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  • जो नहीं कर पाए वे गिनते जाएं, हम नौकरियां देते जाएंगे: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

    जो नहीं कर पाए वे गिनते जाएं, हम नौकरियां देते जाएंगे: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

    जो नहीं कर पाए वे गिनते जाएं, हम नौकरियां देते जाएंगे: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
     
    लोकभवन में 818 युवाओं को मिला नियुक्ति पत्र, मुख्यमंत्री योगी बोले- भर्ती का सिलसिला लगातार रहेगा
     
    मिशन रोजगार के तहत UPPSC और UPSSSC से विभिन्न विभागीय पदों पर चयनित अभ्यर्थियों को मुख्यमंत्री ने सौंपे नियुक्ति पत्र

     
    पुलिस में 36 हजार और होमगार्ड में 41 से 42 हजार नियुक्तियों की प्रक्रिया का किया जिक्र
     
    बोले- अगले छह महीने में एक लाख से अधिक युवाओं को देंगे सरकारी नौकरी
     
    पूर्ववर्ती सरकारों पर साधा निशाना, कहा- भर्ती बोर्ड और आयोगों में भाई-भतीजों को बैठाकर पूरी प्रक्रिया को किया था बदनाम
     
    कहा- बीमार उत्तर प्रदेश नहीं था, सरकारों की मानसिकता बीमार थी, कार्यप्रणाली भ्रष्ट और भेदभावपूर्ण थी
     
    लखनऊ

     मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि जो लोग रोजगार नहीं दे पाए, वे आज सवाल खड़े कर रहे हैं। वे गिनते जाएं, हम नौकरियां देते जाएंगे। अगले छह महीने में एक लाख से कम नहीं, बल्कि एक लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी दी जाएगी। यह सिलसिला लगातार जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि प्रतिभाशाली युवा जब उत्तर प्रदेश की ताकत बनेंगे तो प्रदेश देश की नंबर वन अर्थव्यवस्था के रूप में खुद को स्थापित करेगा।
     
    मुख्यमंत्री योगी शुक्रवार को लोकभवन सभागार में मिशन रोजगार के तहत आयोजित नियुक्ति पत्र वितरण समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) और उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) के माध्यम से आयुष, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम समेत विभिन्न विभागीय पदों पर चयनित 818 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए। मुख्यमंत्री योगी ने नवचयनित युवाओं को बधाई देते हुए कहा कि उन्हें उनके परिश्रम का प्रतिफल मिला है और अब वे उत्तर प्रदेश सरकार के अलग-अलग विभागों का हिस्सा बन रहे हैं।
     
    साढ़े नौ लाख युवाओं को मिल चुकी सरकारी नौकरी
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि अब तक प्रदेश के साढ़े नौ लाख युवाओं को पारदर्शी तरीके से विभिन्न सरकारी विभागों में नौकरी दी गई है। नियुक्तियों का क्रम आगे भी जारी रहेगा। शनिवार को भी करीब एक हजार लोगों को नियुक्ति पत्र दिए जाएंगे।
     
    उन्होंने कहा कि अगले छह महीने में एक लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी देने का लक्ष्य है। जो लोग यह काम नहीं कर पाए, वे आज प्रश्न खड़े कर रहे हैं। वे गिनते जाएं, हम देते जाएंगे। एक लाख से कम युवाओं को नौकरी देने पर नहीं, उससे ज्यादा पर ही चर्चा होगी।
     
    पुलिस में 36 हजार, होमगार्ड में 41 से 42 हजार नियुक्तियां
    मुख्यमंत्री योगी ने आगामी नियुक्तियों का ब्योरा देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस में 36 हजार युवाओं को नियुक्ति पत्र दिए जाने हैं। उनकी परीक्षाएं पूरी हो चुकी हैं और फिजिकल व मेडिकल की प्रक्रिया चल रही है। होमगार्ड में भी 41 से 42 हजार नियुक्तियां हो रही हैं।
     
    उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग से अगले छह महीने में आने वाले परिणामों के माध्यम से 25 से 30 हजार नए युवाओं को अवसर मिलेगा। उत्तर प्रदेश शिक्षा चयन आयोग से करीब 20 से 25 हजार नौजवानों को अवसर मिलने वाला है। कुछ के परिणाम आने शुरू हो गए हैं और कुछ की परीक्षाएं चल रही हैं। अगले तीन से चार महीने में इनके परिणाम भी सामने आ जाएंगे। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग से भी अलग-अलग विभागों में 15 से 16 हजार युवाओं को अवसर मिलेगा।
     
    भर्ती बोर्ड राजनीति का शिकार न हों तो ऐसे मिलते हैं परिणाम
    मुख्यमंत्री योगी ने भर्ती प्रक्रिया समयबद्ध, पारदर्शी और शुचितापूर्ण तरीके से पूरी करने के लिए उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग और उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्षों एवं सदस्यों को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि भर्ती बोर्ड और आयोग शासन की राजनीति का शिकार नहीं होते और परीक्षाएं पारदर्शी व शुचितापूर्ण तरीके से संपन्न होती हैं तो उसके परिणाम ऐसे ही देखने को मिलते हैं।
     
    भाई-भतीजों को बैठाकर भर्ती प्रक्रिया को किया बदनाम
    मुख्यमंत्री योगी ने पूर्ववर्ती सरकारों पर हमला बोलते हुए कहा कि 2017 से पहले आयोग और भर्ती बोर्डों में तत्कालीन सरकारों ने अपने भाई-भतीजों को बैठाकर पूरी प्रक्रिया को बदनाम कर रखा था। एक भी भर्ती ईमानदारीपूर्वक नहीं होती थी। युवा पलायन करता था और प्रदेश के बाहर उसके सामने पहचान का संकट खड़ा था।
     
    उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग का चेयरमैन ऐसे व्यक्ति को बनाया गया था, जो स्वयं उस पद के लिए योग्य नहीं था। इसके बाद वहां जो स्थिति बनी, उसके खिलाफ न्यायालय को कहना पड़ा और प्रदेश के युवाओं को सड़कों पर उतरना पड़ा।
     
    मुख्यमंत्री योगी ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी की सरकार में ऐसी भर्तियां भी हुईं, जिनमें आवेदन नहीं करने वालों को नियुक्ति पत्र मिल गया और आवेदन करने वाले देखते रह गए। विज्ञापन जारी होते ही वसूली के लिए अलग-अलग गिरोह और सिंडिकेट सक्रिय हो जाते थे। सरकार ने समूह ग और घ की भर्तियों से साक्षात्कार की व्यवस्था समाप्त कर दी।
     
    बीमार यूपी नहीं, सरकारों की मानसिकता बीमार थी
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश के नौजवानों की प्रतिभा को सम्मान नहीं मिला। उस समय की सरकारों की बीमारू मानसिकता के कारण उत्तर प्रदेश बीमारू राज्य बन गया था। उन्होंने कहा कि बीमार उत्तर प्रदेश नहीं था, सरकारों की मानसिकता बीमार थी। उनकी कार्यप्रणाली भ्रष्ट और भेदभावपूर्ण थी।
     
    उन्होंने कहा कि पिछली सरकारें प्रदेश की युवा शक्ति को समस्या मानती थीं, जबकि वर्तमान सरकार ने इसे उत्तर प्रदेश की आर्थिक ताकत और अवसर के रूप में देखा। प्रदेश की संभावनाओं को प्रतिभाशाली युवाओं के माध्यम से आगे बढ़ाने का काम किया गया।
     
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि जो उत्तर प्रदेश 2017 से पहले सबसे गरीब राज्यों में माना जाता था और पहचान के संकट से गुजर रहा था, वही प्रदेश पिछले छह वर्षों से लगातार रेवेन्यू सरप्लस स्टेट है। आज उत्तर प्रदेश भारत के ग्रोथ इंजन का महत्वपूर्ण हिस्सा है और देश की टॉप तीन अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाता है।
     
