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  • प्रौद्योगिकी से सशक्त एमएसएमई: योगी सरकार ने यूपी को बनाया डिजिटल औद्योगिक शक्ति केंद्र

    प्रौद्योगिकी से सशक्त एमएसएमई: योगी सरकार ने यूपी को बनाया डिजिटल औद्योगिक शक्ति केंद्र

    प्रौद्योगिकी से सशक्त एमएसएमई: योगी सरकार ने यूपी को बनाया डिजिटल औद्योगिक शक्ति केंद्र

    उद्यम सारथी और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से आसान हो रहा कारोबार

    एमएसएमई चैम्पियनशिप और तकनीकी उन्नयन से बढ़ी प्रतिस्पर्धा

    नई एमएसएमई नीति और प्लग एंड प्ले मॉडल से निवेश को गति

    लखनऊ
     उत्तर प्रदेश में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र को प्रौद्योगिकी से जोड़ने की दिशा में प्रदेश सरकार ने बहुस्तरीय पहल की गति तेज कर दी हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, तकनीकी उन्नयन और नीतिगत सुधारों के माध्यम से प्रदेश के 96 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयों को प्रतिस्पर्धी और बाजारोन्मुख बनाने का प्रयास किया गया है। योगी सरकार के इन क़दमों से उत्पादन क्षमता बढ़ी है और रोजगार सृजन को नई गति प्राप्त हुई है। 

    डिजिटल अवसंरचना, नीतिगत सरलता और वित्तीय सहयोग के संयोजन ने प्रदेश को अग्रणी औद्योगिक केंद्र बनाने की आधारभूमि को तैयार करने का काम किया है। एमएसएमई  सेक्टर की योजनाओं के लिए प्रदेश सरकार के बजट 2026-27 में 3,822 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं, जो वर्ष 2025-2026 की तुलना में 19 प्रतिशत अधिक है। 

    ओडीओपी को मिला डिजिटल आयाम

    वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना के अंतर्गत मार्केटिंग डेवलपमेंट, टूलकिट वितरण और प्रशिक्षण के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म विकसित किया गया है। इसके माध्यम से एससी-एसटी और ओबीसी वर्ग के कारीगरों को तकनीक आधारित कौशल प्रशिक्षण दिया जा रहा है। पारंपरिक उत्पादों को ई-कॉमर्स और डिजिटल मार्केटिंग से जोड़ने से स्थानीय वस्तुओं की पहुंच राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक बढ़ी है।

    तकनीकी उन्नयन और प्रतिस्पर्धा में बढ़त

    एमएसएमई चैम्पियनशिप इनीशिएटिव (चैंपियंस पोर्टल) के अंतर्गत चयनित इकाइयों को आधुनिक मशीनरी को अपनाने, गुणवत्ता सुधार और डिजिटल टूल्स के उपयोग के लिए तकनीकी सहायता दी जा रही है। इस पहल का उद्देश्य उत्पादन लागत को घटाकर प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को और विकसित करना है। लाखों इकाइयों को डिजिटल उन्नयन और विपणन सहयोग का लाभ मिल रहा है।

    उद्यम सारथी और आरएएमपी का सहारा

    उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 24  जनवरी, 2021 को लॉन्च की गई उद्यम सारथी ऐप के जरिए डिजिटल रजिस्ट्रेशन, योजनाओं की जानकारी और संचालन मार्गदर्शन एक ही मंच पर उपलब्ध कराया गया है। इससे उद्यमियों की सरकारी योजनाओं और प्रोत्साहनों तक त्वरित पहुंच प्राप्त हो जाती है। प्रदेश में आरएएमपी (राइजिंग एंड एक्सेलेरेटिंग एमएसएमई परफार्मेंस) योजना विश्व बैंक समर्थित एक केंद्रीय पहल है, इसके अंतर्गत वित्तीय और तकनीकी समर्थन भी प्रदान किया जा रहा है, जिससे इकाइयों के विस्तार और आधुनिकीकरण को बल मिला है।

    नीतिगत सरलता और त्वरित संचालन
    वर्ष 2022 से लागू एमएसएमई नीति के माध्य
    म से प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया है। प्लग एंड प्ले मॉडल से 72 घंटे में संचालन शुरू करने की सुविधा दी गई है। क्रेडिट प्रवाह में वृद्धि और पांच लाख रुपये तक बीमा कवरेज जैसी व्यवस्थाओं ने उद्यमियों को जोखिम प्रबंधन में सहूलियत प्रदान करने का काम किया है। इन उपायों से निवेश वातावरण मजबूत हुआ है।

    बढ़ रहा है रोजगार और आर्थिक प्रभाव

    प्रौद्योगिकी आधारित सुधारों का असर रोजगार सृजन पर भी पड़ा है। एमएसएमई क्षेत्र पहले से ही करोड़ों लोगों की आजीविका का आधार रहा है और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन से इसमें नए अवसर जुड़े हैं। ई-कॉमर्स और ऑनलाइन सप्लाई चेन से जुड़ने के कारण ग्रामीण और अर्धशहरी इकाइयों को व्यापक बाजार हासिल हुआ है।

  • सुपर-8 से पहले श्रीलंका को बड़ा झटका, मथीशा पथिराना चोटिल

    सुपर-8 से पहले श्रीलंका को बड़ा झटका, मथीशा पथिराना चोटिल

    नई दिल्ली
    श्रीलंका के तेज गेंदबाज मथीशा पथिराना ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टी20 विश्व कप के ग्रुप स्टेज मुकाबले के दौरान चोटिल हो गए हैं। वह पहले ही ओवर में गेंदबाजी करने के दौरान चोटिल हो गए। हालांकि श्रीलंका ने पथुम निसंका की शतकीय पारी की मदद से ऑस्ट्रेलिया को 12 गेंदे शेष रहते आठ विकेट से शिकस्त दी। इस जीत के साथ श्रीलंका क्रिकेट टीम ने टी20 विश्व कप के सुपर-8 चरण के लिए क्वालीफाई कर लिया। पल्लेकेले इंटरनेशनल स्टेडियम में ऑस्ट्रेलिया को 181 रन पर आउट करने के बाद श्रीलंका ने 18 ओवर में दो विकेट पर 184 रन बनाकर शानदार जीत दर्ज की।

    पहले बल्लेबाजी करने उतरी ऑस्ट्रेलिया को ट्रेविस हेड और मिचेल मार्श ने दमदार शुरुआत दिलाई थी। हालांकि ऑस्ट्रेलिया की पारी के तीसरे ओवर में मथीशा पथिराना बॉलिंग करने के दौरान रुक गए और काफी दर्द में दिखे। उन्होंने अपना बायां पैर पकड़ा हुआ था। पथिराना ने अपना पहला ओवर पूरा किए बिना लंगड़ाते हुए मैदान छोड़ दिया। उन्होंने अपनी चार गेंदों में सिर्फ तीन रन दिए थे, जिसके बाद कप्तान दसुन शनाका ने उनका ओवर पूरा किया और दो गेंदें डाली, जिसमें एक पर हेड ने चौका जड़ा। पथिराना शायद हैमस्ट्रिंग चोट के कारण मैच से बाहर हुए। हालांकि श्रीलंकाई क्रिकेट बोर्ड से अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं आई है।

