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  • जयशंकर का अमेरिका को संदेश, ‘आतंकवाद पर भारत की चिंता समझना जरूरी’

    जयशंकर का अमेरिका को संदेश, ‘आतंकवाद पर भारत की चिंता समझना जरूरी’

    नई दिल्ली
    विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि पड़ोसी देश से उत्पन्न होने वाला आतंकवाद भारत की प्रमुख चिंताओं में से एक है। अगर नई दिल्ली के साझेदार इस चिंता को पूरी तरह नहीं समझते हैं, तो इसका द्विपक्षीय संबंधों पर असर पड़ता है। उनका यह बयान अमेरिका और पाकिस्तान की बढ़ती नजदीकी के बीच भारत-अमेरिका संबंधों के संदर्भ में आया है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के समापन के अवसर पर एशिया सोसाइटी की ओर से कार्यक्रम आयोजित किया गया, जहां जयशंकर ने भारतीय-अमेरिकी और प्रवासी भारतीय समुदाय के प्रमुख सदस्यों के साथ-साथ नीति विशेषज्ञों को संबोधित किया।

    एस जयशंकर से भारत-अमेरिका संबंधों के बारे में सवाल किया गया। उनसे खासतौर पर पिछले एक वर्ष के दौरान व्यापार और टैरिफ से जुड़े घटनाक्रम व द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर दिशा में ले जाने के लिए क्या किए जाने की जरूरत है, इस बारे में पूछा गया। जयशंकर ने कहा, 'अगर मैं व्यापक नजरिए से देखूं तो मैं देखता हूं कि दुनिया के कई देशों के अमेरिका के साथ संबंध अधिक कठिन रहे हैं। मेरा मतलब है कि इससे हमें सांत्वना शायद न मिले, लेकिन यह एक वास्तविकता है।' उन्होंने अमेरिका और पाकिस्तान के बीच संबंधों का जिक्र किया, जिनमें पिछले एक वर्ष के दौरान सुधार आया है, खासकर जनवरी 2025 में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के कुछ ही महीनों बाद।

    आतंकवाद को लेकर क्या बोले जयशंकर
    जयशंकर ने कहा कि एक मुद्दा हर देश की संवेदनशीलताओं से जुड़ा है। उन्होंने कहा, 'भारत के लिए जो बात विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, वह आतंकवाद का मुद्दा है। हमारा मानना है कि शायद बहुत कम ऐसे देश हैं, जिन्हें कई दशकों से किसी पड़ोसी देश की ओर से जानबूझकर और सुनियोजित नीति के तहत उस तरह के आतंकवाद का सामना करना पड़ा है, जैसा हमने किया है।' पाकिस्तान का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा, 'अगर जो बात हमारे लिए इतनी अहम है, उसके बारे में पर्याप्त समझ या सराहना या सहानुभूति नहीं है, तो मुझे लगता है कि इससे भी एक समस्या पैदा होती है। यदि मेरी प्रमुख चिंताओं में से किसी एक को मेरा साझेदार पूरी तरह नहीं समझता है, तो स्पष्ट रूप से इसका संबंधों पर असर पड़ता है।'

    पहलगाम हमले के बाद और बढ़ा तनाव
    पिछले साल मई में भारत ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकवादी हमले के जवाब में पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादी ढांचे को निशाना बनाकर ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। इस हमले को पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के मुखौटा संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट ने अंजाम दिया था और इसमें 26 लोग मारे गए थे जिनमें से ज्यादातर पर्यटक थे। पिछले पूरे साल और यहां तक कि गत सप्ताह संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन में भी ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष को रुकवाया था। भारत लगातार किसी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप से इनकार करता रहा है।

    ट्रंप का अब तक कैसा रहा है रवैया
    पिछले साल जून में कनाडा के कनानास्किस में आयोजित जी7 नेताओं के शिखर सम्मेलन से लौटने के बाद ट्रंप ने पाकिस्तान के फील्ड मार्शल असीम मुनीर की व्हाइट हाउस में दोपहर के भोजन पर मेजबानी की थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी जी7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया था। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और मुनीर ने पिछले साल सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र के दौरान व्हाइट हाउस में ट्रंप से फिर मुलाकात की थी। ट्रंप ने विभिन्न मौकों पर सार्वजनिक रूप से मुनीर की प्रशंसा की और उन्हें महान जनरल, महान फील्ड मार्शल, एक महान व्यक्ति बताया। जयशंकर ने कहा, 'हम निश्चित रूप से उम्मीद करेंगे और अपेक्षा करेंगे कि भारत-अमेरिका संबंध आगे बढ़ते हुए बेहतर दिशा में जाएं। लेकिन मुझे सामने मौजूद मुद्दों को लेकर वास्तविकता को ध्यान में रखना होगा और जिस हद तक हम इनमें से कुछ मुद्दों पर आगे बढ़ने में सक्षम होंगे, मुझे लगता है कि हमारे संबंध बेहतर होंगे।'

  • दीपक चाहर के तीन बैट चोरी, मजाकिया अंदाज में बोले- योगी जी या मोदी जी के पास जाऊं?

    दीपक चाहर के तीन बैट चोरी, मजाकिया अंदाज में बोले- योगी जी या मोदी जी के पास जाऊं?

    नई दिल्ली
    भारतीय टीम के तेज गेंदबाज दीपक चाहर एक अजीब समस्या से जूझ रहे हैं। आगरा के एक प्रैक्टिस ग्राउंड में अभ्यास के दौरान उनके तीन बेहद महंगे बल्ले चोरी हो गए। इन तीनों बैट्स की कुल कीमत लगभग 1.5 लाख रुपये बताई जा रही है। इस घटना के बाद दीपक चाहर ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर प्रशंसकों से सलाह मांगी है। वीडियो में चाहर ने बताया कि पिछले दिन शाम को मैदान से उनके बल्ले चोरी हुए हैं। उन्होंने मजाकिया अंदाज में यह भी कहा कि बल्ले चुराने वाले व्यक्ति को शायद यह अंदाजा भी नहीं होगा कि ये कितने महंगे हैं।

    'योगी जी के पास जाऊं या मोदी जी के पास?'
    अनोखे और मजाकिया अंदाज में अपनी बात रखते हुए दीपक चाहर ने कहा कि उनके पास बल्ले वापस पाने के कई रास्ते हैं। उन्होंने कहा कि वे पुलिस में शिकायत दर्ज करा सकते हैं, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास जा सकते हैं, या फिर सिर्फ भगवान से प्रार्थना कर सकते हैं कि चोर उनके बल्ले लौटा दे। चाहर ने चुटकी लेते हुए कहा कि चोर शायद इन बल्लों को बेच देगा या फिर इनसे टेनिस-बॉल क्रिकेट खेलेगा। उन्होंने चोर से अपील की कि वह बल्ले वापस कर दे। चाहर ने यहां तक ऑफर दिया कि अगर उस व्यक्ति को पैसे चाहिए, तो वे बल्ले के बदले उसे पैसे देने को भी तैयार हैं।

