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  • नव निर्माण के नौ वर्ष: प्रदेश सरकार ने विधानसभा में प्रस्तुत किया अब तक का सबसे बड़ा बजट

    नव निर्माण के नौ वर्ष: प्रदेश सरकार ने विधानसभा में प्रस्तुत किया अब तक का सबसे बड़ा बजट

    लखनऊ
    उत्तर प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बुधवार को विधानसभा में योगी सरकार का वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट प्रस्तुत किया। "नव निर्माण के नौ वर्ष" की थीम पर प्रस्तुत बजट 2026-27 का कुल आकार 9,12,696.35 करोड़ रुपये है, जो वित्तीय वर्ष 2025-26 की तुलना में लगभग 12.9 प्रतिशत अधिक है। आकार के लिहाज से योगी सरकार ने अपने इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा बजट प्रस्तुत किया है। वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने सदन को बताया कि यह बजट राज्य की बढ़ती आर्थिक क्षमता, निवेश के अनुकूल माहौल और सुदृढ़ राजकोषीय प्रबंधन का परिणाम है। यह बजट न केवल राज्य की आर्थिक मजबूती को दर्शाता है, बल्कि दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता और सतत विकास की स्पष्ट रूपरेखा भी प्रस्तुत करता है। बजट 2026-27 सरकार की उस सोच को प्रतिबिंबित करता है, जिसमें विकास, वित्तीय अनुशासन और भविष्य की तैयारी तीनों को समान महत्व दिया गया है। इस बजट में अन्नदाता किसान, युवा, महिला, छात्र-छात्राओं समेत हर वर्ग का ध्यान रखा गया है। 

    शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि को प्राथमिकता
    वित्त मंत्री ने बताया कि बजट में 19.5 प्रतिशत पूंजीगत परिव्यय का प्रावधान किया गया है, जो आधारभूत ढांचे, औद्योगिक विकास, सड़क, ऊर्जा और शहरी-ग्रामीण अधोसंरचना को नई गति देगा। पूंजीगत निवेश से रोजगार सृजन होगा और आर्थिक गतिविधियों को मजबूती मिलेगी। योगी सरकार ने सामाजिक क्षेत्रों को बजट में प्रमुख स्थान दिया है। इसके अंतर्गत शिक्षा के लिए कुल बजट का 12.4 प्रतिशत, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा के लिए 6 प्रतिशत और कृषि एवं सम्बद्ध सेवाओं के लिए 9 प्रतिशत का आवंटन किया गया है। यह स्पष्ट संकेत है कि सरकार मानव संसाधन विकास और किसानों की आय बढ़ाने को विकास की धुरी मानकर चल रही है।

    राजकोषीय घाटा 3 प्रतिशत की सीमा में
    उन्होंने बताया कि 16वें केन्द्रीय वित्त आयोग की संस्तुतियों के अनुरूप वित्तीय वर्ष 2026-27 में राजकोषीय घाटे की सीमा 3 प्रतिशत निर्धारित की गई है, जो वर्ष 2030-31 तक लागू रहेगी। सरकार ने स्पष्ट किया कि वह राजकोषीय अनुशासन से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं करेगी। उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राजकोषीय घाटा 1,18,480.59 करोड़ रुपये अनुमानित है, जो राज्य के अनुमानित सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) का 2.98 प्रतिशत है। यह 3 प्रतिशत की निर्धारित सीमा के भीतर है और वित्तीय अनुशासन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। समग्र परिप्रेक्ष्य में, बजट 2026-27 में एक ओर जहां विकासोन्मुख नई योजनाओं का विस्तार है, वहीं दूसरी ओर राजस्व बचत और नियंत्रित राजकोषीय घाटे के माध्यम से वित्तीय स्थिरता बनाए रखने का स्पष्ट प्रयास किया गया है। 

    डीजल से सोलर की ओर बड़ा कदम
    बजट में विशेष रूप से कृषि विभाग के अंतर्गत डीजल पंप सेट को सोलर पंप में परिवर्तित करने की महत्वाकांक्षी योजना के लिए 637.84 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इससे किसानों की डीजल पर निर्भरता कम होगी, लागत घटेगी और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा। यह कदम कृषि क्षेत्र में हरित ऊर्जा संक्रमण की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    अंतर्राष्ट्रीय महिला किसान वर्ष और एफपीओ को मजबूती
    संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा वर्ष 2026 को अंतर्राष्ट्रीय महिला किसान वर्ष घोषित किए जाने के मद्देनजर सरकार ने किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के लिए रिवॉल्विंग फंड योजना के अंतर्गत 150 करोड़ रुपये का कोष नाबार्ड की सहभागी संस्था ‘नैब किसान’ के साथ मिलकर स्थापित करने का निर्णय लिया है। इसमें सरकार 75 करोड़ रुपये का अंशदान देगी। प्रत्येक पात्र एफपीओ को अधिकतम 50 लाख रुपये तक की ऋण सीमा उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अतिरिक्त, यूपी एग्रीज के अंतर्गत प्रदेश में एग्री एक्सपोर्ट हब की स्थापना के लिए 245 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देना और किसानों को वैश्विक बाजार से जोड़ना है। मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना के तहत 38 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। साथ ही प्रदेश में 2 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त खाद्यान्न भंडारण क्षमता विकसित की जाएगी, जिसके लिए 25 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। 
    इसके अलावा, बजट में स्वच्छताकर्मियों को बड़ा तोहफा देते हुए उनके अकाउंट में सीधे 16 से 20 हजार रुपये भेजने का भी प्राविधान किया गया है। इसके लिए सारी तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। जल्द ही स्कीम का फायदा स्वच्छताकर्मियों को मिलेगा।

    शिक्षकों और कर्मचारियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा
    बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों, शिक्षामित्रों, विशेष शिक्षकों, अनुदेशकों, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय के कार्मिकों तथा पीएम पोषण योजना की रसोइयों एवं उनके आश्रितों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने के लिए 357.84 करोड़ रुपये का प्रस्ताव किया गया है। माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के लिए 89.25 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। प्रदेश के विद्यालयों में अध्ययनरत छात्राओं को निशुल्क सैनेटरी नैपकिन उपलब्ध कराने के लिए 300 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे स्वास्थ्य, स्वच्छता और स्कूल उपस्थिति में सुधार की उम्मीद है। स्नातक एवं स्नातकोत्तर छात्रों के लिए एआई प्रमाणन शुल्क प्रतिपूर्ति योजना हेतु 10 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री विद्यालक्ष्मी योजना के अंतर्गत मेधावी छात्रों के शिक्षा ऋण पर अतिरिक्त ब्याज सब्सिडी के लिए 30 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गए हैं।

    एमएसएमई और रोजगार को बढ़ावा
    सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग के तहत सरदार वल्लभभाई पटेल इंप्लॉइमेंट एंड इंडस्ट्रियल जोन की स्थापना के लिए 575 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। एक जनपद एक व्यंजन (ओडीओसी) योजना के लिए 75 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है, जिससे स्थानीय खाद्य उत्पादों को पहचान और बाजार मिलेगा। इसके साथ ही, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग के अंतर्गत इंटरनेशनल फिल्म सिटी परियोजना को आगे बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिससे प्रदेश में फिल्म उद्योग और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