    इससे पहले वानिंदु हसरंगा हैमस्ट्रिंग इंजरी के कारण टी20 वर्ल्ड कप से बाहर हो गए हैं। स्पिन गेंदबाजी ऑलराउंडर दुशान हेमंथा को मौजूदा टी20 विश्व कप के लिए चोटिल वानिंदु हसरंगा की जगह श्रीलंका की टीम में शामिल किया गया है। श्रीलंका के स्पिन गेंदबाज हसरंगा आयरलैंड के खिलाफ पहले मैच के दौरान चोटिल हो गए थे जिसके कारण वह टूर्नामेंट से बाहर हो गए हैं।

    तीन मैच में दूसरी हार साथ ही ऑस्ट्रेलिया के लिए सुपर आठ में पहुंचने की राह मुश्किल हो गयी।श्रीलंका के लिए सलामी बल्लेबाज निसांका ने 52 गेंद में नाबाद 100 रन की शानदार पारी खेली। कुसल मेंडिस ने 38 गेंद में 51 रन का योगदान दिया।

     

  • समावेशी विकास के साथ तीव्र गतिशील अर्थव्यवस्था वाला राज्य बना म.प्र. : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    समावेशी विकास के साथ तीव्र गतिशील अर्थव्यवस्था वाला राज्य बना म.प्र. : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    समावेशी विकास के साथ तीव्र गतिशील अर्थव्यवस्था वाला राज्य बना म.प्र. : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    सकल राज्य घरेलू उत्पाद में 11.14 प्रतिशत वृद्धि
    मध्यप्रदेश का आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था समावेशी विकास के साथ अत्यंत गतिशील अर्थव्यवस्था बन गई है। वित्तीय अनुशासन, पारदर्शी प्रशासन और दूरदर्शी नीतियों के साथ मध्यप्रदेश की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई है। मध्यप्रदेश विधान सभा में मंगलवार को प्रस्तुत आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 के अनुसार राज्य की अर्थव्यवस्था योजनाबद्ध रूप से संतुलित और परिणामोन्मुखी है।

    प्रमुख बिंदु

    1. वित्तीय वर्ष 2025-26 (अग्रिम अनुमान) में मध्यप्रदेश का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) प्रचलित मूल्यों पर ₹16,69,750 करोड़ अनुमानित है, जो वित्तीय वर्ष 2024-25 (त्वरित अनुमान) के ₹15,02,428 करोड़ की तुलना में 11.14 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।

    2. वित्तीय वर्ष 2025-26 (अग्रिम अनुमान) में मध्यप्रदेश का सकल राज्य घरेलू उत्पाद स्थिर (2011-12) मूल्यों पर ₹7,81,911 करोड़ अनुमानित है, जो वित्तीय वर्ष 2024-25 (त्वरित अनुमान) के ₹7,23,724 करोड़ की तुलना में 8.04 प्रतिशत की वास्तविक वृद्धि को दर्शाता है।

    3. वित्तीय वर्ष 2011-12 से वित्तीय वर्ष 2025-26 की अवधि के दौरान मध्यप्रदेश की प्रति व्यक्ति शुद्ध आय प्रचलित मूल्यों पर ₹38,497 से बढ़कर ₹1,69,050 हो गई तथा स्थिर (2011-12) मूल्यों पर ₹38,497 से बढ़कर ₹76,971 हो गई, जो वास्तविक आय स्तर में उल्लेखनीय सुधार को दर्शाता है।

    4. वित्तीय वर्ष 2025-26 (अग्रिम अनुमान) में सकल राज्य मूल्य वर्धन (GSVA) की क्षेत्रीय संरचना प्रचलित मूल्यों पर इस प्रकार रही—प्राथमिक क्षेत्र का योगदान 43.09 प्रतिशत, द्वितीयक क्षेत्र का 19.79 प्रतिशत तथा तृतीयक क्षेत्र का 37.12 प्रतिशत।

    5. स्थिर (2011-12) मूल्यों पर इनकी हिस्सेदारी क्रमशः प्राथमिक क्षेत्र 33.54 प्रतिशत, द्वितीयक क्षेत्र 26.18 प्रतिशत तथा तृतीयक क्षेत्र 40.28 प्रतिशत रही।

    6. वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्राथमिक क्षेत्र की GSVA में हिस्सेदारी प्रचलित मूल्यों पर 43.09 प्रतिशत तथा स्थिर (2011-12) मूल्यों पर 33.54 प्रतिशत रही। प्रचलित मूल्यों पर इस क्षेत्र का कुल मूल्य वित्तीय वर्ष 2024-25 (त्वरित अनुमान) के ₹6,33,532 करोड़ से बढ़कर वित्तीय वर्ष 2025-26 (अग्रिम अनुमान) में ₹6,79,817 करोड़ हो गया, जो 7.31 प्रतिशत की वृद्धि दर को दर्शाता है।

    7. वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्राथमिक क्षेत्र के अंतर्गत फसलों का सर्वाधिक योगदान 30.17 प्रतिशत रहा, इसके बाद पशुधन 7.22 प्रतिशत, वानिकी 2.13 प्रतिशत, मत्स्यपालन एवं जलीय कृषि 0.61 प्रतिशत तथा खनन एवं उत्खनन 2.96 प्रतिशत रहा।

    8. वित्तीय वर्ष 2025-26 में द्वितीयक क्षेत्र की GSVA में हिस्सेदारी प्रचलित मूल्यों पर 19.79 प्रतिशत तथा स्थिर (2011-12) मूल्यों पर 26.18 प्रतिशत रही। द्वितीयक क्षेत्र का कुल GSVA वित्तीय वर्ष 2024-25 (त्वरित अनुमान) के ₹2,84,125 करोड़ से बढ़कर वित्तीय वर्ष 2025-26 (अग्रिम अनुमान) में ₹3,12,350 करोड़ हो गया, जो प्रचलित मूल्यों पर 9.93 प्रतिशत तथा स्थिर मूल्यों पर 6.87 प्रतिशत की वृद्धि दर को दर्शाता है।

    9. वित्तीय वर्ष 2025-26 में द्वितीयक क्षेत्र के अंतर्गत निर्माण क्षेत्र का सर्वाधिक योगदान 9.22 प्रतिशत रहा, इसके बाद विनिर्माण का 7.22 प्रतिशत तथा विद्युत, गैस, जलापूर्ति एवं अन्य उपयोगिता सेवाओं का 3.35 प्रतिशत योगदान रहा।

    10. वित्तीय वर्ष 2025-26 में तृतीयक क्षेत्र की GSVA में हिस्सेदारी प्रचलित मूल्यों पर 37.12 प्रतिशत तथा स्थिर (2011-12) मूल्यों पर 40.28 प्रतिशत रही। तृतीयक क्षेत्र का कुल GSVA वित्तीय वर्ष 2024-25 (त्वरित अनुमान) के ₹5,05,679 करोड़ से बढ़कर वित्तीय वर्ष 2025-26 (अग्रिम अनुमान) में ₹5,85,588 करोड़ हो गया, जो प्रचलित मूल्यों पर 15.80 प्रतिशत तथा स्थिर मूल्यों पर 12.07 प्रतिशत की वृद्धि दर को दर्शाता है।

    11. वित्तीय वर्ष 2025-26 में तृतीयक क्षेत्र के अंतर्गत व्यापार, मरम्मत, होटल एवं रेस्टोरेंट का सर्वाधिक योगदान 10.35 प्रतिशत रहा। इसके पश्चात अन्य सेवाएँ 7.80 प्रतिशत, अचल संपत्ति, आवास स्वामित्व एवं व्यावसायिक सेवाएँ 4.98 प्रतिशत, लोक प्रशासन 4.96 प्रतिशत, वित्तीय सेवाएँ 3.73 प्रतिशत, परिवहन एवं भंडारण 2.80 प्रतिशत, संचार एवं प्रसारण संबंधी सेवाएँ 1.68 प्रतिशत तथा रेलवे का 0.82 प्रतिशत योगदान रहा।

