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय शिवाजी नगर में भोपाल में सुबह 9 बजे से होगा।

    प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही मुख्यमंत्री स्कूटी योजना का उद्देश्य स्कूली विद्यार्थियों को शैक्षणिक उपलब्धियां हासिल करने के लिए प्रोत्साहित करना है। योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए विद्यार्थियों को कक्षा 12वीं में प्रथम प्रयास में ही 70% अंक के साथ स्कूल में प्रथम स्थान आना जरूरी है। प्रदेश सरकार द्वारा इस योजना का लाभ स्कूल शिक्षा एवं जनजातीय कार्य विभाग के शासकीय हायर सेकंडरी स्कूलों में नियमित विद्यार्थी के रूप में अध्ययनरत विद्यार्थी को दिया जाता है। योजना में सभी संकायों के विद्यार्थियों को शामिल किया गया है। मोटराइज्ड स्कूटी के लिए अधिकतम 90 हजार रुपये और ई-स्कूटी के लिए अधिकतम 1.20 लाख रुपये की राशि प्रदान की जाती है।

    अब तक प्रदेश के 23,000 से अधिक पात्र विद्यार्थी हो चुके हैं लाभान्वित

    प्रदेश सरकार द्वारा योजना अंतर्गत शिक्षण सत्र 2025-26 के लिए प्रदेश के 7,400 से अधिक पात्र विद्यार्थियों को ई-स्कूटी का वितरण किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि मेधावी विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही इस योजना से अब तक प्रदेश के 23,000 से अधिक पात्र विद्यार्थी लाभान्वित हो चुके हैं। योजना के संचालन पर अब तक लगभग 246 करोड़ रुपये व्यय किए गए हैं। मुख्यमंत्री स्कूटी योजना मेधावी विद्यार्थियों की मेहनत और उपलब्धि को प्रोत्साहित करने के साथ ही आगे की पढ़ाई के लिए सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में प्रदेश सरकार की महत्वपूर्ण पहल है। शासकीय स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित करने से शिक्षा के प्रति उनका उत्साह बढ़ रहा है और उच्च शिक्षा की ओर उनकी भागीदारी को मजबूत करने में भी मदद मिल रही है।

     

  • UPI पेमेंट पर ग्राहकों को नहीं देना होगा चार्ज, 15 अक्टूबर से नए नियम से पहले सरकार का बड़ा कदम

    UPI पेमेंट पर ग्राहकों को नहीं देना होगा चार्ज, 15 अक्टूबर से नए नियम से पहले सरकार का बड़ा कदम

    नई दिल्ली

    यूपीआई चार्ज को लेकर सियासी घमासान है. सरकार साफ कर चुकी है कि यूपीआई फीस का बोझ आम लोगों पर नहीं पड़ेगा. बावजूद इसके गफलत की स्थिति है. लोगों को डर सता रहा है कि आखिरकार इसका असर आम आदमी पर ही पड़ेगा. यूपीआई फीस भले ही मर्चेंट पर लागू हो, मगर यूजर्स से ही इसकी वसूली होगी. यही कारण है कि यूपीआई चार्ज को लेकर सरकार के इस फैसले पर अलग-अलग राय देखने को मिल रही है. बहरहाल, 2000 रुपए से अधिक के कमर्शियल यूपीआई पेमेंट पर चार्ज का असर आम जनता पर न पड़े, इसके लिए सरकार पूरी कोशिश में लगी है. सूत्रों की मानें तो सरकार पेमेंट एग्रीगेटर्स के साथ बातचीत कर रही है ताकि यूपीआई फीस का बोझ आम ग्राहकों पर न पड़े। 

    दरअसल, नया नियम यह है कि अब ₹2000 से ज्यादा के यूपीआई पेमेंट पर 0.4% MDR लागू होगा. यह नियम 15 अक्टूबर से लागू होगा. सरकार यह साफ कर चुकी है कि यह शुल्क ग्राहकों से नहीं, कारोबारियों से लिया जाएगा. यानी आम यूजर्स के लिए पेमेंट सिस्टम पहले की तरह ही होगा. उसके ऊपर फीस का कोई बोझ नहीं पड़ने वाला है. मगर अब क्योंकि लोगों में डर है कि कंपनियां इस चार्ज की वसूली आम यूजर्स से कर सकती है. इसलिए सरकार अब यह सुनिश्चित करने के लिए निगरानी व्यवस्था बना रही है कि दुकानदार या कारोबारी यूपीआई फीस का यह बोझ ग्राहकों पर न डालें। 

    केंद्र सरकार ने क्या कदम उठाया
    सरकारी सूत्रों ने  बताया कि केंद्र सरकार ने यूपीआई इकोसिस्टम में पेमेंट एग्रीगेटर्स और दूसरे स्टेकहोल्डर्स के साथ बातचीत शुरू कर दी है. इसका मकसद यह पक्का करना है कि हाल ही में लागू किए गए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) का बोझ ग्राहकों पर न डाला जाए। 

    मॉनिटरिंग सिस्टम तैयार कर रही सरकार
    समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त मंत्रालय एक मॉनिटरिंग सिस्टम भी तैयार कर रहा है ताकि यह देखा जा सके कि मर्चेंट इस फीस का बोझ ग्राहकों पर न डालें. ऐसी चिंताएं हैं कि नए चार्ज से बड़े पेमेंट के लिए यूपीआई इस्तेमाल करने वाले लोगों की लागत बढ़ सकती है। 

