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  • ममता बनर्जी का बदला सियासी समीकरण, अब लेफ्ट से बातचीत; SIR पर विपक्षी एकता की कवायद

    ममता बनर्जी का बदला सियासी समीकरण, अब लेफ्ट से बातचीत; SIR पर विपक्षी एकता की कवायद

    नई दिल्ली
    ममता बनर्जी की राजनीति एक ही सूत्र पर चलती दिखती है। जरूरत पड़ी तो भाजपा के साथ खड़ी हो गईं, जरूरत पड़ी तो कांग्रेस के साथ चली गईं। अब जरूरत पड़ने पर लेफ्ट की ओर हाथ बढ़ा रही हैं। बंगाल में दशकों तक लेफ्ट को अपना सबसे बड़ा दुश्मन बताने वाली नेता आज उसी लेफ्ट से बात कर रही हैं। यह बदलाव अचानक नहीं आया। सीपीआई(एम) महासचिव एमए बेबी ने चुनाव आयोग और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर के मुद्दे पर विपक्षी नेताओं को पत्र लिखा। पत्र में संयुक्त रणनीति बनाने की बात कही गई। इसके बाद ममता बनर्जी ने उनसे संपर्क किया। दोनों ने फोन पर बात की। चर्चा विपक्षी दलों को एक मंच पर लाने की संभावना पर हुई।

    सेरामपुर की जनसभा में ममता बनर्जी ने कहा कि अब यह देखने की जरूरत नहीं कि कौन लाल है, कौन नीला है या कौन पीला है। अब हम सब एक हैं। उन्होंने 30 सितंबर की प्रस्तावित इंडिया ब्लॉक बैठक का भी जिक्र किया और विपक्षी पार्टियों से एकजुट होने को कहा। बयान साफ है। रंग अब मायने नहीं रखते। लेकिन बंगाल की राजनीति में यह बात नई है। तृणमूल कांग्रेस बनी ही लेफ्ट को हराने के वादे पर थी। ममता बनर्जी सालों तक सीपीआई(एम) की सबसे बड़ी विरोधी रहीं। अब वही नेता लेफ्ट के साथ बैठने को तैयार हैं।

    लेफ्ट विरोध से बनी पहचान
    बंगाल में ममता बनर्जी की राजनीतिक पहचान लेफ्ट फ्रंट के विरोध से बनी। 1998 में उन्होंने कांग्रेस छोड़ी और तृणमूल कांग्रेस बनाई। इसके बाद पार्टी लेफ्ट की मुख्य चुनौती बन गई। 2011 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल-कांग्रेस गठबंधन ने 34 साल पुरानी लेफ्ट सरकार को हराया। ममता मुख्यमंत्री बनीं। लेफ्ट को भारी हार मिली। उसके बाद लंबे समय तक ममता बनर्जी लेफ्ट को बंगाल की तरक्की में सबसे बड़ी रुकावट बताती रहीं। सीपीआई(एम) तृणमूल पर हिंसा, मौकापरस्ती और असहिष्णुता के आरोप लगाती रही। दोनों पक्ष सड़क से विधानसभा तक एक-दूसरे के खिलाफ लड़ते रहे।

    अब उन्हीं दो ताकतों को साथ आने के लिए कहा जा रहा है। पुराने आरोपों का कोई सार्वजनिक हिसाब नहीं हुआ। दशकों की दुश्मनी कैसे खत्म हुई, इसका कोई साफ जवाब भी नहीं दिया गया। जब बंगाल में लेफ्ट पर हमला करना होता है, पुराने आरोप काम आते हैं। जब बड़े विपक्षी मंच की जरूरत होती है, तो लाल, नीला और पीला रंग एक हो जाते हैं

    भाजपा के साथ भी गईं, कांग्रेस के साथ भी
    राष्ट्रीय राजनीति में ममता बनर्जी का सफर बार-बार रुख बदलने का रहा है। 1999 में तृणमूल भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए में शामिल हुई। ममता रेल मंत्री बनीं। 2001 में एनडीए छोड़ दिया। 2003 में वाजपेयी सरकार में वापस आईं। 2004 में कोयला और खान मंत्री रहीं। 2009 में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए-2 सरकार में शामिल हुईं और फिर रेल मंत्री बनीं। 2012 में मल्टी-ब्रांड रिटेल में एफडीआई, डीजल की कीमतें बढ़ाने और एलपीजी सब्सिडी सीमित करने जैसे मुद्दों पर समर्थन वापस ले लिया।

    यानी भाजपा कभी गठबंधन साथी रही, कभी दुश्मन। कांग्रेस कभी सहयोगी रही, कभी निशाना। लेफ्ट कभी मुख्य दुश्मन था, अब विपक्षी एकता के नाम पर उससे संपर्क हो रहा है।

    लेफ्ट के सामने उलझन
    सीपीआई(एम) ने साफ कहा है कि यह तृणमूल के साथ चुनावी गठबंधन नहीं है। पार्टी इसे चुनाव आयोग और एसआईआर जैसे मुद्दों पर विपक्ष को जोड़ने की कोशिश बता रही है। लेकिन बंगाल में लेफ्ट के कार्यकर्ताओं के लिए यह आसान नहीं। दशकों से वे तृणमूल के खिलाफ लड़ते रहे हैं। ऐसे में किसी भी सहयोग से उनके समर्थकों में भ्रम फैल सकता है। पार्टी के वैकल्पिक राजनीति के दावे पर भी असर पड़ सकता है।

    सीपीआई(एम) नेता सुजान चक्रवर्ती ने कहा है कि लेफ्ट का भाजपा विरोध नया नहीं है। पार्टी अकेले भी भाजपा से लड़ती रही है। उनके बयान से साफ है कि बंगाल लेफ्ट तृणमूल के साथ किसी समझ को लेकर सतर्क है। यह सतर्कता स्वाभाविक है। तृणमूल की पहचान लेफ्ट को हराकर बनी थी, उसके साथ हाथ मिलाकर नहीं। जो पार्टी खुद को लेफ्ट शासन का विकल्प बताती थी, अब लेफ्ट का सहयोग मांग रही है क्योंकि उसे बड़े राजनीतिक कवर की जरूरत है।

    शुभेंदु अधिकारी का हमला
    बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इस नए समीकरण पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जो पार्टी कभी सीपीएम के खिलाफ लड़ती थी, अब उसी की दोस्त बन रही है। तृणमूल कांग्रेस का जन्म सीपीएम के लंबे शासन के खिलाफ हुआ था। आज वही सीपीएम उसकी राजनीतिक साझेदार बन गई है। इस दौरान उन्होंने विधानसभा की एक घटना का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, वोटिंग के दौरान तृणमूल के एक हिस्से और सीपीआई(एम) के अकेले विधायक का रुख एक जैसा रहा। उन्होंने इसे दोनों पक्षों के बीच बनती समझ का संकेत बताया।

