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  • भारत को ट्रंप के टैरिफ से बड़ी राहत, इन दवाओं पर नहीं लगेगा 100% शुल्क

    भारत को ट्रंप के टैरिफ से बड़ी राहत, इन दवाओं पर नहीं लगेगा 100% शुल्क

    वाशिंगटन
    अमेरिका भारत समेत कई देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने की बात कर रहा है। हालांकि ज्यादा टैरिफ लगाने से अमेरिका के लोगों को महंगाई का सामना करना पड़ता है। ऐसे टैरिफ से निर्यात करने वाले देश ही नहीं बल्कि अमेरिका को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। दवाइयों के मामले में भी यह किसी से छिपा नहीं है। डोनाल्ड ट्रंप ने दवाओं पर 100 फीसदी टैरिफ की बात कही थी। हालांकि अब ट्रंप प्रशासन कई खास दवाइयों को मूल्यानुसार शुल्क से छूट देने का विचार कर रहा है। इससे भारत की दवा कंपनियों को भी राहत मिलेगी।

    रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका भारत सहित 20 देशों से आयात की जाने वाली दुर्लभ बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं और उनसे जुड़े अवयवों परकोई मूल्यानुसार शुल्क नहीं लगाएगा। विश्व सीमा शुल्क संगठन के अनुसार मूल्यानुसार शुल्क, कर योग्य वस्तुओं के मौद्रिक मूल्य का एक निश्चित प्रतिशत होता है।

    घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर अमेरिका का जोर
    अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने फेडरल रजिस्टर में इन देशों की सूची प्रकाशित की है। विभाग 29 सितंबर से कुछ पेटेंट प्राप्त दवा आयात और उनसे जुड़े घटकों पर 100 प्रतिशत शुल्क लगाने की तैयारी कर रहा है। घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दो अप्रैल को पेटेंट प्राप्त दवाओं, बायोलाजिक्स और उनसे संबंधित अवयवों के आयात पर शुल्क लगाने के संबंध में एक घोषणापत्र जारी किया था।

    कौन सी दवाइयों पर मिलेगी राहत
    शून्य प्रतिशत शुल्क दर के लिए पात्र उत्पादों में दुर्लभ बीमारियों की सभी दवाएं, बांझपन उपचार, सेल थेरेपी, जीन थेरेपी, एंटीबॉडी-ड्रग कंजुगेट्स (एडीसी) और पशु औषधियां शामिल हैं। इन दवाओं में इस्तेमाल होने वाले अवयव भी शून्य प्रतिशत शुल्क दर के दायरे में आएंगे।

    भारत के अलावा इन देशों को भी राहत
    भारत के अलावा शून्य शुल्क दर वाली श्रेणी में शामिल अन्य देश अर्जेंटीना, बांग्लादेश, कंबोडिया, इक्वाडोर, अल साल्वाडोर, यूरोपीय संघ, ग्वाटेमाला, इंडोनेशिया, जापान, जॉर्डन, मलेशिया, उत्तरी मैसेडोनिया, दक्षिण कोरिया, स्विट्जरलैंड, लिकटेंस्टीन, ताइवान, थाईलैंड, ब्रिटेन और वियतनाम हैं।

    नोटिस में कहा गया कि इन देशों से आने वाले पात्र उत्पादों को शून्य प्रतिशत शुल्क का लाभ इसलिए मिल सकता है क्योंकि अमेरिका के साथ उनका इस समय व्यापार और सुरक्षा ढांचा समझौता है या आने वाले दिनों में यह समझौता हो सकता है। यह छूट व्यापार विस्तार अधिनियम की धारा 232 के तहत दवाओं और दवा अवयवों के आयात पर दी जा रही है। एक परिशिष्ट में नामित कंपनियों के लिए यह शुल्क 31 जुलाई से लागू हो चुका है और अन्य दायरे में आने वाली कंपनियों पर यह 29 सितंबर से लागू होगा। वाणिज्य विभाग के नोटिस के अनुसार, जेनेरिक दवा उत्पाद और उनसे जुड़े अवयव धारा 232 के तहत लगने वाले दवा शुल्क के दायरे में नहीं आते हैं।

  • नोएडा के ₹4,000 करोड़ जमीन घोटाले में बड़ा एक्शन, PCS अधिकारी बर्खास्त

    नोएडा के ₹4,000 करोड़ जमीन घोटाले में बड़ा एक्शन, PCS अधिकारी बर्खास्त

    लखनऊ
    यूपी सरकार ने भ्रष्टाचार के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। नोएडा में 4000 करोड़ रुपये के भूखंड घोटाले में वरिष्ठ पीसीएस अधिकारी हरीश चंद्र को सोमवार को बर्खास्त कर दिया गया है। वह मौजूदा समय कोलकाता पश्चिम बंगाल में स्थानिक प्रतिनिधि खाद्य एवं रसद विभाग के पद पर तैनात थे।

