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  • इंदौर में कैंसर स्क्रीनिंग का हाईटेक इलाज, रोबोट सिर्फ 12 सेकंड में देगा जांच रिपोर्ट

    इंदौर में कैंसर स्क्रीनिंग का हाईटेक इलाज, रोबोट सिर्फ 12 सेकंड में देगा जांच रिपोर्ट

    इंदौर
     देश भर में तेजी से ओरल कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं. ऐसे में समय रहते बीमारियों की जांच में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस काफी मददगार साबित हो रहा है. रोबोट डिवाइस मुंह से जुड़ी बीमारियों और खासतौर पर कैंसर का पता आसानी से और समय रहते लगा रहा है, जिससे मरीज को बीमारी के गंभीर होने से पहले इलाज मिल सकेगा। 

    हर साल कैंसर की चपेट में आ रहे हजारों लोग
    भारत में धूम्रपान की लत के अलावा, तंबाकू का सेवन और तरह-तरह के जानलेवा शौक से कैंसर के मामले बढ़ते जा रहे हैं. हर साल हजारों मरीज डायग्नोज हो रहे हैं, इनमें से अधिकांश थर्ड और फोर्थ स्टेज कंडीशन में होते हैं. इसलिए इनमें से हर साल 50 हजार लोगों की इलाज के बावजूद बीमारी फैलने के कारण मौत हो जाती है. हॉस्पिटल और ऑन्कोलॉजिस्ट वाले कैंसर सहित कई अन्य गंभीर बीमारियों को प्री स्टेज में पता करने के लिए स्कैन ओ एयर नामक रोबोटिक मशीन का उपयोग कर रहे हैं. यह मशीन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए बीमारी का 96% तक पता लगाने में सक्षम है। 

    फ्री में होगी जांच
    इंदौर स्थित एक निजी अस्पताल में पहली बार यह मशीन स्थपित किया गया है. जहां मुंह की किसी भी समस्या का निशुल्क जांच किया जा रहा है. जांच के बाद फौरन रिपोर्ट मरीज के मोबाइल नंबर में आ जाता है. अस्पताल के ऑन्कोलॉजिस्ट अमय बियानी ने कहा, "अधिकांश मरीजों को यह पता नहीं होता कि उनके मुंह की छोटी सी तकलीफ कभी भी कैंसर का रूप ले सकती है. अस्पताल में किसी भी तरह की तकलीफ में आने वाले लोग अपने मुंह की प्री मेलेनिन स्टेज में ही जांच कर सकें. इसलिए यह रोबोटिक मशीन स्थापित की गई है। 

    ओरल कैंसर के लिए क्रांतिकारी साबित
    इस रोबोटिक मशीन की खोज साल 2020 में पुणे की डेंटिस्ट विधि भानुशाली और रजत कबाड़े ने किया था, इसका उद्देश्य दांतों और मसूड़े की 40 तरह की बीमारियों की पहचान के लिए किया गया था. इस रोबोटिक मशीन से तरह-तरह की मुंह की जांच के अलावा, कैंसर की प्री स्टेज से संबंधित बीमारी और स्थितियां भी डायग्नोज होने लगी हैं, जिससे यह मशीन ओरल कैंसर के डायग्नोज के लिए क्रांतिकारी साबित हो रही है। 

     
    मेडिकल प्रोफेशनल के लिए सहायक
    कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रतिभा पवार ने कहा, "रोबोटिक मशीन की जांच रिपोर्ट से काफी हद तक मरीज की बीमारी का पता चल जाता है. जिससे यह डॉक्टर और मेडिकल प्रोफेशनल के लिए भी सहायक सिद्ध होगी. मशीन की जांच रिपोर्ट के बाद सिर्फ उन मरीजों को सीटी स्कैन अथवा बायोप्सी करनी जरूरी होगी. जिनका डायग्नोज मशीन द्वारा ओरल कैंसर के रूप में किया गया है इससे लोगों को अनावश्यक जांच के खतरे और आर्थिक समस्या से बचाव हो सकेगा। 

  • यूपी चुनाव से पहले BJP में बड़े बदलाव की तैयारी, 125 विधायकों के टिकट कटने की चर्चा; सर्वे ने बढ़ाई टेंशन

    यूपी चुनाव से पहले BJP में बड़े बदलाव की तैयारी, 125 विधायकों के टिकट कटने की चर्चा; सर्वे ने बढ़ाई टेंशन

    लखनऊ

    उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अब छह महीने से भी कम वक्त बचा है. इस चुनाव में 10 साल से सत्तारूढ़ योगी आदित्यनाथ की अगुवाई वाली भाजपा सरकार के सामने हैट्रिक लगाने की चुनौती है. भाजपा ने स्थानीय विधायकों के कामकाज और लोकप्रियता का सर्वे कराते हुए जनता का मूड भांपने की कोशिश की है. 2024 के लोकसभा चुनाव से लगे झटके से सबक लेकर भाजपा ने 403 विधानसभा सीटों पर एक गोपनीय और बहुस्तरीय आंतरिक सर्वे कराया है. इस सर्वे रिपोर्ट ने सत्ता के गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। 

    भाजपा का आंतरिक सर्वे
    सूत्रों की मानें तो इस सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, यूपी में करीब 125 से 128 मौजूदा विधायकों के खिलाफ उनके ही क्षेत्रों में जबर्दस्त एंटी इनकंबेंसी है. सीधे तौर पर कहें तो करीब भाजपा में 128 सीटों पर मौजूदा विधायकों के टिकट काटा या बदला जा  सकता है. पश्चिम यूपी से लेकर पूरब तक मंत्रियों से लेकर दिग्गज विधायकों तक के नाम इस रेड लिस्ट में शामिल हैं. भाजपा यूपी को अपने संगठन के लिहाज से 6 क्षेत्रों में बांटती है. ऐसे में कहां किस क्षेत्र से कितने टिकट कट सकते हैं, ये आंकड़ा चौंकाने वाला है. यूपी विधानसभा चुनाव 2027 को 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले सेमीफाइनल माना जा रहा है। 

        पश्चिम क्षेत्र की 71 सीटों में 23-25 टिकट कटने के आसार
        ब्रज क्षेत्र कुल 65 सीटों में 24-26 टिकट कटने की संभावना
        अवध क्षेत्र में कुल 82 सीट में 26-28 टिकट कटने का संकेत
        कानपुर क्षेत्र की कुल 52 सीट में 22-24 कटने के कयास
        काशी क्षेत्र में कुल 72 सीट में 19-21 का पत्ता कट सकता है
        गोरखपुर क्षेत्र की 62 सीटों में 18-22 टिकट कटने की संभावना

    यूपी में भाजपा की हैट्रिक की चुनौती
    भाजपा यूपी में हैट्रिक लगाने को पूरी ताकत झोंक रही है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले एक-डेढ़ महीने में ही राज्य के ज्यादातर जिलों का दौरा कर विकास परियोजनाओं की झड़ी लगा दी है.2022 की जीत की बात करें तो 1985 के बाद यूपी में यह पहला मौका था जब किसी मुख्यमंत्री और सत्तारूढ़ पार्टी ने लगातार दूसरी बार पूरे बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की थी. वहीं सपा-कांग्रेस गठबंधन 2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजों से उत्साहित है. अखिलेश यादव जहां पीडीए के सामाजिक समीकरणों पर ध्यान केंद्रित किए हैं, वहीं कांग्रेस दलित-मुस्लिम वोटों को एकजुट करके अपना जनाधार बढ़ाने में जुटी है। 

