इस्लामाबाद
हाल ही में अमेरिकी नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर तुलसी गबार्ड ने सीनेट इंटेलिजेंस कमिटी के सामने 2026 एनुअल थ्रेट असेसमेंट पेश किया। इसमें उन्होंने रूस, चीन, उत्तर कोरिया, ईरान के साथ पाकिस्तान को भी उन देशों की सूची में शामिल किया है जो ऐसी मिसाइल डिलीवरी सिस्टम विकसित कर रहे हैं जिनकी रेंज अमेरिकी मुख्य भूमि तक पहुंच सकती है। गबार्ड ने स्पष्ट कहा कि 'पाकिस्तान की लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल डेवलपमेंट संभावित रूप से इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल्स (ICBMs) तक जा सकती है, जिनकी रेंज अमेरिका को टारगेट करने लायक होगी।' आतंकवाद को पालने वाले पाकिस्तान के पास वर्तमान में सबसे लंबी दूरी तक मार करने वाली ऑपरेशनल मिसाइल शाहीन-3 है। इसकी रेंज 2,750 किलोमीटर है। यानी यह मिसाइल भारत के प्रमुख शहरों और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के पोर्ट ब्लेयर तक पहुंच सकती है।

शाहीन-3 कोई ICBM नहीं
हालांकि, शाहीन-3 कोई अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) नहीं है। किसी भी बैलिस्टिक मिसाइल को ICBM की श्रेणी में आने के लिए कम से कम 5,500 किलोमीटर की रेंज की आवश्यकता होती है। वहीं, अमेरिका और पाकिस्तान के बीच की दूरी 11,000 किलोमीटर से अधिक है। ऐसे में अमेरिका का जिक्र क्यों हो रहा है? यही 11000 किलोमीटर की दूरी अब अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की एक गंभीर रिपोर्ट के केंद्र में आ गई है।

भले ही गबार्ड ने पाकिस्तानी मिसाइल कार्यक्रम की कोई सटीक समय-सीमा नहीं बताई, लेकिन अन्य अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि पाकिस्तान को एक कार्यात्मक लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल विकसित और तैनात करने में अभी कई साल से लेकर एक दशक तक का समय लग सकता है।

पाकिस्तान का लक्ष्य अमेरिका क्यों? खुद को बचाने की नापाक चाल
इस्लामाबाद का हमेशा से यही आधिकारिक रुख रहा है कि उसके परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम केवल भारत के खिलाफ बनाए गए हैं। 2025 में भारत के 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद, पाकिस्तान ने 'आर्मी रॉकेट फोर्स कमांड' के गठन की घोषणा की थी जो छोटे देशों की क्षेत्रीय रक्षा और निवारक रणनीतियों के अनुरूप है।

जब पाकिस्तान के पास क्षेत्रीय स्तर (भारत) पर हमले रोकने के लिए पर्याप्त हथियार मौजूद हैं, तो उसे ICBM की आवश्यकता क्यों है? विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान इस तरह की मिसाइल इसलिए भी बना रहा है ताकि उसके परमाणु हथियारों पर अमेरिका के किसी भी प्रकार के 'निवारक हमले' को रोका जा सके। इसके अलावा, पाकिस्तान भविष्य में किसी भी संभावित जंग में अमेरिका को सैन्य रूप से भारत के पक्ष में हस्तक्षेप करने से हतोत्साहित करना चाहता है। सीधे शब्दों में कहें तो पाकिस्तान खुद को बचाने की नापाक चाल चल रहा है।

पाकिस्तान ने उत्तर कोरिया और ईरान की वर्तमान स्थिति से भी सबक लिया है। अमेरिका उत्तर कोरिया को एक बड़ा खतरा मानता है, लेकिन उसके पास परमाणु हथियार होने के कारण सीधे हमले से बचता है। दूसरी ओर, ईरान पर अमेरिकी बमबारी इसलिए हो रही है क्योंकि उसके पास अभी तक एक सक्षम परमाणु प्लेटफॉर्म नहीं है।

भड़क गया पाकिस्तान
पाकिस्तानी विश्लेषकों ने अमेरिकी दावों को सिरे से खारिज किया है। अल जजीरा से बात करते हुए परमाणु सुरक्षा विद्वान राबिया अख्तर ने कहा कि अमेरिकी आकलन में एक पुरानी खामी है- वे जमीनी और ठोस विश्लेषण के बजाय 'सबसे खराब स्थिति की अटकलों' को आधार बनाते हैं। इसके बावजूद, अमेरिकी खुफिया विभाग इस बात पर कायम है कि पाकिस्तान की 'विश्वसनीय न्यूनतम प्रतिरोधक' नीति में अब वैश्विक स्तर पर शक्ति प्रदर्शन का तत्व भी शामिल हो गया है। ऐसा इसलिए भी माना जा रहा है क्योंकि इस्लामाबाद ने अमेरिका तक पहुंचने वाली ICBM विकसित करने की बात से न तो कभी साफ इनकार किया है और न ही इसकी पुष्टि की है।

वर्तमान जमीनी हकीकत
आज की तारीख में, पाकिस्तान के पास ऐसी कोई मिसाइल नहीं है जो अंतरमहाद्वीपीय रेंज के करीब भी हो। उनकी सबसे उन्नत MIRV (मल्टीपल वारहेड) सक्षम प्रणाली अबाबील है, जिसकी अनुमानित रेंज केवल 2,200 किमी है। वर्तमान में 2,750 किमी रेंज वाली शाहीन-3 ही उनकी सबसे लंबी दूरी की ऑपरेशनल मिसाइल बनी हुई है।