    उन्होंने कहा कि नौ वर्षों में प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय और अर्थव्यवस्था तीन गुना हुई है। महिला कार्यबल की उपलब्धता तीन गुना और प्रदेश का बजट भी तीन गुना से अधिक हुआ है।
     
    युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को जवाब देने की ताकत
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 2017 से पहले कोई बेटी खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करती थी, व्यापारी व्यापार करने को तैयार नहीं था और नौजवान पलायन के लिए मजबूर था। डबल इंजन की सरकार बनने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जीरो टॉलरेंस की नीति लागू की गई।
     
    उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों पर युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाते हुए कहा कि लोकतंत्र में बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने युवाओं को ऐसे लोगों को जवाब देने की ताकत दी है और इस ताकत का इस्तेमाल करने की आवश्यकता है।
     
    आयुष को मिली नई पहचान, चिकित्सा क्षेत्र में भी बढ़े अवसर
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि वर्ष 2014 से पहले आयुष की कोई पहचान नहीं थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अलग मंत्रालय बनाकर पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को नई पहचान दी। आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, होम्योपैथी और सिद्धा को एक प्लेटफार्म मिला। अब आयुष विश्वविद्यालय और नए कॉलेज बन रहे हैं तथा नियुक्तियों की प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है।
     
    उन्होंने कहा कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र में भी विभिन्न कार्यक्रम चल रहे हैं और नए मेडिकल कॉलेजों की श्रृंखला खड़ी हो रही है। भर्ती में विज्ञापन जारी होने से नियुक्ति पत्र वितरण तक प्रत्येक प्रक्रिया की समयबद्धता और मेरिट की समीक्षा की जा रही है।
     
    मुख्यमंत्री योगी ने नवचयनित युवाओं से कहा कि अब वे सीधे उत्तर प्रदेश शासन का हिस्सा बनकर अपनी प्रतिभा और सेवा का लाभ प्रदेश की 25 करोड़ जनता को दे सकेंगे। उन्होंने अभ्यर्थियों और उनके अभिभावकों को बधाई देते हुए पूरी ईमानदारी और तन्मयता के साथ दायित्व निभाने का आह्वान किया।
     
    नियुक्ति पत्र केवल कागज नहीं, मेहनत और प्रतिज्ञा का परिणाम: हंसराज विश्वकर्मा
    सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग के राज्य मंत्री हंसराज विश्वकर्मा ने कहा कि नियुक्ति पत्र केवल कागज नहीं, बल्कि अभ्यर्थियों की मेहनत और प्रतिज्ञा का परिणाम है। आज युवाओं को रोजगार के साथ जिम्मेदारी भी मिली है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पारदर्शिता के साथ काम हो रहा है। सरदार पटेल के नाम से एक विभाग खोला जा रहा है और उनके नाम से इंडस्ट्री जोन भी खोला जा रहा है, जिसका उद्घाटन अक्टूबर या नवंबर में मुख्यमंत्री योगी कर सकते हैं।
     
    चिकित्सा क्षेत्र में हुआ बड़ा बदलाव: मयंकेश्वर शरण सिंह
    चिकित्सा एवं स्वास्थ्य राज्य मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह ने नवचयनित अभ्यर्थियों को बधाई देते हुए कहा कि पिछले साढ़े नौ वर्षों में मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में चिकित्सा क्षेत्र में बहुत बदलाव हुआ है। प्रदेश में इंसेफेलाइटिस को खत्म करने का काम किया गया है।
     
    देश का ग्रोथ इंजन बन रहा उत्तर प्रदेश: दयाशंकर मिश्र दयालु
    आयुष राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार डॉ. दयाशंकर मिश्र दयालु ने कहा कि उत्तर प्रदेश आज देश में ग्रोथ का इंजन बन रहा है। साढ़े नौ लाख नियुक्तियां कल्पना से परे हैं। यह वही उत्तर प्रदेश है, जहां नौकरियां पैसे से बिकती थीं। आज यह उत्तर प्रदेश के गौरव का अवसर है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के माध्यम से चयनित 361 फार्मासिस्टों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए जा रहे हैं।

    मुख्यमंत्री योगी को भेंट की भगवान धन्वंतरि और श्रीराम की प्रतिमा
    कार्यक्रम की शुरुआत में आयुष राज्य मंत्री डॉ. दयाशंकर मिश्र 'दयालु' ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भगवान धन्वंतरि की प्रतिमा भेंट की। वहीं, राज्य मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह और अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष ने मुख्यमंत्री योगी को रुद्राक्ष का पौधा और भगवान श्रीराम की प्रतिमा भेंट की। इसके बाद राज्य मंत्री हंसराज विश्वकर्मा और प्रमुख सचिव शशि भूषण लाल सुशील ने मुख्यमंत्री योगी को पौधा और भगवान श्रीराम दरबार की प्रतिमा भेंट की।
     
    कार्यक्रम में ये रहे मौजूद
    कार्यक्रम में आयुष राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार डॉ. दयाशंकर मिश्र दयालु, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य राज्य मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह, एमएसएमई राज्य मंत्री हंसराज विश्वकर्मा, अपर मुख्य सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा अमित कुमार घोष, प्रमुख सचिव आयुष रंजन कुमार, प्रमुख सचिव एमएसएमई शशि भूषण लाल सुशील और उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष एसएन साबत समेत विभागीय अधिकारी और नवचयनित अभ्यर्थी मौजूद रहे।

  • MP में 33.2 इंच बारिश, कोटे की 89.3% पूरी; 21 सितंबर तक फिर बरसेंगे बादल

    MP में 33.2 इंच बारिश, कोटे की 89.3% पूरी; 21 सितंबर तक फिर बरसेंगे बादल

    भोपाल 

    मध्य प्रदेश में मानसून अब अपने अंतिम पड़ाव में है। सीजन खत्म होने में महज 11 दिन बाकी हैं और प्रदेश में अब तक 33.2 इंच बारिश दर्ज हो चुकी है। यह सामान्य बारिश के कोटे का 89.3 प्रतिशत है। यानी करीब 4.1 इंच पानी की कमी अभी बनी हुई है। मौसम विभाग के मुताबिक अगले चार दिन प्रदेश में हल्की बारिश का दौर जारी रह सकता है। इसके बाद महीने के आखिरी सप्ताह में किसी मजबूत मौसम प्रणाली के सक्रिय होने पर कुछ जिलों में तेज बारिश हो सकती है। इससे प्रदेश बारिश के सामान्य आंकड़े के करीब पहुंच सकता है ।हालांकि, सभी जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य तक पहुंचना आसान नहीं होगा। इंदौर, उज्जैन, जबलपुर और नर्मदापुरम संभाग के कई जिलों में बारिश की कमी बनी है। इंदौर, धार, आलीराजपुर, रायसेन, विदिशा, जबलपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, पांढुर्णा, सागर, उज्जैन, रतलाम और शाजापुर में अभी सामान्य बारिश का 80 प्रतिशत पानी भी नहीं गिरा है। इन जिलों में सामान्य आंकड़ा पूरा करने के लिए मानसून के बचे दिनों में लगातार बारिश की जरूरत होगी। वहीं, मऊगंज और निवाड़ी में सामान्य से दोगुने से अधिक पानी गिर चुका है।

    37 जिलों में अभी सामान्य से कम बारिश
    प्रदेश के भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, छतरपुर, निवाड़ी, मैहर, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल और उमरिया में सामान्य या उससे अधिक बारिश दर्ज हो चुकी है। इसके उलट बाकी 37 जिलों में बारिश सामान्य से कम है।प्रदेश की सामान्य मानसूनी बारिश 37.3 इंच है। इस लिहाज से सामान्य आंकड़ा पूरा करने के लिए अब करीब 4.1 इंच बारिश की जरूरत है।

