भोपाल
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा किए जा रहे निरंतर नवाचारों और सुधारों का सकारात्मक असर भी प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में दिखाई दे रहा है। पिछले 23 वर्षों में शिक्षा के क्षेत्र में किए गए बदलावों और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की वजह से प्राथमिक शालाओं में विद्यार्थियों की ड्रॉप आउट दर शून्य तक पहुंच गई है। प्रदेश के शासकीय स्कूलों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को नवाचार के साथ गुणवत्तापूर्ण एवं समावेशी शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में प्रदेश सरकार लगातार प्रयास कर रही है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देशानुसार विद्यार्थियों को शिक्षा से सतत जोड़े रखने और उनकी पढ़ाई को रूचिकर एवं आसान बनाने में विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाएं भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। साइकिल, स्कूटी, लैपटॉप, गणवेश और छात्रवृत्ति जैसी योजनाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को आर्थिक संबल प्रदान कर शिक्षा के लिये प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इन योजनाओं ने विद्यार्थियों की स्कूल तक पहुंच बढ़ाने के साथ ही उन्हें पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित किया है। इन योजनाओं से विद्यार्थियों का शासकीय स्कूलों के प्रति रूझान बढ़ा है।
स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ नवाचार, तकनीक, बेहतर अधोसंरचना और विद्यार्थियों की आवश्यकताओं पर केंद्रित व्यवस्थाओं को प्राथमिकता दी जा रही है। पीएमएवं सांदीपनि विद्यालयों, ई-हॉस्टल मैनेजमेंट सिस्टम, गृह संपर्क अभियान और व्यावसायिक शिक्षा जैसे नवाचारों से शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा मिल रही है।
प्रदेश सरकार का प्रयास है कि हर विद्यार्थी को समान अवसर, बेहतर शैक्षणिक वातावरण और आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर उपलब्ध हों। शासकीय विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के साथ विद्यार्थियों को शिक्षा से जोड़े रखने और उनके सर्वांगीण विकास पर निरंतर काम किया जा रहा है।
साइकिल योजना से 1 करोड़ से अधिक विद्यार्थी हुए लाभान्वित
प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2004-05 में शासकीय स्कूलों की कक्षा 6वीं एवं 9वीं की छात्राओं को स्कूल आने-जाने में आने वाली परेशानी को दूर करने के लिये साइकिल योजना शुरू की गई। योजना अंतर्गत अब तक 1 करोड़ से अधिक विद्यार्थी लाभान्वित हो चुके हैं। योजना पर प्रदेश सरकार द्वारा अब तक 2,942.63 करोड़ रुपये से अधिक की राशि व्यय की गई हैं।
ड्रॉप आउट दर में आई उल्लेखनीय कमी
प्रदेश के हर बच्चे को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के निरंतर प्रयासों का परिणाम है कि ड्रॉप आउट दर में उल्लेखनीय कमी आई है। वर्ष 2002-03 में ड्रॉप आउट दर प्राथमिक स्तर पर 15% और माध्यमिक स्तर पर 24.70% थी। वर्ष 2025-26 में पहली बार प्राथमिक स्तर पर ड्रॉप आउट दर शून्य प्रतिशत हो गई है। माध्यमिक स्तर पर यह दर घटकर 6.2% और सेकंडरी स्तर पर 13.0% रह गई है।
व्यावसायिक शिक्षा में मध्यप्रदेश देश में अग्रणी
