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  • सेनाध्यक्ष धीरज सेठ बोले- आत्मनिर्भरता सिर्फ हथियार बनाना नहीं, लंबे युद्ध के लिए तैयार रहना जरूरी

    सेनाध्यक्ष धीरज सेठ बोले- आत्मनिर्भरता सिर्फ हथियार बनाना नहीं, लंबे युद्ध के लिए तैयार रहना जरूरी

     नई दिल्ली
     रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का अर्थ केवल देश में हथियार और सैन्य उपकरण बनाना नहीं है। भारत के पास ऐसी क्षमता होनी चाहिए जिससे वह लंबे समय तक चलने वाले युद्ध में अपनी सैन्य ताकत को बनाए रख सके। रविवार को यह बात थल सेनाध्यक्ष जनरल धीरज सेठ ने कही। उन्होंने कहा कि ऐसी क्षमता होनी चाहिए जिससे बदलती जरूरतों के अनुसार सैन्य ताकत को ढाल सके और लगातार मजबूत कर सके।

    रुक-रुक कर होने वाले युद्ध
    उन्होंने आज के युद्धों को ‘रुक-रुक कर होने वाले युद्ध’ बताया है। ‘बदलते युद्ध के दौर में आत्मनिर्भरता’ विषय पर बोलते हुए थल सेनाध्यक्ष ने कहा कि युद्ध का स्वरूप, तकनीक और उसकी अवधि तेजी से बदल रही है। इसलिए सैन्य क्षमता के विकास और आत्मनिर्भरता की हमारी सोच को भी लगातार बदलना होगा।

    आर्मी चीफ ने 1971 के युद्ध का किया जिक्र
    साल 1971 में ढाका में हुए ऐतिहासिक आत्मसमर्पण का जिक्र करते हुए जनरल सेठ ने कहा, “पिछली सदी के युद्धों की एक स्पष्ट समाप्ति होती थी। 1971 की वह तस्वीर ऐसा ही एक क्षण थी, जब यह साफ था कि युद्ध समाप्त हो गया है। लेकिन आज के युद्धों में ऐसी स्पष्ट समाप्ति दिखाई नहीं देती। संघर्ष लंबे समय तक चलते हैं और बीच-बीच में भीषण लड़ाई होती रहती है। तकनीक लड़ाइयों की अवधि कम कर सकती है, लेकिन जरूरी नहीं कि वह युद्धों की अवधि भी कम करे। ये ‘रुक-रुक कर होने वाले युद्ध’ हैं।”

    चुनौती केवल स्वदेशी हथियार बनाने की नहीं
    उन्होंने कहा कि सैन्य क्षमता को तैयार करने, विकसित करने, परखने और सेना में शामिल करने में कई वर्ष लगते हैं, जबकि तकनीक बहुत कम समय में बदल जाती है। इसलिए चुनौती केवल स्वदेशी हथियार बनाने की नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने की भी है कि सेना में शामिल होने तक वह तकनीक उपयोगी और आधुनिक बनी रहे।

    सैन्य जरूरतों के अनुरूप होनी चाहिए क्षमताएं
    उन्होंने कहा, “हर परिस्थिति के लिए एक ही समाधान कारगर नहीं हो सकता। भारतीय सेना समुद्र तल से लेकर अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों तक और अत्यधिक गर्मी से लेकर शून्य से काफी नीचे के तापमान तक काम करती है। इसलिए हमारी सैन्य क्षमताएं भारत की अपनी भौगोलिक परिस्थितियों, अलग-अलग इलाकों और सैन्य जरूरतों के अनुरूप होनी चाहिए। कुछ सौ डॉलर की कीमत वाला ड्रोन लाखों डॉलर की कीमत वाले सैन्य प्लेटफार्म के लिए खतरा बन सकता है। कम कीमत वाली, स्मार्ट और बड़े पैमाने पर उपलब्ध तकनीक अब बेहद महंगे सैन्य हथियारों और उपकरणों के लिए भी खतरा बन सकती है।”

    कुछ देशों तक सीमित नहीं रही तकनीक
    इसके साथ ही सेनाध्यक्ष ने बताया कि तकनीक अब कुछ देशों या संस्थाओं तक सीमित नहीं रही है। जो तकनीक हमारे पास है, वही हमारे विरोधी के पास भी हो सकती है। इसलिए केवल नई तकनीक हासिल करना पर्याप्त नहीं होगा। असली बढ़त इस बात से मिलेगी कि हम विरोधी से कितनी तेजी से नए समाधान खोजते हैं, खुद को बदलते हैं और उसकी तकनीक का जवाब तैयार करते हैं। हालांकि उन्होंने पुरानी सैन्य प्रणालियों को जल्दबाजी में बेकार मान लेने के प्रति भी आगाह किया।

    पुराने हथियारों को बदलना नहीं
    उन्होंने कहा, “आज के युद्ध दिखा रहे हैं कि पुरानी प्रणालियां भी नई तकनीक के साथ बेहद प्रभावी हो सकती हैं। दशकों पहले विकसित की गई एयर डिफेंस तोपें आधुनिक सेंसर और अग्नि नियंत्रण प्रणाली के साथ ड्रोन और ड्रोन समूहों के खिलाफ प्रभावी हो सकती हैं। इसलिए भविष्य की सैन्य क्षमता का अर्थ हमेशा पुराने हथियारों को बदलना नहीं है। कई बार पुरानी और भरोसेमंद प्रणालियों को नई तकनीक से जोड़कर उन्हें और प्रभावी बनाया जा सकता है।”

    भारत की इन दोनों की जरूरत
    जनरल सेठ ने कहा कि हमें दूर से मार करने की क्षमता और जमीन पर सीधे युद्ध करने की क्षमता, दोनों की आवश्यकता है। लंबी दूरी के हथियार युद्धक्षेत्र को प्रभावित कर सकते हैं, लेकिन जमीन पर कब्जा करने, उसे अपने नियंत्रण में रखने और उसकी रक्षा करने का काम अंततः सैनिक को ही करना होगा। उन्होंने कहा, “भारतीय सेना को लंबी मारक क्षमता और मजबूत जमीनी क्षमता, दोनों की जरूरत है।”

    इस बात को ध्यान में रखकर होना चाहिए ये काम
    सूचना, साइबर और अंतरिक्ष सहित युद्ध के नए क्षेत्रों की बढ़ती भूमिका के बावजूद थल सेनाध्यक्ष ने कहा, “जमीन पर नियंत्रण ही सफलता का एकमात्र प्रत्यक्ष संकेतक है। जमीन पर नियंत्रण सैनिक ही स्थापित करता है और वही उसकी रक्षा करता है। इसलिए सैन्य क्षमता से जुड़ा हर निर्णय इस बात को ध्यान में रखकर होना चाहिए कि वह सैनिक को कितना अधिक सक्षम बनाता है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता के केंद्र में योद्धा होना चाहिए। हर सैन्य क्षमता अंततः योद्धा के लिए बनाई जानी चाहिए।”

