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  • UUnder 19 World Cup Final: भारत ने छठी बार जीता अंडर-19 विश्वकप, 16 में से 10 बार फाइनल में पहुंचकर दिखाया दबदबा

    UUnder 19 World Cup Final: भारत ने छठी बार जीता अंडर-19 विश्वकप, 16 में से 10 बार फाइनल में पहुंचकर दिखाया दबदबा

    हरारे .

    भारतीय अंडर-19 टीम ने इंग्लैंड के खिलाफ फाइनल में शानदार प्रदर्शन किया और छठी बार विश्व कप का खिताब जीत लिया। भारत पूरे टूर्नामेंट के दौरान अजेय रहा और ग्रुप चरण से लेकर फाइनल मुकाबले तक कोई टीम आयुष म्हात्रे की अगुआई वाली टीम को हरा नहीं सकी। भारत के लिए वैभव सूर्यवंशी, आयुष म्हात्रे और अभिज्ञान कुंडू ने पूरे टूर्नामेंट के दौरान शानदार प्रदर्शन किया।

    इंग्लैंड को 100 रन से रौंदा

    भारत ने इंग्लैंड के खिलाफ फाइनल में 100 रनों से हराया। भारत ने इंग्लैंड के सामने 412 रन का लक्ष्य रखा था। जवाब में इंग्लिश टीम 40.2 ओवर में 311 रन रन पर सिमट गई। टीम इंडिया के लिए वैभव सूर्यवंशी फाइनल के सुपरस्टार रहे। उन्होंने 80 गेंद में 175 रन की ताबड़तोड़ पारी खेली। वहीं, इंग्लैंड की ओर से कैलब फाल्कनर ने शतक जड़ा, लेकिन टीम को नहीं जिता पाए। फाल्कनर ने 67 गेंद पर 115 रन की पारी खेली। 

    टूर्नामेंट में अजेय रही भारतीय टीम

    भारतीय टीम पूरे टूर्नामेंट के दौरान अजेय रही। भारत ने पहले मैच में अमेरिका को छह विकेट से हराया।
    इसके बाद बांग्लादेश को 18 रन से मात देकर सुपर सिक्स चरण में प्रवेश किया।
    ग्रुप चरण के आखिरी मैच में भारत ने न्यूजीलैंड को डीएलएस प्रणाली से सात विकेट से हराया।
    ग्रुप चरण में दमदार प्रदर्शन के बाद भारत ने सुपर सिक्स चरण में जिम्बाब्वे को 204 रनों के बड़े अंतर से हराया।

    फिर चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को 58 रन से हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया और पाकिस्तान को बाहर का रास्ता दिखाया।

    भारत ने सेमीफाइनल में अफगानिस्तान को सात विकेट से हराकर फाइनल में जगह बनाई।
    अब इंग्लैंड को हराकर खिताब अपने नाम किया।

    सर्वाधिक बार खिताबी मुकाबले खेलने का है रिकॉर्ड 

    इसमें कोई शक नहीं है कि भारत का अंडर-19 विश्व कप में हमेशा ही दबदबा रहा है। दिलचस्प बात यह है कि भारत अंडर-19 विश्व कप के 16 सत्र में से 10 बार खिताबी मुकाबले में पहुंच चुका है जो सर्वाधिक है। भारत ने लगातार छठी बार खिताबी मुकाबले में प्रवेश किया था। टीम ने 2016, 2018, 2020, 2022, 2024 और 2026 में खिताबी मुकाबले में प्रवेश किया। यह आंकड़ा ये बताने के लिए अपने आप में काफी है कि भारतीय टीम का अंडर-19 में कोई सानी नहीं है। यहां तक कि ऑस्ट्रेलिया टीम भी भारत से काफी पीछे है। ऑस्ट्रेलिया ने छह बार अंडर-19 टीम के फाइनल में जगह बनाई है और चार बार खिताब जीता है।

    अंडर-19 विश्व कप का किया था सबसे बड़ा रन चेज

    भारत के नाम अंडर-19 विश्व कप में सबसे बड़ा रन चेज का रिकॉर्ड भी है। टीम ने यह उपलब्धि अफगानिस्तान के खिलाफ सेमीफाइनल मैच में हासिल की थी। अफगानिस्तान ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 50 ओवर में चार विकेट पर 310 रन बनाए। जवाब में भारत के लिए आरोन जॉर्ज ने शतक लगाया, जबकि वैभव सूर्यवंशी और कप्तान आयुष म्हात्रे ने अर्धशतक लगाए जिससे टीम ने 41.1 ओवर में तीन विकेट पर 311 रन बनाकर मैच अपने नाम किया था। भारत ने इस तरह अंडर-19 विश्व कप का सबसे बड़ा रन चेज बनाया था। इससे पहले ये रिकॉर्ड न्यूजीलैंड के नाम था जिन्होंने 2006 में आयरलैंड के खिलाफ 305 रनों का लक्ष्य हासिल किया था। भारत ने इस तरह 20 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ा था।

     

     

  • कांग्रेस बंगाल की सभी सीटों पर ममता के खिलाफ अकेले लड़ेगी चुनाव, लेकिन क्या होगा उसका एजेंडा?

    कांग्रेस बंगाल की सभी सीटों पर ममता के खिलाफ अकेले लड़ेगी चुनाव, लेकिन क्या होगा उसका एजेंडा?

    कलकत्ता 

    पश्चिम बंगाल में विधानसभा के चुनाव अप्रैल-मई में होने वाले हैं. लेकिन, अभी से ही संकेत मिलने लगे हैं कि बंगाल की लड़ाई भी लगभग दिल्ली और बिहार जैसी ही हो सकती है – बंगाल में भी कांग्रेस करीब करीब उसी भूमिका में नजर आ सकती है, जैसा कांग्रेस का रवैया दिल्ली और बिहार में देखा जा चुका है.

    पश्चिम बंगाल में चल रहे SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण के खिलाफ अपनी मुहिम को धार देने के लिए ममता बनर्जी दिल्ली में हैं. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मिल चुकी हैं, और सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की बेंच के सामने अपने केस की पैरवी भी कर चुकी हैं.

    साथ ही, ममता बनर्जी चाहती हैं कि मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कांग्रेस संसद में महाभियोग का प्रस्ताव लाए, और तृणमूल कांग्रेस सहित सभी विपक्षी दल उसको सपोर्ट करें – लेकिन, सपोर्ट के बदले में वो कुछ भी शेयर नहीं करना चाहती हैं. 

    मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तो पहले से ही तृणमूल कांग्रेस के पश्चिम बंगाल चुनाव अकेले लड़ने का ऐलान कर रखा है. अब तो कांग्रेस ने भी पश्चिम बंगाल की सभी 294 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है – ऐसी सूरत में बंगाल के चुनाव नतीजे दिल्ली और बिहार से कितने अलग होंगे, देखना महत्वपूर्ण होगा.

    पश्चिम बंगाल की संभावित चुनावी जंग

    ये तो अब पूरी तरह साफ हो गया है कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को चुनावी लड़ाई सिर्फ बीजेपी के खिलाफ नहीं लड़ना है. 2021 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी बहुत ज्यादा सीटें तो नहीं जीत पाई थी, लेकिन मुख्य विपक्षी दल तो बन ही गई. कांग्रेस का तो खाता भी नहीं खुल पाया था. 

    मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग के मुद्दे पर विपक्ष का साथ चाह रहीं ममता बनर्जी से दिल्ली में जब कांग्रेस के बारे पूछा गया तो उनका जवाब था कि उनकी पार्टी विधानसभा चुनाव अकेले लड़ेगी. कांग्रेस के साथ किसी भी तरह के चुनावी गठबंधन की संभावना को नकारते हुए ममता बनर्जी पहले भी कह चुकी हैं, तृणमूल कांग्रेस की रणनीति साफ है, जबकि बाकी पार्टियां टीएमसी के खिलाफ लड़ने की रणनीति बनाती हैं.

    पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर अब कांग्रेस का रुख भी सामने आ गया है. कांग्रेस का कहना है, प्रदेश संगठन और कार्यकर्ताओं की लंबे समय से मांग रही है कि पार्टी राज्य में अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान के साथ चुनावी मैदान में उतरे. पश्चिम बंगाल कांग्रेस ने आलाकमान के प्रति आभार प्रकट करते हुए कहा है कि केंद्रीय नेतृत्व ने बंगाल कांग्रेस की भावनाओं का सम्मान किया और अकेले चुनाव लड़ने के फैसले को मंजूरी दी.

    बंगाल कांग्रेस की तरफ से एक बयान में कहा गया है, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, पश्चिम बंगाल प्रभारी गुलाम अहमद मीर, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी, सांसद ईशा खान चौधरी सहित सूबे के सीनियर नेताओं की मौजूदगी में व्यापक विमर्श हुआ – और तय हुआ कि पार्टी 2026 का विधानसभा चुनाव अकेले दम पर लड़ेगी.

    बीजेपी के खिलाफ ममता बनर्जी की लड़ाई में कांग्रेस की ही तरह एक और मोर्चा खड़ा हो रहा है. सीपीएम की पश्चिम बंगाल इकाई के सचिव मोहम्मद सलीम ने हाल ही में टीएमसी से सस्पेंड विधायक हुमायूं कबीर से मुलाकात की थी. मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद बनवाने की घोषणा करके चर्चा में आए हुमायूं कबीर ने जनता उन्नयन पार्टी बनाई है, और ममता बनर्जी को सत्ता से बेदखल करने का दावा कर रहे हैं. 

    बंगाल चुनाव में कांग्रेस की भूमिका

    2025 के शुरू में दिल्ली विधानसभा चुनाव और आखिर में बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही. पश्चिम बंगाल के 2021 के चुनाव में तो राहुल गांधी की भूमिका रस्मअदायगी जैसी थी. राहुल गांधी एक दिन के लिए पश्चिम बंगाल में कैंपेन करने गए थे, और कोविड के कारण आगे के कार्यक्रम रद्द कर दिए गए थे. 

    2025 के पश्चिम बंगाल चुनाव में कांग्रेस की भूमिका का अंदाजा कैसे लगाया जाए? क्या राहुल गांधी दिल्ली और बिहार की तरह बंगाल में भी कांग्रेस को चुनाव लड़ाने वाले हैं या 2021 की ही तरह रस्मअदायगी निभाने की तैयारी है? 

    दिल्ली में हुई कांग्रेस की मीटिंग में ममता बनर्जी के सबसे बड़े विरोधी अधीर रंजन चौधरी भी शामिल थे, जो 2024 का लोकसभा चुनाव हारने के बाद से हाशिये पर भेजे जा चुके हैं. और, ये भी ममता बनर्जी के फेवर में ही जाता है. 2024 के चुनाव से पहले ही ममता बनर्जी ने घोषणा कर डाली थी कि वो अकेले चुनाव लड़ेंगी. पहले तो सुनने में आया था कि वो कांग्रेस को दो सीटें गठबंधन के तहत देने के तैयार भी थीं, लेकिन बाद में मना कर दिया. और, भारत जोड़ो न्याय यात्रा के साथ राहुल गांधी के पश्चिम बंगाल में प्रवेश की पूर्व संध्या पर ही 'एकला चलो रे' घोषणा कर दी थी. फिर कांग्रेस नेतृत्व की तरफ से ममता बनर्जी के प्रति बयानों में सम्मान के भाव ही प्रकट किए जा रहे थे. 

    दिल्ली और बिहार चुनावों में राहुल गांधी के तेवर को देखें तो अंदाज बिल्कुल अलग था. दिल्ली चुनाव में आम आदमी पार्टी नेता अरविंद केजरीवाल के खिलाफ राहुल गांधी उतने ही आक्रामक नजर आते थे, जितना बीजेपी के नेता. शीशमहल से लेकर दिल्ली शराब घोटाले तक, राहुल गांधी ने एक एक मामला गिनाकर अरविंद केजरीवाल को कठघरे में खड़ा कर दिया था. 

    ये भी था कि अरविंद केजरीवाल का भी कांग्रेस के प्रति ममता बनर्जी जैसा ही रवैया था. ममता बनर्जी ने तो विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक में रहते हुए भी अरविंद केजरीवाल का समर्थन किया था. मतलब, कांग्रेस के खिलाफ. जैसे समाजवादी पार्टी नेता अखिलेश यादव ने चुनाव कैंपेन भी किया था. 

    बिहार चुनाव राहुल गांधी दिल्ली की तरह तो नहीं लड़ रहे थे, लेकिन कोई कमी भी नहीं छोड़ी थी. आरजेडी नेता तेजस्वी यादव के साथ वोटर अधिकार यात्रा करते हुए उनको मुख्यमंत्री पद का चेहरा नहीं बताया. तेजस्वी यादव के बड़े भाई और प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बता देने के बाद भी. बाद में जो हुआ, न होता तो भी नतीजे शायद ही अलग होते. 

    तृणमूल कांग्रेस के लिए बंगाल का किला कितना मजबूत

    2016 में 3 सीटें जीतने वाली बीजेपी को ममता बनर्जी ने प्रशांत किशोर की बदौलत 100 का आंकड़ा भले ही पार न करने दिया हो, लेकिन 77 सीटें जीतने से नहीं रोक सकीं. नंदीग्राम के संग्राम में अपने ही पुराने सहयोगी शुभेंदु अधिकारी के हाथों हार का मुंह तक देखना पड़ा था. 2016 में टीएमसी को 211 सीटें मिली थीं, जबकि हद से ज्यादा प्रतिकूल परिस्थितियों में भी पांच साल बाद अपना प्रदर्शन सुधारते हुए टीएमसी 215 सीटें जीतने में कामयाब रही. 2011 में जब पहली बार लेफ्ट मोर्चा को बेदखल कर ममता बनर्जी ने सत्ता हासिल की थी, तो 184 सीटें मिली थीं. तब कांग्रेस का भी सपोर्ट हासिल था, लेकिन अब आमने सामने की टक्कर होने वाली है. 

    पश्चिम बंगाल में अभी जो राजनीतिक समीकरण बनते दिखाई पड़ रहे हैं, कुछ चीजें तो पूरी तरह साफ हैं. कुछ तस्वीरें तो हमेशा ही धुंधली रहती हैं.

    1. मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की कोशिश, ममता बनर्जी की तरफ से फिजूल की कवायद है. हो सकता है, इसे प्रचारित करके ममता बनर्जी वैसे ही फायदा उठाने की कोशिश करें जैसे बंगाल के लोगों के लिए SIR के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाकर पैरवी करने का वादा पूरा करने जैसा.  

    2. अगर ममता बनर्जी भी अरविंद केजरीवाल और तेजस्वी यादव जैसा व्यवहार करेंगी, और राहुल गांधी का रवैया दिल्ली और बिहार जैसा ही रहेगा, तो नतीजे अलग कैसे होंगे? 

    3. ममता बनर्जी की पश्चिम बंगाल में 'एकला चलो…' की जिद के कारण कांग्रेस के पैंतरे दिल्ली और बिहार जैसा 'खेला' कर सकते हैं.
     