    अन्य क्षेत्रों में प्रमुख उपलब्धियाँ

    लोक वित्त, बैंकिंग एवं वित्तीय संस्थान

    वित्तीय वर्ष 2025-26 में ₹2,618 करोड़ के राजस्व आधिक्य का अनुमान है। राजकोषीय घाटा GSDP का 4.66 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि राजस्व प्राप्तियाँ GSDP के 17.16 प्रतिशत के बराबर आंकी गई हैं। कर राजस्व में 13.57 प्रतिशत वृद्धि अपेक्षित है तथा ऋण–GSDP अनुपात 31.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

    कृषि एवं ग्रामीण विकास

    वर्ष 2024-25 में कुल फसल उत्पादन में पिछले वर्ष की तुलना में 7.66 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई, जबकि खाद्यान्न उत्पादन में 14.68 प्रतिशत की वृद्धि हुई। उद्यानिकी क्षेत्र 28.39 लाख हेक्टेयर रहा, जिसमें 425.68 लाख मीट्रिक टन उत्पादन हुआ। दुग्ध उत्पादन 225.95 लाख टन तक पहुँचा। कुल 72,975 किमी ग्रामीण सड़कों का निर्माण किया गया तथा 40.82 लाख ग्रामीण आवास पूर्ण किए गए।

    औद्योगिक विकास, एमएसएमई एवं अधोसंरचना

    द्वितीयक क्षेत्र में 9.93 प्रतिशत तथा तृतीयक क्षेत्र में 15.80 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। 1,028 इकाइयों को 6,125 एकड़ भूमि आवंटित की गई, जिनमें ₹1.17 लाख करोड़ के प्रस्तावित निवेश से लगभग 1.7 लाख रोजगार अवसर सृजित होने की संभावना है। वर्ष 2024-25 में एमएसएमई सहायता ₹22,162 करोड़ रही। राज्य में 1,723 स्टार्टअप तथा 103 इनक्यूबेशन केंद्र संचालित हैं। सीएसआर व्यय ₹2,600.47 करोड़ रहा तथा पर्यटन आगमन 13.18 करोड़ रहा।

    नगरीय विकास

    अमृत 2.0 के अंतर्गत ₹24,065 करोड़ का आवंटन किया गया, जिसमें 1,134 परियोजनाएँ स्वीकृत हुईं। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत 8.75 लाख आवास पूर्ण किए गए। स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 में राज्य को आठ राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुए।

    स्वास्थ्य क्षेत्र

    राष्ट्रीय स्वास्थ्य लेखा (NHA) 2021-22 के अनुसार कुल स्वास्थ्य व्यय ₹34,112 करोड़ रहा, जो GSDP का 3 प्रतिशत है। नवंबर 2025 तक 4.42 करोड़ आयुष्मान कार्ड जारी किए गए। मातृ मृत्यु अनुपात 379 (2001-03) से घटकर 142 (2021-23) प्रति लाख जीवित जन्म हो गया।

    शिक्षा एवं कौशल विकास

    वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल बजट का 10.37 प्रतिशत शिक्षा के लिए आवंटित किया गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 9.00 प्रतिशत अधिक है। कक्षा 1-5 में ड्रॉपआउट दर शून्य हो गई है, जबकि कक्षा 6-8 में यह घटकर 6.3 प्रतिशत रह गई है। उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए राज्य को SWAYAM पोर्टल पर मॉडल राज्य घोषित किया गया। तकनीकी संस्थानों की संख्या 1,625 से बढ़कर 2,070 हो गई है। मुख्यमंत्री मेधावी योजना के अंतर्गत 45,668 विद्यार्थियों को ₹500 करोड़ की वित्तीय सहायता प्रदान की गई।

    क्षेत्रवार जीएसवीए योगदान (वर्तमान मूल्यों पर)

     

     

    (राशि ₹ करोड़ में एवं वृद्धि प्रतिशत में)

     

    क्षेत्र

    उप-क्षेत्र

    2024–25 (त्वरित अनुमान)

    2025–26 (अग्रिम अनुमान)

    वृद्धि (राशि)

    वृद्धि (%)

    प्राथमिक

    फसलें

    4,47,476

    4,76,024

    28,548

    6.38

    पशुधन

    1,00,845

    1,13,913

    13,068

    12.96

    वानिकी एवं लकड़ी कटाई

    31,304

    33,633

    2,329

    7.44

    मत्स्य एवं जलीय कृषि

    8,230

    9,532

    1,302

    15.81

    खनन एवं उत्खनन

    45,677

    46,715

    1,038

    2.27

    प्राथमिक (कुल)

    6,33,532

    6,79,817

    46,285

    7.31

    द्वितीयक

    विनिर्माण

    1,06,552

    1,13,933

    7,381

    6.93

    विद्युत, गैस, जल आपूर्ति एवं अन्य उपयोगिताएँ

    49,262

    52,894

    3,632

    7.37

    निर्माण

    1,28,311

    1,45,523

    17,212

    13.41

    द्वितीयक (कुल)

    2,84,125

    3,12,350

    28,225

    9.93

    तृतीयक

    व्यापार, मरम्मत, होटल एवं रेस्टोरेंट

    1,47,319

    1,63,336

    16,017

    10.87

    अन्य परिवहन एवं भंडारण

    40,250

    44,162

    3,912

    9.72

    रेलमार्ग

    11,624

    12,874

    1,250

    10.75

    संचार एवं प्रसारण संबंधित सेवाएँ

    24,102

    26,511

    2,409

    10.00

    वित्तीय सेवाएँ

    50,481

    58,790

    8,309

    16.46

    अचल संपत्ति, आवास स्वामित्व एवं व्यावसायिक सेवाएँ

    68,499

    78,533

    10,034

    14.65

    लोक प्रशासन

    64,879

    78,270

    13,391

    20.64

    अन्य सेवाएँ

    98,525

    1,23,112

    24,587

    24.96

    तृतीयक (कुल)

    5,05,679

    5,85,588

    79,909

    15.80

    क्षेत्रवार जीएसवीए योगदान (स्थिर मूल्य 2011–12 पर) (राशि ₹ करोड़ में एवं वृद्धि प्रतिशत में)

     

    क्षेत्र

    उप-क्षेत्र

    2024–25 (त्वरित अनुमान)

    2025–26 (अग्रिम अनुमान)

    वृद्धि (राशि)

    वृद्धि (%)

    प्राथमिक

    फसलें

    1,55,068

    1,55,959

    891

    0.57

    पशुधन

    39,990

    44,312

    4,322

    10.81

    वानिकी एवं लकड़ी कटाई

    15,686

    16,084

    398

    2.54

    मत्स्य एवं जलीय कृषि

    3,834

    4,305

    471

    12.27

    खनन एवं उत्खनन

    20,016

    20,679

    663

    3.31

    प्राथमिक (कुल)

    2,34,594

    2,41,338

    6,744

    2.87

    द्वितीयक

    विनिर्माण

    75,634

    79,262

    3,628

    4.80

    विद्युत, गैस, जल आपूर्ति एवं अन्य उपयोगिताएँ

    35,084

    38,024

    2,940

    8.38

    निर्माण

    65,612

    71,155

    5,543

    8.45

    द्वितीयक (कुल)