    गेंदबाजी का अभ्यास करते वक्त गायब हुए बल्ले
    दीपक चाहर के पिता और उनके कोच लोकेंद्र चाहर के अनुसार, यह घटना आगरा के अरतौनी स्थित चाहर-डावर ग्राउंड पर प्रैक्टिस के दौरान हुई। चाहर जब मैदान पर गेंदबाजी का अभ्यास करने गए, तो उन्होंने अपना किट बैग वहीं रख दिया था। लगभग एक घंटे बाद जब वे बल्लेबाजी के लिए लौटे, तो उनके तीनों प्लेयर-एडिशन बल्ले गायब थे।
    सोशल मीडिया पर वायरल हुआ अनोखा वीडियो
    दीपक चाहर का यह वीडियो इंटरनेट पर काफी तेजी से वायरल हो रहा है। आमतौर पर चोरी होने पर खिलाड़ी पुलिस का रुख करते हैं, लेकिन चाहर की ओर से मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री का जिक्र करते हुए बनाई गई यह वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है। दीपक चाहर सोशल मीडिया पर काफी ज्यादा एक्टिव हैं। भारतीय क्रिकेटर दीपक चाहर ने भारत के लिए 13 वनडे और 25 टी20 मैच खेले हैं, जिनमें उनके नाम क्रमशः 16 और 31 विकेट दर्ज हैं। वे लंबे समय से भारतीय टीम में वापसी की राह देख रहे हैं।

  • ट्रेड शो में युवाओं ने विभिन्न पुस्तकों से प्रतियोगी परीक्षाओं की सामग्री और प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को समझा

    ट्रेड शो में युवाओं ने विभिन्न पुस्तकों से प्रतियोगी परीक्षाओं की सामग्री और प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को समझा

    ग्रेटर नोएडा
     उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो में सूचना एवं जनसंपर्क विभाग का पवेलियन पांच दिनों तक युवाओं के ज्ञान, करियर और प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ने का केंद्र बना रहा। पुस्तकों की प्रदर्शनी से लेकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की सामग्री और प्रदेश के प्रमुख धार्मिक-सांस्कृतिक स्थलों को डिजिटल माध्यम से देखने का अवसर युवाओं को मिला। यही वजह रही कि पवेलियन पर दिनभर युवाओं की आवाजाही बनी रही।

    किताबों में करियर की राह, ज्ञान में बढ़ा भरोसा
    पवेलियन में भारतीय इतिहास, संस्कृति, राजनीतिक विज्ञान, उभरते भारत, उभरते उत्तर प्रदेश और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से संबंधित पुस्तकों ने युवाओं का ध्यान खींचा। कई युवा किताबें लेकर वहीं बैठकर पढ़ते दिखाई दिए तो कुछ ने पसंद आई पुस्तकों के प्रकाशकों की जानकारी अपने मोबाइल में दर्ज की। उत्तर प्रदेश वार्षिकी जैसी पुस्तकें प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए खास आकर्षण रहीं।
    सिकंदराबाद से आईं पीसीएस अभ्यर्थी निधि यादव ने बताया कि उनकी क्लासमेट ने उन्हें ट्रेड शो में उपलब्ध उत्तर प्रदेश वार्षिकी के बारे में बताया था। इसी पुस्तक को देखने और लेने के लिए वह विशेष रूप से यहां पहुंचीं। उनके अनुसार प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान उत्तर प्रदेश से जुड़े सामान्य ज्ञान की प्रमाणिक सामग्री उपयोगी रहती है। पवेलियन में बनारस तेरे रंग हजार, योगी का राम राज्य, लोक आराधना की अभिव्यक्ति, तीर्थनामा अयोध्या, न्यू यूपी फॉर ए न्यू इंडिया और विकसित यूपी विकसित भारत जैसी पुस्तकों में भी युवाओं ने रुचि दिखाई।

    सेल्फी से संस्कृति और विरासत से जुड़ा युवा
    युवाओं के बीच पवेलियन का सेल्फी जोन भी खास आकर्षण रहा। राम मंदिर अयोध्या, वाराणसी का नमो घाट, वृंदावन का प्रेम मंदिर और सारनाथ जैसे धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों को बैकग्राउंड में चुनकर युवाओं ने सेल्फी ली। इलेक्ट्रॉनिक ग्लोब के माध्यम से युवाओं और बच्चों को उभरते भारत और उभरते उत्तर प्रदेश की तस्वीर भी प्रस्तुत की गई। इलेक्ट्रॉनिक ग्लोब के साथ भी युवाओं और बच्चों में सेल्फी लेने का क्रेज रहा। भीड़ का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कई युवाओं को अपनी बारी के लिए करीब आधे घंटे तक इंतजार करना पड़ा। सेल्फी लेने के बाद सूचना विभाग की ओर से उन्हें उपहार भी दिए गए।

    इस तरह पांच दिनों में पवेलियन ने सूचना देने की पारंपरिक भूमिका से आगे बढ़कर युवाओं को किताबों के जरिए ज्ञान, प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए सामग्री, प्रदेश की संस्कृति और डिजिटल माध्यम से अपनी विरासत से जुड़ने का अवसर दिया। ट्रेड शो में युवाओं की मौजूदगी ने यह भी दिखाया कि मनोरंजन के साथ ज्ञान और करियर से जुड़ी सामग्री को एक ही मंच पर उपलब्ध कराया जाए तो युवा उसमें सक्रिय रुचि लेते हैं।

  • प्रदेश के समग्र विकास और जनहित को गति देने के लिए 24 हजार 500 करोड़ रूपये की स्वीकृति

    प्रदेश के समग्र विकास और जनहित को गति देने के लिए 24 हजार 500 करोड़ रूपये की स्वीकृति

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रि-परिषद की बैठक मंत्रालय में सम्पन्न हुई। मंत्रि-परिषद ने प्रदेश के समग्र विकास और जनहित को गति देने के लिए लगभग 24 हजार 500 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न योजनाओं और परियोजनाओं को मंजूरी दी। युवाओं के सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए मंत्रि-परिषद ने पुलिस आरक्षक, विशेष सशस्त्र बल, जेल प्रहरी, वन रक्षक और आबकारी आरक्षक जैसी वर्दीधारी सेवाओं में अग्निवीरों को 20 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण देने का बड़ा फैसला किया है।

    शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से 76 हजार से अधिक अतिथि शिक्षकों के मानदेय के लिए आगामी पांच वर्षों के लिए 5,329.17 करोड़ रुपये, स्कूली विद्यार्थियों को गणवेश राशि के लिए 348 करोड़ 7 लाख रुपये तथा स्वास्थ्य केंद्रों व औषधि नियंत्रण के लिए 3,245 करोड़ 80 लाख रुपये स्वीकृत किए गए। अधोसंरचना विस्तार के तहत 4,470 करोड़ 30 लाख रुपये की लागत से दमोह-कटनी 4-लेन मार्ग निर्माण, ग्रामीण विकास निधि के लिए 3,580 करोड़ 22 लाख रुपयें और सिंहस्थ 2028 के दृष्टिगत उज्जैन की कान्ह डायवर्सन परियोजना सहित दतिया, नीमच व सागर की बंडा वृहद सिंचाई परियोजनाओं की निरंतरता को स्वीकृति दी गई। यह निर्णय प्रदेश में रोजगार, बुनियादी ढांचे और सामाजिक कल्याण को गति प्रदान करेंगे।

    पुलिस आरक्षक सहित विशेष सशस्त्र बल,जेल प्रहरी,वन रक्षक और आबकारी आरक्षक के पदों पर अग्निवीरों को मिलेगा 20 प्रतिशत आरक्षण