    4. फिर तो दिल्ली और बिहार की तरह पश्चिम बंगाल में भी बीजेपी को बड़े आराम से खुला मैदान मिल सकता है. 

     

  • नीमच की ‘बहादुर मां’: 20 बच्चों को बचाने के लिए झेले मधुमक्खियों के डंक, कंचन बाई के बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाएगी सरकार

    नीमच की ‘बहादुर मां’: 20 बच्चों को बचाने के लिए झेले मधुमक्खियों के डंक, कंचन बाई के बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाएगी सरकार

     नीमच

    मध्य प्रदेश सरकार ने  नीमच जिले में मधुमक्खियों के हमले में 20 बच्चों को बचाते हुए जान गंवाने वाली 45 साल की महिला के परिवार को 4 लाख रुपये का मुआवजा देने का ऐलान किया है. 

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा, "नीमच जिले के रानपुर गांव में मधुमक्खियों के डंक से आंगनवाड़ी कार्यकर्ता कंचन बाई मेघवाल की असमय मौत बहुत दुखद और दिल दहला देने वाली है. राज्य सरकार दुख की इस घड़ी में उनके परिवार के साथ है. मानवीय आधार पर, मैंने उनके परिवार को 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का निर्देश दिया है. राज्य सरकार उनके बच्चों की पढ़ाई का खर्च भी उठाएगी."

    महिला के बेटे रवि मेघवाल ने एक न्यूज एजेंसी को बताया कि कंचन बाई एक सेल्फ-हेल्प ग्रुप की अध्यक्ष थीं, जो जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर रानपुर गांव में एक ही बिल्डिंग में स्थित आंगनवाड़ी और प्राइमरी स्कूल के बच्चों को खाना खिलाती थीं.

    घटना की जानकारी देते हुए मेघवाल ने कहा, "2 फरवरी को मधुमक्खियों के झुंड ने कुछ बच्चों पर हमला कर दिया, जब वे बिल्डिंग के बाहर हैंडपंप पर पानी पी रहे थे. बच्चे बिल्डिंग के अंदर भाग गए, लेकिन मधुमक्खियों का हमला जारी रहा. मेरी मां अंदर भागीं और एक टीचर की मदद से बच्चों को बचाया."

    मेघवाल ने आगे बताया कि हमले के समय बिल्डिंग के अंदर करीब 20 बच्चे थे. उन्होंने कहा, "उन्हें बचाते समय मेरी मां को कई मधुमक्खियों ने काट लिया, जिसके बाद वह बेहोश हो गईं और उनके मुंह से झाग निकलने लगा. उन्हें पास के एक अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया."

    मुख्यमंत्री की ओर से दिए जा रहे 4 लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा के बारे में बात करते हुए मेघवाल ने कहा कि वह चाहते हैं कि उनकी मां को उनकी बहादुरी के लिए पूरा सम्मान और श्रेय मिले.

    एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि मधुमक्खियों के हमले से जुड़े हालात की जांच की जा रही है और जांच के बाद उचित कदम उठाए जाएंगे.

  • बस्तरवासियों को मिली ‘जनजातीय गौरव वाटिका’ की अनमोल सौगात

    बस्तरवासियों को मिली ‘जनजातीय गौरव वाटिका’ की अनमोल सौगात

    रायपुर.

    उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा, वन मंत्री  केदार कश्यप और विधायक  किरण सिंह देव ने किया लोकार्पण

    शहर की आपाधापी, धूल और शोर-शराबे से दूर, बस्तरवासियों को प्रकृति की गोद में सुकून के पल बिताने के लिए शुक्रवार को एक भव्य और अनमोल ठिकाना मिल गया। बस्तर की समृद्ध जनजातीय विरासत, परंपरा और नैसर्गिक सौंदर्य को एक सूत्र में पिरोने के उद्देश्य से कुम्हड़ाकोट में निर्मित 'जनजातीय गौरव वाटिका' का लोकार्पण छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा, वन मंत्री  केदार कश्यप और विधायक  किरण सिंह देव ने किया। लगभग तीन करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुई यह वाटिका अब जनता के लिए समर्पित कर दी गई है, जो न केवल पर्यटन का नया केंद्र बनकर उभरी है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक अनूठी मिसाल पेश कर रही है।

    शुक्रवार शाम आयोजित समारोह में उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री  केदार कश्यप, विधायक  किरण देव के साथ जिला पंचायत अध्यक्ष वेदवती कश्यप और छत्तीसगढ़ बेवरेजेस कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष  निवास मद्दी, सीसीएफ  आलोक तिवारी, स्टायलो मंडावी, संचालक कांगेर वैली सहित अन्य प्रमुख स्थानीय जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

    लोकार्पण के पश्चात उपमुख्यमंत्री और अन्य अतिथियों ने वाटिका का अवलोकन किया। वन मंडलाधिकारी  उत्तम कुमार गुप्ता ने निरीक्षण के दौरान अतिथियों को अवगत कराया कि करीब 25 एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैले इस प्रोजेक्ट को शुरुआत में एक हेल्थ पार्क के रूप में परिकल्पित किया गया था, जिसे बाद में एक भव्य वाटिका का रूप दिया गया। उपमुख्यमंत्री ने यहाँ स्वास्थ्य के प्रति जागरूक नागरिकों के लिए बनाए गए 1700 मीटर लंबे वॉकिंग ट्रेल, योगा शेड, योगा ज़ोन और ओपन जिम जैसी आधुनिक सुविधाओं की सराहना की। उन्होंने वॉकिंग ट्रेल के बीच-बीच में बनाए गए 'गपशप ज़ोन' और पारिवारिक आयोजनों के लिए निर्मित पाँच सुंदर पगोड़ा को भी देखा, जो अब पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन चुके हैं।

    वाटिका भ्रमण के दौरान उपमुख्यमंत्री ने यहाँ की 'इको-फ्रेंडली' नीति और 'प्लास्टिक फ्री ज़ोन' के नियम को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम बताया। वाटिका के बीच में निर्मित तालाब और आइलैंड ने सभी का मन मोह लिया।

    आगंतुकों की सुविधाओं के लिए प्रवेश द्वार पर भव्य पार्किंग और प्रसाधन की व्यवस्था भी सुचारू रूप से शुरू हो गई है। वन विभाग द्वारा भविष्य में यहाँ ट्री-हाउस बनाने और एडवेंचर स्पोर्ट्स शुरू करने की योजना की जानकारी भी दी गई। उपमुख्यमंत्री  शर्मा द्वारा किए गए इस लोकार्पण के साथ ही अब 'जनजातीय गौरव वाटिका' बस्तर के पर्यटन मानचित्र पर एक प्रमुख स्थल के रूप में अंकित हो गई है।

    इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा तथा वन मंत्री  केदार कश्यप द्वारा विभिन्न स्व-सहायता समूहों और हितग्राहियों को कुल 1 करोड़ 22 लाख रुपये से अधिक की राशि के चेक वितरित किए। इस पहल के माध्यम से शासन ने वनांचल में स्वरोजगार को बढ़ावा देने और वन आश्रित परिवारों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है।

    उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने 'वृत्त स्तरीय चक्रीय निधि' के तहत महिला स्व-सहायता समूहों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए 1 करोड़ 20 लाख 13 हजार रुपये का ऋण वितरित किया। इसमें सबसे बड़ी राशि बकावण्ड के 'मां धारणी करणी स्व-सहायता समूह' को प्रदान की गई, जिन्हें काजू प्रसंस्करण और विपणन जैसे बड़े कार्यों के लिए 50 लाख रुपये का चेक सौंपा गया। इसी कड़ी में, आसना के 'गोधन स्व-सहायता समूह' को गाय पालन के लिए 34 लाख रुपये की राशि दी गई। इसके अतिरिक्त,  शर्मा ने घोटिया और भानपुरी के समूहों को इमली संग्रहण व प्रसंस्करण के लिए क्रमशः 13.13 लाख और 13 लाख रुपये तथा कोलेंग की समिति को दोना-पत्तल निर्माण हेतु 10 लाख रुपये की राशि वितरित कर स्थानीय उद्यमों को प्रोत्साहित किया।  

    कार्यक्रम के दौरान उप मुख्यमंत्री ने मानवीय संवेदनाओं का परिचय देते हुए दुख की घड़ी में पीड़ित परिवार को संबल भी प्रदान किया। उन्होंने 'राजमोहनी देवी तेंदूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा बीमा योजना' के तहत कुरंदी निवासी कमलोचन नाग को 2 लाख रुपये की बीमा राशि का चेक सौंपा। यह सहायता राशि उनकी पत्नी स्वर्गीय भारती नाग के आकस्मिक निधन के पश्चात स्वीकृत की गई थी। उप मुख्यमंत्री द्वारा किया गया यह वितरण न केवल लाभार्थियों के लिए आर्थिक मदद है, बल्कि बस्तर के सुदूर वनांचलों में रोजगार और सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक ठोस कदम भी है। इस दौरान उपस्थित महिला समूहों के सदस्यों से इमली, काजू के प्रोसेसिंग की गतिविधियों का संज्ञान लेकर बाजार की उपलब्धता एवं मार्केटिंग की व्यवस्था के संबंध चर्चा किए ।

  • रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय में “शोध शिखर 2026” का भव्य शुभारंभ

    रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय में “शोध शिखर 2026” का भव्य शुभारंभ

    भोपाल। 

    नवाचार, अनुसंधान और समाजोन्मुख विकास पर केंद्रित अंतरराष्ट्रीय संवाद

    रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, भोपाल में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन “शोध शिखर 2026” का शुभारंभ अत्यंत गरिमामय वातावरण में हुआ। यह सम्मेलन नवाचार, हरित प्रौद्योगिकी, सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) और समाजोन्मुख अनुसंधान की दिशा में वैश्विक दृष्टिकोण प्रस्तुत करने का एक महत्वपूर्ण मंच बनकर उभरा। कार्यक्रम में देश-विदेश के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों, उद्योग विशेषज्ञों और शोधार्थियों की सक्रिय भागीदारी रही।
    बतौर मुख्य अतिथि डॉ. अपर्णा एन., ग्रुप डायरेक्टर, एनआरएससी, इसरो, हैदराबाद ने रिमोट सेंसिंग की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आधुनिक शोध में भू-स्थानिक तकनीक अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। कृषि, आपदा प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और संसाधन प्रबंधन में रिमोट सेंसिंग का योगदान समाज के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रहा है। उन्होंने शोधार्थियों और पेपर प्रेजेंटर्स को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि शोध का उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जन नहीं, बल्कि समाज की समस्याओं का समाधान होना चाहिए।

    कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए  संतोष चौबे, कुलाधिपति, रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए आईसेक्ट समूह की प्रेरणादायी यात्रा का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इस संस्था की शुरुआत एक पुस्तक “कंप्यूटर एक परिचय” से हुई थी, जिसकी अब तक लगभग दो मिलियन प्रतियां प्रकाशित और वितरित हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में एक आंदोलन था। हाल ही में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर प्रकाशित पुस्तक भी तेजी से लोकप्रिय हो रही है, जो भविष्य की तकनीकी आवश्यकताओं को रेखांकित करती है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार आज जिन पहलों—डिजिटल इंडिया और स्टार्टअप इंडिया—को आगे बढ़ा रही है, उन दिशाओं में आईसेक्ट समूह लंबे समय से कार्य कर रहा है। उन्होंने विश्वविद्यालयों की भूमिका को नवाचार और सामाजिक परिवर्तन का प्रमुख माध्यम बताते हुए शोध को व्यवहारिक और समाजोपयोगी बनाने पर जोर दिया।
    कार्यक्रम में उपस्थित विशिष्ट वक्ताओं में  माइकल श्क्लोव्स्की, वेंचर फाउंडर, बेयर क्रॉप साइंस ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि वे पिछले तीन वर्षों से भारत में रह रहे हैं और यहां की संस्कृति, अनुशासन और कार्यशैली से अत्यंत प्रभावित हैं। उन्होंने कहा कि वे किसान उत्पादक संगठनों (FPO) और किसानों के बीच तकनीकी हस्तांतरण पर कार्य कर रहे हैं। उनका मानना है कि जब तक शोध और तकनीक का लाभ अंतिम व्यक्ति तक नहीं पहुंचेगा, तब तक उसका वास्तविक उद्देश्य पूरा नहीं होगा। उन्होंने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि हमें व्यवहारिक और प्रैक्टिकल सोच विकसित करनी होगी, तभी हम लोगों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन ला सकेंगे।

    डॉ. विनोद शिवरैन, सिन्जेंटा इंडिया ने कहा कि कृषि क्षेत्र में प्रौद्योगिकी का उद्देश्य किसानों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाना है। उन्होंने ‘विजन 2047’ का उल्लेख करते हुए कहा कि हमें व्यक्तिगत और सामूहिक स्तर पर नवाचारों को अपनाना होगा। केवल कृषि ही नहीं, बल्कि सभी क्षेत्रों में विश्व की चुनौतियों का समाधान खोजने की दिशा में कार्य करना होगा। विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान देना भी उतना ही आवश्यक है।

    डॉ रजत संधीर, प्रोफेसर पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़, ने अपने संबोधन में कहा कि रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय किसानों, सरकार और उद्योग के साथ मिलकर कार्य कर रहा है, जो अनुसंधान को जमीन से जोड़ने का सशक्त उदाहरण है। उन्होंने कहा कि भारत में स्टार्टअप संस्कृति तेजी से विकसित हो रही है और लाखों युवाओं ने नवाचार के माध्यम से नए आयाम स्थापित किए हैं। विचारों को वास्तविकता में बदलने की क्षमता ही आज के भारत की सबसे बड़ी ताकत है।
    कार्यक्रम के प्रारंभ में रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो रवि प्रकाश दुबे ने स्वागत वक्तव्य दिया। उन्होंने कहा कि “शोध शिखर” जैसे कार्यक्रमों से ऐसे विचार सामने आते हैं जो समाज और राष्ट्र के विकास में उपयोगी सिद्ध होते हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि यहां 10 संकायों में विविध पाठ्यक्रम संचालित हो रहे हैं तथा 18 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के माध्यम से शोध और नवाचार को निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है।
    डॉ अरुण जोशी, कुलगुरु, डॉ सी वी रामन यूनिवर्सिटी खण्डवा ने कहा कि यदि कोई अच्छा और नवाचारी शोधकर्ता बनना चाहता है, तो उसे ‘रिफ्लेक्शन’ शब्द को समझना और अपनाना होगा। जब तक आत्म-मंथन और चिंतन नहीं होगा, तब तक सच्चा शोध संभव नहीं है। उन्होंने शोध आधारित प्रशिक्षण और इनसाइटफुल एनालिसिस पर बल देते हुए कहा कि यही प्रक्रिया हमें क्रिटिकल थिंकिंग की ओर ले जाती है।

