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  • शी जिनपिंग जाएंगे अमेरिका, ट्रंप से मुलाकात की तारीख तय; इन मुद्दों पर होगी बात

    शी जिनपिंग जाएंगे अमेरिका, ट्रंप से मुलाकात की तारीख तय; इन मुद्दों पर होगी बात

    बीजिंग 

    चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 23 से 25 सितंबर तक अमेरिका की सरकारी यात्रा पर जाएंगे। यह यात्रा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निमंत्रण पर हो रही है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने सोमवार को यह जानकारी दी। प्रवक्ता ने बताया कि शी 23 सितंबर को वाशिंगटन पहुंचेंगे। वहां उनकी ट्रंप से बड़ी बैठक होगी। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के अनुसार, शी ज्वाइंट बेस एंड्रयूज के हवाई अड्डे पर उतरेंगे। ट्रंप खुद वहां जाकर उनका स्वागत करेंगे। यह बहुत कम होता है। आमतौर पर ट्रंप विदेशी मेहमानों से वाइट हाउस में ही मिलते हैं।

    बता दें कि दोनों नेता इससे पहले मई में मिले थे। तब ट्रंप बीजिंग गए थे। दोनों देशों ने अपने रिश्ते सुधारने की बात की थी। ये दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं। इस बड़ी बैठक से पहले दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी अंतिम तैयारी को लेकर बातचीत कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि इसमें टैरिफ का मुद्दा भी शामिल है। बताया जा रहा है कि दोनों पक्ष आर्थिक और व्यापारिक मुद्दों पर बात करेंगे।

    दोनों नेताओं की मुलाकात बहुत ही अहम मानी जा रही है। बताया जा रहा है कि यह बातचीत इसलिए भी जरूरी हो गई है क्योंकि ट्रंप ने शुक्रवार को एक नए कानून पर हस्ताक्षर किए। इस कानून से रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाया जा सकता है। इसमें चीन और भारत भी शामिल हैं। कानून का नाम लिंडसे ओ. ग्राहम रूस और ईरान प्रतिबंध अधिनियम 2026 है। दूसरी ओर चीन ने कहा है कि वह रूसी तेल-गैस खरीद पर अमेरिकी टैरिफ का विरोध करता है। चीन का कहना है कि दो देशों के सामान्य व्यापार में तीसरे देश को दखल नहीं देना चाहिए।

    चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा है कि चीन बराबरी और आपसी फायदे के आधार पर दूसरे देशों के साथ सामान्य व्यापार करता है। यह व्यापार किसी तीसरे देश के खिलाफ नहीं है। इसमें बाहरी दबाव नहीं होना चाहिए। चीन एकतरफा प्रतिबंधों का विरोध करता है। इनका अंतरराष्ट्रीय कानून में कोई आधार नहीं है और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी भी नहीं है।

  • सेवा संकल्प अभियान : उप मुख्यमंत्री  अरुण साव ने 126.92 करोड़ के कार्यों का किया लोकार्पण-भूमिपूजन

    सेवा संकल्प अभियान : उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने 126.92 करोड़ के कार्यों का किया लोकार्पण-भूमिपूजन

    रायपुर

    सेवा संकल्प अभियान के तहत रायगढ़ में विकास कार्यों को गति देने सोमवार को संत पूज्य  प्रियदर्शी राम जी ऑडिटोरियम पंजरी प्लांट रायगढ़ में भूमिपूजन एवं लोकार्पण कार्यक्रम आयोजित किया गया। उप मुख्यमंत्री  अरुण साव के मुख्य आतिथ्य में नगर निगम और लोक निर्माण विभाग के कुल 126.92 करोड़ रुपए के विकास कार्यों का भूमिपूजन-लोकार्पण हुआ। उप मुख्यमंत्री  साव ने शहर के विकास के लिए चार और बड़े कार्यों की घोषणा की। वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक  ओ.पी. चौधरी दिल्ली से वर्चुअली कार्यक्रम में शामिल हुए। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों को पूर्ण हो चुके आवासों की प्रतीकात्मक चॉबी भी सौंपी गई।

    रायगढ़ को विकसित जिला बनाने तेज गति से कार्य जारी – उप मुख्यमंत्री  साव 

    उप मुख्यमंत्री  अरुण साव ने कहा कि रायगढ़ तेजी से विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। रायगढ़ जिले को विकसित जिला बनाने के लिए तेज गति से काम किया जा रहा है। सेवा संकल्प अभियान के तहत विकास कार्यों को गति देने के साथ नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि रायगढ़ नगर निगम की ओर से लगभग 10 करोड़ रुपए के विभिन्न विकास कार्यों की सूची उन्हें दी गई है। इन कार्यों के लिए शीघ्र स्वीकृति प्राप्त हो जाएगी। उन्होंने कहा कि रायगढ़ के विकास के लिए राशि की कोई कमी नहीं होगी। 
                  
    उप मुख्यमंत्री  साव ने कहा कि शहर की जरूरतों के अनुसार विकास कार्यों को प्राथमिकता से आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने शहर के विकास के लिए चार अतिरिक्त कार्यों की घोषणा की। इनमें संजय मार्केट के निर्माण एवं उन्नयन के लिए 15.67 करोड़ रुपए, रामलीला मैदान के विकास, मंच एवं पवेलियन निर्माण के लिए 5 करोड़ रुपए, तालाब के संरक्षण एवं सौंदर्यीकरण के लिए 4.99 करोड़ रुपए तथा केवड़ाबाड़ी से मरीन ड्राइव तक सनलाईजेशन कार्य के लिए 9.97 करोड़ रुपए शामिल हैं।   

    उप मुख्यमंत्री  साव ने कहा कि रायगढ़ में सड़क, नाली, जल निकासी, बाजार, खेल और अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि रायगढ़ औद्योगिक गतिविधियों के साथ अपनी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान के लिए भी जाना जाता है। विकास कार्यों के माध्यम से शहर की सुविधाओं को बेहतर बनाते हुए रायगढ़ को विकसित और सुव्यवस्थित शहर के रूप में आगे बढ़ाना है। उन्होंने निर्माण एजेंसियों से कहा कि विकास कार्यों को तेजी से पूरा किया जाए और गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाए।

    औद्योगिक पहचान के अनुरूप विकसित हो रहा रायगढ़ –  ओ.पी. चौधरी

    वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक  ओ.पी. चौधरी ने दिल्ली से वर्चुअली संबोधित करते हुए कहा कि रायगढ़ के विकास के लिए लगातार कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में रायगढ़ नगर निगम को विभिन्न योजनाओं के तहत 384.66 करोड़ रुपए के कार्यों की स्वीकृति मिली है। वहीं लोक निर्माण विभाग के माध्यम से जिले में सड़क, भवन और पुल सहित विभिन्न कार्यों के लिए 1426 करोड़ रुपए की स्वीकृति का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि रायगढ़ के रिंग रोड के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। रायगढ़-घरघोड़ा फोरलेन तथा पूंजीपथरा-तमनार फोरलेन की दिशा में भी कार्य आगे बढ़ रहा है। इसके अलावा तमनार-उरगा-लैलूंगा, तमनार बाईपास, कया-कमतरा- चरखापारा-ससकोबा-बंधनपुर और कोड़ातराई-पुसौर फोरलेन सहित विभिन्न सड़क परियोजनाओं का भी उन्होंने उल्लेख किया। उन्होंने रायगढ़ में स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, संगीत महाविद्यालय भवन और वर्किंग वूमेन हॉस्टल जैसे कार्यों की जानकारी भी दी। वित्त मंत्री  चौधरी ने कहा कि रायगढ़ की अधोसंरचना को उसकी औद्योगिक पहचान के अनुरूप मजबूत किया जा रहा है।

    लोकार्पण-भूमिपूजन कार्यक्रम को लोकसभा सांसद  राधेश्याम राठिया, राज्यसभा सांसद  देवेंद्र प्रताप सिंह और महापौर  जीवर्धन चौहान ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष मती शिखा रवींद्र गबेल, सभापति  डिग्री लाल साहू,  अरूणधर दीवान,  गुरुपाल भल्ला,  सुभाष पाण्डेय,  कांत सोमावार,  विकास केडिया,  अनुपम पाल,  जतीन साव,  अरूण कातोरे,  पवन अग्रवाल, कलेक्टर  मयंक चतुर्वेदी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक  शशिमोहन सिंह, डीएफओ रायगढ़  अरविंद पीएम, जिला पंचायत सीईओ  अभिजीत बबन पठारे, नगर निगम के पार्षदगण सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

  • EPFO Rule Change: ₹20-25 हजार से ज्यादा सैलरी वालों पर क्या होगा असर?

    EPFO Rule Change: ₹20-25 हजार से ज्यादा सैलरी वालों पर क्या होगा असर?