    सिद्धांत या मौजूदा जरूरत?
    अभी तृणमूल और सीपीआई(एम) के बीच कोई पक्का चुनावी गठबंधन घोषित नहीं हुआ है। बातचीत हो रही है। चुनिंदा मुद्दों पर साथ काम करने की अपील की जा रही है। लेकिन बड़ा संदेश पहले से साफ है। ममता बनर्जी की राजनीति में कल के सिद्धांत आज की जरूरत के हिसाब से बदल सकते हैं। जब भाजपा चाहिए थी, एनडीए में गईं। जब कांग्रेस चाहिए थी, यूपीए में गईं। जब लेफ्ट को हराना था, एंटी-लेफ्ट राजनीति को आंदोलन का आधार बनाया। अब बड़े विपक्षी मंच की जरूरत है, तो लेफ्ट के साथ बैठने को तैयार हैं। यह ममता बनर्जी की सुविधा की राजनीति का एक और अध्याय है। इसमें वफादारी बदलती है, दुश्मन साथी बन जाते हैं और सत्ता की जरूरत के हिसाब से विचारधारा को ढाल लिया जाता है।

  • 28 सितंबर राशिफल: सोमवार का दिन इन राशियों के लिए रहेगा शुभ, मिलेगी तरक्की

    28 सितंबर राशिफल: सोमवार का दिन इन राशियों के लिए रहेगा शुभ, मिलेगी तरक्की

    मेष
    मेष राशि वालों का ध्यान घर और काम, दोनों तरफ रहेगा। सुबह किसी जरूरी काम को लेकर भागदौड़ हो सकती है। अगर नौकरी में किसी पुराने मामले पर बात चल रही है तो आज स्थिति कुछ साफ हो सकती है। कारोबारियों को ग्राहक से बातचीत के दौरान अपनी शर्तें स्पष्ट रखनी चाहिए। पैसों की स्थिति ठीक रहेगी, लेकिन घर की कोई जरूरत खर्च बढ़ा सकती है। परिवार के साथ बैठने का समय मिलेगा। प्रेम संबंध में साथी से खुलकर बात करने पर मन हल्का होगा। शरीर में थकान रहे तो आराम को टालें नहीं।

    वृषभ
    पिछले दिनों जिस काम को लेकर चिंता बनी हुई थी, उसमें आज कुछ राहत मिल सकती है। नौकरी करने वालों को किसी वरिष्ठ से जरूरी सलाह मिलेगी। काम बदलने या नई जगह कोशिश करने वाले लोगों की किसी से बातचीत हो सकती है। कारोबार में पुराने ग्राहक से दोबारा संपर्क बन सकता है। आमदनी के साथ खर्च भी रहेगा, इसलिए पैसा संभालकर चलना होगा। घर में किसी सदस्य की बात आपको थोड़ी परेशान कर सकती है। साथी के साथ समय बिताने से रिश्ते में गर्माहट आएगी। खानपान बिगाड़ने से बचें।

    मिथुन
    आज लोगों से बातचीत आपके लिए अहम रहेगी। किसी परिचित के जरिए काम की जानकारी मिल सकती है। नौकरी में आपकी सलाह किसी फैसले में शामिल की जा सकती है। कारोबारी किसी पुराने संपर्क को फिर से सक्रिय कर सकते हैं। रुका हुआ भुगतान मिलने की संभावना है, जिससे आर्थिक दबाव कुछ कम होगा। घर में किसी छोटे काम को लेकर आपकी जरूरत पड़ सकती है। प्रेम संबंधों में साथी के साथ अच्छी बातचीत होगी। दिनभर फोन या स्क्रीन पर ज्यादा समय बिताने से सिरदर्द हो सकता है।

    कर्क
    आज हर काम तुरंत निपटाने की कोशिश न करें। कुछ चीजों को समय देना ही बेहतर रहेगा। नौकरी में जिम्मेदारी बढ़ सकती है और किसी काम की जवाबदेही भी आपको लेनी पड़ सकती है। कारोबार में नया फैसला लेने से पहले हिसाब जरूर देख लें। पैसों से जुड़ा कोई खर्च अचानक सामने आएगा। परिवार के किसी बड़े व्यक्ति की सलाह काम आ सकती है। रिश्ते में अपनी बात मनवाने के बजाय सामने वाले को भी सुनें। मानसिक थकान महसूस हो सकती है।

    सिंह
    कामकाज के लिहाज से दिन राहत देने वाला हो सकता है। पिछले कुछ समय से चल रहा कोई काम पूरा होने के करीब पहुंचेगा। नौकरी में अधिकारी आपके काम को नोटिस कर सकते हैं। कारोबार में नए ग्राहक से संपर्क होगा और आगे काम बनने की गुंजाइश रहेगी। आर्थिक स्थिति में सुधार के संकेत हैं, हालांकि कोई जरूरी खरीदारी करनी पड़ सकती है। परिवार में माहौल अच्छा रहेगा। प्रेम जीवन में साथी की ओर से सहयोग मिलेगा। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा।

    कन्या
    आज कुछ काम उम्मीद से धीमे चलेंगे। इसके कारण परेशान होने की जरूरत नहीं है। नौकरी में पुराने कामों को समेटने पर ध्यान दें। कारोबार में किसी नई योजना को लेकर अभी जल्दबाजी न करें। आर्थिक स्थिति सामान्य रहेगी, लेकिन घर या वाहन से जुड़ा खर्च आ सकता है। परिवार में छोटी बात को लेकर मनमुटाव हो तो बातचीत से सुलझाएं। प्रेम जीवन में साथी को समय देना जरूरी होगा। लंबे समय तक बैठकर काम करने से शरीर में अकड़न हो सकती है।

    तुला
    आज काम को लेकर छोटी-सी लापरवाही भी परेशानी बढ़ा सकती है। नौकरी में दस्तावेज या जरूरी जानकारी भेजने से पहले उसे एक बार फिर देख लें। कारोबारियों को ग्राहक की शिकायत सुनकर ही जवाब देना चाहिए। आर्थिक स्थिति सामान्य रहेगी। गैरजरूरी सामान पर पैसा खर्च करने से बचें। परिवार में किसी सदस्य के काम में हाथ बंटाना पड़ सकता है। प्रेम संबंधों में पुरानी बात छेड़ने से माहौल खराब हो सकता है। पेट संबंधी परेशानी से बचने के लिए खानपान ठीक रखें।

    वृश्चिक
    दोस्तों और पुराने परिचितों के साथ संपर्क बढ़ेगा। इनमें से कोई व्यक्ति आपके काम से जुड़ी मदद कर सकता है। नौकरी में टीम के साथ मिलकर किया गया काम बेहतर तरीके से पूरा होगा। कारोबार में नए ग्राहक से बातचीत आगे बढ़ सकती है। धन के मामले में राहत मिल सकती है और पुराना पैसा वापस आने की खबर भी मिल सकती है। घर में किसी सदस्य की अच्छी खबर से खुशी होगी। प्रेम संबंधों में नजदीकी बढ़ेगी। स्वास्थ्य ठीक रहेगा।

