जबलपुर
रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय (RDVV) के परीक्षा पोर्टल पर बी.फार्मा की छात्रा के आवेदन में रोल नंबर के स्थान पर अभद्र शब्द प्रदर्शित होने के मामले को विश्वविद्यालय प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। पूरे प्रकरण की जांच तेज कर दी गई है और अब एमपी ऑनलाइन से औपचारिक रूप से जवाब-तलब किया जाएगा। विश्वविद्यालय का कहना है कि इस तकनीकी गड़बड़ी के लिए जिम्मेदारी तय की जाएगी तथा डेटा सुरक्षा से जुड़े सभी पहलुओं की जांच होगी।
एमपी ऑनलाइन को भेजा जाएगा नोटिस
विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. रविशंकर सोनवाने ने बताया कि परीक्षा पोर्टल पर इस तरह की आपत्तिजनक प्रविष्टि किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन लगातार एमपी ऑनलाइन के अधिकारियों के संपर्क में है और जल्द ही उन्हें औपचारिक नोटिस जारी कर विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि तकनीकी त्रुटि किस स्तर पर हुई।
तकनीकी गड़बड़ी के हर पहलू की होगी पड़ताल
कुलसचिव के अनुसार प्रथम दृष्टया मामला गंभीर तकनीकी त्रुटि का प्रतीत होता है। ऑनलाइन परीक्षा डेटा सुरक्षित रखने वाली एजेंसी की भूमिका, डेटा किस स्तर पर प्रभावित हुआ और यह गड़बड़ी कैसे हुई, इसकी विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
छात्रा के आवेदन में सामने आई थी गंभीर त्रुटि
गौरतलब है कि विश्वविद्यालय के आधिकारिक परीक्षा पोर्टल पर बी.फार्मा (सीबीसीएस) आठवें सेमेस्टर की नियमित छात्रा अर्पिता मिश्रा के आवेदन में प्रथम सेमेस्टर के रोल नंबर के स्थान पर अभद्र शब्द प्रदर्शित हुआ था। इतना ही नहीं, पोर्टल पर छात्रा के पिछले सात सेमेस्टर का शैक्षणिक विवरण भी गलत दिखाई दे रहा था। मामला सामने आने के बाद परीक्षा पोर्टल की विश्वसनीयता और विद्यार्थियों के शैक्षणिक डेटा की सुरक्षा पर सवाल उठने लगे।
एनएसयूआई ने उठाए सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
एनएसयूआई के जिला अध्यक्ष सचिन रजक ने कहा कि परीक्षा आवेदन, परिणाम और शैक्षणिक रिकॉर्ड जैसे संवेदनशील डेटा यदि इस प्रकार प्रभावित हो सकते हैं तो पोर्टल की सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक तकनीकी जांच कराई जानी चाहिए। विद्यार्थियों ने दोषियों पर कार्रवाई करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सुरक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाने की मांग भी की है।
विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि एमपी ऑनलाइन से स्पष्टीकरण मिलने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि मामला तकनीकी त्रुटि, डेटाबेस में गड़बड़ी, सॉफ्टवेयर बग या किसी अन्य कारण से हुआ है। फिलहाल पूरे प्रकरण पर विश्वविद्यालय की नजर बनी हुई है।
















