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  • CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में अगले हफ्ते सुनवाई

    CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में अगले हफ्ते सुनवाई

    नई दिल्ली
    सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर याचिका पर अगले हफ्ते सुनवाई करने पर सहमति जताई है। इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि उन्होंने अन्य दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की मंजूरी के बिना निर्वाचन आयोग (ECI) के नाम पर एकतरफा फैसले लिए।

    वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत के सामने यह याचिका रखी। उन्होंने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने इस मामले को जल्द लिस्ट करने की मांग की। उन्होंने कहा कि कानूनी नियमों के मुताबिक कई सदस्यों वाले कमीशन के फैसले सर्वसम्मति से या बहुमत से होने चाहिए।

    क्या आरोप लगाया गया?
    विकास सिंह ने कहा, "कई सदस्यों वाले आयोग का मकसद यह था और कानून में भी यही लिखा है कि फैसला सर्वसम्मति से या बहुमत से लिया जाए। अब चुनाव आयोग ने जिस तरह से काम किया है उसे देखते हुए इस बात पर गंभीर संदेह है कि क्या एसआईआर की पूरी प्रक्रिया के लिए चुनाव आयोग ने कोई फैसला लिया भी था या नहीं। क्योंकि अगर आयोग ने सर्वसम्मति से फैसला नहीं लिया है तो… कोर्ट ने भी जो फैसला सुनाया है वह इसी आधार पर सुनाया है कि यह आयोग का फैसला है। इसलिए, यह एक गंभीर मामला है।"
    याचिका में क्या मांग की गई?
    इस याचिका में अधिकार-पृच्छा रिट की मांग की गई है। इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त से यह बताने को कहा गया है कि उन्होंने किस अधिकार के तहत ऐसे काम किए हैं और कर रहे हैं मानो वे अकेले ही उस सामूहिक निर्णय लेने की शक्ति का इस्तेमाल करने के हकदार हों, जो संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत एक संस्था के तौर पर चुनाव आयोग को दी गई है।

    वहीं, राकेश कुमार सिंह की ओर से कोर्ट में दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि सत्ता का लगातार केंद्रीकरण हो रहा है, एजेंडा और मीटिंग के मिनट्स (कार्यवृत्त) में देरी या उनकी कमी है, वोटर लिस्ट की प्रक्रियाओं में बदलाव किए गए हैं और दो चुनाव आयुक्तों की जानकारी या मंजूरी के बिना अपीलें दायर की गई हैं।

    याचिका में इस बात पर जोर दिया गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 के अनुसार, चुनाव आयोग का कामकाज जहां तक संभव हो सर्वसम्मति से किया जाना चाहिए और अगर किसी मामले पर मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की राय अलग-अलग होती है तो उस मामले का फैसला बहुमत की राय के आधार पर किया जाएगा।

  • UP में बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत, अक्टूबर में भी 5% से ज्यादा बिल घटेगा

    UP में बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत, अक्टूबर में भी 5% से ज्यादा बिल घटेगा

     लखनऊ
    बिजली उपभोक्ताओं को अक्टूबर में भी बिजली के बिल से राहत मिलती दिख रही है। जून में 10 प्रतिशत ज्यादा बिजली का बिल देने वाले उपभोक्ताओं का जुलाई में 4.43 प्रतिशत, अगस्त में 2.92 प्रतिशत, सितंबर में रिकॉर्ड 7.93 प्रतिशत के बाद अब अक्टूबर में भी पांच प्रतिशत से अधिक बिल कम हो सकता है।

    एफपीपीसीए (ईंधन एवं बिजली खरीद लागत समायोजन) के तहत जुलाई माह के ईंधन अधिभार शुल्क(फ्यूल सरचार्ज) में कमी को देखते हुए सितंबर के बिजली बिल पर अक्टूबर में सभी श्रेणियों के लगभग 3.73 करोड़ उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा। इस संबंध में पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन द्वारा जल्द ही आदेश जारी करने की कवायद की जा रही है।

    जून में भारी-भरकम 10 प्रतिशत ईंधन अधिभार शुल्क वसूलने पर विद्युत नियामक आयोग के कड़े रुख के बाद से लगातार चौथे माह उपभोक्ताओं को बिजली के बिल से कुछ राहत मिलना तय है।

    गौरतलब है कि कारपोरेशन द्वारा पुराने भुगतान को भी अधिभार में शामिल करते हुए 1610 करोड़ रुपये के लिए जून में उपभोक्ताओं से 10 प्रतिशत अतिरिक्त वसूला गया था। जून में उपभोक्ताओं से 10 प्रतिशत वसूलने के बाद कॉर्पोरेशन प्रबंधन जुलाई में भी 10 प्रतिशत वसूलता उससे पहले ही आयोग ने पुराने भुगतान को अधिभार में शामिल करने पर नाराजगी जताते हुए उसे गलत ठहराते हुए आदेश जारी किया था।

    आयोग ने कहा था कि वास्तविक बिजली खरीद की लागत एवं ट्रांसमिशन शुल्क के आधार पर ही अधिभार तय होगा। इसमें किसी अन्य माह की देनदारी के भुगतान या समायोजन को शामिल नहीं किया जा सकता।

    यही कारण रहा कि जुलाई से लगातार उपभोक्ताओं को बिजली का कम ही बिल देना पड़ रहा है। उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने बताया कि एफपीपीसीए गणना में अब पारदर्शिता के चलते उपभोक्ताओं को कानूनन इसका लाभ समय पर मिल रहा है।

     

  • रोहित ने खोला विराट कोहली से दोस्ती का राज, बोले- हमारी सोच एक जैसी है

    रोहित ने खोला विराट कोहली से दोस्ती का राज, बोले- हमारी सोच एक जैसी है

    नई दिल्ली
    भारत के दिग्गज क्रिकेटर्स रोहित शर्मा और विराट कोहली की दोस्ती सिर्फ मैदान तक सीमित नहीं रही है. करीब दो दशक से दोनों ने एक साथ क्रिकेट खेला है, मुश्किल दौर देखे हैं, बड़ी जीत का हिस्सा रहे हैं और कई यादगार मुकाबलों में भारत की उम्मीदों को संभाला है. अब रोहित शर्मा ने विराट कोहली के साथ अपनी दोस्ती, उनकी सोच और भारतीय क्रिकेट के लिए उनके योगदान पर खुलकर बात की है.

