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  • छत्तीसगढ़ को कृषि योजनाओं के लिए ₹181.99 करोड़, RKVY की दूसरी किस्त जारी

    छत्तीसगढ़ को कृषि योजनाओं के लिए ₹181.99 करोड़, RKVY की दूसरी किस्त जारी

     रायपुर
     कृषि विकास को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने प्रदेश को 181.99 करोड़ रुपये की राशि जारी की है। इसमें राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत 91.20 करोड़ और कृषि उन्नति योजना के तहत 90.79 करोड़ रुपये शामिल हैं।

    कृषि मंत्रियों का सम्मेलन और केंद्रीय मंत्री से मुलाकात
    नई दिल्ली में 28 और 29 सितंबर को रबी अभियान 2026 के तहत देशभर के कृषि मंत्रियों का सम्मेलन हुआ। इसी दौरान कृषि मंत्री राम विचार नेताम ने केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात की। केंद्रीय मंत्री ने उन्हें दोनों योजनाओं के तहत दूसरी किस्त की राशि जारी किए जाने की जानकारी दी।

    रबी फसल और अभियानों पर विशेष ध्यान 
    राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन के दौरान रबी सीजन की तैयारियों और केंद्र सरकार की कृषि योजनाओं को छत्तीसगढ़ में प्रभावी ढंग से लागू करने को लेकर विस्तृत मंथन किया गया। बैठक में किसानों तक सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ पहुंचाने और कुल कृषि उत्पादन में वृद्धि दर्ज करने पर विशेष जोर दिया गया। 

    182 करोड़ रुपये के इस नए आवंटन से प्रदेश में चल रहे विकसित संकल्प अभियान और खेत बचाओ अभियान को मजबूती मिलेगी। सरकार का प्राथमिक उद्देश्य कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ किसानों तक योजनाओं का पारदर्शी लाभ पहुंचाना है। 

    दलहन और तिलहन का रकबा बढ़ाने की योजना
    सम्मेलन में छत्तीसगढ़ के भीतर दलहन और तिलहन फसलों का क्षेत्रफल बढ़ाने की विशेष रणनीति पर गहन विचार-विमर्श हुआ। इसके साथ ही राज्य में कृषि उत्पादन बढ़ाने और किसानों को बेहतर कृषि व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। स्वीकृत की गई राशि मिलने से प्रदेश की विभिन्न कृषि योजनाओं तथा अभियानों की रफ्तार बढ़ेगी। इससे रबी सीजन के दौरान किसानों को सहायता मिलेगी और खेती से जुड़े अभियानों को जमीनी स्तर पर गति प्राप्त होगी।

    किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को मजबूत करने पर जोर
    केंद्रीय मंत्री चौहान ने एक पत्र देते हुए कहा कि केंद्र सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए राज्यों के साथ मिलकर काम कर रही है। दोनों योजनाओं के तहत मिली राशि से प्रदेश में कृषि से जुड़े कामों को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

    कृषि विकास और योजनाओं के अधिकतम लाभ के लिए राशि का उपयोग
    कृषि मंत्री राम विचार नेताम ने राशि जारी करने के लिए केंद्र सरकार का आभार जताया। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य के मिलकर काम करने से प्रदेश के कृषि क्षेत्र को नई गति मिल रही है। राशि का उपयोग कृषि विकास से जुड़े कामों को आगे बढ़ाने और किसानों को योजनाओं का अधिकतम लाभ दिलाने में किया जाएगा।

     

  • हिंदू धर्म में 33 करोड़ नहीं, कितने देवता? वेद-उपनिषदों में क्या है उल्लेख

    हिंदू धर्म में 33 करोड़ नहीं, कितने देवता? वेद-उपनिषदों में क्या है उल्लेख

    हिंदू धर्म को लेकर आपने भी अक्सर एक बात सुनी होगी कि हिंदू धर्म में 33 करोड़ देवी-देवता हैं. यह बात इतनी बार कही और सुनी गई है कि बहुत से लोगों के लिए यह एक स्थापित तथ्य जैसी बन गई है. लेकिन क्या सच में वेदों और उपनिषदों में 33 करोड़ देवी-देवताओं का उल्लेख मिलता है?

    अगर हिंदू धर्म के सबसे पुराने ग्रंथों की तरफ लौटकर इस सवाल का जवाब तलाशें, तो तस्वीर थोड़ी अलग दिखाई देती है. यहां बात सिर्फ 33 करोड़ या 33 कोटि की नहीं है, बल्कि यह समझना भी जरूरी है कि ‘देवता’ शब्द का वैदिक अर्थ क्या था, 33 देवताओं की गणना कैसे हुई और ब्रह्मा, विष्णु और महेश का इस पूरी व्यवस्था में स्थान क्या है.

    क्या है 33 कोटि का मतलब?
    इस पूरे विवाद की जड़ एक संस्कृत शब्द कोटि है. आज कोटि का इस्तेमाल अक्सर करोड़ के अर्थ में होता है. लेकिन संस्कृत में इस शब्द के एक से अधिक अर्थ मिलते हैं. संदर्भ के अनुसार इसका अर्थ श्रेणी, वर्ग, प्रकार या उत्कृष्ट व श्रेष्ठ भी हो सकता है. इसलिए 33 कोटि को हर जगह सीधे 33 करोड़ पढ़ना उचित नहीं है. भारतीय परंपरा और वैदिक व्याख्याओं में 33 देवताओं की अवधारणा का उल्लेख मिलता है.

    यानी 33 कोटि देवता को 33 करोड़ अलग-अलग भगवान मान लेना शास्त्रीय संदर्भ को बहुत सरल बना देना होगा.

    वेदों में 33 देवताओं का क्या उल्लेख है?
    वैदिक साहित्य में 33 देवताओं की संख्या का उल्लेख मिलता है. अलग-अलग वैदिक ग्रंथों में इनकी सूची या वर्गीकरण में थोड़ा अंतर दिखाई देता है, लेकिन मुख्य रूप से 8 वसु, 11 रुद्र और 12 आदित्य का समूह 31 का होता है.

    बृहदारण्यक उपनिषद के एक प्रसिद्ध संवाद में ऋषि याज्ञवल्क्य से देवताओं की संख्या पूछी जाती है. वे पहले 33 बताते हैं. आगे पूछे जाने पर वे संख्या को 6, फिर 3, फिर 2, फिर डेढ़ और अंत में 1 तक ले जाते हैं. इसी संवाद में 33 देवताओं को 8 वसु, 11 रुद्र, 12 आदित्य, इंद्र और प्रजापति के रूप में समझाया गया है. यानी यहां 33 करोड़ देवताओं की सूची नहीं, बल्कि देवताओं की एक विशिष्ट वैदिक गणना सामने आती है.

    कौन हैं 8 वसु?
    बृहदारण्यक उपनिषद में वसुओं को उन शक्तियों से जोड़ा गया है जिन पर यह संसार टिका हुआ है. वहां अग्नि, पृथ्वी, वायु, अंतरिक्ष, सूर्य, द्युलोक, चंद्रमा और नक्षत्रों को वसु कहा गया है. वसु शब्द का संबंध उस चीज से समझा जाता है जो संसार के लिए आधार या निवास का कारण बने. इसलिए वसुओं को केवल किसी मानव जैसी आकृति वाले देवताओं के रूप में देखने के बजाय प्रकृति और संसार की मूल शक्तियों से जुड़ी वैदिक अवधारणा के रूप में भी समझा जाता है.

