Category: उत्तर प्रदेश

  • अखिलेश के खिलाफ मंत्रियों ने खोला मोर्चा, चौधरी भूपेंद्र सिंह और राजभर ने गिनाए पुराने कारनामे

    अखिलेश के खिलाफ मंत्रियों ने खोला मोर्चा, चौधरी भूपेंद्र सिंह और राजभर ने गिनाए पुराने कारनामे

    अखिलेश के खिलाफ मंत्रियों ने खोला मोर्चा, चौधरी भूपेंद्र सिंह और राजभर ने गिनाए पुराने कारनामे

    अखिलेश ने तिजोरी भरने के लिए बनाया था एक्सप्रेसवे: चौधरी भूपेंद्र सिंह

    सपा राज में पत्रकार को जिंदा जलाया गया था, अखिलेश पर चौधरी भूपेंद्र का तीखा प्रहार

    पीडीए मतलब परिवार, दौलतमंद और अपराधी: ओम प्रकाश राजभर

    ‘लोकतंत्र की देते हैं दुहाई और इमरजेंसी वाली कांग्रेस से करते हैं गलबहियां’: भूपेंद्र और राजभर

    लखनऊ, 
     समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान, लोकतंत्र की रक्षा, एक्सप्रेसवे निर्माण और पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर दिए गए बयानों पर उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री चौधरी भूपेंद्र सिंह और ओम प्रकाश राजभर ने कड़ा पलटवार किया है। दोनों नेताओं ने अखिलेश यादव के बयानों को उनके पुराने राजनीतिक फैसलों और सपा सरकार के कार्यकाल की याद दिलाते हुए आड़े हाथ लिया।

    लोकतंत्र की दुहाई पर चौधरी भूपेंद्र सिंह का निशाना
    चौधरी भूपेंद्र सिंह ने अखिलेश यादव द्वारा लोकतंत्र सेनानियों को 51 हजार सम्मान राशि देने के ऐलान पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र की बात करने वालों को पहले अपने गिरेबान में झांकना चाहिए। उन्होंने कहा कि अखिलेश एक तरफ इमरजेंसी का रोना रोते हैं, वहीं दूसरी तरफ उसी कांग्रेस के साथ गलबहियां कर चुनाव लड़ रहे हैं, जिसने देश पर तानाशाही थोपकर इमरजेंसी लगाने का ऐतिहासिक पाप किया था।

    एक्सप्रेसवे के मुद्दे पर घेरा
    अखिलेश यादव के एक्सप्रेसवे संबंधी दावों पर चौधरी भूपेंद्र सिंह ने सपा सरकार को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि सपा कार्यकाल के दौरान सड़क और एक्सप्रेसवे निर्माण में हुई संगठित लूट जगजाहिर है। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश के कार्यकाल में केवल एक एक्सप्रेसवे बना, जिसमें भारी भ्रष्टाचार हुआ। निजी और पारिवारिक तिजोरी भरने के लिए एक्सप्रेसवे का रूट जानबूझकर बदला गया था, और सपा इस खुली धांधली से मुंह नहीं मोड़ सकती।

    'सपा राज में पत्रकार को जिंदा जलाया गया था'
    पत्रकारों के सम्मान और सुरक्षा के दावों पर पलटवार करते हुए चौधरी भूपेंद्र सिंह ने शाहजहांपुर में पत्रकार को जिंदा जलाए जाने की घटना याद दिलाई। उन्होंने कहा कि सपा सरकार में एक मंत्री के खिलाफ स्टोरी करने पर पत्रकार को जिंदा जला दिया गया और बाद में अस्पताल में भी उसकी जान लेने की कोशिश हुई।

    उन्होंने आगे कहा कि जब अखिलेश यादव को प्रेस वार्ता में किसी पत्रकार का सवाल पसंद नहीं आता, तो वे उसकी जाति पूछने लगते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पत्रकारों को धमकाने, सपा कार्यकर्ताओं द्वारा मारपीट करने और 'मुर्दाबाद' के उस मामले में अखिलेश की मौजूदगी और उनके इशारे पर पत्रकारों से बर्बरता की गई थी।

    राजभर बोले- अखिलेश की किसी बात का भरोसा नहीं
    कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव की राजनीतिक विश्वसनीयता पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि 2017 में कांग्रेस के साथ गठबंधन की विफलता के बाद खुद अखिलेश ने इसे अपनी 'सबसे बड़ी भूल' करार दिया था। इसके बाद मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में जाकर जनता से कांग्रेस को वोट न देने की अपील की और उसे धोखेबाज बताया। राजभर ने उत्तराखंड उपचुनाव का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां सपा के 2,200 वोट काटने की वजह से ही कांग्रेस मामूली अंतर से हारी थी।

    इमरजेंसी के इतिहास पर राजभर का वार
    इमरजेंसी का जिक्र करते हुए ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि रायबरेली से राज नारायण के चुनाव मामले में अदालत द्वारा इंदिरा गांधी को 6 साल के लिए अयोग्य ठहराए जाने के बाद कांग्रेस ने देश में इमरजेंसी थोपी थी। लाखों नेताओं, कार्यकर्ताओं और पत्रकारों को सलाखों के पीछे डाला गया। राजभर ने सवाल उठाया कि उसी कांग्रेस के साथ खड़े होकर अखिलेश किस मुंह से लोकतंत्र सेनानियों को पेंशन और सम्मान देने की बात कर रहे हैं।

    PDA मतलब परिवार, दौलतमंद और अपराधी
    अखिलेश के 'पीडीए' (PDA) फार्मूले की धज्जियां उड़ाते हुए राजभर ने कहा कि इनके PDA का असली अर्थ है- 'P' से परिवार, 'D' से धनी राम यानी दौलतमंद, और 'A' से अपराधी। राजभर ने सवाल उठाया कि जिन निष्ठावान कार्यकर्ताओं ने खून-पसीना बहाकर, लाठियां खाकर सपा को सींचा, उनके हक को दरकिनार कर केवल धनकुबेरों और अपराधियों को तरजीह दी जा रही है।

    मुस्लिम व अन्य वर्गों के प्रतिनिधित्व पर सवाल
    राजभर ने सपा के भीतर मुस्लिम प्रतिनिधित्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि मुसलमानों के एकतरफा वोट से सपा विधायक जीतते हैं, लेकिन जब राज्यसभा भेजने की बात आती है तो मुसलमानों को नजरअंदाज कर दिया जाता है। उन्हें केवल वोट बैंक और गुलाम बनाकर रखा गया है। उन्होंने यह भी पूछा कि PDA में पंडित और सामान्य वर्ग की हिस्सेदारी कहां है? एक बार किसी को भेजा गया, उसके बाद उन्हें भी दरकिनार कर दिया गया।

