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  • एशियन गेम्स 2026: भारत ने बांग्लादेश को 3-0 से हराया, क्वार्टर फाइनल में एंट्री

    एशियन गेम्स 2026: भारत ने बांग्लादेश को 3-0 से हराया, क्वार्टर फाइनल में एंट्री

    नागोया
    एशियन गेम्स 2026 का आगाज भारतीय पुरुष बैडमिंटन टीम ने धमाकेदार जीत के साथ किया है। एकतरफा मुकाबले में लक्ष्य सेन , आयुष शेट्टी और किदांबी श्रीकांत ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए बांग्लादेश को 3-0 से शिकस्त दी। इवेंट में 5 मैच होने थे लेकिन पहले तीन को जीतकर ही भारत ने बांग्लादेश को बाहर कर दिया। इसकी वजह से चौथे और पांचवें मैच की जरूरत नहीं पड़ी। इसके साथ ही पुरुष बैडमिंटन टीम इवेंट में बांग्लादेश का सफर समाप्त हो गया है। भारतीय महिला टीम ने रविवार को बांग्लादेश को कुछ इसी अंदाज में क्रिकेट के सेमीफाइनल मुकाबले में हराया था

    लक्ष्य सेन ने दिलाई विजयी शुरुआत
    भारत को मुकाबले में बेहतरीन शुरुआत लक्ष्य सेन ने दिलाई। बांग्लादेश के खिलाड़ी अयमान इब्न जमन के खिलाफ खेलते हुए लक्ष्य ने दमदार खेल दिखाया। पहले गेम में लक्ष्य का पूरी तरह से दबदबा देखने को मिला और उन्होंने एक के बाद एक दमदार शॉट्स लगाते हुए गेम को 21-4 के बड़े अंतर से जीता। लक्ष्य अपनी इसी लय को दूसरे गेम में भी बरकरार रखने में सफल रहे। उन्होंने दूसरे गेम को 21-12 से अपने नाम करते हुए मुकाबले में भारत को 1-0 की बढ़त दिलाई। लक्ष्य के जबरदस्त स्मैश का जमान के पास कोई जवाब नजर नहीं आया।

    आयुष शेट्टी को भी नहीं हुई दिक्कत
    वहीं, आयुष शेट्टी ने दूसरे मैच में कमाल का खेल दिखाया। बांग्लादेश के खिलाड़ी गौरव सिंघा पर आयुष पूरी तरह से हावी नजर आए और उन्होंने वापसी करने का कोई मौका नहीं दिया। आयुष ने पहले गेम को 21-4 से जीता। इसके बाद दूसरे गेम में भी वह अपने इस दबदबे को कायम रखने में कामयाब रहे और उन्होंने 21-13 से गेम जीतकर भारत की बढ़त को 2-0 कर डाला।

    किदांबी श्रीकांत का अनुभव भारी पड़ा
    तीसरे मैच में किदांबी श्रीकांत को पहले गेम में जीत के लिए थोड़ी मशक्कत करनी पड़ी लेकिन वह गेम को 21-15 से अपने नाम करने में सफल रहे। दूसरे गेम में श्रीकांत ने जुमार अल-अमीन को वापसी करने का कोई मौका नहीं दिया और 21-10 से गेम को जीतकर बांग्लादेश की हार पर मुहर लगा दी। इस जीत के साथ ही भारतीय पुरुष टीम ने क्वार्टर फाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली है। क्वार्टर फाइनल मुकाबले में भारत की भिड़ंत अब मंगलवार को जापान से होगी।

  • गोशालाओं में हो सकेंगे मांगलिक कार्यक्रम, गो-पर्यटन से गांवों को मिलेगा कमाई का नया रास्ता

    गोशालाओं में हो सकेंगे मांगलिक कार्यक्रम, गो-पर्यटन से गांवों को मिलेगा कमाई का नया रास्ता

    गोशालाओं में हो सकेंगे मांगलिक कार्यक्रम, गो-पर्यटन से गांवों को मिलेगा कमाई का नया रास्ता

    स्थानीय ग्रामीणों, कारीगरों और छोटे कारोबारियों के लिए बनेंगे आय के नए अवसर

    चयनित गोशालाओं, कान्हा हाउस और बड़े गो-संरक्षण केंद्रों को स्थानीय जरूरतों के अनुरूप विकसित करने की तैयारी

    योगी सरकार परंपरा और स्थानीय संस्कृति को देगी मंच, क्षेत्र की विशेषता के अनुसार तैयार होंगे गो-पर्यटन के अलग-अलग मॉडल

    लखनऊ
     आने वाले समय में गांव की गोशालाएं भी स्थानीय संस्कृति और ग्रामीण जीवन की पहचान बनेंगी। योगी सरकार का यह विजन जल्द ही मूर्त रूप लेने वाला है। गो-संरक्षण के लिए संचालित गोशालाओं को अब परंपरा, भौगोलिक परिस्थितियों और ग्रामीण जरूरतों के अनुरूप विकसित करने की तैयारी है। चयनित गोशालाओं, कान्हा हाउस और बड़े गो-संरक्षण केंद्रों को गो-पर्यटन से जोड़कर गांवों में आर्थिक गतिविधियों के नए रास्ते तलाशे जाएंगे।

    उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि गोशालाओं के इस प्रस्तावित नए स्वरूप में संरक्षण के साथ पर्यटन और स्थानीय गतिविधियों को भी स्थान मिलेगा। इसका उद्देश्य किसी क्षेत्र की संस्कृति और परंपरा को वहां की गोशाला से जोड़ना है। इससे गोशाला केवल पशु संरक्षण का स्थान न रहकर ग्रामीण जीवन और स्थानीय पहचान से परिचित कराने वाला केंद्र बन सकती है। क्षेत्र के अनुरूप यहां ऐसी गतिविधियां विकसित की जा सकती हैं, जो बाहर से आने वाले लोगों को गांव की जीवनशैली, पशुपालन और स्थानीय परंपराओं से जोड़ें।

    मांगलिक कार्यक्रमों के लिए भी खुलेंगे द्वार

    चयनित गोशालाओं में मांगलिक कार्यक्रमों के आयोजन की भी व्यवस्था विकसित किए जाने की तैयारी है। इससे गोशालाओं का उपयोग केवल दैनिक गो-संरक्षण गतिविधियों तक सीमित न रहकर सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजनों से भी जुड़ सकेगा। स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार ऐसे स्थलों को विकसित करने की योजना है, जहां ग्रामीण परिवेश के बीच पारंपरिक कार्यक्रमों के आयोजन की सुविधा उपलब्ध हो सके। इससे गोशालाओं के आसपास आर्थिक गतिविधियों के लिए भी अवसर बनेंगे। गो-पर्यटन का यह मॉडल हर जगह एक जैसा नहीं होगा। जिस क्षेत्र की जो विशेषता होगी, उसी के अनुरूप गोशाला का स्वरूप विकसित करने पर जोर रहेगा। कहीं लोक संस्कृति और परंपराएं आकर्षण का केंद्र बन सकती हैं तो कहीं स्थानीय खान-पान, कला, शिल्प या ग्रामीण जीवनशैली को गतिविधियों से जोड़ा जा सकता है। इस तरह अलग-अलग क्षेत्रों में उनकी अपनी विशेषताओं के आधार पर गो-पर्यटन के अलग-अलग मॉडल आकार ले सकते हैं।

    स्थानीय लोगों के लिए खुलेंगे अवसर

    आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि गो-पर्यटन विकसित होने पर इसका दायरा केवल गोशाला परिसर तक सीमित नहीं रहेगा। आसपास के ग्रामीणों, स्वयं सहायता समूहों, स्थानीय कारीगरों, छोटे कारोबारियों और खान-पान से जुड़े लोगों के लिए भी इससे नए अवसर पैदा होंगे। पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने पर स्थानीय उत्पादों और सेवाओं की मांग बनने की संभावना है। हालांकि, इन अवसरों का वास्तविक स्वरूप संबंधित गोशाला और वहां विकसित की जाने वाली गतिविधियों पर निर्भर करेगा। इस मॉडल में गांव की स्थानीय अर्थव्यवस्था को गोशाला से जोड़ने की संभावनाएं भी तलाशी जाएंगी। गोशाला के आसपास स्थानीय उत्पादों, ग्रामीण कला और पारंपरिक गतिविधियों को स्थान मिलने से गांव की विशिष्ट पहचान को सामने लाने का अवसर मिलेगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन आधारित गतिविधियों का एक नया आधार तैयार हो सकता है।

    कान्हा हाउस और बड़े केंद्र भी होंगे विकसित

    उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गो-संरक्षण केंद्रों को नया स्वरूप देने की रणनीति बनाई गई है। चयनित गोशालाओं के साथ कान्हा हाउस और बड़े गो-संरक्षण केंद्रों को भी विकसित करने की तैयारी है। पूरी पहल का महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि गोशालाओं को गांव की सामाजिक और सांस्कृतिक संरचना से जोड़ने की दिशा में देखा जा रहा है। इससे संरक्षण की मूल भूमिका बरकरार रखते हुए उनके उपयोग का दायरा बढ़ सकता है। गांव आने वाला व्यक्ति केवल गोशाला देखने तक सीमित न रहे, बल्कि वहां की संस्कृति, परंपरा और ग्रामीण जीवन को भी अनुभव कर सके, इसी सोच के अनुरूप मॉडल विकसित किए जाने की तैयारी है।

    गांव की पहचान बनेगी अपनी गोशाला

    ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन का आकर्षण अक्सर वहां की स्थानीय पहचान में छिपा होता है। हर गांव और क्षेत्र की अपनी कहानी, परंपरा और जीवनशैली होती है। यदि इन्हें व्यवस्थित ढंग से गोशालाओं से जोड़ा जाता है तो ये केंद्र ग्रामीण पर्यटन के नए पड़ाव बन सकते हैं। आने वाले समय में चयनित गोशालाओं का यह बदला हुआ स्वरूप गांव की पहचान का हिस्सा बन सकता है।

  • एशियन गेम्स 2026 में आर माधवन के बेटे वेदांत का डेब्यू, फाइनल में नहीं बना स्थान

    एशियन गेम्स 2026 में आर माधवन के बेटे वेदांत का डेब्यू, फाइनल में नहीं बना स्थान

    इंडियन सिनेमा के सबसे टैलेंटेड और नेशनल अवॉर्ड विनिंग एक्टर आर माधवन के लिए आज का दिन बड़ा खास रहा. उनके लाड़ले बेटे वेदांत माधवन टोक्यो, जापान में हो रहे एशियन गेम्स 2026 में हिस्सा लिया. उन्होंने फ्रीस्टाइल स्विमिंग कॉम्पिटीशन में भारत को रीप्रेजेंट किया. ये वेदांत का पहला गेम था, जिसमें वो भारत की तरफ से खेल रहे थे.

