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  • MP के 7 सीनियर पुलिस अफसरों को मिला 2016 का IPS कैडर, DIG बनने की राह आसान

    MP के 7 सीनियर पुलिस अफसरों को मिला 2016 का IPS कैडर, DIG बनने की राह आसान

    भोपाल
    केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मध्य प्रदेश राज्य पुलिस सेवा के 1998 बैच के 7 वरिष्ठ अधिकारियों की पदोन्नति का वर्ष (कैडर वर्ष) तय कर दिया है। 27 वर्षों के लंबे सेवाकाल के बाद इन सभी अधिकारियों को आईपीएस 2016 बैच आवंटित किया गया है। आईपीएस सीनिओरिटी रूल्स 1988 के तहत 27 साल से अधिक की सेवा पर अधिकतम 9 वर्ष का वेटेज दिया जाता है।

    इसी नियमावली के तहत गणना वर्ष (2025) में से 9 साल घटाकर इन अफसरों को 2016 का बैच मिला है। गृह मंत्रालय के आदेशानुसार, यह सभी अफसर 2016 बैच के प्रमोटेड आईपीएस राजेंद्र कुमार वर्मा के ठीक नीचे और 2017 बैच के सीनियर आईपीएस अंकित जायसवाल के ठीक ऊपर रहेंगे।

    प्रमोट हुए अधिकारियों के नाम
    निमिषा पांडे, मलय जैन, अमित सक्सेना, मनीषा पाठक सोनी, सुमन गुर्जर, सब्यसाची सराफ और समर वर्मा।

    पदोन्नति का फायदा
    सर्विस लेंथ काउंट होने से इन अधिकारियों को कनिष्ठ प्रशासनिक व सिलेक्शन ग्रेड मिलने का रास्ता साफ हो गया है, जिससे वे भविष्य में डीआईजी (DIG) पद की पात्रता भी हासिल कर लेंगे।

  • उज्जैन में मोहन भागवत बोले- धर्म के पालन से मिलता है जीवन का सुख, मोक्ष की ओर भी बढ़ता है व्यक्ति

    उज्जैन में मोहन भागवत बोले- धर्म के पालन से मिलता है जीवन का सुख, मोक्ष की ओर भी बढ़ता है व्यक्ति

    उज्जैन 
    रिलिजन धर्म नहीं, धर्म जीवन का अनुशासन है। किसी इच्छा की पूर्ति, भय, लोभ या प्राण बचाने के लिए भी धर्म का त्याग नहीं करना चाहिए। सुख-दुख आते-जाते रहते हैं, लेकिन धर्म नित्य रहता है।

    यह बात राष्ट्रीय स्वयं सेवक प्रमुख मोहन भागवत ने कही। वे उज्जैन में ‘युवा धर्म संसद’ को संबोधित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जीवन में जिस भौतिक सुख और अर्थ-काम की अपेक्षा मनुष्य करता है, वह धर्म के पालन से प्राप्त होती है। धर्म का सेवन जीवन के सुख देने के साथ व्यक्ति को मोक्ष की ओर भी अग्रसर करता है।उन्होंने महाभारत की फलश्रुति का उल्लेख करते हुए कहा कि सुबह भारत सावित्री का स्मरण करने और उसके भाव को दिनभर जीवन में रखने से महाभारत सुनने का फल प्राप्त होता है।

    उन्होंने कहा कि आज धर्म को लेकर भ्रम का एक कारण अपनी भाषा और धर्म के वास्तविक अर्थ को भूल जाना है। पश्चिमी लोगों ने भारत में धर्म के आचरण और उससे जुड़े कर्मकांड व अनुशासन को देखा और उसे अपने यहां के ‘रिलिजन’ के समान समझ लिया। बाद में हम भी धर्म को रिलिजन कहने लगे।

    वक्ता ने कुश्ती का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे कुश्ती सीखने के लिए अखाड़े में जोर-बैठक लगाना जरूरी है, वैसे ही धर्म के कर्मकांड और अनुशासन उसके अभ्यास का हिस्सा हैं। कर्मकांड धर्म का एक अंग है, पूरा धर्म नहीं। उन्होंने कहा- ‘रिलिजन धर्म नहीं है।’

    1,700 युवा छात्र-छात्राएं शामिल हो रहे
    गीता भवन में 17 से 19 सितंबर तक आयोजित सेवाज्ञ संस्थानम् के इस कार्यक्रम में देशभर से करीब 1,700 युवा छात्र-छात्राएं शामिल होने पहुंचे हैं। दूसरे दिन करीब 300 विद्वान, शिक्षक, शोधकर्ता और धर्माचार्य भी कार्यक्रम का हिस्सा बनेंगे। आरएसएस प्रमुख डॉ. मोहन भागवत उद्घाटन सत्र में, जबकि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 19 सितंबर को समापन सत्र में शामिल होंगे।

    सेवाज्ञ संस्थानम् की ओर से सिद्धपीठ हनुमत निवास अयोध्या के पीठाधीश्वर एवं संरक्षक आचार्य मिथिलेशनन्दिनीशरणजी महाराज के मार्गदर्शन में यह आयोजन किया जा रहा है। आयोजकों के अनुसार, काशी, अयोध्या, मथुरा, हरिद्वार और काञ्चीपुरम् के बाद यह युवा धर्म संसद का छठा संस्करण है। अगले साल इसका आयोजन द्वारका में किया जाएगा।

