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  • PM मोदी से CM डॉ. यादव की आत्मीय भेंट, Global Investors Summit-2027 का दिया न्योता

    PM मोदी से CM डॉ. यादव की आत्मीय भेंट, Global Investors Summit-2027 का दिया न्योता

    प्रधानमंत्री मोदी से मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की आत्मीय भेंट

    ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2027 के लिए किया आमंत्रित

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरूवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से आत्मीय भेंट कर उनका मार्गदर्शन प्राप्त किया। प्रधानमंत्री मोदी को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश में जारी विकास कार्यों, जनकल्याणकारी पहलों, उपलब्धियों, निवेश और प्रदेश की प्रगति से जुड़े विभिन्न विषयों की जानकारी दी।

    इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वर्ष 2027 में मध्यप्रदेश में आयोजित होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के लिए प्रधानमंत्री मोदी को आमंत्रित किया। उन्होंने प्रदेश में निवेश के लिए तैयार किए जा रहे अनुकूल वातावरण, औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी भी दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में प्रारंभ की गई ‘मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा’ के संबंध में भी प्रधानमंत्री मोदी को अवगत कराया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 17 सितंबर से प्रदेश में संचालित ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत प्रदेशभर में आयोजित की जा रही विभिन्न गतिविधियों और कार्यक्रमों की जानकारी भी प्रधानमंत्री मोदी को दी। उन्होंने अभियान के माध्यम से जनभागीदारी, सेवा और जनकल्याण से जुड़े विभिन्न आयोजनों के बारे में अवगत कराया।

     

  • भोपाल में आदर्श गौ शाला स्थापित करने के कार्य को शीघ्र पूर्ण करें: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    भोपाल में आदर्श गौ शाला स्थापित करने के कार्य को शीघ्र पूर्ण करें: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    भोपाल में आदर्श गौ शाला स्थापित करने के कार्य को शीघ्र पूर्ण करें: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    विभागों की योजनाओं पर हुई चर्चा

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रालय में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विकास योजनाओं पर चर्चा की। इन विभागों में नगरीय विकास एवं आवास, खनिज, सूचना प्रौद्योगिकी विभाग और लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी शामिल हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को हुई बैठक में विभागों के अधिकारियों से योजनाओं की प्रगति और कार्यों की जानकारी प्राप्त की और जरूरी दिशा-निर्देश दिए। इस अवसर पर मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय) नीरज मंडलोई सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नगरीय विकास और आवास विभाग द्वारा प्रदेश के नगरों के साथ ही राजधानी भोपाल के विकास में नए आयाम जोड़े जाएं। ग्वालियर, इंदौर और उज्जैन में बड़ी आदर्श गौशालाओं के संचालन में सफलता मिली है। इसी तरह भोपाल में इस मॉडल पर आदर्श गौ-शाला स्थापित करने के कार्य को गति प्रदान करते हुए अच्छे परिणाम प्राप्त करने के प्रयास किए जाएं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंगरौली को आदर्श जिला बनाना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों और समाज के प्रतिष्ठित नागरिकों से भी चर्चा की जाए। नई टाउनशिप विकसित होने से आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि होगी और सभी वर्ग लाभान्वित होंगे। खनिज विभाग के अधिकारियों ने सिंगरौली जिले में माइनिंग सेक्टर की नई संभावनाओं और भविष्य में जिले के समग्र विकास की रूपरेखा प्रस्तुत की। बैठक में बताया गया कि सिंगरौली में अधोसंरचना विकास के कार्य हो रहे हैं। सिंगरौली विकास प्राधिकरण की गतिविधियों का विस्तार किया जा रहा है।

    निजी क्षेत्र में आईटी पार्क स्थापना को प्रोत्साहित करें

    सूचना प्रौद्योगिकी विभाग से संबंधित चर्चा में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि निजी क्षेत्र में भी आईटी पार्क स्थापना को प्रोत्साहित किया जाए। जबलपुर के उद्यमी सेमीकंडक्टर क्षेत्र में कार्य के इच्छुक हैं। इस नाते उन्हें मार्गदर्शन और सहयोग प्रदान किया जाए। इसके अलावा टेक्नीकल यूनिवर्सिटी को एक महत्वपूर्ण कौशल विकास केंद्र की पहचान देने के प्रयास किए जाएं।

    बैठक में बताया गया कि मध्यप्रदेश जल जीवन मिशन के कार्यों में अग्रणी है। प्रदेश के 83 लाख से अधिक परिवारों को नल से जल मिल रहा है। गत दो वर्ष में इस कार्य में अच्छी सफलता मिली है। प्रदेश की 38 हजार 403 जल प्रदाय संरचनाओं को जियो टैग किया गया है।

     

  • ट्रांसमिशन कंपनी ने एक ही दिन में हासिल की दो महत्वपूर्ण उपलब्धियां

    ट्रांसमिशन कंपनी ने एक ही दिन में हासिल की दो महत्वपूर्ण उपलब्धियां

    ट्रांसमिशन कंपनी ने एक ही दिन में हासिल की दो महत्वपूर्ण उपलब्धियां

    जामगांव आर में 132/33 केवी उपकेंद्र ऊर्जीकृत, पाटन-अमलेश्वर 132 केवी सर्किट-1 का भी सफलतापूर्वक हुआ चार्जिंग एवं कमीशनिंग

    रायपुर, 
     छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी ने विद्युत पारेषण व्यवस्था को और सुदृढ़ करने की दिशा में 30 सितंबर को दो महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कीं। दुर्ग जिले के पाटन क्षेत्र में नवनिर्मित 132/33 केवी उपकेंद्र, जामगांव आर को सफलतापूर्वक ऊर्जीकृत एवं कमीशन किया गया। इसके बाद 220/132/33 केवी उपकेंद्र, पाटन में नवनिर्मित 132 केवी लाइन बे के माध्यम से 132 केवी पाटन-अमलेश्वर सर्किट-1 का भी सफलतापूर्वक चार्जिंग एवं कमीशनिंग किया गया।