    प्रमुख सचिव नियुक्ति एवं कार्मिक एम. देवराज ने इस संबंध में सोमवार को आदेश जारी किया। हरिश्चंद्र पर नवीन ओखला औद्योगिक विकास प्राधिकरण में तैनाती के समय ग्राम शहदरा के सेक्टर 140-ए, 141, 142 व 143 में प्राधिकरण द्वारा अर्जित व कब्जा प्राप्त 381527 वर्ग मीटर भूमि को नियमों के विपरीत लीज बैक कर गंभीर अनियमितता के आरोप में 27 सितंबर 2013 को अनुशासनिक कार्रवाई की संस्तुति करते हुए मेरठ के मंडलायुक्त को जांच सौंपी गई।

    सेटेलाइट इमेज के आधार पर होना था आबादी का निर्धारण
    जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि नियमों के विपरीत जाकर लीक बैक कर गंभीर अनियमितता एवं भ्रष्टाचार किया गया। नोएडा विकास प्राधिकरण में तैनाती के दौरान ग्राम शहदरा की आबादी निस्तारण के लिए सर्वे कराया गया। आबादी का निर्धारण सेटेलाइट इमेज के आधार पर किया जाना चाहिए था, लेकिन जानबूझकर तथ्यों को छिपाने के लिए सेटेलाइटज इमेज का उपयोग नहीं किया गया। सर्वे आख्या जो प्रस्तुत की गई, उमें कई भू-मालिक, प्राइवेट कंपनियों व ग्राम के बाहर के निवासियों को भी शामिल किया गया। इसमें उनके द्वारा निजी स्वार्थवश कई तथ्यों को छिपाया गया। जैसे कालम नं-9 में मूल काश्तकार का नाम दर्ज नहीं किया गया।

    अनियमित तरीके से आवंटित कर दी गई जमीन
    कालम नं- 13 में विनियमितीकरण समिति को संदर्भित क्षेत्रफल का उल्लेख नहीं किया गया। लीज बैक के लिए डीएम, एसएसपी आदि की सदस्यता वाली समिति, प्राधिकरण बोर्ड व अन्य उच्चाधिकारियों के समक्ष तथ्यों को छिपाते हुए भ्रामक आख्या प्रस्तुत की गई, ताकि लीज बैक शहदरा के बाहर के व्यक्तियों एवं प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों के पक्ष में कराई जा सके और अपना स्वार्थ सिद्ध किया जा सके। उनके द्वारा समिति को भ्रामक आख्या प्रस्तुत कर लगभग 400447 वर्ग मीटर भूमि जिसका बाजार मूल्य लगभग 4000 करोड़ रुपये होता है, अनियमित तरीके से भू-माफिया से साठगांठ कर आवंटित कर दी गई।

    जानबूझकर तथ्यों को छिपाया गया
    वास्तविक तथ्यों को छिपाने तथा नियमों के विपरीत जानबूझकर भ्रामक आख्या प्रस्तुत करने, स्वयं व संबंधित निजी पक्षकारों को अनुचित लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से करीब 4000 करोड़ रुपये की क्षति पहुंचाने के लिए प्रथमदृष्टया दोषी पाए गए। जांच में पाया गया कि जानबूझकर तथ्यों को छिपाया गया। राजस्व अभिलेखों में दर्ज प्राइवेट लि. कंपनियों एस्टर इलेक्ट्रिक प्रालि, महानंदा इलेक्ट्रानिक प्रालि व प्रयास गारमेंट लि. कंपनियों द्वारा कुलदीप शर्मा पुत्र भूलेराम के स्थान पर तथ्यों का छिपाव करते हुए केवल कुलदीप शर्मा के नाम सर्वे में अंकित किए गए।

    2026 में लाए गए तथ्यों के आधार पर हुई कार्रवाई
    शासनादेश में कहा गया है कि हरीश चंद्र तत्कालीन सचिव नवीन ओखला औद्योगिक विकास प्राधिकरण के विरुद्ध शासन द्वारा 27 नवंबर 2013 द्वारा संस्थित विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई में सिद्ध पाए गए आरोप व लोक सेवा आयोग प्रयागराज द्वारा 6 जनवरी 2022 को उपलब्ध कराई गई सहमति तथा हाईकोर्ट इलाहाबाद खंडपीठ लखनऊ के आदेश 3 सितंबर 2026 में लाए गए तथ्यों व के आधार पर उन्हें बर्खास्त किया जाता है। उनके विरुद्ध चल रही विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई समाप्त किए जाने की स्वीकृति प्रदान की गई है।

  • गोविंदा-कोमल रानी की डेटिंग पर सुनीता ने तोड़ी चुप्पी, बोलीं- मैं अब खुद पर ध्यान दे रही

    गोविंदा-कोमल रानी की डेटिंग पर सुनीता ने तोड़ी चुप्पी, बोलीं- मैं अब खुद पर ध्यान दे रही

    गोविंदा और सुनीता आहूजा की शादीशुदा जिंदगी मुश्किल दौर से गुजर रही है. डेटिंग की चर्चाओं के बीच गोविंदा बीते दिनों अपनी रूमर्ड गर्लफ्रेंड कोमल रानी स्वर्णकार संग लालबागचा राजा के दरबार में दर्शन करने पहुंचे थे. दोनों को साथ में बप्पा का आशीर्वाद करते देखकर उनकी डेटिंग की खबरें चर्चा में आ गईं. अब सुनीता ने गोविंदा और कोमल के रिश्ते पर चुप्पी तोड़ी है.

