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  • रांची में 2.86 करोड़ से बनेंगे ग्रीन पैच, शहर होगा और हरा-भरा

    रांची में 2.86 करोड़ से बनेंगे ग्रीन पैच, शहर होगा और हरा-भरा

    रांची
     राजधानी की सड़कों को हरा-भरा और खूबसूरत बनाने की कवायद शुरू हो गई है। वहीं प्रस्तावित दूसरी ओर दस लेन सड़क का विरोध शुरू हो गया है। रांची नगर निगम ने शहर के अलग-अलग हिस्सों में ग्रीन पैच विकसित करने के लिए करीब 2.86 करोड़ रुपये के टेंडर जारी किए हैं।

    इनमें चुटिया, रांची रेलवे स्टेशन, कोकर, कांटाटोली, डोरंडा, हटिया, हरमू, अरगोड़ा, बिरसा चौक, कडरू, पंडरा समेत कई प्रमुख इलाके शामिल हैं। खास बात यह है कि इन ग्रीन पैच का निर्माण करने के साथ एक साल तक इनके रखरखाव की जिम्मेदारी भी संबंधित एजेंसी की होगी। ग्रीन पैच पर कुल अनुमानित लागत 2,85,81,660 रुपये है।

    इन मार्गों पर बनेगा ग्रीन पैच

    • चुटिया, रांची रेलवे स्टेशन और कोकर के विभिन्न स्थानों पर ग्रीन पैच विकसित किए जाएंगे। इसकी अनुमानित लागत 84.37 लाख रुपये है।
    • कांटाटोली, डोरंडा और हटिया इलाके में हरियाली विकसित करने की योजना है। इस काम पर करीब 57.71 लाख रुपये खर्च होंगे।
    • सहजानंद चौक, हरमू, अरगोड़ा चौक, बिरसा चौक और कडरू सहित विभिन्न स्थानों को शामिल किया गया है। इसकी अनुमानित लागत 60.49 लाख रुपये है।
    • दीनदयाल चौक से जज कालोनी तक, एलपीएन साहदेव चौक और पंडरा समेत अन्य स्थानों पर ग्रीन पैच विकसित किए जाएंगे। इसके लिए निगम ने 83.25 लाख रुपये की अनुमानित लागत तय की है।

    10 लेन सड़क के विरोध में उतरे लोग, 7 सितंबर को शहीद मैदान में धरना
    प्रस्तावित 10 लेन सड़क निर्माण के खिलाफ बस्ती बचाओ संघर्ष समिति ने आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। बुधवार को समिति की ओर से जगन्नाथपुर चौक पर नुक्कड़ सभा की गई। इसमें स्थानीय लोगों ने सड़क निर्माण से बस्ती, स्कूल और ऐतिहासिक स्थलों पर पड़ने वाले असर को लेकर विरोध जताया। सभा की अध्यक्षता समिति के वरिष्ठ सदस्य दिलीप कुमार ने की।

    समिति के संयोजक मिंटू पासवान ने कहा कि 10 लेन सड़क बनने से जगन्नाथपुर की ऐतिहासिक रथ यात्रा और मेला प्रभावित होगा। इलाके में 1691 ईस्वी से स्थापित प्राचीन देवी मंदिर और करीब 50 साल पुराने दुर्गा मंदिर के भी प्रभावित होने की आशंका है।

    समिति ने सरकार से 10 लेन सड़क की योजना रद करने की मांग की। कहा कि अगर यातायात व्यवस्था के लिए सड़क जरूरी है तो फ्लाईओवर का विकल्प अपनाया जा सकता है। सभा में वार्ड 37 के पार्षद परमेश्वर सिंह समेत राधा पूर्ति, हरेंद्र सिंह, विमला देवी, सुषमा देवी, रूदन देवी, जीतन मुंडा, मोहन बरला, श्याम थापा और धीरज राम सहित कई लोग मौजूद थे। समिति ने 7 सितंबर को शहीद मैदान में धरना देने का निर्णय लिया है।

  • लुधियाना में बहुओं ने सास की अर्थी को दिया कंधा, मौत के बाद आंखें और शरीर भी किया दान

    लुधियाना में बहुओं ने सास की अर्थी को दिया कंधा, मौत के बाद आंखें और शरीर भी किया दान

    लुधियाना 

    लुधियाना में महिला की मौत के बाद जब घर से उनकी अर्थी निकाली गई तो बहुओं ने एक नई मिसाल कायम की। दोनों बहुओं ने अपनी सास की अर्थी को आगे से अपने कंधों पर उठाया, जबकि दोनों बेटों ने पीछे से कंधा लगाकर मां को अंतिम विदाई दी।

    घर से कुछ दूर तक बहुओं ने सास की अर्थी को कंधा दिया और उसके बाद शव हारमनी आयुर्वेदिक कॉलेज एंड हॉस्पिटल फिरोजपुर की मैनेजमेंट के हवाले कर दिया। शव लेकर अस्पताल की मैनेजमेंट फिरोजपुर के लिए रवाना हुई। मेडिकल कॉलेज में अब उनके शव पर स्टूडेंट्स प्रैक्टिकल करेंगे।

    अंतिम यात्रा से पहले महिला सुखदेव कौर की आंखें भी दान की गई। आंखें डॉ रमेश सुपरस्पेशिलिटी आईएंड लेजर सेंटर को दी गई। उनकी आंखें भी किसी दृष्टिहीन को लगाई जाएंगी और वो भी दुनियां देख सकेंगे।

    महिला अपने दो बेटों व बहुओं के साथ लुधियाना के प्रताप सिंह वाला में रहती थी। उन्होंने 10 साल पहले मरणोपरांत शरीर दान करने का फैसला किया था। उन्होंने बाकायदा इसके लिए फॉर्म भर दिया था। परिवार ने भी एफिडेविट दिया था कि उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।

    परिवार व रिश्तेदारों ने ऐसे दी सुखदेव कौर को अंतिम विदाई…

        मौत होते ही आई हॉस्पिटल को किया फोन: सुखदेव कौर ने 10 साल पहले शरीर व आंखें दान करने का संकल्प लिया था। बुधवार शाम को जैसे ही सुखदेव कौर की हार्ट अटैक से मौत हुई तो बेटों यादविंदर सिंह व गुरविंदर सिंह ने डॉ रमेश सुपरस्पेशलिटी आई एंड लेजर सेंटर को फोन किया और मां की आंखों को ले जाने के लिए कहा। आई अस्पताल की टीम आई और उनकी आंखें लेकर चली गई।

        शरीर के लिए डेरे की टीम से किया संपर्क: सुखदेव कौर ने एक सत्संग के दौरान डेरे में शरीर दान का संकल्प लिया था। जब उनकी मौत हुई तो बेटों ने डेरे की टीम से संपर्क किया। हारमनी आयुर्वेदिक कॉलेज एंड हॉस्पिटल फिरोजपुर को शव लेने के लिए कहा। गुरुवार को अस्पताल की टीम शव लेने लुधियाना पहुंची।

        बहुओं ने दिया अर्थी को कांधा: धार्मिक रीति रिवाज निभाने के बाद अंतिम यात्रा की शुरुआत में समाज की पुरानी मान्यताओं को दरकिनार करते हुए सुखदेव कौर की दोनों बहुओं मनप्रीत कौर और राजवीर कौर ने अपनी सास की अर्थी को आगे से अपने कंधों पर उठाया, जबकि बेटे यादविंदर सिंह और गुरविंदर सिंह पीछे से सहारा बने।

