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  • सचिन पायलट का बड़ा बयान, बोले- कैप्टन अमरिंदर की वापसी पर हाईकमान से कोई बातचीत नहीं

    सचिन पायलट का बड़ा बयान, बोले- कैप्टन अमरिंदर की वापसी पर हाईकमान से कोई बातचीत नहीं

    चंडीगढ़.

    पंजाब पूर्व मुख्यमंत्री और मौजूदा भाजपा नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह के पिछले कुछ समय से कांग्रेस में वापसी की चर्चा है। लेकिन फिलहाल इस पर संस्पेंस भी बरकरार है। पंजाब कांग्रेस के नए प्रधान सचिन पायलट ने कैप्टन को लेकर बड़ी बात कही है।

    पायलट ने कहा कैप्टन को लेकर उनकी हाईकमान से कोई बातचीत नहीं हुई है। ऐसे में इस बारे में वह कुछ नहीं कह सकते। पंजाब दौरे से पहले सचिन पायलट अपनी तैयारी में जुटे हैं। पंजाब कांग्रेस के प्रभारी सचिन पायलट ने कहा है कि कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनाव पूरी ताकत और मजबूती के साथ लड़ेगी। पार्टी का मुख्य मुद्दा पंजाब में नशे को खत्म करना, विकास और युवाओं के बेहतर भविष्य के लिए योजनाएं तैयार करना होगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का लक्ष्य पंजाब को देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करना है। बातचीत में पायलट ने नशे की समस्या को पंजाब के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश की आम आदमी पार्टी सरकार नशे के खिलाफ कार्रवाई करने में पूरी तरह विफल रही है।

    केंद्र नशे की आपूर्ती रोकने में विफल
    वहीं, केंद्र की भाजपा सरकार भी पंजाब में बाहर से आने वाले नशे की आपूर्ति को रोकने में असफल रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पंजाब के विकास के अपने पुराने रिकार्ड और युवाओं के बेहतर भविष्य के संकल्प के साथ जनता के बीच जाएगी। भाजपा के पंजाब प्रभारी सतीश पूनिया की ओर से अकाली दल के साथ संभावित गठबंधन को लेकर कांग्रेस पर की गई टिप्पणी पर पायलट ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि भाजपा को यह बताना चाहिए कि जिन लोगों को वह पहले गालियां देती थी और जिन्हें उसने किनारे कर दिया था, आज उसी शरण में वापस क्यों जाना पड़ रहा है।

    प्रकाश सिंह बादल के बाद अकाली दल टूटा
    अकाली दल को लेकर पायलट ने कहा कि यह पार्टी अब वह नहीं रही जो प्रकाश सिंह बादल के समय हुआ करती थी। पार्टी में कई टूट हुई हैं और अलग-अलग दल बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि अकाली दल और भाजपा जमीन तलाशने के लिए एक-दूसरे का साथ लेने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, जब दोनों दलों का गठबंधन था, तब भी उन्हें पंजाब में बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा था। पायलट ने दावा किया कि आगामी विधानसभा चुनाव में मुख्य मुकाबला कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच होगा। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव के परिणाम इसका संकेत दे चुके हैं।

    बिखर रही आप
    आप पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी बिखर गई है और उसके राज्यसभा के अधिकतर सांसद भाजपा के साथ चले गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के पास विपक्षी दलों को तोड़ने के अलावा कोई मुद्दा नहीं है और सांसदों को तोड़कर किसी तरह परिसीमन से जुड़े कानून को आगे बढ़ाना उसका प्रयास है। पायलट ने कहा कि पंजाब के लोग राजनीतिक रूप से जागरूक हैं और कांग्रेस का संगठन पूरी मजबूती के साथ चुनाव लड़कर जीत हासिल करेगा।

  • मुख्यमंत्री निवास में मनाया गया तीजा पोरा तिहार, दिखी छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपरा

    मुख्यमंत्री निवास में मनाया गया तीजा पोरा तिहार, दिखी छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपरा

    रायपुर.

    मुख्यमंत्री निवास में शनिवार को तीजा-पोरा तिहार के अवसर पर विशेष आयोजन किया गया. आयोजन के दौरान छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपरा और संस्कृति की झलक मुख्यमंत्री निवास में देखने को मिली. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के आतिथ्य में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी रही.

    तीजा जहां महिलाओं के लिए मायके, परिवार और रिश्तों की भावनाओं से जुड़ा पर्व है, वहीं पोरा तिहार खेती-किसानी और पशुधन के प्रति आस्था और सम्मान को दर्शाता है। इस दिन मिट्टी से बने नंदी-बैल और पारंपरिक खिलौनों की पूजा की जाती है। गांवों से लेकर शहरों तक इस पर्व की खास रौनक देखने को मिल रही हैं. लोकगीत, पारंपरिक नृत्य, झूले और छत्तीसगढ़ी पकवान इस उत्सव को और खास बना रहे हैं. मुख्यमंत्री आवास में हुए आयोजन में मंत्री गजेंद्र यादव के अलावा मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, रायपुर महापौर मीनल चौबे, पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की पत्नी वीणा सिंह और उनकी बहू के अलावा बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हुईं. 

  • MP Weather: 15 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, उज्जैन-देवास समेत कई इलाकों में बदलेगा मौसम

    MP Weather: 15 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, उज्जैन-देवास समेत कई इलाकों में बदलेगा मौसम

    भोपाल 

    मध्य प्रदेश में कुछ दिनों के ब्रेक के बाद एक बार फिर मानसून एक्टिव हो गया है. प्रदेश के कई हिस्सों में शुक्रवार को बारिश हुई. मौसम विभाग ने शनिवार को प्रदेश के 15 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है. इंदौर, जबलपुर, सागर और नर्मदापुरम संभाग के कई जिलों में बारिश होने की संभावना जताई गई है. मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में अगले तीन दिनों तक मानसून सिस्टम का असर बना रहेगा। 

    शुक्रवार को भोपाल समेत कई जिलों में मौसम बदला और तेज बारिश हुई. भोपाल में बारिश के साथ तेज आंधी भी चली. इसके कारण कई इलाकों में कुछ समय के लिए विजिबिलिटी 100 मीटर से भी कम हो गई. सड़कों पर गाड़ी चलाने वालों को परेशानी का सामना करना पड़ा. दमोह, टीकमगढ़ और विदिशा समेत कई जिलों में भी बारिश दर्ज की गई। 

    मौसम विभाग के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी में बना लो प्रेशर एरिया अब प्रदेश के मौसम को प्रभावित कर रहा है. इसी सिस्टम के कारण मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का दौर दोबारा शुरू हुआ है. आने वाले दिनों में इस सिस्टम का असर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में देखने को मिल सकता है। 

