Category: देश

  • मोदी के लक्षद्वीप दौरे के 2 साल बाद बदली तस्वीर, पर्यटन के साथ बढ़ी नौसेना की ताकत

    मोदी के लक्षद्वीप दौरे के 2 साल बाद बदली तस्वीर, पर्यटन के साथ बढ़ी नौसेना की ताकत

    नई दिल्ली
    जनवरी 2024 की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लक्षद्वीप में स्नॉर्कलिंग करते हुए तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुई थीं. इसके बाद 'बॉयकॉट मालदीव' बनाम 'एक्सप्लोर लक्षद्वीप' की बहस शुरू हो गई. अब दो साल बाद इन 36 द्वीपों पर पर्यटन से लेकर बुनियादी ढांचे और सामरिक मौजूदगी तक बड़ा बदलाव दिखाई दे रहा है.

    आजतक ने अगत्ती, कवरत्ती, मिनिकॉय और बिटरा पहुंचकर यह जानने की कोशिश की कि पिछले दो वर्षों में लक्षद्वीप में क्या बदला है.

    असल में लक्षद्वीप 36 द्वीपों का समूह है, जो कोच्चि से करीब 220 से 440 किलोमीटर दूर स्थित है. इसका कुल भू-क्षेत्र महज 32 वर्ग किलोमीटर है. इनमें केवल 10 द्वीप- कवरत्ती, अगत्ती, अमिनी, कदमत, किल्तान, चेतलात, बिटरा, एंड्रॉट, कल्पेनी और मिनिकॉय आबाद हैं.

    पीएम मोदी की यात्रा के बाद तीन गुना बढ़े पर्यटक
    दशकों तक लक्षद्वीप तक पहुंच आसान नहीं थी. अगत्ती में केवल एक छोटा एयरस्ट्रिप था और साप्ताहिक जहाज यहां पहुंचने का प्रमुख जरिया थे. लेकिन अब तस्वीर बदल रही है. प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा ने लक्षद्वीप को देश के पर्यटन मानचित्र पर प्रमुखता से ला दिया. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2024 के बाद यहां पर्यटकों की संख्या तीन गुना बढ़ी है. नए बीच रिसॉर्ट, होमस्टे और हेलिकॉप्टर कनेक्टिविटी की योजनाओं पर काम हो रहा है. केंद्र सरकार ऐसे बुनियादी ढांचे पर भी जोर दे रही है, जिसका इस्तेमाल आम नागरिकों के साथ सुरक्षाबल भी कर सकें.

    अगत्ती एयरफील्ड के विस्तार की योजना है, ताकि यहां बड़े ATR और सैन्य परिवहन विमान उतर सकें. वहीं मिनिकॉय में नौसेना बेस के साथ नया सैन्य-सिविल एयरफील्ड विकसित किया जा रहा है.

    INS जटायु से बढ़ी नौसेना की ताकत
    2023 तक लक्षद्वीप में नौसेना की प्रमुख मौजूदगी कवरत्ती स्थित INS द्वीपरक्षक और मिनिकॉय में एक छोटे नौसैनिक डिटैचमेंट तक सीमित थी. INS द्वीपरक्षक 2012 में कमीशन हुआ था, जबकि मिनिकॉय में नौसैनिक डिटैचमेंट 1980 के दशक की शुरुआत में स्थापित किया गया था.

    प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के करीब दो महीने बाद 6 मार्च 2024 को तत्कालीन नौसेना प्रमुख एडमिरल आर. हरि कुमार ने मिनिकॉय में INS जटायु को कमीशन किया. इससे पुराने डिटैचमेंट को पूर्ण स्वतंत्र नौसैनिक इकाई में बदल दिया गया.

    मिनिकॉय लक्षद्वीप का सबसे दक्षिणी द्वीप है और महत्वपूर्ण आठ डिग्री तथा नौ डिग्री चैनल के पास स्थित है. यह मालदीव से करीब 524 किलोमीटर और थुराकुनु द्वीप से लगभग 70 नॉटिकल मील दूर है. INS जटायु समुद्री डकैती, नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने और समुद्री मार्गों की निगरानी में अहम भूमिका निभा रहा है.

    बिटरा में तीसरा नौसैनिक ठिकाना बनाने की तैयारी
    करीब 200 लोगों की आबादी वाला बिटरा लक्षद्वीप का सबसे छोटा आबाद द्वीप है. सूत्रों के मुताबिक, यहां नौसेना का फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस बनाने के लिए जमीन अधिग्रहण को लेकर सोशल इम्पैक्ट असेसमेंट किया जा रहा है. इसका मकसद उत्तरी लक्षद्वीप में निगरानी की कमियों को दूर करना और नौसेना की ऑपरेशनल पहुंच बढ़ाना है.

    हालांकि स्थानीय लोगों में इसे लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया है. उन्हें नौकरियों और बेहतर चिकित्सा सुविधाओं की उम्मीद है, वहीं छोटे और संवेदनशील द्वीप पर विस्थापन की चिंता भी है.

    अधिकारियों के मुताबिक, इस बदलाव के पीछे पर्यटन ही नहीं बल्कि सुरक्षा भी बड़ी वजह है. हिंद महासागर क्षेत्र में चीनी रिसर्च जहाजों की मौजूदगी और सोमालिया के पास समुद्री डकैती की घटनाओं के बीच लक्षद्वीप सामरिक रूप से अहम है. मार्च 2024 में नौसेना की कमांडर्स कॉन्फ्रेंस के दौरान विमानवाहक पोत INS विक्रांत और INS विक्रमादित्य की लक्षद्वीप के पास तैनाती ने भी भारत की बढ़ती समुद्री ताकत का संदेश दिया.