    रोहित शर्मा और विराट कोहली के इंटरनेशनल करियर की शुरुआत करीब एक साल के अंतर के साथ हुई थी. रोहित ने 2007 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा, जबकि विराट ने 2008 में इंटरनेशनल डेब्यू किया. इसके बाद दोनों लंबे समय तक भारतीय टीम के अहम सदस्य रहे. अलग-अलग कप्तानों के साथ खेले, खुद कप्तानी की और फिर एक-दूसरे की कप्तानी में भी टीम के लिए योगदान दिया.

    रोहित शर्मा के मुताबिक इतने लंबे समय तक साथ खेलने के कारण दोनों के बीच एक ऐसी समझ विकसित हो गई है, जिसके लिए ज्यादा शब्दों की जरूरत नहीं पड़ती. रोहित ने जियोहॉटस्टार से कहा, 'हम दोनों के बीच मजबूत दोस्ती है. हम समझते हैं कि इस स्तर पर खेलने के लिए क्या चाहिए. हमारे तरीके अलग हैं, लेकिन ऐसा ही होना चाहिए, क्योंकि हर व्यक्ति अलग होता है.'

    रोहित शर्मा ने बताया कि दोनों की दोस्ती की शुरुआत ऑस्ट्रेलिया दौरे के आसपास हुई थी. उस दौर की कुछ पुरानी यादें आज भी दोनों के लिए खास हैं. उन्होंने कहा कि जब कभी टीवी पर उस समय से जुड़ा कोई वीडियो या पल सामने आता है, तो दोनों एक-दूसरे को देखकर हंसने लगते हैं. यानी सालों पुराने इस रिश्ते में क्रिकेट की गंभीरता के साथ दोस्ती और हल्के-फुल्के पलों की भी अपनी जगह रही है.

    कोहली बदलने वाले नहीं: रोहित शर्मा
    विराट कोहली के भारतीय क्रिकेट में योगदान को लेकर रोहित शर्मा ने किसी तरह के संदेह की गुंजाइश नहीं छोड़ी. उन्होंने कहा कि कोहली ने टीम के लिए जो हासिल किया है, वह सभी के सामने है और आगे भी उनके रवैये में कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिलेगा. रोहित ने कहा, 'उन्होंने टीम के लिए जो किया है, उसके बारे में सवाल करने की जरूरत नहीं है. यह सबके सामने है. आगे भी मुझे नहीं लगता कि कुछ बदलेगा. वह वही विराट कोहली रहेंगे, जिन्हें हम जानते हैं. वह आएंगे, अच्छी तैयारी करेंगे, रन बनाएंगे और टीम इंडिया को मैच जिताने की कोशिश करेंगे.'

    विराट कोहली ने तीनों फॉर्मेट में भारतीय टीम की कप्तानी की, जबकि रोहित शर्मा के नेतृत्व में भी वह लंबे समय तक टीम के प्रमुख बल्लेबाज रहे. रोहित का कहना है कि कप्तानी की जिम्मेदारी बदलने के बावजूद कोहली के काम करने के तरीके में कोई खास बदलाव नहीं आया. उन्होंने कहा, 'जब वह कप्तान थे, तब भी उनका रवैया लगभग ऐसा ही था. जब मैं कप्तान था, तब भी वह वैसे ही रहे. मुझे नहीं लगता कि इसमें कुछ बदलने की जरूरत है.'

    कोहली-रोहित की नजरें 2027 वर्ल्ड कप पर
    विराट कोहली पहले ही इसकी पुष्टि कर चुके हैं कि वो 2027 का वर्ल्ड कप उनके लिए आखिरी मेगा टूर्नामेंट होगा. कोहली के अनुभव को देखते हुए रोहित शर्मा का मानना है कि उन्हें विश्व कप को लेकर कुछ समझाने की जरूरत नहीं है. रोहित ने कहा, 'वह इतने सालों से खेल रहे हैं. चाहे 2027 का विश्व कप हो या 2023 का, उन्हें कुछ समझाने की जरूरत नहीं है. विश्व कप, विश्व कप होता है.'

    रोहित शर्मा और विराट कोहली की बल्लेबाजी शैली अलग है. मैदान पर उनका व्यवहार भी एक जैसा नहीं है. लेकिन जब बात भारतीय टीम के लक्ष्य की आती है, तो दोनों की सोच एक ही दिशा में जाती है. रोहित शर्मा ने कहा, 'हम दोनों अलग-अलग व्यक्ति हैं और मैदान पर खुद को अलग तरीके से पेश करते हैं. लेकिन टीम के लिए हमारा लक्ष्य और सोच लगभग एक जैसी है. हमें मैच जीतना है, विश्व कप जीतना है, टूर्नामेंट जीतना है, सीरीज जीतनी है और टीम के लिए अच्छा करना है.'

