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  • भोपाल में 8084 प्रतिष्ठानों को नोटिस, 190 बंद; सुप्रीम कोर्ट में नया एफिडेविट

    भोपाल में 8084 प्रतिष्ठानों को नोटिस, 190 बंद; सुप्रीम कोर्ट में नया एफिडेविट

    भोपाल
     आवासीय क्षेत्रों में संचालित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में दोपहर दो बजे से सुनवाई होगी। 15 सितंबर को प्रस्तावित सुनवाई टलने के बाद अब 22 सितंबर को सुनवाई हो रही है। इसके लिए नगर निगम ने सुप्रीम कोर्ट में 34 पेज का नया एफिडेविट पेश किया है। इसमें शहरभर में 8084 प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी करने और 190 के खिलाफ कार्रवाई कर कारोबार बंद कराने की जानकारी दी गई है।

    62,500 प्रतिष्ठान चिह्नित, 8084 को नोटिस
    सुप्रीम कोर्ट के पांच अगस्त के निर्देश के बाद नगर निगम ने दावा किया था कि उसने शहर के आवासीय क्षेत्रों में संचालित 62,500 से अधिक प्रतिष्ठानों को चिह्नित किया है। निगम ने 8269 प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी करने की भी जानकारी दी थी। सूत्रों के अनुसार, अब नए शपथ पत्र में नोटिस का आंकड़ा 8084 बताया गया है। साथ ही 190 प्रतिष्ठानों को बंद कराने की कार्रवाई की जानकारी भी दी गई है।

    आंकड़ों में आए इस बदलाव को लेकर भी सुनवाई के दौरान सवाल उठ सकते हैं। नगर निगम ने कोर्ट को बताया है कि चिह्नित प्रतिष्ठानों पर लगातार कार्रवाई जारी है।

    सुप्रीम कोर्ट के 5 अगस्त के आदेश के बाद नगर निगम ने रहवासी इलाकों में कमर्शियल गतिविधियां चलाने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी। निगम की सूची में ऐसे करीब 62,500 प्रतिष्ठान हैं। इनमें से 8,084 को नोटिस दिए गए। इसके बाद तीन दिन तक कार्रवाई चली। व्यापारियों के विरोध के बाद निगम ने अभियान रोक दिया। अब ये प्रतिष्ठान खुल चुके हैं।

    रिकॉर्ड में 62,500, नोटिस सिर्फ 8,084 प्रतिष्ठान को निगम के रिकॉर्ड में 62,500 कमर्शियल प्रतिष्ठान होने के बावजूद करीब 13% यानी 8,084 को ही नोटिस दिए गए। इनमें भी कार्रवाई 190 तक पहुंची। इसके बाद न नोटिस की कार्रवाई आगे बढ़ी न बंद प्रतिष्ठानों की दोबारा जांच हुई।

    निगम खुद बोला – दोबारा खोलना आपराधिक कृत्य
    निगम की टीमों ने सभी संस्थानों को नियमानुसार बंद क
    राया है। कहीं भी संस्थान दोबारा खुल गए हैं तो यह आपराधिक कृत्य है। कोर्ट में पूछने पर वकील के माध्यम से स्थिति स्पष्ट कर जवाब देंगे।' -भुवन गुप्ता, उपायुक्त (भवन अनुज्ञा)

    रहवासी इलाकों में चल रहे 190 कमर्शियल प्रतिष्ठान बंद कराए थे, सभी फिर खुले; 15 दिन से देखने तक नहीं पहुंचा नगर निगम

    भोपाल के रहवासी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ नगर निगम ने तीन दिन कार्रवाई कर 190 प्रतिष्ठान बंद कराए थे। अब सभी दोबारा खुल चुके हैं, लेकिन करीब 15 दिन से निगम की टीमें इनकी स्थिति देखने तक नहीं पहुंचीं। न दोबारा खुले प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई हुई, न कोई नया प्रतिष्ठान बंद कराया गया।

    10 नंबर मार्केट में सीलिंग के दौरान व्यापारियों ने निगम के पंचनामे के आधार पर प्रतिष्ठान खुद बंद किए थे। अब यहां कई प्रतिष्ठान दिन में बंद रहते हैं और शाम होते ही खुल जाते हैं।

    सीलिंग और पंचनामे के बाद फिर शुरू हुआ कारोबार
    बता दें कि निगम ने आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक करने वाले सात प्रतिष्ठानों को सील किया, जबकि 183 ने स्वेच्छा से कारोबार बंद करने के पंचनामे बनाए गए। निगम की कार्रवाई के दौरान पंचनामा बनाकर बंद कराए गए कई प्रतिष्ठानों में दोबारा कारोबार शुरू होने की जानकारी सामने आ रही है। ऐसे में मंगलवार की सुनवाई में निगम की कार्रवाई के साथ उसके जमीनी अनुपालन की स्थिति भी अहम रहेगी। कोर्ट जमीनी स्तर पर कार्रवाई की मॉनिटरिंग पर जोर दे सकता है।