    भोपाल समेत कई जिलों में बारिश
    शुक्रवार को भोपाल में बारिश के साथ तेज हवाएं चलीं। कुछ इलाकों में विजिबिलिटी 100 मीटर से भी कम हो गई, जिससे वाहन चालकों को काफी सावधानी बरतनी पड़ी। दमोह, टीकमगढ़ और विदिशा समेत कई जिलों में भी बारिश दर्ज की गई। बारिश के बाद तापमान में गिरावट आई और लोगों को गर्मी से राहत मिली। मौसम विभाग ने इंदौर, जबलपुर, सागर और नर्मदापुरम संभाग के कई जिलों में बारिश की संभावना जताई है। भोपाल और आसपास के क्षेत्रों में भी मौसम सक्रिय रह सकता है। 15 सितंबर तक प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है।

    तेज बारिश के दौरान निचले इलाकों में जलभराव की समस्या हो सकती है। वाहन चालकों को कम विजिबिलिटी में धीमी गति से गाड़ी चलाने की सलाह दी गई है। तेज आंधी के समय पेड़ और बिजली के खंभों से दूर रहना भी जरूरी है। आने वाले दिनों में बारिश से राहत तो मिलेगी, लेकिन खराब मौसम के दौरान सावधानी बरतना बेहद जरूरी रहेगा।

    बारिश नहीं होने से गर्मी-उमस दोनों बढ़ी

    बता दें कि प्रदेश के कई जिलों में पिछले 3 से 4 दिन बारिश नहीं हुई। इस वजह से गर्मी और उमस दोनों का असर बढ़ गया। बारिश शुरू होने से लोगों को इससे राहत मिलने की उम्मीद है।

    प्रदेश में अब तक 31.5 इंच बारिश

    मौसम विभाग के अनुसार, अब तक हुई बारिश की बात करें तो इस सीजन 801.3 मिमी यानी, 31.5 इंच बारिश हो चुकी है। यह अब तक की सामान्य बारिश 34.2 इंच (868.6 मिमी) की तुलना में 2.7 इंच कम है। वहीं, ओवरऑल 8 प्रतिशत कम पानी गिरा है। पूर्वी हिस्से में 1 प्रतिशत और पश्चिमी हिस्से में औसत से 14% बारिश कम हुई है।

    33 जिलों में 1% से 56% तक कम बारिश

    प्रदेश के पूर्वी हिस्से- जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में 1% तक कम बारिश हुई है। बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर, सिवनी में 3% से 26% तक कम बारिश हुई है। पिछले एक सप्ताह में यह आंकड़ा काफी सुधरा है। बीते एक सप्ताह से यहां के कई जिलों में बाढ़ के हालात बने हुए हैं। इससे आंकड़े में सुधार आया और सीजन में पहली बार पूर्वी हिस्सा आंकड़ों में बेहतर रहा है, लेकिन बुधवार तक आंकड़ा एक प्रतिशत हो गया।

    वहीं, पश्चिमी हिस्से के आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, खंडवा, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में औसत से 1% से 56% कम पानी गिरा है।

    इन 22 जिलों में ज्यादा बारिश

    IMD की मानें तो अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़्र, श्योपुर और शिवपुरी में ही औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई।

    15 सितंबर तक बारिश का दौर
    मौसम विभाग ने बताया कि बंगाल की खाड़ी में बने सिस्टम के कारण प्रदेश में 15 सितंबर तक बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है. इस दौरान कई जिलों में हल्की बारिश हो सकती है, जबकि कुछ इलाकों में भारी बारिश भी होने का अनुमान है. कहीं-कहीं तेज हवाओं और गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है। 

    तीन-चार दिन से थमी थी बारिश, अब फिर राहत
    प्रदेश के कई इलाकों में पिछले तीन-चार दिन से बारिश नहीं होने के कारण गर्मी और उमस बढ़ गई थी। शुक्रवार को बारिश शुरू होने के बाद मौसम बदला और लोगों को राहत मिली। भोपाल में बारिश के दौरान तेज हवा के कारण सड़क पर दृश्यता काफी कम हो गई। दमोह में तेज बारिश के कारण निचले इलाकों में पानी भर गया। खंडवा में भी दोपहर में पहले तेज हवा चली और इसके बाद बारिश हुई। टीकमगढ़ में बारिश के बाद तापमान में गिरावट आई और मौसम सुहाना हो गया।

    31.5 इंच बारिश, सामान्य आंकड़े से अभी 2.7 इंच पीछे
    मध्य प्रदेश में इस मानसून सीजन में अब तक 801.3 मिमी यानी 31.5 इंच बारिश हो चुकी है। सामान्य तौर पर इस अवधि में 868.6 मिमी यानी 34.2 इंच बारिश होनी चाहिए थी। इस लिहाज से प्रदेश में अभी 2.7 इंच यानी 8 प्रतिशत बारिश कम है। पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश की कमी करीब एक प्रतिशत रह गई है, जबकि पश्चिमी हिस्से में सामान्य से 14 प्रतिशत कम बारिश हुई है।

    33 जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से कम
    प्रदेश के 33 जिलों में अब भी सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। पूर्वी हिस्से के कई जिलों में कमी 3 से 26 प्रतिशत तक है। इनमें बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडोरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर और सिवनी शामिल हैं। पश्चिमी हिस्से के कई जिलों में कमी ज्यादा है। आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से कम पानी गिरा है।

    22 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश
    दूसरी ओर अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। 

    इन इलाकों में ज्यादा असर
    इस समय भारी बारिश का सबसे ज्यादा असर इंदौर, जबलपुर, सागर और नर्मदापुरम के जिलों में देखने को मिल सकता है. इसके अलावा भोपाल और आसपास के क्षेत्रों में भी मौसम सक्रिय रहने की संभावना है. बारिश के कारण तापमान में गिरावट आने से लोगों को गर्मी से राहत मिल सकती है. मौसम विभाग ने लोगों से बारिश और तेज आंधी के दौरान सावधानी बरतने की अपील की है. खासकर वाहन चालकों को कम विजिबिलिटी में स्लो स्पीड से गाड़ी चलाने और जरूरत न होने पर खुली जगहों पर जाने से बचने की सलाह दी गई है। 

  • सरकारें ही जर्जर थीं तो सिस्टम भी जर्जर हो गया था: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

    सरकारें ही जर्जर थीं तो सिस्टम भी जर्जर हो गया था: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

    सरकारें ही जर्जर थीं तो सिस्टम भी जर्जर हो गया था: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
     