    15 अक्टूबर से बदल रहा यूपीआई पेमेंट नियम
    दरअसल, नए नियमों के तहत 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के पर्सन-टू-मर्चेंट यूपीआई ट्रांजेक्शन पर 0.4% एमडीआर यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होगा. यह फीस मर्चेंट यानी कारोबारी देंगे, ग्राहक नहीं. 75,000 रुपये या उससे अधिक के ट्रांजेक्शन के लिए यह चार्ज ज़्यादा से ज़्यादा 300 रुपये होगा। 

    वित्त मंत्रालय का क्या अनुमान
    इस बीच वित्त मंत्रालय का अनुमान है कि 2,000 रुपये से अधिक के व्यापारी यूपीआई लेनदेन पर 15 अक्टूबर से 0.4 प्रतिशत ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ (एमडीआर) लागू होने से नकदी लेनदेन नहीं बढ़ेगा. सूत्रों ने कहा कि इस फैसले से यूपीआई लेनदेन की कुल मात्रा का सिर्फ चार प्रतिशत प्रभावित होगा और इससे यूपीआई के इस्तेमाल में कमी आने की संभावना नहीं है. उन्होंने कहा कि रुपे डेबिट कार्ड से होने वाले लेनदेन किसी भी राशि के लिए पूरी तरह निशुल्क हैं। 

  • EPFO Wage Limit बढ़ी! ₹15,000 से ₹25,000 हुई लिमिट, कर्मचारियों को मिलेंगे ये 5 बड़े फायदे

    EPFO Wage Limit बढ़ी! ₹15,000 से ₹25,000 हुई लिमिट, कर्मचारियों को मिलेंगे ये 5 बड़े फायदे

     नई दिल्ली

    हर महीने सैलरी से होने वाला PF डिडक्शन कई कर्मचारियों को हाथ में आने वाले वेतन से अनचाही कटौती जैसा लगता है. लेकिन यही रकम समय के साथ रिटायरमेंट की बड़ी बचत बन सकती है. अब ऐसे कर्मचारियों की संख्या बढ़ने वाली है, जिन्हें नौकरी के साथ PF, पेंशन और इंश्योरेंस जैसी सामाजिक सुरक्षा का फायदा मिल सकेगा। 

    सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) के दायरे को बढ़ाने के लिए वेज लिमिट में बड़ा बदलाव किया है. इसका असर खास तौर पर उन कर्मचारियों पर पड़ेगा, जिनकी मंथली सैलरी अब तक तय सीमा से ज्यादा होने की वजह से अनिवार्य EPF कवरेज से बाहर रह जाती थी। 

    ₹15,000 से बढ़कर ₹25,000 हुई वेज लिमिट

    कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत एम्प्लॉयी प्रोविडेंट फंड (EPF) की वेज लिमिट (Wage Limit) को ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 मंथली कर दिया गया है. यानी अब ₹15,000 से ₹25,000 तक की मंथली सैलरी वाले सभी कर्मचारियों को EPF के दायरे में लाया जा सकेगा. सरकार को उम्मीद है कि इस बदलाव से 51 लाख से ज्यादा अतिरिक्त कर्मचारी EPFO के दायरे में आएंगे. इसका मतलब है कि बड़ी संख्या में नौकरीपेशा लोगों को औपचारिक सोशल सिक्योरिटी सिस्टम से जुड़ने का मौका मिलेगा. अब सवाल है कि एक कर्मचारी के लिए इसका सीधा असर क्या होगा? कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के इस फैसले से कर्मचारियों को होने वाले 5 बड़े फायदे समझिए…

    1. रिटायरमेंट के लिए सेविंग्स फंड
    एम्प्लॉयी प्रोविडेंट फंड का सबसे बड़ा फायदा लंबी अवधि की बचत है. कर्मचारी की नौकरी के दौरान हर महीने PF में योगदान जमा होता रहता है. इस रकम पर सरकार की तरफ से 8.25% सालाना की दर से ब्याज भी मिलता है. हालांकि, ब्याज की दर फिक्स नहीं है और सरकार समय-समय पर इसे बढ़ा या घटा सकती है. इसके बावजूद EPF पर मिलने वाली ब्याज बैंकों की एफडी से अच्छी ही रहती है. आपकी सैलरी से हर महीने कटने वाली पीएफ की रकम लंबे समय तक जमा रहने पर एक बड़ा रिटायरमेंट कॉर्पस तैयार होता है. वेज लिमिट बढ़ने से अब ज्यादा कर्मचारी इस सिस्टम में शामिल हो सकेंगे. खास तौर पर वे कर्मचारी जो पहले ₹15,000 की सीमा से ऊपर वेतन होने के कारण अनिवार्य EPF कवरेज से बाहर रह जाते थे, उन्हें नियमित रिटायरमेंट सेविंग का रास्ता मिल सकता है। 

    2. EPS के जरिए पेंशन का फायदा
    कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) से जुड़ने का दूसरा बड़ा फायदा कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) से जुड़ा है. पात्र कर्मचारियों को नियमों के मुताबिक रिटायरमेंट के बाद पेंशन का लाभ मिल सकता है. EPS सिर्फ रिटायरमेंट तक सीमित नहीं है. तय नियमों और पात्रता के तहत इसमें दिव्यांगता पेंशन और परिवार के लिए पेंशन जैसी सुविधाएं भी शामिल हैं. यानी EPFO की सदस्यता नौकरी खत्म होने के बाद भी वित्तीय सुरक्षा का एक आधार दे सकती है। 