    11 रुद्र कौन हैं?
    रुद्रों को लेकर भी लोकप्रिय धारणा और वैदिक व्याख्या में अंतर दिखाई देता है. आज रुद्र नाम सुनते ही भगवान शिव की याद आती है. वैदिक परंपरा में रुद्र की अवधारणा व्यापक है. बृहदारण्यक उपनिषद में 11 रुद्रों की व्याख्या मनुष्य के दस प्राणों और आत्मा के संदर्भ में की गई है. जब ये शरीर से चले जाते हैं तो मनुष्य के प्रियजन शोक करते हैं, इसलिए उन्हें रुद्र कहा गया.

    बाद की हिंदू परंपराओं में रुद्र का संबंध भगवान शिव के साथ और अधिक गहराई से जुड़ गया. इसलिए वैदिक रुद्र और बाद की शिव-परंपरा के बीच ऐतिहासिक विकास को समझना जरूरी है.

    12 आदित्य किसे कहा गया है?
    12 आदित्य का संबंध वैदिक साहित्य में सूर्य और समय की अवधारणाओं से भी जोड़ा गया है. बृहदारण्यक उपनिषद में 12 आदित्यों को वर्ष के 12 महीनों के रूप में समझाया गया है, जो संसार को अपने साथ आगे ले जाते हैं. बाद के ग्रंथों में 12 आदित्यों के नामों की सूचियां भी मिलती हैं और उनमें अलग-अलग परंपराओं के अनुसार कुछ अंतर हो सकता है. इसलिए हर ग्रंथ की सूची को एक जैसा मानना सही नहीं होगा.

    फिर 33 की संख्या पूरी कैसे होती है?
    यही हिस्सा सबसे दिलचस्प है. 8 वसु + 11 रुद्र + 12 आदित्य = 31.

    इसके बाद बृहदारण्यक उपनिषद की गणना में इंद्र और प्रजापति को जोड़कर संख्या 33 होती है. वहीं दूसरे वैदिक ग्रंथों में 33 की संरचना में कुछ अंतर मिलता है. उदाहरण के लिए, शतपथ ब्राह्मण की एक व्याख्या में 8 वसु, 11 रुद्र, 12 आदित्य और द्यौस-पृथ्वी का उल्लेख मिलता है, जबकि एक अन्य वैदिक पाठ में इंद्र और प्रजापति को शामिल किया गया है. इसलिए, 33 देवताओं की बात तो स्पष्ट है, लेकिन उनकी अंतिम सूची हर वैदिक पाठ में बिल्कुल एक जैसी नहीं है.

    फिर ब्रह्मा, विष्णु और महेश कहां आते हैं?
    यह सवाल भी बेहद स्वाभाविक है. हिंदू धर्म की बाद की प्रमुख परंपराओं में ब्रह्मा, विष्णु और शिव को त्रिमूर्ति के रूप में देखा जाता है. इन्हें क्रमशः सृष्टि, पालन और संहार या परिवर्तन से जुड़ी भूमिकाओं के संदर्भ में समझाया जाता है.

    लेकिन यह कहना कि हर वैदिक ग्रंथ में त्रिमूर्ति की यही अवधारणा उसी रूप में मौजूद थी, सही नहीं होगा. ब्रह्मा, विष्णु और शिव की लोकप्रिय त्रिमूर्ति अवधारणा हिंदू धार्मिक विचार के लंबे विकास के दौरान अधिक स्पष्ट रूप से सामने आती है. इसलिए, इन्हें 33 देवताओं की किसी एक सूची में जबरन फिट करने के बजाय वैदिक देवताओं और बाद की पौराणिक परंपराओं के विकास को अलग-अलग समझना ज्यादा सही है.

    क्या हिंदू धर्म में भगवान एक हैं या अनेक?
    यहीं से हिंदू दर्शन का एक महत्वपूर्ण पहलू सामने आता है. उपनिषदों में एक ओर अलग-अलग देवताओं और शक्तियों की चर्चा मिलती है, तो दूसरी ओर परम सत्य की एकता पर भी जोर दिया जाता है. बृहदारण्यक उपनिषद के उसी संवाद में याज्ञवल्क्य से देवताओं की संख्या पूछते-पूछते अंत में संख्या एक तक पहुंचती है. ऋग्वेद का प्रसिद्ध वाक्य ‘एकं सद् विप्रा बहुधा वदन्ति’ भी इसी विचार से जोड़ा जाता है कि सत्य एक है, लेकिन ज्ञानी उसे अलग-अलग नामों से संबोधित करते हैं.

    इसका अर्थ यह नहीं कि हिंदू धर्म की हर परंपरा बिल्कुल एक ही दार्शनिक व्याख्या स्वीकार करती है. हिंदू दर्शन में एकेश्वरवादी, बहुरूपी और विभिन्न दार्शनिक दृष्टिकोणों की लंबी परंपरा रही

  • रायपुर में गुटखा कारोबारी के गोदाम पर DGGI की रेड, 50 से ज्यादा बोरे मिले

    रायपुर में गुटखा कारोबारी के गोदाम पर DGGI की रेड, 50 से ज्यादा बोरे मिले

     रायपुर
     राजधानी रायपुर में गुटखा कारोबार से जुड़े एक ठिकाने पर डायरेक्टरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस (DGGI) की टीम ने मंगलवार को छापेमारी की। महाराष्ट्र से मिले इनपुट के आधार पर अधिकारियों की टीम तीन गाड़ियों में शदाणी दरबार मार्केट स्थित एक गोदाम पर पहुंची और वहां दस्तावेजों तथा गुटखा स्टॉक की जांच शुरू की। जानकारी के मुताबिक DGGI को सूचना मिली थी कि गोदाम में बड़ी मात्रा में सितार ब्रांड का गुटखा रखा हुआ है।

    टीम ने मौके पर पहुंचकर तलाशी ली तो 50 से अधिक बोरे गुटखा मिलने की बात सामने आई। अधिकारियों ने मौके पर मिले स्टॉक को जांच के दायरे में लिया है और यह पता लगाया जा रहा है कि गोदाम में रखा माल किस कारोबारी का है। कार्रवाई के दौरान गोदाम मालिक और वहां से जुड़े कुछ अन्य लोगों को भी मौके पर बुलाया गया। अधिकारियों ने उनसे स्टॉक, खरीद-बिक्री और परिवहन से संबंधित जानकारी मांगी। टीम ने मौके पर उपलब्ध दस्तावेजों की जांच शुरू की है। पूरी कार्रवाई की वीडियो रिकॉर्डिंग भी कराई गई। सूत्रों के अनुसार यह कार्रवाई महाराष्ट्र से मिले इनपुट के बाद की गई। DGGI अधिकारियों को गुटखा की आपूर्ति और स्टॉक से जुड़े कुछ अहम इनपुट मिले थे, जिसके आधार पर रायपुर स्थित गोदाम को चिन्हित किया गया। इसके बाद टीम ने अचानक दबिश दी। कार्रवाई के दौरान बरामद गुटखा किस नेटवर्क से जुड़ा है, इसकी भी जांच की जा रही है। सूत्रों का दावा है कि गोदाम से मिला माल एक बड़े गुटखा कारोबारी से जुड़ा हो सकता है। 

