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  • ‘जाति का जहर घोलने निकले हैं अखिलेश, 100 यात्राएं भी नहीं बचा पाएंगी सपा को’: अनिल राजभर

    ‘जाति का जहर घोलने निकले हैं अखिलेश, 100 यात्राएं भी नहीं बचा पाएंगी सपा को’: अनिल राजभर

    'जाति का जहर घोलने निकले हैं अखिलेश, 100 यात्राएं भी नहीं बचा पाएंगी सपा को': अनिल राजभर

    पीडीए रथ यात्रा पूरी तरह फर्जी, दलित और मजदूर वर्ग सपा के असली चेहरे से परिचिति: अनिल राजभर

    दिनेश प्रताप सिंह ने अखिलेश को घेरा, बोले- पीडीए मतलब 'परमानेंटली डिवाइडेड अलायंस'

    लखनऊ
     समाजवादी पार्टी की पीडीए रथ यात्रा को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर ने अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी हर मोर्चे पर विफल होने के बाद अब जाति का जहर घोलने की राजनीति कर रही है, लेकिन उसे इसमें कोई सफलता मिलने वाली नहीं है। उन्होंने कहा कि सपा चाहे एक यात्रा निकाले या 100 यात्राएं, जनता अब उसके बहकावे में आने वाली नहीं है।

    पीडीए रथ यात्रा पूरी तरह फर्जी

    अनिल राजभर ने कहा कि पीडीए रथ यात्रा पूरी तरह फर्जी यात्रा है। उत्तर प्रदेश का पिछड़ा, दलित, कमजोर और मजदूर वर्ग समाजवादी पार्टी के असली चेहरे से भलीभांति परिचित है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब सपा सत्ता में रहती है तो उसे गरीबों की याद नहीं आती और पूरा सैफई परिवार प्रदेश की गाढ़ी कमाई को लूटने में लगा रहता है। आज वही लोग चोला बदलकर पिछड़ों और दलितों को ठगने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन जनता सब समझती है।

    पीडीए की परिभाषा तय करे सपा

    उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी पहले पीडीए की परिभाषा ही तय कर ले। पार्टी के नेता खुद ही पीडीए को लेकर भ्रमित हैं और रोज इसकी नई परिभाषा बताते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की राजनीतिक तिकड़मों से कोई फर्क पड़ने वाला नहीं है। चुनाव आने पर समाजवादी पार्टी का कहीं नामोनिशान नहीं दिखाई देगा।

    इस दौरान नए वोटर फॉर्म में सर्विलांस से जुड़ी जानकारी जोड़े जाने और दो चुनाव आयुक्तों की आपत्ति के सवाल पर अनिल राजभर ने कहा कि हाल में सामने आए घटनाक्रम से स्पष्ट है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से हुई है। चुनाव आयोग किसी भी विषय पर नियमों और परंपराओं के अनुसार आपसी राय-मशविरा और विस्तृत विचार-विमर्श के बाद ही निर्णय लेता है। अलग-अलग राय लोकतांत्रिक निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा होती है।

    स्वर्गीय कल्याण सिंह के परिवार से कब मिलेंगे अखिलेश?

    वहीं, भाजपा के मुख्य प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह ने भी अखिलेश यादव और उनकी पीडीए राजनीति पर निशाना साधा। रायबरेली में सपा विधायक राहुल लोधी के आवास पर अखिलेश यादव के प्रस्तावित दौरे को लेकर उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव को अपने नेताओं के घर जरूर जाना चाहिए, लेकिन उन्हें यह भी बताना चाहिए कि उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व राज्यपाल स्वर्गीय कल्याण सिंह के परिवार के पास वे आज तक क्यों नहीं गए।

    दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि एक मुख्यमंत्री को दूसरे मुख्यमंत्री के परिवार के प्रति शिष्टाचार और संवेदना दिखानी चाहिए थी। यदि अखिलेश यादव कल्याण सिंह के परिवार के पास जाकर श्रद्धांजलि और संवेदना व्यक्त करते, तो यह राजनीतिक नहीं बल्कि मानवीय और संवैधानिक मर्यादा का परिचय होता। उन्होंने कहा कि अब जब वे लोध समाज के बीच जा रहे हैं तो उन्हें अपने पुराने व्यवहार का भी जवाब देना चाहिए।

    पीडीए मतलब परमानेंटली डिवाइडेड अलायंस

    पीडीए रथ यात्रा पर हमला बोलते हुए भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि पीडीए का वास्तविक अर्थ 'परमानेंटली डिवाइडेड अलायंस' है। उन्होंने दावा किया कि आज न पिछड़ा समाज, न दलित समाज और न ही अल्पसंख्यक समाज समाजवादी पार्टी के साथ है। उन्होंने कहा कि पिछड़ा समाज पूरी मजबूती के साथ एनडीए के साथ खड़ा है।

