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  • भवन निर्माण में उत्कृष्ट दृष्टिकोण के साथ दीर्घकालीन कार्य योजना अपनाये : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    भवन निर्माण में उत्कृष्ट दृष्टिकोण के साथ दीर्घकालीन कार्य योजना अपनाये : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    भगवान विश्वकर्मा का साक्षात् अवतार हैं इंजीनियर्स
    सड़क एवं भवन विकास कार्यों के लिए म.प्र. शासन के साथ हुए 4 एमओयू
    पीडब्ल्यूडी की प्रशिक्षण कार्ययोजना 2026-27, न्यूज लेटर सहित रोड नेटवर्क मास्टर प्लान एवं बजट मॉड्यूल का भी हुआ विमोचन
    पिछले 2 वर्ष में लोक निर्माण विभाग ने अपने कार्यों के आधार पर बनाई विशिष्ठ पहचान

     

    भोपाल
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि निर्माण सिर्फ ईंट–पत्थर का संयोजन नहीं, एक अभिनव कला है। इसमें उत्कृष्ट दृष्टिकोण के साथ दीर्घकालिक कार्य योजना को अपनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बदलते समय की आवश्यकताओं के अनुरूप अब हर निर्माण कार्य में कन्सेप्चुअल और क्वालिटेटिव एप्रोच अनिवार्य रूप से दिखाई देना चाहिए। गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाना चाहिए। प्रदेश के विकास के लिए हम सभी को पूरी क्षमता दक्षता से काम करना होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरुवार को रवीन्द्र भवन में लोक निर्माण विभाग अन्तर्गत मध्यप्रदेश भवन विकास निगम द्वारा आयोजित एक दिवसीय क्षमता संवर्धन कार्यशाला सह प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। लोक निर्माण विभाग के तकनीकी अधिकारियों, वरिष्ठ एवं कनिष्ठ अभियंताओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वैचारिक प्रतिबद्धता और कार्यशैली में जड़ता से बचने और बदलती तकनीकों के अनुरूप स्वयं को अद्यतन रखने के लिए कौशल संवर्धन अत्यंत आवश्यक है। ऐसी कार्यशालाएं अभियंताओं की स्किल्स को रिफ्रेश करती हैं और उन्हें नई ऊर्जा प्रदान करती हैं। उन्होंने निर्माण कार्यों में दीर्घकालिक दृष्टि, नवाचार और पारदर्शिता को प्राथमिकता देने पर जोर दिया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में पीएम गतिशक्ति योजना के माध्यम से लोक निर्माण विभाग नवाचारों को धरातल पर उतार रहा है। वर्तमान समय में हमारे इंजीनियर्स साक्षात् भगवान विश्वकर्मा के अवतार हैं। लोक निर्माण विभाग ने पिछले 2 वर्षों के कार्यों के आधार पर अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है। इस अवधि में सराहनीय कार्य हुए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि गीता के अंतिम अध्याय में ज्ञान और विज्ञान की बात कही गई है, जिसमें मन, बुद्धि और अहंकार के साथ पंच तत्वों की व्याख्या की गई है। लोक निर्माण विभाग के इंजीनियर्स की यह कार्यशाला आधुनिक संरचनाओं के निर्माण को गति प्रदान करने के लिए महत्वपूर्ण पहल है। हमारे इंजीनियर्स ने सांदीपनि विद्यालय सहित बड़े-बड़े अधोसंरचनात्मक विकास के निर्माण कार्य किए हैं। सड़क, पुल, स्टेडियम और भवन जैसे निर्माण कार्य लोक निर्माण विभाग के माध्यम से ही किये जाते हैं। विभागीय इंजीनियर्स की क्षमता संवर्धन के लिए समय-समय पर प्रशिक्षण की आवश्यकता भी है। उन्होंने कहा कि इंजीनियर्स को अपना काम करने में अनेक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ता है। आज की कार्यशाला में एमपीआईडीसी सहित देश की विभिन्न संस्थाओं के साथ समझौते हुए हैं। प्रदेश में ग्रीन बिल्डिंग के विकास को लेकर सहमति बनी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी कार्यों और नवाचारों के लिए लोक निर्माण मंत्री एवं विभाग को बधाई दीं।

    तकनीक, पारदर्शिता और गुणवत्ता से बदलेगा निर्माण तंत्र : लोक निर्माण मंत्री श्री सिंह
    लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह ने क्षमता संवर्धन कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि यह केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि विभाग की उस निरंतर सुधार यात्रा का प्रतीक है जिसमें नई सोच, नई प्रणाली और उच्च गुणवत्ता के साथ लोक निर्माण विभाग आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि जब सोच बदलती है तभी व्यवस्था बदलती है, और यह कार्यशाला विभाग के नवाचारों की श्रृंखला का एक महत्वपूर्ण कदम है। मंत्री श्री सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में देश में अधोसंरचना विकास को केवल निर्माण कार्य तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि उसे सुशासन, पारदर्शिता, तकनीक और नागरिक सुविधा से जोड़ा गया है। उन्होंने प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान, डिजिटल इंडिया, ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस, हरित विकास और आत्मनिर्भर भारत जैसे कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा कि अब विकास समन्वित सोच के साथ आगे बढ़ रहा है। मंत्री श्री सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के दूरदर्शी नेतृत्व में मध्यप्रदेश ने अधोसंरचनात्मक विकास को नई गति और दिशा दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का स्पष्ट संदेश है कि निर्माण केवल संरचना नहीं, बल्कि भविष्य की नींव है। समयबद्धता, गुणवत्ता, पारदर्शिता और पर्यावरणीय संवेदनशीलता अब विभाग की कार्य संस्कृति का अभिन्न अंग बनती जा रही है। उन्होंने कहा कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लोक निर्माण विभाग के लिए 293 इंजीनियर्स के पद भरने की स्वीकृति प्रदान की है। इसके लिए विभागीय स्तर पर कार्य जारी है। मंत्री श्री सिंह ने बताया कि प्रोजेक्ट मैनेजमेंट मैन्युअल 2.0 विभाग की महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो सरकारी भवन निर्माण परियोजनाओं के लिए एक समग्र मार्गदर्शिका का कार्य करेगा। मंत्री श्री सिंह ने पीएम गति शक्ति पोर्टल आधारित रोड नेटवर्क मास्टर प्लान के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