    हालांकि इस संबंध में DGGI की ओर से अभी तक आधिकारिक तौर पर नाम और मालिकाना संबंध की पुष्टि नहीं की गई है। बताया जा रहा है कि जांच एजेंसी अब सप्लाई चेन, स्टॉक रजिस्टर, बिलिंग और टैक्स भुगतान से जुड़े दस्तावेजों का मिलान कर रही है। अधिकारियों का फोकस इस बात पर है कि माल वैध बिलिंग के साथ गोदाम तक पहुंचा था या नहीं और संबंधित कारोबार में GST से जुड़े नियमों का पालन किया गया है या नहीं। इस कार्रवाई को करीब नौ दिन पहले दुर्ग जिले में हुई एक अन्य रेड से भी जोड़कर देखा जा रहा है। कुम्हारी के स्टेशन चौक क्षेत्र में सेंट्रल GST इंटेलिजेंस की टीम ने एक फैक्ट्री में दबिश दी थी। वहां सितार ब्रांड का गुटखा बनाए जाने की जानकारी सामने आई थी। कार्रवाई के दौरान दो मशीनें और करीब 30 बोरे गुटखा जब्त किए जाने की बात कही गई थी। अब रायपुर में 50 से अधिक बोरे मिलने के बाद एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुट गई हैं। जांच में यह भी देखा जा रहा है 

    कि रायपुर और दुर्ग में मिले स्टॉक के बीच कोई सीधा कारोबारी संबंध है या नहीं। फिलहाल DGGI की टीम दस्तावेजों और बरामद माल की जांच कर रही है। कार्रवाई पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि टैक्स चोरी या अवैध कारोबार से जुड़ा कोई मामला बनता है या नहीं और आगे किसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

    3 गाड़ियों में पहुंची थी टीम
    बताया जा रहा है कि महाराष्ट्र से मिले इनपुट के बाद DGGI के अधिकारी रायपुर पहुंचे। इसके बाद 3 गाड़ियों में टीम कारोबारी के ठिकाने पर पहुंची और जांच शुरू की। मौके पर गोदाम मालिक और कुछ लोगों को भी बुलाया गया और पूछताछ की गई। पूरी कार्रवाई की DGGI की टीम ने वीडियो रिकार्डिंग भी की है।

    गुटखा किंग बंटी से जुड़ रहे तार
    DGGI सूत्रों के अनुसार जिस गोदाम में मंगलवार की दोपहर को दबिश देकर गुटखा जब्त किया गया। वो गुटखा कारोबारी बंटी का बताया जा रहा है। कारोबारी बंटी का दुर्ग में पाटर्नर है, जहां पहले भी कार्रवाई हो चुकी है।

    कारोबारी बंटी महाराष्ट्र से ऑपरेट कर रहा है। महाराष्ट्र में कल्याण के पास फैक्ट्री डाली है। वहीं से गुटखा बनवाकर छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, मुंबई और उत्तर प्रदेश के कई राज्यों में सप्लाई किया जा रहा है।

    9 दिन पहले सेंट्रल GST ने दुर्ग में मारा था छापा
    9 दिन पहले दुर्ग जिले में सेंट्रल GST इंटेलिजेंस की टीम ने छापा मारा था। कुम्हारी के स्टेशन चौक इलाके में एक फैक्ट्री के अंदर सितार कंपनी का गुटखा बनाया जा रहा था। इस दौरान गुटखा बनाने में इस्तेमाल होने वाली 2 मशीनें और करीब 30 बोरा गुटखा जब्त किया गया था। इसके बाद रायपुर में कार्रवाई हुई है।

  • OMG! राखी सावंत ने डोनाल्ड ट्रंप को बताया अपना ‘पापा’, बोलीं- मुझे US की नागरिकता दिलाएं

    OMG! राखी सावंत ने डोनाल्ड ट्रंप को बताया अपना ‘पापा’, बोलीं- मुझे US की नागरिकता दिलाएं

    OMG…ये क्या बोल गईं राखी सावंत? वैसे राखी हैं, तो कुछ भी कह सकती हैं. आखिर राखी अपने बेबाक अंदाज के लिए ही जानी जाती हैं. वो बिंदास होकर बिना डरे अपने दिल की बातें शेयर करती हैं. राखी ने अब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर कुछ ऐसा कह दिया है, जिसके बाद आप भी अपना माथा पकड़ लेंगे.

    चर्चा में राखी का बयान
    राखी सावंत ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप उनके शुगर डैडी हैं. राखी का यह भी कहना है कि वो डोनाल्ड ट्रंप को अपना पिता मानती हैं. वो चाहती हैं कि डोनाल्ड ट्रंप उन्हें यूएस की नागरिकता दे दें.

    फरीदून शहरयार संग बातचीत में राखी ने डोनाल्ड ट्रंप को लेकर कई दावे किए. हालांकि, राखी की बातों को सीरियस लेने की गलती नहीं करना…क्योंकि राखी ने ये सब मस्ती मजाक में कहा है.

    दरअसल, इंटरव्यू में राखी से पूछा गया कि उनका डोनाल्ड ट्रंप से क्या रिश्ता है. वो इस बात का खुलासा करें, क्योंकि राखी अक्सर डोनाल्ड ट्रंप को लेकर बयान देती रहती हैं. इस सवाल पर राखी बिना झिझके हुए बोलीं- डोनाल्ड ट्रंप मेरे पापा हैं. वो मेरे शुगर डैडी हैं.

    मां की आखिरी इच्छा
    राखी आगे बोलीं- जब मेरी मां का इंतकाल (निधन) हुआ था, उससे पहले मेरी मां ने मुझसे कहा था कि राखी तब तक तिजोरी मत खोलना जब तक मेरा इंतकाल न हो जाए. मां के निधन के बाद जब मैंने तिजोरी खोली तो उसमें मेरी मां के कई सारे जेवर थे. मां के जेवर मैंने अपने भाई-बहन को दे दिए.

    राखी आगे मजाकिया अंदाज में बोलीं- मेरे लिए तिजोरी में सिर्फ एक चिट्ठी थी. उसमें लिखा था- तुम्हारे पापा सावंत नहीं, बल्कि डोनाल्ड ट्रंप हैं. मैं चाहती हूं कि डोनाल्ड ट्रंप पापा मुझे स्वीकार कर लें और वहां की नागरिकता मुझे दे दें.

    फैंस ने उड़ाई राखी की खिल्ली
    राखी के इन दावों पर फैंस के भी मजेदार रिएक्शन देखने को मिल रहे हैं. एक यूजर ने लिखा- झूठ इतनी सफाई से बोलो कि सच बोलने वाला भी घबरा जाए. दूसरे यूजर ने लिखा- ये बात सिर्फ राखी ही बोल सकती हैं. वहीं, कई लोग लाफिंग इमोजी के साथ अपना रिएक्शन दे रहे हैं.