    जामगांव आर स्थित नवनिर्मित 132/33 केवी उपकेंद्र को 30 सितंबर को प्रातः 11:58 बजे छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी के प्रबंध निदेशक राजेश कुमार शुक्ला ने ऊर्जीकृत कर कमीशन किया। इस अवसर पर कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी, अभियंता, कर्मचारी तथा परियोजना से जुड़े विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

    132 केवी पाटन-अमलेश्वर सर्किट-1 को उसी दिन दोपहर 2:08 बजे पाटन स्थित 220/132/33 केवी उपकेंद्र में नवनिर्मित 132 केवी लाइन बे से सफलतापूर्वक चार्ज एवं कमीशन किया गया। यह कार्य 132 केवी लाइनों के पुनर्विन्यास योजना के अंतर्गत किया गया है। जामगांव आर उपकेंद्र के सफल कमीशनिंग के कुछ ही घंटे बाद इस सर्किट का कमीशन होना पारेषण व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

    जामगांव आर में नवनिर्मित 132/33 केवी उपकेंद्र की स्थापना से पाटन तथा दुर्ग जिले के आसपास के क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति की विश्वसनीयता और गुणवत्ता को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। वहीं पाटन-अमलेश्वर 132 केवी सर्किट-1 की कमीशनिंग से क्षेत्र की पारेषण व्यवस्था को अतिरिक्त मजबूती मिलेगी।

    जामगांव आर उपकेंद्र के निर्माण के लिए स्वीकृत परियोजना में 2×40 एमवीए क्षमता का 132/33 केवी उपकेंद्र शामिल है। परियोजना के अंतर्गत पाटन-जामगांव 132 केवी लाइन तथा पाटन उपकेंद्र में अतिरिक्त 132 केवी फीडर बे से संबंधित कार्य भी स्वीकृत किए गए थे।
    इस अवसर पर कार्यपालक निदेशक एमएस. चौहान, केएस मनोठिया, संजय पटेल, वीके. दीक्षित,  कार्यपालक निदेशक (दुर्ग क्षेत्र) शिरीष शैलेट मुख्य अभियंता (सिविल), संजय तिवारी, अब्राहम वर्गीस,  प्रसन्ना गोस्वामी, अतिरिक्त मुख्य अभियंता, आई. एस. कंवर,  आर. के. तिवारी,  पी. पी. सिंह, अधीक्षण अभियंता, सुनील के. भुआर्या, करुणेश यादव,  विक्रम मंधान, पुष्पा पिल्लई तथा कंचन हिशीकर सहित परियोजना, ईएचटी निर्माण एवं संधारण, उपकेंद्र संचालन एवं संधारण, सिविल तथा सीएंडटीएम से जुड़े अधिकारी, अभियंता, कर्मचारी एवं अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

     

  • एशियन गेम्स में भारत-पाकिस्तान फाइनल तय, 3 अक्टूबर को गोल्ड के लिए भिड़ेंगे

    एशियन गेम्स में भारत-पाकिस्तान फाइनल तय, 3 अक्टूबर को गोल्ड के लिए भिड़ेंगे

    निशिन
     श्रीलंका को एकतरफा सेमीफाइनल में 124 रन के अंतर से रौंदते हुए भारतीय टीम ने शान से एशियन गेम्स के फाइनल में जगह बना ली है. अब 3 अक्टूबर को भारत-पाकिस्तान के बीच गोल्ड मेडल की लड़ाई होगी. भारतीय समयानुसार खिताबी मुकाबले की शुरुआत सुबह साढ़े नौ बजे से होगी. भारत हांगझोऊ में खेले गए पिछले एशियाई खेलों का गोल्ड मेडलिस्ट है। 

    महज 45 रन पर ऑलआउट हुआ श्रीलंका
    ईशान किशन की नाबाद 80 रन की अर्धशतकीय पारी के बूते भारत ने टॉस गंवाकर पहले बल्लेबाजी करते हुए सात विकेट के नुकसान पर 169 रन का चैंलेंजिंग टोटल खड़ा किया था. जवाब में श्रीलंका ने पहले ही ओवर में बिना किसी स्कोर के दो विकेट गंवा दिए और 9.5 ओवर आते-आते पूरी टीम ही महज 45 रन पर ऑलआउट हो गई. भारत के लिए जसप्रीत बुमराह और अक्षर पटेल ने घातक गेंदबाजी करते हुए दो-दो विकेट लिए जबकि तीन खिलाड़ी रन आउट हुए. पार्ट टाइम स्पिनर अभिषेक शर्मा ने आखिरी के दो विकेट लगातार दो गेंदों पर लेकर श्रीलंका का गेम ओवर कर दिया। 

    अब ब्रॉन्ज मेडल के लिए बांग्लादेश से भिड़ेगा श्रीलंका
    श्रीलंका अब बांग्लादेश के खिलाफ प्ले-ऑफ में कांस्य पदक के लिए लड़ेगा, जिसे पाकिस्तान ने दिन में पहले हराया था. कांस्य पदक और फाइनल दोनों शनिवार को यहां आयोजित किए जाएंगे. 170 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए श्रीलंका पहले पावरप्ले के अंदर 31 रन पर छह विकेट गंवा बैठा और अंततः 45 रन पर ऑल आउट हो गया. जसप्रीत बुमराह ने अपने पहले ओवर में दो विकेट लिए और फिर अक्षर पटेल भी दो विकेट लेने में सफल रहे. पिच मुश्किल थी, गेंद कभी भी एक्स्ट्रा बाउंस ले रही थी, जिससे बल्लेबाजी कठिन नजर आ रही थी। 

    बांग्लादेश को हराकर फाइनल में पहुंचा है पाकिस्तान
    1 अक्टूबर को खेले गए पहले सेमीफाइनल में पाकिस्तान ने बांग्लादेश को छह विकेट से हराते हुए फाइनल का टिकट कटवाया था. मैच में बांग्लादेश ने पहले बल्लेबाजी करते हुए सात विकेट के नुकसान पर 111 रन बनाए थे. जवाब में साहिबजादा फरहान की कप्तानी वाली पाकिस्तानी टीम ने नौ गेंद पहले ही चार विकेट खोकर मैच अपने नाम कर लिया था. पिछले एशियन गेम्स में पाकिस्तान को कोई मेडल नहीं मिला था. टीम बांग्लादेश के खिलाफ ब्रॉन्ज मेडल भी नहीं जीत पाई थी। 