    धनु
    आज किसी नए संपर्क से आगे के लिए रास्ता बन सकता है। नौकरी में नई जिम्मेदारी मिले तो उसे बोझ न समझें, इससे आपकी पहचान बढ़ सकती है। कारोबार में बाहर के किसी व्यक्ति से संपर्क हो सकता है। पैसों की स्थिति संभली रहेगी और कोई छोटा लाभ भी मिल सकता है। परिवार में किसी शुभ काम की तैयारी पर चर्चा होगी। प्रेम जीवन में साथी के साथ बाहर जाने का मौका मिल सकता है। दिन अच्छा रखने के लिए अपनी दिनचर्या न बिगाड़ें।

    मकर
    आज कोई पुराना मामला फिर चर्चा में आ सकता है। नौकरी में सहकर्मी के साथ मतभेद हो तो बात को वहीं खत्म करना बेहतर होगा। कारोबारी किसी पुराने भुगतान को लेकर संपर्क कर सकते हैं। पैसा मिलने की उम्मीद है, लेकिन किसी को उधार देने में सावधानी रखें। घर में किसी करीबी की चिंता रहेगी। प्रेम संबंध में शक या अधूरी जानकारी के आधार पर फैसला न लें। मन परेशान हो तो थोड़ी देर अकेले रहना आपके लिए अच्छा रहेगा।

    कुंभ
    काम को लेकर आज स्थिति आपके पक्ष में जाती दिख सकती है। नौकरी में जिस काम को पूरा करने में दिक्कत आ रही थी, उसमें किसी की मदद मिल जाएगी। कारोबारियों को नया ग्राहक मिल सकता है। आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए आज कोई योजना बनाई जा सकती है। हालांकि केवल योजना बनाने के बजाय उसके खर्च और फायदे का हिसाब भी देखें। घर में धार्मिक या शुभ काम की बात हो सकती है। प्रेम जीवन में साथी के साथ बातचीत सुखद रहेगी। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा

    मीन
    रविवार की शुरुआत थोड़ी उलझी हुई हो सकती है। अचानक आए किसी काम की वजह से पहले से बनाई योजना बदलनी पड़ेगी। नौकरी में जरूरी काम को टालने के बजाय पहले पूरा कर लें। कारोबार में किसी सौदे पर फैसला करने से पहले दूसरी तरफ की शर्तें अच्छी तरह समझें। आर्थिक मामलों में आज जोखिम लेने से बचना ठीक रहेगा।

  • महतारी वंदन योजना से लक्ष्मी मांझी की जिंदगी में आया बदलाव, सिलाई मशीन ने खोली आत्मनिर्भरता की राह

    महतारी वंदन योजना से लक्ष्मी मांझी की जिंदगी में आया बदलाव, सिलाई मशीन ने खोली आत्मनिर्भरता की राह

    रायपुर

    महतारी वंदन योजना महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की दिशा में नई राह खोल रही है। योजना के तहत मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता से महिलाएं अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ स्वरोजगार की दिशा में भी कदम बढ़ा रही हैं। गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के गौरेला विकासखंड के ग्राम पंचायत गोरखपुर के आवास मोहल्ला निवासी लक्ष्मी मांझी की कहानी भी इसी बदलाव की एक प्रेरक मिसाल है।

    लक्ष्मी मांझी बताती हैं कि महतारी वंदन योजना के तहत उन्हें लगातार आर्थिक सहायता मिल रही है। योजना की 31वीं किस्त की राशि भी उनके बैंक खाते में प्राप्त हुई है। इस आर्थिक सहायता ने उनके लिए न केवल घरेलू जरूरतों को पूरा करना आसान बनाया, बल्कि उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर भी दिया।

    सिलाई मशीन खरीदकर शुरू किया स्वरोजगार

    लक्ष्मी मांझी ने महतारी वंदन योजना से प्राप्त राशि को बचाकर सिलाई मशीन खरीदने का निर्णय लिया। सिलाई मशीन मिलने के बाद उन्होंने घर से ही सिलाई का काम शुरू कर दिया। अब वे आसपास की महिलाओं और परिवार के लोगों के कपड़े सिलकर अपनी आय अर्जित कर रही हैं।

    पहले जहां अपनी व्यक्तिगत जरूरतों और परिवार की आर्थिक आवश्यकताओं के लिए दूसरों पर निर्भरता रहती थी, वहीं अब सिलाई के काम से होने वाली आमदनी के माध्यम से लक्ष्मी मांझी परिवार की आर्थिक व्यवस्था में स्वयं योगदान दे रही हैं। घर से ही काम करने की सुविधा के कारण वे घरेलू जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए स्वरोजगार भी कर पा रही हैं।

    बच्चों की पढ़ाई में भी कर रहीं सहयोग

    लक्ष्मी मांझी बताती हैं कि सिलाई से होने वाली आय और महतारी वंदन योजना से मिलने वाली सहायता राशि का उपयोग वे परिवार की आवश्यकताओं के साथ-साथ बच्चों की पढ़ाई-लिखाई में भी कर रही हैं। बच्चों की शैक्षणिक जरूरतों को पूरा करने में सहयोग कर पाना उनके लिए संतोष और आत्मविश्वास का विषय है।

    वे कहती हैं कि नियमित आर्थिक सहायता मिलने से परिवार की छोटी-बड़ी जरूरतों को पूरा करने में सहूलियत हुई है। इसी सहायता को बचाकर उन्होंने सिलाई मशीन खरीदी और आज यही मशीन उनके लिए अतिरिक्त आय का जरिया बन गई है। इससे उनके भीतर आत्मविश्वास बढ़ा है और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एक नई शुरुआत हुई है।

    प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना से घरेलू जीवन भी हुआ आसान

    लक्ष्मी मांझी को प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन का लाभ भी प्राप्त हुआ है। इससे खाना बनाने के लिए स्वच्छ ईंधन की सुविधा मिली है और घरेलू कार्य पहले की तुलना में अधिक आसान हुए हैं। महतारी वंदन योजना और प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना सहित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिलने से उनके परिवार के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है।

    सरकारी योजनाओं का लाभ बन रहा आत्मनिर्भरता का आधार

    लक्ष्मी मांझी का कहना है कि सरकार की योजनाओं का लाभ जब जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचता है, तो उसका असर केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं रहता, बल्कि परिवारों को आगे बढ़ने और अपने लिए नए अवसर तैयार करने का रास्ता भी मिलता है। महतारी वंदन योजना से प्राप्त राशि का उपयोग उन्होंने अपनी जरूरतों के साथ-साथ स्वरोजगार शुरू करने में किया, जिससे अब वे स्वयं आय अर्जित कर रही हैं।