    डॉ. विजय सिंह, कुलगुरु, स्कोप ग्लोबल स्किल्स यूनिवर्सिटी ने कहा कि आज कौशल आधारित शिक्षा और शोध की संभावनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। उन्होंने बताया कि उद्योगों के साथ मिलकर विश्वविद्यालय स्किल और रिसर्च दोनों क्षेत्रों में कार्य कर रहा है। रक्षा, कृषि और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में उच्च गुणवत्ता वाले शोध पत्र प्रस्तुत होने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर विशेष कार्य हो रहा है, जो भविष्य की शिक्षा और उद्योग दोनों के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।
    कार्यक्रम की प्रस्तावना और भूमिका रखते हुए सम्मेलन की संयोजक डॉ. रचना चतुर्वेदी ने “शोध शिखर” की अवधारणा, उद्देश्य और इसकी प्रासंगिकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह मंच केवल शोध प्रस्तुत करने का अवसर नहीं है, बल्कि यह नवाचारों को समाज के वास्तविक मुद्दों से जोड़ने का प्रयास है, जिससे अकादमिक ज्ञान और सामाजिक आवश्यकताओं के बीच सेतु स्थापित किया जा सके।

    उद्घाटन समारोह के पश्चात पैनल डिस्कशन में डॉ. अपर्णा एन. ने सेटेलाइटों के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि इसरो 32 मंत्रालयों के साथ काम कर रहा है, उन्होंने आगे कहा कि एनआरएससी और आरएनटीयू विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के साथ रिमोट सेंसिंग, डाटा एनालिसिस, जियो स्पेशियल जैसे विषयों पर ट्रेनिंग दे सकता है। वहीं डॉ मनीष मोहन गोरे, सीनियर साइंटिस्ट एंड एडिटर विज्ञान प्रगति एनआईएसपीआर नई दिल्ली ने एनआईएसपीआर की यात्रा को बताते हुए कहा कि एनआईएसपीआर और आरएनटीयू साथ मिलकर विज्ञान संचार के लिए काम कर सकते हैं जिसमें संयुक्त पब्लिकेशन और भारतीय भाषाओं के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर सकते हैं। डॉ रजत संधीर, प्रोफेसर पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ ने विद्यार्थियों को माइंडसेट चेंज करने की बात कही। उन्होंने बताया कि आरएनटीयू कृषि में एआई के उपयोग पर साथ में कार्य कर सकता है। डॉ. विनोद शिवरैन, सिन्जेंटा इंडिया और  माइकल श्क्लोव्स्की, वेंचर फाउंडर, बेयर क्रॉप साइंस इन्होंने भी अपने विचार व्यक्त किये। इस सत्र में मॉडरेटर की भूमिका डॉ अदिति चतुर्वेदी वत्स ने निभाई।
     
    विज्ञान संचार के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए सी. वी. रामन विज्ञान सम्मान प्रदान

    विज्ञान संचार के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले देश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों और विज्ञान लेखकों को “सी. वी. रमन विज्ञान सम्मान” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन विशेषज्ञों को प्रदान किया गया, जिन्होंने विज्ञान को समाज तक सरल, प्रभावी और जनोन्मुखी तरीके से पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सम्मान प्राप्त करने वालों में डॉ. मनोज कुमार पटेरिया (पूर्व निदेशक, डीएसटी, नई दिल्ली), डॉ. मनीष मोहन गोरे (वरिष्ठ वैज्ञानिक, निस्पर, नई दिल्ली), डॉ. समीर गांगुली (वरिष्ठ विज्ञान लेखक, मुंबई) तथा डॉ. प्रदीप मिश्रा (वैज्ञानिक अधिकारी "एफ" राजा रमन्ना सेंटर फॉर एडवांस्ड टेक्नोलॉजी परमाणु ऊर्जा विभाग, इंदौर शामिल रहे। इन सभी ने विज्ञान संचार, वैज्ञानिक सोच के प्रसार और आमजन में विज्ञान के प्रति जागरूकता बढ़ाने में विशेष योगदान दिया है।
    विज्ञान पर्व
     

    शोध शिखर 2026 में दस विषयों पर तकनीकी सत्रों का आयोजन

    सम्मेलन के अंतर्गत आयोजित सत्रों में अभियांत्रिकी प्रौद्योगिकी एवं हरित नवाचार, समग्र स्वास्थ्य, वेलनेस एवं पर्यावरणीय कल्याण, समाज पर प्रभाव डालने वाला आधुनिक विज्ञान, सतत कृषि, खाद्य सुरक्षा एवं ग्रामीण नवाचार, मानविकी, कला एवं सतत समाज, व्यवसाय प्रबंधन एवं हरित अर्थव्यवस्था, नवाचार एवं सततता के लिए शिक्षा, सतत विकास लक्ष्यों के परिप्रेक्ष्य में विधि, सुशासन एवं पर्यावरण नीति, विनिर्माण, ऑटोमेशन एवं ऊर्जा के क्षेत्र में नवीन विकास तथा भारतीय ज्ञान प्रणाली जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल रहे।
    शोध शिखर 2026 की स्मारिका, रिसर्च इन एजीयू बुक, इलेक्ट्रॉनिकी आपके लिए: कंप्यूटर एक परिचय के नवीन अंक, उद्यमिता, पर्यावरण, और भाषाओं पर कुलाधिपति  संतोष चौबे जी की किताब और डॉ रचना चतुर्वेदी की किताब डिजिटल स्किलिंग इन लाइवलीहुड बुक का विमोचन किया गया।
     
    रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय में एमओयू साइनिंग, अकादमिक एवं अनुसंधान सहयोग को मिलेगा बढ़ावा

    रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय भोपाल ने शैक्षणिक और अनुसंधान गतिविधियों को नई दिशा देने की पहल करते हुए पीआई-RAHI: नॉर्दर्न रीजन एस एंड टी क्लस्टर, चंडीगढ़ के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, नवाचार, शोध तथा विद्यार्थियों के कौशल विकास को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से किया गया है। इस एमओयू के माध्यम से दोनों संस्थान संयुक्त रूप से शोध परियोजनाओं, अकादमिक आदान-प्रदान, कार्यशालाओं, प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा नवाचार आधारित गतिविधियों का संचालन करेंगे। साथ ही विद्यार्थियों और शोधार्थियों को नई तकनीकों, प्रयोगात्मक अनुसंधान और उद्योग-अकादमिक समन्वय से जुड़ने के बेहतर अवसर प्राप्त होंगे। इस अवसर पर देश-विदेश से आए शोधार्थियों, शिक्षकों और विशेषज्ञों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए ज्ञान, अनुभव और विचारों का आदान-प्रदान किया।
    सम्मेलन का समापन सत्र 7 फरवरी 2026 को आयोजित होगा, जिसमें प्रो. खेमसिंह डहेरिया, अध्यक्ष, मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय नियामक आयोग मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। वहीं डॉ. मृत्युंजय महापात्रा, महानिदेशक, भारत मौसम विज्ञान विभाग विशिष्ट अतिथि होंगे। समापन सत्र में सम्मेलन रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी, पुरस्कार वितरण किया जाएगा तथा उत्कृष्ट शोध कार्यों को सम्मानित किया जाएगा।