        फूलों से सजी एंबुलेंस को दी हरी झंडी: पार्थिव शरीर को एंबुलेंस में सम्मानपूर्वक रखा गया और पूरे वाहन को फूलों से सजाया गया। गांव प्रताप सिंह वाला के सरपंच गुरमेज सिंह ने हरी झंडी दिखाकर एम्बुलेंस को फिरोजपुर के मेडिकल कॉलेज के लिए रवाना किया। अंतिम विदाई के दौरान उपस्थित परिजनों, रिश्तेदारों और ग्रामीणों ने उनकी इस अंतिम सेवा और त्याग को नमन किया।

    मेडिकल छात्रों की पढ़ाई और शोध में आएगा काम गांव प्रताप सिंह वाला के सरपंच गुरमेज सिंह कामरेड ने कहा कि इंसानी शरीर मृत्यु के बाद मिट्टी में मिल जाता है, लेकिन सुखदेव कौर का यह शरीर अब अमर हो गया है। वे बेहद सहृदय और मीठे स्वभाव की महिला थीं, जो हमेशा दूसरों की मदद के लिए तैयार रहती थीं। उनके जाने से गांव को अपूरणीय क्षति हुई है, लेकिन उनके परिवार ने शरीरदान करके पूरे समाज को एक मिसाल दी है।

    उन्होंने आगे कहा कि शरीरदान की मुहिम बेहद सराहनीय है। इस पार्थिव देह पर हारमनी आयुर्वेदिक कॉलेज एंड हॉस्पिटल फिरोजपुर के छात्र प्रैक्टिकल करेंगे और बीमारियों पर शोध करेंगे, जो भविष्य में मानव जाति के इलाज के काम आएगा।

    शरीर दान की प्रक्रिया जानिए…
        जीवनकाल में संकल्प व पंजीकरण:
    जब कोई व्यक्ति जीवित रहते हुए शरीरदान का फैसला करता है, तो उसे किसी नजदीकी मेडिकल कॉलेज या अधिकृत संस्थान में जाकर बॉडी डोनेशन फॉर्म भरना होता है, जिसमें उसकी स्पष्ट सहमति दर्ज होती है। इस आवेदन पत्र में परिवार के सदस्यों या नॉमिनी का विवरण भी लिया जाता है, जिसके बाद संस्थान आवेदक को एक औपचारिक पंजीकरण या शपथ पत्र जारी कर देता है।

        परिवार को सूचित करना: शरीरदान की प्रक्रिया को सुचारू रूप से पूरा करने के लिए यह बेहद जरूरी है कि व्यक्ति अपने फैसले की जानकारी अपने निकटतम परिजनों को पहले से दे दे। व्यक्ति की मृत्यु के तुरंत बाद परिवार के सदस्यों को ही संबंधित मेडिकल कॉलेज या संस्थान से संपर्क करके दान की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना होता है।

        मृत्यु के बाद संस्थान को सूचना: डॉक्टर द्वारा मृत्यु की पुष्टि किए जाने के बाद परिजनों को बिना किसी देरी के मेडिकल कॉलेज को तुरंत सूचित करना चाहिए। इसके बाद संस्थान के विशेषज्ञ यह जांचते हैं कि क्या शरीर उनके निर्धारित मानकों और स्वीकार्यता की शर्तों के अनुसार सही स्थिति में है।

        जरूरी दस्तावेजों की पूर्ति: प्रक्रिया को कानूनी रूप से पूरा करने के लिए मृत्यु प्रमाणपत्र, पहले से भरा हुआ संकल्प-पत्र, मृतक व उनके निकट संबंधी के पहचान पत्र और संस्थान का निर्धारित सहमति फॉर्म तैयार रखना होता है।

        मेडिकल कॉलेज को शव सौंपना: सभी कागजी प्रक्रियाएं और प्राथमिक जांच पूरी होने के बाद पार्थिव देह को सम्मानपूर्वक मेडिकल कॉलेज के एनाटॉमी डिपार्टमेंट को सौंप दिया जाता है, जहां इसका उपयोग मेडिकल छात्रों के प्रैक्टिकल, अध्ययन और जटिल बीमारियों पर शोध के लिए किया जाता है।

        अंतिम संस्कार की प्रक्रिया: शोध व अध्ययन का कार्य पूरा हो जाने के बाद संबंधित संस्थान अपनी नीतियों के तहत शव का अंतिम संस्कार करता है। कई मामलों में परिजनों की इच्छा अनुसार उन्हें भी इस प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर दिया जाता है।

  • दिल्ली में अब बिजली की तरह आएगा पानी का SMS! 20 लाख उपभोक्ताओं को मिलेगी हर अपडेट

    दिल्ली में अब बिजली की तरह आएगा पानी का SMS! 20 लाख उपभोक्ताओं को मिलेगी हर अपडेट

    नई दिल्ली
     जिस तरह बिजली वितरण कंपनियां पावर कट या विलिंग संबंधित तमाम अपडेट्स उपभोक्ताओं को देती रहती है, उसी तरह जल बोर्ड ने भी उपभोक्ताओं को SMS के जरिए पानी संबंधित तमाम जानकारियां उपलब्ध कराने की योजना बनाई है। पहले फेज में 20 लाख उपभोक्ताओं से बोर्ड SMS ब्रॉडकास्ट सर्विस शुरू करेगा। इस योजना के लिए जल्द ही एक प्राइवेट एजेंसी भी नियुक्त की जाएगी। SMS ब्रॉडकास्ट सर्विस नहीं होने के चलते शिकायतों की संख्या अधिक है। इससे जल बोर्ड के हेल्पलाइन नंबर पर भी बोझ अधिक बढ़ता जा रहा है।

    बिजली कंपनी की तरह पानी का एसएमएस आएगा
    जल बोर्ड अफसरों के अनुसार दिल्ली में बिजली सप्लाई करने वाली वितरण कंपनियां अपने उपभोक्ताओं को बिजली संबंधित हर तरह की जानकारी SMS और वट्सऐप पर जारी करती है। बिजली बिल घर पर डिलीवर करने से कुछ दिन पहले बिजली कंपनियां सभी उपभोक्ताओं को बिजली बिलों के बारे में जानकारी भी देती है।

    इसी तरह जल बोर्ड भी अब अपने उपभोक्ताओं को SMS सर्विसेज उपलब्ध कराएगा। इसमें पानी व सीवर संबंधित नियोजित या अनियोजित मेटिनेस वर्क, पानी सप्लाई ठप होने, लाइनों में किसी तरह की खराबी आने और मेंटेनेंस के बाद पानी सप्लाई शुरू करने संबंधित तमाम जानकारियां उपभोक्ताओं के मोबाइल पर SMS के जरिए दी जाएगी।

    जल बोर्ड अफसरों का कहना है कि दिल्ली के नागरिकों के साथ तुरंत और बड़े पैमाने पर संवाद करने की नियमित आवश्यकता होती है। ऐसी सूचनाओं के प्रसार में देरी से नागरिकों को असुविधा होती है, जिससे हेल्पलाइन नंबर 1916 पर शिकायतों का बोझ बढ़ता है।

