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  • मध्य प्रदेश सरकार करेगी ग्राम पंचायतों तक एमएसएमई का विस्तार

    मध्य प्रदेश सरकार करेगी ग्राम पंचायतों तक एमएसएमई का विस्तार

    भोपाल
     मध्य प्रदेश में बड़े शहरों व कस्बों के बाद अब राज्य सरकार ग्राम पंचायत स्तर तक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) इकाइयों का विस्तार करेगी। एमएसएमई विभाग इसकी विस्तृत कार्ययोजना बना रहा है। इसका उद्देश्य सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम के माध्यम से ग्राम पंचायतों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और ग्राम स्तर पर ही रोजगार उपलब्ध कराना है।

    इसके लिए पहले जिलों का पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चयन कर प्रयोग किया जाएगा। ऐसी ग्राम पंचायतें चिह्नित की जाएंगी जहां सड़क, बिजली, पानी और उद्योग के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हों। रियायती दरों पर निवेशकों को जमीन उपलब्ध कराई जाएगी।

    भोपाल से लगी ग्राम पंचायतों को किया जा रहा चिह्नित

    बता दें, इंदौर के आसपास की ग्राम पंचायतों में पहले से 308 उद्योग स्थापित हैं। यहां 90.41 करोड़ रुपये पूंजीगत निवेश हुआ है और इससे 1954 लोग रोजगार पा रहे हैं। भोपाल से लगी ग्राम पंचायतों को भी चिह्नित किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि इनमें क्षेत्र की अर्थव्यवस्था के संतुलित विकास के लिए योजनाबद्ध हस्तक्षेप आवश्यक है।

    जिससे विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों के बीच न्यायसंगत अवसर सुनिश्चित किया जा सके। इसमें छोटे उद्यमों के लिए वित्तीय क्रेडिट को सरल बनाया जाएगा। नए उद्यमों के लिए बाजार में प्रवेश की बाधाओं का सरलीकरण किया जाएगा।

    एमएसएमई ऋण मूल्यांकन -कैश फ्लो आधारित जोखिम मूल्यांकन को अपनाना, वित्तीय माड्यूल को प्रशिक्षण में एकीकृत करना, सूचना विषमता को दूर करना और श्रमिक अधिकारों को सुरक्षित करने की दिशा में काम किया जाएगा।

     

  • एमपी में ऑनलाइन फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट से बचाएगा क्यूआर कोड, जानें कैसे काम करेगा ये सिस्टम

    एमपी में ऑनलाइन फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट से बचाएगा क्यूआर कोड, जानें कैसे काम करेगा ये सिस्टम

    भोपाल 

    मध्य प्रदेश में बढ़ते साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए प्रदेश पुलिस एक नई और प्रभावी पहल करने जा रही है। ऑनलाइन फ्रॉड, फर्जी कॉल और ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे मामलों से आम नागरिकों को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से क्यूआर कोड आधारित जागरूकता व्यवस्था विकसित की जा रही है। इस क्यूआर कोड को स्कैन करते ही साइबर अपराध से बचाव से जुड़ी आवश्यक और प्रमाणिक जानकारी सीधे मोबाइल फोन पर उपलब्ध हो जाएगी। मध्य प्रदेश पुलिस साइबर विशेषज्ञों के सहयोग से इस नवाचार को अंतिम रूप दे रही है। योजना के तहत भोपाल सहित पूरे प्रदेश के भीड़भाड़ वाले स्थानों, प्रमुख बाजारों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, सरकारी एवं निजी कार्यालयों तथा अन्य महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थलों पर ये क्यूआर कोड लगाए जाएंगे। यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो मार्च 2026 से प्रदेशवासियों को यह सुविधा मिलना शुरू हो जाएगी। 

    इस परियोजना पर साइबर पुलिस के नेतृत्व में तेजी से काम चल रहा है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि आज के डिजिटल युग में अपराधी नये-नये हथकंडे अपनाकर लोगों को ठग रहे हैं। ऐसे में तकनीक के जरिए लोगों को जागरूक करना बेहद जरूरी है। यह क्यूआर कोड न सिर्फ जानकारी देगा, बल्कि सही समय पर सही कदम उठाने में भी मदद करेगा।

    सभी प्रमुख स्थानों पर लगाए जाएंगे क्यूआर कोड
    सरकारी ही नहीं, बल्कि निजी संस्थानों में भी प्रमुख स्थानों पर क्यूआर कोड लगाए जाने की तैयारी है। इसके साथ-साथ इसका व्यापक प्रचार-प्रसार भी किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक लोग इसका उपयोग कर सकें। पुलिस अधीक्षक (साइबर) प्रणय नागवंशी ने बताया कि साइबर अपराधों से बचाव के लिए जागरूकता सबसे बड़ा हथियार है। साइबर मुख्यालय समय-समय पर एडवाइजरी जारी करता है और अब क्यूआर कोड के माध्यम से यह जानकारी और अधिक सुलभ हो जाएगी।

    क्यूआर कोड से मिलने वाले प्रमुख लाभ
    क्यूआर कोड स्कैन करने पर यह स्पष्ट जानकारी मिलेगी कि साइबर अपराध से बचने के लिए क्या करें और किन बातों से बचें। आमतौर पर पूछे जाने वाले सवालों के सरल उत्तर भी उपलब्ध रहेंगे। इसके अलावा नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 और नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल (cybercrime-gov-in) का सीधा लिंक दिया जाएगा, जिससे पीड़ित तुरंत शिकायत दर्ज कर सकेंगे। ठगी के अलावा फेसबुक, व्हाट्सएप और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के सुरक्षित उपयोग से जुड़ी सावधानियों की जानकारी भी मिलेगी। साथ ही, फर्जी कॉल, नकली नोटिस और ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी धोखाधड़ी से बचने के जरूरी उपाय भी बताए जाएंगे। 

  • एमपी के 15 जिलों को 1500 करोड़ की छूट देगी बिजली कंपनी, घर-घर बताएगी स्मार्ट मीटर के फायदे

    एमपी के 15 जिलों को 1500 करोड़ की छूट देगी बिजली कंपनी, घर-घर बताएगी स्मार्ट मीटर के फायदे

