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  • इंदौर में आईईटी में रैगिंग के लिए उकसाया, प्रथम वर्ष के चार विद्यार्थी होंगे निष्कासित

    इंदौर में आईईटी में रैगिंग के लिए उकसाया, प्रथम वर्ष के चार विद्यार्थी होंगे निष्कासित

    इंदौर.

    इंस्टिट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (आईईटी) ने रैगिंग को लेकर रिपोर्ट तैयार कर ली है, जिसमें प्रथम वर्ष के चार विद्यार्थियों पर सख्त कार्रवाई की गई है। इन्हें सीनियर को रैगिंग दिए जाने को लेकर सहपाठियों पर दबाव बनाने का दोषी पाया गया है। एंटी रैगिंग कमेटी (एआरसी) ने चार विद्यार्थियों को कोर्स से बाहर करने का फैसला लिया है।

    रिपोर्ट में निष्कासन की अनुशंसा की गई है। जबकि 11 विद्यार्थियों को हॉस्टल से बाहर कर दिया गया है। इन पर अर्थदंड भी लगाया गया है। रैगिंग की रिपोर्ट कुलगुरु डॉ. राकेश सिंघई को भेज दी गई। करीब दो सप्ताह पहले प्रथम वर्ष के कुछ विद्यार्थियों ने रैगिंग की शिकायत दर्ज कराई थी। बताया गया था कि डी हॉस्टल में कुछ छात्र जूनियर्स पर दबाव बनाते हैं। आरोप था कि उन्हें सीनियर्स के पास जाकर जबरन परिचय देने के लिए उकसाया जाता है। इतना ही नहीं, सिगरेट पीने के लिए भी मजबूर किया जाता है।

    बैच आउट कर दिया जाता है
    इन्कार करने पर विद्यार्थियों को ‘बैच आउट’ कर दिया जाता है। 'बैच आउट' यानी ऐसे विद्यार्थियों को सांस्कृतिक और शैक्षणिक गतिविधियों से दूर रखा जाता है। उन्हें सीनियर्स के सामने सिर झुकाकर और हाथ जोड़कर बात करने को कहा जाता है। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए संस्थान ने तुरंत जांच शुरू कर दी। शिकायत के अलावा एंटी रैगिंग कमेटी ने ऑडियो रिकॉर्डिंग की भी जांच की। इसमें प्रथम वर्ष के कुछ विद्यार्थी अपने सहपाठियों को रैगिंग देने के लिए उकसाते हुए पाए गए। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ द्वितीय वर्ष के विद्यार्थी भी इस पूरे मामले में शामिल थे। करीब दो सप्ताह की जांच के बाद कमेटी ने करीब 15 विद्यार्थियों को दोषी पाया। इनमें से चार प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों पर गंभीर आरोप साबित हुए। कमेटी ने इन्हें बीटेक कोर्स से बाहर करने की सिफारिश की है। रिपोर्ट कुलगुरु डॉ. राकेश सिंघई को भेज दी गई है। अगले सप्ताह इस मुद्दे पर बैठक बुलाई गई है, जिसमें अंतिम फैसला लिया जाएगा।

    जुर्माना भी लगाया
    बीटेक के प्रथम व द्वितीय वर्ष के आठ विद्यार्थी ऐसे हैं, जो रैगिंग का समर्थन करते हैं। इन पर भी कमेटी ने सख्त कार्रवाई की है। भले ही इन्हें कोर्स से बाहर नहीं किया गया है, मगर इन विद्यार्थियों को हॉस्टल से निष्कासित कर दिया गया है। साथ ही दस हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। नोटिस मिलने के सात दिनों के भीतर विद्यार्थियों को अर्थदंड की राशि जमा करना है। समयावधि निकलने के बाद विद्यार्थियों पर अर्थदंड के साथ ही जुर्माना भी लगाया जाएगा। प्रतिदिन 100 रुपये रखा गया है। तीन विद्यार्थियों को पूर्व में भी रैगिंग में शामिल होना पाया गया था। इन पर दस हजार रुपये अर्थदंड लगाया गया है और कैम्पस प्लेसमेंट की गतिविधियों से बाहर कर दिया गया है।

    यूजीसी को भी भेजी रिपोर्ट
    आईईटी के निदेशक डॉ. प्रतोष बसंल का कहना है कि रैगिंग को लेकर कमेटी ने रिपोर्ट तैयार की है। चार विद्यार्थियों को कोर्स से बाहर करने की अनुशंसा की है। कुछ विद्यार्थियों को हॉस्टल और प्लेसमेंट से बाहर किया गया है। कुलगुरु और यूजीसी को रिपोर्ट भेज दी गई है। विश्वविद्यालय के अब फैसले के बाद कार्रवाई की जाएगी।