    डिंपल यादव के निर्विरोध चुनाव पर उठाए सवाल
    राजभर ने डिंपल यादव के पूर्व में हुए निर्विरोध चुनाव का उल्लेख करते हुए गंभीर आरोप लगाया कि उस समय विरोधी प्रत्याशियों को कथित तौर पर अगवा कर जबरन पर्चे वापस कराए गए थे। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव का सरोकार न तो पिछड़ों से है, न दलितों से, न मुसलमानों से और न ही सामान्य वर्ग से, उनकी राजनीति केवल परिवार और निजी स्वार्थ तक सीमित है।

  • वीरता पदक पाकर बोले पुलिसकर्मी- अत्याधुनिक संसाधनों से मजबूत हुई पुलिसिंग, जनता में बढ़ा सुरक्षा का भरोसा

    वीरता पदक पाकर बोले पुलिसकर्मी- अत्याधुनिक संसाधनों से मजबूत हुई पुलिसिंग, जनता में बढ़ा सुरक्षा का भरोसा

    वीरता पदक पाकर बोले पुलिसकर्मी- अत्याधुनिक संसाधनों से मजबूत हुई पुलिसिंग, जनता में बढ़ा सुरक्षा का भरोसा

    लोकभवन में मुख्यमंत्री योगी ने वीर पुलिसकर्मियों को विभिन्न वीरता पदकों से किया सम्मानित

    अशोक कुमार मीणा को गैलेंट्री मेडल, अमित श्रीवास्तव को राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री वीरता पदक

    कुलदीप कुमार बोले- तकनीक के इस्तेमाल से बदली पुलिसिंग, जीरो टॉलरेंस नीति का दिख रहा असर

    घनश्याम यादव ने मुख्यमंत्री के हाथों पदक मिलने को बताया गौरव का क्षण

    लखनऊ, 
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम में वीर पुलिसकर्मियों को विभिन्न वीरता पदकों से सम्मानित किया। पदक प्राप्त करने वाले पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने इसे अपने और परिवार के लिए गौरव का क्षण बताया। पुलिसकर्मियों ने एक स्वर में कहा कि पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश की पुलिसिंग में व्यापक बदलाव आया है और अत्याधुनिक संसाधनों व तकनीक के इस्तेमाल से पुलिस की कार्यक्षमता बढ़ी है।

    अपराधियों में पुलिस का डर बढ़ा

    हरदोई के पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार मीणा को गैलेंट्री मेडल से सम्मानित किया गया। उन्होंने कहा कि यह उनके लिए गर्व का पल है। पुलिसिंग में काफी बदलाव आया है और अपराधियों में पुलिस का डर बढ़ा है। ऋतुल कुमार वर्मा को राष्ट्रपति वीरता पदक से सम्मानित किया गया है। 
    उन्होंने कहा कि करीब 15-16 वर्षों की सेवा में उन्होंने पुलिसिंग का बदलता स्वरूप देखा है और वर्तमान में पहले से बेहतर माहौल है।

    मुख्यमंत्री के हाथों सम्मान मिलना गौरव की बात

    एसटीएफ वाराणसी यूनिट के इंस्पेक्टर अमित श्रीवास्तव को राष्ट्रपति वीरता पदक और मुख्यमंत्री वीरता पदक से सम्मानित किया गया। उन्होंने कहा कि सम्मान उनके और परिवार के लिए खुशी का क्षण है। पुलिस को कार्य करने की स्वतंत्रता मिलने और प्रभावी कार्रवाई का परिणाम है कि अपराध में कमी आई है और अपराधियों में भय का माहौल बना है। इसी क्रम में संभल में सीओ के पद पर तैनात कुलदीप कुमार को राष्ट्रपति वीरता पदक मिला। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के हाथों सम्मान मिलना गौरव की बात है। पुलिस ने समय के साथ खुद को बदला है और तकनीक का इस्तेमाल बढ़ा है। 

    आज यूपी पुलिस देश में नंबर वन

    कुलदीप कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री जी की जीरो टॉलरेंस नीति का नतीजा है कि यूपी पुलिस आज देश की नंबर वन पुलिस है। एसटीएफ मुख्यालय लखनऊ के इंस्पेक्टर घनश्याम यादव को मुख्यमंत्री वीरता पदक से सम्मानित किया गया। उन्होंने कहा कि जिन मुख्यमंत्री को अब तक टीवी और अखबारों में देखते थे, उनके हाथों से पदक मिलना उनके लिए बेहद गर्व का क्षण है। एसटीएफ में तैनात अंगद सिंह यादव को गैलेंट्री पदक मिला। उन्होंने कहा कि अच्छे कार्य के लिए मिला यह सम्मान उनके और परिवार के लिए गर्व का विषय है। जीरो टॉलरेंस नीति के तहत पुलिस अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। 

    पुलिस की कार्रवाई से अपराधियों में डर

    मुख्यमंत्री वीरता पदक से सम्मानित धर्मेंद्र सिंह राठौर ने कहा कि पुलिस की कार्रवाई से अपराधियों में डर और जनता में सुरक्षा की भावना बढ़ी है। पुलिस सुधारों पर भी काम हो रहा है और पुलिसकर्मियों की आवास समेत मूलभूत सुविधाओं में सुधार किया गया है। उपनिरीक्षक अजय वर्मा को मुख्यमंत्री वीरता पदक से सम्मानित किया गया है। उन्होंने कहा कि अत्याधुनिक संसाधनों के आने से पुलिसिंग बेहतर हुई है और पुलिसकर्मी अधिक प्रभावी ढंग से अपना कार्य कर पा रहे हैं।

  • 2017 से पहले माफिया के सामने नाक रगड़ती थी सरकार: सीएम योगी

    2017 से पहले माफिया के सामने नाक रगड़ती थी सरकार: सीएम योगी

    2017 से पहले माफिया के सामने नाक रगड़ती थी सरकार: सीएम योगी
     
    लोकभवन में अत्याधुनिक 87 इंटरसेप्टर वाहनों को फ्लैग ऑफ किया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने

    वीर पुलिसकर्मियों का सम्मान और पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह की पुस्तक ‘संघर्ष’ का विमोचन भी किया सीएम ने
     
