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  • MP की स्वच्छता रैंकिंग पर कचरे का संकट, 15 शहरों की साख दांव पर

    MP की स्वच्छता रैंकिंग पर कचरे का संकट, 15 शहरों की साख दांव पर

     भोपाल 
    स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 के परिणामों का इंतजार जल्द खत्म होने वाला है। पिछले वर्ष इन पुरस्कारों की घोषणा जुलाई में हो गई थी लेकिन इस बार अक्टूबर माह में होगी। मध्यप्रदेश के लगभग 15 शहर स्वच्छता सर्वे की रैंकिंग की दौड़ में शामिल हैं। कचरा प्रबंधन की नियमानुसार व्यवस्था नहीं कर पाने से प्रदेश के कई शहरों की रैंकिंग बिगड़ सकती है। वहीं नागरिकों का फीडबैक भी निर्णायक रहेगा। दरअसल प्रदेश में प्रतिदिन निकलने वाला घरेलू कचरे की मात्रा बढ़ती जा रही है लेकिन प्रोसेसिंग की व्यवस्था नहीं है।

    मैदानी निरीक्षण पर तय किए जाएंगे नंबर
    प्रदेश में एक साल में प्रतिदिन निकलने वाले घरेलू कचरे की मात्रा में 1730 टन बढ़ चुकी है। इसके साथ इस कचरे की प्रोसेसिंग में भी गैप बढ़ा है। एक साल पहले 18.05 टीपीडी कचरे की प्रोसेसिंग नहीं हो पा रही थी जो अब बढ़कर 55.39 टन प्रतिदिन हो गई है। अभी भी 34 डंपिंग साइट्स पर लगभग 13 लाख मीट्रिक टन लीगेसी वेस्ट जमा है, जो शहरों की सूरत पर धब्बा बना हुआ है। स्वच्छ अवार्ड की रैंकिंग 12500 नंबरों पर होगी। इसमें से 1-1 हजार नंबर ओडीएफ और वाटर प्लस के साथ ही गार्बेज फ्री सिटी के लिए होंगे। बचे 10500 नंबर टीम के मैदानी निरीक्षण पर तय किए जाएंगे। राजधानी भोपाल के साथ ही इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन, सागर, सतना जैसे बड़े शहरों में भी कचरे के ऐसे पहाड़ दिखाई देते हैं। 

    धार्मिक स्थलों के साथ स्कूलों में भी सर्वे
    स्वच्छ सर्वे की टीमों ने फरवरी-मार्च में प्रदेश के नगरीय निकायों में जाकर सर्वेक्षण का काम पूरा किया। इस बार टूरिस्ट, हेरिटेज, धार्मिक स्थलों के साथ अन्य ऐसे स्थानों की स्वच्छता का भी निरीक्षण किया गया जहां बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। इसके साथ स्कूली बच्चों के व्यवहार में स्वच्छता शामिल हुई या नहीं, इसका भी स्कूलों में जाकर जायजा लिया गया। नई टूलकिट में खुले में शौच और यूरिनेशन रोकने का एक नया इंडिकेटर शामिल थे। टीमों ने निकायों में खुले में यूरिनेशन रोकने के लिए जरूरत के अनुसार व्यवस्था भी देखी।

    स्वच्छ शहर जोड़ी में मिल सकता है लाभ
    इस बार स्वच्छ शहर जोड़ी नाम से से एक नई अवार्ड कैटेगरी शुरू की गई है। इससे स्वच्छ शहर अपने समीपस्थ शहर को स्वच्छता सिखाकर जोड़ी में अवॉर्ड ले सकेंगे। प्रदेश के स्वच्छता में अव्वल शहरों को इसका लाभ मिल सकता है। क्योंकि पिछले वर्ष प्रदेश के आठ शहरों को अवॉर्ड मिला था। इनमें इंदौ, उज्जैन, बुदनी, भोपाल, देवास, शाहगंज, जबलपुर और ग्वालियर शामिल थे। इन शहरों के आसपास वाले नगरों के साथ जोड़ी में पुरस्कार आ सकता है।

    स्वच्छता मानक के नंबर निर्धारित

    1500- दिखाई देने वाली स्वच्छता
    1000- कचरे का सेग्रीगेशन, संग्रहण और परिवहन
    1500- सॉलिड वेस्ट प्रोसेसिंग
    1000- एक्सेस टू सेनिटेशन
    1000- उपयोग किए गए पानी का प्रबंधन
    500- डीस्लजिंग सर्विसेज का मशीनीकरण
    1500- स्वच्छता की एडवोकेसी
    1000- इकोसिस्टम सशक्तिकरण
    500- स्वच्छता कर्मियों का कल्याण
    1000- सिटीजन फीडबैक और शिकायत निवारण
    10500- कुल नंबर

  • परिणीति चोपड़ा का OTT डेब्यू फीका! ‘शक: ट्रस्ट नो वन’ में ट्विस्ट तो बहुत, रोमांच गायब

    परिणीति चोपड़ा का OTT डेब्यू फीका! ‘शक: ट्रस्ट नो वन’ में ट्विस्ट तो बहुत, रोमांच गायब

    परिणीति चोपड़ा का ओटीटी डेब्यू हो गया है. उनकी सीरीज शक: ट्रस्ट नो वन आज नेटफ्लिक्स पर रिलीज हो गई. सीरीज की कहानी ऐसी है, जिसे हम पहले सुन भी चुके हैं. यह अमेरिका के फिलाडेल्फिया की बच्ची डेलिमार वेरा (Delimar Vera) की जिंदगी से प्रेरित है.

    डेलिमार वेरा फिलाडेल्फिया की वही छोटी बच्ची जो 10 दिन की उम्र में गायब हो गई थी और वर्षों बाद अपनी मां से मिली. कहानी भावुक है, अविश्वसनीय है और इतनी सिनेमाई है कि इसमें बहुत ज्यादा सजावट की जरूरत ही नहीं है. लेकिन परिणीति की सीधे-सादे भावनात्मक आधार वाली सीरीज को तकरीबन 40-40 मिनट के सात एपिसोड में खींचा गया है और यहीं से परेशानी शुरू होती है.