    1,76,329

    1,88,441

    12,112

    6.87

    तृतीयक

    व्यापार, मरम्मत, होटल एवं रेस्टोरेंट

    71,055

    78,221

    7,166

    10.09

    अन्य परिवहन एवं भंडारण

    22,468

    24,140

    1,672

    7.44

    रेलमार्ग

    6,423

    6,966

    543

    8.45

    संचार एवं प्रसारण संबंधित सेवाएँ

    13,800

    14,865

    1,065

    7.71

    वित्तीय सेवाएँ

    29,881

    32,733

    2,852

    9.54

    अचल संपत्ति, आवास स्वामित्व एवं व्यावसायिक सेवाएँ

    35,184

    38,523

    3,339

    9.49

    लोक प्रशासन

    33,519

    39,674

    6,155

    18.36

    अन्य सेवाएँ

    46,286

    54,715

    8,429

    18.21

    तृतीयक (कुल)

    2,58,616

    2,89,837

    31,221

    12.07

    वर्तमान मूल्यों पर जीएसवीए में योगदान (%) (वित्त वर्ष 2024–25 से 2025–26)

     

    क्षेत्र

    उप-क्षेत्र

    2024–25 (%)

    2025–26 (%)

    परिवर्तन (%)

    प्राथमिक

    फसलें

    31.44

    30.17

    –1.27

    पशुधन

    7.08

    7.22

    +0.14

    वानिकी एवं लकड़ी कटाई

    2.20

    2.13

    –0.07

    मत्स्य एवं जलीय कृषि

    0.58

    0.61

    +0.03

    खनन एवं उत्खनन

    3.21

    2.96

    –0.25

    प्राथमिक (कुल)

    44.51

    43.09

    –1.42

    द्वितीयक (कुल)

     

    19.96

    19.79

    –0.17

    तृतीयक (कुल)

     

    35.53

    37.12

    +1.59

     

     

     

  • Ujjain Vikram Vyapar Mela 2026 में लग्जरी कारों की मांग आसमान पर, BMW, मर्सिडीज और जैगवार को मिली 50% टैक्स छूट

    Ujjain Vikram Vyapar Mela 2026 में लग्जरी कारों की मांग आसमान पर, BMW, मर्सिडीज और जैगवार को मिली 50% टैक्स छूट

    उज्जैन 

    धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान के साथ शहर ऑटोमोबाइल सेक्टर में भी नई आर्थिक गति दर्ज कर रहा है। प्रदेश शासन के विक्रम व्यापार मेला 2026 के दौरान दोपहिया, कार और हल्के वाहनों पर लाइफटाइम मोटरयान कर में 50 प्रतिशत की छूट लागू की है। यह छूट 15 फरवरी से 18 मार्च 2026 तक मेला अवधि में प्रभावी रहेगी। इस छूट का असर यह रहा कि मेले के पहले ही दिन 501 वाहनों की रिकॉर्डतोड़ बिक्री हो गई। 50 प्रतिशत छूट लागू होने से लग्जरी कारों की मांग आसमान पर पहुंच गई है। मेले में बीएमडब्ल्यू, मर्सिडिज और जैगवार जैसे लग्जरी ब्रांडों की डिमांड बढ़ गई।
    50 % की छूट मिलने से ऑन-रोड कीमत में आई बड़ी कमी

    आरटीओ संतोष मालवीय के अनुसार 16 फरवरी को किए भौतिक सत्यापन और कर निर्धारण के बाद पहले दिन 501 वाहनों का पंजीयन दर्ज किया गया। इनमें 136 दोपहिया, 340 चारपहिया और 25 अन्य हल्के वाहन शामिल हैं। यह आंकड़ा बताता है कि कर प्रोत्साहन का सीधा प्रभाव वाहन पंजीयन और ऑटोमोबाइल बाजार की मांग पर पड़ा है। लाइफटाइम टैक्स, जो वाहन के पंजीयन के समय एकमुश्त लिया जाता है, उसमें 50 प्रतिशत की छूट मिलने से ऑन-रोड कीमत में बड़ी कमी आई है। इससे उपभोक्ताओं की खरीद क्षमता बढ़ी है। डीलरशिप स्तर पर बुकिंग और डिलीवरी की प्रक्रिया तेज हो गई।
    पिछले मेले के भी टूटेंगे रिकॉर्ड

    इंजीनियरिंग कॉलेज परिसर में लगे वाहन मेले में 124 चार पहिया वाहन और 40 दोपहिया वाहन के अस्थाई आउटलेट लगे हैं। सोमवार को इन आउटलेट से 450 से ज्यादा वाहन की बिक्री हुई जबकि 41 वाहन रविवार को शुभारंभ के बाद ही बिक गए थे। इसको लेकर आरटीओ अधिकारियों को मानना है कि इस बार मेला ग्वालियर और पिछले दो साल उज्जैन में लगे मेले का भी रिकार्ड तोड़ देगा।

    2024 में 1 मार्च से शुरू हुआ मेला 9 अप्रेल तक चला था। इस दौरान 5797 दोपहिया वाहन, 17908 चार पहिया वाहन कुल 23705 वाहनों की बिक्री हुई थी।
    2025 में 26 फरवरी से शुरू हुआ मेला 9 अप्रेल तक चला था। 7772 दोपहिया वाहन, 28451 चार पहिया और कुल 36225 वाहनों की बिक्री हुई थी। जिससे शासन को 186.58 करोड का राजस्व प्राप्त हुआ था और इतने ही राजस्व की छूट दी गई थी।

    3 करोड़ के वाहन भी बिके थे मेले में

    पिछले विक्रम व्यापार मेलों में बीएमडब्ल्यू, मर्सिडिज बैंज और जैगवार जैसे ब्रांडों के वाहनों का रजिस्ट्रेशन बाजार की क्षमता को दर्शाता है। एक्सपर्ट के अनुसार, इस तरह की कर रियायतें ऑटोमोबाइल सेक्टर में डिमांड जनरेशन, एडवांस टैक्स रिलेजेशन और क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को गति देने का प्रभावी माध्यम बन रही हैं। विक्रमोत्सव मेला अब उज्जैन में ऑटोमोबाइल रजिस्ट्रेशन का पीक सीजन बनता जा रहा है।

  • UN चीफ की तारीफ: भारत अब बड़ी शक्ति, दुनिया में योगदान बना अहम

    UN चीफ की तारीफ: भारत अब बड़ी शक्ति, दुनिया में योगदान बना अहम

    नई दिल्ली

    संयुक्त राष्ट्र (UN) प्रमुख ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय और संयुक्त राष्ट्र के एजेंडे में भारत का स्थायी योगदान 'हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण' है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत जैसी विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की वैश्विक स्तर पर बढ़ती और सशक्त होती भूमिका एक 'सकारात्मक मेगा ट्रेंड' के रूप में उभर रही है।
    भारत को माना अहम शक्ति

    संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने ये टिप्पणियां कृत्रिम मेधा पर 'ग्लोबल साउथ' में आयोजित होने वाले पहले शिखर सम्मेलन 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट' में भाग लेने के लिए नई दिल्ली रवाना होने से पहले कीं। गुतारेस ने यहां 'पीटीआई' को दिए एक विशेष साक्षात्कार में कहा, 'संयुक्त राष्ट्र की गतिविधियों के सभी पहलुओं मसलन शांति और सुरक्षा, सतत विकास पर चर्चा में भारत एक अत्यंत अहम शक्ति बन गया है। मुझे भारत द्वारा आयोजित जी20 की अध्यक्षता याद है जहां बहुत महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए थे।'
    भारत का जताया आभार