    गोविंदा के अफेयर पर क्या बोलीं सुनीता?
    एक इंटरव्यू में सुनीता से गोविंदा और कोमल रानी के रिश्ते पर सवाल किया गया. सुनीता से पूछा गया कि गोविंदा बप्पा के दर्शन करने कोमल रानी संग गए थे. इस सवाल पर सुनीता ने कहा कि वो अब गोविंदा पर नहीं, बल्कि खुद पर और अपने काम पर फोकस करना चाहती हैं.

    सुनीता बोलीं- गोविंदा के बारे में या उनकी को-स्टार के बारे में मुझे कुछ नहीं बोलना है. मैं देख रही हूं कि वो खुश हैं. भगवान उनका भला करे. जैसी जिंदगी उन्हें जीनी है, वो जिएं.

    सुनीता ने कहा कि अब उन्हें बाकी चीजों से फर्क नहीं पड़ता. वो अपनी जिंदगी पर ध्यान दे रही हैं. सुनीता बोलीं- मुझे अब इन सब चीजों पर ध्यान नहीं देना है. मैं भगवान से प्रार्थना करती हूं को वो जहां भी हैं, जिसके साथ भी हैं खुश रहें. मेरा फोकस अब मेरे काम पर है. मैं अब बार-बार कंट्रोवर्सी में नहीं पड़ना चाहती. जिसे जहां खुशी मिलती है, वहीं पर रहो. ये टाइम की बर्बादी है. टाइम बर्बाद करने से अच्छा है कि खुद पर ध्यान दो.

    कोमल ने सुनीता पर कसा था तंज
    बता दें कि बीते दिनों गोविंदा की रूमर्ड गर्लफ्रेंड कोमल रानी स्वर्णकार ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर करके सुनीता को खरी-खोटी सुनाई. कोमल ने पोस्ट में ये दावा किया था कि सुनीता ने गोविंदा को मारने की कोशिश की है.

    गोविंदा और सुनीता का घर तोड़ने के आरोपों पर कोमल ने कहा कि उनका घर पहले से ही टूटा हुआ था और टूटे हुए घर को फिर से तोड़ा नहीं जा सकता. हालांकि, कोमल के आरोपों पर सुनीता ने अब तक रिएक्शन नहीं दिया है.

  • 18 साल के रेहान का कमाल, गुजरात में ₹80 करोड़ से लगाएंगे सेमीकंडक्टर फैक्ट्री

    18 साल के रेहान का कमाल, गुजरात में ₹80 करोड़ से लगाएंगे सेमीकंडक्टर फैक्ट्री

    आज के दौर में 18 साल की उम्र में ज्यादातर युवा कॉलेज, करियर और नौकरी के बारे में सोच रहे होते हैं. लेकिन गुजरात के अहमदाबाद के रहने वाले रेहान मनसूरी ने इतनी कम उम्र में सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग की दुनिया में कदम रखा है. उनकी कंपनी Micronex गुजरात के सानंद में करीब ₹80 करोड़ के निवेश से सेमीकंडक्टर लीड फ्रेम बनाने की फैक्ट्री लगाने जा रही है.

    खास बात यह है कि यह कोई ऐप या AI सॉफ्टवेयर स्टार्टअप नहीं है. कंपनी सीधे उस हार्डवेयर सप्लाई चेन में उतर रही है, जो चिप को पैकेज करने के लिए जरूरी होती है. कंपनी के मुताबिक फैक्ट्री में निर्माण का काम शुरू हो चुका है और मई 2027 तक प्रोडक्शन शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है. पहले चरण में हर साल करीब 50 करोड़ लीड फ्रेम यूनिट बनाने की योजना है. फैक्ट्री शुरू होने के बाद करीब 250 लोगों को सीधे रोजगार मिलने की उम्मीद है.

    लीड फ्रेम होता क्या है?
    नाम सुनकर आपको लग सकता है कि यह चिप के अंदर लगा कोई छोटा सा इलेक्ट्रॉनिक पार्ट है. असल में लीड फ्रेम एक बेहद पतले मेटल का स्ट्रक्चर होता है, जिस पर सेमीकंडक्टर चिप को लगाया जाता है. यह चिप को सपोर्ट देने के साथ-साथ उसे बाहरी सर्किट से जोड़ने में भी मदद करती है.

    चिप और लीड फ्रेम  को बेहद पतले गोल्ड या कॉपर वायर से जोड़ा जाता है. इसके बाद पूरा पैकेज सर्किट बोर्ड से कनेक्ट किया जा सकता है. यानी आसान भाषा में कहें तो चिप बनने के बाद उसे इस्तेमाल करने लायक पैकेज बनाने की प्रक्रिया में लीड फ्रेम की अहम भूमिका होती है.

    Micronex इन लीड फ्रेम्स  को कॉपर एलॉय से बनाने की योजना बना रही है. इनकी मोटाई 0.1mm से 0.25mm के बीच होगी. कंपनी के मुताबिक ये पार्ट चिप को मैकेनिकल सपोर्ट देने, गर्मी निकालने और मैन्युफैक्चरिंग के दौरान सुरक्षा देने में भी मदद करते हैं.