     नई दिल्‍ली

    सरकार ने अनिवार्य कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) कवरेज के लिए सैलरी लिमिट को 17 सितंबर से 15,000 रुपये प्रति माह से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह कर दिया है. सरकार को उम्मीद है कि इस बदलाव से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी इसके दायरे में आएंगे। 

    इस नियम के बदलने का क्या मतलब है? 
    यह बदलाव खासतौर पर उन लोगों के लिए है, जो पहली बार EPFO में शामिल हो रहे हैं. सितंबर 2014 से कर्मचारी भविष्‍य निधि (EPFO) के अंतर्गत आने वाले किसी कंपनी में 15,000 रुपये तक कमाने वाले कर्मचारियों को पेंशन में योगदान देना जरूरी था. अब ये लिमिट बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दी गई है. ऐसे में अब 15 से 25 हजार रुपये के बीच कमाने वाले कर्मचारियों की खुद से पीएफ पेंशन के दायरे में रख दिया जाएगा और उन्‍हें पेंशन का लाभ दिया जाएगा। 

    अगर 20,000 रुपये है सैलरी तो क्‍या होगा असर? 
    पुरानी सीमा के तहत ₹20,000 प्रति माह की बेसिक सैलरी पर किसी कंपनी में शामिल होने वाला कर्मचारी वैधानिक सीमा से ऊपर था और खुद ही इसके दायरे में नहीं आता था, लेकिन अब लिमिट बढ़ने के बाद ₹20,000 नई सीमा से कम है, इसलिए अब वह कर्मचारी लागू नियमों के अधीन अनिवार्य कवरेज के अंतर्गत आता है यानी उसका पीएफ पेंशन में योगदान शुरू हो जाएगा। 

    इसका मतलब है कि कर्मचारी को रिटायरमेंट के लिए जमा किए गए PF का लाभ मिलेगा, ईपीएस के तहत पेंशन की पात्रता होगी और कर्मचारी जमा से जुड़ी बीमा योजना (EDLI) के तहत बीमा कवर मिलेगा। 

    10 हजार महीना कमाने वालों पर क्‍या होगा असर? 
    अगर आपकी 10 हजार रुपये सैलरी है तो आपके लिए कुछ भी नहीं बदलने वाला है. आपका जितना पहले पेंशन में योगदान जा रहा था, उसी हिसाब से आज भी जा रहा होगा. क्‍योंकि आप पहले भी सैलरी लिमिट के दायरे में थे और अब भी सैलरी लिमिट के दायरे में हैं। 

    अगर आपकी 25,000 रुपये से ज्‍यादा सैलरी तो क्‍या होगा? 
    अगर आपकी सैलरी 25 हजार रुपये से ज्‍यादा है तो मंथली कटौती में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. जहां कटौती वैधानिक सीमा पर लिमिटेड है, वहां कर्मचारियों का अधिकतम कंट्रीब्‍यूशन 15,000 रुपये का 12 फीसदी यानी 1800 रुपये प्रति माह था. नई लिमिट के अनुसार यह ₹25,000 का 12%, यानी ₹ 3,000 प्रति माह हो जाएगा. जिससे कर्मचारी की कटौती ₹1,200 तक बढ़ सकती है. इन कर्मचारियों के लिए इसका मतलब होगा कि उन्हें हर महीने कम वेतन मिलेगा और उनके पीएफ बचत खाते में अधिक राशि जमा होगी। 

  • बेंगलुरु में टेलीकॉम उद्योग के प्रमुख निवेशकों से संवाद करेंगे मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    बेंगलुरु में टेलीकॉम उद्योग के प्रमुख निवेशकों से संवाद करेंगे मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    बेंगलुरु में टेलीकॉम उद्योग के प्रमुख निवेशकों से संवाद करेंगे मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    ग्वालियर के टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन को निवेश का नया केंद्र बनाने की तैयारी
    22 सितंबर को इन्वेस्टर्स राउंड टेबल में ग्वालियर टीएमजेड की संभावनाओं और नीतिगत सहयोग पर होगी चर्चा

    भोपाल 
    मध्यप्रदेश में टेलीकॉम और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को गति देने के लिए राज्य सरकार अब देश के प्रमुख तकनीकी केंद्र बेंगलुरु के उद्योग जगत से सीधे संवाद करने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 22 सितंबर को बेंगलुरु में टेलीकॉम क्षेत्र के प्रमुख उद्योगपतियों और निवेशकों के साथ इन्वेस्टर्स राउंड टेबल में ग्वालियर में विकसित किए जा रहे टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा करेंगे।

    ताज बेंगलुरु में होने वाले इस संवाद में मुख्यमंत्री डॉ. यादव निवेशकों को ग्वालियर टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन में उपलब्ध निवेश अवसरों, राज्य की औद्योगिक नीतियों और निवेश के लिए राज्य सरकार की ओर से दिए जा रहे सहयोग की जानकारी देंगे। टेलीकॉम उपकरणों के विनिर्माण के साथ इस क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और इससे जुड़े उद्योगों के विस्तार की संभावनाओं पर भी चर्चा होगी।

    ग्वालियर में टेलीकॉम उद्योग के लिए तैयार हो रहा नया आधार

    इन्वेस्टर्स राउंड टेबल में ग्वालियर टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन की प्रमुख विशेषताओं और निवेशकों के लिए उपलब्ध प्रोत्साहनों का प्रस्तुतिकरण किया जाएगा। अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई तथा दूरसंचार विभाग के वरिष्ठ अधिकारी निवेशकों के सामने टीएमजेड से जुड़े अवसरों और नीति समर्थन की जानकारी रखेंगे।

    कार्यक्रम में टेलीकॉम उद्योग की प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधि अपने अनुभव साझा करेंगे। टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन में निवेश के इच्छुक उद्योगों के साथ उनके प्रस्तावों और अपेक्षाओं पर भी चर्चा होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव निवेशकों के प्रश्नों और सुझावों पर संवाद करते हुए मध्यप्रदेश में निवेश के लिए राज्य सरकार की प्रतिबद्धता और उपलब्ध सहयोग की जानकारी देंगे।

    केंद्र और राज्य के समन्वय से टेलीकॉम विनिर्माण को मिलेगा बढ़ावा

    इन्वेस्टर्स राउंड टेबल में भारत सरकार के संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया भी शामिल होंगे। केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों तथा उद्योग जगत की सहभागिता से होने वाला यह संवाद ग्वालियर टीएमजेड के विकास और टेलीकॉम विनिर्माण क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण होगा।

    बेंगलुरु के तकनीकी केंद्रों को भी देखेंगे मुख्यमंत्री

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव बेंगलुरु प्रवास के दौरान टेलीकॉम और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े प्रमुख संस्थानों का अवलोकन भी करेंगे। वे क्वालकॉम के आरएंडडी सेंटर तथा सिग्नलचिप इनोवेशन और सिग्नलट्रॉन सिस्टम का दौरा करेंगे। इन केंद्रों पर अनुसंधान, नवाचार और टेलीकॉम तकनीक के क्षेत्र में हो रहे कार्यों की जानकारी ली जाएगी। इसके माध्यम से बेंगलुरु के तकनीकी इकोसिस्टम और मध्यप्रदेश में विकसित किए जा रहे टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन के बीच संभावित सहयोग के अवसरों को समझने का प्रयास होगा।

     

  • MP में रोबोट से होगी पानी-सीवर पाइपलाइन की जांच, बिना सड़क खोदे मरम्मत

    MP में रोबोट से होगी पानी-सीवर पाइपलाइन की जांच, बिना सड़क खोदे मरम्मत

    इंदौर
     भागीरथपुरा में दूषित पानी की त्रासदी के बाद मध्यप्रदेश सरकार ने शहरी क्षेत्रों में पेयजल और सीवर नेटवर्क की स्थिति जांचने के लिए रोबोटिक तकनीक का इस्तेमाल करने का फैसला लिया है। नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय ने प्रदेश के नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर परिषदों को 70 से 900 मिलीमीटर व्यास वाली पानी और सीवर पाइपलाइनों की जांच कराने के निर्देश दिए हैं।

    इसके लिए चेन्नई की विशेषज्ञ एजेंसी पेरमा-लिनियर इंडस्ट्रीज (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड को सबसे कम बोली यानी L1 के आधार पर एम्पैनल किया गया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक पाइपलाइन निरीक्षण की दर 40 रुपए प्रति मीटर तय हुई है और इसके लिए एक साल का एग्रीमेंट किया गया है।

    भागीरथपुरा के बाद क्यों पड़ी रोबोटिक जांच की जरूरत?
    दिसंबर 2025 के आखिर में इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी की वजह से बड़े स्तर पर बीमारी फैली थी। शुरुआती सरकारी और NHRC रिकॉर्ड में दूषित पानी से मौतों और बड़ी संख्या में लोगों के बीमार होने की पुष्टि हुई थी। NHRC ने जनवरी 2026 में मामले पर स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य के मुख्य सचिव से रिपोर्ट मांगी थी।

    बाद में न्यायिक जांच में 36 मौतों की जांच की गई। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक इनमें 24 मौतों को सीवर से दूषित पानी पीने से सीधे जोड़ा गया, जबकि 12 मामलों में दूषित पानी और मौत के बीच निर्णायक संबंध स्थापित नहीं हो सका। न्यायिक जांच में पाइपलाइन बदलने में देरी और शहरी जल नेटवर्क से जुड़े प्रशासनिक पहलुओं पर भी सवाल उठे हैं।

    इसी घटना के बाद सरकार का फोकस इस बात पर है कि प्रदेश में ऐसी पाइपलाइन क्रॉसिंग और लीकेज की पहले ही पहचान कर ली जाए, जहां सीवर का पानी पेयजल नेटवर्क को प्रभावित कर सकता है।