    2022 विधानसभा चुनाव में किसको कितनी सीटें

    भारतीय जनता पार्टी (BJP)- 255
    अपना दल (सोनेलाल)-1 2
    निषाद पार्टी (NISHAD)- 06
    एनडीए (NDA)-  273
    कुल सीटें 403: बहुमत 202

    गठबंधन में सीटों का बंटवारा भी चुनौती
    उत्तर प्रदेश में मोदी-योगी लहर को कायम रखते हुए भाजपा को अकेले 41.29% वोट मिले थे. भाजपा का पिछले चुनाव में अपना दल सोनेलाल, निषाद पार्टी जैसे दलों के साथ गठबंधन रहा है. अब एनडीए के खेमे में पश्चिमी उत्तर प्रदेश से राष्ट्रीय लोकदल शामिल है. एनडीए का सपा-कांग्रेस गठबंधन से मुख्य मुकाबला होना तय है. मायावती की बहुजन समाज पार्टी, आजाद समाज पार्टी, एआईएमआईएम जैसे दल भी ताल ठोकने को तैयार हैं। 

  • बच्चों के गुम होने और अपहरण मामलों पर SC सख्त, केंद्र-राज्यों से मांगा जवाब

    बच्चों के गुम होने और अपहरण मामलों पर SC सख्त, केंद्र-राज्यों से मांगा जवाब

    नई दिल्ली

    बच्चों के गुम होने, अपहरण और उन्हें जबरन ले जाने के मामलों की जांच को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई है। याचिका में पूरे देश में ऐसी घटनाओं की जांच के लिए एक जैसी व्यवस्था बनाने की मांग की गई है। इसके साथ ही जांच को तय समयसीमा में पूरा करने, विशेष जांच प्रक्रिया अपनाने और मामलों की जल्द सुनवाई के लिए समर्पित अदालतें बनाने की मांग की गई है।

    याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या किया?
    मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने मामले में केंद्र और राज्यों से जवाब मांगा है। इस पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल हैं। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ-साथ शिक्षा मंत्रालय, कानून एवं न्याय मंत्रालय, गृह मंत्रालय और विधि आयोग को नोटिस जारी किया है।

    याचिकाकर्ता की मुख्य मांग क्या?
    यह जनहित याचिका अधिवक्ता और याचिकाकर्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने दाखिल की है। इसे अधिवक्ता-ऑन-रिकॉर्ड अश्वनी कुमार दुबे के जरिए सुप्रीम कोर्ट में पेश किया गया। याचिका में मांग की गई है कि बच्चों के अपहरण और उन्हें जबरन ले जाने के मामलों की जांच के लिए पूरे देश में एक समान व्यवस्था हो। इसमें खास तौर पर समयबद्ध जांच और विशेष जांच प्रक्रिया की मांग रखी गई है। 

    ​समर्पित अदालतें बनाने की पैरवी
    याचिका में केवल जांच तक ही बात सीमित नहीं रखी गई है, बल्कि त्वरित न्याय के लिए समर्पित विशेष अदालतें गठित करने का भी अनुरोध किया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि जब तक बच्चों के खिलाफ होने वाले इन अपराधों के लिए अलग से विशेष अदालतें नहीं होंगी, तब तक पीड़ितों को त्वरित न्याय मिलना कठिन होगा और दोषियों में कानून का डर कायम नहीं हो सकेगा।

    ​मौजूदा व्यवस्था की खामियों पर उठाये सवाल
    सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में यह रेखांकित किया गया है कि वर्तमान समय में राज्यों के बीच जांच एजेंसियों के समन्वय और सूचना साझा करने में काफी ढिलाई देखने को मिलती है। कई मामलों में पुलिस की धीमी और असंवेदनशील कार्रवाई के कारण अपहृत बच्चों को सही समय पर सुरक्षित वापस नहीं लाया जा पाता।

    याचिका में कहा गया है कि अंतरराज्यीय नेटवर्क के जरिए बच्चों का अपहरण कर उन्हें बाल मजदूरी या मानव तस्करी में धकेल दिया जाता है, जिसके लिए एक एकीकृत राष्ट्रीय तंत्र की सख्त जरूरत है।

    ​सुप्रीम कोर्ट का रुख और आगे की कार्रवाई
    सीजेआई की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिका में उठाए गए बिंदुओं को गंभीर मानते हुए सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर दिया है। राज्यों और केंद्र सरकार की ओर से दाखिल होने वाले जवाबों के बाद सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर आगे की सुनवाई करेगा और बच्चों की सुरक्षा के लिए दिशानिर्देश तय कर सकता है।

    याचिका में ये प्रमुख मांगें रखी गई हैं:-

        बच्चों के अपहरण और जबरन ले जाने के मामलों की जांच के लिए देशभर में एक समान व्यवस्था हो।

        जांच को तय समयसीमा में पूरा करने के लिए समयबद्ध प्रक्रिया लागू की जाए।

        ऐसे मामलों की जांच के लिए विशेष और समर्पित जांच प्रक्रिया तैयार की जाए।

        मामलों की सुनवाई तेजी से पूरी करने के लिए समर्पित अदालतों की व्यवस्था हो।

    याचिका में मौजूदा व्यवस्था को लेकर क्या कहा गया?
    याचिका में लापता, अपहृत और जबरन ले जाए गए बच्चों से जुड़े मामलों को संभालने में व्यवस्था की खामियों का हवाला दिया गया है। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की है, जिससे ऐसे मामलों में जांच एजेंसियां तेजी से और आपसी तालमेल के साथ कार्रवाई कर सकें। याचिका का जोर इस बात पर है कि बच्चों से जुड़े इन मामलों में जांच और कार्रवाई के लिए एक समान और समन्वित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

    याचिका में कहा गया है कि बच्चों के गुम होने, अपहरण या उन्हें जबरन ले जाने के मामलों में जांच एजेंसियों की कार्रवाई तेज और आपस में समन्वित होनी चाहिए। इसी उद्देश्य से याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से दखल देने की मांग की है। फिलहाल अदालत ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर उनका जवाब मांगा है। केंद्र, राज्यों और अन्य संबंधित पक्षों के जवाब के बाद मामले में आगे की कार्रवाई होगी। 

  • 18 साल से कम उम्र के बच्चों के Instagram-Facebook चलाने पर लगेगी रोक? सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

    18 साल से कम उम्र के बच्चों के Instagram-Facebook चलाने पर लगेगी रोक? सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

    नई दिल्ली
    सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को उस याचिका पर नोटिस जारी किया है, जिसमें मांग की गई है कि 18 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया और दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अकाउंट बनाने की इजाजत नहीं होनी चाहिए. याचिका में सोशल मीडिया के इस्तेमाल करने के लिए सुरक्षा उपायों की भी मांग की गई है, जिसमें माता-पिता या लीगल गार्जियन की सहमति जरूरी होनी चाहिए.  याचिकामें कहा गया है कि मेटा और दूसरी सोशल मीडिया कंपनियों ने बच्चों के अकाउंट बनाने की आयुसीमा 13 साल तय की है, जो अमेरिकी कानून के मुताबिक है। 