    यह कहानी दो घंटे की एक कसी हुई फिल्म की हकदार थी. इसके बजाय मेकर्स इसे थ्रिलर, इमोशनल फैमिली ड्रामा, रिश्तों, रहस्य और कई जगह लगभग सुपरनैचुरल कहानी बनाने की कोशिश करते हैं. इसमें किडनैपिंग है, गैरकानूनी सरोगेसी है, बेवफाई है, सास-बहू का ड्रामा है, तंत्र-मंत्र है, हैलुसिनेशन हैं और इतने सारे राज हैं कि हर किरदार कुछ न कुछ छिपाता नजर आता है.

    कभी-कभी कहानी को सब कुछ देने की जरूरत नहीं होती. ‘शक’ के केंद्र में एक मां है, जो अपनी उस बेटी को तलाश रही है जिसे जन्म के वक्त अगवा कर लिया गया था. उसे यकीन है कि उसकी बच्ची जिंदा है और एक दिन उसकी जिंदगी में वापस आएगी. इतना भर अपने आप में एक मजबूत कहानी है लेकिन शो लगातार इसमें नई परतें जोड़ता जाता है, मानो मेकर्स को डर हो कि सिर्फ मां-बेटी की यह कहानी दर्शकों को बांधे नहीं रख पाएगी.

    नतीजा यह होता है कि थ्रिलर लगातार ट्विस्ट तो देता रहता है, लेकिन वह सबसे जरूरी चीज भूल जाता है जिसकी एक अच्छे थ्रिलर को जरूरत होती है, जिज्ञासा.

    दूसरे या तीसरे एपिसोड तक आपको काफी हद तक अंदाजा हो जाता है कि कहानी किस दिशा में जाने वाली है. इसके बाद आप यह जानने के लिए उत्सुक नहीं रहते कि हुआ क्या है. आप बस यह इंतजार करते हैं कि आखिर ऐसा क्यों हुआ और कैसे हुआ और जब दर्शक मोटे तौर पर रहस्य सुलझा चुका हो, लेकिन किरदार कई एपिसोड तक उसी रहस्य के आसपास घूमते रहें, तो सस्पेंस रोमांच की जगह धैर्य की परीक्षा लेने लगता है.

    ‘शक’ यानी संदेह शायद यही इस शो का सबसे बड़ा मिस्ड प्वॉइन्ट है. शो चाहता है कि दर्शक हर किसी पर शक करे लेकिन खुद मुख्य किरदार को शायद ही कभी किसी पर वास्तव में शक करने की ठोस वजह दी जाती है और यह पूरी तरह उसकी गलती नहीं, बल्कि कमजोर लेखन का नतीजा है.

    फिर आते हैं राज. यहां लगभग हर किसी के पास कोई न कोई राज है. कागज पर देखें तो ये सभी मसाले एक बेहद दिलचस्प और पल-पल करवट लेने वाली कहानी के लिए पर्याप्त हैं लेकिन ‘शक’ एक साथ मां की भावनात्मक कहानी भी बनना चाहता है और हर किरदार के इर्द-गिर्द घूमता ट्विस्ट से भरा थ्रिलर भी. इसी कोशिश के बीच कहानी कहीं अपना रास्ता खो देती है.

    लेखन कई जगह सुविधानुसार कहानी को आगे बढ़ाता नजर आता है. एक पुलिस अफसर है, लेकिन भावनात्मक एंगल बनाने के लिए उसे बीमार कर दिया जाता है और फिर वह टैरो कार्ड पढ़ने लगता है. टैरो कार्ड के जरिए वह न सिर्फ मुख्य किरदार को उम्मीद देता है, बल्कि कहानी को अगले खुलासे की तरफ भी धकेलता है. यह सब किरदार के स्वभाव से स्वाभाविक रूप से निकलता हुआ कम और ऐसा ज्यादा लगता है जैसे लेखकों को कहानी पूरी करने के लिए एक और मोहरा चाहिए था.

    यही बात कुछ ज्यादा नाटकीय दृश्यों पर भी लागू होती है, खासकर तेज लाल रोशनी और हैलुसिनेशन वाले हिस्सों पर. ये दृश्य माहौल के भीतर से थ्रिल पैदा करने के बजाय सीधे ऐलान करते हैं कि ‘अब थ्रिलर शुरू हो गया है.’ कई जगह इनका जरूरत से ज्यादा नाटकीय होना अनजाने में हास्यास्पद भी लगने लगता है.

    दुर्भाग्य से कहानी का भावनात्मक पक्ष भी उतनी मजबूती से असर नहीं छोड़ पाता, जितना उसे छोड़ना चाहिए था. मां का दर्द आपको उस गहराई से महसूस नहीं होता, जिसकी इस कहानी को जरूरत है. उसकी बेटी के खोने का दुख आपको भीतर तक नहीं तोड़ता. यहां तक कि जब वह दूसरे लोगों के बच्चों में अपनी बेटी को तलाशने की बेचैनी दिखाती है, तब भी वे दृश्य दिल तोड़ने के बजाय कई बार बनावटी और परेशान करने वाले लगते हैं.

    परिणीति चोपड़ा के हिस्से कुछ अच्छे पल जरूर आते हैं. खासकर कमजोर और भावुक दृश्यों में वह अपने किरदार के गुस्से के नीचे छिपे दुख की झलक दिखाने में सफल रहती हैं. लेकिन ज्यादातर समय वह अपने किरदार को इतने तीखे और लगभग हमेशा गुस्से से भरे हावभाव के साथ निभाती हैं कि दर्द और बदले की भावना के बीच का फर्क धुंधला पड़ जाता है.

    ताहिर राज भसीन ग्रे शेड वाले किरदार में अपने चरित्र को पर्याप्त रूप से डरावना बनाए रखते हैं. सोनी राजदान यहां सरप्राइज पैकेज हैं. उनके मासूम चेहरे और किरदार के कामों के बीच का विरोधाभास कई जगह वाकई बेचैन करने वाला असर पैदा करता है. हरलीन सेठी, सुमीत व्यास और अनुप सोनी को भी मजबूत किरदार मिले हैं और वे अपनी भूमिकाओं के साथ न्याय करते हैं. वहीं जेनिफर विंगेट को शायद सबसे दिलचस्प मौका मिला है अपनी रेंज दिखाने का. ‘बेहद’ के बाद एक बार फिर उन्हें किरदार के अलग-अलग रंग तलाशने का मौका मिलता है और वह साबित करती हैं कि असमान लेखन के बावजूद दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींचने की उनमें पूरी क्षमता है.