  • एपस्टीन का काला नेटवर्क: प्राइवेट जेट, ताकतवर लोग और नाबालिग लड़कियों का खेल

    एपस्टीन का काला नेटवर्क: प्राइवेट जेट, ताकतवर लोग और नाबालिग लड़कियों का खेल

    आईलैंड 
    जेफरी एपस्टीन का प्राइवेट आईलैंड लिटिल सेंट जेम्स कैरिबियन सागर में स्थित है, जो अमेरिकी वर्जिन द्वीप समूह में सेंट थॉमस के दक्षिण-पूर्व में है। यह लगभग 72 एकड़ का छोटा आईलैंड है, जिसे एपस्टीन ने 1998 में करीब 80 लाख डॉलर में खरीदा था। यहां सफेद रेत के समुद्र तट, नारियल के पेड़, नीले रंग की छत वाले भवन, स्विमिंग पूल, हेलीकॉप्टर लैंडिंग पैड, मुख्य विला, गेस्ट कॉटेज और डॉक जैसी सुविधाएं थीं। 2010 तक एपस्टीन ने द्वीप का बड़े पैमाने पर नवीनीकरण किया, जिसमें नई विलाएं, स्टोन केबिन और एक रहस्यमयी नीले-सफेद धारीदार भवन शामिल था, जिसे कुछ लोग टेम्पल कहते हैं। यह द्वीप अलग-थलग होने के कारण गोपनीय गतिविधियों के लिए सही माना जाता था, जहां नाव या हेलीकॉप्टर से ही पहुंचा जा सकता था।

    इस द्वीप पर एपस्टीन और उनकी सहयोगी घिस्लेन मैक्सवेल पर नाबालिग लड़कियों और महिलाओं के साथ यौन शोषण और मानव तस्करी के गंभीर आरोप लगे हैं। पीड़ितों के बयानों के अनुसार, यहां दुनिया भर से 12 साल की उम्र की लड़कियों को लाया जाता था, जिन्हें अमीर और प्रभावशाली लोगों को शेयर किया जाता था। वर्जीनिया गिफ्रे जैसी पीड़िताओं ने अपनी किताब में बताया कि उन्हें अपमान, मारपीट और बलात्कार का सामना करना पड़ा। 15 साल की लड़की ने कथित तौर पर द्वीप से भागने के लिए दो मील तैरकर सेंट थॉमस पहुंचने की कोशिश की। ईमेल और दस्तावेजों में स्वीट यंग कोकोनट्स जैसे संकेत और लिटिल गर्ल का जिक्र मिला है, जो यौन शोषण की ओर इशारा करते हैं। कई पीड़ितों ने बताया कि उन्हें छुट्टी के बहाने लाया गया लेकिन वे यौन हिंसा का शिकार बनीं।
    किन लोगों के नाम आए सामने

    एपस्टीन फाइल्स में अमेरिकी न्याय विभाग की ओर से जारी लाखों पन्नों के दस्तावेजों में द्वीप के ब्लूप्रिंट, फोटो, लॉगबुक और यात्रा रिकॉर्ड शामिल हैं। इनमें डोनाल्ड ट्रंप, व्लादिमीर पुतिन, प्रिंस एंड्र्यू, मार्क जुकरबर्ग, वुडी एलन जैसे कई बड़े नामों का जिक्र है। हालांकि, नाम आने से दोष सिद्ध नहीं होता और कई ने किसी गलत संबंध से इनकार किया है। फाइल्स में एपस्टीन की संपत्तियों से बरामद सीडी, फोटो और अन्य सबूतों की सूची भी है। एपस्टीन 2008 में बाल यौन अपराधों के लिए दोषी ठहराए गए थे और 2019 में सेक्स ट्रैफिकिंग के आरोपों में गिरफ्तार हुए, लेकिन जेल में उनकी मौत हो गई, जिसे सुसाइड बताया गया।
    कई सवालों के जवाब बाकी

    हाल के वर्षों में द्वीप को 2023 में 6 करोड़ डॉलर में बेच दिया गया है और नए मालिक स्टीफन डेकोफ इसे एक लग्जरी रिसॉर्ट में बदलने की योजना बना रहे हैं, ताकि इसकी कुख्यात इतिहास को मिटाया जा सके। एपस्टीन फाइल्स की रिलीज से कई सवालों के जवाब अभी बाकी हैं और पीड़ितों की आवाज को न्याय मिलने की उम्मीद बनी हुई है। यह मामला शक्ति, धन और गोपनीयता के दुरुपयोग की एक दुखद मिसाल बन चुका है।

  • शिवपुरी में तीन आरोपी शॉर्ट एनकाउंटर में गिरफ्तार, वकील संजय सक्सेना की हुई थी हत्या

    शिवपुरी में तीन आरोपी शॉर्ट एनकाउंटर में गिरफ्तार, वकील संजय सक्सेना की हुई थी हत्या

    शिवपुरी.