    हमें लड़ने की स्वतंत्रता देती है आत्मनिर्भरता
    इन वास्तविकताओं को ध्यान में रखते हुए थल सेनाध्यक्ष ने भविष्य की सैन्य क्षमताओं के विकास के लिए समर्थ की अवधारणा सामने रखी। उन्होंने कहा कि भारतीय रक्षा उत्पाद 80 से अधिक देशों तक पहुंचे हैं। आज 175 में से 159 प्रकार के गोला-बारूद का स्वदेशीकरण हो चुका है। रक्षा उत्पादन में करीब 16,000 सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग भाग ले रहे हैं। उन्होंने कहा, “आत्मनिर्भरता हमें लड़ने की स्वतंत्रता देती है। क्षमता हमें लड़ने की सामर्थ्य देती है। योद्धा हमें लड़ने की इच्छाशक्ति देता है। ये सभी मिलकर हमें जीतने की क्षमता देते हैं।

  • जंग जीतना नहीं, जंग रोकना है असली जीत! कौन हैं अमेरिकी एडमिरल सैमुअल पापारो

    जंग जीतना नहीं, जंग रोकना है असली जीत! कौन हैं अमेरिकी एडमिरल सैमुअल पापारो

    वाशिंगटन
    जब दुनिया जंग के मैदान में फतह हासिल करने को ही सबसे बड़ी कामयाबी मानती है, तब एक चार सितारा अमेरिकी सैन्य कमांडर की सोच बिल्कुल अलग नजर आती है।

    यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड के प्रमुख एडमिरल सैमुअल पापारो का मानना है कि एक सच्चे फौजी की असली जीत युद्ध लड़ने में नहीं, बल्कि उसे होने से रोकने में है। आज उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती चीन की आक्रामकता को थामना और ताइवान पर मंडराते युद्ध के बादलों को छांटना है।

    मावेरिक नहीं, शांत और अनुशासित आइसमैन बने प्रेरणा
    बात 1986 की है, जब सैमुअल पापारो पेंसिल्वेनिया में अपनी कॉलेज की पढ़ाई कर रहे थे। एक रोज वह अपनी मंगेतर मॉरीन के साथ मशहूर हॉलीवुड फिल्म टॉप गन देखने पहुंचे। उस दौर में टॉम क्रूज का बेपरवाह और आक्रामक किरदार मावेरिक हर नौजवान का हीरो था।

    मगर दिलचस्प बात यह रही कि पापारो को मावेरिक नहीं, बल्कि उसका प्रतिद्वंद्वी आइसमैन भा गया। पापारो का मानना था कि आइसमैन हवा-हवाई बातों पर नहीं, बल्कि अनुशासन, कड़ी मेहनत और सही फैसलों पर भरोसा करता था। यही सोच आगे चलकर उनके पूरे सैन्य जीवन की रीढ़ बनी।

    पापारो का वर्दी से पुश्तैनी नाता
    सैन्य सेवा का संस्कार पापारो को विरासत में मिला था, हालांकि उनका पारिवारिक परिवेश बेहद सादगी भरा था। उनके पिता सैमुअल सीनियर मरीन कोर में रहे और यूएसएस जॉन एफ. कैनेडी और किट्टी हॉक जैसे विशालकाय एयरक्राफ्ट कैरियर्स की देखरेख का काम किया। वहीं उनके दादा द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नौसेना के निर्माण दस्ते का हिस्सा रहे।

    उनकी मां ने दक्षिण फिलाडेल्फिया के हेयर सैलून में बाल धोने और स्टोर में मेकअप काउंटर पर काम करके घर संभाला। पापारो अपने परिवार की पहली पीढ़ी थे जिन्होंने उच्च शिक्षा हासिल की।

    विलेनोवा कैथोलिक कॉलेज से ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद उन्होंने टॉपगन फाइटर वेपन्स स्कूल से फाइटर पायलट की ट्रेनिंग ली और अमेरिकी नौसेना की अग्रिम कतार में शामिल हो गए।

    पापारो कैसे करते है आधी दुनिया पर निगरानी?
    एडमिरल पापारो आज दुनिया की सबसे विशाल सैन्य कमान की अगुवाई कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में करीब 4 लाख सैन्य व असैन्य कर्मी, 5 एयरक्राफ्ट कैरियर, लगभग 200 युद्धपोत और 1,000 से अधिक आधुनिक लड़ाकू विमान तैनात हैं।

    दूसरे विश्व युद्ध के बाद से प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका का दबदबा रहा है, लेकिन अब शी जिनपिंग के नेतृत्व वाला चीन इस प्रभुत्व को सीधी चुनौती दे रहा है।

    रिपोर्टों के अनुसार, चीनी राष्ट्रपति ने अपनी सेना को 2027 तक ताइवान पर नियंत्रण करने लायक ताकत हासिल करने का लक्ष्य दे रखा है। ऐसे में पापारो का दायित्व सिर्फ सीमाएं संभालना नहीं, बल्कि बीजिंग को यह अहसास कराना है कि ताइवान पर किसी भी सैन्य दुस्साहस का अंजाम कितना भयावह हो सकता है।

    पापारो विवादों से रखते दूरी
    एडमिरल पापारो सुर्खियों और गैर-जरूरी बयानों से दूर रहना पसंद करते हैं। बताया जाता है कि उन्होंने ईरान संकट के समय भी एयरक्राफ्ट कैरियर्स और विध्वंसकों से हवाई हमलों को लेकर अपनी स्वतंत्र सैन्य राय रखी थी और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के सामने भी स्थिति का सटीक आकलन पेश किया था।

    पापारो साफ कहते हैं कि वे जंग जीतकर कोई महान नायक बनने की होड़ में नहीं हैं। उनका एकमात्र मकसद प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक संतुलन बनाए रखना और शांति की रक्षा करना है। उनकी सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि वे जिस जंग की तैयारी दिन-रात कर रहे हैं, दुनिया को वह जंग कभी लड़नी ही न पड़े।

  • 8th Pay Commission पर बड़ा अपडेट, अक्टूबर में मुंबई-बेंगलुरु में होंगी अहम बैठकें

    8th Pay Commission पर बड़ा अपडेट, अक्टूबर में मुंबई-बेंगलुरु में होंगी अहम बैठकें

    नई दिल्ली
    8th सेंट्रल पे कमीशन (8th Central Pay Commission) को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की नजर अब इसकी आगामी बैठकों और राज्यों के दौरों पर है। आयोग ने अक्टूबर 2026 में मुंबई और बेंगलुरु में स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन का प्रोग्राम तय किया है। इसके अलावा कंसल्टेंट इंगेजमेंट गाइडलाइंस में बदलाव और जयपुर व चंडीगढ़ से जुड़े पुराने नोटिस भी आयोग के हालिया अपडेट का हिस्सा हैं। हालांकि, इन गतिविधियों को वेतन बढ़ोतरी या फिटमेंट फैक्टर के अंतिम ऐलान से जोड़कर देखना सही नहीं होगा।