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव की युवाओं को सशक्त बनाने की मंशा के अनुरूप मंत्रिपरिषद ने प्रदेश की वर्दीधारी सेवाओं में अग्निवीरों को 20 प्रतिशत आरक्षण देने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। मंत्रि-परिषद के निर्णय अनुसार अब गृह विभाग के अंतर्गत आरक्षक (सामान्य ड्यूटी)की भर्ती में होमगार्ड को 10, भूतपूर्व सैनिक को 5 और अग्निवीरों को 20 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा। इसी तरह गृह विभाग अंतर्गत विशेष सशस्त्र बल में होमगार्ड को 10, भूतपूर्व सैनिक को 5 और अग्निवीरों 20 प्रतिशत, जेल विभाग अंतर्गत जेल प्रहरी में होमगार्ड को 15, भूतपूर्व सैनिक को 5 और अग्निवीरों को 20, वन विभाग अंतर्गत वन रक्षक में होमगार्ड को 15, भूतपूर्व सैनिक को 5 और अग्निवीरों को 20 प्रतिशत तथा वाणिज्यिक कर विभाग अंतर्गत आबकारी आरक्षक में होमगार्ड को 10, भूतपूर्व सैनिक को 5 और अग्निवीरों को 20 प्रतिशत आरक्षण (हॉरिजेन्टल) दिये जाने का निर्णय लिया गया है।

    कक्षा 1 से 8 तक शासकीय विद्यालयों के विद्यार्थियों को गणवेश की राशि प्रदाय करने के लिए 348 करोड़ 7 लाख रूपये की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद ने सत्र 2026-27 में कक्षा 1 से 8 तक शासकीय विद्यालयों में अध्ययनरत छात्र और छात्राओं के लिये गणवेश की राशि डीबीटी के माध्यम से छात्र, छात्राओं और पालकों के खातों में प्रदाय करने के लिए 348 करोड़ 7 लाख रूपये की स्वीकृति दी है।

    अतिथि शिक्षकों को मानदेय प्रदाय करने के लिए 5,329 करोड़ 17 लाख रूपये की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद ने अतिथि शिक्षकों के मानदेय प्रदाय संबंधी योजना को आगामी 5 वर्षों 2026-27 से 2030 -31 तक निरंतर संचालन के लिए 5,329 करोड़ 17 लाख रूपये की स्वीकृति दी है। प्रदेश के शासकीय प्राथमिक, माध्यमिक, हाईस्कूल एवं हायर सेकेण्डरी शालाओं में शिक्षकों के विषयमान से स्वीकृत पदों में से रिक्त पदों पर अतिथि शिक्षकों के माध्यम से अध्यापन की व्यवस्था की जाती है। प्रदेश में वर्तमान में 76 हजार से अधिक अतिथि शिक्षक कार्यरत है।

    सिंगरौली में 605 बिस्तरीय जिला चिकित्सालय निर्माण के लिए 372 करोड़ 12 लाख रूपये की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद ने जिला चिकित्सालय सिंगरौली में अतिरिक्त 155 बिस्तरों की वृद्धि करते हुए 450 से 605 बिस्तरीय चिकित्सालय में विस्तार कार्य के साथ आंतरिक और बाह्य विकास कार्यों तथा बॉयोमेडिकल उपकरण एवं अस्पताल फर्नीचर आदि कार्य के लिए 372 करोड़ 12 लाख रूपये की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति दी है।

    उल्लेखनीय है कि वर्ष 2024 में जिला चिकित्सालय सिंगरौली के परिसर में 400 बिस्तरीय अस्पताल भवन एवं 50 बिस्तरीय क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल ब्लॉक के एकजाई भवन निर्माण कार्य के लिए 188 करोड़ 72 लाख रूपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई थी। जिला चिकित्सालय के क्षेत्रफल वृद्धि एवं 450 बिस्तर से 605 बिस्तरीय अस्पताल भवन सहित अन्य कार्य के फलस्वरूप लागत में वृद्धि होने से राशि रूपये 372 करोड़ 12 लाख रूपये की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति जारी की गई है।

    दमोह-कटनी मार्ग के निर्माण के लिए 4,470 करोड़ 30 लाख रूपये की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद ने दमोह-कटनी मार्ग लम्बाई 105.10 कि.मी. का 4-लेन मय पेव्हड शोल्डर के साथ हाईब्रिड एन्यूटी मॉडल (एच.ए.एम) के लिए बनाए गए मॉडल कंसेशन एग्रीमेंट के आधार पर निर्माण के लिए 4,470 करोड़ 30 लाख रूपये (जीएसटी सहित) की प्रशासकीय स्वीकृति दी है।

    स्वीकृति अनुसार परियोजना निर्माण लागत की 40 प्रतिशत राशि 865 करोड़ 15 लाख रूपये (जीएसटी सहित) का भुगतान निर्माण अवधि के दौरान म.प्र. सडक विकास निगम द्वारा लिये जा रहे ऋण के माध्यम से किया जायेगा।  निर्माण लागत की शेष 60 प्रतिशत राशि, एन्यूटी, ओ.एण्ड.एम, ब्याज, निर्माण पूर्व कार्यकलाप (भू-अर्जन एवं अन्य कार्य) एवं सुपरविजन चार्जेस के लिए कुल राशि 3,605 करोड़ 15 लाख रूपये का व्यय किये जाने के लिए शासन द्वारा म.प्र. सडक विकास निगम को राज्य बजट के माध्यम से इक्विटी के रूप में दिये जाने एवं इसके विरूद्ध निगम द्वारा राज्य शासन को शेयर्स जारी किये जाने का अनुमोदन किया गया है।

    लोक स्वास्थ्य केंद्रों, ड्रग रेग्युलेटरी सिस्टम के सुदृढीकरण और औषधि नियंत्रण के लिए 3,245 करोड़ 80 लाख रूपये की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद ने लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग अंतर्गत तीन योजनाओं के 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक निरंतर संचालन के लिए 3,245 करोड़ 80 लाख रूपये की स्वीकृति दी है। निर्णय अनुसार प्रदेश के सामुदायिक स्वास्थ्य, उप स्वास्थ्य और प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों के भवन निर्माण से संबंधित योजना के लिए 3,113 करोड़ 27 लाख रूपये की स्वीकृति दी गई है। इसी तरह ड्रग रेग्युलेटरी सिस्टम का सुदृढीकरण से संबंधित योजना के लिए 20 करोड़ 90 लाख रूपये और औषधि नियंत्रण से संबंधित योजना के लिए 111 करोड़ 63 लाख रूपये की स्वीकृति दी है।

    छिन्दवाडा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज अस्पताल के निर्माण के लिए 953 करोड़ 69 लाख रूपये की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद ने छिन्दवाडा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज अस्पताल एवं अन्य भवनों का निर्माण तथा सभी संबंद्ध सेवाओं सहित बाहय विकास कार्यों के लिए 953 करोड़ 69 लाख रूपयें की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति दी है।

    वर्ष 2022 में छिन्दवाडा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज अस्पताल एवं अन्य भवनों के निर्माण के लिए 768 करोड़ 22 लाख रूपयें की प्रशासकीय स्वीकृति जारी की गई थी। वर्तमान में शासन द्वारा जी.एस.टी. की दरों को 12 प्रतिशत से बढ़कर 18 प्रतिशत होने से अंतर की राशि, डेडीकेडेट विद्युत फीडर लाईन, नगर पालिक निगम द्वारा भवन अनुज्ञा फीस में वृद्धि होने के फलस्वरूप 953 करोड़ 69 लाख रूपयें की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है।

    दतिया की माँ रतनगढ़ बहुउद्देशीय सिंचाई परियोजना की निरंतरता के लिये  1,608.02 करोड़ रूपयें की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद ने दतिया जिले की माँ रतनगढ़ बहुउद्देशीय सिंचाई परियोजना को वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरंतर संचालन के लिए 1,608.02 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य बांध निर्माण कर सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली के माध्यम से दतिया जिले के 78,484 हेक्टेयर में क्षेत्र में सिंचाई क्षमता विकसित करना है।