    एशियन गेम्स में हिट या मिस माधवन का बेटा?
    वेदांत एशियन गेम्स में भारत की स्विमिंग टीम का हिस्सा थे. उनके अलावा तीन और खिलाड़ी थे, जिन्होंने 4×200 मीटर फ्रीस्टाइल स्विमिंग रिले में हिस्सा लिया. हालांकि उनकी टीम इस इवेंट के फाइनल में जगह नहीं बना सकी. भारतीय चौकड़ी ने 7 मिनट 24.32 सेकंड का समय निकाला और 13 टीमों में 9वें स्थान पर रही.

    इस वजह से टीम फाइनल के लिए क्वालिफाई नहीं कर पाई, क्योंकि केवल टॉप-8 टीमों को फाइनल में जगह मिलनी थी. वेदांत ना सही, लेकिन भारत के श्रीहरि नटराज ने 50 मीटर बैकस्ट्रोक के फाइनल में जगह बनाई. उन्होंने 25.37 सेकंड का समय निकाला और तीसरे स्थान पर रहे. कुल मिलाकर देखा जाए, तो एशियन गेम्स में माधवन के बेटे का डेब्यू निराशाजनक रहा है.

    वेदांत इससे पहले भी इंटरनेशनल लेवल पर भारत के लिए मेडल जीत चुके हैं. साल 2023 में मलेशिया ओपन स्विमिंग चैम्पियनशिप में उन्होंने पांच गोल्ड मेडल जीते थे. हर कैटेगरी में माधवन के बेटे आगे थे. इस 2026 एशियन गेम्स के लिए उन्हें 200 मीटर फ्रीस्टाइल, 200 मीटर बैकस्ट्रोक और 4×200 मीटर फ्रीस्टाइल रिले के लिए भारतीय टीम में चुना गया था.

    फिल्मी करियर छोड़ चुनी स्पोर्ट्स की राह
    बाकी स्टारकिड्स की तरह, वेदांत माधवन के पास अपने पिता के जैसे फिल्मों में काम करने का मौका था. लेकिन उन्होंने अपने पैशन को चुना, और स्विमिंग में ही करियर बनाया. वो भारत के लिए स्विमिंग में मेडल जीत सकें, इसलिए आर माधवन और उनकी पत्नी सरिता ने भी दुबई शिफ्ट होने का सोचा. वहां वेदांत ओलंपिक लेवल की तैयारी में बिजी रहते हैं. एक्टर ने अपने बेटे को स्टारडम से दूर रखकर उसे खुद की मेहनत से सफलता हासिल करने के काबिल बनाया. एशियन गेम्स में वेदांत भले ही कमजोर पड़े, लेकिन आगे आने वाले समय में वो कुछ कमाल करके जरूर दिखा सकते हैं.

  • TMC के बैंक खातों पर ममता बनर्जी का कंट्रोल बरकरार, हाईकोर्ट से राहत

    TMC के बैंक खातों पर ममता बनर्जी का कंट्रोल बरकरार, हाईकोर्ट से राहत

    कलकत्ता

    चुनाव आयोग की तरफ से 'जोड़ाफूल' सिंबल फ्रीज किए जाने के झटके के बीच 'कालीघाट तृणमूल' (ममता बनर्जी गुट) को कलकत्ता हाईकोर्ट से राहत मिली है। हाईकोर्ट के जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की सिंगल बेंच ने साफ किया है कि चुनाव चिन्ह में बदलाव का बैंक खातों के इस्तेमाल पर कोई असर नहीं पड़ेगा और पार्टी अपने तीनों बैंक खातों का संचालन पूर्व आदेश के तहत ही करती रहेगी।

    अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि चुनाव आयोग की तरफ से चुनाव चिह्न में किया गया बदलाव केवल आगामी उपचुनावों तक ही सीमित है। इसलिए फिलहाल यह बैंक खातों के वित्तीय प्रबंधन पर लागू नहीं होगा।

    कैसे निकाल सकेंगे बैंक अकाउंट से पैसा?
    हाईकोर्ट के नए आदेश के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस के तीन बैंक अकाउंट के संचालन के लिए तय की गई अंतरिम व्यवस्था को अब 29 जनवरी तक बढ़ा दिया गया है।

    पैसा निकालने की प्रक्रिया इस प्रकार रहेगी:
    दो अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता: ममता तृणमूल गूट के कोई भी दो अधिकृत व्यक्ति चेक पर हस्ताक्षर कर सकेंगे।

    स्पेशल ऑफिसर की स्क्रूटनी: अदालत की तरफ से नियुक्त विशेष अधिकारी पूर्व जज सुब्रत तालुकदार इन चेकों की जांच करेंगे। स्पेशल ऑफिसर की मंजूरी के बाद ही बैंक संबंधित राशि का भुगतान करेगा।

    जुलाई के अंतरिम आदेश को कोर्ट ने फिर बढ़ाया
    यह मामला सबसे पहले जुलाई में जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की बेंच के सामने आया था, जब पार्टी के तीन खातों को फ्रीज किए जाने को लेकर विवाद खड़ा हुआ था।

    उस समय हाईकोर्ट ने रिटायर जज सुब्रत तालुकदार को विशेष अधिकारी नियुक्त करते हुए 30 सितंबर तक खातों के अस्थायी प्रबंधन का आदेश दिया था। अब बेंच ने 9 जुलाई के उसी आदेश की अवधि को 29 जनवरी तक के लिए बढ़ा दिया है, जिससे पार्टी को अपने दैनिक और कानूनी खर्चों को पूरा करने में सहूलियत मिलेगी।