    8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) का गठन 3 नवंबर 2025 को किया गया था। आयोग की अध्यक्षता जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। प्रोफेसर पुलक घोष सदस्य और पंकज जैन मेंबर-सेक्रेटरी हैं। आयोग का मुख्य काम केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के पे, अलाउंसेस, पेंशन और दूसरी सेवा शर्तों की समीक्षा कर सरकार को अपनी सिफारिशें देना है। फिलहाल, आयोग अलग-अलग कर्मचारी संगठनों, यूनियनों, पेंशनर एसोसिएशनों और अन्य हितधारकों से सुझाव ले रहा है।

    मुंबई दौरा इस प्रॉसेस में अगला महत्वपूर्ण पड़ाव है। आयोग 22 और 23 अक्टूबर 2026 को मुंबई में स्टेकहोल्डर मीटिंग्स करेगा। योग्य कर्मचारी यूनियन, प्रतिनिधि संगठन, पेंशनर एसोसिएशन, फेडरेशन और अन्य संबंधित ग्रुप आयोग से मुलाकात के लिए एप्वाइंटमेंट रिक्वेस्ट भेज सकते हैं। इसके लिए 10 अक्टूबर 2026 तक आवेदन किया जा सकता है। बैठक का स्थान और विस्तृत कार्यक्रम बाद में जारी किया जाएगा।

    इससे पहले आयोग का बेंगलुरु दौरा 7 और 8 अक्टूबर 2026 को निर्धारित है। इसके लिए एप्वाइंटमेंट रिक्वेस्ट भेजने की अंतिम तारीख 18 सितंबर 2026 थी, जो अब समाप्त हो चुकी है। इसी तरह जयपुर में 31 अगस्त और 1 सितंबर को प्रस्तावित बैठक तथा चंडीगढ़ में 16 से 18 सितंबर तक हुए प्रोग्राम भी स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन का हिस्सा थे। इन दौरों का उद्देश्य अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े लोगों की राय और सुझाव समझना है।

    आयोग ने 11 अगस्त 2026 को कंसल्टेंट की नियुक्ति से जुड़ी गाइडलाइन्स में भी आंशिक बदलाव किया था। यह एक प्रशासनिक अपडेट है और इसका सीधा मतलब कर्मचारियों की सैलरी, पेंशन या अलाउंसेस में बदलाव नहीं है। इसी तरह अलग-अलग कर्मचारी संगठनों की ओर से फिटमेंट फैक्टर, मिनिमम बेसिक पे या सैलरी हाइक को लेकर कई मांगें सामने आ सकती हैं, लेकिन इन्हें आयोग की अंतिम सिफारिश नहीं माना जाना चाहिए।

    फिलहाल, 8th पे कमीशन के ताजा अपडेट में किसी निश्चित फिटमेंट फैक्टर, मिनिमम बेसिक सैलरी या सैलरी हाइक की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। आयोग की राज्यवार बैठकें अभी कंसल्टेशन प्रॉसेस का हिस्सा हैं। आगे आयोग विभिन्न सुझावों और उपलब्ध आंकड़ों का अध्ययन करके अपनी सिफारिशें तैयार करेगा। इसके बाद सरकार इन सिफारिशों पर फैसला लेगी। इसलिए सोशल मीडिया या अन्य जगहों पर चल रहे वेतन बढ़ोतरी के आंकड़ों को आधिकारिक फैसला मानने से पहले सरकारी घोषणा का इंतजार करना जरूरी है।

  • पूर्व IAS दिव्या मित्तल के इस्तीफे के बाद बढ़ी हलचल, 29 सितंबर को बताएंगी भविष्य का प्लान

    पूर्व IAS दिव्या मित्तल के इस्तीफे के बाद बढ़ी हलचल, 29 सितंबर को बताएंगी भविष्य का प्लान

    लखनऊ
    उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले की पूर्व जिलाधिकारी (DM) और चर्चित पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने 30 अगस्त को प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा दे दिया था। इसके 14 दिन बाद 14 सितंबर को उनका इस्तीफा स्वीाकर कर लिया गया। उन्होंने इसकी जानकारी एक्स हैंडल पर दी थी।

    इस्तीफा स्वीकार होने के बाद सोशल मीडिया पर उनके भविष्य को लेकर तरह-तरह के दावे किए जा रहे हैं, इन दावों पर विराम लगाते हुए दिव्या मित्तल ने अपने एक्स हैंडल पर एक पोस्ट शेयर की है। जिसमें उन्होंने संकेत दिया है कि वह 29 सितंबर को सुबह अपने भविष्य के प्लान का एलान करने वाली हैं।

    सोशल मीडिया पर लगाए जा रहे कयासों का किया जिक्र
    सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए पोस्ट में पूर्व आईएएस दिव्या मित्तल ने अपनी पोस्ट में उन तमाम अटकलों और कयासों का जिक्र किया, जिसको लेकर उनके इस्तीफे के बाद से कयास लगाए जा रहे थे।

    उन्होंने लिखा, "आगे क्या करना है? मैंने पढ़ा: बच्चे छोटे हैं। अब घर। अच्छा पैकेज मिलेगा। वापस विदेश। IAS पर किताब लिखी है। कोचिंग। टिकट पक्का हो गया होगा। राजनीति। 29 सितंबर, सुबह 8:30 बजे बताऊंगी।"

    दिव्या मित्तल के इस पोस्ट के बाद उनके अगले कदम को लेकर उत्सुकता काफी बढ़ गई है और लोग उन्हें आगे भविष्य के लिए शुभकामनाएं दे रहे हैं। कुछ लोगों ने लिखा है कि हमें इंतजार है। ऐसे में अब सभी 29 सितंबर को सुबह 8:30 बजे का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, जब दिव्या मित्तल स्वयं अपने अगले कदम का खुलासा करेंगी।

    कौन हैं पूर्व आईएएस दिव्या मित्तल?
    गौरतलब है कि पूर्व आईएएस दिव्या मित्तल का जन्म हरियाणा राज्य के रेवाड़ी जिले में हुआ है। दिव्या मित्तल ने आईआईटी दिल्ली से बीटेक और आईआईएम बेंगलुरु से एमबीए की पढ़ाई की है।

    शादी के बाद वह अपने पति गगनदीप के साथ लाखों के पैकेज पर लंदन चली गईं। कुछ समय बाद वह लंदन की नौकरी छोड़ वापस अपने देश भारत लौट आईं।