    नीमच की रामपुरा मनासा सूक्ष्म उद्वहन सिंचाई परियोजना की निरंतरता के लिए 524 करोड़ 65 लाख रूपये की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद ने नीमच जिले की रामपुरा मनासा सूक्ष्म उद्वहन सिंचाई परियोजना को वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरंतर संचालन के लिए 524 करोड़ 65 लाख रूपये की स्वीकृति दी है। यह एक वृहद सिंचाई परियोजना है। परियोजना अन्तर्गत गांधीसागर जलाशय से जल उद्वहन कर नीमच जिले के 65,400 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता विकसित की जा रही है।

    उज्जैन की कान्ह डायवर्सन क्लोस डक्ट परियोजना के निरंतर संचालन के लिए 358 करोड़ 22 लाख रूपये की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद ने उज्जैन की कान्ह डायवर्सन क्लोस डक्ट परियोजना के वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरंतर संचालन के लिए 358 करोड़ 22 लाख रूपये की स्वीकृति दी है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य उज्जैन की पवित्र शिप्रा नदी में प्रदूषित कान्ह नदी के पानी को प्रवेश करने से रोकना है। यह योजना 2028 में उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ महापर्व के दृष्टिगत निर्माणाधीन है। इसके तहत प्रदूषित कान्ह नदी के पानी को 30.15 किलोमीटर लंबी भूमिगत सुरंग और ढकी हुई नहर के माध्यम से मोड़ कर प्रदूषित पानी को गंभीर नदी तक पहुंचाना है।

    सागर की बण्डा वृहद सिंचाई परियोजना की निरंतरता के लिए 1,052 करोड़ रूपये की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद ने सागर जिले के बण्डा तहसील के ग्राम उल्दन में धसान नदी पर प्रस्तावित बण्डा वृहद सिंचाई परियोजना के वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरंतर संचालन के लिए 1,052 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य बांध निर्माण कर सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली के माध्यम से सागर जिले के 80,000 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई करना है।

    विमुक्त, घुमन्तु एवं अर्द्धघुमन्तु कल्याण विभाग के छात्रावास, आश्रम और सामुदायिक कल्याण केन्द्रों में रहवासियों के लिए 1 रूपये प्रति किलोग्राम की दर से खाद्यान्न वितरण की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद ने अनुसूचित जाति और जनजाति के छात्रावासों और आश्रमों की तरह ही विमुक्त, घुमन्तु एवं अर्द्धघुमन्तु कल्याण विभाग के छात्रावास, आश्रम और सामुदायिक कल्याण केन्द्रों में रहवासियों को भोजन के लिए रु. 1 प्रति किलोग्राम की दर से खाद्यान्न वितरण किये जाने की स्वीकृति दी है। इसके लिए वितरित खाद्यान्न पर राज्य अनुदान का भुगतान विद्यार्थियों को रियायती दर पर खाद्यान्न योजना पर राज्य शासन से अनुदान मद अंतर्गत विकलनीय होगा।

    मउगंज, छिन्दवाडा, मैहर और टीकमगढ जिलों में नवीन जिला हाथकरघा कार्यालय के लिए 12 नवीन पदों के सृजन के साथ हथकरघा संचालनालय के लिए 2 करोड़ 41 लाख रूपये की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद ने मउगंज, छिन्दवाडा, मैहर और टीकमगढ जिलों में नवीन जिला हाथकरघा कार्यालय के लिए 3-3 नवीन पद कुल 12 नवीन पदों के सृजन के साथ हथकरघा संचालनालय के लिए 2 करोड़ 41 लाख रूपये की स्वीकृति दी है। स्वीकृत पदों को विभागीय सुसंगत भर्ती नियमों में सम्मिलित करने की आवश्यक कार्यवाही करने के लिए कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग को अधिकृत किया गया है।

    भूमि के अंतरण पर उपकर का ग्रामीण विकास निधि में अंतरण की योजना की निरंतरता के लिए 3,580.22 करोड़ रूपये की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद ने म.प्र. उपकर अधिनियम, 1982 के अंतर्गत भूमि के अंतरण पर उपकर का ग्रामीण विकास निधि में अंतरण की योजना को वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरंतर संचालन के लिए 3,580.22 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी है। ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों में भूमि व संपत्तियों का क्रय-विक्रय और उनका पंजीयन एक सतत वैधानिक प्रक्रिया है, जिससे उपकर की राशि निरंतर प्राप्त होती है। इस राशि का उपयोग त्रि-स्तरीय पंचायती राज संस्थाओं (मुख्यतः जनपद व जिला पंचायतों) के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए किया जाता है।

    विधि विभाग की 14 योजनाओं के लिए 1,342 करोड़ 48 लाख रुपये की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद ने विधि एवं विधायी कार्य विभाग की 14 प्रमुख योजनाओं की 16वें वित्त आयोग की अवधि 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक की निरंतरता के लिए 1,342 करोड़ 48 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की है। यह राशि न्यायिक अधोसंरचना और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने पर व्यय की जाएगी।

    स्वीकृति अनुसार प्रमुख रूप से उच्च न्यायालय भवन व आवासीय परिसर निर्माण के लिए 372 करोड़ रुपये, महाधिवक्ता कार्यालय के लिए 357 करोड़ 77 लाख रुपये और राज्य न्यायिक अकादमी भवन के लिए 200 करोड़ रुपये का व्यय किया जायेगा। इसके अलावा अधिवक्ता कल्याण, ए.डी.आर. सेंटर्स, लोक अदालत और विभागीय आईटी व पुस्तकालय सुदृढ़ीकरण के लिए भी वित्तीय स्वीकृति दी गई है।

    न्यायालयों के निर्वाह पत्र तामिल से संबंधित योजना की निरंतरता के लिए 622 करोड़ 37 लाख रूपये की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद ने विधि एवं विधायी कार्य विभाग के पंजीयक, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के अंतर्गत निर्वाह पत्र तामिल से संबंधित योजना को 16वें वित्त आयोग की अवधि 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 के लिये निरंतरता के लिए 622 करोड़ 37 लाख रूपये की स्वीकृति दी है। इस योजना में राज्य के समस्त अधीनस्थ न्यायालयों यथा जिला एवं सत्र न्यायालय, सिविल न्यायालय आदि में पदस्थ ऐसे शासकीय सेवकों (प्रोसेस सर्वर) का वेतन आहरित किया जाता है जो न्यायालयों के पत्रों की तामिल करवाते है। योजना में उनके वेतन, भत्तों के साथ यात्रा देयकों का भुगतान भी किया जाता है।

    वनोपज एवं खनिज परिवहन के अभिवहन शुल्क की नई दरों का अनुमोदन

    मंत्रि-परिषद ने राज्य में उत्पादित वनोपज (खनिज वनोपज, लघु वनोपज एवं बांस को छोड़कर) तथा अन्य राज्यों से आयातित वनोपज के परिवहन के लिए अभिवहन शुल्क एवं अनापत्ति प्रमाण-पत्र (एन.ओ.सी) शुल्क की नवीन दरों को स्वीकृति प्रदान की है। इसके साथ ही खनिज वनोपजों के परिवहन पर भी प्रति टन की दर से शुल्क निर्धारित किया गया है।

