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  • दिशा सालियान के पिता ने भेजा 500 करोड़ का मानहानि नोटिस, सात दिन में मांगी माफी

    दिशा सालियान के पिता ने भेजा 500 करोड़ का मानहानि नोटिस, सात दिन में मांगी माफी

    फिल्म मैनेजर दिशा सालियान की मौत एक गुत्थी बन गई है. दिशा की मौत के केस में कई बड़े-बड़े नाम सामने आए हैं. अब दिशा के पिता सतीश सालियन ने आदित्य ठाकरे और महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख को 500 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस भेजा है.

    हाल ही में सीबीआई ने सतीश सालियान की शिकायत के आधार पर केस दर्ज किया था. अब उन्होंने दोनों नेताओं को 500 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस भेजा है. नोटिस में दोनों के कुछ बयानों पर आपत्ति जताई गई है. सतीश सालियन ने माफी मांगने, बयान वापस लेने और 500 करोड़ का हर्जाना देने की मांग की है. इसके लिए सात दिन का समय दिया गया है.

    यह कानूनी नोटिस वकील अनुष्का सोनावणे के जरिए भेजा गया है. नोटिस में दोनों नेताओं से बिना शर्त, स्पष्ट और सार्वजनिक रूप से लिखित माफी मांगने को कहा गया है. माफी को सभी प्रमुख मीडिया संस्थानों में प्रकाशित कराने की मांग की गई है. इसके लिए प्रिंट मीडिया में ए4 आकार का विज्ञापन देने और राष्ट्रीय और राज्य स्तर के प्रमुख न्यूज चैनलों के साथ-साथ सोशल मीडिया अकाउंट्स पर कम से कम तीन मिनट का बिना शर्त वीडियो माफीनामा जारी करने को कहा गया है.

    दिशा के पिता की मांग
    नोटिस में कहा गया है कि आदित्य ठाकरे और अनिल देशमुख ने सतीश सालियान के बयानों और कानूनी कार्रवाई को लेकर झूठे, दुर्भावनापूर्ण और मानहानिकारक आरोप लगाए. सतीश का कहना है कि उनकी बेटी की मौत की स्वतंत्र जांच की मांग को राजनीतिक मकसद से प्रेरित बताया गया. साथ ही यह भी कहा गया कि सीबीआई पहले ही दिशा सालियान मामले की जांच कर चुकी है और उन्हें क्लीन चिट दे चुकी है.

    नोटिस के मुताबिक, सतीश सालियान ने अपनी बेटी की मौत की स्वतंत्र जांच के लिए संवैधानिक और कानूनी अधिकारों के तहत हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. उनका दावा है कि याचिका में कई आरोपों, परिस्थितियों, विरोधाभासों और दस्तावेजी व इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को मेंशन किया गया था.

    नोटिस में कहा गया है कि आदित्य ठाकरे ने इस मामले की सुनवाई में हस्तक्षेप किया. उन्होंने केवल कानूनी पहलुओं पर सवाल नहीं उठाए, बल्कि सतीश सालियान की नीयत और उनकी विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े किए. उन्होंने सतीश की कानूनी लड़ाई को राजनीतिक साजिश और उन्हें परेशान करने की कोशिश बताया.

    सतीश सालियान ने इन आरोपों को झूठा बताते हुए कहा है कि इन्हें बिना किसी ठोस सबूत के लगाया गया. नोटिस में अनिल देशमुख के पिछले साल दिए गए उस बयान का भी जिक्र है, जिसमें उन्होंने सतीश की याचिका को आदित्य ठाकरे को बदनाम करने की साजिश बताया था. सतीश का कहना है कि देशमुख खुद इस मामले में निष्पक्ष व्यक्ति नहीं थे, इसलिए उनका बयान और भी गंभीर और दुर्भावनापूर्ण था.

    क्या दिशा की मौत हत्या थी?
    दिशा सालियान के पिता लंबे समय से अपनी बेटी की मौत को लेकर सवाल उठाते आ रहे हैं. 2025 में उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और मामले की दोबारा जांच की मांग की. उनके वकील ने कोर्ट में  दावा किया कि दिशा के साथ पहले यौन हिंसा हुई और उसके बाद उनकी हत्या कर दी गई. ये भी आरोप लगाया गया कि मामले को दबाने के लिए प्रभावशाली लोगों और पुलिस अधिकारियों की भूमिका रही. इन आरोपों की पुष्टि अभी CBI की जांच का विषय है.

    दिशा सालियान की मौत की शुरुआती जांच मुंबई पुलिस ने की थी. पुलिस की जांच में उनकी मौत को आत्महत्या बताया गया था. मार्च 2025 में सामने आई मुंबई पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट में भी दिशा की मौत को आत्महत्या बताया गया था और उनकी मानसिक परेशानी का जिक्र किया गया था. यानी अब CBI के सामने सबसे अहम सवाल यही है कि क्या पुराने निष्कर्षों से अलग कोई नया और ठोस सबूत सामने आता है.