    मंत्री श्री सिंह ने कहा कि सड़कों, पुलों और भवनों का वास्तविक आधार प्रशिक्षित एवं सक्षम मानव संसाधन होता है। इसी उद्देश्य से विभाग ने राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ मिलकर एक वर्ष का प्रशिक्षण कैलेंडर तैयार किया है, जिसमें प्रत्येक त्रैमास के लिए सड़क, पुल, भवन, पर्यावरण और नवीन तकनीकों जैसी थीम निर्धारित की गई हैं। उन्होंने बताया कि विभाग ने 10 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाले भवनों को ग्रीन बिल्डिंग मानकों के अनुरूप निर्मित करने के निर्देशों के पालन में त्वरित कार्रवाई करते हुए अभियंताओं को इस विषय पर प्रशिक्षण देना प्रारंभ कर दिया है, जो विभाग की सकारात्मक कार्य संस्कृति का उदाहरण है। मंत्री श्री सिंह ने बताया कि लोक निर्माण विभाग के कार्यों के लिए ट्री शिफ्टिंग की एक कार्यशाला भी बहुत जल्द आयोजित की जाएगी। भास्कराचार्य संस्थान ने लोक निर्माण विभाग के 500 से अधिक लोक कल्याण सरोवरों की कार्य योजना तैयार कर ली है। लोक निर्माण विभाग ने कार्यों का औचक निरीक्षण की शुरुआत की है, जिसे ओडिशा और राजस्थान जैसे राज्यों ने अपनाया है। लोक निर्माण तकनीक, पारदर्शिता और मानवीय संवेदनाओं के साथ आगे बढ़ रहा है।

    कार्यशाला में प्रशिक्षण कैलेंडर एवं प्रोजेक्ट मैनेजमेंट मैन्युअल का विमोचन किया गया तथा पी.एम.एस. पोर्टल-2.0 डिजिटल प्रबंधन प्रणाली को प्रेजेंटेशन के साथ लाँच किया गया। साथ ही, म.प्र. सड़क विकास निगम एवं म.प्र. भवन विकास निगम द्वारा सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीआरआरआई) नई दिल्ली, इंडियन एकेडमी ऑफ हाईवे इंजीनियर्स (आईएएचई) नई दिल्ली,इंजीनियरिंग स्टाफ कॉलेज ऑफ इंडिया (ईएससीआई), हैदराबाद, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी) मुंबई तथा म.प्र. भवन विकास निगम द्वारा योजना तथा वास्तुकला विद्यालय भोपाल (एस.पी.ए.) के साथ एमओयू किये गये।

    प्रमुख सचिव लोक निर्माण विभाग श्री सुखबीर सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में लोक निर्माण विभाग निरंतर अपनी योजनाओं को मूर्तरूप दे रहा है। लोक निर्माण मंत्री श्री सिंह ने अभियंताओं के प्रशिक्षण का नवाचार किया है। आज भवन निर्माण में बेहतर प्रबंधन के लिए कार्यशाला आयोजित की गई है। प्रदेश की अधोसंरचना में सड़क अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करती है। विकसित भारत@2047 के लिए प्रधानमंत्री श्री मोदी के निर्देशों के अनुसार मध्यप्रदेश में गांव-गांव तक सड़क और अधोसंरचनात्मक विकास के कार्य तेजी से पूर्ण किए जा रहे हैं। प्रशिक्षण अब हमारी गतिविधियों का अंग बन चुका है।

    कार्यशाला में डॉ. विक्रांत सिंह तोमर ने “कैपेसिटी बिल्डिंग थ्रू इंस्पायर्ड लिविंग पर प्रेजेंटेशन दिया। राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने ग्रीन बिल्डिंग कॉन्सेप्ट, आधुनिक भवन निर्माण तकनीक, गुणवत्ता नियंत्रण तथा निर्माण क्षेत्र में नवाचार जैसे विषयों पर विस्तृत मार्गदर्शन प्रदान किया गया।

    कार्यशाला में प्रशिक्षण कैलेंडर और परियोजना प्रबंधन पुस्तिका का विमोचन किया गया। साथ ही परियोजना प्रबंधन प्रणाली–2.0 (डिजिटल प्रबंधन प्रणाली) का प्रदर्शन कर उसका औपचारिक शुभारंभ किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लोक निर्माण विभाग के प्रोजेक्ट मैनेजमेंट सिस्टम पीएमएस 2.0 की लाँचिंग की। मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम एवं मध्यप्रदेश भवन विकास निगम द्वारा केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान, भारतीय राजमार्ग अभियंता अकादमी, इंजीनियरिंग स्टाफ कॉलेज ऑफ इंडिया, आईआईटी मुंबई तथा स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर भोपाल जैसी राष्ट्रीय प्रतिष्ठित संस्थाओं के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर भी किए गए। कार्यशाला में राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों ने क्षमता निर्माण, हरित भवन अवधारणा, आधुनिक निर्माण तकनीक, गुणवत्ता नियंत्रण और नवाचार जैसे विषयों पर मार्गदर्शन दिया।