    यूपी पर लगा था बीमारू का ठप्पा, नौजवान के सामने था पहचान का संकट

    युवा पुस्तक नहीं पढ़ना चाहता, यह धारणा उसके साथ अन्याय : मुख्यमंत्री

    मुख्यमंत्री योगी ने गोमती पुस्तक महोत्सव का पांचवां संस्करण का किया शुभारंभ, 80 से बढ़कर 250 हुए स्टॉल

    योगी बोले, पाठ्यक्रम से ही नहीं समझ सकते समाज, देश और दुनिया को

    प्रदेश की 57,600 ग्राम पंचायतों के पुस्तकालयों तक पहुंचीं एनबीटी की पुस्तकें
     
    लखनऊ

     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकारें ही जर्जर थीं तो सिस्टम भी जर्जर हो गया था। सरकारी विद्यालयों के भवन जर्जर थे, सुविधाओं का अभाव था और उत्तर प्रदेश पर बीमारू राज्य का ठप्पा लग गया था। प्रदेश के नौजवान के सामने पहचान का संकट था। बाहर जाने पर वह अपनी पहचान बताने से भी संकोच करता था। पिछले दस वर्षों में शुरू हुए सकारात्मक प्रयासों के परिणाम अब सामने हैं और उत्तर प्रदेश की तस्वीर बदली है।
     
    शनिवार को गोमती पुस्तक महोत्सव-2026 के पांचवें संस्करण का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश के पास ज्ञान और चिंतन की अत्यंत समृद्ध परंपरा रही है। इसके बावजूद जब हमने ज्ञान को सीमित और संकुचित दायरे में कैद किया और अपनी विरासत से दूरी बनाई तो उसका दुष्परिणाम पूरे प्रदेश को भुगतना पड़ा। यूपी बीमारू राज्यों की श्रेणी में खड़ा हो गया। उन्होंने कहा कि कोई व्यक्ति, समाज या राष्ट्र अपनी विरासत से संबंध तोड़कर आगे नहीं बढ़ सकता।
     
    बेसिक शिक्षा की पूर्व की स्थिति का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि परिषदीय विद्यालयों में सुविधाओं की कल्पना करना कठिन था। भवन जर्जर थे और व्यवस्थाएं भी उसी स्थिति में थीं। सरकार ने ऑपरेशन कायाकल्प शुरू किया तो विद्यालयों के भवन बदले। स्मार्ट क्लास और डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा उपलब्ध कराई गई। मुख्यमंत्री ने चित्रकूट का अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि वहां तीसरी कक्षा की एक बच्ची को डिजिटल लाइब्रेरी सहजता से संचालित करते देखकर उन्हें अहसास हुआ कि बच्चों में क्षमता की कमी नहीं थी, उन्हें अवसर और संसाधन नहीं मिले थे।
     
    मुख्यमंत्री योगी ने इसी संदर्भ में युवाओं के पुस्तकों से दूर होने की धारणा को भी खारिज किया। कहा कि यह कहना युवा के साथ अन्याय होगा कि वह पुस्तक नहीं पढ़ना चाहता और अपना अधिकतर समय सोशल या डिजिटल मीडिया पर ही बिताता है। वास्तविकता यह है कि हमने उस तक पुस्तक पहुंचाने का पर्याप्त प्रयास नहीं किया। जब युवाओं को पुस्तकें और उचित मंच उपलब्ध कराया गया तो पुस्तक महोत्सवों में उनकी भागीदारी ने सारी धारणाएं बदल दीं।
     
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि लखनऊ में पुस्तक महोत्सव की शुरुआत के समय उन्हें भी इसके परिणाम को लेकर थोड़ा संकोच था, लेकिन पहले ही आयोजन में अपेक्षा से कई गुना अधिक छात्र और युवा पहुंचे। आज इसका पांचवां संस्करण आयोजित हो रहा है और स्टॉल की संख्या 80 से बढ़कर 250 हो चुकी है। अगले नौ दिनों तक हजारों विद्यार्थियों और युवाओं को ज्ञानवर्धक, मनोरंजक और रोचक पुस्तकों को जानने का अवसर मिलेगा। यहां पुस्तक विमोचन के साथ लेखक और पाठक आमने-सामने होंगे। युवाओं को लेखकों की अभिव्यक्ति, उनके संघर्ष और जीवन यात्रा को समझने का अवसर भी मिलेगा।
     
    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति आभार जताते हुए मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि उनकी प्रेरणा से शिक्षा मंत्रालय देश के अलग-अलग हिस्सों में पुस्तक महोत्सवों के माध्यम से भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को आधुनिक ज्ञान से जोड़ने का काम कर रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री की पुस्तक ‘एग्जाम वारियर्स’ का उल्लेख करते हुए कहा कि इसे हर बच्चे और युवा को पढ़ना और आत्मसात करना चाहिए। यह केवल स्कूली परीक्षाओं के लिए नहीं है। जीवन में हर व्यक्ति को अलग-अलग परिस्थितियों में परीक्षा के दौर से गुजरना पड़ता है। जब हिम्मत जवाब देने लगती है, तब ऐसी पुस्तकें संबल और मार्गदर्शन देती हैं।
     
    ऋग्वेद के मंत्र ‘आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः’ का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय ऋषि परंपरा ज्ञान को चारों ओर से आने देने की प्रेरणा देती है। केवल स्कूल, कॉलेज या विश्वविद्यालय जाकर पाठ्यक्रम पढ़ लेने से ही व्यक्ति ज्ञानवान नहीं हो सकता। पाठ्यक्रम किसी विषय में पारंगत कर सकता है, लेकिन समाज, देश और दुनिया को समझने के लिए अलग-अलग विषयों और विचारों को पढ़ना जरूरी है।
     
    मुख्यमंत्री योगी ने उत्तर प्रदेश की प्राचीन ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि लखनऊ साहित्य का पुराना केंद्र रहा है। यहां से करीब 70 किलोमीटर दूर नैमिषारण्य में 88 हजार ऋषियों ने पुराणों के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाया। काशी के विश्वविद्यालय जगविख्यात रहे हैं। प्रयागराज का कुंभ केवल आयोजन या महोत्सव नहीं रहा, बल्कि देशभर के ऋषि-मुनियों के ज्ञान, चिंतन, संवाद और नवाचार की स्थली रहा है। मुजफ्फरनगर के शुकतीर्थ में करीब पांच हजार वर्ष पहले श्रीमद्भागवत महापुराण की पहली कथा के वाचन की परंपरा भी इसी प्रदेश से जुड़ी है।
     