  • 100% अमेरिकी टैरिफ के दांव पर भारत का रुख साफ, ऊर्जा सुरक्षा से नहीं करेगा समझौता

    100% अमेरिकी टैरिफ के दांव पर भारत का रुख साफ, ऊर्जा सुरक्षा से नहीं करेगा समझौता

    नई दिल्ली
    अमेरिकी संसद के निचले सदन (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) में ‘सेंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट’ पारित होने के बाद भारत ने वाशिंगटन को दो टूक शब्दों में कड़ा कूटनीतिक संदेश दे दिया है. विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्पष्ट किया है कि भारत अपनी 1.4 अरब आबादी की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और वैश्विक बाजार की परिस्थितियों के हिसाब से अलग-अलग स्रोतों से तेल और गैस की खरीद जारी रखेगा. 16 सितंबर 2026 को पारित इस अमेरिकी विधेयक में रूस से ऊर्जा आयात करने वाले मुल्कों पर कड़े अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रावधान है, जिसका सीधा असर भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ सकता है। 

    नई दिल्ली ने साफ कर दिया है कि वह अपने राष्ट्रीय, व्यापारिक और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाने को तैयार है. विदेश मंत्रालय के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में इस संवेदनशील मसले पर अमेरिकी अधिकारियों के साथ उच्च स्तर पर कई दौर की बेबाक बातचीत हो चुकी है. भारत ने अमेरिका को स्पष्ट समझा दिया है कि ऐसे एकतरफा फैसलों का असर न केवल द्विपक्षीय व्यापारिक रिश्तों पर पड़ेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में भी भारी उथल-पुथल मच सकती है. सरकार ने उद्योग जगत और व्यापारिक संगठनों के साथ मिलकर इस कानून से पैदा होने वाली चुनौतियों से निपटने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। 

    MEA के मुताबिक, भारत बदलती बाजार परिस्थितियों के अनुरूप ऊर्जा के विविध स्रोतों से खरीद जारी रखेगा. मंत्रालय ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में इस मुद्दे पर विभिन्न अमेरिकी अधिकारियों के साथ उच्च स्तर पर चर्चा हुई है. भारतीय पक्ष ने द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर इसके संभावित प्रभावों को भी स्पष्ट रूप से अमेरिका के सामने रखा है। 

    भारत ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह अपने व्यापार और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है. सरकार इन घटनाक्रमों के प्रभावों से निपटने के लिए भारतीय व्यापार और उद्योग संगठनों के साथ मिलकर काम करेगी। 

    विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत सरकार ने अमेरिकी कांग्रेस में Sanctioning Russia and Iran Act के पारित होने का संज्ञान लिया है. भारत इस मामले में आगे होने वाले घटनाक्रम पर नजर रख रहा है. अमेरिकी कानून में रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रावधान शामिल है और इससे भारत समेत अन्य देशों पर असर पड़ सकता है। 

  • घर में मधुकामिनी का पौधा लगाने से मिलेंगे ये फायदे, जानें सही दिशा और वास्तु नियम

    घर में मधुकामिनी का पौधा लगाने से मिलेंगे ये फायदे, जानें सही दिशा और वास्तु नियम

    मधुकामिनी (Madhu Kamini / Orange Jasmine) का पौधा अपनी खूबसूरत हरी पत्तियों और सफेद, भीनी-भीनी खुशबू वाले फूलों के लिए जाना जाता है. बागवानी और सौंदर्य के अलावा, वास्तु शास्त्र और ज्योतिष में भी इस पौधे का बहुत ऊंचा स्थान है.  इसे घर में लगाने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है और जीवन के कई वास्तु दोष दूर होते हैं. आइए विस्तार से जानते हैं मधुकामिनी के पौधे से जुड़े वास्तु नियम, इसके लाभ और रख-रखाव के सही तरीकों के बारे में.

    1. पौधे को लगाने की सही दिशा
    वास्तु शास्त्र में दिशाओं का बहुत महत्व होता है.  किसी भी पौधे का शुभ फल तभी मिलता है जब उसे सही दिशा में लगाया जाए.

    उत्तर और पूर्व दिशा (ईशान्य कोण): मधुकामिनी के पौधे को हमेशा घर की उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व (ईशान्य कोण) दिशा में लगाना सबसे उत्तम माना जाता है.  यह दिशाएं देवताओं और सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र मानी जाती हैं.  इस दिशा में यह पौधा तेजी से सकारात्मक परिणाम देता है.

    किन दिशाओं में रखने से बचें: इस पौधे को घर की दक्षिण या पश्चिम दिशा में रखने से बचना चाहिए, क्योंकि ये दिशाएं इसकी ऊर्जा के अनुकूल नहीं मानी जातीं.

    2. मुख्य वास्तु लाभ
    सकारात्मक ऊर्जा का संचार: इस पौधे के फूलों की प्राकृतिक और भीनी खुशबू घर के वातावरण को तरोताजा रखती है. यह मानसिक तनाव को कम कर घर में शांति और सुकून भरा माहौल बनाती है.