    क्या गोल्ड मेडल मैच में हाथ मिलाएगी भारत-पाक की टीम
    भारत-पाकिस्तान गोल्ड मेडल से पहले एक बार फिर इस बात पर चर्चा होगी कि क्या दोनों टीमें हाथ मिलाएंगी. भारतीय खिलाड़ियों ने पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर के बाद से एशिया कप और आईसीसी इवेंट में अपने पाकिस्तानी प्लेयर्स के साथ हैंडशेक करना बंद कर चुका है ताकि भारतीय सशस्त्र बलों के साथ एकजुटता दिखाई जा सके. यह देखना बाकी है कि क्या मैनेजमेंट एशियन गेम्स में भी अपनी पॉलिसी बरकरार रखेगा या प्रोटोकॉल का पालन करेगा। 

  • CG में जनपद अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव, SDM को दिया आवेदन

    CG में जनपद अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव, SDM को दिया आवेदन

    अभनपुर.

    जनपद पंचायत अभनपुर की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। जनपद अध्यक्ष चंद्रिका जितेंद्र बंजारे के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की कवायद शुरू हो गई है। जनपद पंचायत के कुछ सदस्यों ने अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की मांग को लेकर आवेदन पेश किया है।

    आवेदन के साथ 9 जनपद सदस्यों के हस्ताक्षर भी संलग्न किए गए हैं। खास बात यह है कि 25 सदस्यीय जनपद पंचायत में अध्यक्ष चंद्रिका जितेंद्र बंजारे भाजपा समर्थित हैं, जबकि अविश्वास प्रस्ताव की मांग को लेकर आवेदन करने वाले सदस्य कांग्रेस समर्थित बताए जा रहे हैं। ऐसे में इस आवेदन ने अभनपुर की पंचायत राजनीति में सियासी हलचल बढ़ा दी है।

    आवेदनकर्ताओं ने लगाए गंभीर आरोप
    अविश्वास प्रस्ताव की मांग को लेकर दिए गए आवेदन में सदस्यों ने अध्यक्ष की कार्यप्रणाली पर कई सवाल उठाए हैं।आवेदनकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि जनपद पंचायत के निर्वाचित सदस्यों को महत्वपूर्ण निर्णयों में अपेक्षित रूप से विश्वास में नहीं लिया जा रहा है और कार्यप्रणाली को लेकर सदस्यों में असंतोष है। सदस्यों ने इन कारणों का हवाला देते हुए छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम के तहत विशेष सम्मेलन बुलाकर अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान कराने की मांग की है। हालांकि आवेदन में लगाए गए आरोप संबंधित सदस्यों के हैं।

    एसडीएम कार्यालय पहुंचा आवेदन, लेकिन कलेक्टर हैं सक्षम अधिकारी
    मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात सामने आई है कि आवेदन अभनपुर एसडीएम कार्यालय में प्रस्तुत किया गया, लेकिन अभनपुर एसडीएम ने स्पष्ट किया कि जनपद पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया के लिए कलेक्टर सक्षम अधिकारी हैं। ऐसे में अब पूरे मामले में जिला प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। आवेदन के आधार पर नियमानुसार क्या कार्रवाई की जाती है और अविश्वास प्रस्ताव के लिए विशेष सम्मेलन बुलाने की प्रक्रिया शुरू होती है या नहीं, यह कलेक्टर स्तर पर तय होगा।

    9 हस्ताक्षर से बढ़ी हलचल, अब प्रशासनिक प्रक्रिया पर नजर
    आवेदन के साथ 9 जनपद सदस्यों के हस्ताक्षर होने का दावा किया गया है। 25 सदस्यीय जनपद पंचायत में इतने सदस्यों के एकजुट होकर अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की मांग करने से राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। फिलहाल मामला आवेदन से आगे वैधानिक प्रक्रिया के चरण में पहुंचने का इंतजार कर रहा है। कलेक्टर के स्तर पर आवेदन का परीक्षण और आगे की कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होगा कि अविश्वास प्रस्ताव पर विशेष सम्मेलन और मतदान की स्थिति बनती है या नहीं।

    प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी निगाहें
    अभनपुर जनपद पंचायत में अध्यक्ष पद को लेकर सामने आए इस घटनाक्रम ने स्थानीय राजनीति को गरमा दिया है। एक तरफ भाजपा समर्थित अध्यक्ष चंद्रिका जितेंद्र बंजारे हैं, तो दूसरी ओर कांग्रेस समर्थित बताए जा रहे जनपद सदस्यों का समूह अविश्वास प्रस्ताव की मांग लेकर सामने आया है। अब राजनीतिक चर्चा से ज्यादा निगाहें कलेक्टर कार्यालय से होने वाली अगली प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि प्रक्रिया आगे बढ़ती है तो जनपद पंचायत की राजनीति में इसका असर व्यापक हो सकता है।

  • 2017 से पहले माफिया के सामने नाक रगड़ती थी सरकार: सीएम योगी

    2017 से पहले माफिया के सामने नाक रगड़ती थी सरकार: सीएम योगी

    2017 से पहले माफिया के सामने नाक रगड़ती थी सरकार: सीएम योगी
     
    लोकभवन में अत्याधुनिक 87 इंटरसेप्टर वाहनों को फ्लैग ऑफ किया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने

    वीर पुलिसकर्मियों का सम्मान और पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह की पुस्तक ‘संघर्ष’ का विमोचन भी किया सीएम ने
     
    बंद कमरे में टिप्पणी करना आसान, सुरक्षा हटा दें तो बड़े से बड़े व्यक्ति को भीगी बिल्ली बनने में देर नहीं लगती: मुख्यमंत्री
     
    सीएम ने कहा- पुलिस रिफॉर्म लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना उत्तर प्रदेश, सात पुलिस कमिश्नरेट कर रहे काम
     