    स्वीकृति अनुसार सामान्य वनोपज के परिवहन के लिए एक घनमीटर तक की मात्रा पर 200 रुपये का शुल्क तय किया गया है। एक घनमीटर से अधिक मात्रा होने की स्थिति में पहले घनमीटर के लिए 200 रुपये और उसके बाद प्रत्येक अतिरिक्त घनमीटर के लिए 100 रुपये अतिरिक्त देय होंगे। यदि अतिरिक्त मात्रा आधे (1/2) घनमीटर से कम है तो उसकी गणना शून्य मानी जाएगी वहीं यदि यह मात्रा आधे घनमीटर से अधिक और एक घनमीटर से कम है तो उसकी गणना पूरे एक घनमीटर के रूप में की जाएगी।

    मंत्रि-परिषद ने खनिज वनोपजों के परिवहन के लिए भी प्रति टन शुल्क की दरें अनुमोदित की हैं। इसके तहत पहली श्रेणी के खनिजों—जैसे लाइम स्टोन, डोलोमाइट, फायर क्ले, मैंगनीज अयस्क, कॉपर अयस्क, रॉक फॉस्फेट, पायरोफिलाइट, डायस्पोर, ऑकर, बॉक्साइट, आयरन अयस्क, कैल्साइट, कोयला, क्वार्ट्ज, सिलिका सैंड, शेल, स्लेट और सोप स्टोन के परिवहन पर 81 रुपये प्रति टन की दर से शुल्क निर्धारित किया गया है। दूसरी श्रेणी में शामिल फ्लैग स्टोन, ग्रेनाइट, मार्बल एवं मिट्टी पत्थर के परिवहन के लिए 52 रुपये प्रति टन का शुल्क देय होगा।

    अन्य निर्णय

    मंत्रि-परिषद ने केन्द्र प्रवर्तित योजना "न्यायालय भवनों का निर्माण" में स्वीकृत निर्माण कार्यों के लंबित दायित्वों में भारत सरकार द्वारा नियत की गई अधिकतम व्यय सीमा से अधिक की राशि 691 करोड़ 1 लाख रूपये का भुगतान राज्य शासन द्वारा राज्य योजना में उपलब्ध करायी गई राशि से किए जाने की अनुमति प्रदान की है।

     

  • UP Weather: मानसून की विदाई शुरू, 30 सितंबर तक इन जिलों में बारिश के आसार

    UP Weather: मानसून की विदाई शुरू, 30 सितंबर तक इन जिलों में बारिश के आसार

    लखनऊ
     भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा आज जारी ताजा अपडेट के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून देश के कई हिस्सों से वापस लौट रहा है। मानसून की वापसी की रेखा वर्तमान में उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर और अलीगढ़ क्षेत्रों से होकर गुजर रही है।

    मौसम विभाग के अनुसार, निचले क्षोभमंडल के स्तर पर पूर्वी उत्तर प्रदेश के ऊपर एक ऊपरी हवा का साइक्लोन सर्कुलेशन बना हुआ है। इस मौसमी प्रणाली के प्रभाव से राज्य के मौसम में बदलाव देखने को मिल रहा है।

    पूर्वी यूपी में हल्की बारिश की संभावना
    29 और 30 सितंबर को पूर्वी उत्तर प्रदेश के वाराणसी, मीरजापुर, सोनभद्र और आजमगढ़ समेत कुछ जिलों में हल्की या छिटपुट बारिश होने की संभावना व्यक्त की गई है। इसके बाद 1 अक्टूबर से 5 अक्टूबर के दौरान मौसम के मुख्य रूप से शुष्क रहने का अनुमान है।

    पश्चिमी यूपी में ऐसा रहेगा मौसम का हाल
    पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लगभग सभी जिलों में 30 सितंबर से 5 अक्टूबर तक मौसम पूरी तरह शुष्क रहने की संभावना है। इस दौरान तापमान में भी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।

    कब होगी मानसून की विदाई
    देश में मानसून की विदाई अब शुरू हो चुकी है। मानसून के पीछे हटने के कारण आने वाले दिनों में राज्य के अधिकतम और न्यूनतम तापमान में बदलाव देखा जा सकता है।

    अक्टूबर के पहले हफ्ते में मानसून के पूरी तरह खत्म होने के आसार हैं। किसानों को सलाह दी गई है कि मौसम के शुष्क रहने के दौरान वे अपनी फसलों की देखभाल और कटाई का कार्य योजनाबद्ध तरीके से करें।

     

  • दुनिया में यूपी की बढ़ती साख का प्रतीक बना इंटरनेशनल ट्रेड शो : भूपेंद्र चौधरी

    दुनिया में यूपी की बढ़ती साख का प्रतीक बना इंटरनेशनल ट्रेड शो : भूपेंद्र चौधरी

    ग्रेटर नोएडा
    सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो प्रदेश की बढ़ती औद्योगिक और कारोबारी साख का प्रतीक बन गया है। देश-विदेश से आए उद्यमियों, निर्यातकों, कारीगरों और खरीदारों को एक मंच मिलने से उत्तर प्रदेश के उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने की नई संभावनाएं बनी हैं। उन्होंने कहा कि ट्रेड शो का समापन दरअसल प्रदेश के उद्यमियों के लिए नए अवसरों की शुरुआत है।

    उन्होंने कहा कि ओडीओपी, विश्वकर्मा श्रम सम्मान और मुख्यमंत्री युवा योजना जैसी योजनाएं प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश की आर्थिक प्रगति को गति दे रही हैं। सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति, बेहतर कानून-व्यवस्था, सिंगल विंडो सिस्टम और उद्योगों के लिए प्रोत्साहन नीतियों से उत्तर प्रदेश को उद्यम प्रदेश के रूप में स्थापित करने में मदद मिली है। बिजनेस रिफॉर्म एक्शन प्लान में भी प्रदेश लगातार टॉप एचीवर' के रूप में सामने आया है।

    उन्होंने कहा कि सीएम योगी के प्रयास से यहां की योजनाएं रोल मॉडल बन गई हैं। आज दुनिया में योगी के कानून के मॉडल की चर्चा होती है। पिछले नौ वर्षों में झांसी, चित्रकूट, अलीगढ़, कानपुर, लखनऊ और आगरा में डिफेंस कॉरिडोर से रक्षा उत्पादन को बढ़ावा मिल रहा है। ग्रेटर नोएडा डेटा सेंटर हब के रूप में उभर रहा है।

    उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री युवा योजना के तहत लाखों युवाओं को बिना गारंटी और बिना ब्याज के ऋण दिया गया। अयोध्या में श्रीराम मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम और प्रयागराज महाकुंभ जैसे आयोजनों से प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को भी नई गति मिली है। भूपेंद्र चौधरी ने ट्रेड शो में शामिल पार्टनर देशों वियतनाम, जापान, सिंगापुर, रूस, ऑस्ट्रेलिया और बेलारूस के प्रतिनिधियों, देश-विदेश से आए बिजनेस लीडरों, उद्यमियों, निर्यातकों, कारीगरों का स्वागत कर आभार व्यक्त किया।

    यूपीआईटीएस बना यूपी के हुनर को ग्लोबल बाजार तक पहुंचाने का मंच : नंदी
    औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ ने कहा कि उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस)-2026 प्रदेश की नई आर्थिक पहचान का उत्सव है। चार साल पहले शुरू हुआ यह आयोजन प्रदेश के उद्यमियों, कारीगरों और बुनकरों के उत्पादों को घरेलू बाजार से वैश्विक बाजार तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। उन्होंने कहा कि इस बार ट्रेड शो में 90 देशों के 600 से अधिक विदेशी बायर्स ने हिस्सा लिया। जापान, रूस, वियतनाम, सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया और बेलारूस पार्टनर कंट्री के रूप में शामिल हुए। इससे उत्तर प्रदेश की कारोबारी संभावनाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करने का अवसर मिला।