    गुतारेस ने कहा, 'और एक लोकतांत्रिक देश के रूप में मानवाधिकारों के मामले में भी वह अहम शक्ति बन गया है, वो भी एक ऐसी दुनिया में जहां दुर्भाग्य से हम दुनिया के कई हिस्सों में लोकतंत्र को संकट में देखते हैं।' संयुक्त राष्ट्र में भारत की भूमिका से संबंधित एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा, 'सबसे पहले हम संयुक्त राष्ट्र शांति रक्षा में भारत की उपस्थिति के लिए उसके प्रति बहुत आभारी हैं। वर्तमान में लगभग 5000 भारतीय महिलाएं और पुरुष दुनिया भर में शांति रक्षा अभियानों में तैनात हैं।'
    इन मुद्दों पर भी की बात

    उन्होंने "शांति स्थापना में भारत के पहले पूर्ण महिला पुलिस दल'' पर भी प्रकाश डाला और उसे "उल्लेखनीय" करार दिया। संयुक्त राष्ट्र प्रमुख के रूप में गुतारेस का कार्यकाल इस वर्ष समाप्त हो रहा है। उन्होंने बढ़ते संघर्षों और बढ़ती असमानताओं के बीच दुनिया में उभर रहे कुछ 'सकारात्मक मेगा ट्रेंड' पर प्रकाश डाला।

    उन्होंने कहा, 'मेरा संदेश यह है कि चिंता करने के कई कारण हैं। हमने देखा है कि संघर्ष बढ़ रहे हैं, अन्याय और असमानताएं बढ़ रही हैं और दुनिया में गरीबी और भूख की समस्या का समाधान नहीं हो रहा है।' उन्होंने कहा, 'हमने दुनिया के विभिन्न हिस्सों में आतंकवाद को पनपते और एक भयावह रूप में बदलते देखा है। इसलिए चिंता के कई कारण हैं, लेकिन कुछ सकारात्मक मेगा ट्रेंड भी हैं।'

    गुतारेस ने इस बात पर जोर दिया कि "सबसे महत्वपूर्ण मेगा ट्रेंड" में एक भारत जैसे देशों और अर्थव्यवस्थाओं की भूमिका से संबंधित है। संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने कहा कि विकसित देशों का समूह-जी7 और इसी तरह के अन्य देशों की वैश्विक अर्थव्यवस्था में हिस्सेदारी हर दिन कम होती जा रही है, जबकि उभरती अर्थव्यवस्थाएं, जिनमें भारत एक प्रमुख स्तंभ है, विश्व की अर्थव्यवस्था में लगातार अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रही हैं।'

    उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया प्रतिदिन जारी है और यही "मेगा ट्रेंड" समय के साथ ऐसी विश्व व्यवस्था के निर्माण में योगदान देगा, जहां न्याय, समानता और शांति के लिए अधिक अनुकूल परिस्थितियां उपलब्ध होंगी।

  • बांग्लादेश में छवि सुधार मिशन पर तारिक रहमान, कैबिनेट में दो हिंदू चेहरों को दी जगह

    बांग्लादेश में छवि सुधार मिशन पर तारिक रहमान, कैबिनेट में दो हिंदू चेहरों को दी जगह

    ढाका
    बांग्लादेश के 13वें संसदीय चुनाव में जबरदस्त जीत हासिल करने वाले तारिक रहमान की कैबिनेट में दो अल्पसंख्यक समुदाय के नेताओं को जगह दी गई है. 25 सांसदों ने मंत्री पद की शपथ ली. इनमें निताई रॉय चौधरी का नाम भी शामिल है. हालांकि पहले चर्चा थी कि चौधरी के समधी और अहम महकमों के मंत्री रह चुके गोयेश्वर चंद्र रॉय को जगह मिलेगी. वहीं दूसरे अल्पसंख्यक नेता का नाम दीपेन दीवान है.

    कौन हैं निताई रॉय चौधरी?
    तृतीयोमात्रा डॉट कॉम के मुताबिक, 1949 में पैदा हुए निताई रॉय चौधरी एक बांग्लादेशी वकील और राजनीतिज्ञ हैं. निताई रॉय चौधरी, जो मगुरा निर्वाचन क्षेत्र से सांसद चुने गए हैं, पार्टी के शीर्ष रणनीतिकारों में से एक हैं और शीर्ष नेतृत्व के वरिष्ठ रणनीतिक सलाहकार माने जाते हैं. उन्होंने जमात-ए-इस्लामी के प्रत्याशी को सीधी टक्कर में मात दी है. 12 फरवरी 2026 को हुए 13वें संसदीय चुनाव में उन्होंने मगुरा-2 संसदीय क्षेत्र से जीत हासिल की. निताई रॉय चौधरी को 147896 वोट मिले हैं. उन्होंने जमात उम्मीदवार मुस्तर्शीद बिल्लाह को 30,838 वोटों के अंतर से हराया है.
     
    कौन हैं दीपेन दीवान?
    दूसरे अल्पसंख्यक नेता दीपेन दीवान, बौद्ध मेजोरिटी वाले चकमा एथनिक माइनॉरिटी ग्रुप से हैं. इन्होंने दक्षिण-पूर्व रंगमती जिले की एक सीट से जीत हासिल की. हालांकि उनकी धार्मिक पहचान साफ नहीं है और कई लोग उन्हें हिंदू बताते हैं. दीवान ने अपने सबसे करीबी प्रतिद्वंद्वी के तौर पर एक निर्दलीय चकमा उम्मीदवार को हराया.

    हिंदू मंत्रियों की नियुक्ति और मां से नाता
    तारिक रहमान की कैबिनेट में मंत्री पद को लेकर गोयेश्वर रॉय को लेकर थी, जो बांग्लादेश की राजनीति में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के प्रमुख चेहरों में से एक माने जाते हैं. खालिदा जिया सरकार में लगभग 30 साल पहले (1991-1996) वो राज्य मंत्री थे. इस बार उन्हें जगह न देकर उनके समधी निताई रॉय चौधरी को मंत्री बनाया गया है. खालिदा जिया की पार्टी भले ही अल्पसंख्यकों को ज्यादा महत्वपूर्ण पद न देती हो लेकिन खालिदा जिया के दो कार्यकाल में हिंदू मंत्री शामिल रहे –
    1991-1996 में गयेश्वर चंद्र रॉय राज्य मंत्री (स्टेट मिनिस्टर) के रूप में शामिल थे. वे पर्यावरण एवं वन मंत्रालय तथा मत्स्य एवं पशुपालन मंत्रालय के प्रभारी थे. अब वे बड़ा अल्पसंख्यक चेहरा बन चुके हैं.
    2001-2006 में गौतम चक्रबर्ती राज्य मंत्री के रूप में जल संसाधन मंत्रालय के प्रभारी थे. वे बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई कल्याण फ्रंट के कन्वेनर भी थे. तारिक रहमान ने भी मां की राह पर चलते हुए अपनी कैबिनेट में हिंदू चेहरों को शामिल किया है. उनकी मां की कैबिनेट में एक हिंदू मंत्री रहे लेकिन रहमान कैबिनेट में 2 अल्पसंख्यक चेहरे हैं, वो भी ऐसे वक्त में जब बांग्लादेश अल्पसंख्यकों के लिए नर्क बना हुआ है.