    मऊगंज और निवाड़ी में दोगुने से ज्यादा पानी
    दूसरी ओर, प्रदेश के कुछ जिलों में बारिश सामान्य आंकड़े से काफी आगे निकल चुकी है। मऊगंज और निवाड़ी में सामान्य कोटे की तुलना में दोगुनी बारिश हो चुकी है। यानी जहां कुछ जिले बारिश की कमी से जूझ रहे हैं, वहीं इन जिलों में सामान्य से काफी ज्यादा पानी गिर चुका है।

    इन जिलों में सामान्य या ज्यादा बारिश
    प्रदेश के भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, छतरपुर, निवाड़ी, मैहर, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल और उमरिया में सामान्य या उससे ज्यादा बारिश दर्ज की जा चुकी है।

    इसके अलावा प्रदेश के 37 जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है। अब मानसून के अंतिम 11 दिन इन जिलों के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे। यदि इस दौरान अच्छी बारिश होती है तो कई जिलों का बारिश का आंकड़ा सामान्य के करीब पहुंच सकता है।

    22 सितंबर तक होगी हल्की बारिश
    मौसम विशेषज्ञ अरुण शर्मा के अनुसार, अगले चार दिन यानी 22 सितंबर तक प्रदेश में हल्की बारिश का दौर बना रह सकता है। पश्चिमी हिस्से में साइक्लोनिक सर्कुलेशन सक्रिय होने से कुछ जिलों में बारिश हो रही है। वहीं, 19 सितंबर की शाम के आसपास उत्तर अंडमान सागर में नया निम्न दबाव क्षेत्र बनने की संभावना है। इसके दक्षिण ओडिशा और उत्तर आंध्र प्रदेश तट की ओर पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ने के संकेत हैं। इसके असर से प्रदेश में मौसम में फिर बदलाव देखने को मिल सकता है।

    जून की कमी अब तक पूरी नहीं हुई
    इस मानसून में सबसे बड़ी कमी जून में रही। जून में प्रदेश में सामान्य से 14 प्रतिशत कम बारिश हुई थी। जुलाई की शुरुआत में तेज बारिश से स्थिति सुधरी, लेकिन बाद में मानसून में दो बार ब्रेक आया और कई दिन बारिश थमी रही। जुलाई और अगस्त में सामान्य बारिश का आंकड़ा पूरा हो गया, लेकिन जून की कमी की पूरी भरपाई नहीं हो सकी। सितंबर में बारिश होने के बावजूद पूरे मानसून में अब तक करीब 7 प्रतिशत की कमी बनी हुई है।

    22 सितंबर तक हल्की बारिश का दौर मौसम विभाग ने अगले चार दिन यानी, 22 सितंबर तक प्रदेश में हल्की बारिश होने का अनुमान जताया है। मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक ने बताया, इस समय पश्चिमी हिस्से में एक साइक्लोनिक सकुर्लेशन सिस्टम (चक्रवात) एक्टिव है। इस वजह से पश्चिमी हिस्से के जिलों में बारिश का दौर बना हुआ है।

    19 सितंबर की शाम के आसपास उत्तर अंडमान सागर में नया निम्न दबाव क्षेत्र बनने की संभावना है। इसके बाद इसके दक्षिण ओडिशा–उत्तर आंध्र प्रदेश तट की ओर पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ने के संकेत हैं। इस सिस्टम से एमपी के मौसम में एक और बदलाव का आधार बन सकती है।

    जून में सूखा, जुलाई-अगस्त में अच्छी बारिश मौसम विभाग के अनुसार, जून में 14% कम बारिश हुई थी। जुलाई के शुरुआती दिनों में तेज बारिश होने से यह बढ़ गया। इसके बाद मानसून दो बार ब्रेक हुआ और कई दिन तक बारिश नहीं हुई।

    आखिरी सप्ताह में फिर से स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव हो गया। बावजूद इसके 13 प्रतिशत कम बारिश हुई है। हालांकि, जुलाई और फिर अगस्त का भी कोटा फुल हो गया, लेकिन जून की भरपाई नहीं हो पाई। यही वजह है कि अब तक भी प्रदेश में 7 प्रतिशत कम पानी गिरा है।

    प्रदेश की सामान्य बारिश 37.3 इंच प्रदेश की सामान्य बारिश 37.3 इंच है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जिले की सामान्य बारिश 38 से 39 इंच तक है।

    भोपाल में 4 साल से कोटे से ज्यादा बारिश भोपाल में सितंबर महीने की औसत बारिश 7 इंच है, लेकिन पिछले 5 साल से कोटे से ज्यादा पानी बरस रहा है। ओवरऑल रिकॉर्ड की बात करें तो साल 1961 में पूरे सितंबर माह में 30 इंच से ज्यादा पानी गिरा था। वहीं, 24 घंटे में सर्वाधिक 9.2 इंच बारिश का रिकॉर्ड 2 सितंबर 1947 को बना था।

    इस महीने औसत 8 से 10 दिन बारिश होती है। वहीं, दिन में तापमान 31.3 डिग्री और न्यूनतम तापमान 22.2 डिग्री सेल्सियस तक रहता है।

     

  • ‘गोलमाल 5’ की रिलीज डेट का ऐलान, पोस्टर से अक्षय कुमार गायब; फैंस की नजरें टिकीं

    ‘गोलमाल 5’ की रिलीज डेट का ऐलान, पोस्टर से अक्षय कुमार गायब; फैंस की नजरें टिकीं

    मुंबई 

    रोहित शेट्टी के डायरेक्शन में बनी गोलमाल फ्रेंचाइजी की सभी फिल्मों ने ऑडियंस को खूब एंटरटेन किया है। अब इसके 5वें पार्ट का बेसब्री से इंजतार हो रहा था। इस बीच इसकी रिलीज की खबर ने ऑडियंस को खुश कर दिया है। फिल्म में अजय देवगन, अरशद वारसी, तुषार कपूर, शरमन जोशी, श्रेयस तलपडे और अक्षय कुमार जैसे एक्टर्स नजर आने वाले हैं। जानिए कब रिलीज होगी हंसी का धमाका करने वाली गोलमाल 5।

    गोलमाल 5 की रिलीज डेट हुई अनाउंस
    रोहित शेट्टी ने एक मोशन पोस्टर के साथ गोलमाल 5 की रिलीज डेट का एलान कर दिया है। डायरेक्टर ने बताया है कि उनकी फिल्म 8 जनवरी 2027 को थिएटर में दस्तक देने वाली है। रोहित शेट्टी ने लिखा 'हंसी, मजाक, मस्ती, खुशियां और फैमिली और कुछ नहीं, 8 जनवरी 2027।' इसके साथ फिल्म का मोशन पोस्टर शेयर किया गया है। पोस्टर में अजय देवगन बाइक चलाते दिख रहे हैं। पीछे शहर नजर आ रहा है। बाइक पर आगे अजय देवगन, फिर अरशद वारसी, श्रेयस तलपडे, तुषार कपूर, कुनाल खेमू और फिर शरमन जोशी दिख रहे हैं। हैरानी वाली बात ये है कि इस फिल्म के पोस्टर में अक्षय कुमार नहीं नजर आ रहे हैं। वैसे अगर आप अजय देवगन की बाइक के नंबर प्लेट को देखेंगे तो उस पर TN लिखा हुआ है, यानी फिल्म की कहानी तमिलनाडु के बैकड्राप पर बेस्ड हो सकती है।

    गोलमाल 5 के पोस्टर पर नहीं दिखे अक्षय कुमार
    कुछ समय पहले फिल्म गोलमाल 5 की कास्ट के साथ अक्षय कुमार का लुक भी सामने आया था। खिलाड़ी कुमार का बाल्ड लुक था। ऐसा बताया गया था कि अक्षय इस फिल्म में विलेन के किरदार में होंगे। लेकिन फिल्म के पोस्टर में उनकी झलक नहीं दिखाई गई है।

