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  • इंदौर में राहुल गांधी के कार्यक्रम के लिए रीजनल पार्क मैदान पर सहमति, कांग्रेस देगी ₹2.5 लाख फीस

    इंदौर में राहुल गांधी के कार्यक्रम के लिए रीजनल पार्क मैदान पर सहमति, कांग्रेस देगी ₹2.5 लाख फीस

     इंदौर 

     राहुल गांधी के आयोजन छात्रों की गूंज के लिए इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) मैदान देने पर सहमत हो गया है। रीजनल पार्क के सामने स्थित मैदान के आवंटन के लिए कांग्रेस के पास संदेश पहुंचा है कि लीज शुल्क चुका दिया जाए।

    शहर कांग्रेस कमेटी की ओर से शुक्रवार को आईडीए में मैदान आवंटन के लिए पैसा जमा किया जाएगा। कांग्रेस ने 14 से 19 सितंबर तक के लिए इस मैदान के आवंटन का लिखित आवेदन दिया है। दस दिनों से ज्यादा समय से 19 सितंबर को होने वाले आयोजन छात्रों की गूंज के स्थान को लेकर खींचतान चल रही थी।

    पहले कांग्रेस ने नेहरू स्टेडियम मांगा था। नगर निगम ने इनकार कर दिया था। इसके बाद आईडीए से रीजनल पार्क पिपल्याराव के सामने स्थित मैदान मांगा गया। हालांकि आईडीए ने सीधे इस मैदान के आवंटन की सहमति नहीं दी थी।

    दो दिन पहले पत्र लिखकर आइडीए ने पुलिस से अभिमत मांग लिया। इसके बाद कांग्रेस ने मुद्दा बनाया और कहा कि सरकार के ईशारे पर प्रशासन राहुल गांधी के आयोजन को रोकने की कोशिश कर रहा है। इसके बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बयान दे दिया था कि जगह नहीं मिलेगी तो सड़क पर आयोजन होगा लेकिन छात्रों की गूंज तो होकर रहेगा।

    सूत्रों के अनुसार आईडीए के अधिकारियों की ओर से शहर कांग्रेस कमेटी के पास गुरुवार दोपहर संदेश पहुंचा कि मैदान आवंटन के शुल्क के रूप में करीब ढाई लाख रुपये की राशि जमा करवाई जाए। इसके बाद ही मैदान दिया जा सकेगा। शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने कहा कि मैदान के लिए तय शुल्क शुक्रवार को जमा कर दिया जाएगा।
    महू में भी हुई बैठक

    छात्रों की गूंज के लिए कांग्रेस की तैयारी और बैठकों का सिलसिला जारी है। प्रदेश कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी के साथ प्रदेश सहप्रभारी रणविजय लोचन, उषा नायडू, विजयालक्ष्मी साधौ व जिला कांग्रेस अध्यक्ष विपिन वानखेड़े ने शुक्रवार को ग्रामीण क्षेत्रों में बैठक ली। पहले महू और फिर देपालपुर क्षेत्र में बैठक हुई। इस दौरान कांग्रेस नेताओं ने डॉ. भीमराव आंबेडकर जन्मस्थली पर माल्यार्पण भी किया। इंदौर में हो रहे इस आयोजन के लिए ग्रामीण क्षेत्र से भी युवाओं को जुटाने के प्रयास में कांग्रेस लगी है।

  • योगी सरकार में हर कक्षा को मिलेगा सीखने का नया साधन, ₹56.36 करोड़ से बनेंगे टीएलएम

    योगी सरकार में हर कक्षा को मिलेगा सीखने का नया साधन, ₹56.36 करोड़ से बनेंगे टीएलएम

    लखनऊ

     योगी सरकार बेसिक शिक्षा में कक्षा-कक्ष को अधिक प्रभावी, सहज और गतिविधि आधारित बनाने के साथ-साथ विद्यालयों में शिक्षण-अधिगम सामग्री की उपलब्धता को सुदृढ़ कर रही है। इसी क्रम में समग्र शिक्षा के अंतर्गत वर्ष 2026-27 में कक्षा 1 से 5 तक के विद्यालयों में शिक्षकों द्वारा टीचिंग लर्निंग मैटेरियल (टीएलएम) तैयार करने के लिए ₹56.36 करोड़ का बजट जारी किया गया है। 

    इसका उपयोग विद्यालय स्तर पर शिक्षकों द्वारा बच्चों की सीखने की जरूरत, कक्षा एवं विषय के अनुरूप उपयोगी शिक्षण सामग्री तैयार करने में किया जाएगा। राज्य परियोजना निदेशक एवं महानिदेशक, स्कूल शिक्षा मोनिका रानी द्वारा जारी दिशा-निर्देशों में जिलों को धनराशि का प्रभावी और निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

    15 अक्टूबर तक खरीद, 31 अक्टूबर तक निर्माण

    विद्यालय स्तर पर टीएलएम निर्माण के लिए समय-सीमा भी निर्धारित की गई है। संबंधित सामग्री की खरीद 15 अक्टूबर 2026 तक पूरी करनी होगी, जबकि शिक्षकों द्वारा 31 अक्टूबर 2026 तक कक्षावार एवं विषयवार टीएलएम तैयार किया जाएगा। उत्कृष्ट और नवाचारी सामग्री को सामने लाने के लिए ब्लॉक संसाधन केंद्र स्तर पर ‘निपुण टीएलएम मेला उत्सव’ आयोजित किया जाएगा, जिसमें शिक्षकों द्वारा विकसित टीएलएम का प्रदर्शन और कक्षा शिक्षण में उसके प्रभावी उपयोग का प्रस्तुतीकरण होगा।

    हर कक्षा की सीखने की जरूरत के अनुरूप सामग्री

    समग्र शिक्षा की वार्षिक कार्ययोजना एवं बजट 2026-27 में स्वीकृत धनराशि के अंतर्गत यह बजट विद्यालय स्तर पर टीएलएम निर्माण के लिए उपलब्ध कराया गया है। इसका उद्देश्य कक्षा 1 से 5 तक के शिक्षकों को ऐसी शिक्षण सामग्री तैयार करने के लिए संसाधन उपलब्ध कराना है, जो निपुण लक्ष्य से जुड़ी, सरल, उपयोगी और कक्षा-कक्ष में सहजता से प्रयोग की जा सके। दिशा-निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि टीएलएम पाठ्य बिंदु, विषयवस्तु और शिक्षण योजना के अनुरूप तैयार हो। सामग्री में उपयोगिता, टिकाऊपन और सहज उपलब्धता का ध्यान रखने के साथ बच्चों की स्वयं सामग्री बनाने और जोड़ने में सहभागिता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है।

    निपुण लक्ष्य से लेकर आकलन ट्रैकर तक

    सूची में कक्षा 1 से 5 तक के लिए ‘निपुण लक्ष्य’ पोस्टर, कक्षावार गणित एवं हिंदी की तालिका, कक्षा 3 से 5 के लिए अंग्रेजी एवं पर्यावरण अध्ययन की तालिका, शिक्षण-अधिगम से संबंधित आईईसी सामग्री, कैच-अप शिक्षण एवं आकलन ट्रैकर सहित विभिन्न सामग्री शामिल है। इसके अतिरिक्त कार्ड बोर्ड, चार्ट पेपर, स्केच पेन, फ्लैश कार्ड, एबेकस, ग्लोब, भारत एवं विश्व के मानचित्र, कठपुतलियां, पशु-पक्षियों एवं परिवहन संबंधी चार्ट, घड़ी, वर्णमाला कार्ड आदि सामग्री की व्यवस्था सुझाई गई है।