    शिमला भी खूबसूरत नजर आता है. लेकिन बस खूबसूरत। कहानी में ये लोकेशन कभी किरदार नहीं बन पाती. इतने खास माहौल वाले शहर में सेट थ्रिलर में पहाड़, धुंध और अकेलापन कहानी के तनाव को कई गुना बढ़ा सकते थे. लेकिन यहां वे ज्यादातर खूबसूरत बैकड्रॉप बनकर रह जाते हैं.

    सिद्धार्थ पी. मल्होत्रा और रेंसिल डी'सिल्वा दोनों पहले मजबूत काम से जुड़े रहे हैं, लेकिन यहां कहानी को ‘थ्रिलर’ बनाने की कोशिश खुद कहानी पर हावी होती नजर आती है. मेकर्स आपको एक ऐसा मुकम्मल ड्रामा देना चाहते हैं, जिसकी मांग असल कहानी ने कभी की ही नहीं थी. वे इसमें रहस्य भी चाहते हैं, भावनाएं भी, रोमांस भी, पारिवारिक राज भी, सुपरनैचुरल रंग भी और एक चमत्कार भी और ‘शक’ को सब कुछ बनाने की कोशिश में वे उसे असल में बहुत कम बना देते हैं.

    सात एपिसोड देखने के बाद सबसे बड़ा रहस्य यह नहीं रह जाता कि बेटी को किसने अगवा किया था. असली सवाल यह रह जाता है कि आखिर इस कहानी को सात एपिसोड की जरूरत थी ही क्यों?

  • ₹1.5 करोड़ की फिल्म ने कमाए ₹366 करोड़, प्रोड्यूसर को मिल सकते हैं ₹50 करोड़!

    ₹1.5 करोड़ की फिल्म ने कमाए ₹366 करोड़, प्रोड्यूसर को मिल सकते हैं ₹50 करोड़!

    बॉलीवुड में हर साल बड़ी-बड़ी फिल्मों पर करोड़ों रुपये लगाए जाते हैं, लेकिन कभी-कभी छोटा बजट भी ऐसा कमाल कर देता है कि बड़े-बड़े रिकॉर्ड पीछे छूट जाते हैं. 2026 की सरप्राइज हिट बनकर सामने आई ‘हनुमान अंश’ इसका ताजा उदाहरण है. महज 1.5 करोड़ रुपये से थोड़े ज्यादा बजट में बनी ये फिल्म सिनेमाघरों में 7 हफ्ते पूरे कर चुकी है और अभी भी कमाई का सिलसिला जारी है.

    खास बात ये है कि फिल्म की एक प्रोड्यूसर ने इसमें 50 लाख रुपये लगाए थे और अब उनका दावा है कि उन्हें 50 करोड़ रुपये से ज्यादा का फायदा हो सकता है.

    1.5 करोड़ के बजट में बनी फिल्म ने मचा दिया तहलका
    ‘हनुमान अंश’ इस साल की सबसे बड़ी सरप्राइज हिट्स में से एक बन गई है. फिल्म ‘धुरंधर 2’ और ‘बॉर्डर 2’ के बाद 2026 की तीसरी सबसे बड़ी हिट बताई जा रही है. फिल्म को सिनेमाघरों में रिलीज हुए 7 हफ्ते हो चुके हैं, लेकिन इसकी रफ्तार अभी थमती नजर नहीं आ रही. फिल्म की एक प्रोड्यूसर अनूप्रिया नागर ने हाल ही में फिल्म के बजट और अपनी कमाई को लेकर खुलासा किया है.

    उनके मुताबिक, फिल्म को बनाने में 1.5 करोड़ रुपये से थोड़े ज्यादा खर्च हुए थे और उन्होंने खुद इसमें 50 लाख रुपये लगाए थे.

    प्रोड्यूसर ने लगाए 50 लाख, अब मिलेंगे 50 करोड़?
    सिद्धार्थ कन्नन से बातचीत में अनूप्रिया नागर ने अपने निवेश के बारे में खुलकर बताया. उन्होंने कहा- मैंने पूरी फिल्म के बजट का एक-तिहाई हिस्सा लगाया था. मैंने फिल्म में 50 लाख रुपये लगाए और बजट 1.5 करोड़ रुपये से थोड़ा ज्यादा था. फिल्म की कमाई की बात करें तो ट्रेड ट्रैकर सैकनिल्क के मुताबिक-'हनुमान अंश’ ने पहले 47 दिनों में 366.45 करोड़ रुपये ग्रॉस कमा लिए हैं.

    जब अनुप्रिया से पूछा गया कि फिल्म से उन्हें कितना रिटर्न मिलेगा, तो उन्होंने बताया कि मुनाफे का चार हिस्सों में बंटवारा होगा. उन्होंने कहा, “मुझे मुनाफे का एक-चौथाई हिस्सा मिलेगा. सबसे पहले डिस्ट्रीब्यूटर अपना हिस्सा लेंगे. उसके बाद हमें दूसरे खर्चों का भुगतान करना होगा और टैक्स भी देना होगा. फिर जो भी रकम बचेगी, उसे हम चारों के बीच बांटा जाएगा.

    50 लाख लगाने वाली अनुप्रिया को मिल सकते हैं 50 करोड़
    जब अनुप्रिया से पूछा गया कि वह व्यक्तिगत तौर पर फिल्म से कितनी कमाई कर सकती हैं, तो उन्होंने कहा कि अभी तक के हिसाब से उन्हें कम से कम 50 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है. हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि ये आंकड़ा अभी सैद्धांतिक है, क्योंकि फिल्म की OTT, म्यूजिक और सैटेलाइट डील अभी बाकी है.

    अनुप्रिया ने कहा- अभी तक ऐसा लग रहा है कि मैं 50 करोड़ रुपये कमाऊंगी. लेकिन ये सब सैद्धांतिक है. हमें अभी OTT, म्यूजिक और सैटेलाइट डील करनी बाकी है. अगर आगे फिल्म की डिजिटल, सैटेलाइट और म्यूजिक डील भी अच्छी रही, तो कमाई का गणित और बड़ा हो सकता है.

    50 करोड़ मिले तो क्या करेंगी अनूप्रिया?
    अब सवाल ये था कि अगर अनूप्रिया को 50 करोड़ रुपये मिलते हैं, तो वह इस पैसे का क्या करेंगी? इस पर उनका जवाब भी काफी दिलचस्प था. उन्होंने कहा कि उन्हें खुद नहीं पता कि इतनी बड़ी रकम को कैसे संभालना है और वह इसका इस्तेमाल समाज के लिए करना चाहती हैं.