    गोलमाल फ्रेंचाइजी की फिल्में
    बता दें, साल 2006 में नीरज वोरा की कहानी लेकर रोहित शेट्टी ने फिल्म गोलमाल डायरेक्ट की थी। किसी ने नहीं सोचा था कि अंधे, गूंगे बहरे बन ऑडियंस को हंसाने वाली फिल्म कल्ट क्लासिक कॉमेडी फिल्मों में गिनी जाएगी। इस फिल्म में ओरिजिनल कास्ट अजय देवगन, अरशद वारसी, तुषार कपूर और शरमन जोशी लीड रोल में थे। फिल्म की सफलता के बाद रोहित शेट्टी ने इसका दूसरा पार्ट गोलमाल रिटर्न बनाई जो साल 2008 में रिलीज हुई। इस बार फिल्म में ओरिजिनल कास्ट के साथ करीना कपूर, अमृता अरोड़ा जैसे एक्टर्स भी शामिल हुए। फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर अच्छा रिएक्शन मिला।

    गोलमाल 5 का हो रहा है इंतजार
    साल 2010 में गोलमाल 3 बनाया गया। फिल्म हिट हुई। साल 2017 में गोलमाल अगेन और अब गोलमाल 5 रिलीज होने वाली है। फिल्म का बेसब्री से इंतजार हो रहा है। फिल्म में हीरोइन कौन होगी इसके बारे में अभी अधिक जानकरी सामने नहीं आई है। लेकिन ऑडियंस हंसने के लिए तैयार है। फिल्म 8 जनवरी 2027 को रिलीज हो रही है।

    अजय देवगन की आने वाली फिल्में
    वर्क फ्रंट की बात करें तो अजय देवगन इस साल धमाल 4 में नजर आए थे। फिल्म को मिलाजुला रिएक्शन मिला था। अब 2 अक्टूबर को उनकी फिल्म दृश्यम 3 रिलीज होने जा रही है। हाल में फिल्म का ट्रेलर रिलीज किया गया था। फिल्म में जयदीप अहलावत की एंट्री ने कहानी मजेदार बना दी है। इस बार सैम के मर्डर का सच बाहर आएगा या एक बार फिर विजय सलगांवकर बच निकलेगा। कहानी दमदार होने वाली है। इसके बाद अजय देवगन अगले साल अपनी फिल्म चौहान से धमाका करने वाले हैं। फिल्म का टीज़र रिलीज कर जानकारी दी गई गई थी। धांसू टीजर देखने के बाद अब ऑडियंस फिल्म का इंतजार कर रही है।

  • पेंशन बंद होने से प्राध्यापक परेशान, बोले- ‘हमने देश सेवा के लिए विद्यार्थी तैयार किए, अब रोटी को मोहताज’

    पेंशन बंद होने से प्राध्यापक परेशान, बोले- ‘हमने देश सेवा के लिए विद्यार्थी तैयार किए, अब रोटी को मोहताज’

    हमारे पढ़ाए विद्यार्थी देश सेवा कर रहे हैं पर हमें रोटी के लिए तरसा दिए

    पेंशन बंद कर देने से प्राध्यापक परेशान, अपना फैसला वापस ले 

    रायपुर/ बिलासपुर
    छत्तीसगढ़ सरकार ने 1 सितम्बर 2026 को एक तुगलकी और दमनकारी आदेश जारी कर प्रदेश के अनुदानित अशासकीय महाविद्यालयों से सेवानिवृत हुए 400 से अधिक प्राध्यापकों और तृतीय व चतुर्थ कर्मचारियों की पेंशन अचानक बंद कर उनके समक्ष उनके जीवन-यापन, अपने इलाज और पारिवारिक जिम्मेदारियों के निर्वहन के लिए गंभीर संकट पैदा कर दिया है l 

    छत्तीसगढ़ अनुदानित अशासकीय महाविद्यालय प्राध्यापक संघ ने प्रेस क्लब में पत्रकारों से चर्चा करते हुए बताया कि राज्य सरकार के 11 सितम्बर 2026 को जारी आदेश के अनुसार इन अनुदानित अशासकीय महाविधालयों में वर्तमान में कार्यरत प्राध्यापकों एवं तृतीय व चतुर्थ कर्मचारियों की पेंशन व ग्रेच्युटी की पात्रता व प्रावधान को अचानक सेवावधि के बीच में ही समाप्त कर दिया है l इससे वर्त्तमान में कार्यरत प्राध्यापकों एवं कर्मचारियों को सेवानिवृत होने पर जीवन-यापन की समस्याओं से जूझना होगा l 

    राज्य सरकार अनुदानित अशासकीय महाविद्यालयों के सेवानिवृत्त प्राध्यापकों व कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति पर पेंशन व ग्रेच्युटी का निरंतर भुगतान गत 37 वर्षों से करती आ रही है। 26 अक्टूबर 2010 को तत्कालीन मुख्य मंत्री डॉ रमन सिंह ने इन प्राध्यापकों व कर्मचारियों की मांग पर पांचवें वेतनमान में पेंशन तथा चौथे वेतनमान में ग्रेच्युटी देना आरम्भ किया। तब से सेवानिवृत प्राध्यापक व कर्मी पांचवें वेतनमान में निरंतर पेंशन प्राप्त करते रहे हैं । हालांकि पेंशनर्स की यह मांग थी कि शासकीय महाविद्यालयों के पेंशनर्स के समकक्ष जो जिस वेतनमान में सेवानिवृत हो रहा है, उसे उसी वेतनमान में पेंशन व ग्रेच्युटी प्रदान की जाए । 

    संघ के अध्यक्ष डी एन शर्मा व महासचिव।       ने बताया कि वेतनमान के अनुरूप पेंशन व ग्रेच्युटी के अधिकार को लेकर  उच्च न्यायालय में 80 से अधिक सेवानिवृत्त प्राध्यापकों द्वारा दायर की गई याचिकाओं पर अलग अलग निर्णयों में राज्य सरकार को आदेश दिया कि जो प्राध्यापक जिस वेतनमान में सेवानिवृत हुआ है, उसे उसी वेतनमान में पेंशन तथा ग्रेच्युटी का भुगतान किया जाए । इस निर्णय के विरुद्ध राज्य सरकार द्वारा उच्च न्यायालय (डबल बेंच) में दायर कई रिवीजन याचिकाओं को भी खारिज कर दिया है। राज्य सरकार द्वारा उच्च न्यायालय के आदेशों की अवहेना करने पर 50 से अधिक पेंशनभोगी प्राध्यापकों ने उच्च न्यायालय में राज्य सरकार के विरुद्ध ‘न्यायालय की अवमानना’ के कंटेंप्ट प्रकरण दायर किये हैं, जिन पर कार्यवाही लंबित है । हालाकि डॉ आर के उपाध्याय व डॉ सी के तिवारी के कंटेंप्ट प्रकरण पर उच्च न्यायालय के आदेश पर राज्य सरकार द्वारा उन्हें 6वें वेतनमान में ग्रेच्युटी का भुगतान कर, 6वें वेतनमान में पेंशन दी जा रही है, जो इस आदेश के बाद रोक दी गई है l स्थिति यह है कि गत दो माहों (जुलाई व अगस्त) की किसी भी पेंशनभोगी को पेंशन का भुगतान राज्य सरकार द्वारा अब तक नहीं किया गया है l    उच्च न्यायालय द्वारा पेंशनर्स के उपयुक्त वेतनमान में पेंशन देने के अधिकार को मान्य कर उनके हित में दिये गए आदेशों से क्षुब्ध होकर राज्य सरकार ने माननीय सर्वोच्च न्यायालय में एसएलपी (विशेष पुनरीक्षण याचिका) दायर की थी; जो सर्वोच्च न्यायालय द्वारा खारिज कर दी गईं हैं l पेंशनर्स को उनका हक नहीं देने के लिए राज्य सरकार ने 27 पेंशनर्स के मामले फिर से सर्वोच्च न्यायालय में एसएलपी दायर कर दी है। 