    दिनेश प्रताप सिंह ने आरोप लगाया कि प्रदेशभर में ऐसे पोस्टर और बैनर लगाए जा रहे हैं जिनमें अखिलेश यादव से पूछा जा रहा है कि दलितों पर अत्याचार कब रुकेंगे। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी चाहे जितना नया चोला पहन ले, उत्तर प्रदेश की जनता उसके असली चरित्र को पहचान चुकी है। जनता अब भ्रमित होने वाली नहीं है और समय आने पर अपना जवाब देगी।

  • समय का सदुपयोग और आत्मअनुशासन से आसान होती है जीवन की राह: जेपी यादव

    समय का सदुपयोग और आत्मअनुशासन से आसान होती है जीवन की राह: जेपी यादव

    समय के सदुपयोग एवं आत्म अनुशासन से आसान होती है जीवन की राह

    संभागीय उपायुक्त जेपी यादव ने विद्यार्थियों से किया प्रेरणा संवाद

    शहडोल
    एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय शहडोल में आयोजित प्रेरणा संवाद कार्यक्रम में जनजातीय कार्य विभाग के संभागीय उपायुक्त जेपी यादव ने विद्यार्थियों को समय के सदुपयोग, निरंतर प्रयास, कड़ी मेहनत, आत्म अनुशासन, एकाग्रता एवं सकारात्मक सोच का महत्व बताते हुए जीवन में लक्ष्य प्राप्ति के लिए प्रेरित किया।

    यादव ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि दुनिया में ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है, जिसे कभी न कभी समस्याओं का सामना न करना पड़ा हो। समस्या आने पर उसके आकार को समझते हुए उससे कई गुना बड़े प्रयास के साथ समाधान के लिए तब तक प्रयास करते रहना चाहिए, जब तक समस्या का निराकरण न हो जाए। जो व्यक्ति समस्याओं के सामने डटे रहते हैं, वे सफल होते हैं, जबकि समस्या का आकार देखकर पीछे हटने वाले व्यक्ति अपने लक्ष्य से भटक जाते हैं।

    उन्होंने कहा कि समय की चाल को कोई रोक नहीं पाया है, इसलिए समय की कद्र करना सीखना चाहिए। सही समय पर प्रयास नहीं करने से जीवन में कठिनाइयां बढ़ती हैं और बाद में पछताने से कोई लाभ नहीं होता। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि कितनी भी बार असफलता मिले, हार नहीं माननी चाहिए। सफलता एक दिन में नहीं मिलती, लेकिन निरंतर प्रयास से एक दिन सफलता अवश्य प्राप्त होती है। उन्होंने “लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती” कविता विद्यार्थियों के साथ गाकर उन्हें प्रेरित किया।

    संभागीय उपायुक्त ने विद्यार्थियों को समय प्रबंधन का महत्व बताते हुए कहा कि आज का काम कल पर टालने से कार्यों का बोझ बढ़ता जाता है। इसलिए प्रतिदिन का कार्य प्रतिदिन पूरा करने की आदत विकसित करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जीवन में आत्म अनुशासन का बहुत महत्व है। आत्म अनुशासन के बिना जीवन बिना मांझी की पतवार के समान है। विद्यार्थियों को दूसरों से तुलना करने के बजाय स्वयं से प्रतियोगिता कर निरंतर अपने को बेहतर बनाने का प्रयास करना चाहिए।

    यादव ने कहा कि माता-पिता लगभग सभी के अच्छे होते हैं, लेकिन बच्चों का अच्छा बनना भी उतना ही आवश्यक है। माता-पिता के त्याग का प्रतिफल बच्चों की सफलता पर निर्भर करता है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने माता-पिता को खुश होने का अवसर देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह जरूरी नहीं कि सभी को नौकरी मिले, लेकिन सकारात्मक प्रयास और मेहनत जारी रखने पर जीवन में कोई न कोई कार्य अवश्य मिलेगा। जीवन में निराश होने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि हौसला बनाए रखने की जरूरत है।

    उन्होंने प्रेरणा संवाद के दौरान उपस्थित शिक्षकों से कहा कि वे बच्चों के प्रति संवेदनशील व्यवहार रखें। कमजोर विद्यार्थियों के प्रति सद्भाव रखते हुए उनका हौसला बढ़ाएं और उन्हें निरंतर प्रेरित करते रहें। उन्होंने कहा कि कभी-कभी बहुत पीछे रहने वाला बच्चा भी जीवन में बहुत बड़ी मंजिल हासिल कर लेता है।

    कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं एवं शिक्षकगण उपस्थित रहे। प्रेरणा संवाद से उत्साहित विद्यार्थियों ने इसे हौसला बढ़ाने वाला कार्यक्रम बताते हुए कहा कि वे आगे बढ़कर अपने जीवन को सफल बनाने का निरंतर प्रयास करेंगे।

  • ‘Tenzing’ का दमदार ट्रेलर रिलीज, एवरेस्ट फतह की अनकही कहानी दिखाएगी फिल्म

    ‘Tenzing’ का दमदार ट्रेलर रिलीज, एवरेस्ट फतह की अनकही कहानी दिखाएगी फिल्म

    एवरेस्ट की चोटी पर खड़े दो इंसान दुनिया के लिए शायद एक ही तस्वीर हैं. नाम हैं एडमंड हिलेरी और तेनजिंग नॉर्गे लेकिन इतिहास की उस मशहूर तस्वीर के पीछे एक कहानी ऐसी भी है, जिसमें सिर्फ बर्फ, पहाड़ और मौत का खतरा नहीं था, बल्कि पहचान, बराबरी, वर्ग और अपने सपने को अपना कहने की जिद भी थी. एप्पल ओरिजिनल फिल्मस की आने वाली फिल्म Tenzing का ट्रेलर इसी अनकही कहानी को सामने लाता है.

