Category: उत्तर प्रदेश

  • दिनेश प्रताप सिंह का पलटवार-‘अखिलेश यादव ने लाल रंग को भय का प्रतीक बना दिया’

    दिनेश प्रताप सिंह का पलटवार-‘अखिलेश यादव ने लाल रंग को भय का प्रतीक बना दिया’

    लखनऊ

    समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के लाल-हरे रंग वाले बयान पर पलटवार करते हुए उत्तर प्रदेश के मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि भारतीय संस्कृति में रंगों का महत्व जरूर है, लेकिन राजनीति और जनसेवा में रंग नहीं, बल्कि जनता की सेवा मायने रखती है। उन्होंने कहा कि कोई सफेद, हरा या लाल कपड़ा पहनकर अथवा भगवा झंडा लेकर भी जनता की सेवा कर सकता है, लेकिन सवाल यह है कि जनता की बेहतर सेवा कौन कर रहा है। हालाँकि अखिलेश यादव ने लाल रंग को भय का प्रतिक बना दिया है। 

    दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा ‘सबका साथ, सबका विकास’ पर आधारित है और पार्टी के लिए हर भारतीय नागरिक समान है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इसी भावना के साथ काम कर रहे हैं। मंत्री ने दावा किया कि देश सुरक्षित है, देशवासियों की मेहनत की कमाई सुरक्षित है और देश का सम्मान सुरक्षित है। मंत्री ने कहा की प्रदेश में पहले क्या होता था यह जानते है और आज योगी आदित्यनाथ की सरकार लोग अमन चैन से सर उठाकर जी रहे है।

    रैलियों की अनुमति के आरोपों पर भी पलटवार

    अखिलेश यादव की ओर से राजनीतिक कार्यक्रमों की अनुमति नहीं मिलने के आरोपों पर दिनेश प्रताप सिंह ने इसे मिथ्या आरोप बताया। उन्होंने रायबरेली का उदाहरण देते हुए कहा कि अखिलेश यादव वहां बैठक करने आए थे और उन्हें न किसी ने रोका और न ही किसी ने पूछा। उन्होंने कहा कि किसी कार्यक्रम का न होना संबंधित दल के अपने कारण हो सकते हैं, लेकिन इसका सरकार से कोई लेना-देना नहीं है। 

    PDA पर बोले-‘डिवाइड एंड रूल’ की राजनीति कर रहे अखिलेश

    दिनेश प्रताप सिंह ने PDA की राजनीति पर सीधे अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि ‘डिवाइड एंड रूल’ यानी ‘बांटो और राज करो’ की नीति लोकतंत्र और समाज सेवा के लिए उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि समाज के कुछ हिस्से को ‘हमारे’ और कुछ को ‘हमारे नहीं’ बताकर राजनीति करना उसी सोच को दर्शाता है।

    दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि अखिलेश यादव इसी तरह समाज को हिस्सों में बांटकर राजनीति कर रहे हैं। इसके विपरीत भाजपा ‘सबका साथ, सबका विकास’ के आधार पर सभी की सेवा और सम्मान की बात करती है। उन्होंने कहा कि भाजपा समाज को बांटकर सत्ता हासिल करने के बजाय सभी की सेवा के जरिए जनता का समर्थन हासिल करने में विश्वास रखती है।

  • मुश्किल घड़ी में ‘अभिभावक’ बनी योगी सरकार,  वाराणसी के 11,219 परिवारों को 191 करोड़ से अधिक की मदद

    मुश्किल घड़ी में ‘अभिभावक’ बनी योगी सरकार, वाराणसी के 11,219 परिवारों को 191 करोड़ से अधिक की मदद

    *वाराणसी

     बीमारी जब दरवाजे पर दस्तक देती है, तो सिर्फ शरीर नहीं, पूरा घर टूटने लगता है। जमा-पूंजी खत्म होती है, कर्ज का बोझ बढ़ता है और कई बार अपने भी हाथ खड़े कर देते हैं। ऐसे कठिन वक्त में योगी सरकार एक संवेदनशील अभिभावक की तरह जरूरतमंद परिवारों के साथ खड़ी दिख रही है। वाराणसी में मई 2017 से 8 सितंबर 2026 तक मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से 11,219 लाभार्थियों को 191 करोड़ 11 लाख 58 हजार 416 की आर्थिक सहायता स्वीकृत की गई है। यह मदद इलाज की राह में खड़ी पैसों की दीवार को गिराकर परिवारों को नई उम्मीद दे रही है।

    संकट में सरकार का बड़ा सहारा

    गंभीर बीमारी या आकस्मिक दुर्घटना के समय आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के सामने इलाज का खर्च जुटाना सबसे बड़ी चुनौती होती है। दवाएं, जांच, ऑपरेशन, अस्पताल में भर्ती और उसके बाद की देखभाल का खर्च कई बार परिवार को कर्ज लेने या संपत्ति बेचने तक की स्थिति में पहुंचा देता है। उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य और चिकित्सा व्यवस्था को दुरुस्त करने के साथ-साथ सरकार मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से गंभीर बीमारियों से पीड़ित पात्र लोगों को आर्थिक सहायता उपलब्ध करा रही है। इससे परिवार अपने प्रियजनों का समय पर उपचार करा पा रहे हैं। आकस्मिक दुर्घटनाओं और अन्य आपात परिस्थितियों में भी सरकार त्वरित मदद देकर परिवारों का संकट कम करने का प्रयास कर रही है। अपर जिलाधिकारी (प्रोटोकॉल) विनय कुमार सिंह ने बताया कि वाराणसी में मई 2017 से 8 सितंबर 2026 तक कोष से कुल 11,219 लाभार्थियों को 1,91,11,58,416  रुपये की वित्तीय सहायता स्वीकृत की गई है। उन्होंने कहा कि यह सहायता गंभीर बीमारी और आकस्मिक परिस्थितियों में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के प्रति सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाती है।

