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  • महिलाओं को मिलेगा ₹500 ज्यादा, चुनावी बजट में गिग वर्कर्स के लिए भी खुशखबरी, ममता सरकार ने खोला खजाना

    महिलाओं को मिलेगा ₹500 ज्यादा, चुनावी बजट में गिग वर्कर्स के लिए भी खुशखबरी, ममता सरकार ने खोला खजाना

    कोलकाता
     पश्चिम बंगाल की वित्त मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने विधानसभा में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 4.06 लाख करोड़ रुपये का अंतरिम बजट पेश किया. इस बजट में सबसे बड़ा ऐलान ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना को लेकर हुआ है. राज्य की 2.42 करोड़ महिलाओं के लिए मासिक सहायता राशि में 500 रुपये की बढ़ोतरी की गई है. यह बढ़ी हुई राशि फरवरी 2026 से ही लागू हो जाएगी. इस कदम को आगामी विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है.

    क्या है बंगाल बजट की अन्य बड़ी घोषणाएं?

    पश्चिम बंगाल बजट में केवल महिलाओं ही नहीं, बल्कि अन्य वर्गों पर भी फोकस किया गया है. गिग वर्कर्स यानी जोमैटो और स्विगी जैसे प्लेटफॉर्म पर काम करने वालों को अब ‘स्वास्थ्य साथी’ जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ मिलेगा.

    इसके अलावा आंगनवाड़ी वर्कर्स और सहायिकाओं के मानदेय में अप्रैल 2026 से 1000 रुपये की वृद्धि की जाएगी. बेरोजगारी दूर करने के लिए युवाओं को 1500 रुपये प्रति माह का भत्ता देने की नई योजना भी शुरू होगी.

    ‘लक्ष्मी भंडार’ के बदले समीकरण

    लक्ष्मी भंडार योजना ममता बनर्जी की सबसे सफल योजनाओं में से एक मानी जाती है. वर्तमान में इसमें सामान्य वर्ग को 1000 और एससी-एसटी वर्ग को 1200 रुपये मिलते हैं. अब 500 रुपये की अतिरिक्त बढ़ोतरी के बाद यह राशि और बढ़ जाएगी. जानकारों का मानना है कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में महिलाओं के भारी मतदान ने एनडीए की जीत तय की थी. इसी पैटर्न को देखते हुए बंगाल में भी तृणमूल कांग्रेस अपनी पकड़ मजबूत कर रही है.

    महिलाओं को लुभाने की मची होड़

    आजकल राजनीति में महिलाएं नई ‘किंगमेकर’ बनकर उभरी हैं. पश्चिम बंगाल ही नहीं, महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे राज्यों में भी यही ट्रेंड दिख रहा है. महाराष्ट्र में बीजेपी के नेतृत्व वाली महायुति सरकार ने ‘मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना’ के तहत 2.5 करोड़ महिलाओं को दिसंबर और जनवरी की किस्त एक साथ देने का फैसला किया है. तमिलनाडु की डीएमके सरकार ने भी ‘कलैग्नार मगलिर उरीमई थिट्टम’ योजना का दायरा बढ़ा दिया है. सभी पार्टियां जानती हैं कि महिलाओं का वोट जीत की गारंटी है.

  • भोपाल से विदिशा, रायसेन और सीहोर तक चलेगी मेट्रो, राजधानी से जुड़ेगा सैटेलाइट शहरों का नेटवर्क

    भोपाल से विदिशा, रायसेन और सीहोर तक चलेगी मेट्रो, राजधानी से जुड़ेगा सैटेलाइट शहरों का नेटवर्क

    भोपाल 

    मेट्रो ट्रेन प्रोजेक्ट के तहत अब भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन यानी बीएमआर में भी रूट तय होगा। भोपाल से सीहोर, विदिशा, रायसेन, राजगढ़ की ओर मेट्रो की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। बीएमआर के लिए बन रही डीपीआर में इसके प्रावधान किए जा रहे हैं। भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन की योजना में मेट्रो को शामिल करने शासन ने बीडीए को निर्देशित किया है। रोड नेटवर्क के साथ मेट्रो नेटवर्क से पास के शहरों में प्रस्तावित सैटेलाइट टाउनशिप को भोपाल से सीधे जोड़ा जाएगा।
    भोपाल शहर में 6 लाइनें तय

    अभी मेट्रो ट्रेन प्रोजेक्ट में भोपाल शहर में ही छह लाइनें तय की हुई है। 103 किमी लंबी लाइन में से फिलहाल 6.22 किमी की लाइन पर मेट्रो का कमर्शियल रन शुरू किया जा चुका है। पहले चरण की दो लाइनों के 32 किमी में मेट्रो को आमजन यात्रियों के साथ चलाने 2028 से 2030 तक की समय सीमा तय की है। मेट्रो रेल कारपोरेशन धीरेधीरे मेट्रो को चरणबद्ध तरीके से तैयार करने की योजना बना रहा है। अब वहभोपाल के भीतर के साथ मेट्रोपॉलिटन रीजन वाले क्षेत्रों तक भी रूट तय करेगा।

    उपनगरीय परिवहन में बदलेगी मेट्रो

    बीएमआर की डीपीआर तैयार करने वाले अफसरों के अनुसार भोपाल के लिए लोकल ट्रांसपोर्ट का हिस्सा बनने जा रही मेट्रो बीएमआर में उपनगरीय रेल की भूमिका में रहेगी। इससे मौजूदा व बीएमआर में प्रस्तावित उपनगरों को जोड़ा जाएगा। बीएमआर में भोपाल की बसाहट को सैटेलाइट टाउनशिप से पास के शहरों में शिफ्ट किया जाएगा। यहां आबादी का दबाव बढऩे से रोकने के लिए नई टाउनशिप विकसित होगी। इन्हीं को आवाजाही में मदद के लिए मेट्रो उपनगरीय सेवा विकसित होगी।
    सवाल: छह किमी में दस साल, बीएमआर कब बनेगी?