    पहले समझिए, सरकार को यह फैसला क्यों लेना पड़ा?
    दिसंबर 2025 के आखिरी सप्ताह में इंदौर के भगीरथपुरा में दूषित पेयजल से 36 लोगों की मौत हो गई थी। जांच में पीने के पानी में मानव मल से जुड़े बैक्टीरिया मिले। सीवर लाइन लीक होने से उसका पानी पेयजल लाइन में मिल गया था। अकेले भगीरथपुरा में ऐसे 260 पॉइंट्स मिले, जहां सीवर का पानी पेयजल में मिल रहा था।

    हादसे के बाद सरकार ने जीआईएस (GIS) प्लेटफॉर्म 'गरुड़' से पूरे प्रदेश की मैपिंग कराई। इसमें मध्य प्रदेश में 2.30 लाख से अधिक ऐसे पॉइंट्स मिले, जहां सीवर और पेयजल पाइपलाइनें एक-दूसरे को क्रॉस कर रही हैं। इनमें इंदौर में 30 हजार और भोपाल में 20 हजार से अधिक डेंजर क्रॉसिंग पॉइंट्स हैं, जहां सीवर का पानी पेयजल में मिलने का खतरा है।

    दूषित पेयजल पीने से यहां 36 लोगों की मौत हो गई थी। जांच में पानी में मानव मल से जुड़े बैक्टीरिया मिले थे। पता चला कि सीवर लाइन लीक होकर पेयजल लाइन में मिल रही थी। अकेले भागीरथपुरा में ऐसे 260 पॉइंट्स मिले थे। इस हादसे ने पूरे प्रदेश को हिला दिया था। इसी के बाद सरकार ने बड़ा फैसला लेने की तैयारी शुरू की।

    हादसे के बाद मध्यप्रदेश सरकार ने जीआईएस (Geographic Information System) प्लेटफॉर्म गरुड़ से पूरे प्रदेश की मैपिंग कराई। इस मैपिंग में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए। प्रदेश में 2.30 लाख से ज्यादा ऐसे पॉइंट्स मिले, जहां सीवर और पेयजल लाइनें एक दूसरे को क्रॉस कर रही हैं। इनमें से इंदौर में 30 हजार से ज्यादा डेंजर क्रॉसिंग पॉइंट्स हैं। भोपाल में भी 20 हजार से ज्यादा ऐसे खतरनाक पॉइंट्स मिले हैं। इन जगहों पर सीवर का पानी पेयजल में मिलने का खतरा बना रहता है।

    अब रोबोट करेंगे जांच
    सरकार ने अब इन डेंजर पॉइंट्स की जांच के लिए रोबोट तकनीक अपनाने का फैसला किया है। यह जांच ट्रेंचलेस टेक्नोलॉजी से होगी। इसका मतलब है कि सड़क खोदने की जरूरत नहीं पड़ेगी। रोबोट को सीसीटीवी क्रॉलर सिस्टम से पाइपलाइन में उतारा जाएगा।

    इसे मौजूदा मैनहोल या एयर रिलीज वाल्व के जरिए भेजा जाएगा। रोबोट में हाई रिजॉल्यूशन कैमरा और सेंसर लगे होंगे। यह रोबोट करीब 300 मीटर लंबे केबल से जुड़ा रहेगा। पाइपलाइन के अंदर रोबोट लगातार वीडियो रिकॉर्डिंग करेगा। साथ ही जरूरी डेटा भी दर्ज करता रहेगा।

    यह रोबोट 70 से 900 मिमी व्यास वाली पाइपलाइनों में काम करेगा। इसकी मदद से लीकेज, टूट फूट और अवैध कनेक्शन का पता चलेगा। इससे साफ हो जाएगा कि कहां कहां खतरा ज्यादा है। नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय ने सभी नगर निगमों को इसके निर्देश दिए हैं। नगर पालिकाओं और नगर परिषदों को भी यह आदेश दिया गया है। सभी जगह इस तकनीक से जांच अनिवार्य कर दी गई है।

    एजेंसी को कैसे मिला काम
    इस काम के लिए विभाग ने टेंडर जारी किया था। इसकी अनुमानित लागत 1.50 करोड़ रुपए रखी गई थी। यह काम 365 दिन में पूरा करना तय हुआ है। टेंडर में तीन कंपनियों ने बोली लगाई। इनकी दरों में जमीन आसमान का फर्क देखने को मिला।

    डिजिटल सर्विलॉन्स ने 440 रुपए प्रति मीटर की दर रखी थी। फॉर्म डील ने 400 रुपए प्रति मीटर का रेट दिया था। लेकिन चेन्नई की पेरमा-लिनियर इंडस्ट्रीज ने सिर्फ 40 रुपए प्रति मीटर की बोली लगाई।

    सबसे कम बोली होने के कारण इसी कंपनी को काम मिला है। कंपनी अप्रैल 2022 में रजिस्टर्ड हुई थी। इसके डायरेक्टर गणेशन और रेवती हैं। अब सभी नगरीय निकाय अपनी जरूरत के हिसाब से एस्टीमेट तैयार करेंगे। इसके बाद कंपनी को वर्क ऑर्डर जारी किया जाएगा।

    देश के कई राज्यों में पहले से इस्तेमाल
    मध्य प्रदेश में यह तकनीक पहली बार इस्तेमाल हो रही है। लेकिन देश के कई राज्यों में यह पहले से काम कर रही है। नीति आयोग की एक रिपोर्ट में इसका जिक्र किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक 15 से ज्यादा राज्यों में रोबोटिक पाइपलाइन जांच हो रही है। इनमें तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश शामिल हैं।

    महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में भी यह तकनीक इस्तेमाल हो रही है। इन राज्यों में चेन्नई की एक कंपनी के खास रोबोट काम कर रहे हैं। ये रोबोट हाई रिजॉल्यूशन कैमरों की मदद से जीआईएस मैपिंग करते हैं। साथ ही लीकेज की सटीक जानकारी भी देते हैं।

    पुराने तरीके से होती थी दिक्कत
    अब तक सीवर लाइनों की जांच पुराने तरीकों से होती थी। इसमें बड़े पैमाने पर सड़क और जमीन की खुदाई करनी पड़ती थी। इससे लंबे समय तक ट्रैफिक भी प्रभावित रहता था। खुदाई से कचरा बढ़ता था और पर्यावरण पर भी असर पड़ता था। आपात मरम्मत में भी काफी समय लग जाता था।

    इसके अलावा बिजली और गैस जैसी अन्य भूमिगत यूटिलिटी को नुकसान का खतरा रहता था। घनी आबादी वाले इलाकों में तो जांच करना और मुश्किल हो जाता था। रोबोटिक तकनीक आने से यह सारी दिक्कतें कम होने की उम्मीद है।

    खराबी मिलने पर तय समय में रिपोर्ट
    रोबोटिक जांच में मिलने वाली खराबियों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। हर श्रेणी के लिए अलग डेडलाइन तय की गई है। क्रिटिकल श्रेणी में गंभीर लीकेज, अवैध टैपिंग और पाइपलाइन बैठने जैसी समस्याएं आती हैं। इसकी रिपोर्ट 48 घंटे के भीतर देना जरूरी होगा।

    मेजर श्रेणी में सामान्य लीकेज, जॉइंट खिसकना और पाइप का आकार बिगड़ना शामिल है। इसकी रिपोर्ट तीन दिन के भीतर देनी होगी। माइनर श्रेणी में पाइप में जमी गंदगी और मामूली तलछट जैसी समस्याएं आती हैं। इन्हें मासिक रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा।

    ₹400 के काम की बोली सिर्फ ₹40 प्रति मीटर, ऐसे तय हुई एजेंसी

    नगरीय प्रशासन विभाग ने इस काम के लिए 1.50 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत और 365 दिनों की अवधि का टेंडर जारी किया था। इसमें तीन कंपनियों ने बोली लगाई। उनकी दरों में बड़ा अंतर था।

        डिजिटल सर्विलॉन्स : ₹440 प्रति मीटर
        फॉर्म डील: ₹400 प्रति मीटर
        पेरमा-लिनियर इंडस्ट्रीज( इंडिया) प्रा. लिमिटेड: ₹40 प्रति मीटर

    सबसे कम बोली (L1) के आधार पर चेन्नई की पेरमा-लिनियर इंडस्ट्रीज को एम्पैनल किया गया है। कंपनी 20 अप्रैल 2022 को रजिस्टर्ड हुई थी और इसके डायरेक्टर गणेशन और रेवती हैं। अब नगरीय निकाय अपनी जरूरत के अनुसार एस्टीमेट तैयार कर कंपनी को वर्क ऑर्डर जारी करेंगे।

    15 से अधिक राज्यों में इस्तेमाल हो रही है यह तकनीक

    मध्य प्रदेश इस तकनीक का इस्तेमाल पहली बार करने जा रहा है। नीति आयोग के फ्रंटियर टेक नेटवर्क की अगस्त 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और दिल्ली सहित 15 से अधिक राज्यों में रोबोटिक पाइपलाइन निरीक्षण का इस्तेमाल हो रहा है।

    इन राज्यों में चेन्नई की Solinas के 'Endobots' हाई-रिज़ॉल्यूशन कैमरों और सेंसर की मदद से पाइपलाइनों की GIS मैपिंग और लीकेज की जांच कर रहे हैं।