    जब सरकार को लगा कि मा न्यायालयों से पेंशनर्स प्राध्यापकों को उनका अधिकार मिल जाएगा तो दमनकारी रवैया अपनाते हुए पांचवें वेतनमान में पेंशन तथा चौथे वेतनमान में ग्रेच्युटी प्रदान करने के डॉ रमन सिंह सरकार द्वारा जारी आदेश को विष्णुदेव साय सरकार ने 22 अगस्त 26 की मंत्रिमंडल की बैठक में पलटकर निरस्त कर दिया। इस निर्णय के अनुसरण में 1 सितंबर 2026 और 11 सितंबर 2026 को आदेश जारी कर राज्य में अनुदानित अशासकीय महाविद्यालय के प्राध्यापकों और कर्मचारियों को मिल रही पेंशन 1 सितंबर 2026 से बंद कर दी है। यहाँ तक कि जुलाई व अगस्त माहों की पेंशन का भुगतान भी राज्य सरकार ने रोक दिया है । 

    विष्णुदेव साय सरकार के इस दमनकारी निर्णय से सेवानिवृत वृद्द प्राध्यापक व कर्मचारी गंभीर आर्थिक कठिनाइयों में आ गए हैं । बीपी, डायबिटीज, हार्ट रोगों, घुटनों के दर्द सहित उम्र जनित बीमारियों के चलते बुढ़ापे के दौर में पारिवारिक जिम्मेदारियां के निर्वाह के लिए पेंशन ही उनके जीवन का सहारा थी l  
    उक्त जानकारी देते हुए संघ ने मांग की है कि 
    हमारे राज्य सरकार से यह मांग है कि राज्य सरकार 1 सितंबर 2026 तथा 11 सितंबर 2026 के पेंशन व ग्रेच्युटी बंद करने के आदेश को तत्काल प्रभाव से वापस ले और सभी पेंशनर्स की पेंशन को यथावत लागू करें। जुलाई व अगस्त की पेंशन का भुगतान अति शीघ्र किया जाये ।वयोवृद्द व असहाय होते प्राध्यापकों और कर्मचारियों के प्रति सरकार की हठधर्मिता और भेदभाव व उत्पीडन वाले   उपेक्षापूर्ण रवैय्ये से हम सब प्राध्यापक हैरान व दुखी हैं। हम अत्यधिक वेदना और पीड़ा के साथ यह व्यक्त कर रहे हैं कि हम प्राध्यापकों ने प्रदेश की उच्च शिक्षा में उस समय से अपना महत्वपूर्ण योगदान देते आ रहे हैं जब अंचल/प्रदेश में गुणवत्तायुक्त उच्च शिक्षा के संस्थान बहुत ही कम थे; और फिर भी हम वर्तमान राज्य सरकार द्वारा पुरस्कारस्वरूप सताये जा रहे हैं। हमारे पढ़ाये हुए विद्यार्थी आईएएस, आईपीएस, वैज्ञानिक, न्यायाधीश,  मंत्री, विधायक, सांसद जैसे राजनेता व अन्य उच्च पदों आसीन हुए हैं। कई अंतर-राष्ट्रीय खिलाडी भी दिए हैं l

  • दुर्ग नगर निगम की नई पहल, किफायती दामों पर मिलेगी ‘सब्जी की टोकरी’

    दुर्ग नगर निगम की नई पहल, किफायती दामों पर मिलेगी ‘सब्जी की टोकरी’

    दुर्ग.

    नगर निगम दुर्ग द्वारा शहरवासियों को किफायती दरों पर ताजी, स्वच्छ एवं गुणवत्तापूर्ण फल-सब्जियां उपलब्ध कराने की दिशा में एक अभिनव पहल की गई है। सेवा संकल्प अभियान के तहत रायपुर नाका स्थित वार्ड 21 के पंचरत्न गार्डन में ‘सब्जी की टोकरी’ केंद्र का शुभारंभ मेयर अलका बाघमार ने किया।

    महापौर ने कहा कि सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत निगम द्वारा जनहित में यह अभिनव पहल शुरू की गई है। सब्जी की टोकरी का उद्देश्य आमजन को उनके आसपास ही ताजी, स्वच्छ, गुणवत्तापूर्ण एवं किफायती दरों पर फल-सब्जियां उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि इस पहल से शहरवासियों को बेहतर गुणवत्ता की ताजी सब्जियां एवं फल आसानी से उपलब्ध होंगे। निकट भविष्य में कीटनाशक एवं रसायन मुक्त फल- सब्जियां उपलब्ध कराने की दिशा में भी प्रयास किए जाएंगे। निगम का उद्देश्य शहरवासियों को सुविधाजनक, स्वच्छ और व्यवस्थित बाजार की सुविधा उपलब्ध कराना है। पंचरत्न गार्डन, रायपुर नाका, वार्ड 21 में दोपहर 2 बजे से सुविधा उपलब्ध होगी। इस अवसर पर एमआईसी सदस्य लीना दिनेश देवांगन, वार्ड पार्षद विद्यावती सिंह, अरुण सिंह, चंद्रिका चन्द्राकर, कुमुद बघेल सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।

    मेयर ने कहा कि सब्जी की टोकरी केवल फल-सब्जी उपलब्ध कराने की पहल नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने का माध्यम भी है। प्रत्येक केंद्र पर दो महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि दुर्ग नगर निगम द्वारा शहर को स्वच्छ, सुंदर एवं स्मार्ट बनाने के साथ-साथ नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार नवाचार किए जा रहे हैं। सब्जी की टोकरी भी इसी दिशा में एक जनहितकारी पहल है, जिसका लाभ शहरवासियों को सीधे मिलेगा। इससे नागरिकों को उचित एवं किफायती दरों पर ताजी सब्जियां और फल उपलब्ध होने के साथ ही स्थानीय महिलाओं को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे।

    नाना-नानी पार्क सहित 10 अन्य स्थान चिन्हित
    मेयर ने कहा कि नगर निगम द्वारा शहर के लगभग 10 विभिन्न स्थानों पर किफायती सब्जी एवं फल की दुकानें शुरू की जाएंगी। इसके लिए वार्ड 51 स्थित नाना-नानी पार्क सहित अन्य स्थानों को चिन्हित कर लिया गया है, जहां जल्द ही ऐसी दुकानें प्रारंभ की जाएंगी। निगम प्रशासन ने शहरवासियों से अपील की है कि यदि वे सस्ती, ताजी एवं गुणवत्तापूर्ण फल सब्जियां खरीदना चाहते हैं, तो सेवा संकल्प सब्जी टोकरी केंद्र का लाभ उठाएं।

  • अजीत अगरकर नहीं रहना चाहते चीफ सेलेक्टर! BCCI को बताई अपनी इच्छा, AGM में क्या हुआ?

    अजीत अगरकर नहीं रहना चाहते चीफ सेलेक्टर! BCCI को बताई अपनी इच्छा, AGM में क्या हुआ?

    मुंबई

    भारतीय  क्रिकेट टीम से जुड़ा एक बड़ा और महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है, जहां अब BCCI (भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड) नए चीफ सेलेक्टर की तलाश में है. मौजूदा चीफ सेलेक्टर अजीत अगरकर ने बोर्ड से जुड़े बड़े लोगों को इस बारे में बता दिया है कि वो अब इस पद पर रहना नहीं चाहते हैं। 

    समाचार एजेंसी पीटीआई को अगरकर से जुड़े एक सूत्र ने बाया कि उन्होंने पहले ही BCCI को इस बारे में जानकारी दे दी है, अगरकर इस पोस्ट पर बने रहने के इच्छक नहीं हैं। 

    इससे पहले शुक्रवार को BCCI की AGM (एनुअल जनरल मीट‍िंग) हुई. जहां BCCI ने यहां AGM (एनुअल जनरल मीटिंग)  के दौरान अधिकारियों को चेयरमैन ऑफ सेलेक्टर्स अगरकर के भविष्य पर फैसला लेने की इजाजत दी. अगरकर इस मीट‍िंग के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा में रहे, उनका कार्यकाल 4 अक्टूबर को खतम् हो रहा है। 