    लक्ष्मी मांझी ने महतारी वंदन योजना सहित शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिलने पर प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी एवं मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय जी के प्रति आभार व्यक्त किया है। उनका कहना है कि सरकार की योजनाओं से मिली सहायता ने उनके परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर दिया है।

    लक्ष्मी मांझी की यह कहानी इस बात की मिसाल है कि यदि आर्थिक सहायता का सही उपयोग किया जाए तो सरकारी योजनाएं परिवार की जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ महिलाओं के लिए स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता का आधार भी बन सकती हैं।

  • सीएम योगी के निर्देश पर आपदा पीड़ितों को तत्काल मिल रही राहत, 24 घंटे में चार-चार लाख की आर्थिक सहायता

    सीएम योगी के निर्देश पर आपदा पीड़ितों को तत्काल मिल रही राहत, 24 घंटे में चार-चार लाख की आर्थिक सहायता

    लखनऊ

     उत्तर प्रदेश में भारी बारिश और प्राकृतिक आपदा के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रभावित परिवारों तक तत्काल राहत पहुंचाने की संवेदनशीलता और तत्परता दिखाई है। अयोध्या और बस्ती में तेज आंधी-पानी से प्रभावित परिवारों के बीच जनपद के प्रभारी मंत्री एवं कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही पहुंचे और पीड़ित परिजनों को ढांढस बंधाया। उन्होंने सीएम योगी के निर्देश पर प्रभावित परिवारों को दैवीय आपदा राहत कोष से घटना के 24 घंटे के अंदर चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता के चेक सौंपे।

    अयोध्या में अतिवृष्टि और आंधी-तूफान के कारण चार लोगों की असामयिक मृत्यु हुई। इनमें सोहावल तहसील के शिवदासपुर, शुक्ला का पुरवा निवासी 18 वर्षीय आकाश वर्मा, मिल्कीपुर तहसील निवासी 12 वर्षीय आर्यन, रुदौली तहसील निवासी 76 वर्षीय रामस्वरूप और 40 वर्षीय धर्मराज शामिल हैं। इन सभी की मृत्यु पेड़ गिरने के कारण हुई। प्रभारी मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने अयोध्या सर्किट हाउस में आकाश वर्मा, रामस्वरूप और धर्मराज के परिजनों को चार-चार लाख रुपये के चेक सौंपे। वहीं बस्ती में भी आपदा प्रभावित दो परिवारों को तत्काल आर्थिक सहायता दी गई।

    बस्ती में भी पीड़ित परिवारों को मिली राहत

    बस्ती सदर तहसील के चौबाह गांव निवासी मोतीराम की आंधी में छप्पर गिरने से मृत्यु हुई थी, उनकी पत्नी कैलाशा देवी को चार लाख रुपये की सहायता दी गई। वहीं महुली पश्चिम के ग्राम बलुआ निवासी प्रशांत की सर्पदंश से मृत्यु के बाद उनकी माता मीरा देवी को भी चार लाख रुपये का चेक सौंपा गया।

    हर नागरिक के सुख-दुःख में अभिभावक की तरह खड़ी है सरकार

    कृषि मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा, सेवा और सहायता के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री योगी के स्पष्ट निर्देश हैं कि दैवीय या प्राकृतिक आपदा की स्थिति में प्रभावित परिवारों को अविलंब राहत, चिकित्सीय सुविधा और आर्थिक संबल उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने जिला प्रशासन को सभी प्रभावितों को हरसंभव सहायता तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

  • सेवा की कहानी: अमृत सरोवर बना महिलाओं की आजीविका का आधार, मछली पालन से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़े कदम

    सेवा की कहानी: अमृत सरोवर बना महिलाओं की आजीविका का आधार, मछली पालन से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़े कदम

    रायपुर

     गांव में बना अमृत सरोवर अब जल संरक्षण के साथ ग्रामीण महिलाओं की आजीविका का जरिया भी बन रहा है। सरगुजा जिले के बतौली विकासखंड की ग्राम पंचायत बिरीमकेला के ज्योति स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने अमृत सरोवर में मछली पालन शुरू कर आय की नई राह बनाई है। पहले किसी आयमूलक गतिविधि से नहीं जुड़ी इन महिलाओं को सरोवर के रूप में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधन मिला तो उन्होंने सामूहिक प्रयास से इसे अपनी आजीविका का माध्यम बना लिया। पहली बार मछलियों की बिक्री से हुई आमदनी ने समूह का हौसला बढ़ाया है और अब महिलाओं ने दोबारा मछली पालन शुरू कर दिया है।

    पहली बिक्री से मिली आमदनी ने बढ़ाया महिलाओं का हौसला

    ज्योति स्व-सहायता समूह की सदस्य रजनी चौहान बताती हैं कि अमृत सरोवर मिलने के बाद समूह ने पहली बार मछली पालन की गतिविधि शुरू की। तैयार हुई मछलियों में से लगभग 15 किलो मछली की बिक्री की गई, जिससे समूह को पहली बार इस गतिविधि से आमदनी हुई।

    मछली पालन से मिली इस शुरुआती सफलता ने समूह की महिलाओं को इसे आगे भी जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया। अब महिलाएं इस गतिविधि को नियमित आजीविका के साधन के रूप में विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

    दोबारा शुरू किया मछली पालन, नियमित आजीविका बनाने की तैयारी

    रजनी बताती हैं कि समूह ने एक बार फिर अमृत सरोवर में मछलियां डाली हैं। इस बार 10 पैकेट डाले गए हैं। समूह की महिलाएं मिलकर मछली पालन का काम कर रही हैं और आने वाले समय में इससे अपनी आमदनी को और बढ़ाना चाहती हैं। अमृत सरोवर से जुड़ने से पहले समूह के पास ऐसी कोई आयमूलक गतिविधि नहीं थी। अब स्थानीय स्तर पर उपलब्ध जल संसाधन का उपयोग करते हुए महिलाएं सामूहिक रूप से मछली पालन कर रही हैं। इससे उन्हें गांव में ही काम और आय का अवसर मिला है।

    “आजीविका बढ़ाएंगे और अपने पैरों पर खड़े होंगे”

    रजनी चौहान ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, “पहले हम लोग समूह में कुछ नहीं करते थे। अब अमृत सरोवर मिला है, जिसमें मछली पालन कर रहे हैं और हमारी आजीविका बढ़ रही है। आगे भी हम लोग आजीविका बढ़ाएंगे और अपने पैरों पर खड़े होंगे।” उन्होंने समूह की ओर से प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया।