    याचिका में क्या कहा गया है?
    NGO जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन अलायंस की फाइल की गई याचिका में कहा गया है कि फेसबुक और स्नैपचैट (इंडिया) जैसे प्लेटफॉर्म यूजर्स को 13 साल की उम्र से अकाउंट बनाने की इजाजत देते हैं, जबकि भारतीय कानून 18 साल से कम उम्र के लोगों को नाबालिग मानता है.  याचिका में इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस और डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) रूल्स, 2021 में बदलाव करने या खास गाइडलाइंस बनाने के निर्देश देने की मांग की गई है. जिससे ये सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी डिजिटल प्लेटफॉर्म माता-पिता या कानूनी अभिभावक की सहमति के बिना 18 साल से कम उम्र के बच्चे के साथ सोशल मीडिया कॉन्ट्रैक्ट न कर सके, या ये कॉन्टेक्ट माता-पिता या अभिभावक के वेरिफिकेशन/e-KYC के अधीन होनी चाहिए। 

    बच्चों को सीधे एक्सेस देने पर सवाल
    याचिका में ये भी मांग की गई है कि ऐसी गाइडलाइंस बनाई जाएं जो ये जरूरी करें कि जहां भी किसी नाबालिग को डिजिटल प्लेटफॉर्म एक्सेस करने या इस्तेमाल करने की इजाजत हो, तो ऐसा एक्सेस कानूनी तौर पर मान्यता प्राप्त तरीके से हो, जिसमें माता-पिता या कानूनी अभिभावक शामिल हों. इसमें भी माता-पिता या अभिभावक का वेरिफिकेशन/e-KYC शामिल हो, जो सर्विस के नेचर और रिस्क के हिसाब से हो। 

    याचिका में कहा गया है कि बच्चों का डिजिटल प्लेटफॉर्म तक खुद से एक्सेस उन्हें ऑनलाइन ग्रूमिंग, यौन शोषण, ट्रैफिकिंग, बिहेवियरल प्रोफाइलिंग, पर्सनल डेटा का गलत इस्तेमाल, साइबरबुलिंग और उम्र के हिसाब से गलत कंटेंट जैसे रिस्क के खतरे में डालता है। 

  • भारत-रूस की दोस्ती बदलेगी एयरोस्पेस की तस्वीर! IL-114-300 पर हो सकती है बड़ी डील

    भारत-रूस की दोस्ती बदलेगी एयरोस्पेस की तस्वीर! IL-114-300 पर हो सकती है बड़ी डील

     नई दिल्ली

    रूस अब भारत के साथ सिर्फ पारंपरिक रक्षा सहयोग तक सीमित नहीं रहना चाहता. वह नागरिक विमानन क्षेत्र में भी अपनी उपस्थिति मजबूत करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. रूस एयरक्राफ्ट कॉरपोरेशन (यूएसी) के सीईओ वादिम बाडेखा ने हाल ही में बताया कि पिछले छह महीनों में भारतीय कंपनियों के साथ बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी है। 

    नई दिल्ली में चल रहे इन्नोप्रोम इंडिया प्रदर्शनी के दौरान कई महत्वपूर्ण समझौते औपचारिक रूप लेने वाले हैं. इस प्रदर्शनी में 120 से ज्यादा रूसी और भारतीय कंपनियां हिस्सा ले रही हैं. यह आयोजन ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से ठीक पहले हो रहा है, जिससे दोनों देशों के औद्योगिक सहयोग को गति मिलने की उम्मीद है। 

    सबसे ज्यादा चर्चा आईएल-114-300 क्षेत्रीय यात्री विमान को लेकर हो रही है. यह विमान छोटी और मध्यम दूरी की उड़ानों के लिए बनाया गया है. रूसी कंपनियां भारतीय एयरलाइंस और ऑपरेटरों को यह विमान बेचने के लिए सक्रिय हैं। 

    प्रस्तावित सौदों में पिनेकल एयर के लिए 50 विमान, एयर केरल के लिए 20 विमान और स्लीक एविएशन से जुड़े एमओयू के तहत 35 विमान शामिल हैं. इन आंकड़ों से साफ है कि रूस पक्ष भारत में कनेक्टिविटी को मजबूत करने वाले विमानों की बड़ी मांग देख रहा है। 

    आईएल-114-300: क्षेत्रीय उड़ानों का संभावित गेम चेंजर
    आईएल-114-300 एक टर्बोप्रॉप क्षेत्रीय यात्री विमान है जिसे रूस यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉरपोरेशन ने विकसित किया है. यह विमान मुख्य रूप से छोटे शहरों और क्षेत्रीय मार्गों को जोड़ने के लिए उपयुक्त माना जाता है. भारत जैसे विशाल देश में जहां कई छोटे शहर अभी भी अच्छी हवाई कनेक्टिविटी का इंतजार कर रहे हैं, ऐसे विमान महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। 

    जनवरी में विंग्स इंडिया एविएशन एग्जीबिशन के दौरान हैदराबाद में यूएसी ने भारतीय कंपनी फ्लेमिंगो एयरोस्पेस के साथ छह आईएल-114-300 विमानों की संभावित आपूर्ति के लिए प्रारंभिक समझौता किया था. अब इन्नोप्रोम के दौरान इससे बड़े सौदे होने की संभावना जताई जा रही है। 

    अगर ये समझौते सफल होते हैं तो यह न सिर्फ रूसी विमानों के लिए भारतीय बाजार का दरवाजा खोलेगा बल्कि भारत की क्षेत्रीय हवाई सेवाओं को भी नई दिशा देगा. भारतीय पक्ष के लिए यह आकर्षक इसलिए भी है क्योंकि कई घरेलू ऑपरेटर छोटे विमानों की तलाश में हैं जो कम यात्री क्षमता वाले मार्गों पर आर्थिक रूप से प्रैक्टिकल हों. बड़े जेट विमान इन मार्गों पर घाटे में चलते हैं, जबकि टर्बोप्रॉप विमान ईंधन की बचत और संचालन लागत कम रखने में मदद कर सकते हैं। 

    एसजे-100 का स्थानीय उत्पादन: मेक इन इंडिया की दिशा में कदम
    आईएल-114-300 के अलावा रूस पक्ष एसजे-100 क्षेत्रीय जेट के भारत में स्थानीय उत्पादन पर भी गंभीरता से काम कर रहा है. यूएसी के अनुसार इस विषय पर बातचीत लगभग 80% पूरी हो चुकी है. जल्द ही समझौता होने की उम्मीद है. इससे पहले यूएसी और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने एसजे-100 के संयुक्त लाइसेंस प्राप्त उत्पादन से संबंधित समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। 

    एसजे-100 एक आधुनिक क्षेत्रीय जेट है जिसे रूस ने विकसित किया है. भारत में इसका उत्पादन शुरू होने से न सिर्फ तकनीक का हस्तांतरण होगा बल्कि स्थानीय निर्माण क्षमता भी बढ़ेगी. भारतीय कंपनियां अगर इस विमान का बड़ा हिस्सा देश में ही बना पाती हैं तो लागत कम होगी, रोजगार बढ़ेगा और भविष्य में निर्यात की संभावनाएं भी खुलेंगी।

    स्थानीय उत्पादन की बातचीत इतनी आगे बढ़ना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे दोनों देशों के बीच सिर्फ खरीदार-विक्रेता का रिश्ता नहीं बल्कि साझा विनिर्माण साझेदारी बनेगी. रक्षा क्षेत्र में लंबे समय से चले आ रहे सहयोग के बाद नागरिक विमानन में भी ऐसा मॉडल अपनाना दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। 