व्यावसायिक शिक्षा के क्षेत्र में मध्यप्रदेश देश में अग्रणी है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति- 2020 के अनुरूप विद्यार्थियों को रोजगारोंमुखी और कौशल विकास के लिये भी शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। प्रदेश में कक्षा 9वीं से 12वीं तक व्यावसायिक शिक्षा पाठ्यक्रम संचालित करने वाले विद्यालयों की संख्या बढ़कर 3,367 हो गई है, जो देश में सर्वाधिक है। वर्ष 2024-25 में 4.06 लाख विद्यार्थियों एवं वर्ष 2025-26 में 5,98,452 विद्यार्थियों ने इन पाठ्यक्रमों में नामांकन कराया। पिछले दो वर्षों में 1,010 विद्यालयों में एग्रीकल्चर ट्रेड प्रारंभ किया गया है। विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ने के उद्देश्य से जनवरी 2026 में प्रदेश के सभी हाई एवं हायर सेकंडरी विद्यालयों में कॅरियर सप्ताह एवं कॅरियर मेले का आयोजन भी किया गया।
वर्ष 2003 की तुलना में चार गुना से अधिक बढ़ा शिक्षा बजट
शासकीय स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अधोसंरचना विकास को प्राथमिकता देते हुए प्रदेश सरकार ने शिक्षा बजट में उल्लेखनीय वृद्धि की है। वर्ष 2002-03 में शिक्षा का बजट 2,456 करोड़ रुपये था, जो वर्ष 2026-27 में बढ़कर 9,623.12 करोड़ रुपये हो गया है। इस प्रकार वर्ष 2003 की तुलना में शिक्षा बजट में लगभग चार गुना वृद्धि हुई है।
अब तक प्रदेश के 23,000 से अधिक विद्यार्थियों को मिल चुकी है स्कूटी
प्रदेश सरकार द्वारा मेधावी विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से वर्ष 2022-23 से मुख्यमंत्री स्कूटी योजना संचालित की जा रही है। कक्षा 12वीं में प्रथम प्रयास में 70% अंक के साथ स्कूल में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले शासकीय हायर सेकंडरी स्कूलों के नियमित विद्यार्थियों को योजना का लाभ मिलता है। प्रदेश सरकार द्वारा योजना शुरू होने से अब तक 23 हजार 487 विद्यार्थी लाभान्वित हो चुके हैं। योजना पर लगभग 246 करोड़ रुपये प्रदेश सरकार द्वारा व्यय किए जा चुके हैं। मोटराइज्ड स्कूटी के लिए अधिकतम 90 हजार रुपये और ई-स्कूटी के लिए अधिकतम 1.20 लाख रुपये की राशि प्रदान की जाती है।
पहली बार एक अप्रैल से शुरू हुआ पाठ्यपुस्तक वितरण
शासकीय स्कूलों में अध्ययनरत कक्षा 1 से 12वीं तक के विद्यार्थियों को निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें प्रदान की जाती हैं। शैक्षणिक सत्र 2025-26 में पहली बार एक अप्रैल से निःशुल्क पाठ्य पुस्तकों का वितरण शुरू किया गया, जिससे विद्यार्थियों को सत्र की शुरुआत से ही पढ़ाई की सामग्री उपलब्ध हो सके। वर्ष 2026-27 में पुस्तकों की प्रिंटिंग, बाइंडिंग एवं पेपर की गुणवत्ता बेहतर करने के लिए एसओपी निर्धारित की गई है।
बोर्ड परीक्षा परिणामों में हुआ उल्लेखनीय सुधार
विगत वर्षों में हाई स्कूल एवं हायर सेकेंडरी के परीक्षा परिणामों में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। हाई स्कूल स्तर पर वर्ष 2025-26 में परीक्षा परिणाम 73.42 प्रतिशत रहा। इसी प्रकार हायर सेकंडरी में वर्ष 2025-26 में परीक्षा परिणाम 76.01 प्रतिशत रहा।
स्थानीय परीक्षाओं की अंकसूचियां अब ऑनलाइन
स्थानीय परीक्षाओं की अंकसूचियों की ऑनलाइन उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। शैक्षणिक सत्र 2025-26 से विद्यार्थियों को स्थानीय परीक्षाओं की अंकसूचियां ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे विद्यार्थियों को अंकसूची प्राप्त करने में सुविधा के साथ ही प्रक्रिया में पारदर्शिता और डिजिटल व्यवस्था को बढ़ावा मिला है।
पीएमएवं सांदीपनि विद्यालयों के प्रति विद्यार्थियों एवं अभिभावकों का बढ़ा रूझान