    बांग्लादेश के दामन से खून का दाग धोएंगे तारिक रहमान?
    तारिक रहमान ऐसे वक्त में बांग्लादेश की सत्ता संभाल रहे हैं, जब वहां अस्थिरता के साथ-साथ अल्पसंख्यकों के लिए बेहद बुरे हालात हैं. अंतरिम सरकार के राज में हिंदुओं का खूब कत्लेआम हुआ. मॉब लिंचिंग की ऐसी-ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरीं. खासतौर पर चुनावों की घोषणा होने के बाद से अलग-अलग इलाकों से लगभग हर रोज हिंदुओं की हत्या की खबरें आती रहीं. खासतौर पर नवंबर के अंत से फरवरी के पहले हफ्ते तक अल्पसंख्यकों के खून से बांग्लादेश का दामन रंग गया. क्या तारिक रहमान बदलाव के छोटे से कदम से अपने देश की इमेज सुधार पाएंगे?

    BNP कैबिनेट में किसे कौन सी जिम्मेदारी दी जाएगी?
     
    BNP के सूत्रों के हवाले से एक लिस्ट हासिल की है, जिसमें बताया गया है कि किन मंत्रियों और राज्य मंत्रियों को कौन से मंत्रालय दिए जाएंगे.

        मिर्ज़ा फ़ख़रुल इस्लाम आलमगीर – स्थानीय सरकार, ग्रामीण विकास और सहकारिता मंत्रालय
        सलाहुद्दीन अहमद – गृह मंत्रालय
        अमीर खसरू महमूद चौधरी – वित्त और योजना मंत्रालय
        मेजर (रिटायर्ड) हाफिज उद्दीन अहमद – मुक्ति युद्ध मामलों का मंत्रालय
        इकबाल हसन महमूद तुकू – बिजली, ऊर्जा और खनिज संसाधन मंत्रालय
        AZM ज़ाहिद हुसैन – महिला और बाल मंत्रालय, सामाजिक कल्याण
        खलीलुर रहमान – विदेश मंत्रालय
        अब्दुल अवल मिंटू – पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
        मिजानुर रहमान मीनू – भूमि मंत्रालय
        निताई रॉय चौधरी – सांस्कृतिक मामलों का मंत्रालय
        मोहम्मद असदुज्जमां – कानून, न्याय और संसदीय मामलों का मंत्रालय
        काज़ी शाह मोफ़ज्जल हुसैन कैकोबाद – धार्मिक मामलों का मंत्रालय
        अरिफुल हक चौधरी – श्रम और रोज़गार मंत्रालय, प्रवासी कल्याण और विदेशी रोज़गार
        खानदेकर अब्दुल मुक्तदिर – वाणिज्य, उद्योग, कपड़ा और जूट मंत्रालय
        ज़ाहिर उद्दीन स्वपन – सूचना और प्रसारण मंत्रालय शाहिद
        उद्दीन चौधरी एनी – जल संसाधन मंत्रालय
        एहसानुल हक मिलन – शिक्षा, प्राइमरी और मास एजुकेशन मंत्रालय
        अमीन उर ​​राशिद – कृषि, मत्स्य पालन और पशुधन मंत्रालय, खाद्य मंत्रालय
        अफरोजा खानम – नागरिक उड्डयन और पर्यटन मंत्रालय
        असदुल हबीब दुलु – आपदा प्रबंधन और राहत मंत्रालय
        ज़कारिया ताहिर – आवास और सार्वजनिक निर्माण मंत्रालय
        दीपेन दीवान – चटगाँव पहाड़ी इलाकों के मामले मंत्रालय
        सरदार एमडी सखावत हुसैन बकुल – स्वास्थ्य और परिवार नियोजन मंत्रालय
        फकीर महबूब अनम – डाक और दूरसंचार विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय
        शेख रबीउल आलम, सड़क परिवहन और पुल, रेलवे और शिपिंग मंत्रालय.

  • Maruti e Vitara लॉन्च: मारुति की पहली इलेक्ट्रिक SUV की कीमत का खुलासा

    Maruti e Vitara लॉन्च: मारुति की पहली इलेक्ट्रिक SUV की कीमत का खुलासा

    मुंबई 
    भारत की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी के लिए आज बड़ा दिन है. कंपनी ने आज अपनी पहली इलेक्ट्रिक कार e-Vitara की कीमत का औपचारिक ऐलान कर दिया है. यह पल कंपनी के लिए बेहद खास माना जा रहा है, क्योंकि इसी के साथ मारुति सुजुकी इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सेगमेंट में आधिकारिक तौर पर एंट्री कर ली है.

    कीमत है इतनी

    Maruti e-Vitara को पहली बार भारत मोबिलिटी ऑटो एक्सपो 2025 में दिखाया गया था और तब से इसकी कीमत को लेकर बाजार में काफी इंतजार था, जो आज खत्म हो गया है. नई मारुति ई विटारा को बैटरी एज सर्विस (BaaS) रेंटल सब्सक्रिप्शन प्लान के तहत पेश किया गया है. इसके लिए बिना बैटरी के कार की शुरुआती कीमत 10.99 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) तय की गई है. बैटरी के लिए ग्राहकों को अलग से 3.99 रुपये प्रतिकिमी किराया देना होगा. 

    कैसी है Maruti e Vitara
    मारुति सुजुकी ने अपनी पहली ईवी को बेहतर बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है. कंपनी ने e-Vitara को बेहद ही क्लीन और मॉडर्न डिज़ाइन दिया है. इसकी लंबाई 4,275 मिमी, चौड़ाई 1,800 मिमी और ऊंचाई 1,640 मिमी है, जबकि व्हीलबेस 2,700 मिमी का है. यह साइज इसे कॉम्पैक्ट SUV सेगमेंट में न केवल बेहतर प्रजेंस देता बल्कि अंदर बैठने वालों को अच्छा खासा स्पेस देता है.

    प्रीमियम केबिन और नई टेक्नोलॉजी

    केबिन के मामले में e-Vitara अब तक की सबसे प्रीमियम मारुति कार मानी जा रही है. इसमें 10.25-इंच का फुली डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर और 10.1-इंच का टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम दिया गया है, जो फ्लोटिंग सेंटर कंसोल पर लगाया गया है. सॉफ्ट-टच मटीरियल, ड्यूल-टोन इंटीरियर और मल्टी-कलर एंबिएंट लाइटिंग के कारण अंदर का माहौल काफी शानदार लगता है.

    इस SUV में वेंटिलेटेड फ्रंट सीट्स, 10-वे पावर एडजस्टेबल ड्राइवर सीट और 40:20:40 स्प्लिट रियर सीट दी गई है, जिसे स्लाइड, रिक्लाइन और फोल्ड किया जा सकता है. फिक्स्ड ग्लास सनरूफ और हार्मन ट्यून साउंड सिस्टम इसकी प्रीमियम पहचान को और मजबूत करते हैं.

    बैटरी पैक और ड्राइविंग रेंज

    Maruti e-Vitara में हल्का 3-इन-1 इलेक्ट्रिक ड्राइव सिस्टम दिया गया है, जिसमें मोटर, इन्वर्टर और ट्रांसमिशन एक ही यूनिट में शामिल हैं. इससे वजन कम होता है और परफॉर्मेंस के साथ-साथ रेंज भी बेहतर मिलती है. Maruti e-Vitara दो बैटरी ऑप्शन में आ रही है. इसमें 49kWh और 61kWh बैटरी पैक का विकल्प मिलेगा. दोनों ही वेरिएंट फ्रंट व्हील ड्राइव सेटअप के साथ आएंगे. बड़ा बैटरी पैक सिंगल चार्ज में 543 किलोमीटर (ARAI प्रमाणित रेंज) तक की ड्राइविंग रेंज देगा. 

    e-Vitara को तीन ट्रिम में पेश किया गया है. बेस वेरिएंट Delta में 49kWh बैटरी मिलेगी. वहीं Zeta और Alpha ट्रिम में 61kWh की बड़ी बैटरी दी जाएगी. ग्लोबल मार्केट में इसका ऑल-व्हील-ड्राइव वर्जन भी उपलब्ध है, जिसमें पीछे एक एकस्ट्रा मोटर लगाई गई है. भारत में AWD वर्जन आएगा या नहीं, इस पर अभी सस्पेंस बना हुआ है. 