    भोपाल 

     राज्य शासन के निर्देश पर पश्चिम क्षेत्र बिजली वितरण कंपनी इंदौर सहित सभी 15 जिलों में 9 से 23 फरवरी तक स्मार्ट मीटर पखवाड़ा मनाएगी। इस दौरान उपभोक्ताओं को स्मार्ट मीटर के फायदे, त्रुटिरहित व त्वरित बिजली बिल सेवा, ऊर्जस ऐप पर स्मार्ट मीटर की लाइव जानकारी, गैर घरेलू उपभोक्ताओं को पॉवर फैक्टर की छूट, सौर ऊर्जा गणना के लिए स्मार्ट मीटर से मीटर राशि की बचत और दिन में बिजली खपत के लिए टीओडी गणना इत्यादि लाभों को बताया जाएगा।
    स्मार्ट मीटर के फायदे बताए जाएंगे

    उपभोक्ताओं को स्मार्ट मीटर के साथ ही लगाए गए चेक मीटर संबंधित रिपोर्ट की जानकारी दी जाएगी, जिसमें दोनों ही मीटरों में खपत का स्तर समान दर्ज हुआ है। पखवाड़े के दौरान पश्चिम क्षेत्र कंपनी की ओर से शिविर, कार्यशालाएं, शिकायत निवारण, तकनीकी जानकारी प्रदान करने के लिए विशेष सत्र, प्रदर्शनी इत्यादि के आयोजन होंगे। इन सभी गतिविधियों का उद्देश्य आम लोगों को स्मार्ट मीटर के फायदे बताने, भ्रम दूर करने एवं उपभोक्ताओं बिजली की संतुष्टि को लेकर रचनात्मक प्रयास है।
    1500 करोड़ की छूट मिलेगी

    बिजली वितरण कंपनी औद्योगिक, उच्चदाब उपभोक्ताओं को नियमानुसार प्रति माह, प्रति बिल निर्धारित छूट (रिबेट) प्रदान कर रही है। पिछले बारह माह के दौरान नए कनेक्शनों पर छूट, कैप्टिव छूट, इंक्रीमेंटल छूट, टीओडी छूट, पॉवर फैक्टर छूट, सब्सिडी, प्रॉम्प्ट पैमेंट, ग्रीन फील्ड छूट मिलाकर कुल 1500 करोड़ रुपए की छूट प्रदान की गई है ताकि उद्योगों को गति मिले, रोजगार, विकास के अवसर में पर्याप्त वृद्धि हो।

  • बिकिनी में नताशा स्टानकोविक ने पूल में दिए सिजलिंग पोज, हार्दिक पंड्या की EX वाइफ

    बिकिनी में नताशा स्टानकोविक ने पूल में दिए सिजलिंग पोज, हार्दिक पंड्या की EX वाइफ

    मुंबई 

    क्रिकेटर हार्दिक पंड्या की एक्स वाइफ और बॉलीवुड एक्ट्रेस-मॉडल नताशा स्टेनकोविक इन दिनों गोवा में हॉलीडे पर हैं. उन्होंने अपने वेकेशन से कुछ बेहद ग्लैमरस तस्वीरें शेयर की हैं.नताशा ने पूल साइड कुछ सिजलिंग पोज देते हुए फोटोज शेयर की हैं, जिसमें वो बेहद हॉट नजर आईं. रेड बिकिनी लुक में एक्ट्रेस का कोई जवाब नहीं दिखा.  नताशा ने कैमरा की तरफ बेहद कॉन्फिडेंस के साथ देखते हुए दिलकश अंदाज में पोज दिए, जिसे काफी पसंद किया गया.

    पूल साइड रेड बिकिनी में नताशा ने अपनी टोन्ड बॉडी भी फ्लॉन्ट की. उनके चेहरे पर एक अलग ही ग्लो दिखाई दिया.कैमरा पर नताशा का कॉन्फिडेंस देखकर यूजर्स खुद को उनकी तारीफ करने से नहीं रोक पाए. वो एक्ट्रेस के हॉट अवतार पर अपना दिल हार रहे हैं.
    नताशा की फिटनेस और उनके बोल्ड अवतार को देखकर एक यूजर ने लिखा, 'किसी ने मेरा जबड़ा देखा है क्या? शायद वो खुला का खुला ही रह गया है.'       

    नताशा स्टेनकोविक सोशल मीडिया पर अपनी खूबसूरती के अलावा एक और कारण से भी ट्रेंड में रहती हैं. लोगों को उनका और बेटे अगस्त्य का बॉन्ड बेहद पसंद आता है. हार्दिक पंड्या से तलाक के बाद वो अपने बेटे की परवरिश अच्छी तरह से करती हैं.    

    बात करें नताशा की डेटिंग लाइफ के बारे में, तो वो कई मौकों पर एक मिस्ट्री मैन के साथ नजर आ चुकी हैं. लेकिन उन्होंने अभी तक किसी को डेट करनी की खबर कंफर्म नहीं की है. मगर वहीं दूसरी तरफ उनके एक्स हार्दिक मॉडल माहिका शर्मा को डेट कर रहे हैं.

  • पीएमएफएमई योजना- प्रदेश के युवा विभिन्न उद्योग स्थापित कर बना रहे हैं अपनी पहचान

    पीएमएफएमई योजना- प्रदेश के युवा विभिन्न उद्योग स्थापित कर बना रहे हैं अपनी पहचान

    पीएमएफएमई योजना

    प्रदेश के युवा विभिन्न उद्योग स्थापित कर बना रहे हैं अपनी पहचान

    सरकारी योजना, तकनीकी मार्गदर्शन एवं ईच्छाशक्ति युवाओं के सपने साकार करने में सहायक

