Author: Admin

  • आंगन मिलन सेवा से उत्सव स्थल बने आंगनबाड़ी केंद्र, पहले दिन 97 हजार से अधिक लोगों की सहभागिता

    आंगन मिलन सेवा से उत्सव स्थल बने आंगनबाड़ी केंद्र, पहले दिन 97 हजार से अधिक लोगों की सहभागिता

    आंगन मिलन सेवा से उत्सव स्थल बने आंगनबाड़ी केंद्र, पहले दिन 97 हजार से अधिक लोगों की सहभागिता

    प्रदेश में 2,262 स्थानों पर हुए 12,698 आयोजन; मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय मुंगेली के मदकू में कार्यक्रम में हुए शामिल

    सुपोषित थाली के प्रदर्शन के साथ माताओं और बच्चों के पोषण पर हुआ संवाद

    रायपुर
     सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत प्रदेश में शुक्रवार से शुरू हुई ‘आंगन मिलन सेवा’ के पहले दिन आंगनबाड़ी केंद्रों में उत्सव जैसा माहौल रहा। राज्यभर में 2,262 स्थानों पर 12,698 गतिविधियां आयोजित की गईं, जिनमें 97,471 लोगों ने सहभागिता की। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय भी मुंगेली जिले के मदकू में आयोजित आंगन मिलन सेवा कार्यक्रम में शामिल हुए और माताओं एवं बच्चों के पोषण का संदेश दिया।

    आंगनबाड़ी केंद्रों में गर्भवती माताओं का स्वागत किया गया। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौष्टिक खाद्य पदार्थों, दालों और हरी सब्जियों का प्रदर्शन कर परिवारों को संतुलित भोजन के बारे में बताया गया। सुपोषित थाली के माध्यम से महिलाओं ने जाना कि रोजमर्रा के भोजन में विविध खाद्य पदार्थ शामिल कर माताओं और बच्चों का पोषण कैसे बेहतर बनाया जा सकता है। कार्यक्रमों में बच्चों के अभिभावकों ने भी भाग लिया और पोषण तथा मातृ स्वास्थ्य से जुड़े अनुभव साझा किए।

    महतारी वंदन योजना और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की लाभार्थियों ने बताया कि योजनाओं से मिली सहायता से वे अपनी और अपने परिवार की जरूरतें पूरी कर पा रही हैं। आंगन मिलन सेवा के माध्यम से परिवारों और समुदाय को आंगनबाड़ी केंद्रों से जोड़ते हुए बच्चों के पोषण को साझा जिम्मेदारी बनाने पर जोर दिया गया।

  • CM योगी की PWD समीक्षा बैठक 27 सितंबर को, सड़कों और अधूरे कामों पर होगी नजर

    CM योगी की PWD समीक्षा बैठक 27 सितंबर को, सड़कों और अधूरे कामों पर होगी नजर

    लखनऊ
    सीएम योगी आदित्यनाथ 27 सितंबर को लोक निर्माण विभाग (PWD) की समीक्षा बैठक बुलाई है। इसमें पीडब्ल्यूडी के कामों का हिसाब-किताब होगा। इसके मद्देनजर प्रमुख सचिव अजय चौहान ने सभी चीफ इंजीनियरों को तैयारी के साथ बैठक में शामिल होने के निर्देश दिए हैं। सीएम योगी आदित्यनाथ बारिश के कारण टूटी सड़कों की मरम्मत, उन्हें गड्ढामुक्त किए जाने, वित्तीय वर्ष (financial year) 2023-24 से पहले स्वीकृत 50 करोड़ से अधिक के अधूरे कामों को पूरा करने के लिए रिवाइज्ड ऐक्शन प्लान (पुनरीक्षित कार्ययोजना), वित्तीय वर्ष 2027-28 के नए कामों का ऐक्शन प्लान (कार्ययोजना) और 2026-27 के तहत अलॉट किए रुपयों और खर्च की समीक्षा करेंगे। इस दौरान जीएसटी और अतिरिक्त बिटुमिन्स की मांग की रिपोर्ट भी प्रस्तुत की जाएगी। पीडब्ल्यूडी के प्रमुख सचिव के मुताबिक प्रदेश के सभी क्षेत्रीय मुख्य अभियंता इन सूचनाओं के साथ दोपहर 12 बजे से आयोजित बैठक में हिस्सा लेंगे।

    छुट्टी में खुले रहेंगे पीडब्ल्यूडी के सभी कार्यालय
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की 27 सितंबर को समीक्षा बैठक को देखते हुए शनिवार और रविवार को भी लोक निर्माण विभाग प्रमुख अभियंता कार्यालय तथा सभी क्षेत्रीय, वृत्तीय तथा खंडीय कार्यालय खुले रहेंगे। पीडब्ल्यूडी के प्रमुख अभियंता विभागाध्यक्ष एके द्विवेदी के मुताबिक मुख्य अभियंता मुख्याल-1 सेतु और भवन में भी सामान्य दिनों की तरह कार्य होगा।

    कानपुर में महापौर ने जर्जर सड़कों का ठीकरा अब पीडब्ल्यूडी पर फोड़ा
    उधर, कानपुर से आई एक खबर के अनुसर वहां की खराब सड़कों को लेकर जनप्रतिनिधियों को निशाने में लेने के बाद महापौर प्रमिला पांडेय ने अब इसका ठीकरा पीडल्यूडी के सिर फोड़ा है। शुक्रवार को हुई बैठक में उन्होंने कहा कि जिन सड़कों पर खतरनाक गड्ढे हैं, उनमें अधिकतर सड़कें पीडब्ल्यूडी की हैं। बैठक में नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय समेत जलकल, पीडब्ल्यूडी, केस्को, मेट्रो के अफसर मौजूद रहे। नगर आयुक्त ने सभी अफसरों से कहा कि हर एक विभाग आपस में समन्वय बनाकर 10 अक्तूबर तक सड़कों को गड्ढामुक्त करा दें।