    यहां आकर वह यूपीएससी की तैयारी में जुट गई। इसके बाद साल 012 में दिव्या मित्तल यूपीएससी ने क्रैक किया। उनका सेलेक्शन आईपीएस के लिए हुआ, लेकिन वह आईएएस बनना चाहती थी।

    दूसरे प्रयास में 2013 में आईएएस बन गईं। दिव्या मित्तल अपने कार्यकाल के दौरान मिर्जापुर, बस्ती, देवरिया जिले में डीएम रहीं। इसके अलावा उन्होंने कई अन्य महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर जिम्मेदारी संभाली।

     

  • 308 पहियों वाला ‘बाहुबली’ ट्रक लेकर पहुंचा 200 टन का वेसल, देखने उमड़ी भीड़

    308 पहियों वाला ‘बाहुबली’ ट्रक लेकर पहुंचा 200 टन का वेसल, देखने उमड़ी भीड़

    लखनऊ
     Balrampur News बेल्जियम देश से समुद्र के रास्ते भारत पहुंचे विशालकाय वेसल की देश भर में चर्चा है। हर किसी को इसके बारे में जानने की इच्छा है। लगभग 200 टन वजनी इस वेसल को 308 पहियों वाला ट्रक लेकर यूपी के बलरामपुर की तरफ बढ़ रहा है।

     ये ट्रक जिस भी शहर से गुजर रहा है वहां इसे देखने वालों का हुजूम उमड़ रहा है। कोई सेल्फी ले रहा तो कोई वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर रहा है। आइए यहां जानते हैं कि इस ट्रक और इसपर लदे इस विशालकाय वेसल के बारे में पूरी डिटेल।

    कैसे भारत पहुंचा वेसल
    जानकारी के अनुसार, ये वेसल ओडिशा के पारादीप बंदरगाह पर उतरा और फिर इसे 308 पहियों वाले विशालकाय ट्रेलर पर क्रेन की मदद से रखा गया। इसके बाद ये ट्रक झारखंड और बिहार के रास्ते उत्तर प्रदेश पहुंचा।

    अब तक किन शहरों से होकर गुजरा वायरल ट्रक
    ओडिशा से शुरू हुई इस ट्रक की यात्रा झारखंड और बिहार से होते हुए उत्तर प्रदेश पहुंची है। सफर के दौरान ये ट्रक झारखंड की राजधानी रांची के पास नगड़ी टोल प्लाजा और पिस्का रेलवे क्रॉसिंग से होते हुए गुजरा। इसके बाद इस ट्रक ने बिहार में प्रवेश किया जहां ये औरंगाबाद, रोहतास और कैमूर के रास्ते आगे बढ़ा। आखिर में ये ट्रक अब यूपी में प्रवेश कर चुका है। जहां ये चंदौली और वाराणसी के रास्ते अपने गंतव्य बलरामपुर चीनी मिल की और बढ़ रहा है।

    रोजाना केवल 10 से 12 किलोमीटर की दूरी हो रही तय
    इस वेसल के भारी वजन को सड़क पर संतुलित करने के लिए ट्रक में 308 पहिये लगाए गए हैं। बताया जा रहा है कि अत्यधिक वजन के कारण यह महाट्रक रोजाना केवल 10 से 12 किलोमीटर की ही दूरी तय कर पा रहा है। इस ट्रक ने अभी तक के सफर में लगभग 2 करोड़ रुपए का डीजल इस्तेमाल किया है।

    किस काम आएगा ये 200 टन का वेसल
    बेल्जियम से आया ये 200 टन का बाहूबली वेसल बलरामपुर चीनी मिल से जुड़े एथनॉल प्लांट के लिए ले जाया जा रहा है। इस वेसल में वैक्यूम बॉयलर जैसे इंटस्ट्रियल बॉयलर उपकरण हैं।

    308 पहियों वाले ट्रक के लिए बनाना पड़ा स्पेशल रूट
    इसका बड़ा आकार होने के कारण आम सड़कों से निकालने के लिए स्पेशल रूट बनाने की जरूरत पड़ी। कई शहरों में कई मार्गों को बंद करना पड़ा तो कहीं बिजली के खंभे और तारों को हटाना भी पड़ा। कैमूर में इसे निकालने के लिए पुल तोड़ने की भी जरूर पड़ी। इस ट्रक के साथ पुलिस प्रशासन की टीम भी लगातार चल रही है। बता दें कि ये ट्रक अब वाराणसी से होते हुए गाजीपुर की तरफ बढ़ रहा है और जल्दी ही बलरामपुर पहुंचाया जाएगा।

     

  • मौसम ने फिर बढ़ाई टेंशन, यूपी-दिल्ली-बिहार समेत 20 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

    मौसम ने फिर बढ़ाई टेंशन, यूपी-दिल्ली-बिहार समेत 20 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

    नई दिल्ली
    देश के पूर्वी और उत्तरी राज्यों में मानसून के रौद्र रूप के बीच मौसम विभाग ने एक बार फिर से टेंशन बढ़ाने वाला अलर्ट जारी कर दिया है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक आज यानी 28 सितंबर को यूपी, दिल्ली, बिहार, पंजाब सहित 20 राज्यों में मूसलाधार बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 75 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से तेज हवा के झोंके चलने की चेतावनी है। इस बीच पहाड़ी इलाकों में लैंड स्लाइड की भी चेतावनी जारी की गई है। अगर आप यात्रा का प्लान कर रहे हैं तो मौसम विभाग का अपडेट जरूर पढ़ लीजिए नहीं तो मुश्किलों में फंस सकते हैं। छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश में तेज आंधी लोगों की मुश्किलें बढ़ा सकता है। वहीं, आज पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कई जिलों में खतरनाक बारिश की चेतावनी जारी की गई है। इस बीच मछुआरों और किसानों को समुद्री इलाकों से दूर हटकर सुरक्षित जगहों पर जाने के लिए कहा गया है। पश्चिम मध्य बंगाल में अगले 24 घंटे फिर से भारी पड़ने वाले हैं।

    वहीं, बंगाल की खाड़ी में पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी तक एक डीप डिप्रेशन बना हुआ है जिससे पूर्वी भारत के लोगों की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। इसके अलावा दक्षिण छत्तीसगढ़ और ओडिशा में डीप डिप्रेशन की वजह से मौसम बिगड़ने वाला है। उत्तर-पूर्वी असम और आसपास के इलाकों में ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है। मध्य उत्तर प्रदेश के उत्तरी हिस्सों में एक सुस्पष्ट दाब क्षेत्र में बदल गया। तो चलिए आज हम आपलोगों को बताते हैं कि आज यानी 28 सितंबर को देश के अन्य राज्यों में मौसम का हाल कैसा रहेगा। इसके अलावा हम जिलावार भी मौसम का हाल बता रहे हैं