  • राज्यसभा चुनाव के लिए BJP ने घोषित किए 2 और उम्मीदवार, उत्तराखंड से दिनेश आर्य तो बंगाल से कोयल मल्लिक को टिकट

    राज्यसभा चुनाव के लिए BJP ने घोषित किए 2 और उम्मीदवार, उत्तराखंड से दिनेश आर्य तो बंगाल से कोयल मल्लिक को टिकट

    नई दिल्ली
    भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राज्यसभा चुनाव के लिए दो और उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया है। भगवा पार्टी ने उत्तराखंड में होने वाले चुनाव के लिए दिनेश आर्य को कैंडिडेट बनाया है। वहीं, पश्चिम बंगाल में होने वाले राज्यसभा उपचुनाव के लिए रुक्मिणी मल्लिक ऊर्फ कोयल मल्लिक को अपना उम्मीदवार घोषित किया है।

    आपको बता दें कि राज्यसभा में उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व कर रहे अरुण सिंह, गीता उर्फ चंद्रप्रभा, नीरज शेखर, बृजलाल, प्रो. राम गोपाल यादव, रामजी, बी. एल. वर्मा, सीमा और हरदीप सिंह पुरी के साथ-साथ उत्तराखंड से नरेश बंसल का कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त होने वाला है। उत्तर प्रदेश से डॉ. दिनेश शर्मा की सीट उनके इस्तीफे के कारण 11 सितंबर से रिक्त है।

    बंगाल से कोयल मल्लिक को टिकट
    पश्चिम बंगाल से राज्यसभा की एक सीट के लिए उपचुनाव रुक्मिणी मल्लिक के 16 जुलाई को इस्तीफे देने के बाद से रिक्त है। उनका कार्यकाल दाे अप्रैल 2032 तक था। भाजपा ने उन्हें ही यहां से कैंडिडेट बनाया है। आपको बता दें कि वह पहले टीएमसी में थीं। सांसदों के बगावत के बाद उन्होंने भी ममता का साथ छोड़ भाजपा का दामन थाम लिया था।

    आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल की राज्यसभा की 12 सीट के लिए 16 अक्टूबर को चुनाव होंगे। इनमें उत्तर प्रदेश की 10 और उत्तराखंड की एक सीट शामिल है, जहां मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त हो रहा है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल की एक सीट पर उपचुनाव होगा।

    मतदान 23 अक्टूबर को सुबह आठ बजे से शाम चार बजे तक होगा। मतगणना 27 अक्टूबर को होगी। आयोग ने पूरी चुनाव प्रक्रिया 31 अक्टूबर तक पूरी करने का निर्देश दिया है।

  • सुप्रीम कोर्ट को ‘बिन मांगी सलाह’ देना पड़ा भारी, निचली अदालत के जज से मांगा स्पष्टीकरण

    सुप्रीम कोर्ट को ‘बिन मांगी सलाह’ देना पड़ा भारी, निचली अदालत के जज से मांगा स्पष्टीकरण

    नई दिल्ली
    सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत के एक जज के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है. दरअसल, जज ने सुप्रीम कोर्ट को जमानत कानून को लेकर बिन मांगी सलाह दे दी थी. कोर्ट ने इस मामले में रजिस्ट्री को संबंधित जज से स्पष्टीकरण मांगने का निर्देश दिया है.

    मामला पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले का है. यहां बारासात के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश एक आपराधिक मामले की सुनवाई कर रहे थे. सुप्रीम कोर्ट ने मई 2026 में इस मामले की सुनवाई तीन महीने में पूरी करने का निर्देश दिया था.

    तीन महीने की तय अवधि में ट्रायल पूरा नहीं हो सका. इसके बाद जज ने 11 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट के असिस्टेंट रजिस्ट्रार को एक पत्र लिखा. इसमें ट्रायल पूरा करने के लिए और समय मांगा गया.

    जज ने पत्र में बताया कि मामले की सुनवाई पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय की जरूरत है. लेकिन लेटर के आखिरी दो पैराग्राफ में उन्होंने जमानत को लेकर SC को सलाह दे दी. उन्होंने लिखा कि यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि उच्च अदालत को किन मामलों में जमानत देनी चाहिए और किन मामलों में जमानत नहीं देनी चाहिए.

    सुप्रीम कोर्ट ने जताई कड़ी नाराजगी
    जज के इस पत्र पर सुप्रीम कोर्ट की पीठ काफी असहज हुई. जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने इस पर कड़ी टिप्पणी की.

    पीठ ने कहा कि ट्रायल जज ने जिस तरह से सुप्रीम कोर्ट को पत्र लिखकर अतिरिक्त समय मांगा, उससे वह काफी परेशान है. कोर्ट ने साफ कहा कि किसी पीठासीन अधिकारी का काम सुप्रीम कोर्ट को यह सलाह देना नहीं है कि उसे कब जमानत देनी चाहिए और कब नहीं.

    सुप्रीम कोर्ट ने पत्र की भाषा और उसमें दी गई सलाह पर गंभीर आपत्ति जताई. कोर्ट ने अपनी रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि संबंधित जज से जल्द से जल्द स्पष्टीकरण मांगा जाए. कोर्ट ने यह भी जानना चाहा कि आखिर जज ने इस तरह की टिप्पणी क्यों की. अब जज के जवाब के बाद ही इस मामले में आगे की कार्रवाई पर फैसला होगा.

    इसी तरह के एक दूसरे मामले में भी सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत के जजों को अहम सलाह दी है. जस्टिस उज्जल भुइयां और जस्टिस अतुल एस. चंदूरकर की पीठ ने जमानत याचिकाओं की सुनवाई को लेकर टिप्पणी की.