    बंद कमरे में टिप्पणी करना आसान, सुरक्षा हटा दें तो बड़े से बड़े व्यक्ति को भीगी बिल्ली बनने में देर नहीं लगती: मुख्यमंत्री
     
    सीएम ने कहा- पुलिस रिफॉर्म लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना उत्तर प्रदेश, सात पुलिस कमिश्नरेट कर रहे काम
     
    14 लाख से अधिक कैमरों से अपराध पर निगरानी, घटनाओं के खुलासे के साथ रोकथाम में भी मिल रही मदद
     
    यूपी पुलिस को पहली बार कीर्ति चक्र, वीरगति को प्राप्त इंस्पेक्टर सुनील कुमार के परिवार का सम्मान
     
    16 पुलिसकर्मियों को राष्ट्रपति वीरता पदक, 10 को मुख्यमंत्री वीरता पदक

    लखनऊ, 
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्ववर्ती सरकार की कानून-व्यवस्था पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश के हर जिले में दुर्दांत माफिया का बोलबाला था। समानांतर सरकारें चलती थीं। माफिया के सामने नाक रगड़ी जाती थी, घुटने टेके जाते थे और पुलिस मजबूर थी। राजनीतिक नेतृत्व की रीढ़ ही टेढ़ी हो तो वह कानून-व्यवस्था को सीधा कैसे कर सकता है।
     
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार को लोकभवन सभागार में आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने 87 इंटरसेप्टर वाहनों को हरी झंडी दिखाई, वीर पुलिसकर्मियों को पदक प्रदान किए और पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह की पुस्तक ‘संघर्ष’ का विमोचन भी किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 के बाद सरकार ने पुलिस सुधारों को आगे बढ़ाया। प्रकाश सिंह ने जिस पुलिस रिफॉर्म की वकालत की थी, उसे उत्तर प्रदेश ने देश में सबसे पहले लागू किया। प्रदेश में अब सात पुलिस कमिश्नरेट काम कर रहे हैं। आज यूपी पुलिस के सामने विचार, वीरता और तकनीक, तीनों का समन्वय दिखाई दे रहा है। ‘संघर्ष’ के माध्यम से पुलिस सेवा के अनुभव और चुनौतियां सामने आई हैं तो जांबाजों की वीरता का सम्मान हुआ है और सड़क सुरक्षा के लिए अत्याधुनिक इंटरसेप्टर वाहन पुलिस बल को समर्पित किए गए हैं।

    बंद कमरे में बैठकर टिप्पणी करना बेहद आसान
    मुख्यमंत्री ने कहा कि बंद कमरे में बैठकर किसी के प्रति कोई भी टिप्पणी करना आसान है। कोई व्यक्ति कितना भी बड़ा क्यों न हो और उसे अपने पद का कितना भी गुरूर हो, सुरक्षा हटा दी जाए तो अराजकता के माहौल में उसे भीगी बिल्ली बनने में देर नहीं लगेगी। स्वस्थ चिंतन तभी संभव है, जब समाज में सुरक्षा का वातावरण हो। सुरक्षित माहौल में ही समृद्धि की परिकल्पना को साकार किया जा सकता है। यूपी पुलिस की थीम ‘आपकी सुरक्षा, हमारा संकल्प’ इसी भावना को व्यक्त करती है। जब तराई क्षेत्र आतंकवाद की चपेट में था, तब पुलिस व सेना की सुरक्षा में ही आवागमन संभव था। सूर्यास्त के बाद आवाजाही लगभग बंद हो जाती थी। उस समय डीजीपी के रूप में प्रकाश सिंह ने इन चुनौतियों का सामना किया।  पुलिस सुधारों के लिए प्रकाश सिंह को सुप्रीम कोर्ट की शरण लेनी पड़ी थी। उत्तर प्रदेश ने पुलिस सुधारों को लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।

    विचार तभी सार्थक, जब व्यवहार में उतरें
    मुख्यमंत्री ने कहा कि वैचारिकी केवल शब्द या आलेख नहीं होती, बल्कि वह व्यावहारिक जीवन की चुनौतियों को भी समाहित करती है। प्रकाश सिंह ने अपने सेवाकाल में पग-पग पर इन चुनौतियों का सामना किया और अपनी पूरी सेवा को कुशलतापूर्वक पूरा किया। लंबे समय तक विभिन्न संस्थानों में व्याख्यानों के माध्यम से युवाओं को प्रेरित करने वाली उनकी वैचारिकी अब पुस्तक के रूप में सामने आई है। आचार और विचार में जब समन्वय होता है और दोनों एक ही दिशा में आगे बढ़ते हैं, तभी परिणाम सामने आता है।

    2017 से पहले कानून-व्यवस्था थी बड़ी चुनौती
    मुख्यमंत्री ने 2017 से पहले प्रदेश की कानून-व्यवस्था की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय ‘यूपी वाला’ कहकर लोगों को बाहर कर दिया जाता था। पुलिस के सामने भी बड़ी चुनौतियां थीं। राजनीतिक नेतृत्व में स्वयं निर्णय लेने की सामर्थ्य नहीं हो तो कानून-व्यवस्था को नियंत्रित करना कठिन होता है। तब पुलिस सुधार और अवस्थापना सुविधाओं की स्थिति भी बेहतर नहीं थी। एक वर्ष में करीब छह हजार पुलिस कार्मिकों को ही प्रशिक्षण दिया जा सकता था। पुलिसकर्मियों को टूटे भवनों में रहना पड़ता था। पीएसी की वाहिनियां समाप्त कर दी गई थीं। कोसीकलां, मेरठ, अलीगढ़ और मुजफ्फरनगर समेत कई स्थानों पर दंगों के चलते लंबे समय तक कर्फ्यू लगा। इन्हीं परिस्थितियों में उत्तर प्रदेश को बीमारू कहा जाने लगा। अर्थव्यवस्था, रोजगार, तकनीक और कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन सहित विभिन्न क्षेत्रों में चुनौतियां खड़ी थीं। 2017 के बाद इन परिस्थितियों को बदलते हुए प्रदेश को आगे बढ़ाने का काम किया गया।