    रोहित शर्मा ने बदलते क्रिकेट कैलेंडर का एक दूसरा पहलू भी बताया. पहले भारतीय क्रिकेटरों को लगातार दौरे करने पड़ते थे. कई बार पांच-सात दिन के अंतराल में ही अगली सीरीज के लिए रवाना होना पड़ता था. इसका असर निजी जिंदगी और परिवार के साथ बिताए जाने वाले समय पर भी पड़ता था. अब दोनों को पहले की तुलना में घर पर ज्यादा समय मिल रहा है. रोहित ने बताया, 'करीब एक साल पहले तक हर पांच-सात दिन में हम दौरे पर होते थे. इसलिए घर पर ज्यादा समय नहीं मिल पाता था. अब हम दोनों घर पर ज्यादा समय बिता रहे हैं, जो हमेशा अच्छा लगता है."

    करीब दो दशक के इस सफर में रोहित शर्मा और विराट कोहली ने भारतीय क्रिकेट के कई दौर देखे हैं. टीम बदली, कप्तान बदले, भूमिकाएं बदलीं, लेकिन दोनों के बीच आपसी समझ और भारत के लिए जीत हासिल करने की इच्छा कायम रही. 2027 विश्व कप की तैयारी के बीच रोहित की बातें इस लंबे रिश्ते की उस तस्वीर को सामने लाती हैं, जिसमें प्रतिस्पर्धा से ज्यादा सम्मान, अनुभव से ज्यादा समझ और व्यक्तिगत उपलब्धियों से ऊपर टीम की जीत दिखाई देती है.

  • CM योगी का सपा पर हमला, बोले- पहले माफिया चलाते थे समानांतर सरकार

    CM योगी का सपा पर हमला, बोले- पहले माफिया चलाते थे समानांतर सरकार

    लखनऊ
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष खासकर समाजवादी पार्टी पर हमला बोलते हुए कहा कि जिन लोगों ने पहले राज्य के लोगों के सामने पहचान का संकट खड़ा किया, वे अब नए रूप और नारे के साथ गिरगिट की तरह रंग बदल रहे हैं। उनके शासनकाल में माफिया हर जिले में समानांतर सरकार चला रहे थे। पहले भर्तियों के विज्ञापन से पहले ही आशंकाएं सामने आ जाती थीं। जकड़न, बेईमानी और माफिया का राज था। वर्ष 2017 में सरकार बनते ही हमनें इस स्थिति को समाप्त करने का संकल्प लिया। आज प्रदेश सबसे तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था वाला राज्य बन गया है।

    नवचयनित 1375 ग्राम पंचायत अधिकारियों को सोमवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के ज्यूपिटर हाल में नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि नौजवानों के सपनों को उड़ान चाहिए, जो अब मिल रही है। 10 वर्ष पहले ऐसा नहीं था। आज हम युवाओं की ऊर्जा और प्रतिभाओं का उपयोग राज्य की समृद्धि में कर रहे हैं। हमारी सरकार में 9.5 लाख युवाओं को पारदर्शी प्रक्रिया के तहत सरकारी नौकरियां दी गई हैं।

    पहले हमारी अर्थव्यवस्था नीचे के पांच राज्यों में थी, अब हम शीर्ष तीन राज्यों में शामिल हैं। प्रदेश की अर्थव्यवस्था, प्रति व्यक्ति आय और राज्य का बजट तीन गुणा बढ़ा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सपा के लिए विकास का मतलब केवल सैफई था। हमने सपा अध्यक्ष से कहा था कि हर सप्ताह नियुक्ति पत्र बांटेंगे, छह महीने में एक लाख नौकरियां देंगे। आज चौथा नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम हो रहा है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले तीन कार्यक्रमों में 5297 युवाओं को नियुक्ति पत्र वितरित किए जा चुके हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि महात्मा गांधी के सपनों को केंद्र और प्रदेश की एनडीए सरकार ने साकार किया है। गांवों में अब ग्राम सचिवालय बनाए गए हैं, जहां ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत अधिकारी, लेखपाल, बीसी सखी और पंचायत सहायक के बैठने की व्यवस्था है। डिजिटल लाइब्रेरियां बनाई जा रही हैं। जितनी कमाई ग्राम पंचायतें करेंगी, उतनी ही धनराशि सरकार भी देगी।

    पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि इस सरकार में विभाग में 6581 नियुक्तियां की गईं हैं। सपा के शासनकाल में नौकरी का विज्ञापन आते ही शिवपाल यादव के गुर्गे पूरे प्रदेश में नौकरी बेचने में जुट जाते थे। सपा और कांग्रेस नफरत की राजनीति करती हैं। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि अब नौकरियों के लिए कोई पैसा नहीं ले सकता है। गांधी जी के नाम पर चुनाव लड़ने वाली कांग्रेस ने कभी गांवों का विकास नहीं किया। इस कार्यक्रम में महापौर सुषमा खर्कवाल, एमएलसी डॉ. महेंद्र सिंह, विधायक डा. नीरज बोरा, प्रमुख सचिव पंचायती राज रविंद्र, अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष एसएन साबत उपस्थित थे।

    मुख्यमंत्री के हाथों इन्हें मिले नियुक्ति पत्र
    मुख्यमंत्री ने 11 ग्राम पंचायत अधिकारियों को नियुक्ति पत्र दिए, जिनमें आशुतोष त्रिपाठी, ओम बघेल, प्रवीण, सुधा, आदित्य सिंह, नेहा, रूपाली, श्रुति श्रीवास्तव, ब्यूटी शाही, शुभम और अमित कुमार सिंह शामिल हैं। कुशीनगर के आदित्य सिंह, लखनऊ की श्रुति सिंह और गोरखपुर की ब्यूटी शाही ने पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया पर अपने विचार साझा किए।

  • सीएम योगी की प्रेरणा से यूपी के युवाओं ने खोजी भविष्य में होने वाली बीमारियों से बचाने में सक्षम मशीन