    भागीरथपुरा मामले में अब तक क्या हुआ
    इंदौर के भागीरथपुरा में गंदे पानी की शिकायतें अक्टूबर नवंबर 2025 से ही आने लगी थीं। इसके बावजूद, उस समय ठोस कार्रवाई नहीं हुई थी। 24 दिसंबर को उल्टी दस्त के मामले बढ़े और मरीज अस्पताल पहुंचने लगे। 27 और 28 दिसंबर को बीमारियां तेजी से बढ़ीं।

    स्वास्थ्य टीमों ने इलाके में सर्वे शुरू किया। 30 दिसंबर को 5 मौतों और 1000 से ज्यादा लोगों के बीमार होने की पुष्टि हुई। इसी दौरान पता चला कि चिह्नित लीकेज पाइपलाइन बदलने में पहले ही देरी हो चुकी थी।

    31 दिसंबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव खुद भागीरथपुरा पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। 3 जनवरी 2026 को निगम आयुक्त को हटा दिया गया। एडिशनल कमिश्नर और एक ईई (Executive Engineer) को सस्पेंड किया गया।

    17 जनवरी को कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी भागीरथपुरा पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर हालचाल जाना। 25 अगस्त 2026 को हाईकोर्ट में 36 मौतों की जांच पर सुनवाई हुई। इस दौरान 600 से ज्यादा पेज की जांच रिपोर्ट भी पेश की गई।

    प्रदेश में सामने आए हजारों डेंजर क्रॉसिंग पॉइंट
    सरकार ने GIS आधारित मैपिंग के जरिए पेयजल और सीवर नेटवर्क के बीच संभावित जोखिम वाले स्थानों की पहचान की है। अब इन जगहों पर केवल कागजी या सतही जांच के बजाय पाइपलाइन के अंदर की वास्तविक स्थिति जानने के लिए रोबोटिक निरीक्षण कराया जाएगा।

    इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि पाइपलाइन के भीतर कहीं लीकेज, टूट-फूट, अवैध कनेक्शन या अन्य संरचनात्मक समस्या तो नहीं है।

    इंदौर और भोपाल जैसे बड़े शहरों में इस तरह की जांच इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि पुराने और नए पाइपलाइन नेटवर्क कई स्थानों पर एक-दूसरे के आसपास या क्रॉसिंग पर मौजूद हैं।

    बिना सड़क खोदे होगी पाइपलाइन की जांच
    रोबोटिक निरीक्षण की सबसे बड़ी खासियत यह है कि पाइपलाइन की जांच के लिए हर जगह सड़क खोदने की जरूरत नहीं होगी।

    रोबोट को मौजूदा मैनहोल, एयर रिलीज वाल्व या उपलब्ध एक्सेस पॉइंट के जरिए पाइपलाइन के अंदर भेजा जा सकता है। इसके बाद कैमरा और सेंसर पाइपलाइन की अंदरूनी स्थिति का रिकॉर्ड तैयार करेंगे।

    इस तकनीक से किसी पाइपलाइन को खोलने या लंबे हिस्से में खुदाई करने से पहले यह पता लगाया जा सकेगा कि वास्तविक समस्या कहां मौजूद है।

    CCTV कैमरा और सेंसर से होगी निगरानी
    रोबोटिक सिस्टम में हाई-रिजॉल्यूशन कैमरे और सेंसर लगाए जाते हैं। रोबोट पाइपलाइन के अंदर आगे बढ़ते हुए लगातार वीडियो रिकॉर्ड करता है।

    इस रिकॉर्डिंग से विशेषज्ञ पाइपलाइन की दीवारों में मौजूद दरार, छेद, टूट-फूट, लीकेज और अन्य दोषों की पहचान कर सकते हैं।

    NITI Aayog के Frontier Tech Network के मुताबिक, चेन्नई की Solinas जैसी कंपनियों के Endobot सिस्टम हाई-रिजॉल्यूशन कैमरों, सेंसर और GIS तकनीक की मदद से भूमिगत पाइपलाइनों की जांच और डिजिटाइजेशन करते हैं। NITI Aayog के अनुसार ऐसे रोबोट पाइपलाइन के दोषों की पहचान करने के साथ उनकी स्थिति का आकलन भी कर सकते हैं।

    ₹400 और ₹440 की बोली के मुकाबले ₹40 प्रति मीटर
    रोबोटिक पाइपलाइन निरीक्षण के लिए नगरीय प्रशासन विभाग ने ₹1.50 करोड़ की अनुमानित लागत और 365 दिनों की अवधि वाला टेंडर जारी किया था।

    इसमें तीन कंपनियों ने बोली लगाई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार दरों में काफी अंतर था:

    डिजिटल सर्विलॉन्स: ₹440 प्रति मीटर
    फॉर्म डील: ₹400 प्रति मीटर

    पेरमा-लिनियर इंडस्ट्रीज (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड: ₹40 प्रति मीटर

    सबसे कम बोली यानी L1 के आधार पर पेरमा-लिनियर इंडस्ट्रीज को एम्पैनल किया गया। अब संबंधित नगरीय निकाय अपनी जरूरत के अनुसार एस्टीमेट तैयार करेंगे और उसके आधार पर वर्क ऑर्डर जारी किए जाएंगे।

    70 से 900 MM तक की पाइपलाइनों की होगी जांच
    इस योजना के तहत 70 से 900 मिलीमीटर व्यास वाली पानी और सीवर पाइपलाइनों का निरीक्षण किया जाएगा।

    इससे छोटे व्यास की वितरण लाइनों से लेकर अपेक्षाकृत बड़ी पाइपलाइनों तक अंदरूनी स्थिति की जांच संभव होगी।

    खासकर उन जगहों पर प्राथमिकता दी जा सकती है जहां GIS मैपिंग में पेयजल और सीवर नेटवर्क के बीच संभावित जोखिम वाली क्रॉसिंग सामने आई हैं।

    रोबोटिक जांच से क्या होगा फायदा?
    पाइपलाइन की सामान्य जांच में कई जगह सड़क की खुदाई करनी पड़ती है। इससे ट्रैफिक, कारोबार और स्थानीय लोगों को परेशानी होती है। रोबोटिक तकनीक में कम खुदाई के साथ पाइपलाइन के अंदर की स्थिति का पता लगाने की कोशिश की जाती है।

    NITI Aayog के अनुसार Solinas के Endobot सिस्टम का इस्तेमाल पाइपलाइन की खराबियों जैसे लीकेज और क्रैक की पहचान के लिए किया जाता है। संस्था के मुताबिक ऐसी तकनीक से अनावश्यक खुदाई कम करने और पाइपलाइन की स्थिति के आधार पर मरम्मत या बदलाव की प्राथमिकता तय करने में मदद मिल सकती है।

    इसका एक फायदा यह भी है कि पाइपलाइन के अंदर निरीक्षण के दौरान कर्मचारियों को जोखिम वाले हिस्सों में सीधे भेजने की जरूरत कम हो सकती है।

    15 से ज्यादा राज्यों में इस्तेमाल हो रही रोबोटिक तकनीक
    NITI Aayog के Frontier Tech Network के अनुसार पाइपलाइन निरीक्षण में रोबोटिक तकनीक का इस्तेमाल देश के 15 से अधिक राज्यों में किया जा रहा है। इनमें तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और दिल्ली-NCR प्रमुख क्षेत्र हैं।

    NITI Aayog के मुताबिक Solinas के रोबोटिक सिस्टम का इस्तेमाल 15 से अधिक राज्यों और 35 से ज्यादा शहरों में किया जा चुका है। इन सिस्टम का इस्तेमाल भूमिगत पानी, सीवर और ड्रेनेज नेटवर्क की जांच एवं डिजिटाइजेशन के लिए किया जाता है।

    MP में पहली बार बड़े स्तर पर इस्तेमाल
    मध्यप्रदेश में अब इस तकनीक को शहरी जल और सीवर नेटवर्क की व्यवस्थित जांच के लिए इस्तेमाल करने की तैयारी है। भागीरथपुरा जैसी घटना के बाद सरकार का जोर केवल खराब पाइपलाइन बदलने पर नहीं, बल्कि जोखिम वाले स्थानों की पहले पहचान करने पर भी है।

    हालांकि रोबोटिक निरीक्षण अपने आप में समाधान नहीं है। जांच के बाद सामने आने वाली लीकेज, टूट-फूट या खतरनाक क्रॉसिंग को समय पर ठीक करना भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा। यही प्रक्रिया तय करेगी कि तकनीक से मिले डेटा का इस्तेमाल शहरों की पेयजल सुरक्षा को कितना बेहतर बनाया जा सकता है।

     

  • चीनी बग्स का खतरा! ड्रोन और मिलिट्री सिस्टम होंगे और सुरक्षित, सेना बनाएगी 6 साइबर लैब

    चीनी बग्स का खतरा! ड्रोन और मिलिट्री सिस्टम होंगे और सुरक्षित, सेना बनाएगी 6 साइबर लैब

     नई दिल्ली

    भारतीय सेना विदेशी मूल के साइबर अटैक से जुड़े सुरक्षा जोखिमों को लेकर चिंतित है. इसलिए वह 6 आश्वस्त (AASHVAST) प्रयोगशालाएं स्थापित करने की योजना बना रही है. इन लैब्स का मकसद ड्रोन और अन्य सैन्य इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम में छिपी कमजोरियों का पता लगाना है. इनमें खराब कोड, छिपे हुए एक्सेस मैकेनिज्म और फर्मवेयर स्तर की खामियों की जांच की जाएगी, जो सैन्य अभियानों को बाधित कर सकती हैं। 