    भारत-रूस सहयोग का नया अध्याय
    भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग दशकों पुराना है. लड़ाकू विमान, हेलिकॉप्टर, मिसाइल सिस्टम और अन्य प्लेटफॉर्म दोनों देशों के रिश्ते की रीढ़ रहे हैं. अब रूस नागरिक विमानन क्षेत्र में भी अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहा है. पश्चिमी देशों पर प्रतिबंधों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की चुनौतियों के बीच रूस नए बाजारों की तलाश में है. भारत उसकी नजर में एक बड़ा और स्थिर बाजार है। 

    इन्नोप्रोम इंडिया प्रदर्शनी इसी रणनीति का हिस्सा लगती है. यहां सिर्फ विमान सौदों की बात नहीं हो रही बल्कि औद्योगिक सहयोग के कई अन्य क्षेत्रों पर भी चर्चा हो रही है. 120 से अधिक कंपनियों की भागीदारी से साफ है कि दोनों देश सिर्फ सरकारी स्तर पर नहीं बल्कि निजी क्षेत्र से भी रिश्ते मजबूत करना चाहते हैं। 

    क्षेत्रीय कनेक्टिविटी भारत सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है. उड़ान योजना के तहत छोटे शहरों को हवाई सेवा से जोड़ने के प्रयास चल रहे हैं. रूसी क्षेत्रीय विमान अगर प्रतिस्पर्धी कीमत और विश्वसनीय सेवा के साथ आते हैं तो वे इस लक्ष्य को पूरा करने में मददगार साबित हो सकते हैं. साथ ही स्थानीय उत्पादन से भारत की विमानन विनिर्माण क्षमता भी मजबूत होगी। 

    संभावनाएं और चुनौतियां दोनों मौजूद
    ये प्रस्ताव आशाजनक जरूर हैं लेकिन कई चुनौतियां भी हैं. सबसे पहले प्रमाणन और नियामक मंजूरी का मुद्दा. किसी भी नए विमान को भारतीय आसमान में उड़ान भरने के लिए सख्त सुरक्षा और प्रमाणन प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है. दूसरी चुनौती रखरखाव और स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता है. लंबे समय तक विमानों को सुचारू रूप से चलाने के लिए मजबूत सपोर्ट सिस्टम जरूरी होता है। 

    तीसरी चुनौती कॉम्पीटिशन है. भारतीय बाजार में अन्य देशों के क्षेत्रीय विमान भी मौजूद हैं या आने की कोशिश कर रहे हैं. कीमत, फ्यूल एफिसिएंसी, यात्री सुविधा और आफ्टर सेल्स सपोर्ट जैसे मुद्दे फैसला करने वाले साबित होंगे. चौथी बात फाइनेंशियल सपोर्ट की है. बड़े सौदों के लिए आसान ऋण सुविधा या लीजिंग व्यवस्था महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। 

    इन चुनौतियों के बावजूद रूस पक्ष आशावादी नजर आ रहा है. पिछले छह महीनों में हुई प्रगति और इन्नोप्रोम में संभावित समझौते इस बात का संकेत देते हैं कि दोनों देश व्यावहारिक सहयोग की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. अगर आईएल-114-300 के बड़े ऑर्डर और एसजे-100 का स्थानीय उत्पादन दोनों सफल होते हैं तो यह भारत-रूस एयरोस्पेस संबंधों का नया अध्याय साबित हो सकता है। 

    आगे की राह और रणनीतिक महत्व

    भारत के लिए यह सहयोग कई मायनों में फायदेमंद हो सकता है. 

        पहला- क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी में सुधार. 
        दूसरा- घरेलू विनिर्माण क्षमता का विकास. 
        तीसरा- आपूर्ति स्रोतों में विविधता. 

    एक ही देश या क्षेत्र पर निर्भरता कम करने की रणनीति के तहत रूस विकल्प उपयोगी साबित हो सकता है. रूस के लिए भारत एक बड़ा बाजार है जहां वह अपने नागरिक विमानों को जगह दे सकता है. साथ ही स्थानीय उत्पादन से वह तकनीक साझा कर दीर्घकालिक साझेदारी बना सकता है। 

    ब्रिक्स जैसे मंचों पर दोनों देश पहले से सहयोग कर रहे हैं. औद्योगिक और तकनीकी सहयोग को और गहरा करने से यह रिश्ता और मजबूत होगा. कुल मिलाकर, इन्नोप्रोम इंडिया में होने वाले संभावित समझौते सिर्फ कुछ विमानों की खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं रहेंगे। 

    वे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, स्थानीय विनिर्माण और रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा दे सकते हैं. IL-114-300 और SJ-100 जैसे प्रस्ताव अगर धरातल पर उतरते हैं तो भारत-रूस सहयोग रक्षा से आगे बढ़कर नागरिक एयरोस्पेस क्षेत्र में भी मजबूती से स्थापित हो जाएगा. यह दोनों देशों के लिए आपसी लाभ का नया अध्याय साबित हो सकता है। 

     

  • समुद्र के बीच बनेगा दुनिया का पहला एनर्जी आइलैंड, 3.5 GW बिजली पैदा करने की तैयारी

    समुद्र के बीच बनेगा दुनिया का पहला एनर्जी आइलैंड, 3.5 GW बिजली पैदा करने की तैयारी

    ब्रसेल्स

     सौ बात की एक बात कि बिजली पैदा करने को लेकर यूरोप के देश बेल्जियम से एक ऐसी ख़बर आई जिस पर ज़्यादा लोगों का ध्यान नहीं गया लेकिन सबको ध्यान देने की ज़रूरत है. बिजली पैदा करने के लिए दुनिया में क्या-क्या किया जा रहा है, इस पर सब को नज़र रखने की ज़रूरत है. क्योंकि दुनिया में ताक़त का खेल इसी आधार पर होता जा रहा है कि किसके पास कितनी ऊर्जा बनाने की कपैसिटी है. ईरान युद्ध में सारा खेल ही तेल के व्यापार को कंट्रोल करने का है. AI की जंग जो चल रही है, उसमें दुनिया के डेटा सेंटरों पर कंट्रोल करने के लिए बड़ी भारी मात्रा में बिजली की ज़रूरत पड़ेगी, ये सब देश समझ रहे हैं. ऊधर रूस और यूक्रेन युद्ध में यूरोप ने देख लिया कि उसके हाथ इसलिए बंधे हुए हैं क्योंकि उसको सर्दियों में अपने हीटिंग सिस्टम चलाने के लिए रूस की गैस की ज़रूरत पड़ती है. और यूरोप में अब जिस हिसाब से गर्मी पड़ने लग गई है तो वो ये भी समझ रहे हैं कि अब तो वहां भी AC लगाने पड़ेंगे आगे चल कर। 

    अभी तक पंखे भी नहीं देखे थे उन्होंने. तो बिजली कहां से आएगी इतनी? कोयले से बना नहीं सकते क्योंकि कोयला जला-जला कर ही तो 100 साल में दुनिया का ये हाल हो गया है कि दुनिया भर में गर्मी बढ़ गई है. यूरोप दूसरों को नसीहत दे रहा है कि कोयला मत जलाओ तो ख़ुद कैसे जला लेगा? तेल और गैस के लिए या तो रूस के सामने झुकना पड़ता है या अरब देशों पर निर्भर रहना पड़ता है. परमाणु बिजली के लिए यूरेनियम की मारामारी है. सोलर बिजली के लिए ज़मीन भी चाहिए जो यूरोप के कई देशों में उतनी है नहीं और बड़ी बात ये कि सूरज तो वहां निकलता ही कितने दिन है साल में? तो यूरोप के कई देश बनाते हैं बिजली हवा से। 