  • जेड प्लांट को भूलकर भी इन जगहों पर न रखें, जानें सही दिशा और वास्तु नियम

    जेड प्लांट को भूलकर भी इन जगहों पर न रखें, जानें सही दिशा और वास्तु नियम

    आज के समय में घरों को हरा-भरा रखने और पॉजिटिविटी बढ़ाने के लिए इंडोर प्लांट्स (Indoor Plants) का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है. इनमें से कुछ पौधे सिर्फ सुंदरता ही नहीं बढ़ाते, बल्कि आपकी किस्मत बदलने की ताकत भी रखते हैं. वास्तु शास्त्र और फेंगशुई में ऐसे ही एक चमत्कारी पौधे का विशेष महत्व बताया गया है, जिसे जेड प्लांट (Jade Plant) कहा जाता है.   

    इसे मनी ट्री, फ्रेंडशिप ट्री या गुड लक प्लांट के नाम से भी जाना जाता है. इसकी चमकदार, रसीली और सिक्के के आकार जैसी गोल पत्तियां धन और समृद्धि का प्रतीक मानी जाती हैं. आइए जानते हैं कि घर में जेड प्लांट लगाने के क्या फायदे हैं और इसे किस दिशा में रखने से बरकत होती है. धन और तरक्की के लिए जेड प्लांट रखने की सही दिशा  वास्तु शास्त्र के अनुसार, किसी भी पौधे का पूर्ण लाभ तभी मिलता है जब उसे सही दिशा और उचित स्थान पर रखा जाए:  

    दक्षिण-पूर्व दिशा (South-East): यह दिशा धन के देवता और शुक्र ग्रह के अधीन मानी जाती है. जेड प्लांट को दक्षिण-पूर्व दिशा या अपने लिविंग रूम के आग्नेय कोण में रखना सबसे उत्तम माना गया है. यह आर्थिक स्थिति को मजबूत करता है.  नए इनकम सोर्स बनाता है.   

    मुख्य द्वार पर (Main Entrance): घर के मुख्य द्वार पर (विशेषकर दाहिनी ओर) जेड प्लांट रखने से सकारात्मक ऊर्जा और सौभाग्य का स्वागत होता है. यह घर में आने वाली नकारात्मक ऊर्जा को रोकता है.  

    ऑफिस या वर्क डेस्क: अगर आपको बिजनेस में घाटा हो रहा है या नौकरी में प्रमोशन रुक गया है, तो ऑफिस की डेस्क या कैश काउंटर के दक्षिण-पूर्व कोने में छोटा जेड प्लांट रखें. इससे फोकस बढ़ता है.  

    पश्चिम दिशा (West Direction): यदि आप बच्चों की रचनात्मकता और उनके करियर में तरक्की देखना चाहते हैं, तो इस पौधे को घर की पश्चिम दिशा या स्टडी टेबल के पास रख सकते हैं.

    इन जगहों पर भूलकर भी न रखें जेड प्लांट  
    वास्तु नियमों के मुताबिक कुछ ऐसी जगहें हैं जहां जेड प्लांट रखने से इसका विपरीत प्रभाव पड़ सकता है:

    बेडरूम या बाथरूम: इसे कभी भी बेडरूम या बाथरूम में न रखें. बाथरूम की नकारात्मक ऊर्जा इसके सकारात्मक प्रभावों को नष्ट कर देती है.  

    अंधेरे कोने: जेड प्लांट को घर के ऐसे कोने में बिल्कुल न रखें जहां बिल्कुल धूप या रोशनी न आती हो.   

    वास्तु के अनुसार सूखा हुआ या मुरझाया हुआ पौधा घर में कंगाली और नकारात्मकता को आकर्षित करता है. अगर पौधे की पत्तियां पीली पड़ रही हैं या सूख रही हैं, तो उन्हें तुरंत काटकर हटा दें.  

    पानी की मात्रा: जेड प्लांट एक सकुलेन्ट (Succulent) पौधा है, यानी इसकी पत्तियों में पानी स्टोर रहता है. इसे बहुत ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती. गमले में तभी पानी डालें जब ऊपरी मिट्टी सूखी नजर आए.  

    सही धूप: इसे स्वस्थ और हरा-भरा रखने के लिए दिन में कम से कम 3 से 4 घंटे की हल्की धूप या ब्राइट इनडायरेक्ट लाइट मिलना बहुत जरूरी है

     

  • Google ने लॉन्च किया Fitbit Air, बिना स्क्रीन वाला फिटनेस बैंड; कीमत ₹13,999

    Google ने लॉन्च किया Fitbit Air, बिना स्क्रीन वाला फिटनेस बैंड; कीमत ₹13,999

    Google ने भारत में अपना Fitbit Air फिटनेस बैंड लॉन्च कर दिया है. WHOOP के बाद से मार्केट में स्क्रीनलेस फिटनेस बैंड का ट्रेंड आया और इस ट्रेंड में अब गूगल भी आ चुका है. इसे अमेरिका में कुछ महीने पहले ही लॉन्च किया गया था, लेकिन भारत में अब लॉन्च हुआ है.

    भारत में 2 अक्टूबर से बिक्री के लिए उपलब्ध होगा. इसकी सबसे खास बात यह है कि इसमें कोई स्क्रीन नहीं है. यानी यह आपकी सेहत का डेटा रिकॉर्ड करेगा, लेकिन कलाई पर मैसेज, कॉल या दूसरे नोटिफिकेशन दिखाकर आपका ध्यान नहीं भटकाएगा. इसकी कीमत 13,999 रुपये रखी गई है.

    Google के मुताबिक Fitbit Air उसका अब तक का सबसे छोटा और हल्का Fitbit ट्रैकर है. इसे 24 घंटे पहनने के हिसाब से बनाया गया है. कंपनी का फोकस यहां स्मार्टवॉच बनाने पर नहीं, बल्कि ऐसा छोटा ट्रैकर देने पर है जो चुपचाप आपकी ऐक्टिविटी और सेहत से जुड़े आंकड़े रिकॉर्ड करता रहे. ये जानकारी फोन पर Google Health ऐप में देखी जा सकती है.

    स्क्रीन नहीं है, फिर यह करेगा क्या?
    Fitbit Air को पहली नजर में देखकर सवाल उठ सकता है कि जब इसमें स्क्रीन ही नहीं है तो इसका फायदा क्या है. इसका जवाब इसके सेंसर और Google Health ऐप में छिपा है.

    यह ट्रैकर लगातार हार्ट रेट रिकॉर्ड कर सकता है. इसके अलावा आराम की स्थिति में हार्ट रेट, हार्ट रेट में बदलाव, नींद के अलग-अलग चरण, नींद की ड्यूरेशन और ब्लड ऑक्सीजन यानी SpO2 जैसी जानकारी भी रिकॉर्ड की जाती है. इसमें इरेगुलर हार्ट रिदम यानी Afib से जुड़े नोटिफिकेशन का फीचर भी दी गई है.