    देश के 20 राज्यों में प्रचंड बारिश-आंधी की चेतावनी
    मौसम विभाग की भविष्यवाणी के मुताबिक आज यानी 28 सितंबर को देश के 20 राज्यों यूपी, बिहार, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, उत्तराखंड, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, अंडमान-निकोबार और केरल में भारी बारिश और आंधी का अलर्ट जारी कर दिया है। इस बारिश के साथ 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने की चेतावनी है।

    दिल्ली में आज मौसम कैसा रहेगा
    दिल्ली(28 सितंबर-बारिश-आंधी का अलर्ट): मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक दिल्ली में आज यानी 28 सितंबर को मध्यम बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान हवा की रफ्तार 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे तक रहने की चेतावनी है। वहीं, दिल्ली में आज यानी 28 सितंबर को अधिकतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस जाएगा तो न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस तक रहेगा।

    यूपी में आज मौसम कैसा रहेगा
    यूपी(28 सितंबर-बारिश-आंधी की चेतावनी): बिजनौर, रामपुर, बरेली, मोरादाबाद, लखीमपुर खीरी, बागपत, श्रावस्ती, सहारनपुर, बहराइच, सिद्धार्थ नगर, देवरिया, गोरखपुर, कुशीनगर, गाजीपुर, मथुरा, अलीगढ़, आगरा, कानपुर, प्रयागराज और अंबेदकर नगर में मध्यम से भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से तेज हवा के झोंके चलेंगे। । वहीं, इस दौरान लखनऊ में आज यानी 28 सितंबर को अधिकतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस पहुंचेगा तो न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस तक जाएगा।

    बिहार में आज मौसम कैसा रहेगा
    बिहार(28 सितंबर-भारी बारिश-आंधी का अलर्ट): पश्चिमी चंपारण, पटना, भोजपुर, सिवान, गोपालगंज, पूर्वी चंपारण, औरंगाबाद, सारण, वैशाली, समस्तीपुर, दरभंगा, मधुबनी, पूर्णिया, किशनगंज, कटिहार, भागलपुर, मुंगेर, बेगूसराय और बांका में भारी बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 60 से 65 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चलने की संभावना है। वहीं, पटना में आज यानी 28 सितंबर को अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचेगा तो न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस तक जाएगा।

    झारखंड में आज मौसम कैसा रहेगा
    झारखंड(28-29 सितंबर-तेज बारिश-तूफान की चेतावनी): गुमला, गढ़वा, सिमडेगा, रांची, पश्चिम सिंहभूम, धनबाद, गिरिडीह, बोकारो, साहेबगंज, रामगढ़, हजारीबाग, जमशेदपुर और पलामू में भारी बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 70 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से आंधी चलेगी। वहीं, रांची में आज यानी 28 सितंबर को अधिकतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस रहेगा तो न्यूनतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस पहुंचेगा।

    उत्तराखंड में आज मौसम कैसा रहेगा
    उत्तराखंड (28 सितंबर-बारिश-आंधी का अलर्ट): हरिद्वार, चमोली, रुद्रप्रयाग, अल्मोड़ा, पिथौरागढ, पौड़ी गढ़वाल और नैनीताल में प्रचंड बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 40 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से आंधी चलेगी। वहीं, देहरादून में आज यानी 28 सितंबर को अधिकतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस पहुंचेगा तो न्यूनतम तापमान 19 डिग्री सेल्सियस रहेगा।

    हिमाचल में आज मौसम कैसा रहेगा
    हिमाचल (28-29 सितंबर-बारिश-तूफान की चेतावनी): मंडी, सोलन, बिलासपुर, किन्नौर, लाहौल-स्पीति, सिरमौर, कुल्लू और मनाली में तेज बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा के झोंके चलेंगे। वहीं, मनाली में आज यानी 28 सितंबर को अधिकतम तापमान 8 डिग्री सेल्सियस तक जाएगा न्यूनतम तापमान 3 डिग्री सेल्सियस तक रहेगा।

    जम्मू-कश्मीर में आज मौसम कैसा रहेगा
    जम्मू-कश्मीर (28 सितंबर-भारी बारिश-आंधी की संभावना): राजौरी, बारामूला, गांदरबल, डोडा, कठुआ और सांबा में मध्यम से भारी बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी की चेतावनी है। वहीं, श्रीनगर में आज यानी 28 सितंबर को अधिकतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस तो न्यूनतम तापमान 12 डिग्री सेल्सियस पहुंचेगा।

    पश्चिम बंगाल में आज मौसम कैसा रहेगा
    पश्चिम बंगाल(28 सितंबर-भारी बारिश-आंधी का अलर्ट): पुरबा मेदिनीपुर, दार्जिलिंग, हावड़ा, नादिया, कोलकाता, अलीपुरद्वार, दुर्गापुर और बीरभूम में तेज बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, इस दौरान 60 से 65 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा के झोंके चलेंगे। वहीं, कोलकाता में आज यानी 28 सितंबर को अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस तो न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस पर जाएगा।

    पंजाब में आज मौसम कैसा रहेगा
    पंजाब (28 सितंबर-भारी बारिश और आंधी की संभावना): पठानकोट, लुधियाना, चंडीगढ़, जालंधर, मोगा, मनसा,कपूरथला और पटियाला में भारी बारिश-आंधी की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 50 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलेगी।

    राजस्थान में आज मौसम कैसा रहेगा
    राजस्थान (28 सितंबर-बारिश-आंधी की चेतावनी): सवाई माधोपुर, कोटा, पाली, बीकानेर, उदयपुर, जयपुर, अजमेर और भरतपुर में भारी बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चलेगी। वहीं, जयपुर में आज यानी 28 सितंबर को अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस तो न्यूनतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस तक रहेगा।

    मध्य प्रदेश में आज मौसम कैसा रहेगा
    मध्य प्रदेश (28-29 सितंबर- बारिश-आंधी का येलो अलर्ट): नरसिंहपुर, देवास, होशंगाबाद, भोपाल, इंदौर, खांडवा, गुना, मुरैना, शेयोपुर, उज्जैन, विदिशा, अशोक नगर, नीमच, उमरिया, छिंदवाड़ा, अशोक नगर और कटनी में मध्यम से भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 40 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से तेज आंधी चल सकती है। वहीं, भोपाल में आज 28 सितंबर को अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस पहुंचेगा न्यूनतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस रहेगा।

    छत्तीसगढ़ में आज मौसम कैसा रहेगा
    छत्तीसगढ़(28 सितंबर-भारी बारिश-आंधी की चेतावनी): बिलासपुर, सूरजपुर, रायपुर, धमतरी दुर्ग, बस्तर, महासमुंद और बेमेतरा में बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 70 से 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी।