    यूपी एआई मिशन और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर
    आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के तहत ‘उत्तर प्रदेश एआई मिशन’ (यूपीएआई मिशन) शुरू किया जाएगा, जिसके अंतर्गत अगले तीन वर्षों में लगभग 2000 करोड़ रुपये के कार्यक्रम चरणबद्ध रूप से लागू किए जाएंगे। इसके लिए 225 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। स्टेट डाटा सेंटर 2.0 के लिए 100 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। इसके साथ नियोजन विभाग के अंतर्गत स्टेट डाटा अथॉरिटी की स्थापना हेतु 10 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिए 53 विभागों में ‘जन विश्वास सिद्धांत’ लागू किया जाएगा। इसके लिए 10 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

    श्रमजीवी महिला छात्रावास के लिए 80 करोड़ रुपये का बजट
    मुख्यमंत्री श्रमजीवी महिला छात्रावास योजना के अंतर्गत गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद और लखनऊ में निर्माण कार्य चल रहा है। अन्य जनपदों (अयोध्या, बरेली, अलीगढ़, मिर्जापुर, सहारनपुर एवं मुरादाबाद) में विस्तार के लिए 80 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित है। जनमानस के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए एसजीपीजीआई में क्वाटर्नरी हेल्थ केयर सुविधा प्रारंभ करने के लिए 359 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। 

    इसके साथ ही कैंसर मिशन के अंतर्गत हब एवं स्पोक मॉडल पर राज्य स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभागों तथा निजी क्षेत्र के समन्वय से कैंसर उपचार व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा।

    सिटी इकोनॉमिक रीजन योजना: वाराणसी रीजन चयनित
    केन्द्रीय बजट 2026-27 के अंतर्गत सिटी इकोनॉमिक रीजन योजना में 7 रीजन की पहचान की गई है, जिनमें वाराणसी रीजन भी शामिल है। नीति आयोग की जनवरी 2026 की रिपोर्ट में काशी-विन्ध्य क्षेत्र को ‘इकोनॉमिक हब’ के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव है, जिसमें 34 प्राथमिकता परियोजनाओं के माध्यम से स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल, पर्यटन, विनिर्माण, ऊर्जा और आवास क्षेत्रों में समेकित विकास किया जाएगा।

    महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण पर विशेष जोर
    यूपी बजट में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण पर विशेष जोर दिया गया है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को उद्यमी बनाने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश महिला उद्यमी क्रेडिट कार्ड योजना के तहत 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके माध्यम से महिलाओं को आसान, ब्याज-मुक्त एवं चरणबद्ध पूंजी उपलब्ध कराकर ‘लखपति दीदी’ लक्ष्य को गति दी जाएगी। वहीं महिला उद्यमियों द्वारा उत्पादित सामान की बिक्री सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री महिला उद्यमी उत्पाद विपणन योजना के अंतर्गत 100 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। इस योजना के तहत रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन, एयरपोर्ट और बड़े बाजारों में महिलाओं द्वारा संचालित शोरूम व दुकानों की व्यवस्था की जाएगी, जिनका किराया शुरुआती तीन वर्षों तक राज्य सरकार वहन करेगी।

    ऋण प्रबंधन में योगी सरकार की बड़ी उपलब्धि
    वित्त मंत्री ने बताया कि वर्ष 2016-17 में राज्य को 29.3 प्रतिशत ऋण-जीएसडीपी की अर्थव्यवस्था विरासत में मिली थी, जिसे 2019-20 तक घटाकर 27.9 प्रतिशत कर दिया गया। हालांकि कोविड-19 महामारी के कारण यह अनुपात वर्ष 2021-22 में बढ़कर 33.4 प्रतिशत हो गया था, लेकिन सुनियोजित राजकोषीय प्रबंधन के चलते वर्ष 2024-25 में इसे पुनः 27 प्रतिशत से नीचे लाया गया है। सरकार ने आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 में ऋण-जीएसडीपी अनुपात को 23.1 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य तय किया है। इतना ही नहीं, बजट के साथ प्रस्तुत मध्यकालीन राजकोषीय नीति में इसे चरणबद्ध रूप से 20 प्रतिशत से नीचे लाने का संकल्प भी दोहराया गया है। इसका उद्देश्य राज्य की दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता और सतत विकास सुनिश्चित करना है।

    नई योजनाओं और सुदृढ़ वित्तीय संरचना की दिशा में बड़ा कदम
    प्रदेश सरकार ने अपने बजट में 43,565.33 करोड़ रुपये की नई योजनाओं को शामिल किया है, जिनका उद्देश्य अधोसंरचना विकास, सामाजिक क्षेत्र के सुदृढ़ीकरण और उत्पादक निवेश को गति देना है। यह प्रावधान राज्य की दीर्घकालिक आर्थिक वृद्धि और समावेशी विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। राज्य की कुल प्राप्तियां 8,48,233.18 करोड़ रुपये अनुमानित की गई हैं। इसमें से राजस्व प्राप्तियां 7,28,928.12 करोड़ रुपये तथा पूंजीगत प्राप्तियां 1,19,305.06 करोड़ रुपये निर्धारित हैं। राजस्व प्राप्तियों में कर राजस्व का बड़ा हिस्सा 6,03,401.76 करोड़ रुपये है। इसमें स्वयं का कर राजस्व 3,34,491 करोड़ रुपये तथा केन्द्रीय करों में राज्य का अंश 2,68,910.76 करोड़ रुपये शामिल है। यह वित्तीय संरचना स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि राज्य की आय में स्वयं के संसाधनों की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है, जिससे राज्य आर्थिक रूप से अधिक आत्मनिर्भर और सशक्त बनता जा रहा है।

    पूंजीगत निवेश पर स्पष्ट बल
    राज्य सरकार ने कुल 9,12,696.35 करोड़ रुपये के व्यय का प्रस्ताव रखा है, जिसमें पूंजीगत निवेश को विशेष प्राथमिकता दी गई है। इसमें से 6,64,470.55 करोड़ रुपये राजस्व लेखा व्यय तथा 2,48,225.81 करोड़ रुपये पूंजी लेखा व्यय के रूप में निर्धारित किए गए हैं। पूंजीगत व्यय का यह उच्च स्तर राज्य में दीर्घकालिक परिसंपत्तियों के निर्माण, आधारभूत संरचना के विस्तार और आर्थिक गतिविधियों को गति देने की स्पष्ट प्रतिबद्धता को दर्शाता है। वित्त मंत्री ने बताया कि समेकित निधि की प्राप्तियों में से कुल व्यय घटाने पर 64,463.17 करोड़ रुपये का घाटा अनुमानित है। वहीं लोक लेखे से 9,500 करोड़ रुपये की शुद्ध प्राप्तियां अनुमानित की गई हैं। इन दोनों को समायोजित करने पर समस्त लेन-देन का शुद्ध परिणाम 54,963.17 करोड़ रुपये ऋणात्मक आंका गया है, जो वित्तीय प्रबंधन के संतुलन की आवश्यकता को इंगित करता है। वित्त मंत्री ने बताया कि प्रारंभिक शेष 96.41 करोड़ रुपये ऋणात्मक को जोड़ने पर अंतिम शेष 55,059.58 करोड़ रुपये ऋणात्मक अनुमानित है। एक सकारात्मक संकेत यह भी है कि राजस्व बचत 64,457.57 करोड़ रुपये अनुमानित की गई है, जो दर्शाता है कि राज्य की नियमित आय उसके नियमित व्यय से अधिक है और राजकोषीय संतुलन को बनाए रखने में सहायता कर रही है।