    भोपाल 

    केन्द्र सरकार द्वारा संचालित प्रधानमंत्री सूक्ष्म, खाद्य, उद्योग उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) का लाभ लेकर बुरहानपुर जिले के युवा उद्यमी  अभिषेक जायसवाल ने उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने डिहाइड्रेट यूनिट की स्थापना की है। यह प्रदेश के युवाओं एवं किसानों को खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में स्वरोजगार से जोड़ने की एक महत्वाकांक्षी योजना है। इस योजना का उद्देश्य उद्यमिता को बढ़ावा देना और युवाओं को आर्थिक रूप से आत्म निर्भर बनाना है।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में इस योजना का लाभ अधिक से अधिक युवाओं तक पहुँचाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। शासन द्वारा विभागीय मार्गदर्शन, तकनीकी सहायता एवं वित्तीय सहयोग के माध्यम से युवाओं को उद्यम स्थापना हेतु प्रेरित किया जा रहा है, जिससे वे स्वयं का व्यवसाय स्थापित कर रोजगार के नए अवसर सृजित कर सकें।

    यूनिट स्थापना से मिली नई पहचान

    बुरहानपुर जिले के युवा उद्यमी अभिषेक जायसवाल एक शिक्षित युवा हैं, जिन्होंने एग्रीकल्चर बीएससी तथा एग्रीकल्चर मैनेजमेंट में एमबीए की पढ़ाई की है। शुरू से ही कृषि से जुड़े परिवार से होने के कारण अभिषेक की कृषि से संबंधित कार्य को आगे बढ़ाने में रूचि थी। उद्यानिकी विभाग के सहयोग से प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना द्वारा अभिषेक ने डिहाइड्रेट यूनिट की स्थापना कर मात्र 4 माह में ही लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।

    पीएमएफएमई योजना से मिला संबल

    अभिषेक जायसवाल बताते हैं कि उद्यानिकी विभाग के माध्यम से उन्हें पीएमएफएमई योजना की जानकारी प्राप्त हुई, जिसके बाद उन्होंने अपने उद्यम की शुरुआत करने का निर्णय लिया। योजना में उन्होंने बैंक से प्राप्त सहायता राशि के माध्यम से माह अक्टूबर 2025 में डिहाइड्रेट यूनिट की स्थापना की। इस यूनिट में मुख्य रूप से प्याज, केला के डिहाइड्रेट उत्पादों को तैयार करते हैं।

    क्या है डिहाइड्रेट यूनिट

    डिहाइड्रेशन यूनिट एक ऐसी प्रसंस्करण इकाई है, जिसमें फल एवं सब्जियों जैसे प्याज, केला, हल्दी तथा पत्तेदार सब्जियों से कम तापमान पर नमी हटाकर उन्हें सुखाया जाता है। यह प्रक्रिया जल्दी खराब होने वाली खाद्य सामग्री को लंबे समय तक सुरक्षित रखती है और उन्हें फ्लेक्स, चिप्स अथवा पाउडर के रूप में उपयोग योग्य बनाती है।

    डिहाइड्रेशन के कारण उत्पाद लम्बे समय तक सुरक्षित रहते हैं, जिससे भंडारण एवं परिवहन आसान और कम खर्चीला हो जाता है। सही तकनीक से सुखाने पर उत्पाद का रंग, स्वाद एवं पोषण तत्व काफी हद तक सुरक्षित रहते हैं, जिससे ग्राहकों को गुणवत्तापूर्ण एवं पौष्टिक खाद्य उत्पाद उपलब्ध होते हैं।

    प्रक्रिया

    अभिषेक जायसवाल बताते हैं कि यूनिट में प्याज को डिहाइड्रेट करने के लिए पहले उसका छिलका हटाकर अच्छे से साफ कर कटर मशीन से 1 एमएम स्लाइस बनाए जाते हैं। इन स्लाइसों को क्रेट में भरकर इलेक्ट्रॉनिक ड्रायर में निर्धारित तापमान पर लगभग 10 घंटे रखा जाता है, जिससे डिहाइड्रेटेड उत्पाद तैयार होता है।

    पाउडर बनाने के लिए स्लाइस को पल्वराइज़र मशीन में पीसकर पाउडर तैयार किया जाता है और वाइब्रो फिल्टर से छाना जाता है। वहीं केले को डिहाइड्रेट करने के लिए करीबन 60 डिग्री तापमान पर लगभग 8 घंटे तक ड्रायर में रखा जाता है। इसी प्रकार हल्दी, मैथी एवं अन्य उत्पादों के लिए भी लगभग समान प्रक्रिया अपनाई जाती है।

    रोजगार के अवसर भी हुए सृजित

    यूनिट में वर्तमान में 5 से 6 लोगों को रोजगार मिल रहा है। इससे न केवल अभिषेक का व्यवसाय आगे बढ़ रहा है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित हो रहे हैं।

    मांग और बिक्री से बढ़ रही आय

    अभिषेक जायसवाल यूनिट में प्रतिमाह लगभग 5-6 क्विंटल उत्पादन की बिक्री कर लेते हैं, जिससे उन्हें लगभग 50 से 60 हजार रुपये शुद्ध आय प्रति माह का मुनाफा हो जाता है। अभिषेक जायसवाल बताते है कि, उत्पादों की पैकेजिंग 30 एवं 50 किलो के पैकेट्स में की जाती है। इसके लिए पैकिंग बैग में सामग्री भरकर पैकेजिंग मशीन से सील कर ग्राहकों तक पहुँचाया जाता है। ग्राहकों द्वारा इन डिहाइड्रेट उत्पादों को पसंद किया जा रहा है। नियमित ग्राहक के साथ-साथ मांग अनुसार पैकेट्स भी तैयार किए जाते हैं।

    ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जुड़ने की तैयारी

    अभिषेक के उत्पादों की बिक्री बुरहानपुर जिले के साथ-साथ इंदौर, मुंबई सहित अन्य शहरों में भी हो रही है। आने वाले समय में वे अपने उत्पादों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से भी विक्रय करने की तैयारी कर रहे हैं।

    योजना बनी आत्मनिर्भरता की राह

    प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना से सही मार्गदर्शन, योजना का लाभ और ईच्छाशक्ति के बल पर युवा न केवल स्वयं का व्यवसाय स्थापित कर रहे हैं, बल्कि अन्य लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर बना रहे है।

     