    सड़क स्थिति की समीक्षा
    मोतीझील स्थित नगर निगम मुख्यालय में हुई बैठक में महापौर ने प्रमुख सड़कों की स्थिति, क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत और अलग-अलग विभागों की ओर से सड़क खोदने के बाद उसे दोबारा ठीक कराने की स्थिति की समीक्षा की गई। महापौर ने कहा कि शहर में कहीं सड़कें गड्ढों में तब्दील हैं तो कहीं पाइपलाइन, बिजली लाइन या दूसरे विकास कार्यों की वजह से सड़क खोदने के बाद उनकी मरम्मत नहीं कराई गई है। इससे लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। शहर में बड़ी संख्या में खराब सड़कें पीडब्ल्यूडी की हैं, पर उनकी खराब स्थिति का दोष नगर निगम पर आता है।

    पीडब्ल्यूडी अफसरों को अल्टीमेटम
    महापौर ने पीडब्ल्यूडी अधिकारियों से ऐसी सड़कों की जल्द मरम्मत कराने को कहा। निर्देश दिए कि जहां तत्काल मरम्मत की जरूरत है, वहां काम में देरी न की जाए। त्योहार सिर पर है। अब लापरवाही सहन नहीं होगी। उन्होंने सड़क मरम्मत में आ रही दिक्कतों और काम पूरा करने की समय-सीमा की भी जानकारी ली। बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि किसी विभाग की ओर से सड़क बनाने के बाद दूसरे विभाग की खोदाई के कारण वह दोबारा खराब नहीं होनी चाहिए।

    पैचवर्क तय लक्ष्य में पूरा हो
    नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने बताया कि सभी संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर सड़कों पर चल रहे और प्रस्तावित कामों की समीक्षा की गई है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि सड़कों को गड्ढामुक्त करने का लक्ष्य 10 अक्तूबर तय हुआ है। जिन स्थानों पर पैचवर्क प्रभावित हो रहा है, वहां मौसम साफ होते ही तेजी से काम कराया जाएगा। जिन जगहों पर नई सड़क का निर्माण होना है, वहां संबंधित विभाग अपनी कार्ययोजना के अनुसार काम करेंगे।

  • सूरत का फेमस बाजरे का भरवां पराठा, स्वाद ऐसा कि एक से ही भर जाएगा पेट

    सूरत का फेमस बाजरे का भरवां पराठा, स्वाद ऐसा कि एक से ही भर जाएगा पेट

    राजस्थान, महाराष्ट्र के अलावा गुजराती फूड भी लोगों को बहुत पसंद आता है और इसे घर के देसी मसालों से ही बनाते हैं. सुबह नाश्ते में ज्यादातर भारतीयों के घर में पराठे बनाए जाते हैं, कभी सादा तो कभी आलू-गोभी और दाल वाले पराठे बनते हैं. गेहूं के आटे से तो पराठा सब लोग बनाते हैं, लेकिन क्या आपने कभी बाजरे के आटे का पराठा खाया है.  

    गुजरात के सूरत शहर की गलियों में बाजरे का भरवां पराठा मिलता है, जिसका स्वाद कमाल होता है. इसके साथ ही एक पराठे से ही आपका पेट भर जाएगा, इसे बनाने में ज्यादा मेहनत भी नहीं लगती है. बच्चे  से बड़े सभी इसे मजे से खाएंगे और बार-बार इसे बनाने की डिमांड भी करेंगे. आइए आपको घर पर भरवां बाजरा पराठा बनाने का तरीका बताते हैं.

    बाजरे का स्टफिंग पराठा बनाने के लिए सामग्री
        2 कप बाजरे का आटा
        1 प्याज बारीक कटा हुआ
        पानी
        2 हरी मिर्च बारीक कटी हुई
        2 टेबलस्पून हरा धनिया
        1/2 टीस्पून अजवाइन
        1/2 टीस्पून लाल मिर्च पाउडर
        1/2 टीस्पून धनिया पाउडर
        1/4 टीस्पून हल्दी
        नमक स्वादानुसार
        1-2 टीस्पून तेल

    बाजरे का पराठा बनाने का तरीका

    • सबसे पहले एक बर्तन में बाजरे का आटा लें और इसमें थोड़ा नमक डालकर गर्म पानी की मदद से नरम आटा गूंध लें. बाजरे का आटा गेहूं की तरह आसानी से नहीं बंधता, इसलिए पानी थोड़ा-थोड़ा डालें और आटे को अच्छी तरह मसलकर तैयार करें.
    • आटा गूंथने के बाद अब स्टफिंग बनाने के लिए एक कटोरे में बारीक कटा प्याज, हरी मिर्च, हरा धनिया, अजवाइन, लाल मिर्च, धनिया पाउडर, हल्दी और नमक डालकर अच्छी तरह मिला लें. चाहें तो इसमें थोड़ा सा अमचूर पाउडर भी डाल सकते हैं, इससे स्वाद और चटपटा हो जाएगा.
    • अब आटे की एक मोटी लोई लें और उसे हाथ से थोड़ा चपटा करें. इसके बीच में तैयार स्टफिंग रखें और किनारों को बंद करके दोबारा गोल कर लें. इसे हल्के हाथ से दबाकर पराठे का शेप दें.
    • बाजरे का आटा टूट सकता है, इसलिए हल्के हाथ से ही बेलने चलाएं, अगर हो तो हथेली से धीरे-धीरे दबाकर पराठा तैयार कर सकते हैं.  
    • अब तवा गर्म करें और उस पर तैयार बाजरे का पराठा डाल दें. दोनों तरफ से हल्का सिकने के बाद थोड़ा तेल लगाकर पराठे को अच्छी तरह सेंक लें. जब पराठा दोनों तरफ से गोल्डन और कुरकुरा हो जाए तो इसे तवे से उतार लें.