    पहली नजर में यह एक माउंटेनियरिंग एडवेंचर फिल्म लगती है, लेकिन कुछ ही मिनटों में साफ हो जाता है कि निर्देशक जेनिफर पीडम का मकसद सिर्फ एवरेस्ट की ऊंचाई दिखाना नहीं है. वह उस आदमी के भीतर उतरना चाहती हैं, जिसके लिए यह पहाड़ दुनिया की सबसे ऊंची चोटी भर नहीं, बल्कि आस्था और जिंदगी का हिस्सा था.

    फिल्म में तेनजिंग नॉर्गे का किरदार जेंडन फुंत्सोक ने निभाया है जबकि हॉलीवुड स्टार टॉम हिडलस्टन माउंटेनियर एडमंड हिलेरी के किरदार में हैं जबकि विलियम डफोए ब्रिटिश अभियान के लीडर कर्नल जॉन हंट के रोल में हैं. ट्रेलर की सबसे दिलचस्प बात यह है कि कहानी को सिर्फ हिलेरी और तेनजिंग के एवरेस्ट फतह तक नहीं समेटा गया है. यहां तेनजिंग एक ऐसे शख्स के तौर पर दिखाई देते हैं जो वर्षों तक ब्रिटिश अभियानों में काम करते रहे, लेकिन उनके लिए सिर्फ किसी और के अभियान का हिस्सा बनना पर्याप्त नहीं था.वह उस पहाड़ पर चढ़ना चाहते थे, जिसे बचपन से अपना मानते आए थे.

    यहीं से फिल्म का असली संघर्ष शुरू होता है. ब्रिटिश पर्वतारोही एवरेस्ट को एक ऐसी चोटी की तरह देखते हैं जिसे इंसान को जीतना है, जबकि तेनजिंग के लिए वह आस्था का सवाल है. वह उसे चोमोलुंगमा यानी पवित्र देवी के तौर पर पूजते हैं. इस तरह एक ही पहाड़ को देखने के दो बिल्कुल अलग नजरिए. ट्रेलर इस फर्क को बहुत खूबसूरती से पकड़ता है.

    तेनजिंग की नजर में यह प्रकृति के खिलाफ लड़ाई नहीं, बल्कि उसके साथ एक रिश्ता है. यही वजह है कि फिल्म का एवरेस्ट सिर्फ एक लोकेशन नहीं बल्कि कहानी का एक जीवित किरदार महसूस लगता है. इस कहानी में एक और अहम लड़ाई है, सम्मान की लड़ाई.

    1953 के ब्रिटिश अभियान में तेनजिंग को सिर्फ सामान ढोने वाले शेरपा की भूमिका तक सीमित रखना पर्याप्त नहीं था. कहानी में वह चाहते हैं कि उन्हें बाकायदा क्लाइंबिंग टीम का मेंबर माना जाए. यही छोटी-सी लगने वाली मांग फिल्म के बड़े सामाजिक और ऐतिहासिक सवाल को सामने लाती है कि जिस व्यक्ति को उस पहाड़ का रास्ता सबसे ज्यादा पता है, क्या उसे सिर्फ इसलिए पीछे रखा जा सकता है क्योंकि वह ब्रिटिश नहीं है? फिल्म इसी सवाल को बिना भाषण दिए कहानी के भीतर रखने की कोशिश करती दिखती है.

    ट्रेलर में एडमंड हिलेरी की भूमिका में टॉम काफी सधे नजर आए हैं. फिल्म दोनों को प्रतिद्वंद्वी बनाने के बजाय दो अलग दुनिया से आए ऐसे लोगों के रूप में देखती है, जिनके बीच धीरे-धीरे सम्मान और भरोसा पैदा होता है. ऊंचाई पर पहुंचते-पहुंचते वर्ग और पद की सीमाएं पीछे छूट जाती हैं और दो पर्वतारोही एक-दूसरे के साथी बनते हैं. यही शायद फिल्म का सबसे मानवीय हिस्सा है कि इतिहास ने दोनों के नाम एक साथ लिखे, लेकिन वहां तक पहुंचने के लिए दोनों को अलग-अलग रास्तों से गुजरना पड़ा था.

