Author: Admin

  • AIIMS भोपाल का ‘मैजिक नाइफ’: एक ही औजार से संभव होगी डेंटल सर्जरी

    AIIMS भोपाल का ‘मैजिक नाइफ’: एक ही औजार से संभव होगी डेंटल सर्जरी

    भोपाल

    एम्स भोपाल के डॉक्टरों ने दांतों की सर्जरी में इस्तेमाल होने वाला एक मल्टीपल टूल विकसित किया है, जिसे भारत सरकार से पेटेंट मिला है. यह उपकरण डेंटल इम्प्लांट और ओरल सर्जरी को आसान और कम समय में पूरा करने में मदद करेगा. 

    दरअसल, दांतों के ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों को एक ही उपकरण से  कट लगाना, पकड़ना और इम्प्लांट करना  जैसे अलग अलग काम करने होते हैं. 

    इससे निजात पाने के लिए एम्स के डॉक्टरों ने डेंटल इम्प्लांट और माइनर ओरल सर्जरी के लिए एक मल्टीपर्पज सर्जिकल टूल बनाया है. यह एक 'स्विस नाइफ' की तरह काम करता है, जिसमें सर्जरी के तमाम स्टेपस् के लिएजरूरी  कई टूल्स एक ही डिवाइस में मिलते हैं. 

    इस 'स्विस नाइफ' की 5 बड़ी विशेषताएं

    •     ऑल-इन-वन डिज़ाइन यानी सर्जरी के दौरान अलग-अलग दर्जनों औजारों की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे प्रक्रिया आसान होगी.
    •     कम उपकरणों के उपयोग से संक्रमण का खतरा कम होगा और शल्य चिकित्सा की सटीकता बढ़ेगी.
    •     प्रक्रिया कम समय में पूरी होने से मरीजों को कम असुविधा होगी और उनकी रिकवरी तेज होगी.
    •     इसका डिजाइन काफी छोटा और हल्का है, जो इसे मोबाइल क्लीनिकों और ग्रामीण स्वास्थ्य शिविरों के लिए आदर्श बनाता है.
    •     वहीं, महंगे विदेशी उपकरणों पर निर्भरता कम होने से दंत चिकित्सा की लागत में कमी आएगी. 

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह पेटेंट न केवल एम्स भोपाल के लिए गौरव की बात है, बल्कि यह 'मेक इन इंडिया' पहल को भी मजबूती प्रदान करता है. आने वाले समय में यह उपकरण सरकारी अस्पतालों, प्राइवेट क्लीनिकों और ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवाओं में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है.

    इस स्वदेशी उपकरण के मुख्य आविष्कारक डॉ. अंशुल राय हैं. उनके साथ डॉ. बाबूलाल, डॉ. जितेंद्र कुमार, डॉ. ज़ेनिश भट्टी और डॉ. मोनिका राय ने सह-आविष्कारकों के रूप में इस पर काम किया. टीम का उद्देश्य सर्जरी के दौरान बार-बार उपकरण बदलने की जटिलता और उससे होने वाली मानवीय त्रुटियों को कम करना था. 

  • 12 फरवरी को भोपाल में भवन विकास निगम की कार्यशाला, डॉ. यादव होंगे मुख्य अतिथि

    12 फरवरी को भोपाल में भवन विकास निगम की कार्यशाला, डॉ. यादव होंगे मुख्य अतिथि

    12 फरवरी को भोपाल में भवन विकास निगम की क्षमता संवर्धन कार्यशाला

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव होंगे मुख्य अतिथि

    भोपाल 

    लोक निर्माण से लोक कल्याण के विजन को सशक्त आधार देने के उद्देश्य से लोक निर्माण विभाग, मध्यप्रदेश शासन द्वारा निरंतर क्षमता संवर्धन कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में 12 फरवरी 2026 को भोपाल स्थित रवीन्द्र भवन में मध्यप्रदेश भवन विकास निगम के तत्वावधान में एक दिवसीय क्षमता संवर्धन कार्यशाला सह प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव होंगे। इस संबंध में जानकारी देते हुए लोक निर्माण मंत्री  राकेश सिंह ने बताया कि यह कार्यशाला निर्माण क्षेत्र से जुड़े अभियंताओं एवं तकनीकी अधिकारियों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी। कार्यशाला में लोक निर्माण विभाग, परियोजना क्रियान्वयन इकाई, मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम तथा मध्यप्रदेश भवन विकास निगम के लगभग 2,000 अभियंता एवं तकनीकी अधिकारी भाग लेंगे।

    कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षण कैलेंडर एवं परियोजना प्रबंधन पुस्तिका का विमोचन किया जाएगा तथा परियोजना प्रबंधन प्रणाली–2.0 डिजिटल प्रबंधन प्रणाली का प्रदर्शन एवं औपचारिक शुभारंभ होगा। इसके साथ ही मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम एवं मध्यप्रदेश भवन विकास निगम द्वारा राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित संस्थाओं—केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान, भारतीय राजमार्ग अभियंता अकादमी, इंजीनियरिंग स्टाफ कॉलेज ऑफ इंडिया,भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मुंबई तथा स्कूल ऑफ़ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर भोपाल के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर होंगे। मंत्री  राकेश सिंह ने बताया कि कार्यशाला में राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञ क्षमता निर्माण, हरित भवन अवधारणा, आधुनिक भवन निर्माण तकनीक, गुणवत्ता नियंत्रण तथा निर्माण क्षेत्र में नवाचार जैसे विषयों पर मार्गदर्शन दिया जाएगा। साथ ही  विक्रांत सिंह तोमर द्वारा क्षमता निर्माण विषय पर विशेष व्याख्यान दिया जाएगा।

    मध्यप्रदेश भवन विकास निगम द्वारा विकसित परियोजना प्रबंधन प्रणाली पोर्टल–2.0 एक उन्नत डिजिटल प्रबंधन प्रणाली है। इससे समस्त निर्माण कार्यों का सुव्यवस्थित, पारदर्शी एवं दक्ष क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा रहा है। इस प्रणाली में प्रत्येक परियोजना के लिए उत्तरदायी–जवाबदेह–समय-सीमा प्रणाली के माध्यम से संबंधित अधिकारी, सक्षम स्वीकृतकर्ता तथा निर्धारित समय-सीमा स्पष्ट रूप से दर्ज रहती है, जिससे सतत निगरानी एवं जवाबदेही सुनिश्चित होती है। प्रक्रिया नियंत्रण द्वार प्रणाली के अंतर्गत आवश्यक कार्य, अभिलेख एवं स्वीकृतियाँ पूर्ण होने के पश्चात ही अगले चरण की अनुमति प्रदान की जाती है। मानक कार्य प्रणाली के अनुसार कार्य निष्पादन से सभी परियोजनाओं में एकरूपता एवं प्रशासनिक दक्षता सुनिश्चित होती है, वहीं स्वचालित पत्र निर्माण सुविधा से विभागीय पत्राचार त्वरित, पारदर्शी एवं कागजरहित बनता है।