    तकनीक बनी आधुनिक पुलिसिंग का आधार
    सीएम योगी ने कहा कि पुलिस सुधारों के साथ तकनीक का समावेश भी आवश्यक है। सेफ सिटी के लक्ष्य के तहत प्रदेश के शहरों में 14 लाख से अधिक कैमरे लगाए गए हैं। ये कैमरे घटनाओं की रोकथाम और उनके अनावरण में भूमिका निभा रहे हैं। जिलों में इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर स्थापित किए गए हैं। विचार और व्यवहार के साथ जब तकनीक जुड़ती है तो उसके परिणाम भी सामने आते हैं। आज यूपी पुलिस की पहचान में यह बदलाव दिखाई देता है।

    सुनील कुमार सिंह की वीरता को नमन
    मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश पुलिस के एसटीएफ से जुड़े जांबाज इंस्पेक्टर स्वर्गीय सुनील कुमार सिंह की वीरता को नमन किया। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने उनकी वीरता के लिए उन्हें कीर्ति चक्र से सम्मानित किया है और यूपी पुलिस को पहली बार यह गौरव प्राप्त हुआ है। सुनील कुमार सिंह ने 22 जनवरी, 2025 को आमने-सामने की मुठभेड़ में चार दुर्दांत अपराधियों को मार गिराया था। इस दौरान वह अपराधियों की गोलियों से गंभीर रूप से घायल हुए और बाद में उनका बलिदान हुआ। मुख्यमंत्री ने उनकी धर्मपत्नी एवं परिवार के सदस्यों को सम्मानित करते हुए उनकी स्मृति को नमन किया। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में 16 पुलिस अधिकारियों एवं कार्मिकों को राष्ट्रपति के वीरता पुरस्कार तथा 10 पुलिस अधिकारियों एवं कार्मिकों को मुख्यमंत्री वीरता पदक से सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने सभी वीर पुलिसकर्मियों को बधाई दी।

    सड़क सुरक्षा के लिए 87 इंटरसेप्टर वाहन
    मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क सुरक्षा प्रदेश के सामने बड़ी चुनौती है। कोविड के ढाई-तीन वर्षों में प्रदेश में लगभग 24 हजार लोगों की मृत्यु हुई थी, जबकि सड़क दुर्घटनाओं में हर वर्ष 23-24 हजार लोगों की जान चली जाती है। इसे तकनीक और प्रभावी प्रवर्तन के माध्यम से नियंत्रित किया जा सकता है। इसी उद्देश्य से अत्याधुनिक उपकरणों से सुसज्जित 87 इंटरसेप्टर वाहनों को उत्तर प्रदेश पुलिस को समर्पित किया गया है। सड़क सुरक्षा नियमों का उल्लंघन केवल एक व्यक्ति को प्रभावित नहीं करता, बल्कि उसका प्रभाव पूरे परिवार और अंततः समाज पर पड़ता है। ये इंटरसेप्टर वाहन विभिन्न जनपदों में सड़क सुरक्षा के मानकों के अनुपालन और यातायात नियमों के प्रभावी प्रवर्तन में योगदान देंगे।

    इस अवसर पर  समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण, उत्तर प्रदेश पुलिस के पूर्व महानिदेशक प्रकाश सिंह, उत्तर प्रदेश पुलिस के महानिदेशक राजीव कृष्ण, अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद, स्वामी धर्मबंधु, प्रभात प्रकाशन से पवन अग्रवाल और उत्तर प्रदेश पुलिस के वरिष्ठ अधिकारीगण,  कार्मिकगण व उनके परिजन उपस्थित रहे।

  • यूपी पुलिस के बेड़े में शामिल हुए 87 नए इंटरसेप्टर वाहन

    यूपी पुलिस के बेड़े में शामिल हुए 87 नए इंटरसेप्टर वाहन

    यूपी पुलिस के बेड़े में शामिल हुए 87 नए इंटरसेप्टर वाहन
     
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 25 चार-पहिया और 62 दो-पहिया वाहनों को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना
     
    प्रदेश में अब 35 चार-पहिया और 137 दो-पहिया इंटरसेप्टर वाहन, यातायात नियम तोड़ने वालों पर होगी कार्रवाई
     
    आठ माह में सड़क दुर्घटनाओं में सात और मृतकों की संख्या में आठ प्रतिशत की कमी
     
    75 जिलों के 700 सर्वाधिक दुर्घटना-बाहुल्य थाना क्षेत्रों में 801 विशेष टीमें कर रहीं निगरानी
     
     लखनऊ

     सड़क हादसों में कमी लाने और यातायात नियमों का सख्ती से पालन कराने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस के बेड़े में गुरुवार को 87 नए इंटरसेप्टर वाहन शामिल हो गए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 25 चार-पहिया और 62 दो-पहिया इंटरसेप्टर वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसके साथ ही प्रदेश में इंटरसेप्टर वाहनों की संख्या बढ़कर 172 हो गई है। इनमें 35 चार-पहिया और 137 दो-पहिया वाहन हैं।
     
    नए इंटरसेप्टर वाहनों से तेज रफ्तार, नशे में वाहन चलाने, काली फिल्म, प्रेशर हॉर्न और रैश ड्राइविंग जैसे यातायात नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई में मदद मिलेगी। इनमें स्पीड लेजर गन, ब्रेथ एनालाइजर, टिंट मीटर और डेसिबल मीटर जैसे उपकरण हैं। जरूरत पड़ने पर इन वाहनों का इस्तेमाल ट्रैफिक रिस्पॉन्स व्हीकल के रूप में भी किया जा सकेगा।
     
    700 दुर्घटना-बाहुल्य थाना क्षेत्रों पर नजर

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर डीजीपी राजीव कृष्ण के नेतृत्व में शुरू की गई जीरो फैटेलिटी डिस्ट्रिक्ट (ZFD) योजना सभी 75 जिलों के 700 सर्वाधिक दुर्घटना-बाहुल्य थाना क्षेत्रों तक पहुंच चुकी है। इसके तहत 801 विशेष टीमों में करीब 3,500 पुलिसकर्मियों को लगाया गया है। ये टीमें क्रिटिकल कॉरिडोर और ब्लैक स्पॉट पर नियमित पेट्रोलिंग, निगरानी और यातायात नियमों का पालन करा रही हैं।
     
    पिछले आठ माह में प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं में करीब सात प्रतिशत और मृतकों की संख्या में करीब आठ प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। इस अवधि में करीब 1,107 लोगों की जान बचाई गई।
     
