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  • 12 सितंबर को राष्ट्रीय लोक अदालत में ई-चालानों का निपटारा, जुर्माने में मिलेगी छूट

    12 सितंबर को राष्ट्रीय लोक अदालत में ई-चालानों का निपटारा, जुर्माने में मिलेगी छूट

     मुजफ्फरपुर
    वाहन चालकों के लंबित ई-चालानों के निपटारे के लिए 12 सितंबर 2026 को राष्ट्रीय लोक अदालत (National Lok Adalat 2026) का आयोजन होगा। 'एकमुश्त समाधान योजना 2026' के तहत जुर्माने की राशि में छूट का लाभ मिलेगा।

    इसको लेकर राज्य परिवहन आयुक्त आरिफ अहसन ने पत्र जारी किया है। टोल प्लाजा से कटे ई-चालानों के लिए कहा गया है कि जिस जिले में टोल प्लाजा है, उसी जिले में उससे जुड़े लंबित चालानों का निपटारा होगा। लोक अदालत से पहले प्री-रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया गया है।

    जिला विधिक सेवा प्राधिकार में पांच सितंबर से परिवहन व यातायात पुलिस के दो-दो काउंटर बनाए जाएंगे। यहां चालान की छाया प्रति व अन्य कागजात जमा करना होगा। वाहन मालिकों को टोकन दिया जाएगा। परिवहन-यातायात पुलिस जुर्माने के चालान का वेरिफिकेशन लोक अदालत से पहले ही करेगी।

    इससे लोक अदालत में वाहन मालिकों को जुर्माने की राशि जमा करने में अधिक समय नहीं लगेगा। साथ ही तेजी से मामले का निपटारा होगा। लोक अदालत में 31 मई 2026 से पूर्व कटे ई-चालान का ही समझौते के तहत निपटारा होगा।

    जिला परिवहन पदाधिकारी प्रियंका सिन्हा ने कहा कि आदेशानुसार मामले का निपटारा होगा। वाहन मालिकों की सुविधा का विशेष ध्यान रखा जाएगा। प्राधिकार व विभाग के निर्देशों का शत प्रतिशत पालन होगा। लोक अदालत में जुर्माने से राहत के लिए टोकन के साथ चालान की छाया प्रति, आधार कार्ड, आरसी आदि देना होगा।

    परिवहन विभाग करेगा 19 हजार 691 चालान का निपटारा:
    राष्ट्रीय लोक अदालत में परिवहन विभाग 19 हजार 691 चालान का समझौते के तहत निपटारा करेगा। इससे करीब 28.46 करोड़ रुपये की वसूली होगी। परिवहन विभाग द्वारा 2019 से मई 2026 तक 37,515 चालान किए गए। 56.15 करोड़ जुर्माना किया गया।

    इसमें से अब तक 17,824 वाहन मालिकों ने चालानों की राशि जमा की। इससे विभाग को 27.69 करोड़ रुपये राजस्व की प्राप्ति हुई। जबकि अब भी 19,691 चालान लंबित हैं।

     

  • पंजाब के 82.68 लाख बैंक खातों में ₹3,111 करोड़ लावारिस, कहीं आपका पैसा तो नहीं?

    पंजाब के 82.68 लाख बैंक खातों में ₹3,111 करोड़ लावारिस, कहीं आपका पैसा तो नहीं?

    चंडीगढ़ 

    पंजाब के 82.68 लाख बैंक खातों में 3111 करोड़ रुपये ऐसी रकम है, जिसके असली हकदार या तो खातों से दूर हो चुके हैं या फिर उन्हें अपनी जमा राशि की याद ही नहीं रही। लंबे समय तक लेन-देन नहीं होने के कारण इनमें से बड़ी संख्या में खाते निष्क्रिय हो गए और नियमों के तहत बैंकों ने जमा रकम रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के डिपॉजिटर एंड अवेयरनेस फंड (डीईए) में ट्रांसफर कर दी गई। 

    हैरानी की बात यह है कि बैंकों की तमाम कोशिशों के बावजूद महज 0.48 फीसदी खाताधारकों तक ही पहुंच बनाई जा सकी और उनकी रकम लौटाई गई। राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की हालिया बैठक में पेश रिपोर्ट ने बैंक खातों में जमा इस लावारिस धन की तस्वीर सामने रखी है।