    अफसरों का कहना है कि ब्रॉडकास्ट SMS सर्विसेज के लिए किसी प्राइवेट कंपनी को हायर किया जाएगा। शुरुआत में 20 लाख उपभोक्ताओं से सर्विसेज की शुरुआत की जाएगी। ई-केवाईसी होने के बाद उपभोक्ताओं की संख्या करीब 60-62 लाख होने की उम्मीद है। इसके बाद SMS सर्विसेज का दायरा बाकी उपभोक्ताओं तक बढ़ाया जाएगा। सर्विस की शुरुआत अगले एक या डेढ़ महीने में किया जाएगा।

    123 होटलों के बोरवेल होंगे सील
    नैशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के सख्त रुख के बाद दिल्ली जल बोर्ड (DJB) ने पहाड़गंज और आसपास के इलाको में भूजल के अवैध दोहन पर कार्रवाई तेज कर दी है। डीजेबी ने रिपोर्ट जमा करके बताया है कि इलाके में चिह्नित 555 होटल और गेस्ट हाउस में से 432 ने अपने बोरवेल पर डिजिटल वॉटर मीटर/पीजोमीटर लगा लिए है। वही, नियमों का पालन नहीं करने वाले 123 होटलों के बोरवेल सील करने की तैयारी है।

    DJB की रिपोर्ट के अनुसार, पिछली सुनवाई तक सिर्फ 162 होटल और गेस्ट हाउस मे मीटर लगाए गए थे। एनजीटी के सख्त रुख के बाद डीजेबी ने होटल असोसिएशनों के साथ बैठके की और लगातार फॉलो-अप किया। डीजेबी ने एनजीटी को बताया है कि भूजल निकासी की निगरानी आगे भी जारी रहेगी।

     

  • हरियाणा में SIR के बीच वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने की होड़, 1.36 लाख लोगों ने भरा Form-6

    हरियाणा में SIR के बीच वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने की होड़, 1.36 लाख लोगों ने भरा Form-6

    चंडीगढ़
    हरियाणा में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बीच अभी तक एक लाख 36 हजार 646 लोगों ने अपना नाम मतदाता सूचियों में जुड़वाने के लिए फार्म-6 भरा है। अयोग्य या मृत व्यक्तियों के नाम मतदाता सूची से कटवाने के लिए 10 हजार 156 फार्म-7 भरे गए हैं, जबकि एक लाख छह हजार 671 मतदाताओं ने नाम-पते सहित अपनी अन्य जानकारी अपडेट करने के लिए फार्म-8 भरा है।

    त्रुटियां ठीक कराने के लिए अंतिम तिथि 31 अगस्त से बढ़ाकर 30 सितंबर की जा चुकी है। फार्म-6 और आठ में पिछले एसआईआर की मतदाता सूची का स्वयं या माता-पिता, दादा-दादी का विवरण भरना होता है।

    यदि किसी पात्र व्यक्ति के पास पिछले एसआईआर की मतदाता सूची का रिकॉर्ड/विवरण उपलब्ध नहीं है तो जन्म वर्ष के अनुसार अपने दस्तावेज फार्म 6 व फार्म 8 के साथ संलग्न अवश्य करें।
    मुख्य निर्वाचन अधिकारी ए श्रीनिवास ने बताया कि मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने या स्थानांतरण के लिए घोषणा पत्र भी जमा करना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल पुराना मतदाता रिकॉर्ड या संबंधित दस्तावेज उपलब्ध न होने के आधार पर किसी पात्र मतदाता का नाम मतदाता सूची से नहीं हटाया जा सकता।

    मतदाता की पात्रता का परीक्षण निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर किया जाएगा। जिन मतदाताओं का पिछली एसआईआर सूची से मिलान नहीं हुआ है, उन्हें अपनी पात्रता के साक्ष्य के रूप में दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। यदि किसी व्यक्ति का जन्म भारत में एक जुलाई 1987 से पहले हुआ है तो दस्तावेज सूची में से स्वयं का कोई भी दस्तावेज प्रस्तुत कर सकता है।

    एक जुलाई 1987 से दो दिसंबर 2004 के बीच जन्मे मतदाताओं को अपना तथा अपने माता-पिता में से किसी एक का दस्तावेज प्रस्तुत करना होगा। दो दिसंबर 2004 के बाद जन्मे मतदाताओं को स्वयं का, अपने पिता तथा अपनी माता का दस्तावेज प्रस्तुत करना होगा।

    यदि माता-पिता भारतीय नहीं हैं, तो जन्म के समय के उनके वैध वीजा तथा पासपोर्ट की प्रति प्रस्तुत करनी होगी। अगर किसी व्यक्ति का जन्म भारत के बाहर हुआ है तो भारतीय मिशन द्वारा जारी किया गया जन्म पंजीकरण संलग्न करना होगा। यदि पंजीकरण द्वारा भारतीय नागरिकता प्राप्त की है तो नागरिकता पंजीकरण प्रमाणपत्र संलग्न करना होगा।

    यह दस्तावेज होंगे मान्य

    •     किसी केंद्रीय/राज्य/ पीएसयू के नियमित कर्मचारी/पेंशनभोगी को जारी कोई पहचान पत्र/ पेंशन भुगतान आदेश
    •     एक जुलाई 1987 से पहले भारत में सरकार/स्थानीय प्राधिकरण/बैंक/डाकघर/ एसलआइसी/पीएसयू द्वारा जारी कोई भी पहचान पत्र/ प्रमाण पत्र/दस्तावेज
    •     सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी जन्म प्रमाणपत्र
    •     पासपोर्ट
    •     मान्यता प्राप्त बोर्ड/विश्वविद्यालय द्वारा जारी मैटिक परीक्षा/ शैक्षणिक प्रमाण-पत्र
    •     सक्षम राज्य प्राधिकारी द्वारा जारी स्थायी निवास प्रमाण-पत्र
    •     वन अधिकार प्रमाण-पत्र
    •     सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी ओबीसी/एससी/एसटी या कोई भी जाति प्रमाणपत्र
    •     राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर, जहां भी यह प्रचलन में हो
    •     राज्य/स्थानीय प्राधिकारियों द्वारा तैयार किया गया परिवार रजिस्टर
    •     सरकार द्वारा कोई भी भूमि/ मकान आवंटन प्रमाणपत्र
    •     आधार के लिए चुनाव आयोग के माध्यम से जारी अनुदेश लागू होंगे।
  • रांची में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का भव्य आगाज, बाल गोपाल-बाल राधा पोशाक प्रतियोगिता ने जीता दिल

    रांची में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का भव्य आगाज, बाल गोपाल-बाल राधा पोशाक प्रतियोगिता ने जीता दिल

     रांची
    दो दिवसीय श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का शुभारंभ बाल गोपाल-बाल राधा पोशाक प्रतियोगिता के साथ चिरौंदी मोरहाबादी स्थित गीतांजली बैंक्वेट हाल में शुरू हो गई। कांके विधायक सुरेश बैठा ने दीप जलाया। इस अवसर पर श्री कृष्ण जन्माष्टमी आयोजन समिति मोरहाबादी के मुख्य संरक्षक राजीव रंजन प्रसाद, अध्यक्ष बिनोद गोप, संरक्षक डॉ राजेश गुप्ता छोटू, कार्यकारी अध्यक्ष राहुल सिंह, महासचिव मनोज गुप्ता, विजय शर्मा, राजेश गुप्ता सचिव रोहित सिंह उपस्थित थे।