    109 मार्गों पर रियल टाइम निगरानी
    शहरों में जाम की समस्या से निपटने के लिए RTC योजना के तहत 20 प्रमुख जिलों के 109 मार्गों की UP GATI प्लेटफॉर्म से रियल टाइम निगरानी की जा रही है। रूट मार्शल और संबंधित विभाग जाम के कारणों की पहचान कर मौके पर कार्रवाई करते हैं। मार्च 2026 में इन मार्गों पर 16,723 कंजेशन पॉइंट दर्ज किए गए थे, जो अगस्त तक घटकर 8,569 रह गए। इस तरह करीब 49 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।
     
    कैमरों से निगरानी, नियम तोड़ने पर ई-चालान
    यातायात व्यवस्था की निगरानी के लिए ITMS और Safe City कैमरा नेटवर्क की भी मदद ली जा रही है। ANPR के साथ रेड लाइट और गति सीमा के उल्लंघन की पहचान करने वाले कैमरों तथा कमांड सेंटर की लाइव फीड से यातायात पर नजर रखी जाती है। जरूरत पड़ने पर जाम और भीड़ वाले इलाकों में ड्रोन से भी निगरानी की जाती है। कैमरों और फील्ड टीमों से मिली जानकारी के आधार पर नियम तोड़ने वालों के ई-चालान के साथ मौके पर भी कार्रवाई की जा रही है।

  • CM योगी ने वीरता पदक से सम्मानित किए पुलिसकर्मी, शहीद इंस्पेक्टर की पत्नी को भी सम्मान

    CM योगी ने वीरता पदक से सम्मानित किए पुलिसकर्मी, शहीद इंस्पेक्टर की पत्नी को भी सम्मान

    अदम्य साहस व कर्तव्यनिष्ठा का प्रदर्शन करने वाले पुलिसकर्मियों को सम्मानित किया सीएम योगी ने

    वीरता पदक से अलंकृत किया पुलिसकर्मियों को, शहीद निरीक्षक सुनील कुमार की पत्नी को किया सम्मानित

    यूपी के पूर्व पुलिस महानिदेशक प्रकाश सिंह की पुस्तक ‘संघर्ष’ का विमोचन भी किया मुख्यमंत्री ने

    लखनऊ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने  अदम्य साहस, शौर्य और कर्तव्यनिष्ठा का प्रदर्शन करने वाले पुलिसकर्मियों को वीरता पदक प्रदान कर उन्हें सम्मानित किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक प्रकाश सिंह की पुस्तक ‘संघर्ष’ का विमोचन भी किया। 

    पुलिस सेवा में सर्वोच्च बलिदान को नमन करते हुए मुख्यमंत्री ने एसटीएफ के शहीद निरीक्षक सुनील कुमार की पत्नी मुनेश देवी को नगद धनराशि एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया। निरीक्षक सुनील कुमार ने 20 जनवरी 2025 को शामली के झिंझाना क्षेत्र में हुई मुठभेड़ में चार अपराधियों को मार गिराने में अदम्य साहस का परिचय दिया था। कर्तव्य पालन करते हुए उन्होंने वीरगति प्राप्त की थी। स्वतंत्रता दिवस 2026 के अवसर पर उन्हें मरणोपरांत कीर्ति चक्र से सम्मानित किए जाने की घोषणा भी की गई।

    गणतंत्र दिवस 2025 के अवसर पर घोषित वीरता पदक
    1. देवदत्त सिंह – आरक्षी, नागरिक पुलिस, एसटीएफ
    2. राजन कुमार – आरक्षी, नागरिक पुलिस, एसटीएफ
    3. रितुल कुमार वर्मा – आरक्षी, नागरिक पुलिस, एसटीएफ
    4. निपुण अग्रवाल, आईपीएस – सेनानायक, नवमी वाहिनी पीएसी, मुरादाबाद

    5. स्वतंत्र कुमार सिंह – अपर पुलिस उपायुक्त, कमिश्नरेट गौतमबुद्धनगर
    6. मुन्ने सिंह – उपनिरीक्षक, नागरिक पुलिस, मेरठ
    7. नीरज कुमार पाल – आरक्षी, नागरिक पुलिस, कमिश्नरेट गाजियाबाद
    8. अशोक कुमार मीणा, आईपीएस – पुलिस अधीक्षक, हरदोई
    9. कुलदीप कुमार – पुलिस उपाधीक्षक, जनपद संभल
    10. गीतेश कपिल – निरीक्षक, नागरिक पुलिस, शाहजहांपुर
    11. प्रवीण अहलावत – आरक्षी, नागरिक पुलिस, जनपद सहारनपुर
    12. अमित – निरीक्षक, नागरिक पुलिस, एसटीएफ
    13. अंगद सिंह यादव – उपनिरीक्षक, नागरिक पुलिस, एसटीएफ
    14. डॉ. दीक्षा शर्मा – पुलिस उपायुक्त, कमिश्नरेट लखनऊ
    15. संदीप कुमार – आरक्षी, नागरिक पुलिस, कमिश्नरेट गाजियाबाद
    16. रिपुदमन सिंह – निरीक्षक, नागरिक पुलिस

    गणतंत्र दिवस 2026 के अवसर पर घोषित वीरता पदक
    1. धर्मेंद्र सिंह राठौर – निरीक्षक, नागरिक पुलिस, बुलंदशहर
    2. केशव शांडिल्य – उपनिरीक्षक, एसटीएफ
    3. राहुल कुमार – मुख्य आरक्षी, नागरिक पुलिस, एसटीएफ
    4. अजय कुमार वर्मा – उपनिरीक्षक, नागरिक पुलिस, जनपद मथुरा
    5. घनश्याम यादव – निरीक्षक, नागरिक पुलिस, एसटीएफ
    6. अवनीश कुमार त्यागी – उपनिरीक्षक, नागरिक पुलिस, जनपद मैनपुरी
    7. अमित त्रिपाठी – आरक्षी, नागरिक पुलिस, एसटीएफ
    8. अमित – निरीक्षक, नागरिक पुलिस, एसटीएफ
    9. मनीष बिष्ट – निरीक्षक, नागरिक पुलिस, कमिश्नरेट गाजियाबाद
    10. रणधीर सिंह – मुख्य आरक्षी, नागरिक पुलिस, एसटीएफ

  • PUC नहीं तो फ्यूल नहीं! दिल्ली के 500 पेट्रोल पंप पर आज से नया नियम लागू

    PUC नहीं तो फ्यूल नहीं! दिल्ली के 500 पेट्रोल पंप पर आज से नया नियम लागू

     नई दिल्ली
    दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने का दौर शुरू होने से पहले सरकार ने कुछ नए कदम उठाए हैं. इनमें सबसे अहम है 'नो पॉल्यूशन सर्टिफिकेट, नो फ्यूल' नियम. इसके तहत अगर आपकी गाड़ी के पास वैध PUC (पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट) नहीं है, तो पेट्रोल पंप पर आपको फ्यूल नहीं दिया जाएगा। 