    पीठ ने कहा कि जजों को अपने निजी नैतिक विचार या व्यक्तिगत मूल्य फैसलों पर नहीं थोपने चाहिए. जमानत याचिका पर फैसला कानून और मामले के तथ्यों के आधार पर होना चाहिए. कोर्ट की इस टिप्पणी का मतलब साफ है कि जमानत जैसे मामलों में न्यायिक फैसले व्यक्तिगत सोच से नहीं, बल्कि कानून और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर होने चाहिए.
     

  • मक्का पैक्ट से दूर हुआ मिस्र: पीएम मोदी से मुलाकात के बाद भारत के पक्ष में बड़ा फैसला

    मक्का पैक्ट से दूर हुआ मिस्र: पीएम मोदी से मुलाकात के बाद भारत के पक्ष में बड़ा फैसला

    नई दिल्ली
     तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब के मक्का पैक्ट में मिस्र के भी शामिल होने को लेकर चर्चाएं लगातार चल रही थीं। हालांकि, अब मिस्र ने इसे लेकर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। जानकारी रखने वाले लोगों के मुताबिक, ब्रिक्स समिट के दौरान जब मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की, तो मक्का समझौते, उसके क्षेत्रीय और व्यापक असर पर चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी को और बढ़ाने के उपायों पर भी चर्चा की। इस दौरान मिस्र ने तुर्की को भारत के लिए ठेंगा दिखा दिया।

    मक्का पैक्ट से मिस्र क्यों बना रहा दूरी?
    मिस्र ने भारत की चिंताओं और अन्य कारकों को ध्यान में रखते हुए सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच रक्षा समझौते में शामिल न होने का फैसला किया था। जानकारों ने बताया कि नई दिल्ली और काहिरा अरब दुनिया के एक अहम स्तंभ के तौर पर मिस्र के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को और बढ़ाने के लिए काम करेंगे। मिस्र ब्रिक्स का सदस्य है और 2024 में इस समूह में शामिल हुआ था।

    भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत
    तुर्की के बार-बार सुझावों के बावजूद मिस्र अब तक मक्का समझौते में शामिल होने से दूर रहा है। ऐसा उसने किसी का पक्ष न लेने की अपनी रणनीति और भारत के साथ बढ़ते रिश्तों के कारण किया है। पश्चिम एशिया के जानकारों का कहना है कि मक्का समझौते की उपयोगिता सीमित है क्योंकि नाटो या पुराने वारसा समझौते के विपरीत, इन तीनों देशों का कोई साझा दुश्मन या एक नेता नहीं है। इस बात की भी संभावना कम है कि भारत-पाकिस्तान युद्ध की स्थिति में सऊदी अरब सैन्य मदद के जरिए पाकिस्तान की सहायता के लिए आगे आएगा।

    मिस्र हमेशा अरब देशों की गुटबाजी से रहा दूर
    अरब देशों में सबसे शक्तिशाली सेना वाला मिस्र ऐतिहासिक रूप से गुटबाजी की राजनीति से दूर रहा है। उत्तरी और पूर्वोत्तर अफ्रीका में स्थिरता के स्तंभ के तौर पर अपनी भूमिका निभाता रहा है। काहिरा के पड़ोसी देश इजरायल के साथ जटिल संबंध हैं। जिसके साथ उसके राजनयिक रिश्ते हैं। वह सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच किसी एक का पक्ष नहीं लेना चाहता। इस तरह से मिस्र ने भारत के साथ अपने बढ़ते रिश्तों की वजह से मक्का समझौते पर अपना रुख स्पष्ट कर दिया।

     

  • भारत की माइक्रो मिसाइल ‘ज्वाला’ की तैयारी तेज, दो रॉकेट मोटर्स का टेस्ट सफल

    भारत की माइक्रो मिसाइल ‘ज्वाला’ की तैयारी तेज, दो रॉकेट मोटर्स का टेस्ट सफल

     नई दिल्ली

    भारत की निजी रक्षा कंपनी आईजी डिफेंस ने अपने ज्वाला माइक्रो-मिसाइल कार्यक्रम के तहत दो सॉलिड रॉकेट मोटर्स का सफल परीक्षण किया है. यह परीक्षण 3 अक्टूबर 2026 को सुबह करीब चार बजे किया गया. यह उपलब्धि कंपनी के लिए महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुई है. ज्वाला भारत का पहला स्वदेशी निजी माइक्रो-मिसाइल कार्यक्रम है जो हार्ड-किल काउंटर-यूएएस यानी ड्रोन को नष्ट करने वाला सिस्टम विकसित करने पर केंद्रित है। 

    आधुनिक युद्धों में ड्रोनों का बढ़ता इस्तेमाल वायु रक्षा के लिए नई चुनौती बन गया है. सस्ते और बड़ी संख्या में ड्रोन भेजने की क्षमता ने किफायती जवाबी उपायों की जरूरत बढ़ा दी है. ज्वाला इसी जरूरत को पूरा करने के लिए बनाई जा रही है ताकि मौजूदा वायु रक्षा परतों के साथ मिलकर ड्रोन खतरों से बड़े पैमाने पर निपटा जा सके। 

    आज के संघर्षों में ड्रोन झुंड आम हो गए हैं. ये सस्ते होने के साथ प्रभावी भी साबित हो रहे हैं. महंगी मिसाइलों से हर ड्रोन को मार गिराना आर्थिक रूप से संभव नहीं है. इसलिए सस्ती और बड़ी संख्या में उत्पादित की जा सकने वाली इंटरसेप्टर मिसाइलों की मांग बढ़ी है। 