    14 लाख से अधिक कैमरों से अपराध पर निगरानी, घटनाओं के खुलासे के साथ रोकथाम में भी मिल रही मदद
     
    यूपी पुलिस को पहली बार कीर्ति चक्र, वीरगति को प्राप्त इंस्पेक्टर सुनील कुमार के परिवार का सम्मान
     
    16 पुलिसकर्मियों को राष्ट्रपति वीरता पदक, 10 को मुख्यमंत्री वीरता पदक

    लखनऊ, 
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्ववर्ती सरकार की कानून-व्यवस्था पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश के हर जिले में दुर्दांत माफिया का बोलबाला था। समानांतर सरकारें चलती थीं। माफिया के सामने नाक रगड़ी जाती थी, घुटने टेके जाते थे और पुलिस मजबूर थी। राजनीतिक नेतृत्व की रीढ़ ही टेढ़ी हो तो वह कानून-व्यवस्था को सीधा कैसे कर सकता है।
     
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार को लोकभवन सभागार में आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने 87 इंटरसेप्टर वाहनों को हरी झंडी दिखाई, वीर पुलिसकर्मियों को पदक प्रदान किए और पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह की पुस्तक ‘संघर्ष’ का विमोचन भी किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 के बाद सरकार ने पुलिस सुधारों को आगे बढ़ाया। प्रकाश सिंह ने जिस पुलिस रिफॉर्म की वकालत की थी, उसे उत्तर प्रदेश ने देश में सबसे पहले लागू किया। प्रदेश में अब सात पुलिस कमिश्नरेट काम कर रहे हैं। आज यूपी पुलिस के सामने विचार, वीरता और तकनीक, तीनों का समन्वय दिखाई दे रहा है। ‘संघर्ष’ के माध्यम से पुलिस सेवा के अनुभव और चुनौतियां सामने आई हैं तो जांबाजों की वीरता का सम्मान हुआ है और सड़क सुरक्षा के लिए अत्याधुनिक इंटरसेप्टर वाहन पुलिस बल को समर्पित किए गए हैं।

    बंद कमरे में बैठकर टिप्पणी करना बेहद आसान
    मुख्यमंत्री ने कहा कि बंद कमरे में बैठकर किसी के प्रति कोई भी टिप्पणी करना आसान है। कोई व्यक्ति कितना भी बड़ा क्यों न हो और उसे अपने पद का कितना भी गुरूर हो, सुरक्षा हटा दी जाए तो अराजकता के माहौल में उसे भीगी बिल्ली बनने में देर नहीं लगेगी। स्वस्थ चिंतन तभी संभव है, जब समाज में सुरक्षा का वातावरण हो। सुरक्षित माहौल में ही समृद्धि की परिकल्पना को साकार किया जा सकता है। यूपी पुलिस की थीम ‘आपकी सुरक्षा, हमारा संकल्प’ इसी भावना को व्यक्त करती है। जब तराई क्षेत्र आतंकवाद की चपेट में था, तब पुलिस व सेना की सुरक्षा में ही आवागमन संभव था। सूर्यास्त के बाद आवाजाही लगभग बंद हो जाती थी। उस समय डीजीपी के रूप में प्रकाश सिंह ने इन चुनौतियों का सामना किया।  पुलिस सुधारों के लिए प्रकाश सिंह को सुप्रीम कोर्ट की शरण लेनी पड़ी थी। उत्तर प्रदेश ने पुलिस सुधारों को लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।

    विचार तभी सार्थक, जब व्यवहार में उतरें
    मुख्यमंत्री ने कहा कि वैचारिकी केवल शब्द या आलेख नहीं होती, बल्कि वह व्यावहारिक जीवन की चुनौतियों को भी समाहित करती है। प्रकाश सिंह ने अपने सेवाकाल में पग-पग पर इन चुनौतियों का सामना किया और अपनी पूरी सेवा को कुशलतापूर्वक पूरा किया। लंबे समय तक विभिन्न संस्थानों में व्याख्यानों के माध्यम से युवाओं को प्रेरित करने वाली उनकी वैचारिकी अब पुस्तक के रूप में सामने आई है। आचार और विचार में जब समन्वय होता है और दोनों एक ही दिशा में आगे बढ़ते हैं, तभी परिणाम सामने आता है।

    2017 से पहले कानून-व्यवस्था थी बड़ी चुनौती
    मुख्यमंत्री ने 2017 से पहले प्रदेश की कानून-व्यवस्था की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय ‘यूपी वाला’ कहकर लोगों को बाहर कर दिया जाता था। पुलिस के सामने भी बड़ी चुनौतियां थीं। राजनीतिक नेतृत्व में स्वयं निर्णय लेने की सामर्थ्य नहीं हो तो कानून-व्यवस्था को नियंत्रित करना कठिन होता है। तब पुलिस सुधार और अवस्थापना सुविधाओं की स्थिति भी बेहतर नहीं थी। एक वर्ष में करीब छह हजार पुलिस कार्मिकों को ही प्रशिक्षण दिया जा सकता था। पुलिसकर्मियों को टूटे भवनों में रहना पड़ता था। पीएसी की वाहिनियां समाप्त कर दी गई थीं। कोसीकलां, मेरठ, अलीगढ़ और मुजफ्फरनगर समेत कई स्थानों पर दंगों के चलते लंबे समय तक कर्फ्यू लगा। इन्हीं परिस्थितियों में उत्तर प्रदेश को बीमारू कहा जाने लगा। अर्थव्यवस्था, रोजगार, तकनीक और कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन सहित विभिन्न क्षेत्रों में चुनौतियां खड़ी थीं। 2017 के बाद इन परिस्थितियों को बदलते हुए प्रदेश को आगे बढ़ाने का काम किया गया।

    तकनीक बनी आधुनिक पुलिसिंग का आधार
    सीएम योगी ने कहा कि पुलिस सुधारों के साथ तकनीक का समावेश भी आवश्यक है। सेफ सिटी के लक्ष्य के तहत प्रदेश के शहरों में 14 लाख से अधिक कैमरे लगाए गए हैं। ये कैमरे घटनाओं की रोकथाम और उनके अनावरण में भूमिका निभा रहे हैं। जिलों में इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर स्थापित किए गए हैं। विचार और व्यवहार के साथ जब तकनीक जुड़ती है तो उसके परिणाम भी सामने आते हैं। आज यूपी पुलिस की पहचान में यह बदलाव दिखाई देता है।