    कार्यशाला में म.प्र. भवन विकास निगम के प्रबंध संचालक श्री सिबी चक्रवर्ती, म.प्र. सड़क विकास निगम के प्रबंध संचालक श्री भरत यादव, लोक निर्माण विभाग के चीफ इंजीनियर श्री के.पी.एस राणा सहित लोक निर्माण विभाग, परियोजना क्रियान्वयन इकाई, मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम तथा मध्यप्रदेश भवन विकास निगम के करीब 2 हजार से अधिक अभियंता एवं तकनीकी अधिकारी उपस्थित थे।

  • ऑपरेशन साइबर शील्ड: फर्जी RTO ई-चालान लिंक से लाखों की ठगी, राजस्थान से दो साइबर ठग दबोचे गए

    ऑपरेशन साइबर शील्ड: फर्जी RTO ई-चालान लिंक से लाखों की ठगी, राजस्थान से दो साइबर ठग दबोचे गए

    रायपुर

    रायपुर रेंज पुलिस ने ऑपरेशन साइबर शील्ड के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए फर्जी लिंक के माध्यम से ऑनलाइन ठगी करने वाले दो साइबर आरोपियों को राजस्थान से गिरफ्तार किया है। आरोपी Winmate और Wingo जैसे संदिग्ध ऐप के जरिए एंड्रॉइड यूजर्स को निशाना बनाते थे और उनके मोबाइल से फर्जी एसएमएस भेजकर बैंक खातों से रकम पार कर देते थे।

    पुलिस महानिरीक्षक रायपुर रेंज अमरेश मिश्रा के निर्देशन में की गई इस कार्रवाई में पृथ्वी कुमार बिश्नोई उर्फ राहुल (20) निवासी ग्राम डोलीकला, थाना कल्याणपुर, बाड़मेर (राजस्थान) और नरसिंह सिंह (24) निवासी भोपालगढ़, जोधपुर (राजस्थान) को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों के पास से घटना में प्रयुक्त मोबाइल फोन, सिम कार्ड और बैंक खाते से जुड़े दस्तावेज जब्त किए गए हैं।

    ऐसे हुआ पर्दाफाश

    प्रार्थी धर्मेंद्र सिंह ने थाना विधानसभा में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके मोबाइल पर RTOechallan नाम से एक एसएमएस आया। उसमें दिए गए लिंक पर क्लिक करते ही उनके बैंक खाते से 4.52 लाख रुपये कट गए। इस पर अपराध क्रमांक 8/26 के तहत धारा 318(4), 3(5) भारतीय न्याय संहिता और 66(D) आईटी एक्ट में मामला दर्ज कर रेंज साइबर थाना ने जांच शुरू की। जांच के दौरान गूगल, बैंकिंग ट्रांजेक्शन, मोबाइल सेवा प्रदाता, यूट्यूब और टेलीग्राम से मिले तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया गया, जिससे आरोपियों की पहचान कर राजस्थान में दबिश देकर गिरफ्तारी की गई।

    सोशल मीडिया पर लालच देकर फंसाते थे

    पुलिस के अनुसार आरोपी यूट्यूब और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर “Task Complete”, “Instant Bonus”, “Referral Bonus” और गेम खेलकर कमाई जैसे प्रलोभन देकर Winmate और Wingo जैसे ऐप डाउनलोड करवाते थे। ये ऐप प्ले स्टोर या ऐप स्टोर पर उपलब्ध नहीं होते थे। ऐप इंस्टॉल करते ही यूजर को बोनस राशि दिखती थी और “SMS Task” के नाम पर उसके मोबाइल से बड़ी संख्या में फर्जी ई-चालान और संदिग्ध लिंक भेजे जाते थे। लिंक पर क्लिक करते ही मोबाइल हैक हो जाता था और बैंक खाते या ई-वॉलेट से रकम निकाल ली जाती थी।

    Swiggy-Instamart से खपाते थे ठगी की रकम

    जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ठगी की रकम को छिपाने के लिए Swiggy और Instamart जैसे क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म से महंगे सामान की ऑनलाइन खरीदारी कर उसे अलग-अलग राज्यों में डिलीवर कराते थे, जिससे पैसों का ट्रैक करना मुश्किल हो जाए। इससे पहले भी इसी तरह के मामले में WinGo ऐप के जरिए ठगी करने वाले तीन आरोपियों को महाराष्ट्र, ओडिशा और उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार किया जा चुका है।

    पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि—

        केवल Play Store या App Store से ही ऐप डाउनलोड करें।
        “गारंटीड मुनाफा” या “आसान कमाई” के झांसे में न आएं।
        अनावश्यक रूप से SMS, कॉन्टैक्ट या बैंक संबंधी अनुमति मांगने वाले ऐप इंस्टॉल न करें।
        किसी भी अज्ञात लिंक या APK फाइल पर क्लिक न करें।
        साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।

     

  • जर्मन कप में बायर्न का दमदार प्रदर्शन, लीपजिग को हराकर सेमीफाइनल में एंट्री

    जर्मन कप में बायर्न का दमदार प्रदर्शन, लीपजिग को हराकर सेमीफाइनल में एंट्री

    बर्लिन
    बायर्न म्यूनिख ने 2020 के बाद पहली बार जर्मन कप के सेमीफाइनल में प्रवेश कर लिया है। क्वार्टरफाइनल में आरबी लीपजिग को 2-0 से हराकर बायर्न ने सेमीफाइनल में जगह बना ली। दोनों गोल दूसरे हाफ में आए।