    शिवपुरी जिले में करैरा में कोर्ट जाते समय वकील संजय सक्सेना को गोली मारकर उनकी हत्या करने वाले शूटरों गोलू पुत्र अरविंद रावत, पपेंद्र पुत्र हरदास रावत, जहीर पुत्र रफीक को पुलिस ने अलसुबह हुए शॉर्ट एनकांउटर में गिरफ्तार कर लिया है। इस एनकाउंटर में पपेन्द्र को दो गोली लगने की जानकारी सामने आई है।

    करैरा में शनिवार सुबह करीब 11 बजे बदमाशों ने 57 वर्षीय वकील संजय कुमार सक्सेना की गोली मारकर हत्या कर दी थी। वह निचली बस्ती से गुर्जर दरवाजे होते हुए जंगल के सुनसान रास्ते से बाइक पर सवार होकर न्यायालय जा रहे थे। जिस तरह से घटना को अंजाम दिया गया है, उसे देखकर यह अंदेशा है कि बदमाशों ने पहले उनके आने-जाने के रास्ते की रैकी की थी और इसके बाद घात लगाकर उनके सीने में गोली उतार दी।

    करीब से मारी गई गोली
    पुलिस का मानना है कि आरोपियों ने वकील को रोककर बहुत करीब से उन्हें गोली मारी। स्वजन के आरोपों के आधार पर पुलिस ने केस दर्ज कर लिया था। अभिभाषक संघ ने भी दो दिन में आरोपितों की गिरफ्तारी न होने पर सोमवार से न्यायालय में काम बंद कर हड़ताल की चेतावनी दी थी। शाम करीब सात बजे पुलिस में अंतिम संस्कार किया गया।

    दूरी कम हो जाए इसलिए जंगल के रास्ते से जाते थे कोर्ट
    बताया जा रहा है कि एडवोकेट संजय सक्सेना अगर रोड वाले रास्ते से कोर्ट जाते तो उन्हें करीब आठ किमी की दूरी घर से कोर्ट जाने के लिए तय करनी पड़ती थी। वहीं जंगल वाले सुनसान रास्ते से महज चार किमी की दूरी तय करने पर वह कोर्ट पहुंच जाते थे। यही कारण था कि वह जंगल वाले सुनसान रास्ते का प्रयोग कोर्ट जाने में करते थे। इसी का लाभ हत्यारों ने उठाया।

  • बेटे के इलाज के लिए गूगल पर खोजा डॉक्टर का नंबर, 1.59 लाख रुपये की ऑनलाइन ठगी

    बेटे के इलाज के लिए गूगल पर खोजा डॉक्टर का नंबर, 1.59 लाख रुपये की ऑनलाइन ठगी

    शहडोल.

    शहडोल जिले के ब्यौहारी थाना क्षेत्र से ऑनलाइन ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। बेटे के इलाज के लिए डॉक्टर का नंबर गूगल पर सर्च करना एक परिवार को भारी पड़ गया। ठगों ने डॉक्टर बनकर बात की और उपचार के नाम पर एक ऐप डाउनलोड कराकर शिक्षक की पत्नी से एक लाख उनसठ हजार रुपये की ठगी कर ली। अब पीड़ित परिवार पैसे वापस दिलाने की मांग को लेकर पुलिस प्रशासन से गुहार लगा रहा है।

    जानकारी के अनुसार, ब्यौहारी निवासी शिक्षक शिवेश कुमार सिंह के छोटे बेटे का इलाज नागपुर में चल रहा है। बेटे की तबीयत खराब होने पर उसकी मां आरती सिंह डॉक्टर से अपाइंटमेंट लेने के लिए गूगल पर नंबर सर्च कर रही थीं, इसी दौरान उनका कॉल असली डॉक्टर के बजाय साइबर ठगों के पास पहुंच गया। ठगों ने खुद को डॉक्टर का स्टाफ बताते हुए विश्वास में लिया और एक मोबाइल ऐप डाउनलोड करने को कहा।