    सुनील कुमार सिंह की वीरता को नमन
    मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश पुलिस के एसटीएफ से जुड़े जांबाज इंस्पेक्टर स्वर्गीय सुनील कुमार सिंह की वीरता को नमन किया। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने उनकी वीरता के लिए उन्हें कीर्ति चक्र से सम्मानित किया है और यूपी पुलिस को पहली बार यह गौरव प्राप्त हुआ है। सुनील कुमार सिंह ने 22 जनवरी, 2025 को आमने-सामने की मुठभेड़ में चार दुर्दांत अपराधियों को मार गिराया था। इस दौरान वह अपराधियों की गोलियों से गंभीर रूप से घायल हुए और बाद में उनका बलिदान हुआ। मुख्यमंत्री ने उनकी धर्मपत्नी एवं परिवार के सदस्यों को सम्मानित करते हुए उनकी स्मृति को नमन किया। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में 16 पुलिस अधिकारियों एवं कार्मिकों को राष्ट्रपति के वीरता पुरस्कार तथा 10 पुलिस अधिकारियों एवं कार्मिकों को मुख्यमंत्री वीरता पदक से सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने सभी वीर पुलिसकर्मियों को बधाई दी।

    सड़क सुरक्षा के लिए 87 इंटरसेप्टर वाहन
    मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क सुरक्षा प्रदेश के सामने बड़ी चुनौती है। कोविड के ढाई-तीन वर्षों में प्रदेश में लगभग 24 हजार लोगों की मृत्यु हुई थी, जबकि सड़क दुर्घटनाओं में हर वर्ष 23-24 हजार लोगों की जान चली जाती है। इसे तकनीक और प्रभावी प्रवर्तन के माध्यम से नियंत्रित किया जा सकता है। इसी उद्देश्य से अत्याधुनिक उपकरणों से सुसज्जित 87 इंटरसेप्टर वाहनों को उत्तर प्रदेश पुलिस को समर्पित किया गया है। सड़क सुरक्षा नियमों का उल्लंघन केवल एक व्यक्ति को प्रभावित नहीं करता, बल्कि उसका प्रभाव पूरे परिवार और अंततः समाज पर पड़ता है। ये इंटरसेप्टर वाहन विभिन्न जनपदों में सड़क सुरक्षा के मानकों के अनुपालन और यातायात नियमों के प्रभावी प्रवर्तन में योगदान देंगे।

    इस अवसर पर  समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण, उत्तर प्रदेश पुलिस के पूर्व महानिदेशक प्रकाश सिंह, उत्तर प्रदेश पुलिस के महानिदेशक राजीव कृष्ण, अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद, स्वामी धर्मबंधु, प्रभात प्रकाशन से पवन अग्रवाल और उत्तर प्रदेश पुलिस के वरिष्ठ अधिकारीगण,  कार्मिकगण व उनके परिजन उपस्थित रहे।

  • UPI की रफ्तार बरकरार, सितंबर में 2407 करोड़ ट्रांजैक्शन; ₹29.37 लाख करोड़ का पेमेंट

    UPI की रफ्तार बरकरार, सितंबर में 2407 करोड़ ट्रांजैक्शन; ₹29.37 लाख करोड़ का पेमेंट

     नई दिल्ली
    आजकल छोटी दुकान से लेकर बड़े स्टोर तक पेमेंट का तरीका तेजी से बदल रहा है. कुछ रुपये की चाय हो या हजारों रुपये की खरीदारी, मोबाइल निकालकर QR कोड स्कैन करना लोगों की रोजमर्रा की आदत बन चुका है. सितंबर के UPI आंकड़े भी इसी बदलाव की तस्वीर दिखाते हैं. इस महीने यूपीआई पर कुल 24.07 बिलियन यानी 2407 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए और इनकी कुल वैल्यू ₹29.37 लाख करोड़ रही. यानी औसतन हर दिन करीब 802 मिलियन यानी 80.2 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए। 

    खास बात यह है कि ये आंकड़े ऐसे समय आए हैं, जब 15 अक्टूबर से ₹2000 से ज्यादा के मर्चेंट UPI पेमेंट पर नया MDR फ्रेमवर्क लागू होने वाला है. हालांकि, पर्सन-टू-पर्सन (P2P) यूपीआई ट्रांजैक्शन पहले की तरह पूरी तरह फ्री रहेगा. यानी आप अपने परिवार के सदस्यों, दोस्तों या रिश्तेदारों को UPI से पैसे भेजते हैं, तो उस पर किसी तरह का चार्ज नहीं लगेगा. नई व्यवस्था सिर्फ मर्चेंट यानी दुकानदारों या व्यापारियों को किए जाने वाले पेमेंट पर लागू होगी. यहां भी जानना जरूरी है कि MDR चार्ज पेमेंट करने वाले पर नहीं बल्कि रिसीव करने वाले पर लागू होगा। 

    हर दिन 80 करोड़ से ज्यादा UPI ट्रांजैक्शन

    नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के मुताबिक सितंबर में यूपीआई ट्रांजैक्शन की संख्या सालाना आधार पर 23 फीसदी बढ़ी. वहीं कुल ट्रांजैक्शन वैल्यू में 18 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. सितंबर में हर दिन औसतन ₹97,913 करोड़ के यूपीआई ट्रांजैक्शन हुए. यानी रोजाना ट्रांजैक्शन की संख्या और उनकी कुल रकम, दोनों रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए. अगर सिर्फ महीने के कुल आंकड़े देखें तो सितंबर में यूपीआई ट्रांजैक्शन अगस्त के मुकाबले थोड़े कम रहे। 