  • राजपाल यादव की गुरुवार को रिहाई तय? सलमान खान और अजय देवगन बने मददगार, मैनेजर ने दी पुष्टि

    राजपाल यादव की गुरुवार को रिहाई तय? सलमान खान और अजय देवगन बने मददगार, मैनेजर ने दी पुष्टि

    मुंबई

    राजपाल याद इस वक्त 5 करोड़ रुपये को लेकर चेक बाउंस केस में तिहाड़ जेल की सलाखों के पीछे हैं। साल 2010 का ये मामला धीरे-धीरे ऐसा नासूर बना कि अब उन्होंने घुटने टेक दिए। तिहाड़ जेल में सरेंडर करने से पहले राजपाल यादव ने सीधे और साफ शब्दों में कहा था कि उनके पास पैसे नहीं है इसलिए कोई और उपाय नहीं है। वहीं उन्होंने ये भी कहा था कि फिल्म इंडस्ट्री में ऐसा कोई नहीं जो उनकी मदद कर सके। अब घटना ने जहां फैन्स को दुखी किया वहीं बॉलीवुड सितारे भी उनकी मदद के लिए सामने आ रहे हैं। सबसे पहले सोनू सूद ने उनकी मदद के लिए आवाज उठाई और अब सलमान खान से लेकर अजय देवगन तक जैसे एक्टर्स ने उनकी मदद के लिए हाथ बढ़ा दिया है।

    राजपाल यादव के मैनेजर ने बताया 9 करोड़ रुपये कर्ज और उसके निपटारे और जमानत पर बातें कीं। राजपाल यादव अपनी कुछ गलतियों की वजह से पर्सनल और प्रफेशनल लाइफ में जिस बुरे दौर से गुजर रहे हैं, अब उनकी मदद के लिए इंडस्ट्री ने हाथ बढ़ा दिया है। एक्टर के मैनेजर गोल्डी ने इस खास बातचीत में बताया कि उन्हें मदद करने वालों में अजय देवगन, सलमान खान, वरुण धवन और कई अन्य सितारे शामिल हैं।

    गोल्डी बोले- बहुत से लोगों ने राजपाल यादव की मदद के लिए हाथ बढ़ाया
    गोल्डी ने सलमान और अजय देनगन से मिले सपोर्ट पर बातें करते हुए कहा, 'बहुत से लोगों ने राजपाल यादव की मदद के लिए हाथ बढ़ाया है। सोनू सूद, सलमान खान और अजय देवगन जैसे एक्टर्स ने उन्हें सपोर्ट दिया है। मेरी अभी डेविड धवन से बात हुई थी, उन्होंने भी सम्पर्क किया है। रतन नैन, वरुण धवन… इस बार कई लोग उनकी मदद के लिए आगे आ रहे हैं, जिसकी राजपाल ने दिल से सराहना की है।'

    राजपाल यादव के मैनेजर बोले- कल तक हो सकते हैं रिहा
    उन्होंने कहा, 'अच्छी बात ये है कि उनकी स्थिति बिगड़ने के बाद इंडस्ट्री ने चट्टान की तरह उनका साथ दिया है और इसकी सराहना की जानी चाहिए।' उन्होंने बताया कि घर में सभी चाह रहे हैं कि राजपाल तब तक रिहा हो जाएं। उन्होंने उम्मीद जताई कि वो कल तक रिहा हो जाएंगे।

  • UP Budget 2026: प्रत्येक मण्डल में एक स्पोर्ट कॉलेज स्थापित कर बनाएंगे सेंटर आफ एक्सीलेंस

    UP Budget 2026: प्रत्येक मण्डल में एक स्पोर्ट कॉलेज स्थापित कर बनाएंगे सेंटर आफ एक्सीलेंस

    लखनऊ
    2026-27 के लिए प्रस्तुत बजट में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए तैयार करने की व्यापक रूपरेखा पेश की गई है। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि योगी सरकार ने इसके तहत प्रत्येक मंडल में एक स्पोर्ट्स कॉलेज की स्थापना कर उन्हें सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। इससे वर्ष 2032 और 2036 ओलंपिक को लक्ष्य बनाकर खिलाड़ियों को तैयार किया जा सकेगा। इसके लिए अभी 80 करोड़ रुपये का प्रावधान किया जा रहा है।

    वहीं, प्रदेश के 403 विधानसभा क्षेत्रों में 03 लाख प्रति विधानसभा तथा 80 संसदीय क्षेत्रों में 10 लाख प्रति संसदीय क्षेत्र की दर से सांसद / विधायक खेल स्पर्धा का आयोजन किया जाएगा। इसके लिए 20 करोड़ रुपए के बजट का प्रावधान किया जा रहा है।

    मेजर ध्यानचंद राज्य खेल विश्वविद्यालय, मेरठ के नवीन भवन निर्माण एवं विकास कार्य के लिए 80 करोड़ रुपये, पूंजीगत परिसंपत्तियों के सृजन के लिए 30 करोड़ रुपये तथा शैक्षणिक व खेल गतिविधियों के संचालन के लिए 60 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस प्रकार कुल 170 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान नई मांग के माध्यम से किया जा रहा है।

    कानपुर स्थित ग्रीनपार्क अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के उच्चीकरण और आधुनिकीकरण के लिए 45 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित है, जिससे स्टेडियम का पुनर्विकास कर उसे आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा।
    योगी सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश के खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मंच पर तिरंगा लहराएं और उत्तर प्रदेश खेल प्रतिभा का नया केंद्र बने।
    वर्तमान में प्रदेश में तीन स्पोर्ट्स कॉलेज हैं। गोरखपुर में वीर बहादुर सिंह स्पोर्ट्स कॉलेज, लखनऊ में गुरु गोविंद सिंह स्पोर्ट्स कॉलेज और सैफई स्पोर्ट्स कॉलेज।

  • प्रार्थना सभा में गूंजेंगी अखबार की सुर्खियां

    प्रार्थना सभा में गूंजेंगी अखबार की सुर्खियां

    शासकीय प्राथमिक शाला पीपरडांड की अभिनव पहल

    रायपुर,

     छात्रों के लिए प्रतिदिन समाचार पत्र पढ़ना एक लाभकारी आदत है। इससे उन्हें समसामयिक घटनाओं, महत्वपूर्ण मुद्दों और विविध विचारों से अवगत होने का अवसर मिलता है। यह आदत गुणवत्तापूर्ण भाषा और सुव्यवस्थित सामग्री के संपर्क में आने से उनकी पढ़ने और लिखने की क्षमताओं को बढ़ाती है। शिक्षा को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रखकर उसे जीवन से जोड़ने की दिशा में सरगुजा जिला के विकासखंड प्रेमनगर के शासकीय प्राथमिक शाला पीपरडांड में एक सराहनीय एवं अभिनव पहल की गई है। विद्यालय में विद्यार्थियों की दैनिक दिनचर्या में अखबार वाचन को शामिल किया गया है। इस प्रयास से परीक्षा-केंद्रित शिक्षा को ज्ञान-केंद्रित शिक्षा में परिवर्तित करने की दिशा में सार्थक कदम उठाया गया है।