    बीएमआर में मेट्रो की प्लानिंग तो ठीक है, लेकिन मौजूदा 103 किमी के प्रस्तावित नेटवर्क में से महज सात फीसदी ही बन पाया है। शहरी नेटवर्क का 93 फीसदी बनना बाकी है। सात फीसदी निर्माण में यूरोपियन बैंक से लोन लिया हुआ है। बचे हुए हिस्से को बनाने और बीएमआर से जुड़े शहरों तक मेट्रो पहुंचाने कई गुना ज्यादा बजट और समय लगेगा।

    मेट्रो, रोड सबका विकल्प है

    बीएमआर के लिए शासन की मंशा के अनुसार योजना तय की जा रही है। संबंधित क्षेत्रों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट सभी माध्यमों से जोड़ा जाएगा। मेट्रो, रोड सबका विकल्प है।

    -संजीव सिंह, अध्यक्ष बीडीए- संभागायुक्त

  • चंबल में रेत माफियाओं पर तगड़ा प्रहार, 2 दिन में नष्ट की गई 4 करोड़ से अधिक की अवैध रेत, मुरैना में कार्रवाई

    चंबल में रेत माफियाओं पर तगड़ा प्रहार, 2 दिन में नष्ट की गई 4 करोड़ से अधिक की अवैध रेत, मुरैना में कार्रवाई

    मुरैना
     चंबल की रेत पर वर्षों से चल रहा माफिया का खेल अब प्रशासन के सीधे निशाने पर आ गया है. जिले के कलेक्टर ने रेत माफिया की कमर तोड़ने के लिए अधिकारियों को पूरी तरह फ्री हैंड दे दिया है. टास्क फोर्स की बैठक के बाद वन विभाग, पुलिस, राजस्व, परिवहन और माइनिंग विभाग की संयुक्त टीम ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई शुरू की.

    चंबल में करोड़ों की रेत नष्ट की गई

    महज दो दिनों में 4 करोड़ रुपये से अधिक की चंबल में रेत नष्ट की जा चुकी है. बुधवार की सुबह से शाम तक 20 जेसीबी और 5 लोडरों की मदद से चंबल राजघाट स्थित पिपरई और भानपुर क्षेत्र में रेत को नष्ट किया गया. इस सख्त कार्रवाई से रेत माफियाओं में हड़कंप मच गया है, वहीं हाईवे पर लगने वाली रेत मंडी भी दो दिनों से बंद पड़ी है. प्रशासन का यह अभियान अगले 15 दिनों तक लगातार जारी रहेगा.

    बीते रोज जिला कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ ने टास्क फोर्स की बैठक में स्पष्ट निर्देश देते हुए अधिकारियों को रेत माफियाओं पर सख्ती से कार्रवाई करने के लिए फ्री हैंड दे दिया था. इसके बाद प्रशासनिक मशीनरी पूरी ताकत के साथ मैदान में उतर आई. कलेक्टर के निर्देश पर वन मंडलाधिकारी हरिश्चंद्र बघेल के नेतृत्व में वन विभाग, पुलिस, परिवहन, राजस्व और माइनिंग विभाग की संयुक्त टीम ने चंबल राजघाट पुल क्षेत्र के पिपरई और भानपुर में बड़े पैमाने पर कार्रवाई की.

    चंबल नदी किनारे डंप कर रखी गई हजारों ट्राली रेत नष्ट

    मंगलवार और बुधवार को लगातार चली इस कार्रवाई में करीब 20 जेसीबी मशीनों और 5 लोडरों की मदद से 16,500 से अधिक ट्रॉली अवैध रेत को नष्ट किया गया. अधिकारियों के अनुसार, पहले चरण में चंबल नदी किनारे डंप कर रखी गई लगभग 1000 से अधिक ट्रॉली से अधिक रेत को नष्ट किया गया, जबकि बुधवार सुबह से शाम तक दोबारा अभियान चलाकर करीब 15,000 ट्रॉली अवैध रेत को मिट्टी में मिला दिया गया. यह रेत, माफियाओं द्वारा अवैध रूप से खनन कर नदी किनारे जमा की गई थी. 

    कार्रवाई के दौरान 150 पुलिस के जवान और 50 वन रक्षक तैनात

    दो दिनों में नष्ट की गई रेत का बाजार मूल्य करीब 4 करोड़ 10 लाख रुपये आंका गया है. प्रशासन इसे चंबल क्षेत्र में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई बता रहा है. कार्रवाई के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे. मौके पर करीब 150 पुलिस जवान और 50 वन रक्षक तैनात रहे, जिससे किसी भी तरह की अव्यवस्था या विरोध की स्थिति न बन सके. इस बड़ी कार्रवाई से रेत माफियाओं में हड़कंप मच गया है. हाईवे पर लगने वाली रेत मंडियां भी बीते दो दिनों से बंद पड़ी हैं. प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यह अभियान यहीं नहीं रुकेगा, बल्कि आने वाले दिनों में भी लगातार कार्रवाई जारी रहेगी. चंबल में अवैध रेत कारोबार पर अब आर-पार की लड़ाई के संकेत साफ नजर आ रहे हैं.