पीएमएवं सांदीपनि विद्यालय गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और विश्वस्तरीय अधोसंरचना के केंद्र के रूप में अपनी पहचान बना रहे हैं। विद्यालयों में उपलब्ध बेहतर शैक्षणिक सुविधाओं और आधुनिक अधोसंरचना के कारण विद्यार्थियों एवं अभिभावकों का रुझान लगातार बढ़ा है। बेहतर शैक्षणिक प्रदर्शन की वजह से इन विद्यालयों को निजी विद्यालयों के समकक्ष और कई मामलों में बेहतर विकल्प के रूप में स्थापित किया है।
प्रदेश में प्रथम चरण में आधुनिक भौतिक सुविधाओं से परिपूर्ण 368 सांदीपनि विद्यालयों का संचालन शुरू चुका है। इसमें 274 स्कूल शिक्षा विभाग और 94 जनजातीय विभाग के सांदीपनि विद्यालय हैं। प्रदेश में 799 पीएमविद्यालय संचालित हैं, जिनमें 4 लाख 80 हजार छात्र नामांकित हैं। सभी पीएमस्कूलों में शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार से निर्धारित 21 इंडिकेटर पर प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है।
ई-हॉस्टल मैनेजमेंट सिस्टम से छात्रावास संचालन में पारदर्शिता
स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा छात्रावासों के प्रभावी संचालन के लिए पहली बार ई-हॉस्टल एडमिशन एवं मैनेजमेंट सिस्टम लागू किया गया है। इससे स्कूलों में प्रवेश एवं सीट आवंटन प्रक्रिया को सरल बनाने के साथ विद्यार्थियों के डिजिटल रिकॉर्ड का व्यवस्थित संधारण किया जा रहा है। विद्यालय एवं आवासीय कैचमेंट क्षेत्र की मैपिंग के साथ स्टोर, रसोई, उपस्थिति, वित्त एवं स्वास्थ्य जैसी विभिन्न गतिविधियों का भी डिजिटल प्रबंधन किया जा रहा है। इससे छात्रावास व्यवस्था अधिक पारदर्शी, सुगम एवं प्रभावी बनी है।
गृह संपर्क अभियान से 3 लाख से अधिक बच्चे स्कूल लौटे
आउट-ऑफ-स्कूल बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से पुन: जोड़ने के लिए गृह संपर्क अभियान संचालित किया जा रहा है। अभियान अंतर्गत शिक्षक घर-घर जाकर सर्वेक्षण करते हैं और अप्रवेशित विद्यार्थियों की पहचान कर आवश्यकता के अनुसार मौके पर ही प्रवेश दिलाते हैं। विद्यार्थियों के घर पर उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में उसके विद्यालय छोड़ने के कारणों को भी दर्ज किया जाता है। अभियान के माध्यम से अब तक तीन लाख से अधिक बच्चों को पुनः स्कूल से जोड़ा गया है।
पीएम जनमन अंतर्गत 106 छात्रावास स्वीकृत
प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान पीएम-जनमन अंतर्गत विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह पीवीटीजी के विद्यार्थियों के लिए 106 छात्रावासों को स्वीकृति दी गई है। छात्रावासों की यह सुविधा जनजातीय क्षेत्रों के विद्यार्थियों को आवासीय एवं शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
धरती आबा अभियान के तहत 104 छात्रावास स्वीकृत
धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत 104 छात्रावास स्वीकृत किए गए हैं। इन छात्रावासों के माध्यम से जनजातीय क्षेत्रों के विद्यार्थियों को बेहतर आवासीय एवं शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।
अब तक 6 लाख 47 हजार से अधिक प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को लैपटॉप के लिए मिली 25 हजार रुपये की राशि
प्रदेश में प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से लैपटॉप प्रदान किये जा रहे है। वर्ष 2009-10 से संचालित योजना में माध्यमिक शिक्षा मंडल की हायर सेकेंडरी परीक्षा में 75 प्रतिशत या उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को लैपटॉप क्रय करने के लिए 25 हजार रुपये की राशि उनके बैंक खाते में अंतरित की जाती है। प्रदेश सरकार द्वारा अब तक 6 लाख 47 हजार 599 विद्यार्थियों को लैपटॉप क्रय करने के लिए राशि प्रदान कर चुकी है।
