इंदौर
 मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में इंदौर सांसद शंकर लालवानी के मामले पर मंगलवार को सुनवाई हुई. दरअसल, इंदौर सांसद के खिलाफ पिछले साल एक चुनाव याचिका दायर की गई थी. इंदौर से दूसरी बार निर्वाचित हुए सांसद शंकर लालवानी के खिलाफ सेना से रिटायर्ड धर्मेन्द्र सिंह झाला ने ये याचिका दायर की थी. इस याचिका में धर्मेंद्र सिंह झाला ने अपना नामांकन गलत तरीके से रिजेक्ट किए जाने के आरोप लगाते हुए वर्तमान सांसद लालवानी का निर्वाचन शून्य कराने की मांग की थी.
दो सप्ताह बाद फिर होगी सुनवाई

इंदौर हाई कोर्ट में इंदौर सांसद शंकर लालवानी का निर्वाचन शून्य घोषित करने के मामले पर सुनवाई हुई. इस दौरान कोर्ट ने अन्य पक्षों को सुनने की बात कही है और इस पूरे मामले में दो सप्ताह बाद फिर सुनवाई होगी. वहीं सांसद शंकर लालवानी की ओर से भी कोर्ट में एक आवेदन लगाया गया है.

याचिकाकर्ता ने लगाए ये आरोप

बता दें कि याचिकाकर्ता धर्मेंद्र सिंह झाला ने 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में इंदौर लोकसभा क्षेत्र से नामांकन फॉर्म भरा था. उन्होंने याचिका में कहा कि जिला निर्वाचन अधिकारी ने उनका नाम गलत तरीके से प्रत्याशियों की सूची से बाहर कर दिया था. उन्होंने आरोप लगाए कि नाम वापसी के फॉर्म पर उनके हस्ताक्षर नहीं थे और फॉर्म पर पिता का नाम भी अलग था.

याचिकाकर्ता ने आगे कहा, '' मैंने नामांकन वापस लिया ही नहीं. बावजूद इसके, मेरा नाम प्रत्याशी की सूची से बाहर कर दिया गया.'' इसके साथ ही याचिकाकर्ता ने कोर्ट के समक्ष विभिन्न तरह के तर्क भी दिए, जिसपर कोर्ट ने सुनवाई की.

याचिका खारिज करने की मांग

कोर्ट के समक्ष सांसद शंकर लालवानी की ओर से अधिवक्ता मनोज द्विवेदी ने भी एक आवेदन प्रस्तुत किया है. इसमें यह मांग की गई है कि धर्मेंद्र सिंह झाला द्वारा दायर की गई याचिका चलने योग्य नहीं है, इसे निरस्त किया जाए. फिलहाल कोर्ट ने इस पूरे मामले में सुनवाई कर याचिकाकर्ता से इस संबंध में अन्य तथ्यों पर दो सप्ताह में जवाब मांगा है.

कौन हैं शंकर लालवानी?

शंकर लालवानी इंदौर के लोकप्रिय नेता हैं, जिनके नाम सबसे ज्यादा वोटों से जीतने का रिकॉर्ड भी दर्ज है. लोकसभा चुनाव 2024 में शंकर लालवानी ने मध्य प्रदेश की इंदौर लोकसभा सीट से 10 लाख से ज्यादा वोटों से जीतकर इतिहास रच दिया था. यहां से कांग्रेस प्रत्याशी अक्षय कांति बम ने नामांकन वापिसी के आखिरी दिन अपना नाम वापस ले लिया था.