    सीएम योगी की प्रेरणा से यूपी के युवाओं ने खोजी भविष्य में होने वाली बीमारियों से बचाने में सक्षम मशीन

    ग्रेटर नोएडा
     सोचिए, एक ऐसा अस्पताल जिसे न बड़ी इमारत चाहिए, न भारी-भरकम मशीनों से भरी लैब। उसे कार में रखिए और शहर से गांव या किसी दूर-दराज इलाके तक ले जाइए। मरीज सामने आया तो बीपी और शुगर से लेकर ईसीजी, फेफड़ों, आंख-कान तक की जांच वहीं शुरू। एक बूंद खून से कई जरूरी जांच और महज 10 मिनट में कुल 75 तरह के टेस्ट की सुविधा। भविष्य में होने वाली बीमारियों के जोखिम का समय रहते संकेत देने की क्षमता भी। यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में प्रदर्शित ‘डॉक्टर ऑन ड्यूटी’ इसी सोच को हकीकत में बदलने की कोशिश है। करीब तीन लाख रुपये की यह मशीन स्वास्थ्य सेवाओं को अस्पताल की चारदीवारी से निकालकर मरीज के दरवाजे तक पहुंचाने का मॉडल पेश कर रही है। सीएम योगी की प्रेरणा से यूपी के युवाओं ने भविष्य में होने वाली बीमारियों से बचाने में सक्षम ये मशीन खोजी है।

    तीन लाख की मशीन से अस्पताल जैसी जांच
    एमडी इंटरनल मेडिसिन और डॉक्टर्स ऑन ड्यूटी के फाउंडर एवं सीईओ डॉ. श्रेय श्रीवास्तव कहते हैं कि मशीन को इस तरह विकसित किया गया है कि प्राथमिक स्तर पर होने वाली कई महत्वपूर्ण जांच एक ही जगह की जा सकें। इसमें ब्लड प्रेशर, शुगर, बॉडी एनालिसिस, ईसीजी और लंग्स फंक्शन टेस्ट के साथ आंख, नाक और कान की जांच की सुविधा है। उनका कहना है कि सिंगल ड्रॉप ब्लड टेस्ट समेत कुल 75 जांच करीब 10 मिनट में की जा सकती हैं।

    इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका पोर्टेबल होना है। इसे कार में रखकर आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाया जा सकता है। यानी जिस गांव में अस्पताल या डायग्नोस्टिक सेंटर नहीं है, वहां जांच की सुविधाएं पहुंचाने के लिए पूरी लैब खड़ी करने की जरूरत नहीं होगी। मशीन बिजली के साथ बैटरी और सोलर पावर से भी संचालित की जा सकती है।

    महंगी जांच का बोझ घटेगा
    इस मॉडल के जरिए अस्पतालों और डायग्नोस्टिक सेंटर में होने वाली कई जांच की तुलना में बेहद कम लागत पर प्राथमिक जांच संभव हो सकती है। कई मामलों में खर्च मौजूदा लागत के करीब 10 प्रतिशत तक सीमित किया जा सकता है। यदि बड़े स्तर पर इसका इस्तेमाल सफल रहता है तो गांव और छोटे शहरों के मरीजों को सामान्य जांच के लिए बार-बार बड़े अस्पतालों की दौड़ लगाने से राहत मिल सकती है। इससे मरीज का पैसा ही नहीं, अस्पताल तक आने-जाने और जांच के इंतजार में लगने वाला समय भी बच सकता है।

    बीमारी दस्तक दे, उससे पहले मिल सकेगा संकेत
    ‘डॉक्टर ऑन ड्यूटी’ को केवल जांच मशीन तक सीमित रखने के बजाय एआई आधारित हेल्थ सिस्टम के रूप में विकसित किया गया है। उपलब्ध स्वास्थ्य संकेतकों और जांच रिपोर्ट के आधार पर मरीज में भविष्य में विकसित हो सकने वाले स्वास्थ्य जोखिमों की पहचान में यह सहायक है। इसका उद्देश्य डॉक्टर को शुरुआती स्तर पर अधिक स्वास्थ्य डेटा उपलब्ध कराना और समय रहते मरीज को आगे की चिकित्सकीय सलाह तक पहुंचाना है। इस मॉडल के पीछे सोच है कि बीमारी गंभीर होने के बाद महंगे अस्पताल पहुंचने के बजाय जोखिम की पहचान पहले हो। खासकर ग्रामीण इलाकों में नियमित स्वास्थ्य जांच आसान होने से ऐसे लोगों तक स्क्रीनिंग पहुंचाई जा सकती है, जो दूरी और खर्च के कारण सामान्य जांच भी टाल देते हैं।

    बड़े अस्पतालों का दबाव घटाने की तैयारी
    ग्रेटर इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के सेंटर फॉर मेडिकल इनोवेशन के सीईओ डॉ. राहुल सिंह ने बताया कि इस तकनीक का उद्देश्य लोगों की गाढ़ी कमाई के साथ समय बचाना भी है। प्राथमिक जांच स्थानीय स्तर पर होने से हर मरीज को शुरुआती टेस्ट के लिए बड़े अस्पताल जाने की जरूरत कम हो सकती है। इस मॉडल को सेंट्रल और बड़े अस्पतालों पर मरीजों का दबाव घटाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सामान्य जांच और शुरुआती स्क्रीनिंग स्थानीय स्तर पर होने के बाद जरूरत वाले मरीजों को ही विशेषज्ञ या बड़े अस्पताल तक रेफर करने की व्यवस्था विकसित की जा सकती है।