    क्षमता संवर्धन कार्यशाला न केवल प्रदेश के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता एवं दक्षता को सुदृढ़ करेगी, बल्कि अभियंताओं एवं तकनीकी अधिकारियों को नवीनतम तकनीकी ज्ञान, गुणवत्ता आधारित निर्माण प्रक्रिया तथा सतत विकास के सिद्धांतों से भी अवगत कराएगी। लोक निर्माण विभाग की यह पहल “लोक निर्माण से लोक कल्याण” के संकल्प को तकनीकी सुदृढ़ता, डिजिटल नवाचार और प्रभावी प्रबंधन के माध्यम से नई दिशा प्रदान करेगी।

     

  • सरकार ने संसद में साझा की 8वें वेतन आयोग की नई जानकारी, केंद्रीय कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण अपडेट

    सरकार ने संसद में साझा की 8वें वेतन आयोग की नई जानकारी, केंद्रीय कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण अपडेट

    नई दिल्ली

    सरकार ने साफ कर दिया है कि 8वां केंद्रीय वेतन आयोग (8th Pay Commission) औपचारिक रूप से गठित किया जा चुका है और तय समय सीमा के भीतर अपनी सिफारिशें देगा। राज्यसभा में पूछे गए सवालों के लिखित जवाब में वित्त मंत्रालय ने मंगलवार बताया कि 3 नवंबर 2025 को आयोग के गठन की अधिसूचना जारी कर दी गई थी। सांसदों ने सरकार से यह जानना चाहा था कि आयोग किन-किन मुद्दों की समीक्षा करेगा और उसकी सिफारिशें लागू होने की संभावित समय-सीमा क्या होगी।

    क्या है डिटेल
    सरकार के मुताबिक, 8वां वेतन आयोग केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतनमान, भत्ते, पेंशन ढांचे और सेवा शर्तों की समीक्षा करेगा। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। यानी मौजूदा समय-सीमा को देखते हुए रिपोर्ट 2027 तक आने की संभावना है। हालांकि, सरकार ने फिलहाल यह नहीं बताया है कि सिफारिशें लागू करने का रोडमैप क्या होगा या कोई चरणबद्ध योजना तैयार की गई है या नहीं।

    सरकार के बजट पर कितना बोझ पड़ेगा
    संसद में यह सवाल भी उठा कि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने से केंद्र सरकार के बजट पर कितना बोझ पड़ेगा। इस पर सरकार ने कहा कि फिलहाल लागत का आकलन करना संभव नहीं है। आयोग की सिफारिशें आने और सरकार द्वारा उन्हें स्वीकार किए जाने के बाद ही वास्तविक वित्तीय प्रभाव का अंदाजा लगाया जा सकेगा। इसका मतलब है कि बजटीय योजना आयोग की अंतिम रिपोर्ट के बाद ही बनेगी।

    12 फरवरी 2026 को देशव्यापी हड़ताल
    इधर, कर्मचारी संगठनों ने सरकार पर दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया है। कन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लॉइज एंड वर्कर्स (CCGEW) ने 12 फरवरी 2026 को देशव्यापी एक दिन की हड़ताल का ऐलान किया है। उनकी मांगों में 20% अंतरिम राहत, 50% महंगाई भत्ते का मूल वेतन में विलय और एनपीएस खत्म कर पुरानी पेंशन योजना (OPS) लागू करना शामिल है। ऐसे में संसद के अंदर सवालों और सड़कों पर बढ़ते दबाव के बीच 8वें वेतन आयोग की कार्यवाही पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।

  • महिलाओं के लिए बड़ा तोहफा: 14 फरवरी को खाते में आएंगे 1500 रुपये, जानें अपना स्टेटस कैसे चेक करें

    महिलाओं के लिए बड़ा तोहफा: 14 फरवरी को खाते में आएंगे 1500 रुपये, जानें अपना स्टेटस कैसे चेक करें

    भोपाल 

     मध्य प्रदेश की लाडली बहना योजना की 33वीं किस्त का इंतज़ार  महिलाएं बेसब्री से कर रही हैं. स्कीम की 32वीं किस्त 16 जनवरी को जारी की गई थी. नियमों के मुताबिक हर महीने की 1 से 10 तारीख के बीच किस्तें जारी की जाती हैं, इसलिए लोग फरवरी 2026 की किस्त जारी होने का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं. जिन महिलाओं को इस बार पैसे नहीं मिलेंगे वे ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर लिस्ट में अपना नाम चेक कर सकती हैं.

    लाडली बहना योजना अपडेट

    मध्य प्रदेश सरकार की लाडली बहना योजना राज्य में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए एक अहम पहल बन गई है. इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने ₹1,500 की आर्थिक मदद सीधे उनके बैंक अकाउंट में मिलती है, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें.

    मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव 14 फरवरी को खंडवा जिले में होने वाले कार्यक्रम से 33वीं किस्त महिलाओं के खाते में ट्रांसफर करेंगे। इस बार कार्यक्रम खंडवा जिले के पंधाना में आयोजित होगा। लाडली बहना योजना के अलावा पंधाना विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्यों का उदघाटन भी मुख्यमंत्री करने वाले हैं।

    मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना की 32वीं किस्त 16 जनवरी को नर्मदापुरम से जारी की गई थी। पिछली बार पात्र महिलाओं के खाते में 1856 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए थे। इस बार महिलाओं को यही सौगात मिलने वाली है। इस बीच लाडली बहना योजना से करीब 1 लाख से ज्यादा नाम कम हो चुके हैं।
    क्यों कम हुए लाडली बहना योजना से नाम
    लाडली बहना योजना जब शुरू हुई थी, तब इसमें 1.32 करोड़ नाम जुड़े थे। लेकिन बाद में इसे 1.29 करोड़ और फिर 1.26 करोड़ कर दिया गया। पिछले महीने इस योजना से एक लाख नाम और कम हो गए। जानकारी के मुताबिक जो महिलाएं पात्रता की शर्त पूरी नहीं कर रही थीं, उनके नाम हटाए गए हैं। इसके अलावा जिनकी उम्र 60 साल हो चुकी है, उनके नाम भी योजना से हटा दिए गए हैं। गाइडलाइंस के मुताबिक इस योजना का लाभ 60 की उम्र तक ही मिल सकता है।

    कैसे चेक करें स्टेटस
    अगर आप इस बात को लेकर कन्फ्यूज हैं कि आपका नाम लिस्ट में है भी या नहीं, तो आप ऑनलाइन पोर्टल https://cmladlibahna.mp.gov.in/ पर जाकर पता कर सकते हैं। यहां आपके पास दो विकल्प होंगे। आप चाहें तो अंतिम सूची में जाकर अपना नाम चेक कर सकती हैं। या फिर 'आवेदन एवं भुगतान की स्थिति' में जाकर भी स्टेटस चेक कर सकती हैं। इस पर क्लिक करने के बाद बस आपको अपना रजिस्ट्रेशन नंबर या समग्र आईडी ही भरना है। इसके बाद मोबाइल पर आए ओटीपी से वेरिफाई करना है, आपका स्टेटस खुल जाएगा।

    कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने बताया कि, 14 फरवरी को सीएम मोहन यादव खंडवा आ रहे हैं। वे पंधाना में लाडली बहना योजना की राशि अंतरित करेंगे।  14फरवरी को मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव खंडवा जिले के पंधाना का दौरा प्रस्तावित है। यह से लाडली बहना योजना की राशि का विवरण किया जाएगा। इसके अलावा मुख्यमंत्री डॉ मोहन पंधाना विधानसभा में अभी जितने में कार्य पूरे हो चुके है उन निर्माण कार्यों का लोकार्पण भी करेंगे।

    कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने बताया कि सीएम के दौरे को लेकर विधायक की अध्यक्षता में विभागों की बैठक भी ली गई है। सारी तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। बता दें कि लाडली बहना योजना मध्य प्रदेश सरकार की बेहद महत्वपूर्ण योजना है। महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान के शासनकाल में इस योजना का शुभारंभ किया था। जिसके तहत लाभार्थी महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपए की राशि सीधे उनके बैंक अकाउंट में मिलती है। फरवरी में इस योजना की 33वीं किस्त जारी की जाएगी। 

    क्या बजट में लाडली बहना को लेकर होगा ऐलान
    लाडली बहना योजना में नए रजिस्ट्रेशन लंबे समय से शुरू नहीं हुए हैं। ऐसे में प्रदेश की महिलाएं 18 फरवरी को आने वाले बजट से उम्मीदें लगाए बैठी हैं कि मुख्यमंत्री मोहन यादव से उन्हें बड़ी सौगात मिल सकती है। इसके अलावा इस साल लाडली बहना योजना का पैसा बढ़ाने की भी बात है, उसे लेकर बजट में घोषणा हो सकती है।

     

  • एमपी के हर किसान पर ₹74,420 का कर्ज, आंध्र के किसान ₹2.45 लाख के कर्जदार

    एमपी के हर किसान पर ₹74,420 का कर्ज, आंध्र के किसान ₹2.45 लाख के कर्जदार

    भोपाल

    देश के किसानों की आर्थिक स्थिति पर संसद में पेश ताजा सरकारी आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश के हर किसान परिवार पर औसत बकाया 74,420 रुपए का कर्ज है। यह राष्ट्रीय औसत 74,121 रुपए के लगभग बराबर है। आंकड़े केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने टीएमसी सांसद कालिपद सरेन खेरवाल के प्रश्न के लिखित उत्तर में दिए। रिपोर्ट बताती है कि दक्षिण भारत के कई राज्यों में किसानों पर कर्ज का बोझ मध्य भारत की तुलना में काफी अधिक है, जबकि पूर्वोत्तर राज्यों में यह सबसे कम है। दरअसल, संसद में पेश की गई ताजा रिपोर्ट में मध्य प्रदेश के किसानों की मिली-जुली तस्वीर सामने आई है। वहीं आंकड़ों के मुताबिक, भारत में प्रति कृषक परिवार पर औसत बकाया ऋण 74,121 रुपए है। चौंकाने वाली बात यह है कि दक्षिण भारतीय राज्यों के किसान कर्ज के मामले में उत्तर भारत के मुकाबले कहीं आगे हैं।

    टीएमसी सांसद कालिपद सरेन खेरवाल के सवाल के जवाब में केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यह जानकारी दी।

    एमपी की स्थिति: राष्ट्रीय औसत के करीब, राजस्थान से बेहतर

    आंकड़ों का विश्लेषण करें तो मध्य प्रदेश में किसानों की स्थिति कर्ज के मामले में कई राज्यों से बेहतर है। जहां पड़ोसी राज्य राजस्थान में प्रति किसान परिवार कर्ज का बोझ ₹1,13,865 है, वहीं मध्य प्रदेश में यह ₹74,420 पर टिका है। हालांकि, छोटे राज्यों जैसे छत्तीसगढ़ (₹21,443) की तुलना में एमपी के किसानों पर कर्ज का दबाव अधिक है।

    दक्षिण के राज्यों के किसान सबसे ज्यादा कर्जदार

    आंकड़ों के मुताबिक, भारत में प्रति कृषक परिवार पर औसत बकाया ऋण ₹74,121 है। चौंकाने वाली बात यह है कि दक्षिण भारतीय राज्यों के किसान कर्ज के मामले में उत्तर भारत के मुकाबले कहीं आगे हैं ।

    केसीसी (KCC) का कर्ज ₹10 लाख करोड़ के पार

    कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सदन में बताया कि 30 सितंबर 2025 की स्थिति के अनुसार किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के तहत बकाया धनराशि ₹10.39 लाख करोड़ तक पहुंच गई है। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया कि 1 फरवरी 2026 तक का एकदम सटीक डेटा उपलब्ध नहीं है, क्योंकि पिछला बड़ा सर्वेक्षण (NSS 77वां दौरा) साल 2019 में ही किया गया था।

    राजस्थान कर्ज के मामले में आगे

        राजस्थान: ₹1,13,865
        मध्य प्रदेश: ₹74,420
        उत्तर प्रदेश: ₹51,107
        बिहार: ₹23,534

    इन राज्यों में बोझ कम

        नागालैंड: सिर्फ ₹1,750
        मेघालय: ₹2,237
        अरुणाचल प्रदेश: ₹3,581

    किसानों की आया बढ़ाने में जुटी राज्य सरकार

    इधर, मध्य प्रदेश की मोहन सरकार ने बढ़ती लागत और ऋण दबाव को देखते हुए वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष घोषित किया है। राज्य में जून 2026 तक शून्य प्रतिशत ब्याज पर फसल ऋण उपलब्ध रहेगा। समय पर भुगतान करने वाले किसानों को अतिरिक्त ब्याज अनुदान भी दिया जाएगा। सहकारी बैंकों के डिफॉल्टर किसानों को पुनर्वित्त के माध्यम से मुख्यधारा में लाने की योजना लागू है। साथ ही नर्मदा-क्षिप्रा सहित नदी जोड़ो परियोजनाओं से सिंचाई क्षेत्र बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।

    राष्ट्रीय औसत के करीब, राजस्थान से बेहतर

    दावा किया गया है कि मध्य प्रदेश में किसानों की स्थिति कर्ज के मामले में कई राज्यों से बेहतर है। जहां पड़ोसी राज्य राजस्थान में प्रति किसान परिवार कर्ज का बोझ 1,13,865 रुपए है। वहीं मध्य प्रदेश में यह 74,420 रुपए पर टिका है। हालांकि, छोटे राज्यों जैसे छत्तीसगढ़ (21,443) की तुलना में मध्यप्रदेश के किसानों पर कर्ज का दबाव अधिक है।