    खाते से रकम निकालना शुरू कर दी
    महिला ने जैसे ही ऐप डाउनलोड किया, ठगों ने चरणबद्ध तरीके से उनके खाते से रकम निकालनी शुरू कर दी। पहले दो बार में 50-50 हजार रुपये और फिर एक बार में 59 हजार रुपये ट्रांसफर करा लिए गए। इस तरह कुल एक लाख 59 हजार रुपये की ठगी हो गई। महिला की छोटी सी गलती के चलते न सिर्फ मेहनत की कमाई चली गई, बल्कि डॉक्टर का अपाइंटमेंट भी नहीं मिल सका। अब शिक्षक पिता अपने बीमार बेटे के इलाज और ठगी के शिकार हुए पैसे की वापसी के लिए करीब 100 किलोमीटर का सफर तय कर जिला मुख्यालय में पुलिस अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं। इस मामले में एडिशनल एसपी ने बताया कि शिकायत प्राप्त हुई है। महिला द्वारा डॉक्टर का नंबर गूगल पर सर्च किया गया था, जो ठगों के पास कनेक्ट हो गया। फिलहाल मामले की साइबर सेल के माध्यम से जांच कर उचित कार्रवाई की जा रही है।

  • ग्वालियर में बुजुर्ग की आत्महत्या मामले में खुलाशा, मारती और प्रताड़ित करती थी बड़ी बहू

    ग्वालियर में बुजुर्ग की आत्महत्या मामले में खुलाशा, मारती और प्रताड़ित करती थी बड़ी बहू

    ग्वालियर.

    शहर के थाटीपुर क्षेत्र में 95 वर्षीय बुजुर्ग की आत्महत्या के मामले में बड़ा राजफाश हुआ है। बुजुर्ग अपनी बड़ी बहू से प्रताड़ित थे। सुसाइड नोट में बहू पर गंभीर आरोप लगाए हैं। यह तक लिखा है-वह प्रताड़ित करती है, मारपीट भी करती है। अब जीने की स्थिति नहीं रही, इसलिए जान दे रहा हूं। पुलिस ने सुसाइड नोट जब्त कर लिया है।

    सुसाइड नोट की जांच हैंड राइटिंग एक्सपर्ट से होगी। इसके बाद ही इस मामले में एफआइआर होगी। थाटीपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत नेहरू कॉलोनी में रहने वाले 95 वर्षीय रामाधार गुप्ता डेयरी संचालक थे। कुछ समय से उनकी डेयरी बेटा सुरेश चंद्र गुप्ता संभाल रहा है। बीती रात रामाधार ने खुद को लाइसेंसी बंदूक से गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। पुलिस को सुसाइड नोट मिला था, जिसमें आत्महत्या की वजह लिखी थी। सुसाइड नोट में बड़ी बहू द्वारा दिन-रात प्रताड़ित किए जाने की बात लिखी है। पुलिस ने शनिवार को शव का पोस्टमार्टम कराया। इसके बाद शव स्वजन के सुपुर्द कर दिया। पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है।

    सुसाइड नोट के अंश…
    मैं रामाधार अपनी बड़ी बहू की प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या कर रहा हूं। बड़ी बहू द्वारा प्रताड़ित किया गया है, जिसके कारण यह कदम उठा रहा हूं। बड़ी बहू सुनीता बहुत परेशान करती है। यह परेशानी इतनी बढ़ गई है, अब मुझसे झिल नहीं रही है। मैं इस कारण ही आत्महत्या कर रहा हूं। बहुत कुछ सह चुका हूं, लेकिन अब यह सब झिल नहीं रहा है।
    उम्र 95 वर्ष हो चुकी है। सुनीता से कई बार कहा- मेरी उम्र अब मरने लायक है। ऐसे में कहां जाऊंगा। मेरी मौत का मामला सुनीता पर जरूर दर्ज किया जाए। मेरी छोटी बहू ख्याल रखती है।

    बड़ी बहू द्वारा प्रताड़ित किए जाने की बात लिखी
    बुजुर्ग की आत्महत्या के मामले की जांच जारी है। सुसाइड नोट में बड़ी बहू द्वारा प्रताड़ित किए जाने की बात लिखी है। इसकी जांच कराई जा रही है। अभी मर्ग कायम किया है। जांच के बाद आगामी कार्रवाई की जाएगी।
    – विपेंद्र सिंह चौहान थाना प्रभारी, थाटीपुर।

  • इंदौर में अब नहीं टूटेंगे मकान, नई ‘नेटम’ तकनीक से बनेगा छोटा गणपति मेट्रो स्टेशन

    इंदौर में अब नहीं टूटेंगे मकान, नई ‘नेटम’ तकनीक से बनेगा छोटा गणपति मेट्रो स्टेशन

    इंदौर.