    अनुप्रिया ने कहा- मुझे यह भी नहीं पता कि इतने पैसे को कैसे संभालना है, इसलिए मुझे लगता है कि इसका सबसे अच्छा तरीका समाज को वापस देना है. उन्होंने आगे बताया कि वह अपनी खुद की प्रोडक्शन कंपनी शुरू करना चाहती हैं, ताकि ऐसी और कहानियां दर्शकों तक पहुंचा सकें. उनका फोकस रीजनल फिल्मों और वेब सीरीज बनाने पर होगा, लेकिन वह इन्हें बड़े बजट के बजाय छोटे बजट में बनाना चाहती हैं.

    अनुप्रिया ने कहा- मैं छोटे बजट में फिल्में बनाना चाहती हूं, क्योंकि मैं जानती हूं कि ‘हनुमान अंश’ सिर्फ इसलिए बन पाई क्योंकि इसका बजट छोटा था. अगर मेरा बजट बहुत बड़ा होता, तो मुझे नहीं लगता कि यह फिल्म इस तरह बन पाती. मैं यह सुनिश्चित करना चाहती हूं कि अपनी प्रोडक्शन कंपनी के लिए पैसे का एक निश्चित हिस्सा बचाकर रखूं.

    डायरेक्टर ने 14 साल तक सुनाई थी ये कहानी
    ‘हनुमान अंश’ के डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी के लिए भी ये फिल्म किसी सपने के सच होने जैसी है. अनुप्रिया ने बताया कि विशाल पिछले 14 साल से इस कहानी को बनाना चाहते थे. उन्होंने कई OTT प्लेटफॉर्म्स को इसकी कहानी सुनाई थी, लेकिन बात नहीं बन पाई.

    अनुप्रिया ने कहा- उन्होंने 14 लंबे सालों तक इस कहानी को बनाने की कोशिश की. उन्होंने कई OTT प्लेटफॉर्म्स को इसकी कहानी सुनाई थी. रागिनी सोना और नम्रता सिंह (को-प्रोड्यूसर्स) ही वो लोग थीं, जिन्होंने फिल्म पर भरोसा दिखाया और कहा कि चलिए इसे बनाते हैं. अनुप्रिया खुद प्रोजेक्ट से पोस्ट-प्रोडक्शन के दौरान जुड़ी थीं. उस वक्त फिल्म की टीम को कुछ फंड की जरूरत थी और उन्होंने इसमें निवेश किया.

    डायरेक्टर ने नहीं ली कोई फीस, अब चारों में बंटेगा मुनाफा
    अनुप्रिया ने फिल्म के डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी की फीस को लेकर भी बड़ा खुलासा किया. उन्होंने बताया कि फिल्म का बजट बेहद कम था, इसलिए विशाल ने फिल्म बनाते वक्त कोई फीस लेने से इनकार कर दिया था.

    अनुप्रिया ने कहा- हमारा बजट बहुत कम था, इसलिए उन्होंने कहा कि वह फिल्म बनाते समय कोई फीस नहीं लेंगे. लेकिन कंपनी में हम सभी बराबर के पार्टनर हैं, इसलिए अगर हम अच्छा कर रहे हैं, तो हम चारों भी अच्छा करेंगे. डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी ने फिल्म के शुरुआती दौर में फीस नहीं ली, लेकिन अब फिल्म के मुनाफे में वह बाकी तीन पार्टनर्स के बराबर हिस्सेदार हैं.

    पहली फिल्म में ही विशाल ने कर दिया कमाल
    अनुप्रिया ने विशाल चतुर्वेदी की जमकर तारीफ भी की. उन्होंने कहा कि सभी लोगों को विशाल पर भरोसा था और उन्हें खुशी है कि एक फर्स्ट-टाइम डायरेक्टर को यह मौका मिला.

    उन्होंने कहा- हम सभी को विशाल पर भरोसा था. वह पहली बार फिल्म डायरेक्ट कर रहे हैं और मुझे खुशी है कि उन्हें यह मौका मिला. उन्होंने कितनी खूबसूरत डायरेक्शन की है और कितनी शानदार स्क्रिप्ट लिखी है.

    अभी OTT डील होना बाकी है
    ‘हनुमान अंश’ की सिनेमाघरों में कमाई भले ही जबरदस्त चल रही हो, लेकिन फिल्म की OTT डील अभी तक नहीं हुई है. इसके अलावा म्यूजिक और सैटेलाइट डील भी बाकी है. ऐसे में फिल्म की आगे की कमाई और प्रोड्यूसर्स को मिलने वाले मुनाफे पर अभी पूरी तस्वीर सामने आना बाकी है.

    लेकिन फिलहाल 1.5 करोड़ रुपये से थोड़ा ज्यादा के बजट वाली इस फिल्म का 366 करोड़ रुपये से ज्यादा का ग्रॉस कलेक्शन अपने आप में इसकी सबसे बड़ी कहानी बन चुका है.

  • 70 बांग्लादेशियों के फर्जी पासपोर्ट का खुलासा, STF ने आरोपी गया प्रसाद को दबोचा

    70 बांग्लादेशियों के फर्जी पासपोर्ट का खुलासा, STF ने आरोपी गया प्रसाद को दबोचा

    ग्वालियर
    स्पेशल टास्क फोर्स (STF) मध्य प्रदेश ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 70 फर्जी पासपोर्ट बनवाने के बड़े रैकेट में एक और बड़ी सफलता हासिल की है।एसटीएफ भोपाल की टीम ने इस मामले में 6वें आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी की पहचान गया प्रसाद गौतम पिता कच्ची राम निवासी बनवार चीनौर भितरवार ग्वालियर के रूप में हुई है।

    पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी पूर्व में जान-पहचान न होने के बावजूद पासपोर्ट बनवाने वालों के निवास पते की फर्जी तस्दीक (वेरिफिकेशन) करता था और गवाह के रूप में अपनी भूमिका निभाता था। ग्वालियर के डबरा से बने सभी 17 पासपोर्ट में यह इकलौता गवाह है।