    अगस्त में 24.51 बिलियन ट्रांजैक्शन हुए थे और उनकी कुल वैल्यू ₹29.82 लाख करोड़ थी. लेकिन इसका सीधा मतलब यह नहीं है कि सितंबर में डिजिटल पेमेंट की रफ्तार कमजोर हुई. कैशफ्री के को-फाउंडर रीजू दत्ता के मुताबिक अगस्त में 31 दिन थे, जबकि सितंबर में 30 दिन. इसलिए दोनों महीनों के कुल आंकड़ों की तुलना करते समय दिनों की संख्या को ध्यान में रखना जरूरी है। 

    सितंबर में बड़े UPI ट्रांजैक्शन बढ़े
    रीजू दत्ता के मुताबिक अप्रैल से अगस्त के बीच यूपीआई पर एवरेज डेली ट्रांजैक्शन वैल्यू करीब ₹96,000 करोड़ रही थी. सितंबर में यह बढ़कर करीब ₹98,000 करोड़ पहुंच गई. इसकी एक वजह सितंबर में अपेक्षाकृत ज्यादा रकम वाले ट्रांजैक्शन होना भी बताया जा रहा है. महीने के बीच में गणेश चतुर्थी का त्योहार भी पड़ा, जिससे खरीदारी और उपभोक्ता खर्च को सहारा मिला. सितंबर के आंकड़ों को आने वाले फेस्टिव सीजन के लिए भी अहम माना जा रहा है। 

    अक्टूबर में बड़ी फेस्टिव सेल्स शुरू होने की उम्मीद है, जबकि नवंबर में दिवाली का त्योहार आएगा. डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म Fibe के एमडी और ग्रुप सीईओ अक्षय मेहरोत्रा के मुताबिक ₹29.37 लाख करोड़ की रकम वाले 24.07 बिलियन मंथली यूपीआई ट्रांजैक्शन यह दिखाते हैं कि डिजिटल पेमेंट लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी में कितनी मजबूती से शामिल हो चुका है. उनके मुताबिक फेस्टिव सीजन में पेमेंट, कर्ज और तकनीक को जोड़ने से वित्तीय सेवाओं की पहुंच और बढ़ सकती है। 

    छोटे शहरों तक है UPI की पहुंच
    यूपीआई की बढ़ती पहुंच सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है. PayNearby के फाउंडर आनंद कुमार बजाज के मुताबिक छोटे शहरों, ग्रामीण इलाकों और मोहल्ले की दुकानों में भी यूपीआई का इस्तेमाल बढ़ रहा है. यानी डिजिटल पेमेंट अब सिर्फ बड़े मॉल या ऑनलाइन खरीदारी तक सीमित नहीं रहा. स्थानीय दुकानदार और छोटे कारोबारी भी तेजी से यूपीआई से जुड़ रहे हैं। 

    IMPS लेनदेन में भी हुई बढ़ोतरी
    सितंबर में इमीडिएट पेमेंट सर्विस (IMPS)
    के जरिए भी लेनदेन में बढ़ोतरी दर्ज हुई. इसकी कुल ट्रांजैक्शन वैल्यू ₹7.06 लाख करोड़ रही, जो सालाना आधार पर 18 फीसदी ज्यादा है. सितंबर में IMPS पर रोजाना औसतन 11.80 मिलियन यानी करीब 1.18 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए. इनकी औसत दैनिक वैल्यू ₹23,530 करोड़ रही। 

    UPI की रफ्तार पर पड़ेगा MDR का असर?
    फिलहाल जानकारों का मानना है कि नए MDR फ्रेमवर्क से यूपीआई के कुल ट्रांजैक्शन वॉल्यूम या वैल्यू पर बड़ा असर पड़ने की उम्मीद नहीं है. इसकी एक बड़ी वजह यह है कि ज्यादातर मर्चेंट ट्रांजैक्शन ₹2,000 तक के दायरे में आते हैं और इस सीमा तक जीरो MDR जारी रहेगा. अक्षय मेहरोत्रा के मुताबिक यूपीआई का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है और आने वाले समय में इसके लिए सस्टेनेबल इकोनॉमिक मॉडल जरूरी होगा. उनके अनुसार मामूली MDR से यूपीआई को चलाने में जो इंफ्रास्ट्रक्चर लगता है, उसको मेंटेन करने के लिए आर्थिक सहारा मिलेगा. अब नजर 15 अक्टूबर पर है, जब नया MDR फ्रेमवर्क लागू होगा। 

  • SIR पर EC की सफाई, कहा- सभी फैसले सर्वसम्मति से; विपक्ष के सवालों का दिया जवाब

    SIR पर EC की सफाई, कहा- सभी फैसले सर्वसम्मति से; विपक्ष के सवालों का दिया जवाब

     नई दिल्ली
    विपक्षी दलों द्वारा एसआईआर (SIR) प्रक्रिया पर उठाए जा रहे सवालों के बीच चुनाव आयोग के सूत्रों ने अपना पक्ष साफ किया है. चुनाव आयोग के सूत्रों ने प्रक्रिया का बचाव करते हुए कहना है कि एसआईआर मतदाता सूची के पुनरीक्षण की एक वैधानिक और स्थापित प्रक्रिया है, जिसे सुप्रीम कोर्ट की न्यायिक समीक्षा का भी समर्थन प्राप्त है और किसी भी चुनाव आयुक्त ने किसी फैसले पर असहमति दर्ज नहीं की है। 

    फर्जी और मृत वोटर हटाना मकसद
    सूत्रों के मुताबिक, एसआईआर का प्राथमिक उद्देश्य मतदाता सूची को पूरी तरह साफ-सुथरा और पारदर्शी बनाना है. इसके तहत मृत, डुप्लीकेट, फर्जी और शिफ्ट हो चुके मतदाताओं की पहचान की जाती है. साथ ही ये सुनिश्चित किया जाता है कि सभी पात्र नागरिक लिस्ट में बने रहें। 

    सूत्रों ने साफ किया कि सुप्रीम कोर्ट ने कभी-भी एसआईआर प्रक्रिया को निलंबित नहीं किया, बल्कि मतदाता घोषणा और मैपिंग प्रक्रिया समेत इसे आगे बढ़ाने की अनुमति दी और मतदाताओं के लिए सुरक्षा उपाय तय किए। 