    केसीसी का कर्ज 10 लाख करोड़ के पार

    शिवराज ने सदन में बताया कि 30 सितंबर 2025 की स्थिति के अनुसार किसान क्रेडिट कार्ड के तहत बकाया धनराशि 10.39 लाख करोड़ तक पहुंच गई है। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया कि 1 फरवरी 2026 तक का एकदम सटीक डेटा उपलब्ध नहीं है, क्योंकि पिछला बड़ा सर्वेक्षण साल 2019 में ही किया गया था।

    उत्तरप्रदेश-बिहार में औसत बोझ कम

    आंध्र प्रदेश प्रति किसान परिवार औसत 2,45,554 के साथ देश में सबसे अधिक कर्जदार राज्य है। इसके बाद केरल (2,42,482), पंजाब (2,03,249), हरियाणा (1,82,922) और तेलंगाना (1,52,113) का स्थान है। इसके विपरीत नागालैंड में औसत कर्ज मात्र 1,750, मेघालय में 2,237 और अरुणाचल प्रदेश में 3,581 दर्ज किया गया। उत्तर और मध्य भारत में राजस्थान (1,13,865) के किसान अपेक्षाकृत अधिक कर्जदार पाए गए, जबकि उत्तर प्रदेश (51,107) और बिहार (23,534) में औसत बोझ कम है।

    कर्ज में टॉप-5 राज्य

    राज्य         कर्ज रुपए में

    आंध्रप्रदेश    2,45,554

    केरल          2,42,482

    पंजाब         2,03,249

    हरियाणा    1,82,922

    तेलंगाना    1,52,113

    एमपी सरकार की रणनीति: 'किसान कल्याण वर्ष' और जीरो ब्याज योजना

    बढ़ते कर्ज और खेती की लागत को देखते हुए मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने वर्ष 2026 को 'किसान कल्याण वर्ष' घोषित किया है। सरकार की ओर से किसानों को राहत देने के लिए कई बड़े कदम उठाए गए हैं।

        ब्याज मुक्त ऋण: प्रदेश में किसानों को जून 2026 तक 0% ब्याज पर फसल ऋण (Crop Loan) मिलता रहेगा। समय पर कर्ज चुकाने वाले किसानों को 4% अतिरिक्त ब्याज अनुदान भी दिया जाएगा।
        डिफॉल्टरों को राहत: सरकार ने सहकारी बैंकों के उन किसानों को फिर से मुख्यधारा में लाने की योजना बनाई है जो कर्ज के कारण डिफॉल्टर हो गए थे।
        सिंचाई विस्तार: नर्मदा-क्षिप्रा और अन्य नदी जोड़ो परियोजनाओं के जरिए प्रदेश में सिंचाई का रकबा बढ़ाने का लक्ष्य है, ताकि खेती को लाभकारी बनाया जा सके।

    एमपी में भी बढ़ रहा किसान क्रेडिट कार्ड का दायरा

    आंकड़ों के मुताबिक, किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) कर्ज का सबसे बड़ा माध्यम बनकर उभरा है। मध्य प्रदेश में भी ग्रामीण बैंकों और सहकारी समितियों के माध्यम से केसीसी का वितरण तेजी से हुआ है। सरकार का कहना है कि यह कर्ज किसानों की निवेश क्षमता बढ़ाता है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि फसलों के उचित दाम (MSP) और प्राकृतिक आपदाओं के कारण यह कर्ज किसानों के लिए बोझ बन जाता है।

     

  • ट्रेड डील में भारत को बड़ी राहत: दाल को हटाया गया प्रतिबंधित सूची से, जानें और क्या-क्या बदला

    ट्रेड डील में भारत को बड़ी राहत: दाल को हटाया गया प्रतिबंधित सूची से, जानें और क्या-क्या बदला

    नई दिल्ली

    India-US Trade Deal: भारत-अमेरिका ट्रेड डील में एक नया अपडेट हुआ है. अमेरिका ने भङारत के साथ हुई ट्रेड डील के फैक्टशीट में बड़ा बदलाव किया है. इस बदलाव से भारत को बड़ा फायदा होगा. दरअसल, वाइट हाउस ने फैक्टशीट में जो बदलाव किया है, उसके मुताबिक ट्रेड डील वाली लिस्ट से अब दाल हट गई है. पिछले हफ्ते भारत और अमेरिका ने अंतरिम व्यापार समझौते की घोषणा की थी. उस समय वाइट हाउस ने एक फैक्टशीट जारी की थी. उसमें कुछ बातें ऐसी थीं, जिनसे भारत को थोड़ी परेशानी हो सकती थी. इसे लेकर सवाल उठ रहे थे. लेकिन अब अमेरिका ने उस फैक्टशीट को अपडेट कर दिया है.

    ट्रेड डील वाली फैक्टशीट से कई चीजें हटा दी गई हैं या शब्द बदले गए हैं. इसमें सबसे अहम है दाल. जी हां, सबसे बड़ी खुशखबरी यह है कि दाल का जिक्र पूरी तरह हटा दिया गया है. पहले फैक्टशीट में साफ लिखा था कि भारत अमेरिकी दालों पर टैरिफ कम या खत्म करेगा. अब उस लिस्ट से ‘certain pulses’ शब्द निकाल दिए गए हैं. इसका मतलब साफ है कि भारत को अब अमेरिकी दालों पर टैरिफ घटाने की जरूरत नहीं है. भारतीय किसानों और दाल उत्पादकों के लिए यह बहुत अच्छी खबर है.

    पहला बड़ा बदलाव दाल

    दरअसल, बीते दिनों ही पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच फोन पर बातचीत हुई थी. इसके बाद अमेरिका और भारत के बीच ड्रेड डील पर सहमति बनी थी. इसके बाद एक फैक्टशीट जारी किया गया था. अब वाइट हाउस ने भारत के साथ हुए व्यापार समझौते का फैक्टशीट थोड़ा बदल दिया है. पहले की फैक्ट शीट में जो बातें लिखी गई थीं, अब उनमें से कुछ हिस्से हटा दिए गए हैं और कुछ शब्द भी बदल दिए गए हैं. पहला सबसे बड़ा बदलाव दाल ही है.

    दूसरा बड़ा बदलाव क्या?

    दूसरा बड़ा बदलाव है 500 अरब डॉलर खरीद का वादा. जी हां, भारत-अमेरिका ट्रेड डील के फैक्टशीट में पहले लिखा था कि भारत ‘committed’ है यानी वादा कर चुका है कि वह अमेरिका से 500 अरब डॉलर के सामान खरीदेगा. अब शब्द बदलकर ‘intend’ कर दिया गया है यानी ‘इरादा है’. मतलब कि भारत ने कोई वादा नहीं किया है, बल्कि भारत इरादा रखता है. इरादा डील के हिसाब से बदल भी सकता है, मगर वादा नहीं.