  • एमपी ट्रांसको में स्वास्थ्य परीक्षण एवं प्रशिक्षण शिविर का आयोजन

    एमपी ट्रांसको में स्वास्थ्य परीक्षण एवं प्रशिक्षण शिविर का आयोजन

    एमपी ट्रांसको में स्वास्थ्य परीक्षण एवं प्रशिक्षण शिविर का आयोजन

    भोपाल

    मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) के आष्टा 132 केवी सबस्टेशन, सतवास में क्लस्टर (कन्नौद, खातेगांव एवं सतवास उपकेंद्र) के अंतर्गत कार्यरत सभी नियमित, संविदा एवं आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए स्वास्थ्य परीक्षण एवं प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया।

    यह शिविर कार्यपालन अभियंता  योगेन्द्र चहार के विशेष प्रयासों से आयोजित किया गया। शिविर में सतवास के मेडिकल ऑफिसर डॉ. राहुल ने कर्मचारियों को सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) सहित प्राथमिक चिकित्सा से संबंधित आवश्यक जानकारी प्रदान की। उन्होंने सीपीआर देने की परिस्थितियों, उसकी सही विधि एवं इसके व्यावहारिक महत्व को सरल एवं प्रभावी ढंग से समझाया।

    स्वास्थ्य एवं सुरक्षा से जुड़ी इस उपयोगी जानकारी से सभी उपस्थित कर्मचारी लाभान्वित हुए। एमपी ट्रांसको की सतत मुहिम के अंतर्गत आयोजित इस शिविर का मुख्य उद्देश्य कर्मचारियों को आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित एवं प्रभावी चिकित्सा सहायता प्रदान करने के लिए सक्षम बनाना।

     

  • बंगाल में यूपी के 54 भाजपाई संभाल रहे चुनावी मोर्चा, 47 विधानसभा सीटों की जिम्मेदारी हर नेता को

    बंगाल में यूपी के 54 भाजपाई संभाल रहे चुनावी मोर्चा, 47 विधानसभा सीटों की जिम्मेदारी हर नेता को

    कलकत्ता 

    बिहार विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत से उत्साहित भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल के चुनावी रण में भी पूरी ताकत झोंक दी है। पार्टी ने उत्तर प्रदेश से मंत्रियों, संगठनात्मक अनुभव रखने वाले नेताओं और रणनीतिकारों की एक जंबो टीम बंगाल भेजी है, ताकि चुनावी जमीन मजबूत की जा सके।

    भाजपा ने चुनावी रणनीति के तहत बंगाल को छह क्षेत्रों में विभाजित किया है। इनमें से तीन क्षेत्रों की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री जेपीएस राठौर, पूर्व कैबिनेट मंत्री सुरेश राणा और उत्तराखंड के शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत को सौंपी गई है। इनके साथ संबंधित राज्यों के संगठन महामंत्री भी तैनात किए गए हैं। 

    47 सीटों का दायित्व यूपी के नेताओं को
    पार्टी ने 244 विधानसभा सीटों में से 47 सीटों का दायित्व यूपी के नेताओं को सौंपा है। बंगाल का चुनाव भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बना हुआ है और देशभर की निगाहें यहां के नतीजों पर टिकी हैं।
    उत्तर प्रदेश में लंबे समय तक प्रदेश महामंत्री रह चुके जेपीएस राठौर को उनकी मजबूत संगठनात्मक पकड़ को देखते हुए अक्टूबर में ही बंगाल भेज दिया गया था। वे कोलकाता दक्षिण क्षेत्र का प्रभार संभाल रहे हैं और इससे पहले भी विधानसभा चुनाव के दौरान यहां सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं।

    44 जिलों में से पांच जिलों का प्रभार भी यूपी के नेताओं
    पूर्व गन्ना विकास मंत्री और प्रदेश उपाध्यक्ष रह चुके सुरेश राणा को कोलकाता उत्तर की जिम्मेदारी दी गई है। इससे पहले वे हरियाणा विधानसभा चुनाव में भी पार्टी के लिए अहम सीटों पर काम कर चुके हैं। राज्य के 44 जिलों में से पांच जिलों का प्रभार भी यूपी के नेताओं के पास है।

    इनमें राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’, राज्यमंत्री दिनेश खटीक, संजय गंगवार, पूर्व सांसद अजय मिश्र टेनी और सुब्रत पाठक शामिल हैं। सुब्रत पाठक को हुगली जिले की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जहां की सात विधानसभा सीटों पर फिलहाल भाजपा का कोई विधायक नहीं है, हालांकि 2019 के लोकसभा चुनाव में यहां से भाजपा सांसद जीत दर्ज कर चुके हैं।पूर्व मंत्री स्वाति सिंह को कोलकाता दक्षिण की बिहाला सीट, उपेंद्र तिवारी को हावड़ा टाउन की संकरेल सीट और आनंद शुक्ला को हाबरा सीट का दायित्व दिया गया है।
    वहीं मेरठ-गाजियाबाद क्षेत्र से एमएलसी धर्मेंद्र भारद्वाज बैरकपुर जिले की जगतदल विधानसभा सीट और कानपुर से एमएलसी अरुण पाठक नईहाटी सीट पर कैंप किए हुए हैं। इसके अतिरिक्त जिला, क्षेत्र और प्रदेश स्तर के संगठनात्मक पदाधिकारियों को भी चुनावी रणनीति के तहत पश्चिम बंगाल भेजा गया है। 

  • बांग्लादेश को अमेरिका का गुलाम बनाकर जाएंगे यूनुस? चुनाव से पहले सीक्रेट डील ने मचाई खलबली

    बांग्लादेश को अमेरिका का गुलाम बनाकर जाएंगे यूनुस? चुनाव से पहले सीक्रेट डील ने मचाई खलबली

    ढाका 

    जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के साथ ट्रेड डील की घोषणा की तब पड़ोसी बांग्लादेश में चिंताएं बढ़ गईं क्योंकि बांग्लादेश भी अमेरिका के साथ एक समझौता करने जा रहा है. ये चिंता इसलिए है क्योंकि बांग्लादेश-अमेरिका व्यापार समझौता पूरी तरह सीक्रेट रखा गया है.