    दिल्ली में लैब पहले ही शुरू हो चुकी है. देशभर में कम से कम पांच और लैब्स लगाने की योजना है. शुरुआत में इनका फोकस ड्रोन पर रहेगा. बाद में सेना द्वारा खरीदे जाने वाले सीसीटीवी कैमरों की भी जांच की जाएगी. यह पहल ऐसे समय में आई है जब सैन्य उपकरणों में चीनी मूल के पुर्जों को लेकर चिंता बढ़ रही है. खासकर पूर्वी सीमाओं पर तैनात ड्रोनों में चीनी साइबर अटैक की मौजूदगी को लेकर सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं।  

    भारत ने पहले भी घरेलू सैन्य ड्रोन निर्माताओं को चीनी मूल के पुर्जों का इस्तेमाल सीमित करने के निर्देश दिए थे. 2025 में आर्मी डिजाइन ब्यूरो ने रक्षा मंत्रालय को एक फ्रेमवर्क सौंपा था, जिसका उद्देश्य यूएवी से चीनी मूल के साइबर अटैक को पूरी तरह हटाना था. आश्वस्त लैब्स इस प्रक्रिया में एक और परत जोड़ेंगी. वे सिर्फ यह नहीं देखेंगी कि कोई हिस्सा कहां से खरीदा गया, बल्कि उसकी असली उत्पत्ति और उसमें क्या छिपा हो सकता है, इसकी भी जांच करेंगी। 

    फर्मवेयर स्तर की छिपी खतरों की जांच
    आश्वस्त सिस्टम को क्विकपे प्राइवेट लिमिटेड ने इलेक्ट्रॉनिक्स एंड मैकेनिकल इंजीनियर्स महानिदेशालय के लिए विकसित किया है. यह सिर्फ फिजिकल जांच पर निर्भर नहीं रहेगा, बल्कि फर्मवेयर और एम्बेडेड सिस्टम का एनालिसिस करेगा. यह सिस्टम करीब 14 तरह की कमजोरियों का पता लगा सकता है. इनमें छिपे हुए कोड और कमांड शामिल हैं, जो ड्रोन के कामकाज में बाधा डाल सकते हैं। 

    लोकेशन या समय आधारित खराबी भी पता चलेगी, जो किसी खास इलाके या समय पर मिशन को खराब कर सकती है. एम्बेडेड पासवर्ड, एन्क्रिप्शन कुंजी और रिमोट एक्सेस टूल भी स्कैन किए जाएंगे. कुछ खराबियां ऐसी हो सकती हैं जो यूएवी को निर्धारित गंतव्य तक पहुंचने या मिशन पूरा करने से रोक दें। 

    अप्रैल 2026 में सेना ने फर्मवेयर और एम्बेडेड सिस्टम वैलिडेशन के लिए कस्टमाइज्ड लाइसेंस्ड सॉफ्टवेयर खरीदने का आरएफपी जारी किया था. इससे साफ है कि सेना इस दिशा में व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ रही है. आधुनिक युद्ध में ड्रोन और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम की भूमिका बढ़ने के साथ साइबर सुरक्षा और भी महत्वपूर्ण हो गई है. अगर किसी सिस्टम में छिपा बैकडोर या दुर्भावनापूर्ण कोड हो, तो दुश्मन उसे दूर से नियंत्रित या बाधित कर सकता है. इसलिए ऐसी जांच जरूरी है। 

    सीसीटीवी कैमरे भी जांच के दायरे में
    स्क्रीनिंग कार्यक्रम आगे चलकर भविष्य में खरीदे जाने वाले सीसीटीवी कैमरों तक भी फैलेगा. इन जांचों में संभावित रूप से कमजोर प्रॉप्राइटरी प्रोटोकॉल और एम्बेडेड तकनीकों को देखा जाएगा, खासकर विदेशी मूल की प्रणालियों से जुड़ी तकनीकों को. व्यापक उद्देश्य साइबर लचीलापन बढ़ाना, बाहरी हस्तक्षेप का खतरा कम करना। 

    सैन्य प्लेटफॉर्म को विवादित परिचालन वातावरण में भरोसेमंद बनाए रखना है. यह पहल आत्मनिर्भर भारत विजन के तहत रक्षा तकनीक में अधिक आत्मनिर्भरता की दिशा में भी योगदान देगी. सेना की यह कोशिश दिखाती है कि वह सिर्फ हार्डवेयर खरीदने तक सीमित नहीं रहना चाहती. वह सॉफ्टवेयर और फर्मवेयर स्तर पर भी पूरी तरह सुरक्षित सिस्टम चाहती है। 

    ड्रोन और सीसीटीवी जैसे उपकरणों में छिपी कमजोरियां युद्ध के मैदान में गंभीर परिणाम ला सकती हैं. आश्वस्त लैब्स इन जोखिमों को कम करने में मदद करेंगी. इससे भारतीय सेना की तकनीकी सुरक्षा मजबूत होगी और भविष्य के संघर्षों में बाहरी हस्तक्षेप का खतरा घटेगा. कुल मिलाकर यह कदम आधुनिक युद्ध की बदलती जरूरतों के अनुरूप है, जहां साइबर सुरक्षा उतनी ही महत्वपूर्ण हो गई है जितनी पारंपरिक सैन्य क्षमता। 

  • छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल का नया रिकॉर्ड, 7,650 संपत्तियों की बिक्री

    छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल का नया रिकॉर्ड, 7,650 संपत्तियों की बिक्री

    विशेष लेख

    संपत्ति विक्रय में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल ने रचा नया कीर्तिमान

    2 वर्ष 8 माह में 7,650 संपत्तियों का विक्रय, वार्षिक औसत में 84 प्रतिशत की बढ़ोतरी

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व एवं वित्त एवं आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में पारदर्शी, सरल और हितग्राही-केंद्रित व्यवस्था को मिली नई गति

    1,609.18 करोड़ रुपये की संपत्तियों का विक्रय, ओटीएस-2 से 1,584 संपत्तियों का हुआ निराकरण

    रायपुर,
     छत्तीसगढ़ में आवासीय सुविधाओं के विस्तार और अधोसंरचना विकास को नई गति देने की दिशा में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल ने संपत्ति विक्रय के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा विकास कार्यों में गति, पारदर्शिता और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में मंडल द्वारा संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन, विक्रय प्रक्रिया को सरल बनाने और हितग्राहियों की सुविधा को प्राथमिकता देने के प्रयासों का सकारात्मक परिणाम सामने आया है।

    मंडल के उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2024 से अगस्त 2026 तक मात्र 2 वर्ष 8 माह की अवधि में 7,650 संपत्तियों का विक्रय किया गया है। इस अवधि में संपत्ति विक्रय का वार्षिक औसत लगभग 2,869 संपत्ति रहा है। यह आंकड़ा पिछले पांच वर्षों के प्रदर्शन की तुलना में मंडल की विक्रय क्षमता में आई उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है।

    वर्ष 2019 से 2023 तक पांच वर्षों की अवधि में मंडल द्वारा कुल 7,793 संपत्तियों का विक्रय किया गया था। इस दौरान वार्षिक औसत लगभग 1,559 संपत्ति रहा। इसके मुकाबले वर्ष 2024 से अगस्त 2026 की वर्तमान अवधि में वार्षिक औसत बढ़कर लगभग 2,869 संपत्ति हो गया है। अर्थात पिछले पांच वर्षों की तुलना में वर्तमान अवधि में मंडल के वार्षिक औसत संपत्ति विक्रय में लगभग 84 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

    केवल संख्या नहीं, विक्रय मूल्य में भी बड़ी छलांग
    मंडल की उपलब्धि केवल संपत्तियों की संख्या तक सीमित नहीं है, बल्कि संपत्ति विक्रय से प्राप्त राशि में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2024 से अगस्त 2026 तक मंडल द्वारा कुल 1,609.18 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों का विक्रय किया गया है। इस अवधि में संपत्ति विक्रय का वार्षिक औसत लगभग 603 करोड़ रुपये रहा। वहीं वर्ष 2019 से 2023 तक पांच वर्षों में कुल 1,362.21 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों का विक्रय हुआ था। इस अवधि में वार्षिक औसत विक्रय मूल्य 272.44 करोड़ रुपये रहा। वर्तमान अवधि में यह औसत बढ़कर लगभग 603 करोड़ रुपये हो गया है। इस तरह मंडल के वार्षिक औसत संपत्ति विक्रय मूल्य में पिछले पांच वर्षों की तुलना में दो गुने से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है।

    ये आंकड़े बताते हैं कि मंडल द्वारा उपलब्ध संपत्तियों के प्रबंधन और विक्रय को लेकर अपनाई गई कार्ययोजना प्रभावी रही है। संपत्तियों के बेहतर उपयोग, मांग के अनुरूप विक्रय व्यवस्था, हितग्राहियों के लिए प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने तथा लंबित मामलों के निराकरण पर ध्यान देने से विक्रय गतिविधियों में तेजी आई है।