    रिपोर्ट के अनुसार बैंकों की तरफ से विशेष अभियान के तहत 39,918 बैंक खातों में 130 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई है। पंजाब सरकार ने ओडिशा की तर्ज पर सिंगल नोडल अकाउंट तैयार किया है ताकि खातों में जमा राशि के भुगतान में किसी भी तरह की देरी न हो लेकिन बावजूद इसके अधिकतर बैंक इस खाते में राशि जमा नहीं करवा रहे हैं। जानकारी के अनुसार अधिकतर खाते ऐसी परिस्थितियों में निष्क्रिय हुए जब खाताधारक स्थानांतरित हो गए या फिर उनका बैंक बदल गया। समिति के अनुसार बैंक खाताधारकों को ढूंढ रहे हैं जिसके लिए लगातार बैंकों को उचित दिशा-निर्देश जारी किए जा रहे हैं।

    इस तरह निष्क्रिय हो जाता है खाता
    जब किसी खाते में दो साल से ज्यादा कोई लेनदेन या गतिविधि नहीं होती है तो उसे निष्क्रिय कर दिया जाता है। वहीं अगर खाता 10 साल से ज्यादा समय तक निष्क्रिय रहता है तो बैंक उस खाते की राशि को आरबीआई के विशेष फंड में जमा करवा देता है।

    2.49 लाख खाते निष्क्रिय 
    रिपोर्ट के अनुसार विभिन्न बैंकों में इस समय 2.49 लाख बचत खाते निष्क्रिय हैं जिनमें करोड़ों रुपये जमा हैं। इसी तरह प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत खुले 33.50 लाख खाते निष्क्रिय हो गए हैं और इनमें 435 करोड़ रुपये जमा हैं। इनमें ज्यादातर ऐसे खाते शामिल हैं जिन्हें लोगों ने न तो अपडेट करवाया और न ही पिछले काफी समय से लेन-देन किया है जिस कारण यह निष्क्रिय हो रहे हैं।

    निष्क्रिय होने से बचाने के लिए यह सावधानी जरूरी 

        अपने खाते में कुछ महीनों में एक बार लेन-देन जरूर करें।
        नियमित रूप से अपने सभी बैंक खातों की समीक्षा करें, उपयोग में नहीं आने वाले खाते बंद कर दें
        बैंकों में संपर्क के लिए अपनी नवीनतम जानकारी अपडेट करवाएं।
        पासबुक, नेट बैंकिंग से समय-समय पर खाता जांचें
        बैंक के किसी भी अलर्ट और नोटिस को अनदेखा न करें।

     

  • राजस्थान में विशेष शिक्षा शिक्षकों को राहत, अब नहीं दिया जाएगा गैर-शैक्षणिक काम

    राजस्थान में विशेष शिक्षा शिक्षकों को राहत, अब नहीं दिया जाएगा गैर-शैक्षणिक काम

    जयपुर
     विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए श्रीगंगानगर और अलवर से राहत की खबर सामने आई है। दोनों जिलों के शिक्षा विभागों ने निर्देश जारी कर विशेष शिक्षा शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक जिम्मेदारियां नहीं देने को कहा है। यानी अब इन शिक्षकों को कार्यक्रमों और परीक्षाओं के प्रबंधन जैसे ऐसे कामों में नहीं लगाया जाएगा, जो उनकी मुख्य जिम्मेदारी का हिस्सा नहीं हैं।

    75 हजार से ज्यादा बच्चों की जिम्मेदारी
    यह निर्देश ऐसे समय आया है जब प्रदेश के सरकारी स्कूलों में 75 हजार से ज्यादा विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। इन बच्चों की शिक्षा और उन्हें जरूरी सहायता उपलब्ध कराने में विशेष शिक्षा शिक्षकों की महत्लपूर्ण भूमिका है। ऐसे में विभाग का मानना है कि शिक्षकों का समय गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाने के बजाय उन्हें CWSN बच्चों से जुड़े कामों पर ध्यान देना चाहिए।

    शिक्षकों को किन कामों पर देना होगा ध्यान?
    आदेश में बताया गया है कि सरकार ने विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CWSN) के लिए जिला स्तर पर विशेष शिक्षा शिक्षक और रिसोर्स पर्सन नियुक्त किए हैं। इन शिक्षकों को CWSN बच्चों को पढ़ाने और उन्हें उनकी जरूरत के हिसाब से विशेष दक्षताएं देने की ट्रेनिंग मिली हुई है।