    किसके साथ करें सर्व?
    गरमा-गरम बाजरे का स्टफिंग पराठा दही, हरी चटनी, अचार या मक्खन के साथ सर्व करें. बच्चों के लिए बना रहे हैं तो आप इसमें स्टफिंग में आप पनीर डाल सकते हैं, जिससे उनको प्रोटीन भी मिल जाता है.

  • पेंशन केस में लापरवाही, 6 अधिकारी-कर्मचारी सस्पेंड

    पेंशन केस में लापरवाही, 6 अधिकारी-कर्मचारी सस्पेंड

    मुंगेली.

    लोक शिक्षण संचालनालय ने मुंगेली जिले में दिवंगत शिक्षक के पेंशन प्रकरण मामले में गंभीर लापरवाही पाए जाने के बाद बड़ी कार्रवाई करते हुए शिक्षा विभाग के 6 अधिकारियों व कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है.

    मामला लोरमी विकासखंड का है. जहां पेंशन प्रकरण में नियम प्रक्रिया को ताक पर रखकर गड़बड़ी पाये जाने पर निलंबन की कार्रवाई की गई है जिससे हड़कंप मचा हुआ है. आने वाले दिनों में कुछ और जांच में लंबित मामले में कार्रवाई के कयास लगाये जा रहे हैं. लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा जारी आदेश में बताया किया कि हाईस्कूल लाखासार में पदस्थ विज्ञान शिक्षक अंजनी त्रिपाठी का 25 सितंबर 2022 को सेवाकाल के दौरान निधन हो गया था. जिसके बाद परिवार पेंशन, मृत्यु सह सेवानिवृत्ति उपादान के प्रकरण की प्रक्रिया में 2018 में शिक्षक एलबी के संविलियन के बाद किए गए वेतन निर्धारण की सक्षम प्राधिकारी से जांच एवं अनुमोदन नहीं कराया गया.

    विलंब से अनुमोदन के कारण अधिक भुगतान एवं वसूली की स्थिति निर्मित हुई साथ ही लंबित पेंशन के संबंध में लोक शिक्षण संचालनालय को अंधेरे में रखकर गलत और भ्रामक जानकारी भेजी गई. मामले में तत्कालीन प्राचार्य राघवेन्द्र कुमार सोनी, प्रभारी प्राचार्य रघुनंदन राजपूत, लिपिक मोतीराम यादव, त्रिवेणी ध्रुव, अशोक ध्रुव, डीईओ ऑफिस के पेशन कक्ष प्रभारी कनिष्ठ लेखा परीक्षक शत्रुहन कुलमित्र को निलंबित किया गया है. सभी छह कर्मचारियों द्वारा अपने काम में नियम विरूद्ध कार्य, गंभीर लापरवाही, शासकीय कार्य में लेट लतीफ जैसी कई गलतियां पाई गई. सभी निलंबित लोगों का बिलासपुर संयुक्त संचालक कार्यालय निलंबन अवधि में निर्धारित किया गया है.

  • एक दिन के मासूम को मिली जिंदगी की उम्मीद, एयर एंबुलेंस से अहमदाबाद पहुंचा

    एक दिन के मासूम को मिली जिंदगी की उम्मीद, एयर एंबुलेंस से अहमदाबाद पहुंचा

    उज्जैन
     देवास में जन्मे नवजात को गंभीर हृदय रोग होने की खबर मिलते ही मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग ने जो तत्परता दिखाई, वह एक मिसाल बन गई. उज्जैन में भर्ती नवजात मासूम को तत्काल विशेषज्ञ उपचार की जरूरत थी. नवजात को बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने तेजी से कदम उठाया और पहले उसे सड़क मार्ग से इंदौर पहुंचाया गया. यहां से पीएम श्री एयर एंबुलेंस के जरिए करीब 2 घंटे में अहमदाबाद के एक अस्पताल में पहुंचाया गया. जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उसका उपचार चल रहा है। 

    एयर एंबुलेंस अहमदाबाद पहुंचाया
    देवास के गांव जमुणी निवासी धीरज का 1 दिन का बेटा गंभीर हृदय बीमारी जूझ रहा है. जिसके बाद बच्चे को उज्जैन के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया. यहां चिकित्सकों ने उसे बेहतर इलाज के लिए चिकित्सा केंद्र ले जाने की सलाह दी. इसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने मामले की जानकारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर अशोक कुमार पटेल सीएमएचओ को दी। 

    2 घंटे की यात्रा के बाद उपचार जारी
    मामले की गंभीरता को देखते हुए सीएमएचओ डॉक्टर अशोक कुमार पटेल और पीएम श्री एयर एंबुलेंस के नोडल अधिकारी डॉक्टर आदित्य माथुर ने तत्काल समन्वय शुरू किया. बिना समय गवाएं नवजात को एंबुलेंस से उज्जैन से इंदौर ले जाया गया और इसके बाद यहां से पीएम श्री एयर एंबुलेंस से अहमदाबाद के लिए उड़ान भरी. करीब 2 घंटे की यात्रा के बाद नवजात को गुजरात के एक अस्पताल में पहुंचाया गया. जहां उसके गंभीर हृदय रोग के उपचार की प्रक्रिया शुरू की गई. इतनी कम उम्र और गंभीर स्थिति को देखते हुए उच्च चिकित्सा केंद्र तक पहुंचना बेहद कठिन था। 