    देशभर से चयनित युवाओं का विशेष उद्बोधन सत्र भी होगा
    दूसरे दिन सुबह युवा धर्म संसद का विधिवत उद्घाटन होगा। कार्यक्रम में संघ प्रमुख मोहन भागवत, आचार्य मिथिलेशनन्दिनीशरण महाराज, संरक्षक-सेवाज्ञ संस्थानम्, प्रो. श्रीनिवास बरखेड़ी, कुलगुरु-केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली और आशीष कुमार आशु, अध्यक्ष-सेवाज्ञ संस्थानम् शामिल होंगे। इस दौरान धर्म की अस्तित्वपरक अवधारणा पर व्याख्यान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और सूचना-विचार संघर्ष पर संवाद तथा देशभर से चयनित युवाओं का विशेष उद्बोधन सत्र होगा।

    व्याख्यान सत्र में प्रसिद्ध गीतकार मनोज मुंतशिर भी शामिल होंगे
    उद्घाटन सत्र के बाद दोपहर 12 से 2 बजे तक व्याख्यान सत्र आयोजित होगा। इसमें अवधेशानंद गिरि जी महाराज, आचार्य महामंडलेश्वर, जूना अखाड़ा; मनोज मुंतशिर, प्रसिद्ध पटकथा लेखक एवं गीतकार; प्रो. श्रीनिवास बरखेड़ी, कुलपति, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय; स्मृति अनंतलक्ष्मी जी, सह-संस्थापिका एवं आध्यात्मिक मार्गदर्शिका, अनादि फाउंडेशन और जे. नंद कुमार जी, राष्ट्रीय संयोजक, प्रज्ञा प्रवाह युवाओं का मार्गदर्शन करेंगे।

    25 राज्यों से 1,700 युवा कार्यक्रम का हिस्सा बनेंगे
    सह-मीडिया प्रमुख बादल सिंह ने बताया कि युवा धर्म संसद का छठा संस्करण इस बार उज्जैन में आयोजित किया जा रहा है। इसमें देशभर से करीब 1,700 छात्र-छात्राओं के साथ लगभग 300 विद्वान, शिक्षक और प्रतिभागी शामिल हो रहे हैं। स्वामी विवेकानंद के शिकागो उद्बोधन को ध्यान में रखते हुए युवा धर्म संसद का आयोजन किया गया है।

    इससे पहले काशी, अयोध्या, हरिद्वार, मथुरा और कांचीपुरम में इसका आयोजन हो चुका है। इन आयोजनों में करीब 7,100 प्रतिभागी शामिल हो चुके हैं। इस बार रजिस्ट्रेशन जुलाई में शुरू हुए थे और 31 अगस्त को बंद कर दिए गए।

  • कलेक्टर ने रोजगार सहायक के विरुद्ध कार्यवाही करने के दिए निर्देश

    कलेक्टर ने रोजगार सहायक के विरुद्ध कार्यवाही करने के दिए निर्देश

    कलेक्टर ने रोजगार सहायक के विरुद्ध कार्यवाही करने के दिए निर्देश 

    शहडोल
     कलेक्टर  पार्थ जायसवाल ने आज जनपद पंचायत सोहागपुर के ग्राम पटासी में आयोजित मुख्यमंत्री जन कल्याण शिविर में रामवती बैगा को दो वर्ष बाद मुख्यमंत्री सामाजिक सुरक्षा कल्याणी पेंशन योजना के तहत स्वीकृत पेंशन आदेश जारी करने पर ग्राम पंचायत पटासी के रोजगार सहायक के विरुद्ध कार्यवाही करने के निर्देश मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत सोहागपुर को दिए।

  • छात्रावास में खेल मैदान करें विकसित, उच्च गुणवत्ता के मटेरियल करें उपयोग :- कलेक्टर

    छात्रावास में खेल मैदान करें विकसित, उच्च गुणवत्ता के मटेरियल करें उपयोग :- कलेक्टर

    छात्रावास में खेल मैदान करें विकसित, उच्च गुणवत्ता के मटेरियल करें उपयोग :- कलेक्टर 

    कलेक्टर ने निर्माणाधीन पॉलिटेक्निक छात्रावास का किया निरीक्षण

    शहडोल
     कलेक्टर श्री पार्थ जायसवाल ने आज जिला मुख्यालय में  निर्माणाधीन 100 सीटर पॉलिटेक्निक छात्रावास का निरीक्षण कर निर्माण कार्य की प्रगति एवं परिसर में उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं का जायजा लिया।

       निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने छात्रावास भवन के विभिन्न हिस्सों का अवलोकन करते हुए निर्माण कार्य की गुणवत्ता एवं प्रगति के संबंध में संबंधित अधिकारियों से जानकारी ली। उन्होंने छात्रावास परिसर में विद्यार्थियों की सुविधा एवं सुरक्षित वातावरण को ध्यान में रखते हुए बाउंड्रीवाल का निर्माण कराने के निर्देश दिए।
    कलेक्टर ने निर्देश दिए की निर्माण अधिनियम छात्रावास में उपयोग होने वाले मटेरियल उच्च गुणवत्ता के हो यह सुनिश्चित करें। 