    टीएलएम के निर्माण और उपयोग पर भी निगरानी

    निर्देशों के अनुसार स्वीकृत धनराशि का उपयोग निर्धारित टीएलएम निर्माण में ही किया जाएगा। सामान्य स्टेशनरी, सफाई सामग्री, सजावट, व्यक्तिगत उपयोग की वस्तुओं अथवा ऐसी सामग्री की खरीद पर धनराशि खर्च नहीं की जाएगी, जिसका शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में प्रत्यक्ष उपयोग न हो। विद्यालयों में टीएलएम के निर्माण और कक्षा-शिक्षण में उसके उपयोग की निगरानी प्रधानाध्यापक/प्रभारी प्रधानाध्यापक, बीईओ, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, डायट एवं संबंधित शैक्षिक टीमों द्वारा की जाएगी।

    योगी सरकार प्रदेश के हर बच्चे को बेहतर सीखने के अवसर उपलब्ध कराने के लिए कक्षा शिक्षण को अधिक प्रभावी और गतिविधिपरक बना रही है। विद्यालयों में शिक्षकों को टीएलएम निर्माण के लिए उपलब्ध कराए जा रहे संसाधन कक्षा-कक्ष को अधिक जीवंत और सीखने की प्रक्रिया को अधिक सहज बनाएंगे। इसमें बच्चों की सहभागिता सुनिश्चित करने से सीखने के साथ उनकी रचनात्मकता भी विकसित होगी।

    संदीप सिंह, बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) उत्तर प्रदेश

    हमारा प्रयास है कि विद्यालयों में उपलब्ध कराई जा रही टीएलएम निर्माण की सुविधा का उपयोग शिक्षकों द्वारा बच्चों की सीखने की जरूरतों और शिक्षण योजना के अनुरूप किया जाए तथा उसका प्रभावी उपयोग कक्षा-कक्ष में सुनिश्चित हो। शिक्षकों द्वारा तैयार उत्कृष्ट और नवाचारी टीएलएम को निपुण टीएलएम मेला उत्सव के माध्यम से साझा करने से बेहतर शिक्षण प्रयोगों को व्यापक स्तर पर अपनाने का अवसर मिलेगा।
    मोनिका रानी, महानिदेशक, स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक

  • पंजाब कांग्रेस में फिर बढ़ी अंदरूनी कलह, 5 साल पुरानी गलती दोहराने का खतरा; 2027 से पहले संकट

    पंजाब कांग्रेस में फिर बढ़ी अंदरूनी कलह, 5 साल पुरानी गलती दोहराने का खतरा; 2027 से पहले संकट

    चंडीगढ़ 
    पंजाब की सियासत में कांग्रेस एक बार फिर उसी दोराहे पर खड़ी दिख रही है, जहां वह 2022 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले खड़ी थी. कांग्रेस ने पांच साल पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह को हटाकर चरणजीत सिंह चन्नी को सत्ता की कमान सौंपी थी, लेकिन नवजोत सिंह सिद्ध की नाराजगी दूर नहीं हो सकी और कांग्रेस को सत्ता गंवानी पड़ गई थी. अब कांग्रेस ने 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले संगठन में बदलाव शुरू। 

    कांग्रेस में नेतृत्व के टकराव के मुद्दे को सुलझाने के नाम पर पार्टी आलाकमान फैसले ले रहा है. भूपेश बघेल को हटाकर पार्टी ने सचिन पायलट को पंजाब का प्रभारी बना दिया है. इसके बाद भी चन्नी खेमा राजा वडिंग को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने की मांग कर रहा है। 

    पंजाब विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के बीच कांग्रेस के सामने सियासी संकट खड़ा हो गया है. इस समय जहां चुनाव की तैयारी में राजनीतिक दल जुटे हैं, तो कांग्रेस अभी संगठन में ही उलझी है. कांग्रेस प्रभारी के बाद प्रदेश अध्यक्ष बदलती है तो मामला सुलझने से ज्यादा कहीं उलझ न जाए और फिर से उसे कहीं 'चेकमेट' का सामना न करना पड़ जाए?

    पांच साल पहले वाली गलती दोहरा रही कांग्रेस
    पंजाब में कांग्रेस एक बार फिर उसी मुकाम पर खड़ी है, जिसने 2021 में पार्टी को गहरे राजनीतिक संकट में डाल दिया था. उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच चली लंबी खींचतान ने कांग्रेस को कमजोर कर दिया था. पार्टी नेतृत्व ने संगठन में अचानक बदलाव किए थे. मुख्यमंत्री से लेकर प्रदेश अध्यक्ष तक बदल दिए थे, लेकिन नतीजा यह हुआ कि पार्टी पूरी तरह बिखर और आम आदमी पार्टी (AAP) ने प्रचंड बहुमत हासिल कर कांग्रेस का किला ढहा दिया। 

    2022 में कांग्रेस को करारी मात खानी पड़ी थी. अब फिर कुछ वैसे ही हालत नजर आ रहे हैं. इस बार पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है. साल 2021 में कांग्रेस ने इसी तरह की गुटबाजी को खत्म करने के लिए बदलाव किया था. अब फिर से कांग्रेस बदलाव कर मामले को सुलझाने की कवायद शुरू की है, जिसमें भूपेश बघेल को हटाकर सचिन पायलट को प्रभारी बनाया है। 

    चुनावी माहौल में बदलाव महंगा न पड़ जाए
    कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष को लेकर भी बदलने की चर्चा है, लेकिन यह बदलाव 2021 की तरह महंगा न पड़ जाए. पंजाब विधानसभा चुनाव को अब छह महीने से भी कम समय है. कांग्रेस हाईकमान ने करीब दो महीने के सियासी मंथन के बाद और राहुल गांधी ने पंजाब के एक-एक नेता से दिल्ली में बैठक कर फीडबैक लिया. इसके बाद एक जुलाई को राजा वडिंग को प्रदेश अध्यक्ष और चरणजीत सिंह चन्नी को कैंपेन कमेटी का चेयरमैन नियुक्त किया. इसके बाद से चन्नी गुट ने वड़िंग को हटाने की मांग उठा दी, जो सियासी टेंशन का सबब बना हुआ। 

    बता दें कि पंजाब के 2022 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को सिर्फ 18 सीटें मिली थी, जो राज्य में पार्टी का अब तक का सबसे खराब प्रदर्शन रहा था. आम आदमी पार्टी ने 92 सीटों के साथ शानदार जीत हासिल कर सरकार बनाई थी। 2022 के बाद कांग्रेस में कोई नेता प्रदेश अध्यक्ष की कमान लेने को तैयार नहीं था. ऐसे में राहुल गांधी ने राजा वडिंग को प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया था। 