    आयुष्मान कार्ड से बच्चे का उपचार
    परिजन के पास आयुष्मान कार्ड होने के कारण पात्रता अनुसार नवजात के उपचार और संबंधित स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ निशुल्क मिल रहा है. पीएम श्री एयर एंबुलेंस सेवा का उद्देश्य भी गंभीर मरीजों को जरूरत के मुताबिक उच्च स्तरीय चिकित्सा सेवा उपलब्ध करवाना है. सीएमएचओ डॉक्टर अशोक कुमार पटेल ने कहा, "नवजात को बेहतर इलाज के लिए एयर एंबुलेंस से अहमदाबाद भेजा गया है. परिजन के पास आयुष्मान कार्ड से बच्चे का उपचार हो रहा है। 

  • MP को नितिन गडकरी की बड़ी सौगात, ₹43 हजार करोड़ से बनेंगी सड़कें

    MP को नितिन गडकरी की बड़ी सौगात, ₹43 हजार करोड़ से बनेंगी सड़कें

    भोपाल 

     मप्र में 43 हजार करोड़ की सड़कें बनेंगी। 940 किमी 2-लेन सड़कों को 4-लेन में बदला जाएगा। 41 हजार करोड़ रुपए खर्च आएगा। जबकि 50 जिलों की 200 किमी पुरानी हो चुकी सिंगल व डबल लेन खस्ताहाल सड़कों को सीसी रोड में बदला जाएगा।इस काम पर 4200 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इन दोनों कामों से प्रदेश के करीब 2 करोड़ से अधिक लोगों को लाभ मिलेगा। इनमें कई सड़कें ऐसी भी हैं, जो 25 से 30 साल से खस्ताहाल है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने अनंत चतुर्दशी पर मप्र को ये सौगात दी। केंद्रीय मंत्री गडकरी ने बताया कि मप्र की 940 किमी सड़कों के प्रस्ताव को वे 18 सितंबर को ही स्वीकृति कर चुके हैं। यह काम एनएचएआइ को सौंपा है। कम समय में अच्छी गुणवत्ता वाला काम हो, यह पहली प्राथमिकता है।

    सीएम आवास पर की प्रोजेक्ट की समीक्षा
    असल में केंद्रीय मंत्री गडकरी लोक परिवहन सेवा की बसों का शुभारंभ करने शुक्रवार को भोपाल आए थे, जिन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ उनके निवास पर रोड इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े प्रोजेक्टों की समीक्षा की। बैठक में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह और मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव सुखबीर सिंह मौजूद रहे। जबकि एमपीआरडीसी के एमडी भरत यादव ने आगामी कार्य योजना का प्रजेंटेशन भी दिया।

    केंद्रीय मंत्री गडकरी ने यह भी कहा
    पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी का बटेश्वर (यूपी) से विशेष संबंध रहा है। अटल एक्सप्रेस-वे का निर्माण बटेश्वर तक करेंगे।

    सिंहस्थ 2028 के दृष्टिगत उज्जैन को जोड़ने वाले सभी मार्गों को तेजी से पूरा करें।

    कान्हा राष्ट्रीय उद्यान की सड़क कनेक्टिविटी नागपुर जबलपुर और रायपुर से बढ़ाने के लिए कार्य योजना बनाए।

    बालाघाट जिले में बेहतर रोड नेटवर्क के लिए कार्य योजना बनाएं।

    पीडब्ल्यूडी को मिलेंगी 200 किमी सड़कें
    असल में एनएचएआइ ने बीते 25 से 30 सालों में नए व पुराने सड़क मागर्गों का विस्तार किया है। शहरों व ग्रामीण आबादी को राहत देने के लिए बायपास बनाए हैं लेकिन मुख्य शहरों व ग्रामीण आबादी के अंदर से गुजरने वाले पुराने मार्गों का नए सिरे से निर्माण नहीं कराया, जो कि आज भी बायपास तक पहुंचने पहुंचने का का मुख्य जरिया है। जबकि ये मार्ग अभी भी एनएचएआइ के पास ही है।

    मप्र के करीब 50 जिलों को मिला लें तो इनकी लंबाई करीब 200 किमी के आसपास है और जिन्हें बनाने में 4200 करोड़ का खर्च आ रहा है। मप्र पहले ही केंद्र को प्रस्ताव भेज चुका है। ये बन जाए तो बड़ी राहत मिलेगी। गडकरी ने उक्त प्रस्ताव को मंजूर करने का भरोसा दिया। साथ में यह भी कहा कि इन्हें सीसी रोड बनाकर पीडब्ल्यूडी को दे देंगे। बता दें कि शहरों के अंदर व आसपास के क्षेत्रों में वर्षों पहले 2-लेन बनाए थे। ट्रैफिक के दयाव व जाम के चलते अब उन पर आरओबी बना दिए है इसके कारण इन सड़कों का विस्तार नहीं हो पाया. जो कि समय की जरुरत है।

    जबलपुर के पास टोल वसूली रोकने के निर्देश
    केंद्रीय मंत्री गडकरी ने जबलपुर के पास खस्ताहाल शहपुरा आरओबी के ठीक होने तक टोल वसूली बंद करने के निर्देश दिए हैं। उक्त आरओबी की एप्रोच रोड खराब है, जिसके कारण मार्ग डायवर्ट किया है। इस तरह राहगीर उक्त मार्ग पर बहुत कम चलते हैं, तब भी उनसे टोल वसूला जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की ओर से यह बात केंद्रीय मंत्री के सामने रखी गई। जिस पर उन्होंने तत्काल निर्णय लिया और अफसरों को निर्देश दिए।