    आज चार सितंबर को ऐतिहासिक मोरहाबादी मैदान में दही हांडी का आयोजन होगा। भजन संध्या एवं रासलीला का मंचन किया जाएगा। सुरेश बैठा ने कहा कि श्रीकृष्ण जन्मोत्सव को लेकर रांचीवासियों में खासा उत्साह है। इस वर्ष दो दिवसीय आयोजन में बच्चों से लेकर युवाओं और श्रद्धालुओं के लिए श्री कृष्ण जन्मोत्सव आयोजन समिति द्वारा विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

    शहर वासियों को जन्माष्टमी की शुभकामनाएं
    मुख्य संरक्षक राजीव रंजन प्रसाद ने भी तमाम राज्यवासियों को हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि इस आयोजन को पहले भी लोगों का प्यार और समर्थन मिलता रहा है जो ऐसे भव्य आयोजन के लिए प्रेरणा देता है lसंरक्षक डा राजेश गुप्ता ने भी शहर वासियों को जन्माष्टमी की शुभकामनाएं दीं l

    गोपाल एवं बाल राधा पोशाक प्रतियोगिता 0 से 5 वर्ष एवं 6 से 12 वर्ष आयु वर्ग के बच्चे बाल गोपाल एवं बाल राधा की पोशाक ने हिस्सा लिया। प्रतियोगिता में जज की भूमिका में शहर की प्रख्यात फैशन डिजाइनर स्मृति राजीव, अंशिका कुमारी और राम सिंह ने उपस्थित बच्चों के परिधान एवं अन्य पहलुओं का मूल्यांकन किया l

    मोरहाबादी मैदान में दही हांडी का आयोजन
    प्रतिभागी बच्चों के अभिभावकों ने भी कार्यक्रम में सहयोग दिया l प्रतियोगिता के प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय विजेताओं को 4 सितंबर को मोरहाबादी मैदान स्थित दही हांडी आयोजन स्थल पर माननीय मुख्यमंत्री द्वारा पुरस्कृत किया जाएगा।

     

  • मणिमहेश डल झील में शाही स्नान के लिए उमड़ा आस्था का सैलाब, पंजाब-चंडीगढ़ से पहुंचे श्रद्धालु

    मणिमहेश डल झील में शाही स्नान के लिए उमड़ा आस्था का सैलाब, पंजाब-चंडीगढ़ से पहुंचे श्रद्धालु

    मणिमहेश 

    उत्तर भारत की पवित्र मणिमहेश यात्रा में जन्माष्टमी के पावन अवसर पर आज आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। भगवान शिव के धाम मणिमहेश पहुंच रहे श्रद्धालु पवित्र ‘डल झील’ में सुबह से ही आस्था की डुबकी लगा रहे हैं। इस मौके पर हिमाचल के अलावा पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और जम्मू से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मणिमहेश पहुंच रहे हैं। श्रद्धालु पवित्र झील में स्नान कर भगवान शिव के दर्शन और पूजा-अर्चना कर रहे हैं। मणिमहेश यात्रा 2026 आधिकारिक तौर पर 19 सितंबर तक चलेगी।

    मणिमहेश झील समुद्र तल से करीब 13 हजार फीट की ऊंचाई पर कैलाश पर्वत की तलहटी में स्थित है। जिला चंबा प्रशासन के अनुसार, कैलाश चोटी की ऊंचाई करीब 18,564 फीट है। मणिमहेश को भगवान शिव का प्रमुख तीर्थ माना जाता है और यहां हर साल हजारों श्रद्धालु पवित्र डल झील में स्नान के लिए पहुंचते हैं।

    हड़सर से 13 किलोमीटर पैदल चढ़ाई
    मणिमहेश पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को हड़सर से करीब 13 किलोमीटर का पैदल ट्रेक करना पड़ता है। हड़सर तक वाहन पहुंचते हैं। इसके बाद यात्रा पैदल शुरू होती है। रास्ते में धनछो प्रमुख पड़ाव है, जहां श्रद्धालु विश्राम करते हैं। इसके आगे चढ़ाई पार कर मणिमहेश डल झील तक पहुंचा जाता है।

    झील से करीब डेढ़ किलोमीटर पहले गौरी कुंड और शिव क्रोत्री भी धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थल हैं। मान्यता के अनुसार, गौरी कुंड और शिव क्रोत्री में क्रमश: माता पार्वती और भगवान शिव ने स्नान किया था। ज्यादातर श्रद्धालु पैदल यात्रा करते हैं, मगर काफी लोग हेलीटैक्सी से भी मणिमहेश पहुंचते हैं। प्रशासन ने इस बार चार हेलीटैक्सी के साथ मणिमहेश यात्रा के लिए करार किया है।

    राधाष्टमी पर होगा बड़ा शाही स्नान
    जन्माष्टमी के शाही स्नान के बाद अब श्रद्धालुओं की नजर राधाष्टमी पर होने वाले बड़े शाही स्नान पर है। यह 18 और 19 सितंबर को होगा। मणिमहेश यात्रा का यह सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक पड़ाव माना जाता है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।

    इस बार मौसम भी दे रहा साथ
    यात्रा के दौरान इस बार मौसम श्रद्धालुओं का साथ दे रहा है। मौसम अनुकूल रहने से पैदल ट्रैक पर आवाजाही सुगम बनी हुई है। प्रशासन भी श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर निगरानी कर रहा है। एसडीएम भरमौर अजय कुमार सिंह ने बताया कि जन्माष्टमी के शाही स्नान के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मणिमहेश पहुंचे हैं।

    डल झील में शाही स्नान चल रहा है। पिछले साल भारी बारिश और बादल फटने के कारण मणिमहेश यात्रा के दौरान काफी मुश्किलें आई थीं। 25 हजार से ज्यादा श्रद्धालु भरमौर से मणिमहेश के रास्ते में फंस गए थे।

    यात्रा के लिए पंजीकरण अनिवार्य
    प्रशासन ने इस बार मणिमहेश यात्रा के लिए पंजीकरण अनिवार्य किया है। श्रद्धालुओं को भरमौर पहुंचने से पहले पंजीकरण कराने और उसकी रसीद साथ रखने की सलाह दी गई है। हड़सर बेस कैंप पर स्वास्थ्य जांच के बाद ही श्रद्धालुओं को आगे यात्रा की अनुमति दी जाती है। प्रशासन ने यात्रियों से मौसम को देखते हुए गर्म कपड़े, रेनकोट, छाता, टॉर्च और उचित जूते साथ रखने की अपील की है।

    यात्रा का मुख्य आकर्षण भगवान शिव के धाम मणिमहेश में पवित्र डल झील में स्नान है। जन्माष्टमी के शाही स्नान के बाद अब 18-19 सितंबर को होने वाले बड़े शाही स्नान को लेकर भी प्रशासन और श्रद्धालुओं में उत्साह है।