    स्वास्थ्य सेवा के साथ रोजगार का भी मॉडल
    ‘डॉक्टर ऑन ड्यूटी’ केवल मेडिकल इनोवेशन तक सीमित नहीं है। करीब तीन लाख रुपये कीमत और पोर्टेबल स्वरूप के कारण इसे मेडिकल क्षेत्र में स्वरोजगार के मॉडल के रूप में भी विकसित करने की योजना है। प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी या उद्यमी मशीन के जरिए स्थानीय स्तर पर हेल्थ स्क्रीनिंग और जांच सेवाएं उपलब्ध करा सकते हैं। स्टार्टअप को ‘स्टार्ट इन यूपी’ के तहत उत्तर प्रदेश सरकार से 10 लाख रुपये की मदद भी मिली है। इंटरनेशनल ट्रेड शो में इसका प्रदर्शन इस बात का उदाहरण है कि प्रदेश के स्टार्टअप अब केवल ऐप और डिजिटल सेवाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की लागत, पहुंच और उपलब्धता जैसी बुनियादी चुनौतियों के समाधान पर भी काम कर रहे हैं।

    बदल सकती है जांच की तस्वीर
    भारत जैसे विशाल देश में अस्पताल और विशेषज्ञ डॉक्टर तक पहुंच के साथ डायग्नोस्टिक सुविधाओं की उपलब्धता भी बड़ी चुनौती है। ऐसे में कार में समा जाने वाला, बिजली-बैटरी-सोलर तीनों विकल्पों से चलने वाला और एक ही प्लेटफॉर्म पर दर्जनों जांच उपलब्ध कराने वाला मॉडल बड़े बदलाव की संभावना दिखाता है।

  • राहुल गांधी 1 अक्टूबर को बालाघाट आएंगे, आदिवासी परिवारों से मिलेंगे

    राहुल गांधी 1 अक्टूबर को बालाघाट आएंगे, आदिवासी परिवारों से मिलेंगे

    बालाघाट.

    लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी एक बार फिर से मध्य प्रदेश के दौर पर रहेंगे। वह एक अक्टूबर को बालाघाट जाएंगे और आदिवासी बच्चों की मौतों को लेकर पीड़ित परिवार से मुलाकात करेंगे।

    कांग्रेस नेता बैहर और बिरसा के प्रभावित आदिवासी इलाकों में जाकर मृत बच्चों के परिवारों से बातचीत करेंगे। बालाघाट में सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 32 बच्चों की मौत हो चुकी है।

    इंदौर कार्यक्रम में हुए थे शामिल
    काग्रेस सांसद का 13 दिन में मध्य प्रदेश का यह दूसरा दौरा रहने वाला है। इससे पहले वह 19 सितंबर को इंदौर के कार्यक्रम 'छात्रों की गूंज' में शामिल हुए थे। कार्यक्रम से पहले उन्होंने लिखा था कि 30 से ज्यादा आदिवासी बच्चों की बीमारी, कुपोषण से मौतें हो रही हैं, लेकिन कार्रवाई सुस्त रही। सरकार सोती रही।

    विक्रांत भूरिया ने की थी बातचीत
    आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉक्टर विक्रांत भूरिया ने केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना से प्रभावितों के आंदोलन, बालाघाट में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी से बैगा आदिवासी बच्चों की मौत, देवास सहित अन्य जिलों में आदिवासियों को भूमि से बेदखल करने, वनाधिकार पत्र अब तक प्राप्त न होने सहित अन्य मामलों के बारे में बताया था।

    कुपोषण और स्वास्थ्य बदहाली पर उठे सवाल
    सूत्रों का कहना है कि राहुल गांधी ने पार्टी पदाधिकारियों से बातचीत की और कहा कि वह एक अक्टूबर को बालाघाट आएंगे और प्रभावितों से मिलेंगे। इसके बहाने वे आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य, कुपोषण और सरकारी सेवाओं की स्थिति पर सरकार को घेरने के साथ यह संदेश देने का प्रयास करेंगे कि भाजपा केवल आदिवासी हितैषी होने की बात करती है मगर वास्तविकता तो बालाघाट, पन्ना, छतरपुर, सिंगरौली और देवास में दिखाई देती है।

  • अधिकारियों को दिए निर्देश, तत्परता और संवेदनशीलता से हो जनता की समस्याओं का समाधान

    अधिकारियों को दिए निर्देश, तत्परता और संवेदनशीलता से हो जनता की समस्याओं का समाधान

    गोरखपुर
     सोमवार को गोरखपुर दौरे पर आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार सुबह गोरखनाथ मंदिर में जनसेवा के नियमित प्रकल्प 'जनता दर्शन' में विभिन्न जिलों से आए लोगों से मुलाकात की। गंभीरता से उनकी समस्याएं सुनीं और अधिकारियों को निर्देशित किया कि जन समस्याओं का समाधान तत्परता और संवेदनशील तरीके से किया जाए। इसमें किसी भी तरह की शिथिलता या लापरवाही पाए जाने पर जवाबदेही तय करते हुए संबंधित के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जनता की समस्याओं का समाधान सरकार की प्राथमिकता है। हर समस्या का निस्तारण गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी और संतुष्टिपरक होना चाहिए।

    गोरखनाथ मंदिर परिसर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन के सामने आयोजित जनता दर्शन में कुर्सियों पर बैठाए गए लोगों तक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद पहुंचे और एक-एक करके सबकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने करीब 150 लोगों से मुलाकात की। सबको आश्वस्त किया, घबराइए मत, समस्या का समाधान सुनिश्चित कराया जाएगा।  सबके प्रार्थना पत्रों को अधिकारियों को संदर्भित करते हुए त्वरित निस्तारण के निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि किसी के साथ भी अन्याय नहीं होना चाहिए। हर पीड़ित के साथ संवेदनशील व्यवहार अपनाते हुए उसकी सहायता की जानी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि किसी की जमीन पर अवैध कब्जा करने वाले, कमजोरों को उजाड़ने वाले किसी भी सूरत में बख्शे न जाएं। उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। जनता दर्शन में कई लोग इलाज के लिए आर्थिक सहायता की गुहार लेकर पहुंचे थे। सीएम योगी ने उनके प्रार्थना पत्रों को अधिकारियों को हस्तगत करते हुए निर्देश दिया कि इलाज से जुड़ी एस्टीमेट की प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूर्ण करा कर शासन में उपलब्ध कराया जाए। गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए सरकार भरपूर मदद उपलब्ध कराएगी।