     साथ ही परिसर में पर्याप्त संख्या में वृक्षारोपण कराने, विद्यार्थियों के खेलकूद के लिए बैडमिंटन एवं वॉलीबॉल कोर्ट विकसित करने तथा समुचित प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा।

    कलेक्टर ने परिसर में बच्चों के बैठने के लिए उपयुक्त बैठक व्यवस्था विकसित करने के भी निर्देश दिए, ताकि छात्रावास में रहने वाले विद्यार्थियों को अध्ययन एवं अन्य गतिविधियों के लिए बेहतर वातावरण मिल सके। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्माण कार्य निर्धारित मापदंडों एवं गुणवत्ता के साथ समय-सीमा में पूर्ण कराने के निर्देश दिए। छात्रावास का निर्माण पीआईयू द्वारा लगभग 714 लाख रुपए की लागत से कराया जा रहा है।

    इस अवसर पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री शिवम प्रजापति अनुविभागीय, डिप्टी कलेक्टर श्री भागीरथी लहरें,  सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग श्री आनंद राय सिंहा, कार्यपालन यंत्री पी आई यू श्री रमाकान्त पांडे सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

  • दिल्ली में SIR के बीच खास पहल, बेघर-ट्रांसजेंडर और सेक्स वर्करों के लिए 23-24 सितंबर को लगेंगे विशेष कैंप

    दिल्ली में SIR के बीच खास पहल, बेघर-ट्रांसजेंडर और सेक्स वर्करों के लिए 23-24 सितंबर को लगेंगे विशेष कैंप

     नई दिल्ली
     दिल्ली में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान बेघर लोगों, ट्रांसजेंडर और सेक्स वर्करों को मतदाता सूची में शामिल करने के लिए विशेष शिविर लगाए जाएंगे। दिल्ली के 13 जिलों में ये शिविर 23 और 24 सितंबर को शाम पांच से रात नौ बजे तक डयूसिब के रैन बसेरों और दूसरे चिन्हित स्थानों पर लगाए जाएंगे।

    ट्रांसजेंडर और सेक्स वर्करों तक पहुंचने के लिए उनके साथ काम करने वाले एनजीओ की मदद ली जाएगी। शिखिर में बूथ लेवल आफिसर (बीएलओ) भी मौजूद रहेंगे। अधिकारियों के मुताबिक इन लोगों को पहचान, पते और जरूरी दस्तावेज देने में कई बार परेशानी होती है। बेघर लोगों के पास स्थायी पता, पारिवारिक रिकॉर्ड या दूसरे जरूरी दस्तावेज नहीं होने से उनकी जानकारी सत्यापित करने में भी दिक्कत आती है।

    अंतिम मतदाता सूची में शामिल किया जाएगा
    मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने कहा है कि जो व्यक्ति किसी इलाके का सामान्य निवासी है, उसका नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल किया जाएगा। अधिकारियों को चुनाव आयोग के मैनुअल ऑफ इलेक्ट्रोरल रोल्स-2023 के मुताबिक इन आवेदनों पर प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। ऑनलाइन फार्म जमा करने को प्रोत्साहित करने के साथ आवेदकों से फिजिकल फार्म भी लेने को कहा गया है।

    गौरतलब है कि 31 अगस्त को जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में दिल्ली में 97,53,577 मतदाता हैं। इनमें 49,88,993 पुरुष और 47,64,137 महिला वोटर हैं। वहीं, 2025 विधानसभा चुनाव के दौरान मतदाता सूची में 1,55,24,858 वोटर थे। ड्राफ्ट सूची में थर्ड जेंडर वोटरों की संख्या भी 1,261 से घटकर 447 रह गई है। ड्राफ्ट सूची से छूटे पात्र मतदाता 30 सितंबर तक फार्म छह के जरिए अपना नाम जोड़ने के लिए दावा कर सकते हैं।

    दावे और आपत्तियों के निपटारे की प्रक्रिया 29 अक्टूबर तक
    दावे और आपत्तियों के निपटारे की प्रक्रिया 29 अक्टूबर तक चलेगी। अंतिम मतदाता सूची चार नवंबर को जारी होगी। इसके अलावा 20 और 27 सितंबर को दिल्ली के सभी मतदान केंद्रों पर सुबह 10 से शाम पांच बजे तक सामान्य विशेष शिविर लगाए जाएंगे। यहां मतदाता ड्राफ्ट सूची चेक करने, फार्म जमा करने और आवेदन भरने में मदद ले सकेंगे।

     

  • Samsung Galaxy Z Fold8 पर बड़ी राहत, Galaxy Forever प्लान से 25% तक घटेगी EMI

    Samsung Galaxy Z Fold8 पर बड़ी राहत, Galaxy Forever प्लान से 25% तक घटेगी EMI

    Samsung Galaxy Z Fold8 और Galaxy Z Fold8 Ultra खरीदने वालों के लिए कंपनी ने नया Galaxy Forever प्लान पेश किया है. इसके तहत दोनों फोल्डेबल फोन की महीने की EMI 25% तक कम हो जाएगी. हालांकि, कम EMI का मतलब फोन पर 25% की छूट नहीं है. फोन की कीमत का 40% हिस्सा 24 महीने बाद देना होगा. चूंकि ये फोन काफी महंगा है, इसलिए कई लोग चाहते हैं कि कम पैसे देकर फोन चलाया जाए, बाद में पूरा पैसे दे देंगे. इसी को साधते हुए ये स्कीम आई है.