    नंदी ने कहा कि यूपीआईटीएस में बनारस की साड़ी, मुरादाबाद का पीतल, भदोही का कालीन और लखनऊ की चिकनकारी समेत प्रदेश की पारंपरिक कला और शिल्प को आधुनिक बाजार, तकनीक और ब्रांडिंग से जोड़ने का प्रयास किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकल को ग्लोबल बनाने के विजन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, एक्सप्रेसवे, एयर कनेक्टिविटी और निवेश अनुकूल वातावरण से उद्योगों के लिए नई संभावनाएं बनी हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था में एमएसएमई, मैन्युफैक्चरिंग, हस्तशिल्प और निर्यात की महत्वपूर्ण भूमिका है। यूपीआईटीएस इस योगदान को और विस्तार देने का मजबूत मंच बन रहा है

  • योगी सरकार के निवेश, निर्यात और ‘ब्रांड यूपी’ को वैश्विक बाजार से जोड़ने का अहम मंच बनकर उभरा आईईएमएल

    योगी सरकार के निवेश, निर्यात और ‘ब्रांड यूपी’ को वैश्विक बाजार से जोड़ने का अहम मंच बनकर उभरा आईईएमएल

    ग्रेटर नोएडा
    ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट (आईईएमएल) में उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस) के चौथे संस्करण का मंगलवार शाम समापन हो गया। वर्ष 2023 में शुरू हुआ यह आयोजन अब उत्तर प्रदेश के उद्योग, उद्यमिता, निर्यात और वैश्विक कारोबार को एक मंच पर लाने वाले प्रमुख व्यापारिक आयोजनों में अपनी पहचान बना चुका है। वर्ष 2003 में स्थापित इंडिया एक्सपो मार्ट पिछले चार वर्षों में यूपी के उत्पादों और उद्यमियों को देश-दुनिया के खरीदारों, निवेशकों और कारोबारी प्रतिनिधियों से जोड़ने का महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरा है।

    उत्तर प्रदेश की बदलती आर्थिक तस्वीर के बीच इंडिया एक्सपो मार्ट अब केवल प्रदर्शनी स्थल नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण ट्रेड प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित हुआ है। प्रदेश में निवेश, निर्यात और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए विकसित एक्सप्रेसवे, एयर कनेक्टिविटी, औद्योगिक पार्क, लॉजिस्टिक्स और आधुनिक ट्रेड इन्फ्रास्ट्रक्चर के साथ ऐसे प्लेटफॉर्म उत्तर प्रदेश के उत्पादों और उद्यमियों को वैश्विक आपूर्ति शृंखला से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

    2003 में रखी नींव, 2026 में बना वैश्विक व्यापार का बड़ा मंच
    इंडिया एक्सपोजिशन मार्ट लिमिटेड का गठन 12 अप्रैल 2001 को हुआ। वर्ष 2003 में ग्रेटर नोएडा स्थित परिसर की आधारशिला रखी गई और 2006 में इसका उद्घाटन हुआ। शुरुआत में स्थायी मार्ट और प्रदर्शनी अवसंरचना के माध्यम से भारतीय निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों तक पहुंच उपलब्ध कराने का उद्देश्य रखा गया। समय के साथ यहां स्थायी शो-रूम, बड़े प्रदर्शनी हॉल, बिजनेस मीटिंग स्पेस, हॉस्पिटैलिटी और आयोजन संबंधी सुविधाएं विकसित होती गईं। आज यह परिसर विभिन्न क्षेत्रों के उद्योगों को अपने उत्पाद प्रदर्शित करने और कारोबार के नए अवसर तलाशने का मंच उपलब्ध कराता है।

    योगी सरकार के ‘ब्रांड यूपी’ को वैश्विक मंच
    उत्तर प्रदेश सरकार ने पिछले वर्षों में ओडीओपी, निर्यात प्रोत्साहन, एमएसएमई, स्टार्टअप, निवेश और रोजगार को आर्थिक विकास के प्रमुख आधारों के रूप में आगे बढ़ाया है। इस पूरी रणनीति में ऐसे ट्रेड प्लेटफॉर्म की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है, जहां यूपी के उत्पाद सीधे देश-दुनिया के खरीदारों तक पहुंच सकें। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस) की शुरुआत वर्ष 2023 में हुई। इंडिया एक्सपो मार्ट में आयोजित यह आयोजन प्रदेश के उद्यमियों, निर्यातकों, कारीगरों और उत्पादकों को वैश्विक बाजार से जोड़ने का बड़ा माध्यम बन गया है। इसके जरिए उत्तर प्रदेश के ओडीओपी, हस्तशिल्प, टेक्सटाइल, फूड प्रोसेसिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, कृषि उत्पादों, मैन्युफैक्चरिंग और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों और निवेशकों के सामने प्रस्तुत किया जा रहा है।

    यूपीआईटीएस ने बढ़ाया ग्लोबल कनेक्ट
    वर्ष 2025 के यूपीआईटीएस में 2,200 से अधिक प्रदर्शकों और 80 से अधिक देशों की भागीदारी दर्ज की गई। आयोजन के दौरान 288 एमओयू हुए, जिनका कुल घोषित मूल्य लगभग 89 करोड़ रुपये था। 2026 में यूपीआईटीएस का विस्तार और व्यापक हुआ। चौथे उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो में 2,400 से अधिक प्रदर्शक, 90 देशों की भागीदारी और 550 से अधिक अंतरराष्ट्रीय खरीदारों ने इसे प्रदेश के बढ़ते वैश्विक व्यापार संपर्क का बड़ा मंच बना दिया है। इस आयोजन में उत्तर प्रदेश के उत्पादों के साथ-साथ छह साझेदार देशों- वियतनाम, जापान, सिंगापुर, रूस, ऑस्ट्रिया और बेलारूस की भागीदारी भी अंतरराष्ट्रीय सहयोग के बढ़ते दायरे को दर्शाती है।

    ‘लोकल से ग्लोबल’ तक पहुंच रहा यूपी
    योगी सरकार की नीतियों में स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार उपलब्ध कराने पर विशेष जोर रहा है। यूपीआईटीएस इसी दिशा में एक व्यावहारिक प्लेटफॉर्म बनकर सामने आया है। इंडिया एक्सपो मार्ट के स्थायी मार्ट में 31 जुलाई 2026 तक 1,800 शो-रूम और 774 निर्यातकों की मौजूदगी दर्ज की गई। इससे पूरे वर्ष खरीदारों और विक्रेताओं के बीच संपर्क बनाए रखने की व्यवस्था मजबूत होती है। मार्ट सोर्सिंग डेज जैसे आयोजनों के जरिए खरीदार प्रमुख प्रदर्शनियों के बाहर भी उत्पादों और आपूर्तिकर्ताओं से जुड़ सकते हैं। इस प्रकार ट्रेड कनेक्ट केवल पांच-दिन के किसी आयोजन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि सालभर चलने वाली व्यावसायिक गतिविधि में बदल जाता है।