    लीपजिग ने मैच की शुरुआत आक्रामक अंदाज में की। क्रिस्टोफ बॉमगार्टनर ने चौथे मिनट में गोल भी कर दिया था, लेकिन वीएआर समीक्षा के बाद इसे ऑफसाइड करार दिया गया। इसके बाद बायर्न ने धीरे-धीरे खेल पर पकड़ बनानी शुरू की। हैरी केन ने शुरुआती मिनटों में गोलकीपर मार्टेन वेंडेवोर्ड्ट को कठिन बचाव करने पर मजबूर किया, जबकि 11वें मिनट में कैस्टेलो लुकेबा ने रिबाउंड पर संभावित गोल को लाइन से हटाकर टीम को राहत दी।

    पहले हाफ के मध्य में बायर्न ने दबाव बढ़ाया। लुइस डियाज और केन ने करीब से गोल करने की कोशिश की, लेकिन लीपजिग का डिफेंस मजबूती से डटा रहा। एक विवादित क्षण तब आया जब जोसिप स्टैनिसिक ने एंटोनियो नुसा को पेनल्टी बॉक्स के बाहर गिराया, पर रेफरी ने पेनल्टी नहीं दी। हाफ टाइम तक दोनों टीमें गोलरहित रहीं।

    दूसरे हाफ में मुकाबला संतुलित रहा, लेकिन 64वें मिनट में निर्णायक मोड़ आया। लीपजिग के गोलकीपर वेंडेवोर्ड्ट स्टैनिसिक को चैलेंज करते हुए फिसल गए और बायर्न को पेनल्टी मिल गई। हैरी केन ने शांतचित्त होकर पेनल्टी को गोल में बदला और टीम को बढ़त दिलाई। इसके तीन मिनट बाद ही लुइस डियाज ने 67वें मिनट में दूसरा गोल दागकर बढ़त दोगुनी कर दी।

    इसके बाद बायर्न ने खेल पर पूरा नियंत्रण बनाए रखा और लीपजिग को वापसी का मौका नहीं दिया। इस जीत के साथ बायर्न सेमीफाइनल में बायर लेवरकुसेन, स्टटगार्ट और फ्रीबर्ग के साथ शामिल हो गया है। अंतिम चार के लिए ड्रॉ 22 फरवरी को होगा।

    मैच के बाद लीपजिग के चेयरमैन ओलिवर मिंट्जलाफ ने बायर्न को बधाई देते हुए कहा कि उनकी टीम ने अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन भविष्य में बायर्न को हराने के लिए और मेहनत की जरूरत होगी।

     

  • छत्तीसगढ़ की 4 सेंट्रल जेलों को मिला आईएसओ गुणवत्ता प्रमाणन

    छत्तीसगढ़ की 4 सेंट्रल जेलों को मिला आईएसओ गुणवत्ता प्रमाणन

    रायपुर.

    छत्तीसगढ़ की जेल व्यवस्थाओं में गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। उप मुख्यमंत्री एवं जेल विभाग के प्रभारी मंत्री विजय शर्मा के निर्देशन में राज्य की जेलों की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे है। इन्हीं प्रयासों का ही यह परिणाम है कि छत्तीसगढ़ की सेंट्रल जेल रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर एवं अम्बिकापुर को अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानक आईएसओ 9001ः2015 का प्रमाणन प्राप्त हुआ है। 

    उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा द्वारा जेलों में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कार्यप्रणाली स्थापित करने के उद्देश्य से आईएसओ सर्टिफिकेशन कराने की पहल की थी। यह प्रक्रिया पूर्ण कर राज्य की चार प्रमुख केंद्रीय जेलों को प्रमाणन प्राप्त हो गया है। इस प्रमाणन से जेल प्रशासन में कार्य प्रक्रियाओं में एकरूपता एवं पारदर्शिता, बंदी कल्याण और मानवाधिकार संरक्षण को बढ़ावा, जोखिम प्रबंधन और जवाबदेही में सुधार, जनविश्वास एवं संस्थागत विश्वास में वृद्धि जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को मजबूती मिलेगी। यह पहल राज्य की सुधारात्मक न्याय प्रणाली को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। राज्य सरकार का उद्देश्य जेलों को केवल निरुद्ध स्थान के रूप में नहीं, बल्कि सुधार एवं पुनर्वास केंद्र के रूप में विकसित करना है। 

  • ईरान की हाइपरसोनिक मिसाइलों का तोड़ तैयार? डेविड्स स्लिंग के साथ इजरायल का नया प्लान

    ईरान की हाइपरसोनिक मिसाइलों का तोड़ तैयार? डेविड्स स्लिंग के साथ इजरायल का नया प्लान

    इजरायल 

    इजरायल की उन्नत वायु रक्षा प्रणाली डेविड्स स्लिंग ने एक बार फिर अपनी शक्ति साबित की है। भविष्य में बढ़ते मिसाइल खतरों, खासकर ईरान जैसे दुश्मनों को ध्यान में रखते हुए, इजरायल ने इस मध्यम दूरी की एयर डिफेंस सिस्टम के कई जटिल और चुनौतीपूर्ण परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए हैं।

    इजरायल ने तैयार कर लिया ईरान की हाइपरसोनिक मिसाइलों का तोड़, डेविड्स स्लिंग के साथ क्या प्लान?