    भंते के रूप में रहता था, वहीं से शुरू हुआ नेटवर्क
    एसटीएफ के अनुसार, आरोपी गया प्रसाद ने वर्ष 2019 में बौद्ध धर्म की दीक्षा ली थी। इसके बाद वर्ष 2021-22 में वह अम्बेडकर पार्क, सिमरिया टेकड़ी (डबरा, ग्वालियर) में भंते के रूप में रहने लगा।

    स्थानीय निवासी होने के कारण उसने इसी दौरान वर्ष 2022 में बौद्ध भिक्षु संबंधी कार्यक्रम आयोजित कराया था। इसी कार्यक्रम के दौरान उसकी पहचान मैत्तानंद भिक्षु उर्फ रेयाल चौधरी भिक्षु से हुई। इसके बाद आरोपी ने मैत्तानंद भिक्षु के कहने पर 17 बांग्लादेशियों के फर्जी निवास प्रमाण की पुष्टि की और खुद गवाह बना।

    एक ही पते पर दर्ज कराए गए फर्जी पासपोर्ट
    जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी ने जिन भी लोगों के पासपोर्ट बनवाने में आपराधिक सहयोग किया, उन सभी में निवास स्थान के रूप में एक ही पता"सिमरिया टेकड़ी, डबरा, जिला ग्वालियर" दर्ज कराया गया था। बिना किसी पूर्व परिचय के भी आरोपी झूठा गवाह बनकर फर्जी पासपोर्ट जारी करवा रहा था।

    इन गंभीर धाराओं में मामला दर्ज
    एसटीएफ भोपाल के अपराध क्रमांक 09/2026 के तहत दर्ज इस प्रकरण में आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420, 465, 467, 468, 471 एवं 120-बी के अलावा धारा 12 (पासपोर्ट अधिनियम), धारा 14 (विदेशी विषयक अधिनियम) तथा धारा 17 (भारतीय नागरिकता अधिनियम) के तहत कार्रवाई की जा रही है।

     

  • CG रोजगार मेले में 230 पदों पर भर्ती, हजारों युवा पहुंचे

    CG रोजगार मेले में 230 पदों पर भर्ती, हजारों युवा पहुंचे

    महासमुंद.

    जिले के युवाओं को उनकी योग्यता और कौशल के अनुसार रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए जिला रोजगार एवं स्वरोजगार मार्गदर्शन केंद्र द्वारा 24 सितंबर 2026 को जिला स्तरीय रोजगार मेले का आयोजन किया जा रहा है।

    रोजगार मेला ग्राम बरोडाबाजार स्थित पॉलिटेक्निक कॉलेज परिसर के लाइवलीहुड कॉलेज के द्वितीय तल पर आयोजित होगा। रोजगार मेले का समय सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक निर्धारित किया गया है। योग्य उम्मीदवार निर्धारित समय पर पहुंचकर साक्षात्कार प्रक्रिया में शामिल हो सकेंगे। प्रशासन ने युवाओं से समय का विशेष ध्यान रखने की अपील की है।

    230 पदों पर होगी भर्ती
    उपसंचालक रोजगार डॉ. शशिकला अतुलकर के अनुसार मेले में निजी क्षेत्र की कई कंपनियां शामिल होंगी। स्वतंत्रा माइक्रोफिन प्राइवेट लिमिटेड, पुष्कल एग्रोटेक लिमिटेड, अलर्ट एसजीएस प्राइवेट लिमिटेड, रजत इक्विपमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड और श्रमिन टैलेंट प्राइवेट लिमिटेड द्वारा कुल 230 विभिन्न पदों पर भर्ती की जाएगी।

    10वीं से स्नातक तक के युवा ले सकेंगे हिस्सा
    रोजगार मेले में 10वीं, 12वीं, बीएससी एग्रीकल्चर, स्नातक डिग्री और आईटीआई उत्तीर्ण युवा योग्यता के अनुसार आवेदन कर सकेंगे। अलग-अलग पदों के लिए शैक्षणिक योग्यता निर्धारित की गई है।

    ऑनलाइन आवेदन जरूरी
    मेले में शामिल होने के लिए उम्मीदवारों को पहले छत्तीसगढ़ रोजगार एप या आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करना अनिवार्य है। इसके बाद ही साक्षात्कार प्रक्रिया में शामिल हो सकेंगे। उम्मीदवारों को मेले में शैक्षणिक योग्यता के मूल दस्तावेज, रोजगार पंजीयन कार्ड, आधार कार्ड, बायोडाटा की छायाप्रति और पासपोर्ट साइज रंगीन फोटो साथ लाने होंगे। रिक्त पदों और वेतनमान से जुड़ी विस्तृत जानकारी के लिए जिला रोजगार कार्यालय से संपर्क किया जा सकता है।

  • कब्जामुक्त कराएं जमीन, दबंगों को सिखाएं कानूनी सबक: मुख्यमंत्री

    कब्जामुक्त कराएं जमीन, दबंगों को सिखाएं कानूनी सबक: मुख्यमंत्री

    कब्जामुक्त कराएं जमीन, दबंगों को सिखाएं कानूनी सबक: मुख्यमंत्री

    बारिश के बावजूद सीएम योगी आदित्यनाथ ने किया जनता दर्शन

    गोरखनाथ मंदिर में मुख्यमंत्री ने करीब 200 लोगों से मुलाकात कर सुनीं समस्याएं

    जनता से बोले सीएम – घबराइए मत, सबकी समस्या का होगा समाधान

    गोरखपुर
     जनता की सेवा को सर्वोपरि रखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार सुबह बारिश होने के बावजूद ‘जनता दर्शन’ किया। दूरदराज से आए लोगों से उन्होंने गोरखनाथ मंदिर में मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। समस्या लेकर आए लोगों को मुख्यमंत्री ने समाधान का भरोसा दिया। इस अवसर पर अवैध कब्जे की शिकायतों पर उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जमीन कब्जामुक्त कराने के साथ जबरन कब्जा करने वालों को कड़ा कानूनी सबक सिखाया जाए। 

    बारिश की वजह से मुख्यमंत्री के निर्देश पर लोगों की सुविधा के लिए जनता दर्शन का आयोजन गोरखनाथ मंदिर परिसर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन सभागार में किया गया। इस दौरान सीएम योगी ने करीब 200 लोगों की समस्याएं सुनीं और अधिकारियों को उनका समाधान करने का निर्देश दिया। कुर्सियों पर बैठाए गए लोगों तक पहुंचकर मुख्यमंत्री ने उनकी पीड़ा जानी और आश्वस्त किया कि सभी की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित किया जाएगा। जनता दर्शन में मुख्यमंत्री ने वहां मौजूद अधिकारियों को निर्देशित किया कि हर पीड़ित व्यक्ति की समस्या पर संवेदनशीलता से ध्यान दें और तत्परता से उसका समयबद्ध व पारदर्शी निस्तारण कराएं। 