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में विकास और सुशासन पर जोर
    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार विकास योजनाओं के क्रियान्वयन के साथ-साथ शासन की प्रक्रियाओं को अधिक सरल, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। नागरिकों को समय पर सुविधाएं उपलब्ध हों और सरकारी संस्थाओं की संपत्तियों का बेहतर उपयोग हो, इस दिशा में भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। गृह निर्माण मंडल की संपत्ति विक्रय में सामने आई यह वृद्धि इसी व्यापक दृष्टिकोण से जुड़ी हुई है। मंडल की संपत्तियों के प्रभावी उपयोग से एक ओर उपलब्ध संसाधनों का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित हो रहा है, वहीं दूसरी ओर नागरिकों को आवासीय एवं व्यावसायिक संपत्तियां प्राप्त करने के अवसर मिल रहे हैं।

    वित्त एवं आवास मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में परिणामोन्मुख कार्यप्रणाली
    वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी द्वारा विभागीय संस्थाओं में कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और परिणाम आधारित बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। गृह निर्माण मंडल की संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन और विक्रय प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए भी इसी दृष्टिकोण के अनुरूप कार्य किया जा रहा है। मंडल द्वारा उपलब्ध संपत्तियों के विक्रय में तेजी के साथ-साथ बकाया मामलों के निराकरण और हितग्राहियों को राहत देने के लिए विशेष योजनाओं को भी प्रभावी रूप से लागू किया गया है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण वन टाइम सेटलमेंट-2 (ओटीएस-2) योजना है।

    ओटीएस-2 योजना से 1,584 संपत्तियों का निराकरण
    मंडल द्वारा बकाया राशि के मामलों के समाधान और संपत्तियों के त्वरित निराकरण के उद्देश्य से लागू की गई वन टाइम सेटलमेंट-2 छूट योजना को भी व्यापक सफलता मिली है। योजना के अंतर्गत 1 मार्च 2025 से वर्तमान दिनांक तक 1,584 संपत्तियों का विक्रय एवं निराकरण किया गया है। इन संपत्तियों का कुल मूल्य लगभग 238.67 करोड़ रुपये है।

    ओटीएस-2 योजना के माध्यम से लंबे समय से लंबित बकाया मामलों के निराकरण का रास्ता आसान हुआ है। इससे हितग्राहियों को अपनी देनदारियों के समाधान का अवसर मिला, वहीं मंडल की संपत्तियों के प्रभावी उपयोग और वित्तीय प्रबंधन को भी मजबूती मिली है।

    हितग्राही-केंद्रित व्यवस्था बनी बदलाव का आधार
    गृह निर्माण मंडल की संपत्ति विक्रय में हुई वृद्धि के पीछे केवल अधिक संपत्तियों को बाजार में उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि हितग्राहियों की सुविधा को केंद्र में रखकर प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने का प्रयास भी महत्वपूर्ण है। आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियों के विक्रय में पारदर्शिता, सरलता और सुविधा पर जोर दिए जाने से नागरिकों के लिए संपत्ति खरीदने की प्रक्रिया अधिक सहज हुई है।

    मंडल द्वारा संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन के साथ उनकी मांग, स्थान और उपयोगिता को ध्यान में रखते हुए विक्रय प्रक्रिया को गति देने का प्रयास किया जा रहा है। इससे मंडल की उपलब्ध संपत्तियों का उपयोग बढ़ा है और नागरिकों को अपनी आवश्यकता के अनुरूप संपत्ति प्राप्त करने के अवसर भी मिले हैं।

    आंकड़े बता रहे बदलाव की तस्वीर
    यदि पिछले पांच वर्षों और वर्तमान अवधि के प्रदर्शन की तुलना की जाए तो मंडल की उपलब्धि स्पष्ट रूप से सामने आती है। वर्ष 2019 से 2023 के दौरान जहां पांच वर्षों में 7,793 संपत्तियों का विक्रय हुआ, वहीं वर्ष 2024 से अगस्त 2026 तक केवल 32 माह में 7,650 संपत्तियां विक्रय की जा चुकी हैं। इसी तरह संपत्ति विक्रय से प्राप्त राशि भी पांच वर्षों के 1,362.21 करोड़ रुपये की तुलना में वर्तमान 32 माह में 1,609.18 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। इस तरह कम अवधि में लगभग पिछले पांच वर्षों के बराबर संपत्तियों का विक्रय और उससे भी अधिक मूल्य की संपत्तियों का विक्रय मंडल की कार्यप्रणाली में आए बदलाव को रेखांकित करता है।

    आवास और अधोसंरचना विकास के लिए मजबूत आधार
    गृह निर्माण मंडल का मूल उद्देश्य प्रदेश के नागरिकों को बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ आवासीय एवं अधोसंरचनात्मक विकास को बढ़ावा देना है। संपत्ति विक्रय में आई तेजी से मंडल के संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित होने के साथ भविष्य की आवासीय एवं विकास परियोजनाओं के लिए भी बेहतर आधार तैयार हो रहा है।

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की विकासोन्मुखी नीतियों और वित्त एवं आवास मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में मंडल द्वारा “संपत्ति प्रबंधन से विकास की गति” की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। संपत्तियों का बेहतर उपयोग, लंबित मामलों का निराकरण, हितग्राहियों को सुविधाजनक सेवाएं और पारदर्शी विक्रय व्यवस्थाकृइन सभी प्रयासों का सम्मिलित प्रभाव मंडल के प्रदर्शन में दिखाई दे रहा है।

    गृह निर्माण मंडल की यह उपलब्धि इस बात का संकेत है कि जब सरकारी संपत्तियों का बेहतर प्रबंधन, सरल प्रक्रिया और हितग्राही-केंद्रित दृष्टिकोण एक साथ आगे बढ़ते हैं, तो उसका सीधा लाभ नागरिकों और विकास गतिविधियों को मिलता है। आने वाले समय में भी मंडल द्वारा पारदर्शी एवं सुविधाजनक व्यवस्था को और मजबूत करते हुए संपत्ति विक्रय को गति देने तथा प्रदेश में आवास एवं अधोसंरचना विकास को नई ऊंचाई देने के प्रयास जारी रहेंगे।

    • सुनील त्रिपाठी
     सहायक संचालक, जनसंपर्क

     

  • मंगलवार को फिर 2500 युवाओं को मिलेंगे नियुक्ति पत्र: सीएम योगी

    मंगलवार को फिर 2500 युवाओं को मिलेंगे नियुक्ति पत्र: सीएम योगी

    मंगलवार को फिर 2500 युवाओं को मिलेंगे नियुक्ति पत्र: सीएम योगी

    मेरठ में युवा संवाद कार्यक्रम में शामिल हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

    'राष्ट्र प्रथम' होना चाहिए हर युवा का भावः मुख्यमंत्री

    सीएम की अपीलः पिछली सरकारों से तुलना कीजिए और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ाइए

    हमने प्रशासन से कहा कि बुलडोजर का स्टेयरिंग ऐसे घुमाओ कि वाहन कटने की घटनाएं बंद हों, अब मेरठ में चोरी के वाहन कटने बंद हो गए- सीएम

    पुलिस वालों से कहा कि मॉकड्रिल का ही प्रदर्शन ही कर दो, ताकि दंगाई भूल न जाएं कि कार्रवाई कैसी होती हैः सीएम योगी

    हर कार्य को नकारात्मक भाव से देखने वाला युवा नहीं हो सकताः मुख्यमंत्री

    सीएम का तंज, मुझसे वे लोग प्रश्न पूछ रहे हैं, जिनके शासन में एक भी भर्ती साफ-सुथरी नहीं रही

    मेरठ, 
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मेरठ की क्रांतिधरा पर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन का 'युवा संवाद' कार्यक्रम में स्वागत किया। उन्होंने कहा कि हमने सत्ता संभालते ही युवाओं के लिए सरकारी भर्तियों को लेकर पारदर्शी व्यवस्था बनाई। अब तक 9.50 लाख नौजवानों को सरकारी नौकरी दी है। परसों से फिर मिशन रोजगार शुरू हुआ है। मंगलवार सुबह फिर ढाई हजार युवाओं को नियुक्ति पत्र मिलेंगे। छह महीने में एक लाख युवाओं को नौकरी देंगे। यह क्रम अनवरत चलेगा।

    सीएम योगी ने तंज कसा कि मुझसे प्रश्न वो लोग पूछ रहे हैं, जिनके शासन में एक भी भर्ती साफ-सुथरी नहीं थी। विज्ञापन निकलते ही महाभारत के रिश्ते (चाचा-भतीजे, भाई, मामा) वसूली करने निकल पड़ते थे। थाने-तहसीलें बिक जाती थीं। सपा शासन के समय जिसने परीक्षा भी नहीं दी, ऐसे लोगों को भी नियुक्ति पत्र दे दिया गया। यूपी पब्लिक सर्विस कमीशन की एक परीक्षा ऐसी हुई, उसमें 86 में से 56 एक ही जाति के थे। उसका टॉपर वह हुआ, जो हाईस्कूल-इंटर, स्नातक में तृतीय श्रेणी से उत्तीर्ण हुआ। बाकी की शिक्षा भगवान भरोसे हुई। अयोग्य व्यक्ति को चेयरमैन बना दिया गया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि हर युवा का भाव राष्ट्र प्रथम होना चाहिए। डबल इंजन सरकार युवा ऊर्जा को प्लेटफॉर्म दे रही है। हर क्षेत्र में युवा शक्ति समेत सभी वर्गों के लिए कार्य हुए हैं। उन्होंने आह्वान किया कि पिछली सरकारों से तुलना कीजिए और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ाइए। स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि यह महत्वपूर्ण नहीं कि आपकी शिक्षा कितना धनार्जन कराती है, बल्कि यह महत्वपूर्ण है कि शिक्षा राष्ट्र के प्रति कितना समर्पण का भाव पैदा करती है। सीएम ने छात्रों, युवाओं से कहा कि हर क्षेत्र में आपके लिए संभावनाएं हैं। उसके अनुरूप करियर को बढ़ाइए। 