समेकित छात्रवृत्ति योजना से लाखों विद्यार्थियों को लाभ
समेकित छात्रवृत्ति योजना से कक्षा पहली से 12वीं तक के विद्यार्थियों को विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं का लाभ मिल रहा है। वर्ष 2013-14 से संचालित इस योजना में छह विभागों की लगभग 20 प्रकार की छात्रवृत्ति योजनाओं को शामिल किया गया है। छात्रवृत्ति की स्वीकृति एवं राशि का भुगतान शिक्षा पोर्टल से ऑनलाइन प्रक्रिया द्वारा सीधे विद्यार्थियों के बैंक खातों में किया जाता है। वर्ष 2024-25 में 63.72 लाख विद्यार्थियों को 352 करोड़ रुपये, जबकि वर्ष 2025-26 में 60.59 लाख विद्यार्थियों को 344 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति प्रदान की गई।
सुपर 100 योजना में मेधावी विद्यार्थियों को करा रहे है प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी
सुपर 100 योजना के माध्यम से शासकीय विद्यालयों के मेधावी विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की गुणवत्तापूर्ण तैयारी कराई जा रही है। कक्षा 10वीं में अध्ययनरत विद्यार्थियों का चयन परीक्षा के माध्यम से किया जाता है। चयनित विद्यार्थियों को कक्षा 11वीं एवं 12वीं में भोपाल के शासकीय सुभाष उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय तथा इंदौर के शासकीय मल्हार आश्रम उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में अध्ययन के साथ इंजीनियरिंग, मेडिकल एवं अन्य प्रतिष्ठित व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए विशेष कोचिंग दी जाती है। वर्तमान में दोनों संस्थाओं में कुल 304 विद्यार्थियों को प्रवेश दिया जाता है।
19 लाख छात्राओं के बैंक खातों में सैनिटरी नैपकिन के लिए सीधे पहुंच रही राशि
प्रदेश में बालिकाओं के स्वास्थ्य, स्वच्छता और विद्यालय में नियमित उपस्थिति को बढ़ावा देने के लिए सैनिटरी नैपकिन योजना संचालित की जा रही है। योजना अन्तर्गत कक्षा 7वीं से 12वीं तक अध्ययनरत सभी बालिकाओं को प्रतिवर्ष 300 रुपये की राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) से प्रदान की जाती है। सितंबर 2025 में शासकीय विद्यालयों में अध्ययनरत लगभग 19 लाख बालिकाओं के खातों में कुल 57 करोड़ रुपये की राशि अंतरित की गई।
डिजिटल शिक्षा से स्मार्ट हुई स्कूलों की पढ़ाई
प्रदेश में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश के स्कूलों में स्मार्ट क्लास एवं आईसीटी लैब की सुविधा का विस्तार किया जा रहा है। वर्ष 2025-26 तक मिडिल स्कूलों में 4,163 स्मार्ट क्लास, जबकि कस्तूरबा गांधी बालिका शिक्षा छात्रावासों में शत-प्रतिशत स्मार्ट क्लास एवं आईसीटी लैब स्वीकृत की गई हैं। नेताजी सुभाषचंद्र बोस छात्रावासों में भी शत-प्रतिशत स्मार्ट क्लास स्वीकृत हैं। प्रदेश के 9,316 हाई स्कूल एवं हायर सेकेंडरी स्कूलों में 8,870 (95%) स्मार्ट क्लास स्वीकृत हैं, जिनमें 7,405 कार्यशील हैं। इसी तरह 8,754 (94%) स्कूलों में आईसीटी लैब स्वीकृत हैं, जिनमें 3,706 कार्यशील हैं।
निःशुल्क गणवेश से विद्यार्थियों को मिली है मदद
प्रदेश की शासकीय शालाओं में अध्ययनरत बालिकाओं को वर्ष 2004-05 से प्रारम्भ इस योजना में 2 जोड़ी निःशुल्क गणवेश की सुविधा प्रदान की गई। वर्ष 2011-12 से इस योजना में छात्रों को भी शामिल किया गया। वर्तमान में प्रदेश की शासकीय शालाओं में कक्षा 1 से 8 में अध्ययनरत लगभग 60 लाख विद्यार्थियों को प्रतिवर्ष 2 जोड़ी गणवेश के लिए 600 रुपये की राशि के मान से लगभग 360 करोड़ प्रतिवर्ष का व्यय किया जा रहा है।
