    जल संरक्षण के साथ आजीविका का भी बना माध्यम

    सेवा संकल्प अभियान के तहत ज्योति स्व-सहायता समूह की यह ‘सेवा की कहानी’ बताती है कि गांव में तैयार जल संरचनाओं को आजीविका गतिविधियों से जोड़कर ग्रामीण महिलाओं के लिए आय के अवसर भी विकसित किए जा सकते हैं। अमृत सरोवर में मछली पालन से रजनी और उनकी साथी महिलाओं ने आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाया है। अब उनका प्रयास इस गतिविधि को आगे बढ़ाकर अपनी आमदनी मजबूत करने और अपने पैरों पर खड़े होने का है।

  • अधिकारियों को युद्धस्तर पर काम कर जल्द से जल्द विद्युत आपूर्ति सामान्य करने के निर्देश

    अधिकारियों को युद्धस्तर पर काम कर जल्द से जल्द विद्युत आपूर्ति सामान्य करने के निर्देश

    लखनऊ

    प्रदेश में लगातार हो रही बारिश से प्रभावित विद्युत आपूर्ति को जल्द सामान्य करने के लिए योगी सरकार ने निगरानी और राहत कार्य तेज कर दिए हैं। 
    प्रमुख सचिव ऊर्जा एवं यूपी पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष रणवीर प्रसाद ने अधिकारियों को युद्धस्तर पर काम कर जल्द से जल्द विद्युत आपूर्ति सामान्य करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं की शिकायतों का फीडरवार निस्तारण सुनिश्चित किया जाए और 1912 पर आने वाली प्रत्येक सूचना को गंभीरता से लिया जाए।

    प्रमुख सचिव ने निर्देश दिया कि उपभोक्ताओं को यह भी बताया जाए कि उनकी विद्युत आपूर्ति कब तक बहाल होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि अस्पताल, पेयजल सहित आवश्यक सेवाओं की बिजली आपूर्ति प्राथमिकता के आधार पर बहाल की जाए। बारिश और पेड़ों के गिरने से 33 और 11 केवी फीडरों में बड़े पैमाने पर ब्रेकडाउन हुआ है। कई स्थानों पर बिजली के पोल भी टूटे हैं। इन्हें बदलने के साथ ही क्षतिग्रस्त लाइनों की मरम्मत का काम दिन-रात जारी है। दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों में भी टीमें लगातार कार्य कर रही हैं।

    शहरी क्षेत्रों में आपूर्ति लगभग सामान्य

    डिस्कॉम अधिकारियों ने बताया कि लखनऊ सहित प्रदेश के अधिकांश शहरी क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति लगभग सामान्य कर दी गई है। मध्यांचल में बरेली मंडल को छोड़कर शहरी क्षेत्रों में आपूर्ति सामान्य है। 33 केवी के छह सबस्टेशन बंद हैं, जिन्हें शाम तक चालू करने का लक्ष्य है। पूर्वांचल में बस्ती और संतकबीरनगर को छोड़कर अधिकांश शहरी क्षेत्रों में आपूर्ति सामान्य है।

    पश्चिमांचल में अमरोहा, बिजनौर, संभल और मुरादाबाद के ग्रामीण क्षेत्रों को छोड़कर आपूर्ति सामान्य है। दक्षिणांचल में इटावा, कन्नौज, औरैया और फर्रुखाबाद को छोड़कर अन्य शहरों में बिजली आपूर्ति बहाल कर दी गई है। केस्को क्षेत्र में 33 केवी का कोई ब्रेकडाउन नहीं है। सब जगह आपूर्ति नॉर्मल कर दी गई है। 

    24 घंटे सक्रिय कंट्रोल रूम, मैनपावर की कमी ना हो

    अधिक प्रभावित जिलों में अंबेडकरनगर, भदोही, आजमगढ़, बलिया, बहराइच, बस्ती, बरेली, गोंडा, देवरिया, लखीमपुर, मऊ, सिद्धार्थनगर, कानपुर देहात, हमीरपुर, शाहजहांपुर, आगरा, फिरोजाबाद, कानपुर नगर, बुलंदशहर, गोरखपुर और वाराणसी ग्रामीण शामिल हैं। लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। मुख्यालयों से अधिकारियों को जिलों में भेजा गया है। आरडीएसएस और बिजनेस प्लान के कार्यों में लगी कार्यदायी संस्थाओं को भी अनुरक्षण कार्य में लगाया गया है। 

    शक्तिभवन और डिस्कॉम के कंट्रोल रूम 24 घंटे सक्रिय

    यूपीपीसीएल अध्यक्ष ने कहा कि विद्युत आपूर्ति बहाली के कार्य में मैनपावर की कोई कमी नहीं रहनी चाहिए। जिला और फीडरवार लगातार मॉनिटरिंग करते हुए कार्य कराया जाए और एक भी फीडर छूटने न पाए। अस्पताल, पेयजल सहित अन्य आवश्यक सेवाओं की विद्युत आपूर्ति प्राथमिकता के आधार पर बहाल की जाए। उन्होंने कहा कि सामग्री की पर्याप्त उपलब्धता है। शक्ति भवन और सभी डिस्कॉम के कंट्रोल रूम 24 घंटे सक्रिय हैं। डिस्कॉम के प्रबंध निदेशकों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अपने-अपने क्षेत्रों में आई समस्याओं और चल रहे अनुरक्षण कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। यूपीपीसीएल के प्रबंध निदेशक नितेश कुमार ने भी अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

  • बीजों की कोठरी में सहेजी है पीढ़ियों की खुशहाली, मझगवां के आदिवासी परिवारों ने बचाकर रखी देसी अनाज की विरासत

    बीजों की कोठरी में सहेजी है पीढ़ियों की खुशहाली, मझगवां के आदिवासी परिवारों ने बचाकर रखी देसी अनाज की विरासत

    भोपाल

    खुशियों की दास्तां

    शहडोल जिले के मझगवां गांव के सलैया टोला में रहने वाले आदिवासी परिवारों के लिए अनाज सिर्फ भोजन नहीं, बल्कि उनकी पीढ़ियों की पहचान, परंपरा और खुशियों का आधार है। घर की कोठरियों में सहेजे गए छोटे-छोटे बीज उनके लिए किसी खजाने से कम नहीं हैं। इन्हीं बीजों से खेतों में फसल लहलहाती है, घर में अनाज आता है और पूरे परिवार की जरूरतें पूरी होती हैं।

    आज जब खेती में आधुनिक और हाइब्रिड किस्मों का चलन बढ़ रहा है, वहीं मझगवां के बैगा एवं भूमिया समाज के किसान अपनी पुरानी देसी किस्मों को आज भी संजोए हुए हैं। झोलार, बांसपोर, ठर्री, सरैय्या, गुरमटिया, करन फूल और भेजरी जैसी पारंपरिक धान की किस्में यहां के खेतों में आज भी दिखाई देती हैं। इसी तरह लेदरी कोदो, बासिन कोदो, कोदैली कोदो, बेमेरहा कुटकी, जाली कुटकी, छोटाही कुटकी, भदैली कुटकी, कागुन, समा और मिलो जैसे श्री अन्न भी यहां की खेती और भोजन का हिस्सा हैं।