    मेडिकल डिवाइस नहीं, सिर्फ फिटनेस ट्रैकर है
    यहां एक जरूरी बात समझना भी जरूरी है. गूगल खुद कहता है कि Fitbit Air मेडिकल डिवाइस नहीं है और इन फीचर्स का इस्तेमाल किसी बीमारी की जांच या इलाज के लिए नहीं किया जाना चाहिए. हार्ट रेट और नींद से जुड़े आंकड़ों की सटीकता कई चीजों पर निर्भर कर सकती है.

    असली खेल Google Health Coach का है
    Google इसे अपने Google Health Coach के साथ जोड़कर देख रहा है. यानी हार्डवेयर से ज्यादा सॉफ्टवेयर पर भी काम किया गया है. Health Coach आपके ट्रैक किए गए डेटा को देखकर रोजमर्रा की सेहत और फिटनेस से जुड़े सुझाव देने के लिए बनाया गया है. कंपनी के मुताबिक यह वर्कआउट लॉग करने, गाइडेड एक्सरसाइज फॉलो करने और आपकी ऐक्टिविटीज को समझने में मदद कर सकता है. यहां तक कि जिम में किसी मशीन या व्हाइटबोर्ड पर लिखी वर्कआउट रूटीन की फोटो लेकर उसे एक्टिविटी के तौर पर लॉग करने का विकल्प भी दिया गया है.

    सात दिन तक चलेगी बैटरी
    स्क्रीन हटाने का एक सीधा फायदा बैटरी में भी दिखाई देता है. गूगल के अनुसार Fitbit Air एक बार चार्ज करने पर सात दिन तक चल सकता है. अगर बैटरी खत्म हो रही है तो सिर्फ पांच मिनट की फास्ट चार्जिंग से करीब एक दिन की बैटरी मिल सकती है.

    यह उन लोगों के लिए खास तौर पर उपयोगी हो सकता है जो रात में भी ट्रैकर पहनते हैं. गूगल का कहना है कि इसका हल्का और छोटा डिजाइन रातभर पहनने के लिए बनाया गया है. कंपनी यह भी कहती है कि यूजर दिन में Pixel Watch जैसे दूसरे डिवाइस का इस्तेमाल करके रात में Fitbit Air पहन सकता है और नींद का डेटा लगातार रिकॉर्ड कर सकता है.

    कलाई पर स्क्रीन नहीं, लेकिन फोन में पूरा डेटा
    कलाई पर आपको डेटा देखने के लिए स्क्रीन नहीं मिलेगी. इसके बजाय फोन में Google Health ऐप खोलकर अपनी जानकारी देखनी होगी. इसका एक फायदा यह है कि कलाई पर बार-बार स्क्रीन देखने की जरूरत नहीं पड़ेगी. गूगल भी इसे ऐसा डिवाइस बता रहा है जो आपको लगातार नोटिफिकेशन से दूर रखता है. यानी अगर आप स्मार्टवॉच की वजह से हर मैसेज और अलर्ट तुरंत देखने लगते हैं, तो Fitbit Air उसका उल्टा अनुभव देता है.

    कीमत 13,999 रुपये, साथ में तीन महीने का प्रीमियम ट्रायल
    भारत में Google Fitbit Air की कीमत 13,999 रुपये है और इसकी बिक्री 2 अक्टूबर से शुरू होगी. यह Google Store के अलावा Flipkart, Croma, Reliance Digital और Vijay Sales जैसे रिटेल पार्टनर्स के जरिए उपलब्ध होगा.

    हर खरीद के साथ Google Health Premium का तीन महीने का ट्रायल मिलेगा. इससे Google Health Coach का पूरा अनुभव इस्तेमाल किया जा सकेगा.

    लॉन्च ऑफर के तहत चुनिंदा HDFC Bank और ICICI Bank कार्ड से भुगतान करने पर 1,000 रुपये का कैशबैक भी दिया जा रहा है. 6 महीने की नो-कॉस्ट EMI के साथ भी 1,000 रुपये कैशबैक का विकल्प है. इसके अलावा कंज्यूमर लोन पर 12 महीने तक की नो-कॉस्ट EMI उपलब्ध होगी.

    Whoop और दूसरे स्क्रीनलेस ट्रैकर से मुकाबला
    स्क्रीनलेस फिटनेस ट्रैकर कोई नई कैटेगरी नहीं है. Whoop और कुछ दूसरे ब्रांड पहले से ऐसे डिवाइस दे रहे हैं जिनका फोकस स्क्रीन और नोटिफिकेशन के बजाय स्वास्थ्य, फिटनेस और रिकवरी डेटा पर है. Fitbit Air इसी बढ़ती कैटेगरी में Google की एंट्री है.

    Google की खासियत यहां उसका बड़ा हेल्थ इकोसिस्टम है. Fitbit Air को Google Health ऐप और Google Health Coach के साथ जोड़कर कंपनी हार्डवेयर से ज्यादा डेटा और व्यक्तिगत सलाह पर जोर दे रही है. मई में Google ने बताया था कि उसका Google Health ऐप अलग-अलग हेल्थ डेटा को एक जगह लाने की दिशा में बनाया गया है.

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    बिलासपुर से गुजरने वाली 3 एक्सप्रेस ट्रेनें रद्द, 24 नवंबर से मेगा ब्लॉक; 2 का बदलेगा रूट

    बिलासपुर

    महाराष्ट्र से झारखंड और ओडिशा जाने वाले ट्रेन यात्रियों की परेशानी बढ़ने वाली है। दक्षिण पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर मंडल में ट्रैक बदलने का काम किया जाएगा। यह काम सीनी-राजखरसावां सेक्शन की अप और डाउन लाइन पर चलेगा।

    इसके लिए 24 नवंबर से 15 जनवरी तक मेगा ब्लॉक लिया जाएगा। इस काम का असर बिलासपुर से होकर चलने वाली ट्रेनों पर भी पड़ेगा। रेलवे ने इस दौरान 3 ट्रेनों को रद्द और 2 ट्रेनों को बदले रूट से चलाने का फैसला किया है।

    ब्लॉक का सबसे ज्यादा असर 18109/18110 टाटानगर-नेताजी सुभाष चंद्र बोस इतवारी एक्सप्रेस पर पड़ेगा। इस ट्रेन के दोनों दिशाओं में 17-17 फेरे रद्द रहेंगे। इसके अलावा नांदेड़-संतरागाछी एक्सप्रेस और पुणे-संतरागाछी हमसफर एक्सप्रेस के भी निर्धारित फेरे रद्द किए गए हैं।

    वहीं उत्कल एक्सप्रेस और साउथ बिहार एक्सप्रेस को कुछ निर्धारित तारीखों पर बदले रूट से चलाया जाएगा। इससे महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा के बीच ट्रेन से सफर करने वाले यात्रियों को अपनी यात्रा की तारीख और ट्रेन की जानकारी पहले से जांचनी होगी।

    14 अक्टूबर तक 18 एक्सप्रेस ट्रेनें रद्द
    इधर छत्तीसगढ़ से गुजरने वाली 18 एक्सप्रेस ट्रेनें 14 अक्टूबर 2026 तक पहले ही रद्द है। इसके अलावा उत्कल एक्सप्रेस अलग-अलग तारीखों पर बदले रूट से चलेगी, जबकि 13 अक्टूबर को गीतांजलि एक्सप्रेस 2 घंटे की देरी से रवाना होगी। दक्षिण पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर मंडल में काम होगा।