    Samsung अपने महंगे फोल्डेबल फोन खरीदने का नया तरीका लेकर आया है. कंपनी ने Galaxy Z Fold8 और Galaxy Z Fold8 Ultra के लिए Galaxy Forever प्रोग्राम में नया 24 महीने का प्लान पेश किया है. इसके तहत ग्राहक हर महीने कम EMI देकर फोन खरीद सकते हैं, लेकिन फोन की कुल कीमत का एक बड़ा हिस्सा बाद में देना होगा.

    नए प्लान में Galaxy Z Fold8 Ultra की EMI 9,417 रुपये से घटकर 6,997 रुपये हो जाती है. वहीं Galaxy Z Fold8 की EMI 8,584 रुपये से घटकर 6,416 रुपये रह जाती है. यानी महीने की EMI में करीब 25 फीसदी की कमी आती है. यह प्लान 24 महीने के लिए है.

    40 फीसदी पैसा 2 साल बाद देना होगा
    यहां सबसे जरूरी बात यह है कि सैमसंग ने फोन की कीमत 25 फीसदी कम नहीं की है. कंपनी सिर्फ पेमेंट का तरीका बदल रही है. Galaxy Forever प्लान में फोन की कीमत का 60 फीसदी हिस्सा 24 महीने की EMI के जरिए चुकाया जाता है. इसके साथ Galaxy Forever की प्रोग्राम फीस भी जुड़ी होती है. बाकी 40 फीसदी रकम 24 महीने पूरे होने के बाद देनी होती है. इसे बुलेट पेमेंट कहा जाता है.

    मसलन, Galaxy Z Fold8 की शुरुआती कीमत 1,79,999 रुपये है, जबकि Galaxy Z Fold8 Ultra की कीमत 1,99,999 रुपये से शुरू होती है. ऐसे में कम EMI देखकर यह मान लेना सही नहीं होगा कि फोन सस्ता हो गया है. अगर कस्टमर फोन अपने पास रखना चाहता है, तो 24 महीने बाद बची हुई 40 फीसदी रकम का भुगतान करना होगा.

    2 साल बाद तीन विकल्प मिलेंगे
    24 महीने पूरे होने के बाद कस्टमर्स के पास तीन विकल्प होंगे. पहला, वह अपना पुराना फोन वापस करके नया Galaxy फोन ले सकता है. दूसरा, 40 फीसदी की बची हुई रकम देकर मौजूदा फोन अपने पास रख सकता है. तीसरा, फोन वापस करके Galaxy Forever प्रोग्राम से बाहर निकल सकता है. ये विकल्प सैमसंग की शर्तों के तहत उपलब्ध होंगे.

    सैमसंग ने 24 महीने पूरे होने से पहले फोन वापस करने या अपग्रेड करने का विकल्प भी दिया है. 10 से 11 महीने के बीच फोन लौटाने पर 55 फीसदी तक, 12 से 13 महीने में 50 फीसदी तक, 14 से 18 महीने में 45 फीसदी तक और 19 से 25 महीने में 40 फीसदी तक अश्योर्ड बायबैक वैल्यू भी मिल सकती है.

    Samsung Care+ भी मिलेगा
    Galaxy Forever प्लान में Samsung Care+ भी शामिल है. इसमें फोन को एक्सिडेंटल और लिक्विड से सुरक्षा मिलती है. इसके लिए ग्राहक को अलग से Care+ खरीदने की जरूरत नहीं होगी.

  • दिल्ली वाली कुरकुरी मोठ कचौड़ी घर पर बनाएं, जानें मसालेदार स्टफिंग की आसान रेसिपी आज

    दिल्ली वाली कुरकुरी मोठ कचौड़ी घर पर बनाएं, जानें मसालेदार स्टफिंग की आसान रेसिपी आज

    दिल्ली सिर्फ घूमने ही नहीं बल्कि खाने की शौकीन लोगों को भी बहुत पसंद आती है. दिल्ली के स्ट्रीट फूड के चर्च तो दूर-दूर तक होते हैं और इनका चटपटा स्वाद लोगों को बहुत पसंद भी आता है. समोसे, छोले-कुलचे, छोले-भटूरे, टिक्की चाट और कचौड़ी दिल्ली की हर गली-नुक्कड़ पर आपको खाने को मिल जाएंगे. वैसे तो दिल्ली में मिलने वाले हर स्ट्रीट फूड की एक अलग खासियत है, उसी में से एक मोठ की कचौड़ी है.

    मोठ की कचौड़ी का स्वाद मसालेदार और पेट भरने वाला होता है. जो बाहर से कुरकुरी और अंदर से मसालेदार स्टफिंग वाली यह कचौड़ी सुबह के नाश्ते या शाम की चाय के साथ खूब पसंद की जाती है. अगर आपका भी दिल्ली वाली मोठ कचौड़ी खाने का मन है तो इसे घर पर आसानी से बना सकते हैं. आइए मोठ की कचौड़ी बनाने का आसान तरीका जानते हैं.