    छोटा गणपति भूमिगत मेट्रो स्टेशन के निर्माण का रास्ता अब साफ हो गया है। मेट्रो के अन्य सभी भूमिगत स्टेशन में इसके निर्माण की तकनीक अलग रहेगी। यह न्यू आस्ट्रियन टनलिंग मैथ (नेटम) तकनीक से होगा। ओपन कट के बजाए इस तकनीक से निर्माण करने पर मल्हागंज क्षेत्र के 142 आवासीय व व्यावसायिक इमारतें बच जाएंगी यानी इन्हें नहीं तोड़ना पड़ेगा।

    गौरतलब है कि मल्हारगंज क्षेत्र में भवनों को तोड़े जाने की नौबत आने के कारण यहां के रहवासी पिछले कुछ महीनों से विरोध जता रहे थे। नौ फरवरी को इस संबंध में गांधी नगर स्थित मेट्रो डिपो कार्यालय में बैठक हुई। इसमें नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, पूर्व विधायक सत्यनारायण सत्तन और छोटा गणपति क्षेत्र के नागरिक भी शामिल हुए। मेट्रो के अधिकारियों ने सभी को छोटा गणपति मेट्रो स्टेशन की निर्माण की तकनीक बदलने के बाद उससे आवासीय व व्यावसायिक भवनों के प्रभावित न होने की जानकारी दी थी। इसके बाद शुक्रवार को भी मेट्रो के अधिकारियों ने स्थानीय लोगों को भूमिगत स्टेशन की तकनीक के बारे में बताया।

    रंगपंचमी के बाद शुरू होगा निर्माण
    एयरपोर्ट से रीगल तक सात भूमिगत मेट्रो स्टेशन प्रस्तावित हैं। इनमें रीगल व छोटा गणपति मेट्रो स्टेशन का निर्माण कार्य अभी शुरू नहीं हो सका है। शेष के लिए बोरिंग मशीनों के माध्यम से पाइलिंग का कार्य पूर्ण किया जा चुका है। छोटा गणपति मेट्रो स्टेशन के निर्माण पर रहवासियों के विरोध के कारण निर्माण कार्य अभी तक शुरू नहीं हुआ था। शनिवार को हुई बैठक में मंत्री विजयवर्गीय ने मेट्रो के अधिकारियों को जल्द से जल्द इस स्टेशन का निर्माण कार्य शुरू करने के निर्देश दिए। मेट्रो प्रबंधन रंगपंचमी के बाद इस स्टेशन का निर्माण कार्य शुरू करेगा।

    इस तरह तैयार होगा छोटा गणपति स्टेशन
    जियोटेक्नीकल इन्वेस्टिगेशन में प्रस्तावित भूमिगत मेट्रो स्टेशन की जमीन के 38 मीटर (लगभग 125 फीट) गहराई में कठोर चट्टानें मिली हैं। इस वजह से यह स्टेशन ज्यादा गहराई में बनेगा। मेट्रो के अन्य भूमिगत स्टेशन 18 से 22 मीटर गहराई पर बन रहे हैं।

    146 मीटर होगी स्टेशन की लंबाई
    पूर्व में स्टेशन का निर्माण ओपन कट पद्धति से 190 मीटर की लंबाई में प्रस्तावित था। इससे निर्माण क्षेत्र में 142 निजी आवासीय एवं व्यावसायिक मकान टूट रहे थे। अब स्टेशन की लंबाई 146 मीटर होगी। 142 भवन नहीं तोड़े जाएंगे।

    निगम का गार्डन व मल्हारगंज थाना टूटेगा
    इस भूमिगत स्टेशन के निर्माण के लिए मल्हारगंज क्षेत्र में बने नगर निगम के दो उद्यान उनकी बीच की 22 मीटर चौड़ी सड़क पर खोदाई होगी। यहां निगम की बनी 12 दुकानें, मल्हारगंज पुलिस स्टेशन, छह पुलिस क्वार्टर तोड़े जाएंगे। प्रवेश निकास गेट के लिए लाल अस्पताल की 0.09 हेक्टेयर आंशिक भूमि ली जाएगी।