    प्रस्तावित समझौते को लेकर सवाल ऐसे भी उठ रहे हैं कि क्या गैर-निर्वाचित मोहम्मद यूनुस प्रशासन के पास ऐसा समझौता करने का जनादेश भी है या नहीं. यह घटनाक्रम उन रिपोर्टों के बाद सामने आया है, जिनमें दावा किया गया है कि 2024 में प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार को गिराने वाली इस्लामी साजिश के साथ-साथ यूनुस प्रशासन को अमेरिकी डीप स्टेट का समर्थन मिला था.

    अमेरिका के साथ समझौता सीक्रेट रखा गया है जिसे लेकर बांग्लादेश के निर्यातक संगठनों और खासकर उसके अहम टेक्सटाइल सेक्टर के हितधारकों में चिंता बढ़ गई है. उनका कहना है कि समझौते की शर्तें बांग्लादेशी निर्यात को और नुकसान पहुंचा सकती हैं.

    बांग्लादेश के कुल निर्यात का 90 फीसदी से ज्यादा रेडीमेड गारमेंट्स और टेक्सटाइल्स का है. ट्रंप के टैरिफ की वजह से बांग्लादेश के वस्त्र उद्योग को पहले ही भारी नुकसान पहुंचा है और अगर अमेरिका के साथ कोई सीक्रेट समझौता हो जाता है तो बड़े पैमाने पर रोजगार देने वाले क्षेत्रों को यह प्रभावित कर सकता है. इससे बांग्लादेश की पूरी अर्थव्यवस्था को झटका लग सकता है.

    समझौते की वैधता पर उठ रहे सवाल

    समझौते की वैधता पर भी सवाल उठ रहे हैं. अमेरिका-बांग्लादेश ट्रेड डील बांग्लादेश में चुनाव से महज तीन दिन पहले 9 फरवरी को हो सकता है. ऐसे में सवाल यह है कि चुनाव से ठीक पहले और अपने कार्यकाल के अंतिम दिनों में यूनुस प्रशासन यह समझौता क्यों कर रहा है. बांग्लादेशी अखबार ‘प्रथम आलो’ की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में यूनुस प्रशासन ने अमेरिका के साथ एक नॉन-डिस्क्लोजर एग्रीमेंट पर दस्तखत किए थे, जिसके चलते समझौते के ड्राफ्ट की जानकारी सार्वजनिक नहीं है.

    बांग्लादेशी अर्थशास्त्री और बुद्धिजीवी अनु मुहम्मद ने कहा है कि यूनुस प्रशासन की यह जल्दबाजी और झोल-झाल सिर्फ अमेरिका के साथ व्यापार समझौते तक सीमित नहीं है. उन्होंने एक फेसबुक पोस्ट कर उन्होंने सवाल उठाए हैं कि आम चुनाव से ठीक पहले जल्दबाजी में बंदरगाह लीज पर दिया जा रहा, हथियार आयात किए जा रहे और अमेरिका के साथ 'अधीनता' वाले समझौते साइन किए जा रहे हैं.

    अनु मुहम्मद ने सवाल किया कि 9 फरवरी के बांग्लादेश-अमेरिका व्यापार समझौते से आखिर किसके हित सध रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि ये समझौते पूरी तरह गैर-पारदर्शी, अव्यावहारिक और अनियमित तरीके से आगे बढ़ाए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि विदेशी 'लॉबिस्ट' सलाहकार बनकर यूनुस प्रशासन के भीतर बैठाए गए हैं, जो इन समझौतों को किसी भी कीमत पर कराना चाहते हैं.

    यह भी आरोप हैं कि नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस को इस्लामिस्ट जमात-ए-इस्लामी के समर्थन से ही अंतरिम सरकार का मुखिया बनाया गया. ट्रेड डील को लेकर चर्चा ऐसे समय में हो रही है, जब रिपोर्टें हैं कि अमेरिकी डिप्लोमैट्स जमात के साथ बातचीत कर रहे हैं. 12 फरवरी को होने वाले चुनाव में जमात को एक बड़े राजनीतिक खिलाड़ी के तौर पर देखा जा रहा है.

    कोलकाता में एक वर्चुअल प्रोग्राम को संबोधित करते हुए 2 फरवरी को शेख हसीना के बेटे सजीब वाजेद ने कहा कि बांग्लादेश एक 'फर्जी' चुनाव की ओर बढ़ रहा है, जिसका मकसद विदेशी हितों के प्रति वफादार कमजोर सरकार बनाना है. उन्होंने यूनुस शासन पर इस्लामवादियों के समर्थन से चलने और अपारदर्शी तरीके से फैसले लेने का आरोप लगाया.

    रोचक बात ये हैं कि 12 फरवरी को बांग्लादेश सिर्फ नई सरकार के लिए वोटिंग नहीं करेगा, बल्कि जुलाई चार्टर पर भी मुहर लगाएगा या उसे खारिज करेगा. इस चार्टर को खुद मोहम्मद यूनुस और उनकी सरकार आगे बढ़ा रही है और ‘यस वोट’ के पक्ष में कैंपेन चला रही है. 2024 के हसीना-विरोधी प्रदर्शनों के बाद तैयार किया गया यह चार्टर संविधान में संशोधन करेगा. माना जा रहा है कि यह संशोधन अंतरिम शासन की तरफ से की गई कथित गड़बड़ियों का भी बचाव करेगा.

    जल्दबाजी में समझौता क्यों कराना चाहती है यूनुस सरकार?

    अप्रैल 2025 में जब ट्रंप ने 100 देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ का ऐलान किया, तो बांग्लादेश पर 37 फीसदी का भारी टैरिफ लगा. जून 2025 में बांग्लादेश ने अमेरिका के साथ नॉन-डिस्क्लोजर एग्रीमेंट साइन किया, जिससे टैरिफ पर बातचीत सीक्रेट हो गई. जुलाई में अमेरिका ने अचानक टैरिफ घटाकर 35 फीसदी और अगस्त में 20 फीसदी कर दिया.

    ढाका स्थित ‘डेली सन’ के मुताबिक, बांग्लादेश के वाणिज्य सचिव महबूबुर रहमान ने कहा है कि अमेरिका से 9 फरवरी की तारीख मिली है और उसी दिन समझौते पर दस्तखत होंगे.