    पहले कार और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, फि मोबाइल और टेलीकॉम
    कंपनी की शुरुआती योजना लीड फ्रेम्स को पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और ओटोमोटिव सेक्टर के लिए तैयार करने की है. इसके बाद उत्पादन क्षमता बढ़ने पर कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और टेलीकॉम सेक्टर में भी विस्तार करने की योजना है.

    Micronex ने SEMICON India 2026 के दौरान Kaynes Semicon के साथ MoU भी साइन किया है. इससे भविष्य में कंपनी के लीड फ्रेम्स को सेमीकंडक्टर कंपनियों तक सप्लाई करने का रास्ता खुल सकता है. कंपनी ने India Semiconductor Mission के Semicon 2.0 कार्यक्रम के तहत प्रस्ताव देने की भी योजना बताई है.

    18 साल के रेहान ने सेमीकंडक्टर ही क्यों चुना?
    Rehan Mansuri एक ऐसे परिवार से आते हैं जिसका कारोबार प्लास्टिक वेस्ट रिसाइक्लिंग से जुड़ा है. रिपोर्टों के मुताबिक परिवार की भारत में सात रिसाइक्लिंग यूनिट हैं. इसी वजह से उन्हें कम उम्र से ही मैन्युफैक्चरिंग और बिजनेस का अनुभव मिला. रेहान के मुताबिक उन्होंने भारत की सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में लीड फ्रेम्स को लेकर एक गैप देखा. उनका फोकस शुरुआत में दुनिया की बड़ी कंपनियों से कीमत या स्केल पर सीधी टक्कर लेने के बजाय लोकल कंपनियों को स्थानीय सप्लाई, तेज डिलीवरी, इंजीनियरिंग सपोर्ट और डिजाइन बदलाव में मदद देने पर है.

    गुजरात क्यों बन रहा है सेमीकंडक्टर का बड़ा सेंटर?
    Micronex का यह प्रोजेक्ट ऐसे समय में आया है जब गुजरात में सेमीकंडक्टर से जुड़ा पूरा इकोसिस्टम तेजी से विकसित हो रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक गुजरात में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम में करीब ₹1.4 लाख करोड़ के निवेश का जिक्र किया गया है. सानंद में पहले से ही सेमीकंडक्टर पैकेजिंग और मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े प्रोजेक्ट डेवेलप हो रहे हैं.

  • पूर्व IAS दिव्या मित्तल की राजनीति में एंट्री, इस्तीफे के बाद बड़ा फैसला

    पूर्व IAS दिव्या मित्तल की राजनीति में एंट्री, इस्तीफे के बाद बड़ा फैसला

    लखनऊ
    पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल अब राजनीति में कदम रखने जा रही हैं। IIT और IIM से पढ़ाई करने वाली दिव्या मित्तल ने IAS बनने से पहले लंदन में लाखों रुपये के पैकेज पर नौकरी की थी। फिर देश सेवा के लिए विदेश की नौकरी छोड़कर उन्होंने UPSC की तैयारी शुरू की और तीसरे प्रयास में IAS बनीं। अब प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा देने के बाद उन्होंने राजनीति में आने का फैसला किया है।

    2013 बैच की आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल का सफर बेहद रोचक रहा है। हरियाणा के रेवाड़ी में जन्मी दिव्या मित्तल ने देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में पढ़ाई की। पहले उन्होंने आईआईटी दिल्ली से इंजीनियरिंग की। इसके बाद आईआईएम बेंगलुरु से एमबीए की डिग्री हासिल की। पढ़ाई पूरी होने के बाद वह पति के साथ लंदन चली गईं। जहां एक मल्टीनेशनल कंपनी में बड़े पैकेज पर जॉब भी किया। हालांकि कुछ समय बाद ही उनका 9 से 6 वाली जॉब से मोह भंग हो गया और देश सेवा के लिए भारत आ गईं।

    तीन बार दी परीक्षा, तीनों बार मिली सफलता
    दिव्या मित्तल ने भारत आकर यूपीएससपी की तैयारी में जुट गईं। उन्होंने तीन बार सिविल सर्विस की परीक्षा दी। तीनों बार सफलता भी मिली लेकिन जिस आईएएस के टैग को हासिल करना चाहती थीं, उसे आखिर में हासिल करके ही माना। साल 2010 में उन्होंने पहली बार में ही 332वीं रैंक हासिल की और भारतीय राजस्व सेवा के लिए चुनी गईं। फिर अगले साल परीक्षा दी और इस बार 134वीं रैंक हासिल कर आईपीएस बनीं। तीसरी बार में 68वीं रैंक के साथ आईएएस बन गईं। दिव्या मित्तल को 2013 में यूपी कैडर से प्रदेश में सेवा का मौका मिला।

    इन पदों पर रहीं दिव्या मित्तल
    बीते 13 सालों में दिव्या मित्तल की लगातार फिल्ड में तैनाती मिलती रही। मेरठ में संयुक्त मजिस्ट्रेट के पद से आईएएस की करियर शुरूआत हुई। इसके बाद गौतमबुद्ध नगर में मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ), कानपुर नगर में यूपीसीडा की संयुक्त प्रबंध निदेशक, बरेली में विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष, यूपी ग्रामीण सड़क विकास एजेंसी की सीईओ, संतकबीर नगर, मिर्जापुर और देवरिया में डीएम के पद पर काम किया।