    इस नियम को लागू करने के लिए दिल्ली के करीब 500 पेट्रोल पंप पर ऑटोमैटिक सिस्टम लगाया गया है. इन पेट्रोल पंप पर कैमरे लगाए गए हैं. ये कैमरे परिवहन के डेटाबेस से जुड़े हैं. सिस्टम गाड़ी का नंबर स्कैन करके यह पता करता है कि उसका PUC वैध है या नहीं। 

    जैसे ही बिना वैध PUC वाली गाड़ी पेट्रोल पंप पर पहुंचती है, सिस्टम उसका नंबर पहचान लेता है. इसके बाद ऑटोमैटिक अनाउंसमेंट होता है. इसमें गाड़ी के नंबर के साथ बताया जाता है कि उसके पास वैध पॉल्यूशन सर्टिफिकेट नहीं है. ऐसी गाड़ी को तुरंत ईंधन देने से रोक दिया जाता है. यानी पेट्रोल या डीजल लेने से पहले वाहन मालिक को PUC बनवाना होगा। 

    पेट्रोल पंप पर ही PUC बनवाने की सुविधा
    सरकार ने वाहन मालिकों के लिए एक ऑप्शन भी रखा है. कई पेट्रोल पंप पर PUC बनवाने वाले कियोस्क लगाए गए हैं. अगर किसी वाहन का PUC वैध नहीं है, तो वह वहीं अपना प्रदूषण सर्टिफिकेट बनवा सकता है. इसके बाद वाहन में ईंधन भरवाया जा सकता है. यानी वाहन मालिक को PUC बनवाने के लिए अलग जगह जाने की जरूरत नहीं होगी। 

    अगर वाहन मालिक के पास PUC नहीं है, तो उसे इसे बनवाने के लिए कुछ समय दिया जा सकता है. लेकिन अगर तय समय के बाद भी वाहन का प्रदूषण प्रमाणपत्र नहीं बनवाया गया, तो कार्रवाई हो सकती है. ऐसी गाड़ियों पर करीब ₹10 हजार तक का चालान लगाया जा सकता है। 

    दरअसल, दिल्ली में हर साल सर्दियों के दौरान प्रदूषण बड़ी समस्या बन जाता है. तापमान गिरने के साथ हवा की गुणवत्ता भी खराब होने लगती है. ऐसे में सरकार ने इस बार प्रदूषण बढ़ने से पहले ही कुछ कदम लागू किए हैं. अब करीब 500 पेट्रोल पंप पर यह सिस्टम काम कर रहा है. कैमरे, परिवहन डेटाबेस और ऑटोमैटिक अनाउंसमेंट के जरिए नियम लागू किया जा रहा है। 
    हालांकि, बड़ा सवाल यह है कि ऐसे कदमों से दिल्ली के प्रदूषण में कितना फर्क पड़ेगा. आने वाले दिनों में इसका असर साफ होगा. फिलहाल सरकार की कोशिश है कि बिना वैध PUC वाली गाड़ियों पर लगाम लगाई जाए और प्रदूषण को बढ़ने से पहले नियंत्रित किया जा सके। 

  • ‘अखिलेश से पूछिए, इंडी गठबंधन की बैठक में क्यों नहीं आए?’, ओपी राजभर का राहुल गांधी पर सीधा हमला

    ‘अखिलेश से पूछिए, इंडी गठबंधन की बैठक में क्यों नहीं आए?’, ओपी राजभर का राहुल गांधी पर सीधा हमला

    ‘अखिलेश से पूछिए, इंडी गठबंधन की बैठक में क्यों नहीं आए?’, ओपी राजभर का राहुल गांधी पर सीधा हमला

    इंडी गठबंधन की बैठक में नहीं पहुंचे अखिलेश तो राजभर ने राहुल से पूछा- ‘डिंपल या धर्मेंद्र को क्यों नहीं भेजा?’

    ‘अखिलेश ऑनलाइन भी जुड़ सकते थे’, इंडी गठबंधन की बैठक से दूरी पर राजभर ने घेरा

    'अखिलेश खुद नहीं गए तो डिंपल या धर्मेंद्र को भेज देते', इंडी गठबंधन की बैठक को लेकर राजभर का तीखा हमला

    ज्ञानेश कुमार पर विपक्ष के आरोपों को लेकर राजभर का राहुल पर हमला- ‘पहले चुनावों का इतिहास देखिए’

    ओपी राजभर की राहुल गांधी को नसीहत- ‘ज्ञानेश कुमार पर ऊर्जा बर्बाद करने के बजाय जनता के बीच जाइए’

    ‘आरोप-आरोप खेलते रहिए, आपस में लड़ते रहिए’, राहुल गांधी पर ओपी राजभर का तीखा हमला

    लखनऊ
    सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष और यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने गुरुवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। राजभर ने सोशल मीडिया पर राहुल गांधी को संबोधित करते हुए इंडी गठबंधन की बैठक में अखिलेश यादव की गैरमौजूदगी को लेकर सवाल उठाए हैं।

    राजभर ने कहा कि राहुल गांधी ने इंडी गठबंधन की बैठक की, लेकिन अखिलेश यादव बैठक में शामिल नहीं हुए। उन्होंने राहुल गांधी से कहा कि अपने दोस्त अखिलेश यादव से पूछिए कि वह ऐसा कौन सा काम कर रहे थे कि बैठक में नहीं आ सके।

    '6 अक्टूबर तक नामांकन था, कल ही जाने की क्या जल्दी थी'

    ओपी राजभर ने कहा कि राज्यसभा का नामांकन 6 अक्टूबर तक होना है। ऐसे में उन्होंने सवाल किया कि अखिलेश यादव के लिए पहले ही नामांकन करने की ऐसी क्या जल्दी थी। राजभर ने तंज कसते हुए कहा कि मान लिया कि उस दिन नामांकन नहीं होता तो अखिलेश यादव के लिए पहाड़ टूट जाता, लेकिन अगर खुद नहीं जाना था तो डिंपल यादव या धर्मेंद्र यादव को क्यों नहीं भेजा गया।