  • डीजी जेल हिमांशु गुप्ता के कर कमलों से केंद्रीय जेल, रायपुर में छत्तीसगढ़ राज्य की प्रथम महिला खुली जेल (वीमेन ओ.सी.आई.) का शुभारंभ

    डीजी जेल हिमांशु गुप्ता के कर कमलों से केंद्रीय जेल, रायपुर में छत्तीसगढ़ राज्य की प्रथम महिला खुली जेल (वीमेन ओ.सी.आई.) का शुभारंभ

    डीजी जेल हिमांशु गुप्ता के कर कमलों से केंद्रीय जेल, रायपुर में छत्तीसगढ़ राज्य की प्रथम महिला खुली जेल (वीमेन ओ.सी.आई.) का शुभारंभ

    रायपुर
     डीजी, जेल  हिमांशु गुप्ता के कर कमलों से केंद्रीय जेल, रायपुर में छत्तीसगढ़ राज्य की पहली महिला खुली जेल (वीमेन ओपन करेक्शनल इंस्टीट्यूशन -ओ.सी.आई.) का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर  योगेश सिंह क्षत्री (जेल अधीक्षक), श्रीमती खुशबू मिश्रा (महिला ओपन जेल प्रभारी) एवं जेल विभाग के अधिकारी कर्मचारी उपस्थित रहे।

           छत्तीसगढ़ राज्य में पहली बार इस प्रकार की महिला ओपन जेल प्रारंभ की गई है। रायपुर जेल में उपलब्ध अधोसंरचना का उपयोग करते हुए ओपन जेल खोला गया है।इस ओपन जेल में 25 महिला बंदिनियाँ रहेंगीl ये महिला बंदिनी सुबह विभिन्न कार्य करने के लिए जेल के बाहर निकलेंगी तथा शाम को कार्य पूर्ण कर लॉकअप होने के पूर्व जेल में वापस आ जाएंगी।

             महिला बंदिनियों को जेल की ऊंची दीवारों के बाहर मंदिर के पास स्थित परिसर में सिलाई सेन्टर, ब्यूटी पार्लर एवं जेल उत्पादों के बिक्री केंद्र में रोजगार दिया जाएगा। उनके लिए रोजगार के अन्य वैकल्पिक साधन भी उपलब्ध रहेंगे।

  • यूपीआईटीएस: एक योगी के तप की गाथा

    यूपीआईटीएस: एक योगी के तप की गाथा

    यूपीआईटीएस: एक योगी के तप की गाथा
    –    नम्रता नारायण, उद्यमी, प्रबंध निदेशक, मैत्रेयी माइक्रो प्रोडक्ट्स, नोएडा

    नोएडा

    बशीर बद्र साहब का एक मशहूर शेर है- “ये फूल मुझे कोई विरासत में मिले हैं, तुम ने मेरा कांटों भरा बिस्तर नहीं देखा!” मेगा सिटी बनने की राह पर दौड़ते ग्रेटर नोएडा के विशालकाय एक्सपो सेंटर में उत्तर प्रदेश अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला (यूपीआईटीएस) की चमक-दमक आपको भयावह अंधेरे से लड़ाई की कहानी नहीं बताएगी। वैश्विक प्रतिनिधियों से आंख मिलाते ओडीओपी स्टाल्स यहां तक पहुंचने का संघर्ष बयान नहीं करते। पूरे आत्मविश्वास के साथ एक्सपोर्ट ऑर्डर लेते हस्तशिल्पी व कारीगर आपको उन जख्मों के निशान नहीं दिखाएंगे, जो एक दशक पहले तक रिस रहे थे। लेकिन, हकीकत यही है। यूपी में मरणासन्न स्थिति में आ चुके एमएसएमई सेक्टर के पुनर्जीवित होकर करीब चार करोड़ लोगों की जीवन-रेखा बनने तक का सफर ऐसी तमाम अनकही कहानियों से भरा है। यह एक योगी के तप की गाथा है, जिसने हालात से समझौता करने के बजाय हालात बदलने का फैसला किया।

    एमएसएमई बना आर्थिक क्रांति का केंद्र
    एक समय देश में आर्थिक सुस्ती और औद्योगिक पिछड़ेपन की पहचान माने जाने वाले उत्तर प्रदेश ने पिछले कुछ वर्षों में विकास की एक नई और अभूतपूर्व कहानी लिखी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी दूरदर्शी सोच, नीतिगत स्पष्टता और कुशल नियोजन से राज्य की विशाल औद्योगिक क्षमता को एक तप की तरह धरातल पर उतारा है। इस आर्थिक क्रांति के केंद्र में रहा है प्रदेश का सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र, जिसे 'एक जिला एक उत्पाद' (ओडीओपी) योजना के जरिए न केवल नया जीवन मिला, बल्कि 'उत्तर प्रदेश अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला' (यूपीआईटीएस) जैसे वैश्विक मंच के माध्यम से विश्व व्यापार के पटल पर प्रमुख 'ग्लोबल एक्सपोर्ट हब' के रूप में स्थापित भी किया गया। 

    ओडीओपी से मिली संजीवनी
    उत्तर प्रदेश का प्रत्येक जिला अ
    पनी किसी न किसी पारंपरिक कला, शिल्प या विशिष्ट उत्पाद के लिए ऐतिहासिक रूप से प्रसिद्ध रहा है। मुरादाबाद का पीतल उद्योग, भदोही की कालीन, वाराणसी की बनारसी साड़ी, फिरोजाबाद का कांच उद्योग, कन्नौज का इत्र और अलीगढ़ के ताले जैसे उद्योग राज्य की औद्योगिक रीढ़ हुआ करते थे। लेकिन, एक दशक पहले तक बदहाल कानून-व्यवस्था, मार्केटिंग व वित्तीय संसाधनों का अभाव, पुरानी तकनीक और सरकारी प्रोत्साहन की कमी के कारण ये पारंपरिक उद्योग लगभग दम तोड़ चुके थे। स्थानीय हस्तशिल्पी, कारीगर और बुनकर आजीविका की तलाश में राज्य से पलायन करने के लिए मजबूर थे।