    इन शिक्षकों का काम सिर्फ अपने स्कूल के CWSN बच्चों को पढ़ाना नहीं है। उन्हें अपने स्कूल के अलावा आसपास के प्राथमिक एवं प्रारंभिक शिक्षा अधिकारियों और शहरी क्लस्टर प्रारंभिक शिक्षा अधिकारियों के क्षेत्र में आने वाले CWSN बच्चों को भी पढ़ाई में मदद देनी होती है।

    इसके साथ ही इन शिक्षकों को समावेशी शिक्षा से जुड़ी कई गतिविधियां भी संभालनी होती हैं। इनमें CWSN बच्चों के लिए परिवहन, एस्कॉर्ट, रीडर और छात्रवृत्ति भत्ते से जुड़ी सुविधाओं का काम शामिल है। इसके अलावा ऐसे बच्चों की पहचान करना भी इन शिक्षकों की जिम्मेदारी है, जिन्हें विशेष शिक्षा और सहायता की जरूरत है।

    संस्थान प्रधानों को दिए निर्देश
    विभाग ने सभी संस्थान प्रधानों को निर्देश दिए हैं कि विशेष शिक्षा शिक्षकों को अतिरिक्त प्रभार न दिया जाए। उनसे गैर-शैक्षणिक काम कराने के बजाय उन्हें विशेष जरूरत वाले बच्चों की पढ़ाई, मदद और ऐसे बच्चों की पहचान से जुड़े कामों पर ध्यान देने के लिए कहा गया है।

    राजस्थान प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विपिन प्रकाश शर्मा ने भी कहा कि विशेष शिक्षा शिक्षकों को अतिरिक्त जिम्मेदारियां नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि इन शिक्षकों का काम सिर्फ बच्चों को पढ़ाना ही नहीं है। वे स्कूल में विशेष जरूरत वाले बच्चों के व्यवहार को संभालने और उन्हें सहज महसूस कराने में भी मदद करते हैं। उन्होंने कहा कि स्कूल के बाद ब्लॉक स्तर पर तैनात विशेष शिक्षक ऐसे दूसरे बच्चों की पहचान करने और उन्हें सही स्कूलिंग से जोड़ने का काम भी करते हैं। इसलिए इन शिक्षकों पर अतिरिक्त काम का बोझ नहीं डाला जाना चाहिए।

    पहले भी हो चुकी है भर्ती और पदोन्नति
    पिछले साल नवंबर में राज्य सरकार ने 242 विशेष शिक्षा शिक्षकों की भर्ती और पदोन्नति के लिए वित्तीय मंजूरी दी थी। इसके बाद कक्षा 11वीं और 12वीं के विशेष जरूरत वाले बच्चों को पढ़ाई के लिए विशेष शिक्षक मिलने का रास्ता साफ हुआ।

    राज्य में पहली बार विशेष शिक्षा शिक्षकों को व्याख्याता के पद पर भर्ती और पदोन्नत किया गया। इससे पहले साल 2007 में ग्रेड-III शिक्षक के पद पर विशेष शिक्षा शिक्षकों की भर्ती हुई थी। इसके बाद 2015 में कक्षा 9वीं और 10वीं के लिए विशेष शिक्षा शिक्षकों की भर्ती की गई थी।

     

     

  • दिल्ली SIR के बाद 3 दिन में 5.40 लाख दावे-आपत्तियां, वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने के लिए 2.21 लाख आवेदन

    दिल्ली SIR के बाद 3 दिन में 5.40 लाख दावे-आपत्तियां, वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने के लिए 2.21 लाख आवेदन

    नई दिल्ली
    दिल्ली में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होने के बाद महज तीन दिनों में 5.40 लाख क्लेम और आब्जेक्शन और आवेदन प्राप्त हुए हैं। 31 अगस्त को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट प्रकाशित होने के बाद 2 सितंबर तक नाम जोड़ने के लिए फॉर्म-6 के 2,21,806 आवेदन मिले हैं।

    वहीं वोटर लिस्ट से नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 के तहत 51,556 आवेदन आए हैं। वोटर लिस्ट में संशोधन के लिए फॉर्म -S के 2,65,396 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इसके अलावा विदेश में रहने वाले इंडियन वोटर्स के लिए फॉर्म-6ए के 1,372 आवेदन मिले हैं।