    एक महीने पहले दिया था इस्तीफा
    दिव्या मित्तल ने बीते 30 अगस्त को इस्तीफा दे दिया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उन्होंने लंबा-चौड़ा पोस्ट लिखा था। जिसमें उन्होंने अपनी भावनाएं प्रकट की थीं। उन्होंने लिखा था, 'आज मैंने 13 सालों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम देते हुए IAS से त्यागपत्र दे दिया है। साधारण परिवेश में पलते हुए मैंने एक अच्छे, सफल जीवन का सपना देखा था। दिन-रात एक कर IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ने के बाद, लंदन में नौकरी लग गयी। लेकिन सब कुछ पा लेने पर भी कुछ अधूरा था। अपने देश में न होना खलता था। मेरी पढ़ाई, आत्मविश्वास, दुनिया में कहीं भी सिर उठाकर चलने की ताकत, सब इस मिट्टी का कर्ज़ था मुझ पर। वो कर्ज़ चुकाना था। चाहती थी जिस भारत का सपना देखा था, उसे बनाने वाली ईंटों पर मेरे भी हाथों के निशान हों। मैं लौट आई और IAS अधिकारी बनने का सौभाग्य मिला।'

    राजनीति में जाएंगी पूर्व आईएएस
    दिव्या ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स (ट्विटर) पर एक वीडियो के जरिए साफ कर दिया कि वह राजनीति में प्रवेश करेंगी। हालांकि किस पार्टी से जुड़ेगी ये साफ नहीं है। साथ ही उन्होंने भाजपा पर निशाना भी साधा। यह भी कहा कि वह किसी से नहीं डरेंगी।

  • राशन कार्डधारकों के लिए बड़ा अपडेट, 1.58 करोड़ कार्ड अक्टूबर से हो सकते हैं बंद

    राशन कार्डधारकों के लिए बड़ा अपडेट, 1.58 करोड़ कार्ड अक्टूबर से हो सकते हैं बंद

    नई दिल्ली
    अगर आप राशन कार्डधारक हैं और आपने कई महीनों से राशन नहीं लिया है तो यह सुविधा हमेशा के लिए बंद भी हो सकती है। केंद्र सरकार पिछले छह महीनों से अपने राशन कार्ड का इस्तेमाल नहीं करने वाले 1.58 करोड़ लाभार्थियों के लिए अक्टूबर से राशन बंद करने जा रही है। सरकार पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (PDS) के डेटाबेस को ठीक करने के लिए इनएक्टिव, डुप्लिकेट या संदिग्ध लाभार्थियों को हटा रही है।

    HT की रिपोर्ट के अनुसार, एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि पीडीएस डेटाबेस से लाभार्थियों के नाम तुरंत नहीं हटाए जाएंगे। वो असली लाभार्थी हैं या नहीं यह साबित करने के लिए उन्हें तीन महीने का समय दिया जाएगा, तब तक उनके राशन कार्ड कुछ समय के लिए बंद कर दिए जाएंगे। अगर वो इस दौरान e-KYC प्रोसेस पूरा कर लेते हैं, तो उनके कार्ड फिर से चालू कर दिए जाएंगे।

    3 महीने में पूरी करने होगी ई-केवाईसी
    सरकार तीन महीने में 'साइलेंट राशन कार्ड' (ऐसे कार्ड जिनसे पिछले 6 महीनों में अनाज नहीं लिया गया है) से जुड़ी समस्याएं हल करना चाहती है। संशोधित 'टारगेटेड पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (कंट्रोल) ऑर्डर' में कुछ समय के लिए ऐसे राशन कार्डों को निष्क्रिय करने का प्रावधान है, जिसके बाद अंतिम निर्णय लेने से पहले तीन महीने के भीतर फील्ड वेरिफिकेशन और ई-केवाईसी (e-KYC) की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

    सरकार का तर्क है कि अनाज असली लाभार्थियों तक पहुंचाने और डुप्लीकेट, मर चुके, दूसरी जगह चले गए या अयोग्य लोगों की वजह से होने वाली बर्बादी को कम करने के लिए डेटाबेस को ठीक करना जरूरी है।

    सरकार से नागरिकों पर डाला जा रहा बोझ : प्रो. नारायणन
    अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर राजेंद्रन नारायणन ने पहले लाभार्थियों के कार्ड बंद करने और फिर उनसे अपनी पात्रता साबित करने के लिए कहने के तरीके पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा, "किसी व्यक्ति का नाम हटाने और फिर उनसे e-KYC या इसी तरह के दूसरे तरीकों से सिस्टम में दोबारा जुड़ने के लिए कहने की यह प्रक्रिया, जवाबदेही का बोझ सरकार से नागरिकों पर डालने जैसा है।"

    उन्होंने कहा कि अधिकारों पर आधारित कल्याणकारी कार्यक्रम में डिफॉल्ट तरीका लोगों को बाहर करने के बजाय उन्हें शामिल करने का होना चाहिए। लेकिन पहले नाम हटा देना और फिर राज्य की तकनीकी जरूरतों को पूरा करने की जिम्मेदारी नागरिकों पर डालना गलत है।