    जीवन का दर्शन समझाती विज्ञान कविताओं का कवियों ने किया पाठ

    द्वितीय सत्र विज्ञान कवि सम्मेलन का रहा। इसमें छिंदवाड़ा से शेफाली शर्मा, दिल्ली से डॉ दीवा नियाजी, डॉ मनीष मोहन गोरे, प्रदीप मिश्रा, संतोष चौबे, डॉ विशाखा राजुरकर और मोहन सगोरिया ने शिरकत करते हुए अपनी विज्ञान कविताओं को प्रस्तुत किया। इसमें शुरुआत शेफाली शर्मा ने अपनी कविता "एक मात्र" से की। इसके बाद उन्होंने कविता "आर्यभट्ट" को प्रस्तुत किया। डॉ दीवा नियाजी ने गुरूत्वाकर्षण के नियम को जीवन से जोड़कर सुंदर कविता प्रस्तुत की। इसके बाद उन्होंने एआई पर कविता "मशीन", कोरोना पर कविता " महामारी आई तो याद आया विज्ञान…" को पढ़ा। डॉ मनीष मोहन गोरे ने कविता "पौधे की व्यथा" से कविता पाठ की शुरुआत की। इसके बाद कविता "कोशिका" पेश किया। डॉ विशाखा राजुरकर ने अपनी कविता " हमारे यहां तेजी से विकास हो रहा है…" को पेश किया। अगली कविता "समानांतर ब्रह्मांड" को पेश किया। कविता पाठ को आगे बढ़ाते हुए प्रदीप मिश्र जी ने अपनी कविता "महामशीन" और "नाभिक" को पेश किया। वरिष्ठ कवि बलराम गुमास्ता द्वारा "दूर गिलहरी रुकी, आम की पतली टहनी झुकी…", " जितनी दूर देख पाती हैं आंखे…" का पाठ किया। अंत में संतोष चौबे द्वारा कविता " आईना" और "कृत्रिम बुद्धिमत्ता" का पाठ किया।

    कठपुतली और नुक्कड़ नाटक के माध्यम से विज्ञान संचार प्रस्तुत

    “शोध शिखर” में डॉ. विकास मिश्रा ने कठपुतली और नुक्कड़ नाटक के माध्यम से विज्ञान संचार प्रस्तुत किया। उन्होंने जटिल वैज्ञानिक अवधारणाओं को सरल और रोचक ढंग से समझाते हुए विद्यार्थियों व आमजन में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने पर जोर दिया। इस प्रस्तुति में राजेंद्र कुमार त्रिवेदी, इश्कियाक अली, राज कुमार बाजपेयी और पूजा विरमानी का भी सहयोग रहा।

    "पर्यावरण संकट समाधान के लिए डाटा साइंस और एआई" पर संवाद सत्र

    "पर्यावरण संकट समाधान के लिए डाटा साइंस और एआई" सत्र के प्रमुख वक्ताओं में डिपार्टमेंट ऑफ साइंस (डीएसटी) एवं टेक्नोलोजी के पूर्व डायरेक्टर डॉ मनोज पटेरिया, डीएसटी के पूर्व वैज्ञानिक डॉ बी के त्यागी, आईसीएमआर अहमदाबाद के पूर्व वैज्ञानिक डॉ केएन पांडे और दिल्ली निस्पर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ मनीष मोहन गोरे शामिल रहे। सत्र की अध्यक्षता रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति संतोष चौबे ने की। इस दौरान अपने वक्तव्य में डॉ मनोज पटेरिया ने कृषि के क्षेत्र में डाटा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज किसानों की संख्या घटती जा रही है इसलिए उनसे संबंधित डाटा महत्वपूर्ण हो गया है। ताकि सही नीतियां एवं योजनाएं बन सके। साथ ही उन्होंने अरावली पर पेड़ लगाने की पहल का जिक्र करते हुए बताया कि इस पहल ने वहां की लोकल प्रजातियों के बीजों को नया जीवन दिया और अरावली को हराभरा बनाया है। ये बातें डाटा के ऑब्जर्वेशन से समझ आई है। उन्होंने दिल्ली में सीएनजी को अपनाए जाने का उदाहरण देकर बताया कि यह अफसरों एवं नेताओं द्वारा लिया गया था , इसे लेकर साइंटिफिक कंसल्टेशन नहीं किया गया था। जबकि स्पेन में म्युनिसिपैलिटी के पास भी साइंटिफिक कंसल्टेंट होता है, इसीलिए उनकी योजनाओं का क्रियान्वयन आदर्श तरीके से होता है। अध्यक्षीय उद्बोधन में संतोष चौबे ने फ्यूचर स्टडीज या फ्यूचर टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट विभाग बनाए जाने की बात कही, जिससे देश में बेहतर तकनीक आ सके और हम बाकी विश्व से आगे चल सकें। डॉ के एन पांडे ने अपने वक्तव्य में पर्यावरण संरक्षण के लिए डाटा संग्रह की आवश्यकता पर जोर दिया। अधिक और बेहतर डेटा सही तस्वीर प्रस्तुत करता है जिससे भविष्य का सही अनुमान लगाना संभव होता है। डॉ बी के त्यागी ने अपने वक्तव्य में पर्यावरण एवं कृषि में एआई के उपयोग पर बात की। उन्होंने बताया कि वन एवं जैव विविधिता के संरक्षण में एआई वाइल्डलाइफ मॉनिटरिंग, हैबिटेट एनालिसिस, डिफोरेस्टेशन डिटेक्शन जैसे कार्यों को कर रहा है। साथ ही उन्होंने एआई रेगुलेशन और डाटा शेयरिंग फ्रेमवर्क पर कार्य किए जाने की बात कही। इससे पहले डॉ मनीष मोहन गोरे ने विज्ञान प्रसार की जरूरत पर बात की।

  • पॉवर जनरेटिंग प्रशिक्षण संस्थान में कार्मिकों के लिए हुई पर्सनल एवं प्रोफेशनल एक्सीलेंस कार्यशाला

    पॉवर जनरेटिंग प्रशिक्षण संस्थान में कार्मिकों के लिए हुई पर्सनल एवं प्रोफेशनल एक्सीलेंस कार्यशाला

    भोपाल .

    मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी (MPPGCL) द्वारा अपने अभियंताओं और कार्मिकों के लिए पर्सनल एवं प्रोफेशनल एक्सीलेंस विषय पर एक विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन नयागांव स्थित कंपनी के प्रशिक्षण संस्थान में किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य कार्मिकों की व्यवहारिक दक्षताओं, नेतृत्व क्षमता व टीमवर्क कौशल को सुदृढ़ करना था, जिससे कम्पनी कार्यक्षमता को और अधिक सशक्त बनाया जा सके। इस प्रशिक्षण कार्यशाला में कंपनी के विभिन्न विभागों से कुल 67 अभियंताओं व कार्मिकों ने सक्रिय सहभागिता की।

    करियर काउंसलर एवं कॉर्पोरेट ट्रेनर मनीषा आनंद ने कार्मिकों को विविध टीम बिल्डिंग गतिविधियों, संवादात्मक अभ्यासों व व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से व्यावहारिक एवं नेतृत्व विकास से जुड़े महत्वपूर्ण मॉडल एवं सिद्धांतों से परिचित कराया। सत्र के दौरान आत्म-विकास, प्रभावी संचार, सहयोगात्मक कार्यशैली एवं पेशेवर उत्कृष्टता जैसे विषयों पर विशेष बल दिया गया।

    मुख्य अभियंता मानव संसाधन एवं प्रशासन श्री दीपक कश्यप ने कहा कि कंपनी का दृष्टिकोण केवल तकनीकी दक्षता तक सीमित नहीं है, बल्कि कंपनी अपने मानव संसाधन को निरंतर सीखने एवं कौशल उन्नयन की दिशा में प्रेरित करती है। उन्होंने बताया कि कंपनी के कार्मिक न केवल अपने-अपने तकनीकी क्षेत्रों में दक्ष हैं, बल्कि व्यक्तिगत एवं पेशेवर विकास के पथ पर भी निरंतर अग्रसर हैं। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम कंपनी के कार्मिकों में सकारात्मक कार्य संस्कृति के निर्माण एवं नेतृत्व क्षमता के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    कंपनी के प्रबंध संचालक श्री मनजीत सिंह ने ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों की निरन्तरता पर बल देते हुए कहा कि व्यक्तिगत और व्यावसायिक विकास के लिए ऐसे कार्यक्रम आवश्यक हैं।

     

  • मनेंद्रगढ़ में प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम से मरीजों को मिल रही है बड़ी राहत

    मनेंद्रगढ़ में प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम से मरीजों को मिल रही है बड़ी राहत

    रायपुर.