    मुख्यमंत्री ने गोशाला में की गोसेवा
    गोरखनाथ मंदिर प्रवास के दौरान मंगलवार सुबह  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंदिर की गोशाला में जाकर गोसेवा भी की। उन्होंने गायों, गोवंश व नंदी को खूब दुलारा, गुड़ खिलाया और गोशाला के कार्यकर्ताओं को गोवंश की समुचित देखभाल के निर्देश दिए।

  • 10 दिन पहले अस्पताल में थीं नीरू, अब एशियन गेम्स में जीता ऐतिहासिक गोल्ड

    10 दिन पहले अस्पताल में थीं नीरू, अब एशियन गेम्स में जीता ऐतिहासिक गोल्ड

    नई दिल्ली
    भारतीय सेना में नायब सूबेदार नीरू ने बारिश से भीगे शूटिंग रेंज और गिरते तापमान के बीच कमाल का संयम दिखाया. फाइनल में चीन की सुन युनोंग ने 26 निशाने साधे, जबकि कुवैत की अब्दुलमलिक हाजर 21 के स्कोर के साथ पीछे रहीं. नीरू ने 28 का स्कोर बनाकर मुकाबला अपने नाम कर लिया.
       
    10 दिन पहले फ्लू हुआ था… भोपाल में थीं भर्ती
    भोपाल में एशियन गेम्स से करीब 10 दिन पहले नीरू को तेज फ्लू हुआ था. बीमारी इतनी गंभीर थी कि उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा. वह पांच दिन तक खाना तक नहीं खा सकीं. बीमारी को लेकर H1N1 की आशंका भी जताई गई थी.

    ऐसे वक्त में एशियन गेम्स में उतरना भी सवाल था और फॉर्म को लेकर भी संशय था… लेकिन नीरू के निजी कोच और पूर्व अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज मंशेर सिंह ने उन्हें बीमारी को पीछे छोड़कर सिर्फ टारगेट पर ध्यान देने को कहा.

    नीरू ने वही किया. उन्होंने जीत के बाद कहा, 'मंशेर सर ने सिर्फ इतना कहा कि जो हुआ उसे भूल जाओ और टारगेट पर ध्यान दो. मैंने वही किया.'

    … बारिश और ठंड भी नहीं रोक सकी
    मंगलवार को शूटिंग रेंज का मौसम भी आसान नहीं था. लगातार बारिश और खराब विजिबिलिटी ने उड़ते हुए क्ले टारगेट को देखना मुश्किल कर दिया था. तापमान भी नीचे जा रहा था. लेकिन नीरू का निशाना नहीं डगमगाया.

    क्वालिफिकेशन के शुरुआती चार राउंड में उन्होंने 100 में 95 निशाने साधे और बढ़त बना ली. पांचवें राउंड में उन्होंने 23 का स्कोर किया. कुल 118 के स्कोर के साथ वह कतर की बासिल रे के बराबर रहीं और आठ निशानेबाजों वाले फाइनल में पहुंच गईं.
    इसके बाद शुरू हुआ असली इम्तिहान.

    आखिरी पांच निशाने और गोल्ड
    फाइनल में जैसे-जैसे मुकाबला आगे बढ़ा, मुश्किल मौसम का असर दूसरे निशानेबाजों पर दिखने लगा. लेकिन नीरू अपनी लय में बनी रहीं.

    आखिरी पांच निशानों से पहले उनके पास चीन की सुन युनोंग पर दो अंक की बढ़त थी. इसी दौरान नीरू को येलो कार्ड भी दिखाया गया. कुछ देर के लिए फैसला विवादित रहा और फिर उन्हें इसका लाभ मिला.

    वापसी के बाद नीरू ने एक बार फिर अपना फोकस दिखाया. आखिरी पांचों टारगेट पर निशाना सटीक लगा.

    28/30…गोल्ड पक्का
    आखिरी टारगेट टूटते ही भारतीय खेमे में जश्न शुरू हो गया. भारत के ब्रिटिश कोच और ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट पीटर विल्सन ने नीरू को तिरंगे में लपेट लिया. नीरू हालांकि बेहद शांत नजर आईं. जैसे उन्हें पता हो कि अभी कहानी पूरी नहीं हुई है.

    पहले टीम सिल्वर, फिर व्यक्तिगत गोल्ड
    नीरू ने इसी दिन पहले टीम स्पर्धा में भी भारत को सिल्वर दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी. नीरू के 118, आशीमा अहलावत के 106 और मनीषा कीर के 104 के स्कोर से भारत का कुल स्कोर 328 रहा.

    चीन ने 346 के स्कोर के साथ गोल्ड जीता, जबकि कुवैत को 325 के साथ ब्रॉन्ज मिला.

    लेकिन दिन का सबसे बड़ा पल नीरू के लिए व्यक्तिगत फाइनल में आया. वह महिलाओं की ट्रैप स्पर्धा में एशियन गेम्स का व्यक्तिगत मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला बन गईं और भारत के लिए मौजूदा गेम्स में व्यक्तिगत शूटिंग गोल्ड जीतने वाली पहली निशानेबाज भी बनीं.