  • राजस्थान में सरकारी नौकरी के नियम सख्त! ट्रेनिंग के बाद नौकरी छोड़ी तो वसूला जाएगा खर्च

    राजस्थान में सरकारी नौकरी के नियम सख्त! ट्रेनिंग के बाद नौकरी छोड़ी तो वसूला जाएगा खर्च

    बीकानेर
    सरकारी नौकरी में नियुक्ति के बाद प्रशिक्षण लेकर जल्द सेवा छोड़ने वाले कर्मचारियों के लिए राज्य सरकार ने नियम सख्त कर दिए है। वहीं महिला कर्मचारियों को चाइल्ड केयर लीव और सरोगेसी के मामले में राहत दी गई है। नए नियम के तहत राजपत्रित पद पर नियुक्ति के बाद स्वतंत्र प्रभार संभालने से पहले निर्धारित प्रशिक्षण लेने वाले कर्मचारी को प्रशिक्षण शुरू होने से पहले बॉन्ड देना होगा। प्रशिक्षण के दौरान या प्रशिक्षण पूरा होने के दो वर्ष के भीतर इस्तीफा देने अथवा दूसरी नौकरी स्वीकार करने पर सरकार प्रशिक्षण पर किए गए खर्च और अन्य प्रशिक्षण संबंधी खर्च की वसूली कर सकेगी। हालांकि, वसूली में कर्मचारी को दिया गया वेतन तथा नियमानुसार मिले यात्रा एवं दैनिक भत्ते शामिल नहीं होंगे।

    यदि कर्मचारी को केंद्र सरकार, किसी अन्य राज्य सरकार, केंद्र या राजस्थान सरकार के पूर्ण अथवा आंशिक स्वामित्व वाले सार्वजनिक उपक्रम, क्वासी-गवर्नमेंट संगठन, आरबीआई या ग्रामीण बैंक में नौकरी मिलती है और इसके लिए राजस्थान सरकार की सेवा छोड़नी पड़ती है, तो बॉन्ड की शर्त उसी रूप में लागू नहीं होगी। ऐसे कर्मचारी से नए नियोक्ता के यहां निर्धारित अवधि तक सेवा करने के लिए नया बॉन्ड लिया जाएगा। अवधि और शर्ते संबंधित प्रशासनिक विभाग तय करेगा।

    6 माह तक की ट्रेनिंग पर 1 साल की सेवा जरूरी
    तीन महीने से अधिक अवधि के प्रशिक्षण पर भेजे गए और नियम 7 (8) (बी) के तहत ड्यूटी पर माने गए कर्मचारियों पर भी बॉन्ड की शर्त लागू होगी। 3 महीने से अधिक और 6 महीने तक के प्रशिक्षण के बाद कम से कम एक वर्ष राज्य सेवा करनी होगी। 6 महीने से अधिक के प्रशिक्षण के बाद कम से कम दो वर्ष राज्य सेवा करनी होगी। निर्धारित अवधि पूरी किए बिना सेवा छोड़ने या दूसरी नौकरी स्वीकार करने पर प्रशिक्षण पर हुए खर्च की वसूली का प्रावधान रहेगा।

    पहले से आवेदन किया है, तो भी मिल सकेगी अनुमति
    यदि किसी ने राजस्थान सरकार की सेवा में आने से पहले ही केंद्र सरकार, अन्य राज्य सरकार, सरकारी उपक्रम या संबंधित संस्थाओं में आवेदन कर रखा था और उस समय आवेदन उचित माध्यम से भेजना संभव नहीं था, तो उसे भी इस प्रावधान का लाभ मिल सकता है। इसके लिए कर्मचारी को राजस्थान सरकार की सेवा में शामिल होने के एक महीने के भीतर सरकार को इसकी सूचना देनी होगी। चाइल्ड केयर लीव के नियमों में भी बदलाव किया गया है। अब सामान्य स्थिति में यह अवकाश एक कैलेंडर वर्ष में तीन से अधिक स्पेल में नहीं दिया जाएगा।

    पहली बार अलग मातृत्व अवकाश
    यदि सरोगेट मां और कमीशनिंग मां में से कोई एक या दोनों सरकारी कर्मचारी हैं, तो सरोगेट मां को 180 दिन तक मातृत्व अवकाश, कमीशनिंग मां को 90 दिन तक मातृत्व अवकाश मिल सकेगा। सरोगेट मां के लिए विवाहित महिला सरकारी कर्मचारी होना, उम्र 25 से 35 वर्ष के बीच होना और इम्प्लांटेशन के समय उसका स्वयं का बच्चा होना जैसी शर्तें रखी गई हैं। वहीं कमीशनिंग मां की उम्र 23 से 50 वर्ष के बीच होनी चाहिए।

  • बेंगलुरु में बिहार महोत्सव का भव्य आगाज, लोक संस्कृति से लेकर बिहारी व्यंजनों तक दिखी बिहार की झलक

    बेंगलुरु में बिहार महोत्सव का भव्य आगाज, लोक संस्कृति से लेकर बिहारी व्यंजनों तक दिखी बिहार की झलक

    पटना
    कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में गुरुवार को चार दिनी बिहार महोत्सव 2026 का शानदार आगाज हुआ। छह सितंबर तक चलने वाले इस महोत्सव का मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने द आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर में श्रीश्री रवि शंकर की गरिमामयी उपस्थिति में शुभारंभ किया। इस आयोजन के माध्यम से बिहार की जीवंत लोक परंपराओं, विशिष्ट खान-पान, हस्तशिल्प और आधुनिक उद्यमिता को एक मंच पर लाया गया है, जिसमें एक लाख से अधिक लोगों के शामिल होने की उम्मीद है।

    इस अवसर पर बिहार विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी, अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री जमा खान सहित कई विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे। शाम की शुरुआत गौरव और अपनत्व की भावना से ओत-प्रोत बिहार गौरव गान की भावपूर्ण प्रस्तुति के साथ हुई। इसके बाद बिहार की विशिष्ट लोक नृत्य परंपराओं में शामिल झिझिया की शानदार प्रस्तुति ने दर्शकों का मन मोह लिया। कलाकारों ने सिर पर दीप रखकर मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किया।

    समृद्ध लोक परंपराओं की झलक देखने को मिलेगी
    महोत्सव के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बिहार की समृद्ध लोक परंपराओं की झलक देखने को मिलेगी। इनमें झिझिया, सामा-चकेवा, कजरी और झूमर प्रमुख हैं। प्रसिद्ध लोक गायिका कल्पना पटवारी और लोक गायक सत्येंद्र कुमार संगीत बिहार की संगीत विरासत को मंच पर जीवंत करेंगे।

    सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के अलावा महोत्सव में श्रीश्री योग सत्र, आयुर्वेद एवं वेलनेस सत्र, शास्त्रीय नृत्य कार्यशालाएं, भजन क्लबिंग और ध्यान कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। महोत्सव के दौरान आर्ट ऑफ लिविंग के विशेष कार्यक्रमों के तहत हैप्पीनेस और सहज समाधि पाठ्यक्रम भी आयोजित होंगे। इसकी तैयारी पूरी कर ली गई है।