    राजा वडिंग ने पंजाब में सिर्फ संगठन की बागडोर ही नहीं संभाली बल्कि 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को राज्य की 13 में से 7 लोकसभा सीटें जिताकर अपना लोहा भी मनवाया था, जबकि चरणजीत चन्नी 2022 के चुनाव हार के बाद पंजाब छोड़कर विदेश चले गए थे और रंधावा राजस्थान का प्रभार संभाल रहे थे. ऐसे में राजा वडिंग ने काफी मशक्कत कर कांग्रेस को खड़ा किया, लेकिन 2027 चुनाव की सियासी सरगर्मी बढ़ने के साथ ही चन्नी ने प्रदेश अध्यक्ष बदलने का मोर्चा खोल दिया है। 

    चन्नी समर्थक विधानसभा चुनाव से पहले उन्हें मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित करने और वडिंग को हटाने की मांग को लेकर पार्टी नेतृत्व पर दबाव बना रहे हैं. ऐसे में प्रभारी रहे भूपेश बघेल गुटबाजी को दूर करने में नाकाम रहे और विवाद इतना बढ़ा कि पार्टी आलाकमान को सचिन पायलट को नया प्रभारी नियुक्त करना पड़ा. इसके बाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष को बदलने की चर्चा चल रही है, लेकिन चुनाव से ठीक पहले बिहार में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष को बदलकर अपना हश्र देख चुकी है. ऐसे में क्या पंजाब में जोखिम भरा कदम उठाएगी?

    पंजाब की सत्ता में वापसी पर कहीं न लग जाए ग्रहण
    पंजाब की सियासत का इतिहास गवाह है कि जब-जब कांग्रेस ने विधानसभा चुनावों से ठीक पहले शीर्ष नेतृत्व और प्रदेश अध्यक्ष के चेहरे पर अनिश्चितता पैदा की है, तब-तब उसे भारी नुकसान उठाना पड़ा है. चन्नी खेमे की मांग है कि राज्य में दलित वोटों और समीकरणों को ध्यान में रखते हुए नेतृत्व में बदलाव किया जाए या चन्नी को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जाए। 

    वहीं, कांग्रेस हाईकमान के सामने जाट सिख और दलित नेतृत्व के बीच संतुलन साधने की बड़ी चुनौती बनी हुई है. पिछले 2022 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने जाट सिख की जगह चन्नी को आगे कर दलित दांव खेला था, लेकिन सफल नहीं रहा. कांग्रेस का परंपरागत मतदाता जाट सिख नाराज होकर आम आदमी पार्टी के साथ चला गया. चन्नी अपने दलित समुदाय को भी साधकर नहीं रख सके। 

    पंजाब में जाट सिख और दलित केमिस्ट्री में उलझी
    पंजाब में जाट सिख का दांव हमेंशा सफल रहा है. आजादी के बाद से पंजाब में जब-जब कांग्रेस ने जाट सिख चेहरे को आगे कर चुनाव लड़ा, पार्टी को पूर्ण बहुमत के साथ बड़ी सफलता मिली. 2002 और 2017 के विधानसभा चुनावों में जाट सिख नेतृत्व ने मालवा, माझा और दोआबा के ग्रामीण क्षेत्रों में कांग्रेस का आधार मजबूत किया। 

    पंजाब की ग्रामीण आबादी, कृषि अर्थव्यवस्था और किसान-समर्थित वोट बैंक में जाट सिख समुदाय का दबदबा माना जाता है. इस वर्ग से चेहरा आगे करने पर अकाली दल और आम आदमी पार्टी के पारंपरिक ग्रामीण वोट बैंक में सेंध लगाना आसान रहता है। 

    2022 में पार्टी ने चुनावों से ठीक पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह को हटाकर चरणजीत सिंह चन्नी (जो रामदासिया दलित सिख समुदाय से आते हैं) को मुख्यमंत्री बनाया था, इसके बाद भी दलित समाज का वोट कांग्रेस को नहीं मिल सका। 

    पंजाब में लगभग 32 फीसदी दलित आबादी होने के बावजूद यह प्रयोग चुनावी जीत में नहीं बदल सका. कांग्रेस को 2022 में अब तक की सबसे बड़ी हार का सामना करना पड़ा और पार्टी केवल 18 सीटों पर सिमट गई. ग्रामीण जाट सिख वोटों का एक बड़ा हिस्सा आम आदमी पार्टी (भगवंत मान – जाट सिख चेहरा) की तरफ शिफ्ट हो गया. ऐसे में कांग्रेस ने जाट सिख चेहरे के तौर पर अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को आगे किया। इसका नतीजा 2024 के लोकसभा चुनाव में दिखा, जब कांग्रेस 7 सीटें जीतने में सफल रही। 

    2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के अंदर जारी खींचतान के पीछे यही बहस है कि क्या कांग्रेस को अपने कोर जाट सिख फॉर्मूले पर ही कायम रहना चाहिए या दलित नेतृत्व को दोबारा बड़ी जिम्मेदारी देकर नया सामाजिक समीकरण तैयार करना चाहिए. सचिन पायलट के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यही है कि वे बिना कोई बड़ा नुकसान किए सभी धड़ों को एक मंच पर लाएं, वरना इतिहास खुद को दोहराने में देर नहीं लगााएगा। 

  • पैकेज्ड फूड लेबलिंग में देरी पर SC सख्त, FSSAI से मांगा जवाब; नमक-सोडियम डेटा पर उठे सवाल

    पैकेज्ड फूड लेबलिंग में देरी पर SC सख्त, FSSAI से मांगा जवाब; नमक-सोडियम डेटा पर उठे सवाल

     नई दिल्ली

    सुप्रीम कोर्ट ने पैकेज्ड फूड पर चेतावनी लेबल को लेकर एफएसएसएआई से नाराजगी जताई है. कोर्ट ने पूछा है कि पैकेजिंग पर चेतावनी में देरी क्यों हो रही है. अदालत ने इस मामले में और जानकारी मांगी है. साथ ही यह भी पूछा गया कि नमक और सोडियम की मात्रा को लेकर चेतावनी को लेकर क्या फैसला हुआ है। 

    सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि पहले हुई बैठक में स्टेकहोल्डर्स के साथ एफएसएसएआई ने कुछ बातों पर सहमति जताई थी, लेकिन अब वह अपनी बात से पलट गया है. वकील ने कहा कि आज एफएसएसएआई ने पूरी तरह यू टर्न ले लिया है, जो पहले तय हुआ था उससे अलग रुख अपना लिया है। 

    इस मामले में सीनियर एडवोकेट मनिंदर सिंह ने अदालत में अपनी दलील रखी. उन्होंने बताया कि आईसीएमआर की गाइडलाइंस में दो श्रेणियां तय की गई हैं. उन्होंने सुझाव दिया कि खाने की चीजों की जांच खास शर्तों के आधार पर होनी चाहिए. यानी टेस्टिंग सौ ग्राम की मात्रा पर और साथ ही हर सर्विंग की मात्रा पर भी होनी चाहिए, ताकि उपभोक्ता को सही जानकारी मिल सके। 