    भोल्ली सिंह के लिए बीज ही असली पूंजी

    मझगवां के किसान भोल्ली सिंह ने अपने खेतों में कई पारंपरिक फसलों को बचाकर रखा है। उनके खेत में झोलार धान, बांसपोर, सरैय्या, गुरमटिया, करन फूल और भेजरी जैसी देसी धान की किस्में हैं। साथ ही कोदो, मक्का, मिलो, कागुन, कुटकी, लेदरी कोदो और बासिन कोदो भी उगाए जाते हैं।

    भोल्ली सिंह के लिए इन फसलों की खुशी सिर्फ अच्छी पैदावार तक सीमित नहीं है। जब खेत से अनाज घर आता है और परिवार के भोजन में शामिल होता है, तो उन्हें अपनी मेहनत सफल होने का एहसास होता है। वे बताते हैं कि मोटा अनाज उनके रोजमर्रा के भोजन का हिस्सा है। उनका कहना है कि 60 वर्ष से अधिक उम्र में भी वे 20 से 25 किलोमीटर तक साइकिल चला लेते हैं और पारंपरिक भोजन को अपनी तंदुरुस्ती से जोड़कर देखते हैं।

    बिरमतिया बैगा के लिए देसी बीज, अपनी पहचान और अपनी परंपरा

    मझगवां के सलैया टोला की बिरमतिया बैगा ने भी अपने खेतों में पारंपरिक अनाज और धान की कई किस्मों को सुरक्षित रखा है। उनके खेत में समा, कुटकी, सिकिया, काकुन, सरैय्या और ठर्री धान जैसी फसलें उगाई जाती हैं। अलग-अलग मौसम में इन फसलों की खेती करना और उनसे प्राप्त अनाज को सुरक्षित रखना उनके परिवार की पुरानी परंपरा का हिस्सा है।

    बिरमतिया बैगा के लिए खेत में उगने वाला हर अनाज केवल फसल नहीं है। उसके साथ उनके परिवार की यादें, पुरखों की खेती की पद्धति और वर्षों से चली आ रही खाद्य परंपरा जुड़ी हुई है। वे पुराने बीजों को संभालकर रखती हैं, ताकि अगली फसल के समय इन्हीं बीजों से फिर खेती की जा सके। इस तरह एक मौसम की फसल अगले मौसम के लिए बीज बन जाती है और पीढ़ियों से चली आ रही यह परंपरा आगे बढ़ती रहती है।

    वे बताती हैं कि घर में सुरक्षित रखा अनाज परिवार के भोजन में उपयोग होता है। खेत से निकला अपना धान और मोटा अनाज जब घर की रसोई तक पहुंचता है तो उसमें मेहनत के साथ अपनेपन का एहसास भी जुड़ा होता है। समा, कुटकी, सिकिया और काकुन जैसे अनाज उनके भोजन का हिस्सा हैं, वहीं सरैय्या और ठर्री जैसे पारंपरिक धान की किस्में उनकी खेती की विविधता को बनाए रखती हैं।

    बिरमतिया के लिए पुराने बीजों को बचाकर रखना अपनी परंपरा को बचाकर रखने जैसा है। उनका मानना है कि इन बीजों की पहचान गांव के खेतों और परिवारों से जुड़ी है। इसलिए उन्हें सुरक्षित रखना जरूरी है, ताकि आने वाले समय में भी इन पारंपरिक फसलों की खेती होती रहे और नई पीढ़ी इन अनाजों के बारे में जान सके। उनके घर में रखे बीजों की यह छोटी-सी दुनिया इस बात की गवाही देती है कि मझगवां के आदिवासी परिवारों ने आधुनिक खेती के दौर में भी अपनी पारंपरिक फसलों के लिए जगह बनाए रखी है। बिरमतिया के लिए इन बीजों की सबसे बड़ी खुशी यही है कि वे आज भी खेत में बोए जाते हैं, फसल बनकर घर आते हैं और परिवार के भोजन का हिस्सा बनते हैं।

    धनवतिया बैगा ने संभाल रखी है बीजों की विरासत

    धनवतिया बैगा भी देसी अनाज की खेती और बीज संरक्षण से जुड़ी हैं। उनके खेत में झुंझरु, पैलहाई, बरबट्टी, मक्का, कोदो, कुटकी, कागुन, भदैला कुटकी और सऊटहा कुटकी जैसी फसलें हैं। जब उनसे इन फसलों के बीजों के बारे में पूछा जाता है तो उनका सहज जवाब होता है कि बीज मिल जाएंगे और जो यहां न मिलें, वे आसपास के पहाड़ी गांवों में मिल जाएंगे। यह जवाब बताता है कि यहां बीजों का संरक्षण केवल एक परिवार तक सीमित नहीं, बल्कि गांव और आसपास के समुदाय की साझा परंपरा है।

    सालभर का अनाज, सालभर की निश्चिंतता

    इन परिवारों की खुशियों का एक बड़ा कारण उनकी खाद्य आत्मनिर्भरता भी है। वे खेतों में उगाए गए अलग-अलग अनाज को घर में सुरक्षित रखते हैं और सालभर उसका उपयोग करते हैं। धान की देसी किस्म हो या कोदो-कुटकी, कागुन या समा—इनका उपयोग परिवार के भोजन में होता है। फसल घर आने के बाद कोठरी में अनाज का सुरक्षित होना इन परिवारों के लिए आने वाले दिनों की निश्चिंतता भी है। मेहनत से उगाया अपना अनाज, अपने घर का भोजन और अपने ही सुरक्षित किए बीज—यही उनकी खुशहाल जिंदगी की सरल कहानी है।

    पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा को आगे बढ़ा रहे किसान

    कृषि वैज्ञानिक डॉ. बी.के. प्रजापति के अनुसार मझगवां क्षेत्र के बैगा और भूमिया समाज के किसान प्राचीन काल से मोटे अनाज और पारंपरिक फसलों की खेती करते आ रहे हैं। इन किसानों ने कई पुरानी किस्मों के बीजों को आज भी सुरक्षित रखा है।

    मझगवां के किसानों की यह पहल केवल खेती नहीं, बल्कि पारंपरिक कृषि ज्ञान और जैव विविधता को आगे बढ़ाने का माध्यम भी है। उनके घरों की कोठरियों में रखे ये बीज आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक ऐसी विरासत हैं, जिसे उन्होंने मेहनत, विश्वास और अपनी परंपरा से संभालकर रखा है।

     