    बीमारी और आर्थिक लड़ाई में खड़ी योगी सरकार

    मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष कैंसर, हृदय रोग, किडनी रोग और ब्रेन ट्यूमर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज, आकस्मिक दुर्घटना या परिवार के कमाने वाले सदस्य की मृत्यु की स्थिति में पीड़ित और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को तुरंत राहत पहुंचाता है। जिन परिवारों की आय किसी एक सदस्य पर निर्भर होती है, उनके लिए यह व्यवस्था और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। यह सहायता केवल गंभीर बीमारियों तक सीमित नहीं है। आकस्मिक दुर्घटना अथवा अन्य गंभीर परिस्थितियों में भी पात्र जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है।

    समय पर मदद, यही असली राहत

    जिला प्रशासन का जोर इस पर है कि सहायता पात्र व्यक्ति तक समय पर पहुंचे। आवेदन, सत्यापन, संस्तुति और स्वीकृति की प्रक्रिया जितनी सरल और समयबद्ध होगी, मदद का असर उतना ही बड़ा होगा। जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने कहा कि जिला प्रशासन का प्रयास है कि पात्र जरूरतमंदों को सरकार की इस महत्वपूर्ण व्यवस्था का लाभ समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराया जाए, ताकि संकट की घड़ी में उन्हें आवश्यक राहत मिल सके।

    जिनकी जिंदगी में लौटी उम्मीद

    केस-1: जैतपुरा के बुनकर परिवार को मिला सहारा

    जैतपुरा के बुनकर परिवार के एक सदस्य ने बताया कि उनके 54 वर्षीय पिता गंभीर बीमारी से पीड़ित थे और इलाज के लिए पैसों की सख्त जरूरत थी। सरकार से मदद मांगी तो मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से तुरंत आर्थिक सहायता मिल गई। इससे पिता का इलाज हो सका और उनकी जान बच गई। उन्होंने कहा कि गरीब परिवारों के लिए यह मदद बहुत बड़ा सहारा है।

    केस-2: ऑपरेशन सफल, पत्नी की सेहत में सुधार

    पिंडरा तहसील के पुआरी कला गांव के ऑटो चालक अरविंद कुमार की पत्नी शिल्पी ब्रेन ट्यूमर से पीड़ित हैं। ऑपरेशन और उपचार का खर्च परिवार की क्षमता से बाहर था। कोष से मिली सहायता से ऑपरेशन सफलतापूर्वक हो गया और अब शिल्पी की सेहत में सुधार हो रहा है। अरविंद ने कहा कि सरकारी मदद से उन्हें बड़ी राहत मिली है।

    केस-3: उधार के इलाज को मिला 'जीवन की डोर' का सहारा

    भोजूबीर निवासी एक किसान की पत्नी कैंसर से जूझ रही थीं। शुरुआत में परिवार ने उधार लेकर इलाज कराया, फिर कोष की जानकारी मिली और इलाज के लिए बड़ी आर्थिक मदद मिली। 47 वर्षीय मरीज के पति ने कहा कि यह सहायता न मिलती तो इलाज जारी रखना मुश्किल हो जाता। उनके लिए मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष मुश्किल समय में सहारा और जीवन की डोर बन गया।

  • यूपी में गुंडई की पहचान है सपा की लाल टोपी : दयाशंकर सिंह

    यूपी में गुंडई की पहचान है सपा की लाल टोपी : दयाशंकर सिंह

    लखनऊ

    समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के लाल-हरे रंग वाले बयान पर तीखा पलटवार करते हुए उत्तर प्रदेश के परिवहन मंत्री (राज्य मंत्री-स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने लाल टोपी को उत्तर प्रदेश में गुंडई का प्रतीक बताया। मंत्री ने कहा कि सपा कार्यकर्ताओं को लाल टोपी में देखकर लोगों के मन में भय पैदा होता है। वहीं, भगवा रंग को उन्होंने समृद्धि का प्रतीक बताया और कहा कि अब अखिलेश यादव भी लाल रंग छोड़कर अपने रथ को भगवा कर रहे हैं।

    पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव के प्रति कथित नाराजगी और चौधरी चरण सिंह की लगातार तारीफ पर दयाशंकर सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय लोकदल के साथ हालिया बयानबाजी के बाद समाजवादी पार्टी को जाट समाज की नाराजगी का एहसास हुआ है। मंत्री के मुताबिक, चौधरी चरण सिंह का नाम लेकर इस नाराजगी को लगातार शांत करने की भरपूर कोशिश की जा रही है, लेकिन जाट समाज कथित अपमान को आसानी से भूलेगा नहीं।

    अखिलेश यादव की ओर से पत्रकारों के लगातार अपमान और समाजवाद को पढ़ने की सलाह दिए जाने पर भी मंत्री दयाशंकर सिंह ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि समाजवाद का पाठ पहले अखिलेश यादव को पढ़ना चाहिए, क्योंकि समाजवादी पार्टी जिस विचारधारा के साथ बनी थी, उससे वह भटक गई है। दयाशंकर सिंह ने कहा कि नेताजी मुलायम सिंह यादव ने कांग्रेस के खिलाफ समाजवादी पार्टी बनाई थी। लोकतांत्रिक संघर्ष के दौरान डंडे खाए, लाठियां खाईं और जेल गए।

    दयाशंकर सिंह ने कहा कि जिस पार्टी को मुलायम सिंह यादव ने अपने संघर्ष और त्याग से खड़ा किया, आज उनके बेटे अखिलेश यादव सत्ता पाने की लालसा में उसकी मान-मर्यादा और मूल विचारधारा को कांग्रेस की गोद में बैठाकर खत्म कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि मुलायम सिंह यादव ने जिस विचारधारा और संघर्ष की जमीन पर सपा खड़ी की थी, आज उसी पार्टी को कांग्रेस के साथ क्यों ले जाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी को अखिलेश यादव कांग्रेस की गोद में बिठा रहे हैं।