    मीटिंग के आखिर में BCCI के एक सीनियर अधिकारी ने कहा, अब ऑफिसर्स को सेलेक्शन कमेटियों से जुड़े मामलों पर फैसले लेने का अधिकार म‍िल गया है। 

    BCCI की 95वीं AGM में उससे जुड़े राज्य सदस्य बोर्ड शामिल हुए, जिसमें भारत के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली (क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल) और पूर्व पेसर वेंकटेश प्रसाद (कर्नाटक स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन) भी शामिल थे। 

    सीनियर सेलेक्शन कमिटी के चेयरमैन के भविष्य के साथ-साथ, BCCI जूनियर सिलेक्शन कमिटी के सभी पाँच पदों को भरने पर भी विचार कर रहा है. BCCI सेक्रेटरी देवजीत सैकिया ने कहा कि बोर्ड को जूनियर सिलेक्शन कमिटी के लिए बहुत सारे एप्लीकेशन मिले हैं और उनका लक्ष्य 15 द‍िन के अंदर यह प्रोसेस पूरा करना है। 

    क्या भारतीय फील्ड‍िंग कोच शुभदीप घोष हटेंगे?
    सैकिया ने कहा कि मौजूदा इंडियन फील्डिंग कोच शुभदीप घोष का अपॉइंटमेंट शॉर्ट टर्म के लिए है, लेकिन उनके परफॉर्मेंस को देखा जाएगा.
    उन्होंने आखिरी फैसला अभी लिया जाना बाकी है। 

    वानखेड़े में कब होगा टेस्ट 
    स्टेट बॉडी के सेक्रेटरी उन्मेश खानविलकर ने  मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन के लिए टेस्ट मैच को लेकर ड‍िमांड की .मशहूर वानखेड़े स्टेडियम में टेस्ट मैच होस्ट किए हुए लगभग दो साल हो गए हैं, आखिरी टेस्ट 2024 के आखिर में न्यूज़ीलैंड के खिलाफ खेला गया था_ हालांकि, अगले साल की शुरुआत में होने वाले पहले विमेंस चैम्प‍ियंस लीग और विमेंस प्रीमियर लीग के कुछ हिस्सों जैसे आने वाले मैचों के साथ क्रिकेट इस जगह पर वापस आ रहा है। 

    BGT टेस्ट को रांची से शिफ्ट करने पर कोई फैसला नहीं
    झारखंड स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन के सेक्रेटरी और भारत के पूर्व क्रिकेटर सौरभ तिवारी ने भारत-ऑस्ट्रेलिया टेस्ट को रांची से हटाने के बारे में कोई जानकारी होने से इनकार कर दिया. तिवारी ने कहा  AGM में इस बारे में बिल्कुल भी बात नहीं हुई है। 

    BCCI की AGM में हुए फैसले?
    जनरल बॉडी ने अंपायरों और मैच रेफरी के लिए बेहतर पेमेंट स्ट्रक्चर और ग्रेड्स के रीक्लासिफिकेशन को भी मंजूरी दी. हालांकि डिटेल्स नहीं दी गईं, लेकिन अभी, सीनियर घरेलू टूर्नामेंट के लिए टॉप दो ग्रेड के अंपायरों को हर दिन क्रमशः Rs 40,000 और Rs 30,000 मिलते हैं, जबकि T20 गेम्स के लिए यह रकम Rs 20,000 है. लेकिन बदले हुए पेमेंट ग्रेड A, B, C और D के हिसाब से हर दिन Rs 60,000, Rs 50,000, Rs 40,000 और Rs 35,000 होंगे। 

    कुछ स्टेट यूनिट्स में उम्र में धोखाधड़ी के कई मामलों के बाद, BCCI ने अपनी एज वेरिफिकेशन पॉलिसी को अपडेट किया और अपनाया. BCCI की नई इंटरनल कमेटी BCCI की प्रिवेंशन ऑफ सेक्सुअल हैरेसमेंट पॉलिसी के तहत बनाई गई थी. सैकिया ने कहा कि क्रिकेट अंडमान और निकोबार को एसोसिएट मेंबरशिप देने का मामला टाल दिया गया क्योंकि यह एक कानूनी मामला है।

  • तिरुपति लड्डू के घी में कथित मिलावट, पाम ऑयल इस्तेमाल होने का आरोप

    तिरुपति लड्डू के घी में कथित मिलावट, पाम ऑयल इस्तेमाल होने का आरोप

    तिरुमला

    तिरुपति के मशहूर लड्डू प्रसाद को लेकर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है. जिस घी को गाय का शुद्ध घी बताकर तिरुमला तिरुपति देवस्थानम यानी टीटीडी को सप्लाई किया जाता था, उसके बारे में प्रवर्तन निदेशालय ने चौंकाने वाले आरोप लगाए हैं. ED के मुताबिक इस कथित घी में असली दूध की मलाई से निकले घी की जगह रिफाइंड पाम ऑयल, पाम कर्नेल ऑयल और पामोलीन जैसी चीजों का इस्तेमाल किया गया. इतना ही नहीं, इसे घी जैसा बनाने के लिए कई रसायन भी मिलाए जाने का आरोप है. मामला 2019 से 2024 के बीच टीटीडी को कथित तौर पर मिलावटी घी की आपूर्ति से जुड़ा है. जांच एजेंसी के अनुसार इस दौरान करीब 230 करोड़ रुपए की कथित धोखाधड़ी वाली सप्लाई हुई। 

    मामला तब और गंभीर हो गया जब ED ने इस केस में सुकृति फूड्स प्राइवेट लिमिटेड केप्रमोटर कैलाश चंद मंगला को गिरफ्तार किया. एजेंसी का आरोप है कि इस पूरी अवधि में करीब 96 करोड़ रुपए मूल्य का कथित मिलावटी घी कैलाश चंद मंगला की कंपनी ने तैयार किया था. यानी मामला सिर्फ किसी छोटे स्तर की मिलावट का नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर आपूर्ति और कारोबार से जुड़ा बताया जा रहा है. हालांकि यहां यह समझना जरूरी है कि ये ED की जांच में सामने आए आरोप हैं. अदालत में इन आरोपों की पुष्टि होना अभी बाकी है. जांच एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित मिलावटी घी कैसे तैयार हुआ, किस तरह सप्लाई किया गया और इस पूरे नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे। 

    घी में क्या-क्या मिलाने का आरोप?
    ED के मुताबिक कथित मिलावटी घी तैयार करने में रिफाइंड पाम ऑयल, पाम कर्नेल ऑयल और पामोलीन का इस्तेमाल किया गया. ये सभी वनस्पति तेल हैं और असली गाय के घी से अलग होते हैं. एजेंसी का आरोप है कि इनका इस्तेमाल करके ऐसा पदार्थ तैयार किया गया, जिसे घी के रूप में टीटीडी तक पहुंचाया गया. यही इस मामले का सबसे अहम हिस्सा है. क्योंकि तिरुपति का लड्डू सिर्फ एक मिठाई नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद है. हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु तिरुमला मंदिर पहुंचते हैं और लड्डू प्रसाद लेकर जाते हैं. ऐसे में घी की गुणवत्ता को लेकर उठे सवाल सीधे श्रद्धालुओं की आस्था और खाद्य गुणवत्ता दोनों से जुड़े हैं। 

    सिर्फ तेल नहीं, केमिकल्स के इस्तेमाल का भी आरोप
    ED ने अपनी जांच में कुछ खास केमिकल्स के इस्तेमाल का भी आरोप लगाया है. एजेंसी के मुताबिक कथित मिलावटी घी बनाने की प्रक्रिया में एमजी-90, मोनोग्लिसराइड्स, मायवेसिट सॉफ्ट 400 और एसीटिक एसिड एस्टर जैसे केमिकल्स का इस्तेमाल किया गया. जांच एजेंसी का दावा है कि इन चीजों की मदद से वनस्पति तेलों से ऐसा मिश्रण तैयार किया गया, जिसे घी की तरह सप्लाई किया जा सके। 