    जस्टिस पारदीवाला ने कहा कि अदालत ने भी इस विषय पर अपने स्तर पर अध्ययन किया है. उन्होंने बताया कि आज इस मामले में आदेश पारित किया जाएगा, जो शाम तक या फिर कल तक अपलोड हो जाएगा. जस्टिस पारदीवाला ने वकीलों से कहा कि वे इस आदेश का अध्ययन करें और उसके बाद अदालत में वापस आएं. साथ ही यह भी कहा गया कि एफएसएसएआई और केंद्र सरकार भी इस आदेश को ध्यान से पढ़ें, ताकि आगे की सुनवाई में इस पर सही तरीके से बात हो सके। 

    यह मामला पैकेज्ड फूड प्रोडक्ट्स पर हेल्थ वार्निंग लेबल से जुड़ा है, जिसमें अधिक चीनी, नमक और वसा की मात्रा की जानकारी उपभोक्ताओं तक साफ तरीके से पहुंचाने की मांग की गई है। 

  • मातृशक्ति के सम्मान से गढ़ता यूपी का नया भविष्य

    मातृशक्ति के सम्मान से गढ़ता यूपी का नया भविष्य

    मातृशक्ति के सम्मान से गढ़ता यूपी का नया भविष्य

    हमारे धार्मिक ग्रंथों में नारी को शक्ति कहा गया है। यह शक्ति केवल पूजने से नहीं आती, बल्कि उसे अवसर, अधिकार और सम्मान देकर उसकी ऊर्जा को राष्ट्र निर्माण से जोड़ने से प्रस्फुटित होती है। नारी शक्ति, सृजन और समाज की धुरी है जिसे उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता’ के भाव से आगे बढ़ा रही है, जो हमारी सनातन सभ्यता की मूल चेतना का उदघोष है। किंतु नारी का असली सम्मान तब तक पूर्ण नहीं होता, जब तक कि उसके श्रम का सम्मान न किया जाए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं के मानदेय में बढ़ोतरी करके सम्मान की इस श्रृंखला को आगे बढ़ाया है। सरकार के इस फैसले के सामाजिक अर्थ बहुत व्यापक हैं। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को राज्य की सरकारी व्यवस्था की महज एक इकाई के रूप में नहीं देखा जा सकता। वे गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य तथा प्रारंभिक देखभाल की पहली पंक्ति में खड़ी होती हैं। उनके श्रम का सम्मान वस्तुतः आने वाली पीढ़ी के बेहतर भविष्य का सम्मान है।

    यह विडंबना ही है कि एक दशक पहले तक यूपी की सरकारें नारी के सम्मान की बात तो करती रहीं, लेकिन व्यवहार में उन्हें हाशिये पर ही धकेला जाता रहा। चाहे वह श्रम का प्रतिफल हो या सामाजिक सुरक्षा का अधिकार, हमेशा उनकी अनदेखी हुई। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका और रसोइया जैसी लाखों महिलाएं समाज की नींव को सींचती रहीं, पर बदले में उन्हें वह सब नहीं मिला जिसकी वे वास्तविक रूप से हकदार रहीं। यही वह पृष्ठभूमि है जिसमें योगी सरकार के नारी सम्मान को केंद्र में रखकर लिए गए फैसले महत्वपूर्ण हो जाते हैं। वह चाहे आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों का मानदेय बढ़ाना हो, रसोइयों को उनके श्रम का सही प्रतिदान दिया जाना हो, साठ वर्ष या उससे अधिक आयु की महिलाओं को निःशुल्क बस यात्रा की सुविधा देना हो, स्नातक की छात्राओं को स्कूटी देने की घोषणा हो या फिर ग्रामीण महिलाओं को विभिन्न योजनाओं के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाना हो, सभी में एक व्यापक संदेश है। यह संदेश योगी सरकार की सोच का प्रतिबिंब है कि नारी सहायता की पात्र नहीं है, वह विकास की शक्ति है। सरकार की नीतियों में मातृशक्ति का सम्मान अब घोषणाओं से आगे बढ़कर मानदेय, सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, गतिशीलता और कानून-व्यवस्था जैसे क्षेत्रों में स्पष्ट दिखाई देता है।
     
    आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के मानदेय में वृद्धि और उन्हें कैशलेस इलाज की सुविधा की बात करते हैं। यह सिर्फ एक निर्णय भर नहीं, व्यवस्थागत परिवर्तन का संदेश है जिसमें मानवीय संवेदना के साथ नारी गरिमा और श्रम का सम्मान है। 2017 में आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों को महज तीन हजार रुपये मानदेय मिलता था। योगी सरकार ने इसे परफॉर्मेंस आधारित व्यवस्था से जोड़ते हुए आठ हजार रुपये किया। अब इसे बढ़ाकर 12 हजार रुपये किया गया। सहायिकाओं का मानदेय भी 1,500 रुपये से बढ़ाकर पहले चार हजार और अब छह हजार रुपये किया गया। इसके साथ ही कैशलेस इलाज की सुविधा इन्हें स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं से मुक्त करेगी। ये सब इसके हकदार थे क्योंकि इनका सेवा भाव अतुलनीय है। याद करें कोरोना काल की महामारी को, ये आंगनवाड़ी कार्यकत्रियां ही थीं जिन्होंने अपनी जान जोखिम में डालते हुए गांव-गांव स्क्रीनिंग से लेकर दस्तक अभियान और संक्रमित लोगों की सेवा की।

    सीएम योगी ने कहा कि सभी आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं के साथ उनके परिवार को हर वर्ष पांच लाख रुपये तक कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा मिलेगी। इसका लाभ इम्पैनल्ड अस्पतालों के साथ सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में लिया जा सकेगा। मुख्यमंत्री ने सम्मान भाव में ही इनके लिए अब दो से तीन साड़ियों की व्यवस्था की है।नएक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता केवल एक सरकारी कर्मचारी नहीं होती, वह समाज की उस पहली कड़ी की तरह होती है जो गर्भवती माताओं से लेकर नवजात शिशुओं तक की देखभाल का दायित्व निभाती है। जब यह कड़ी सशक्त होती है, तो पूरा सामाजिक ताना-बाना मजबूत होता है।

    इसी क्रम में योगी सरकार के एक और निर्णय की चर्चा जरूरी है। मुख्यमंत्री ने रक्षाबंधन से पहले प्रदेश की 3.54 लाख रसोइया बहनों को जो चार बड़े उपहार दिए, वे भी भावनात्मक और व्यावहारिक, दोनों दृष्टि से उल्लेखनीय हैं। रसोइया माताओं-बहनों का मानदेय 2 हजार से बढ़ाकर 3 हजार रुपये करना, दुर्घटना की स्थिति में स्टेट बैंक के माध्यम से दो लाख रुपये की सहायता और प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये तक की मुफ्त कैशलेस चिकित्सा सुविधा देना, तथा परिधान राशि को दोगुना कर 500 से 1000 रुपये करना। ये सभी निर्णय महिलाओं की समग्र सामाजिक सुरक्षा की चिंता करते हैं।