    3. नौकरी के साथ इंश्योरेंस कवर भी
    EPFO की सदस्यता के साथ एम्प्लॉई डिपॉजिट लिं
    क्ड इंश्योरेंस (EDLI) का कवर भी जुड़ा होता है. यह कर्मचारी को जीवन बीमा से जुड़ी वित्तीय सुरक्षा देता है. इसका मतलब है कि EPF में शामिल होने वाला कर्मचारी सिर्फ अपनी रिटायरमेंट सेविंग नहीं बनाता, बल्कि कुछ परिस्थितियों में उसके परिवार के लिए भी आर्थिक सुरक्षा का इंतजाम होता है. वेज लिमिट बढ़ने से यह सुरक्षा ज्यादा कर्मचारियों तक पहुंच सकती है। 

    4. सोशल सिक्योरिटी सिस्टम का दायरा बढ़ेगा
    वेज लिमिट बढ़ने का एक बड़ा असर यह है कि ज्यादा कर्मचारी औपचारिक सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा बन सकेंगे. पहले ₹15,000 से ज्यादा वेतन के साथ नई नौकरी शुरू करने वाले कई कर्मचारी अनिवार्य EPF कवरेज से बाहर रह जाते थे. अब ₹15,000 से ₹25,000 की वेज सीमा के बीच आने वाले कर्मचारियों के लिए कवरेज का दायरा बढ़ेगा. इससे नौकरीपेशा लोगों को बचत, पेंशन और इंश्योरेंस जैसी सुविधाओं के एक ही सिस्टम से जुड़ने का मौका मिलेगा। 

    5. भविष्य की वित्तीय सुरक्षा और मजबूत होगी
    इस बदलाव का फायदा सिर्फ आज की सैलरी या PF कटौती तक सीमित नहीं है. EPF, EPS और EDLI मिलकर कर्मचारी को लंबी अवधि में कई तरह की वित्तीय सुरक्षा देते हैं. नियमित PF योगदान से रिटायरमेंट के लिए फंड बनता है, EPS के जरिए पात्रता के अनुसार पेंशन का रास्ता खुलता है और EDLI के जरिए इंश्योरेंस कवर मिलता है. यानी एक कर्मचारी के लिए यह व्यवस्था नौकरी के दौरान बचत और भविष्य की सुरक्षा, दोनों का आधार बन सकती है। 

    किन कर्मचारियों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर?
    अगर आपकी मंथली सैलरी ₹15,000 से ₹25,000 के बीच है और आप अब तक वेज लिमिट की वजह से अनिवार्य EPF कवरेज से बाहर थे, तो यह बदलाव आपके लिए खास मायने रखता है. नई व्यवस्था के तहत ऐसे सभी कर्मचारी अब EPFO के दायरे में आ जाएंगे. सरकार को उम्मीद है कि वेज लिमिट बढ़ने से 51 लाख से ज्यादा अतिरिक्त कर्मचारी सोशल सिक्योरिटी सिस्टम से जुड़ेंगे. EPFO ने भी कहा है कि बदलती सैलरी और कर्मचारी ढांचे को देखते हुए कवरेज का दायरा बढ़ाना जरूरी है. सीधी बात यह है कि वेज लिमिट बढ़ने से सिर्फ EPF में शामिल होने वाले कर्मचारियों की संख्या नहीं बढ़ेगी, बल्कि ज्यादा नौकरीपेशा लोगों को रिटायरमेंट बचत, पेंशन और इंश्योरेंस जैसी सुरक्षा का फायदा मिल सकता है। 

  • रेलवे की बड़ी तैयारी! दूसरी वंदे भारत स्लीपर ट्रेन जल्द, प्रयागराज में भी होगा स्टॉपेज

    रेलवे की बड़ी तैयारी! दूसरी वंदे भारत स्लीपर ट्रेन जल्द, प्रयागराज में भी होगा स्टॉपेज

    नई दिल्ली

    भारतीय रेलवे दूसरी स्लीपर वंदे भारत एक्सप्रेस शुरू करने की योजना बना रही है। यह हाई स्पीड ट्रेन दिल्ली और वाराणसी के बीच चलेगी जो कि प्रयागराज और कानपुर से होकर गुजरेगी। इस बात की संभावना है कि दीवाली से पहले इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाई जा सकती है। इसका ट्रायल इसी महीने शुरू होने की संभावना है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रेन वाराणसी कैंट से रात 9:20 बजे चलेगी और रात 10:45 बजे प्रयागराज पहुंचेगी। यह कानपुर सेंट्रल से रात 12:35 बजे पहुंचेगी और सुबह 5 बजे नई दिल्ली।

    वापसी की यात्रा में यह नई दिल्ली से रात 9:20 बजे चलेगी और सुबह 5 बजे वाराणसी पहुंचेगी। इस ट्रेन की स्पीड 130 किमी/घंटा से 160 किमी/घंटा के बीच होने की उम्मीद है। इसकी वजह से दिल्ली, प्रयागराज और वाराणसी के बीच यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा।

    इस नई चमचमाती ट्रेन में कुल 16 कोच होंगे। वहीं, इसमें 823 यात्रियों के बैठने की क्षमता होगी। इसमें 11 AC थ्री-टियर कोच, चार AC टू-टियर कोच और एक फर्स्ट AC कोच शामिल होंगे। ट्रेन में वंदे भारत सर्विस वाली आधुनिक सुविधाएं होंगी।