    16 प्रदर्शनी हॉल, 76 हजार वर्गमीटर से अधिक ऑपरेशनल एरिया
    इंडिया एक्सपो मार्ट ने मांग के अनुरूप लगातार अपनी क्षमता बढ़ाई है। 31 मार्च 2024 तक जहां 14 प्रदर्शनी हॉल संचालित थे, वहीं 31 मार्च 2026 तक इनकी संख्या बढ़कर 16 हो गई। इसी अवधि में ऑपरेशनल हॉल क्षेत्रफल 64,888 वर्गमीटर से बढ़कर 76,484 वर्गमीटर हो गया, लगभग 17.87 प्रतिशत की वृद्धि। यह विस्तार ऐसे समय में हुआ है जब उत्तर प्रदेश देश के प्रमुख निवेश और औद्योगिक केंद्रों में अपनी भूमिका मजबूत कर रहा है।

    दुनिया के प्रमुख सेक्टर एक ही परिसर में
    इंडिया एक्सपो मार्ट का विस्तार केवल आकार में नहीं, बल्कि सेक्टरों की विविधता में भी हुआ है। यहां हस्तशिल्प और होम डेकोर से लेकर रिन्यूएबल एनर्जी, बैटरी, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरिंग, फूड, हॉस्पिटैलिटी, पैकेजिंग और औद्योगिक तकनीक तक के आयोजन होते हैं। आईएचजीएफ दिल्ली फेयर, रिन्यूएबल एनर्जी इंडिया एक्सपो, बैटरी शो इंडिया, सीपीएचआई एंड पी – एमईसी इंडिया और इंडस फूड जैसे बड़े आयोजनों ने इसे विभिन्न उद्योगों के कारोबारियों के लिए महत्वपूर्ण मंच बनाया है।

    यूपी की अर्थव्यवस्था को मिलने वाला बहुआयामी लाभ
    इंडिया एक्सपो मार्ट का प्रभाव केवल प्रदर्शनी में शामिल कंपनियों तक सीमित नहीं है। बड़े आयोजनों से होटल, परिवहन, कैटरिंग, स्टॉल निर्माण, सुरक्षा, लॉजिस्टिक्स, तकनीकी सेवाओं और अन्य स्थानीय व्यवसायों के लिए मांग पैदा होती है।

     

  • 2023 में शुरू उत्तर प्रदेश अंतरराषट्रीय व्यापार मेले ने यूपी को दिलाई नई पहचान: शशि भूषण लाल सुशील

    2023 में शुरू उत्तर प्रदेश अंतरराषट्रीय व्यापार मेले ने यूपी को दिलाई नई पहचान: शशि भूषण लाल सुशील

    ग्रेटर नोएडा
     वर्ष 2023 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में शुरू हुए उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस) ने आर्थिक प्रगति, तकनीकी विकास, सांस्कृतिक विरासत, निवेश, विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे और औद्योगिक विकास के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश को नई पहचान दिलाई है। यूपीआईटीएस-2026 के समापन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रमुख सचिव, एमएसएमई एवं निर्यात प्रोत्साहन शशि भूषण लाल सुशील ने कहा कि “यूपी डिड इट”, यानी उत्तर प्रदेश ने कर दिखाया।

    उन्होंने कहा कि यूपीआईटीएस में प्रदेश के कारीगरों को केवल उत्पादों की बिक्री का अवसर नहीं मिला, बल्कि देश-विदेश से आए खरीदारों से ग्राहक प्रतिक्रिया और बाजार का अनुभव भी मिला। इससे उन्हें डिजाइन और उत्पाद विकास को ग्राहक-केंद्रित बनाने तथा भविष्य में स्थानीय बाजार से आगे बढ़कर अंतरराष्ट्रीय बाजार में निर्यात करने में मदद मिलेगी। आयोजन में युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ने पर भी विशेष जोर दिया गया। उन्हें स्वरोजगार योजनाओं के साथ मशीनों के उपयोग और व्यवसाय संचालन की जानकारी दी गई। तकनीकी सत्रों में विशेषज्ञों ने उद्यमियों को उद्योग विस्तार तथा निर्यातकों को नए देशों और नए उत्पादों के निर्यात की संभावनाओं से अवगत कराया। संबंधित विभागों के मंत्रियों ने भी इन सत्रों में समय देकर प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया।

    ओडीओसी से सामने आई यूपी की समृद्ध पाक विरासत
    प्रमुख सचिव ने कहा कि यूपीआईटीएस ने उत्तर प्रदेश को स्वयं को जानने और देश-दुनिया को उत्तर प्रदेश को जानने का अवसर दिया। एक जनपद-एक व्यंजन (ओडीओसी) के माध्यम से ऐसे पारंपरिक व्यंजन सामने आए, जिनके बारे में अनेक लोग पहली बार जान पाए। इससे प्रदेश की सदियों पुरानी पाक एवं सांस्कृतिक विरासत को देश-विदेश के खरीदारों और प्रतिनिधिमंडलों तक पहुंचाने का अवसर मिला।

    एआई पर व्यावहारिक प्रयोग
    एआई पर अपने विचार रखते हुए प्रमुख सचिव ने कहा कि मानव ने पहले शारीरिक श्रम और फिर कई अन्य कार्य मशीनों को सौंपे और अब सोचने की प्रक्रिया भी एआई को सौंपने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। उन्होंने इसके संतुलित उपयोग की आवश्यकता बताते हुए जानकारी दी कि उन्होंने सीएम युवा योजना के तहत मुजफ्फरनगर और बदायूं के तीन युवा उद्यमियों को एआई आधारित बिक्री सेवा से जोड़कर इसका व्यावहारिक परीक्षण शुरू कराया है। इससे पता चलेगा कि एआई उनकी बिक्री और कारोबार को बढ़ाने में कितनी मदद करता है।

    यूपीआईटीएस ने उद्यमियों को वैश्विक बाजार से जोड़ा
    कमिश्नर उद्योग के. विजयेंद्र पांडियन ने कहा कि यूपीआईटीएस के चार संस्करणों ने उत्तर प्रदेश की औद्योगिक, कारोबारी और निर्यात क्षमता को देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत करने के साथ प्रदेश के उद्यमियों और कारीगरों को नए बाजारों से जोड़ने का काम किया है। इस आयोजन के माध्यम से उत्पादों की बिक्री के साथ उद्यमियों को ग्राहकों की पसंद, बाजार की मांग और उत्पादों में आवश्यक बदलाव की जानकारी भी मिली, जिससे वे अपने उत्पादों की गुणवत्ता, डिजाइन और पैकेजिंग में सुधार कर सकेंगे। यूपीआईटीएस में युवाओं और नए उद्यमियों को स्वरोजगार, उद्योग संचालन और तकनीक के माध्यम से कारोबार विस्तार की जानकारी मिली। तकनीकी सत्रों और विशेषज्ञों के संवाद से निर्यात एवं कारोबार बढ़ाने के नए अवसरों पर भी चर्चा हुई। उन्होंने ‘एक जनपद-एक व्यंजन’ पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके माध्यम से प्रदेश के पारंपरिक खान-पान और स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार से जोड़ने का प्रयास किया गया। यूपीआईटीएस केवल व्यापारिक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि प्रदेश के उत्पादों, उद्यमिता, कौशल और नवाचार को वैश्विक बाजार से जोड़ने वाला मंच बन चुका है।