    आईजी डिफेंस के एवीपी विंग कमांडर अनूप शर्मा ने कहा कि ड्रोन खतरा तेजी से बदल रहा है और काउंटर-यूएएस सिस्टम को भी उसी गति से विकसित होना चाहिए. ज्वाला ठीक इसी सोच के साथ बनाई जा रही है. सफल प्रोपल्शन टेस्ट इस स्वदेशी हार्ड-किल क्षमता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. यह मिसाइल न सिर्फ सस्ती होगी बल्कि बड़े पैमाने पर तैनात की जा सकेगी जिससे मिसाइल भंडार की गहराई भी बढ़ेगी।  

    ग्रिड सिस्टम के साथ इंटीग्रेटेड आर्किटेक्चर  
    ज्वाला को अकेले मिसाइल के रूप में नहीं बल्कि आईजी डिफेंस के व्यापक ग्रिड इकोसिस्टम के हिस्से के रूप में विकसित किया जा रहा है. ग्रिड डिफेंड एक एआई आधारित बैटल मैनेजमेंट सिस्टम है जो सेंसर, इफेक्टर्स और कमांड सिस्टम को जोड़ता है. यह सिस्टम डिटेक्शन, पहचान, ट्रैकिंग, खतरे का आकलन और एंगेजमेंट मैनेजमेंट को एक साथ लाता है. ग्रिड कई सेंसरों से जानकारी लेकर साझा तस्वीर बनाता है, हवाई खतरों को ट्रैक करता है और उपलब्ध हथियारों को निर्देशित करता है। 

    इस तरह सेंसर से शूटर तक का पूरा आर्किटेक्चर तैयार होता है जिसमें ज्वाला हार्ड-किल इंटरसेप्टर का काम करती है और ग्रिड बुद्धिमत्ता व मिशन मैनेजमेंट उपलब्ध कराता है. कंपनी के फाउंडर और सीईओ बोधिसत्त्व संघप्रिय ने कहा कि वे ज्वाला को बुद्धिमान रक्षा आर्किटेक्चर का हिस्सा बना रहे हैं ताकि डिटेक्शन से लेकर एंगेजमेंट तक अधिकृत मिशन स्वायत्त तरीके से पूरे हो सकें। 

    यह विकास आत्मनिर्भर भारत की दिशा में निजी क्षेत्र की महत्वपूर्ण भागीदारी दर्शाता है. आईजी डिफेंस स्वदेशी प्रोपल्शन, इंटरसेप्टर और काउंटर-यूएएस तकनीकों पर काम कर रही है. सफल परीक्षण के बाद कंपनी सिस्टम की परिपक्वता, विश्वसनीयता, विनिर्माण क्षमता और स्केलेबिलिटी पर ध्यान केंद्रित करेगी। 

    आधुनिक युद्ध में ड्रोन खतरे के खिलाफ सस्ती और प्रभावी प्रणाली तैयार करना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है. ज्वाला और ग्रिड का संयोजन महंगी रक्षा प्रणालियों पर निर्भरता कम करने में मदद करेगा. यह उपलब्धि दिखाती है कि भारतीय निजी कंपनियां अब जटिल रक्षा तकनीकों में भी आगे बढ़ रही हैं और देश की सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हो रही हैं। 

  • रूसी सेना से भारतीय नागरिकों की वापसी तेज, 140 की घर वापसी; 55 अभी भी फंसे

    रूसी सेना से भारतीय नागरिकों की वापसी तेज, 140 की घर वापसी; 55 अभी भी फंसे

    नई दिल्ली
     भारत-रूस के बीच सलाहकार समिति की बैठक हुई है। इस बैठक के बाद सामने आई जानकारी से पता चला है कि रूसी सेना में भर्ती किए गए लगभग 140 भारतीय नागरिकों को सेवा से मुक्त कर दिया गया है। वहीं भारत रूसी सशस्त्र बलों में सेवा कर रहे अन्य 55 लोगों के बारे में जानकारी मांग रहा है।

    एएनआइ की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने ऐसे सभी लोगों को जल्द से जल्द सेवा से मुक्त कराने के लिए रूसी अधिकारियों से बातचीत की है।

    भारत-रूस के बीच सलाहकार समिति की बैठक
    बैठक की जानकारी में कहा गया, 'भारत सरकार ने ऐसे सभी लोगों को जल्द से जल्द सेवा से मुक्त कराने के लिए रूसी अधिकारियों के साथ, उच्चतम स्तर पर भी, बातचीत की है। अब तक, लगभग 140 भारतीय नागरिकों को सेवा से मुक्त किया जा चुका है।'

    बैठक में आगे बताया गया, 'भारतीय पक्ष रूसी सेना में कथित तौर पर मौजूद 55 भारतीय नागरिकों के बारे में जानकारी के लिए रूसी अधिकारियों के संपर्क में है। भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियां बेईमान एजेंटों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर रही हैं।'

    विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने पिछले महीने ये ताजा आंकड़े साझा किए थे। उस समय, मिसरी ने कहा था कि रूसी सशस्त्र बलों में भर्ती किए गए 227 भारतीय नागरिकों में से 139 को सेवा से मुक्त कर दिया गया था, जबकि 51 की मौत हो गई थी।

    विदेश सचिव मिसरी ने कहा कि यह मुद्दा रूस के साथ अलग-अलग मौकों पर अलग-अलग स्तरों पर उठाया गया था। मिसरी ने कहा था, 'आखिरी गिनती के अनुसार, हमारे पास रूसी सेना में भर्ती किए गए 227 भारतीय नागरिकों के बारे में जानकारी थी। उनमें से, हमारे पास जानकारी है कि हमारे 139 नागरिकों को सेना से मुक्त कर दिया गया है।'

    विदेश सचिव ने आगे बताया था, 'दुर्भाग्य से, हमारे पास उन 51 लोगों के बारे में भी जानकारी है जिनकी अब तक मौत हो चुकी है। भारत अभी भी सेवा कर रहे लोगों की जल्द रिहाई और वापसी सुनिश्चित करने के लिए मॉस्को के साथ लगातार बातचीत कर रहा है।'