    वर्ष 2017 में सत्ता संभालने के बाद पीएम मोदी की प्रेरणा से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के इस पारंपरिक ज्ञान और कौशल को पहचानते हुए 'ओडीओपी' योजना की शुरुआत की। इस योजना का प्राथमिक उद्देश्य राज्य के सभी 75 जिलों के पारंपरिक उत्पादों को चिह्नित कर उनका संरक्षण करना, उन्हें आधुनिक तकनीकों से लैस करना और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा करना था। 

    योजना का बहुआयामी कार्यान्वयन
    ओडीओपी योजना को केवल कागजों तक सीमित न रखकर इसे धरातल पर लागू करने के लिए राज्य सरकार ने एक बहुआयामी रणनीति बनाई। सबसे पहले वित्तीय सहायता और ऋण सुलभता पर ध्यान दिया गया। उद्यमियों और दस्तकारों को आसान शर्तों पर पूंजी उपलब्ध कराने के लिए मुद्रा योजना और विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना जैसी पहलों के साथ समन्वय स्थापित किया गया। इससे स्थानीय इकाइयों का विस्तार और आधुनिकीकरण संभव हुआ। अगले चरण में तकनीकी उन्नयन और गुणवत्ता सुधार पर फोकस रहा। पारंपरिक कारीगरों को आधुनिक डिजाइन, गुणवत्ता नियंत्रण और नई पैकेजिंग तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया। इसके साथ ही जीआई टैगिंग के जरिए उत्पादों की प्रामाणिकता और अंतरराष्ट्रीय साख को मजबूत किया गया। तीसरे चरण में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्मों के साथ रणनीतिक साझेदारी करके छोटे ग्रामीण उद्यमियों के उत्पादों को सीधे डिजिटल मार्केट-प्लेस से जोड़कर आर्थिक आत्मनिर्भरता दी गई।

    एमएसएमई सेक्टर का पुनरुद्धार और आर्थिक प्रभाव
    ओडीओपी योजना के रणनीतिक क्रियान्वयन ने उत्तर प्रदेश के एमएसएमई क्षेत्र में नए प्राण फूंक दिए। राज्य में लाखों एमएसएमई इकाइयों को प्रोत्साहन मिलने से स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित हुए, जिससे युवाओं का पलायन रुका। एमएसएमई सेक्टर के इस कायाकल्प का सीधा असर प्रदेश के निर्यात आंकड़ों पर दिखाई देने लगा, जो आज दो लाख करोड़ के पार जा चुका है। राज्य के पारंपरिक उत्पाद जो कभी स्थानीय बाजारों तक सीमित थे, वे अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरे उतरते हुए विश्व के अलग-अलग देशों में निर्यात होने लगे। ओडीओपी ने उत्तर प्रदेश को 'वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी' की ओर ले जाने वाले सबसे प्रमुख इंजन का रूप ले लिया। 

     यूपीआईटीएस बना वैश्विक शोकेस
    स्थानीय स्तर पर उत्पादन और गुणवत्ता में सुधार के बाद, अगला बड़ा कदम इन उत्पादों को वैश्विक खरीदारों के सामने प्रस्तुत करना था। इसी सोच के साथ सीएम योगी ने 'उत्तर प्रदेश अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला' की नींव रखी। ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो मार्ट में आयोजित यह व्यापार मेला महज एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि यूपी के आर्थिक रूपांतरण का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय मंच साबित हुआ है। यूपीआईटीएस ने दुनिया भर के आयातकों, निवेशकों और व्यापारिक प्रतिनिधियों को एक छत के नीचे ला खड़ा किया। इस मेले में विभिन्न देशों के सैकड़ों अंतरराष्ट्रीय खरीदारों का पंजीकरण राज्य के उत्पादों में विश्व के गहरे विश्वास को दर्शाता है। इस साल ऑस्ट्रिया, बेलारूस, जापान, रूस, सिंगापुर और वियतनाम जैसे अग्रणी राष्ट्रों की पार्टनर कंट्री के रूप में सहभागिता राज्य के कूटनीतिक और व्यापारिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाएगी। यह मेला न केवल आम नागरिकों को स्थानीय उत्पादों से जोड़ेगा, बल्कि डेढ़ लाख से अधिक व्यापारिक प्रतिनिधियों की उपस्थिति स्थानीय उद्यमियों को अंतरराष्ट्रीय व्यापार सौदे हासिल करने का सीधा अवसर प्रदान करेगी।
     