    आपको बता दें कि हावड़ा-कामाख्या रूट के बाद भारतीय रेलवे की योजना के अनुसार यह दूसरी स्लीपर वंदे भारत सर्विस होगी। रेलवे बोर्ड ने अभी तक ट्रेन नंबर, किराया और सर्विस शुरू होने की तारीख की घोषणा नहीं की है।

    पुतिन ने वंदे भारत के स्लीपर ट्रेनसेट का मॉडल देखा

    आपको बता दें कि वंदे भारत एक्सप्रेस भारतीय रेल का एक सफल मॉडल है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत मंडपम में आयोजित 'इन्नोप्रोम' प्रदर्शनी में रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) के स्टॉल का दौरा किया और वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट का मॉडल देखा। आरवीएनएल और रूसी कंपनी ट्रांसमैशहोल्डिंग (टीएमएच) ने मिलकर 'किनेट रेलवे सॉल्यूशंस लिमिटेड' नाम का एक भारत-रूस संयुक्त उपक्रम बनाया है। यह कंपनी महाराष्ट्र में अपनी मराठवाड़ा फैक्टरी में 120 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट बनाएगी, जिनमें से हर एक में 16 डिब्बे होंगे।

    भविष्य में 160 किमी की रफ्तार से चलेगी ट्रेन
    शुरुआती चरण में इस हाई तकनीक ट्रेन की अधिकतम रफ्तार 130 किमी प्रति घंटा तय की गई है। अमर उजाला की खबर के अनुसार, मिशन रफ्तार प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद भविष्य में इसकी रफ्तार 160 किमी प्रति घंटा की जाएगी। इस आधुनिक ट्रेन का ठहराव सफर के दौरान प्रयागराज के अलावा कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर भी होगा। ट्रेन की प्राइमरी मेंटेनेंस की जिम्मेदारी उत्तर रेलवे संभालेगा।

    वाराणसी और नई दिल्ली से रात 9.20 बजे चले ट्रेन
    वाराणसी और नई दिल्ली से इसे रात 9:20 बजे चलाया जा सकता है। दोनों ही स्टेशनों पर पहुंचने का समय भी सुबह पांच बजे प्रस्तावित है।

    16 कोच की ट्रेन में 823 यात्री करेंगे सफर
    यह ट्रेन 16 कोच की होगी, जिसमें में 823 यात्री कर सफर सकेंगे। इसमें एसी थर्ड टियर के 11, एसी सेकंड टियर के चार और फर्स्ट एसी का एक कोच रहेगा। क्षेत्रीय रेल उपयोगकर्ता परामर्शदात्री समिति (जेडआरयूसीसी) एनसीआर के सदस्य सांसद प्रवीण पटेल का कहना है इससे यात्रियों का सफर और ज्यादा आरामदायक हो जाएगा।

  • 19 सितंबर राशिफल: शनिवार को चमकेगा इन राशियों का भाग्य, धन लाभ के बनेंगे योग

    19 सितंबर राशिफल: शनिवार को चमकेगा इन राशियों का भाग्य, धन लाभ के बनेंगे योग

    मेष राशि- आपका मन रचनात्मक कामों में लगा रहेगा। करियर में नई संभावनाएं बन सकती हैं। पैसों की स्थिति संतुलित बनी रहेगी। परिवार और रिश्तों में मिठास रहेगी। सेहत ठीक रहेगी और आत्मविश्वास में बढ़ोतरी होगी।

    वृषभ राशि- किस्मत आपका पूरा साथ देती नजर आएगी। करियर और पढ़ाई के क्षेत्र में सफलता मिलने के योग हैं। यात्रा या किसी नए काम की शुरुआत संभव है। पैसों का लाभ होगा। मन खुश रहेगा और दिन भर ऊर्जा बनी रहेगी।

    मिथुन राशि- मेहनत ज्यादा करनी पड़ सकती है, लेकिन उसका नतीजा सकारात्मक रहेगा। करियर में आगे बढ़ने के मौके मिल सकते हैं। पैसों को लेकर कोई भी फैसला सोच-समझकर लें। प्रेम संबंधों में भरोसा बनाए रखना ज़रूरी होगा। सेहत सामान्य रहेगी।

    कर्क राशि- रिश्तों और काम के बीच संतुलन बनाकर चलना जरूरी होगा। साझेदारी से जुड़े कामों में फायदा हो सकता है। नौकरीपेशा लोगों को नई ज़िम्मेदारी मिल सकती है। पैसों की स्थिति सामान्य से बेहतर रहेगी। मानसिक शांति के लिए खुद को थोड़ा समय देना फायदेमंद रहेगा।

    सिंह राशि- नए विचार और योजनाएं आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकती हैं। नौकरी और व्यापार में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे। दोस्तों और सहयोगियों का साथ मिलेगा। प्रेम जीवन में समझ और तालमेल बना रहेगा। मानसिक रूप से आज खुद को हल्का और शांत महसूस करेंगे।

    कन्या राशि- आपको अपनी योजनाओं पर पूरा ध्यान बनाए रखना होगा। कामकाज में की गई मेहनत का पूरा लाभ मिलने की संभावना है। पैसों से जुड़े मामलों में सोच-समझकर फैसला लें। घर का माहौल सुखद रहेगा। सेहत में धीरे-धीरे सुधार महसूस होगा।

    तुला राशि- जिम्मेदारियों का बोझ थोड़ा बढ़ सकता है, लेकिन आप सब कुछ अच्छे से संभाल लेंगे। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत रंग लाएगी और नतीजे आपके पक्ष में रहेंगे। पैसों की स्थिति मज़बूत रहेगी। परिवार का पूरा सहयोग मिलेगा। सेहत को लेकर थोड़ी सावधानी जरूरी है।