  • बेंगलुरु-मुंबई सफर अब 16 घंटे में! 1137 KM रूट पर जल्द दौड़ेगी वंदे भारत स्लीपर, किराया ₹3000

    बेंगलुरु-मुंबई सफर अब 16 घंटे में! 1137 KM रूट पर जल्द दौड़ेगी वंदे भारत स्लीपर, किराया ₹3000

    बेंगलुरु
    बेंगलुरु से मुंबई जाने में अभी ट्रेन से करीब 22 से 24 घंटे लग जाते हैं. लेकिन जल्द ही इस सफर में 6 से 8 घंटे की बचत हो सकती है. दोनों शहरों के बीच वंदे भारत स्लीपर ट्रेन इस महीने शुरू होने की संभावना है. प्रस्तावित टाइमटेबल के मुताबिक, यह ट्रेन बेंगलुरु से मुंबई का सफर 16 घंटे 5 मिनट में पूरा कर सकती है. वापसी में मुंबई से बेंगलुरु पहुंचने में करीब 15 घंटे 45 मिनट लगने का अनुमान है. यह दक्षिण भारत की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन होगी। 

    प्रस्तावित रेल रूट करीब 1,137 किलोमीटर लंबा है और पूरी तरह इलेक्ट्रिफाइड व डबल ट्रैक है. इसके ज्यादातर हिस्सों में 130 किलोमीटर प्रति घंटे तक की स्पीड से ट्रेन चलाने की क्षमता है. यही वजह है कि इस रूट को फास्ट ट्रेन सर्विस के लिए बेहतर विकल्प माना जा रहा है. इस ट्रेन को रात में लंबी दूरी का सफर करने वाले यात्रियों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. हालांकि, अभी ट्रेन की शुरुआत की तारीख और टाइमटेबल पर रेलवे की अंतिम घोषणा का इंतजार है। 

    बेंगलुरु से मुंबई कितना लगेगा समय?

    प्रस्तावित टाइम टेबल के मुताबिक, ट्रेन बेंगलुरु के सर एम. विश्वेश्वरैया टर्मिनल (SMVT Bengaluru) से शाम 7:50 बजे रवाना होगी और अगले दिन सुबह 11:55 बजे मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) पहुंचेगी. इस तरह सफर में 16 घंटे 5 मिनट लगेंगे. वापसी में ट्रेन मुंबई के CSMT से रात 8:10 बजे चलेगी और अगले दिन सुबह 11:55 बजे बेंगलुरु पहुंचेगी. इस दिशा में यात्रा का समय करीब 15 घंटे 45 मिनट रहने का अनुमान है. फिलहाल इस रूट पर चलने वाली मौजूदा ट्रेनों को एक तरफ का सफर पूरा करने में करीब 22 से 24 घंटे लगते हैं. ऐसे में वंदे भारत स्लीपर ट्रेन इस रूट पर यात्रियों के करीब 6 से 8 घंटे बच सकती है। 

    किन स्टेशनों पर रुक सकती है ट्रेन?
    सूत्रों के मुताबिक, बेंगलुरु-मुंबई वंदे भारत स्लीपर के रास्ते में इन स्टेशनों पर ठहराव हो सकता है:

        अनंतपुर
        गुंतकल
        रायचूर
        कलबुर्गी
        सोलापुर
        पुणे
        कल्याण

    ट्रेन के संभावित नंबर 27651 और 27652 बताए जा रहे हैं. हालांकि, स्टॉपेज और ट्रेन नंबर को लेकर अभी अंतिम पुष्टि नहीं हुई है. रेलवे की आधिकारिक घोषणा के बाद ही तय होगा कि ट्रेन किन स्टेशनों पर रुकेगी और उसका समय क्या होगा। 

    प्रस्तावित योजना के मुताबिक, ट्रेन बेंगलुरु के SMVT स्टेशन से शुरू होगी. लेकिन इसे KSR बेंगलुरु यानी शहर के मुख्य रेलवे स्टेशन से चलाने की मांग भी उठी है. इस ट्रेन को शुरू करने की घोषणा पहली बार सितंबर 2025 में की गई थी. रेलवे से ट्रेन को KSR बेंगलुरु से चलाने की मांग की, क्योंकि यह स्टेशन यात्रियों के लिए ज्यादा सुविधाजनक है. वंदे भारत स्लीपर ट्रेन शुरू होने की तारीख के साथ-साथ यह भी देखना होगा कि रेलवे इसके शुरुआती स्टेशन को लेकर क्या फैसला करता है। 

    ट्रेन के दो रैक हो गए हैं तैयार
    इस सर्विस के लिए 16 कोच वाले दो वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट चलाने की तैयारी है. इनका निर्माण भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (BEML) ने इंटीग्रल कोच फैक्टरी (ICF) के प्रोग्राम के तहत किया है. सूत्रों के मुताबिक, एक ट्रेनसेट बेंगलुरु कैंटोनमेंट में है, जबकि दूसरे ट्रेनसेट को बंगारापेट के पास वरदापुरा में रखा गया है. रेलवे बोर्ड इन दोनों रैक को दक्षिण पश्चिम रेलवे को सौंपने के संबंध में जल्द ही औपचारिक सूचना जारी कर सकता है। 