    ओडिशा में आज मौसम कैसा रहेगा
    ओडिशा(28 सितंबर-भारी बारिश-आंधी का अलर्ट): मयूरभंज, भुवनेश्वर, पुरी, क्योंझर, भद्रक, बालासोर, कटक, गजपति, गंजाम, मयूरभंज और झारसपगुड़ा में मध्यम से भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलने की चेतावनी है।

  • होर्मुज संकट से ग्लोबल ऑयल सप्लाई पर दबाव, क्रूड 123 डॉलर के पार; भारत पर बढ़ी चिंता

    होर्मुज संकट से ग्लोबल ऑयल सप्लाई पर दबाव, क्रूड 123 डॉलर के पार; भारत पर बढ़ी चिंता

    नई दिल्ली
     पश्चिम एशिया में पिछले सात महीनों से जारी युद्ध ने अब दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातक सऊदी अरब को भी अपनी चपेट में ले लिया है, जिससे ग्लोबल ऑयल सप्लाई पर दबाव बढ़ गया है। होर्मुज स्ट्रेट 28 फरवरी से बंद है, जबकि 10 सितंबर को ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर ड्रोन हमले के बाद सऊदी अरब के कच्चे तेल के निर्यात का पश्चिमी रास्ता भी बंद हो गया है। इन रुकावटों के कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़कर 109.4 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं, अभी ये 104.2 डॉलर पर हैं।

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट' पर हस्ताक्षर करने के बाद सप्लाई में रुकावट और बढ़ सकती है। ट्रंप ने यूएन में कहा कि अमेरिकी कांग्रेस चुनावों के बाद ईरान के पास या तो पूरी तरह खत्म होने या फिर डील करने का विकल्प है। सात दिनों के भीतर ही ईरान ने संकेत दिया कि वह डील करना पसंद करेगा।

    16-17 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक पहुंच सकता है सप्लाई संकट
    स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से पहले दुनिया की करीब 20 फीसदी तेल आपूर्ति इसी रास्ते से गुजरती थी। इसमें करीब 1.5 करोड़ बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल और 50 लाख बैरल पेट्रोलियम उत्पाद शामिल थे। होर्मुज के रास्ते को आंशिक रूप से बायपास करने के लिए सऊदी अरब ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के जरिए करीब 40 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल निर्यात कर रहा था। वहीं, यूएई हबशन-फुजैराह पाइपलाइन के जरिए करीब 15 लाख बैरल प्रतिदिन तेल बाहर भेज रहा था। दोनों देश होर्मुज से बाहर तेल पहुंचाने के लिए शटल सेवाओं का इस्तेमाल कर रहे थे, जहां उसे दूसरे जहाजों में ट्रांसफर कर आगे भेजा जा सकता था।

    ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के बंद होने से कच्चे तेल की सप्लाई में कम से कम 13-14 मिलियन बैरल प्रतिदिन की रुकावट आ सकती है। रूस अभी हर दिन लगभग 3.5 मिलियन बैरल तेल एक्सपोर्ट करता है। अगर ग्राहम एक्ट लागू किया जाता है और जिन देशों को टारगेट किया गया है, वे मान जाते हैं, तो ग्लोबल ऑयल सप्लाई में रुकावट 16-17 मिलियन बैरल प्रति दिन तक बढ़ सकती है। इस कमी को पूरा करने के लिए कोई दूसरा जरिया नहीं है।

    LNG और पेट्रोलियम उत्पादों पर भी असर
    इस रुकावट का असर सिर्फ कच्चे तेल तक सीमित नहीं रहेगा। इसका असर पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स और एनएनजी पर भी पड़ेगा। एलएनजी को करीब -163 डिग्री सेल्सियस तापमान पर रखा जाता है और समुद्र के बीच इसे आसानी से दूसरे जहाज में ट्रांसफर नहीं किया जा सकता।

    भारत सरकार ने ग्राहम एक्ट को लेकर कहा है कि इसके प्रभाव सिर्फ द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं होंगे, बल्कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर भी असर पड़ेगा। मौजूदा हालात को देखते हुए यह चिंता और महत्वपूर्ण हो गई है।

    अमेरिका में भी बढ़ी कीमतों की मार
    ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी से तेहरान पर दबाव तो बनता है, लेकिन इससे खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका के सहयोगी देशों पर भी असर पड़ रहा है। इससे ईरान के स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लगातार बंद रखने के रुख के और मजबूत होने की आशंका है।

    अमेरिका में भी इसका असर स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। 4.30 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई हैं, जो 4 डॉलर प्रति गैलन से अधिक है। जबकि डीज़ल की कीमतें 6.75 डॉलर प्रति गैलन तक बढ़ गई हैं, जिससे चुनावी साल में खेती-बाड़ी के क्षेत्र पर असर पड़ रहा है।

    ग्राहम एक्ट लागू करने से न सिर्फ उन देशों की अर्थव्यवस्थाओं को नुकसान हो सकता है जिन्हें निशाना बनाया गया है, बल्कि अमेरिकी उपभोक्ताओं को भी नुकसान हो सकता है। क्योंकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतें बढ़ने से अमेरिका में भी कीमतें बढ़ेंगी। अमेरिका के बेंचमार्क WTI की कीमत पहले ही 27 फरवरी को 67.02 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर अब 92.41 डॉलर हो गई है।

    यमन में सऊदी समर्थित बलों को झटका
    इस बीच यमन में सऊदी समर्थित बलों को भी नुकसान उठाना पड़ा है। हूतियों ने मोचा बंदरगाह पर कब्जा कर लिया है और पेरिम द्वीप पर भी नियंत्रण स्थापित कर लिया है। इसके अलावा सऊदी अरब के सीमावर्ती शहरों और रियाद पर भी हमले किए गए हैं

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब के सीधे सैन्य हस्तक्षेप के अनुरोध को स्वीकार नहीं किया है। अमेरिका के अलावा ब्रिटेन और फ्रांस का समर्थन फिलहाल खुफिया जानकारी और लॉजिस्टिक सहायता तक सीमित बताया गया है। तुर्की और पाकिस्तान ने भी सऊदी अरब के समर्थन में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच पिछले साल स्ट्रैटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट हुआ था। इससे पहले 2015 में भी पाकिस्तान ने हूतियों के खिलाफ सऊदी अरब के सैन्य अभियान में सीधे हस्तक्षेप से इनकार किया था।

    भारत पर क्यों बढ़ सकता है दबाव?
    भारत रूसी कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है, लेकिन उसने यह खरीद तब की थी जब अमेरिका ने कोई प्रतिबंध नहीं लगाया था। बाइडेन प्रशासन की 'प्राइस कैप' (कीमत की सीमा) पॉलिसी के तहत रूसी कच्चा तेल खरीदने की इजाजत थी, लेकिन छूट के साथ। हाल ही में ट्रंप प्रशासन ने भी समय-समय पर रूसी कच्चा तेल खरीदने के लिए लाइसेंस दिए थे। यह कानून भारत को तब निशाना बना रहा है जब उसने अमेरिकी तेल और गैस की खरीद बढ़ा दी है। अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान, भारत ने 8.2 अरब डॉलर का रूसी कच्चा तेल आयात किया। इस साल अगस्त में अमेरिका LNG आयात का सबसे बड़ा स्रोत भी बनकर उभरा है।