    ज्ञान के आदान-प्रदान का भी मंच

    यूपीआईटीएस केवल बिक्री का जरिया नहीं बनता, बल्कि यह स्थानीय उद्यमियों को वैश्विक व्यापार की बारीकियों से अवगत कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मेले के दौरान आयोजित विशेष सत्रों में 'ई-कॉमर्स व डिजिटल मार्केट एक्सेस', 'ब्रांड निर्माण', 'फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स के लाभ' और 'न्यू टेक्नोलॉजी का उपयोग' जैसे विषयों पर विशेषज्ञ उद्यमियों का मार्गदर्शन करते हैं। इस बहुआयामी दृष्टिकोण से यह सुनिश्चित हुआ कि राज्य की एमएसएमई इकाइयां न केवल पारंपरिक विनिर्माण में आगे रहें, बल्कि आधुनिक तकनीक, सप्लाई चेन और ग्लोबल ट्रेड मानकों को अपना कर खुद को भविष्य के अनुकूल बना सकें।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नीतिगत दूरदर्शिता ने उत्तर प्रदेश के औद्योगिक परिदृश्य का पूरी तरह कायाकल्प कर दिया है। ओडीओपी योजना ने जहां राज्य के पारंपरिक उद्योगों और एमएसएमई सेक्टर को संजीवनी देकर पुनर्जीवित किया, वहीं यूपीआईटीएस जैसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले ने इसे दुनिया के नक्शे पर एक नए ब्रांड के रूप में स्थापित कर दिया। विभिन्न देशों की सहभागिता, हजारों एमएसएमई इकाइयों का समावेश और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर स्थानीय कला की यह गूंज साबित करती है कि उत्तर प्रदेश 'उत्पादन से लेकर निर्यात' तक के अपने सफर में सफलता की नई कहानियां लिख रहा है। आने वाले वर्षों में यही नीतियां और वैश्विक शोकेस उत्तर प्रदेश को न केवल भारत का सबसे मजबूत आर्थिक राज्य बनाएंगे, बल्कि 'ग्लोबल एक्सपोर्ट हब' के रूप में स्थापित करेंगे।

  • दिल्ली में गैंगरेप के बाद CM रेखा गुप्ता ने मानी चूक, सुरक्षा बढ़ाने का दिया भरोसा

    दिल्ली में गैंगरेप के बाद CM रेखा गुप्ता ने मानी चूक, सुरक्षा बढ़ाने का दिया भरोसा

    नई दिल्ली
     हाल में ही राजधानी दिल्ली में गैंगरेप, महिलाओं से छेड़छाड़ समेत कई गंभीर आपराधिक मामले सामने आए हैं। सिलसिलेवार हुई इन घटनाओं के बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने प्रशासन की कमियों को स्वीकार किया है। उन्होंने कहा कि सरकार इन घटनाओं से सबक ले रही है और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।

    टाइम्स नाउ के पॉडकास्ट में टाइम्स ग्रुप की एडिटर-इन-चीफ नविका कुमार से बातचीत के दौरान सीएम रेखा गुप्ता ने 16 वर्षीय लड़की से चलती बस में गैंगरेप के मामले पर प्रशासन की गलती को स्वीकार किया है। सीएम रेखा गुप्ता से जब पूछा गया किय 2012 में हुए गैंगरेप के मामले से क्या उन्होंने सबक नहीं लिया और 47 किलोमीटर तक चलने वाली बस को कई चेकपॉइंट से गुजरने के बावजूद एक बार भी क्यों नहीं रोका गया।

    गैंगरेप की घटना पर मानी गलती
    मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने जवाब में कहा, 'निश्चित रूप से, एक गलती हुई थी। बस की जांच नहीं की गई थी। इस घटना के बाद, सभी एजेंसियों को एहसास हुआ कि किसी भी बस को नहीं छोड़ा जाना चाहिए। हां, 11 चालान काटे गए थे। मैंने यह भी कहा है कि किसी भी बस के ड्राइवर या कंडक्टर का भले ही वह प्राइवेट एजेंसी का हो पूरा पुलिस रिकॉर्ड चेक किया जाना चाहिए। किसी भी ऐसे व्यक्ति को, जिसका क्रिमिनल रिकॉर्ड हो, चाहे वह स्कूल बस चला रहा हो, प्राइवेट बस या सरकारी बस, उसे अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। सभी का पुलिस वेरिफिकेशन जरूरी है। इन चीजों को सख्ती से लागू किया जाएगा।'

    'हर घटना हम सभी के लिए दर्दनाक'
    सीएम रेखा गुप्ता ने आगे कहा, 'ऐसा नहीं है कि हमने कुछ सीखा नहीं है। मैं कह सकती हूं कि इस शहर में होने वाली हर घटना हम सभी के लिए दुखद होती है। उन्होंने कहा, अगर मैं अपनी बात करूं, एक मां, एक महिला, एक मुख्यमंत्री और समाज के एक हिस्से के तौर पर तो ऐसी घटना होने पर हमें भी उतना ही दुख होता है। रेखा गुप्ता ने कहा, हम यह सुनिश्चित करने की कोशिश करते हैं कि ऐसी कोई घटना न हो। हम 100 प्रतिशत नतीजे चाहते हैं। हम इसी उम्मीद में काम करते हैं कि हमें 100 प्रतिशत नतीजे मिलें। पुलिस बल दिन-रात काम करते हैं। पूरा प्रशासन और सिस्टम इसमें शामिल होता है। लेकिन अगर एक भी घटना होती है, तो वह हम सभी के लिए दुखद होती है।'

    आस्था कुंज गैंगरेप के बाद डार्क स्पॉट पर जोर
    दक्षिण दिल्ली के कालकाजी में आस्था कुंज पार्क में एक नाबालिग के साथ गैंगरेप और उसके बाद हुए विरोध प्रदर्शनों के बारे में पूछे जाने पर रेखा गुप्ता ने कहा, 'किसी बेटी या महिला के साथ होने वाली हर घटना के बारे में मैं तुरंत पता लगाने की कोशिश करता हूं कि यह कैसे हुई, क्या हुआ, और किन चीजों को ठीक करने की जरूरत है या सरकार को क्या काम करने की जरूरत है।

    उन्होंने कहा कि सभी एजेंसियों को ऐसे डार्क स्पॉट तुरंत सुरक्षित करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री के मुताबिक, उनकी सरकार के सत्ता में आने के बाद करीब एक लाख नई स्ट्रीट लाइटें लगाई गई हैं। ये सेंसर से जुड़ी हैं और खराब होने पर कंट्रोल रूम को तत्काल अलर्ट मिलता है, जिसके बाद संबंधित एजेंसी उसे ठीक करने पहुंचती है।

    सत्य निकेतन हादसे पर बोलीं- जिम्मेदारी से इनकार नहीं
    सत्य निकेतन में इमारत गिरने से सात लोगों की मौत के मामले में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सरकार और नगर निगम की जिम्मेदारी से इनकार नहीं किया। हालांकि, उन्होंने इसके लिए पिछली सरकारों पर भी दोष मढ़ा।

    उन्होंने कहा, 'मैं यह नहीं कहूंगी कि कोई जिम्मेदारी नहीं है। जिम्मेदारी तो जरूर है। दिल्ली एक दिन में नहीं बनी। यह कई सालों में बनी। तब कौन सी सरकारें थीं? नगर निगम में कौन था? दिल्ली सरकार में कौन था?'