    राशन कार्ड से पहले भी हटाए जा चुके नाम
    सरकार पहले भी पीडीएस डेटाबेस को ठीक करने के लिए डिजिटाइजेशन, आधार सीडिंग और e-KYC का इस्तेमाल कर चुकी है। खाद्य मंत्रालय ने नवंबर 2024 में बताया था कि इन प्रक्रियाओं के जरिए पीडीएस सिस्टम से करीब 5.8 करोड़ राशन कार्ड हटा दिए गए थे। मंत्रालय ने इस प्रक्रिया को 'डी-डुप्लीकेशन' (डुप्लीकेट कार्ड हटाने की प्रक्रिया) बताया, जिसका मकसद यह सुनिश्चित करना था कि सिर्फ पात्र लोग ही इस व्यवस्था का लाभ उठा सकें।

  • ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बार पाकिस्तान पहुंचे भारत के वरिष्ठ अधिकारी

    ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बार पाकिस्तान पहुंचे भारत के वरिष्ठ अधिकारी

    नई दिल्ली
    ऑपरेशन सिंदूर के करीब डेढ़ साल बाद भारत ने पहली बार विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी को पाकिस्तान भेजा है। भारत ने अतिरिक्त सचिव आलोक डिमरी को पाकिस्तान भेजा है। डिमरी इस समय इस्लामाबाद में आयोजित एससीओ समन्वयकों की बैठक में हिस्सा ले रहे हैं। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब भारत का रुख साफ रहा है कि आतंकवाद से मुक्त और अनुकूल माहौल में ही द्विपक्षीय बातचीत संभव है। हालांकि, भारत एससीओ जैसे बहुपक्षीय मंच के तहत पाकिस्तान के साथ जुड़ने के लिए तैयार है।

    कौन हैं आलोक डिमरी?
    आलोक अमिताभ डिमरी भारतीय विदेश सेवा (IFS) के वरिष्ठ अधिकारी और राजनयिक हैं। फिलहाल वह विदेश मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव के साथ-साथ SCO के राष्ट्रीय समन्वयक की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। डिमरी इससे पहले 2019 से 2022 तक किर्गिज गणराज्य में भारत के राजदूत और बाद में ब्रुनेई में भारत के उच्चायुक्त रह चुके हैं। विदेश मंत्रालय में उनकी मौजूदा जिम्मेदारी SCO से जुड़े मामलों को देखना है। इसी जिम्मेदारी के तहत वह पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हो रही एससीओ की बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

    भारत की ओर से उनकी मौजूदगी इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि करीब दो साल बाद नई दिल्ली की ओर से किसी एससीओ बैठक में पाकिस्तान में भागीदारी हुई है। सूत्रों के मुताबिक, भारत एससीओ के साथ जुड़ना चाहता है और इसी वजह से अपने एससीओ समन्वयक को पाकिस्तान भेजा गया है।

    पाकिस्तान में क्या हो रहा है?
    पाकिस्तान इस सप्ताह सोमवार से बुधवार तक इस्लामाबाद में एससीओ के राष्ट्रीय समन्वयकों की बैठक की मेजबानी कर रहा है। बैठक में पाकिस्तान की अध्यक्षता के तहत संगठन के कार्यक्रम और अन्य संगठनात्मक मुद्दों पर चर्चा हो रही है।

    पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के मुताबिक, यह बैठक 2026-27 के लिए एससीओ काउंसिल ऑफ हेड्स ऑफ स्टेट (CHS) की पाकिस्तान की अध्यक्षता के तहत हो रही है। इसमें सदस्य देशों के राष्ट्रीय समन्वयक और एससीओ सचिवालय के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं।

    बैठक में मुख्य रूप से इन मुद्दों पर चर्चा होनी है:
        पाकिस्तान की अध्यक्षता में एससीओ के कार्यक्रमों की रूपरेखा
        आगामी एससीओ बैठकों और कार्यक्रमों की तैयारियां
        एससीओ सहयोग और समन्वय से जुड़े विभिन्न मुद्दे
        एजेंडे में शामिल अन्य विषय

    पाकिस्तान ने अपनी अध्यक्षता के लिए ‘विजन को असलियत में बदलना: कनेक्टिविटी, इनोवेशन और साझा समृद्धि’ थीम रखी है।

    पहलगाम हमले के बाद भारत का रुख क्या रहा है?
    भारत सरकार का रुख रहा है कि आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते। खासकर पहलगाम आतंकी हमले और पिछले साल मई में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत-पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य टकराव के बाद यह स्थिति और स्पष्ट हुई।

    हालांकि, भारत ने एससीओ जैसे बहुपक्षीय मंच पर पाकिस्तान के साथ भागीदारी से इनकार नहीं किया है। दिल्ली का कहना है कि आतंकवाद से मुक्त अनुकूल माहौल में द्विपक्षीय बातचीत होनी चाहिए, जबकि एससीओ के प्रारूप के तहत भारत पाकिस्तान के साथ जुड़ता रहेगा।