    28 साल पुरानी पार्टी दो धड़ों में बंटी, हाथ से छूटा 'जोड़ाफूल'
    ममता बनर्जी ने 1998 में कांग्रेस से अलग होकर 'तृणमूल कांग्रेस' (TMC) की नींव रखी थी। पिछले 28 वर्षों से 'जोड़ाफूल' (घास पर दो फूल) और 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' का नाम ममता बनर्जी की राजनीतिक पहचान का आधार रहा है।

    हालांकि, 2026 के विधानसभा चुनावों के महज चार महीने के भीतर ममता बनर्जी की बनाई यह पार्टी अभूतपूर्व संकट से गुजर रही है और व्यावहारिक रूप से दो धड़ों में टूट चुकी है।

    ममता बनर्जी गुट (कालीघाट कैंप): चुनाव आयोग के फैसले के बाद यह धड़ा आगामी उपचुनावों में 'ममता सर्वभारतीय तृणमूल कांग्रेस' के नाम और 'फुटबॉल खिलाड़ी' सिंबल के साथ चुनावी मैदान में उतरेगा।

    बागी गुट (ऋतब्रत बनर्जी कैंप): इस धड़े को 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'लिफाफा' चुनाव चिन्ह आवंटित हुआ है।

    पार्टी के नाम और 28 साल पुराने ऐतिहासिक चुनाव चिन्ह के छिन जाने के बाद ममता बनर्जी ने आयोग के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है, जिस पर इसी हफ्ते सुनवाई होने की उम्मीद है।

  • आर्यवीर सहवाग ने ठोके 47 रन, फिफ्टी से चूके; भारत ने बनाए 341 रन

    आर्यवीर सहवाग ने ठोके 47 रन, फिफ्टी से चूके; भारत ने बनाए 341 रन

    नई दिल्ली
    भारतीय अंडर-19 टीम ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अनाधिकारिक वनडे सीरीज खेल रही है। सीरीज के दूसरे मुकाबले में भारत के लिए सलामी बल्लेबाज आर्यवीर सहवाग ने शानदार बल्लेबाजी की। राजकोट के निरंजन शाह स्टेडियम में भारतीय टीम ने पहले बैटिंग की कप्तान लक्ष्य राजेश रायचंदानी के साथ आर्यवीर ओपनिंग करने आए। 29 गेंदों पर लक्ष्य ने 11 रन बनाए तो आर्यवीर ने शुरुआत से ही चौकों की बरसात करके अपने इरादे साफ कर दिया।

    आर्यवीर सहवाग रन आउट हुए
    आर्यवीर सहवाग के बल्ले से 47 रनों की पारी निकली। उन्होंने 48 गेंदों का सामना किया और इस दौरान 9 चौके मारे। रन आउट होने की वजह से उन्हें पवेलियन लौटना पड़ा और फिफ्टी से चूक गए। पहले विकेट के लिए लक्ष्य के साथ सहवाग ने 45 गेंद पर 46 रन जोड़े। इसमें आर्यवीर ने 21 तो लक्ष्य ने 11 रनों का योगदान दिया। दूसरे विकेट के लिए वीके विनीत के साथ 55 रनों की साझेदारी हुई। विनीत के साथ तालमेल बिगड़ने की वजह से ही आर्यवीर रन आउट हुए।

    भारतीय टीम ने 341 रन बनाए
    ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहले बैटिंग करते हुए भारतीय अंडर-19 टीम ने 7 विकेट पर 341 रन बनाए। चौथे नंबर पर उतरे यशबर्धन चौहान ने 122 रनों की पारी खेली। 100 गेंदों पर उन्होंने 15 चौके और दो छक्के मारे। वीके विनीत ने 4 चौके और 6 छक्कों की मदद से 92 गेंदों पर 87 रन बनाए। विनीश और यशबर्धन के बीच 132 रनों की साझेदारी हुई। कुशाग्र ओझा ने 20 गेंदों पर 34 रन बनाए। छठे नंबर पर बैटिंग करने उतरे राहुल द्रविड़ के बेटे अन्वय ने 8 गेंद पर 9 रन बनाए। वह 47वें ओवर में क्रीज पर आए थे।

    तीन मैचों की सीरीज के पहले मुकाबले को भारतीय अंडर-19 टीम ने जीता था। राजकोट में ही बारिश की वजह से मैच 20-20 ओवर का हुआ था। भारत ने 6 विकेट पर 182 रन बनाए तो ऑस्ट्रेलियाई अंडर-19 टीम 175 रन ही बना सकी थी।

     

     

  • लखनऊ में CM आवास के पास टावर पर चढ़ी आगरा की महिला, पुलिस ने सुरक्षित उतारा

    लखनऊ में CM आवास के पास टावर पर चढ़ी आगरा की महिला, पुलिस ने सुरक्षित उतारा

    लखनऊ
    लखनऊ के गौतमपल्ली क्षेत्र में मुख्यमंत्री आवास के पास सोमवार को उस समय अफरातफरी मच गई, जब आगरा से आई एक महिला पार्क रोड स्थित ऊंचे टावर पर चढ़ गई। महिला की पहचान तुलसा के रूप में हुई है। उसे टावर पर चढ़ा देखकर आसपास लोगों की भीड़ जुट गई। सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल की टीम मौके पर पहुंची और महिला को सुरक्षित नीचे उतारने के प्रयास शुरू किए। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, तुलसा का जमीन को लेकर पड़ोसी से विवाद चल रहा है। महिला का आरोप है कि पड़ोसी ने उसके प्लॉट पर कब्जा कर रखा है। उसने इस संबंध में स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायत की थी। तुलसा का कहना है कि शिकायत करने के बावजूद उसकी समस्या का समाधान नहीं हुआ।