  • योगी सरकार का उपभोक्ताओं को बड़ा तोहफा, लगातार चौथे महीने बिजली बिल में राहत

    योगी सरकार का उपभोक्ताओं को बड़ा तोहफा, लगातार चौथे महीने बिजली बिल में राहत

    लखनऊ

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार की उपभोक्ता हितों को प्राथमिकता देने की नीति का असर बिजली उपभोक्ताओं के बिलों पर दिखाई दे रहा है। विद्युत क्रय लागत में कमी का लाभ प्रदेश के उपभोक्ताओं तक पहुंचाते हुए अक्टूबर माह के बिजली बिल में 5.24 प्रतिशत की राहत दी जाएगी। उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) ने इस संबंध में आवश्यक आदेश जारी कर दिए हैं।

    यूपीपीसीएल के निदेशक वाणिज्य प्रशांत वर्मा ने बताया कि अक्टूबर माह के लिए ईंधन एवं विद्युत क्रय समायोजन अधिभार (एफपीपीएएस) की दर (-)5.24 प्रतिशत निर्धारित की गई है। ऋणात्मक एफपीपीएएस का लाभ उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में समायोजित किया जाएगा। इससे प्रदेशभर के विद्युत उपभोक्ताओं को करीब 424 करोड़ रुपये की राहत मिलने का अनुमान है।

    उन्होंने बताया कि एफपीपीएएस के माध्यम से यह लगातार चौथा महीना है, जब बिजली उपभोक्ताओं को राहत मिल रही है। इससे पहले जुलाई में 4.43 प्रतिशत, अगस्त में 2.92 प्रतिशत और सितंबर में 7.93 प्रतिशत की राहत दी जा चुकी है।

    प्रदेश सरकार की मंशा के अनुरूप यूपीपीसीएल विद्युत आपूर्ति व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और उपभोक्ता-केंद्रित बनाने के साथ ही विद्युत क्रय लागत में होने वाले अनुकूल बदलाव का लाभ सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचा रहा है। एफपीपीएएस व्यवस्था के तहत बिजली और ईंधन की खरीद लागत में होने वाले उतार-चढ़ाव का समयबद्ध समायोजन बिलों में किया जाता है। लागत घटने पर उसका लाभ भी इसी व्यवस्था के जरिए उपभोक्ताओं को दिया जा रहा है।

  • फिर बढ़ेगी दिव्यांगजन की पेंशन धनराशि: सीएम योगी

    फिर बढ़ेगी दिव्यांगजन की पेंशन धनराशि: सीएम योगी

    गोरखपुर

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि किसी भी समाज की प्रगति और असली पहचान ऊंची इमारतों से नहीं होती। समाज की प्रगति उस व्यवस्था में होती है, जहां शासन की योजनाओं का लाभ बिना भेदभाव, अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक मजबूती से पहुंचता है। यही सुशासन का पहला सूत्र है। उत्तर प्रदेश की डबल इंजन सरकार इसी सूत्र पर कार्य कर रही है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने दिव्यांगजन की पेंशन धनराशि में जल्द ही फिर वृद्धि किए जाने की घोषणा की। उन्होंने सभी 18 मंडलों में जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र स्थापित करने के भी निर्देश दिए हैं।

    सीएम योगी बुधवार को सिविल लाइंस स्थित गोरखपुर क्लब में दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग और हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरण समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने 509 लाभार्थियों को मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल, ई-ट्राइसाइकिल, स्मार्टफोन, स्मार्टकेन, ब्रेल किट सहित विभिन्न प्रकार के 664 सहायक उपकरणों का वितरण किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शासन प्रमुख के रूप में 25 वर्ष पूर्ण करने के उपलक्ष्य में चलाए जा रहे ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि मोदी जी के नेतृत्व में 12 वर्षों में देश में बिना भेदभाव शासन की योजनाओं का समाज के अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्तियों तक पहुंचा है। डबल इंजन सरकार ने किसी भी योजना में व्यक्ति, मत, मजहब, क्षेत्र, भाषा आदि का कभी भेदभाव नहीं किया। सिर्फ एक लक्ष्य रहा- सबका साथ और सबका विकास। सबका विश्वास और सबका प्रयास। 

    पीएम मोदी जैसा योजक तो कोई अयोग्य कैसे रह सकता

    मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में कहा गया है, ‘अयोग्यो पुरुषो नास्ति’। यानी, हमारी संस्कृति में किसी भी व्यक्ति को अधूरा नहीं माना गया है। भारतीय मनीषा कहती है कि कोई भी व्यक्ति अयोग्य नहीं होता। अगर कोई किसी को अयोग्य कहता है तो इसका मतलब यह है कि कोई योजक नहीं है। जब देश में प्रधानमंत्री मोदी जी जैसा योजक है तो कोई अयोग्य कैसे रह सकता है। उनके नेतृत्व में जरूरतमंदों को आवास, शौचालय, रसोई गैस कनेक्शन, पेंशन, युवाओं को रोजगार-नौकरी उपलब्ध कराई गई। केंद्र व प्रदेश की डबल इंजन सरकार का लक्ष्य हर व्यक्ति का स्वावलंबन और सबके जीवन में खुशी लाना है। 

    जल्द बढ़ेगी दिव्यांगजन की पेंशन राशि

    सीएम योगी ने दिव्यांगजन कल्याण के लिए किए गए कार्यों का विस्तार से उल्लेख करते हुए कहा कि जल्द ही उनकी पेंशन धनराशि में एक बार फिर वॄद्धि की जाएगी। पहले दिव्यांगजन को 300 रुपये पेंशन मिलती थी। सरकार ने इसे पहले 500 और फिर 1000 रुपये किया। अब कुछ दिनों में इसमें फिर बढ़ोतरी की जाएगी।
     