    आर्थिक समृद्धि: वास्तु के जानकारों के अनुसार, यह पौधा घर में धन और बरकत को आकर्षित करता है.  इसे घर के मुख्य द्वार के पास या बालकनी में सही दिशा में रखने से आर्थिक स्थिति मजबूत होती है.

    पारिवारिक रिश्तों में मिठास: इसके नाम की तरह ही इसके प्रभाव से परिवार के सदस्यों के बीच आपसी प्रेम, अपनापन और मधुर संबंध बने रहते हैं.  यह वैवाहिक जीवन में भी मिठास घोलने में मदद करता है.

    3. रख-रखाव और वास्तु से जुड़े जरूरी नियम
    स्वच्छता का विशेष ध्यान: पौधे के आसपास का स्थान हमेशा साफ-सुथरा होना चाहिए.  गमले के पास किसी भी प्रकार का कड़ा-कचरा या गंदगी जमा न होने दें.

    सूखे पत्तों और शाखाओं को हटाएं: यदि पौधे की कोई टहनी या पत्तियां सूख जाएं, तो उन्हें तुरंत काटकर अलग कर दें.  वास्तु के अनुसार, घर में सूखा या मुरझाया हुआ पौधा नकारात्मक ऊर्जा का कारण बनता है.

    नियमित सिंचाई और देखभाल: पौधे को पर्याप्त धूप और पानी दें ताकि उसकी ताजगी बनी रहे. हरा-भरा और स्वस्थ पौधा घर में हमेशा सकारात्मकता और तरक्की लेकर आता है.

  • मुक्ताकाशी मंच में सजेगी काव्य की महफिल, नामचीन कविगण करेंगे रचनाओं का पाठ

    मुक्ताकाशी मंच में सजेगी काव्य की महफिल, नामचीन कविगण करेंगे रचनाओं का पाठ

    मुक्ताकाशी मंच में सजेगी काव्य की महफिल, नामचीन कविगण करेंगे रचनाओं का पाठ

    सेवा संकल्प अभियान के तहत 18 सितंबर को होगा ‘भव्य काव्य संध्या’ का आयोजन, छत्तीसगढ़ के नामचीन कवियों के साथ लखनऊ और जबलपुर के रचनाकार भी देंगे प्रस्तुति

    रायपुर
    संस्कृति विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा सेवा संकल्प अभियान के तहत 18 सितंबर 2026 को रायपुर के महंत घासीदास स्मारक परिसर स्थित मुक्ताकाशी मंच में ‘भव्य काव्य संध्या’ का आयोजन किया जाएगा। शाम 7 बजे से आयोजित इस विशेष काव्य संध्या में छत्तीसगढ़ के नामचीन कविगण अपनी बहुचर्चित रचनाओं की प्रस्तुति देंगे।

    कार्यक्रम में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आमंत्रित रचनाकार भी अपनी साहित्यिक प्रस्तुतियों से काव्य संध्या की गरिमा बढ़ाएंगे। लखनऊ की श्रृंगार रस की कवयित्री सुश्री सोनी मिश्रा अपनी रचनाओं की प्रस्तुति देंगी, वहीं जबलपुर के श्री विनोद नयन भी काव्य पाठ करेंगे। छत्तीसगढ़ के स्थानीय कवियों की सहभागिता के साथ यह आयोजन साहित्य और काव्य प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा।

    सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आयोजित यह काव्य संध्या साहित्य, संस्कृति और रचनात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से जनभागीदारी को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक विशेष आयोजन है। मुक्ताकाशी मंच का वातावरण काव्य पाठ और साहित्यिक प्रस्तुतियों से सराबोर होगा, जहां श्रोताओं को विभिन्न रस और भावों से जुड़ी रचनाएं सुनने का अवसर मिलेगा।

    संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। कार्यक्रम का आयोजन 18 सितंबर को शाम 7 बजे से महंत घासीदास स्मारक परिसर, रायपुर के मुक्ताकाशी मंच में किया जाएगा। साहित्य एवं कविता प्रेमियों से इस काव्य संध्या में सहभागिता का आह्वान किया गया है।

    उल्लेखनीय है कि संस्कृति विभाग द्वारा सेवा संकल्प अभियान के तहत सांस्कृतिक एवं साहित्यिक गतिविधियों के माध्यम से जनभागीदारी को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है। इसी क्रम में आयोजित ‘भव्य काव्य संध्या’ छत्तीसगढ़ की समृद्ध साहित्यिक एवं सांस्कृतिक परंपरा को मंच प्रदान करने का अवसर भी बनेगी।

  • EPFO का नया नियम आज से लागू, ₹25 हजार सैलरी पर कितनी मिलेगी पेंशन? समझें पूरा गणित

    EPFO का नया नियम आज से लागू, ₹25 हजार सैलरी पर कितनी मिलेगी पेंशन? समझें पूरा गणित