    इस पहल का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में पढ़ने की आदत विकसित करना ही नहीं, बल्कि उन्हें सोचने, समझने, तर्क करने और प्रश्न पूछने के लिए प्रेरित करना है। सहायक शिक्षक श्री राजेन्द्र जायसवाल ने बताया कि वर्तमान समय में बढ़ते मोबाइल स्क्रीन टाइम के कारण बच्चों में पठन संस्कृति कमजोर होती जा रही है। ऐसे में समाचार पत्र वाचन शिक्षा सुधार का एक प्रभावी माध्यम बनकर सामने आया है। नई व्यवस्था के तहत विद्यालय की प्रार्थना सभा अब केवल अनुशासनात्मक गतिविधि तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जागरूकता की पाठशाला के रूप में विकसित होगी। छात्र-छात्राएं प्रतिदिन अखबार की प्रमुख सुर्खियां पढ़ेंगे और देश-दुनिया की समसामयिक घटनाओं से अवगत होंगे।

    इसके अलावा सप्ताह में एक दिन विद्यार्थियों को किसी संपादकीय विषय पर मौलिक लेखन एवं समूह चर्चा के लिए प्रेरित किया जाएगा। इससे बच्चों में विचार-विमर्श, संवाद कौशल, अभिव्यक्ति क्षमता तथा नैतिक मूल्यों का विकास होगा। विद्यालय की इस नवाचारपूर्ण पहल की क्षेत्र में व्यापक सराहना की जा रही है। यह प्रयास निश्चित रूप से विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

  • हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, 66 उप अभियंताओं को मिली बड़ी राहत

    हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, 66 उप अभियंताओं को मिली बड़ी राहत

    रायपुर

    ग्रामीण अभियांत्रिक सेवा की वर्ष 2011 की भर्ती प्रक्रिया को लेकर छत्तीसगढ़ में बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। हाईकोर्ट द्वारा 66 उप अभियंताओं (सिविल) की नियुक्तियां नियमों के विरुद्ध बताते हुए रद्द किए जाने के बाद अब सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगा दी है।

    दरअसल, इस भर्ती प्रक्रिया को लेकर याचिकाकर्ता रवि तिवारी ने अधिवक्ता शाल्विक तिवारी के माध्यम से छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। 3 फरवरी 2026 को मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने भर्ती को अवैध करार देते हुए 66 उप अभियंताओं की नियुक्तियां निरस्त कर दी थीं।

    हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा था कि भर्ती विज्ञापन के अनुसार अभ्यर्थियों के पास कट-ऑफ तिथि तक निर्धारित शैक्षणिक योग्यता होना अनिवार्य था, जबकि कई चयनित अभ्यर्थियों ने आवश्यक डिग्री या डिप्लोमा बाद में प्राप्त किया। ऐसे में उनकी नियुक्तियां प्रारंभ से ही अवैध मानी गईं। कोर्ट ने यह भी पाया कि 275 पदों के लिए जारी विज्ञापन के बावजूद उससे अधिक पदों पर नियुक्तियां की गईं, जो सेवा कानून के सिद्धांतों के विपरीत है।

    सुनवाई के दौरान नियुक्त उप अभियंताओं की ओर से यह तर्क दिया गया कि वे करीब 14 वर्षों से सेवा दे रहे हैं, इसलिए उनके मामलों में सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण अपनाया जाए। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा था कि लंबी सेवा अवधि किसी अवैध नियुक्ति को वैध नहीं बना सकती। इसके बाद कोर्ट ने क्वो वारंटो का रिट जारी करते हुए नियुक्तियां रद्द कर दी थीं।

    हाईकोर्ट के फैसले को दी गई चुनौती, सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

    वहीं हाईकोर्ट के इस फैसले को चुनौती देते हुए प्रभावित कर्मचारियों ने सुप्रीम कोर्ट, नई दिल्ली का रुख किया। इस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार, 11 फरवरी 2026 को छत्तीसगढ़ राज्य को नोटिस जारी किया और हाईकोर्ट के आदेश के प्रभाव एवं क्रियान्वयन पर स्थगन आदेश पारित किया है।

    यह प्रकरण लगभग 60 शासकीय कर्मचारियों की सामूहिक सेवा-समाप्ति से संबंधित है, जिन्हें प्रारंभिक रूप से पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, छत्तीसगढ़ शासन में उप अभियंता (सिविल) के पद पर नियुक्त किया गया था। उच्च न्यायालय ने अपने निर्णय में यह कहते हुए उनकी सेवाएं समाप्त करने का निर्देश दिया था कि संबंधित अभ्यर्थियों के पास भर्ती विज्ञापन के अनुसार आवेदन की अंतिम तिथि तक निर्धारित शैक्षणिक अर्हता उपलब्ध नहीं थी।

    हालांकि, सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित अंतरिम आदेश के अनुसार, संबंधित कर्मचारियों की सेवा की निरंतरता अब सर्वोच्च न्यायालय में लंबित विशेष अनुमति याचिका (SLP) के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगी।

    मामले में याचिकाकर्ताओं एवं निजी प्रत्यर्थियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी, परमेश्वर के. तथा गौरव अग्रवाल ने पक्ष रखा। उनके साथ अधिवक्ता हर्षवर्धन परगनिहा, चंद्रशेखर ए. चकलाब्बी (AOR) और सुधांशु प्रकाश (AOR) भी उपस्थित रहे।

  • हरित ऊर्जा को नई उड़ान: बजट 2026-27 में 2,104 करोड़ का प्रावधान

    हरित ऊर्जा को नई उड़ान: बजट 2026-27 में 2,104 करोड़ का प्रावधान

    लखनऊ
    वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट भाषण में स्पष्ट किया कि योगी सरकार उत्तर प्रदेश को हरित और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। अतिरिक्त ऊर्जा स्रोतों के विकास के लिए लगभग 2,104 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है, जो पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 की तुलना में दो गुने से अधिक है। यह प्रावधान राज्य की ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।

    22,000 मेगावॉट का महत्वाकांक्षी लक्ष्य
    राज्य सरकार द्वारा लागू उत्तर प्रदेश सौर ऊर्जा नीति-2022, उत्तर प्रदेश राज्य जैव ऊर्जा नीति-2022 और उत्तर प्रदेश ग्रीन हाइड्रोजन नीति-2024 के तहत आगामी पांच वर्षों में 22,000 मेगावॉट विद्युत उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह लक्ष्य प्रदेश को पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम कर आत्मनिर्भर ऊर्जा राज्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    2,815 मेगावॉट सौर क्षमता स्थापित
    प्रदेश में अब तक 2,815 मेगावॉट की सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित की जा चुकी हैं। यह उपलब्धि दर्शाती है कि नीति निर्माण के साथ-साथ क्रियान्वयन स्तर पर भी सरकार सक्रिय है।

    पीएम कुसुम और सूर्यघर योजना को 1,500 करोड़
    पीएम कुसुम सूर्यघर योजना को प्रदेश में सघन रूप से लागू किया जा रहा है। बजट में इसके लिए 1,500 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है। इससे किसानों और घरेलू उपभोक्ताओं को सौर ऊर्जा के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में गति मिलेगी।