    ट्रैक्टर-ट्रॉली का रास्ता पूरी तरह बंद किया गया

    कलेक्टर के निर्देश पर चंबल नदी से आने-जाने वाले सभी प्रमुख मार्गों पर जेसीबी मशीनों से गहरे गड्ढे खुदवाए गए हैं, जिससे ट्रैक्टर-ट्रॉली का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया है. रेत विनिष्टीकरण की इस बड़ी कार्रवाई में मंगलवार को 6 जेसीबी मशीनों का उपयोग किया गया, जबकि बुधवार को अभियान और तेज करते हुए 20 जेसीबी और 5 लोडरों की मदद ली गई. कार्रवाई के दौरान वनमंडलाधिकारी हरिशचंद्र बघेल के नेतृत्व में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुरेन्द्र पाल सिंह डाबर, एसडीएम मुरैना बीएस कुशवाह, जिला खनिज अधिकारी सुखदेव निर्मल, पुलिस लाइन आरआई रविकांत शुक्ला, सूबेदार गजेंद्र सिंह परिहार, राष्ट्रीय चंबल अभ्यारण्य के एसडीओ सहित संबंधित राजस्व अमला मौके पर मौजूद रहा. 

  • मेघालय में दर्दनाक हादसा: कोयला खदान में भीषण धमाका, 10 मजदूरों की मौत

    मेघालय में दर्दनाक हादसा: कोयला खदान में भीषण धमाका, 10 मजदूरों की मौत

     शिलॉन्ग

    मेघालय के ताशखाई इलाके में स्थित एक कोयला खदान में भीषण धमाका होने से बड़ा हादसा हो गया. इस दुर्घटना में कम से कम 10 मजदूरों की मौत होने की जानकारी सामने आई है. हादसे के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया और स्थानीय प्रशासन तथा पुलिस ने तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया.

    जानकारी के मुताबिक, ताशखाई की कोयला खदान में अचानक जोरदार धमाका हुआ, जिसके कारण खदान के अंदर काम कर रहे मजदूर इसकी चपेट में आ गए. धमाका इतना तेज था कि खदान के अंदर मौजूद मजदूरों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिल पाया. आशंका जताई जा रही है कि मृतकों में सभी मजदूर असम के रहने वाले थे, हालांकि प्रशासन की ओर से अभी आधिकारिक पुष्टि की प्रक्रिया जारी है.
     
    स्थानीय सूत्रों के अनुसार, मृत मजदूरों में से एक असम के कटिगारा क्षेत्र के बिहारा गांव का रहने वाला बताया जा रहा है. हादसे की सूचना मिलते ही मेघालय पुलिस और बचाव दल मौके पर पहुंच गए और राहत व बचाव कार्य शुरू कर दिया गया. खदान के अंदर फंसे अन्य मजदूरों की तलाश के लिए सघन सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है.

    प्रशासन ने आसपास के इलाके को घेरकर सुरक्षा बढ़ा दी है, ताकि बचाव कार्य में किसी तरह की बाधा न आए. अधिकारियों का कहना है कि धमाके के कारणों का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी गई है. शुरुआती तौर पर खदान में गैस रिसाव या तकनीकी खामी को हादसे की संभावित वजह माना जा रहा है, हालांकि जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी.

    इस हादसे के बाद मजदूरों की सुरक्षा और अवैध खनन गतिविधियों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं. स्थानीय प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि मामले की गहराई से जांच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. वहीं, मृतकों के परिजनों को हर संभव सहायता देने की बात भी कही गई है.

  • फर्जी बिल और दोहरे भुगतान पर जिला प्रबंधक की सेवा समाप्त, 2.80 लाख के गबन पर कलेक्टर ने की कड़ी कार्रवाई

    फर्जी बिल और दोहरे भुगतान पर जिला प्रबंधक की सेवा समाप्त, 2.80 लाख के गबन पर कलेक्टर ने की कड़ी कार्रवाई

    उमरिया
    जिले में ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े बहुचर्चित गबन मामले में आखिरकार प्रशासन ने सख्त कदम उठा लिया है। फर्जी भुगतान और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर सामने आई खबरों के बाद कलेक्टर धरणेन्द्र कुमार जैन ने बड़ा फैसला लेते हुए जिला प्रबंधक (कृषि) महेन्द्र कुमार बारसकर की संविदा सेवा तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी है। यह आदेश मध्य प्रदेश शासन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग तथा मध्य प्रदेश ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत जिला स्तर पर प्रदत्त प्रशासनिक और वित्तीय अधिकारों के आधार पर जारी किया गया है। 