    वृश्चिक राशि- दिन आपके लिए अच्छे संकेत लेकर आया है। करियर से जुड़ी कोई अच्छी खबर मिल सकती है। मान-सम्मान में बढ़ोतरी होगी और लोग आपकी बातों को गंभीरता से लेंगे। पैसों की स्थिति मज़बूत होने के योग हैं। प्रेम जीवन में उत्साह और नयापन बना रहेगा। सेहत भी अच्छी रहेगी।

    धनु राशि- आप भावनात्मक रूप से थोड़े संवेदनशील रह सकते हैं। कामकाज में धैर्य रखना ज़रूरी होगा। परिवार में किसी बात को लेकर चिंता हो सकती है, लेकिन बातचीत से समाधान निकल आएगा। पैसों की स्थिति संतुलित रहेगी। सेहत के लिहाज से आराम जरूरी है, खुद को ज्यादा थकाने से बचें।

    मकर राशि- आपकी बात करने की कला आपको फायदा दिला सकती है। नए लोगों से संपर्क बनेंगे, जो आने वाले समय में काम आ सकते हैं। करियर से जुड़े रुके हुए काम आगे बढ़ सकते हैं। धन लाभ के योग भी बन रहे हैं। दोस्तों का सहयोग मिलेगा। सेहत सामान्य रहेगी, लेकिन ज्यादा काम करने से थकान महसूस हो सकती है।

    कुंभ राशि- दिन धैर्य और समझदारी से आगे बढ़ने का है। नौकरी और व्यापार में काम धीरे-धीरे सही दिशा में बढ़ेगा। खर्च थोड़े बढ़ सकते हैं, इसलिए फालतू खर्च से बचना बेहतर रहेगा। परिवार के साथ समय बिताने से मन को सुकून मिलेगा। प्रेम संबंधों में स्थिरता बनी रहेगी। सेहत को लेकर लापरवाही न करें।

    मीन राशि- आप खुद को पहले से ज्यादा ऊर्जावान और आत्मविश्वास से भरा हुआ महसूस करेंगे। कामकाज में आपकी मेहनत साफ नजर आएगी और अधिकारी आपके काम से खुश हो सकते हैं। पैसों के मामले में सुधार के संकेत हैं, लेकिन जल्दबाज़ी में कोई बड़ा खर्च करने से बचें। घर का माहौल सामान्य रहेगा। सेहत ठीक रहेगी, बस गुस्से और तनाव को खुद पर हावी न होने दें।

  • आशीर्वाद का दीया’ बना विश्व रिकॉर्ड का साक्षी

    आशीर्वाद का दीया’ बना विश्व रिकॉर्ड का साक्षी

    रायपुर, 

     प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी जी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में आयोजित ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम ने जनभागीदारी और सेवा भावना का नया अध्याय रचा है। रायपुर में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में 25 लाख से अधिक दीप प्रज्वलित किए गए, वहीं प्रदेशभर में 1.50 करोड़ से अधिक दीयों की रोशनी से सेवा, सुशासन और जनभागीदारी का संदेश दिया गया। इस ऐतिहासिक आयोजन के लिए ‘आशीर्वाद का दीया’ का नाम गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया।

    वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी ने इस उपलब्धि को छत्तीसगढ़ की जनता की व्यापक सहभागिता और सामूहिक संकल्प का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी जी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्षों की सेवा यात्रा पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित ‘आशीर्वाद का दीया’ में प्रदेशवासियों ने जिस उत्साह और आत्मीयता के साथ भागीदारी की, वह अभूतपूर्व है।

     चौधरी ने कहा कि रायपुर में 25 लाख से अधिक दीपों का प्रज्वलन और प्रदेशभर में 1.50 करोड़ से अधिक दीयों का जलना छत्तीसगढ़ की जनता के उत्साह और जनभागीदारी की व्यापकता को दर्शाता है। यह केवल दीप प्रज्वलन का आयोजन नहीं, बल्कि सेवा, सुशासन और राष्ट्र निर्माण की भावना के प्रति जनसहभागिता का सामूहिक उत्सव बना।

    ‘आशीर्वाद का दीया’ के माध्यम से प्रदेश के विभिन्न जिलों में गांवों से लेकर शहरों तक नागरिकों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न वर्गों ने सहभागिता की। दीपों की रोशनी के माध्यम से प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी जी की 25 वर्षों की सार्वजनिक सेवा यात्रा के प्रति आभार और विकसित भारत के संकल्प के साथ विकसित छत्तीसगढ़ की भावना को अभिव्यक्ति मिली।

    इस व्यापक जनभागीदारी ने ‘आशीर्वाद का दीया’ को विशेष पहचान दिलाई और आयोजन का नाम गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ। यह उपलब्धि छत्तीसगढ़वासियों की सामूहिक सहभागिता और उत्साह का प्रमाण है।

  • 9 लाख 77 हजार से अधिक स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को मिली 10.53 करोड़ रुपये की छूट

    9 लाख 77 हजार से अधिक स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को मिली 10.53 करोड़ रुपये की छूट

    भोपाल 

    मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के कार्यक्षेत्र के भोपाल, नर्मदापुरम, ग्वालियर एवं चंबल संभाग अंतर्गत आने वाले 16 जिलों के स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के लिए अगस्त माह लाभदायक रहा। कंपनी द्वारा स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को टाइम ऑफ डे (ToD) टैरिफ व्यवस्था के तहत सोलर आवर्स (सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक) में बिजली की खपत पर 20 प्रतिशत तक की विशेष छूट का लाभ दिया जा रहा है।