    फिल्म का एक और खूबसूरत किरदार तेनजिंग का परिवार और विशेष रूप से उनकी पत्न ही. उनकी पत्नी सिर्फ उनकी निजी जिंदगी का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि उनके सपने को समझने और उसे आगे बढ़ाने वाली शख्सियत के रूप में दिखाई देती हैं. ट्रेलर में पहाड़ की तरफ बढ़ते तेनजिंग के साथ घर-परिवार और उस सपने की कीमत भी दिखाई देती है. इस वजह से एवरेस्ट की चढ़ाई सिर्फ रोमांच नहीं रह जाती. हर कदम के साथ यह सवाल भी चलता है कि एक आदमी अपने सबसे बड़े सपने के लिए कितना कुछ पीछे छोड़ सकता है.

    फिल्म का विजुअल ट्रीटमेंट भी ट्रेलर की बड़ी ताकत है. बर्फ से ढके पहाड़, पतली हवा में तेज होती सांसें, खामोशी को चीरती हवाएं और एवरेस्ट की खतरनाक ऊंचाइयां सब मिलकर दर्शक को उस वातावरण में ले जाने की कोशिश करते हैं. खासतौर पर पहाड़ के एरियल विजुअल और बर्फ की आवाज एक गजब अनुभव है.

    फिर भी तेनजिंग का सबसे बड़ा आकर्षण यही है कि यह एक ऐसी ऐतिहासिक उपलब्धि को दूसरे नजरिए से देखने की कोशिश करती है, जिसे दुनिया दशकों से एक ही तस्वीर में देखती आई है. एवरेस्ट पर पहुंचने की कहानी हम जानते हैं, लेकिन उस चोटी तक पहुंचने से पहले तेनजिंग को अपनी जगह बनाने के लिए कितनी बार शुरू से शुरुआत करनी पड़ी, यह कहानी कम कही गई है. फिल्म उसी खाली जगह को भरने की कोशिश करती है.

  • ‘लव एंड वॉर’ से रणबीर कपूर का फर्स्ट लुक आउट, इश्क में घायल दिखे एक्टर

    ‘लव एंड वॉर’ से रणबीर कपूर का फर्स्ट लुक आउट, इश्क में घायल दिखे एक्टर

    संजय लीला भंसाली की 'लव एंड वॉर' उन बड़ी फिल्मों में से एक है, जिसका दर्शकों को बेसब्री से इंतजार है. इस फिल्म में इंडस्ट्री के तीन सबसे बड़े और बेहद टैलेंटेड स्टार्स जैसे रणबीर कपूर, आलिया भट्ट, और विक्की कौशल लीड रोल में हैं.

    इस तरह से भंसाली अपनी दमदार कास्ट के साथ दर्शकों के लिए एक बेहतरीन और कभी न भूलने वाली वन-ऑफ-अ-काइंड सिनेमैटिक स्पेक्टेकल बना रहे हैं.  बेसब्री से फिल्म से जुड़ी अपडेट का इंतजार कर रहे दर्शकों के लिए अब मेकर्स ने फिल्म की मच अवेटेड पहली झलक पेश कर दी है. जी हां, फिल्म से रणबीर कपूर का फर्स्ट लुक पोस्टर आउट कर दिया गया है.

    इश्क में घायल दिखे रणबीर
    रणबीर कपूर जारी किए गए फर्स्ट लुक पोस्टर में बहुत अच्छे लग रहे हैं. वो एक अलग किरदार में परफेक्शन के साथ डूबे हुए नजर आ रहे हैं. संजय लीला भंसाली के हर प्रोजेक्ट की तरह इस प्रोजेक्ट में भी भव्यता और बारीकी से हर एक बात पर ध्यान दिया गया है, जिसका सबूत यह पोस्टर है. पोस्टर से ये साफ है कि फिल्म सिल्वर स्क्रीन पर अपना जादू चलाने वाली है.

    रणबीर इस तरह के अवतार में पहले कभी नहीं देखे गए हैं. दर्शकों ने भी लव एंड वॉर में उनके इस तरह के लुक की उम्मीद नहीं की थी. कहना होगा कि भंसाली ने इस बार भी अपना कमाल दिखाया है, जिससे दर्शक हैरान रह गए हैं. एक बार फिर म्यूजिक के मामले में भंसाली अपनी कमाल के परफेक्शन को दर्शकों के सामने पेश कर रहे हैं.

    मेकर्स ने सोशल मीडिया पर पोस्टर शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा है- वो रूतबा, वो रौब, वो जुनून! संजय लीला भंसाली की लव एंड वॉर 21 जनवरी को सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है.

    संजय लीला भंसाली द्वारा स्क्रीन पर रोमांस लाते देखना किसी ट्रीट से कम नहीं होता, ऐसे में दर्शक लव एंड वॉर के जरिए लंबे समय के बाद फिर से प्यार का जादू देखने के साथ महसूस करने वाले हैं. ऐसे में कहना गलत नहीं होगा कि पोस्टर ने फिल्म की रिलीज के लिए एक्साइटमेंट को अलग लेवल पर पहुंचा दिया है.
     