    श्रीश्री रविशंकर बोले -बिहार के हर क्षेत्र में बड़ा बदलाव आया
    गुरुदेव श्रीश्री रविशंकर ने पिछले कई दशकों में बिहार में आए व्यापक बदलाव को याद करते हुए कहा, मैंने बिहार को देखा है और आज के बिहार को भी देख रहा हूं। दोनों में जमीन-आसमान का अंतर है। बिहार में अपने कार्यों के दिनों को याद करते हुए श्रीश्री ने राज्य में हुए एक महत्वपूर्ण सामाजिक परिवर्तन का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि किस तरह कभी एक-दूसरे के कट्टर विरोधी रहे रणवीर सेना और सीपीआई-एमएल के विद्रोहियों को एक साथ लाकर ध्यान और सुदर्शन क्रिया का अभ्यास कराया था। अंतिम दिन दोनों समूहों के सदस्यों की आंखों में आंसू थे और उन्होंने एक-दूसरे को गले लगाया। इससे पूरे वातावरण में अपनत्व और शांति की एक नई भावना का संचार हुआ। श्रीश्री ने कहा, “दोनों समूह एक-दूसरे से मिले, आंसू बह निकले और पूरा वातावरण बदल गया। उन्होंने कहा कि बिहार में वर्तमान विकास की गति पर कहा कि चाहे आप पूर्णिया देखें, भागलपुर या दूसरे जिले, आप देख सकते हैं कि कितना विकास हुआ है। बिहार को बहुत-बहुत बधाई। कहा कि सम्राट चौधरी बहुत मेहनती हैं और वे बिहार को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे।

    समृद्ध बिहार से पूरा होगा विकसित भारत का सपना: सम्राट
    मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रवासी बिहारियों से अपने राज्य के विकास में योगदान देने की अपील की है। उन्होंने कहा कि बिहार को अब विकास और समृद्धि के नए दौर में आगे ले जाना है। इसके लिए बिहार के बाहर रहने वाले सभी लोगों का सहयोग आवश्यक है। बिहार की धरती ने भगवान बुद्ध, भगवान महावीर, गुरु गोविंद सिंह और महात्मा गांधी जैसे महान व्यक्तित्वों को अपनी विरासत से जोड़ा है। आज आवश्यकता है कि बिहार के लोग अपनी कर्मभूमि के साथ-साथ अपनी जन्मभूमि के विकास में भी सहयोग करें। बिहार समृद्ध होगा, तभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को साकार किया जा सकेगा।

    बिहारी व्यंजन और मधुबनी पेंटिंग के स्टॉल
    सीएम ने कहा कि अगले दो वर्षों में 31 दिसंबर 2028 तक बिहार में मां सीता का भव्य मंदिर स्थापित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मार्गदर्शन में बिहार ने विकास की लंबी यात्रा तय की। उन्होंने कहा कि आज का युग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का है। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने आर्ट ऑफ लिविंग प्रांगण में लगे बिहार के व्यंजन, मधुबनी पेंटिंग्स सहित अन्य स्टॉलों का अवलोकन किया। इससे पहले मुख्यमंत्री ने गौशाला, आश्रम में स्थित गुरुकुल का भ्रमण किया और गणेश मंदिर में पूजा कर बिहारवासियों की सुख, समृद्धि की कामना की।मुख्यमंत्री ने पाग और अंगवस्त्र भेंटकर श्रीश्री रविशंकर जी का स्वागत किया।

    बिहार की विरासत को विश्व पटल पर पहुंचाना हमारा दायित्व : डॉ. प्रेम कुमार
    विधान सभा के अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि बिहार की गौरवशाली विरासत को विश्व पटल पर पहुंचाना हमारा दायित्व है। बिहार का इतिहास जितना प्राचीन है, उतना ही गौरवशाली भी है। प्राचीन काल में पाटलिपुत्र विश्व की महानतम राजधानियों में शामिल रहा है। उन्होंने कहा कि आज का दिन हम सभी के लिए अत्यंत गौरव, आत्मसम्मान और अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को स्मरण करने का अवसर है।

    बिहारी जहां भी रहते हैं, नाम रोशन करते हैं: सरावगी
    बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी गुरुवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ बेंगलुरु पहुंचे। एयरपोर्ट पर बड़ी संख्या में मौजूद बिहारवासियों ने दोनों का गर्मजोशी से स्वागत किया। ‎इस मौके पर सरावगी ने कहा कि बिहार के लोग देश के जिस भी हिस्से में रहते हैं, अपनी मेहनत, प्रतिभा और संस्कारों के माध्यम से बिहार का नाम रोशन कर रहे हैं। भाजपा अध्यक्ष श्री श्री गौशाला पहुंचे और वहां गौ सेवा की। सरावगी ने कहा यहां बिहार के लोगों से मिले स्नेह, सम्मान और अपनत्व से वह अभिभूत हूं। उन्होंने कहा कि बिहार से दूर रहकर भी अपनी माटी, संस्कृति और संस्कारों से जुड़े आप सभी लोगों का यह स्नेह हृदय को छू गया।

    बिहार में सेवा और साधना प्रयासों से आया बड़ा बदलाव
    चार दशकों से अधिक समय से श्रीश्री रवि शंकर और द आर्ट ऑफ लिविंग ने बिहार के कुछ चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में काम किया है। संस्था ने कभी हिंसा और उपेक्षा के लिए पहचाने जाने वाले क्षेत्रों को संवाद और पुनर्निर्माण के केंद्रों में बदलने का प्रयास किया है। नक्सली संघर्ष से प्रभावित रहे गांवों में वर्षों तक चले संवाद और ध्यान के प्रयासों ने 100 से अधिक समुदायों को पुरानी हिंसा और प्रतिशोध के चक्र से बाहर निकलने में मदद की है। आज इन समुदायों ने शिक्षा, कृषि और शांतिपूर्ण जीवन की दिशा में आगे बढ़ना शुरू किया है। प्रिजन प्रोग्राम के माध्यम से कैदियों को मानसिक शांति और सुधार की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिला है।

  • DA विवाद: पंजाब सरकार ने केंद्र के बराबर वेतन-DA का दिया ऑफर, फिर भी कर्मचारी अड़े

    DA विवाद: पंजाब सरकार ने केंद्र के बराबर वेतन-DA का दिया ऑफर, फिर भी कर्मचारी अड़े

    अमृतसर 

    पंजाब सरकार और कर्मचारियों के बीच चल रहे डीए विवाद के बीच मान सरकार ने कर्मचारियों को नया ऑफर दिया है। वित्तमंत्री हरपाल सिंह चीमा ने वीरवार को दावा किया कि पंजाब सरकार सूबे के कर्मचारियों को केंद्रीय कर्मियों के बराबर वेतन प्लस डीए देने को तैयार है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार केवल केंद्र के डीए प्रतिशत की नकल करने के बजाय समग्र वेतन पैकेज को केंद्र के बराबर करने के लिए तैयार है। 

    वित्तमंत्री ने दावा किया कि पंजाब अपने राजस्व का 51 फीसदी वेतन और पेंशन पर खर्च करता है, जो प्रमुख राज्यों में सबसे अधिक है। साथ ही पंजाब में कर्मचारियों का वेतन पड़ोसी राज्य हरियाणा, गुजरात, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश समेत अन्य राज्यों से अधिक है। वित्तमंत्री चीमा ने कहा कि डीए के बकाया भुगतान के लिए सरकार ने लिक्विडेशन प्लान बनाया हुआ है। इसके तहत चरणबद्ध भुगतान योजना के तहत बकाया डीए का किस्तों में भुगतान किया जा रहा है और आगे भी इसी तरह किया जाता रहेगा।