    इसी के तहत अगस्त -2026 में कंपनी कार्यक्षेत्र के कुल 9 लाख 77 हजार 400 स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को उनके बिजली बिलों में कुल ₹10.53 करोड़ रुपये की ToD छूट का सीधा लाभ मिला। इनमें भोपाल रीजन के 7 लाख 94 हजार 972 उपभोक्ताओं को 7 करोड़ 80 लाख 50 हजार रुपये तथा ग्वालियर रीजन के 1 लाख 82 हजार 428 उपभोक्ताओं को 2 करोड़ 72 लाख 82 हजार रुपये की छूट प्रदान की गई।

    मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध संचालक श्री ऋषि गर्ग ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे आधुनिक तकनीक का लाभ उठाते हुए अपने परिसरों में स्मार्ट मीटर लगवाएं। स्मार्ट मीटर न केवल ऊर्जा प्रबंधन को बेहतर बनाते हैं, बल्कि उपभोक्ताओं को अपनी बिजली खपत पर नियंत्रण रखने और आर्थिक बचत करने का अवसर भी प्रदान करते हैं। उन्होंने बताया कि टाइम ऑफ डे (ToD) टैरिफ के तहत स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को सोलर आवर्स (सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक) बिजली उपयोग करने पर ऊर्जा प्रभार की सामान्य दर में 10 किलोवाट तक स्वीकृत लोड/अनुबंध मांग वाले उपभोक्ताओं को 20 प्रतिशत तक की छूट दी जा रही है। स्मार्ट मीटर से संबंधित किसी भी जानकारी के लिए उपभोक्ता 1912 पर संपर्क कर सकते हैं अथवा श्री कैलाश कुमार चौधरी, प्रबंधक (स्मार्ट मीटरिंग सेल) से संपर्क कर सकते हैं। साथ ही Smartmeteringcellbhopal@gmail.com पर ई-मेल के माध्यम से भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

    उपभोक्ताओं को घरेलू स्मार्ट मीटर से मिलने वाले फायदे

    •     ऊर्जा की खपत को ट्रैक करने और ऊर्जा की बचत करने में मदद करता है।
    •     बिजली की खपत को सटीक रूप से मापता है, जिससे बिल में कोई गलती नहीं होती।
    •     ऐप के जरिए मोबाइल पर रियल-टाइम डेटा देखकर ऊर्जा की खपत को नियंत्रित कर सकते हैं।
    •     ऊर्जा की गुणवत्ता के बारे में जानकारी मिलती है, ताकि ऊर्जा की खपत को बेहतर बना सकते हैं।
    •     ऊर्जा की खपत को ऑनलाइन ट्रैक करने और नियंत्रित करने की सुविधा मिलती है।
    •     ऊर्जा की खपत को कम करने से पर्यावरण पर पड़ने वाला प्रभाव कम होता है।
    •  
  • सूरज की ऊर्जा से सुकमा में विकास की नई रोशनी, गांवों में रोशनी से लेकर खेतों की सिंचाई तक आसान हुआ जीवन

    सूरज की ऊर्जा से सुकमा में विकास की नई रोशनी, गांवों में रोशनी से लेकर खेतों की सिंचाई तक आसान हुआ जीवन

    रायपुर

    सुकमा जिले के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में सौर ऊर्जा अब केवल बिजली का विकल्प नहीं, बल्कि रोशनी, पेयजल, सिंचाई और रोजमर्रा की सुविधाओं को मजबूत करने का माध्यम बन रही है। गांवों में सोलर हाईमास्ट से रात रोशन हो रही है, सोलर पम्पों से पेयजल की उपलब्धता आसान हुई है और किसानों के खेतों तक सिंचाई का पानी पहुंचाने में सौर ऊर्जा महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

    प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के विकास विजन में गांवों में आधुनिक सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने, स्वच्छ ऊर्जा को प्रोत्साहित करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष जोर रहा है। ‘विकसित भारत’ की परिकल्पना में ग्रामीण भारत को मजबूत आधार देना इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है। प्रधानमंत्री  मोदी ने छत्तीसगढ़ के ‘विकसित भारत विकसित छत्तीसगढ़’ कार्यक्रम में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने, छत्तीसगढ़ को सौर ऊर्जा का केंद्र बनाने और किसानों को ‘अन्नदाता से ऊर्जादाता’ बनाने की दिशा में सरकार के प्रयासों का उल्लेख किया था। इसी व्यापक सोच के अनुरूप सुकमा जैसे दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों में स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार सौर ऊर्जा आधारित सुविधाओं का विस्तार ग्रामीण जीवन में प्रत्यक्ष बदलाव ला रहा है।

    अंधेरे से रोशनी तक, 71 सोलर हाईमास्ट से बदल रही गांवों की रात

    कभी शाम ढलते ही अंधेरे में सिमट जाने वाले सुकमा के कई गांवों में अब सौर ऊर्जा से संचालित हाईमास्ट रोशनी का माध्यम बन रहे हैं। नियद नेल्लानार योजना के जरिए सिलगेर, सालातोंग, टेकलगुडियम, पूवर्ती, बगडेगुड़ा, सुरपनगुड़ा, दुलेड़, मोरपल्ली, मंडीमरका, बेदरे, केरलापेन्दा और तोकनपल्ली सहित विभिन्न ग्रामों एवं नगरीय निकाय क्षेत्रों में 71 सोलर हाईमास्ट संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। वहीं 8 अन्य संयंत्रों की स्थापना प्रगतिरत है।