    हवा से मतलब विंडमिल से. पवन चक्कियों से. वो देखा है ना आपने बड़ा से पंखा लगा देते हैं ऊंचाई पर और वो हवा से चलता है तो नीचे चक्की चलती है और उससे बिजली बनाते हैं. लेकिन उसके लिए क्या चाहिए? एक तो बहुत सारी पवन चक्कियां एक साथ लगाने के लिए ख़ाली मैदान चाहिएं जहां खुली हवा तेज़ी से चलती हो. इतनी ज़मीन कहां से लाएं एक साथ? और ज़मीन पर पवन चक्कियां लगा दें तो खेती नहीं कर सकते वहां फिर. वो अलग नुक़सान है. क्योंकि अगर पवन चक्कियां वहां लगाएं जहां पर भी थोड़ी-बहुत जगह मिले तो वो तो कर सकते हैं लेकिन फिर ये दूर-दूर लगे पंखों से बिजली बनाकर एक जगह लाने के लिए इतना सारी केबल लगानी पड़ेगी, नहीं तो उसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कैसे करेंगे? और यूरोप के बेल्जियम जैसे देशों के पास तो वैसे भी इतनी सारी खुली ज़मीन नहीं है एक साथ. तो जानते हैं बेल्जियम क्या कर रहा है?

    बेल्जियम ने लगाया टापू वाला दिमाग
    बेल्जियम ने देखा कि सबसे ज़्यादा खुली और तेज़ हवा बिना किसी रुकावट के कहां चलती है? दिन हो रात कौन-सी ऐसी जगह है जहां पवन चक्कियों के पंखे फ़र्र-फ़र्र चलते रहेंगे और बिजली बनाते रहेंगे? और ज़मीन भी नहीं छोड़ने पड़ेगी उनके लिए? समुद्र में. जी, बेल्जियम ने सोचा कि अगर समुद्र में पवन चक्कियां लगा दें तो? पानी में ताल बिछाकर बिजली ज़मीन तक ले आएंगे. लेकिन समुद्र में पवन चक्कियां लगाएंगे कहां? तैरते हुए प्लैटफ़ॉर्म पर तो लगा नहीं सकते क्योंकि वो तो हवा से डोल जाएंगे. तो बेल्जियम क्या कर रहा है कि समुद्र में एक पूरा टापू बना रहा है. जी, पूरा नया टापू समुद्र के अंदर. ये अपने आप में दुनिया का एक नया अजूबा बनाया जा रहा है.  वो समुद्र में एक पूरा टापू बना रहा है बिजली पैदा करने के लिए। 

    कहां बन रहा यह आइलैंड?
    नॉर्थ सी में, उत्तर सागर में, बेल्जियम अपने तट से क़रीब 45 km दूर एक आर्टिफ़िशियल एनर्जी आइलैंड बना रहा है. प्रिंसेस एलिज़ाबेथ आइलैंड के नाम से. ये दुनिया का पहला ऐसा टापू बन रहा है. और ये टापू बनाया कैसे जा रहा है वो असली समझने वाली बात है. जैसे बच्चों के खिलौने होते हैं ना जिनमें ब्लॉक जोड़-जोड़ कर कोई बिल्डिंग बनाई जाती है या कुछ भी बनाया जाता है? वैसे बना रहा है. सिमेंट के, कॉन्क्रीट के बड़े-बड़े ब्लॉक बना रहा है, बक्से बना रहा है. और इन बक्सों में समंदर में डाल दिया जाएगा और उनको जोड़कर पूरा टापू बना देंगे. द नेदरलैंड्स के फ़्लिसिंगेन बंदरगाह में 23 ऐसे बड़े-बड़े कॉन्क्रीट के डिब्बे बनाए गए हैं. बड़े-बड़े मतलब एक-एक डिब्बा क़रीब 58m लंबा है, 28m चौड़ा है और 23 से 32m ऊंचा है. 58x28x32 समझ रहे हैं आप? मतलब एक 7 मंज़िला बिल्डिंग समझ लीजिए चौड़ी वाली. दो को जोड़ दो एक फ़ुटबॉल के मैदान जितनी जगह से भी ज़्यादा घेर लें, इतने बड़े-बड़े डिब्बे हैं. और हर डिब्बे का वज़न कितना? हर एक का वज़न है क़रीब 22,000 टन। 

    कैसे बन रहा आइलैंड
    मतलब समझ लो कोई 15,000 गाड़ियों जितना वज़न एक डिब्बे का. इतना सिमेंट लगा कर बने हैं ये डिब्बे. और ये तो अभी ख़ाली डिब्बों की बात हो रही है. खोखले बनाए गए हैं. 23 ऐसे डिब्बे. और इनको उतार दिया गया है समुद्र में. इन भारी डिब्बों को जहाज़ों से खींचकर समुद्र में ले जाया गया और वहां समुद्र के तल में डुबो दिया गया. और अब इनकी दीवारों के अंदर भरी जाएगी रेत. क़रीब बीस लाख क्यूबिक मीटर रेत भरी जा रही है. और ऐसे बनाया जा रहा है समुद्र के अंदर एक 6 हेक्टेयर का ठोस टापू. 6 हेक्टेयर मतलब लगभग 15 एकड़ का टापू बनेगा. मतलब समझ लो फ़ुटबॉल के 12 मैदानों जितना. उस पर बंदरगाह बनाया जाएगा, हेलीपैड बनाया जाएगा. और एक साथ 250 से ज़्यादा पवन चक्कियां लगाई जाएंगी, उनकी टर्बआइन लगाई जाएंगीं जिससे बिजली बनेगी और तारें बिछाई जाएंगी तट तक. डिब्बे समुद्र में उतार दिये गए हैं. बाक़ी काम में 5 साल लग जाएंगे. 2031 से बिजली मिलना शुरू हो जाएगी बेल्जियम को इससे। 

    कैसे बिजली पैदा होगी?
    यानी समुद्र में लगने वाली सैकड़ों पवन च
    क्कियों की बिजली को एक जगह इकट्ठा कर लिया जाएगा और फिर केबलों से ज़मीन तक पहुंचाया जाएगा. कितननी बिजली बनेगी, 3.5 GW बिजली बनने की उम्मीद है इससे. कोई ईंधन नहीं लगेगा. कोई कोयला नहीं, तेल नहीं, गैस नहीं. सिर्फ़ हवा से इतनी बिजली एक साथ एक ही जगह से बना ले जाएगी क्योंकि समुद्र में हवा बिना रुकावट से दिन-रात चलती रहती है. बेल्जियम को पीक बिजली की डिमांड होती है लगभग 9-10 GW और सर्दियों में हीटर चलते हैं तो लगभग 12 GW डिमांड हो जाती है. इस एक टापू से 3.5 GW मिल जाएगी मतलब पूरे देश की एक तिहाई ज़रूरत यहां से पूरी हो जाएगी. एक ही जगह से और ये फ़ॉर्मुला चल निकला तो सोचिए आगे बाक़ी देश भी क्या-क्या कर सकते हैं?