  • ट्रेड शो में बागपत के घेवर का स्वाद चख बोले लोग, सावन के बाद भी खूब भा रहा*

    ट्रेड शो में बागपत के घेवर का स्वाद चख बोले लोग, सावन के बाद भी खूब भा रहा*

    ग्रेटर नोएडा

    इंडिया एक्सपो मार्ट में चल रहे यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में बागपत का घेवर लोगों को रुकने और स्वाद चखने के लिए मजबूर कर रहा है। वन डिस्ट्रिक्ट वन कुजीन के पवेलियन में बागपत के स्टाल पर पहुंच रहे लोग पहले घेवर को बनते देख रहे हैं और फिर उसका स्वाद ले रहे हैं। दिल्ली, गुरुग्राम और गाजियाबाद से आए लोगों ने घेवर की कुरकुराहट और खोये की परत को पसंद किया। कई लोगों के लिए यह भी आकर्षण का विषय रहा कि आमतौर पर सावन की मिठाई माने जाने वाला घेवर यहां सितंबर में भी ताजा तैयार होकर बिक रहा है।

    बागपत के अमीनगर सराय निवासी ईश्वर दयाल अग्रवाल के परिवार में तीन पीढ़ियों से घेवर बनाने का कारोबार है। इसी परिवार से जुड़े दीपक गोयल ट्रेड शो में स्टाल का संचालन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि यहां आने वाले कई लोग घेवर देखकर सवाल करते हैं कि यह तो सावन में मिलने वाली मिठाई है, फिर इस समय कैसे तैयार हो रही है। उन्हें बताया जाता है कि बागपत में घेवर की मांग केवल सावन तक सीमित नहीं है। सोशल मीडिया के माध्यम से भी लोगों को अलग-अलग मौसम में बागपत के घेवर की उपलब्धता की जानकारी मिल रही है।

    सामने बन रहा ताजा घेवर

    ट्रेड शो में बागपत से पांच कारीगर आए हैं। ये कारीगर स्टाल पर ही लोगों के सामने ताजा घेवर तैयार कर रहे हैं। इससे भी लोगों की उत्सुकता बढ़ रही है। दीपक गोयल के अनुसार रोजाना अच्छी बिक्री हो रही है और यहां घेवर 600 रुपये किलो की दर से बेचा जा रहा है।
    घेवर की खासियत बताते हुए उन्होंने कहा कि शुद्ध दूध से तैयार खोये का इस्तेमाल स्वाद को अलग पहचान देता है। नीचे का कुरकुरा हिस्सा और ऊपर जमी खोये की परत इसकी विशेषता है। बागपत के अलावा दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में इसकी मांग रहती है।

    दिल्ली की सोनाली, गुरुग्राम की रवीना कश्यप और गाजियाबाद के धर्मेंद्र भारद्वाज समेत ट्रेड शो में पहुंचे लोगों ने घेवर का स्वाद लिया। लोगों ने स्टाल पर रुककर घेवर बनाने की प्रक्रिया भी देखी। लोग विशेष तरीके से घेवर बनता देख उत्साहित दिखाई दिए। पहली बार एक जिला एक व्यंजन के तहत प्रदेश के सभी 75 जिलों के प्रसिद्ध व्यंजनों को ट्रेड शो में जगह दी गई है। बागपत से घेवर को इसमें शामिल किया गया है। इससे जिले की पारंपरिक मिठाई को दूसरे जिलों से आए लोगों तक पहुंचने का अवसर मिला है।

  • यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो के तीसरे दिन कौशल विकास मिशन के पवेलियन में हुनर, रचनात्मकता और सीखने का उत्साह

    यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो के तीसरे दिन कौशल विकास मिशन के पवेलियन में हुनर, रचनात्मकता और सीखने का उत्साह

    ग्रेटर नोएडा

    उत्तर प्रदेश की कला, कौशल और कारीगरी को वैश्विक मंच देने वाले यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो के तीसरे दिन उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन (UPSDM) का पवेलियन हुनर, रचनात्मकता और सीखने के उत्साह से गुलजार रहा। रविवार को छुट्टी का दिन होने के कारण बड़ी संख्या में परिवार, युवा, बच्चे और बुजुर्ग पवेलियन पहुंचे और यहां न सिर्फ प्रदेश की पारंपरिक कला और उत्पादों को करीब से देखा, बल्कि कई कौशलों को खुद करके सीखने का अनुभव भी लिया।

    यूपीएसडीएम के ‘स्किल मंच’ पर रविवार को नन्हे-मुन्नों की प्रतिभा ने खास आकर्षण पैदा किया। बच्चों ने मंच पर अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। युवाओं ने भी गायकी और फाइन आर्ट्स के जरिए अपनी रचनात्मकता का प्रदर्शन किया। ‘हुनर’ थीम पर रंगों के जरिए युवाओं ने अपनी कल्पनाओं को मंच पर आकार दिया।

    खास बात यह रही कि मंच पर सिर्फ युवा ही नहीं, बल्कि बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने अपनी प्रतिभा और कौशल का प्रदर्शन किया। पहली बार शुरू किए गए ‘स्किल मंच’ का उद्देश्य युवाओं और आम लोगों को अपनी प्रतिभा दिखाने के साथ कौशल, करियर और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ना है।

    पवेलियन में विभिन्न कौशलों के लाइव डेमो दर्शकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बने। पारंपरिक कारीगरी से लेकर आधुनिक कौशल तक, हर स्टॉल पर लोगों को कुछ नया देखने और सीखने को मिला। पॉटरी और टेराकोटा स्टॉल पर विजिटर्स ने मिट्टी को अपने हाथों से आकार देकर सुंदर कलाकृतियां बनाने की कोशिश की। वहीं, लखनऊ की चिकनकारी के स्टॉल पर लोगों ने सुई-धागे से होने वाली बारीक कारीगरी को करीब से समझा और खुद भी इसे आजमाया। यहां कौशल केवल प्रदर्शित नहीं किया गया, बल्कि लोगों को ‘देखिए, समझिए और खुद करके सीखिए’ के अंदाज में इससे जोड़ा गया। बच्चों से लेकर युवाओं और बुजुर्गों तक ने अलग-अलग स्टॉल पर पहुंचकर कला और कौशल का अभ्यास किया। 

    यूपीएसडीएम पवेलियन में प्रदेश के अलग-अलग जिलों की कला और उत्पाद भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। बनारस के लकड़ी के खिलौने, आजमगढ़ की ब्लैक पॉटरी और मथुरा के डेकोरेटिव आइटम्स को देखने और उनके बारे में जानने के लिए विजिटर्स की विशेष रुचि दिखाई दी। प्रतापगढ़ के स्टॉल पर लोगों ने आंवला से बने विभिन्न उत्पादों की जानकारी लेने के साथ उनका स्वाद भी चखा। वहीं, लखनऊ की चिकनकारी ने अपनी बारीक कारीगरी से लोगों का ध्यान खींचा। विजिटर्स उत्पादों को देखने के साथ उनके निर्माण, परंपरा और उनसे जुड़े कौशल की जानकारी भी लेते नजर आए। पवेलियन में इस तरह कला, कौशल, सीखने और अनुभव का संगम देखने को मिल रहा है। पवेलियन की गतिविधियां यह संदेश दे रही हैं कि हुनर सिर्फ देखने की चीज नहीं, बल्कि उसे सीखा, समझा और अपने हाथों से आजमाया भी जा सकता है।