    ट्रेन के 16 में से 11 कोच 3AC
    प्रस्तावित वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में कुल 16 कोच होंगे. इनमें 11 कोच 3AC, 4 कोच 2AC और 1 कोच 1AC का होगा. 3AC का एक तरफ का किराया करीब ₹3,000 रहने का अनुमान है. इसमें नाश्ता और खाना भी शामिल होगा ऐसी उम्मीद है, क्योंकि लंबी दूरी की वंदे भारत ट्रेनों में फूड का​ विकल्प होता है. रेलवे को उम्मीद है कि फ्लाइट के मुकाबले कम किराया और कम यात्रा समय इस सेवा को यात्रियों के बीच लोकप्रिय बना सकता है। 

  • असम के जंगलों में लौटी रौनक, मानस-काजीरंगा में सफारी शुरू; 13 अक्टूबर को खुलेगा पोबितोरा

    असम के जंगलों में लौटी रौनक, मानस-काजीरंगा में सफारी शुरू; 13 अक्टूबर को खुलेगा पोबितोरा

    जोरहाट

    जंगल का सफर कुछ महीनों के लिए बंद था. बारिश का मौसम था. रास्ते मुश्किल थे और वन्यजीवों की सुरक्षा को देखते हुए असम के कई नेशनल पार्क और अभयारण्य पर्यटकों के लिए बंद थे. अब इंतजार खत्म हो गया है. असम में वाइल्डलाइफ टूरिज्म का नया सीजन शुरू हो चुका है। 

    2 अक्टूबर को मानस नेशनल पार्क के दरवाजे पर्यटकों के लिए खुल गए. इसके ठीक एक दिन बाद यानी 3 अक्टूबर से काजीरंगा नेशनल पार्क में भी सैलानियों की एंट्री शुरू हो गई. और अगर आपकी लिस्ट में पोबितोरा भी है, तो उसके लिए थोड़ा और इंतजार करना होगा. पोबितोरा वन्यजीव अभयारण्य 13 अक्टूबर से खुलेगा. यानी अक्टूबर का महीना असम के जंगलों के नाम है। 

    बक्सा और चिरांग जिलों में फैला मानस नेशनल पार्क 2 अक्टूबर से खुल चुका है. मानसून की वजह से हर साल यहां कुछ समय के लिए पर्यटन गतिविधियां बंद रहती हैं। 

    अब मौसम बदलने के साथ जंगल सफारी और वन्यजीवों को करीब से देखने का मौका फिर मिल गया है. और मानस के बाद नंबर आया काजीरंगा का… काजीरंगा नेशनल पार्क 3 अक्टूबर से पर्यटकों के लिए खोल दिया गया. यह पार्क गोलाघाट और नगांव समेत कई जिलों में फैला है. इसका विस्तार बिश्वनाथ और सोनितपुर के कुछ हिस्सों तक भी है। 

    काजीरंगा का नाम आते ही दिमाग में सबसे पहले क्या आता है? एक सींग वाला गैंडा. लेकिन कहानी सिर्फ गैंडे तक सीमित नहीं है. काजीरंगा असम के सबसे बड़े वन्यजीव पर्यटन आकर्षण में शामिल है. हर टूरिज्म सीजन में यहां देश ही नहीं, विदेशों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। 

    अब आंकड़ों पर आते हैं. क्योंकि ये आंकड़े बताते हैं कि असम के जंगलों को देखने के लिए लोगों में कितनी दिलचस्पी है. 2025-26 के टूरिज्म सीजन में काजीरंगा नेशनल पार्क में 4.68 लाख से ज्यादा टूरिस्ट पहुंचे थे. पिछले साल यह संख्या करीब 4.06 लाख थी. यानी एक साल में पर्यटकों की संख्या में अच्छी-खासी बढ़ोतरी हुई। 
    इन 4.68 लाख से ज्यादा पर्यटकों में 4.37 लाख से अधिक भारतीय थे. वहीं 30 हजार से ज्यादा विदेशी पर्यटक भी काजीरंगा पहुंचे. काजीरंगा सिर्फ देश के पर्यटकों की पसंद नहीं है, दुनिया के दूसरे हिस्सों से आने वाले सैलानी भी असम के इस जंगल का रुख करते हैं। 

    मानस में भी बढ़े पर्यटक
    अब मानस की बात करते हैं. साल 2025-26 के टूरिज्म सीजन में मानस नेशनल पार्क में कुल 63,723 लोग पहुंचे थे. इनमें करीब 59 हजार भारतीय और लगभग 5 हजार विदेशी पर्यटक शामिल थे. यानी यहां भी पर्यटकों की आवाजाही बढ़ी है. और अब नया सीजन शुरू हो चुका है. जंगल फिर खुले हैं. सफारी फिर शुरू हो गई है. ऐसे में आने वाले महीनों में पर्यटकों की संख्या और बढ़ने की उम्मीद है। 

    पोबितोरा के लिए 13 अक्टूबर तक इंतजार
    अगर आप असम के वाइल्डलाइफ सर्किट में पोबितोरा वन्यजीव अभयारण्य को भी शामिल करना चाहते हैं, तो तारीख याद रखिए. 13 अक्टूबर… मोरीगांव जिले में पोबितोरा वन्यजीव अभयारण्य इसी दिन पर्यटकों के लिए खोला जाएगा. पिछले टूरिज्म सीजन में पोबितोरा में 35,371 पर्यटक पहुंचे थे. यानी मानस, काजीरंगा और पोबितोरा तीनों जगहों के खुलने के बाद असम का प्रमुख वाइल्डलाइफ टूरिज्म सर्किट पूरी तरह एक्टिव हो जाएगा। 

    असम के पर्यावरण एवं वन मंत्री जयंत मल्ला बरुआ ने इन पर्यटन स्थलों को फिर से खोलने के शेड्यूल की जानकारी दी है. मानसून के दौरान जंगलों में पर्यटकों की आवाजाही रोकना हर साल की प्रक्रिया है. बारिश के दौरान जंगलों की स्थिति, सड़कें और वन्यजीवों की सुरक्षा जैसे कई पहलुओं को ध्यान में रखा जाता है. अब मानसून का दौर पीछे छूट रहा है और पर्यटन सीजन सामने है. इसलिए असम के जंगलों में फिर से हलचल शुरू हो गई है। 