    समंदर में कितनी बिजली बनेंगी
    ज़मीन पर ये करने के लिए एक तो सैकड़ों पवन चक्कियां लगाने के लिए खेती की ज़मीन ख़ाली करनी पड़ेगी तो वो तो नुक़सान है ही. ऊपर से समुद्र में हवा ज़्यादा तेज़ चलती है और ज़्यादा स्थिर तरीक़े से चलती है, इसलिए एक ही क्षमता वाली पवन चक्की समुद्र में ज़मीन से कहीं ज़्यादा बिजली देती है. अगर वहां टापू पर 250 पवन चक्कियां लगानीं पड़ेंगी तो ज़मीन पर उतनी बिजली बनाने के लिए 350 पवन चक्कियां लगानी पड़ेंगीं. बेल्जियम बहुत छोटा और घना बसा हुआ देश है, ज़मीन उतनी है नहीं. पवन चक्कियों की आवाज़ भी होती है. और क़ुदरत के नज़ारे भी छुप जाते हैं पवन चक्कियां लगाने से. ख़ूबसूरत तो है ही सारा यूरोप. तो पवन चक्कियों के बड़े फ़ार्म लगाना वहां मुमकिन ही नहीं है। 

    नॉर्थ सी बनेगा यूरोप का बिजलीघर
    नॉर्थ सी यानी उत्तर सागर में हवा लगातार चलती है और तेज़ चलती है, इसलिए ये इलाक़ा पवन ऊर्जा के लिए दुनिया के सबसे अच्छे इलाक़ों में एक माना जाता है. रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोप समझ चुका है कि गैस के लिए रूस पर निर्भर रहना ख़तरनाक है. आगे चलकर ये टापू ब्रिटेन के साथ भी केबल से जुड़ सकता है. और डेनमार्क के साथ भी जुड़ सकता है, ताकि पड़ोसी देशों को ये बिजली बेच भी सके. टापू को और बड़ा किया जा सकता है. मतलब नॉर्थ सी को यूरोप का बिजलीघर बनाया जा सकता है, पावरहाउस बनाया जा सकता है. सारा खेल ही पावर का है. और दुनिया देखिए क्या-क्या प्लैन बना रही है पावर के लिए. सौ बात की एक बात। 

  • Whales: Giants of the Ocean

    Whales: Giants of the Ocean

    Whales are among the largest and most remarkable animals on Earth. These marine mammals live in oceans around the world, from warm tropical waters to the cold seas surrounding the poles.

    Life Beneath the Surface

    Although whales spend their lives in water, they breathe air through blowholes located on top of their heads. They must regularly return to the surface to breathe before diving again in search of food or traveling through the ocean.

    Whales are warm-blooded, give birth to live young, and nurse their calves with milk. A thick layer of fat called blubber helps protect them from cold water and stores energy during long migrations.

    Two Main Groups

    Whales are generally divided into baleen whales and toothed whales. Baleen whales filter small animals from the water using flexible plates inside their mouths. This group includes blue whales, humpback whales, and gray whales.

    Toothed whales use teeth to catch fish, squid, and other prey. Many of them also use echolocation, producing sounds and listening for returning echoes to understand their surroundings. Sperm whales, belugas, and orcas belong to this group.

    The Blue Whale

    The blue whale is the largest known animal to have ever lived. An adult can grow longer than a city bus and weigh well over one hundred tonnes. Despite its enormous size, it feeds mainly on tiny crustaceans called krill.

    Communication and Migration

    Whales communicate using clicks, whistles, pulses, and complex songs. Some sounds can travel across great distances underwater. Humpback whales are especially famous for their long, patterned songs.

    Many species migrate thousands of kilometres each year. They often feed in cold, nutrient-rich waters before traveling to warmer regions where they mate and give birth.

    Protecting Whales

    Commercial hunting once caused severe declines in many whale populations. Today, whales also face threats from fishing gear, ship collisions, underwater noise, pollution, and changes to ocean ecosystems.

    Conservation programs, safer fishing practices, protected habitats, and international cooperation can help whale populations recover. Protecting whales also supports healthier oceans because these animals play an important role in marine food webs and nutrient cycles.

  • Rashifal 11 September: शुक्रवार को इन राशियों पर बरसेगी मां लक्ष्मी की कृपा, धन लाभ के बनेंगे योग

    Rashifal 11 September: शुक्रवार को इन राशियों पर बरसेगी मां लक्ष्मी की कृपा, धन लाभ के बनेंगे योग

    मेष राशि- कल के दिन कमाई में वृद्धि होगी। जहां पारिवारिक बंधन मजबूत होंगे। वहीं, जीवनसाथी की तलाश में आपको निराशा झेलनी पड़ सकती है। करियर में नए अवसर मिल सकते हैं। प्रॉपर्टी में इन्वेस्ट करना आपके लिए बेहतर साबित हो सकता है।

    वृषभ राशि- छात्रों को मन लगाकर पढ़ाई करने की सलाह दी जाती है। आज का दिन उतार-चढ़ाव वाला हो सकता है। कॉम्पीटीशन की कमी के चलते आपकी प्रोडक्टिविटी पर भी असर पड़ सकता है।

    मिथुन राशि- अपने प्रेम-संबंधों को मजबूत बनाने के लिए पार्टनर से खुलकर बातचीत करें और उन्हें समय दें। स्वास्थ्य को दुरुस्त रखने के लिए हेल्दी डाइट लें। नयी प्रॉपर्टी खरीदने के आसार नजर आ रहे हैं।

    कर्क राशि- घर के सदस्यों और अपने पार्टनर के साथ टाइम स्पेंड करें। करियर में फोकस बनाए रखने की जरूरत है। वहीं, यात्रा के दौरान कुछ दिक्कतें आ सकती हैं। सोच-समझकर फाइनेंशियल डिसीजन लेना आपके लिए बेहतर रहेगा।

    सिंह राशि- दिन आपका स्वास्थ्य भी आपका साथ देगा। ये समय आपके लिए शुभ रहने वाला है। आर्थिक स्थिति सही रहेंगी लेकिन फालतू के खर्चों से बचें। अपनी मेंटल हेल्थ का ध्यान रखें।

    कन्या राशि- आपके पार्टनर का पूरा साथ मिलेगा। वहीं, परिवार के कुछ सदस्यों से मतभेद होने की भी संभावना है। अपनी आर्थिक व्यवस्था को सुधारने के लिए आप प्रॉपर्टी में इन्वेस्ट कर सकते हैं।

    तुला राशि- दिन रोमांचक रहने वाला है। जीवनसाथी के साथ अच्छा वक्त बिताएंगे। कार्यक्षेत्र में सफलता मिलने के आसार हैं। किसी करीबी से गिफ्ट मिलने की संभावना है।

    वृश्चिक राशि- प्रेम संबंध मजबूत होंगे साथ ही पार्टनर से स्पेशल मैसेज भी सप्ताह के अंत तक मिल सकता है। कुछ लोगों के लिए घूमने जाने के योग बनते भी दिख रहे हैं। आज का दिन आपके लिए रोमांस से भरपूर रहने वाला है।

    धनु राशि- घर के सदस्यों के साथ संबंध मजबूत होंगे। व्यवसायिक मुद्दों पर संयम बरतने की जरूरत है। प्रेम-संबंधों में मधुरता आएगी। अपनी फैमिली और दोस्तों के साथ वक्त बिताएं और ट्रिप पर जाएं।

    मकर राशि- अपने स्वास्थ्य को अनदेखा न करें। वहीं, प्रॉपर्टी में इन्वेस्ट करने से बचें। यात्रा पर जाने के प्लान बन सकते हैं। आपको पॉजिटिव बदलाव देखने को मिल सकते हैं। करियर में सफलता मिलेगी।