    कलेक्टर द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि महेन्द्र कुमार बारसकर पर प्रशासनिक और वित्तीय अनियमितताओं के साथ-साथ कर्तव्य निर्वहन में घोर लापरवाही के गंभीर आरोप सिद्ध हुए हैं। इन्हीं कारणों से उनकी संविदा नियुक्ति को तत्काल समाप्त किया गया है। आदेश जारी होते ही प्रभावशील हो गया है, जिससे यह साफ संदेश गया है कि शासकीय योजनाओं में गड़बड़ी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

    दरअसल, यह पूरा मामला उस समय सामने आया जब अमर उजाला ने ग्रामीण आजीविका मिशन में हुए फर्जी भुगतान और गबन की खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया। खबर में बताया गया था कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की योजनाओं के अंतर्गत प्रशिक्षण व्यय और मानदेय की स्वीकृत राशि का एक बार भुगतान होने के बावजूद उसी दावे का दोबारा भुगतान किया गया। इस दोहरे भुगतान से 1,43,440 रुपये का गबन सामने आया। इसके अलावा बिना सक्षम स्वीकृति के 1,36,683 रुपये का भुगतान कर दिया गया। कुल मिलाकर 2,80,123 रुपये की शासकीय राशि के दुरुपयोग का मामला उजागर हुआ।

    मामले की शिकायत जिला परियोजना प्रबंधक चंद्रभान सिंह द्वारा की गई थी। इसके बाद जिला मिशन प्रबंधन इकाई में वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के अंतरिक निरीक्षण के दौरान बिल-वाउचर, कैश बुक, लेजर, व्यय पंजी और बैंक स्टेटमेंट का मिलान किया गया। जांच में पाया गया कि कुछ भुगतान एक ही स्वीकृति आदेश के आधार पर दो बार किए गए, जबकि कुछ भुगतान बिना किसी वैध स्वीकृति के कर दिए गए।

    जांच रिपोर्ट के आधार पर आरोपी अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया, लेकिन उनका जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया। इसके बाद मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत उमरिया के निर्देश पर कोतवाली थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई। थाना प्रभारी मदनलाल मरावी के अनुसार फर्जी बिल और वाउचर के आधार पर राशि निकाले जाने की पुष्टि हुई है। धारा 316(5) बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर जांच जारी है, हालांकि अभी गिरफ्तारी नहीं हुई है।

     प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज हुई और आखिरकार कलेक्टर ने कड़ा निर्णय लेते हुए सेवा समाप्ति की कार्रवाई की। यह फैसला न केवल इस मामले में अहम माना जा रहा है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि मीडिया की सक्रियता और पारदर्शिता कैसे सरकारी तंत्र को जवाबदेह बनाने में भूमिका निभाती है। अब सबकी निगाहें आगे की पुलिस जांच और संभावित कानूनी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

     

  • वैभव सूर्यवंशी ‘बाउंसर टेस्ट’ में नाकाम, U-19 वर्ल्ड कप में 4 बार एक ही पैटर्न में आउट

    वैभव सूर्यवंशी ‘बाउंसर टेस्ट’ में नाकाम, U-19 वर्ल्ड कप में 4 बार एक ही पैटर्न में आउट

    मुंबई 

    14 साल के वैभव सूर्यवंशी ने अंडर 19 वर्ल्ड कप में अपने बल्ले से चमक बिखेरी है. उन्होंने 6 मैचों  की 6 पार‍ियों में 264 रन 44 के एवरेज से बनाए. इस दौरान  वैभव का स्ट्राइक रेट 147.48 का रहा. वैभव ने पूरे वर्ल्ड कप में 26 चौके और 15 छक्के लगाए. 

    वैभव ने बुधवार (4 जनवरी) को अफगानिस्तान की अंडर 19 टीम के ख‍िलाफ हुए सेमीफाइनल  मुकाबले में भी शानदार 68 रनों की पारी  महज 33 गेंदों पर खेली. इसमे 9 चौके और 4 छक्के शामिल रहे. एक समय तो ऐसा लग रहा था कि वैभव इस सेमीफाइनल मैच में शतक जड़ेंगे, लेकिन वो एक बार फ‍िर बाउंसर गेंद के सामने असहाय दिखे और आउट हो गए. उनको नूर‍िस्तानी उमरजई ने ओस्मान सादात के हाथों कैच आउट करवाया. 

    कुल म‍िलाकर वैभव ने इस पारी से यह तो दिखाया कि वह ताबडतोड़ अंदाज में ही खेलने में व‍िश्वास करते हैं, लेकिन उनकी कमजोर कड़ी भी सामने आ गई है. दरसअल, वैभव बाउसंर गेंदों को ठीक से नहीं खेल पा रहे हैं. आइए आपको बताते हैं कि इस अंडर 19 वर्ल्ड कप में वैभव कैसे कैसे आउट हुए हैं. 