    17 नगर निगम सोलर सिटी की ओर
    अयोध्या और मथुरा सहित 17 नगर निगमों को सोलर सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है। शहरी क्षेत्रों में सौर ऊर्जा आधारित ढांचे को मजबूत करने का यह प्रयास स्वच्छ ऊर्जा की व्यापक पहुंच सुनिश्चित करेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में अब तक 5.20 लाख सोलर स्ट्रीट लाइट संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं, जिससे ऊर्जा बचत के साथ-साथ सुरक्षा और सुविधाओं में भी सुधार हुआ है।

    जैव ऊर्जा में देश में अग्रणी
    उत्तर प्रदेश राज्य जैव ऊर्जा नीति-2022 के अंतर्गत प्रदेश में 36 सीबीजी (कंप्रेस्ड बायोगैस) संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं, जो देश में सर्वाधिक हैं। इससे अपशिष्ट प्रबंधन और स्वच्छ ईंधन उत्पादन दोनों को बढ़ावा मिला है।

    ग्रीन हाइड्रोजन में नई पहल
    ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश ने अग्रणी कदम उठाया है। ग्रीन हाइड्रोजन नीति-2024 के तहत प्रदेश में दो सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना को स्वीकृति प्रदान की गई है। यह पहल भविष्य की स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों के अनुसंधान और औद्योगिक उपयोग को बढ़ावा देगी।

  • एसटीईएम और कौशल विकास को एआई मिशन से मिलेगी मजबूती: मुख्यमंत्री

    एसटीईएम और कौशल विकास को एआई मिशन से मिलेगी मजबूती: मुख्यमंत्री

    • डिजिटल लेनदेन की सुरक्षा और साइबर अपराध रोकने के लिए होगी साइबर सिक्योरिटी ऑपरेशन सेंटर की स्थापना
    • बालिकाओं के स्वास्थ्य और स्वच्छता को ध्यान में रखते हुए नि:शुल्क सेनेटरी नैपकिन की व्यवस्था के लिए भी बजट में प्रावधान

    लखनऊ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को विधानसभा के सभागार में पत्रकारों को संबोधित करते हुए वर्ष 2026-27 के बजट की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने युवाओं को डिजिटल रूप से सक्षम बनाने, शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने और उभरते तकनीकी क्षेत्रों में प्रदेश को अग्रणी बनाने की दिशा में बजट में कई अहम घोषणाएं की गई हैं। बजट में स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तिकरण योजना के तहत युवाओं को टैबलेट और स्मार्टफोन उपलब्ध कराने के लिए पर्याप्त धनराशि की व्यवस्था की गई है। इसका उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को डिजिटल रूप से सशक्त बनाना है, ताकि वे ऑनलाइन शिक्षा, स्किल डेवलपमेंट और रोजगार के आधुनिक अवसरों से जुड़ सकें। 

    साइबर सिक्योरिटी ऑपरेशन सेंटर से साइबर फ्राड पर लगेगी रोक
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि एमएसएमई सेक्टर को मजबूती देने के लिए विशेष पहल की गई है। खासतौर पर पुराने कंबल कारखानों के आधुनिकीकरण की दिशा में बजट में प्रस्ताव रखा गया है। हर वर्ष गरीबों को कंबल वितरण के लिए अतिरिक्त प्रावधान करने पड़ते हैं, ऐसे में कंबल उद्योग के आधुनिकीकरण से न केवल उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा। आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए भी बजट में प्रावधान किए गए हैं। इसमें उत्तर प्रदेश एआई मिशन के तहत एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और इंडियन एआई डेटा लैब्स की स्थापना, साइबर फ्रॉड को रोकने के लिए साइबर सिक्योरिटी ऑपरेशन सेंटर की स्थापना के लिए भी बजट में प्रावधान किया गया है। प्रदेश में डेटा सेंटर की मांग तेजी से बढ़ रही है और वर्तमान में कई डेटा सेंटर की स्थापना हो रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए एआई के लिए आवश्यक डेटा सेंटर क्लस्टर की स्थापना की घोषणा की गई है, जिसके लिए अलग से बजट का प्रावधान किया गया है। इस नई योजना से प्रदेश में तकनीकी निवेश को और गति मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही शिक्षा के क्षेत्र में भी सरकार ने अपने पूर्व में दिए गए सफल मॉडलों को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। ऑपरेशन कायाकल्प और निराश्रित बच्चों तथा निर्माण श्रमिकों के बच्चों के लिए शुरू किए गए अटल आवासीय विद्यालय के मॉडल को आधार बनाते हुए अब बेसिक शिक्षा परिषद में सीएम कंपोजिट विद्यालयों की स्थापना की जाएगी। बजट में सभी 75 जनपदों में प्रत्येक जनपद में दो-दो सीएम कंपोजिट विद्यालयों के लिए धनराशि का प्रावधान किया गया है।

    विकासखंडों में होगी कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की स्थापना
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश के उन विकासखंडों में जहां अब तक कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय नहीं थे या उनकी मांग लंबे समय से की जा रही थी, वहां इन विद्यालयों के विस्तार की व्यवस्था की गई है। सरकार ने परिषदीय स्कूलों, माध्यमिक स्कूलों और उच्च शिक्षण संस्थानों में कार्यरत शिक्षणेत्तर कर्मचारियों, मानदेय पर कार्यरत शिक्षकों और अन्य शिक्षकों के लिए भी बड़ी राहत की घोषणा की है। इनके लिए आयुष्मान भारत की तर्ज पर कैशलेस उपचार की सुविधा उपलब्ध कराने हेतु बजट में धनराशि का प्रावधान किया गया है, जिससे सभी प्रकार के शिक्षक इस योजना से जुड़ सकेंगे। इसके अलावा एआई का उपयोग माध्यमिक स्तर से ही प्रारंभ किया जाएगा। इसके लिए बजट में विशेष धनराशि की व्यवस्था की गई है। साथ ही बालिकाओं के स्वास्थ्य और स्वच्छता को ध्यान में रखते हुए नि:शुल्क सेनेटरी नैपकिन की व्यवस्था के लिए भी बजट में प्रावधान किया गया है। युवाओं के कौशल विकास को नई दिशा देने के लिए ड्रीम स्किल लैब क्लस्टर की स्थापना के लिए भी धनराशि का प्रावधान किया गया है। तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में प्रदेश सरकार ने शिक्षा, कौशल, तकनीक और सशक्तिकरण के समन्वय को मजबूत करने के लिए एआई, डिजिटल टेक्नोलॉजी, डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर, डाटा सेंटर और डाटा साइंस जैसे उभरते क्षेत्रों में विशेष पहल की है। इन क्षेत्रों में प्रदेश को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के उद्देश्य से तकनीकी शिक्षा की दृष्टि से नए कार्यक्रमों की शुरुआत की गई है।