    कुंभ राशि- कुछ लोग ट्रिप पर भी जा सकते हैं। दिन आपके लिए आत्मविश्वास से भरपूर रहने वाला है। रोमांटिक लाइफ में उथल-पुथल हो सकती है। परिवार के सदस्यों के साथ मधुरता बनाए रखें।

    मीन राशि- आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प से भरपूर रहेंगे। आर्थिक मामलों में किस्मत साथ देगी। खासकर शेयर बाजार में निवेश करना लाभदायक हो सकता है।थोड़ी बहुत चुनौतियां आ सकती हैं, जिन्हें आप आसानी से पार कर लेंगे।

  • युवाओं को मिलेगा देश की अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं और प्रदेश की ऐतिहासिक धरोहरों को करीब से जानने का अवसर

    युवाओं को मिलेगा देश की अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं और प्रदेश की ऐतिहासिक धरोहरों को करीब से जानने का अवसर

    भोपाल 

    राष्ट्रवाद और देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत मध्यप्रदेश शासन की महत्वपूर्ण ‘माँ तुझे प्रणाम’ योजना के अंतर्गत वर्ष 2026-27 के लिए युवाओं के चयन की प्रक्रिया प्रारंभ की जा रही है। योजना का उद्देश्य युवाओं में भारत की अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं के प्रति सम्मान और राष्ट्रभाव विकसित करना, सीमा पर होने वाली सैन्य गतिविधियों एवं सैनिकों की दिनचर्या से परिचित कराना तथा मध्यप्रदेश के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक स्थलों से युवाओं को परिचित कराना है।

    हर विकासखंड से 10 युवा जाएंगे अनुभव यात्रा पर

    योजना के अंतर्गत प्रत्येक विकासखंड स्तर से 5 युवक एवं 5 युवतियों, कुल 10 युवाओं का चयन किया जाएगा। चयनित युवा भारत की अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं की अनुभव यात्रा अथवा प्रदेश के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं भौगोलिक स्थलों के भ्रमण के माध्यम से देश की विविधता, संस्कृति और सीमा सुरक्षा व्यवस्था को करीब से जान सकेंगे।

    5 अलग-अलग श्रेणियों से होगा चयन

    विकासखंड स्तर पर चयन में एक एनसीसी, एक एनएसएस, एक खिलाड़ी, एक मेधावी छात्र तथा एक स्काउट सहित इसी मानदंड के अनुसार युवतियों का चयन किया जाएगा। चयन के लिए युवाओं की आयु 15 से 25 वर्ष निर्धारित है, जिसकी गणना 31 दिसंबर 2027 तक की जाएगी। चयन के मापदंड योजना के निर्धारित परिशिष्ट में दिए गए हैं।

    खेल प्रतिभाओं को मिलेगा विशेष अवसर

    खेल श्रेणी में अंतर्राष्ट्रीय, राष्ट्रीय, राज्य, संभाग और जिला स्तर पर पदक प्राप्त करने अथवा सहभागिता करने वाले खिलाड़ियों को प्राथमिकता के आधार पर चयन के लिए पात्र माना गया है। इससे विभिन्न स्तरों पर खेल प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुके युवाओं को योजना के माध्यम से देश की सीमाओं और राष्ट्रीय गौरव से जुड़ने का अवसर मिलेगा।

    एनसीसी, एनएसएस और स्काउट युवाओं के लिए भी अवसर

    एनसीसी श्रेणी में सी, बी और ए प्रमाण-पत्र को चयन की प्राथमिकता में रखा गया है। वहीं स्काउट वर्ग में अंतर्राष्ट्रीय/राष्ट्रीय जम्बूरी, राष्ट्रपति स्काउट गाइड रोवर रेंजर पुरस्कार, राज्य पुरस्कार तथा तृतीय एवं द्वितीय सोपान जैसी उपलब्धियों को चयन का आधार बनाया गया है। एनएसएस श्रेणी में अंतर्राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रमों में सहभागिता, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय पुरस्कार, गणतंत्र दिवस परेड, राष्ट्रीय युवा उत्सव, एनएसएस मेगा शिविर, राष्ट्रीय एकता शिविर, साहसिक कार्यक्रम शिविर सहित राज्य, विश्वविद्यालय, जिला एवं इकाई स्तर के शिविरों में सहभागिता को प्राथमिकता दी जाएगी।

    मेधावी विद्यार्थियों को भी मिलेगा मौका

    मेधावी श्रेणी में निर्धारित आयु वर्ग के अंतर्गत आयोजित परीक्षाओं में सर्वाधिक अंक प्राप्त करने वाले युवाओं को चयन में प्राथमिकता दी जाएगी। इस प्रकार योजना में खेल, शिक्षा, एनसीसी, एनएसएस और स्काउटिंग जैसी विविध गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले युवाओं को अवसर दिया जा रहा है।

    जिला स्तर पर समिति करेगी परीक्षण, लॉटरी से होगा चयन

    विकासखंड स्तर से प्राप्त आवेदनों का जिला स्तर पर सूक्ष्म परीक्षण किया जाएगा। इसके बाद जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित चयन समिति द्वारा लॉटरी के माध्यम से युवाओं का चयन किया जाएगा। समिति में जिला पुलिस अधीक्षक, जिला शिक्षा अधिकारी, नेहरू युवा केंद्र के समन्वयक, एनसीसी, एनएसएस, स्काउट-गाइड, चिन्हित महाविद्यालय के जिला प्रभारी तथा जिला खेल एवं युवा कल्याण अधिकारी शामिल रहेंगे।

    दस्तावेजों की होगी अनिवार्य जांच

    अनुभव यात्रा के लिए चयनित युवाओं से निर्धारित प्रपत्र के अनुसार आवेदन पत्र के साथ फिटनेस सर्टिफिकेट/चिकित्सा प्रमाण-पत्र, जोखिम एवं संबंधित थाने से चरित्र प्रमाण-पत्र प्राप्त किया जाएगा। चरित्र प्रमाण-पत्र एवं चिकित्सा प्रमाण-पत्र चयनित युवाओं से ही लिया जाना सुनिश्चित किया जाएगा।

    एक युवा को केवल एक बार मिलेगा अनुभव यात्रा का अवसर

    योजना में चयनित युवा को केवल एक बार ही अनुभव यात्रा में भेजा जाएगा। यदि कोई युवा अनुभव यात्रा में जाने से असहमति व्यक्त करता है, तो उसे आगामी किसी भी अनुभव यात्रा में नहीं भेजा जाएगा। साथ ही पूर्व में अनुभव यात्रा पर भेजे जा चुके युवाओं का पुनः चयन नहीं किया जाएगा।

    आवेदन के लिए 22 सितंबर तक का समय, वेबसाइट से भी प्राप्त किए जा सकते हैं आवेदन

    ‘माँ तुझे प्रणाम’ योजना के अंतर्गत विकासखंड स्तर पर पात्र युवाओं से 22 सितंबर तक आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे। प्राप्त आवेदनों के परीक्षण के बाद 23 से 26 सितंबर तक जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित चयन समिति द्वारा लॉटरी के माध्यम से युवाओं का चयन किया जाएगा। चयनित युवाओं की सूची तथा समिति के हस्ताक्षरित दस्तावेजों की सॉफ्ट कॉपी 30 सितंबर तक संचालनालय, खेल एवं युवा कल्याण को ई-मेल के माध्यम से उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। ‘माँ तुझे प्रणाम’ योजना के आवेदन पत्र खेल एवं युवा कल्याण विभाग की वेबसाइट www.dsywmp.gov.in से भी प्राप्त किए जा सकते हैं।