    यहां भी राहत ही राहत

    इसके अलावा खरीद की लिस्ट से ‘Agricultural products’ भी हटा दिए गए हैं. अब सिर्फ एनर्जी, आईसीटी, कोयला और दूसरे उत्पादों का जिक्र है. यानी कृषि उत्पादों को खरीदने का कोई दबाव नहीं रहा. बदले हुए वर्जन में टेक्स्ट से खेती के सामान का ज़िक्र हटा दिया गया है. अब इसमें लिखा है, ‘भारत ज़्यादा अमेरिकी प्रोडक्ट खरीदने और $500 बिलियन से ज़्यादा की US एनर्जी, इन्फॉर्मेशन और कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी, कोयला और दूसरे प्रोडक्ट खरीदने का इरादा रखता है.’

    और क्या बदलाव हुए?

    इसके अलावा, व्हाइट हाउस की अपडेटेड फैक्टशीट में भारत के अपने डिजिटल सर्विस टैक्स हटाने से जुड़ा टेक्स्ट भी हटा दिया गया है. पहले के टेक्स्ट में कहा गया था, ‘भारत अपने डिजिटल सर्विस टैक्स हटा देगा और डिजिटल ट्रेड में भेदभाव वाले या बोझिल तरीकों और दूसरी रुकावटों को दूर करने वाले मज़बूत बाइलेटरल डिजिटल ट्रेड नियमों पर बातचीत करने के लिए कमिटेड है, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसमिशन पर कस्टम ड्यूटी लगाने पर रोक लगाने वाले नियम भी शामिल हैं. इसमें अब कहा गया है, ‘भारत ने डिजिटल ट्रेड के लिए भेदभाव वाले या बोझिल तरीकों और दूसरी रुकावटों को दूर करने वाले मज़बूत बाइलेटरल डिजिटल ट्रेड नियमों पर बातचीत करने का वादा किया है.’

    राहत देने वाले हैं ये यूटर्न

    ये सारे बदलाव भारत के लिए राहत देने वाले हैं. अगर टैरिफ की बात करें तो भारत पर अब 18 फीसदी टैरिफ लग रहा है. यह पाकिस्तान, बांग्लादेश और चीन से कम है. यह समझौता लगभग एक साल की बातचीत के बाद हुआ. फरवरी 2025 से बातें चल रही थीं. पहले ट्रंप ने भारत पर 50% टैरिफ लगा दिए थे. बाद में यह 18 फीसदी कर दिया गया. अब जब अमेरिका ने फैक्टशीट में ये बदलाव किए हैं तो लगता है कि भारत ने अपनी बात काफी मजबूती से रखी. भारत की दलीलों के कारण ही अमेरिका को कुछ बातें माननी पड़ीं.

    फैक्टशीट में बदलाव का क्या मतलब

        दाल पर टैरिफ न घटाने का फैसला भारतीय किसानों के लिए बहुत बड़ा है. दाल हमारे देश में बहुत महत्वपूर्ण फसल है. अगर अमेरिकी दाल सस्ती होकर आती तो किसानों को नुकसान होता. अब वह खतरा टल गया.
        500 अरब डॉलर की खरीद को भी ‘वादा’ से ‘इरादा’ बना दिया गया. इससे भारत पर कोई कानूनी बाध्यता नहीं रहेगी.
        डिजिटल टैक्स पर भी भारत को तुरंत कुछ करने की जरूरत नहीं पड़ेगी.  सिर्फ भविष्य में नियमों पर बात होगी.

    भारत का हित सर्वोपरि

    पहले समझौते की घोषणा के समय कुछ बातें थोड़ी सख्त लग रही थीं. लेकिन अब अमेरिका ने खुद अपनी लिस्ट को नरम कर दिया है. इससे साफ है कि भारत ने डील में अपना हित अच्छे से सुरक्षित रखा है. आगे जब पूरा डिटेल्ड समझौता आएगा तब और साफ होगा. लेकिन फिलहाल ये बदलाव भारत के लिए सकारात्मक हैं.

  • उज्जैन में महाकाल के प्रवेश द्वार पर होगा सनातन गौरव का प्रदर्शन, बनेंगे 9 भव्य द्वार

    उज्जैन में महाकाल के प्रवेश द्वार पर होगा सनातन गौरव का प्रदर्शन, बनेंगे 9 भव्य द्वार

    उज्जैन
     भगवान महाकाल की नगरी ‘उज्जैन’, अपने प्रवेश मार्गों पर भव्य और प्रतीकात्मक पहचान गढ़ने जा रही है। उज्जैन विकास प्राधिकरण (यूडीए) ने शहर के नए प्रमुख मार्गों पर 92.25 करोड़ लाख रुपये से नौ प्रवेश द्वार बनाने जा रहा है।

    यह परियोजना केवल शहरी सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य उज्जैन की हजारों वर्षों पुरानी सनातन परंपरा, खगोल–कालगणना, सिंहस्थ संस्कृति और राजकीय गौरव को मूर्त रूप देना है। जब कोई श्रद्धालु, पर्यटक या आगंतुक उज्जैन की सीमा में प्रवेश करेगा, तो ये द्वार उसे यह एहसास कराएंगे कि वह किसी साधारण नगर में नहीं, बल्कि काल, धर्म और मोक्ष की राजधानी में कदम रख रहा है।

    योजना के तहत इंदौर रोड, देवास रोड, आगर रोड, मक्सी रोड, बड़नगर रोड और सिंहस्थ से जुड़े प्रमुख मार्गों सहित विभिन्न दिशाओं से शहर में प्रवेश करने वाले मार्गों पर ये द्वार निर्मित किए जाएंगे। प्रवेश द्वारों के आसपास सड़क चौड़ीकरण, सर्विस रोड, मीडियन, हरित पट्टी और ट्रैफिक सुव्यवस्था का भी समग्र विकास किया जाएगा, ताकि शहर की पहली छवि भव्य, सुव्यवस्थित और गरिमामयी बने।

    स्थापत्य में दिखेगा काल और संस्कृति का संवाद

    नौ प्रवेश द्वारों का डिजाइन पारंपरिक भारतीय स्थापत्य और आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीक का संतुलित समन्वय होगा। निर्माण में बंसी पहाड़पुर के गुलाबी–सफेद पत्थर और जैसलमेर के पीले पत्थर का उपयोग किया जाएगा। द्वारों पर 10 से 50 मिमी तक की गहरी 3-डी नक्काशी की जाएगी, जिसमें पौराणिक प्रसंग, धार्मिक प्रतीक, शेर, हाथी, मानव आकृतियां और सांस्कृतिक चिन्ह उकेरे जाएंगे।