    नारी सशक्तीकरण की यह यात्रा यहीं नहीं रुकती। लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति यात्रा योजना का शुभारंभ इस बात का प्रतीक है कि सरकार वृद्ध महिलाओं की गतिशीलता और स्वतंत्रता को भी उतना ही महत्व देती है जितना युवा पीढ़ी के सपनों को। साठ वर्ष या उससे अधिक आयु की महिलाओं को निःशुल्क बस यात्रा की सुविधा देना एक ऐसा कदम है जो उन्हें आर्थिक निर्भरता से मुक्त कर सामाजिक जीवन में सक्रिय भागीदार बनाता है। दूसरी ओर, स्नातक में अध्ययनरत 50 हजार बेटियों को अक्टूबर-नवंबर में स्कूटी प्रदान करने की योजना युवा छात्राओं के सपनों को पंख देने जैसी है। शिक्षा तक पहुंच और गतिशीलता, दोनों को सुनिश्चित करती यह पहल बेटियों के आत्मविश्वास को नई ऊंचाई देगी।

    सामाजिक सुरक्षा की दृष्टि से देखें तो 40.34 लाख निराश्रित महिलाओं को नियमित मासिक पेंशन मिलना और इस पेंशन राशि को 1000 से बढ़ाकर 1500 रुपये प्रतिमाह करने का निर्णय अकेली, विधवा या परित्यक्ता महिलाओं के लिए संबल का काम करता है। सक्षम आंगनबाड़ी और पोषण 2.0 योजना के अंतर्गत 22 लाख से अधिक गर्भवती और धात्री महिलाओं को हर माह राशन मिलना, और रेसिपी आधारित पुष्टाहार लागू करने वाला देश का पहला राज्य बनना, उत्तर प्रदेश की उस दूरदर्शिता को दर्शाता है जो मातृत्व और शिशु स्वास्थ्य को प्राथमिकता देती है। आर्थिक सशक्तीकरण के आयाम में लखपति दीदी योजना के अंतर्गत 18.55 लाख से अधिक महिलाओं का लखपति बनना, 40 हजार सक्रिय बीसी सखियों द्वारा 44,453 करोड़ रुपये से अधिक के वित्तीय लेनदेन का रिकॉर्ड बनाना, तथा 15,409 विद्युत सखियों द्वारा 3,207 करोड़ रुपये का बिल संकलन करना, उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था का नया चेहरा है।
     
    किसी भी समाज या राष्ट्र का विकास तब तक अधूरा रहता है जब तक उसकी आधी आबादी बराबरी और सम्मान के साथ आगे नहीं बढ़ती। योगी सरकार ने नारी गांव की अर्थव्यवस्था, विद्यालय की चेतना, अस्पताल की सेवा और सुरक्षा तंत्र की रीढ़ बनाया है। दिशा और नीयत स्पष्ट है। प्रदेश सरकार के ये निर्णय स्पष्ट रूप से दिखाते हैं कि नारी कल्याण अब कोई कोरा नारा नहीं, बल्कि नीति का केंद्रीय बिंदु है। यहां नीति और नीयत का फासला सिमटता दिख रहा है।

    –    अमिता मिश्रा, वरिष्ठ पत्रकार

  • इंदौर को मिलेगी बड़ी सौगात, रीगल-गांधी हॉल के बीच बनेंगे तीन-तीन लेन के दो रेलवे ओवरब्रिज

    इंदौर को मिलेगी बड़ी सौगात, रीगल-गांधी हॉल के बीच बनेंगे तीन-तीन लेन के दो रेलवे ओवरब्रिज

     इंदौर 

    रीगल से गांधी हॉल के बीच मौजूदा शास्त्री बिज के स्थान पर तीन-तीन लेन के दो अलग-अलग रेलवे ओवर ब्रिज बनाए जाएंगे। पूर्व में जहां शास्त्री ब्रिज को हटाकर उसके स्थान पर एक ही ब्रिज बनाकर उस पर से वाहनों की आने-जाने की व्यवस्था करने की बात कही जा रही थी। अब रेलवे द्वारा मौजूदा शास्त्री ब्रिज के समानांतर ही दूसरा ब्रिज बनाने की योजना बनाई जा रही है।

    यह ब्रिज शास्त्री ब्रिज के समानांतर बनेगा। रीगल की ओर जज बंगलों के पास से होकर यह गांधी हॉल परिसर में उतरेगा। इन दोनों ब्रिजों के निर्माण का जिम्मा इंदौर विकास प्राधिकरण को दिया जाएगा। फिलहाल रेलवे के अफसरों द्वारा आईडीए को इसके लिए प्रस्ताव दिया गया है।

    गुरुवार को इस संबंध में सांसद शंकर लालवानी की अध्यक्षता में आईडीए व रेलवे के अफसरों की बैठक हुई। बैठक में तय हुआ कि सिंहस्थ तक मौजूदा शास्त्री ब्रिज के समानांतर रेलवे ओवर ब्रिज बनाया जाएगा। इसके बनने के बाद शास्त्री ब्रिज को तोड़कर नया ब्रिज बनाया जाएगा। दोनों ब्रिज की ऊंचाई मौजूदा शास्त्री ब्रिज से अधिक रहेगी।

    175 करोड़ में तैयार होंगे दोनों ब्रिज

    रेलवे द्वारा अभी तक शास्त्री ब्रिज को तोड़कर नया ब्रिज बनाने पर 120 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना थी। अब शास्त्री ब्रिज के सामानांतर नया ब्रिज बनाने पर 50 से 55 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया जा रहा है। इस तरह दोनों ब्रिज का निर्माण 175 करोड़ में हो सकेगा।

    तीन-तीन लेन के होंगे दोनो ब्रिज

    नई योजना के तहत शास्त्री ब्रिज के स्थान पर बनाए जाने वाला ब्रिज तीन लेन का होगा और उसके समानांतर बनने वाला ब्रिज भी तीन लेन का होगा। पूर्व में बनने वाले ब्रिज पर जगह कम होने के कारण पैदल चलने वालों के लिए अलग से फुटओवर ब्रिज बनाने की योजना थी।

    अब वो फुटओवर ब्रिज नहीं बनेगा और दोनों ब्रिज पर फुटपाथ का निर्माण किया जा सकेगा। शास्त्री ब्रिज के स्थान पर बनने वाले ब्रिज की चौड़ाई 10.3 मीटर होगी। वही इसके समानांतर बनने वाले ब्रिज की चौड़ाई 9 से 9.30 मीटर होगी। जब दोनों ब्रिज तैयार हो जाएंगे तो आने व जाने के लिए अलग-अलग ब्रिज का उपयोग होगा।

    दो से तीन माह में रेलवे बोर्ड से मिलेगी स्वीकृति

    पूर्व में रेलवे ही शास्त्री ब्रिज को तोड़कर नया ब्रिज बनाने वाला था। इसके लिए बजट तय होने के साथ रेलवे बोर्ड से मंजूरी भी मिल गई थी। अब दूसरा समानांतर ब्रिज बनाने का निर्णय लिया गया और निर्माण का जिम्मा भी आईडीए को दिया जा रहा है। दोनों ब्रिज में रेलवे वाले हिस्से के कार्य का सुपरविजन रेलवे विभाग द्वारा किया जाएगा।