    2017 में शुरू हुआ सफर
    नीरू का शूटिंग सफर 2017 में मध्य प्रदेश शूटिंग अकादमी पहुंचने के बाद तेजी से आगे बढ़ा. उन्हें उनके चचेरे भाई और 2018 एशियन गेम्स में पुरुषों की ट्रैप स्पर्धा के सिल्वर मेडलिस्ट लक्ष्य श्योराण ने इस खेल को अपनाने के लिए प्रेरित किया था.

    इसके बाद नीरू ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. हाल ही में उन्होंने इटली के लोनाटो में ISSF वर्ल्ड कप में ट्रैप का गोल्ड जीतकर इतिहास रचा था. वह इस स्पर्धा में ISSF वर्ल्ड कप का व्यक्तिगत गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनी थीं.
    अब एशियन गेम्स का गोल्ड भी उनके नाम है.

    गोल्ड जवानों को समर्पित
    नीरू ने अपनी इस ऐतिहासिक जीत को भारतीय सेना के जवानों को समर्पित किया. उन्होंने कहा कि सीमा पर देश की रक्षा करने वाले जवानों के सामने उनकी उपलब्धि कुछ भी नहीं है.

    उन्होंने 1978 के बैंकॉक एशियन गेम्स में भारत को ट्रैप का पहला गोल्ड दिलाने वाले रणधीर सिंह को भी याद किया. नीरू ने बताया कि रणधीर सिंह हमेशा उन्हें गर्मजोशी से मिलते थे और सलाह देते थे. अब नीरू ने उसी विरासत में अपना नाम जोड़ दिया है.

    लेकिन नीरू की नजर सिर्फ एशियन गेम्स के गोल्ड पर नहीं रुकी है. उनके लिए यह सफर आगे भी जारी है. उनका अगला बड़ा निशाना ओलंपिक है.

  • बांग्लादेश को पाकिस्तान से झटका, एयरस्पेस नहीं मिलने से अटका यूरेनियम

    बांग्लादेश को पाकिस्तान से झटका, एयरस्पेस नहीं मिलने से अटका यूरेनियम

     ढाका
    जिस पाकिस्तान के लिए भारत से दुश्मनी मोल लेने को तैयार बैठे बांग्लादेश को उसी ने धोखा दे दिया है। बांग्लादेश के रूपपुर न्यूक्लियर पावर प्लांट के लिए न्यूक्लियर फ्यूल की सप्लाई प्रभावित हो गई है। इसकी वजह पाकिस्तान है। पाकिस्तान की ओर से एयरस्पेस क्लियरेंस नहीं मिलने के कारण यूनिट-2 के लिए यूरेनियम लेकर आने वाला कार्गो विमान बांग्लादेश नहीं पहुंच सका।

    बांग्लादेश के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री फकीर महबूब अनाम ने ANI को फोन पर बताया कि रूपपुर न्यूक्लियर पावर प्लांट के लिए यूरेनियम लेकर आने वाले कार्गो विमान के 24 सितंबर को पहुंचने की उम्मीद थी। हालांकि, विमान को पाकिस्तानी एयरस्पेस इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं मिली और इसी वजह से यूरेनियम तय समय पर बांग्लादेश नहीं पहुंच सका।

    पाकिस्तान ने एयरस्पेस क्लियरेंस क्यों नहीं दी?
    मंत्री ने कहा कि फिलहाल पाकिस्तान की ओर से एयरस्पेस क्लियरेंस नहीं दिए जाने की सही वजह स्पष्ट नहीं है। उन्होंने बताया कि यूरेनियम की बांग्लादेश पहुंचने की नई तारीख प्रस्तावित की गई है। रूस की ओर से इसके अक्टूबर के पहले सप्ताह में बांग्लादेश पहुंचने की बात कही गई है।

    एयरपोर्ट पर पूरी तैयारी थी
    बांग्लादेश के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के संयुक्त सचिव शेख मोहम्मद तौहिदुल इस्लाम ने भी इस मामले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एयरपोर्ट पर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई थीं और अधिकारी विमान का इंतजार कर रहे थे।

    उन्होंने कहा कि रोसाटॉम के संपर्क अधिकारी ने उन्हें बताया कि एयरस्पेस क्लियर नहीं है। इस वजह से यूरेनियम को भेजना संभव नहीं हो सका और अब इसे दोबारा शेड्यूल करना पड़ सकता है। अधिकारी यह भी स्पष्ट नहीं कर सके कि किस देश ने एयरस्पेस को ब्लॉक किया था।

    रूस की रोसाटॉम की मदद से बन रहा है प्लांट
    रूपपुर न्यूक्लियर पावर प्लांट बांग्लादेश का पहला परमाणु ऊर्जा संयंत्र है। इसका निर्माण रूस की स्टेट एटॉमिक एनर्जी कॉरपोरेशन रोसाटॉम की तकनीकी मदद से किया जा रहा है और इसकी निगरानी बांग्लादेश एटॉमिक एनर्जी कमीशन कर रहा है।

    यह प्लांट बांग्लादेश के पाबना जिले के ईश्वरडी उपजिला के पाकशी यूनियन में पद्मा नदी के किनारे रूपपुर गांव में बनाया जा रहा है। परियोजना में तीसरी पीढ़ी के दो VVER-1200 रिएक्टर यूनिट बनाए जा रहे हैं। दोनों यूनिट की कुल क्षमता 2,400 मेगावाट बेसलोड बिजली उत्पादन की होगी।

    यूनिट-1 के लिए पहले पहुंच चुका है यूरेनियम
    रूपपुर न्यूक्लियर पावर प्लांट की यूनिट-1 के लिए लो-एनरिच्ड यूरेनियम फ्यूल की पहली खेप रूस से बांग्लादेश पहुंच चुकी है। रोसाटॉम के नोवोसिबिर्स्क केमिकल कंसंट्रेट्स प्लांट में तैयार किए गए 164 नए फ्यूल असेंबली को रूस से एक भारी क्षमता वाले रूसी कार्गो विमान के जरिए ढाका के हजरत शाहजलाल इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचाया गया था।