    एआई मिशन के जरिये एसटीईएम को दिया जाएगा बढ़ावा
    मुख्यमंत्री ने कहा कि साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स (एसटीईएम) को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार ने एसटीईएम एआई मिशन की घोषणा की गई है। इसके तहत राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थानों और अन्य तकनीकी संस्थानों को एक बड़े कार्यक्रम के माध्यम से जोड़ा जाएगा। इसमें एआई इनेबल्ड लैब की स्थापना, स्किल डेवलपमेंट से जुड़ी गतिविधियां और एआई से संबंधित सामग्री को स्थानीय भाषा हिंदी में उपलब्ध कराने की व्यवस्था शामिल है। इसके साथ ही नॉलेज पार्टनर के रूप में डीपटेक के लिए आईआईटी कानपुर, आईआईटी बीएचयू सहित अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों को जोड़ने की भी घोषणा की गई है, जिसके लिए बजट में विशेष धनराशि का प्रावधान किया गया है।

  • रजनीकांत की फिल्म पर 12 साल बाद हाईकोर्ट की बड़ी कार्रवाई, ₹2.52 करोड़ जुर्माने की पूरी कहानी

    रजनीकांत की फिल्म पर 12 साल बाद हाईकोर्ट की बड़ी कार्रवाई, ₹2.52 करोड़ जुर्माने की पूरी कहानी

    मद्रास

    रजनीकांत और दीपिका पादुकोण की 2014 में रिलीज तमिल फिल्‍म 'कोचादाइयां' अचानक चर्चा में आ गई है। मद्रास हाई कोर्ट ने फिल्‍म के प्रोड्यूसर जे मुरली मनोहर और उनके प्रोडक्शन हाउस, मीडियावन ग्लोबल एंटरटेनमेंट लिमिटेड पर ₹2.52 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। यही नहीं, कोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा है कि मेकर्स या तो चार हफ्ते के अंदर यह जुर्माना चुकाएं या फिर छह महीने जेल की सजा भुगतने के लिए तैयार हो जाएं। यकीनन, आप भी यही सोच रहे होंगे कि आख‍िर 12 साल बाद ऐसा क्‍या हो गया, तो आइए इस पूरे मामले को तफ्तील से समझाते हैं।

    Kochadaiiyaan को रजीनकांत की बेटी सौंदर्या रजनीकांत ने डायरेक्‍ट किया है। फिल्‍म में रजनीकांत और दीपिका पादुकोण के अलावा जैकी श्रॉफ भी थे। यह फिल्‍म बॉक्‍स ऑफिस पर फ्लॉप साबित हुई थी। लेकिन रजनीकांत के कारण इसने खूब चर्चा बटोरी थी। हाई कोर्ट का यह मामला असल में एक एडवरटाइजिंग एजेंसी को मुआवजा देने और चेक बाउंस होने से जुड़ा है। आइए, पहले जानते हैं कि कोर्ट में क्‍या हुआ।

    2021 और 2023 में भी सुनाई गई थी सजा
    मद्रास हाई कोर्ट के जस्टिस सुंदर मोहन ने फिल्‍म के प्रोड्यूसर जे मुरली मनोहर और उनकी प्रोडक्शन कंपनी द्वारा दायर एक क्रिमिनल रिवीजन केस को कुछ हद तक मंजूरी दी है। यह केस 2021 में एक मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट द्वारा उन्हें दी गई सजा और 2023 में एक सिटी सिविल कोर्ट द्वारा कन्फर्म किए जाने के खिलाफ दायर किया गया था।

    करोड़ों का कर्ज, नहीं चुकाए बकाया पैसे
    हाई कोर्ट ने मनोहर को 4 हफ्ते के अंदर एडवरटाइजिंग एजेंसी, 'एडब्यूरो एडवरटाइजिंग प्राइवेट लिमिटेड' को ₹2.52 करोड़ देने या 6 महीने जेल की सजा भुगतने का निर्देश दिया है। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने और गड़बड़ियों पर सवाल उठाने के बाद, फैसला सुनाया कि ऐड एजेंसी ने सिर्फ ₹10 करोड़ उधार दिए थे और उसे ₹8.74 करोड़ चुका दिए गए थे, जिससे ₹1.26 करोड़ का बैलेंस रह गया। इसलिए सजा को बदलकर ₹2.52 करोड़ का जुर्माना कर दिया गया, जो उस पर बकाया रकम से दोगुना था।

    2014 में प्रोडक्‍शन हाउस ने लिया था 20 करोड़ रुपये का कर्ज
    'द हिंदू' ने इससे पहले एक रिपोर्ट में बताया कि एडब्यूरो एडवरटाइजिंग प्राइवेट लिमिटेड के अबीरचंद नाहर ने प्रोड्यूसर मोहन के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें कहा गया कि उनकी फर्म ने 25 अप्रैल, 2014 को मीडियावन ग्लोबल एंटरटेनमेंट के साथ एक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) किया था। उन्होंने फोटोरियलिस्टिक मोशन-कैप्चर मूवी के पोस्ट-प्रोडक्शन के लिए प्रोडक्शन हाउस को ₹20 करोड़ का कर्ज दिया था। प्रोडक्शन हाउस ने फाइनेंसर को बताया था कि 'कोचादाइयां' के लीज राइट्स की बिक्री से कम से कम ₹20 करोड़ मिलेंगे।

    ऐड एजेंसी ने किया था गारंटी मुनाफा का वादा, चेक हुआ बाउंस
    ऐड एजेंसी ने अपनी शिकायत में कहा कि किसी तीसरे पक्ष को राइट्स बेचने से पहले उसे बिक्री से होने वाली कमाई का 20% या कम से कम ₹2.40 करोड़ के गारंटी मुनाफे का वादा किया गया था। ऐड एजेंसी ने 28 अप्रैल, 2014 को प्रोडक्शन हाउस के बैंक अकाउंट में ₹10 करोड़ ट्रांसफर कर दिए। लेकिन दिसंबर 2014 में, प्रोडक्शन हाउस की तरफ से एजेंसी को जारी किया गया चेक बाउंस हो गया।

    2021 में कोर्ट ने प्रोड्यूसर मोहन को माना दोषी
    दिसंबर 2021 में एक मजिस्ट्रेट कोर्ट ने मोहन को दोषी ठहराया और उन्‍हें छह महीने जेल की सजा सुनाई। उन्‍हें तब ₹7.70 करोड़ देने या छह महीने की और जेल की सजा भुगतने का भी आदेश दिया गया। फिर अगस्त 2023 में, एक सिविल कोर्ट ने सजा को जारी रखा। लेकिन प्रोड्यूसर ने ₹12.75 करोड़ चुकाने का दावा किया। उसने ऐड एजेंसी पर बाद में दिए गए चेक को गारंटी के तौर पर इस्तेमाल करने का भी आरोप लगाया।

    रजनीकांत की पत्‍नी लता का भी धोखाधड़ी केस में आया नाम
    मामले में एक और ट्व‍िस्‍ट तब आया, जब ऐड एजेंसी ने 2016 में रजनीकांत की पत्नी लता के खिलाफ भी धोखाधड़ी का केस किया था। सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म के राइट्स बेचने के बारे में तब उन्हें नोटिस जारी किया था। साल 2018 में, सर्वोच्‍च न्‍यायालय ने उन्हें ₹6.20 करोड़ देने का आदेश दिया था।

  • महिला उद्यमी क्रेडिट कार्ड और उत्पाद विपणन योजना से आधी आबादी होगी और सशक्त: मुख्यमंत्री योगी आदित्याथ