    आईडीए दोनों ब्रिज का निर्माण करेगा

    रेलवे दोनो ब्रिज के निर्माण की राशि आईडीए को देगा और आईडीए दोनों ब्रिज का निर्माण करेगा। ऐसे में नया ब्रिज बनाने के लिए अभी रेलवे बोर्ड से मंजूरी मिलने में दो से तीन माह का समय लगेगा। इधर गुरुवार को शहर में हुई आइडीए की अफसरों की बैठक में आईडीए के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. परीक्षित संजय राव झाड़े ने नए ब्रिज के निर्माण के लिए सर्वे कार्य शुरू करने के निर्देश दिए। सर्वे के आधार पर ब्रिज के अलाइनमेंट, संरचना, ऊंचाई, चौड़ाई, यातायात प्रबंधन सहित अन्य तकनीकी पहलुओं को अंतिम रूप दिया जाएगा।

     

  • धमतरी के शशिकांत की जिंदगी बदलेगी, 10 साल पुराने हादसे के बाद CM साय AIIMS में कराएंगे इलाज

    धमतरी के शशिकांत की जिंदगी बदलेगी, 10 साल पुराने हादसे के बाद CM साय AIIMS में कराएंगे इलाज

     धमतरी

     करीब 10 साल पहले हुए सड़क हादसे ने धमतरी जिले के देवपुर निवासी शशिकांत भरत की जिंदगी बदल दी। 11 नवंबर 2016 को ग्राम दुगली के पास धमतरी से लौटते समय शाम करीब पांच से छह बजे के बीच हुए हादसे में उन्हें गंभीर चोटें आईं। हालत इतनी गंभीर थी कि वे करीब 50 दिनों तक कोमा में रहे।

    हादसे के बाद सर्वाइकल संबंधी समस्या के कारण उनके हाथ-पैरों की कार्यक्षमता प्रभावित हो गई। आज भी वे स्वयं चलने-फिरने, उठने-बैठने और दैनिक कार्य करने में सक्षम नहीं हैं। उनकी देखभाल मुख्य रूप से उनकी मां करती हैं।

    सोशल मीडिया वीडियो देख CM विष्णुदेव साय ने बढ़ाया मदद का हाथ

    शशिकांत की जिंदगी में अब उपचार की नई उम्मीद जगी है। सोशल मीडिया पर उनका वीडियो सामने आने के बाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को उनकी परेशानी की जानकारी मिली। मुख्यमंत्री ने तत्काल शशिकांत से फोन पर बातचीत कर स्वास्थ्य की स्थिति जानी और हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।

     

  • जनकल्याण और जनभागीदारी का व्यापक अभियान बने ‘सेवा संकल्प अभियान’ : मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय

    जनकल्याण और जनभागीदारी का व्यापक अभियान बने ‘सेवा संकल्प अभियान’ : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

    रायपुर 

     मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा कि 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक आयोजित होने वाला ‘सेवा संकल्प अभियान’ जनकल्याण और जनभागीदारी का व्यापक अभियान बने। अभियान के अंतर्गत स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, रोजगार और विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से जुड़ी गतिविधियों के माध्यम से अधिक से अधिक नागरिकों को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाया जाए। मुख्यमंत्री  साय ने आज सेवा संकल्प अभियान की तैयारियों को लेकर आयोजित कॉन्फ्रेंस में अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि अभियान के प्रत्येक कार्यक्रम के केंद्र में आम नागरिक और उसकी जरूरतें होनी चाहिए। पात्र हितग्राहियों को योजनाओं से जोड़ने, युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने, स्वास्थ्य सेवाओं को लोगों के करीब पहुंचाने और जनसमस्याओं के त्वरित निराकरण पर विशेष ध्यान दिया जाए।

    मुख्यमंत्री  साय ने सभी जिला कलेक्टरों से अभियान की तैयारियों की नियमित समीक्षा करने और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय के साथ कार्यक्रमों को सुनियोजित ढंग से संपन्न कराने को कहा। उन्होंने कार्यक्रमों की पूर्व सूचना आम नागरिकों तक पहुंचाने और अधिक से अधिक जनभागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

    सेवा सेतु शिविरों में पात्र हितग्राहियों को मौके पर मिलेगा योजनाओं का लाभ

    मुख्यमंत्री  साय ने ‘सेवा सेतु’ अभियान को जनकल्याण की दृष्टि से प्रभावी बनाने पर विशेष जोर दिया। अभियान के अंतर्गत चयनित गांवों में स्वास्थ्य शिविर के साथ ही विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के पात्र हितग्राहियों को चिन्हित कर योजनाओं से जोड़ा जाएगा और उनकी समस्याओं का यथासंभव मौके पर निराकरण किया जाएगा।

    शिविर स्थलों पर आवेदन प्राप्त करने के लिए काउंटर स्थापित किए जाएंगे। प्राप्त आवेदनों की डिजिटल मॉनिटरिंग की जाएगी। जिन समस्याओं का तत्काल निराकरण संभव नहीं होगा, उनकी साप्ताहिक समीक्षा कर समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि शिविर आयोजित होने से पहले ही संबंधित क्षेत्र के संभावित पात्र हितग्राहियों की पहचान की जाए, ताकि शिविर के दौरान उन्हें योजनाओं का अधिकतम लाभ दिलाया जा सके। उन्होंने कहा कि शिविरों की जानकारी पहले से गांवों और नागरिकों तक पहुंचाई जाए, जिससे अधिक से अधिक लोग इनमें शामिल हो सकें।

    रोजगार मेलों से युवाओं को मिलेंगे रोजगार के अवसर

    मुख्यमंत्री  साय ने कौशल विकास विभाग द्वारा आयोजित किए जाने वाले रोजगार मेलों को भी सेवा संकल्प अभियान से जोड़ने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि रोजगार मेलों के माध्यम से बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार से जोड़ने का प्रयास किया जाए।

    उन्होंने अधिकारियों से कहा कि युवाओं से आवेदन प्राप्त कर रोजगार के अवसरों से जोड़ने की प्रक्रिया प्रभावी ढंग से पूरी की जाए और चयनित युवाओं को शिविरों में नियुक्ति पत्र प्रदान किए जाएं।

    आंगनबाड़ियों में पोषण और सामुदायिक सहभागिता पर विशेष जोर

    ‘आंगन मिलन’ कार्यक्रम के माध्यम से आंगनबाड़ी केंद्रों में स्वस्थ शिशु प्रतियोगिता, ‘मेरी पौष्टिक थाली’, चित्रकला प्रतियोगिता, न्योता भोज तथा फल एवं मिठाई वितरण जैसी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।

    मुख्यमंत्री  साय ने पोषण चौपालों में अधिक से अधिक माता-पिता की भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। महतारी वंदन योजना का लाभ लेकर अपने जीवन में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करने वाली महिलाओं को भी सम्मानित किया जाएगा।

    आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के लिए खिलौने उपलब्ध कराने में सामुदायिक सहभागिता को प्रोत्साहित किया जाएगा। शहरी क्षेत्रों में भी नागरिकों को आंगनबाड़ियों में बच्चों के उपयोग के लिए खिलौने भेंट करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। अभियान के दौरान प्रदेश के शासकीय, निजी और अनुदान प्राप्त विद्यालयों में चित्रकला और भाषण प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। इनमें विद्यार्थियों के साथ उनके अभिभावकों, शाला प्रबंधन समितियों, पंचायत प्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