    तो अगर असम जाने का प्लान है… तो तारीखें नोट कर लीजिए. 2 अक्टूबर को मानस नेशनल पार्क खुल चुका है. 3 अक्टूबर को काजीरंगा नेशनल पार्क खुल चुका है. 13 अक्टूबर को पोबितोरा वन्यजीव अभयारण्य खुलेगा. पिछले सीजन के आंकड़े बता रहे हैं कि असम के जंगलों को देखने वालों की संख्या लगातार बढ़ी है. इस बार भी देश के अलग-अलग हिस्सों से पर्यटकों के पहुंचने की उम्मीद है. तो जंगल तैयार हैं. सफारी तैयार है. और असम का नया वाइल्डलाइफ टूरिज्म सीजन भी शुरू हो चुका है। 

     

     

  • ऑपरेशन सिंदूर में सुसाइड ड्रोन ने मचाया तहलका, इस महीने रिटायर होंगे एयर चीफ एपी सिंह

    ऑपरेशन सिंदूर में सुसाइड ड्रोन ने मचाया तहलका, इस महीने रिटायर होंगे एयर चीफ एपी सिंह

     नई दिल्ली
    दुनिया भर में चल रहे संघर्षों को देखते हुए यह साफ हो गया है कि मजबूत सैन्य बल हर देश की जरूरत है. हाल के वर्षों में वायु शक्ति किसी भी देश की ताकत की सबसे तेज धार बन चुकी है. भारतीय वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने अपनी सालाना प्रेस कॉन्फ्रेंसमें यही बात दोहराई।  

    उन्होंने कहा कि वायुसेना लगातार अपनी क्षमताओं को बेहतर बना रही है. हर युद्ध घटक का अपना महत्व है लेकिन संयुक्त बल की जरूरत सबसे ज्यादा है. ऑपरेशन सिंदूर में आईएएफ ने यही साबित किया. वायुसेना न सिर्फ ऑपरेशनल पंच देती है बल्कि मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियानों में भी आगे रहती है. कई देशों में मदद पहुंचाकर वसुधैव कुटुंबकम की भावना को जीवंत किया  है। 

    एयर चीफ ने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए बताया कि पाकिस्तानी विमानों को निशाना बनाया गया जो खतरा बन रहे थे. भारतीय लॉइटरिंग म्यूनिशन्स ने दुश्मन पक्ष में भारी अफरातफरी मचा दी. उन्होंने साफ कहा कि वायुसेना को अलग ड्रोन फोर्स की जरूरत नहीं है. मौजूदा ढांचे में ही ड्रोन और अन्य सिस्टम को एकीकृत किया जा रहा है। 

    संख्या की कमी को स्वीकार करते हुए उन्होंने कहा कि मिग-21 को पिछले साल चरणबद्ध तरीके से हटाया गया जबकि इसे दो-तीन साल पहले करना चाहते थे. देरी नुकसान पहुंचाती है लेकिन मौजूदा प्रगति से उम्मीद है कि अंतर भर जाएगा. कम विमान होने के बावजूद ऑपरेशनल क्षमता को लेकर वायुसेना सहज है क्योंकि खरीद प्रक्रिया चल रही है। 

    आत्मनिर्भरता अब मजबूरी बन चुकी है…
    आत्मनिर्भरता अब मजबूरी बन चुकी है. एयर चीफ ने एचएएल और एडीए को पूर्ण समर्थन देने की बात कही. स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस, एएमसीए के साथ मिसाइल और रडार कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया. एमआरएफए सौदा इस वित्तीय वर्ष में हस्ताक्षरित होने की उम्मीद है बशर्ते दोनों पक्ष काम करें. स्क्वाड्रन ताकत बढ़ाने के लिए एचएएल हर साल 24 से अधिक विमान बनाने की बात कर रहा है। 

    एमआरएफए पूरा होने पर आवश्यक लड़ाकू विमान मिल सकेंगे. चीन के बढ़ते स्टील्थ विमान और पाकिस्तान द्वारा उन्हें हासिल करने की कोशिश चिंता का विषय है लेकिन ऑपरेशन सिंदूर में वे कुछ खास नहीं कर पाए. आधुनिक हथियार प्रणालियों को अपने प्लेटफॉर्म पर एकीकृत किया जा रहा है। 

    वायुसेना का विजन साफ है. एआई आधारित बल तैयार किया जाएगा जहां कृत्रिम बुद्धिमत्ता सहायता करेगी लेकिन फैसला इंसान के हाथ में रहेगा. अंतरिक्ष क्षेत्र में जागरूकता बढ़ाने और मुख्य ऑपरेशनों के समर्थन पर काम चल रहा है. स्पेस हथियारों पर भी शुरुआत हो चुकी है. थिएटर कमांड के बारे में एयर चीफ ने कहा कि वे इसके खिलाफ नहीं हैं. बहुपक्षीय अभ्यासों में भागीदारी जारी है जिसमें तरंग शक्ति सबसे बड़ा है. ये अभ्यास सहयोग और अनुभव साझा करने का माध्यम बनते हैं। 
      
    संगठन से बड़ा कोई व्यक्ति नहीं और व्यक्तिगत संदेश  

    एयर चीफ ने फ्लाईदुबई घटना का जिक्र करते हुए कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण था लेकिन भारतीय पायलट का साहस सराहनीय है और उन पर गर्व है. उन्होंने जोर दिया कि कोई भी व्यक्ति संगठन से बड़ा नहीं है. पिछले दो साल में जो कुछ हुआ वह पूरी वायुसेना का काम है. जो नहीं हो पाया उसकी जिम्मेदारी वे खुद लेने को तैयार हैं और संतुष्ट हैं। 