    महिला उद्यमी क्रेडिट कार्ड और उत्पाद विपणन योजना से आधी आबादी होगी और सशक्त: मुख्यमंत्री योगी आदित्याथ

    लखनऊ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को विधानसभा के सभागार में पत्रकारों को संबोधित करते हुए वर्ष 2026-27 के बजट की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बजट में महिलाओं, युवाओं, स्वास्थ्य, शिक्षा, खेल, पर्यटन और दिव्यांगजन कल्याण को केंद्र में रखते हुए प्रदेश को विकास की नई ऊंचाइयों तक ले जाने का रोडमैप पेश किया है। यह बजट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक मजबूत कदम है।

    युवाओं के लिए वन डिस्ट्रिक्ट, वन कमिश्नरी, वन डिविजनल हेड क्वार्टर, वन स्पोटर्स कॉलेज की परिकल्पना
    मुख्यमंत्री योगी आदित्याथ ने कहा कि प्रदेश ने महिलाओं की सुरक्षा, स्वावलंबन और सम्मान को प्राथमिकता देते हुए ई क्यूब के रूप में एंप्लाइमेंट, इंटरप्राइसेस और एक्सीलेंस के तहत उल्लेखनीय प्रगति की है। बीते नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश में महिला श्रम बल भागीदारी 13 प्रतिशत से बढ़कर 36 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इसे आगे बढ़ाने के लिए महिला उद्यमी उत्पाद विपणन योजना की बजट में घोषणा की गई है, जो केंद्रीय बजट में प्रस्तावित सी-मार्ट की तर्ज पर कार्य करेगी। इसके साथ ही बजट में महिला उद्यमी क्रेडिट कार्ड योजना के माध्यम से महिलाओं को ब्याज मुक्त पूंजी उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है, ताकि वे छोटे-छोटे उद्यमों के लिए महंगे कर्ज के बोझ से मुक्त रह सकें और लखपति दीदी लक्ष्य को साकार किया जा सके। इसके अलावा कामकाजी महिलाओं के लिए प्रत्येक जनपद स्तर पर श्रमजीवी महिला छात्रावास के निर्माण के लिए भी बजट में धनराशि सुनिश्चित की गई है। बजट में युवाओं के लिए एक ऐतिहासिक घोषणा करते हुए वन डिस्ट्रिक्ट, वन कमिश्नरी, वन डिविजनल हेड क्वार्टर, वन स्पोटर्स कॉलेज की परिकल्पना रखी गई है। प्रदेश के 18 कमिश्नरी मुख्यालयों पर एक-एक स्पोर्ट्स कॉलेज की स्थापना की जाएगी।मेरठ में मेजर ध्यानचंद के नाम पर बन रही स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी अप्रैल-मई तक पूरी हो जाएगी, जहां शैक्षणिक सत्र पहले से प्रारंभ हो चुके हैं। वर्ष 2030 अहमदाबाद कॉमनवेल्थ गेम्स और 2036 ओलंपिक में भारत की प्रस्तावित दावेदारी को ध्यान में रखते हुए इन स्पोर्ट्स कॉलेजों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके अलावा ग्राम पंचायत स्तर पर ओपन जिम, खेल मैदान, मिनी स्टेडियम और स्टेडियम निर्माण को प्राथमिकता दी गई है, जिसे खेलो इंडिया कार्यक्रम के तहत  केंद्र सरकार के सहयोग से आगे बढ़ाया जाएगा।

    एसजीपीजीआई में देश का पहला क्वाटर्नरी हेल्थ केयर सेंटर होगा स्थापित
    मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने पर्यटन क्षेत्र में भी लंबी छलांग लगाई है। वर्ष 2017 से पहले खराब सुरक्षा व्यवस्था और कमजोर इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण प्रदेश की छवि प्रभावित थी, लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। वर्ष 2024-25 में प्रदेश के धार्मिक, हेरिटेज, इको और एडवेंचर टूरिज्म स्थलों पर 122 करोड़ पर्यटकों ने यात्रा की। बजट में पीपीपी मोड पर 1 लाख अतिरिक्त होटल रूम जोड़ने और 50,000 नए होम-स्टे विकसित करने का प्रावधान किया गया है। साथ ही महिला गाइडों के लिए 10,000 रुपये का लाइसेंस शुल्क माफ कर उन्हें रोजगार से जोड़ने का निर्णय लिया गया है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में बीते नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने अभूतपूर्व प्रगति की है। पहले जहां कुल 36 मेडिकल कॉलेज थे। आज प्रदेश में 81 मेडिकल कॉलेज, 2 एम्स और कई सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल कार्यरत हैं। प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत 5 करोड़ 46 लाख से अधिक आयुष्मान गोल्डन कार्ड जारी कर यूपी देश में अग्रणी राज्य बन चुका है। हर जिले में निःशुल्क डायलिसिस, रेडियोलॉजी सेवाएं (एमआरआई, सीटी, कलर डॉप्लर, डिजिटल एक्स-रे) उपलब्ध कराने की तैयारी है। इसके साथ ही एसजीपीजीआई लखनऊ में देश का पहला क्वाटर्नरी हेल्थ केयर सेंटर स्थापित किया जाएगा, जिसके लिए प्रथम चरण में 250 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह सेंटर विशेष रूप से ऑर्गन ट्रांसप्लांट के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा।

    मेडिकल और हेल्थ सेक्टर को आधुनिक तकनीक से जोड़ने पर विशेष फोकस
    सीएम ने बताया कि बजट में प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों के बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। सरकार ने मेडिकल कॉलेजों में अध्ययनरत छात्रों के लिए छात्रावास निर्माण के लिए अतिरिक्त धनराशि का प्रावधान किया है, जिससे छात्रों को बेहतर आवासीय सुविधाएं मिल सकें और चिकित्सा शिक्षा के वातावरण को और अधिक अनुकूल बनाया जा सके। वहीं सड़क सुरक्षा और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त करने की दिशा में भी बजट में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। सरकार का लक्ष्य है कि गंभीर रूप से घायल मरीजों को समय पर बेहतर इलाज मिल सके और जान-माल की क्षति को न्यूनतम किया जा सके। इसके साथ ही प्रदेश के मेडिकल और हेल्थ सेक्टर को आधुनिक तकनीक से जोड़ने पर भी विशेष फोकस किया गया है। बजट में मिडटेक (मेडिकल टेक्नोलॉजी) की स्थापना का प्रावधान किया गया है, जिसके तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), रोबोटिक तकनीक और अन्य आधुनिक सहायता प्रणालियों का उपयोग कर स्वास्थ्य सेवाओं को और प्रभावी बनाया जाएगा। इसका उद्देश्य प्रदेश के दूर-दराज और पिछड़े क्षेत्रों तक भी उन्नत चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाना है, ताकि बड़े शहरों तक सीमित आधुनिक इलाज का लाभ अन्य जनपदों के लोगों को भी मिल सके। वर्तमान में राज्य में दो सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए गए हैं। इनमें से एक सेंटर लखनऊ स्थित संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) में कार्यरत है, जबकि दूसरा सेंटर आईआईटी कानपुर के सहयोग से संचालित किया जा रहा है। राज्य सरकार ने इन दोनों सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के लिए भी बजट में धनराशि की व्यवस्था की है और इन पर कार्य प्रगति पर है। इन केंद्रों के माध्यम से आधुनिक मेडिकल टेक्नोलॉजी, रिसर्च और नवाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है। रोड सेफ्टी की दृष्टि से आवश्यक प्रावधान किए गए हैं, ताकि सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के साथ-साथ दुर्घटना की स्थिति में त्वरित और प्रभावी उपचार सुनिश्चित किया जा सके। सड़क हादसों, अन्य दुर्घटनाओं या किसी भी प्रकार की आपदा के समय ट्रॉमा सेवाएं मजबूत रहें, इसके लिए प्रदेश में नए ट्रॉमा सेंटर विकसित करने के लिए भी बजट में धनराशि की व्यवस्था की गई है। 