    नई दिल्ली

    केंद्र सरकार ने  प्राइवेट सेक्‍टर में काम करने वाले लोगों को एक बड़ा तोहफा दिया. पेंशन कटौती के लिए अनिवार्य सैलरी लिमिट को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दिया है. सरकार का कहना है कि इससे 51 लाख कर्मचारियों के लिए पेंशन कटौती अनिवार्य हो जाएगी और सरकार को अनुमानित 11,339 करोड़ रुपये का बोझ उठाना होगा। 

    पेंशन में योगदान
    पेंशन के लिए कंट्रीब्‍यूशन कर्मचारी की सैलरी से नहीं, बल्कि नियोक्‍ता के योगदान से जाएगा. नियोक्‍ता अपने 8.33 फीसदी पेंशन में योगदान देगा और बाकी पीएफ अकाउंट में जमा करेगा. ऐसे में बिना इन हैंड सैलरी कटे, कर्मचार‍ियों को पेंशन कटौती का लाभ दिया जाएगा. केंद्र सरकार के अनुसार, कर्मचारियों के सोशल सिक्‍योंरिटी को बढ़ाने के लिए यह फैसला लिया गया है। 

    रिटायरमेंट के बाद पेंशन
    इस नए नियम को आज यानी 17 सितंबर 2026 से लागू कर दिया गया है. अब ऐसे में ज्‍यादातर लोग ये जानना चाहते हैं कि अगर उनका बेसिक और डीए मिलाकर सैलरी 25,000 रुपये की कैटेगरी में आती है, तो रिटायरमेंट के बाद उनकी पेंशन कितनी बनेगी? 

    EPS के तहत पेंशन का फार्मूला? 
    एमप्‍लॉई पेंशन स्‍कीम (EPS) के तहत पेंशन कैलकुलेट करने का एक खास फार्मूला दिया गया है, जिसके तहत आप आप अपनी सैलरी और साल के अनुसार ये अनुमान लगा सकते हैं कि आपकी कितनी सैलरी कटेगी? 

    मासिक पेंशन = पेंशन योग्‍य सैलरी × पेंशन योग्‍य सेवा के साल ÷ 70

    20 साल या उससे अधिक की सेवा पर 2 साल का अतिरिक्त सर्विस वेटेज भी मिलता है। 

    अब अगर 58 साल रिटायरमेंट की उम्र मानी जाए, तो कितनी पेंशन बनेगी? 
    अगर आप 25 साल के हैं और आपकी बेसिक और डीए मिलाकर 25,000 रुपये है, तो आपके पेंशन योग्‍य साल- 33 साल होगा. इसपर 2 साल का बोनस भी दिया जाएगा. ऐसे में अनुमानित पेंशन ₹12,500 महीना होगा. 
    इसी तरह, अगर आपकी उम्र 30 साल है और आपकी Basic + DA 25,000 रुपये है, तो पेंशन योग्‍य सर्विस- 28 साल होगी. इसपर 2 सला का बोनस भी दिया जाएगा. ऐसे में अनुमानित पेंशन  ₹10,714 मंथली होगा। 

    यहां देखें पूरा कैलकुलेशन
    25 साल की उम्र में पेंशन कैलकुलेशन
    ₹25,000 × 35 ÷ 70 = ₹12,500 प्रति महीना 

    30 साल की उम्र में पेंशन कैलकुलेशन 
    ₹25,000 × 30 ÷ 70 = ₹10,714 प्रति महीना

    कब मिलेगी इतनी पेंशन?       
    यह तभी संभव है, जब 25000 रुपये आपकी पेंशन योग्‍य सैलरी रहे. वास्तविक EPS गणना में अंतिम अवधि की पेंशन योग्‍य सैलरी और सेवा अ‍वधि देखी जाती है. अगर ये दोनों इस सेनारियो में फिट बैठते हैं तो आपकी पेंशन ऊपर बताए गए कैलकुलेशन के आधार पर मिलेगी। 

  • सेवा संकल्प अभियान के तहत ग्रामीणों के बीच पहुंचे पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल

    सेवा संकल्प अभियान के तहत ग्रामीणों के बीच पहुंचे पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल

    सेवा संकल्प अभियान के तहत ग्रामीणों के बीच पहुंचे पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल

    पीएम जनमन आवास के हितग्राहियों से की आत्मीय मुलाकात,  लखपति दीदी भानुकला बैगा की सफलता को सराहा

    जनकल्याणकारी योजनाओं से बदली जिंदगी, सेवा संकल्प अभियान में सामने आईं सफलता की कहानियां

    रायपुर, 
     प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में 25 वर्षों की समर्पित जनसेवा के अवसर पर 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक आयोजित सेवा संकल्प अभियान के तहत पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री राजेश अग्रवाल ने गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा कर हितग्राहियों से आत्मीय संवाद किया। उन्होंने गौरेला विकासखंड के ग्राम पंचायत धनौली पहुंचकर शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित परिवारों से मुलाकात की और उनके जीवन में आए सकारात्मक बदलावों की जानकारी ली।