    1– अमेरिका के खलाफ वैभव बोल्ड 2 रन बनाकर ऋत्विक अप्पिडी की गेंद पर बोल्ड हो गए थे. 
    2- बांग्लादेश के ख‍िलाफ वैभव ने 72 रन बनाए. गेंद बहुत ज्यादा छोटी (बाउंसर) नहीं थी, लेकिन सूर्यवंशी पीछे हटे, नीचे झुके और डीप मिडविकेट के ऊपर से बड़ा शॉट लगाने की कोशिश की. गेंद हवा में तो गई, लेकिन दूरी नहीं मिली. लेकिन वह कैच आउट हो गए. हालांकि गेंद नो-बॉल की लाइन के बहुत करीब थी, लेकिन अंपायर ने उसे सही गेंद माना. 
    3-न्यूजीलैंड के ख‍िलाफ वैभव ने 40 रन बनाए, लेकिन उनको जसकरन संधू ने ऑफ स्टंप के बाहर छोटी गेंद (बाउसंर) डाली. सूर्यवंशी ने पुल शॉट खेलने की कोशिश की, लेकिन गेंद ऊंची हवा में मिड-ऑफ की तरफ चली गई. मेसन क्लार्क ने पीछे की ओर काफी दौड़ लगाई, गेंद पर नजर बनाए रखी और दौड़ते हुए डाइव लगाकर शानदार कैच लपक लिया. 
    4-ज‍िम्बाव्बे के ख‍िलाफ 2 रन बनाकर वैभव सीधे मिड-ऑफ फील्डर को कैच थमा बैठे. 
    5- पाक‍िस्तान के ख‍िलाफ मुकाबले में वैभव की कमजोरी एक बार फ‍िर नजर आई, यहां भी वो बाउंसर गेंद पर 30 रन बनाकर आउट हुए. यह साफ इशारा था है कि आगे के करियर में सूर्यवंशी को छोटी गेंदों का खूब सामना करना पड़ेगा. पाकिस्तान के ख‍िलाफ सूर्यवंशी ने स्क्वायर के सामने पुल शॉट खेलने की कोशिश की. लेकिन बल्ले का निचला किनारा लगा और गेंद कीपर के पास चली गई.

    वैभव सूर्यवंशी बांग्लादेश, न्यूजीलैंड, पाक‍िस्तान और  अफगान‍िस्तान के ख‍िलाफ सेमीफाइनल में बाउंसर गेंदों पर आउट हुए. कुल म‍िलाकर 6 में 4 बार. यानी साफ है कि वैभव को अब बाउंसर पर खेलने के लिए कुछ सुधार करने हेांगे, क्योंकि व‍िपक्षी टीमों ने उनकी कमजोर कड़ी को भांप लिया है. 

  • रीवा में मऊगंज से पूर्व विधायक लक्ष्मण तिवारी ने दिया कांग्रेस से इस्तीफा

    रीवा में मऊगंज से पूर्व विधायक लक्ष्मण तिवारी ने दिया कांग्रेस से इस्तीफा

    रीवा 

    रीवा में कांग्रेस पार्टी को एक और बड़ा झटका लगा है। मऊगंज से पूर्व विधायक लक्ष्मण तिवारी ने आज भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है। अपने त्यागपत्र में लक्ष्मण तिवारी ने पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए हैं और कहा है कि कांग्रेस में गुटबाज़ी हावी हो चुकी है, जिससे जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी हो रही है। 

  • मंत्री गुरु खुशवंत साहेब के प्रयास से बनेंगी सड़कें, 2155.97 लाख रुपए किए मंजूर

    मंत्री गुरु खुशवंत साहेब के प्रयास से बनेंगी सड़कें, 2155.97 लाख रुपए किए मंजूर

    रायपुर.

    आरंग विधानसभा क्षेत्र में विकास अब घोषणा नहीं, जमीनी सच्चाई बनता जा रहा है। क्षेत्र की आधारभूत संरचना को सुदृढ़ करने की दिशा में एक और निर्णायक कदम उठाते हुए छत्तीसगढ़ शासन ने सड़क विकास की बड़ी योजना को हरी झंडी दे दी है। यह महत्वपूर्ण उपलब्धि कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के मंत्री गुरु खुशवंत साहेब की सतत पहल और प्रभावी समन्वय का परिणाम है।

    लोक निर्माण विभाग ने वित्तीय वर्ष 2024-25 के अंतर्गत जिला रायपुर के गोढ़ी–तोड़गांव–बड़गांव मार्ग के 9.00 किलोमीटर चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण कार्य के लिए ₹2155.97 लाख की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की है। इस योजना में सड़क निर्माण के साथ-साथ पुल–पुलिया का निर्माण भी शामिल है, जिससे क्षेत्रीय यातायात को स्थायी समाधान मिलेगा। इस सड़क के उन्नयन से न केवल आवागमन सुगम होगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों को शहरी सुविधाओं से जोड़ने में भी मदद मिलेगी। किसानों को मंडियों तक पहुंच, विद्यार्थियों को शिक्षा संस्थानों तक सुविधा और व्यापार को नई गति मिलने की उम्मीद है। यह योजना आरंग विधानसभा के आर्थिक और सामाजिक विकास की धुरी साबित होगी।

    मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार विकास को प्राथमिकता नहीं, प्रतिबद्धता मानकर कार्य कर रही है। आरंग विधानसभा क्षेत्र में लगातार मिल रही स्वीकृतियां इस बात का प्रमाण हैं कि सरकार विकास को काग़ज़ों से निकालकर ज़मीन पर उतार रही है। उन्होंने इस महत्वपूर्ण स्वीकृति के लिए जन प्रिय मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उपमुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण विभाग मंत्री अरुण साव एवं वित्त मंत्री ओपी चौधरी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आने वाले समय में भी आरंग विधानसभा को अधोसंरचना, सड़क, सिंचाई एवं जनसुविधाओं से जुड़ी अनेक नई सौगातें मिलती रहेंगी।