    आगरा से आई महिला लखनऊ में टावर पर चढ़ी
    महिला अपनी शिकायत अधिकारियों तक पहुंचाने के लिए आगरा से लखनऊ पहुंची थी। सोमवार को वह मुख्यमंत्री आवास के पास पार्क रोड पर स्थित टावर पर चढ़ गई। महिला के टावर पर चढ़ने की जानकारी मिलते ही आसपास के लोग मौके पर पहुंच गए। इससे कुछ देर के लिए वहां भीड़ और अफरातफरी की स्थिति बन गई। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस और दमकलकर्मी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने महिला से बातचीत शुरू की और उसे नीचे आने के लिए समझाया। सुरक्षा को देखते हुए पुलिस ने आसपास मौजूद लोगों को भी मौके से दूर कर दिया, ताकि बचाव अभियान में किसी तरह की परेशानी न हो।

    पुलिस के समझाने पर मानी, क्रेन से उतारा गया
    काफी देर तक बातचीत और समझाने के बाद महिला पुलिस के आश्वासन पर टावर से नीचे उतर आई। पुलिस ने उसे सुरक्षित नीचे उतारने के बाद उसकी शिकायत और जमीन विवाद से जुड़ी जानकारी ली। अधिकारियों के मुताबिक, महिला के प्लॉट पर कब्जे के आरोपों की अभी प्रशासनिक स्तर पर पुष्टि नहीं हुई है। मामले में महिला की शिकायत के आधार पर संबंधित तथ्यों की जानकारी जुटाई जा रही है।

  • नीम करोली बाबा से मिले अमेरिकी डॉक्टर, एक मुलाकात ने बदल दी लैरी ब्रिलियंट की जिंदगी

    नीम करोली बाबा से मिले अमेरिकी डॉक्टर, एक मुलाकात ने बदल दी लैरी ब्रिलियंट की जिंदगी

    इन दिनों नीम करोली बाबा के जीवन और उनकी महिमा पर आधारित फिल्म 'हनुमान अंश' बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा रही है. इस फिल्म के जरिए बाबा के चमत्कारों ने एक बार लोगों के दिलों में जगह बना ली है. नीम करोली बाबा के प्रति ऐसी ही गहरी आस्था सिर्फ आज के लोगों में ही नहीं है, बल्कि दशकों पहले सात समंदर पार से आए एक अमेरिकी डॉक्टर की जिंदगी भी उनके एक इशारे पर हमेशा के लिए बदल गई थी. आइए जानते हैं उस अद्भुत यात्रा के बारे में, जहां उत्तराखंड के कैंची धाम में एक विदेशी डॉक्टर की भेंट नीम करोली बाबा से हुई थी.

    जब भटके हुए डॉक्टर की हुई थी बाबा से मुलाकात
    70 वह दौर था जब पश्चिमी दुनिया से ढेरों युवा आध्यात्मिक शांति की तलाश में भारत आ रहे थे. उसी समय अमेरिका के रहने वाले डॉ. लैरी ब्रिलियंट (Dr. Larry Brilliant) अपनी जिंदगी के एक ऐसे दौर से गुजर रहे थे जब उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि क्या करना चाहिए और क्या नहीं. इसी तलाश में वे भारत आए और उत्तराखंड में नीम करोली बाबा के आश्रम (कैंची धाम) पहुंचे. मुलाकात के बाद बाबा उन्हें प्यार से 'डॉक्टर अमेरिका' कहकर बुलाने लग गए थे.

    वहीं, ट्राइसाइकिल द बुद्धिस्ट रिव्यू को दिए एक इंटरव्यू में लैरी ने बताया था कि आगे चलकर नीम करोली बाबा ने उन्हें दिल्ली जाने और संयुक्त राष्ट्र (UN) के साथ मिलकर देश से चेचक (Smallpox) जैसी खतरनाक बीमारी को खत्म करने के काम में जुटने के लिए भी कहा था.

    जिसके बाद आगे चलकर लैरी ब्रिलियंट भारत में वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के चेचक (Smallpox) मिटाने वाले प्रोग्राम से जुड़ गए थे. वे जब भी अपनी पुरानी बातें याद करते हैं, तो कैंची धाम जाना और इस बीमारी के लिए काम करना, उन्हें हमेशा याद आता है. लैरी के मुताबिक, उनकी जिंदगी को एक नई दिशा देने के पीछे सिर्फ नीम करोली बाबा का हाथ था.

    नीम करोली बाबा से हुई थी लैरी की खास बातचीत
    डॉ. लैरी ब्रिलियंट ने इंटरव्यू में बताया था कि, 'जुलाई 1973 में नीम करोली बाबा ने मुझसे कहा था कि तुरंत दिल्ली जाओ और संयुक्त राष्ट्र (UN) के साथ मिलकर काम करो. देश से चेचक की बीमारी को जड़ से मिटाओ.'

    उसी इंटरव्यू में लैरी ने बाबा के साथ पैसों को लेकर हुई एक मजेदार बातचीत भी शेयर की थी. उन्होंने बताया कि नीम करोली बाबा ने उनसे पूछा था कि, "डॉ. अमेरिका, तुम्हारे पास कितने पैसे हैं?"

    लैरी ने जवाब दिया था कि, "मेरे पास केवल 500 डॉलर हैं." इस पर बाबा ने जवाब दिया कि, "500 डॉलर? तुम झूठ बोल रहे हो, अमेरिका में तुम्हारे पास कुल कितने पैसे हैं?"