    मुख्यमंत्री योगी ने गांवों तक पुस्तक और डिजिटल ज्ञान पहुंचाने के प्रयासों का भी उल्लेख किया। कहा कि मुख्यमंत्री के लिए सचिवालय और जिलाधिकारी के लिए कलेक्ट्रेट था, लेकिन गांव की सबसे छोटी प्रशासनिक इकाई के पास बैठने की अपनी जगह तक नहीं थी। सरकार ने ग्राम सचिवालय बनाए और तय किया कि इनमें बैठक कक्ष के साथ पुस्तकालय भी होगा। प्रदेश की 57,600 ग्राम पंचायतों में बने पुस्तकालयों में नेशनल बुक ट्रस्ट की पुस्तकें उपलब्ध कराई गई हैं और डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा भी दी गई है। आज गांव के छात्र और युवा इनका उपयोग कर रहे हैं। यह साबित करता है कि अवसर और संसाधन मिलने पर गांव का युवा भी किसी से पीछे नहीं है।

    मुख्यमंत्री योगी ने छात्राओं को भेंट की ‘एग्जाम वॉरियर्स’, पुस्तक स्टॉलों का किया अवलोकन
    इससे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फीता काटकर गोमती पुस्तक महोत्सव का शुभारंभ किया। महोत्सव परिसर में पहुंचते ही उन्होंने वहां लगी विभिन्न प्रदर्शनियों का अवलोकन किया और पुस्तक स्टॉलों पर जाकर पुस्तकों को देखा। इस दौरान मुख्यमंत्री ने प्रकाशकों और आयोजकों से भी जानकारी ली। उन्होंने छह छात्राओं को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पुस्तक ‘एग्जाम वॉरियर्स’ अपने हाथों से भेंट की, जबकि अन्य छात्राओं को भी पुस्तकें वितरित की गईं। पुस्तकें पाने वाले बच्चों के चेहरे खिल उठे। मुख्यमंत्री ने छात्राओं के साथ तस्वीर भी खिंचवाई।
     
    इस अवसर पर नेशनल बुक ट्रस्ट के चेयरमैन प्रो. मिलिंद मराठे ने मुख्यमंत्री का शॉल ओढ़ाकर और पुस्तक भेंट कर स्वागत किया। उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी, मुख्य सलाहकार अवनीश अवस्थी, पार्थ सारथी सेन शर्मा और बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री संदीप सिंह का भी पुस्तक भेंट कर स्वागत किया गया। कार्यक्रम में गोमती पुस्तक महोत्सव के पिछले संस्करणों की यात्रा और यादगार पलों पर आधारित वीडियो भी प्रदर्शित किया गया, जिसे मुख्यमंत्री समेत उपस्थित अतिथियों ने देखा।

    समारोह में उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी, बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह, लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जेपी सैनी, नेशनल बुक ट्रस्ट के चेयरमैन प्रो. मिलिंद सुधाकर मराठे, निदेशक युवराज मलिक सहित लेखक, प्रकाशक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

  • iPhone 18 आते ही बदला बाजार, iPhone 17 की कीमत में ₹17 हजार का उछाल

    iPhone 18 आते ही बदला बाजार, iPhone 17 की कीमत में ₹17 हजार का उछाल

    टेक वर्ल्ड की यह पुरानी रवायत रही है कि जब भी Apple अपना नया iPhone लॉन्च करता है, तो पुराने मॉडल की कीमतें झटके से गिर जाती हैं. लोग इंतजार करते हैं कि नया फोन आए और वे पिछला iPhone कुछ किफायती दामों में खरीद सकें. लेकिन इस बार हवा का रुख बिल्कुल उलट है.

    iPhone 18 सीरीज़- iPhone 18 Pro और Pro Max के बाज़ार में आते ही, ओपन और ऑनलाइन मार्केट में एक ऐसा नजारा देखने को मिल रहा है जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी. जो iPhone 17 कल तक ₹82,900 में आसानी से उपलब्ध था, उसकी आधिकारिक शुरुआती कीमत Apple की वेबसाइट पर रातों-रात 21 फीसदी उछलकर ₹99,900 पहुंच गई. यानी सीधे-सीधे ₹17,000 का फटका!

    ई-कॉमर्स पोर्टल्स पर कुछ ही घंटों के भीतर 'सोल्ड आउट' का बोर्ड लटक गया. ऐसे में हमने हकीकत जानने के लिए दिल्ली-एनसीआर के कई बड़े स्टोर और मोबाइल बाजारों का रुख किया. जो तस्वीर सामने आई, उसने कई सवाल खड़े कर दिए. एक दिन पहले तक जिन दुकानों पर iPhone 17 उपलब्ध बताया जा रहा था, लॉन्चिंग के कुछ ही घंटों बाद वहां स्टॉक खत्म होने की बात सामने आने लगी.

    जमाखोरी और बुकिंग का खेल
    सबसे पहले हम गाजियाबाद के एक नामी मॉल' पहुंचे. यहां एक बड़े मल्टी-ब्रांड स्टोर पर सूरज नाम के सेल्समैन से मुलाकात हुई. जब हमने पूछा कि क्या iPhone 17 मिल पाएगा? उसने बेझिझक कहा-"हां, मिल जाएगा, लेकिन नए रेट पर!" हमने सवाल दागा कि नया iPhone 18 तो अभी बाजार में पूरी तरह डिलीवर भी नहीं हुआ, फिर पुराने फोन पर नया रेट क्यों? सूरज ने तुरंत पलटी मारी और बात संभालते हुए बोला- "अभी तो हमारे पास फोन उपलब्ध नहीं है, लेकिन हम नए रेट्स पर एडवांस बुकिंग ले रहे हैं. 5 दिन बाद डिलीवरी मिल जाएगी."

    जब हमने पूछा कि शोरूम में मौजूद पुराना स्टॉक कहां गया, तो उसने रटा-रटाया जवाब चिपका दिया कि कंपनी ने पूरा स्टॉक वापस मंगवा लिया है. लेकिन उसकी झिझक यह ऐसा बयां कर रही थी कि बैकग्राउंड में स्टॉक को होल्ड (जमाखोरी) करके जबरन किल्लत बनाई जा रही है.

    बाजार से भी गायब हुए पुराने फोन
    हमारी अगली पहली मंजिल थी ईस्ट दिल्ली स्थित एक नामी मॉल का नामी इलेक्ट्रॉनिक्स स्टोर. हमने आम ग्राहक बनकर काउंटर पर खड़े सेल्समैन से iPhone 17 की उपलब्धता पूछी. सेल्समैन ने मुस्कुराते हुए कहा-"फोन तो मिल जाएगा सर, लेकिन इसके साथ ₹8,500 का एक साल वाला कंपलसरी एक्सटेंडेट वॉरंटी लेनी होगी." हालांकि यह बात स्टोर मैनेजर ने तुरंत खारिज कर दी और बताया कि एक्सटेंडेट वॉरंटी बिल्कुल भी अनिवार्य नहीं है.