    सेफ्टी के मामले में भी e-Vitara को खास तौर पर तैयार किया गया है. इसके बॉडी स्ट्रक्चर में 50 प्रतिशत से ज्यादा हाई-टेंसाइल स्टील का इस्तेमाल किया गया है और बैटरी की सेफ्टी के लिए अलग से प्रोटेक्शन सिस्टम दिया गया है. इसमें 7 एयरबैग, ऑल-डिस्क ब्रेक, इलेक्ट्रॉनिक पार्किंग ब्रेक, टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम और e-Call इमरजेंसी फीचर स्टैंडर्ड मिलते हैं.

    इसके अलावा लेवल-2 ADAS फीचर्स जैसे अडैप्टिव क्रूज कंट्रोल, लेन-कीप असिस्ट और ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग भी दी गई है. कुल मिलाकर e-Vitara को कंपनी की अब तक की सबसे सुरक्षित और तकनीक से भरपूर कारों में गिना जा रहा है.

  • जनदर्शन में कलेक्टर ने सुनी लोगों की समस्याएं

    जनदर्शन में कलेक्टर ने सुनी लोगों की समस्याएं

    जनदर्शन में कलेक्टर ने सुनी लोगों की समस्याएं

    बिलासपुर
    कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल ने साप्ताहिक जनदर्शन में आज दूर-दराज से पहुंचे ग्रामीणों की फरियाद सुनी। उन्होंने एक-एक कर प्रत्येक व्यक्ति से मुलाकात कर उनका आवेदन लिया और आवश्यक कार्रवाई के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया। लोगों ने जनदर्शन में व्यक्तिगत एवं सामुदायिक हित से जुड़े विषयों को लेकर जिला प्रशासन का ध्यान आकृष्ट करते हुए आवेदन दिया। नगर निगम कमिश्नर श्री प्रकाश कुमार सर्वे और सीईओ जिला पंचायत श्री संदीप अग्रवाल ने लोगों की समस्याओं को सुना। लोगों ने कलेक्टर से मिलकर व्यक्तिगत एवं सामुदायिक समस्याओं से संबंधित आवेदन दिए। 

           जनदर्शन में आज बोदरी तहसील के ग्राम बोडसरा के छात्र दीपेश कुमार ने राजस्व रिकॉर्ड में हुई त्रुटि को लेकर कलेक्टर से सुधार की मांग की है। आवेदक का कहना है कि पुराने मिसल रिकॉर्ड में नाम की गलती के कारण उसका जाति, निवास और आय प्रमाण पत्र नहीं बन पा रहा है, जिससे उसकी आगे की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। त्रुटि के कारण राजस्व रिकॉर्ड से जुड़े आवश्यक दस्तावेज नहीं बन पा रहे हैं, जिससे उसे शैक्षणिक और अन्य सरकारी प्रक्रियाओं में परेशानी हो रही है। कलेक्टर ने मामले को एसडीओ बिल्हा को सौंपा। कोटा ब्लॉक के ग्राम पंचायत के ग्रामीणों ने शासकीय तालाब के आने जाने के निस्तारी रास्ते पर सुखराम यादव द्वारा किये गये अवैध निर्माण कार्य को हटाने के लिए ज्ञापन सौंपा है। ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम तेंदुवा के सुखराम यादव द्वारा निस्तारी रास्ते पर अवैध कब्जा कर मकान निर्माण कर लिया गया है। जिससे ग्रामीणों को तालाब आने जाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कलेक्टर ने एसडीएम को उक्त प्रकरण की जांच कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए है। नहरपारा लिटिया के कैलाश प्रसाद साहू ने कलेक्टर से मुलाकात कर किसान सम्मान निधि की राशि प्रदान करने गुहार लगाई। मामले को उप संचालक कृषि देखेंगे। 

           शहर के वार्ड क्रमांक 36 बसंत भाई पटेल नगर के वासियों ने वार्ड में सीसी रोड, नाली, बिजली पोल एवं पानी पाईप लाईन लगाने की मांग की है। वार्ड वासियों ने अपनी समस्या बताते हुए कहा कि कच्चे सड़क की वजह से पानी भराव एवं गदंगी की स्थिति निर्मित हो जाती है। जिससे स्कूली बच्चों सहित आमजनों को भी काफी परेशानियां होती है। कलेक्टर ने आयुक्त नगर निगम को इस पर आवश्यक कार्यवाही करने कहा। सकरी तहसील के ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत कोपरा में तालाब निर्माण के लिए प्रस्तावित जमीन पर अवैध कब्जे को लेकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों की शिकायत के अनुसार ग्राम पंचायत क्षेत्र में तालाब निर्माण के लिए खसरा नंबर 81 और 82 की जमीन ग्राम सभा से स्वीकृत है। कुछ लोगों ने इस प्रस्तावित जमीन पर खेत बनाना शुरू कर दिया है और ट्रैक्टर से लगातार जुताई का काम जारी है। ग्रामीणों का कहना है कि पहले सरपंच द्वारा इस कार्य को रुकवाया गया था, लेकिन कुछ दिनों बाद फिर से उसी जमीन पर खेती शुरू कर दी गई। ग्रामीणों ने कलेक्टर से मांग की है कि संबंधित लोगों द्वारा किए जा रहे कब्जे और खेती के कार्य को तुरंत रोका जाए तथा प्रस्तावित तालाब की जमीन को सुरक्षित रखा जाए। कलेक्टर ने एसडीओ तखतपुर को प्रकरण की जांच कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। 

           जनदर्शन में राजस्व अभिलेखों में नाम सुधार, पुराने मिसल अभिलेख में त्रुटि संशोधन तथा जाति प्रमाण पत्र जारी करने से जुड़े आवेदन भी प्राप्त हुए। कुछ आवेदकों ने आर्थिक सहायता राशि प्रदान करने, किसान सम्मान निधि नहीं मिलने तथा बैंक एवं वित्तीय संस्था से संबंधित बकाया भुगतान की समस्याएं भी रखीं। इसके अलावा दुकान का जप्त सामान या राशि वापस दिलाने एवं आवास ऋण से जुड़ी शिकायतें भी प्राप्त हुई। कलेक्टर ने सभी आवेदनों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों को जांच कर नियमानुसार शीघ्र निराकरण के निर्देश दिए। जनदर्शन में प्राप्त सभी आवेदनों को आगे की कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारियों को भेजा गया।
    रचना/110/324
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  • आज से पंचक आरंभ: इन कामों से रखें दूरी, नहीं तो हो सकता है बड़ा नुकसान

    आज से पंचक आरंभ: इन कामों से रखें दूरी, नहीं तो हो सकता है बड़ा नुकसान

     हिंदू धर्म में पंचक काल को विशेष सावधानी बरतने वाला समय माना जाता है. पंचांग के अनुसार 17 फरवरी 2026 से पंचक की शुरुआत हो गई है, जो 21 फरवरी 2026 तक रहेगा. इस बार पंचक मंगलवार से शुरू हो रहा है, इसलिए इसे अग्नि पंचक कहा जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दौरान कुछ विशेष कार्य करने से बचना चाहिए, वर्ना जीवन में परेशानियां और नुकसान बढ़ सकता है.