  • MP BJP में बड़ी नियुक्ति, बृज गोपाल लोया बने प्रदेश मीडिया प्रभारी

    MP BJP में बड़ी नियुक्ति, बृज गोपाल लोया बने प्रदेश मीडिया प्रभारी

    भोपाल 

     मध्यप्रदेश भाजपा में बड़ी नियुक्ति हुई है। बृज गोपाल लोया को प्रदेश मीडिया प्रभारी बनाया गया है। मध्यप्रदेश भाजपा ने इस संबंध में आदेश भी जारी कर दिया है। प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की सहमति के बाद यह नियुक्ति की गई है। इससे पहले सोमवार के सत्ता और संगठन के शीर्ष नेताओं ने प्रदेश मीडिया प्रभारी पद पर नियुक्ति के लिए गहन विचार विमर्श किया था। डिजिटल टीम के लिए केंद्रीय नेतृत्व के सख्त दिशा निर्देश हैं। इसका ध्यान रखते हुए बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने सीएम मोहन यादव से विस्तार से चर्चा की और बुधवार को आखिरकार बृज गोपाल लोया को प्रदेश मीडिया प्रभारी बनाने की घो​षणा कर दी गई।

    मध्यप्रदेश भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल को दिल्ली बुला लिया गया था। आशीष अग्रवाल को अब मीडिया विभाग का संयोजक बना दिया गया है। तभी से प्रदेश मीडिया प्रभारी पद खाली था। बुधवार को प्रदेश भाजपा ने बृज गोपाल लोया को प्रदेश मीडिया प्रभारी बनाने की घोषणा की। प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है।

    राष्ट्रीय नेतृत्व की बेहद सख्त गाइडलाइन
    बीजेपी में डिजिटल टीम को लेकर राष्ट्रीय नेतृत्व द्वारा बेहद सख्त गाइडलाइन जारी की गई है। पार्टी आलाकमान ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि उनके काम में देश के युवाओं की सोच साफ नजर आनी चाहिए। ऐसे में मध्यप्रदेश भाजपा के लिए चुनौती बढ़ गई थी। राज्य में खाली पडे प्रदेश मीडिया प्रभारी की नियुक्ति को लेकर संगठन और सत्ता ने खूब मंथन किया। सोमवार को बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने इस संबंध में चर्चा के लिए सीएम हाउस जाकर मुख्यमंत्री मोहन यादव से मुलाकात की थी। दोनों नेताओं ने करीब 30 मिनट तक बातचीत की। आधिकारिक तौर पर इस भेंट को सेवा संकल्प अभियान से संबंधित बताया गया लेकिन हकीकत में दोनों शीर्ष नेताओं ने प्रदेश मीडिया प्रभारी की नियुक्ति पर चर्चा की थी।

    प्रदेश सह मीडिया प्रभारी के रूप में काम कर चुके
    बृज गोपाल लोया, बीजेपी के प्रदेश सह मीडिया प्रभारी के रूप में काम कर चुके हैं। वे मूलत: रायसेन जिले के हैं। उदयपुरा निवासी बृज गोपाल लोया पार्टी में पहले भी कई अहम पदों पर रहे हैं। वह नगर परिषद उपाध्यक्ष प्रतिनिधि के साथ ही भाजपा में प्रवक्ता के रूप में भी काम कर चुके हैं। बृज गोपाल लोया की प्रदेश मीडिया प्रभारी पद पर नियुक्ति के बाद उनके पुश्तैनी नगर में खासा उत्साह दिखा। भाजपाइयों में खुशी दिखाई दे रही है।

     

  • प्लेट जितनी बड़ी और रुई जैसी सॉफ्ट, ऐसे बनाएं कर्नाटक की मशहूर थट्टे इडली

    प्लेट जितनी बड़ी और रुई जैसी सॉफ्ट, ऐसे बनाएं कर्नाटक की मशहूर थट्टे इडली

    क्या आपने कभी किसी साउथ इंडियन खाने की दुकान में प्लेट के आकार की बड़ी-बड़ी इडली रखी देखी है. प्लेट के साइज की इडली को 'थट्टे इडली' कहते हैं जो कर्नाटक की संस्कृति का एक अहम हिस्सा है. साउथ इंडिया में लगभग हर जगह मिलने वाली छोटी, गुंबद के आकार की इडली के उलट यह काफी चौड़ी, चपटी और बहुत ही मुलायम होती है. इसका टेक्सचर चावल के केक से ज्यादा बादल जैसा होता है.

    थट्टे इडली इतनी मुलायम क्यों होती है?
    थट्टे इडली का बैटर आम इडली के बैटर से अलग होता है. इसमें रेगुलर इडली वाले चावल और उड़द दाल के साथ ही मुरमुरे या पोहा और कभी-कभी साबूदाना भी मिलाया जाता है जिससे ये बहुत ज्यादा मुलायम और लाइट बनती है. वैसे इस बैटर से साधारण इडली भी बनाई जा सकती है.

    यह इडली नॉर्मल इडली से साइज में बड़ी, स्वाद में बेहद स्वादिष्ट और छूने में रुई जैसी बेहद सॉफ्ट व जालीदार होती है. एक ही इडली में आपका पेट आराम से भर जाता है. इसे नारियल की तीखी चटनी, सांबर और थोड़े से घी या गन पाउडर यानी पोड़ी मसाले के साथ परोसा जाता है. आइए जानते हैं कर्नाटक स्टाइल में एकदम सॉफ्ट और परफेक्ट थट्टे इडली बनाने की आसान विधि!