    राजभर ने कहा कि डिंपल यादव और धर्मेंद्र यादव भी नामांकन में नहीं थे। उन्होंने आगे सवाल उठाया कि अगर नामांकन इतना जरूरी था और अखिलेश यादव खुद नहीं आ सकते थे तो वह ऑनलाइन भी इंडी गठबंधन की बैठक से जुड़ सकते थे।

    'अखिलेश एसी में बैठक पीसी करके ठहाके लगा रहे थे'

    राजभर ने अपने पोस्ट में कहा कि जब राहुल गांधी दिल्ली में बैठक कर रहे थे, तब अखिलेश यादव ‘एसी में बैठक पीसी करके ठहाके लगा रहे थे।’ उन्होंने कहा कि कई नेता ऑनलाइन बैठक में जुड़े थे, ऐसे में अखिलेश यादव भी ऑनलाइन जुड़ सकते थे।

    ज्ञानेश कुमार को लेकर भी राहुल गांधी पर निशाना

    ओपी राजभर ने अपने पोस्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार फरवरी 2025 में मुख्य चुनाव आयुक्त बने हैं और बीजेपी के चुनावी इतिहास को देखा जाना चाहिए कि उनके पहले बीजेपी कितने चुनाव जीत चुकी है।

    राजभर ने कांग्रेस नेता अभिजीत दीपके के बयान का जिक्र करते हुए कहा कि वह कह रहे हैं कि ज्ञानेश कुमार ने बीजेपी को हरियाणा, महाराष्ट्र और दिल्ली जिता दिया। राजभर ने कहा कि उन्हें बताया जाना चाहिए कि इन तीनों राज्यों में चुनाव ज्ञानेश कुमार के मुख्य चुनाव आयुक्त बनने से पहले हो चुका था।

    उन्होंने अपने पोस्ट में 2014, 2019 और 2024 में बीजेपी की जीत का भी जिक्र किया और कहा कि उस समय ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त नहीं थे।

    'ज्ञानेश कुमार पर ऊर्जा बर्बाद करने की जगह जनता के बीच जाइए'

    ओपी राजभर ने राहुल गांधी को सलाह देते हुए कहा कि ज्ञानेश कुमार पर अपनी ऊर्जा बर्बाद करने की जगह जनता के बीच जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता के बीच जाने पर ही जीत की कुछ संभावना बनेगी। राजभर ने कहा कि अगर ऐसा नहीं किया गया तो विपक्ष आरोप-आरोप का खेल खेलता रहेगा, आपस में लड़ता रहेगा और विपक्ष में बैठे रहने के अलावा कुछ हासिल नहीं होगा।

  • रायबरेली सिविल कोर्ट में फर्जी वकीलों पर कसेगा शिकंजा, बिना C.O.P. प्रवेश पर सख्ती

    रायबरेली सिविल कोर्ट में फर्जी वकीलों पर कसेगा शिकंजा, बिना C.O.P. प्रवेश पर सख्ती

     रायबरेली
    उत्तर प्रदेश के रायबरेली सिविल कोर्ट परिसर में वकीलों की पहचान और अनुशासन को लेकर सेंट्रल बार एसोसिएशन ने सख्त रुख अपनाया है। एसोसिएशन की ओर से जारी सूचना में बिना सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस (C.O.P.) के वकीलों की निर्धारित ड्रेस में कोर्ट परिसर में प्रवेश करने वालों को चेतावनी दी गई है। नियमों का उल्लंघन करने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ विधिक कार्रवाई की बात कही गई है। सेंट्रल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेश चंद्र यादव और महामंत्री संजय प्रताप सिंह 'कछवाह' की ओर से जारी सूचना में कहा गया है कि जिन लोगों के पास सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस (C.O.P.) नहीं है, वे वकीलों की निर्धारित पोशाक पहनकर न्यायालय परिसर में प्रवेश न करें। एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।

    फर्जी वकीलों पर कार्रवाई को लेकर सख्ती
    बार एसोसिएशन के इस कदम को कोर्ट परिसर में वकीलों की पहचान और पेशेवर अनुशासन से जोड़कर देखा जा रहा है। एसोसिएशन की ओर से जारी चेतावनी के बाद ऐसे लोगों पर निगरानी बढ़ने की संभावना है, जो बिना वैध दस्तावेजों के खुद को अधिवक्ता के तौर पर पेश करते हैं। कोर्ट परिसर में आने वाले लोगों के लिए अधिवक्ता की पहचान और वैध दस्तावेजों को लेकर स्पष्टता बनाए रखना इस तरह के निर्देशों का प्रमुख उद्देश्य है। 

    कचहरी परिसर में चर्चा का विषय बना नोटिस
    सेंट्रल बार एसोसिएशन की ओर से जारी सख्त सूचना के बाद रायबरेली कचहरी परिसर में इसे लेकर चर्चा तेज हो गई है। नोटिस में नियमों के पालन पर जोर देते हुए स्पष्ट किया गया है कि कोर्ट परिसर में अधिवक्ता की निर्धारित ड्रेस का इस्तेमाल नियमों के अनुरूप ही किया जाए। एसोसिएशन के इस कदम से न्यायालय परिसर में पेशेवर पहचान और अनुशासन को लेकर निगरानी बढ़ने की उम्मीद है।

    नियम तोड़ने पर विधिक कार्रवाई की चेतावनी
    एसोसिएशन ने अपने निर्देश में साफ किया है कि C.O.P. के बिना निर्धारित अधिवक्ता ड्रेस में कोर्ट परिसर में प्रवेश करने वालों के खिलाफ सख्त विधिक कार्रवाई की जा सकती है। अब इस निर्देश के लागू होने के बाद कोर्ट परिसर में ऐसे लोगों की पहचान और उनके खिलाफ कार्रवाई किस तरह की जाती है, इस पर नजर रहेगी।

  • शाहजहांपुर में डबल मर्डर, मंदिर में दो साधुओं को जिंदा जलाने का आरोप

    शाहजहांपुर में डबल मर्डर, मंदिर में दो साधुओं को जिंदा जलाने का आरोप

     शाहजहांपुर
    यूपी के शाहजहांपुर से रात दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई। गांव के पश्चिम में स्थित हनुमान मंदिर में रहकर पूजा-पाठ करने वाले दो वृद्धों की तख्त से बांधकर जिंदा जला देने से मौत हो गई। वारदात रात करीब एक बजे की बताई जा रही है। मृतकों की पहचान गोपाल दास और बड़े दास के रूप में हुई है। बड़े दास दिव्यांग बताए गए हैं।