    अब नहीं जाना पड़ता अन्य जिलों में, पांच हजार से अधिक मरीजों को मिला निःशुल्क उपचार का लाभ

    प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम (जीवनधारा) के अंतर्गत एमसीबी जिले में किडनी रोगियों को निःशुल्क हेमोडायलिसिस सेवा उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे अब तक पांच हजार से अधिक मरीजों को लाभ मिल चुका है। यह सुविधा विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर एवं ग्रामीण क्षेत्र के मरीजों के लिए वरदान साबित हो रही है, जिन्हें पहले उपचार के लिए अन्य जिलों अथवा राज्य के बाहर जाना पड़ता था।

    मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अविनाश खरे ने बताया कि जिले में 01 अक्टूबर 2024 से प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम प्रारंभ किया गया था, जिसका उद्घाटन प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल द्वारा किया गया था। बीते डेढ़ वर्ष में अब तक 5,210 से अधिक मरीजों का सफल डायलिसिस किया जा चुका है। इनमें नेगेटिव 3503, पॉजिटिव (सी) 1474 तथा पॉजिटिव (बी) 232 मरीज शामिल हैं। वर्तमान में मनेन्द्रगढ़ स्थित 220 बिस्तरीय जिला चिकित्सालय में यह सुविधा पूर्णतः निःशुल्क प्रदान की जा रही है। उन्होंने बताया कि डायलिसिस उन मरीजों के लिए आवश्यक होती है जिनकी किडनी की कार्यक्षमता 90 प्रतिशत से अधिक प्रभावित हो चुकी होती है। विशेष रूप से स्टेज-5 क्रोनिक किडनी रोग, अचानक किडनी फेल्योर, अनियंत्रित मधुमेह एवं उच्च रक्तचाप जैसी जटिलताओं से पीड़ित मरीजों को इस उपचार की आवश्यकता पड़ती है। 

    डायलिसिस प्रक्रिया के माध्यम से शरीर से अपशिष्ट पदार्थ एवं अतिरिक्त तरल को बाहर निकालकर मरीजों को राहत दी जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार जब किडनी शरीर की आवश्यकताओं को पूरा करने में असमर्थ हो जाए, शरीर में विषाक्त पदार्थ जमा होने लगें, अत्यधिक थकान, उल्टी, सांस लेने में तकलीफ अथवा फेफड़ों में पानी भरने जैसी स्थिति उत्पन्न हो, तब डायलिसिस आवश्यक हो जाती है। यह प्रक्रिया मरीज की स्थिति के अनुसार अस्थायी या स्थायी दोनों प्रकार की हो सकती है। जिला अस्पताल में उपलब्ध इस निःशुल्क सुविधा से मरीजों का आर्थिक बोझ कम हुआ है तथा उन्हें समय पर उपचार मिल रहा है, जिससे जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और भरोसा दोनों बढ़े हैं।

  • जिन हाथों ने कभी बंदूक थामकर हिंसा को अंजाम दिया, वही प्रशिक्षण लेकर सीख रहे हुनर

    जिन हाथों ने कभी बंदूक थामकर हिंसा को अंजाम दिया, वही प्रशिक्षण लेकर सीख रहे हुनर

    रायपुर.

    मुख्यधारा में लौटने के बाद चौगेल कैंप में दिया जा रहा विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षण

    अगर कुछ कर गुजरने का जज्बा मन में हो तो जीवन में हर काम आसान हो जाता है। इस कथन को आत्मसमर्पित माओवादियों ने चरितार्थ किया है। जिन हाथों ने कभी बंदूक थामकर हिंसा की राह अख्तियार किया था, आज उन्हीं हाथों को राज्य की नक्सल पुनर्वास नीति के तहत कुशल और दक्ष बनाने की कवायद जिला प्रशासन द्वारा की जा रही है। शासन की मंशानुसार ग्राम चौगेल (मुल्ला) कैंप में प्रशिक्षण देकर ’हिंसा से हुनर’ की ओर लौटे माओवादियों को नया जीवनदान मिल रहा है।

    आजीविका मूलक गतिविधियों का दिया जा रहा है प्रशिक्षण

    कभी माओवाद गतिविधियों में संलिप्त रहे युवक-युवतियों को अब ड्राइविंग, सिलाई, काष्ठशिल्प कला, सहायक इलेक्ट्रिशियन जैसे विभिन्न ट्रेड में सतत् प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे वे समाज की मुख्य धारा में लौटने के बाद आजीविका मूलक गतिविधियों में कुशल होकर बेहतर ढंग से सम्मान पूर्वक जीवन निर्वाह कर सके।

    चौगेल कैंप परिसर बना कौशलगढ़

    वर्षों से लाल आतंक के साए में हिंसा का दंश झेल रहा बस्तर संभाग अब विकास की ओर शनैः-शनैः आगे बढ़ रहा है और माओवाद का दायरा धीरे-धीरे सिमटता जा रहा है। छत्तीसगढ़ सहित देश को माओवाद से मुक्ति दिलाने केंद्र सरकार के संकल्प को पूरा करने प्रदेश सरकार हरसंभव प्रयास कर रही है। वहीं हथियार उठाने वालों को भविष्य गढ़ने का सुनहरा अवसर भी सरकार द्वारा दिया जा रहा है। आत्मसमर्पित/पीड़ित नक्सल पुनर्वास नीति-2025 के अंतर्गत उन्हें विभिन्न सृजनात्मक और रोजगारमूलक गतिविधियों के तहत प्रशिक्षण दिया जा रहा है। भानुप्रतापपुर विकासखंड से लगे ग्राम चौगेल (मुल्ला) का बीएसएफ कैम्प परिसर ‘कौशलगढ़’ बन गया है, जहां समाज की मुख्यधारा में लौटे 40 आत्मसमर्पित माओवादियों को अलग-अलग पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षित किया जा रहा है, साथ ही उन्हें शिक्षित भी किया जा रहा है। आवश्यकतानुसार कक्षा पहली से आठवीं तक के पाठ्यक्रमों का नियमित अध्ययन कराया जा रहा है, जिसमें रूचि लेते हुए सभी आत्मसमर्पित माओवादी अपने भविष्य को पूरी शिद्दत से गढ़ने में संलग्न हैं। 20-20 का बैच बनाकर उन्हें हुनरमंद बनाने के सतत प्रयास किए जा रहे हैं।