    पश्चिम एशिया संकट का असर भारत के लिए सीधे तौर पर भी दिख रहा है। भारत के क्रूड ऑयल बास्केट की कीमत 26 फरवरी को 70.61 डॉलर प्रति बैरल थी, जो अब बढ़कर 123.67 डॉलर प्रति बैरल बताई जा रही है। इसी अवधि में स्पॉट एलएनजी की कीमतों में करीब 150 फीसदी की वृद्धि हुई है।

    कतर से लंबे समय तक होने वाली सप्लाई बंद होने के बाद से भारत की खरीद में स्पॉट LNG का हिस्सा बढ़ गया है। ऐसे में लंबे समय तक ऊंची ऊर्जा कीमतें भारत के आयात बिल, परिवहन लागत और महंगाई पर दबाव डाल सकती हैं।

    राजनीतिक समाधान से ही राहत की उम्मीद
    जब तक कोई राजनीतिक समाधान नहीं निकलता, तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहेंगी। अमेरिका और ईरान को 17 जून के मेमोरेंडम पर वापस लौटना होगा। अमेरिका को जोरो एनरिचमेंट (संवर्धन) पर जोर देने की जरूरत नहीं है, NPT गैर-परमाणु हथियार वाले देशों को 3.67% एनरिचमेंट की इजाजत देता है। अमेरिका द्वारा नौसैनिक नाकेबंदी और प्रतिबंध हटाने तथा ईरानी संपत्ति को अनफ्रीज करने के बदले में, ईरान को होर्मुज से आजाद आवाजाही के मामले में लचीलापन दिखाना होगा।

     

     

  • Boeing 737 MAX में सॉफ्टवेयर गड़बड़ी, लैंडिंग के वक्त पायलटों को नहीं मिलेगा ऑटोमेटेड गाइडेंस

    Boeing 737 MAX में सॉफ्टवेयर गड़बड़ी, लैंडिंग के वक्त पायलटों को नहीं मिलेगा ऑटोमेटेड गाइडेंस

     वॉशिंगटन
     विमान बनाने वाली अमेरिकी कंपनी बोइंग के 737 MAX विमानों में सॉफ्टवेयर गड़बड़ी का पता चला है। इसकी वजह से लैंडिंग के दौरान पायलटों को ऑटोमेटेड फ्लाइट गाइडेंस नहीं मिल पाता है।

    कंपनी के डॉक्यूमेंट्स का हवाला देते हुए वॉल स्ट्रीट जर्नल ने रिपोर्ट दी है कि यह समस्या कॉकपिट सॉफ्टवेयर अपडेट से जुड़ी है और तब हो सकती है जब पायलट मिस्ड अप्रोच (लैंडिंग की कोशिश नाकाम होने) के बाद विमान का तय रूट बदलते हैं। ऐसी स्थिति में अगली बार लैंडिंग की कोशिश के दौरान ऑटोमेटेड नेविगेशन फीचर काम करना बंद कर सकता है।

    बोइंग ने क्या कहा?
    बोइंग ने कहा कि उसने पिछले महीने ही ऑपरेटर्स को इस समस्या के बारे में बता दिया था और वह इसके स्थायी समाधान पर काम कर रही है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को भेजे एक ईमेल बयान में बोइंग ने कहा, "हमने ऑपरेटर्स के साथ ऐसी स्थितियों को सुरक्षित रूप से संभालने के लिए मौजूदा पायलट प्रक्रियाओं को मजबूत करने वाली जानकारी साझा की। हमारे इंजीनियर इस समस्या को हमेशा के लिए ठीक करने के लिए एक सॉफ्टवेयर अपडेट पर काम कर रहे हैं।"

    फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (एफएए) सुरक्षा से जुड़ी संभावित समस्या की समीक्षा कर रहा है। एफएए ने कहा कि उसे कुछ 737 MAX विमानों में लगे फ्लाइट कंप्यूटर के लिए सॉफ्टवेयर अपडेट से जुड़ी समस्या के बारे में जानकारी है।

    एजेंसी ने कहा, "एफएए एक सुधारात्मक कार्रवाई समीक्षा बोर्ड बुलाएगा और अगर सुरक्षा से जुड़ी कोई चिंता सामने आती है तो तुरंत कार्रवाई करेगा।" एफएए, बोइंग और एयरलाइंस अब यह पता लगा रहे हैं कि प्रभावित सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कितनी बड़े पैमाने पर हो रहा है और क्या इस समस्या से सुरक्षा को कोई व्यापक खतरा है।

    विमानों की डिलीवरी पर रोक लगाने की मांग
    वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, साउथवेस्ट एयरलाइंस और यूनाइटेड एयरलाइंस ने बोइंग से कहा है कि वे उस सॉफ्टवेयर वाले नए 737 MAX विमानों की डिलीवरी रोक दें, जिनमें यह समस्या है। इसके बजाय उन्होंने पुराने सॉफ्टवेयर वर्शन वाले विमानों की मांग की है।

    इस नई समस्या के कारण MAX विमानों की जांच और बढ़ गई है। अभी यह साफ नहीं है कि इस सॉफ्टवेयर वाले कितने विमान अभी उड़ान भर रहे हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब बोइंग के 737 MAX प्रोग्राम की रेगुलेटरी और सुरक्षा के लिहाज़ से कड़ी जांच हो रही है।

  • मोजतबा खामेनेई को लेकर बड़ा दावा, ईरानी धर्मगुरु बोले- तीसरी बार मलबे से निकाले गए जिंदा

    मोजतबा खामेनेई को लेकर बड़ा दावा, ईरानी धर्मगुरु बोले- तीसरी बार मलबे से निकाले गए जिंदा

    तेहरान
    28 फरवरी 2026 को ईरान पर हुए भीषण अमेरिकी और इजरायली हमलों में अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान की कमान संभालने वाले नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई (56) को लेकर एक और सनसनीखेज खुलासा सामने आया है। ईरान की असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स के सदस्य और वरिष्ठ धर्मगुरु मोहसिन हैदरी ने कतरी टीवी चैनल 'अल अरबी' को दिए इंटरव्यू में दावा किया है कि शुरुआती हमले में घायल होने के बाद मोजतबा को इलाज के लिए तेहरान के एक अस्पताल ले जाया गया था, लेकिन इसके बाद तीन अस्पतालों को निशाना बनाया गया और मोजतबा को तीसरी बार मलबे से जिंदा निकाला गया।