    नाम जोड़ने के सबसे ज्यादा आवेदन आए साउथ वेस्ट जिले से
    मुख्य निर्वाचन अधिकारी दिल्ली के अनुसार, सबसे ज्यादा फॉर्म-6 आवेदन साउथ वेस्ट जिले में 25,3 25,332 प्राप्त हुए हैं। इसके बाद साउथ-ईस्ट में 25,795 और साउथ जिले में 22,522 आवेदन आए है। नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 के सबसे ज्यादा 11,626 आवेदन साउथ ईस्ट जिले में मिले हैं।
    3,275 आवेदन ईस्ट जिले से हुए प्राप्त
    वहीं, फॉर्म-S के जरिए वोटर लिस्ट में सुधार के सबसे अधिक 33,275 आवेदन ईस्ट जिले से प्राप्त हुए हैं। SIR के तहत 31 अगस्त से 30 सितंबर तक क्लेम और ऑब्जेक्शन दाखिल किए जा सकते हैं।

    तुगलकाबाद विधानसभा सीट में सबसे ज्यादा नाम हटे
    बता दें कि दिल्ली की तुगलकाबाद विधानसभा सीट में सर्वाधिक नाम हटे हैं। यहां 1,92,419 वोटर्स हैं। इनमें 1,00,345 वोटर्स के नाम ड्राफ्ट रोल में हैं, जबकि 92,074 वोटर्स के नाम लिस्ट में नहीं हैं। अगर 2025 विधानसभा चुनाव पर नजर डालें तो 2,04,802 वोटर्स में से 1,14,402 ने मतदान किया था। यहां पिछले साल वोट डालने वालों की संख्या के बराबर लोगों के नाम तक नहीं जुड़े हैं। इसी तरह ओखला में 3,62,813 वोटर्स में से 1,96,362 के नाम लिस्ट में हैं, जबकि 1,64,451 के नाम कट गए हैं।

     

  • झारखंड के प्लस टू स्कूलों में AI और साइबर सिक्योरिटी की पढ़ाई, 2027-28 से नया सिलेबस

    झारखंड के प्लस टू स्कूलों में AI और साइबर सिक्योरिटी की पढ़ाई, 2027-28 से नया सिलेबस

     रांची
     राज्य के प्लस टू उच्च विद्यालयों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड कोडिंग, साइबर सिक्योरिटी एंड डेटा साइंस, कंप्यूटर साइंस, अप्लाइड इंग्लिश जैसे विषयों में पढ़ाई शुरू करने के लिए सिलेबस तैयार करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

    स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने इसकी जिम्मेदारी झारखंड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (जेसीईआरटी) को सौंपी है। प्रयास है कि शैक्षणिक सत्र 2027-28 से इन विषयों का सिलेबस तैयार हो ताकि इन विषयों की पढ़ाई शुरू की जा सके। जेसीईआरटी को नौवीं से 12वीं कक्षा के लिए इन विषयों का सिलेबस तैयार करना है।

    स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने इन विषयों के लिए माध्यमिक आचार्य के पद पहले ही स्वीकृत कर लिए हैं। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग से इन विषयों में माध्यमिक आचार्य के पदों पर नियुक्ति की अनुशंसा भी विभाग को मिल चुकी है। अनुशंसित अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों की जांच की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।

    उम्मीद की जा रही है कि शीघ्र ही शिक्षकों की नियुक्ति प्लस टू विद्यालयों में हो जाएगी। इधर, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने जेसीईआरटी को कमेटी गठित कर सिलेबस का प्रारुप तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इसमें विशेषज्ञ शिक्षकों का भी सहयोग लेने का निर्देश दिया गया है।

    एनसीईआरटी के दिशा-निर्देशों तथा सीबीएसई स्कूलों में लागू पाठ्यक्रमों को ध्यान में रखते हुए राज्य के लिए सिलेबस तैयार किया जाएगा। सिलेबस तैयार करने के लिए कई कार्यशालाएं भी आयोजित की जाएंगी। उल्लेखनीय है कि राज्य के प्लस टू विद्यालयों के लिए पहली बार माध्यमिक आचार्य के पद सृजित किए गए हैं।

  • DA Hike: पंजाब सरकार का बड़ा तोहफा, 85 हजार कर्मचारियों का DA बढ़कर होगा 60%; केंद्र के बराबर मिलेगा भत्ता

    DA Hike: पंजाब सरकार का बड़ा तोहफा, 85 हजार कर्मचारियों का DA बढ़कर होगा 60%; केंद्र के बराबर मिलेगा भत्ता