    सभी मंडलों में संचालित होंगे जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र

    मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश के सभी 18 मंडलों में जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं। गोरखपुर में सीतापुर आई हॉस्पिटल परिसर में यह केंद्र शुरू हो चुका है। उन्होंने गोरखपुर में स्पर्श राजकीय दृष्टिबाधित बालक एवं बालिका इंटर कॉलेज, संकेत राजकीय मूकबधिर विद्यालय, बीआरडी मेडिकल कॉलेज के मनोविकास केंद्र और राजकीय कौशल विकास केंद्र का उल्लेख किया। कहा कि नॉर्मल कैंपस में आश्रय एवं प्रशिक्षण केंद्र, छात्रावास और बचपन डे केयर सेंटर भी संचालित हैं।

    दिव्यांगजन के लिए हर विधानसभा क्षेत्र में शिविर
    सीएम योगी ने कहा कि वर्ष 2026-27 में प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में शिविर लगाकर पेंशन से छूटे दिव्यांगजनों को योजनाओं से जोड़ने का लक्ष्य है। प्रदेश में 17 लाख से अधिक दिव्यांगजनों की डिजिटल पहचान मजबूत कर उन्हें कार्ड उपलब्ध कराए गए हैं। दिव्यांगजन सशक्तीकरण की शुरुआत बचपन से होनी चाहिए। शुरुआती जांच, थेरेपी, अभिभावकों को मार्गदर्शन, विशेष शिक्षा और तकनीकी सहायता पर सरकार का जोर है। इसी क्रम में तीन से सात वर्ष के श्रवणबाधित, दृष्टिबाधित और बौद्धिक दिव्यांगता वाले बच्चों के लिए बचपन डे केयर सेंटरों का विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने दिव्यांगजनों को सीएम युवा, पीएम स्वनिधि, ओडीओपी, पीएम विश्वकर्मा, पीएम मुद्रा और स्टैंडअप जैसी योजनाओं से जोड़ने पर जोर दिया। साथ ही बताया कि प्रदेश सरकार कॉक्लियर इंप्लांट पर छह लाख रुपये तक के खर्च के साथ स्पीच थेरेपी में भी सहयोग करती है।

    प्रतिभा को दया नहीं, अवसर की आवश्यकता

    मुख्यमंत्री ने कहा कि शारीरिक चुनौती प्रतिभा की राह में बाधा नहीं बन सकती। प्रतिभा को दया नहीं, अवसर उपलब्ध कराने की आवश्यकता है। सही साधन और प्रशिक्षण मिले तो प्रतिभा अपनी क्षमता की ऊंचाई तक पहुंच सकती है। उन्होंने महान ऋषि अष्टावक्र, महाकवि सूरदास, संगीतकार रवींद्र जैन और पर्वतारोही अरुणिमा सिन्हा के साथ पैरालंपिक खिलाड़ियों दीपा मलिक, सुहास एलवाई, सुमित अंतिल, देवेंद्र, भाविना पटेल, वैभव गौतम, प्रवीण कुमार, प्रीति पाल आदि का उदाहरण देते हुए कहा कि पदक केवल मजबूत भुजाओं से नहीं, बल्कि मजबूत हौसले से जीते जाते हैं। इन खिलाड़ियों ने साबित किया कि प्रतिभा को दया नहीं, अवसर चाहिए।

    पीएम मोदी ने किया दृष्टि बदलने का प्रयास

    सीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2015 में ‘विकलांग’ के स्थान पर ‘दिव्यांग’ शब्द का प्रयोग कर समाज की ‘दृष्टि’ बदलने का प्रयास किया। यह दृष्टि बताती है कि डबल इंजन सरकार दिव्यांगजन को अधिकार और सम्मान देने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी दृष्टि से ब्रेल व ऑडियो सूचना, टैक्टाइल पाथ, सुलभ डिजिटल सेवाएं, सांकेतिक भाषा, कैप्शन और विजुअल अलर्ट जैसी सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं।

    सशक्तीकरण का सबसे बड़ा माध्यम शिक्षा
    मुख्यमंत्री ने शिक्षा को सशक्तीकरण का सबसे बड़ा माध्यम बताते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य है, जहां दिव्यांगजन के लिए दो विश्वविद्यालय संचालित हैं। लखनऊ में डॉ. शकुंतला मिश्रा दिव्यांगजन सशक्तीकरण विश्वविद्यालय और चित्रकूट में जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग विश्वविद्यालय कार्य कर रहे हैं।

    साढ़े नौ वर्षों में आया अभूतपूर्व बदलाव: नरेंद्र कश्यप

    कार्यक्रम में पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेंद्र कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में साढ़े नौ वर्षों के दौरान दिव्यांगजन के जीवन में अभूतपूर्व बदलाव आया है। उन्होंने दिव्यांगजन से जुड़ी हर योजना के लिए समुचित बजट देकर अपनी संवेदनाएं दिखाई हैं। पीडीए का ढिंढोरा पीटने वाली सपा जब सत्ता में थी तब दिव्यांगजन विभाग का बजट महज 665 करोड़ रुपये था। जबकि सीएम योगी की उदारता से वर्ष 2026-27 में यह बजट 2200 करोड़ रुपये हो गया है। मुख्यमंत्री ने राज्य की 25 करोड़ जनता का जीवन उन्नत करने के साथ ही दिव्यांगजन के जीवन को सशक्त करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी है। अखिलेश यादव की सरकार में दिव्यांगजन को भरण पोषण के लिए मात्र 300 रुपये दिया जाता था, इसे बढ़ाकर 1000 रुपये करने का काम सीएम योगी ने किया है। उन्होंने दिव्यांग बच्चियों की यात्रा सुगम बनाने के लिए ई-स्कूटी के लिए 60 करोड़ रुपये दिए हैं। प्रदेश में 55 बचपन डे केयर संचालित है, जबकि 28 और खुलने वाले हैं।