    सबसे ज्यादा चिंता निर्यातकों, खासकर गारमेंट सेक्टर में है. बांग्लादेश गारमेंट मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट इनामुल हक खान ने कहा कि बिना किसी परामर्श के यह प्रक्रिया बेहद परेशान करने वाली है. उनका कहना है कि चुनाव से ठीक पहले समझौते पर दस्तखत करना ठीक नहीं है, क्योंकि इसके दूरगामी असर होंगे.

    यूनुस प्रशासन के जाने के कुछ ही दिनों बाद यह समझौता लागू कराने की जिम्मेदारी एक निर्वाचित सरकार पर आ जाएगी, जिसका इस समझौते की बातचीत में कोई रोल नहीं रहा. सेंटर फॉर पॉलिसी डायलॉग के वरिष्ठ फेलो देबप्रिया भट्टाचार्य ने कहा कि सवाल यह भी है कि क्या आने वाली सरकार के हाथ पहले से ही बांधे जा रहे हैं.

    डर क्यों फैला रहा है यह समझौता?

    समझौते की शर्तें किसी को नहीं पता. नॉन-डिस्क्लोजर एग्रीमेंट के चलते समझौते के बाद प्रभावित होने वाले पक्ष पूरी तरह अंधेरे में हैं. चिंता सिर्फ निर्यातकों तक सीमित नहीं है, घरेलू बाजार पर निर्भर कारोबारी भी डरे हुए हैं. ढाका चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष तस्कीन अहमद ने कहा कि ड्राफ्ट की जानकारी न होने से इसके असर का आकलन करना मुश्किल है और इसे चुनाव से पहले साइन करने से बचा जा सकता था.

    ये चिंताएं जायज भी हैं क्योंकि शेख हसीना की सरकार को हटाने और यूनुस को सत्ता में लाने में अमेरिका पर संलिप्तता के आरोप लगे थे. बांग्लादेशी पत्रकार साहिदुल हसन खोकन के मुताबिक, हसीना को हटाने में अमेरिका सीधे तौर पर भले ही शामिल नहीं था लेकिन यह भू-राजनीतिक रूप से बेहद अहम रही.

    शेख हसीना ने बांग्लादेश को दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गारमेंट निर्यातक बनाने में अहम भूमिका निभाई थी.

    अमेरिका के साथ समझौते का गारमेंट उद्योग पर असर

    बांग्लादेश अमेरिका को हर साल करीब 7 से 8.4 अरब डॉलर के वस्त्र और टेक्सटाइल निर्यात करता है, जिसमें रेडीमेड गारमेंट्स की हिस्सेदारी लगभग 96 फीसदी है. यह क्षेत्र 40 से 50 लाख लोगों को सीधे रोजगार देता है, जिनमें आधे से ज्यादा महिलाएं हैं, और देश की निर्यात आय का 80 फीसदी से ज्यादा हिस्सा इसी से आता है.
    इन तमाम वजहों से अमेरिका-बांग्लादेश ट्रेड डील को एक अपारदर्शी और बाध्यकारी समझौता माना जा रहा है, जिसे एक अलोकतांत्रिक सरकार ने अपने अंतिम दिनों में आगे बढ़ाया. यही कारण है कि यह समझौता आज बांग्लादेशी उद्योगपतियों और निर्यातकों के लिए चिंता का बड़ा कारण बन गया है.

  • सजेगा कन्या विवाह महोत्सव, 300 बेटियों का ब्याह—नेपाल की युवती भी बनेगी दुल्हन, बागेश्वर धाम में शादी की तैयारियां जोरों पर

    सजेगा कन्या विवाह महोत्सव, 300 बेटियों का ब्याह—नेपाल की युवती भी बनेगी दुल्हन, बागेश्वर धाम में शादी की तैयारियां जोरों पर

    खजुराहो

     छतरपुर के बागेश्वर धाम में हर वर्ष की तरह इस साल भी बहुत ही शानदार कन्या विवाह महोत्सव आयोजित होने जा रहा है. इस बार का महोत्सव काफी खास होने वाला है, क्योंकि यह महोत्सव सिर्फ राष्ट्रीय नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय हो गया है. नेपाल की भी एक बेटी की शादी धाम में होगी.  इस मौके पर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने वर-वधु को लहंगा, चुनरी, शेरवानी, टोपी, वरमाला आदि सामग्री दी.

    खजुराहो के बागेश्वर धाम में 300 जोड़ों की शादी की तैयारियां जोरों पर हैं। समारोह 12 से 15 फरवरी तक तीन दिनों तक चलेगा। हर दिन अलग-अलग रस्में होंगी। आने वाले मेहमानों की खातिरदारी भी की जाएगी। दहेज में सभी जोड़ों को 90 लाख की FD, सोने-चांदी समेत गृहस्थी का सामान दी जयेगा। 

    बागेश्वर धाम में सातवीं बार आयोजन हो रहा है। इस बार 13 राज्यों से 1500 से अधिक आवेदन मिले। 60 जिलों की 600 सदस्यीय टीम ने एक महीने तक सर्वे किया। 300 जोड़ों को शादी के लिए बुलाया गया। इसमें एक जोड़ा नेपाल का भी है।

    30,000 रुपये की जॉइंट एफडी
    बाबा बागेश्वर ने सभी ससुराल वालों को सलाह दी कि वे अपनी बहुओं को अपनी बेटियों जैसा मानें और यह पक्का करें कि किसी भी तरह की कोई शिकायत न हो. उन्होंने कुछ समधियों को बुलाया, उनके साथ मज़ाक किया और उनके चेहरों पर गुलाल लगाया. उन्होंने ऐलान किया कि इस बार दूल्हा और दुल्हन के नाम पर 30,000 रुपये की जॉइंट फिक्स्ड डिपॉज़िट खोली जाएगी. यह फिक्स्ड डिपॉज़िट पांच साल से पहले नहीं तोड़ी जा सकती. उन्होंने बताया कि शादियों के लिए चयन प्रक्रिया अत्यंत पारदर्शी रही. सर्वे टीम ने 500 से ज़्यादा लड़कियों में से 300  लड़कियों को चुना, जिसमें उन लड़कियों को प्राथमिकता दी गई जो बहुत गरीब, अनाथ या बेसहारा थीं.