    आयोग ने 11 करोड़ मतदाताओं को दोबारा लिस्ट में शामिल करने की राजनीतिक मांग पर स्पष्टीकरण करते हुए कहा कि इसका सीधा अर्थ उन नामों को फिर से शामिल करना होगा, जिन्हें गहन सत्यापन के दौरान हटाया गया था. लेकिन उनका दोबारा सत्यापन अभी पूरा नहीं हुआ है. नए मतदाताओं और नाम जुड़वाने के इच्छुक लोगों के लिए फॉर्म 6 पूरी तरह उपलब्ध है. सूत्रों के अनुसार फॉर्म 6 में किसी भी तरह का कोई बदलाव नहीं किया गया है। 

    बीएलओ को तीन बार जाने की ट्रेनिंग
    सूत्रों ने बताया कि बीएलओ को प्रशिक्षित किया गया है कि वह मतदाताओं के वेरिफिकेशन के लिए कम से कम तीन बार घर-घर जाएं. इसमें घर पर न मिलने वाले या शिफ्ट मतदाताओं का वेरिफिकेशन भी शामिल है. ये प्रक्रिया सालों से चली आ रही है और केवल 1987 के बाद जन्मे लोगों से ही दस्तावेज मांगे गए हैं. सॉफ्टवेयर के जरिए मैपिंग की गलतियों को चिन्हित कर फर्जी और डुप्लीकेट नाम हटाए जा रहे हैं. अगर किसी ने भी एसआईआर फॉर्म पर हस्ताक्षर कर बीएलओ को दिया है तो उसका नाम ड्राफ्ट सूची में जरूर शामिल होगा। 

    ERO-AERO ने नहीं की शिकायत
    आयोग का कहना है कि मतदाता सूची में नाम
    जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया विकेंद्रीकृत है. ये काम EROs और AEROs के स्तर पर होता है, न कि व्यक्तिगत रूप से मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा। 

    सूत्रों के मुताबिक, देश भर में करीब 25,000 EROs और AEROs में से किसी ने भी इस प्रक्रिया को लेकर शिकायत नहीं की है। 

    गोवा में तकनीकी गड़बड़ी के कारण करीब 97 मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाए थे. इनमें से 88 के नाम अब जोड़े जा चुके हैं. तीन लोग पुर्तगाली नागरिक हैं, 6 उस वक्त विदेश में थे और बाकी मामलों का सत्यापन किया जा रहा है। 

    बेला एस्टेट विवाद पर EC का जवाब
    आयोग ने राहुल गांधी द्वारा बेला एस्टेट में 727 मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाने के मामले पर सफाई देते हुए सूत्रों ने कहा, बीएलओ अभी-भी नए नाम जोड़ने की प्रक्रिया में लगे हुए हैं, क्योंकि दिल्ली में SIR की प्रक्रिया अभी जारी है. चुनाव आयोग का तर्क है कि बेला एस्टेट मेजब बीएलओ गए थे तो वहां कोई था नहीं तो फिर किससे पूछते या हस्ताक्षर करवाते?

    चुनाव आयोगके सूत्रों के मुताबिक, अगर किसी ने भी SIR का फार्म हस्ताक्षर करके बीएलओ को दिया है तो उसका नाम ड्राफ्ट सूची में पक्का होगा। 

  • यूपी पुलिस के बेड़े में शामिल हुए 87 नए इंटरसेप्टर वाहन

    यूपी पुलिस के बेड़े में शामिल हुए 87 नए इंटरसेप्टर वाहन

    यूपी पुलिस के बेड़े में शामिल हुए 87 नए इंटरसेप्टर वाहन
     
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 25 चार-पहिया और 62 दो-पहिया वाहनों को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना
     
    प्रदेश में अब 35 चार-पहिया और 137 दो-पहिया इंटरसेप्टर वाहन, यातायात नियम तोड़ने वालों पर होगी कार्रवाई
     
    आठ माह में सड़क दुर्घटनाओं में सात और मृतकों की संख्या में आठ प्रतिशत की कमी
     
    75 जिलों के 700 सर्वाधिक दुर्घटना-बाहुल्य थाना क्षेत्रों में 801 विशेष टीमें कर रहीं निगरानी
     
     लखनऊ

     सड़क हादसों में कमी लाने और यातायात नियमों का सख्ती से पालन कराने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस के बेड़े में गुरुवार को 87 नए इंटरसेप्टर वाहन शामिल हो गए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 25 चार-पहिया और 62 दो-पहिया इंटरसेप्टर वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसके साथ ही प्रदेश में इंटरसेप्टर वाहनों की संख्या बढ़कर 172 हो गई है। इनमें 35 चार-पहिया और 137 दो-पहिया वाहन हैं।
     
    नए इंटरसेप्टर वाहनों से तेज रफ्तार, नशे में वाहन चलाने, काली फिल्म, प्रेशर हॉर्न और रैश ड्राइविंग जैसे यातायात नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई में मदद मिलेगी। इनमें स्पीड लेजर गन, ब्रेथ एनालाइजर, टिंट मीटर और डेसिबल मीटर जैसे उपकरण हैं। जरूरत पड़ने पर इन वाहनों का इस्तेमाल ट्रैफिक रिस्पॉन्स व्हीकल के रूप में भी किया जा सकेगा।
     
    700 दुर्घटना-बाहुल्य थाना क्षेत्रों पर नजर

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर डीजीपी राजीव कृष्ण के नेतृत्व में शुरू की गई जीरो फैटेलिटी डिस्ट्रिक्ट (ZFD) योजना सभी 75 जिलों के 700 सर्वाधिक दुर्घटना-बाहुल्य थाना क्षेत्रों तक पहुंच चुकी है। इसके तहत 801 विशेष टीमों में करीब 3,500 पुलिसकर्मियों को लगाया गया है। ये टीमें क्रिटिकल कॉरिडोर और ब्लैक स्पॉट पर नियमित पेट्रोलिंग, निगरानी और यातायात नियमों का पालन करा रही हैं।
     
    पिछले आठ माह में प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं में करीब सात प्रतिशत और मृतकों की संख्या में करीब आठ प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। इस अवधि में करीब 1,107 लोगों की जान बचाई गई।
     