    पाकिस्तान के एससीओ समन्वयक कर रहे हैं बैठक की अध्यक्षता
    अधिकारियों के मुताबिक, पाकिस्तान के एससीओ राष्ट्रीय समन्वयक डॉ. एम. फैसल इस बैठक की अध्यक्षता कर रहे हैं। भारत के प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी पाकिस्तान में एससीओ की बैठक में नई दिल्ली की करीब दो साल बाद हुई भागीदारी को दर्शाती है। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एससीओ शिखर सम्मेलन में आमंत्रित करने की संभावना भी है।

  • यूपी में अब घर-घर लगेगी HPV वैक्सीन, 15 साल से कम उम्र की छूटी बेटियों को मिलेगा मुफ्त टीका

    यूपी में अब घर-घर लगेगी HPV वैक्सीन, 15 साल से कम उम्र की छूटी बेटियों को मिलेगा मुफ्त टीका

    लखनऊ
    सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए अब पात्र बेटियों तक एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमावायरस) वैक्सीन पहुंचाने के लिए घर-घर अभियान चलाया जाएगा।

    प्रदेश में 25 लाख से अधिक बच्चियों को यह टीका लगाया जा चुका है। स्वास्थ्य केंद्रों पर चल रहे टीकाकरण से वंचित 14 साल की आयु पूरी कर चुकीं, लेकिन 15 साल से कम उम्र की बालिकाओं को घर जाकर वैक्सीन लगाने की तैयारी है। सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाला दूसरा सबसे आम कैंसर है।

    राष्ट्रीय एचपीवी टीकाकरण अभियान के तहत बालिकाओं को उनके माता-पिता की सहमति से सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर निश्शुल्क वैक्सीन लगाई जा रही है।

    इसके लिए निर्धारित आयु वर्ग की बालिकाएं पात्र हैं। सरकारी स्वास्थ्य इकाइयों और जिला अस्पतालों में चिकित्सकों की निगरानी में टीकाकरण जारी है। केंद्र सरकार द्वारा प्रदेश के लिए निर्धारित 25 लाख बच्चियों के टीकाकरण का लक्ष्य पूरा किया जा चुका है। अब घर-घर अभियान के जरिये छूटी हुई पात्र बालिकाओं तक पहुंचने की तैयारी है।

    निजी अस्पतालों में एचपीवी वैक्सीन की कीमत अधिक होने के कारण कई परिवार इसका लाभ नहीं ले पाते। ऐसे में सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों के साथ घर-घर निश्शुल्क टीकाकरण के जरिये इन परिवारों की बेटियों तक भी वैक्सीन पहुंचाने की योजना है।

    राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की निदेशक डॉ. पिंकी जोवल ने बताया कि केंद्र सरकार ने प्रदेश में 25 लाख बच्चियों को वैक्सीन लगाने का लक्ष्य दिया था, जिसे पूरा कर लिया गया है। अब किसी कारण से टीकाकरण से छूटी पात्र बालिकाओं को वैक्सीन लगाने के लिए टीमें घर-घर जाएंगी।

    एचपीवी संक्रमण सर्वाइकल कैंसर का प्रमुख कारण है। किशोरावस्था में समय पर एचपीवी टीकाकरण से भविष्य में सर्वाइकल कैंसर के जोखिम को कम किया जा सकता है। इसी के तहत टीकाकरण के साथ जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है।

    भारत में हर साल करीब 1.28 लाख महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर के नए मामले सामने आते हैं। यह महिलाओं में होने वाला दूसरा सबसे आम कैंसर है। हर साल करीब 80 हजार महिलाओं की इस बीमारी से मौत होती है। नए मामलों और मौतों के औसत के आधार पर करीब हर सात मिनट में एक महिला की जान जाती है।

  • प्रदेश की 12 पेंशन और सहायता योजनाओं में 57 लाख 56 हजार 334 हितग्राही हो रहे है लाभान्वित

    प्रदेश की 12 पेंशन और सहायता योजनाओं में 57 लाख 56 हजार 334 हितग्राही हो रहे है लाभान्वित

    प्रदेश की 12 पेंशन और सहायता योजनाओं में 57 लाख 56 हजार 334 हितग्राही हो रहे है लाभान्वित

    मुख्यमंत्री प्रतिमाह डीबीटी से हितग्राहियों के खातों में करते है राशि अंतरित

    भोपाल 

    प्रदेश में सामाजिक सुरक्षा पेंशन और अन्य सहायता योजनाएँ वृद्धजनों, विधवा एवं परित्यक्ता महिलाओं, दिव्यांगजनों तथा जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक संबल दे रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रतिमाह विभिन्न कार्यक्रमों के दौरान डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से पेंशन राशि हितग्राहियों के बैंक खातों में अंतरित करते है। सामाजिक न्याय दिव्यांगजन कल्याण विभाग द्वारा प्रदेश के 57 लाख 56 हजार 334 पात्र हितग्राहियों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन एवं अन्य सहायता योजना में का लाभ दिया जा रहा है।