    युवा शक्ति को राष्ट्रसेवा और राष्ट्रीय गौरव से जोड़ने की पहल

    ‘माँ तुझे प्रणाम’ योजना के माध्यम से मध्यप्रदेश शासन का प्रयास है कि प्रदेश के युवा केवल पुस्तकों के माध्यम से नहीं, बल्कि सीमा पर तैनात सैनिकों के जीवन, राष्ट्र की सुरक्षा व्यवस्था तथा भारत की ऐतिहासिक-सांस्कृतिक विरासत को प्रत्यक्ष अनुभव कर देश के प्रति अपने दायित्व और गौरव की भावना को और मजबूत करें।

     

  • सेवा संकल्प अभियान में सभी जनप्रतिनिधि सक्रिय सहभागिता करें, अपने क्षेत्रों में मिलकर कार्यक्रमों को जनभागीदारी का स्वरूप दें: मुख्यमंत्री योगी

    सेवा संकल्प अभियान में सभी जनप्रतिनिधि सक्रिय सहभागिता करें, अपने क्षेत्रों में मिलकर कार्यक्रमों को जनभागीदारी का स्वरूप दें: मुख्यमंत्री योगी

    लखनऊ
     
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को प्रदेश के सभी सांसदों, जिला पंचायत अध्यक्षों, विधायकों, विधान परिषद सदस्यों, महापौरों, नगर पालिका एवं नगर पंचायत अध्यक्षों और ब्लॉक प्रमुखों के साथ वर्चुअल बैठक की। उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों से ‘सेवा संकल्प अभियान’ से जुड़ने और अपने-अपने क्षेत्रों में जनता के साथ मिलकर इसे सफल बनाने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने अभियान के 12 प्रमुख कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के 25 वर्षों के निरंतर सेवा काल को समर्पित यह अभियान तभी सार्थक होगा, जब इसमें समाज के हर वर्ग की भागीदारी हो। सांसदों, विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी से अभियान की पहुंच गांव से लेकर शहर तक और समाज के हर वर्ग तक होगी।

    मुख्यमंत्री ने 17 सितंबर को ‘सेवा दिवस-आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम में भी जनप्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित करने को कहा। 17 सितंबर को सेवा दिवस के साथ विश्वकर्मा जयंती पर सभी विधानसभा क्षेत्रों में विश्वकर्मा पूजन और शिल्पकारों को टूलकिट वितरण किया जाएगा। ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम में शाम सात बजे लाभार्थी परिवारों के साथ दीप प्रज्ज्वलित किए जाएंगे। डबल इंजन सरकार की योजनाओं से बने प्रमुख भवनों और विकास परियोजनाओं के स्थलों पर भी दीप जलाए जाएं। मुख्यमंत्री ने सभी विधायकों से अपने-अपने क्षेत्रों में इन कार्यक्रमों में उपस्थित रहने को कहा। 

    उन्होंने कहा कि ‘मेरे सपनों का भारत’ कार्यक्रम में सभी सरकारी और निजी बेसिक, माध्यमिक तथा उच्च शिक्षण संस्थानों को जोड़ा जाए। विद्यार्थियों की चित्रकला, भाषण और वाद-विवाद प्रतियोगिताओं के साथ शिक्षकों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाए। इससे बच्चों और युवाओं को देश की विकास यात्रा से जोड़ने का अवसर मिलेगा।

    ‘नमो सेवा, अनकही कहानियां’ कार्यक्रम 18 सितंबर से प्रदेश की सभी 403 विधानसभाओं में आयोजित किया जाना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसमें पर्यटन विभाग नोडल विभाग की भूमिका निभाए। स्थानीय कलाकारों को प्राथमिकता देने के साथ विद्यार्थियों और शिक्षकों को भी कार्यक्रम से जोड़ा जाए। उनके माध्यम से सेवा, सुशासन और विकास की उन कहानियों को लोगों तक पहुंचाया जाए, जो हमारे आसपास ही आकार ले रही हैं।

    ‘आंगन मिलन सेवा’ के तहत उत्कृष्ट कार्य करने वाली आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों का सम्मान किया जाएगा। इसके साथ हेल्दी बेबी प्रतियोगिता भी होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कार्यक्रम को केवल आयोजन तक सीमित न रखा जाए। माताओं तक पोषण, स्वास्थ्य और महिला एवं बाल विकास से जुड़ी जरूरी जानकारी भी सहज ढंग से पहुंचाई जाए।

    ‘सेवा की कहानी’ के तहत पिछले साढ़े नौ वर्षों में आए बदलावों को लाभार्थियों की अपनी कहानियों के जरिए सामने लाने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज के हर क्षेत्र में बदलाव आया है और बिना भेदभाव लोगों को सरकार की योजनाओं का लाभ मिल रहा है। इन बदलावों की असली तस्वीर लाभार्थियों के अनुभवों से ही सामने आएगी। उन्होंने कहा कि वीडियो रील में लाभार्थी का नाम, ग्राम, जनपद और योजना का नाम जरूर दिया जाए। मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष और आयुष्मान भारत के लाभार्थियों को भी इसमें शामिल किया जाए।

    ‘सेवा ज्योति कलश यात्रा’ के संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि 7 अक्टूबर का दिन विशेष महत्व रखता है। इसी दिन 25 वर्ष पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में अपनी जनसेवा की एक नई यात्रा शुरू की थी। इस अवसर पर प्रत्येक जनपद के एक प्रमुख चौराहे पर ‘सेवा कलश’ स्थापित किया जाएगा और वहां प्रधानमंत्री जी का विशेष संबोधन होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनप्रतिनिधि इसमें सक्रिय रूप से भाग लें, ताकि यह आयोजन सेवा, समर्पण और संकल्प का प्रतीक बन सके।

    ‘सेवा मेरा योगदान’ के तहत नागरिकों को अलग-अलग सेवा गतिविधियों से जोड़ा जाए। प्रत्येक विधानसभा में कम से कम दो स्थलों के कायाकल्प का काम भी जनभागीदारी से कराया जाए। वहीं ‘सेवा सेतु अभियान’ के तहत प्रत्येक विकासखंड में सात दिवसीय बहुउद्देशीय सेवा शिविर लगाए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिविरों का उद्देश्य साफ होना चाहिए, नागरिक को लाभ लेने के लिए अलग-अलग सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। एक ही जगह केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं की जानकारी मिले, आवेदन हो, पात्रता का सत्यापन हो और पात्र लोगों के मामलों में स्वीकृति की प्रक्रिया आगे बढ़े। इन शिविरों के साथ स्वास्थ्य मेले भी लगाए जाएंगे।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘सेवा संकल्प अभियान’ की असली ताकत लोगों की भागीदारी है। इसलिए इसमें सांसदों और विधायकों के साथ ग्राम स्तर तक के जनप्रतिनिधि, युवा, महिलाएं, विद्यार्थी, शिल्पकार, स्वयं सहायता समूह और सामाजिक संगठन भी जुड़ें। उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों से 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलने वाले इस अभियान को अपने-अपने क्षेत्रों में सेवा, सुशासन और जनभागीदारी का उत्सव बनाने का आह्वान किया।