    शुरुआती जानकारी के मुताबिक, मंदिर की जमीन पर कब्जे को लेकर विवाद चल रहा था। इसी विवाद में सुमित सिंह नाम के युवक पर दोनों वृद्धों के साथ मारपीट करने, उन्हें अलग-अलग तख्त से बांधने और मंदिर परिसर और आसपास से लकड़ियां जुटाकर आग लगाने का आरोप है। बताया जा रहा है कि मंदिर सुमित के परिवार की जमीन पर बना है और वह उस पर कब्जा करना चाहता था। दोनों वृद्ध मंदिर में रहकर पूजा-पाठ करने के साथ उसकी देखभाल भी करते थे। इसी बात को लेकर पहले से विवाद होने की जानकारी सामने आई है। आरोप है कि बुधवार रात सुमित गांव में घूमते हुए पहले काल सिंह स्थान पर पहुंचा और वहां लाइट तोड़ने के बाद हनुमान मंदिर गया। यहां दोनों वृद्धों से उसका विवाद हुआ। इसके बाद उसने कथित तौर पर दोनों के साथ मारपीट की और उन्हें तख्त से बांधकर आग लगा दी। आग में झुलसने से दोनों की मौत हो गई।

    दो महीने पहले जेल से छूटकर आया था आरोपी
    ग्रामीणों के मुताबिक, आरोपी सुमित सिंह करीब दो महीने पहले जेल से छूटकर आया था। उसके खिलाफ एससी-एसटी एक्ट और कार जलाने समेत कई मामलों में मुकदमे दर्ज होने की जानकारी है। उस पर पूर्व में आगजनी की घटनाओं में शामिल रहने के आरोप भी लगाए जाते रहे हैं। बताया जा रहा है कि उसके पिता का नाम भी हिस्ट्रीशीटर के रूप में सामने आता रहा है। हालांकि, आरोपी के आपराधिक रिकॉर्ड और वारदात के पीछे की वास्तविक वजह की आधिकारिक पुष्टि पुलिस की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

    दो वृद्धों को मंदिर परिसर में बांधकर जिंदा जलाने की घटना से गांव में सनसनी फैल गई। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। वारदात में इस्तेमाल किए गए तरीके, जमीन के विवाद की पृष्ठभूमि और आरोपी की भूमिका की पड़ताल की जा रही है।

    मंदिर की जमीन को लेकर पुराना विवाद
    गांव के पश्चिम में स्थित हनुमान मंदिर में दोनों वृद्ध लंबे समय से रहकर पूजा-पाठ और देखभाल करते थे। बताया जा रहा है कि मंदिर सुमित के परिवार की जमीन पर बना है। इसी जमीन पर कब्जे को लेकर विवाद चल रहा था। पुलिस जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि विवाद की तत्काल वजह क्या थी और वारदात से पहले आरोपियों व मृतकों के बीच क्या हुआ।

    दो महीने पहले जेल से छूटने की जानकारी
    ग्रामीणों के अनुसार, सुमित सिंह करीब दो महीने पहले जेल से बाहर आया था। उसके खिलाफ कार जलाने और एससी-एसटी एक्ट समेत कई मुकदमे दर्ज होने की जानकारी दी गई है। उस पर पहले भी आगजनी की घटनाओं में शामिल रहने के आरोप हैं।

  • CM योगी का संदेश- शिव की तरह विषम हालात में भी करें लोक कल्याण

    CM योगी का संदेश- शिव की तरह विषम हालात में भी करें लोक कल्याण

    गोरखपुर
    गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर में राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 12वीं पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने उनके जीवन और आदर्शों को याद किया।  आयोजित समारोह में सीएम योगी ने कहा कि जिस महापुरुष या आराध्य का हम गुणगान करते हैं, उसके आदर्शों के अनुरूप जीवन जीने का प्रयास भी करना चाहिए। 

    मुख्यमंत्री ने भगवान शिव का उदाहरण देते हुए कहा कि विषम और सम परिस्थितियों में खुद को एक समान रखते हुए निश्छल भाव से समाज और लोक कल्याण के लिए कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भगवान शिव ने विषम परिस्थितियों में विष को अपने कंठ में धारण किया, इसलिए उन्हें नीलकंठ कहा जाता है।

    शिवत्व का अर्थ समाज और लोक कल्याण का मार्ग प्रशस्त करना
    सीएम योगी ने कहा कि समाज की विसंगतियों को अपने भीतर समाहित कर समाज और लोक कल्याण के लिए आदर्श स्थापित करना ही शिवत्व है। उन्होंने कहा कि जीवन में परिस्थितियां कैसी भी हों, व्यक्ति को अपने लक्ष्य और कर्तव्य के प्रति स्थिर रहना चाहिए। मुख्यमंत्री ने ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ महाराज और महंत अवेद्यनाथ महाराज की पुण्यस्मृतियों को नमन करते हुए कहा कि दोनों संतों के जीवन से स्थिरता और संकल्प की प्रेरणा मिलती है। 

    महंत दिग्विजयनाथ और अवेद्यनाथ के जीवन से मिलती है प्रेरणा
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जीवन में सिद्धि का सबसे बड़ा मंत्र स्थिरता है। स्थिरता का भाव व्यक्ति को आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि दोनों संतों के जीवन चरित्र का अध्ययन करने पर समाज और राष्ट्र के प्रति समर्पण की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने महंत अवेद्यनाथ के जीवन को उनके गुरु महंत दिग्विजयनाथ के आदर्शों और मूल्यों का विस्तार बताया। साथ ही कहा कि समाज में जब विसंगतियां पैदा होती हैं तो उनका परिमार्जन करने का सामर्थ्य समाज में होना चाहिए।

    गोरक्षपीठ में सात दिवसीय श्रद्धांजलि समारोह का समापन
    गोरखनाथ मंदिर में महंत दिग्विजयनाथ की 57वीं और महंत अवेद्यनाथ की 12वीं पुण्यतिथि के अवसर पर 24 से 30 सितंबर तक साप्ताहिक श्रद्धांजलि समारोह आयोजित किया गया। इसके अंतिम दिन महंत अवेद्यनाथ की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा हुई। कार्यक्रम में देशभर से संत-धर्माचार्यों और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने भी सहभागिता की। समारोह के दौरान महंतद्वय के सामाजिक, धार्मिक और लोक कल्याण से जुड़े कार्यों को याद किया गया।