    इस अवसर पर जिले के प्रभारी मंत्री एवं प्रदेश के जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, मत्स्य विभाग के मंत्री संजय निषाद, प्रदेश सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह, जिला पंचायत की प्रशासक साधना सिंह, महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं एमएलसी डॉ. धर्मेंद्र सिंह, विधायक फतेह बहादुर सिंह, श्रीराम चौहान, राजेश त्रिपाठी, महेंद्रपाल सिंह, विपिन सिंह, डॉ. विमलेश पासवान, प्रदीप शुक्ल, सरवन निषाद, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारू चौधरी, हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक एसपी मोहंती, दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के प्रमुख सचिव राजेश कुमार सिंह, भाजपा के जिलाध्यक्ष जनार्दन तिवारी आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। स्वागत संबोधन भाजपा के महानगर अध्यक्ष रमेश प्रताप गुप्ता ने किया। 

    दिव्यांगजन को मिले सवा करोड़ रुपये के सहायक उपकरण

    कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिव्यांगजन को करीब सवा करोड़ रुपये के सहायक उपकरण उपलब्ध कराए। इसमें 127 दिव्यांगजन को मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल, 25 को ई-ट्राइसाइकिल, 70 को ट्राइसाइकिल, 155 दिव्यांगजन को 319 स्मार्ट केन एवं ब्रेल किट, 90 को हियरिंग एड, 5 को स्मार्टफोन, 1 को ब्रेल लिपि की गीता, 1 को ब्रेल लिपि की रामचरितमानस, 10 को कृत्रिम अंग, 20 को वयोश्री योजना का लाभ और 5 दिव्यांगों को पाठ्य पुस्तकों का वितरण किया गया।

  • 36वीं राज्य स्तरीय कला प्रदर्शनी में कलाकारों को मिलेगा मौका, 1 अक्टूबर से आवेदन शुरू

    36वीं राज्य स्तरीय कला प्रदर्शनी में कलाकारों को मिलेगा मौका, 1 अक्टूबर से आवेदन शुरू

    लखनऊ

    योगी सरकार प्रदेश के कलाकारों को राज्य स्तर पर पहचान दिलाने का बड़ा मौका दे रही है। राज्य ललित कला अकादमी (संस्कृति विभाग) की ओर से '36वीं राज्य स्तरीय कला प्रदर्शनी 2026-27' का आयोजन किया जा रहा है। इसमें चित्र, रेखांकन, ग्राफिक यानी छापा कला, मूर्ति, पोर्ट्रेट यानी व्यक्ति चित्र-मूर्ति, वॉश और पारंपरिक कला विधाओं में कलाकार अपनी कृतियां भेज सकेंगे। प्रदर्शनी में शामिल होने के लिए प्रविष्टि शुल्क और छायाचित्र जमा करने की प्रक्रिया पहली अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक चलेगी। अकादमी की ओर से प्रदर्शनी में चयनित अति विशिष्ट कृतियों के लिए 10 कलाकारों को 25-25 हजार रुपये, प्रमाणपत्र और स्मृति चिह्न दिए जाएंगे।

    प्रदर्शनी में भाग लेने के लिए 300 रुपये प्रवेश शुल्क देना होगा। शुल्क निदेशक राज्य ललित कला अकादमी, उत्तर प्रदेश के नाम नकद, मनीऑर्डर या लखनऊ में देय बैंक ड्राफ्ट के माध्यम से जमा किया जा सकता है। विवरण पत्र यानी शेड्यूल, छायाचित्र, जीवन परिचय और पोट्रेट से संबंधित सामग्री कलाकार स्वयं या उचित माध्यम से अकादमी के पते पर भेज सकते हैं। एक कलाकार केवल एक ही विधा में भाग ले सकेगा। आवेदन अकादमी द्वारा निर्धारित प्रपत्र पर ही करना होगा। चयन के पहले चरण में आवेदन के साथ भेजे गए छायाचित्रों के आधार पर कृतियों का चयन होगा और दूसरे चरण में चयनित कृतियों में से पुरस्कार के लिए चयन किया जाएगा।

    1 अक्टूबर 2025 के बाद बनाई गई कृतियां ही इस प्रदर्शनी के लिए स्वीकार की जाएंगी। ऐसी कृति स्वीकार नहीं की जाएगी जो पहले किसी राज्य स्तरीय प्रदर्शनी में प्रदर्शित हो चुकी हो। छायाचित्र 5×7 इंच के दो-दो स्पष्ट रंगीन फोटो के रूप में भेजने होंगे। फोटो के पीछे केवल कृति का शीर्षक, माध्यम, मूल्य और निर्माण वर्ष लिखा जाना चाहिए। निर्धारित आकार से छोटा फोटो या अतिरिक्त जानकारी लिखे होने पर उसे अस्वीकार किया जा सकता है। चित्र का अधिकतम आकार 4×4 फीट और मूर्ति का अधिकतम आकार 4×4×4 फीट, जबकि मूर्ति का न्यूनतम आकार 2×2 फीट निर्धारित है। मूर्तियां धातु, लकड़ी, पत्थर और फाइबर ग्लास जैसे टिकाऊ पदार्थों की होनी चाहिए। 

    छायाचित्रों के चयन के बाद अकादमी की ओर से चयनित कृति भेजने के लिए कलाकारों को अलग से सूचना दी जाएगी। कलाकार अपनी ओर से सीधे कृति अकादमी को नहीं भेज सकेंगे, जब तक अकादमी की ओर से उसे आमंत्रित न किया जाए। निर्धारित समय में कृति अकादमी को नहीं पहुंचने पर उसे प्रदर्शनी और कैटलॉग में शामिल नहीं किया जाएगा। चयन एवं निर्णायक समिति का निर्णय अंतिम होगा। सभी पर ‘अन्तर्वस्तु 36वीं राज्य स्तरीय कला प्रदर्शनी 2026-27, लखनऊ के लिए है’ लिखना होगा। प्रदर्शनी में शामिल सभी कलाकारों को एक-एक निशुल्क कैटलॉग भी दिया जाएगा। चयनित कृति को प्रदर्शनी समाप्त होने से पहले हटाने की अनुमति नहीं होगी।