    भूमिगत निर्माण की तकनीकों में यह है अंतर
    ओपन कट तकनीक: भूमिगत स्टेशन के लिए जमीन के ऊपर 146 से 190 मीटर लंबाई वाले हिस्से 300 से ज्यादा पिलर बोरिंग मशीन के माध्यम से जमीन की गहराई 18 से 22 मीटर तक तैयार किए जाते हैं। इसके बाद जमीन की ऊपरी सतह से स्टेशन की गहराई तक मिट्टी की खोदाई कर मेट्रो स्टेशन का निर्माण किया जाता है। नेटम तकनीक: स्टेशन के लिए जमीन के ऊपर कम जगह मिलने पर 80 मीटर लंबाई छोटा कट लगाकर जमीन में जहां कठोर चट्टानें मिलती हैं, उस गहराई तक पहुंचते हैं। उसके बाद जमीन की गहराई में कंट्रोल ब्लास्टिंग के माध्यम से अंडर ग्राउंड स्टेशन निर्माण के लिए जमीन के दोनों ओर लगभग 35-35 मीटर लंबाई में खोदाई कर विस्तार किया जाता है। इस तरह स्टेशन बनता है।

    सबसे छोटा होगा स्टेशन लेकिन गहराई में तीन मंजिला बनेगा
    वर्तमान में एयरपोर्ट से रीगल तक प्रस्तावित सात भूमिगत मेट्रो स्टेशन में से छोटा गणपति स्टेशन सबसे छोटा होगा। अन्य भूमिगत स्टेशन 190 मीटर लंबाई में बन रहे हैं। यह 146 मीटर में तैयार होगा। अन्य भूमिगत स्टेशन जमीन में नीचे दो मंजिला बनेंगे, जबकि यह स्टेशन जमीन के नीचे तीन मंजिला होगा।

    कवि सत्तन ने प्रस्तावित स्टेशन की मौजूदा स्थिति को इस तरह काव्य भाव से समझाया
    न किसी की गटर जाएगी,
    न किसी की शटर जाएगी,
    नीचे से मेट्रो निकल जाएगी।
    सब सुरक्षित रहेंगे,
    जो लोग भयग्रस्त थे वो निश्चिंत रहें…।

    इस तरह बनी सहमति
    9 फरवरी: मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, पूर्व विधायक सत्यनारायण सत्तन व मल्हारगंज के स्थानीय लोगों के साथ मेट्रो के अधिकारियों की बैठक हुई। 13 फरवरी: मल्हारगंज क्षेत्र के व्यापारी व रहवासियों के साथ बड़ा गणपति स्थित मेट्रो के आफिस में बैठक हुई और उन्हें तकनीक समझाई गई।

  • महामुकाबले से पहले कोलंबो अलर्ट मोड पर, चप्पे-चप्पे पर पुलिस का सख्त पहरा

    महामुकाबले से पहले कोलंबो अलर्ट मोड पर, चप्पे-चप्पे पर पुलिस का सख्त पहरा

    कोलंबो

    भारत और पाकिस्तान के बीच रविवार को टी20 विश्व कप 2026 का महामुकाबला कोलंबो में खेला जाएगा। इस मैच के लिए श्रीलंका की राजधानी में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, कड़े पहरे के बीच परिंदा भी पर नहीं मार सकेगा।

    विशेष ट्रैफिक और सुरक्षा व्यवस्था लागू
    कोलंबो के आर. प्रेमदासा स्टेडियम में होने वाले इस हाई-वोल्टेज मुकाबले को लेकर श्रीलंका पुलिस ने विशेष ट्रैफिक और सुरक्षा व्यवस्था लागू करने की घोषणा की है। पुलिस प्रवक्ता एफ. टी. वूटलर ने शनिवार को बताया कि मैच के आयोजन को देखते हुए किसी भी तरह की चूक की गुंजाइश नहीं छोड़ी जाएगी।

    पाकिस्तान ने किया था बहिष्कार का एलान
    भारत और पाकिस्तान के बीच यह मुकाबला उस समय हो रहा है, जब पिछले कुछ हफ्तों से अनिश्चितता का माहौल बना हुआ था। पाकिस्तान की ओर से बांग्लादेश के समर्थन में मैच के बहिष्कार की घोषणा के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी। मामले को सुलझाने के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी), बांग्लादेश, पाकिस्तान और श्रीलंका के बीच कई दौर की बातचीत हुई।

    श्रीलंका सरकार ने की पहल और मामले को सुलझाने में निभाई भूमिका
    श्रीलंका सरकार ने भी संभावित आर्थिक नुकसान को देखते हुए पाकिस्तान से रुख बदलने की अपील की थी। राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ से बातचीत कर टीम को कोलंबो भेजने का आग्रह किया था, ताकि टूर्नामेंट के सह-मेजबान के रूप में श्रीलंका की तैयारियों पर असर न पड़े।

  • मध्य प्रदेश में अवैध बसों पर कार्रवाई तेज, 16 फरवरी से चलेगा सख्त चेकिंग अभियान