  • पक्की छत से बदली जिंदगी, प्रधानमंत्री आवास योजना ने जशपुर के हजारों परिवारों के सपनों को दिया आकार

    पक्की छत से बदली जिंदगी, प्रधानमंत्री आवास योजना ने जशपुर के हजारों परिवारों के सपनों को दिया आकार

    रायपुर

    कभी बारिश में टपकती छत और कमजोर दीवारों के बीच रात गुजारने को मजबूर परिवार आज अपने पक्के घर में सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना जशपुर जिले के ऐसे हजारों परिवारों के लिए केवल एक आवास योजना नहीं, बल्कि वर्षों पुराने सपने को साकार करने और जीवन में स्थायित्व लाने का माध्यम बनी है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से जिले में अब तक 1 लाख 12 हजार 948 आवास स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें 96 हजार 801 आवास पूर्ण हो चुके हैं।

    प्रधानमंत्री आवास योजना के साथ प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जनमन) के माध्यम से विशेष पिछड़ी जनजाति परिवारों तक भी पक्के आवास और बुनियादी सुविधाएं पहुंच रही हैं। वहीं मुख्यमंत्री  साय की मंशा के अनुरूप आवास प्लस 2.0 के तहत पूर्व में छूटे परिवारों का सर्वेक्षण कर पात्रतानुसार उन्हें भी योजना से जोड़ने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

    कच्चे मकान की चिंता खत्म, पक्की छत ने दिया सुरक्षा और सम्मान का भरोसा

    जशपुर जिले के अनेक परिवारों का जीवन वर्षों तक कच्चे मकानों में अभाव और कठिनाइयों के बीच बीता। कमजोर दीवारें, टूटी-फूटी छत और बरसात के दिनों में घर के भीतर टपकता पानी उनकी रोजमर्रा की परेशानी का हिस्सा था। बारिश के दौरान सामान को भीगने से बचाना और परिवार के लिए सुरक्षित जगह तलाशना बड़ी चुनौती होती थी। सीमित आर्थिक संसाधनों के कारण अपना पक्का घर बनाना ऐसे परिवारों के लिए आसान नहीं था।

    प्रधानमंत्री आवास योजना ने इस स्थिति को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पक्की छत मिलने से परिवारों को मौसम की मार से सुरक्षा के साथ अपने घर में सम्मानपूर्वक जीवन जीने का भरोसा मिला है। आज ये आवास केवल ईंट और सीमेंट से बने मकान नहीं, बल्कि परिवारों के बेहतर भविष्य, सुरक्षा और आत्मसम्मान की मजबूत नींव बन रहे हैं।

    जशपुर में 1.12 लाख से अधिक आवास स्वीकृत, 96,801 आवास पूर्ण

    प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत जशपुर जिले में अब तक कुल 1 लाख 12 हजार 948 आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं। इनमें 96 हजार 801 आवासों का निर्माण पूर्ण हो चुका है। इन पक्के घरों में हजारों परिवार अब अपने बच्चों और परिजनों के साथ सुरक्षित जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

    योजना के माध्यम से पात्र परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराने के साथ उनके जीवन स्तर में व्यापक सुधार का प्रयास किया जा रहा है। आवास के साथ स्वच्छ पेयजल, बिजली, शौचालय और एलपीजी जैसी बुनियादी सुविधाओं तक पहुंच परिवारों के जीवन को अधिक सुविधाजनक बनाने में सहायक हो रही है। इस तरह पक्का मकान परिवार की सुरक्षा के साथ स्वास्थ्य, स्वच्छता और बेहतर जीवन स्तर का भी आधार बन रहा है।

    पीएम जनमन से पहाड़ी कोरवा परिवारों के जीवन में आया बदलाव

    जशपुर जिले के विशेष पिछड़ी जनजाति परिवारों तक विकास की बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने में प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जनमन) महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। वर्ष 2023 से 2025 तक जिले में पीएम जनमन के अंतर्गत 2,100 आवास स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें 1,614 से अधिक आवास पूर्ण हो चुके हैं।

    इससे विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा परिवारों को सुरक्षित पक्के आवास का लाभ मिला है। पीएम जनमन के तहत आवास के साथ स्वच्छ पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण, सड़क एवं दूरसंचार कनेक्टिविटी और स्थायी आजीविका जैसी बुनियादी आवश्यकताओं तक पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की यह पहल उनके जीवन में स्थायी बदलाव का आधार बन रही है।

    आवास प्लस 2.0 : छूटे 1.02 लाख से अधिक परिवारों का हुआ सर्वेक्षण

    पक्के आवास की सुविधा से कोई पात्र परिवार वंचित न रहे, इसके लिए आवास प्लस 2.0 के तहत जिले में पूर्व में छूटे परिवारों का पुनः सर्वेक्षण किया गया है। इसके अंतर्गत 1 लाख 2 हजार 371 परिवारों का सर्वे किया गया है। सर्वेक्षण के बाद निर्धारित पात्रता के आधार पर परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना सहित संबंधित योजनाओं से लाभान्वित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

    इस पहल से उन जरूरतमंद परिवारों के लिए भी पक्के आवास की उम्मीद मजबूत हुई है, जो किसी कारणवश पूर्व में योजना में शामिल नहीं हो पाए थे। इससे जिले में पक्के आवास का दायरा और व्यापक होगा तथा अधिक से अधिक पात्र परिवारों तक योजना का लाभ पहुंच सकेगा।

    एक पक्का घर, परिवार के बेहतर भविष्य की मजबूत नींव

    प्रधानमंत्री आवास योजना से जशपुर में दिखाई दे रहा बदलाव केवल मकानों की बढ़ती संख्या तक सीमित नहीं है। पक्के घर ने हजारों परिवारों को मौसम की चिंता से राहत, बच्चों को बेहतर वातावरण और पूरे परिवार को सुरक्षा तथा सम्मान का अहसास दिया है। पीएम जनमन और आवास प्लस 2.0 जैसी पहलों के माध्यम से इस बदलाव का दायरा दूरस्थ और वंचित परिवारों तक भी लगातार बढ़ रहा है।

    सेवा संकल्प अभियान 2026 के अंतर्गत ‘सेवा मेरा योगदान’ की भावना के साथ जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों के बीच जशपुर के हजारों पक्के आवास बदलाव की एक सशक्त तस्वीर प्रस्तुत करते हैं। कभी जो पक्का घर परिवारों के लिए दूर का सपना था, वही आज उनके सुरक्षित वर्तमान और बेहतर भविष्य का आधार बन चुका है।