    रात्रिकालीन दृश्य प्रभाव के लिए आरजीबीडब्ल्यू लाइटिंग, एलईडी डाउनलाइटर और डीएमएक्स कंट्रोलर आधारित प्रकाश व्यवस्था की जाएगी। ऊर्जा संरक्षण को ध्यान में रखते हुए सभी द्वारों पर सोलर सिस्टम भी लगाए जाएंगे, जिससे ये द्वार रात में भी उज्जैन की भव्य पहचान बनेंगे।

    यूडीए के अनुसार सभी स्वीकृतियों के बाद 18 महीनों में नौ प्रवेश द्वारों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। निर्माण पूर्ण होने के बाद संबंधित एजेंसी को पांच वर्षों तक संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी भी दी जाएगी।

    जानिये, किस द्वार के लिए कितना बजट

        अमृत द्वार 9.68 करोड़
        पांचजन्य द्वार 12.50 करोड़
        गज द्वार 8.51 करोड़
        कालगणना द्वार 11.07 करोड़
        उज्जैनी द्वार 6.48 करोड़
        सिंहस्थ द्वार 6.48 करोड़
        त्रिशुल द्वार 10.65 करोड़
        विक्रमादित्य द्वार 13.58 करोड़
        डमरू द्वार 13.29 करोड़

    सदियों पुरानी परंपरा को मिलेगा नया स्वरूप

    इतिहासकारों के अनुसार उज्जैन में प्रवेश द्वारों की परंपरा वर्षों पुरानी रही है। प्राचीन काल में नगर की सीमाओं पर बने द्वार न केवल सुरक्षा के लिए होते थे, बल्कि नगर की पहचान, सांस्कृतिक गौरव और शक्ति के प्रतीक भी माने जाते थे। यूडीए की यह योजना उसी परंपरा को आधुनिक शहरी जरूरतों के अनुरूप पुनर्जीवित करने का प्रयास है।

    नामों की साहित्यिक और सांस्कृतिक प्रासंगिकता

        अमृत द्वार : समुद्र मंथन से निकले अमृत का प्रतीक, उज्जैन को मोक्ष और अमरत्व की भूमि के रूप में दर्शाता है।
        पंचजन्य द्वार : भगवान कृष्ण के शंख ‘पंचजन्य’ से प्रेरित, धर्म और विजय का प्रतीक।
        गज द्वार : भारतीय परंपरा में हाथी ऐश्वर्य, शक्ति और मंगल का संकेतक।
        कालगणना द्वार : उज्जैन की विश्वविख्यात कालगणना और खगोल परंपरा की पहचान।
        उज्जैनी द्वार : नगर की सांस्कृतिक आत्मा और ऐतिहासिक अस्मिता का प्रतीक।
        सिंहस्थ द्वार : विश्व प्रसिद्ध सिंहस्थ कुंभ के माध्यम से उज्जैन की वैश्विक धार्मिक पहचान को दर्शाता है।
        त्रिशूल द्वार : भगवान महाकाल के त्रिशूल का प्रतीक, सृजन–संरक्षण–संहार का दर्शन।
        विक्रमादित्य द्वार : सम्राट विक्रमादित्य के न्याय, शौर्य और उज्जैन की राजकीय परंपरा का प्रतीक।
        डमरू द्वार
    : शिव के डमरू से उद्भूत नाद, सृष्टि और समय चक्र का संकेत।

    (नोट : इन नौ भव्य प्रवेश द्वारों के साथ उज्जैन न केवल भौतिक रूप से भव्य दिखेगा, बल्कि अपनी हजारों वर्षों पुरानी सांस्कृतिक विरासत को भी आधुनिक स्वरूप में सशक्त रूप से प्रस्तुत करेगा।) 

  • 12 फरवरी का राशिफल: जानें किन राशियों में हो सकते हैं बड़े बदलाव

    12 फरवरी का राशिफल: जानें किन राशियों में हो सकते हैं बड़े बदलाव

    मेष

    12 फरवरी के दिन आज हर पहलू में संतुलन बनाए रखें। प्यार में शांत रहें, काम पर टीमवर्क पर ध्यान दें। छोटी-मोटी गलतफहमियां पैदा हो सकती हैं। धन को समझदारी से मैनेज करें और स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें।
    वृषभ

    12 फरवरी के दिन आप रिश्तों में क्लैरिटी पाएंगे, चाहे वे रोमांटिक हों या नहीं। करियर के लिहाज से, एक नया नजरिया आपके सामने आने वाली किसी भी चुनौती से निपटने में मदद करेगा।
    मिथुन

    12 फरवरी के दिन आर्थिक रूप से, फ्यूचर में स्टेबिलिटी के लिए सावधानी के साथ योजना बनाना महत्वपूर्ण है। मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों को सपोर्ट करने के लिए संतुलित जीवनशैली बनाए रखने पर ध्यान दें।
    कर्क

    12 फरवरी का दिन विकास से भरे अवसरों का दिन है। आज का दिन काम और निजी जीवन के बीच संतुलन बनाने, नए अवसरों को सामने लाने, विभिन्न क्षेत्रों में विकास और संतुष्टि लाने के बारे में है।
    सिंह

    12 फरवरी का दिन संभावनाओं से भरा हुआ है। प्यार में, आप गहरे संबंध पाएंगे। करियर के लिहाज से, नई चुनौतियां सामने हैं, जो चमकने के अवसर दे सकती। आर्थिक रूप से, अप्रत्याशित लाभ के लिए नजर बनाए रखें।
    कन्या

    12 फरवरी के दिन तनाव या छोटी-मोटी स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को नजरअंदाज न करें। कुल मिलाकर, दिन को पॉजिटिव बदलाव के साथ अपनाएं। ध्यान रखें कि आप रोमांटिक एक्टिविटी के जरिए लव लाइफ को प्रोडक्टिविटी बनाए रखें।
    तुला

    12 फरवरी के दिन सेहत के लिहाज से, अपने शरीर की सुनें और संतुलन बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाएं। आगे बढ़ने और फलने-फूलने के हर अवसर का लाभ उठाएं। अगर आप सिंगल हैं, तो आप किसी ऐसे व्यक्ति से मिल सकते हैं, जो आपकी रुचि जगाएगा।
    वृश्चिक

    12 फरवरी के दिन अपने प्रेम जीवन में सुखद पलों की तलाश करें। ऐसे महत्वपूर्ण काम करें, जिनमें स्किल्स की जरूरत हो। वित्तीय जरूरतों को पूरा करें, जबकि सेहत पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
    धनु

    12 फरवरी के दिन ऑफिस में आप खुद को नई चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार पाएंगे। आपको ऐसे नए अवसर मिलने की संभावना है, जिनके लिए पॉजिटिव मानसिकता की आवश्यकता होगी।
    मकर

    12 फरवरी के दिन गहरे संबंधों को बढ़ावा देने के लिए प्रियजनों और सहकर्मियों के साथ संवाद बनाए रखें। आज धन के प्रति सचेत रहें और लॉन्ग टर्म स्ट्रैटजी पर विचार करें। आपके स्वास्थ्य को संतुलन की आवश्यकता है।
    कुंभ