    मुख्यमंत्री  साय ने शाला प्रबंधन समितियों को इन कार्यक्रमों से सक्रिय रूप से जोड़ने के निर्देश दिए। 11वीं और 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों को नुक्कड़ नाटकों जैसी रचनात्मक गतिविधियों से भी जोड़ा जाएगा। विशेष उपलब्धि प्राप्त दिव्यांग बच्चों को अपने हुनर और प्रतिभा के प्रदर्शन के लिए मंच उपलब्ध कराया जाएगा।

    रक्तदान, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ेगी जनभागीदारी

    ‘सेवा मेरा योगदान’ कार्यक्रम के अंतर्गत रक्तदान, वृक्षारोपण, प्लास्टिक मुक्त अभियान, स्वच्छता तथा जनसरोकार से जुड़ी 25 से अधिक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। नदी घाटों की स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था, वृक्षारोपण और सौंदर्यीकरण पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।

    कार्यक्रमों के बाद भी स्वच्छता व्यवस्था बनी रहे, इसके लिए स्थानीय स्तर पर समितियां गठित करने के निर्देश दिए गए हैं। ‘स्वच्छता ही सेवा’ के अंतर्गत शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में आयोजित होने वाली स्वच्छता गतिविधियों को भी अभियान से जोड़ा जाएगा।

    ‘एक पेड़ मां के नाम’ के तहत होगा वृक्षारोपण

    मुख्यमंत्री  साय ने अभियान के दौरान किए जाने वाले वृक्षारोपण को ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान से जोड़ने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जल संरचनाओं, सार्वजनिक स्थलों और अन्य उपयुक्त स्थानों पर व्यापक वृक्षारोपण किया जाए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि 17 अक्टूबर को ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान का समापन कार्यक्रम आयोजित किया जा सकता है। इस वर्ष प्रदेश में 2.5 करोड़ पौधे लगाने के निर्धारित लक्ष्य को भी पूरा किया जाएगा।

    विकास के प्रतीक स्थलों को भी जनभागीदारी से जोड़ें

    मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा कि सेवा संकल्प अभियान की वास्तविक सार्थकता तभी होगी, जब इसकी गतिविधियों का लाभ सीधे लोगों तक पहुंचे। स्वास्थ्य शिविर में जरूरतमंद को उपचार मिले, पात्र परिवार योजनाओं से जुड़े, युवाओं को रोजगार मिले, बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिले और स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण में समाज की सक्रिय भागीदारी बढ़े।

    उन्होंने सभी जिलों के कलेक्टरों और संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलने वाले अभियान को पूरी संवेदनशीलता और सुनियोजित कार्ययोजना के साथ संचालित करें तथा यह सुनिश्चित करें कि जनकल्याण से जुड़ी गतिविधियों का अधिकतम लाभ प्रदेशवासियों तक पहुंचे।

    इस अवसर पर मुख्य सचिव  विकास शील, अपर मुख्य सचिव  मनोज पिंगुआ, अपर मुख्य सचिव मती ऋचा शर्मा मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव  सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव  पी. दयानंद सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।

  • योगी सरकार का जल प्रबंधन मॉडल बदलेगा बुंदेलखंड की कृषि व्यवस्था, खेतों तक पहुंचेगी इजराइली तकनीक

    योगी सरकार का जल प्रबंधन मॉडल बदलेगा बुंदेलखंड की कृषि व्यवस्था, खेतों तक पहुंचेगी इजराइली तकनीक

    लखनऊ

     बुंदेलखंड में जल संकट की चुनौती से निपटने के लिए योगी सरकार का इंडिया-इजराइल बुंदेलखंड वाटर प्रोजेक्ट अब केवल जलाशय और सिंचाई ढांचा तैयार करने तक सीमित नहीं है। झांसी के गंगावली में चल रहे मिनी पायलट प्रोजेक्ट के जरिए अब यह परखा जा रहा है कि उपलब्ध पानी का वैज्ञानिक प्रबंधन कर कम पानी में अधिक और बेहतर कृषि उत्पादन कैसे हासिल किया जा सकता है। परियोजना के अगले चरण में ड्रिप, स्प्रिंकलर, ऑटोमेटेड इरिगेशन, सोलर पंपिंग, वाटर बजटिंग और संरक्षित खेती जैसी तकनीकों को स्थानीय परिस्थितियों में परखा जाएगा।

    नमामि गंगे और ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के विशेष सचिव एवं निदेशक, भूगर्भ जल विभाग डॉ. राजेश कुमार प्रजापति ने कहा कि सबसे खास बात यह है कि परियोजना में ‘जितना पानी उपलब्ध, उसी के अनुरूप खेती’ की अवधारणा को बढ़ावा देने की तैयारी है। पांड वाटर बजटिंग के जरिए तालाब में उपलब्ध उपयोगी पानी का आकलन किया जाएगा और उसी आधार पर फसल क्षेत्र व गर्मी की फसलों के लिए पानी की सीमा तय करने का प्रस्ताव है। इससे जरूरत से ज्यादा पानी निकालने के बजाय उपलब्ध जल का अधिकतम उत्पादक उपयोग किया जा सकेगा।

    पानी के हिसाब से तय होगी खेती की योजना

    बुंदेलखंड जैसे जल-संवेदनशील क्षेत्र में वाटर बजटिंग को परियोजना की महत्वपूर्ण कड़ी बनाया जा रहा है। प्रशिक्षण कार्यक्रमों में किसानों को तालाब के पानी का हिसाब-किताब और संतुलन तैयार करने की जानकारी दी जाएगी। उपलब्ध उपयोगी पानी के आधार पर फसल क्षेत्र निर्धारित करने और गर्मी की फसलों के लिए वाटर सीलिंग तय करने की व्यवस्था प्रस्तावित है। इसका सीधा फायदा यह होगा कि खेती की योजना उपलब्ध जल संसाधनों को ध्यान में रखकर बनाई जाएगी। अनियंत्रित सिंचाई और जरूरत से अधिक पानी निकालने के बजाय जल-बजट आधारित सिंचाई को बढ़ावा मिलेगा। इससे सीमित जल का बेहतर उपयोग करते हुए कृषि उत्पादकता बढ़ाने की संभावना बनेगी।

    भूजल की स्थिति पर भी रखी जाएगी वैज्ञानिक नजर

    डॉ. राजेश कुमार प्रजापति ने कहा कि परियोजना के शुरुआती चरण में भूजल स्तर में सुधार को लेकर अभी कोई मात्रात्मक निष्कर्ष स्पष्ट रूप से सामने नहीं आया है। हालांकि, भविष्य में वास्तविक प्रभाव का वैज्ञानिक मूल्यांकन करने के लिए बोरवेल और ऑब्जर्वेशन वेल की व्यवस्था की गई है। इनके माध्यम से जल स्रोत और जल उपयोग की निगरानी की जाएगी।

    परियोजना में प्री-प्रोजेक्ट और पोस्ट-प्रोजेक्ट भूजल आंकड़ों की तुलना कर यह आकलन करने की तैयारी है कि जल दक्षता बढ़ाने वाली व्यवस्थाओं से भूजल पर दबाव कितना कम होता है। यानी परियोजना का मूल्यांकन केवल दावों के आधार पर नहीं, बल्कि आंकड़ों के आधार पर करने की व्यवस्था तैयार की जा रही है।