    इस दौरान कुछ महिलाओं ने उनकी जमीन जबरन कब्जा कर लिए जाने की शिकायत की। इस पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि यदि किसी दबंग ने किसी गरीब की जमीन हड़पी है तो उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। जमीन अवैध या जबरन कब्जे से मुक्त होनी चाहिए। 

    हर बार की तरह जनता दर्शन में कुछ लोग गंभीर बीमारियों के इलाज में आर्थिक मदद की गुहार लेकर पहुंचे थे। ऐसे मामलों में सीएम योगी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि इलाज में अस्पताल के एस्टीमेट की प्रक्रिया को जल्द पूर्ण कराकर शासन में भेजें। मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से इलाज के लिए पर्याप्त राशि दी जाएगी।

  • प्रयागराज संगम पर अमेरिका से होगा ऑनलाइन पिंडदान, पितृ पक्ष की तैयारियां तेज

    प्रयागराज संगम पर अमेरिका से होगा ऑनलाइन पिंडदान, पितृ पक्ष की तैयारियां तेज

     प्रयागराज

    पितृ पक्ष के दिन पास आने के साथ ही संगम नगरी प्रयागराज में पितरों के तर्पण और पिंडदान को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं. पितरों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना के लिए देश ही नहीं, विदेशों से भी बड़ी संख्या में लोग प्रयागराज पहुंचते हैं. इस बार भी पितृ पक्ष के दौरान संगम क्षेत्र में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटने की उम्मीद है. खास बात यह है कि जो लोग किसी कारणवश प्रयागराज नहीं पहुंच पा रहे हैं, उनके लिए ऑनलाइन पिंडदान की तैयारी भी शुरू हो चुकी है। 

    इस बार पितृ पक्ष 26 सितंबर से शुरू होकर 10 अक्टूबर तक रहेगा. इस दौरान अपने पितरों के निमित्त लोग प्रयागराज पहुंचकर भी तर्पण और पिंडदान करते हैं. श्रद्धालुओं के लिए यह समय अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और धार्मिक आस्था व्यक्त करने का महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है. तीर्थ पुरोहितों के अनुसार पितृ पक्ष के दौरान देश-विदेश से लोग अपने पितरों को मोक्ष दिलाने और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रयागराज पहुंचते हैं. संगम पर पिंडदान और तर्पण करने के बाद श्रद्धालु आगे की धार्मिक यात्रा भी पूरी करते हैं। 

    प्रदीप पांडे तीर्थ पुरोहित, प्रयागराज बताते हैं कि धार्मिक मान्यता के अनुसार पिंडदान की परंपरा में प्रयागराज, काशी और गया का विशेष महत्व बताया जाता है. लोग प्रयागराज से इसकी शुरुआत करते हैं, इसके बाद काशी होते हुए गया पहुंचकर पिंडदान की प्रक्रिया को पूरा करते हैं. इसी वजह से पितृ पक्ष के दौरान प्रयागराज में देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो जाता है. संगम क्षेत्र में पितृ पक्ष के दौरान सुबह से ही श्रद्धालु अपने पितरों के निमित्त धार्मिक अनुष्ठान करते नजर आते हैं. जैसे-जैसे पितृ पक्ष आगे बढ़ेगा, वैसे-वैसे संगम क्षेत्र में लोगों की संख्या भी बढ़ने लगेगी। 

    अमेरिका से 28 सितंबर को होगा पिंडदान
    प्रदीप पांडे बताते हैं कि इस बार पितृ पक्ष के दौरान विदेश में बैठे लोग भी प्रयागराज की धार्मिक परंपरा से जुड़ रहे हैं. जानकारी के मुताबिक अमेरिका से एक श्रद्धालु 28 सितंबर को प्रयागराज में पिंडदान करेगा. इसके लिए ऑनलाइन व्यवस्था का सहारा लिया जाएगा. पिछले दो-तीन वर्षों से ऑनलाइन पिंडदान की व्यवस्था भी शुरू हुई है. इसका लाभ ऐसे लोग उठा रहे हैं जो किसी कारणवश प्रयागराज नहीं आ पाते. किसी को यात्रा में परेशानी है तो किसी के पास समय या दूसरी तरह की समस्या है. ऐसे में वे ऑनलाइन माध्यम से अपने पितरों के लिए पिंडदान की प्रक्रिया पूरी करा रहे हैं. इस व्यवस्था के जरिए विदेशों में रहने वाले लोगों को भी अपने पितरों के प्रति धार्मिक जिम्मेदारी निभाने का अवसर मिल रहा है. अमेरिका से 28 सितंबर को होने वाला पिंडदान इसी व्यवस्था का एक उदाहरण है. प्रदीप पांडेय बताते हैं कि ऑनलाइन पिंडदान की सुविधा का इस्तेमाल केवल विदेश में रहने वाले लोग ही नहीं कर रहे हैं. गांव और देहात में रहने वाले ऐसे लोग भी इस व्यवस्था का लाभ उठा रहे हैं, जो किसी कारण से प्रयागराज आने में असमर्थ हैं. कई परिवारों के सामने यात्रा से जुड़ी परेशानी होती है. कुछ लोगों के लिए लंबी दूरी तय करना मुश्किल होता है. ऐसे में ऑनलाइन व्यवस्था उनके लिए अपने पितरों के निमित्त पिंडदान कराने का माध्यम बन रही है। 

    तीर्थ पुरोहितों का कहना है कि लोगों की आस्था और अपने पितरों के प्रति श्रद्धा आज भी उतनी ही मजबूत है. परिस्थितियां भले बदल गई हों, लेकिन लोग किसी न किसी तरीके से अपने पितरों के लिए धार्मिक कर्मकांड पूरा करना चाहते हैं। 