    सामग्री:
    2 कप इडली राइस (डोसा राइस या फिर सोना मसूरी चावल)

    1/2 कप उड़द दाल (बिना छिलके वाली)

    1/4 कप साबूदाना (इडली को सुपर सॉफ्ट बनाने के लिए)

    1/4 कप पोहा (चिड़वा)

    1/2 छोटा चम्मच मेथी दाना

    स्वादानुसार नमक

    पानी (बैटर बनाने के लिए)

    मोल्ड/प्लेट ग्रीस करने के लिए थोड़ा-सा तेल या घी

    बनाने की विधि:
    एक बर्तन में इडली राइस, उड़द दाल, साबूदाना और मेथी दाना को अच्छी तरह धोकर 5-6 घंटे के लिए पानी में भिगो दें. पोहे को पीसने से 10 मिनट पहले भिगोएं.

    भीगी हुई सामग्री और पोहे को मिक्सी या ग्राइंडर में थोड़ा-थोड़ा पानी डालकर एकदम स्मूथ पीस लें. बैटर न ज्यादा गाढ़ा होना चाहिए और न ही बहुत पतला.

    पिसे हुए बैटर में नमक मिलाएं और इसे ढककर 8-10 घंटे (या रात भर) किसी गरम जगह पर खमीर उठने के लिए रख दें. खमीर उठने के बाद बैटर फ्लफी और दोगुना हो जाएगा.

    थट्टे इडली स्टैंड (या घर की किसी भी छोटी, फ्लैट किनारे वाली ढोकला/इडली प्लेट) में थोड़ा-सा तेल या घी लगाकर ग्रीस कर लें.

    तैयार बैटर को प्लेट में आधा या तीन-चौथाई भरें. इडली स्टीमर या ढक्कन वाले बड़े बर्तन में पानी उबलने दें. प्लेट्स को स्टीमर में रखें और मध्यम से तेज आंच पर 10-12 मिनट तक भाप में पकने दें.

    एक टूथपिक डालकर चेक करें, अगर वह साफ निकले तो इडली पक चुकी है. थोड़ा ठंडा होने पर चम्मच की मदद से किनारों से इडली निकाल लें.

    ऊपर से थोड़ा-सा देसी घी और गन पाउडर छिड़ककर नारियल की चटनी और गरम-गरम सांभर के साथ परोसें.

  • एशियन गेम्स 2026 में भारत का धमाका, दक्षिण कोरिया को 8-2 से रौंदा

    एशियन गेम्स 2026 में भारत का धमाका, दक्षिण कोरिया को 8-2 से रौंदा

    काकामिगाहारा
     एशियन गेम्स 2026 में भारतीय हॉकी टीम का बेहतरीन प्रदर्शन जारी है। टीम इंडिया ने दक्षिण कोरिया को भी 8-2 के अंतर से रौंद दिया है। इससे पहले भी भारतीय टीम सभी टीमों को बड़े अंतर से हराती आई है। दक्षिण कोरिया के खिलाफ मैच में भारत के लिए फॉरवर्ड अभिषेक (14वां और 38वां मिनट), दिलप्रीत सिंह (26वां और 32वां) ने दो दो गोल किये। शिलानंद लाकड़ा (चौथा), सुखजीत सिंह (नौवां), कप्तान हरमनप्रीत सिंह (11वां) और राजिंदर सिंह (60वां) ने एक एक गोल दागा।

    कोरिया के लिये किम जाएहो (42वां) और किम योंगबोक (52वां) ने गोल किए। भारत ने इससे पहले इंडोनेशिया को 13-1 और श्रीलंका को 16-1 से हराया था। अब भारत का सामना 26 सितंबर को जापान से होगा। इसके बाद भारत को बांग्लादेश के खिलाफ खेलना है। जापान वही टीम है, जिसने पिछले एशियाई खेलों में सिल्वर मेडल अपने नाम किया था। इस बार जापान मेजबान भी है। ऐसे में टीम इंडिया को सतर्क रहना होगा।

    मजबूत टीम मानी जा रही थी कोरिया
    भारत ने इस टूर्नामेंट में जिस तरह की शुरुआत की थी। इसके बाद कहा जा रहा था कि दक्षिण कोरिया की टीम ही भारत को चुनौती दे सकती है। हालांकि, मैच के दौरान ऐसा कुछ देखने को नहीं मिला। भारत ने एकतरफा अंदाज में जीत हासिल की और अब टीम इंडिया हॉकी में गोल्ड जीतने की सबसे मजबूत दावेदार है। भारत के लिए सेमीफाइनल का सफर आसान रहेगा, लेकिन नॉकआउट मुकाबलों में टीम इंडिया फंस सकती है।