  • भोपाल में बनेगी देश की सबसे उन्नत नॉलेज और AI सिटी, 3700 एकड़ में होगा व्यापक विकास

    भोपाल में बनेगी देश की सबसे उन्नत नॉलेज और AI सिटी, 3700 एकड़ में होगा व्यापक विकास

     भोपाल
     भोपाल अब देश के भविष्य के टेक–एजुकेशन मैप पर एक नई पहचान बनाने जा रहा है। राजधानी के भौंरी क्षेत्र में 3700 एकड़ (1500 हेक्टेयर) भूमि पर देश की सबसे उन्नत नॉलेज एंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सिटी विकसित की जाएगी। यह प्रोजेक्ट केवल एक एजुकेशन टाउनशिप नहीं होगा, बल्कि रिसर्च, स्टार्टअप्स, इंडस्ट्री और ग्लोबल यूनिवर्सिटीज का एकीकृत इकोसिस्टम तैयार किया जाएगा, जिससे मध्य प्रदेश को देश का बड़ा AI हब बनाने की दिशा में काम होगा।

    इस परियोजना के लिए 20 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने अर्बन प्लानिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर डिजाइन और डेवलपमेंट के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) दाखिल किए हैं। एजेंसी चयन की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और फरवरी के अंत तक डेवलपमेंट एजेंसी तय होने की संभावना है।

    भौंरी में 3700 एकड़ जमीन पर भारत की सबसे उन्नत नॉलेज एंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) सिटी विकसित होने जा रही है। यह प्रोजेक्ट केवल एजुकेशन टाउनशिप नहीं होगा, बल्कि यह रिसर्च, स्टार्टअप्स, इंडस्ट्री और ग्लोबल यूनिवर्सिटीज का एक इंटीग्रेटेड इकोसिस्टम बनेगा। बीडीए इसकी नोडल एजेंसी है, जबकि आइसर (इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, एजुकेशन एंड रिसर्च) इसका पूरा रोडमैप तैयार करेगा।

    प्रोजेक्ट के लिए अर्बन प्लानिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर डिजाइन और डेवलपमेंट को लेकर 20 से ज्यादा ग्लोबल एजेंसियों ने एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट दाखिल किया है। चयन प्र्रक्रिया अंतिम चरण में है। इस माह के अंत तक डेवलपमेंट एजेंसी तय होने की संभावना है।

    नॉलेज एवं एआई सिटी के रोडमैप पर गुरुवार को राष्ट्रीय स्तर की बैठक भी रखी गई है। इसमें नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय सहित केंद्रीय संस्थानों के निदेशक, कुलपति और प्राचार्य भाग लेंगे। नगरीय प्रशासन विभाग ने आइसर को एक्शन प्लान तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी है।

    इसके लिए 8 सदस्यीय कोर कमेटी बनी है, जिसके कन्वीनर प्रो. सौरभ दत्ता हैं। सुपरविजन आइसर डायरेक्टर गोवर्धन दास कर रहे हैं। बीडीए ने जमीन की पहचान के बाद ईओआई प्रक्रिया पूरी कर ली है। बीडीए सीईओ श्यामवीर सिंह ने बताया कि देश-विदेश की 20 से ज्यादा एजेंसियों ने रुचि दिखाई है।

    डेवलपमेंट एजेंसी क्या करेगी

        पूरे प्रोजेक्ट का मास्टर प्लान तैयार करेगी
        ग्रीन बिल्डिंग कांसेप्ट पर कैंपस डिजाइन
        बड़े पैमाने पर ग्रीन जोन और ओपन स्पेस
        ईवी, सीएनजी और हाइड्रोजन आधारित स्मार्ट ट्रांसपोर्ट
        पीपीपी मॉडल, जॉइंट वेंचर और इंटीग्रेटेड पार्टनरशिप के विकल्प

    भौंरी क्षेत्र में पहले से मौजूद है एजुकेशन इको-सिस्टम

    देश के कई राज्य जैसे तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र एजुकेशन सिटी की दिशा में काम कर रहे हैं, लेकिन भोपाल की नॉलेज–AI सिटी का कॉन्सेप्ट अलग होगा। भौंरी क्षेत्र में पहले से आईसर भोपाल, निफ्ट, राष्ट्रीय फॉरेंसिक रिसर्च इंस्टीट्यूट, अटल बिहारी वाजपेयी पॉलिसी रिसर्च सेंटर, एमपी पुलिस अकादमी और शंकर दयाल शर्मा आयुर्वेदिक इंस्टिट्यूट मौजूद हैं। इसी क्लस्टर में ट्रिपल आईटी (IIIT) कैंपस के निर्माण का प्रस्ताव भी है। इन संस्थानों की मौजूदगी से यहां पहले से एक ऐसा इकोसिस्टम तैयार है, जहां AI, स्पेस टेक, फॉरेंसिक, पब्लिक पॉलिसी, हेल्थ और डिजाइन जैसे क्षेत्रों में साझा रिसर्च की जा सकेगी।

    IISER तैयार कर रहा है रोडमैप

    नगरीय प्रशासन विभाग, मप्र शासन ने नॉलेज–AI सिटी के लिए एक्शन प्लान तैयार करने की जिम्मेदारी IISER भोपाल को सौंपी है। IISER ने पिछले वर्ष फरवरी में एक ब्रेन स्टॉर्मिंग सेशन किया था, जिसके बाद इस परियोजना को सभी संस्थानों को साथ लेकर आगे बढ़ाने की बात कही गई थी। पूरे प्रोजेक्ट की निगरानी IISER के डायरेक्टर गोवर्धन दास कर रहे हैं।