    युवा पीढ़ी भी निभा रही परंपरा
    प्रदीप पांडे तीर्थ पुरोहित, प्रयागराज बताते हैं कि पितृ पक्ष के दौरान एक और खास बात देखने को मिल रही है. आज की युवा पीढ़ी भी सनातन धर्म की परंपराओं और पितरों से जुड़े कर्मकांडों को लेकर रुचि दिखा रही है. लोग अपने पितरों को मोक्ष दिलाने के लिए उपलब्ध व्यवस्थाओं का सहारा ले रहे हैं. जो संगम तक पहुंच सकते हैं, वे स्वयं आकर पिंडदान और तर्पण करते हैं और जो नहीं आ सकते, वे ऑनलाइन व्यवस्था के जरिए इससे जुड़ रहे हैं. तीर्थ पुरोहितों के मुताबिक यह बात महत्वपूर्ण है कि आधुनिक दौर में भी युवा अपने परिवार और पूर्वजों से जुड़ी परंपराओं को निभाने के लिए आगे आ रहे हैं। 

    पीले वस्त्रों में नजर आएंगे श्रद्धालु
    प्रदीप पांडे के मुताबिक पितृ पक्ष के दौरान संगम क्षेत्र में श्रद्धालुओं की वेशभूषा भी अलग दिखाई देती है. पितरों के निमित्त पिंडदान और तर्पण करने के लिए आने वाले कई श्रद्धालु पीले वस्त्र पहनकर आते हैं. जिस तरह भगवा रंग की अपनी अलग धार्मिक पहचान है, उसी तरह पितृ पक्ष के दौरान पीले वस्त्र पहनकर आने की परंपरा भी श्रद्धालुओं के बीच देखने को मिलती है. संगम क्षेत्र में पितृ पक्ष के दौरान बड़ी संख्या में लोग पीले वस्त्रों में दिखाई देंगे. तीर्थ पुरोहितों के अनुसार जो श्रद्धालु इस परंपरा का पालन करते हैं, वे पिंडदान के दौरान निर्धारित वेशभूषा का भी ध्यान रखते हैं. यही वजह है कि पितृ पक्ष में संगम क्षेत्र का दृश्य सामान्य दिनों से काफी अलग नजर आता है। 

    26 सितंबर के बाद बढ़ेगी श्रद्धालुओं की संख्या
    पितृ पक्ष की शुरुआत के साथ ही प्रयागराज में श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला तेज हो रहा है. अभी से लोग धीरे-धीरे पहुंचने लगे हैं. माना जा रहा है कि 26 सितंबर के बाद संगम क्षेत्र में श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ जाएगी. पितरों के प्रति श्रद्धा रखने वाले परिवार देश के अलग-अलग हिस्सों से प्रयागराज पहुंचेंगे. कोई अपने माता-पिता के लिए पिंडदान करेगा तो कोई अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण करेगा. संगम की धरती पर पितरों के निमित्त होने वाले इन धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान बड़ी संख्या में तीर्थ पुरोहित भी श्रद्धालुओं को विधि-विधान से कर्मकांड कराने में जुटेंगे। 

  • MBBS प्रवेश पर दिव्यांग अभ्यर्थियों को हाईकोर्ट की राहत, मेडिकल बोर्ड प्रतिशत नहीं घटा सकता

    MBBS प्रवेश पर दिव्यांग अभ्यर्थियों को हाईकोर्ट की राहत, मेडिकल बोर्ड प्रतिशत नहीं घटा सकता

    लखनऊ
    इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने दिव्यांग अभ्यर्थियों के एमबीबीएस प्रवेश से संबंधित एक मामले में दिशा स्पष्ट की है। कहा कि सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी वैध दिव्यांगता प्रमाण पत्र में दर्ज दिव्यांगता के प्रतिशत को एनएमसी (नेशनल मेडिकल कमीशन) के मेडिकल असेसमेंट बोर्ड द्वारा दोबारा निर्धारित नहीं किया जा सकता। बोर्ड को सिर्फ इतना जांचने का अधिकार है कि अभ्यर्थी उचित सुविधा और सहायक तकनीक के साथ एमबीबीएस पाठ्यक्रम पूरा करने में सक्षम है अथवा नहीं।

    न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति अबधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने शुभम मिश्रा, सौरभ राणा और गुलफाम अहमद की ओर से दाखिल तीन अलग-अलग याचिकाओं पर एक साथ सुनवायी करते हुए, यह निर्णय दिया है। न्यायालय ने मेडिकल असेसमेंट बोर्ड और अपीलीय मेडिकल असेसमेंट बोर्ड द्वारा जारी उन निष्कर्षों को रद्द कर दिया, जिनमें अभ्यर्थियों को पीडब्ल्यूबीडी (पर्सन विद बेंचमार्क डिसबिल्टीज) आरक्षण के लिए अयोग्य बताया गया था। न्यायालय ने याचियों को नीट-यूजी 2026 की शेष काउंसलिंग में पीडब्ल्यूबीडी आरक्षित श्रेणी के योग्य अभ्यर्थी के रूप में शामिल करने का निर्देश दिया है।

    याची शुभम मिश्रा को मुख्य चिकित्सा अधिकारी, सुलतानपुर ने 45 प्रतिशत स्थायी दिव्यांगता का प्रमाण पत्र जारी किया था। हालांकि, मेडिकल असेसमेंट बोर्ड ने 11 अगस्त 2026 के प्रमाण पत्र में उनकी दिव्यांगता को 45 प्रतिशत से घटाकर 20 प्रतिशत कर दिया और उन्हें पीडब्ल्यूबीडी आरक्षण के लिए अयोग्य बताया। अपीलीय मेडिकल बोर्ड ने भी असेसमेंट बोर्ड के फैसले को बरकरार रखा।

    दर्ज दिव्यांगता प्रतिशत सभी के लिए बाध्यकारी
    इसी प्रकार अन्य याचियों सौरभ राणा व गुलफाम अहमद के दिव्यांगता प्रतिशत को घटा दिया गया। अपने निर्णय में कोर्ट कहा कि आरपीडब्ल्यूडी एक्ट की धारा 57 के तहत सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी और वैध दिव्यांगता प्रमाण पत्र, जब तक सक्षम न्यायिक या वैधानिक मंच द्वारा निरस्त नहीं किया जाता, उसमें दर्ज दिव्यांगता प्रतिशत सभी के लिए बाध्यकारी है। कहा कि मेडिकल बोर्ड को यह देखना है कि अभ्यर्थी अपनी प्रमाणित दिव्यांगता के बावजूद उचित सुविधा और सहायक तकनीक के साथ एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने में सक्षम है या नहीं लेकिन यह प्रक्रिया दिव्यांगता के प्रतिशत को दोबारा तय करने के लिए नहीं है।