    जीएसटी बिल के मुद्दे पर स्टोर मैनेजर ने बाजार का एक कड़वा सच उजागर करते हुए बताया, "बाज़ार में इस वक्त iPhone 17 की भारी ब्लैक मार्केटिंग (होर्डिंग) चल रही है. कुछ बड़े डीलर्स अपने लोगों को आम ग्राहक बनाकर भेज रहे हैं और स्टॉक उठाकर ऊंचे दामों पर बेच रहे हैं. इसलिए हम सिर्फ जेनुइन (वास्तविक) खरीदारों को ही जीएसटी बिल पर फोन दे रहे हैं."  यह एकमात्र ऐसा स्टोर रहा जहां ग्राहकों को पुरानों दरों पर iPhone 17 बेचा जा रहा था और यहां भी जल्द ही iPhone 17 का स्टॉक सोल्ड आउट हो गया.

    स्थानीय बाज़ार और ग्राहकों का दर्द
    मॉल का चक्कर काटने के बाद हम ईस्ट दिल्ली के एक लोकल मोबाइल मार्केट पहुंचे, जहां छोटी-बड़ी दर्जनों दुकानें थीं. हर दुकान के काउंटर पर एक ही जवाब सुनने को मिला- 'iPhone 17 मिल ही कहा रहा है भैया!'

    हालांकि, दुकान के बाहर हमारी मुलाकात कुछ ऐसे परेशान ग्राहकों से हुई जो कई घंटों से फोन की तलाश में भटक रहे थे.  एक ग्राहक ने दर्द बयां करते हुए बताया- 'अंदर दुकानदार कह रहे हैं कि ऑफिशियल स्टॉक नहीं है, लेकिन अगर आप कैश में  वही ₹82,900 वाला iPhone 17 अभी ₹95,000 तक में चुपके से दिया जा रहा है. यह खुलेआम ब्लैक मार्केटिंग है.'

    आम तौर पर नया iPhone आते ही पुराना मॉडल इसलिए सस्ता होता है क्योंकि कंपनियों को अपना बचा हुआ पुराना स्टॉक खाली करना होता है. लेकिन इस बार का परिदृश्य पूरी तरह अलग है. iPhone 18 Pro सीरीज की अत्यधिक ऊंची कीमतों और iPhone 17 की रातों-रात बढ़ी ऑफिशियल प्राइस ने भारतीय बाज़ार में एक अजीब सा पैनिक पैदा कर दिया है.

    रिटेलर्स और बड़े डीलर्स को यह अच्छी तरह समझ आ गया है कि कस्टमर अब iPhone 18 के बजाय iPhone 17 को एक बेहतर और किफायती विकल्प मान रहे हैं. इसी भारी मांग का फायदा उठाने के लिए बाज़ार में 'कमी'  पैदा की जा रही है, ताकि पुराना स्टॉक भी एमआरपी या उससे ऊंचे दामों पर ब्लैक में खपाया जा सके.

    नई सीरीज लॉन्च होते ही बढ़ी कीमत
     आपको बता दें कि Apple ने iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max को लॉन्च कर दिया है. नए Pro मॉडल्स में कैमरा, प्रोसेसर और AI को लेकर कई बड़े अपग्रेड किए गए हैं. हालांकि, सबसे ज्यादा चर्चा इनकी कीमत को लेकर हो रही है. भारत में iPhone 18 Pro की शुरुआती कीमत 1,64,900 रुपये, जबकि iPhone 18 Pro Max की कीमत 1,79,900 रुपये रखी गई है. Apple के अनुसार, दोनों मॉडल्स की प्री-बुकिंग 12 सितंबर से शुरू होगी और बिक्री 18 सितंबर से शुरू की जाएगी. इसके अलावा, कंपनी ने अपना पहला फोल्डेबल iPhone भी लॉन्च किया है. iPhone Duo नाम के इस फोन की शुरुआती कीमत 2,99,900 रुपये है.

  • SET 2026: 1.77 लाख अभ्यर्थी देंगे परीक्षा, 7 संभागों में बनाए गए 429 केंद्र

    SET 2026: 1.77 लाख अभ्यर्थी देंगे परीक्षा, 7 संभागों में बनाए गए 429 केंद्र

     कोटा
    कोटा विश्वविद्यालय की ओर से 13 सितम्बर को सहायक आचार्य के लिए राज्य पात्रता परीक्षा (सेट)-2026 आयोजित की जाएगी। यह परीक्षा 7 संभाग जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, उदयपुर, कोटा, अजमेर व भरतपुर में सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक एक पारी में ऑफलाइन मोड पर होगी। इसमें 37 विषयों में इस वर्ष 1 लाख 77 हजार 901 अभ्यर्थी पंजीकृत हुए हैं। सात संभागीय मुख्यालयों में कुल 429 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। जयपुर में सबसे अधिक 78 हजार तो भरतपुर में सबसे कम 8 हजार से अधिक अभ्यर्थी बैठेंगे। इसके अलावा जोधपुर में 22,609, बीकानेर 22,281, उदयपुर 17,320, कोटा 14839, अजमेर संभाग में 13,753 अभ्यर्थी शामिल होंगे।

    कोटा विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. बीपी सारस्वत ने बताया कि परीक्षा का आयोजन यूजीसी-नेट के नवीनतम मानकों के अनुरूप किया जाएगा। परीक्षा से संबंधित व्यवस्थाओं की निगरानी के लिए कोटा विश्वविद्यालय में केंद्रीय कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। परीक्षा की सुरक्षा, गोपनीयता और संवेदनशीलता से जुड़े सभी मानकों को ध्यान में रखते हुए व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। उन्होंने अभ्यर्थियों से निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करने और परीक्षा केंद्र पर समय से पहुंचने की अपील की।

    प्रवेश के लिए ये दस्तावेज जरूरी
    अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र पर प्रवेश-पत्र की रंगीन प्रति, मूल फोटोयुक्त पहचान-पत्र के रूप में केवल आधार कार्ड तथा ऑनलाइन आवेदन के समय अपलोड की गई फोटो से मेल खाती एक रंगीन पासपोर्ट साइज फोटो साथ लानी होगी।

    अभ्यर्थियों की रिपोर्टिंग सुबह 9 से 10 बजे तक होगी। 10 बजे बाद किसी भी अभ्यर्थी को परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं दिया जाएगा।

    परीक्षा समन्वयक प्रो. घनश्याम शर्मा ने बताया कि प्रवेश-पत्र पर अंकित परीक्षा केंद्र और रोल नंबर के कोड को केवल सांकेतिक न मानते हुए परीक्षा केंद्र की वास्तविक लोकेशन पहले से सुनिश्चित कर लें। इसके लिए परीक्षा से एक दिन पूर्व केंद्र पर जाकर स्थान की जानकारी प्राप्त करने की सलाह दी गई है, ताकि परीक्षा के दिन किसी प्रकार की परेशानी न हो।