    फरवरी के आखिर तक एजेंसी नियुक्त होगी

    भोपाल विकास प्राधिकरण (BDA) ने जमीन की पहचान के बाद EOI प्रक्रिया पूरी कर ली है। पहले यह परियोजना 2000 एकड़ में प्रस्तावित थी, जिसे बढ़ाकर अब 3700 एकड़ कर दिया गया है। लक्ष्य है कि वर्ष 2026 में नॉलेज–AI सिटी को धरातल पर उतारने का काम शुरू हो जाए।

    प्रोजेक्ट के कन्वीनर प्रोफेसर सौरभ दत्ता ने बताया कि इस परियोजना पर पिछले एक वर्ष से योजना बनाई जा रही है। नॉलेज और AI सिटी के माध्यम से ऐसा इकोसिस्टम तैयार करने का लक्ष्य है, जहां शिक्षा के साथ रिसर्च और इंडस्ट्री मिलकर काम करें। यह एक पूरी सिटी होगी, जिसे हायर एजुकेशन के साथ अर्बन डेवलपमेंट, हॉस्पिटल और मेट्रो से भी जोड़ा जाएगा।

  • रूस-अमेरिका की परमाणु संधि खत्म, 50 साल में पहली बार कोई नियम नहीं; क्या दुनिया पर मंडराया विनाश का खतरा?

    रूस-अमेरिका की परमाणु संधि खत्म, 50 साल में पहली बार कोई नियम नहीं; क्या दुनिया पर मंडराया विनाश का खतरा?

    मॉस्को 

    दुनिया को हिला देने वाली एक खबर सामने आई है. अमेरिका और रूस के बीच दशकों से चले आ रहे परमाणु हथियार नियंत्रण का सबसे अहम समझौता अब खत्म हो गया है. यह वही संधि थी जिसने दुनिया के दो सबसे बड़े परमाणु ताकतवर देशों के हथियारों की सीमा तय कर रखी थी. लेकिन अब हालात बदल चुके हैं. समझौता खत्म होने के बाद दुनिया में टेंशन बढ़ गई है. रूस के पूर्व राष्ट्रपति और मौजूदा सुरक्षा अधिकारी दिमित्री मेदवेदेव ने इसे लेकर गंभीर चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि इस संधि का खत्म होना दुनिया को तबाही की ओर धकेल सकता है और ‘डूम्सडे क्लॉक’ यानी मानव विनाश का खतरा तेज हो सकता है.

    CNN की रिपोर्ट के अनुसार शीत युद्ध के दौर के बाद से ही रूस अपनी सुपरपावर छवि को बनाए रखने की कोशिश करता रहा है. सोवियत संघ के टूटने के बाद रूस का वैश्विक प्रभाव कमजोर जरूर हुआ लेकिन परमाणु ताकत के कारण उसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अहम भूमिका बनी रही. साल 2010 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा और रूस के तत्कालीन राष्ट्रपति मेदवेदेव ने न्यू START संधि पर हस्ताक्षर किए थे. इस संधि के तहत दोनों देशों को अधिकतम 1550 तैनात परमाणु हथियार रखने की अनुमति थी. यह समझौता वैश्विक शांति के लिए बेहद अहम माना गया था. लेकिन अब इसके खत्म होने के साथ ही दुनिया एक नए और खतरनाक दौर में प्रवेश करती नजर आ रही है.

    सबसे पहले- New START संधि क्या है?

    न्यू स्ट्रैटेजिक आर्म्स रिडक्शन ट्रीटी (New START) परमाणु हथियारों की होड़ को रोकने के लिए 2010 में किया गया एक ऐतिहासिक समझौता था। 2010 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और रूसी राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव ने इस पर साइन किए थे। यह संधि 2011 में लागू हुई थी। इसका उद्देश्य उन रणनीतिक परमाणु हथियारों की तैनाती को सीमित करना था, जो किसी देश के प्रमुख राजनीतिक, सैन्य और औद्योगिक ठिकानों को निशाना बनाने में सक्षम होते हैं। तैनात हथियार वे माने जाते हैं जो सक्रिय सेवा में हों और तुरंत इस्तेमाल किए जा सकें।
    संधि कैसे बनी? पूरी कहानी

    परमाणु हथियारों पर रोक लगाने की कोशिश शीत युद्ध के समय से चली आ रही है। 1969 से अमेरिका और सोवियत संघ (बाद में रूस) ने कई दौर की बातें कीं।

        1970 के दशक में SALT समझौते: हथियारों की संख्या पर सीमा लगाई, लेकिन कम नहीं किए।
        1991 में START I: पहली बड़ी कटौती, जॉर्ज बुश और गोर्बाचेव के समय। हजारों हथियार कम हुए।
        1993 में START II: और कटौती, लेकिन पूरी तरह लागू नहीं हुई।
        2002 में SORT (मॉस्को संधि): बुश और पुतिन ने वारहेड्स 1,700-2200 तक कम करने पर सहमति, लेकिन जांच-पड़ताल कम थी।

    फिर आई न्यू स्टार्ट। 2009 में बराक ओबामा (अमेरिका) और दिमित्री मेदवेदेव (रूस) ने बात शुरू की। 8 अप्रैल 2010 को प्राग (चेक गणराज्य) में हस्ताक्षर हुए। अमेरिकी सीनेट ने 2010 में मंजूरी दे दी थी। रूसी संसद ने 2011 में दी। आखिरकार संधि 5 फरवरी 2011 से लागू हुई। इसका मूल समय 10 साल तक ही था। हालांकि इसे एक बार 5 साल बढ़ाने का प्रावधान भी था, जो 2021 में जो बाइडेन ने इस्तेमाल किया और 2026 तक बढ़ा दिया।
    2021 के बाद क्या हुआ?