    मंत्री अमन अरोड़ा और डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि यह बकाया शिअद-भाजपा गठबंधन और कांग्रेस के कार्यकाल का है, जिसे आम आदमी पार्टी की सरकार डीए की दर बढ़ाते हुए चुका रही है। लिहाजा कर्मचारियों को सरकार का सहयोग करना चाहिए, क्योंकि कर्मचारी प्रशासनिक व्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं। उन्हें विपक्षी दलों के बहकावे में नहीं आना चाहिए। सरकार कर्मचारियों के साथ फिर बातचीत के लिए तैयार है।

    क्या है लिक्विडेशन प्लान?
    पंजाब सरकार ने कर्मचारियों और पेंश
    नभोगियों के छठे वेतन आयोग के तहत लंबित डीए/डीआर के करीब 14,191 करोड़ रुपये के बकाये के भुगतान के लिए लिक्विडेशन प्लान तैयार किया है। इसके तहत सरकार ने पूरी राशि एकमुश्त देने के बजाय पांच वित्तीय वर्षों (2024-25 से 2028-29) में चरणबद्ध तरीके से भुगतान का प्रस्ताव रखा है। वित्तमंत्री का दावा है कि बकाये की अदायगी मासिक किस्तों के जरिये की जा रही है।

    इसके तहत पेंशनभोगियों के लिए उम्र के आधार पर अलग-अलग किस्तों का प्रावधान किया गया था। 85 वर्ष से अधिक उम्र वालों को दो, 75 से 85 वर्ष वालों को 12 और 75 वर्ष से कम उम्र वालों को 42 मासिक किस्तों में भुगतान की रूपरेखा बनाई गई है। अब तक करीब 4500 करोड़ रुपये के बकाये का भुगतान किया जा चुका है। हालांकि, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने अगस्त 2026 में इस लिक्विडेशन प्लान को रद्द कर 14 दिनों में पूरा बकाया चुकाने का आदेश दिया। इसके खिलाफ पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दाखिल की है।

    केंद्र-पंजाब के वेतन और डीए में फर्क
    – पंजाब में क्लर्क इस वक्त 42 प्रतिशत डीए के हिसाब से टेक होम यानी हाथ में आने वाला शुद्ध वेतन 54,812 रुपये प्राप्त करते हैं जबकि केंद्र के अधीन क्लर्कों को 60 प्रतिशत डीए के साथ 36,960 रुपये वेतन मिलता है।
    – इसी तर्ज पर पंजाब के ड्राइवर 40,612 रुपये वेतन पाते हैं जबकि केंद्र के ड्राइवरों को 36,960 रुपये मिलते हैं।
    – पंजाब के स्टेनोग्राफर का वेतन 56,374 रुपये है जबकि केंद्र का 47,360 रुपये।
    – पंजाब के ईटीटी टीचर का 67,592 रुपये वेतन मिल रहा है जबकि केंद्र के टीचरों का वेतन 65,760 रुपये है।
    – पंजाब के पुलिस कांस्टेबल 54,812 रुपये वेतन पाते हैं, जबकि केंद्र के 36,960 रुपये।
    – सरकार यदि पंजाब के कर्मचारियों को केंद्र की तर्ज पर 60 प्रतिशत डीए देती है तो कर्मियों का वेतन और बढ़ जाएगा।

    कर्मचारियों का कड़ा रुख
    बकाया डीए के लिए संघर्ष कर रही पंजाब कर्मचारियों की विभिन्न जत्थेबंदियों की ज्वाइंट एक्शन कमेटी के समन्वयक सुखचैन सिंह खैहरा समेत अन्य नेताओं ने कहा कि कर्मचारी किसी भी तरह से गुमराह नहीं हैं। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट पंजाब सरकार का लिक्विडेशन प्लान रद्द करते हुए बकाया डीए के भुगतान का आदेश दे चुका है। इसके बावजूद पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल कर दी है।

    कर्मचारी नेताओं ने कहा कि इसके अलावा आंदोलन के तहत कर्मचारियों द्वारा सामूहिक अवकाश लेने के बावजूद उनके खिलाफ अनधिकृत रूप से अवकाश लेने पर कार्रवाई के नोटिस जारी किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार हाईकोर्ट का आदेश लागू नहीं करेगी और सुप्रीम कोर्ट से याचिका तथा कार्रवाई के नोटिस वापस नहीं लेगी, तब तक कर्मचारी किसी भी बात के लिए तैयार नहीं हैं। 

    वेतन और डीए पर सरकार ने बताए छह प्रमुख तथ्य
    – पंजाब के कर्मचारी देश में सबसे अधिक वेतन पाने वालों में

    पंजाब सरकार के कर्मचारी देश में सबसे अधिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों में शामिल हैं। राज्य की अधिक बेसिक-पे संरचना के कारण कई प्रमुख श्रेणियों में पंजाब के कर्मचारियों का टेक-होम वेतन उनके केंद्र सरकार के समकक्ष कर्मचारियों की तुलना में अधिक है।

    – राजस्व का 51% वेतन और पेंशन पर खर्च
    पंजाब अपने राजस्व प्राप्तियों का 51% वेतन और पेंशन पर खर्च करता है, जो प्रमुख राज्यों में सबसे अधिक है। इसके मुकाबले अखिल भारतीय औसत 38% है।

    – तीन किस्तों में डीए में 14% की बढ़ोतरी
    भगवंत मान सरकार ने नवंबर 2021 में डीए को 28% से बढ़ाकर नवंबर 2024 में 42% किया है। तीन किस्तों में हुई इस बढ़ोतरी के तहत अक्टूबर 2022 में डीए 34%, दिसंबर 2023 में 38% और नवंबर 2024 में 42% किया गया।

    – 14,100 करोड़ रुपये की डीए बकाया देनदारी विरासत में मिली
    तथ्य पत्र के अनुसार, लगभग 14,100 करोड़ रुपये की डीए बकाया देनदारी 2016-21 की अवधि से संबंधित है और पिछली कांग्रेस तथा अकाली-भाजपा सरकारों से विरासत में मिली है।

    – विरासत में मिले बकाये में से 4,500 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान
    भगवंत मान सरकार ने विरासत में मिले डीए बकाये को समाप्त करने की प्रतिबद्धता जताई है और कर्मचारियों तथा पेंशनरों को इस देनदारी में से 4,500 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान पहले ही किया जा चुका है।

    – 60% डीए करने पर सालाना 6,500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ
    पंजाब में डीए को 60% करने पर राज्य के सरकारी खजाने पर लगभग 6,500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वार्षिक बोझ पड़ेगा। इसके लिए इसे आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं पर होने वाले खर्च के साथ संतुलित करना होगा।

    क्या बोले मंत्री?
    – वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने आगे कहा कि भगवंत मान सरकार ने तीन किस्तों में डीए में 14 प्रतिशत अंकों की बढ़ोतरी की है। उन्होंने कहा, “राज्य की पर्याप्त वित्तीय चुनौतियों के बावजूद वर्तमान सरकार ने नवंबर 2021 में डीए को 28% से बढ़ाकर तीन किस्तों में 42% किया है। अक्टूबर 2022 में यह 34%, दिसंबर 2023 में 38% और नवंबर 2024 में 42% किया गया।