    मोठ की कचौड़ी के लिए इंग्रेडिएंट्स
    आटा गूंथने के लिए
        मैदा- 2 कप
        नमक- स्वादानुसार
        मोयन के लिए तेल या घी- 3 बड़े चम्मच
        पानी- जरूरत के अनुसार

    स्टफिंग के लिए
        मोठ दाल- 1 कप
        जीरा- 1 छोटा चम्मच
        सौंफ- 1 छोटा चम्मच
        हींग- 1 चुटकी
        अदरक- 1 छोटा चम्मच
        हरी मिर्च- 1-2 बारीक कटी
        लाल मिर्च पाउडर- ½ छोटा चम्मच
        धनिया पाउडर- 1 छोटा चम्मच
        अमचूर पाउडर- ½ छोटा चम्मच
        गरम मसाला- ½ छोटा चम्मच
        नमक- स्वादानुसार
        तेल- जरूरत के अनुसार

    परोसने के लिए
        हरी चटनी
        मीठी इमली की चटनी
        बारीक कटा प्याज
        दही

    मोठ दाल को दरदरा पीस लें
    मोठ दाल को अच्छी तरह धोकर कुछ घंटों के लिए पानी में भिगो दें. इसके बाद पानी निकालकर दाल को हल्का उबाल लें. ध्यान रखें कि दाल पूरी तरह गलनी नहीं चाहिए. इसे ठंडा करके हल्का दरदरा पीस लें.

    तैयार करें मसालेदार स्टफिंग
    एक कड़ाही में थोड़ा तेल गर्म करें. इसमें जीरा, सौंफ और चुटकीभर हींग डालें. तड़का लगने के बाद बारीक कटी हरी मिर्च और अदरक डालकर भूनें. अब इसमें दरदरी पिसी मोठ दाल डालें. साथ में धनिया पाउडर, लाल मिर्च, अमचूर, गरम मसाला और नमक डालकर अच्छी तरह मिलाएं. मिक्सर को कुछ मिनट तक भूनें, ताकि उसका पानी सूख जाए और स्टफिंग सूखी हो जाए. गैस बंद करके इसे ठंडा होने दें.

    कचौड़ी का आटा लगाएं
    एक बड़े बर्तन में मैदा और नमक डालें. इसमें घी या तेल डालकर अच्छी तरह मिलाएं. मुट्ठी में दबाने पर अगर मैदा बंधने लगे तो समझें कि मोयन सही है. अब थोड़ा-थोड़ा पानी डालकर नरम आटा गूंथ लें. इसे कुछ देर ढककर रख दें.

    कचौड़ी में भरें मोठ की स्टफिंग
    आटे की छोटी-छोटी लोइयां बना लें. एक लोई को हल्का फैलाकर बीच में मोठ की तैयार स्टफिंग रखें. किनारों को बंद करके हल्के हाथ से दबाएं. अब इसे बेलकर कचौड़ी की शेप दें.

    कचौड़ी तेल में तलें
    कड़ाही में तेल गर्म करें. तेल बहुत तेज गर्म नहीं होना चाहिए. कचौड़ियों को डालकर स्लो से मिडियम फ्लेम पर तलें. दोनों तरफ से गोल्डन और क्रिस्पी होने तक इन्हें आराम से तलें. स्लो फ्लेम पर तलने से कचौड़ी अच्छी तरह सिकती है और कुरकुरी भी बनती है.

    चटनी के साथ करें सर्व
    गरमागरम मोठ की कचौड़ी को हरी चटनी और मीठी इमली की चटनी के साथ परोसें. ऊपर से प्याज डाल सकते हैं और चाहें तो दही भी डालें. शाम की चाय के साथ इसका मजा दोगुना हो जाएगा. दिल्ली के ठेले वाले भैया अक्सर मोठ की कचौड़ी के साथ आलू की रसवाली सब्जी देते हैं, जिसके साथ ये बेहद लाजवाब लगती है.

    प्रो टिप:
    कचौड़ी बनाते समय लोई को बहुत ज्यादा पतला न बेलें, वरना तलते समय कचौड़ी फट सकती है. कचौड़ी को ज्यादा गर्म तेल पर भी फ्राई नहीं करना चाहिए.

  • महाराष्ट्र का देसी ग्वार फली ठेचा, मूंगफली और तिल से बनेगा झटपट स्वादिष्ट नाश्ता घर पर

    महाराष्ट्र का देसी ग्वार फली ठेचा, मूंगफली और तिल से बनेगा झटपट स्वादिष्ट नाश्ता घर पर

    महाराष्ट्र के ट्रेडिशनल खान-पान में कई ऐसी देसी रेसिपी हैं, जिनका स्वाद आज भी गांव की रसोई की याद दिलाता है. मुंबई में आज भी लोग ठेचा खाना बहुत पसंद करते हैं, एक तो यह झटपट बन जाता है और इसका तीखापन रोटी-चावल सब के साथ अच्छा लगता है. हरी-मिर्च-लहसुन, पनीर, सोयाबीन, मूंगदाल का ठेचा तो आपने खाया होगा, लेकिन क्या आपने कभी ग्वार फली का ठेचा खाया है.