    2019 से 2024 तक की सप्लाई पर जांच
    यह पूरा मामला 2019 से 2024 के बीच तिरुमला तिरुपति देवस्थानम को कथित तौर पर की गई घी की आपूर्ति से जुड़ा है. ED के अनुसार इस अवधि में कथित फर्जी या मिलावटी घी की सप्लाई का कुल मूल्य करीब 230 करोड़ रुपए था. इनमें से लगभग 96 करोड़ रुपए का कथित मिलावटी घी सुकृति फूड्स से जुड़ा बताया गया है. अब जांच का फोकस सिर्फ एक कंपनी पर नहीं, बल्कि पूरी आपूर्ति व्यवस्था पर भी हो सकता है. किसी बड़े धार्मिक संस्थान तक इतनी बड़ी मात्रा में सामग्री पहुंचने के लिए खरीद, गुणवत्ता जांच, परिवहन और भुगतान जैसी कई प्रक्रियाएं होती हैं. इसलिए जांच एजेंसी के सामने यह पता लगाना अहम होगा कि कथित मिलावट किस स्तर पर हुई और निगरानी की व्यवस्था में क्या हुआ। 

    कैलाश चंद मंगला की गिरफ्तारी के बाद बढ़ी हलचल
    ED ने सुकृति फूड्स प्राइवेट लिमिटेड केप्रमोटर कैलाश चंद मंगला को इस मामले में गिरफ्तार किया है. गिरफ्तारी के बाद जांच में कंपनी की भूमिका और कथित आपूर्ति की प्रक्रिया पर ध्यान बढ़ गया है. एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कंपनी ने कथित तौर पर किस तरह का घी तैयार किया और उसे गाय के घी के तौर पर कैसे सप्लाई किया गया. साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि कथित उत्पाद की खरीद और आपूर्ति से जुड़े दस्तावेज क्या कहते हैं. फिलहाल सामने आई जानकारी के आधार पर इतना ही कहा जा सकता है कि ED ने मामले में गंभीर आरोप लगाए हैं और गिरफ्तारी जांच का हिस्सा है. अंतिम जिम्मेदारी अदालत में सबूतों के आधार पर तय होगी। 

    तिरुपति लड्डू से क्यों जुड़ा है इतना बड़ा मामला?
    तिरुपति बालाजी मंदिर का लड्डू प्रसाद देश-दुनिया में प्रसिद्ध है. श्रद्धालुओं के लिए इसकी धार्मिक और भावनात्मक अहमियत बहुत ज्यादा है. इसलिए प्रसाद में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की गुणवत्ता को लेकर कोई भी सवाल सामान्य खाद्य मिलावट के मामले से कहीं बड़ा असर पैदा करता है. अगर जांच में ED के आरोप साबित होते हैं, तो यह सवाल भी उठेगा कि इतनी बड़ी मात्रा में कथित मिलावटी घी की आपूर्ति लंबे समय तक कैसे चलती रही। 

    अब जांच में किन सवालों के जवाब जरूरी?
    इस मामले में सबसे बड़े सवाल हैं कि कथित मिलावटी घी की असली मात्रा कितनी थी, इसे किस-किस स्तर पर तैयार और सप्लाई किया गया और गुणवत्ता जांच के दौरान यह सामने क्यों नहीं आया. इसके अलावा यह भी पता लगाना जरूरी होगा कि सप्लाई से जुड़े अन्य कारोबारी या संस्थान किस भूमिका में थे. ED की कार्रवाई के बाद मामले में आगे और गिरफ्तारियां या दस्तावेजी जांच हो सकती है. फिलहाल एजेंसी का दावा है कि 2019 से 2024 के बीच करीब 230 करोड़ रुपए की कथित संदिग्ध सप्लाई हुई और उसमें 96 करोड़ रुपए का कथित मिलावटी घी सुकृति फूड्स से जुड़ा था. इन आरोपों की अंतिम सच्चाई जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। 

  • अगस्त्य इंटरप्राइजेस पर बड़ा खुलासा, बोगस कंपनियों से 141 करोड़ की खरीदी

    अगस्त्य इंटरप्राइजेस पर बड़ा खुलासा, बोगस कंपनियों से 141 करोड़ की खरीदी

    रायपुर.

    राजधानी में अगस्त्य इंटरप्राइजेस के नाम पर जीएसटी फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। कंपनी ने बोगस कंपनियों से 141.74 करोड़ रुपए की खरीदी- बिक्री दिखाकर 23.43 करोड़ रुपए की इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) ली। /बिलों की जांच और संबंधित कंपनियों के भौतिक सत्यापन में कई फमें फर्जी या अस्तित्वहीन मिली।

    जीएसटी अधिकारियों की शिकायत पर पुलिस ने संचालक अमन अग्रवाल के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के मुताबिक, लाभांडी सिग्नेचर होम निवासी अमन अग्रवाल अगस्त्य इंटरप्राइजेस के संचालक हैं। विभाग की जांच में सामने आया कि कंपनी ने अलग-अलग फर्मों से खरीदी के बिल दिखाए और उनके आधार पर आईटीसी का दावा किया। सत्यापन के दौरान कई दस्तावेजों में गड़बड़ी मिली। इनमें 16 साल पहले मृत व्यक्ति के नाम से किरायानामा बनाकर कारोबार दिखाने का मामला भी शामिल हैं।

    मृत व्यापारी के नाम किरायानामा, बैंक खाते से भी इनकार
    भिलाई की हुसैनी इंटरप्राइजेस से अगस्त्य इंटरप्राइजेस ने 16.61 करोड़ रुपए की बिक्री और 2.99 करोड़ रुपए की आईटीसी दिखाई। फर्म के पते के लिए फूल सिंह के नाम किरायानामा लगाया गया था। जीएसटी जांच में सामने आया कि फूल सिंह की वर्ष 2010 में ही मौत हो चुकी थी, जबकि किरायानामा 21 मार्च 2025 का बनाया गया था। भिलाई में चूड़ी की दुकान चलाने वाले मोहम्मद इस्लाम ने अगस्त्य इंटरप्राइजेस से कारोबार और बैंक खाते में लेन- देन से इनकार किया। इंटरप्राइजेस के नाम पर 11.61 करोड़ रुपए की विक्री और 2.08 करोड़ रुपए की आईटीसी दिखाई गई।

    इन फर्मों से दिखाया कारोबार
    अंसारी ट्रेडर्स: 30.71 करोड़ बिक्री, 5.52 करोड़, आईटीसी ललित ट्रेड लिंक: 29.72 करोड़ बिक्री, 5.17 करोड़, आईटीसी अगस्त इंटरप्राइजेस: 22.47 करोड़ बिक्री 4.04 करोड़, आईटीसी विनायक वेंचर्स: 17.95 करोड़ बिक्री, 1.36 करोड़, आईटीसी हुसैनी इंटरप्राइजेस: 16.61 करोड़ बिक्री, 2.99 करोड़ आईटीसी महावीर इंटरप्राइजेस: 12.67 करोड़ बिक्री, 2.27 करोड़ आईटीसी यूनिक इंटरप्राइजेस: 11.61 करोड़ बिक्री, 2.08 करोड़ आईटीसी (तीन अन्य कंपनियों के नाम पर भी आईटीसी का दावा किया गया।)

    फर्जी बिल से ऐसे होता है खेल
    सबसे पहले जाली दस्तावेजों, झूठे पते या फर्जी किरायानामे के जरिए जीएसटी रजिस्ट्रेशन कराया जाता है। बिना कोई असली सामान खरीदे या बेचे, सिर्फ कागजों पर जीएसटी वाले बिल बना लिए जाते हैं। खरीदार इन्हीं फर्जी बिलों को दिखाकर सरकार से टैक्स में छूट या रिफंड (इनपुट टैक्स क्रेडिट) ले लेता है। जांच से बचने के लिए एक फर्जी कंपनी दूसरी और फिर तीसरी कंपनी को बिल काटती है, ताकि कागजों पर कारोबार असली लगे। जब जीएसटी विभाग पते पर जाकर भौतिक जांच करता है या बैंक खातों और ई-वे बिल का मिलान करता है, तो वहां कोई असली दुकान या माल नहीं मिलता और चोरी पकड़ी जाती है।