    इन हाईमास्ट की रोशनी का लाभ केवल सड़कों और चौक-चौराहों तक सीमित नहीं है। शाम के बाद जरूरी काम से आने-जाने वाले ग्रामीणों, बाजार जाने वाले परिवारों, बच्चों और युवाओं तथा सार्वजनिक आयोजनों में शामिल होने वाले लोगों के लिए यह रोशनी सुविधा का नया आधार बनी है। महिलाओं, बुजुर्गों और राहगीरों के लिए भी गांवों में आवागमन पहले की तुलना में अधिक सुविधाजनक हुआ है।

    सौर ऊर्जा आधारित सुविधाओं के रखरखाव में भी प्रशासन की तत्परता दिखाई दे रही है। सुशासन तिहार में प्राप्त शिकायतों पर क्रेडा जिला कार्यालय द्वारा कार्रवाई करते हुए खराब सोलर हाईमास्ट संयंत्रों की एलईडी लाइट और बैटरियों को बदला गया। इससे बंद पड़ी रोशनी फिर से शुरू हुई और ग्रामीणों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप सुविधा मिल सकी।

    672 सोलर पम्पों से पेयजल की राह हुई आसान

    सौर ऊर्जा का दूसरा महत्वपूर्ण प्रभाव ग्रामीण पेयजल व्यवस्था में दिखाई दे रहा है। जल जीवन मिशन के तहत जिले के विभिन्न गांवों में 672 सोलर पम्प स्थापित किए गए हैं। इससे दूरस्थ क्षेत्रों में सौर ऊर्जा का उपयोग पेयजल व्यवस्था को सुगम बनाने में किया जा रहा है। केंद्र सरकार के जल जीवन मिशन का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों तक सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल की सुविधा पहुंचाना है। वर्ष 2026 में केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन को दिसंबर 2028 तक जारी रखने तथा इसे केवल बुनियादी ढांचे के निर्माण से आगे बढ़ाकर नागरिक-केंद्रित सेवा वितरण पर अधिक केंद्रित करने का निर्णय लिया है।

    सुकमा के ग्रामीण क्षेत्रों में सोलर पम्पों के माध्यम से पेयजल व्यवस्था को ऊर्जा की उपलब्धता से जोड़ा जाना दूरस्थ गांवों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। जिन परिवारों को पहले पानी के लिए नदी, झिरिया या कुओं तक जाना पड़ता था, उनके लिए गांव में ही सौर ऊर्जा से संचालित पम्प के माध्यम से पानी उपलब्ध होने से समय और श्रम की बचत हो रही है। इसका लाभ विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों को मिल रहा है, जिन्हें पानी लाने में अतिरिक्त समय और मेहनत नहीं करनी पड़ती।

    4,300 सोलर पम्पों से किसानों को सिंचाई का सहारा

    सौर ऊर्जा का सबसे सीधा प्रभाव सुकमा के किसानों के खेतों में भी दिखाई दे रहा है। सौर सुजला योजना के तहत पिछले आठ वर्षों में जिले में 4,300 सोलर पम्प किसानों के खेतों तक पहुंच चुके हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में निर्धारित 200 सोलर पम्पों का लक्ष्य भी पूरा किया गया है। सिंचाई के लिए सौर ऊर्जा आधारित पम्प किसानों को खेतों तक पानी पहुंचाने में सहारा दे रहे हैं। इससे कृषि कार्यों को समय पर करने और उपलब्ध जल स्रोतों का उपयोग करने में सुविधा मिल रही है। 

    दूरस्थ अंचलों में सौर ऊर्जा बन रही विकास की साथी

    सुकमा में सौर ऊर्जा का विस्तार केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। कोन्टा विकासखंड के जगरगुंडा में सोलर स्ट्रीट लाइट स्थापित की गई है। वहीं पोलमपल्ली, चिंतागुफा, चिंतलनार और भेज्जी में 4.8 किलोवाट क्षमता के सोलर स्ट्रीट लाइट संयंत्रों की स्थापना स्वीकृत है। नगरीय निकाय क्षेत्रों में खराब स्ट्रीट लाइटों के सुधार का कार्य भी जारी है।

    इस तरह एक ओर गांवों की गलियां और चौक-चौराहे रोशन हो रहे हैं, तो दूसरी ओर घरों तक पेयजल और खेतों तक सिंचाई पहुंचाने में सौर ऊर्जा मददगार बन रही है। इससे ग्रामीणों के समय और श्रम की बचत के साथ उनकी दैनिक गतिविधियों में सुविधा बढ़ रही है।

    प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी का विजन, गांवों के जीवन में दिख रहा बदलाव

    प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने ग्रामीण भारत के विकास के संदर्भ में बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता और ग्रामीणों के जीवन को आसान बनाने को सरकार की प्राथमिकताओं से जोड़ा है। सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भी उनका जोर स्वच्छ ऊर्जा, आत्मनिर्भरता और आम नागरिकों को ऊर्जा उत्पादन में भागीदार बनाने पर रहा है। पीएम सूर्य घर जैसी पहल के माध्यम से घरों में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने तथा किसानों को सौर ऊर्जा से जोड़ने की दिशा में केंद्र सरकार की नीतियां इसी व्यापक ऊर्जा आत्मनिर्भरता की सोच को आगे बढ़ाती हैं।