    चंडीगढ़ 
    पंजाब के सरकारी
    कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी है. पंजाब सरकार ने राज्‍य के 85 हजार कर्मचारियों को जन्‍माष्‍टमी का बड़ा तोहफा दिया है. कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने बताया कि पंजाब के 85 हजार कर्मचारियों को केंद्रीय कर्मचारियों के बराबर महंगाई भत्ता मिलेगा. अभी इन कर्मचारियों को बेसिक पे यानी मूल वेतन का 42% महंगाई भत्ता दिया जाता है. भगवंत मान सरकार के नए फैसले के मुताबिक, अब 85,000 सरकारी कर्मियों को केंद्र के बराबर यानी मूल वेतन का 60 फीसदी महंगाई भत्ता मिलेगा। 
     
    किन 85 हजार कर्मियों को मिलेगा 60%  DA/ महंगाई भत्ता 
    पंजाब कैबिनेट सब-कमेटी ने साल 2020 के बाद भर्ती हुए कर्मचारियों को केंद्र सरकार के बराबर DA देने का प्रस्ताव तैयार किया है, जिसे मान सरकार मंजूरी देने वाली है. कैबिनेट मंत्री ने बताया कि 17 जुलाई 2020 के बाद जितने कर्मी बहाल हुए हैं उन्‍हें केंद्र के पे-स्‍केल पर बहाल किया गया था, लेकिन उन्‍हें राज्‍य के मुताबिक, 42% महंगाई भत्ता ही दिया जा रहा था. इनकी संख्‍या राज्‍य में करीब 85 हजार है. अब इन्‍हें मान सरकार, केंद्र के बराबर यानी 60 फीसदी महंगाई भत्ता देने जा रही है। 

     

     चीमा ने यह भी दावा किया कि राज्य अपने कर्मचारियों को देश में सबसे अधिक वेतन देता है। उन्होंने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के महंगाई भत्ते को लेकर विपक्षी दलों पर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया।उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री अमन अरोड़ा और सामाजिक सुरक्षा बलजीत कौर के साथ मौजूद चीमा ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पंजाब के कई प्रमुख श्रेणियों के कर्मचारी पहले से ही अधिक वेतन प्राप्त कर रहे हैं।कैबिनेट मंत्री अरोड़ा ने कर्मचारी संगठनों से अपील की कि वे टकराव का रास्ता अपनाने के बजाय सरकार के साथ बातचीत के माध्यम से अपनी बात रखें।

    उन्होंने कहा, ‘‘कर्मचारी सुशासन की रीढ़ हैं। हम कर्मचारी संगठनों से अपील करते हैं कि वे विपक्षी दलों के राजनीतिक अवसरवाद को समझें, जिन्होंने चुनाव से पहले बिना आवश्यक वित्तीय प्रावधान किए वादे किए थे।’’

    उन्होंने कहा, ‘‘हम मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के साथ बातचीत की मेज पर सभी लंबित मुद्दों का समाधान करने के लिए तैयार हैं, ताकि कर्मचारियों के हितों की रक्षा हो सके और पंजाब की जनता पर असहनीय वित्तीय बोझ भी न पड़े।’’

    मंत्रियों का यह बयान ऐसे वक्त आया है जब पंजाब सरकार ने उच्च न्यायालय के उस आदेश को शीर्ष अदालत में चुनौती दी है, जिसमें राज्य के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों का लंबित महंगाई भत्ता (डीए) और महंगाई राहत (डीआर) का बकाया पैसा दो हफ़्ते के अंदर देने को कहा गया था। सरकार की दलील है कि इतने कम समय में कुल 14,191 करोड़ रुपये का बकाया चुकाने का आदेश संवैधानिक रूप से असंभव है।

    चीमा ने करीब 14,000 करोड़ रुपये के बकाया भुगतान नहीं किए जाने के लिए पिछली सरकारों को भी जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार ने अब तक 4,500 करोड़ रुपये के बकाये का भुगतान कर दिया है।सरकारी कर्मचारी, जिन्होंने 27 अगस्त को राज्यव्यापी हड़ताल की थी, लंबित डीए जारी करने समेत अपनी विभिन्न मांगों को स्वीकार करने के लिए राज्य सरकार पर दबाव बना रहे हैं।