    पुरानी सरकारों पर खड़े किए सवाल
    पीजी के रजिस्ट्रेशन की कार्रवाई अब शुरू होने के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि, 'मुझे CM बने डेढ़ साल हो गए हैं। क्या हमसे पहले कोई सरकार नहीं थी? अब तक ऐसा क्यों नहीं किया गया? क्या इससे पहले दिल्ली में कोई घटना नहीं हुई थी? क्या आग नहीं लगी या इमारतें नहीं गिरीं? सरकारें अब तक सो क्यों रही थीं? क्या वे रेखा गुप्ता के आने और कुछ करने का इंतजार कर रही थीं? कम से कम रेखा गुप्ता घटना वाली जगह पर जाती हैं और वहां तीन घंटे तक खड़ी रहती हैं। और वह दर्द को समझती और महसूस करती हैं। वह प्रशासन पर नजर भी रखती हैं, ताकि मशीनरी पहुंचने में कोई देरी न हो।'

    उन्होंने कहा, 'मैंने वह किया जो दूसरी सरकारों ने नहीं किया। दिल्ली में SDRF नहीं था। जब आपको कहीं से तुरंत राहत की जरूरत होती है, तो आपको ऐसी फोर्स चाहिए होती है जो उस स्थिति को संभाल सके। दिल्ली के पास ऐसा काम करने के लिए कोई फोर्स नहीं थी। उस घटना के बाद, दिल्ली के पास अपना SDRF है। मैं भी पूछ सकती हूं कि पिछली सरकारों ने ऐसा क्यों नहीं किया? जब पहले ऐसी घटनाएं होती थीं, तो CM कितनी बार वहां जाकर खड़े हुए और बात की?'

  • बरगी बांध लबालब, 9 गेट खुलते ही बढ़ेगा नर्मदा का जलस्तर

    बरगी बांध लबालब, 9 गेट खुलते ही बढ़ेगा नर्मदा का जलस्तर

    जबलपुर 
    जबलपुर का बरगी बांध पानी से लबालब हो गया है। बांध के जलग्रहण क्षेत्र में कल और रात्रि में हुई वर्षा के कारण पानी की आवक लगातार बढ़ रही है। ऐसे में बांध की सुरक्षा एवं जल स्तर को नियंत्रित एवं स्थिर बनाए रखने की दृष्टि से जल निकासी बढ़ाई जा रही है। आज यानि 26 सितंबर को बरगी बांध के 9 गेट खोलकर नर्मदा नदी में पानी छोड़ा जाएगा। अधिकारियों के अनुसार बांध में पानी बढ़ने से ऐसा करना आवश्यक हो गया है। जल निकासी को देखते हुए प्रशासन ने नर्मदा के आसपास रहनेवालों को घाटों से दूर रहने को चेताया है। बांध से पानी निकालने के कारण नर्मदा के घाटों पर वर्तमान जलस्तर से लगभग 8 फीट की वृद्धि होने की संभावना जताई जा रही है।

    बाढ़ नियंत्रण कक्ष के सहायक यंत्री ने बरगी के और जल द्वार खोलना जरूरी बताया
    बरगी बांध के बाढ़ नियंत्रण कक्ष के सहायक यंत्री ने बताया कि बरगी के और जल द्वार खोलना जरूरी हो गया है। बांध से निकाले पानी से नर्मदा के जलस्तर में वृद्धि होगी जिसके संबंध में प्रशासनिक अधिकारियों को भी सूचना दे दी गई है।

    बांध के 9 गेट प्रातः 11:00 बजे से खोले जाएंगे
    सहायक यंत्री के अनुसार बांध के 9 गेट खोले जाएंगे। इन सभी जलद्वारों को औसतन 1.83 मीटर ऊंचाई तक खोला जाएगा। आधिकारिक सूचना के अनुसार बरगी बांध के 9 गेट प्रातः 11:00 बजे से खोले जाएंगे। इससे लगभग 2522 क्यूमेक जल निकाला जाएगा।

    जल निकासी के कारण नर्मदा के वर्तमान जलस्तर से लगभग 8 फीट वृद्धि होने की संभावना
    बरगी बांध के जल द्वार औसतन 1.83 मीटर ऊंचाई तक खोलने का व्यापक प्रभाव पड़ेगा। नर्मदा में पानी छोड़ने से नदी का जलस्तर बढ़ेगा। अधिकारियों ने बताया कि बरगी बांध से पानी की इस जल निकासी के कारण नर्मदा के घाटों पर वर्तमान जलस्तर से लगभग 6 से 8 फीट की वृद्धि होने की संभावना है। ऐसे में आमजनों से अनुरोध भी किया गया है कि नर्मदा के घाटों एवं तटीय क्षेत्रों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें।

    अधिकारियों का यह भी कहना है कि बरगी बांध में पानी की आवक के अनुसार जल निकासी की मात्रा को आवश्यकता के अनुरूप कभी भी घटाया अथवा बढ़ाया जा सकता है।