    लैरी ने तब इमरजेंसी रूम में डॉक्टर के तौर पर काम करने के दिन याद किए और कहा कि, "अमेरिका में भी मेरे पास बस 500 डॉलर ही हैं." लैरी बताते हैं कि इसके बाद वह बातचीत एक कॉमेडी शो में बदल गई. बाबा ने उस बात को हंसी-मजाक में बदल दिया था. वो हंसते बार बार एक ही बोल रहे थे कि, ''500 डॉलर यहां, 500 डॉलर वहां… तुम कोई डॉक्टर नहीं हो!"

    लैरी को यह सुनकर अपनी मां की बात याद आ गई, जो अक्सर उन्हें ताना मारती थीं कि तुम पैसे नहीं कमा सकते क्योंकि तुम कोई असली डॉक्टर नहीं हो. लेकिन, बाबा बार-बार यही दोहरा रहे थे कि, "500 डॉलर यहां और 500 डॉलर वहां… तुम डॉक्टर नहीं हो, बल्कि यू-एन-ओ (U.N.O.) डॉक्टर हो."

    इसके बाद उनकी बातचीत ने एक ऐसा मोड़ लिया, जिसे लैरी पूरी जिंदगी नहीं भूले. बाबा ने उनसे कहा था कि वह यूनाइटेड नेशन के डॉक्टर बनने जा रहे हैं, जिससे वह दुनिया से चेचक (Smallpox) जैसे खतरनाक बीमारी को मिटाने में मदद करेंगे.

    आगे लैरी ने उस समय को याद करते हुए बताया था कि बाबा ने इस खतरनाक बीमारी और उसके भविष्य के बारे में बात करते हुए कहा था, "यह भयानक बीमारी जड़ से खत्म हो जाएगी. क्योंकि भगवान इंसानों को एक ऐसा तोहफा देने जा रहे है, जिससे मानवता इस बड़े दुख और दर्द पर हमेशा के लिए जीत हासिल कर लेगी."

    कैंची धाम से लेकर चेचक के खिलाफ जंग तक
    कैंची धाम जाने और नीम करोली बाबा से मिलने के बाद लैरी ब्रिलियंट की पूरी जिंदगी ही बदल गई थी. आगे चलकर लैरी भारत में वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के चेचक कार्यक्रम (Smallpox Eradication Programme) में शामिल हुए. जिसके बाद WHO का यह अभियान ग्लोबल पब्लिक हेल्थ के इतिहास की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक बना था.

    साल 1980 में वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) ने आधिकारिक तौर पर दुनिया को चेचक से पूरी तरह मुक्त घोषित कर दिया था. इंसानों की इतिहास में यह पहली ऐसी बीमारी थी जिसे जड़ से खत्म किया गया था. लैरी ब्रिलियंट के लिए कैंची धाम की यादें हमेशा उनके सफर से जुड़ी रहीं. वे हमेशा यही मानते थे कि नीम करोली बाबा के एक-एक शब्द ने उन्हें एक नई राह दिखाई और अपनी मेडिकल की पढ़ाई का इस्तेमाल चेचक के खिलाफ जंग लड़ने में करने की प्रेरणा दी थी.

     

  • हनुमान जी पर टिप्पणी से भड़के शशि थरूर के बेटे, अमेरिकी शख्स को दिया जवाब

    हनुमान जी पर टिप्पणी से भड़के शशि थरूर के बेटे, अमेरिकी शख्स को दिया जवाब

    नई दिल्ली

    केरल से कांग्रेस सांसद शशि थरूर के बेटे ईशान ने हिंदू धर्म के खिलाफ टिप्पणी को लेकर अमेरिकी की जमकर क्लास लगा दी। उन्होंने इतिहास से आंकड़े पेश कर बताया है कि अमेरिका में ईसाई धर्म आने से सैकड़ों साल पहले इसकी एंट्री भारत में हो चुकी थी। दरअसल, सोशल मीडिया पर हनुमान जी की प्रतिमा साझा कर यूजर उसे गिराने की बात क रहा था।

    जैसी ह्यू नाम के एक सोशल मीडिया यूजर ने हनुमान जी की प्रतिमा की तस्वीर साझा की थी। सात ही लिखा, 'जब हम जीतेंगे, तो इसे गिराने वाले हैं।' इसपर ईशान थरूर ने जवाब दिया, 'पता नहीं इस बेवकूफ को यह पता है या नहीं कि भारत में ईसाई धर्म, अमेरिका में ईसाई धर्म के आने से 1500 साल से भी ज्यादा पहले आ गया था। भारत में हजारों चर्च हैं। फिर भी अमेरिका हनुमान जी की एक मूर्ति बर्दाश्त नहीं कर पा रहा? हर जगह धार्मिक राष्ट्रवादी ही दुनिया के सबसे कमजोर और कम आत्मसम्मान वाले लोग होते हैं।'

    कौन हैं ईशान थरूर
    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, साल 1984 में जन्मे ईशान अमेरिका में पत्रकार हैं। उनका नाम सिंगापुर में हुआ था। उनके जुड़वा भाई का नाम कनिष्क है। वह केरल के तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद शशि थरूर के बेटे हैं। वह मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय मामलों और वैश्विक राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लिखते रहे हैं। हाल ही में वॉशिंगटन पोस्ट में छंटनी के बाद वह चर्चा में आ गए थे।