    ग्वार से बनने वाला ठेचा भी ऐसी ही एक फटाफट तैयार होने वाली डिश है. इसमें ग्वार के साथ भुनी हुई मूंगफली और तिल का इस्तेमाल किया जाता है, जो इसके स्वाद को और भी खास बना देते हैं. दाल-चावल, रोटी या भाकरी के साथ इसका स्वाद लाजवाब लगता है. महाराष्ट्र में आज भी लोग इसे बनाते हैं, आप भी इसे सुबह नाश्ते में ट्राई कर सकते हैं. आइए ग्वार फली का ठेचा बनाने की रेसिपी जानते हैं, जो कम समय में बन जाती है.

    ग्वार फली ठेचा के लिए आवश्यक सामग्री
        ग्वार फली: 250 ग्राम
        लहसुन: 10–12 कलियां
        मूंगफली: ¼ कप (भुनी या कच्ची)
        हरी मिर्च: 7–8 (स्वादानुसार कम या ज्यादा करें)
        जीरा: 1 बड़ा चम्मच
        तिल: 1 बड़ा चम्मच
        नमक: स्वादानुसार
        तेल: आवश्यकतानुसार
        हरा धनिया: बारीक कटा हुआ (गार्निश के लिए)

    ग्वार फली ठेचा बनाने की विधि

    • ग्वार फली को अच्छी तरह धोकर साफ कर लें. दोनों तरफ के किनारे तोड़कर इन्हें दो से तीन टुकड़ों में काट लें.
    • पैन में थोड़ा सा तेल गरम करें और गवार को दो से तीन मिनट के लिए मिडियम फ्लेम पर भून लें, ताकि इसका कच्चापन निकल जाए.
    • उसी पैन में थोड़ा और तेल डालें. इसमें लहसुन, मूंगफली, हरी मिर्च और जीरा डालकर 2 मिनट के लिए भून लें.
    • भुने हुए मसाले, स्वादानुसार नमक और ग्वार फली को एक साथ सिलबट्टे पर रखें. इन्हें दरदरा कूट लें. ध्यान रखें कि इसका बिल्कुल बारीक पेस्ट नहीं बनाना है; ठेचे का असली स्वाद इसके मोटे टेक्सचर में ही है.
    • पैन में फिर से थोड़ा तेल गरम करें और तिल डालें. तिल चटकने पर कूटकर रखा हुआ गवार-मिर्च का ठेचा डालें. इसे अच्छी तरह मिलाते हुए 4 से 5 मिनट तक धीमी आंच पर पकाएं.
    • आखिर में ग्वार फली ठेचा को आप कटोरी में निकाल लें और उस पर हरा धनिया डालकर गार्निश करें. इस ठेचे को आप गरमा-गरम ज्वार या बाजरे की भाकरी और ऊपर से थोड़ा सा कच्चा तेल या घी डालकर परोसें!
    • खास टिप: अगर आपके पास सिलबट्टा नहीं है, तो आप इसे मिक्सी में बना सकते हैं. इसके लिए मिक्सी को लगातार न चलाएं, बल्कि रोक-रोक कर पर सिर्फ 1-2 बार ही चलाएं ताकि यह दरदरा रहे. इसका बिल्कुल बारीक पेस्ट नहीं बनाना है.
  • राधा अष्टमी 2026 कब है? आज या कल, जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

    राधा अष्टमी 2026 कब है? आज या कल, जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

    हर साल राधा अष्टमी का पर्व भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है. यह दिन भगवान श्रीकृष्ण की प्रिय और शक्ति स्वरूपा श्री राधा रानी के प्रकटोत्सव के रूप में मनाया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, राधा रानी का जन्म श्री कृष्ण के जन्मोत्सव (जन्माष्टमी) के ठीक 15 दिन बाद मनाया जाता है.

    इस दिन जो भक्त सच्चे मन से श्री राधा-कृष्ण की पूजा और व्रत करते हैं, उनके जीवन में सुख-समृद्धि, प्रेम और शांति बनी रहती है. ऐसा माना जाता है कि केवल श्रीकृष्ण की पूजा से पूर्ण फल नहीं मिलता, जब तक कि उनके साथ राधा रानी की भी आराधना ना की जाए. इस दिन कई लोग व्रत रखते हैं और खासकर बरसाना और मथुरा-वृंदावन में इस पर्व को बहुत ही भव्य और धूमधाम से मनाया जाता है.

    वहीं, हर बार की तरह इस बार भी राधा अष्टमी की तिथि को लेकर कंफ्यूजन है. कुछ लोग कह रहे हैं कि राधा अष्टमी कल मनाई जानी चाहिए और कुछ लोग कह रहे हैं आज. तो आइए जानते हैं कि राधा अष्टमी की सही तिथि क्या रहेगी.

    कब मनाई जाएगी राधा अष्टमी 2026 (Radha Ashtami 2026 Date)
    द्रिक पंचांग और उदयातिथि के अनुसार, राधा अष्टमी 19 सितंबर 2026, शनिवार यानी कल के दिन मनाने की सलाह दी जा रही है.

    राधा अष्टमी 2026 तिथि (Radha Ashtami 2026 Tithi)
    द्रिक पंचांग के अनुसार, राधा अष्टमी की तिथि 18 सितंबर यानी आज दोपहर 1 बजे शुरू होगी और तिथि का समापन 19 सितंबर को दोपहर 3 बजकर 26 मिनट पर होगा.