    प्रदर्शनी से संबंधित आवेदन और पत्राचार राज्य ललित कला अकादमी, लाल बारादरी भवन, ललित कला अकादमी मार्ग, कैसरबाग, लखनऊ-226001 के पते पर किया जा सकता है। अकादमी का दूरभाष 0522-2616033 और ईमेल slka_up@yahoo.com है। 

    पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि प्रदेश की समृद्ध कला और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के साथ ही कलाकारों को उचित मंच और प्रोत्साहन देना योगी सरकार की प्राथमिकता है। राज्य ललित कला अकादमी के माध्यम से युवा, उभरते, स्थापित और वरिष्ठ कलाकारों को प्रतिभा प्रदर्शित करने के अवसर दिए जा रहे हैं। 36वीं राज्य स्तरीय कला प्रदर्शनी प्रदेश के कलाकारों को अपनी रचनात्मक प्रतिभा सामने लाने और राज्य स्तर पर पहचान बनाने का महत्वपूर्ण मंच प्रदान करेगी। सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के दूरदराज क्षेत्रों में रहने वाले कलाकार भी कला गतिविधियों से जुड़ें और उन्हें प्रशिक्षण, प्रदर्शन, पुरस्कार व आर्थिक सहयोग के माध्यम से आगे बढ़ने के अवसर मिलें।

  • डेयरी क्षेत्र में 22 कंपनियां करेंगी 695.18 करोड़ का निवेश

    डेयरी क्षेत्र में 22 कंपनियां करेंगी 695.18 करोड़ का निवेश

    लखनऊ

    उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस-2026) युवाओं के लिए रोजगार के बड़े अवसर भी लेकर आया। ट्रेड शो में मिले प्रस्तावों के जरिए डेयरी क्षेत्र की 22 कंपनियां उत्तर प्रदेश में 695.18 करोड़ का निवेश करेंगी। कुल निवेश से 2500 से अधिक युवाओं को रोजगार व नौकरी मिलेगी। यहां डेयरी क्षेत्र में सबसे बड़ा निवेश ऐस इंटरनेशनल लि. की ओर से किया जाएगा। कंपनी हाथरस, अलीगढ़ व आगरा में 457 करोड़ का निवेश कर 1500 युवाओं को रोजगार/नौकरी देगी। वहीं केयरब्रो इनोवेटर्स प्रा. लि. की ओर से 100 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। 

    ऐस इंटरनेशनल लि. करेगी 457 करोड़ का निवेश, 1500 युवाओं को देगी रोजगार 
    ऐस इंटरनेशनल लिमिटेड के आदित्य गोयल उत्तर प्रदेश को निवेश का सबसे उपयुक्त गंतव्य मानते हैं। उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी यहां 457 करोड़ का निवेश करेगी। उन्होंने हाथरस, अलीगढ़, आगरा में प्रस्तावित निवेश को लेकर विभाग से समन्वय किया है। वे लगभग 1500 से अधिक युवाओं को अपने साथ जोड़कर उन्हें समृद्धि के राह पर लाएंगे। 

    अयोध्या, लखनऊ, मेरठ व बरेली में 100 करोड़ का निवेश करेगी केयरब्रो इनोवेटर्स प्रा. लि. 

    केयरब्रो इनोवेटर्स प्रा. लि. की ओर से दुग्धशाला विकास विभाग को निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। निवेशक अमित सिंह ने बताया कि उनकी कंपनी अयोध्या, लखनऊ, मेरठ व बरेली में 100 करोड़ का निवेश करेगी। इसके जरिए 250 से अधिक युवाओं को रोजगार से जोड़ा जाएगा। 

    सहकारी व निजी क्षेत्र के उद्यमियों को प्रदान किया गया प्रमाण पत्र 

    दुग्धशाला विकास विभाग की ओऱ से उप्र दुग्धशाला विकास व दुग्ध उत्पाद प्रोत्साहन नीति-2022 के अंतर्गत यह निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुआ है। विभाग, सहकारी व निजी डेयरी उद्यमियों के स्टॉल पर लगभग काफी भीड़ भी रही। पराग-अमूल, नमस्ते इंडिया, पारस डेयरी, ज्ञान डेयरी, न्यू एरा डेयरी, अल्फा मिल्क फूड्स, सीपी मिल्क समेत अनेक कंपनियों ने हिस्सा लिया। वित्त नियंत्रक अरविंद कुमार सिंह, मुख्य दुग्धशाला विकास अधिकारी एपी सिंह, दुग्धशाला विकास अधिकारी आईबी सिंह आदि ने निवेशकों, आगंतुकों को विभाग से जुड़ी योजनाओं की जानकारी दी। 

    विभाग को मिले शीर्ष 5 निवेश प्रस्ताव 

    कंपनी                  निवेश प्रस्ताव     रोजगार    प्रस्तावित जनपद 
    ऐस इंटरनेशनल लिमिटेड   457 करोड़   1500  हाथरस, अलीगढ़ व आगरा 
    केयरब्रो इनोवेटर्स प्रा. लि.    100 करोड़   250  अयोध्या, मेरठ, लखनऊ व बरेली
    अंजुम डेयरी         50 करोड़           40   मुरादाबाद, अमरोहा व रामपुर
    ग्विन व्हे प्रोटीन एलएलपी        27 करोड़    250   एटा, फिरोजाबाद व इटावा
    गौरी फूड एंड बेवरेजेज    14.65 करोड़      55   झांसी 

    उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस-2026) में दुग्धशाला विकास विभाग को 695.18 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। निवेश से प्रदेश के अनेक जनपदों में यह प्रस्ताव धरातल पर उतरेंगे। इससे प्रदेश के 2500 से अधिक युवाओं को रोजगार/नौकरी भी मिलेगी। इसके अतिरिक्त विभाग अन्य निवेशकों को प्रदेश में आमंत्रित कर युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए कार्य कर रहा है। 

    धनलक्ष्मी के. 
    दुग्ध आयुक्त, उत्तर प्रदेश

  • कुशीनगर में बाढ़ राहत को युद्धस्तर पर किया गया सक्रिय, एनडीआरएफ-एसडीआरएफ समेत टीमें तैनात

    कुशीनगर में बाढ़ राहत को युद्धस्तर पर किया गया सक्रिय, एनडीआरएफ-एसडीआरएफ समेत टीमें तैनात

    कुशीनगर में बाढ़ राहत को युद्धस्तर पर किया गया सक्रिय, एनडीआरएफ-एसडीआरएफ समेत टीमें तैनात

    गंडक के बढ़ते जलस्तर के बीच योगी सरकार का राहत अभियान तेज, प्रभावितों तक शीघ्र पहुंच रही मदद

    बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिए 16 राहत शिविर और 10 बाढ़ चौकियां सक्रिय

    13 हजार से अधिक लंच पैकेट और 2100 राशन किट बांटे, सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए जा रहे लोग

    प्रभावित गांवों में राहत शिविर और सामुदायिक रसोई सक्रिय, गांवों में पहुंचाई जा रही हर जरूरी राहत

    लखनऊ/कुशीनगर
     उत्तर प्रदेश में बाढ़ की स्थिति को लेकर योगी सरकार की ओर से प्रशासन को पूरी तरह सक्रिय रखा गया है। कुशीनगर में बड़ी गंडक नदी के जलस्तर में लगातार वृद्धि के बाद राहत आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने जिला प्रशासन से प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य तेज करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन ने प्राथमिकता पर प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के साथ ही उन्हें समय पर भोजन, राशन और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराया है।

    राहत आयुक्त कार्यालय के मुताबिक 29 सितंबर को सुबह आठ बजे बड़ी गंडक नदी का जलस्तर 96.48 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के बिंदु 96 मीटर से 0.48 मीटर ऊपर था। वाल्मीकि नगर बैराज से भी बड़ी मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण खड्डा तहसील के 18 और तमकुहीराज तहसील के 14 गांव प्रभावित हुए हैं।

    प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया
    राहत कार्यों के तहत प्रभावित गांवों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 10 बाढ़ चौकियां और 16 राहत शिविर स्थापित किए हैं। इन व्यवस्थाओं के माध्यम से प्रभावित परिवारों की जरूरतों पर लगातार नजर रखी जा रही है।

    एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और पीएसी भी तैनात
    बचाव कार्य के लिए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और पीएसी बाढ़ राहत दलों की टीमें तैनात की गई हैं। साथ ही स्थानीय स्तर पर भी नावों की व्यवस्था की गई है। रिपोर्ट के अनुसार राहत एवं बचाव कार्य के लिए स्थानीय गोताखोरों की 66 सदस्यीय टीम भी सक्रिय है।

    16 सामुदायिक रसोई से उपलब्ध कराया जा रहा भोजन
    प्रभावित लोगों को भोजन की समस्या न हो, इसके लिए खड्डा तहसील में 13 और तमकुहीराज तहसील में तीन सामुदायिक रसोई स्थापित की गई हैं। इन रसोइयों के माध्यम से प्रभावित परिवारों को नियमित भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके अलावा प्रशासन की ओर से 13,030 लंच पैकेट और 2,100 राशन किट वितरित किए जा चुके हैं। राहत सामग्री की उपलब्धता और वितरण की लगातार निगरानी की जा रही है।

    स्वास्थ्य सेवाओं की भी व्यवस्था
    बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए दो मेडिकल टीमों को लगाया गया है। प्रशासन ने प्रभावित परिवारों तक आवश्यक चिकित्सा सहायता पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही पुलिस, स्वास्थ्य, पशुपालन, विद्युत आपूर्ति सहित संबंधित विभागों को भी राहत एवं बचाव कार्य में सक्रिय रखा गया है। प्रशासन की ओर से बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत के अनुसार बचाव एवं राहत कार्यों को आगे बढ़ाया जा रहा है। योगी सरकार की आपदा प्रबंधन व्यवस्था के तहत प्रभावित लोगों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

  • उमर खालिद और शरजील इमाम को फिर झटका, दिल्ली HC ने खारिज की जमानत याचिका

    उमर खालिद और शरजील इमाम को फिर झटका, दिल्ली HC ने खारिज की जमानत याचिका

    नई दिल्ली
    साल 2020 के दिल्ली दंगे के आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम को दिल्ली हाईकोर्ट ने फिर से राहत देने से इनकार कर दिया है और दोनों की जमानत याचिका खारिज कर दी है। बता दें कि दोनों आरोपी फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े यूएपीए मामले में लगभग 6 साल से बंद हैं।सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि यह कोर्ट न्यायिक अनुशासन से बंधा हुआ है। आदालत ने आगे कहा कि वह शरजील इमाम और उमर खालिद पर लगाई गई शर्तों में बदलाव नहीं कर सकता है।

    क्या थीं शर्तें
    दरअसल, जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस दिनेश भट्ट की बेंच ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित आदेश में किसी तरह का बदलाव नहीं कर सकते। उस आदेश में जमानत पाने के लिए कुछ शर्तें रखी गईं हैं, जिनमें पहली, संरक्षित गवाहों के बयान पूरे होने पर और दूसरी, आदेश पारित होने की तारीख 5 जनवरी, 2026 से एक साल पूरा होने पर ही जमानत पर विचार किया जा सकता है।