    रिश्वत और हनीट्रैप के मामलों पर संवेदनशील बनाया जा रहा है. प्रियंका सक्सेना मामले में अदालत के फैसले का पालन होगा और प्रशिक्षण के बाद उन्हें स्क्वाड्रन लीडर के रूप में शामिल किया जाएगा.  यह एयर चीफ की अंतिम प्रेस कॉन्फ्रेंस है क्योंकि वे इस माह के अंत में सेवा निवृत्त हो रहे हैं। 

    उन्होंने देशवासियों को आश्वस्त किया कि भारतीय वायुसेना हमेशा तैयार रहेगी. दिग्गज सैनिकों का भी आभार जताया. कुल मिलाकर यह वार्ता वायुसेना की मौजूदा स्थिति, चुनौतियों और भविष्य की दिशा को साफ करती है. संख्या की कमी के बावजूद तकनीक, आत्मनिर्भरता और संयुक्त अभियानों पर जोर देकर आईएएफ अपनी ताकत बनाए रखने की दिशा में आगे बढ़ रही है। 

  • 18 महीने के DA एरियर पर फिर बढ़ी हलचल, 8वें वेतन आयोग में मिल सकता है बड़ा अपडेट?

    18 महीने के DA एरियर पर फिर बढ़ी हलचल, 8वें वेतन आयोग में मिल सकता है बड़ा अपडेट?

    नई दिल्ली

    केंद्रीय कर्मचारियों के लिए गठित आठवें वेतन आयोग के सामने अलग-अलग संगठन अपनी डिमांड रख रहे हैं। इनमें से कुछ ऐसे डिमांड हैं जो लंबे समय से चर्चा के केंद्र में रहे हैं। ऐसी ही एक डिमांड कोरोना काल के 18 महीने के महंगाई भत्ते/महंगाई राहत (DA/DR) एरियर की है। आइए जानते हैं इसके बारे में।

    क्या है मामला?
    दरअसल, कोविड-19 महामारी के दौरान साल 2020 की दोनों छमाही यानी जनवरी से जून और जुलाई से दिसंबर तक के डीए बढ़ोतरी को सरकार ने होल्ड कर दिया था। इसके अलावा साल 2021 की पहली छमाही में भी केंद्रीय कर्मचारियों को डीए नहीं बढ़ाया गया था। इस तरह, केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के भत्ते में 18 महीने तक किसी तरह की बढ़ोतरी नहीं की गई। कोरोना के दौरान रोके गए 18 महीने के महंगाई भत्ते/महंगाई राहत (DA/DR) के बकाये के भुगतान की केंद्रीय कर्मचारी लंबे समय से मांग कर रहे हैं।

    हालांकि, केंद्र सरकार ने अलग-अलग समय पर संसद में दिए गए जवाबों में स्पष्ट किया है कि कोविड-19 महामारी के दौरान सरकार की वित्तीय स्थिति पर पड़े दबाव को देखते हुए जनवरी 2020, जुलाई 2020 और जनवरी 2021 की DA/DR की तीन किस्तों को फ्रीज किया गया था। सरकार ने यह भी कहा है कि महामारी के दौरान पैदा हुई असाधारण वित्तीय परिस्थितियों और सरकार की वित्तीय स्थिति को देखते हुए उस अवधि के DA/DR एरियर का भुगतान करना व्यावहारिक नहीं माना गया।

    आठवें वेतन आयोग से मांग
    हाल ही में उत्तर प्रदेश में रिटायर हो चुके कर्मचारियों और पेंशनभोगियों ने विरोध प्रदर्शन किया और 12 सूत्रीय मांगों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंचाया है। प्रमुख मांग थी कि 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर होने वाले सरकारी कर्मचारियों को भी 8वें वेतन आयोग के दायरे में शामिल किया जाए। संगठन ने मांग की कि रिटायरमेंट की तारीख के आधार पर कोई भेदभाव न किया जाए और पुराने रिटायर लोगों की पेंशन में भी संशोधन किया जाए। उन्होंने पुरानी पेंशन व्यवस्था को बहाल करने और पेंशन से होने वाली आय को टैक्स से छूट देने की भी मांग की।

    अन्य प्रमुख मांगों में 65 साल की उम्र के बाद हर 5 साल में पेंशन में 5% की बढ़ोतरी और 10 साल बाद पेंशन कम्यूटेशन से जुड़ी कटौती को खत्म करना शामिल था। पेंशनभोगियों ने कोविड-19 महामारी के दौरान रोके गए 18 महीने के महंगाई भत्ते/महंगाई राहत (DA/DR) के बकाये के भुगतान की भी मांग की है।

    यह भी मांग की गई कि 50% से अधिक महंगाई भत्ते को मूल पेंशन में मिला दिया जाए। संगठन ने वेतन आयोग की प्रक्रिया में देरी का हवाला देते हुए कर्मचारियों, शिक्षकों और पेंशनभोगियों के लिए अंतरिम राहत की भी मांग की।

    क्या 8वें वेतन आयोग का पैनल इन मांगों पर विचार करेगा?
    यह तब पता चलेगा जब 8वां वेतन आयोग केंद्र सरकार को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप देगा। बता दें कि यह 3 सदस्यों वाला आयोग है। यह एक अस्थायी निकाय है। इसकी अध्यक्षता जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 को किया गया था और उम्मीद है कि यह गठन के 18 महीनों के भीतर अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप देगा। ऐसे में 8वें वेतन आयोग की अंतिम रिपोर्ट मई-जून 2027 में पेश किए जाने की उम्मीद है।