    चीमा ने कहा कि पंजाब के कर्मचारियों का मूल वेतन और डीए मिलाकर मिलने वाली राशि हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे अन्य राज्यों के कर्मचारियों से अधिक है। उन्होंने दावा किया कि गुजरात में सरकारी कर्मचारियों का वेतन पंजाब सरकार के कर्मचारियों को मिलने वाले वेतन से 28 प्रतिशत कम है।चीमा ने यह भी दावा किया कि राज्य के कुल राजस्व में सरकारी कर्मचारियों के वेतन और पेंशन पर 51 प्रतिशत राशि खर्च होती है, जबकि अन्य राज्यों में यह औसतन 38 प्रतिशत है।उन्होंने पंजाब में क्लर्क, ड्राइवर, शिक्षक और स्टेनोग्राफर के वेतन की तुलना केंद्र सरकार में इन्हीं पदों पर कार्यरत कर्मचारियों को मिलने वाले वेतन से भी की।उन्होंने दावा किया कि पंजाब सरकार अपने कर्मचारियों को केंद्र सरकार की तुलना में अधिक मूल वेतन दे रही है।

    वित्त मंत्री ने दावा किया कि आम आदमी पार्टी के सत्ता में आने के बाद उसने अपने कर्मचारियों का डीए 28 प्रतिशत से बढ़ाकर 42 प्रतिशत कर दिया।उन्होंने कहा, ‘‘जब आम आदमी पार्टी की सरकार बनी थी, तब कर्मचारियों को 28 प्रतिशत डीए मिल रहा था। हमने इसे अक्टूबर 2022 में बढ़ाकर 34 प्रतिशत, दिसंबर 2023 में 38 प्रतिशत और 2024 में 42 प्रतिशत कर दिया।’’

    उन्होंने विपक्षी दलों पर यह दुष्प्रचार फैलाने का आरोप लगाया कि आप सरकार ने अपने कर्मचारियों का बकाया भुगतान नहीं किया है।

  • दिल्ली-NCR में झमाझम बारिश से बदला मौसम, गरज-चमक के बीच राजधानी में रेड अलर्ट

    दिल्ली-NCR में झमाझम बारिश से बदला मौसम, गरज-चमक के बीच राजधानी में रेड अलर्ट

    नई दिल्ली
    दिल्ली-NCR में मौसम ने शुक्रवार को अचानक करवट ली है. कई इलाकों में तेज गरज के साथ झमाझम बारिश से लोगों को चिलचिलाती गर्मी से राहत मिली है. मौसम विभाग ने राजधानी और आसपास के इलाकों में भारी बारिश की आशंका को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट को बढ़ाकर रेड अलर्ट कर दिया है. मौसम विभाग के इस अलर्ट के बाद दिल्ली और एनसीआर के लोगों को बेहद सतर्क रहने की सलाह दी गई है। 

    जानकारी के मुताबिक, दिल्ली के कई इलाकों के साथ-साथ नोएडा-ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में भी बारिश हुई है. मौसम विभाग ने कुछ इलाकों में मध्यम से तेज बारिश के साथ भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है. लगातार बारिश की स्थिति में निचले इलाकों में पानी भरने और सड़कों पर यातायात की रफ्तार धीमी पड़ने की संभावना है. हालांकि राहत की बात यह है कि जन्माष्टमी के चलते स्कूल-कॉलेज और तमाम दफ्तरों में छुट्टी होने के चलते सड़कों पर ट्रैफिक का कम दबाव रहेगा। 

    मौसम विभाग के ताजा अपडेट के मुताबिक, राजधानी के ज्यादातर हिस्सों में मध्यम बारिश हो सकती है, जबकि कुछ इलाकों में भारी बारिश (50 से 100 मिमी) होने की आशंका है. बारिश के साथ गरज-चमक और बिजली गिरने की भी संभावना जताई गई है. इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं, जिनके झोंकों की रफ्तार 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना है।

    मौसम विभाग ने लोगों को मौसम संबंधी अपडेट पर नजर रखने और बेहद जरूरी होने पर ही बारिश के दौरान बाहर निकलने की सलाह दी है। 

    राजस्थान से उत्तर प्रदेश तक भी मौसम विभाग का अलर्ट
    मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर मध्य प्रदेश और दक्षिणी उत्तर प्रदेश के ऊपर एक अच्छी तरह से चिह्नित निम्न दबाव का क्षेत्र बना हुआ है. वहीं मानसून की अक्षीय रेखा भी सक्रिय है और यह श्रीगंगानगर से होकर निम्न दबाव वाले क्षेत्र तक गुजर रही है. इसका असर उत्तर भारत के कई हिस्सों में देखने को मिल रहा है। 