    इजराइली तकनीक का बुंदेलखंड की जमीन पर परीक्षण
    इंडिया-इजराइल सहयोग के तहत माइक्रो इरिगेशन, ड्रिप, स्प्रिंकलर, ऑटोमेटेड इरिगेशन, एससीएडीए, सोलर पंपिंग, रिजर्वायर आधारित जल प्रबंधन, वाटर बजटिंग और संरक्षित खेती जैसी आधुनिक तकनीकों का प्रदर्शन किया जा रहा है। परियोजना का उद्देश्य केवल विदेशी तकनीक को स्थापित करना नहीं है, बल्कि यह देखना है कि बुंदेलखंड की स्थानीय परिस्थितियों में कौन सी तकनीक सबसे ज्यादा प्रभावी साबित होती है। इसके लिए पानी की मात्रा, सिंचाई दक्षता, फसल की पैदावार, खेती की लागत और जल उत्पादकता जैसे मानकों को मापने की व्यवस्था प्रस्तावित है।

    जलाशय से खेत तक पहुंचेगी आधुनिक सिंचाई व्यवस्था

    परियोजना के अगले चरण में जलाशय से खेत तक पाइपलाइन बिछाने, ड्रिपलाइन और स्प्रिंकलर लगाने, ग्रीनहाउस/टनल व सिंचाई स्वचालन प्रणाली को क्रियाशील करने की योजना है। इसके साथ किसानों को खाद एवं उर्वरक के उचित इस्तेमाल, जल बजट तैयार करने, फसल की योजना बनाने और कृषि यंत्रों के संचालन का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इससे किसानों को केवल सिंचाई का नया साधन नहीं मिलेगा, बल्कि पानी, फसल और कृषि लागत को बेहतर तरीके से प्रबंधित करने की तकनीकी जानकारी भी मिलेगी।

    प्रदर्शन खेत से किसानों के अपने खेत तक पहुंचेगा मॉडल

    परियोजना की एक महत्वपूर्ण कड़ी सफल तकनीकों को किसानों के अपने खेतों तक पहुंचाना है। गंगावली के डेमोस्ट्रेशन फार्म यानी प्रदर्शन खेत में जिन तकनीकों और व्यवस्थाओं के बेहतर परिणाम सामने आएंगे, उन्हें किसानों के खेतों में अपनाने और दोहराने का अवसर दिया जाएगा। इससे मिनी पायलट प्रोजेक्ट केवल प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सफल मॉडल को व्यापक स्तर पर किसानों तक ले जाने का आधार तैयार होगा।

    हर फसल और हर बूंद का रखा जाएगा रिकॉर्ड

    परियोजना में निगरानी को केवल निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं रखा गया है। प्रदर्शन खेतों पर फसल उत्पादन, पानी के इस्तेमाल, पानी के समान वितरण, कृषि सामग्री की मात्रा, लागत, सकल लाभ और किसानों द्वारा नई तकनीकों को अपनाने जैसे महत्वपूर्ण मानकों का नियमित रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था प्रस्तावित है।

    खेत से जुड़े अभिलेख डिजिटल रूप में दर्ज किए जाएंगे। मौसम के अनुसार किसानों के परिणामों का सूचना-पटल तैयार करने की भी व्यवस्था प्रस्तावित है। इससे परियोजना के प्रभाव का चरणबद्ध और वैज्ञानिक मूल्यांकन किया जा सकेगा।

    कृषि और भूजल विभागों की भी रहेगी तकनीकी भागीदारी

    भूगर्भ जल विभाग के अधिशासी अभियंता व वैयक्तिक सहायक निदेशक अनुपम ने कहा कि परियोजना के परिणामों के सत्यापन के लिए कृषि, उद्यान और भूजल विभागों को तकनीकी सहयोग से जोड़ने का प्रावधान किया गया है। इससे अलग-अलग विभागों की विशेषज्ञता का इस्तेमाल कर परियोजना के परिणामों को जांचने और आगे की रणनीति तैयार करने में मदद मिलेगी।

  • पाटलिपुत्र सेटेलाइट टाउनशिप में बनेगा ग्रीन-वॉटर नेटवर्क, बाढ़ और जलजमाव से मिलेगी राहत

    पाटलिपुत्र सेटेलाइट टाउनशिप में बनेगा ग्रीन-वॉटर नेटवर्क, बाढ़ और जलजमाव से मिलेगी राहत

    पटना
    पाटलिपुत्र सेटेलाइट टाउनशिप में सिर्फ सड़क, मकान और व्यावसायिक क्षेत्र ही विकसित नहीं होंगे, बल्कि पर्यावरण और जल संरक्षण को भी शहरी विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जाएगा। प्रस्तावित योजना में नदियों, तालाबों, नहरों, पार्कों, जंगलों और खुले क्षेत्रों को आपस में जोड़कर हरित और जल नेटवर्क तैयार करने की योजना है।

    संवेदनशील क्षेत्रों को सुरक्षित रखने पर जोर
    इस पूरी कवायद का मकसद टाउनशिप को बाढ़, जलजमाव और बढ़ती गर्मी जैसी समस्याओं से बचादा है। नगर विकास विभाग के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार प्रस्तावित सेटेलाइट टाउनशिप की योजना में प्राकृतिक जल स्रोतों और पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों को सुरक्षित रखने पर जोर दिया गया है।

    हरित गलियारों और पार्कों को आपस में जोड़कर हरित क्षेत्र विकसित करने पर भी फोकस किया गया है। इससे पेड़-पौधों और दूसरे जीव-जंतुओं के लिए बेहतर वातावरण तैयार होगा।

    बारिश के पानी का होगा बेहतर इस्तेमाल
    टाउनशिप में बारिश के पानी की निकासी के साथ उसके संरक्षण की भी व्यवस्था की जाएगी। बारिश के पानी को जमीन में पहुंचाने की व्यवस्था से भूजल स्तर को बनाए रखने में मदद मिलेगी। इससे आने वाले समय में पानी की जरूरत पूरी करने में भी सहूलियत होगी।

    भारी बारिश के दौरान जलजमाव और बाढ़ का खतरा कम करना भी योजना का प्रमुख उद्देश्य है। साथ ही बढ़ती गर्मी से राहत के लिए अधिक हरित क्षेत्र विकसित कर शहर के तापमान को नियंत्रित करने और हवा की गुणवत्ता सुधार पर भी सरकार का जोर है।

    प्रमुख बातें जिन पर सरकार का जोर
        जलजमाव और बाढ़ का खतरा कम करना।
        भूजल रिचार्ज कर पानी की उपलब्धता बनाए रखना।
        अधिक पेड़-पौधों से गर्मी का असर को कम करना।
        पार्क और खुले क्षेत्र मनोरंजन के साधनों का विकास।
        टाउनशिप में रहने वालों को मिले स्वच्छ हवा, बेहतर पर्यावरण।
        प्राकृतिक जल स्रोतों और जैव विविधता के संरक्षण पर जोर।