    बता दें कि दिल्ली हाईकोर्ट से पहले कड़कड़डूमा कोर्ट ने बीते 4 जुलाई 2026 को दोनों की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने भी 5 जनवरी 2026 को झटका दिया था।

    शरजील इमाम और उमर खालिद पर दिल्ली में दंगे भड़काने का आरोप
    बता दें कि शरजील इमाम और उमर खालिद पर मुख्य रूप से फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दंगों की बड़ी साजिश रचने का आरोप है। दोनों पर देश विरोधी भड़काऊ भाषण देने का भी आरोप है। दिल्ली पुलिस के मुताबिक दोनों ने CAA और NRC के विरोध प्रदर्शनों की आड़ में हिंसा भड़काने की सोची-समझी योजना बनाई थी।

     

  • नीला ड्रम मर्डर केस: मुस्कान-साहिल दोषी करार, सौरभ राजपूत हत्याकांड में कोर्ट का फैसला

    नीला ड्रम मर्डर केस: मुस्कान-साहिल दोषी करार, सौरभ राजपूत हत्याकांड में कोर्ट का फैसला

    मेरठ

    मेरठ के चर्चित ब्लू ड्रम हत्याकांड में जिला जज की अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल को हत्या का दोषी करार दिया है. कोर्ट ने दोनों को दोषी तो ठहराया, लेकिन अभी सजा का ऐलान नहीं किया है. अदालत के फैसले के बाद अब दोनों को मिलने वाली सजा पर फैसला होना बाकी है। 

    बता दें, यह मामला 3 मार्च 2025 का है. आरोप है कि मुस्कान और साहिल ने सौरभ राजपूत का मर्डर कर शव के टुकड़े किए और उन्हें नीले ड्रम में पैक कर ऊपर से सीमेंट भरकर सील कर दिया था.  करीब 15 दिन बाद पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. जुलाई 2025 में जिला जज की अदालत में केस का ट्रायल शुरू हुआ. पुलिस ने मामले में करीब 1,000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की. इस दौरान 126 तारीखों पर सुनवाई हुई और 22 से ज्यादा गवाहों के बयान दर्ज किए गए. लंबी सुनवाई और अंतिम बहस के बाद 19 सितंबर को कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया। 

    हत्या से कोर्ट में फैसला सुरक्षित होने तक का पूरा घटनाक्रम

    सौरभ राजपूत 24 फरवरी 2025 को लंदन से मेरठ अपने घर लौटा था. अगले दिन 25 फरवरी को पत्नी मुस्कान ने उसके लौटने की खुशी में घर पर पार्टी रखी. इसके कुछ दिन बाद 28 फरवरी को परिवार ने बेटी पीहू का जन्मदिन मनाया. इसके बाद 3 मार्च को मामले ने ऐसा मोड़ लिया, जिसने पूरे घटनाक्रम को हत्या के केस में बदल दिया. टाइमलाइन के मुताबिक, मुस्कान ने डिनर में सौरभ को नींद की दवा मिला दी. इसके बाद साहिल शुक्ला को फोन करके बुलाया गया. आरोप है कि सौरभ की हत्या करने के बाद उसके शव के चार टुकड़े किए गए और उन्हें नीले ड्रम में पैक कर दिया गया। 

    4 मार्च को मुस्कान अपनी बेटी पीहू को अपनी मां के घर छोड़कर साहिल के साथ हिमाचल चली गई. इसके बाद 17 मार्च को मुस्कान हिमाचल से वापस लौटी और मायके पहुंचकर अपने पिता-मां को घटना के बारे में बताया. 18 मार्च को पुलिस इंद्रानगर स्थित घर पहुंची. वहां पुलिस को ड्रम में सौरभ की बॉडी मिली. इसके बाद पुलिस ने साहिल और मुस्कान को गिरफ्तार कर लिया. 19 मार्च को पुलिस ने साहिल और मुस्कान को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की. इसी दौरान सौरभ के शव के चार टुकड़ों का पोस्टमार्टम कराया गया। 

    जांच आगे बढ़ी तो सामने आए कई अहम सुराग
    12 मई को पुलिस ने 1,000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की. इस चार्जशीट में 34 गवाहों का जिक्र किया गया था. पुलिस की जांच में सामने आए तथ्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर मामले को आगे बढ़ाया गया. 17 जून को मुस्कान और साहिल पर हत्या और सबूत मिटाने के आरोप तय हुए. इसके बाद मामले में ट्रायल शुरू हुआ. 4 जुलाई को सौरभ के भाई बबलू की कोर्ट में गवाही हुई. इसके बाद जुलाई से नवंबर के बीच परिवार, पुलिस, डॉक्टर, डांसर और ड्रम बेचने वाले समेत कई गवाहों के बयान कोर्ट में दर्ज किए गए। 

    ड्रम और दूसरे सामान को बनाया गया सबूत
    19 दिसंबर को कोर्ट में नीला ड्रम और ट्रॉली बैग पेश किए गए. इन्हें मामले में महत्वपूर्ण सबूत बताया गया. इसके बाद 23 जनवरी 2026 को जियो के नोडल अधिकारी ने कोर्ट में कॉल डिटेल, चैट और मोबाइल लोकेशन से जुड़ी रिपोर्ट पेश की. 21 अप्रैल को कोर्ट में मुस्कान और साहिल पर लगे आरोपों को लेकर सुनवाई हुई. दोनों ने अपने ऊपर लगे 32 साल की सजा वाले आरोपों को मानने से इनकार कर दिया। 

    इसके बाद 22 मई से 17 सितंबर के बीच मामले में अंतिम बहस चली. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया. अब इस मामले में 19 सितंबर को फैसला सुनाया जाना था, लेकिन कोर्ट ने फैसले की तारीख 30 सितंबर तय कर दी. यानी करीब सात महीने तक चली जांच, गवाहियों, सबूतों और अंतिम बहस के बाद अब मामले में फैसला आने का इंतजार है।