    हेल्थ सेक्टर में मिडटेक की स्थापना के साथ एआई, रोबोटिक पर जोर
    राष्ट्रीय वन हेल्थ मिशन के अंतर्गत राज्य वन हेल्थ मिशन के लिए भी धनराशि की व्यवस्था इसमें की है और जो हमारे मेडिकल कॉलेजेस हैं, उन मेडिकल कॉलेजेस में छात्रावास का निर्माण हो सके, इसके लिए भी हम लोगों ने अतिरिक्त धनराशि की व्यवस्था की है। इसके अलावा प्रदेश के अंदर रोड सेफ्टी की दृष्टि से रोड सेफ्टी के लिए आवश्यक प्रावधान करने के साथ-साथ अगर कोई घटना दुर्घटना होती है, रोड एक्सीडेंट होता है या कोई आपदा आती है, उन स्थितियों में ट्रॉमा हमारा उतना ही सशक्त हो, इसके लिए ट्रॉमा के लिए भी नए ट्रॉमा सेंटर विकसित करने के लिए भी धनराशि की व्यवस्था सरकार ने इस बजट में इसके लिए की है और प्रदेश के अंदर मेडिकल के सेक्टर में भी, हेल्थ सेक्टर में भी मिडटेक की स्थापना हो, इसमें एआई, रोबोटिक आदि की हम सहायता के माध्यम से प्रदेश के दूर-दराज के क्षेत्रों में भी सुविधा उपलब्ध करवा सकें, अन्य जनपदों में उपलब्ध करवा सकें, इसके लिए वर्तमान में हमारे दो सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, एक एसजीपीजीआई लखनऊ में और दूसरा आईआईटी कानपुर के साथ मिलकर के राज्य सरकार इसके लिए धनराशि की व्यवस्था की है और इसमें कार्य हमारा चल रहा है और हमने इसमें धनराशि की व्यवस्था भी की है।

    दिव्यांग बच्चों के लिए डे केयर सेंटर की होगी स्थापना
    सीएम ने बताया कि बजट में उच्च शिक्षा में मेधावी छात्राओं को स्कूटी देने के लिए व्यवस्था की गई है। इसके अलावा बजट में स्मार्टफोन और टैबलेट जैसी सुविधाओं का विस्तार किया गया है। वहीं बजट में दिव्यांगजन कल्याण के तहत छात्राओं के लिए ई-ट्राइसाइकिल, डीडीआरसी की स्थापना, कृत्रिम अंग वितरण केंद्र तथा 3 से 7 वर्ष के दिव्यांग बच्चों के लिए डे-केयर सेंटर की व्यवस्था की गई है। वहीं दिव्यांग बच्चों के प्रशिक्षण और शिक्षा के लिए नौ जनपदों वाराणसी, अयोध्या, गोरखपुर, प्रयागराज, लखनऊ, बरेली, झांसी, मेरठ और आगरा में केंद्र की स्थापना की जाएगी। सीएम ने कहा कि आज का बजट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विकसित भारत की संकल्पनाओं को समर्पित है, जो 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में तेजी के साथ अग्रसर हो रहा है। पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश में बॉटलनेक्स और बीमारू स्टेटस को समाप्त करते हुए, भारत की इकोनॉमी के ब्रेकथ्रू के रूप में हम विकसित करने की दिशा में आगे बढ़े हैं। अब उत्तर प्रदेश बीमारू राज्य नहीं है, अब उत्तर प्रदेश भारत की इकोनॉमी का एक ग्रोथ इंजन बन करके उभरा है। आज का बजट वर्ष 2029-30 में यूपी को 1 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

  • एक सप्ताह में 83 लाख से अधिक की अवैध शराब और वाहन बरामद

    एक सप्ताह में 83 लाख से अधिक की अवैध शराब और वाहन बरामद

     नशा मुक्त समाज के निर्माण में पुलिस को मिली बड़ी सफलता

    भोपाल

     मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा राज्य में कानून व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने और नशा मुक्त समाज के निर्माण की दिशा में अवैध शराब के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है। इसी क्रम में पिछले एक सप्ताह में प्रदेश के विभिन्न जिलों में पुलिस ने अवैध शराब के विरूद्ध कार्यवाही कर 83 लाख रूपए से अधिक की अवैध शराब और वाहन जब्त किए हैं। जानकारी के अनुसार झाबुआ पुलिस ने ऑपरेशन प्रहार के तहत एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए 293 पेटी अंग्रेजी शराब से भरे ट्रक को पकड़ा, जिसकी कुल अनुमानित कीमत लगभग 55 लाख 40 हजार रुपये आंकी गई है।इसी प्रकार मुरैना जिले के बामोर पुलिस ने शराब तस्करी करते हुए 2 आरोपियों को गिरफ्तार कर 35 पेटी अवैध शराब सहित एक कार जब्त की। इस कार्यवाही में कुल 9 लाख 60 हजार रुपये की सामग्री जब्त की है।अशोकनगर पुलिस ने अवैध कच्ची शराब की फैक्ट्री पर छापा मारकर 500 लीटर शराब जब्त कर 8 लाख 75 हजार रुपये का सामग्री जब्त की है। इसके अतिरिक्त, एक अन्य कार्यवाही में 8 हजार 250 रुपये की शराब जब्त किया है। विभिन्न जिलों में अवैध शराब के खिलाफ हुई कार्रवाई इंदौर जिले के देपालपुर थाना क्षेत्र में अवैध शराब के खिलाफ कार्यवाही करते हुए 40 पेटी बीयर और एक कार जब्त कर 6 लाख 44 हजार रुपये की सामग्री जब्?त की है। ग्वालियर जिले में पुरानी छावनी पुलिस ने कार में परिवहन की जा रही 1 लाख रूपए की 19 पेटी अवैध शराब कार सहित जब्त की है। इसी प्रकार कटनी जिले की चौकी झिंझरी थाना माधवनगर पुलिस ने शराब तस्करी पर कार्रवाई करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार कर 35 हजार रुपये की शराब और इलेक्ट्रिक स्कूटी जब्त की है। दतिया जिले की कोतवाली और पंडोखर पुलिस ने अलग-अलग कार्यवाहियों में 55 हजार  रुपये और 32 हजार रुपये की अवैध शराब जब्त की है। जबलपुर पुलिस ने देशी व अंग्रेजी शराब एवं वाहन सहित  लगभग 1 लाख 2 हजार रूपए की सामग्री जब्त की है।