    राजस्थान के पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी हिस्सों में भी भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान जताया गया है. पिछले 24 घंटे में पूर्वी राजस्थान के कई इलाकों में तेज बारिश दर्ज की गई. सवाई माधोपुर के खंडार में सबसे ज्यादा 130 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई. राजस्थान के अलवर, भरतपुर, डीग, दौसा, धौलपुर, जयपुर, सीकर, भीलवाड़ा, अजमेर, करौली, टोंक, बारां, कोटा और झालावाड़ में भी हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। 

     

  • करनाल में NH-44 पर NHAI का अतिक्रमण विरोधी अभियान, हटाए अवैध कब्जे

    करनाल में NH-44 पर NHAI का अतिक्रमण विरोधी अभियान, हटाए अवैध कब्जे

     करनाल
     सड़क सुरक्षा को मजबूत करने और निर्बाध राजमार्ग संचालन सुनिश्चित करने के एक निर्णायक कदम के तहत, एनएचएआई क्षेत्रीय कार्यालय, चंडीगढ़ के अधीन परियोजना क्रियान्वयन इकाई (पीआईयू)-अंबाला ने ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस (ओएंडएम) व्यवस्था के तहत रखरखाव किए जाने वाले पानीपत-खन्ना कॉरिडोर पर करनाल में एनएच-44 के किनारे एक व्यापक अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया।

    इस अभियान का उद्देश्य राष्ट्रीय राजमार्ग को सुरक्षित, सुलभ और बाधाओं से मुक्त रखना था, जिसके तहत राजमार्ग के राइट-ऑफ-वे (मार्ग के अधिकार क्षेत्र) के भीतर अनधिकृत संरचनाओं, सड़क किनारे के अवरोधों और अतिक्रमणों को निशाना बनाया गया।

    यह कार्रवाई राजमार्ग की भूमि की सुरक्षा करने, यातायात की आवाजाही में सुधार लाने और यह सुनिश्चित करने के एनएचएआई के निरंतर प्रयासों का हिस्सा है कि नियमित रखरखाव, आपातकालीन प्रतिक्रिया और अन्य राजमार्ग संचालन बिना किसी रुकावट के किए जा सकें।

    एनएच-44 एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय परिवहन गलियारा है, जिस पर भारी यात्री और वाणिज्यिक यातायात होता है। अतिक्रमण न केवल राजमार्ग की भूमि के प्रभावी उपयोग को सीमित करते हैं, बल्कि गंभीर सुरक्षा खतरे भी पैदा कर सकते हैं, दृश्यता में बाधा डाल सकते हैं और आपातकालीन व रखरखाव कार्यों में रुकावट बन सकते हैं।

    संबंधित टीमों ने दोहराया है कि दोबारा अतिक्रमण को रोकने के लिए साफ किए गए हिस्सों की नियमित रूप से निगरानी की जाएगी। राजमार्ग के किनारे स्थित हितधारकों को भी राजमार्ग की भूमि पर अनधिकृत कब्जे से परहेज करने की सलाह दी गई है।

    यह पहल सड़क उपयोगकर्ताओं और व्यापक जनता के हित में एनएच-44 के पानीपत-खन्ना खंड को सुरक्षित, कुशल, बाधा रहित और पूरी तरह से चालू रखने की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करती है।

  • झारखंड में श्रमिकों को राहत, एक दिन की मजदूरी के लिए घटाई गई कार्य-मात्रा

    झारखंड में श्रमिकों को राहत, एक दिन की मजदूरी के लिए घटाई गई कार्य-मात्रा

     रांची
    राज्य में वीबी जीरामजी योजना के तहत कार्यरत अकुशल श्रमिकों के लिए कार्य की मात्रा पूर्व की तुलना में कम कर दी गई है। इस योजना के अंतर्गत कार्यरत श्रमिकों को अब मिट्टी कटाई के कार्य में पूर्व निर्धारित 73 सीएफटी के स्थान पर औसतन 50.43 सीएफटी कार्य करने पर एक दिन की मजदूरी दिए जाने का प्रविधान किया गया है।

    इसके तहत महिलाओं के लिए इसकी सीमा 46.97 सीएफटी ही रखी गई है। राज्य सरकार यह व्यवस्था कर रही है कि निर्धारित सॉफ्टवेयर सेक्योर साफ्ट में नई दरों को शीघ्र ही अपलोड किया जाए। इससे कार्य की मात्रा एवं मजदूरी भुगतान के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा।