    इजरायल की उन्नत वायु रक्षा प्रणाली डेविड्स स्लिंग ने एक बार फिर अपनी शक्ति साबित की है। भविष्य में बढ़ते मिसाइल खतरों, खासकर ईरान जैसे दुश्मनों को ध्यान में रखते हुए, इजरायल ने इस मध्यम दूरी की एयर डिफेंस सिस्टम के कई जटिल और चुनौतीपूर्ण परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए हैं। ये परीक्षण जून 2025 में ईरान के साथ हुए 12 दिनों के युद्ध से सीखे गए महत्वपूर्ण सबकों पर आधारित हैं, जहां डेविड्स स्लिंग ने लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों को भी सफलतापूर्वक रोक लिया था। यह प्रणाली इजरायल की बहु-स्तरीय रक्षा ढांचे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें आयरन डोम (छोटी दूरी), डेविड्स स्लिंग (मध्यम दूरी) और एरो (लंबी दूरी) शामिल हैं।

    रक्षा मंत्रालय ने बुधवार को बताया कि भविष्य के खतरों के लिए तैयारियों को मजबूत करने के उद्देश्य से इस मध्यम दूरी की एयर डिफेंस प्रणाली के साथ कई उन्नत परीक्षण किए गए। राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स द्वारा विकसित डेविड्स स्लिंग को 40 से 300 किलोमीटर की दूरी तक रॉकेट, बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइल, विमान तथा मानव रहित हवाई वाहन (यूएवी/ड्रोन) को मार गिराने के लिए तैयार किया गया है। इन परीक्षणों के नए चरण की घोषणा ऐसे समय में हुई जब प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू वॉशिंगटन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ वार्ता कर रहे थे। यह घटनाक्रम क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच सामने आया है, जहां तेहरान की ओर से संभावित हमले की आशंका जताई जा रही है।

    रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ये अभ्यास जून 2025 में ईरान के साथ हुए 12 दिवसीय युद्ध से प्राप्त 'परिचालन अनुभवों' पर आधारित थे। इसमें मौजूदा और उभरते खतरों के अनुरूप कई चुनौतीपूर्ण परिदृश्य शामिल किए गए। मंत्रालय ने कहा कि परीक्षणों की सफलता प्रणाली के तकनीकी और परिचालन उन्नयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। युद्ध के दौरान इस प्रणाली ने उच्च प्रदर्शन दिखाया और सफल अवरोधनों से कई जानें बचाईं तथा बड़े नुकसान को टाला।

    बता दें कि डेविड्स स्लिंग वर्ष 2017 से इजरायल में सक्रिय है और देश की बहु-स्तरीय वायु रक्षा प्रणाली का मध्य स्तर बनाती है। इस ढांचे में कम दूरी के लिए आयरन डोम और आयरन बीम शामिल हैं, जबकि लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने के लिए शीर्ष स्तर पर एरो-3 प्रणाली तैनात है। डेविड्स स्लिंग के उन्नयन से एरो-3 पर दबाव कम होता है। एरो-3 को इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज ने लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों का मुकाबला करने के लिए विकसित किया है। जहां डेविड्स स्लिंग की एक मिसाइल दागने की लागत लगभग 10 लाख डॉलर है, वहीं एरो-3 के इस्तेमाल पर 25 लाख डॉलर से अधिक खर्च आ सकता है।

    हालांकि डेविड्स स्लिंग को मूल रूप से लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने के लिए डिज़ाइन नहीं किया गया था, लेकिन रक्षा सूत्रों के अनुसार जून 2025 में ईरान के साथ संघर्ष के दौरान इसे तैनात किया गया और इसने लगभग 1500 किलोमीटर दूर से दागी गई कई मिसाइलों को सफलतापूर्वक निष्क्रिय किया। इससे पहले इसका उपयोग मुख्य रूप से गाजा पट्टी और लेबनान से हमास तथा हिज़बुल्लाह द्वारा दागे गए मध्यम दूरी के रॉकेटों के खिलाफ किया जाता था।

    सेना के अनुसार, जून के संघर्ष के दौरान तेहरान की ओर से दागी गई लगभग 550 बैलिस्टिक मिसाइलों और 1000 से अधिक ड्रोनों में से करीब 85 प्रतिशत को सफलतापूर्वक मार गिराया गया।

  • पाकिस्तान में 13 साल की ईसाई लड़की का अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन और निकाह का आरोप

    पाकिस्तान में 13 साल की ईसाई लड़की का अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन और निकाह का आरोप

    इस्लामाबाद
    पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार रुकने का नाम नहीं ले रहा। बार-बार ऐसे मामले सामने आते हैं जहां अल्पसंख्यक समुदाय की मासूम बच्चियों का अपहरण कर उनके धर्म को जबरन बदल दिया जाता है और छोटी उम्र में ही जबरदस्ती शादी कर दी जाती है। एक बार फिर ऐसा ही एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। ह्यूमन राइट्स फोकस पाकिस्तान (HRFP) ने पाकिस्तान के साहिवाल जिले की तहसील चिचावतनी में 13 वर्षीय ईसाई लड़की सतीश मरियम के अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन और जबरन शादी पर गहरी चिंता जताई है।

    11 जनवरी को दर्ज हुआ था मामला
    रिपोर्ट के अनुसार, 11 जनवरी 2026 को पाकिस्तान दंड संहिता की धारा 365-बी के तहत एफआईआर दर्ज की गई। आरोप है कि सतीश मरियम का अपहरण 10 और 11 जनवरी की रात के बीच हुआ। उसके पिता दिहाड़ी मजदूर बशारत मसीह ने बताया कि स्थानीय लोगों ने अली हैदर गुलजार को कुछ अज्ञात साथियों के साथ नाबालिग लड़की को जबरन गाड़ी में ले जाते देखा था। बशारत मसीह ने एचआरएफपी टीम को बताया कि पुलिस ने शिकायत दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू की है, लेकिन अभी तक कोई संतोषजनक प्रगति नहीं हुई है।