    न्यूयॉर्कर के अनुसार, साल 2026 में संस्था के साथ शुरुआत करने वाले ईशान ग्लोबल नोट्स नाम से एक इंटरनेशनल पॉलिटिक्स कॉलम लिखते हैं। इससे पहले वह करीब 1 दशक तक वॉशिंगटन पोस्ट में रहे और वर्ल्ड व्यू कॉलम लिखते रहे। साल 2021 में अमेरिकन एकेडमी ऑफ डिल्पोमैसी ने उन्हें आर्थर रॉस मीडिया अवॉर्ड फॉर कॉमेंट्री से नवाजा था।

    2024 में उन्हें टेड सोरेन्सन अवॉर्ड मिला। इसके साथ ही वह काउंसिल ऑन फॉरिन रिलेशन्स में 2026-27 एड्वर्ड आर मरो प्रेस फैलो हैं। इससे पहले वह 8 सालों तक टाइम में सीनियर एडिटर और संवाददाता रहे थे। उन्होंने सिंगापुर और न्यूयॉर्क में संस्था के लिए काम किया है।

    उन्होंने साल 2006 में येल यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है। खास बात है कि येल में पढ़ाई के दौरान उन्हें सड्लर फैलोशिप मिली थी। उन्होंने अपनी पत्रकारिता की पारी की शुरुआत साल 2006 से टाइम मैगजीन से की थी। साल 2014 में उन्होंने संस्थान को अलविदा कह दिया था। इसके बाद वह अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी में द वॉशिंगटन पोस्ट पहुंचे थे।

  • OnePlus 16 की पहली झलक आई सामने, 1TB स्टोरेज और 165Hz डिस्प्ले से मचेगा तहलका

    OnePlus 16 की पहली झलक आई सामने, 1TB स्टोरेज और 165Hz डिस्प्ले से मचेगा तहलका

    OnePlus 16 को लेकर अब तक सिर्फ लीक्स और टीजर सामने आ रहे थे, लेकिन अब कंपनी ने फोन की तस्वीर और कलर ऑप्शन जारी कर दिए हैं. यानी OnePlus का अगला फ्लैगशिप फोन अब धीरे-धीरे सामने आ रहा है. फोन का डिजाइन देखकर साफ है कि कंपनी ने इस बार परफॉर्मेंस के साथ लुक पर भी काफी काम किया है.

    OnePlus 16 को तीन कलर में लाया जाएगा. खास बात यह है कि स्टारलाइट वेरिएंट में पीछे की तरफ अलग तरह का स्टारलाइट इफेक्ट दिया गया है. कंपनी के मुताबिक इसमें सिल्क ग्लास फिनिश का इस्तेमाल किया गया है, जिससे फोन पर उंगलियों के निशान कम पड़ेंगे. यह फोन फिलहाल चीन में प्री-ऑर्डर के लिए सामने आया है.

    OnePlus 16 में 1TB तक स्टोरेज
    OnePlus 16 का एक बड़ा अट्रैक्शन इसका 1TB स्टोरेज वेरिएंट है. प्री-ऑर्डर लिस्टिंग के मुताबिक फोन 12GB RAM के साथ 256GB और 512GB स्टोरेज में आएगा. इसके अलावा 16GB RAM के साथ 512GB और 1TB स्टोरेज का विकल्प भी दिया जाएगा. यानी जिन लोगों के फोन में फोटो, वीडियो और गेम्स की वजह से स्टोरेज जल्दी भर जाती है, उनके लिए यह बड़ा अपग्रेड हो सकता है.

    फोन का डिजाइन पिछले OnePlus फ्लैगशिप से पूरी तरह अलग नहीं है. पीछे ऊपर बाईं तरफ चौकोर कैमरा मॉड्यूल दिया गया है, जिसमें तीन कैमरे और फ्लैश नजर आते हैं. लेकिन नए कलर और फिनिश की वजह से फोन को अलग लुक मिलता है.

    165Hz डिस्प्ले
    OnePlus 16 की सबसे ज्यादा चर्चा इसके डिस्प्ले को लेकर है. कंपनी ने 165Hz रिफ्रेश रेट कन्फर्म किया है. खास बात यह है कि यह सिर्फ गेमिंग के लिए नहीं होगा. रिपोर्ट्स के मुताबिक OnePlus 16 में सिस्टम लेवल पर 165Hz रिफ्रेश रेट काम करेगा.

    पिछले OnePlus 15 में भी 165Hz डिस्प्ले दिया गया था, लेकिन इसका इस्तेमाल कई मामलों में गेमिंग तक सीमित था. OnePlus 16 में कंपनी इसे ज्यादा जगह इस्तेमाल करने की तैयारी में है. गेमिंग के दौरान रिफ्रेश रेट 185Hz तक पहुंचने की बात भी रिपोर्ट्स में कही गई है, हालांकि इसे अभी पूरी तरह आधिकारिक स्पेसिफिकेशन नहीं माना जाना चाहिए.

    इसका फायदा क्या होगा? फोन पर स्क्रॉलिंग ज्यादा स्मूद दिख सकती है और गेम में मूवमेंट ज्यादा फ्लुइड महसूस हो सकता है. हालांकि आम यूजर के लिए 120Hz और 165Hz के बीच का फर्क हर सिचुएशन में बहुत बड़ा नहीं होगा. इसका असली फायदा हाई-फ्रेम गेमिंग में ज्यादा दिखाई दे सकता है.

    9000mAh की बैटरी भी हो सकती है
    OnePlus 16 को लेकर सबसे बड़ी लीक इसकी बैटरी को लेकर है. रिपोर्ट्स में 9000mAh बैटरी की बात सामने आई है. अगर यह सही साबित होती है तो यह आज के ज्यादातर प्रीमियम फोन की तुलना में काफी बड़ी बैटरी होगी.