    हॉकी में 12 टीमों के बीच मुकाबला
    एशियन गेम्स 2026 में कुल 12 हॉकी टीमें शामिल हैं। इन्हें 2 ग्रुप में बांटा गया है। दोनों ग्रुप से टॉप 2 टीमें सेमीफाइनल में जगह बनाएंगी। इन्हीं चार टीमों के बीच मैच कराकर हर पदक के विजेता तय किए जाएंगे। भारत के लिए गोल्ड मेडल इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि स्वर्ण पदक जीतने पर भारत 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक के लिए सीधे क्वालीफाई कर जाएगा। अब भारत के लिए बड़ी चुनौती जापान की टीम होगी।

  • Hurun Rich List 2026: इंदौर के विनोद अग्रवाल MP के सबसे अमीर, ₹700 करोड़ बढ़ी दौलत

    Hurun Rich List 2026: इंदौर के विनोद अग्रवाल MP के सबसे अमीर, ₹700 करोड़ बढ़ी दौलत

    इंदौर
     इंदौर के प्रमुख कारोबारी व उद्यमी विनोद कुमार अग्रवाल हुरून रिच लिस्ट 2026 में मप्र के सबसे अमीर व्यक्ति के रूप में शीर्ष स्थान पर हैं। हुरून इंडिया द्वारा जारी सूची में देश के अमीरों की सूची में वे 365वें स्थान पर हैं।

    10 हजार करोड़ से ज्यादा संपत्ति के मालिक
    इस सूची के मुताबिक अग्रवाल की संपत्ति में पिछले वर्ष की तुलना में 700 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है। उनकी संपत्ति 9500 करोड़ रुपये से बढ़कर 10,200 करोड़ रुपये हुई है। हुरून इंडिया की सूची में इंदौर व भोपाल के एक दर्जन उद्यमी शामिल हैं।

    ‘इंदौर में उद्यमियों के लिए लगातार बढ़ रहे अवसर’
    अग्रवाल कोल के संचालक विनोद कुमार अग्रवाल ने बताया कि मेरा विजन है कि इंदौर में ज्यादा से ज्यादा उद्यमी इस सूची में शामिल हों। इस तरह इंदौर का नाम देश-दुनिया में ऊंचाइयों तक पहुंचेगा। इंदौर शहर लगातार बढ़ रहा है। यहां पर नए उद्यमियों व व्यवसाय के लिए अधिक अवसर उपलब्ध हैं।

    इंदौर के विकास में रियल एस्टेट के माध्यम से योगदान दे रहे हैं। इसके माध्यम से हम इंदौर में ऐसे प्रोजेक्ट तैयार कर रहे हैं, जिससे व्यवसायिक अवसर तैयार हों, जो इंदौर को देश के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सामने रखें।

    हुरून इंडिया की सूची में प्रदेश के कारोबारी

    इंदौर के कारोबारी व उद्यमी
    नाम — रैंक
    विनोद कुमार अग्रवाल — 365
    अनुराग मूंदड़ा — 665
    दिनेश पाटीदार — 941
    नितिन अग्रवाल — 1139
    सुनील चौरड़िया — 1276
    विमल तोड़ी — 1425

    भोपाल के कारोबारी व उद्यमी

    दिलीप सूर्यवंशी — 852
    देवेंद्र जैन — 1112
    अनिल बंसल — 1139
    सुनील बंसल  — 1139
    सुधीर कुमार अग्रवाल  — 1276
    सुधीर अग्रवाल  — 1607

     

  • CM साय राज्य स्तरीय पुरस्कार वितरण कार्यक्रम में होंगे शामिल

    CM साय राज्य स्तरीय पुरस्कार वितरण कार्यक्रम में होंगे शामिल

    रायपुर.

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज राजधानी रायपुर में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होंगे। CM साय सुबह 11:45 बजे पं. दीनदयाल उपाध्याय सभागार पहुंचेंगे, जहां आयोजित राज्य स्तरीय पुरस्कार वितरण कार्यक्रम में शामिल होंगे।

    इसके बाद दोपहर 2 बजे से आदिम जाति कल्याण विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री शामिल होंगे। शाम 4:10 बजे मुख्यमंत्री एक निजी रिसॉर्ट में आयोजित Statescon 2026 – Building Viksit Chhattisgarh कार्यक्रम में शामिल होंगे। कार्यक्रम में शामिल होने के बाद मुख्यमंत्री शाम 5:40 बजे मुख्यमंत्री निवास लौटेंगे।

    बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से बदली छत्तीसगढ़ की तस्वीर
    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश में सड़क, बिजली, पेयजल और खाद्य सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार की दिशा में व्यापक कार्य हुए। सार्वजनिक वितरण प्रणाली को प्रभावी बनाकर जरूरतमंद परिवारों तक खाद्यान्न पहुंचाने की मजबूत व्यवस्था विकसित की गई, जिसके कारण डॉ. रमन सिंह को प्रदेश में ‘चाउंर वाले बाबा’ के नाम से भी पहचान मिली। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकार मिलकर जनकल्याणकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए कार्य कर रही हैं। गरीब, किसान, महिला, युवा और वंचित वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है।

  • वर्षों से पिता के नाम दर्ज थी जमीन, लोक सेवा गारंटी से किसान रतम राम को मिला हक