    राधा अष्टमी 2026 पूजन शुभ मुहूर्त (Radha Ashtami 2026 Pujan Shubh Muhurat)
    राधा अष्टमी पर पूजन का सबसे उत्तम समय 19 सितंबर की सुबह 11 बजे से लेकर दोपहर 1 बजकर 28 मिनट तक रहेगा. क्योंकि शास्त्रों के अनुसार श्री राधा रानी का जन्म दोपहर के समय हुआ था, इसलिए इस समयावधि में पूजा करना सबसे श्रेष्ठ माना जाता है.

    राधा अष्टमी 2026 पूजन विधि (Radha Ashtami 2026 Pujan Vidhi)
    राधा अष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें. फिर, व्रत का संकल्प लें. फिर, पूजा स्थल पर एक साफ चौकी बिछाकर उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं. फिर, चौकी पर तांबे या मिट्टी का कलश स्थापित करें. कलश के पास या चौकी पर श्री राधा-कृष्ण की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें. यदि संभव हो, तो राधा रानी का पंचामृत से अभिषेक करें. राधा रानी को सुंदर वस्त्र और आभूषणों से सजाएं. इसके बाद उन्हें रोली, अक्षत (चावल), चंदन, फूल, धूप, दीप और नैवेद्य (फल और मिठाइयां) अर्पित करें. आखिरी में ऊं श्री राधायै नमः मंत्र का जाप करें, कथा सुनें और अंत में घी का दीपक जलाकर आरती करें.

    सोलह श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें
    राधा अष्टमी के दिन पूजा के दौरान श्री राधा रानी को सुहाग की वस्तुएं अर्पित करें. पूजा के बाद इनमें से थोड़ा सा सिंदूर या प्रसाद स्वरूप सुहाग की सामग्री अपने घर की सुहागन महिलाओं को दें या माता रानी के चरणों में अर्पित रहने दें. इससे वैवाहिक जीवन में प्रेम और मधुरता बढ़ती है.

    राधा-कृष्ण को इत्र और पीले फूल चढ़ाएं
    राधा रानी और कृष्ण जी को इत्र बेहद प्रिय है. इस दिन राधा-कृष्ण को गुलाब या चमेली का इत्र अर्पित करें. साथ ही, उन्हें पीले या गुलाबी रंग के ताजे फूल (जैसे गेंदे या गुलाब की माला) चढ़ाएं. ऐसा करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आकर्षण बढ़ता है.

  • राधा रानी की मृत्यु कैसे हुई? अंतिम समय में कृष्ण ने बजाई बांसुरी, जानें पूरी पौराणिक कथा

    राधा रानी की मृत्यु कैसे हुई? अंतिम समय में कृष्ण ने बजाई बांसुरी, जानें पूरी पौराणिक कथा

     राधा रानी की मृत्यु कैसे हुई थी? इसे लेकर तरह-तरह की कथाएं प्रचलित हैं. अलग-अलग धार्मिक परंपराओं और लोककथाओं में राधा रानी के जीवन के अंतिम समय को अलग-अलग तरीके से बताया गया है. लेकिन आज हम उस कथा को जानेंगे, जो पुराणों और वैष्णव परंपरा से जुड़ी कथाओं में मिलती है.

    भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी का प्रेम भारतीय भक्ति परंपरा में प्रेम, समर्पण और भक्ति का प्रतीक माना जाता है. दोनों का जन्म एक ही तिथि यानी अष्टमी को हुआ था, लेकिन दोनों के जन्म पक्ष अलग थे.

    श्री कृष्ण और राधा रानी का जन्म एक ही तिथि पर हुआ था
    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को हुआ था. वहीं राधा जी का प्राकट्य भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को माना जाता है. यानी भगवान कृष्ण के जन्म के करीब 15 दिन बाद राधाष्टमी का पर्व आता है. इसी दिन राधा रानी के प्राकट्य का उत्सव मनाया जाता है.

    राधा जी के पिता का नाम वृषभानु और माता का नाम कीर्ति बताया जाता है. बरसाना को राधा रानी की जन्मभूमि माना जाता है. उनका लालन-पालन बरसाना में हुआ और वृंदावन से भी उनका गहरा संबंध बताया जाता है.

    बांसुरी की धुन पर खिंची चली आती थीं गोपियां
    राधा रानी और श्री कृष्ण के बीच प्रेम को सामान्य सांसारिक प्रेम से अलग दिव्य और आध्यात्मिक प्रेम के रूप में देखा जाता है. मान्यता है कि जब भगवान कृष्ण वृंदावन में अपनी बांसुरी बजाते थे, तो उसकी धुन सुनकर गोपियां सब कुछ भूलकर उनकी ओर खिंची चली आती थीं.

    काव्य परंपरा में भी कृष्ण की बांसुरी के प्रभाव का बेहद सुंदर वर्णन मिलता है. बांसुरी की धुन कानों में पड़ते ही गोपियां सामाजिक मर्यादाओं और सांसारिक बंधनों को भूलकर कृष्ण की ओर चली आती थीं. इन गोपियों में राधा रानी का स्थान सबसे विशेष माना गया है. राधा और कृष्ण का प्रेम भक्ति परंपरा में आत्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक भी माना जाता है.