    इसके बाद रेडिएशन-शील्डेड कंटेनरों को कड़ी सुरक्षा के बीच ढाका से पाबना के ईश्वरडी स्थित प्लांट तक पहुंचाया गया था। इसके लिए बांग्लादेश सेना और कानून-प्रवर्तन एजेंसियों की निगरानी में विशेष ‘ग्रीन कॉरिडोर’ बनाया गया था। अक्टूबर 2023 में प्लांट साइट पर आधिकारिक हैंडओवर समारोह आयोजित किया गया था।

  • खंडवा में औसत से 100 मिमी कम बारिश, रबी फसल पर मंडराया सिंचाई संकट

    खंडवा में औसत से 100 मिमी कम बारिश, रबी फसल पर मंडराया सिंचाई संकट

    भोपाल
    मानसून सीजन की विदाई अब लगभग तय हो चुकी है, आईएमडी एक सप्ताह में इसकी घोषणा कर सकता है। इस साल बारिश का औसत कोटा भी अब तक पूरा नहीं हुआ है। अब भी जिले की औसत बारिश के लिए चार इंच वर्षा की दरकार है। पिछले 15 साल में ये दूसरी बार है जब औसत से कम बारिश हुई है। कम बारिश से आगामी रबी सीजन में किसानों को गेहूं-चना की फसल में सिंचाई के लिए पानी की परेशानी हो सकती है। इस साल 15 वर्ष में पहली बार इंदिरा सागर बांध के गेट तक नहीं खुले।

    सितंबर में 86 मिमी ही बारिश हई
    जिले की औसत बारिश 808.8 मिमी है। इस साल मानसून सीजन में अब तक 708 मिमी बारिश ही दर्ज हो पाई है। इसके पूर्व वर्ष 2017 में सितंबर के अंत तक 758 मिमी बारिश हुई थी। सितंबर माह की देखी जाए तो इस साल सितंबर माह में कुल 86 मिमी बारिश ही हुई है। इसके पूर्व वर्ष 2015 में सितंबर माह में कुल 85 मिमी बारिश दर्ज की गई थी। पिछलेे कुछ वर्षों में बारिश का ट्रैक रिकार्ड देखा जाए तो सितंबर में हुई बारिश से औसत बारिश का कोटा पूरा होता आया है। इस बार स्थिति नहीं बन रही है।

    कृषि विभाग कम पानी वाली फसल फसलों की दे रहा सलाह
    इस साल समय अंतराल में हुई बारिश से खरीफ की फसलों को तो फायदा पहुंचा है, लेकिन आगामी रबी सीजन में किसानों के सामने परेशानी आ सकती है। जिले के छोटे-बड़े कुल 49 तालाब 94.14 प्रतिशत भरे हैं। वहीं, दो प्रमुख बांधों में इंदिरा सागर बांध भी अपनी पूर्ण जल भराव क्षमता के करीब सवा मीटर नीचे है। हालांकि बरगी से छोड़े गए पानी से इसका एफआरएल पूरा होता दिख रहा है। ओंकारेश्वर बांध भी दो मीटर खाली है। आगामी रबी सीजन की स्थिति को देखते हुए कृषि विभाग अभी से किसानों को कम पानी वाली फसलों की बुआई की समझाइश दे रहा है।

    पांच साल में बारिश की स्थिति
    वर्ष मानसून सीजन सितंबर में बारिश
    2022 1049 मिमी 273 मिमी
    2023 918 मिमी 480 मिमी
    2024 964 मिमी 212 मिमी
    2025 866 मिमी 205 मिमी
    2026 708 मिमी 86 मिमी -28 सितंबर तक

    दोनों प्रमुख बांधों की स्थिति
    ओंकारेश्वर बांध जल भराव क्षमता 196.60 मी., वर्तमान में 294.57 मी., दो मीटर खाली
    इंदिरा सागर बांध जल भराव क्षमता 262.13 मी., वर्तमान में 261.07 मी., सवा मीटर खाली

    यह है जिले के तालाबों की स्थिति
    भगवंत सागर बांध कुल जल भराव क्षमता 78.06 एमसीएम, वर्तमान में 75.07 एमसीएम
    भाम मध्यम योजना कुल जल भराव क्षमता 29.73 एमसीएम, वर्तमान में 27.71 एमसीएम
    आवलियां तालाब कुल जल भराव क्षमता 22.199 एमसीएम, वर्तमान में 17.72 एमसीएम
    46 छोटी परियोजनाएं कुल जल भराव क्षमता 40.82, वर्तमान में 39.729 एमसीएम

    अब बारिश की संभावना एक प्रतिशत
    जिले में बारिश का कोई नया सिस्टम अब नजर नहीं आ रहा है। स्थानीय सिस्टम से एक प्रतिशत बारिश की संभावना है। इस साल औसत से कम बारिश हुई है। गर्मियों की फसल को सिंचाई के लिए पानी की परेशानी आ सकती है।
    डॉ. सौरव गुप्ता, कृषि एवं मौसम विशेषज्ञ

    बिजली उत्पादन में कोई परेशानी नहीं
    इस बार डैम के गेट नहीं खुल है। बरगी बांध से छोड़े गए पानी से इंदिरा सागर बांध का जल स्तर 262 तक पहुंच जाएगा। सीजन में बिजली उत्पादन को लेकर कोई परेशानी नहीं आएगी।
    अरमेंद्र सिंह, डीजीएम, इंदिरा सागर परियोजना