    109 मार्गों पर रियल टाइम निगरानी
    शहरों में जाम की समस्या से निपटने के लिए RTC योजना के तहत 20 प्रमुख जिलों के 109 मार्गों की UP GATI प्लेटफॉर्म से रियल टाइम निगरानी की जा रही है। रूट मार्शल और संबंधित विभाग जाम के कारणों की पहचान कर मौके पर कार्रवाई करते हैं। मार्च 2026 में इन मार्गों पर 16,723 कंजेशन पॉइंट दर्ज किए गए थे, जो अगस्त तक घटकर 8,569 रह गए। इस तरह करीब 49 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।
     
    कैमरों से निगरानी, नियम तोड़ने पर ई-चालान
    यातायात व्यवस्था की निगरानी के लिए ITMS और Safe City कैमरा नेटवर्क की भी मदद ली जा रही है। ANPR के साथ रेड लाइट और गति सीमा के उल्लंघन की पहचान करने वाले कैमरों तथा कमांड सेंटर की लाइव फीड से यातायात पर नजर रखी जाती है। जरूरत पड़ने पर जाम और भीड़ वाले इलाकों में ड्रोन से भी निगरानी की जाती है। कैमरों और फील्ड टीमों से मिली जानकारी के आधार पर नियम तोड़ने वालों के ई-चालान के साथ मौके पर भी कार्रवाई की जा रही है।

  • आलू पराठा बेलते ही फटता है? रणवीर बरार की सीक्रेट ट्रिक से बनेगा सॉफ्ट और फूला पराठा

    आलू पराठा बेलते ही फटता है? रणवीर बरार की सीक्रेट ट्रिक से बनेगा सॉफ्ट और फूला पराठा

    सुबह नाश्ते में नर्म, मुलायम और ढेर सारे आलू की स्टफिंग वाले आलू पराठे भला किसे अच्छे नहीं लगते. लेकिन सही तरीके से पराठे बनाने में कई लोगों के पसीने छूट जाते हैं. अक्सर पराठा बनाते समय सबसे बड़ी समस्या यह आती है कि बेलते ही पराठा फट जाता है, आलू की स्टफिंग बाहर निकल आती है या फिर पराठा सेंकने के बाद कड़क और सूखा हो जाता है.

    अगर आपके साथ भी यही होता है तो अब परेशान होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है. मशहूर शेफ रणवीर ब्रार के अनुसार, पराठा फटने की मुख्य वजह उबले आलू में मौजूद अतिरिक्त नमी और आटे का सही तरीके से न गुंधना है. अगर आप आलू उबलने की क्रोनोलॉजी और आटे के टेक्सचर का सही ध्यान रखेंगे तो आपका पराठा गुब्बारे की तरह फूलेगा और रुई जैसा सॉफ्ट बनेगा. आइए जानते हैं शेफ की वही सीक्रेट ट्रिक और रेसिपी.

    सामग्री:

    दो कप गेहूं का आटा

    आधा छोटा चम्मच नमक

    एक छोटा चम्मच देसी घी या तेल

    आवश्यकतानुसार गुनगुना पानी

    आलू की स्टफिंग के लिए:

    चार मध्यम आकार के उबले हुए आलू (ठंडे किए हुए)

    दो हरी मिर्च (बारीक कटी हुई), एक छोटा चम्मच अदरक (कद्दूकस किया हुआ)

    आधा छोटा चम्मच जीरा पाउडर (भुना हुआ), आधा छोटा चम्मच अमचूर या अनारदाना पाउडर

    आधा छोटा चम्मच गरम मसाला, आधा छोटा चम्मच कस्तूरी मेथी

    आधा छोटा चम्मच कुटी हुई लाल मिर्च, एक बड़ा चम्मच बारीक कटा हरा धनिया

    स्वादानुसार नमक

    बनाने की विधि:
    उन्होंने कुछ समय पहले अपने यूट्यूब वीडियो में आलू पराठे को सही तरीके बनाने के बारे में बताया था कि पराठे के फटने की सबसे बड़ी वजह आलू की नमी और आटे का टेक्सचर होता है. उनका कहना है कि सही अनुपात और छोटी-छोटी ट्रिक्स अपनाकर आप भी घर पर मास्टरशेफ स्टाइल पराठे तैयार कर सकते हैं. आइए उन्हीं की रेसिपी से बनाते हैं परफेक्ट आलू पराठा.

    सबसे पहले आटे में हल्का सा नमक मिलाएं. इसके साथ थोड़ा सा बेसन भी मिलाएं ताकि आटे में करारापन आए. अब इसमें अजवायन और थोड़ा घी मिलाना है. अब इसमें पानी मिलाकर आटे का डो Dough बनाएं. सबसे जरूरी चीज है कि आटे के डो को सॉफ्ट रखना है.

    अब उबले आलू को कद्दूकस करें, उसमें अदरक कसकर डालें, महीन बारीक कटी हरी मिर्च डालें, हरा धनिया, नमक, लाल मिर्च पाउडर, जीरा पाउडर, सौंफ, अमचूर पाउडर डालें.

    रणवीर बरार ने बताया कि यहां पर ट्रिक ये है कि इस फिलिंग की कंसिस्टेंसी वैसी होनी चाहिए जैसे आपके आटे के डो की है ताकि आप इसमें भर-भरकर आलू डाल सके.

    कई लोग इसमें प्याज भी डालते हैं. अगर आप प्याज डाल रहे हैं तो फिर आलू को तुरंत पराठे में डालकर बना लें क्योंकि प्याज पानी छोड़ता है जिससे आपकी फिलिंग खराब हो जाती है. लंबे समय तक पराठे और फिलिंग रखनी है तो प्याज ना डालें.

    अब आप लोई को एक कप नुमा आकार देकर उसमें आलू डाल दें और अच्छे से उसे सील कर दें. आलू पूरे पराठे में तभी अच्छे से फैलता है जब उसकी कंसिस्टेंस अच्छी होती है. पराठे को धीमी आंच पर सेकें. आपके परफेक्ट आलू पराठे तैयार हैं.