    मोबाइल, स्मार्ट वॉच और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण प्रतिबंधित
    1- परीक्षा की गोपनीयता और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए परीक्षा कक्ष में मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच, ब्लूटूथ डिवाइस, कैलकुलेटर सहित किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक गैजेट, पुस्तक, नोट्स आदि ले जाना पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा।
    2- अभ्यर्थियों को आधी आस्तीन के हल्के रंग के कपड़े तथा कम हील वाली चप्पल या सैंडल पहनकर आने की सलाह दी गई है।
    3- धार्मिक, पारंपरिक अथवा सांस्कृतिक पोशाक में आने वाले अभ्यर्थियों की सुरक्षा जांच के दौरान विशेष रूप से तलाशी ली जाएगी।
    अभ्यर्थी अपने साथ केवल काले या नीले बॉल पेन लेकर आएं।
    4- ओएमआर शीट पर व्हाइटनर, ब्लेड अथवा किसी अन्य वस्तु का प्रयोग नहीं किया जा सकेगा।
    5- अनुचित साधनों का प्रयोग करते पाए जाने वाले अभ्यर्थियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।

  • Yash की Toxic का बॉक्स ऑफिस पर बुरा हाल, 500 करोड़ के बजट वाली फिल्म पर 300 करोड़ नुकसान का दावा

    Yash की Toxic का बॉक्स ऑफिस पर बुरा हाल, 500 करोड़ के बजट वाली फिल्म पर 300 करोड़ नुकसान का दावा

    यश की ‘Toxic: A Fairytale for Grown-Ups’ से 2026 की सबसे बड़ी फिल्मों में शामिल होने की उम्मीद थी. फिल्म की स्टारकास्ट, जबरदस्त स्केल और यश की चार साल बाद वापसी ने माहौल बना दिया था. लेकिन रिलीज के बाद जो हुआ, उसने मेकर्स का पूरा बॉक्स ऑफिस गणित बिगाड़ दिया.

    फिल्म ने करीब 140 करोड़ की वर्ल्डवाइड ओपनिंग लेकर ब्लॉकबस्टर शुरुआत की थी. भारत में पहले दिन नेट कलेक्शन करीब 101 करोड़ रहा. लगा कि फिल्म अब बॉक्स ऑफिस पर लंबी रेस दौड़ेगी. लेकिन दूसरे ही दिन कमाई करीब 37 करोड़ पर आ गई और पहले सोमवार तक रोज की कमाई 10 करोड़ से नीचे चली गई.

    15वें दिन तक फिल्म का वर्ल्डवाइड कलेक्शन करीब 339.32 करोड़ था. 16वें दिन भारत में फिल्म ने सिर्फ करीब 40 लाख कमाए. यानी जिस फिल्म ने पहले दिन करोड़ों की बारिश की थी, उसकी रफ्तार कुछ ही दिनों में बुरी तरह बैठ गई.

    300-350 करोड़ तक का नुकसान?
    ट्रेड एनालिस्ट रमेश बाला ने इंडिया टुडे से बातचीत में कहा कि ‘टॉक्सिक’ का नुकसान करीब 300 से 350 करोड़ तक हो सकता है. उनके मुताबिक फिल्म अपने बजट का लगभग 60 फीसदी हिस्सा भी रिकवर नहीं कर पाई. फिल्म का प्रोडक्शन बजट करीब 450 करोड़ बताया गया है, जबकि पब्लिसिटी, रिलीज, ब्याज और दूसरे खर्च जोड़ने पर कुल निवेश 500 करोड़ या उससे ज्यादा होने की भी रिपोर्ट्स हैं.

    हालांकि यहां एक बात समझना जरूरी है- वर्ल्डवाइड ग्रॉस और बजट को सीधे घटाकर फिल्म का नुकसान नहीं निकाला जा सकता. कमाई का हिस्सा थिएटर मालिकों, डिस्ट्रीब्यूटर्स और प्रोड्यूसर्स में बंटता है. इसके अलावा OTT, सैटेलाइट और म्यूजिक राइट्स से होने वाली कमाई भी हिसाब में आती है. इसलिए नुकसान के आंकड़े अलग-अलग बताए जा रहे हैं.

    100 करोड़ की ओपनिंग, फिर ऐसा क्या हुआ?
    ‘टॉक्सिक’ की सबसे बड़ी परेशानी इसकी ओपनिंग नहीं, बल्कि ओपनिंग के बाद का क्रैश रहा. यश की स्टार पावर, नयनतारा और कियारा आडवाणी की मौजूदगी और फिल्म के बड़े स्केल ने पहले दिन दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींच लिया. लेकिन इसके बाद फिल्म के लिए वही भीड़ बरकरार नहीं रही. फिल्म को रन के दौरान ‘मिर्जापुर: द मूवी’ और ‘हनुमान अंश’ जैसी फिल्मों से भी मुकाबला करना पड़ा. जैसे-जैसे दूसरी फिल्मों ने रफ्तार पकड़ी, ‘टॉक्सिक’ के शो और स्क्रीन भी कम होते गए.

    हाल ही में यश के एक दोस्त ने भी बताया कि एक्टर टॉक्सिक के फ्लॉप होने से कितना दुखी हैं. उनके मुताबिक ये दर्द उनकी आवाज में महसूस किया जा सकता है.

    गेम चेंजर और आदिपुरुष से भी हुई तुलना
    ‘टॉक्सिक’ की तुलना अब राम चरण की ‘गेम चेंजर' और प्रभास की ‘आदिपुरुष’ से भी हो रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक ‘गेम चेंजर’ का बजट करीब 300-400 करोड़ और वर्ल्डवाइड थिएट्रिकल कलेक्शन करीब 186 करोड़ रहा था, जबकि नुकसान करीब 200 करोड़ बताया गया. वहीं ‘आदिपुरुष’ का बजट अलग-अलग रिपोर्ट्स में 500-700 करोड़ के बीच बताया गया और फिल्म ने करीब 350 करोड़ का वर्ल्डवाइड थिएट्रिकल ग्रॉस किया. इसके नुकसान का अनुमान करीब 220 करोड़ लगाया गया.

    अगर ‘टॉक्सिक’ को लेकर सामने आ रहे 300 करोड़ या उससे ज्यादा के नुकसान के आंकड़े सही साबित होते हैं, तो फिल्म इन दोनों से भी बड़े फाइनेंशियल झटके की कैटेगरी में पहुंच सकती है.