    मंत्री अग्रवाल ने पीएम जनमन आवास योजना के हितग्राही कार्तिक राम बैगा एवं धीरपाल सिंह बैगा के नवनिर्मित आवासों का अवलोकन किया। उन्होंने दोनों परिवारों से चर्चा कर आवास मिलने के बाद उनके जीवन में आए बदलावों के बारे में जाना। हितग्राहियों ने पक्का आवास मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार जताया।

    सेवा संकल्प अभियान के दौरान ग्रामीणों से संवाद करते हुए मंत्री राजेश अग्रवाल ने धीरपाल सिंह बैगा की पत्नी श्रीमती भानुकला बैगा की सफलता की कहानी भी जानी। श्रीमती भानुकला बैगा ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान के महिला स्वसहायता समूह से जुड़ी हैं और बकरी पालन सहित विभिन्न आजीविका गतिविधियों के माध्यम से अपनी आय बढ़ा रही हैं।

    स्वसहायता समूह से जुड़कर निरंतर मेहनत और आजीविका गतिविधियों के विस्तार के माध्यम से उन्होंने लखपति दीदी बनने की उपलब्धि हासिल की है। मंत्री अग्रवाल ने उनकी सफलता की सराहना करते हुए कहा कि ग्रामीण महिलाओं का स्वसहायता समूहों से जुड़कर आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ना समाज के लिए प्रेरणादायी है। उन्होंने श्रीमती भानुकला बैगा को आगे भी अपनी आजीविका गतिविधियों को विस्तार देने के लिए प्रोत्साहित किया।

    आयुष्मान भारत योजना के हितग्राही से जाना योजना का लाभ

    सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों से संवाद की कड़ी में मंत्री राजेश अग्रवाल ने आयुष्मान भारत योजना के हितग्राही नेमचंद गुर्जर से भी मुलाकात की। उन्होंने गुर्जर एवं उनके परिवार से स्वास्थ्य संबंधी जानकारी ली और आयुष्मान भारत योजना से मिले लाभ के बारे में जाना।

    नेमचंद गुर्जर ने बताया कि उन्होंने आयुष्मान कार्ड के माध्यम से उपचार का लाभ लिया है। उन्होंने रेबीज का टीकाकरण भी कराया है। मंत्री अग्रवाल ने योजना से मिले लाभ की जानकारी लेते हुए परिवार के स्वास्थ्य का हालचाल जाना।

    ग्रामीणों की आत्मीयता से अभिभूत हुए मंत्री अग्रवाल

    मुलाकात के दौरान गुर्जर परिवार ने मंत्री राजेश अग्रवाल का आत्मीय स्वागत किया और उन्हें गरमा-गरम स्वादिष्ट भुट्टा खिलाया। ग्रामीण परिवार के इस सहज और आत्मीय आतिथ्य के लिए मंत्री अग्रवाल ने परिवार का धन्यवाद किया। इस दौरान ग्रामीणों और मंत्री के बीच सहज संवाद का वातावरण बना रहा।

    मंत्री राजेश अग्रवाल ने ग्रामीणों से सेवा संकल्प अभियान में अधिक से अधिक सहभागिता की अपील की। उन्होंने कहा कि यह अभियान सेवा, समर्पण और जनभागीदारी की भावना को मजबूत करने का अवसर है। उन्होंने ग्रामीणों से ‘आशीर्वाद का दीप’ जलाकर अभियान से जुड़ने और जनसेवा की भावना को आगे बढ़ाने का आग्रह किया।

    उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं का वास्तविक उद्देश्य तभी सार्थक होता है, जब उनका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और लाभार्थी अपने अनुभव साझा कर दूसरे लोगों को भी योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित करें। सेवा संकल्प अभियान इसी जनभागीदारी और सेवा भावना को व्यापक बनाने का माध्यम है।

    इस अवसर पर विधायक प्रणव कुमार मरपची, जिला पंचायत अध्यक्ष सुसमीरा पैकरा, कलेक्टर विजय दयाराम के., जिला पंचायत सीईओ मुकेश रावटे, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अविनाश मिश्रा सहित अनेक जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक एवं प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे।

  • PMJF PDG लायन तिलोकचंद बरडिया को मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 3233 में चेयरपर्सन – LEO-Lion Liaison की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी

    PMJF PDG लायन तिलोकचंद बरडिया को मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 3233 में चेयरपर्सन – LEO-Lion Liaison की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी

    PMJF PDG लायन तिलोकचंद बरडिया को मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 3233 में चेयरपर्सन – LEO-Lion Liaison की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी

    इंदौर
    लायनिस्टिक वर्ष 2026–27 के लिए मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 3233 में लायन तिलोकचंद बरडिया को चेयरपर्सन – LEO-Lion Liaison की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह नियुक्ति 5 सितम्बर को इंदौर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान की गई।

    मल्टीपल काउंसिल चेयरपर्सन लायन प्रवीण वशिष्ठ द्वारा लायन तिलोकचंद बरडिया को यह जिम्मेदारी प्रदान करते हुए उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी गईं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि लायन बरडिया अपनी लगन, निष्ठा, नेतृत्व क्षमता एवं अनुभव के माध्यम से इस जिम्मेदारी का प्रभावी ढंग से निर्वहन करेंगे।