  • सेवा एवं समर्पण अभियान के तहत शाहपुरा में वृक्षारोपण, पर्यावरण संरक्षण का लिया संकल्प

    सेवा एवं समर्पण अभियान के तहत शाहपुरा में वृक्षारोपण, पर्यावरण संरक्षण का लिया संकल्प

    सेवा एवं समर्पण अभियान के तहत शाहपुरा में हुआ वृक्षारोपण
    भाजपा कार्यकर्ताओं ने पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का लिया संकल्प, प्रदेश से आए बाइकर्स ने भी लिया हिस्सा

    शाहपुरा
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में भारतीय जनता पार्टी द्वारा चलाए जा रहे सेवा एवं समर्पण अभियान के अंतर्गत शाहपुरा में वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में भाजपा पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, युवा कार्यकर्ताओं और नागरिकों ने विभिन्न स्थानों पर पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
    कार्यक्रम के दौरान उपस्थित कार्यकर्ताओं एवं नागरिकों ने अधिक से अधिक पौधे लगाने तथा लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल और संरक्षण करने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि एक पौधा केवल वर्तमान के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, हरित और सुरक्षित पर्यावरण की नींव है।
    इस अवसर पर “हर पौधा—भविष्य की हरियाली और आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारी जिम्मेदारी” का संदेश देते हुए आमजन से पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय सहभागिता की अपील की गई। साथ ही पौधारोपण के बाद उनकी देखभाल को भी अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया।
    कार्यक्रम में प्रदेश से आए बाइकर्स के साथ भाजपा जिला अध्यक्ष चमरू सिंह नेताम, जिला उपाध्यक्ष ज्ञानदीप त्रिपाठी, जिला उपाध्यक्ष संतोष साहू, जनपद अध्यक्ष प्रियंका आर्मो, किसान मोर्चा जिला अध्यक्ष घनश्याम कछवाहा, चिकित्सा प्रकोष्ठ जिला संयोजक श्वेता जैन, भाजपा मंडल अध्यक्ष भजन चक्रवर्ती, मंडल अध्यक्ष हिरेंद्र मरावी, नगर परिषद अध्यक्ष शालिनी अग्रवाल, उपाध्यक्ष मुकेश साहू, सत्यम मानिकपुरी, हरिहरन रजक, नंद कुमार ठाकुर सहित बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता एवं नागरिक उपस्थित रहे।
    जिला मीडिया प्रभारी राज साहू ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि सेवा एवं समर्पण अभियान के तहत पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों को आगे भी जारी रखा जाएगा।

  • इंग्लैंड में 24 साल के क्रिकेटर पर रेप के दो आरोप, एसेक्स ने किया सस्पेंड

    इंग्लैंड में 24 साल के क्रिकेटर पर रेप के दो आरोप, एसेक्स ने किया सस्पेंड

    नई दिल्ली
     इंग्लैंड के घरेलू क्रिकेट से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है। एसेक्स काउंटी क्रिकेट क्लब के 24 साल के बल्लेबाज रॉबिन दास पर यौन उत्पीड़न के दो गंभीर आरोप लगे हैं। इन संगीन आरोपों के सामने आने के बाद एसेक्स काउंटी ने उन्हें तुरंत प्रभाव से टीम से सस्पेंड कर दिया है। अब इस मामले में रॉबिन दास को 9 अक्टूबर 2026 को इनर लंदन क्राउन कोर्ट में पेश होना होगा।

    मार्च 2024 की घटना, अगस्त 2025 में हुई थी गिरफ्तारी
    लंदन मेट्रोपोलिटन पुलिस की आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2024 में ब्रिक्सटन में एक महिला के साथ बलात्कार की शिकायत दर्ज कराई गई थी। मामले की जांच के बाद पुलिस ने 27 अगस्त 2025 को रॉबिन दास को गिरफ्तार किया था। इसके बाद 23 जुलाई 2026 को उन पर दो औपचारिक बलात्कार के आरोप तय किए गए। पुलिस अधिकारियों ने साफ किया है कि पीड़ित महिला को हर संभव कानूनी और मनोवैज्ञानिक सहायता दी जा रही है। अगर अदालत में आरोप साबित होते हैं, तो इस युवा क्रिकेटर को लंबी जेल की सजा हो सकती है।

    एसेक्स काउंटी क्रिकेट क्लब का कड़ा रुख
    मामले की गंभीरता को देखते हुए एसेक्स काउंटी क्रिकेट क्लब ने बयान जारी कर अपने खिलाड़ी को निलंबित करने की पुष्टि की है। क्लब ने अपने आधिकारिक बयान में कहा, 'एसेक्स काउंटी क्रिकेट क्लब इस बात की पुष्टि करता है कि हमारे कॉन्ट्रैक्टेड खिलाड़ी हाल ही में क्लब के बाहर के एक गंभीर मामले को लेकर कोर्ट में पेश हुए थे। क्लब लगातार इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड, प्रोफेशनल क्रिकेटर्स एसोसिएशन और संबंधित अधिकारियों के संपर्क में है। सस्पेंशन की कार्रवाई इसी प्रक्रिया का हिस्सा है और कानूनी प्रक्रिया जारी रहने तक क्लब इस पर कोई अन्य टिप्पणी नहीं करेगा।'

    कैसा रहा है रॉबिन दास का अब तक का करियर?
    फरवरी 2002 में जन्मे बांग्लादेशी मूल के इंग्लिश क्रिकेटर रॉबिन दास दाएं हाथ के बल्लेबाज हैं। उन्होंने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में अब तक 9 फर्स्ट क्लास मैचों में 25.15 की औसत से 327 रन बनाए हैं, जिसमें 1 शतक शामिल है। लिस्ट-ए क्रिकेट के 29 मैचों में 31.00 की औसत से उन्होंने 805 रन बनाए हैं, जिसमें 1 शतक और 5 अर्धशतक दर्ज हैं। उन्होंने अपना आखिरी मुकाबला 21 जुलाई 2026 को मिडिलसेक्स के खिलाफ वनडे कप में खेला था, जिसके बाद से वे क्रिकेट से दूर और निलंबित चल रहे हैं।