    सीएम ने महाभारत, हस्तिनापुर, आजादी के दौर में मेरठ का जिक्र किया, कहा कि मेरठ ने कई दौर को अपने आंखों से देखा है। जब भारत की आजादी का आह्वान हुआ तो उप्र की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। मंगल पांडेय ने बैरकपुर में जो चिंगारी जलाई, मेरठ में कोतवाल धन सिंह गुर्जर के नेतृत्व में उस चिंगारी ने दिल्ली के सिंहासन को हिला दिया था। झांसी में रानी लक्ष्मीबाई, बिठूर में नाना साहेब, तात्या टोपे ने इस आंदोलन को बढ़ाया। उत्तर प्रदेश का कोई भी ऐसा कस्बा और जनपद नहीं था, जहां भारत की आजादी के लिए ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ गूंज न उठी हो। हमारी एकता ने ब्रिटिश ताकत की चूलें हिला दी थीं।

    सीएम ने कहा कि आजाद भारत में मेरठ ने वह दौर भी देखा है, जब दंगे यहां की नियति बन गए थे। सीएम ने प्रदेश भर से लूटे व चोरी किए गए वाहनों को स्क्रैप किए जाने का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 2017 में हमारे सामने वाहन चोरी के मामले आए तो हमने कहा कि वाहन कहां जा रहे हैं, पता चला कि मेरठ मे कट रहे हैं। हमने प्रशासन से कहा कि बुलडोजर का स्टेयरिंग ऐसे घुमाओ कि यह कारोबार बंद हो, फिर यहां चोरी के वाहन कटने बंद हुए। मेरठ अब 12 लेन के एक्सप्रेसवे, नमो भारत रैपिड रेल के साथ जुड़ गया। 

    सीएम ने कहा कि यूपी में साढ़े 9 साल में दंगा नहीं हुआ। मैंने पुलिस वालों से कहा कि मॉकड्रिल का प्रदर्शन ही कर दो ताकि दंगाई भूल न जाएं कि कार्रवाई कैसी होती है। अब डबल इंजन की सरकार है, इसलिए माता-पिता चिंतित नहीं होते हैं। 2017 के पहले हर मां-पिता को चिंता होती थी कि पश्चिमी उप्र में बच्चों को कैसे पढ़ाएं। 2017 के चुनावी अभियान का जिक्र करते हुए सीएम ने कहा कि मेरा पहला कार्यक्रम बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, गाजियाबाद में था। पहली सभा में बोलने खड़ा हुआ तो कुछ लोग मेरे पास आए और बोले कि कुछ ऐसा-वैसा मत कह दीजिएगा। हमने कहा कि हमारी सरकार बनेगी तो दंगे बंद होंगे, बेटी सुरक्षित होगी। अच्छी शिक्षा मिलेगी। लोग देखते थे कि कोई देख तो नहीं रहा है, तब ताली बजाते थे। मैंने कहा कि कम से कम ताली तो खुलकर बजा दो। उस समय ताली बजाने में भी लोगों को डर लगता था। 

    सीएम ने कहा कि 2017 के पहले यूपी को बीमारू कहा जाता था। यहां कोई आना नहीं चाहता था। यहां से पलायन होता था। अब यहां पलायन, दंगा, कर्फ्यू, चोरी के वाहन की बिक्री बंद हो गई। अब हर व्यक्ति पसंद के अनुरूप संस्थान व रोजगार का चयन कर सकता है। हमने मेरठ में प्रदेश का पहला खेल विश्वविद्यालय बनाया। ओडीओपी में खेल उत्पाद की ब्रांडिंग करके उसे पहचान दी। अब किसान खुशहाल है, उसे चिंता नहीं है कि बेटी की शादी के लिए गन्ना मूल्य का भुगतान होगा कि नहीं होगा। सरकार अब गन्ना मूल्य भुगतान की गारंटी दे रही है। सरकार ने 2017 से 2026 के बीच 3.30 लाख करोड़ रुपये गन्ना मूल्य का भुगतान किया। 

    सीएम ने कहा कि अब बिचौलिए समाप्त हो गए। अब 100 में से 15 पैसा नीचे नहीं जाता, बल्कि मोदी जी ने जनधन, मोबाइल व डिजिटल ट्रांजेक्शन के माध्यम से ऐसी व्यवस्था कर दी है कि पूरे 100 रुपये लाभार्थी के खाते में जाते हैं। एक भी पैसा इधर-उधर नहीं हो सकता। पीएम मोदी जी के नेतृत्व में भाजपा सरकार ने तकनीक की ताकत का अहसास कराया है। 

    सीएम ने कहा कि जब हम लोग सांसद थे तो कनेक्शन के 10-10 कूपन मिलते थे। कुछ लोग कूपन बेचने के लिए बदनाम हो गए थे। कांग्रेस की बेचने की प्रवृत्ति थी। उन लोगों की मानसिकता गलत थी तो उन्होंने चोरी करना सिखाया, लेकिन अटल जी प्रधानमंत्री बने तो टेलीकॉम क्षेत्र में रिफॉर्म किया। भारत इस क्षेत्र में बढ़ चुका है। स्मार्टफोन का श्रेय अटल जी व डिजिटल क्रांति का श्रेय मोदी जी को जाता है। दोनों के कार्य करने की नीयत और निर्णय लेने की क्षमता ही उनकी सबसे बड़ी पहचान बनी। 

    सीएम ने परोक्ष रूप से राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि हर कार्य को नकारात्मक भाव से देखने वाला युवा नहीं हो सकता। युवा का भाव सकारात्मक होता है। उसका दृष्टिकोण स्पष्ट होना चाहिए। भारत की युवा शक्ति ने पलायन नहीं किया, चुनौती को समस्या नहीं माना बल्कि समाधान का रास्ता निकाला। सीएम ने श्रीराम, श्रीकृष्ण, बुद्ध, स्वामी विवेकानंद, सुभाष चंद्र बोस, महाराणा प्रताप, गुरु गोविंद सिंह का भी जिक्र किया। राक्षसों को नेस्तनाबूद करने के राम के संकल्प को बताया और कहा कि श्रीकृष्ण ने कंस के अत्याचार से त्रस्त मथुरा को मुक्ति दिलाई। श्रीकृष्ण ने कहा कि मुरली वृंदावन में बजेगी, मथुरा में सुदर्शन से काम चलाना पड़ेगा। 

    सीएम ने कहा कि 2017 के पहले यूपी में महीनों कर्फ्यू लगा रहता था। दंगाइयों के खिलाफ कार्रवाई की बजाय उन्हें मुख्यमंत्री आवास पर सम्मानित किया जाता था, लेकिन अब यूपी में ब्रह्मोस मिसाइल बन रही है, जिससे पाकिस्तान के आका भी कांप उठते हैं। यूपी के पास सर्वाधिक युवा वर्कफोर्स है। सभी ने बदलते भारत के साथ बदलते यूपी को देखा है। अब इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ ही विकास और विरासत का सम्मान है। मेरठ से 40-45 मिनट में दिल्ली की दूरी तय की जा सकती है। हमारे जनप्रतिनिधि अब गंगा एक्सप्रेसवे से साढ़े तीन घंटे में लखनऊ पहुंचते हैं। यह गति प्रगति का आधार है। 

    सीएम ने कैराना के पलायन का जिक्र कर वहां के व्यापारी का दर्द भी सुनाया। फिर कहा कि 2021 में मैं कैराना गया था। अब वहां लोग वापस आ चुके हैं। मैं खुद जाकर लोगों से मिला और उनकी समस्या सुनी। उस परिवार की बेटी ने अपना दर्द बताया। यूपी में अब कैराना, सहारनपुर से सोनभद्र, बिजनौर से बलिया तक हर जगह सुरक्षा है। पिछली सरकारों ने प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नष्ट कर दिया। हमने ओडीओपी व एमएसएमई सेक्टर को संजोया। इससे 3.25 करोड़ लोगों को इसके माध्यम से रोजगार मिला। सुरक्षा का बेहतरीन वातावरण मिला तो 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव आए। 15 लाख करोड़ की ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी हुई। हर क्षेत्र में यूपी में निवेश आए। पिछली सरकारों ने एक जिला-एक माफिया दिया। हमने एक जिला-एक मेडिकल कॉलेज दिया।

    सीएम ने युवाओं से कहा कि तकनीक से भागिए नहीं। उसके अनुरूप खुद को न ढालिए, बल्कि अपने अनुरूप उसे ढालिए। क्वांटम कंप्यूटिंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, रोबोटिक्स, एआई समेत हर फील्ड को टटोलिए, क्योंकि आपके पास संभावनाएं हैं। अच्छी पुस्तकों का अध्ययन कजिए। विरासत, मातृभूमि, पूर्वजों, राष्ट्रनायकों, तीर्थों, बड़ों-गुरुजनों के प्रति श्रद्धा का भाव रखें, यह आपको ज्ञानवान और चुनौतियों से जूझने का जज्बा देगा। सपनों को साकार करने की तैयारी कीजिए, डबल इंजन सरकार आपके लिए पलक पांवड़े बिछाकर इंतजार कर रही है। 

    इस अवसर पर केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री एवं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, सुभारती विश्वविद्यालय के संस्थापक डॉ. अतुल कृष्ण आदि मौजूद रहे।

  • नमो सेवा-अनकही कहानियां : छात्रों ने प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के 25 वर्षों की सेवा यात्रा का किया मंचन

    नमो सेवा-अनकही कहानियां : छात्रों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 25 वर्षों की सेवा यात्रा का किया मंचन

    रायपुर.