    रद्द होने वाली गाड़ियों में इतवारी-टाटानगर-इतवारी एक्सप्रेस, टाटानगर-बिलासपुर एक्सप्रेस, नांदेड़-सांतरागाछी एक्सप्रेस, हटिया-दुर्ग एक्सप्रेस, हावड़ा-CSMT दुरंतो एक्सप्रेस समेत 18 ट्रेनें शामिल हैं। इन एक्सप्रेस ट्रेनों के कैंसिल होने से झारखंड, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और बिहार जाने यात्रियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा।

  • ₹3 हजार की दवा ₹27 हजार में क्यों? MRP-रिटेल कीमत के अंतर पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

    ₹3 हजार की दवा ₹27 हजार में क्यों? MRP-रिटेल कीमत के अंतर पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

    नई दिल्ली

    दवाओं की बढ़ती और मनमानी कीमतों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है. जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने दवाओं की मैक्सिमम रिटेल प्राइस (MRP) और रिटेलर को मिलने वाली कीमत (PTR) के बीच भारी अंतर पर गंभीर सवाल उठाए हैं. सुनवाई के दौरान एक इंजेक्शन का उदाहरण दिया गया, जिसकी रिटेलर कीमत करीब 3,520 रुपये है, लेकिन उसकी MRP 22,437 रुपये तय है. इसी तरह करीब 3 हजार रुपये की कैंसर दवा की MRP 27 हजार रुपये बताई गई। 

    बेंच ने हैरानी जताते हुए पूछा कि आखिर इस भारी अंतर का पैसा किसकी जेब में जा रहा है? इसके साथ ही, कोर्ट ने प्राइवेट अस्पतालों में इन-हाउस केमिस्ट से ही दवा खरीदने की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए और ड्रग्स प्राइस कंट्रोल ऑर्डर (DPCO) के तहत मार्जिन की 16 फीसदी सीमा तय करने का सुझाव दिया। 

    पीठ के सामने उदाहरण रखा गया कि 22,437 रुपये MRP वाली एक इंजेक्शन की कीमत रिटेलर के लिए करीब 3,520 रुपये है। इसी तरह करीब 27,000 रुपये MRP वाली कैंसर की दवा का प्राइस-टू-रिटेलर लगभग 3,000 रुपये बताया गया। इस पर जस्टिस संदीप मेहता ने सवाल किया कि कीमतों के बीच इतना बड़ा अंतर आखिर किसकी जेब में जा रहा है।

    अस्पताल की फार्मेसी पर भी सवाल
    कोर्ट ने अस्पतालों की इन-हाउस फार्मेसी को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। पीठ ने कहा कि मरीजों को अक्सर अस्पताल की अपनी केमिस्ट से ही दवाएं खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ता है। यदि कोई मरीज बाहर से वही दवा कम कीमत पर खरीदकर लाता है तो उसकी गुणवत्ता पर सवाल उठाए जाने या अस्पताल की ओर से इलाज को लेकर दबाव बनाए जाने की स्थिति पैदा हो सकती है। जस्टिस मेहता ने कहा कि ऐसी स्थिति में मरीज आखिर क्या करे। सुनवाई के दौरान उन्होंने अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर भी तीखी टिप्पणी की।

    सबके लिए एक जैसे नियम क्यों नहीं
    जस्टिस मेहता ने आगे कहा कि सरकार को इस बात पर भी ध्यान देना चाहिए कि कई कॉर्पोरेट अस्पताल यह जरूरी कर देते हैं कि दवाइयां उन्हीं के केमिस्ट या किसी खास फ़ार्मेसी से खरीदी जाएं, और अगर मरीज़ उन्हें बाहर से खरीदता है, तो वे इलाज की गारंटी नहीं देते। 

    "अगर कोई मरीज सरकारी स्कीम के तहत इलाज करवा रहा है, तो उसका खर्च कौन उठाता है? टैक्स देने वाला. तो फिर सबके लिए एक जैसे नियम क्यों नहीं?"

    16 परसेंट मार्जिन क्यों नहीं
    उन्होंने कहा, "DPCO के मुताबिक मार्जिन 16 परसेंट होना चाहिए. हर दवा 'ज़रूरी चीज़ों के कानून' (Essential Commodities Act) के दायरे में आती है. हमें समझ नहीं आता कि उनसे कीमतें इस तरह तय करने के लिए क्यों कहा जाता है। 

    जस्टिस मेहता ने सॉलिसिटर जनरल से यह भी कहा कि अगर कोई ऐसा फ़ार्मासिस्ट मिल जाए जो बहुत दयालु हो और जरूरतमंद को 2,700 रुपये में दवा देने को तैयार हो, तो मरीज़ सोचने लगेगा कि दवा असली है या नकली। 

    पैसा कहां जाता है
    "सवाल यह है कि कीमत में 10 गुना बढ़ोतरी क्यों? इतना सारा पैसा कहां जाता है? इससे किसे फ़ायदा हो रहा है?"

    "आखिरकार नुकसान ईमानदार टैक्सपेयर का ही होता है. हम इस मामले की अच्छी तरह से जांच करेंगे. इसका असर समाज के एक बड़े हिस्से पर पड़ता है," बेंच ने कहा. उन्होंने आगे कहा कि पहले तो दवाओं की कीमत का मामला है और फिर मेडिकल प्रैक्टिशनर्स के नैतिक तौर-तरीकों का। 

    मेहता ने आगे कहा कि फार्मा कंपनियों को इससे कोई फायदा नहीं हो रहा है और ऐसा लगता है कि फायदा प्राइवेट अस्पतालों को हो रहा है। 

    जस्टिस मेहता ने कहा कि बिना किसी कॉम्बिनेशन वाली साधारण स्टेटिन की कीमत 40 रुपये है और एस्पिरिन के साथ कॉम्बिनेशन होने पर इसकी कीमत 70 रुपये हो जाती है। 

    "ऐसा कैसे हो रहा है? कॉर्पोरेट अस्पताल तो इंडस्ट्री हैं. यह कोई सेवा नहीं है. आम आदमी को यह सब क्यों भुगतना पड़े?" बेंच ने सॉलिसिटर जनरल से कहा। 

    सॉलिसिटर जनरल ने कहा, "मैं यह नहीं कह रहा कि याचिकाकर्ता गलत हैं, लेकिन कोई ऐसा तरीका निकालना होगा जिससे सभी पक्षों के हितों में संतुलन बना रहे. जैसा कि मैं समझता हूं, फार्मा कंपनियों को इससे कोई फायदा नहीं हो रहा है। 

    2 याचिकाओं पर सुनवाई
    बेंच ने मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर के लिए तय की और कहा कि वह इस मुद्दे पर केंद्र का जवाब सुनेगी। 