    – मंत्री अमन अरोड़ा ने कर्मचारी यूनियनों से टकराव के बजाय बातचीत के माध्यम से सरकार के साथ मुद्दे उठाने की अपील की। उन्होंने कहा, कर्मचारी सुशासन की रीढ़ हैं। हम यूनियनों से अपील करते हैं कि वे विपक्षी दलों के राजनीतिक अवसरवाद को पहचानें, जिन्होंने चुनावों से पहले वित्तीय प्रावधान किए बिना वादे किए थे। हम मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के साथ बातचीत की मेज पर सभी लंबित मुद्दों को हल करने के लिए तैयार हैं, ताकि कर्मचारियों के हितों की रक्षा हो और पंजाब की जनता पर असहनीय बोझ भी न पड़े।

    – कानूनी और वैधानिक स्थिति स्पष्ट करते हुए सामाजिक सुरक्षा मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि राज्य का रुख पंजाब सिविल सर्विसेज (रिवाइज्ड पे) रूल्स, 2021 पर आधारित है। उन्होंने कहा, पंजाब सरकार के कर्मचारियों के वेतन और डीए का निर्धारण पंजाब सिविल सर्विसेज (रिवाइज्ड पे) रूल्स, 2021 के तहत होता है, जिन्हें संविधान के अनुच्छेद 309 के तहत बनाया गया है।

    इन नियमों में डीए का कोई निश्चित प्रतिशत या ऐसा कोई स्वचालित फॉर्मूला निर्धारित नहीं है, जिसके तहत पंजाब को केंद्र सरकार की डीए दर से मेल करना अनिवार्य हो। उन्होंने कहा कि पंजाब के पास अपने कर्मचारियों की सेवा शर्तें निर्धारित करने का सांविधानिक  अधिकार है। उन्होंने कहा, पंजाब के पास अपनी वित्तीय परिस्थितियों के अनुसार अपने कर्मचारियों के वेतन का निर्धारण करने का संवैधानिक और वैधानिक अधिकार है। ऐसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं है, जिसके तहत प्रत्येक राज्य के लिए केंद्र सरकार की डीए दर को स्वतः दोहराना अनिवार्य हो। राज्य को अपने कर्मचारियों के कल्याण और सार्वजनिक सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए उपलब्ध वित्तीय संसाधनों के बीच संतुलन बनाना होगा। 

  • अभिजीत दीपके की पार्टी में बगावत, कौन हैं मनीष ब्रह्मभट्ट जिन्होंने बनाई CJP-D?

    अभिजीत दीपके की पार्टी में बगावत, कौन हैं मनीष ब्रह्मभट्ट जिन्होंने बनाई CJP-D?

    नई दिल्ली

    कॉकरोच जनता पार्टी बनी और टूटकर दो हिस्से होने की कगार पर भी है। खबर है कि सामाजिक कार्यकर्ता मनीष ब्रह्मभट्ट ने गुरुवार को कॉकरोच जनता पार्टी D का ऐलान कर दिया है। इसका मतलब 'डेमोक्रेटिक' या 'लोकतांत्रिक' से है। उन्होंने सीजेपी पर राजनीति करने के आरोप लगाए हैं। कौन हैं ब्रह्मभट्ट जो सरकार के खिलाफ प्रदर्शन के बाद अब अलग सीजेपी की शुरुआत कर रहे हैं।

    ब्रह्मभट्ट के आरोप हैं कि संगठन अब AAP यानी आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल के करीबी लोगों की 'मनमाने ढंग से चुनी गई टीम' बन गया है। साथ ही कहा कि इसमें आंदोलन में शामिल रहे लोगों को प्रतिनिधित्व करने का मौका नहीं मिल रहा है। ब्रह्मभट्ट ने कहा, 'आज हम कॉकरोच जनता पार्टी-लोकतांत्रिक की शुरुआत कर रहे हैं।'

    कौन हैं मनीष ब्रह्मभट्ट
    एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स के माय नेता पर दर्ज जानकारी के अनुसार, ब्रह्मभट्ट गुजरात के पालनपुर के हैं। उन्होंने हेमचंद्राचार्य यूनिवर्सिटी से साल 2006 में एलएलबी की है। इससे पहले इसी विश्वविद्यालय से 2005 में बीकॉम की थी। खास बात है कि वह चुनावी राजनीत में भी किस्मत आजमा चुके हैं, लेकिन कुछ खास सफलता नहीं मिली।

    उन्होंने साल 2022 में पालनपुर सीट से ही गुजरात विधानसभा चुनाव लड़ा था। निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरे ब्रह्मभट्ट को हार का सामना करना पड़ा था और महज 964 वोट ही हासिल किए थे। इस सीट पर तब भारतीय जनता पार्टी उम्मीदवार अनिकेत ठक्कर ने 95 हजार से ज्यादा वोट लेकर जीत हासिल की थी।

    अलग होकर क्या बोले मनीष ब्रह्मभट्ट
    CJP-डेमोक्रेटिक के फाउंडर ब्रह्मभट्ट ने कहा, 'आज हम 'कॉकरोच जनता पार्टी डेमोक्रेटिक' लॉन्च कर रहे हैं… हमें ऐसा क्यों करना पड़ा? यह आंदोलन देश का था। यह इसलिए सफल हुआ क्योंकि लोगों ने इसमें अपना खून-पसीना बहाया था, लेकिन आंदोलन की सफलता के बाद इसे बेच दिया गया और इसका राजनीतिकरण कर दिया गया। अब यह 'टीम केजरीवाल' बन गई है क्योंकि अभिजीत दीपके और अन्य लोगों ने अपने घरों में आराम से बैठकर 12 सदस्यों की टीम बना ली।'

    उन्होंने कहा, 'आंदोलन की सफलता के बाद किसी भी वॉलंटियर या प्रदर्शनकारी को न तो बुलाया गया और न ही उनसे राय ली गई। सोशल मीडिया या इंस्टाग्राम से जुड़े लोगों से भी जरूरी शर्तों के बारे में नहीं पूछा गया। इसके बजाय उन्होंने आम आदमी पार्टी से जुड़े आठ लोगों, एक महिला मित्र और कॉलेज के दोस्तों को शामिल करके टीम बना ली।'

    उन्होंने कहा, 'हम चाहते थे कि यह एक राष्ट्रीय टीम हो, जिसमें हर राज्य से पांच लोग हों और उन क्षेत्रों से प्रदर्शनकारियों और वॉलंटियर्स को चुना जाए। हमने इच्छा जताई थी कि चयन प्रक्रिया 'हाई कमांड' या किसी मनमाने अधिकारी के इशारे पर न हो, लेकिन उन्होंने इस इच्छा को ठुकरा दिया और मनमाने ढंग से टीम बना ली। इस टीम को बनाने का विचार भी अरविंद केजरीवाल का ही था क्योंकि वे शुरू से ही धोखेबाज रहे हैं। जब अन्ना आंदोलन शुरू हुआ, तो उन्होंने अन्ना का फायदा उठाया…।'