    12 फरवरी के दिन आपके पास प्यार का जश्न मनाने के लिए शानदार पल हैं। ऐसी नई जिम्मेदारियां लें, जो उत्पादकता बढ़ाएं। आज आपको धन को सावधानी से संभालने की जरूरत है। आपका शरीर और मन आपकी देखभाल के लिए आपको धन्यवाद देंगे।
    मीन

    12 फरवरी के दिन जब आपको नौकरी में महत्वपूर्ण डिसीजन लेने की आवश्यकता हो, तो दृढ़ रहें। लव के मामले में आपका रवैया आज महत्वपूर्ण है। आर्थिक रूप से आप अच्छे हैं, लेकिन स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।

  • महाशिवरात्रि पर बागेश्वरधाम में भव्य शादी महोत्सव: 301 जोड़े, 12 लाख श्रद्धालु और 5 किमी तिरंगा लाइटिंग

    महाशिवरात्रि पर बागेश्वरधाम में भव्य शादी महोत्सव: 301 जोड़े, 12 लाख श्रद्धालु और 5 किमी तिरंगा लाइटिंग

    छतरपुर 

    छतरपुर जिले के गढ़ा गांव स्थित बागेश्वर धाम एक बार फिर भव्य आयोजन का साक्षी बनने जा रहा है। महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर 15 फरवरी को यहां 300 गरीब कन्याओं का सामूहिक विवाह महोत्सव आयोजित किया जाएगा। इस ऐतिहासिक आयोजन में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित छत्तीसगढ़, राजस्थान, दिल्ली और उत्तराखंड के मुख्यमंत्रियों के शामिल होने की संभावना है। सभी अतिथियों को औपचारिक आमंत्रण भेजे जा चुके हैं और धाम समिति ने उनके आगमन को लेकर संकेत भी जारी कर दिए हैं।

    देशभर के दिग्गज राजनेताओं को न्योता

    बागेश्वर धाम में महाशिवरात्रि पर सामूहिक कन्या विवाह की परंपरा वर्षों से चली आ रही है। इस वर्ष यह आयोजन अपने सातवें संस्करण में प्रवेश कर रहा है, जिसे लेकर खास उत्साह है। समारोह में देश के कई बड़े राजनीतिक चेहरों को आमंत्रित किया गया है। आयोजन की व्यापकता को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी की जा रही है। बुंदेलखंड के जिलों के साथ-साथ ग्वालियर-चंबल संभाग से अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए जाएंगे। धाम परिसर में भव्य तैयारियां जोरों पर हैं।

    खजुराहो के बागेश्वर धाम में 15 फरवरी यानी महाशिवरात्रि पर होने वाली 301 जोड़ों के विवाह समारोह की तैयारियां आखिरी दौर में हैं। 12 फरवरी से तीन दिन कल्चरल नाइट होगी। इन दिनों में करीब 10 से 12 लाख श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है.

    मेहमानों के लिए नागपुर से रबड़ी और राजस्थान से रसगुल्ले मंगवाए जा रहे हैं। 100 एकड़ में कार्यक्रम की व्यवस्था है। बारातियों के लिए बुफे की व्यवस्था रहेगी। पिछले साल इलाहाबाद में हुए महाकुंभ की तर्ज पर 11 तोरण द्वार भी बनाए गए हैं।

    मुख्य कार्यक्रम में छह प्रदेशों के मुख्यमंत्री, मध्यप्रदेश के राज्यपाल, विदेशी मेहमान, सेलिब्रिटी और खिलाड़ी शामिल होंगे।

    दो किमी दूर से नजर आने लगती है सजावट

    अलसुबह अभी सूरज नहीं निकला है। जैसा कि बताया गया था कि शादी के लिए बागेश्वरधाम तिरंगा थीम पर सजाया जाएगा। उसकी झलक धाम के पांच किलोमीटर दूर से ही नजर आने लगती है। सड़क के दोनों पर तिरंगा थीम पर लाइटिंग की गई है।

    कुछ देर में धाम के मुख्य मंदिर के सामने पहुंच गए। यहां आरती हो रही है। दूर-दूर से दर्शन के लिए आए श्रद्धालुओं की भी भीड़ है। जिस जगह पर समाराेह होना है, वहां 24 घंटे काम चल रहा है।

    सामान से भरी लारियां आ रही हैं। सेवादार सही जगह पर सामान अनलोड कराने में व्यस्त हैं। किसी में टेंट का सामान है, तो किसी में खाने-पीने का।

    कोलकाता से आए कारीगर रंग-बिरंगा छत्री नुमा टेंट लगा रहे हैं। दूसरे लोग डोम के लिए पाइप कस रहे हैं। राज मिस्त्री करीब छह लाख लोगों के लिए बनने वाले खाने के लिए बड़ी-बड़ी भट्टियां बना रहे हैं। शादी वाली इस जगह की जिम्मेदारी संभाल रहे सेवादार नितेंद्र चौबे कहते हैं कि चार दिन बचे हैं, सभी काम समय से पूरे हो जाएंगे।

    पंडित प्रदीप मिश्रा से लेकर मोरारी बापू तक आएंगे

    नितेंद्र कहते हैं- पहले 300 बेटियों की शादी होनी थी, लेकिन अब ये संख्या 301 हो गई है। उसी हिसाब से तैयारियां हो रही हैं। मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, उत्तराखंड, हरियाणा और दिल्ली की मुख्यमंत्री कन्याओं को आशीर्वाद देने आ रहे हैं। 12 फरवरी को गुरुकुलम के भूमिपूजन के लिए एमपी के राज्यपाल मंगुभाई पटेल आने वाले हैं।

    13 से 15 फरवरी तीनों दिन अलग-अलग लोग आएंगे। इसमें संत राजेंद्र दास, इंद्रेश कुमार, अनिरुद्धचार्य, पुंडरीक महाराज, मोरारी बापू, बाबा रामदेव, पंडित प्रदीप मिश्रा और रमेश भाई ओझा का आना तो तय हो चुका है। कई दूसरे संत भी आएंगे, लेकिन उनकी अभी तारीख फिक्स नहीं हुई है। कुछ खिलाड़ी भी आने वाले हैं- उमेश यादव और शिखर धवन का आना तय हो चुका है।

    1500 विदेशी भक्त भी आएंगे

    शादी समारोह के मुख्य व्यवस्थापक धीरेंद्र गौर कहते हैं कि आस-पास के ग्रामों में पीले चावल बांटे जा रहे हैं। विदेश से करीब 1500 भक्त आएंगे। अभी करीब 100 श्रद्धालु आ चुके हैं। दुबई, नेपाल, फिजी आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और लंदन से गुरुभाई आना शुरू हो गए हैं।

    ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड के तो एमएलए भी आ रहे हैं। तीन दिन में 10 से 12 लाख लोगों के आने का अनुमान है। बहुत बड़ी व्यस्था होनी है। भारत में धाम से रजिस्टर्ड 75 सेवादारों के संगठन अलग-अलग जगह हैं। इनके करीब 12 हजार सदस्य शादी समारोह की व्यवस्था संभालने आ रहे हैं। उनकी अलग-अलग ड्यूटी लगाई जाएगी।

    धीरेंद्र शास्त्री को पसंद है मटर-पनीर की सब्जी

    भंडारा प्रभारी कपिल साहू के पास भंडार की जिम्मेदारी है। शादी पंडाल के आसपास ये तीन जगह होगा। एक बराता-घराती के लिए तो दूसरा सेवादारों के लिए। वहीं, तीसरा– शादी में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए। इसके अलावा, धाम में आठ-दस जगह भी भोजन-फल की व्यवस्था है।

    वह कहते हैं कि गुरु धीरेंद्र शास्त्री को मटर-पनीर की सब्जी बहुत पसंद है, वो खासतौर पर शादी वाले दिन ही बनाई जाएगी। ये खास सब्जी आने वाले पांच सीएम के अलावा अन्य VVIP को भी परोसी जाएगी। इसमें सबसे खास बात है कि इस बार माल-पुआ के साथ लाखों मेहमानों के लिए नागपुर से रबड़ी और राजस्थान से रसगुल्ले मंगवाए जा रहे हैं।

    अस्थायी अस्पताल भी बनाया

    समारोह के लिए प्रशासन द्वारा यहां अस्पताल भी बनाया गया है। राजनगर बीएमओ और बागेश्वर धाम में स्वास्थ व्यवस्था प्रभारी अवधेश चतुर्वेदी ने बताया कि टीम 24 घंटे काम करेगी। तीन शिफ्ट में 50 स्वास्थ्य कर्मी ड्यूटी पर रहेंगे। जिनमें डॉक्टर, फार्मासिस्ट, नर्सिंग स्टाफ, वार्ड बॉय और ड्रेसर शामिल हैं।

    अस्पताल में ऑक्सीजन, पलंग और आपातकालीन दवाओं की सुविधा रहेगी। फिलहाल 6 बेड की व्यवस्था की गई है। दो एम्बुलेंस तैनात रहेंगी। 12 से 14 फरवरी के दौरान तीन और एम्बुलेंस आ जाएंगी। हालत गंभीर होने पर मरीज को छतरपुर रेफर किया जाएगा।

    इसलिए दी जा रही 30-30 हजार रुपए की FD

    समारोह के मुख्य व्यवस्थापक धीरेंद्र गौर को बनाया गया है। इस बार नव दंपत्ति को बाइक और होम आटा-चक्की नहीं दी जा रही है। धीरेंद्र गौर कहते हैं कि इन दो उपहार से नए परिवार का खर्च बढ़ रहा था, इसलिए इस बार प्रत्येक जोड़े को 30- 30 हजार की फिक्स डिपॉजिट (FD) दी जा रही है।

    इसके साथ ही सोने की लौंग और बाली। मंगलसूत्र के साथ दुल्हन को श्रृंगार और ढाई लाख रुपए का घर-गृहस्थी के सामान दिया जा रहा है।

     

  • भारत के खिलाफ मैच से पहले पाकिस्तानी खिलाड़ियों की धमकी, सूर्या को दी चेतावनी

    भारत के खिलाफ मैच से पहले पाकिस्तानी खिलाड़ियों की धमकी, सूर्या को दी चेतावनी

     नई दिल्ली
    टी20 वर्ल्ड कप में 15 फरवरी को भारत और पाकिस्तान के बीच कोलंबो में मुकाबला खेला जाना है. इस मैच से पहले साहिबजादा फरहान और उस्मान तारिक ने सूर्यकुमार यादव एंड कंपनी को चेतावनी दी है. पाकिस्तान क्रिकेट टीम के स्टार साहिबज़ादा फरहान ने वादा किया है कि जब 15 फरवरी को कोलंबो में दोनों टीमें आमने-सामने होंगी तो उनकी टीम भारत के खिलाफ बिल्कुल अलग मानसिकता के साथ खेलेगी. 

    फरहान ने अपने साथी उस्मान तारिक के साथ भारत को कड़ी टक्कर देने का भरोसा जताया है और IND vs PAK मुकाबले से पहले सूर्यकुमार यादव एंड कंपनी को चेतावनी दी है.

    ‘हम अलग मानसिकता के साथ खेलेंगे’

    अमेरिका के खिलाफ पाकिस्तान की जीत के बाद पत्रकारों से बातचीत में फरहान ने कहा कि भारत के खिलाफ आगामी मुकाबला कोई बड़ी बात नहीं है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान दो मैच जीतकर ग्रुप ए में शीर्ष पर है और टीम आत्मविश्वास से भरी हुई है.

    73 रन की पारी के लिए प्लेयर ऑफ द मैच चुने गए ओपनर ने कहा कि टीम पहले भी भारत का सामना कर चुकी है और टी20 विश्व कप 2026 के आगामी मैच में वे अलग मानसिकता के साथ उतरेंगे.

    उन्होंने कहा, 'देखिए, जब आप दो मैच जीतते हैं और तालिका में शीर्ष पर होते हैं तो आत्मविश्वास आता है. आगामी मैच कोई इतनी बड़ी बात नहीं है, हम पहली बार उनके खिलाफ नहीं खेल रहे हैं. हम पहले भी खेल चुके हैं और इस बार हम अलग मानसिकता के साथ खेलेंगे. आपने हमें इस बदलाव में देखा है. आपने मिडिल ऑर्डर में हमारा संघर्ष देखा है. आपने देखा होगा कि शादाब रन बना रहे हैं, नवाज रन बना रहे हैं. तो उम्मीद है कि आप हमारे उनके खिलाफ मुकाबले का आनंद लेंगे.'

    ‘भारत पर अतिरिक्त दबाव’

    पाकिस्तान के स्पिनर उस्मान तारिक का मानना है कि भारतीय बल्लेबाजों पर उन्हें खेलने को लेकर अतिरिक्त दबाव होगा. हाल ही में जिनकी गेंदबाजी एक्शन पर सवाल उठे थे, उस्मान ने अमेरिका के खिलाफ 4 ओवर में 27 रन देकर 3 विकेट लिए.

    अपने एक्शन को लेकर भारतीय प्रशंसकों के बीच हो रही चर्चा पर पूछे गए सवाल के जवाब में उस्मान ने कहा कि वह केवल अपने खेल पर ध्यान दे रहे हैं और बाहरी शोर से प्रभावित नहीं हैं. उन्होंने कहा कि  मेरा मानना है कि उन पर अतिरिक्त दबाव होगा. क्योंकि जिस तरह वे इन बातों पर चर्चा कर रहे हैं, अगर वे इस तरह आपत्ति जता रहे हैं, तो इससे लगता है कि शायद उन पर अतिरिक्त दबाव होगा.