    सुप्रीम कोर्ट दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था. जिसमें एक याचिका किशनचंद जैन की थी. ये याचिका इस बात पर ज़ोर देती हैं कि जहां 'शेड्यूल्ड' दवाओं की कीमतें तय (सीलिंग) होती हैं, वहीं 'नॉन-शेड्यूल्ड' दवाओं (जो बाज़ार में संख्या और मूल्य के हिसाब से लगभग 80% या उससे ज़्यादा हैं) के मामले में निर्माताओं को MRP तय करने की ज़्यादा आज़ादी होती है, बस उन्हें सालाना 10% तक की बढ़ोतरी की सीमा का पालन करना होता है। 

    22 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने कैंसर की ज़रूरी दवाओं की ज़्यादा कीमतों पर हैरानी जताई और इसे मरीज़ों के साथ "दिन-दहाड़े डकैती" करार दिया था.  कोर्ट ने गौर किया कि एक दवा की MRP 27,000 रुपये थी, जबकि वह खुदरा विक्रेताओं को 2,700 रुपये में सप्लाई की जा रही थी। 

    कोर्ट ने सवाल किया कि मरीजों को इस तरह कैसे ठगा जा सकता है और कहा, "यह बहुत हैरानी की बात है कि जिन अधिकारियों को इस पर कार्रवाई करनी चाहिए, वे चुप हैं। 

    एक याचिका में अधिकारियों को निर्देश देने की मांग की गई थी कि वे फार्मा कंपनियों और खुदरा विक्रेताओं द्वारा ज़रूरी दवाओं की कथित अनैतिक रूप से ज़्यादा कीमतें वसूलने पर रोक लगाकर दवाओं को सस्ता बनाएं। 

    दूसरी याचिका में उन डॉक्टरों के ख़िलाफ़ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की गई है जो मरीज़ों को जेनेरिक दवाएं नहीं लिखते हैं।  

    हर दवा पर 16% मार्जिन का सुझाव
    पीठ ने यह भी सवाल उठाया कि आवश्यक और गैर-आवश्यक दवाओं के बीच अंतर क्यों रखा जाए और कई दवाओं को Drugs (Prices Control) Order (DPCO) के दायरे से बाहर क्यों रखा गया है। कोर्ट ने सुझाव दिया कि सभी दवाओं पर MRP के स्तर पर 16 प्रतिशत मार्जिन तय करने की व्यवस्था क्यों नहीं हो सकती।

    सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार संतुलित समाधान पर विचार करेगी और 16 प्रतिशत की समान सीमा का सुझाव उन्हें तार्किक प्रतीत होता है। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने मौजूदा नियामक व्यवस्था अदालत के सामने रखी।

    कोर्ट ने कहा कि सरकारी योजनाओं के जरिए भुगतान हो या मरीज खुद खर्च करे, अंततः बोझ आम जनता और करदाताओं पर पड़ता है। मामले की अगली सुनवाई अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में होगी। इससे पहले भी इसी मामले में कोर्ट दवाओं की कीमतों को लेकर स्थिति को “broad daylight dacoity” और मरीजों के खिलाफ “absolute rampage” जैसी कड़ी टिप्पणियों से संबोधित कर चुका है।

  • प्रदेश में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा का होगा निरंतर विस्तार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    प्रदेश में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा का होगा निरंतर विस्तार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    प्रदेश में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा का होगा निरंतर विस्तार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    यात्रियों के लिए जिलों में सुविधायुक्त बस स्टैंड और अन्य प्रबंध किए जाएं
    मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा की व्यवस्थाएं बेहतर बनाने के लिए कलेक्टर्स और पुलिस अधीक्षकों को निर्देश

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश के नागरिकों के हित में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा की शुरूआत की गई है। प्रदेश में वर्ष 2005 में राज्य परिवहन निगम बंद किया गया था। राष्ट्रवादी विचारक पं. दीनदयाल उपाध्याय की जयंती, 25 सितम्बर से प्रदेश में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के अंतर्गत 351 इंटरसिटी और इंट्रासिटी बसों के संचालन की शुरूआत हुई है, जिसका निरंतर विस्तार किया जाएगा। अगले पांच वर्ष में 14 हजार 981 बसों के संचालन का लक्ष्य है। इस सेवा में पूर्व से संचालित फिट बसों का उपयोग भी किया जा रहा है, अत: नागरिकों सहित किसी को भी भ्रमपूर्ण जानकारी पर विश्वास नहीं करना चाहिए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंत्रालय में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के अंर्तगत नागरिकों की सुविधा के लिए आवश्यक सुविधाओं के विकास के संबंध में जिलों के कलेक्टर्स और पुलिस अधीक्षक को वीडियो कांफ्रेंसिंग द्वारा निर्देशित कर रहे थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में सेवा संकल्प माह के अंतर्गत प्रारंभ इस सुविधा से स्थानीय प्रशासन द्वारा यात्रियों को व्यवस्थित बस संचालन का लाभ दिलवाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएं। संबंधित जिलों में प्रशासन के स्तर पर नागरिकों और बस आपरेटर्स को आवश्यक सहयोग प्रदान किया जाए। सेवा के प्रदेशव्यापी विस्तार के साथ सभी जिलों में प्रशासनिक अमला नागरिकों की सुविधा के लिए सजग भूमिका का निर्वहन करेगा। वर्तमान में जिन रूट्स पर बसों का संचालन किया जा रहा है वहां मैदानी अमले द्वारा सहयोगी रवैया अपनाया जाए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिन स्थानों पर बस डिपो या टर्मिनल बंद स्थिति में हो तो उन्हें स्वच्छता अभियान चलाकर और बैठक एवं अन्य सुविधाओं का विकास कर उपयोगी बनाया जाए। जहां स्टाप या बस स्टैंड खत्म हो चुके हैं वहां भूमि उपलब्ध करवाकर यह सुविधा विकसित की जाए। परमिट के अलावा जो बसें चल रही हैं उनके व्यवस्थित और अनुशासित संचालन को प्राथमिकता दी जाए। निजी बस ऑपरेटरों के फिटनेस, परमिट की शर्तें, ड्राइवर का बस संचालन और व्यवहार के लिए मजिस्ट्रेट एवं पुलिस अधिकारी से नियमित निरीक्षण की व्यवस्था की जाए। क्षेत्रीय कंपनियों के साथ शहरों में आवश्यक अधोसंरचना विकास के लिए स्थानीय प्रशासन सहयोग करे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बसों के बाधारहित संचालन के लिए थाना पुलिस और ट्रैफिक पुलिस का सहयोग दिलवाया जाए। इसके साथ ही जिला स्तरीय परिवहन सलाहकार समिति की नियमित बैठकें की जाएं। जिला कलेक्टर टीएल बैठक में क्षेत्रीय कंपनी के ईडी से भी प्रत्येक सप्ताह चर्चा करें।राज्य परिवहन उपक्रम की ओर से सभी जिला स्तरीय परिवहन सलाहकार समितियों के समक्ष रूट प्रस्तुतिकरण और सुझाव प्राप्त करने की काईवाई भी सुनिश्चित की जाए। आम जनता के हित में सभी एजेंसियों के बीच परस्पर आवश्यक संवाद रहे।

    परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा का अधिक से अधिक नागरिकों को लाभ दिलवाने के लिए निजी बस ऑपरेटरों को आवश्यक प्रोत्साहन दिया जा रहा है। यात्रियों से प्राप्त सुझावों पर भी प्रशासन की ओर से जरूरी प्रबंध किए जाएं।

    मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा मध्यप्रदेश शासन की महत्वाकांक्षी योजना है। परिवहन क्षेत्र में यात्रियों को बेहतर सुविधा मिले इसलिए बस ऑपरेटर्स से प्रशासन का नियमित संवाद हो। विभिन्न तरह की भ्रांतियां को समाप्त किया जाए। जो पूर्व से संचालित फिट बसें हैं, उनका संचालन किया जा रहा है। अनेक आधुनिक तकनीक भी अपनाई गई हैं, जिसमें यात्री एप के माध्यम से यात्रा के संबंध में बेहतर प्लान कर यात्रा कर सकता है।

    परिवहन सचिव मनीष सिंह ने प्रजेंटेशन में बताया कि मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तीन प्रमुख स्तंभ हैं- बस संचालन, इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम और इंफ्रास्ट्रक्चर। वर्तमान में प्रारंभ की गई बसों की संख्या निरंतर बढ़ाई जाएगी। यात्रियों को लाभान्वित करने के साथ निजी ऑपरेटर को उसके कार्य और व्यवसाय का जायज लाभ हो, इसका ध्यान रखा गया है। राज्य परिवहन उपक्रम के लिए भोपाल में कार्यालय की व्यवस्था की गई है। आने वाले तीन माह में भोपाल, इंदौर, उज्जैन और सागर में क्षेत्रीय सहायक कंपनियों के लिए शत-प्रतिशत कार्यालय भवन उपलब्ध होंगे। इसके साथ ही जबलपुर, रीवा और ग्वालियर में भी क्षेत्रीय सहायक कंपनियों के लिए कार्यालय भवन की व्यवस्था की जा रही है। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के लिए आवश्यक कुल 1190 में से 400 पदों के लिए नियुक्ति की कार्रवाई भी पूर्ण की जाएगी। विशेषज्ञ पद भी भरे जाएंगे। प्रदेश में गत 10 माह में यात्री संख्या और रूट सर्वे के माध्यम से जो आकलन किया गया और आवश्यक बसों की संख्या का अनुमान लगाया गया उसके अनुसार प्रदेश में सात क्षेत्र में 3636 मार्गो पर 13006 बसों की व्यवस्था की जाना है। चरणबद्ध विस्तार भी किया जाएगा। वर्ष 2031 तक प्रदेश में 14981 बसों के संचालन में सफलता मिलेगी। राज्य स्तरीय आईटीएमएस प्लेटफार्म एक विशेष सुविधा है। चलो मोबिलिटी के अंतर्गत आईटीएमएस का अंतरिम रूप से प्रयोग करते हुए आवश्यक माड्यूल निर्धारित किए गए हैं। परिवहन सचिव मनीष सिंह ने सुगम बस संचालन के लिए अधोसंरचना विकास के लिए महत्वपूर्ण बिंदुओं की भी जानकारी दी।

     

  • दशहरा 2026 की तारीख हुई साफ, 20 अक्टूबर को विजयादशमी; जानें शस्त्र पूजन का मुहूर्त

    दशहरा 2026 की तारीख हुई साफ, 20 अक्टूबर को विजयादशमी; जानें शस्त्र पूजन का मुहूर्त

    हिंदू धर्म में असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय के प्रतीक के रूप में मनाए जाने वाले पर्व दशहरा का विशेष स्थान है. दशहरा को विजयदशमी भी कहा जाता है. आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व बुराई के अंत और नई शुरुआत का संदेश देता है. इस दिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने लंकापति रावण का वध कर त्रैलोक्य को उसके अत्याचारों से मुक्त किया था. इसके साथ ही, यह दिन मां दुर्गा द्वारा महिषासुर के वध की विजय के रूप में भी मनाया किया जाता है.

    साल 2026 में दशहरा की तारीख को लेकर लोगों के मन में जो संशय है. तो आइए जानते हैं इस साल विजयादशमी की सही तिथि, शस्त्र पूजन के मुहूर्त और रावण दहन का समय क्या रहने वाला है.

    दशहरा 2026 तिथि (Dussehra 2026 Tithi)
    द्रिक पंचांग के अनुसार, आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि 20 अक्टूबर 2026 (मंगलवार) को पड़ रही है. इसी दिन पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ विजयादशमी का पर्व मनाया जाएगा.

    पंचांग के मुताबिक, दशमी तिथि 20 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 51 मिनट पर शुरू होगी और तिथि का समापन 21 अक्टूबर को दोपहर 2 बजकर 13 मिनट पर होगा.

    विजय मुहूर्त और शस्त्र पूजन का समय
    दशहरे के दिन किसी भी नए कार्य की शुरुआत, यात्रा या महत्वपूर्ण निर्णय लेने के लिए 'विजय मुहूर्त' को अत्यंत शुभ माना गया है. इसके अलावा इस दिन शस्त्रों और उपकरणों की भी पूजा की जाती है.

    विजय मुहूर्त 20 अक्टूबर 2026 को दोपहर 01 बजकर 59 मिनट से लेकर दोपहर 02 बजकर 45 मिनट तक रहेगा.

    इस समयावधि में माता अपराजिता और शमी के पेड़ की पूजा करना बेहद फलदायी माना जाता है.

    रावण दहन का समय (Ravan Dahan 2026 Timing)
    दशहरे के दिन शाम के समय बुराई के प्रतीक रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन किया जाता है. रावण दहन का समय 20 अक्टूबर 2026 को सूर्यास्त के बाद किया जाएगा. आमतौर पर स्थानीय रामलीला कमेटियों द्वारा प्रदोष काल और शुभ चौघड़िया देखकर शाम के समय रावण दहन किया जाता है.

    दशहरा का महत्व
    विजयादशमी को अबूझ मुहूर्त' माना जाता है, यानी इस दिन बिना किसी पंचांगीय विचार के कोई भी नया व्यापार, गृह प्रवेश या वाहन खरीद जैसे मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं. यह पर्व हमें सिखाता है कि अहंकार, बुराई और अधर्म का नाश निश्चित है, भले ही वह कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो. जीत हमेशा सत्य, सदाचार और धर्म की ही होती है.

    दशहरा पर कैसे करें पूजन?
    दशहरे के दिन घर के ईशान कोण में साफ चौकी पर गाय के गोबर से अष्टदल बनाकर माता अपराजिता और मां जया-विजया की स्थापना करें. फिर उन्हें रोली, अक्षत, फूल और भोग अर्पित कर विजय प्राप्ति के लिए प्रार्थना करें. इसके बाद शाम के समय प्रदोष काल में शमी के पेड़ के पास जाकर जल अर्पित करें, घी का दीपक जलाएं और उसकी पूजा कर सुख-समृद्धि की कामना करें. साथ ही, अपने घर के शस्त्रों, औजारों या वाहनों को गंगाजल से पवित्र कर रोली-अक्षत से तिलक करें और कलावा बांधकर उनकी पूजा करें.