    धीरेंद्र शास्त्री बोले– ये अब बालाजी की बेटियां

    आयोजन को लेकर पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि "ये अब बालाजी की बेटियां हो गई हैं। इनका विवाह धूमधाम से किया जाएगा। देशभर के संत, महात्मा, राजपीठ, व्यास पीठ के लोगों के सानिध्य में बेटियां विवाह बंधन में बंधेंगी।

    उन्होंने बताया कि सर्वे टीम ने 600 से अधिक अति निर्धन, अनाथ, मातृहीन और पितृहीन बेटियों का चयन किया था। इनमें से वर्तमान संसाधनों को देखते हुए 300 बेटियों को विवाह के लिए चुना है। उन्होंने कहा कि पात्र बेटियों की संख्या अधिक थी, लेकिन बागेश्वर धाम की वर्तमान सामर्थ्य के अनुसार ही चयन किया गया है।

    पंडित धीरेंद्र शास्त्री के ऑफिस में इन दिनों खासी हलचल है। कर्मचारी देर रात तक काम में व्यस्त हैं। सभी की टेबल पर शादी के निमंत्रण कार्ड का ढेर है। ये निमंत्रण पत्र VVIP मेहमानों को भेजे जाने हैं।

    बीच-बीच में इसकी जिम्मेदारी संभाल रहे कमल अवस्थी कार्ड उठाकर चेक कर ले रहे हैं। वो इसलिए कि नाम और पता सही है या नहीं। उसे वे अपने आईपैड में दर्ज लिस्ट से भी मिलान कर रहे हैं। कोशिश है कि कहीं कोई गलती न हो जाए। दूसरी तरफ भंडार में दूल्हा-दुल्हन को दिए जाने वाले उपहार के ढेर लगे हैं। सेवादार सावधानी से पैकेट बना रहे हैं।

    कमल अवस्थी कहते हैं कि सभी अरेंजमेंट पूरे हो गए हैं। पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने कुछ दिन पहले ही हर जोड़े को बुलाकर उन्हें कपड़े और बाकी सामान दे दिया है। सभी को 13 फरवरी की सुबह 8 बजे बुलाया है। लगन मंडप तैयार किए जा रहे हैं। भोजन पंडाल अलग-अलग होंगे। तैयारियां तो पूरी हैं, फिर भी बहुत काम बाकी है। उस दिन पूरे बागेश्वर धाम को सजाया जाएगा।

    कमल अवस्थी ने नेपाल की रहने वाली अस्मिता सुनार से फोन पर हमारी बात कराई। अस्मिता भी नेपाल के युवक ये यहां सात फेरे लेने वाली हैं। इसके अलावा, मध्यप्रदेश की दो लड़कियाें से भी बात की।

    नेपाल की अस्मिता बोली- चार साल में आया नंबर

    अस्मिता ने फोन पर बताया कि परिवार की माली हालत कभी ठीक नहीं रही। मां दिल्ली में घर-घर जाकर बर्तन साफ करती हैं। पिता यहीं मजदूरी करते हैं। भाई केरल में मजदूरी करता है। एक बार मेरी तबीयत खराब हुई। पहले यहां फिर दिल्ली में डॉक्टर्स को दिखाया। फायदा नहीं हो रहा था।

    डॉक्टर बोलते थे कि दिमाग खराब है, पागल हो गई हूं। लोगों से सुना, तो बागेश्वरधाम पहुंचे। अब मैं एकदम ठीक हूं। बालाजी भगवान ने मुझे ठीक कर दिया। हमने यूट्यूब पर बागेश्वर धाम में हो रही शादियों के बारे में देखा था। मां पिछले चार साल से यहां मेरी शादी के लिए आवेदन कर रही थी, लेकिन इस बार नंबर लगा है। खुशी है कि मुझे गुरुजी से मिलने का मौका मिलेगा।

    अब मेरी शादी मेज बहादुर से हो रही है, वो मेरे ही देश के कंचनपुर के रहने वाले हैं। उनके परिवार की हालत भी हमारे जैसे ही हैं। पढ़ाई के दौरान हमारी मुलाकात हुई थी। मैं और उनकी बहन साथ पढ़ते थे। एक बार हम माउंटेन घूमने गए।

    वहां बात हुई। धीरे-धीरे प्यार हो गया। फिर हम लोगों ने अपने-अपने घर बताया, तो घरवाले बोले- इतना पैसा नहीं है कि अभी शादी कर दें। इसके बाद मां चार साल तक लगातार आवेदन करती रहीं। इस बार नंबर आ गया।

    फोन पर मिली सूचना, शादी के लिए चुना गया

    विदिशा जिले की गंजबासौदा के लाल पठार इलाके में रहने वाली सपना अहिरवार के पिता नहीं हैं। मां बीमार रहती हैं और भाई छोटा है। घर में दो वक्त खाने के लिए भी जद्दोजहद करनी होती है। सपना कहती हैं- बीमार मां को हमेशा मेरी शादी की चिंता रहती थी।

    जब बागेश्वर धाम में होने वाली सामूहिक विवाह समारोह के बारे में पता चला, तो मन में आस सी जागी। पहले भी यहां आ चुकी हूं। पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने परिवार की मदद की। उन्हें अपने पिता जैसा मानती हूं। आवेदन के बाद यहां से घर पहुंचे थे।

    कुछ दिन बाद फोन पर सूचना मिली कि मुझे यहां शादी के लिए चुना गया है। उन्होंने शादी का लहंगा, सैंडल और होने वाले पति को शेरवानी, पगड़ी, जूते और माला दी है। उस दिन कपड़े पहनकर यहां आना है। गरीब हूं, पर आज इसका अहसास नहीं हो रहा है।

    बागेश्वरधाम से शादी होना सपने की तरह

    बागेश्वरधाम में शादी के लिए सिलेक्ट हुईं रायपुरा किशनगढ़ की रहने वाले सपना विश्वकर्मा के माता-पिता की मौत उनके बचपन में हो गई थी। चाचा-चाची ने उन्हें पाला। बागेश्वर धाम में होने वाली शादी को लेकर सपना बहुत खुश हैं।