    मध्य प्रदेश में अवैध बसों पर कार्रवाई तेज, 16 फरवरी से चलेगा सख्त चेकिंग अभियान

    इंदौर
    मध्य प्रदेश की सड़कों पर नियमों का उल्लंघन कर मनमाने तरीके से चल रही बसों के खिलाफ अब सख्त कार्रवाई की जाएगी। बिना परमिट या निर्धारित रूट का पालन न करने वाले बस ऑपरेटरों पर परिवहन विभाग शिकंजा कसने जा रहा है। नए परिवहन आयुक्त उमेश जोगा के पदभार ग्रहण करने के बाद विभाग ने सख्त रुख अपनाया है और 16 फरवरी से प्रदेशव्यापी विशेष जांच अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है।

    इंदौर, भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर जैसे प्रमुख शहरों में परमिट उल्लंघन की बढ़ती शिकायतों ने विभाग की चिंता बढ़ा दी है, जिसके चलते विस्तृत डेटा विश्लेषण भी किया जा रहा है। इंदौर में भी विशेष अभियान चलाकर बसों की जांच की जाएगी। पिछले वर्ष भी परिवहन कार्यालय इंदौर ने बसों की लगातार जांच का अभियान चलाया था, जिसमें लगभग 400 बसों पर कार्रवाई की गई थी।
     
    नियमों का उल्लंघन जारी
    हालांकि, पूरे साल चले अभियान के बावजूद नियमों का उल्लंघन जारी रहा है। अब एक बार फिर बड़े पैमाने पर जांच की जाएगी। इंदौर से विभिन्न रूटों पर प्रतिदिन लगभग एक हजार बसों का संचालन होता है। इन बसों में निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए परिवहन विभाग विशेष अभियान शुरू करेगा।

    जांच के दौरान बसों में कमियां पाए जाने पर जब्ती के साथ ही जुर्माने की कार्रवाई की जाती है। लगातार की जा रही कार्रवाई के कारण बस संचालक अपनी बसों की कमियों को दूर कर लेते हैं, जिससे हादसों पर अंकुश लगता है।

    इसी को ध्यान में रखते हुए परिवहन विभाग जांच अभियान को पुनः शुरू करने जा रहा है। स्लीपर बसों पर भी कार्रवाई की गई है, जिसमें फायर डिटेक्शन एंड सप्रेशन सिस्टम, आपातकालीन द्वार और ड्राइवर केबिन में नियमों के विरुद्ध पार्टीशन को लेकर कार्रवाई की गई है।

  • अब जनरल कोच भी चमकेंगे: AC कोच की तरह हर घंटे सफाई, AI करेगा निगरानी

    अब जनरल कोच भी चमकेंगे: AC कोच की तरह हर घंटे सफाई, AI करेगा निगरानी

     नई दिल्ली

    रेल मंत्री ने रेलवे रिफॉर्म प्लान 2026 के तहत 52 हफ्तों में 52 सुधार लागू करने की घोषणा की है। शनिवार को उन्होंने बताया पहले चरण में ट्रेनों की साफ-सफाई को प्राथमिकता दी जाएगी और इसके लिए सभी कोच में व्यापक सफाई अभियान चलाया जाएगा।

    हर जोन की 4 से 5 ट्रेनों को शामिल किया जाएगा
    रेल मंत्री के मुताबिक, इस योजना की शुरुआती चरण में हर जोन की 4 से 5 ट्रेनों को शामिल किया जाएगा। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से लंबी दूरी की करीब 80 ट्रेनों के एसी कोचों के साथ साथ जनरल कोचों में भी सफाई व्यवस्था लागू की जाएगी। इस दौरान टॉयलेट, डस्टबिन और कोच की सफाई के साथ किसी भी तकनीकी या मैकेनिकल समस्या की भी जांच की जाएगी।

    एआई आधारित तस्वीरें कंट्रोल रूम में भेजी जाएंगी
    पीक आवर में सफाई व्यवस्था मजबूत करने के लिए अतिरिक्त स्टाफ की तैनाती की जाएगी। साथ ही सफाई की निगरानी के लिए तकनीक का इस्तेमाल होगा। रेल मंत्री ने बताया कि एआई आधारित तस्वीरें कंट्रोल रूम में भेजी जाएंगी, जिससे रियल टाइम मॉनिटरिंग हो सकेगी। सफाई मानकों में कमी मिलने पर संबंधित वेंडर पर कार्रवाई की जाएगी, जबकि बेहतर प्रदर्शन करने वाले वेंडरों को ही आगे कॉन्ट्रैक्ट दिए जाएंगे।