    इस अवसर पर लायन तिलोकचंद बरडिया ने इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए मल्टीपल काउंसिल चेयरपर्सन लायन प्रवीण वशिष्ठ एवं मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 3233 के नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि Leo एवं युवा नेतृत्व को सशक्त बनाना, युवाओं को Lions की सेवा गतिविधियों से जोड़ना तथा Lions और Leo सदस्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना उनकी प्राथमिकताओं में रहेगा।

    ‘LEO-Lion Liaison’ की भूमिका के अंतर्गत Lions और Leo सदस्यों के बीच संवाद एवं समन्वय को मजबूत करने, युवाओं को नेतृत्व के अवसर उपलब्ध कराने, नेतृत्व विकास गतिविधियों को प्रोत्साहित करने तथा Leo से Lion बनने की प्रक्रिया को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जाता है। Lions Clubs International के अनुसार यह एक वर्षीय liaison भूमिका युवा नेतृत्व को Lions संगठन के साथ प्रभावी रूप से जोड़ने और Leo कार्यक्रम को मजबूत करने में सहयोग करती है।

    लायनतिलोकचंद बरडिया लंबे समय से Lions गतिविधियों एवं सामाजिक सेवा कार्यों से जुड़े रहे हैं। नई जिम्मेदारी के साथ उनसे मल्टीपल डिस्ट्रिक्ट 3233 में युवा नेतृत्व को नई दिशा देने और Lions तथा Leo समुदाय के बीच मजबूत सहभागिता विकसित करने की अपेक्षा है।

    लायनिस्टिक वर्ष 2026–27 के लिए मिली यह जिम्मेदारी लायन तिलोकचंद बरडिया के सामाजिक एवं संगठनात्मक दायित्वों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखी जा रही है।

    लायन राहुल अग्रवाल 
    सेकटरी 
    लायन क्लब सेंट्रल रायपुर छत्तीसगढ़

  • राज्यपाल  रमेन डेका से मंत्री टंकराम वर्मा ने की सौजन्य भेंट

    राज्यपाल रमेन डेका से मंत्री टंकराम वर्मा ने की सौजन्य भेंट

    राज्यपाल  रमेन डेका से मंत्री टंकराम वर्मा ने की सौजन्य भेंट

    रायपुर
     राज्यपाल रमेन डेका से आज लोक भवन में उच्च शिक्षा, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री  टंकराम वर्मा ने सौजन्य भेंट की। इस दौरान विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई।

  • घर पर बनाएं बाजार जैसा पाव भाजी मसाला, शेफ विकास खन्ना ने बताया आसान तरीका

    घर पर बनाएं बाजार जैसा पाव भाजी मसाला, शेफ विकास खन्ना ने बताया आसान तरीका

     पाव भाजी का नाम सुनते ही मुंबई की सड़कों पर मिलने वाली गरमा-गरम भाजी और मक्खन में सिके पाव याद आ जाते हैं. ठेले या रेस्टोरेंट में मिलने वाली पाव भाजी का स्वाद इतना खास होता है कि लोग इसे खाने के लिए लाइन तक लगाते हैं. वैसे तो यह महाराष्ट्र की मशहूर डिश है, लेकिन अब मुंबई के साथ दिल्ली, यूपी और देश के दूसरे हिस्सों में भी लोग इसे खूब पसंद करते हैं.

    हालांकि, घर पर पाव भाजी बनाने के बाद अक्सर लोगों को शिकायत रहती है कि इसमें बाजार जैसी खुशबू और स्वाद नहीं आता. इसकी एक बड़ी वजह पाव भाजी में इस्तेमाल होने वाला मसाला भी हो सकता है. मशहूर शेफ विकास खन्ना ने पाव भाजी मसाला तैयार करने का एक तरीका शेयर किया है, जिसे घर पर आसानी से बनाया जा सकता है. इस मसाले को भाजी में डालने से उसका स्वाद और खुशबू काफी बढ़ जाती है.

    पाव भाजी मसाला बनाने के लिए सामग्री
        5 सूखी लाल मिर्च
        6 लौंग
        1 चम्मच जीरा
        ¼ कप साबुत धनिया
        1/5 चम्मच सौंफ
        4 बड़ी इलायची
        2 इंच दालचीनी
        1 चम्मच हल्दी पाउडर
        2 चम्मच आमचूर पाउडर
        1 चम्मच काली मिर्च पाउडर
        1 चम्मच लाल मिर्च पाउडर
        1 चम्मच काला नमक

    कैसे बनाएं पाव भाजी मसाला?
    सबसे पहले सूखी लाल मिर्च के डंठल और बीज निकाल लें. फिर एक पैन को गैस पर गर्म करें, अब इन्हें पैन में डालकर हल्का रोस्ट करें. मिर्च को ज्यादा देर तक न भूनें और न ही इसे जलने दें, क्योंकि जली हुई मिर्च से मसाले का स्वाद कड़वा हो सकता है.