    सपना विश्वकर्मा कहती हैं कि यहां से शादी होना तो सपने की तरह है। कभी सोचा नहीं था कि शादी इतने बड़े स्तर पर और इस तरह से होगी।

  • समुद्र नहीं, अब हिमालय से आएगी ‘सुनामी’, बह जाएंगे हजारों गांव! IIT रुड़की का अलर्ट, खतरे में 93 लाख आबादी

    समुद्र नहीं, अब हिमालय से आएगी ‘सुनामी’, बह जाएंगे हजारों गांव! IIT रुड़की का अलर्ट, खतरे में 93 लाख आबादी

    नई दिल्ली
     हिमालय की बर्फीली चोटियों के बीच एक ऐसी तबाही आकार ले रही है, जो सुनामी से कम खतरनाक नहीं है. IIT रुड़की के रिसर्चर्स ने एक चौंकाने वाली स्टडी में बताया है कि हिमालय के पहाड़ों पर बनी ग्लेशियल झीलों का दायरा तेजी से बढ़ रहा है. ‘साइंटिफिक रिपोर्ट्स’ में छपी रवींद्र कुमार और सौरभ विजय की इस रिसर्च के अनुसार, हाई माउंटेन एशिया (HMA) क्षेत्र में 2016 से 2024 के बीच इन झीलों के क्षेत्रफल में 5.5 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी हुई है. वर्तमान में करीब 31,000 से ज्यादा ऐसी झीलें हैं, जो 93 लाख लोगों के लिए सीधा खतरा बन गई हैं.

    क्या है ‘हिमालयी सुनामी’ या GLOF?

        जब पहाड़ों पर स्थित ग्लेशियर पिघलते हैं, तो उनका पानी खाली जगहों पर जमा होकर झीलें बना लेता है. इन झीलों के चारों ओर पक्के बांध नहीं होते, बल्कि ये ढीली चट्टानों, बर्फ और मलबे (Moraine) के प्राकृतिक बांधों से घिरी होती हैं.

        जब ग्लोबल वार्मिंग की वजह से पानी का दबाव बढ़ता है या कोई एवलांच (बर्फ का तूफान) इन झीलों में गिरता है, तो ये बांध गुब्बारे की तरह फट जाते हैं. इसे ही ‘ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड’ (GLOF) या हिमालयी सुनामी कहा जाता है.

        केदारनाथ की 2013 वाली त्रासदी और 2023 में सिक्किम में आई बाढ़ इसी तरह के खतरे के बड़े उदाहरण हैं. ये झीलें इतनी ऊंचाई पर स्थित हैं कि जब इनका पानी नीचे गिरता है, तो वह जबरदस्त रफ्तार पकड़ लेता है.

        इसमें सिर्फ पानी नहीं होता, बल्कि अपने साथ बोल्डर, मिट्टी और पेड़ों को बहाकर लाने वाला एक ‘चलता-फिरता पहाड़’ बन जाता है, जो रास्ते में आने वाली हर चीज को तबाह कर देता है.

    वैज्ञानिकों ने कैसे पहचाना इन 31,000 टाइम बमों को?

    हजारों फीट की ऊंचाई और बेहद कठिन रास्तों के कारण इन झीलों की निगरानी करना नामुमकिन जैसा था. लेकिन IIT रुड़की के वैज्ञानिकों ने अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी का सहारा लिया. उन्होंने नासा (NASA) और यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) के ‘लैंडसैट 8’ के हाई-रेजोल्यूशन डेटा का उपयोग किया. इसके साथ ही यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के ‘सेंटिनल 1 और 2’ और कोपरनिकस डिजिटल एलिवेशन मॉडल की मदद ली गई.
    अमेरिका के नेशनल रिकॉनेस्सेंस ऑफिस द्वारा 3 जनवरी 1976 को ली गई इस तस्वीर में माउंट एवरेस्ट बीच में दिख रहा है. (AP)

    इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके राडार और ऑप्टिकल सेंसर बादलों के पार भी देख सकते हैं. इसकी मदद से वैज्ञानिकों ने 20,000 से 1,00,000 वर्ग मीटर तक की छोटी झीलों की भी सटीक पहचान की है. अब इस तकनीक से ‘तीसरे ध्रुव’ (Third Pole) कहे जाने वाले इस पूरे इलाके की रूटीन मॉनिटरिंग मुमकिन हो गई है.

    किन इलाकों में सबसे तेजी से फैल रही हैं झीलें?

    स्टडी के मुताबिक, झीलों के बढ़ने की रफ्तार हर इलाके में अलग-अलग है:

    किलियन शान (Qilian Shan): इस क्षेत्र में झीलों के क्षेत्रफल में सबसे ज्यादा 22.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है.

    पूर्वी हिमालय: यह इलाका सबसे ज्यादा संवेदनशील है क्योंकि यहां इन झीलों की संख्या सबसे अधिक है.

    भारत की स्थिति: भारत में करीब 30 लाख लोग सीधे तौर पर इन अस्थिर झीलों के नीचे बसे हुए हैं.

    बढ़ती गर्मी और बदलते मानसून की वजह से ग्लेशियर सिकुड़ रहे हैं. जहां पहले बर्फ हुआ करती थी, अब वहां गहरे और अस्थिर पानी के तालाब बन गए हैं.

    93 लाख लोगों पर मंडराता मौत का साया

    दुनिया भर में ग्लेशियर की बाढ़ से जितने लोगों को खतरा है, उनमें से 62 प्रतिशत लोग अकेले हाई माउंटेन एशिया क्षेत्र में रहते हैं. हिमालय के इस हिस्से में रहने वाले कई परिवार झीलों से महज 10 किलोमीटर के दायरे में बसे हैं. इसका मतलब है कि अगर कोई झील फटती है, तो लोगों को चेतावनी देने और सुरक्षित स्थान पर ले जाने के लिए समय बहुत ही कम मिलेगा. ये झीलें ‘टिकिंग टाइम बम’ की तरह हैं, जिनकी दीवारें मिट्टी और बर्फ की बनी हैं. अगर ग्लोबल वार्मिंग की रफ्तार यही रही, तो आने वाले समय में केदारनाथ जैसे हादसों का खतरा और बढ़ सकता है.