    यात्रियों के किराए में किसी तरह की बढ़ोतरी नहीं
    रेल मंत्री ने कहा कि,इस व्यवस्था के लागू होने से रेलवे पर अतिरिक्त खर्च आएगा, लेकिन यात्रियों के किराए में किसी तरह की बढ़ोतरी नहीं की जाएगी। जरूरत के मुताबिक रेलवे अतिरिक्त कर्मचारियों की नियुक्ति भी करेगा। लंबी दूरी गाड़ियों के सभी कोच में हर घंटे साफ सफाई होगी।

    स्टाफ उतरकर जनरल कोच की सफाई करेगा
    इस अभियान के तहत एक इंटीग्रेटेड सिस्टम भी लगाया जाएगा। जिससे कोच की सफाई व्यवस्था को बेहतर तरीके से मॉनिटर किया जा सकेगा। अगर जनरल कोच कनेक्ट नहीं होगा तो स्टाफ उतरकर जनरल कोच की सफाई करेगा। इसके लिए रूट आधारित टीमें तैनात की जाएगी, जो तय रूट पर लगातार काम करेंगी।

  • बदलते मौसम का कहर: दिन में गर्मी, रात में ठंड; इंदौर में बढ़े मरीजों के मामले

    बदलते मौसम का कहर: दिन में गर्मी, रात में ठंड; इंदौर में बढ़े मरीजों के मामले

    इंदौर
    मौसम में लगातार हो रहे बदलाव का असर अब लोगों की सेहत पर साफ दिखाई देने लगा है। दिन में तेज धूप और गर्मी बढ़ी जबकि रात में ठंडक के कारण शरीर का संतुलन बिगड़ रहा है। इसका सीधा असर वायरल फीवर के रूप में सामने आ रहा है। एमवाय अस्पताल में ही एक दिन में करीब एक हजार मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।

    शहर के शासकीय और निजी अस्पतालों में बुखार, सर्दी-खांसी, गले में खराश और बदन दर्द की शिकायत लेकर आने वाले मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। डॉक्टरों का कहना है कि इस समय मौसम का उतार-चढ़ाव संक्रमण के लिए अनुकूल माहौल बना रहा है। दिन में पसीना और रात में ठंडी हवा चलने से लोग जल्दी बीमार पड़ रहे हैं। खासतौर पर वे लोग ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं, जो देर रात तक बाहर रहते हैं या ठंड-गर्मी के बीच लापरवाही बरतते हैं।
     
    शादियों का सीजन भी बढ़ा रहा खतरा
    इन दिनों शादी समारोह का सीजन चल रहा है। देर रात तक कार्यक्रमों में शामिल होना, ठंडी चीजें खाना, नींद पूरी न होना और भीड़भाड़ में समय बिताने से भी वायरल संक्रमण फैलने की बड़ी वजह सामने आई है। डाक्टरों के अनुसार कई लोग हल्का बुखार या सर्दी होने के बाद भी इसे नजरअंदाज कर रहे हैं, जिससे स्थिति गंभीर हो रही है। संक्रमण परिवार के अन्य लोगों तक भी फैल रहा है।

    गंभीर बीमारियों वाले मरीजों के लिए ज्यादा जोखिम
    शुगर, बीपी, कैंसर, ह्दय रोग, लिवर, अस्थमा, गर्भवती महिलाओं और किडनी से संबंधित बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए यह मौसम ज्यादा खतरनाक साबित हो रहा है। वायरल फीवर होने पर इन बीमारियों से पीड़ित मरीजों की रिकवरी धीमी हो जाती है। कई बार उनकी स्थिति बिगड़ने पर अस्पताल में भर्ती तक कराना पड़ रहा है। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने के कारण संक्रमण का असर ज्यादा समय तक बना रहता है।

    बच्चों और बुजुर्गों पर ज्यादा असर
    डॉक्टरों के अनुसार छोटे बच्चों और बुजुर्गों में भी वायरल फीवर के मामले बढ़ रहे हैं। तापमान में अचानक बदलाव से उनकी इम्युनिटी जल्दी प्रभावित होती है, जिससे बुखार और खांसी लंबे समय तक बनी रहती है। ऐसे में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।

    बचाव ही सबसे बड़ा इलाज
    इस मौसम में हल्के गर्म कपड़े साथ रखना, ठंडी चीजों से परहेज करना और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर सावधानी बरतना जरूरी है। संतुलित आहार, पर्याप्त पानी, फल-सब्जियां और भरपूर नींद शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाते हैं।