    मजदूरी भुगतान व्यवस्था को अधिक वैज्ञानिक, न्यायसंगत एवं श्रमिक हितैषी बनाने की दिशा में यह पहल की गई है। ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के तहत विभिन्न श्रेणियों के श्रमिकों की कार्यक्षमता, कार्य की प्रकृति, श्रम एवं निर्धारित कार्यदिवस में किए जा सकने वाले कार्य की मात्रा का आकलन किया गया है।

    झारखंड में वर्तमान व्यवस्था के तहत एक दिन की मजदूरी के भुगतान के लिए 73 सीएफटी मिट्टी कटाई का कार्य निर्धारित था। टाइम एंड मोशन के आधार पर अब विभिन्न श्रेणियों के श्रमिकों के लिए कार्य-मात्रा को युक्तिसंगत बनाया गया है।

    इसके माध्यम से यह सुनिश्चित किया गया है कि निर्धारित कार्य-मात्रा एक सामान्य श्रमिक द्वारा सामान्य कार्यदिवस में वास्तविक रूप से पूरी की जा सके। ग्रामीण विकास मंत्रालय के दिशा-निर्देशों में महिलाओं, बुजुर्गों तथा दिव्यांग श्रमिकों के लिए अलग दर निर्धारित करने का भी प्रविधान है। निर्धारित दरों को लेकर मंत्रालय से अनुमोदन प्राप्त हो चुका है।

  • बिहार के शिक्षकों को AI सिखाएगा Google, मास्टर ट्रेनर बनाकर पूरे राज्य में होगा प्रशिक्षण

    बिहार के शिक्षकों को AI सिखाएगा Google, मास्टर ट्रेनर बनाकर पूरे राज्य में होगा प्रशिक्षण

    पटना
     गूगल फाॅर एजुकेशन इंडिया बिहार के शिक्षकों को समूह में एआई का प्रशिक्षण उपलब्ध कराएगा। गूगल के रिसाेर्स पर्सन क्षेत्रवार प्रशिक्षण देंगे।

    सभी शिक्षकों को इस प्रशिक्षण में शामिल में होने को ले शिक्षा मंत्री के स्तर से पत्र भी लिख जा रहा। शिक्षकों के इस प्रशिक्षण के मूल मे है कि AI के उपयोग की ट्रेनिंग लेकर विद्यार्थियों को एआई में दक्ष कर सकें।

    गूगल एजुकेशन फाॅर इंडिया के कंट्री हेड ने अपनी टीम के साथ हाल ही में शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के साथ इस संबंध में बैठक की थी। शनिवार को शिक्षक दिवस के मौके पर इस संबंध में गूगल एजुकेशन फाॅर इंडिया का शिक्षा विभाग के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर होना है।

    रिसोर्स पर्सन को बिहार में तैनात करेगा गूगल
    इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार सहमति पत्र हस्ताक्षर होने के बाद गूगल अपने रिसोर्स पर्सन को प्रशिक्षण के लिए बिहार में तैनात करेगा।

    यह पहली बार हो रहा जब शिक्षकों के तकनीकी प्रशिक्षण खासकर एआई के लिए शिक्षा विभाग गूगल एजुकेश फार इंडिया के साथ किसी तरह का एमओयू कर रहा।

    शिक्षा विभाग पहले जिला स्तर पर शिक्षकों का चयन कर उन्हें मास्टर ट्रेनर के रूप में तैयार करेगा। गूगल अपने एआई प्लेटफाॅर्म पर इन शिक्षकों को यह ट्रेनिंग देगा कि एआई का उपयोग कितनी सहजता से किया जा सकता है।

    छात्रों को एआई में दक्ष बनाने की पहल
    किसी विषय पर सूचना के लिए किस तरह से प्रांप्ट लिखना है यह ट्रेनिंग का खास हिस्सा है। विद्यार्थियों की जरूरत के हिसाब से शिक्षकों को यह ट्रेनिंग दी जाएगी कि वे तय पाठ्यक्रम को और कैसे बेहतर कर सकते हैं।

    इस पूरी कवायद के मूल में शिक्षा विभाग की यह योजना है कि विद्यार्थियों को एआई के उपयोग में दक्ष बनाया जाए। माध्यमिक विद्यालय में पढ़ने वाले विद्यार्थी इसके केंद्र में हैं।

    शिक्षक एआई की मदद से सभी विषयों पर खास तरीके से विद्यार्थियों को उपलब्ध कराएंगे। मास्टर ट्रेनर के माध्यम से अलग-अलग विद्यालय के शिक्षकों को एआई में प्रशिक्षित किया जाएगा।