    बताया गया कि यह घटना तब हुई जब सतीश की मां शाहनाज बीबी एड़ी में फ्रैक्चर के कारण चलने-फिरने में असमर्थ थीं। परिवार के अनुसार, सतीश घर के काम के लिए बाहर गई थी, तभी उसे जबरन उठा लिया गया। कानून प्रवर्तन अधिकारियों से बार-बार गुहार लगाने और कराची में लड़की के होने के दावों के बावजूद, परिवार का आरोप है कि उसे ढूंढने के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किए गए। 22 जनवरी 2026 को अपहरण के मामले को आगे बढ़ाने के लिए परिवार के घर में कई व्यक्तियों द्वारा कथित तौर पर घुसपैठ की गई, धमकियां दी गईं और उन्हें डराया-धमकाया गया, जिसके बाद दूसरी एफआईआर दर्ज की गई। इसमें पाकिस्तान दंड संहिता की धारा 452, 506, 148 और 149 के तहत घर में जबरन घुसने, आपराधिक धमकी और गैरकानूनी जमावड़े से जुड़े आरोप लगाए गए।

    लड़की ने कबूल कर लिया है इस्लाम
    रिपोर्ट के अनुसार, मामला तब और गंभीर हो गया जब कथित अपहरणकर्ता ने दावा किया कि नाबालिग लड़की ने इस्लाम कबूल कर लिया है और शादी भी कर ली है। पीड़िता के परिवार का कहना है कि सतीश के बयान दर्ज किए गए थे और 28 जनवरी को चिचावतनी के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश नूर मोहम्मद दोथर के समक्ष हुई अदालती सुनवाई में अपहरणकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाया गया। इसमें माता-पिता को बेटी से मिलने की इजाजत नहीं दी गई और कानूनी जानकारी के बिना कार्यवाही की गई।

    3 फरवरी 2026 को एचआरएफपी कार्यालय में बोलते हुए सतीश के माता-पिता ने न्याय की अपनी मांग दोहराई। सतीश की मां शाहनाज बीबी ने कहा कि वह घर पर अकेली है, स्वास्थ्य खराब होने के कारण बेटी की रक्षा नहीं कर पा रही है और लगातार मिल रही धमकियों से परिवार की सुरक्षा को लेकर बेहद चिंतित हैं। माता-पिता का कहना है कि सतीश नाबालिग है, इसलिए कानूनी रूप से न तो विवाह की सहमति दे सकती है और न ही धर्म परिवर्तन कर सकती है।

    सुरक्षा की मांग
    ह्यूमन राइट्स फोकस पाकिस्तान के अध्यक्ष नवीद वाल्टर ने अल्पसंख्यक नाबालिग लड़कियों के जबरन धर्मांतरण और बाल विवाह से सुरक्षा, पीड़ित परिवारों द्वारा झेली जा रही धमकियों व उत्पीड़न, बिना पूर्ण पारदर्शिता और प्रतिनिधित्व के कानूनी कार्यवाही तथा नाबालिग की सुरक्षा व कल्याण को लेकर गंभीर चिंता जताई है। वहीं, एचआरएफपी अध्यक्ष नवीद वाल्टर ने सतीश मरियम के माता-पिता को उनके दौरे के दौरान आश्वासन दिया कि हम सतीश मरियम और उनके परिवार के साथ पूरी एकजुटता से खड़े हैं। हम संबंधित अधिकारियों से निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने, नाबालिग के अधिकारों की रक्षा करने और परिवार को उत्पीड़न व धमकियों से सुरक्षा प्रदान करने की मांग करते हैं।

     

  • बांग्लादेश में वोटिंग खत्म, कई बूथों पर बवाल, महिला एजेंट्स से बदसलूकी के आरोप

    बांग्लादेश में वोटिंग खत्म, कई बूथों पर बवाल, महिला एजेंट्स से बदसलूकी के आरोप

    ढाका
     बांग्लादेश में गुरुवार को 13वें संसदीय चुनाव के लिए वोटिंग संपन्न हो गई है। कड़ी सुरक्षा और लोगों में भारी उत्साह के बीच 299 सीटों पर वोट डाले गए। हालांकि, वोटिंग के दौरान भारी हिंसा और पोलिंग बूथों पर महिला एजेंट्स के साथ बदतमीजी का भी मामला सामने आया है। देश भर के 42,659 पोलिंग बूथों पर सुबह 7:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक वोटिंग हुई। बांग्लादेशी मीडिया की ओर से जारी साझा जानकारी के अनुसार, शेरपुर-3 सीट पर एक उम्मीदवार की मौत के बाद चुनाव टाल दिया गया है। 299 सीटों पर कुल 127,298,522 वोटर वोट डालने के लिए उपयुक्त थे। इनमें से 64,620,077 पुरुष वोटर, 62,677,232 महिला वोटर और 1,213 थर्ड-जेंडर वोटर शामिल हैं। अगर कुल 300 सीटों की बात करें तो वोटरों की कुल संख्या 127,711,899 है। चुनाव आयोग की ओर से बांग्लादेशी मीडिया को बताया गया कि दोपहर दो बजे तक 48 फीसदी वोटिंग हुई। निर्दलीय उम्मीदवार तस्नीम जारा ने आरोप लगाया कि ढाका-9 चुनाव क्षेत्र में कई जगहों पर महिला पोलिंग एजेंट्स को परेशान किया जा रहा है और पोलिंग सेंटरों में घुसने से रोका जा रहा है।
    जारा ने खिलगांव मॉडल कॉलेज पोलिंग सेंटर का दौरा करने के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा कि उनके पोलिंग एजेंट्स, खासकर महिलाओं को, कई सेंटरों में घुसने की कोशिश करते समय रुकावटों का सामना करना पड़ रहा है।
    उन्होंने कहा, “हमारे पोलिंग एजेंट्स को अलग-अलग बहानों से पोलिंग सेंटरों में घुसने से रोका जा रहा है। उन्हें अंदर नहीं जाने दिया जा रहा है, और महिला एजेंट्स को परेशान किया जा रहा है।”
    जारा ने आरोप लगाया कि पोलिंग बूथों के अधिकारी मनमाने नियम बनाकर रुकावटें पैदा कर रहे हैं। महिला एजेंट्स को अंदर जाने से रोका गया, सेंटर छोड़ने के लिए मजबूर किया गया, या उन्हें अलग-अलग निर्देश दिए गए।
    बता दें कि इससे पहले भी बांग्लादेश की निर्दलीय महिला उम्मीदवारों ने आरोप लगाया कि उन्हें परेशानी हो रही है। महिलाओं को चरित्र हनन या धमकियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, दो पोलिंग बूथ, गोपालगंज और मुंशीगंज में धमाके की जानकारी भी सामने आई।