    सीएम योगी ने लगातार की समीक्षा बैठकें: राकेश कुमार
    इंडिया एक्सपो मार्ट लिमिटेड (आईईएमएल) के चेयरमैन राकेश कुमार ने कहा कि उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो अब प्रदेश के उद्यमियों, निर्यातकों, कारीगरों और बुनकरों को देश-दुनिया के खरीदारों से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। यूपीआईटीएस के चौथे संस्करण की सफलता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निरंतर दिशा-निर्देशन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। मुख्यमंत्री ने आयोजन की तैयारियों को लेकर लगातार समीक्षा बैठकें कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की उपस्थिति तथा प्रदेश के मंत्रियों भूपेंद्र चौधरी, नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ और राज्य मंत्री हंसराज विश्वकर्मा सहित अन्य जनप्रतिनिधियों के सहयोग की भी सराहना की। राकेश कुमार ने कहा कि उत्तर प्रदेश की वस्त्र एवं हस्तशिल्प परंपरा प्रदेश की पहचान और लाखों लोगों की आजीविका से जुड़ी है। एक जनपद-एक उत्पाद योजना ने स्थानीय उत्पादों को नई पहचान और बाजार उपलब्ध कराया है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के नेतृत्व में वस्त्र क्षेत्र में हो रहे प्रयासों तथा ‘भारत टेक्स’ जैसे आयोजनों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के ‘फार्म टू फाइबर, फाइबर टू फैक्ट्री, फैक्ट्री टू फैशन और फैशन टू फॉरेन’ के विजन के अनुरूप भारत का वस्त्र उद्योग उत्पादन से निर्यात तक पूरी मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। यूपीआईटीएस उत्तर प्रदेश की औद्योगिक, हस्तशिल्प और उद्यमिता क्षमता को वैश्विक बाजार से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बन रहा है।

  • रतलाम एक्सप्रेस-वे पर दो हादसे, 4 की मौत और 8 घायल

    रतलाम एक्सप्रेस-वे पर दो हादसे, 4 की मौत और 8 घायल

    रतलाम.

    दिल्ली-मुंबई 8 लेन एक्सप्रेस-वे पर मंगलवार सुबह करीब दो घंटे के अंतराल में हुए दो सड़क हादसों में चार लोगों की मौत हो गई, जबकि आठ घायल हुए हैं। दोनों हादसों में कार सवार दो-दो लोगों की जान गई। पहला हादसा सुबह करीब साढ़े चार बजे और दूसरा करीब साढ़े छह बजे हुआ।

    मृतकों में अंबाला से मुंबई जा रहे परिवार के दो सदस्य और गुजरात के दाहोद जिले के दो लोग शामिल हैं। घायलों को जावरा अस्पताल पहुंचाया गया, जहां से प्राथमिक उपचार के बाद रतलाम मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। जावरा औद्योगिक थाना प्रभारी प्रकाश गडरिया के अनुसार पहला हादसा सुबह करीब साढ़े चार बजे हुआ। कार क्रमांक एमएच 48 एके 4833 में सवार परिवार अंबाला से मुंबई जा रहा था। इसी दौरान चालक को झपकी लगने से कार अनियंत्रित हो गई। कार एक्सप्रेस-वे के बीच बनी रेलिंग को तोड़ते हुए करीब 30 फीट नीचे खाई में जा गिरी। हादसे में 67 वर्षीय नरेंद्र कौर और 32 वर्षीय उनकी बहू मनप्रीत कौर की मौत हो गई। कार में सवार 67 वर्षीय मनोहर, 4 वर्षीय जुझार और 2 वर्षीय जोरावर घायल हुए हैं। हादसे की सूचना अन्य वाहन चालकों ने पुलिस को दी। पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को जावरा अस्पताल पहुंचाया। यहां से उन्हें रतलाम मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया।

    टूटी रेलिंग के कारण दूसरी कार भी खाई में गिरी
    पहले हादसे के बाद एक्सप्रेस-वे के बीच की रेलिंग टूट गई थी। सुबह करीब साढ़े छह बजे पुलिसकर्मी मौके पर हादसे की जांच कर रहे थे। इसी दौरान कार क्रमांक जीजे 20 सीबी 4610 वहां से गुजरते समय हवा में उछल गई और टूटी रेलिंग वाले हिस्से से खाई में जा गिरी। इस कार में गुजरात के दाहोद जिले का परिवार सवार था, जो उत्तर प्रदेश से इलाज करवाकर लौट रहा था। दूसरे हादसे में रवि हटीला निवासी चंदला, दाहोद और 50 वर्षीय रमेश मकवाना निवासी विजयगढ़, दाहोद, गुजरात की मौत हो गई। 55 वर्षीय रामली बाई निवासी विजयगढ़, दाहोद, संगीता निवासी विजयगढ़, दाहोद और 30 वर्षीय नरेश मकवाना निवासी विजयगढ़, दाहोद घायल हुए हैं।

    सभी को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। पुलिस के अनुसार पहली कार की टक्कर से एक्सप्रेस-वे के बीच की रेलिंग टूट गई थी। इसी टूटे हिस्से के कारण दूसरी कार भी दुर्घटनाग्रस्त हुई। लगातार हुए दोनों हादसों के बाद पुलिस ने मौके पर राहत और बचाव कार्य कराया। पुलिस दोनों हादसों की परिस्थितियों और दुर्घटना के कारणों की जांच कर रही है।

  • बारापुला फेज-3 कॉरिडोर का उद्घाटन, नोएडा से AIIMS जाना होगा आसान

    बारापुला फेज-3 कॉरिडोर का उद्घाटन, नोएडा से AIIMS जाना होगा आसान

    नई दिल्ली
    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज बारापुला फेज-3 एलिवेटेड कॉरिडोर का उद्घाटन कर दिया है. ये कॉरिडोर पूर्वी दिल्ली के मयूर विहार फेज-1 को सराय काले खां से जोड़ेगा, जिससे AIIMS और दक्षिणी दिल्ली की तरफ जाना आसान होगा.

    इस प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा फायदा नोएडा और पूर्वी दिल्ली से दक्षिणी दिल्ली की तरफ जाने वाले लोगों को होगा. मंगलवार को अमित शाह ने इस कॉरिडोर को हरी झंडी दिखाई, इस दौरान उनके साथ दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता भी मौजूद रहीं.

    उद्घाटन पर बात करते हुए रेखा गुप्ता ने बताया कि इस प्रोजेक्ट को 2014 में मंजूरी मिली थी और योजना मयूर विहार से सराय काले खां तक करीब 11 किलोमीटर का एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने की थी.

    रेखा गुप्ता ने कहा कि 2025 तक दिल्ली में सत्ता में रही सरकार इस काम को इतने सालों में पूरा नहीं कर सकी. रेखा गुप्ता के मुताबिक जब उन्होंने PWD मंत्री प्रवेश वर्मा के साथ मौके का निरीक्षण किया तो स्थिति ऐसी थी कि पुल एक जगह से शुरू होता था, फिर दूसरी जगह से दोबारा शुरू हो जाता था और बीच का बड़ा हिस्सा अधूरा पड़ा था.

    9 साल की देरी, लागत भी बढ़ी
    2014 में मंजूरी मिलने के बाद 2015 में बारापुला फेज-3 कॉरिडोर का निर्माण शुरू हो गया था. इसे 2017 तक पूरा किया जाना था, लेकिन कई अड़चनों के चलते काम लंबा खिंचता गया. अब करीब 1,635 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट का काम पूरा हो चुका है.

    साइकिल और पैदल चलने वालों के लिए भी राहत
    कॉरिडोर में साइकिल चलाने वालों के लिए अलग ट्रैक बनाया गया है. पैदल चलने वालों के लिए भी एक लेन बनाई गई है जहां लोग मॉर्निंग वॉक कर सकेंगे. यमुना के ऊपर बने हिस्से में लंबे स्पैन वाली संरचना का इस्तेमाल किया गया है और शीशे की रेलिंग लगाई गई है, ताकि लोग यमुना की खूबसूरती का लुत्फ उठा सके.