    ड्राइविंग सीखने का शौक अब पूरा हो रहा- मनहेर तारम

    चारपहिया वाहन चालन का प्रशिक्षण ले रहे आत्मसमर्पित माओवादी 40 वर्षीय  मनहेर तारम ने बताया कि पिछले दो सप्ताह से उन्हें ड्रायविंग की ट्रेनिंग दी जा रही है, जिसे वे पूरी रूचि के साथ सीख रहे हैं। ट्रेनर द्वारा स्टेयरिंग थामने से लेकर क्लच, ब्रेक व एक्सिलरेटर का प्रयोग करना सिखाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि ड्रायविंग सीखने की चाहत अब पूरी हो रही है। इसके अलावा सिलाई और काष्ठशिल्प का प्रशिक्षण कैम्प में दिया जा रहा है। इसी तरह  नरसिंह नेताम ने बताया कि वह भी फोरव्हीलर की ड्रायविंग में अपना हाथ आजमा रहे हैं तथा यहां आकर ऐसी गतिविधियों से जुड़ रहे हैं, जिससे आगे का जीवन बेहतर हो सके। 19 साल के सुकदू पद्दा ने बताया कि यहां पिछले तीन महीने से ट्रेनिंग ले रहे हैं और खुद को आजीविका मूलक कार्यों से जोड़ रहे हैं,  जबकि वह निरक्षर है। वहीं 19 वर्ष की कु. काजल वेड़दा ने प्रशिक्षण कार्यक्रम का अनुभव साझा करते हुए कहा कि यहां आकर अलग-अलग पाठ्यक्रमों में नियमित रूप से प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्हें बचपन से कपड़ों की सिलाई करने की इच्छा थी, यहां आकर वह भी पूरी हो रही है। वहीं शिक्षकां के द्वारा प्राथमिक शिक्षा का भी वह लाभ ले रही हैं। इसी तरह कैंप में रह रहे जगदेव कोमरा, राजू नुरूटी, बीरसिंह मण्डावी, मैनू नेगी, सनऊ गावड़े, मानकी नेताम, सामको नुरूटी, उंगी कोर्राम, रमोती कवाची, मानकेर हुपेंडी, डाली सलाम, गेंजो हुपेंडी सहित सभी आत्मसमर्पित माओवादी अपनी रूचि अनुसार ड्राईविंग, काष्ठशिल्प कला, सिलाई मशीन तथा सहायक इलेक्ट्रिशियन ट्रेड में बेहतर ढंग से प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा उनका नियमितरूप से स्वास्थ्य परीक्षण कर आवश्यकतानुसार दवाईयां दी जाती हैं। कैम्प में मनोरंजनात्मक गतिविधियां कैरम, वाद्य यंत्र, विभिन्न प्रकार के खेल भी आयोजित किया जाता है।

    पुनर्वास कैंप के नोडल अधिकारी  विनोद अहिरवार ने बताया कि कलेक्टर उत्तर बस्तर कांकेर के निर्देशानुसार आत्मसमर्पित 40 माओवादियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ते हुए विभिन्न पाठ्यक्रमों में 20-20 के बैच में चौगेल (मुल्ला) कैंप में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं और सभी को बेहतर ढंग से प्रशिक्षित किया जा रहा है। भविष्य में मशरूम उत्पादन, बागवानी सहित विभिन्न सृजनात्मक एवं स्वरोजगार मूलक पाठ्यक्रमों में जल्द ही प्रशिक्षण दिया जाएगा।

    इस तरह आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटे माओवादियों को राज्य शासन द्वारा अवसर देकर उन्हें आत्मनिर्भर तथा स्वरोजगारमूलक सकारात्मक कार्यों से जोड़ा जा रहा है, जिससे उन्हें सम्मानपूर्वक जीवन व्यतीत करने का मौका मिल सके।

  • इरान में महिलाओं को मिली बाइक चलाने की आज़ादी, नया कानून लागू

    इरान में महिलाओं को मिली बाइक चलाने की आज़ादी, नया कानून लागू

    तेहरान 

     ईरान की सरकार ने महिलाओं के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए उन्हें कानूनी रूप से मोटरसाइकिल चलाने की अनुमति दे दी है। स्थानीय मीडिया के अनुसार, ईरान के मंत्रिमंडल ने इस ऐतिहासिक प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिससे अब महिलाओं को भी दोपहिया वाहन चलाने के लिए आधिकारिक लाइसेंस जारी किए जा सकेंगे।
    दशकों पुरानी कानूनी अस्पष्टता का अंत

    ईरान में अब तक महिलाओं के मोटरसाइकिल चलाने पर कोई सीधा कानूनी प्रतिबंध नहीं था, लेकिन प्रशासन उन्हें लाइसेंस देने से इनकार कर देता था। इस अस्पष्टता के कारण महिलाएं सड़क पर वाहन नहीं चला पाती थीं। उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरिफ ने मंगलवार को यातायात संहिता (Traffic Code) को स्पष्ट करने वाले प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर इस वर्षों पुराने गतिरोध को समाप्त कर दिया है।

    घायल होने पर महिलाओं को ही माना जाता था दोषी

    लाइसेंस न होने के कारण ईरानी महिलाओं को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता था। यदि सड़क हादसे में कोई महिला घायल होती थी, तो लाइसेंस के अभाव में उसे ही जिम्मेदार मान लिया जाता था। नए कानून के लागू होने से महिलाओं को कानूनी सुरक्षा मिलेगी और दुर्घटनाओं की स्थिति में उन्हें न्याय मिल सकेगा।
    ट्रैफिक पुलिस के लिए अनिवार्य निर्देश

    ईरानी समाचार एजेंसी इलना (ILNA) के अनुसार, सरकार ने यातायात पुलिस को स्पष्ट निर्देश दिए हैं…

        महिला आवेदकों को व्यावहारिक (Practical) प्रशिक्षण देना होगा।
        पुलिस की सीधी देखरेख में ड्राइविंग परीक्षा आयोजित करनी होगी।
        योग्य महिलाओं को अनिवार्य रूप से मोटरसाइकिल चालक लाइसेंस जारी करना होगा।

     

  • राज्य स्तरीय पण्डूम 2026 की तैयारियों का उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने लिया जायजा

    राज्य स्तरीय पण्डूम 2026 की तैयारियों का उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने लिया जायजा

    रायपुर.

    उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने लिया जायजा

    संभागीय मुख्यालय जगदलपुर के लालबाग मैदान में आयोजित होने वाले संभाग स्तरीय बस्तर पण्डूम 2026 कार्यक्रम की तैयारियों का उप मुख्यमंत्री एवं जिला प्रभारी मंत्री विजय शर्मा ने आज निरीक्षण कर जायजा लिया।

    उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने कार्यक्रम स्थल का भ्रमण कर आयोजन की व्यवस्थाओं की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने विभिन्न स्टॉलों में प्रदर्शित बस्तर की पारंपरिक कला, संस्कृति एवं स्थानीय उत्पादों का अवलोकन करते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए, ताकि आयोजन भव्य, सुव्यवस्थित और जनसहभागिता से परिपूर्ण हो।

    निरीक्षण के दौरान स्कूली छात्रों द्वारा की जा रही सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुतियों का अभ्यास देखकर उप मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से आत्मीय संवाद किया और उनकी प्रतिभा की सराहना करते हुए उत्कृष्ट प्रस्तुति के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि बस्तर पण्डूम जैसे आयोजन बस्तर की लोकसंस्कृति, परंपरा और प्रतिभाओं को व्यापक पहचान दिलाने का सशक्त मंच हैं।

    इस अवसर पर कमिश्नर  डोमन सिंह, आईजी  सुंदरराज पी., कलेक्टर  आकाश छिकारा, पुलिस अधीक्षक  शलभ सिन्हा, जिला पंचायत सीईओ  प्रतीक जैन सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।