    फोन में 100W वायर्ड चार्जिंग और 50W वायरलेस चार्जिंग मिलने की भी रिपोर्ट है. 3C सर्टिफिकेशन में 100W चार्जिंग सपोर्ट सामने आ चुका है. यहां OnePlus 15 से तुलना भी दिलचस्प है.  OnePlus 15 में 7300mAh बैटरी थी और कंपनी ने 120W चार्जिंग और 50W वायरलेस चार्जिंग दी थी.

    कैमरा में 200MP का बड़ा दांव
    कैमरे को लेकर भी OnePlus 16 काफी बड़ा अपग्रेड कर सकता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक फोन में 200MP का मेन कैमरा मिल सकता है. इसके साथ 50MP अल्ट्रावाइड और 50MP पेरिस्कोप टेलीफोटो कैमरा दिया जा सकता है.

    मेन कैमरे में 1/1.4 इंच का सेंसर मिलने की बात है. इसका मतलब सिर्फ मेगापिक्सल ज्यादा होना ही नहीं, बल्कि सेंसर का साइज भी बड़ा होगा. हालांकि कैमरे की असली क्वालिटी का पता फोन के लॉन्च और रियल लाइफ टेस्ट के बाद ही चलेगा.

    अंदर मिल सकती है नई फ्लैगशिप चिप
    परफॉर्मेंस के लिए OnePlus 16 में Qualcomm की अगली फ्लैगशिप चिप मिलने की रिपोर्ट है. अलग-अलग रिपोर्ट्स में इसे Snapdragon 8 Elite Gen 6 Pro या Snapdragon 8 Elite Extreme Gen 6 नाम से बताया गया है.

  • ‘धुरंधर’ के रहमान डकैत बनने से पहले अक्षय खन्ना ने क्यों किया था इनकार?

    ‘धुरंधर’ के रहमान डकैत बनने से पहले अक्षय खन्ना ने क्यों किया था इनकार?

    आदित्य धर की फिल्म धुरंधर बॉलीवुड की सबसे बड़ी पिक्चर रही जिसने दुनियाभर में खूब पैसा छापा. इसके दो पार्ट्स आए, जिसमें से ऑडियंस की पसंद पहला पार्ट रही. इसकी वजह अक्षय खन्ना रहे जिन्होंने फिल्म में रहमान डकैत बनकर सारी लाइमलाइट लूटी. वो एक ही झटके में सबकी पसंद बन गए. लोगो को रणवीर सिंह की जगह मेन विलेन अक्षय से प्यार हुआ, क्योंकि उनका काम तारीफ के काबिल था.

    अक्षय खन्ना के रहमान डकैत वाले किरदार की चर्चा पिछले कई महीनों से चली आ रही है. हर किसी ने उन्हें लेकर बात की, और एक्टर को खूब सराहा. हालांकि अक्षय के पास जब रहमान डकैत के रोल का ऑफर आया था, तब वो इसे करने में कंफर्टेबल नहीं थे. उन्हें पूरी कहानी सुनाई गई और उनका किरदार समझाया गया, तब जाकर एक्टर माने. इसके बारे में हाल ही में धुरंधर के कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा ने बात की.

    अक्षय को था एतराज
    शेखर सुमन ने शो पर उन्होंने धुरंधर में अक्षय खन्ना की कास्टिंग पर कहा- मैं अब ये बता सकता हूं कि 2-3 बहुत बड़े स्टार्स ने इस रोल को करने से मना कर दिया था. उन्हें लगा कि फिल्म में कई कलाकार हैं और डायरेक्टर ने पिछले 7 साल से कोई फिल्म नहीं बनाई है. उनकी आखिरी फिल्म उरी थी. स्टार्स बहुत सारी चीजों का हिसाब-किताब लगाते हैं. जब कोई कलाकार दिल से सोचने के बजाय दिमाग से ज्यादा सोचने लगता है, तो वहीं दिक्कत शुरू हो जाती है.

    'जब मैंने अक्षय खन्ना को कहानी सुनाई तो उन्होंने कहा कि पागल हो गया है क्या तू? मैं विलेन क्यों करूंगा? लेकिन सिर्फ 5 मिनट तक कहानी सुनने के बाद उन्होंने कहा कि फैंटास्टिक और उसी दिन फिल्म के लिए हां कर दी. मुझे पता था कि अक्षय भाई इस किरदार में कमाल कर देंगे. उन्होंने आदित्य धर की लिखी कहानी में अपना भी टच जोड़ा. उन्हें सही समय पर सही स्क्रिप्ट और सही मौका मिला.'

    रणवीर ने किया सपोर्ट
    मुकेश छाबड़ा आगे ये भी बताते हैं कि रणवीर सिंह ने अक्षय खन्ना को फिल्म में बहुत सपोर्ट किया. उनका रोल रहमान डकैत की परछाई जैसा था. मगर तब भी रणवीर ने बिना किसी परेशानी उस रोल को निभाया. मुकेश ने कहा कि अगर उनकी जगह कोई और एक्टर होता, तो वो इसे करने से पहले बहुत सोचता. लेकिन रणवीर को चूंकि फिल्म का सेकंड पार्ट मालूम था, इसलिए उन्होंने इस रोल को पूरी शिद्दत के साथ किया और खुद को डायरेक्टर के हवाले सौंप दिया.

    बात करें अक्षय खन्ना के वर्क फ्रंट की, तो वो तेलुगू फिल्म महाकाली में नजर आएंगे जिसमें उनका रोल गुरू शुक्राचार्य का होगा. इसका टीजर भी रिलीज हुआ था, जिसमें एक्टर को काफी पसंद किया गया.