    OTT के चक्कर में भी बिगड़ा खेल?
    फिल्म की कमाई कमजोर होने के बाद इसका असर नॉन-थिएट्रिकल बिजनेस पर भी पड़ता दिख रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक मेकर्स ने रिलीज से पहले OTT डील फाइनल नहीं की थी. उम्मीद थी कि फिल्म ब्लॉकबस्टर चलेगी तो डिजिटल राइट्स की कीमत और बढ़ेगी. लेकिन हुआ इसका उल्टा.

    रमेश बाला के मुताबिक, अगर OTT राइट्स पहले बेच दिए जाते तो नुकसान का मार्जिन कम से कम 100 करोड़ तक कम हो सकता था. रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि करीब 200 करोड़ की उम्मीद वाली OTT डील अब सिर्फ 30 करोड़ के आसपास बताई जा रही है. हालांकि यह आंकड़ा कन्फर्म नहीं है.

    ‘टॉक्सिक’ ने आखिर कहां कर दी सबसे बड़ी गलती?
    यश की ‘टॉक्सिक’ की कहानी में सबसे बड़ा झटका यही है कि फिल्म फ्लॉप ओपनिंग के कारण नहीं डूबी, बल्कि ब्लॉकबस्टर ओपनिंग के बाद संभल नहीं पाई. 100 करोड़ से ज्यादा की घरेलू ओपनिंग और करीब 140 करोड़ की वर्ल्डवाइड शुरुआत ने फिल्म से बहुत बड़े कलेक्शन की उम्मीद जगा दी थी. लेकिन बाद की गिरती कमाई ने पूरा रिकवरी मॉडल बिगाड़ दिया.

    यश की पिछली फिल्म ‘KGF: Chapter 2’ की जबरदस्त सफलता के बाद ‘टॉक्सिक’ से उम्मीदें पहले ही आसमान पर थीं. चार साल बाद वापसी, पैन-इंडिया अपील और करीब 450-500 करोड़ के भारी-भरकम निवेश ने दबाव और बढ़ा दिया. अब करीब 340 करोड़ के आसपास अटकती वर्ल्डवाइड कमाई इस फिल्म की सबसे बड़ी कहानी बन गई है.

    यानी ‘टॉक्सिक’ सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर कम नहीं चली- इस फिल्म का पूरा बिजनेस प्लान ही उल्टा पड़ता नजर आ रहा है. ओपनिंग से लेकर थिएट्रिकल रन और OTT राइट्स तक, जिस गणित से फिल्म को कमाई का पहाड़ बनना था, वही अब सबसे बड़ा घाटा बन गया है.

  • पटना हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: RT-PCR रिपोर्ट न होने पर भी कोविड मुआवजे का हक नहीं छीना जा सकता

    पटना हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: RT-PCR रिपोर्ट न होने पर भी कोविड मुआवजे का हक नहीं छीना जा सकता

    पटना
    पटना हाईकोर्ट ने कोरोना से मौत मामले में एक अहम फैसला सुनाया है। कहा कि कोविड से मौत मामले में तकनीकी आधार पर मुआवजा रोकना गलत है। अस्पताल का मृत्यु प्रमाण पत्र विश्वसनीय सबूत होता है। सिर्फ आरटीपीसीआर रिपोर्ट नहीं होने पर विधवा का हक नहीं छीना जा सकता। न्यायमूर्ति आलोक कुमार ने मुंगेर की आशा देवी की अर्जी पर अधिकारियों को चार सप्ताह के भीतर अनुग्रह राशि भुगतान करने का आदेश दिया।

    कोर्ट को बताया गया कि आवेदिका के पति अजय कुमार शर्मा की मृत्यु 21 मई 2021 को मुंगेर के सिटी क्रिटिकल हॉस्पिटल में हो गई थी। मृत्यु प्रमाण पत्र में मौत का कारण कोविड-19 दर्ज है। जिला प्रशासन ने उन्हें कोविड मृतकों की सूची में रखा और राशि भी आवंटित की। लेकिन भुगतान नहीं किया गया। मृतक की पत्नी ने आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य विभाग और मुंगेर डीएम को विस्तृत अभ्यावेदन दिया। पर जिला स्वास्थ्य समिति ने आरटी पीसीआर रिपोर्ट नहीं होने का हवाला दे दावा खारिज कर दिया।

    सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला
    स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, टेस्ट रिपोर्ट के अभाव में किसी को मुआवजे से वंचित करने का आधार नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि कोविड सर्टिफिकेट या टेस्ट रिपोर्ट नहीं होना निर्णायक नहीं हो सकता है। अस्पताल का प्रमाण पत्र और जिला स्तरीय सूची में नाम है, तो तकनीकी आधार पर राशि नहीं देना गलत है।

    कोविड के दौरान इलाज में लापरवाही पर अस्पताल सील
    कोविड के दौरान इलाज में लापरवाही पर पटना के कुम्हरार स्थित भागवत नगर स्थित पुष्पांजलि मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल को सिविल सर्जन ने सील कर दिया। जिला प्रशासन और पुलिस से प्राप्त जांच रिपोर्ट के आधार पर अस्पताल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए थाने को आवेदन भी दिया गया है।

    यह कार्रवाई 2021 में आई कोरोना की दूसरी लहर में भारती देवी नाम की महिला की मौत के मामले में की गई है। मामले में परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर इलाज में लापरवाही बरतने और अधिक बिल देने का आरोप लगाया था। परिजनों ने सिविल सर्जन के पास शिकायत की थी। इसके बाद मेडिकल बोर्ड बैठी थी। सिविल सर्जन डॉ. योगेंद्र प्रसाद मंडल की ओर से जारी पत्र में बताया गया है कि जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर अस्पताल के विरुद्ध कार्रवाई की गई। अस्पताल के साथ वहां के चिकित्सकों और अन्य कर्मियों के खिलाफ भी शिकायत का उल्लेख है। पत्र की प्रतिलिपि पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के संबंधित अधिकारियों को भी भेजी गई है।

    सिविल सर्जन ने कहा कि अस्पताल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए थाना प्रभारी को आवेदन दिया गया है। जांच में जो तथ्यों आएंगे उसके आधार पर कार्रवाई होगी।

  • झारखंड में SIR को लेकर बड़ा अपडेट, दूसरे राज्यों के दस्तावेज भी होंगे मान्य

    झारखंड में SIR को लेकर बड़ा अपडेट, दूसरे राज्यों के दस्तावेज भी होंगे मान्य

     रांची
    यदि आप झारखंड में निवास कर रहे हैं और आपका जन्म दूसरे किसी राज्य में हुआ है तो विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के लिए वहां का भी बना आपका दस्तावेज मान्य होगा।

    मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार के अनुसार, मतदाता सूची में किसी व्यक्ति का नाम सम्मिलित होने के लिए उसका भारत का नागरिक होना, संबंधित निर्वाचन क्षेत्र का सामान्य निवासी होना तथा संबंधित अर्हता तिथि (वर्तमान एसआइआर के लिए एक अक्टूबर 2026) को 18 वर्ष की आयु पूर्ण करना आवश्यक है।

    उनके अनुसार, झारखंड की मतदाता सूची में ऐसे मतदाता भी पंजीकृत हैं, जिनका जन्म अथवा पूर्व निवास किसी अन्य राज्य में रहा है। दावा-आपत्ति एवं सुनवाई की प्रक्रिया के क्रम में यदि ऐसे मतदाताओं को आयु, जन्म अथवा अन्य विवरण के सत्यापन के लिए दस्तावेज प्रस्तुत करने का नोटिस प्राप्त हुआ है, तो वे इससे संबंधित भारत निर्वाचन आयोग द्वारा एसआईआर के लिए मान्य दस्तावेज के रूप में अपने संबंधित राज्य के द्वारा जारी किए गए दस्तावेज को प्रस्तुत कर सकते हैं।

    इसके लिए संबंधित दस्तावेज का झारखंड से ही निर्गत होना आवश्यक नहीं है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने स्पष्ट किया कि मतदाता अपने जन्म स्थान, आयु अथवा पारिवारिक संबंध के सत्यापन के लिए वंशावली अथवा सक्षम पदाधिकारी द्वारा निर्गत पारिवारिक सूची, खतियान, शैक्षणिक दस्तावेज सहित निर्वाचन आयोग द्वारा एसआइआर के लिए निर्धारित अन्य मान्य दस्तावेज अपने संबंधित राज्य से प्रस्तुत कर सकते हैं।

    इन दस्तावेज का परीक्षण संबंधित निर्वाचन निबंधन पदाधिकारी द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया जाएगा। उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि नोटिस प्राप्त होने पर निर्धारित समय पर सुनवाई में उपस्थित होकर उपलब्ध मान्य दस्तावेज प्रस्तुत करें।

    उन्होंने निर्वाचन पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रत्येक मामले में प्रस्तुत दस्तावेज का नियमानुसार परीक्षण करते हुए पात्रता के संबंध में निर्धारित प्रक्रिया के तहत निर्णय सुनिश्चित करें, ताकि कोई भी पात्र भारतीय नागरिक मतदाता सूची में शामिल होने से वंचित न रहे और किसी भी अपात्र अथवा विदेशी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में शामिल न हो।

     

  • 27 की उम्र में बड़ा बदलाव, कभी स्कूल से निकाले गए उद्देश्य ने बनाया मुफ्त स्कूल; KBC में जीते 12.5 लाख

    27 की उम्र में बड़ा बदलाव, कभी स्कूल से निकाले गए उद्देश्य ने बनाया मुफ्त स्कूल; KBC में जीते 12.5 लाख

    'कौन बनेगा करोड़पति 18' के लेटेस्ट एपिसोड में एक ऐसे कंटेस्टेंट की कहानी सामने आई, जिसने सभी को इमोशनल कर दिया. हम बात कर रहे हैं कानपुर के रहने वाले उद्देश्य सचान की. उद्देश्य ने 27 की उम्र में वो कमाल कर दिया है, जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी. उद्देश्य की जिंदगी में ऐसा वक्त था, जब फीस ना भरने की वजह से उन्हें स्कूल से निकाल दिया गया था. इसके बाद उन्होंने ऐसा स्कूल बना दिया, जहां 400 से ज्यादा जरूरतमंद बच्चों को मुफ्त शिक्षा मिल रही है.

    दिल छू गई कहानी
    'केबीसी 18' के मंच पर उद्देश्‍य की बात सुनकर होस्‍ट अमिताभ बच्‍चन उनके मुरीद हो गए. उन्होंने बताया कि उनके पिता दर्जी का काम करते थे, जिससे वो सिर्फ 4-5 रुपये कमा पाते थे. परिवार आर्थिक तंगी से गुजर रहा था. इधर मां को बिजली का झटका लगा जिससे वो बीमार पड़ गईं और परिवार की मुश्किलें बढ़ गईं.

    उनके हालात इतने मुश्किल थे कि वो स्कूल फीस भी नहीं दे पा रहे थे. फीस ना मिलने के कारण उन्हें दो बार स्कूल से निकाल दिया गया था. पैसों की तंगी की वजह से स्कूल में उनके साथ बुरा व्यवहार भी किया गया. यहां तक उनके माता-पिता का मजाक बनाया गया.

    पेड़ के नीचे खोला स्कूल
    इन मुश्किलों ने उद्देश्य को बदल दिया. स्कूल से निकलने के बाद उन्हें एहसास हुआ कि उनकी तरह तमाम बच्चे होंगे, जो पैसों की वजह से पढ़ नहीं पाते होंगे. करीब 8 साल पहले उन्होंने अपनी मां से 250 रुपये उधार लिए. कुछ पैम्फलेट छपवाए और बच्चों को पढ़ाने की शुरुआत कर दी. शुरुआत में उनके पास कोई बिल्डिंग नहीं थी. इसलिए वो पेढ़ के नीचे बच्चों को पढ़ाने लगे. धीरे-धीरे लोगों तक उद्देश्य का उद्देश्य पहुंचा. आज उनके पास स्कूल की अपनी बिल्डिंग है और करीब 400 जरूरतमंद बच्चे यहां मुफ्त शिक्षा हासिल कर रहे हैं. उद्देश्य के स्कूल में झुग्गी-बस्तियों से आने वाले बच्चों की संख्या ज्यादा है. वो 12वीं कक्षा तक पढ़ाते हैं. उद्देश्य का कहना है कि वो स्कूल से कोई कमाई नहीं करते हैं. उनकी  बुनियादी जरूरतों का ध्यान उनके बड़े भाई रखते हैं.

    माधवन ने की मदद
    शो पर उन्होंने बताया कि ढाबे, कैफे और कुछ फैक्ट्रियों में छोटे-मोटे करके और पिता की मदद से अपनी शिक्षा पूरी की. सोशल मीडिया के जरिए उद्देश्य की कहानी बड़े-बड़े लोगों तक पहुंचीं और उन्हें फंडिंग मिलने लगी. एक्टर आर. माधवन ने भी उनके स्कूल के बारे में सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, जिसके बाद उन्हें काफी मदद मिली. उद्देश्य की कहानी से अमिताभ बच्चन भी प्रभावित हुए उन्होंने कहा कि वो भी सोशल मीडिया के जरिए उद्देश्य के स्कूल के बारे में लोगों को बताएंगे. ताकि उनकी मदद हो सके.

    बता दें कि उद्देश्य केबीसी से 12.5 लाख रुपये जीतकर लौटे.