    अब एक दूसरे पैन में साबुत धनिया, लौंग, जीरा, सौंफ, बड़ी इलायची और दालचीनी डालें. इन सभी साबुत मसालों को स्लो फ्लेम पर हल्का गर्म कर लें. मसालों को सिर्फ इतना ही रोस्ट करना है कि उनकी खुशबू आने लगे.

    इसके बाद भुने हुए साबुत मसालों और सूखी लाल मिर्च को थोड़ा ठंडा होने दें. इन्हें मिक्सर जार में डालें. अब इसमें हल्दी पाउडर, आमचूर पाउडर, काली मिर्च पाउडर, लाल मिर्च पाउडर और काला नमक डाल दें.

    सभी चीजों को अच्छी तरह पीसकर बारीक पाउडर तैयार कर लें. अगर आपको दरदरा मसाला पसंद है तो आप बिल्कुल पतला पीसने की जरूरत नहीं है.

    भाजी में कैसे करें इस्तेमाल?
    जब भी घर पर पाव भाजी बनाएं, सब्जियों को मैश करने के बाद इस मसाले को अपनी जरूरत के हिसाब से डालें और अच्छी तरह मिलाकर पकाएं. मसालों को भाजी के साथ कुछ देर पकाने से उनकी खुशबू और स्वाद अच्छी तरह मिल जाएगा. इस तरह घर पर तैयार किया गया फ्रेश मसाला आपकी पाव भाजी को ज्यादा खुशबूदार और चटपटा स्वाद दे सकता है.

  • राधा या रुक्मिणी, कौन हैं कृष्ण के सबसे करीब? जानें दोनों से जुड़े पौराणिक रहस्य

    राधा या रुक्मिणी, कौन हैं कृष्ण के सबसे करीब? जानें दोनों से जुड़े पौराणिक रहस्य

     भगवान श्रीकृष्ण का नाम आते ही सबसे पहले राधा रानी का स्मरण होता है. राधा को जहां कृष्ण की प्रेम और भक्ति का प्रतीक माना जाता है, वहीं रुक्मिणी को उनकी अर्धांगिनी के रूप में पूजा जाता है. भगवान कृष्ण इन दोनों से अलग-अलग रूपों में प्रेम करते थे.

    लेकिन क्या आपको पता है कि राधा और रुक्मिणी से जुड़े कई ऐसे पौराणिक रहस्य हैं, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं? क्या राधा और रुक्मिणी को देवी लक्ष्मी के ही अलग-अलग स्वरूप माना जाता है? और क्या राधा-कृष्ण का विवाह वास्तव में हुआ था? आइए, आज जानते हैं राधा, रुक्मिणी और भगवान कृष्ण से जुड़ी इन पौराणिक कथाओं को.

    रुक्मिणी ने श्रीकृष्ण को बनाया था अपना पति
    पौराणिक कथा के अनुसार, रुक्मिणी विदर्भ के राजा भीष्मक की पुत्री थीं. वह भगवान श्रीकृष्ण के गुणों और व्यक्तित्व से प्रभावित थीं और मन ही मन उन्हें अपना पति मान चुकी थीं. लेकिन रुक्मिणी के भाई रुक्मी उनका विवाह शिशुपाल से कराना चाहते थे. जब रुक्मिणी को इस बात का पता चला, तो उन्होंने भगवान कृष्ण को संदेश भेजकर अपनी इच्छा बताई.

    कथा के अनुसार, विवाह से पहले ही भगवान कृष्ण रुक्मिणी को लेकर चले गए और बाद में दोनों का विवाह हुआ. इसी वजह से रुक्मिणी को भगवान कृष्ण की प्रमुख पत्नियों में सबसे प्रमुख स्थान प्राप्त है.

    राधा और रुक्मिणी को लक्ष्मी का स्वरूप क्यों माना जाता है?
    वैष्णव परंपरा में भगवान कृष्ण को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है. इसी परंपरा में रुक्मिणी को देवी लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है. राधा रानी के स्वरूप को लेकर अलग-अलग वैष्णव परंपराओं में अलग व्याख्याएं मिलती हैं. गौड़ीय वैष्णव परंपरा में राधा को कृष्ण की ह्लादिनी शक्ति यानी उनकी दिव्य आनंद-शक्ति माना जाता है. इसी वजह से राधा रानी और श्रीकृष्ण का संबंध केवल सांसारिक प्रेम के रूप में नहीं, बल्कि ईश्वर और उनकी शक्ति के आध्यात्मिक संबंध के रूप में भी समझाया जाता है.

    क्या राधा और कृष्ण का विवाह हुआ था?
    राधा-कृष्ण के विवाह को लेकर अलग-अलग धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं में अलग-अलग कथाएं मिलती हैं. ब्रह्मवैवर्त पुराण और गर्ग संहिता से जुड़ी परंपराओं में राधा-कृष्ण विवाह का वर्णन मिलता है. एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, ब्रज के भांडीर वन में ब्रह्मा जी ने राधा और कृष्ण का विवाह कराया था. इस मान्यता से जुड़ा भांडीर वन आज भी ब्रज क्षेत्र में धार्मिक आस्था का प्रमुख स्थान माना जाता है. इसलिए यह कहना उचित होगा कि राधा-कृष्ण के विवाह की कथा कुछ धार्मिक परंपराओं में स्वीकार की गई है, जबकि सभी प्रमुख ग्रंथों में इसका एक जैसा वर्णन नहीं मिलता.