  • इंदौर में UPI MDR के खिलाफ पोस्टर वार, दुकानों पर लगाए गए पोस्टर; कांग्रेस ने जताया विरोध

    इंदौर में UPI MDR के खिलाफ पोस्टर वार, दुकानों पर लगाए गए पोस्टर; कांग्रेस ने जताया विरोध

    इंदौर/ग्वालियर
    केंद्र सरकार द्वारा जब से यूपीआई ट्रांजेक्शन पर एमडीआर यानि मर्चेंट डिस्काउंट रेट लागू करने की घोषणा की गई है, तब से ही देश भर में व्यापारियों की नाराजगी जाहिर हो रही है. एक तरफ लोग इस नई व्यवस्था से परेशान हैं तो वहीं विपक्ष भी सरकार को निशाने पर लिए हुए है. ग्वालियर में कांग्रेस विधायक सतीश सिकरवार ने भी इस मुद्दे पर बीजेपी सरकार पर निशाना साधा है. वहीं, इंदौर रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन से जुड़े व्यापारियों ने दुकानों पर इस संबंध में पोस्टर लगाए हैं। 

    इंदौर में व्यापारियों ने लगाए पोस्टर, 125 संगठनों की बैठक
    इंदौर में एमडीआर के खिलाफ मैदान में उतरे व्यापारियों का कहना है कि, ''यदि ऐसे भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लागू होता है तो इससे डिजिटल भुगतान करने वाले ग्राहकों और व्यापारियों पर अतिरिक्त लागत का असर पड़ सकता है. इंदौर रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अक्षय जैन ने बताया कि, ''अभियान के अगले चरण में सोशल मीडिया के माध्यम से इस मुद्दे को आम उपभोक्ताओं तक पहुंचाने की तैयारी है. संगठन की ओर से चार दिनों में करीब 10 लाख उपभोक्ताओं को अभियान से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है. इसके जरिए व्यापारियों की आपत्ति और उनकी मांग को व्यापक स्तर पर सामने रखने का प्रयास किया जाएगा। 

    इंदौर निकलने से पहले सरकार पर निशाना
    इंदौर में शनिवार को राहुल गांधी के आने से पहले ही प्रदेश भर से कांग्रेस विधायकों नेताओं और कार्यकर्ताओं को पार्टी द्वारा बुलाया गया है. ग्वालियर से कांग्रेस विधायक सतीश सिकरवार भी इंदौर पहुंच रहे हैं. लेकिन ग्वालियर से रवाना होने से पहले विधायक सतीश सिकरवार मीडिया से मुखातिब हुए. इस दौरान उन्होंने 15 अक्टूबर को लागू होने जा रहे यूपी ट्रांजेक्शन पर एमडीआर को लेकर सरकार पर हमला बोला। 

    अलग-अलग टैक्स लगाकर सरकार कर रही जनता को परेशान
    विधायक सतीश सिकरवार का कहना है कि, ''जब से भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी है तब से ही कोई ना कोई टैक्स लगाकर जानता को परेशान किया जा रहा है. पहले के समय में जैसे जज़िया कर लगा करता था, अंग्रेजों के जमाने में भी टैक्स लगते थे. उसी तरह सरकार हिटलरशाही चला रही है और आम आदमी को परेशान करने का काम कर रही है।

    एक तरफ ऑनलाइन पेमेंट को बढ़ावा दूसरी और टैक्स की मार
    कांग्रेस ने विधायक का कहना है कि, सरकार एक तरफ आम आदमी से ऑनलाइन पेमेंट करने की बात कह रही है. सारा काम नगद में बंद करने की बात कहती है. वहीं दूसरी तरफ इस टैक्स लगाकर जनता के साथ खिलवाड़ कर रही है. ये निंदनीय है आने वाले समय में जनता इसका जवाब जरूर देगी। 

    एमपी चेंबर ऑफ कॉमर्स ने की एमडीआर स्थगित करने की मांग
    मध्य प्रदेश चैम्बर ऑफ कॉमर्स ग्वालियर के अध्यक्ष प्रवीण अग्रवाल का भी कहना है कि, ''डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के चक्कर में पहले ही कई व्यापारी वर्ग कई बार यूपीआई ट्रांजेक्शन से साइबर फ्रॉड्स, उनकी वजह से अकाउंट फ्रीज और फिर रिकवरी जैसी परेशानियों से गुजर रहे हैं. ऐसे में MDR भी व्यापारियों के लिए एक नए टैक्स की तरह होगा. कई बार छोटे व्यापारी को तो एक लाख तक का माल बेचने पर बमुश्किल 500-700 रुपये का ही मुनाफा होता है. ऐसे में एमडीआर की वजह से वह मुनाफा भी एमडीआर में चला जाएगा. इन हालातों को अगर देखा जाए तो व्यापारियों के हित में सरकार को यह नया शुल्क स्थगित करना चाहिए। 

     

  • ‘वर्क फ्रॉम होम’ वाले अखिलेश अब 20 करोड़ की गाड़ी से करेंगे राजनीति: राजभर

    ‘वर्क फ्रॉम होम’ वाले अखिलेश अब 20 करोड़ की गाड़ी से करेंगे राजनीति: राजभर

    ‘वर्क फ्रॉम होम’ वाले अखिलेश अब 20 करोड़ की गाड़ी से करेंगे राजनीति: राजभर
     
    ‘वर्क फ्रॉम होम’ की राजनीति पर कसा तंज, कहा- एसी में बैठकर पीसी करने के बाद अब गाड़ी में भी चाहिए घर वाली फीलिंग
     
    दलित-अति पिछड़ों से दूरी का लगाया आरोप, बोले- जनता सब देख रही है, जवाब भी वही देगी

     

    लखनऊ
     सुभासपा अध्यक्ष एवं कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा सियासी हमला बोला है। राजभर ने अखिलेश यादव की कथित 20 करोड़ रुपये की लग्जरी गाड़ी को लेकर तंज कसते हुए इसे उनकी ‘वर्क फ्रॉम होम’ राजनीति से जोड़ दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश गरीब, दलित और अति पिछड़े लोगों के बीच जाने से बचते हैं और इसी कारण ऐसी गाड़ी का सहारा लिया जा रहा है।
     
    सोशल मीडिया पर राजभर ने लिखा, “अखिलेश जी, ‘वर्क फ्रॉम होम’ कैसा चल रहा है? एसी में बैठकर पीसी वाला वर्क फ्रॉम होम।” इसके बाद उन्होंने दावा किया कि अखिलेश यादव ने 20 करोड़ रुपये की “हॉलीवुड टाइप” भगवा रंग की गाड़ी मंगाई है। राजभर ने कटाक्ष किया कि चुनाव में घर से बाहर निकलना पड़े तो भी अखिलेश को गाड़ी के भीतर घर जैसा एहसास मिलता रहे।
     
    राजभर ने कहा कि अखिलेश को गरीबों के बीच जाने में डर लगता है कि कहीं जनता उनकी “पोल” न खोल दे। दलित और अति पिछड़ों को लेकर भी उन्होंने अखिलेश पर सीधा हमला किया। राजभर ने तंज किया कि शायद डर है कि कोई दलित या अति पिछड़ा हाथ मिला ले तो सैनिटाइजर इस्तेमाल करना पड़े, इसलिए बख्तरबंद गाड़ी, लिफ्ट और रूफटॉप का इंतजाम किया गया है।
     
    राजभर ने कहा कि जनता अखिलेश यादव को भी देख रही है, उनकी राजनीति और कार्यकर्ताओं को भी। उनका ‘वर्क फ्रॉम होम’ और जनता के बीच जाने का डर भी लोगों की नजर में है। इसका जवाब समय आने पर जनता ही देगी।