  • रेप केस में DNA से मिली क्लीन चिट, लेकिन हाईकोर्ट सख्त—पुलिस जांच पर उठाए गंभीर सवाल

    रेप केस में DNA से मिली क्लीन चिट, लेकिन हाईकोर्ट सख्त—पुलिस जांच पर उठाए गंभीर सवाल

    भोपाल
    मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दुष्कर्म मामले में सुनवाई के दौरान पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई है। जस्टिस जीएस अहलूवालिया की एकलपीठ ने डीएनए रिपोर्ट में आरोपी के निर्दोष पाए जाने के बावजूद असली आरोपी की तलाश शुरू न करने पर पुलिस विभाग को आड़े हाथों लिया। कोर्ट ने डीजीपी से पूछा कि क्या उनके अधीनस्थ अधिकारियों को दोबारा प्रशिक्षण की जरूरत है या आम जनता ऐसे ही पुलिस की कानूनी जानकारी की कमी का खामियाजा भुगतती रहे।

    बार एंड बेंच में छपी खबर के मुताबिक, मामला बैतूल जिले का है। आरोपी को 10 अक्टूबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था और उसके खिलाफ चालान पेश किया जा चुका था। दिसंबर 2025 में आई डीएनए रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि आरोपी नाबालिग पीड़िता से जन्मे बच्चे का जैविक पिता नहीं है। इसके बावजूद पुलिस ने वास्तविक आरोपी की पहचान और गिरफ्तारी के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

    अदालत की टिप्पणी- पुलिस अधिकारियों को प्रशिक्षण की जरूरत
    10 फरवरी को जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने बैतूल के पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र जैन से पूछा कि डीएनए रिपोर्ट के बाद आगे क्या कार्रवाई की गई। कोर्ट ने पाया कि एसपी संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। आदेश में कहा गया कि यह स्थिति राज्य के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के प्रशिक्षण पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

    डीएनए जांच में आरोपी को क्लीन चिट
    कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि दो अन्य दुष्कर्म मामलों में भी शुरुआती तौर पर गिरफ्तार किए गए आरोपी बाद में डीएनए जांच में निर्दोष पाए गए, लेकिन पुलिस ने समय रहते वास्तविक आरोपियों की तलाश में सक्रियता नहीं दिखाई। पीठ ने टिप्पणी की कि ऐसा प्रतीत होता है कि पुलिस विभाग अपनी कार्यप्रणाली में सुधार को लेकर गंभीर नहीं है।

    हालांकि, कोर्ट ने एसपी के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई का आदेश नहीं दिया, बल्कि डीजीपी से यह विचार करने को कहा कि क्या विभाग को सक्षम और विधिक रूप से प्रशिक्षित अधिकारियों की आवश्यकता है? कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि आगे की जांच ट्रायल कोर्ट से अनुमति लेकर की जाए, क्योंकि चार्जशीट दाखिल होने के बाद आगे की जांच के लिए न्यायालय की अनुमति आवश्यक है, जैसा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों में निर्धारित है।

    जमानत अर्जी खारिज
    कोर्ट ने कहा कि चूंकि बच्चा जीवित है, इसलिए सभी संभावित संदिग्धों के रक्त नमूने लेकर जैविक पिता की पहचान सुनिश्चित की जाए। जहां तक जमानत का सवाल है, कोर्ट ने आरोपी की याचिका खारिज कर दी। पीठ ने कहा कि केवल डीएनए रिपोर्ट के आधार पर पीड़िता के बयान को खारिज नहीं किया जा सकता। चूंकि अभी पीड़िता का साक्ष्य दर्ज नहीं हुआ है, इसलिए इस स्तर पर आरोपी को जमानत नहीं दी जा सकती। बता दें कि आरोपी की ओर से अधिवक्ता प्रदीप सिंह चौहान ने पैरवी की, जबकि राज्य की ओर से शासकीय अधिवक्ता स्वाति जॉर्ज उपस्थित रहीं।

  • मेला स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का सशक्त माध्यम-मंत्री  केदार कश्यप

    मेला स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का सशक्त माध्यम-मंत्री केदार कश्यप

    रायपुर.