    सीता और रुक्मिणी के संबंध की कथा
    राधा और रुक्मिणी को देवी लक्ष्मी के स्वरूप से जोड़ने वाली मान्यताओं के साथ रामायण की कुछ कथाएं भी जोड़ी जाती हैं. एक प्रचलित कथा के अनुसार, भगवान राम के अश्वमेध यज्ञ के दौरान माता सीता की अनुपस्थिति में उनके स्थान पर उनकी स्वर्ण प्रतिमा स्थापित की गई थी. यह कथा भगवान राम की पत्नी के रूप में सीता के महत्व को दर्शाती है.

    बाद की पौराणिक परंपराओं में सीता, रुक्मिणी और लक्ष्मी के स्वरूपों को एक-दूसरे से जोड़कर भी देखा गया है. हालांकि, इन कथाओं के स्रोत और विवरण अलग-अलग ग्रंथों में अलग मिलते हैं.

    राधा-कृष्ण का प्रेम संबंध और रुक्मिणी का वैवाहिक संबंध
    राधा रानी और रुक्मिणी को समझने के लिए उनके संबंधों को एक ही दृष्टि से देखना जरूरी नहीं है. राधा-कृष्ण का संबंध भक्ति, प्रेम और आध्यात्मिक समर्पण का प्रतीक माना जाता है. वहीं रुक्मिणी-कृष्ण का संबंध पति-पत्नी के वैवाहिक रिश्ते के रूप में सामने आता है. इसलिए कृष्ण के जीवन में राधा और रुक्मिणी की भूमिकाएं अलग होते हुए भी दोनों का धार्मिक महत्व बहुत बड़ा है.

    कृष्ण और राधा के वियोग की कथाएं
    राधा और कृष्ण के वियोग को लेकर भी कई पौराणिक और भक्तिपरक कथाएं प्रचलित हैं. श्री कृष्ण के वृंदावन छोड़कर मथुरा और फिर द्वारका चले जाने के बाद दोनों के अलग होने की कथा भक्ति साहित्य में बेहद महत्वपूर्ण बन गई. कुछ परंपराओं में श्रीकृष्ण के वियोग को अलग-अलग श्रापों और पौराणिक घटनाओं से जोड़कर समझाया गया है. हालांकि, इन कथाओं के विवरण सभी ग्रंथों में समान नहीं हैं. राधा-कृष्ण का यह वियोग भक्त और भगवान के बीच उस प्रेम का प्रतीक माना जाता है, जिसमें मिलने से ज्यादा भगवान की स्मृति और भक्ति को महत्व दिया जाता है.

    रुक्मिणी और श्री कृष्ण के अलग होने की कथा
    रुक्मिणी और श्रीकृष्ण से जुड़ी एक अन्य कथा ऋषि दुर्वासा से संबंधित है. विभिन्न पुराणिक परंपराओं में इस प्रसंग के अलग-अलग रूप मिलते हैं. इस कथा में ऋषि दुर्वासा के आतिथ्य और उनके साथ हुए व्यवहार को लेकर भगवान कृष्ण और रुक्मिणी से जुड़ी घटनाओं का वर्णन मिलता है. कुछ लोककथाओं में इसी प्रसंग को दोनों के लंबे समय तक अलग रहने से भी जोड़ा जाता है.

    हालांकि, इस कथा के अलग-अलग संस्करणों में घटनाओं और अवधि को लेकर अंतर मिलता है, इसलिए इसे एक निश्चित ऐतिहासिक घटना की तरह नहीं, बल्कि पौराणिक परंपरा के रूप में देखना चाहिए.

    राधा रानी और रुक्मिणी, दोनों का अपना अलग महत्व
    भगवान कृष्ण के साथ राधा और रुक्मिणी के संबंधों को भारतीय धार्मिक परंपरा में अलग-अलग भावों से समझाया गया है. राधा को प्रेम, भक्ति और कृष्ण के प्रति पूर्ण समर्पण का प्रतीक माना जाता है. वहीं रुक्मिणी को पत्नी, गृहस्थ धर्म और देवी लक्ष्मी के स्वरूप से जोड़ा जाता है.

    इसलिए राधा और रुक्मिणी की तुलना करने के बजाय दोनों के धार्मिक स्वरूप और उनसे जुड़ी अलग-अलग परंपराओं को समझना अधिक महत्वपूर्ण है. भगवान श्रीकृष्ण की कथाओं में प्रेम, भक्ति, त्याग और समर्पण के कई रूप दिखाई देते हैं. यही वजह है कि आज भी राधा-कृष्ण और रुक्मिणी-कृष्ण की पूजा करोड़ों भक्त श्रद्धा के साथ करते हैं.