    सौर ऊर्जा से जुड़े इस राष्ट्रीय विजन का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि ऊर्जा का लाभ केवल बड़े शहरों तक सीमित न रहे, बल्कि दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचे। सुकमा में सौर हाईमास्ट, सोलर पम्प और सोलर स्ट्रीट लाइट जैसी सुविधाओं का विस्तार इसी आवश्यकता के अनुरूप स्थानीय स्तर पर हो रहे प्रयासों को दर्शाता है।

    आज सुकमा में सौर ऊर्जा रात की रोशनी, घरों के पेयजल और खेतों की सिंचाई इन तीनों जरूरतों को पूरा करने में सहयोगी बन रही है। 71 सोलर हाईमास्ट, 672 सोलर पम्प और सौर सुजला योजना के तहत 4,300 सोलर पम्पों का लाभ इस बदलाव की तस्वीर को स्पष्ट करता है।

    दूरस्थ अंचलों में सुविधाओं का यह विस्तार सेवा, सुशासन और आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ते कदमों को रेखांकित करता है। यही बदलाव विकसित भारत के उस विजन से जुड़ता है, जिसमें गांवों को आधुनिक सुविधाओं से सशक्त, किसानों को अधिक सक्षम और नागरिकों के जीवन को अधिक सुविधाजनक बनाने पर जोर दिया गया है।

  • विकास की नई रफ्तार से बदल रहा छत्तीसगढ़, अधोसंरचना को मिल रही मजबूती :  अरुण साव

    विकास की नई रफ्तार से बदल रहा छत्तीसगढ़, अधोसंरचना को मिल रही मजबूती : अरुण साव

    रायपुर

    छत्तीसगढ़ में विकास का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। राज्य की अधोसंरचना को नई मजबूती दी जा रही है। सड़क, परिवहन और कनेक्टिविटी से लेकर आवास, जलापूर्ति और सार्वजनिक परिवहन तक के लिए आने वाले समय की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकास की आधारभूत संरचना तैयार की जा रही है। मजबूत अधोसंरचना आर्थिक विकास की बुनियाद है और राज्य सरकार इसे सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। अधोसंरचना विकास पर अब तक 12 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री  अरुण साव ने आज 'विकसित छत्तीसगढ़ कॉन्क्लेव-2026' में ये बातें कहीं।

    उप मुख्यमंत्री  साव ने नवा रायपुर में इकोनॉमिक टाइम्स ग्रुप द्वारा आयोजित 'छत्तीसगढ़ कॉन्क्लेव-2026' के विशेष सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ तेजी से आगे बढ़ रहा है। विकास की इस रफ्तार को बनाए रखने के लिए राज्य में अधोसंरचना के विस्तार पर लगातार काम किए जा रहे हैं। बेहतर सड़कें, सुगम परिवहन और मजबूत कनेक्टिविटी न केवल लोगों की आवाजाही को आसान बनाती हैं, बल्कि उद्योग, व्यापार और निवेश के लिए भी अनुकूल वातावरण तैयार करती हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश समावेशी विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। केंद्र सरकार उन राज्यों और क्षेत्रों की विकास संबंधी जरूरतों पर भी विशेष ध्यान दे रही है, जो लंबे समय तक विकास की मुख्यधारा में अपेक्षाकृत पीछे रहे हैं।  साव ने विशेष रूप से पूर्वोत्तर राज्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां कनेक्टिविटी, अधोसंरचना और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार को प्राथमिकता दी जा रही है। इससे देश के अलग-अलग हिस्सों के बीच विकास का संतुलन मजबूत हो रहा है और दूरस्थ क्षेत्रों को भी व्यापक आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने के अवसर बढ़ रहे हैं।

     साव ने कहा कि छत्तीसगढ़ में विकास का लाभ अधिक से अधिक क्षेत्रों और लोगों तक पहुंचाने के लिए अधोसंरचना को लगातार मजबूत किया जा रहा है। तेजी से बढ़ते शहरीकरण और शहरों की बढ़ती आबादी के साथ लोगों की जरूरतें भी बदल रही हैं। ऐसे में केवल वर्तमान जरूरतों के लिए नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर शहरी सुविधाओं और अधोसंरचना का विकास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आर्थिक प्रगति के लिए मजबूत अधोसंरचना जरूरी है। सड़कों और परिवहन सुविधाओं के विस्तार से कनेक्टिविटी बेहतर होती है और इसका सीधा लाभ आर्थिक गतिविधियों को मिलता है। छत्तीसगढ़ में इसी दृष्टि से अधोसंरचना विकास को विकास की गति से जोड़ते हुए काम किया जा रहा है।

    कॉन्क्लेव में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संचालक  नीलेश महादेव क्षीरसागर ने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण के साथ शहरों की जरूरतों का स्वरूप भी बदल रहा है। इसे ध्यान में रखते हुए भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप आधुनिक शहरी अधोसंरचना तैयार की जा रही है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0, बेहतर जलापूर्ति और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में राज्य सरकार प्रभावी ढंग से काम कर रही है।

    कॉन्क्लेव में छत्तीसगढ़ के विकास, अधोसंरचना, शहरीकरण और निवेश से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई। कार्यक्रम में इकोनॉमिक टाइम्स के सीनियर एसोसिएट एडीटर  अर्पित गुप्ता, टीपीआरईसी (TPREC) के सीईओ एवं मैनेजिंग डायरेक्टर  संजय बांगा तथा अनिएक्स (Anniex) के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर  नीरव शाह भी मौजूद थे।