    माता मावली मेले में विकास की सौगात
         
    नारायणपुर में आयोजित ऐतिहासिक माता मावली मेले में छत्तीसगढ़ शासन के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री  केदार कश्यप तथा राजस्व एवं उच्च शिक्षा मंत्री  टंकराम वर्मा शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने माता मावली की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों, विशेषकर जिलेवासियों को शुभकामनाएं दीं।
        
    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री  कश्यप ने कहा कि मावली माता के आशीर्वाद से बस्तर की समृद्ध लोकसंस्कृति और परंपराएं सदैव अक्षुण्ण रहें। उन्होंने कहा कि नारायणपुर का यह मेला सामाजिक समरसता, लोककला और परंपरा का जीवंत संगम है, जहां दूर-दूर से लोग पहुंचकर बस्तर की संस्कृति से रूबरू होते हैं। उन्होंने सभी को मेले में शामिल होकर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लेने का आग्रह किया।
          
    मंत्री द्वय ने मेले में लगे विभिन्न दुकानों एवं विभागीय स्टॉलों का अवलोकन किया तथा स्थानीय उत्पादों और पूजा सामग्री की खरीदारी भी की। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करते हैं।
          
    इस अवसर पर कुल 1 करोड़ 76 लाख 59 हजार रुपये के कार्यों का भूमिपूजन तथा 59 लाख 51 हजार रुपये के कार्यों का लोकार्पण किया गया। मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप 10 प्राथमिक शाला भवनों के निर्माण हेतु भूमिपूजन किया गया, जिनकी स्वीकृत राशि 1 करोड़ 41 लाख 60 हजार रुपये है। इसके अलावा जनपद पंचायत ओरछा के ग्राम कुतुल एवं जाटलूर में दो-दो बाजार शेड निर्माण के लिए 34 लाख 99 हजार रुपये स्वीकृत किए गए।
          
    जनपद पंचायत नारायणपुर अंतर्गत बागडोंगरी, पालकी और महिमागवाड़ी में 59 लाख 51 हजार रुपये की लागत से निर्मित खाद्यान्न भवनों का लोकार्पण किया गया। साथ ही नेलवाड़ और खोड़गांव में 100-100 मैट्रिक टन क्षमता के गोदामों का भी लोकार्पण किया गया।
           
    कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ के अध्यक्ष रूपसाय सलाम, जिला पंचायत अध्यक्ष नारायण मरकाम, नगरपालिका अध्यक्ष इंद्रप्रसाद बघेल, कलेक्टर नम्रता जैन, पुलिस अधीक्षक सहित जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित

  • नरवणे की किताब लीक पर घमासान! साजिश की बू या लापरवाही? पेंगुइन इंडिया से पुलिस के 15 तीखे सवाल

    नरवणे की किताब लीक पर घमासान! साजिश की बू या लापरवाही? पेंगुइन इंडिया से पुलिस के 15 तीखे सवाल

    नई दिल्ली
    पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की किताब लीक मामले में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने छानबीन तेज कर दी है। इस सिलसिले में प्रकाशक पेंगुइन इंडिया के प्रतिनिधियों से पूछताछ की गई है। सूत्रों की मानें तो पुलिस 15 सवालों के जवाब जानना चाहती है। स्पेशल सेल तकनीकी सबूतों के जरिए यह पता लगाने में जुटी है कि यह पूरी घटना किसी साजिश का हिस्सा तो नहीं है।

    कोई आपराधिक साजिश तो नहीं?
    पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि स्पेशल सेल की छानबीन अब इस बात पर फोकस है कि क्या पांडुलिपि के कथित लीक के पीछे कोई आपराधिक साजिश तो नहीं थी। हाल ही में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने नरवणे की किताब के कथित लीक की जांच में आपराधिक साजिश के आरोप भी जोड़ दिए हैं।

    15 सवालों के जवाब चाह रही स्पेशल सेल
    पुलिस सूत्रों ने बताया कि स्पेशल सेल ने पेंगुइन इंडिया को नोटिस जारी कर 15 अहम सवालों के जवाब मांगे थे। जांच एजेंसी ने कंपनी से पांडुलिपि की हैंडलिंग, डिजिटल और फिजिकल एक्सेस, एडिटिंग प्रक्रिया, प्रिंटिंग से पहले की सुरक्षा व्यवस्था और ड्राफ्ट कॉपी तक किन-किन लोगों की पहुंच थी, जैसे बिंदुओं पर जानकारी तलब की थी।

    पेंगुइन इंडिया के प्रतिनिधियों से पूछताछ
    वहीं जांच टीम ने पेंगुइन इंडिया के प्रतिनिधियों से विस्तृत पूछताछ की है। कंपनी के प्रतिनिधि पूछताछ के लिए पेश हुए। उन्होंने कुछ सवालों के जवाब जांच एजेंसी को सौंप दिए हैं। कुछ बिंदुओं पर विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराने के लिए अतिरिक्त समय मांगा गया है। स्पेशल सेल अब पेंगुइन इंडिया द्वारा दिए गए जवाबों और दस्तावेजों का विश्लेषण कर रही है।

    डिजिटल ट्रेल की भी जांच
    जांच में इस सवाल का भी जवाब तलाशा जा रहा है कि क्या यह घटना किसी आंतरिक लापरवाही का नतीजा है। इस मामले में किसी की गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस तकनीकी साक्ष्यों और डिजिटल ट्रेल की भी जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही जिम्मेदारी तय की जा सकेगी।

    नहीं प्रकाशित की पुस्तक- पेंगुइन इंडिया
    गौरतलब है कि राहुल गांधी ने लोकसभा में इसके कुछ अंश का जिक्र करते हुए सरकार की घेरेबंदी की थी। इसके बाद पुस्तक को लेकर विवाद बढ़ गया। पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने अपने बयान में कहा कि हम स्पष्ट कर रहे हैं कि पुस्तक का प्रकाशन नहीं हुआ है। पुस्तक की कोई भी प्रति प्रिंट या डिजिटल रूप में जनता के लिए उपलब्ध नहीं कराई गई है।

    फिर कैसे लीक हो गए बुक के अंश?
    ऐसे में सवाल उठता है कि जब किताब प्रकाशित नहीं हुई तो इसके अंश आम कैसे हो गए? पुलिस सूत्रों ने बताया कि अप्रकाशित पांडुलिपि कथित तौर पर कैसे प्रसारित हुई? इसके जवाब तलाशे जा रहे हैं।