    कब से कब तक रहेगा पंचक?
    पंचांग के अनुसार पंचक की शुरुआत 17 फरवरी 2026, मंगलवार सुबह 09:05 बजे से हो गई है और इसका समापन 21 फरवरी 2026, शनिवार शाम 07:07 बजे होगा. इस बार पंचक का समय इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि इसी दिन फाल्गुन अमावस्या और सूर्य ग्रहण भी पड़ रहे हैं, जिससे इसका धार्मिक महत्व और बढ़ गया है.

    क्या होता है पंचक?
    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब चंद्रमा धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्र में रहता है, तब पंचक काल बनता है. यह कुल पांच दिनों का समय होता है. मान्यता है कि इन दिनों में किए गए कुछ कार्य अशुभ फल दे सकते हैं. मंगलवार से शुरू होने के कारण इसे अग्नि पंचक के नाम से जाना जाता है. इस दौरान आग लगने का भय, दुर्घटनाओं की आशंका और विवादों का खतरा अधिक रहता है.

    भूलकर भी न करें ये काम
    शास्त्रों के अनुसार, पंचक के इन दिनों में कुछ विशेष कार्यों को करने की सख्त मनाही है.

    दक्षिण दिशा की यात्रा: पंचक के दौरान दक्षिण दिशा में यात्रा करना वर्जित है. इसे यम की दिशा माना जाता है, जिससे दुर्घटना या भारी हानि का भय रहता है.

    घर की छत डलवाना: यदि आप घर बनवा रहे हैं, तो ध्यान रखें कि पंचक के दौरान लेंटर या छत नहीं डलवानी चाहिए. इससे घर में क्लेश और धन की हानि हो सकती है.

    लकड़ी का काम और चारपाई: पंचक के दौरान लकड़ी इकट्ठा करना, फर्नीचर खरीदना या चारपाई/पलंग बनवाना अशुभ माना जाता है.

    मशीनरी का कार्य: अग्नि पंचक होने के कारण औजारों और मशीनों से जुड़े काम सावधानी से करें या टाल दें. आग से जुड़ी दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है.

    नए निवेश या व्यापार: किसी भी नए बड़े निवेश या व्यापार की शुरुआत से इन 5 दिनों तक बचना चाहिए.

    क्यों खास है इस बार का अग्नि पंचक?

    इस बार का पंचक ज्योतिषीय दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है. 17 फरवरी को ही साल का पहला सूर्य ग्रहण भी लग रहा है और साथ ही फाल्गुन अमावस्या भी है. ग्रहों की यह स्थिति मानसिक तनाव और विवाद पैदा कर सकती है. विद्वानों का मानना है कि ग्रहण और पंचक का एक साथ होना प्रकृति और जनजीवन पर गहरा प्रभाव डाल सकता है.

    पंचक में अनहोनी से बचने के उपाय

        यदि कोई कार्य करना बहुत अनिवार्य हो, तो ज्योतिष शास्त्र में कुछ उपाय बताए गए हैं:
        यदि दक्षिण दिशा में जाना जरूरी हो, तो हनुमान जी के मंदिर में गुड़-चना चढ़ाकर यात्रा शुरू करें.
        लकड़ी का काम शुरू करने से पहले गायत्री मंत्र का जाप करें या गायत्री हवन करें.

     

  • सूर्य ग्रहण में तुलसी दल और गंगाजल का महत्व: क्या है इसके पीछे का धार्मिक रहस्य?

    सूर्य ग्रहण में तुलसी दल और गंगाजल का महत्व: क्या है इसके पीछे का धार्मिक रहस्य?

    पंचांग के अनुसार, साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को लगने जा रहा है. सूर्य ग्रहण के दौरान तुलसी के पत्तों और गंगाजल का इस्तेमाल बहुत जरूरी माना गया है. शास्त्रों की मानें तो ग्रहण के समय जब सूर्य की रोशनी कम होती है, तो पूरी दुनिया में एक तरह की नकारात्मक ऊर्जा फैलने लगती है. ऐसे में तुलसी और गंगाजल दो ऐसी पवित्र चीजें हैं, जो इस बुराई को सोख लेती हैं और आसपास के माहौल को शुद्ध रखती हैं. माना जाता है कि इनके इस्तेमाल से घर और रसोई की पवित्रता बनी रहती है और हम पर ग्रहण का बुरा असर पड़ने की आशंका बहुत कम हो जाती है. यह हमारी प्राचीन परंपरा का एक अटूट हिस्सा है.

    खाने-पीने की चीजों में तुलसी का महत्व
    शास्त्रों और युर्वेद के अनुसार, तुलसी एक ऐसा पौधा है जिसमें कुदरती तौर पर हानिकारक किरणों को खत्म करने की अद्भुत शक्ति होती है. ग्रहण के समय हवा में कुछ ऐसे बारीक कीटाणु और अशुद्ध तरंगें बढ़ जाती हैं, जो खाने और पानी को खराब कर सकती हैं. अगर हम पके हुए खाने, दूध और पीने के पानी में तुलसी का पत्ता डाल दें, तो वह खाना पूरी तरह सुरक्षित रहता है. माना जाता है कि तुलसी की उपस्थिति से भोजन शुद्ध बना रहता है और ग्रहण खत्म होने के बाद भी हम उसे बिना किसी डर के इस्तेमाल कर सकते हैं. यह विधि हमारे आहार की सात्विकता का संचालन करती है.

    गंगाजल के छिड़काव से वातावरण की शुद्धि
    गंगाजल को हमारे धर्म में सबसे पवित्र जल माना गया है, जो कभी अशुद्ध नहीं होता. शास्त्रों के अनुसार, ग्रहण के समय घर के हर कोने और मंदिर में गंगाजल छिड़कने से वहां मौजूद नकारात्मक ऊर्जा तुरंत खत्म हो जाती है. गंगाजल में वातावरण को साफ-सुथरा रखने और मन में अच्छे विचार लाने की अद्भुत शक्ति होती है. ग्रहण के समय जब हम थोड़े डरे या परेशान होते हैं, तब गंगाजल का स्पर्श हमारे मन को शांत और पवित्र रखने में बड़ी मदद करता है. इससे घर में सुख-शांति बनी रहती है और तनाव कम होने की संभावना बढ़ जाती है. गंगाजल का प्रयोग घर के वातावरण में सकारात्मकता भर देता है.

    ग्रहण समाप्ति के बाद शुद्धि का विधान
    जैसे ही ग्रहण खत्म हो, खुद को और घर को शुद्ध करने के लिए भी इनका बहुत बड़ा महत्व है. नहाने के पानी में गंगाजल की कुछ बूंदें डालकर स्नान करने से शरीर की सारी सुस्ती और दोष दूर हो जाते हैं. इसके बाद पूरे घर और भगवान की मूर्तियों पर भी गंगाजल छिड़कना चाहिए. ग्रहण के दौरान जिन चीजों में आपने तुलसी के पत्ते डाले थे, उन्हें इस्तेमाल करने से पहले पत्ते निकालकर किसी पौधे या साफ जगह पर रख दें. यह छोटी सी विधि आपके जीवन में फिर से सकारात्मकता लाने में मदद करती है.