    2023 में रूस ने संधि में हिस्सा रोक दिया जैसे निरीक्षण बंद कर दिए, लेकिन सीमाओं का पालन करने का दावा जारी रखा। वजह बताई कि यूक्रेन युद्ध में अमेरिका मदद कर रहा है। आखिरकार आज (5 फरवरी 2026) संधि खत्म हो गई। अब दोनों देश स्वतंत्र हैं – जितने चाहें हथियार बढ़ा सकते हैं।
    रूस बोला- अब परमाणु हथियारों की सीमा से मुक्त

    रूस ने कहा है कि वह अब अमेरिका के साथ रणनीतिक परमाणु हथियारों की संख्या को सीमित करने वाली न्यू स्टार्ट संधि से अब बंधा नहीं है, क्योंकि यह संधि गुरुवार को समाप्त हो रही है। इस बयान से वैश्विक सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं बढ़ गई हैं। संयुक्त राष्ट्र ने इसे अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए “गंभीर क्षण” करार दिया है।

    रूसी विदेश मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि अमेरिका ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के उस प्रस्ताव पर कोई जवाब नहीं दिया, जिसमें दोनों देशों से 12 महीने तक संधि के तहत मिसाइलों और तैनात परमाणु वारहेड्स की सीमाओं का पालन जारी रखने की बात कही गई थी। मंत्रालय ने कहा- हम मानते हैं कि न्यू स्टार्ट संधि के पक्षकार अब इसके तहत किसी भी दायित्व या पारस्परिक घोषणाओं से बंधे नहीं हैं। हमारी बातों को जानबूझकर अनदेखा किया जा रहा है, जो गलत और अफसोसजनक है।
    संधि खत्म होने के संभावित असर

    संधि की अवधि समाप्त होने के साथ ही रूस और अमेरिका दोनों के लिए मिसाइलों की संख्या बढ़ाने और सैकड़ों अतिरिक्त रणनीतिक वारहेड्स तैनात करने का रास्ता खुल जाएगा। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा करना तकनीकी और लॉजिस्टिक रूप से चुनौतीपूर्ण होगा और इसमें समय लगेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले संकेत दिए थे कि वे संधि के विस्तार पर विचार कर सकते हैं, लेकिन जनवरी में उन्होंने कहा था कि अगर यह खत्म होती है तो कोई बेहतर समझौता किया जाएगा। ट्रंप ने भविष्य की किसी भी परमाणु वार्ता में चीन को शामिल करने की भी बात कही है।
    परमाणु हथियारों का मौजूदा संतुलन

    रूस और अमेरिका मिलकर दुनिया के 90 प्रतिशत से अधिक परमाणु हथियारों का भंडार रखते हैं। जनवरी 2025 तक रूस के पास 4,309 और अमेरिका के पास 3,700 परमाणु वारहेड्स थे। फ्रांस और ब्रिटेन के पास क्रमशः 290 और 225 वारहेड्स हैं, जबकि चीन के पास लगभग 600 परमाणु हथियार माने जाते हैं।
    विशेषज्ञों की चेतावनी

    सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि न्यू स्टार्ट के खत्म होने से एक नई हथियारों की होड़ शुरू हो सकती है, जिसमें चीन के परमाणु विस्तार का भी असर पड़ेगा। फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट्स के मैट कोर्डा के अनुसार सबसे अधिकतम स्थिति में दोनों देश अपनी तैनात परमाणु क्षमताओं को लगभग दोगुना कर सकते हैं।
    पोप लियो ने भी चेताया

    संधि की समाप्ति से पहले, पोप लियो ने दोनों देशों से अपील की कि वे हथियारों पर लगी सीमाओं को न छोड़ें और भय व अविश्वास की राजनीति के बजाय साझा वैश्विक हितों को प्राथमिकता दें। उधर, संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने कहा कि आधी सदी से अधिक समय में पहली बार दुनिया ऐसे दौर में प्रवेश कर रही है, जब रूस और अमेरिका यानी दुनिया के सबसे बड़े परमाणु शक्ति संपन्न देश पर कोई बाध्यकारी सीमा नहीं होगी।

    उन्होंने चेतावनी दी कि परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का जोखिम दशकों में सबसे अधिक है और दोनों देशों से आग्रह किया कि वे जल्द से जल्द नई, सत्यापनीय और जोखिम कम करने वाली संधि पर बातचीत शुरू करें। गुतारेस ने कहा- दुनिया अब रूस और अमेरिका से उम्मीद कर रही है कि वे अपने शब्दों को कार्रवाई में बदलें और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए तुरंत कदम उठाएं।