    इस खुलासे के बाद 56 साल के नए सुप्रीम लीडर की सेहत, उनकी सार्वजनिक अनुपस्थिति और उनके सीक्रेट लोकेशन को लेकर दुनिया भर में फिर से चर्चा छिड़ गई है।

    अस्पताल पर बमबारी के बाद मलबे से बचाया गया
    ईरानी धर्मगुरु मोहसिन हैदरी के अनुसार, 28 फरवरी को अली खामेनेई के तेहरान स्थित परिसर पर हुए हमले में मोजतबा गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

    हैदरी ने बताया, "जब दुश्मनों को पता चला कि वे घायल होकर अस्पताल में भर्ती हैं, तो तेहरान के तीन अलग-अलग अस्पतालों पर बमबारी की गई। मोजतबा खामेनेई तीसरे अस्पताल में मौजूद थे और उन्हें मलबे के नीचे से बाहर निकाला गया।"

    इस हमले के बाद से ही मोजतबा किसी अज्ञात स्थान पर चले गए हैं और तब से अब तक न तो उन्हें सार्वजनिक रूप से देखा गया है और न ही उनका कोई ऑडियो-वीडियो संदेश जारी हुआ है।

    गुप्त कमरे में वोटिंग और 8 मार्च का चुनाव
    असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स का सचिवालय खुद अमेरिकी और इजरायली हमलों का शिकार बना था, जिसमें 8 लोग मारे गए थे और नए सुप्रीम लीडर से जुड़ी कई गोपनीय रिपोर्ट जलकर खाक हो गई थीं।

    हमले के बाद असेंबली के सदस्यों को बिना जगह बताए एक गुप्त कमरे में बुलाया गया। वहां सदस्यों ने कागज की पर्चियों पर अपने वोट लिखे।

    मोहसिन हैदरी ने बताया कि उन्होंने ही सबसे पहले मोजतबा खामेनेई के नाम का प्रस्ताव रखा था, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को अली खामेनेई के बेटे को चुनने पर अंजाम भुगतने की चेतावनी दी थी।

    मोजतबा को 59 में से 50 वोट मिले, जबकि 8 वोट अयातुल्ला अलीरेजा अराफी को पड़े और 1 सदस्य ने मतदान में भाग नहीं लिया।

    हैदरी के मुताबिक, मोजतबा को खुद भी यह अंदाजा नहीं था कि उन्हें चुना जा रहा है। उन्हें टीवी पर आधिकारिक ऐलान देखने के बाद ही अपने सुप्रीम लीडर बनने का पता चला।

    क्या वाकई जिंदा और स्वस्थ हैं मोजतबा खामेनेई?
    मोजतबा खामेनेई की सेहत को लेकर अमेरिका और ईरान की ओर से अलग-अलग विरोधी दावे किए जा रहे हैं।

    अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि वे मानते हैं कि मोजतबा मरे नहीं हैं, लेकिन वे बेहद गंभीर रूप से घायल और अधमरे हो चुके हैं। ट्रंप के मुताबिक उनके शरीर का बायां हिस्सा (हाथ और पैर) बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ है।

    संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के दौरान न्यू यॉर्क पहुंचे ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में इन दावों को खारिज किया। पेजेशकियान ने दावा किया कि उन्होंने हाल ही में मोजतबा खामेनेई के साथ 7 घंटे लंबी बैठक की है और वे पूरी तरह से स्वस्थ और शासन चलाने में सक्षम हैं।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सत्ता संभालने से पहले किसी भी औपचारिक पद पर न रहने वाले और "शैडो मैन" कहे जाने वाले मोजतबा खामेनेई की लंबे समय से जारी गुमनामी ईरान के भीतर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संशय को और बढ़ा रही है।

  • निकोटीन पाउच पर केंद्र सरकार सख्त, राज्यों को बिक्री रोकने और जब्ती के निर्देश

    निकोटीन पाउच पर केंद्र सरकार सख्त, राज्यों को बिक्री रोकने और जब्ती के निर्देश

    नई दिल्ली
    देशभर में खुलेआम बिक रहे 'निकोटीन पाउच' को लेकर केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। बिना मंजूरी के ऑनलाइन और दुकानों पर निकोटीन पाउच बेचने के मामलों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र ने सभी राज्यों को आधिकारिक पत्र भेजा है।

    सरकार ने इन अवैध उत्पादों की बिक्री तुरंत रोकने, इन्हें जब्त करने और बेचने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। ड्रग्स कंसल्टेटिव कमेटी के अनुसार, ये निकोटीन पाउच सेहत के लिए बेहद नुकसानदेह हैं। इन पैकेटों में अत्यधिक मात्रा में लत लगाने वाला निकोटीन होता है।

    बच्चों को जल्दी लग जाती है लत
    बता दें कि सबसे बड़ी चिंता यह है कि ये बच्चों तक आसानी से पहुंच रहे हैं, जिससे कम उम्र में ही युवाओं को इसकी खतरनाक लत लगने का बड़ा खतरा पैदा हो गया है। इसी को ध्यान में रखते हुए सलाहकार बोर्ड ने साफ सिफारिश की है कि निकोटीन के ऐसे किसी भी नए उत्पाद को बाजार में बेचने की अनुमति न दी जाए।

    गौर करने वाली बात यह है कि लोगों के मन में अक्सर यह सवाल आता है कि अगर सिगरेट छोड़ने के लिए 'निकोटीन गम' का इस्तेमाल किया जा सकता है, तो 'निकोटीन पाउच' पर पाबंदी क्यों है? आइए हम आपको बताते हैं।

    क्या है निकोटीन गम और निकोटीन पाउच में फर्क?
    इस बात को ऐसे समझिए मंजूरी प्राप्त निकोटीन गम शरीर को निकोटीन की एक नियंत्रित और सुरक्षित खुराक देते हैं, जिससे धीरे-धीरे सिगरेट या तंबाकू की लत छूटने में मदद मिलती है।

    अमेरिकी दवा नियामक संस्था (FDA) ने इनकी सुरक्षा और असरशीलता की पूरी जांच करने के बाद इन्हें सिगरेट छुड़ाने के एक वैध इलाज के तौर पर मंजूरी दी है। इसके साथ यदि डॉक्टर या काउंसलर की सलाह ली जाए, तो सिगरेट छोड़ने की सफलता दर दोगुनी से भी ज्यादा हो जाती है।

    निकोटीन पाउच असुरक्षित और गैर-कानूनी क्यों?
    इसके ठीक उलट, निकोटीन पाउच में  के इन पाउच में भी निकोटीन होता है, लेकिन इस बात का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि ये सिगरेट छुड़ाने में असरदार हैं। यही वजह है कि अमेरिकी एफडीए या अन्य प्रमुख स्वास्थ्य नियामकों ने इन्हें इलाज के रूप में कोई मंजूरी नहीं दी है।