    वर्षों से पिता के नाम दर्ज थी जमीन, लोक सेवा गारंटी से किसान रतम राम को मिला हक

    सेवा की कहानी

    वर्षों से पिता के नाम दर्ज थी जमीन, लोक सेवा गारंटी से किसान रतम राम को मिला हक

    फौती नामांतरण के बाद बी-1 में दर्ज हुआ नाम, किसान हितैषी योजनाओं से जुड़ने की राह हुई आसान

    समय-सीमा में राजस्व प्रकरण का निराकरण, किसान रतम राम ने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय का जताया आभार

    रायपुर
     वर्षों से जिस कृषि भूमि पर खेती कर परिवार का जीवन चल रहा था, उसके राजस्व अभिलेख में अब भी दिवंगत पिता का ही नाम दर्ज था। इस वजह से जशपुर जिले के ग्राम कंडोरा निवासी किसान श्री रतम राम को अपनी जमीन से जुड़ी कई प्रक्रियाओं और किसान हितैषी योजनाओं का लाभ लेने में कठिनाई आ रही थी। लोक सेवा गारंटी के माध्यम से उनका फौती नामांतरण होने और बी-1 में नाम दर्ज होने के बाद अब उनकी यह परेशानी दूर हो गई है।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में सुशासन, पारदर्शिता और समयबद्ध नागरिक सेवाओं पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी व्यवस्था का लाभ कुनकुरी तहसील के ग्राम कंडोरा निवासी किसान श्री रतम राम को मिला।

    पिता के निधन के वर्षों बाद भी रिकॉर्ड में दर्ज था उनका नाम

    श्री रतम राम के पिता स्वर्गीय सुखरू के निधन के कई वर्ष बीत चुके थे, लेकिन कृषि भूमि के राजस्व अभिलेख बी-1 में अब भी उनके पिता का नाम दर्ज था। जीवित वारिस के रूप में श्री रतम राम का नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं होने के कारण उन्हें जमीन से संबंधित कार्यों के साथ किसान हितैषी योजनाओं की प्रक्रियाओं में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।

    किसान के लिए जमीन केवल संपत्ति नहीं, बल्कि उसकी आजीविका का आधार होती है। ऐसे में राजस्व रिकॉर्ड का अद्यतन होना किसान को उसकी भूमि से संबंधित अधिकारों और विभिन्न शासकीय प्रक्रियाओं से जोड़ने के लिए महत्वपूर्ण है।

    लोक सेवा गारंटी ने आसान की राह

    अपनी समस्या के समाधान के लिए श्री रतम राम ने लोक सेवा गारंटी अधिनियम के अंतर्गत आवेदन प्रस्तुत किया। आवेदन मिलने के बाद राजस्व विभाग ने निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार प्रकरण पर कार्रवाई शुरू की। पटवारी जांच, मौका मुआयना तथा दावा-आपत्ति सहित आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद उनका फौती नामांतरण किया गया।

    नामांतरण पूरा होते ही राजस्व अभिलेख बी-1 में श्री रतम राम का नाम दर्ज हो गया। वर्षों से लंबित उनकी समस्या का समाधान होने से उन्हें बड़ी राहत मिली।

    अब किसान योजनाओं से जुड़ने की राह हुई आसान

    राजस्व अभिलेख अद्यतन होने से श्री रतम राम के लिए कृषि भूमि से संबंधित शासकीय प्रक्रियाएं आसान हुई हैं। अब प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, समर्थन मूल्य पर धान खरीदी और एग्रीस्टैक के अंतर्गत डिजिटल किसान पहचान जैसी किसान हितैषी योजनाओं से जुड़ी प्रक्रियाओं में उन्हें सुविधा मिल सकेगी। संबंधित योजनाओं का वास्तविक लाभ उनके निर्धारित पात्रता मानदंडों के अनुसार प्राप्त होगा।

    श्री रतम राम की कहानी यह बताती है कि समय पर राजस्व रिकॉर्ड में सुधार किसी किसान के लिए केवल दस्तावेजी प्रक्रिया नहीं है। यह उसकी भूमि से जुड़े अधिकारों को रिकॉर्ड में स्पष्ट करने और विभिन्न शासकीय सेवाओं तक उसकी पहुंच आसान बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम है।

    रतम राम बोले—समय पर हुआ काम, अब बी-1 में मेरा नाम

    अपनी समस्या का समाधान होने से प्रसन्न श्री रतम राम ने कहा, “मेरे पिता के नाम पर जमीन होने से मुझे लाभ नहीं मिल रहा था। लोक सेवा गारंटी से मेरा काम समय पर हो गया और बी-1 में मेरा नाम आ गया। इसके लिए मैं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और जिला प्रशासन को दिल से धन्यवाद देता हूं।”

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में नागरिकों को राजस्व सहित विभिन्न शासकीय सेवाएं निर्धारित समय-सीमा में उपलब्ध कराने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का लाभ अब जमीनी स्तर पर हितग्राहियों तक पहुंच रहा है। किसान रतम राम का फौती नामांतरण इसी समयबद्ध सेवा व्यवस्था की एक सकारात्मक तस्वीर है।