    आयुक्त सामाजिक न्याय, द्वियांगजन कल्याण के. जी. तिवारी के अनुसार, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना में 15 लाख 75 हजार 79, राष्ट्रीय विधवा पेंशन में 5 लाख 46 हजार 920 और राष्ट्रीय निःशक्त पेंशन में 84 हजार 623 हितग्राही लाभान्वित हैं। समग्र सामाजिक सुरक्षा पेंशन के 18 लाख 63 हजार 632 और मुख्यमंत्री कल्याणी पेंशन के 15 लाख 29 हजार 490 हितग्राही हैं।

    मुख्यमंत्री अविवाहित पेंशन में 3 हजार 992, मुख्यमंत्री कन्या अभिभावक पेंशन में 63 हजार 590 और बहुदिव्यांग एवं बौद्धिक दिव्यांग सहायता अनुदान में 82 हजार 143 हितग्राही हैं। राष्ट्रीय परिवार सहायता योजना में 1 हजार 413, मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह योजना में 4 हजार 908, मुख्यमंत्री कल्याणी विवाह सहायता योजना में 340 और दिव्यांग विवाह प्रोत्साहन योजना में 204 हितग्राही को दी जा रही है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार गरीब, निराश्रित और कमजोर वर्गों के कल्याण के लिए संवेदनशीलता से कार्य कर रही है। पेंशन राशि दैनिक खर्चों में मदद के साथ हितग्राहियों को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का आधार भी देती है। सरकार का संकल्प है कि सहायता समय पर प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक पहुँचे।

     

  • 1 अक्टूबर से महंगे होंगे AC, TV, फ्रिज और वॉशिंग मशीन, 8% तक बढ़ सकते हैं दाम

    1 अक्टूबर से महंगे होंगे AC, TV, फ्रिज और वॉशिंग मशीन, 8% तक बढ़ सकते हैं दाम

    मुंबई 

    फेस्टिव सीजन में अगर आप AC, TV, फ्रिज या वॉशिंग मशीन खरीदने का प्लान बना रहे हैं तो आपके लिए जरूरी खबर है. 1 अक्टूबर से इन प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ सकती हैं. कई बड़ी कंपनियां अक्टूबर से अपने प्रोडक्ट्स के दाम 5 से 8 फीसदी तक बढ़ाने की तैयारी में हैं. वहीं कुछ कंपनियों ने कीमतें बढ़ाने का फैसला पहले ही कर लिया है.

    इसका सबसे ज्यादा असर AC की कीमतों पर देखने को मिल सकता है. कंपनियां AC के दाम करीब 5 से 8 फीसदी तक बढ़ा सकती हैं. वहीं वॉशिंग मशीन, फ्रिज और LED TV की कीमतों में भी 3 से 4 फीसदी तक बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. हर कंपनी की कीमत बढ़ाने की टाइमिंग अलग हो सकती है. आइए जानते हैं, क्यों बढ़ाए जा रहे हैं दाम?

    क्यों कंपनियां बढ़ा रही हैं कीमत?
    कंपनियों पर कॉपर, एल्युमिनियम, स्टील और प्लास्टिक जैसी चीजों की बढ़ती कीमतों का दबाव है. इसके अलावा सामान को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने का खर्च भी बढ़ा है. डॉलर में उतार-चढ़ाव और पश्चिमी एशिया में चल रही स्थिति का असर भी कंपनियों की लागत पर पड़ रहा है.

    जानिए किन कंपनियों ने दाम बढ़ाने का ऐलान कर दिया है?
    Blue Star, Godrej Appliances, Haier, Daikin और Super Plastronics जैसी कंपनियां कीमतों में बढ़ोतरी का ऐलान कर चुकी हैं. LG और Bosch Home Comfort ने भी AC की कीमतों में करीब 5 फीसदी तक बढ़ोतरी की है. Panasonic अभी कीमत बढ़ाने को लेकर स्थिति को देख रही है.

    Haier 1 अक्टूबर से अपने रूम AC की कीमत करीब 5 फीसदी बढ़ाने वाली है. कंपनी ने TV और वॉशिंग मशीन जैसे दूसरे प्रोडक्ट्स की कीमतों में 2 से 3 फीसदी बढ़ोतरी की भी बात कही है. कंपनी के मुताबिक अगर लागत इसी तरह बढ़ती रही तो दिसंबर और जनवरी में भी कीमतें बढ़ सकती हैं.

    पुराने स्टॉक की वजह से मिलेगी राहत!
    यहां एक राहत वाली बात भी है. कंपनियों और डीलर्स के पास पुराने दाम पर खरीदा गया स्टॉक मौजूद है. ऐसे में फेस्टिव सीजन की शुरुआत में कुछ प्रोडक्ट पुराने दाम पर मिल सकते हैं. Godrej के मुताबिक यह पुराना स्टॉक करीब एक से डेढ़ महीने तक चल सकता है. यानी दिवाली तक कुछ प्रोडक्ट्स पर पुराने दाम का फायदा मिल सकता है.

    लेकिन दिवाली के बाद नए दाम ज्यादा साफ तौर पर देखने को मिल सकते हैं. खासकर TV की कीमतों में आगे और बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है. इसलिए अगर आप इस फेस्टिव सीजन में कोई बड़ा इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदने का सोच रहे हैं, तो कीमत और ऑफर दोनों को देखकर फैसला करना जरूरी होगा.