    सेवा संकल्प अभियान के तहत संत पूज्य  प्रियदर्शी राम जी ऑडिटोरियम पंजरी प्लांट रायगढ़ में ‘नमो सेवा-अनकही कहानियां’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। डिग्री कॉलेज रायगढ़ के छात्र-छात्राओं ने प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्षों की यात्रा और देश के प्रति उनके योगदान पर आधारित जीवंत नाट्य प्रस्तुति दी। उप मुख्यमंत्री  अरुण साव ने दर्शक दीर्घा में बैठकर पूरी प्रस्तुति देखी और विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया।
               
    नाट्य मंचन में सेवा, समर्पण और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश दिया गया। विद्यार्थियों ने अभिनय के माध्यम से विभिन्न परिस्थितियों और चुनौतियों के बीच लिए गए निर्णयों तथा देश के विकास से जुड़े विषयों को मंच पर प्रस्तुत किया। प्रस्तुति की अतिथियों और दर्शकों ने सराहना की।

    17 सितम्बर से 17 अक्टूबर तक सेवा संकल्प अभियान

    उप मुख्यमंत्री  अरुण साव ने कहा कि सेवा संकल्प अभियान 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर तक आयोजित किया जा रहा है। अभियान के माध्यम से सेवा और जनभागीदारी से जुड़े विभिन्न कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि अभियान में 12 संकल्प और 25 सेवा कार्यों को शामिल किया गया है। इन गतिविधियों का उद्देश्य समाज के विभिन्न वर्गों तक जनकल्याणकारी योजनाओं और सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के साथ लोगों को सेवा कार्यों से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में प्रत्येक नागरिक की भागीदारी महत्वपूर्ण है। उन्होंने विद्यार्थियों की प्रस्तुति की सराहना करते हुए कहा कि युवाओं की ऊर्जा और रचनात्मकता समाज में सेवा और जिम्मेदारी की भावना को मजबूत कर सकती है।

    25 वर्षों की यात्रा को मंच पर उतारा

    उप मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्यार्थियों ने प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्षों की यात्रा को नाट्य रूप में प्रस्तुत किया है। इस दौरान विभिन्न परिस्थितियों और चुनौतियों के बीच देशहित से जुड़े निर्णयों और विकास के प्रयासों को मंच पर दिखाया गया। कोरोना महामारी के कठिन दौर सहित विभिन्न परिस्थितियों का भी प्रस्तुति में उल्लेख किया गया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है और सेवा संकल्प अभियान जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। कार्यक्रम में डिग्री कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने ‘सेवा ही संकल्प’ विषय को केंद्र में रखते हुए प्रस्तुति दी। मंचन में सेवा भावना, सामाजिक दायित्व और राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया। 
                
    इस अवसर पर लोकसभा सांसद  राधेश्याम राठिया, राज्यसभा सांसद  देवेन्द्र प्रताप सिंह, महापौर  जीवर्धन चौहान, जिला पंचायत अध्यक्ष मती शिखा रवींद्र गबेल, सभापति  डिग्री लाल साहू,  अरूणधर दीवान,  गुरुपाल भल्ला,  सुभाष पाण्डेय,  कांत सोमावार,  विकास केडिया,  अनुपम पाल,  जतीन साव,  अरूण कातोरे,  पवन अग्रवाल, कलेक्टर  मयंक चतुर्वेदी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक  शशिमोहन सिंह, डीएफओ रायगढ़  अरविंद पीएम, आयुक्त नगर निगम  बृजेश सिंह क्षत्रिय और जिला पंचायत सीईओ  अभिजीत बबन पठारे सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।

  • मंत्री  विश्वास सारंग ने किया 8.5 करोड़ से अधिक की लागत से पीएम ई-बस डिपो एवं चार्जिंग प्वाइंट का भूमिपूजन

    मंत्री विश्वास सारंग ने किया 8.5 करोड़ से अधिक की लागत से पीएम ई-बस डिपो एवं चार्जिंग प्वाइंट का भूमिपूजन

    भोपाल 

    सहकारिता, खेल और युवा कल्याण मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने सोमवार को नरेला विधानसभा क्षेत्र के कस्तूरबा नगर में प्रधानमंत्री ई-बस योजना के अंतर्गत प्रस्तावित नवीन इलेक्ट्रिक बस डिपो एवं चार्जिंग प्वाइंट का भूमिपूजन किया एवं इलेक्ट्रिक बस का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने क्षेत्रवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ई-बस योजना के माध्यम से शहरों में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को आधुनिक, सुविधाजनक, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। कस्तूरबा नगर में निर्मित होने वाले इस नवीन ई-बस डिपो की क्षमता 50 इलेक्ट्रिक बसों की होगी। डिपो के निर्माण में 7 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से सिविल कार्य तथा 1.60 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से इलेक्ट्रिकल कार्य किए जाएंगे। डिपो के तैयार होने के बाद क्षेत्र में इलेक्ट्रिक बसों के संचालन, रख-रखाव एवं प्रबंधन को बेहतर आधारभूत संरचना प्राप्त होगी। भूमिजन के दौरान भोपाल महापौर मती मालती राय, जिला महामंत्री  प्रदीप शेखावत, एमआईसी सदस्य  अशोक वाणी, मंडल अध्यक्ष  भूपेंद्र सिंह चौहान, पार्षद  सूर्यकांत गुप्ता, स्थानीय पार्षद  राकेश यादव, पार्षद  विमलेश ठाकुर, नगर निगम के अधिकारी-कर्मचारी, भाजपा कार्यकर्ता सहित क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।

    सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था होगी सुगम

    मंत्री  सारंग ने कहा कि नवीन इलेक्ट्रिक बस डिपो एवं इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को आधुनिक स्वरूप मिलने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक बसों के माध्यम से पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करने तथा स्वच्छ एवं हरित परिवहन व्यवस्था को प्रोत्साहित करने में सहायता मिलेगी। आगे उन्होंने कहा कि कस्तूरबा नगर में प्रस्तावित ई-बस डिपो नरेला विधानसभा क्षेत्र सहित भोपाल की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना के रूप में विकसित किया जाएगा। मंत्री  सारंग ने कहा कि डिपो में 50 इलेक्ट्रिक बसों की क्षमता के साथ आवश्यक सिविल एवं इलेक्ट्रिकल सुविधाओं का विकास किया जाएगा, जिससे भविष्य में इलेक्ट्रिक बसों के संचालन और प्रबंधन को बेहतर एवं व्यवस्थित स्वरूप प्रदान किया जा सकेगा।

    आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगी इलेक्ट्रिक बसें

    पीएम ई-बस योजना के अंतर्गत संचालित होने वाली इलेक्ट्रिक बसों में यात्रियों की सुविधा, सुरक्षा एवं सुगम परिवहन को ध्यान में रखते हुए अनेक आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। यात्रियों को डिजिटल टिकटिंग के लिए क्यूआर कोड की सुविधा उपलब्ध होगी। इसके साथ ही मोबाइल एप के माध्यम से डिजिटल टिकट एवं बस पास बनवाने की सुविधा भी प्रदान की जाएगी। इससे यात्रियों को टिकट एवं पास प्राप्त करने के लिए अतिरिक्त समय नहीं लगाना पड़ेगा और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा मिलेगा। वहीं यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक बस में 5 सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। साथ ही आपातकालीन परिस्थितियों में यात्रियों की त्वरित सहायता के लिए बसों में इमरजेंसी पैनिक बटन एवं स्टॉप बटन की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी।

    दिव्यांग एवं वरिष्ठ यात्रियों की सुविधा का भी रखा गया ध्यान

    इलेक्ट्रिक बसों में दिव्यांग यात्रियों के लिए ऑटोमेटिक हाइड्रोलिक व्हीलचेयर लिफ्टिंग सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इससे व्हीलचेयर का उपयोग करने वाले यात्रियों के लिए बस में चढ़ना और उतरना अधिक सुगम एवं सुरक्षित होगा। इसके अतिरिक्त यात्रियों को आवश्यक सूचनाएं उपलब्ध कराने के लिए बसों में पब्लिक एनाउंसमेंट सिस्टम तथा पब्लिक इंफॉर्मेशन सिस्टम की सुविधा भी उपलब्ध होगी। इन व्यवस्थाओं के माध्यम से यात्रियों को बस से संबंधित आवश्यक जानकारी एवं यात्रा के दौरान महत्वपूर्ण घोषणाएं आसानी से प्राप्त हो सकेंगी।