    क्या राधा-कृष्ण का विवाह हुआ था?
    राधा और कृष्ण के विवाह को लेकर भी अलग-अलग धार्मिक परंपराओं में अलग मान्यताएं मिलती हैं. ब्रह्मवैवर्त पुराण से जुड़ी परंपरा में राधा-कृष्ण के विवाह का वर्णन मिलता है. इस कथा के अनुसार, भांडीर वन में ब्रह्मा जी ने राधा और कृष्ण का विवाह कराया था. मान्यता है कि इस विवाह के समय कई देवी-देवता भी साक्षी बने थे.

    वृंदावन के पास स्थित भांडीर वन आज भी राधा-कृष्ण की इस कथा से जुड़ा महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल माना जाता है. यहां राधा-कृष्ण विवाह की कथा से जुड़े स्थानों और परंपराओं के दर्शन किए जाते हैं.

    श्री कृष्ण के वृंदावन छोड़ने के बाद क्या हुआ?
    समय बीतता गया और भगवान कृष्ण वृंदावन छोड़कर मथुरा चले गए. इसके बाद वे द्वारका चले गए. दूसरी ओर राधा रानी का जीवन बरसाना और वृंदावन से जुड़ा रहा. श्री कृष्ण के मथुरा और फिर द्वारका चले जाने के बाद राधा और कृष्ण का मिलना बेहद दुर्लभ हो गया था.

    कहा जाता है कि एक बार दोनों की मुलाकात कुरुक्षेत्र में हुई थी. उस समय सूर्य ग्रहण के अवसर पर भगवान कृष्ण द्वारका से कुरुक्षेत्र आए थे. नंद बाबा और वृंदावन के कई गोप-गोपिकाएं भी वहां पहुंचे थे. इसी दौरान राधा रानी और भगवान कृष्ण की भी मुलाकात हुई.

    द्वारका में हुई राधा-कृष्ण की अंतिम मुलाकात
    राधा-कृष्ण की अंतिम मुलाकात को लेकर एक प्रसिद्ध पौराणिक कथा द्वारका से जुड़ी है. कथा के अनुसार, अपने जीवन के प्रमुख दायित्वों से मुक्त होने के बाद राधा रानी भगवान कृष्ण से मिलने द्वारका पहुंचीं. वहां उन्होंने भगवान कृष्ण के महल में जाकर उनसे मुलाकात की.

    कहा जाता है कि राधा जी को देखकर भगवान कृष्ण बेहद प्रसन्न हुए. राधा रानी के अनुरोध पर कृष्ण ने उन्हें महल में एक जिम्मेदारी भी सौंपी. इसके बाद राधा रानी कुछ समय तक द्वारका में रहकर महल के कार्यों में सहयोग करती रहीं और अवसर मिलने पर भगवान कृष्ण के दर्शन करती थीं. लेकिन द्वारका का राजसी वातावरण राधा रानी को वह आनंद नहीं दे पा रहा था, जो उन्हें वृंदावन में कृष्ण के साथ महसूस होता था.

    क्यों छोड़ दिया था राधा रानी ने द्वारका का महल?
    वृंदावन में राधा रानी का जीवन कृष्ण की भक्ति और प्रेम से जुड़ा था. द्वारका में रहते हुए उन्हें महसूस हुआ कि वह पहले जैसा दिव्य प्रेम और अपनापन महसूस नहीं कर पा रही हैं. धीरे-धीरे वह उदास रहने लगीं. आखिरकार उन्होंने द्वारका का महल छोड़ दिया और एकांत स्थान पर चली गईं.

    समय बीतता गया. राधा रानी कमजोर होती गईं और उनके मन में भगवान कृष्ण की स्मृतियां और भी गहरी होती चली गईं.

    अंतिम समय में कृष्ण ने दिया राधा को दर्शन
    कथा के अनुसार, जब राधा रानी ने अपने अंतिम समय में भगवान कृष्ण को याद किया, तब कृष्ण उनके सामने प्रकट हुए. भगवान कृष्ण ने राधा जी से कहा कि वह अपनी कोई इच्छा बताएं. लेकिन राधा रानी ने अपने लिए कुछ नहीं मांगा.

    भगवान कृष्ण ने जब दोबारा उनसे अपनी इच्छा बताने को कहा, तब राधा रानी ने केवल इतना कहा कि वह कृष्ण की बांसुरी सुनना चाहती हैं. वह वही बांसुरी की धुन सुनना चाहती थीं, जिसे उन्होंने वृंदावन में सुना था.

    बांसुरी की धुन सुनते-सुनते राधा रानी ने त्यागा था शरीर
    कथा के अनुसार, भगवान कृष्ण ने अपनी बांसुरी उठाई और उसी तरह बजाने लगे, जैसे वह वृंदावन में बजाया करते थे. कृष्ण बांसुरी बजाते रहे और राधा रानी उस मधुर धुन को सुनती रहीं. बांसुरी की धुन में खोई राधा रानी ने धीरे-धीरे अपने शरीर का त्याग कर दिया. पौराणिक कथा में आगे कहा जाता है कि राधा रानी की दिव्य आत्मा भगवान कृष्ण में विलीन हो गई. यही वजह है कि राधा-कृष्ण को केवल दो अलग-अलग स्वरूपों के रूप में नहीं, बल्कि एक ही दिव्य प्रेम और चेतना के दो रूपों के तौर पर भी देखा जाता है.