  • फोटो कॉपी, मशरूम और महुआ व्यवसाय ने बदली बबली की जिंदगी

    फोटो कॉपी, मशरूम और महुआ व्यवसाय ने बदली बबली की जिंदगी

    फोटो कॉपी, मशरूम और महुआ व्यवसाय ने बदली बबली की जिंदगी

    बिहान से मिली उड़ान, साय सरकार की योजनाओं से मजबूत हुआ आत्मविश्वास

     प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के महिला स्व-सहायता समूहों को आत्मनिर्भर बनाने के विजन की दिख रही जमीनी तस्वीर

    रायपुर,
    कभी परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए सीमित साधनों पर निर्भर रहने वाली ग्राम पंचायत चुकतीपानी की श्रीमती बबली यादव आज अपने हुनर, मेहनत और आत्मविश्वास से अपनी अलग पहचान बना रही हैं। ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान से जुड़कर उन्होंने एक नहीं, बल्कि कई आजीविका गतिविधियों को अपनाया। फोटो कॉपी एवं कंप्यूटर कार्य, मशरूम उत्पादन और महुआ खरीदी जैसे अलग-अलग कामों से उन्होंने अपनी आय का मजबूत आधार तैयार किया है। आज उनकी कहानी गांव की उन महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही है, जो अपने पैरों पर खड़ा होकर परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने का सपना देखती हैं।

    श्रीमती बबली यादव जागृति महिला स्व सहायता समूह की अध्यक्ष हैं। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने उपलब्ध अवसरों का उपयोग करते हुए स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाया। समूह के माध्यम से ऋण प्राप्त कर उन्होंने कंप्यूटर खरीदा और अपने घर से ही फोटो कॉपी एवं कंप्यूटर संबंधी कार्य शुरू किया। शुरुआत भले ही छोटे स्तर से हुई, लेकिन मेहनत और निरंतर प्रयास ने इस काम को उनकी नियमित आय का जरिया बना दिया।

    बबली की मेहनत का लाभ केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं रहा। गांव में ही फोटो कॉपी, प्रिंटिंग और कंप्यूटर से जुड़े काम की सुविधा मिलने लगी। पहले जिन छोटे-छोटे कामों के लिए ग्रामीणों को बाहर जाना पड़ता था, वे अब स्थानीय स्तर पर ही पूरे होने लगे। इस तरह उनका स्वरोजगार ग्रामीणों के लिए सुविधा और उनके परिवार के लिए आय का माध्यम बन गया।

    मशरूम की खेती से बढ़ी आमदनी, महुआ खरीदी से जुड़ा नया अवसर

    श्रीमती बबली यादव ने अपनी आय को एक ही साधन तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने मशरूम उत्पादन की शुरुआत की। कम जगह में शुरू किए गए इस कृषि आधारित व्यवसाय से उन्हें अतिरिक्त आमदनी मिलने लगी। मशरूम उत्पादन ने उन्हें यह विश्वास दिया कि स्थानीय संसाधनों और उपलब्ध अवसरों का सही उपयोग कर गांव में रहते हुए भी आय के नए रास्ते बनाए जा सकते हैं।

    इसके साथ ही वे पीजी समूह के माध्यम से महुआ खरीदी के कार्य से भी जुड़ी हैं। इस गतिविधि के जरिए वे स्वयं आय अर्जित करने के साथ ग्रामीण महिलाओं को भी रोजगार और आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास कर रही हैं। इस तरह फोटो कॉपी से लेकर मशरूम और महुआ तक, बबली ने अपनी आजीविका को कई आय स्रोतों से जोड़ा है।

    लगभग 10 हजार रुपये मासिक आय से मजबूत हुआ परिवार

    श्रीमती बबली यादव बताती हैं कि फोटो कॉपी एवं कंप्यूटर कार्य, मशरूम उत्पादन और महुआ खरीदी जैसी गतिविधियों से उनकी मासिक आय लगभग 10 हजार रुपये तक हो जाती है। इस अतिरिक्त आय से परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिली है। पहले जहां परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए आय के सीमित साधन थे, वहीं अब उनके पास अपनी मेहनत से कमाई का नियमित माध्यम है।

    उनके लिए यह बदलाव केवल आमदनी बढ़ने तक सीमित नहीं है। आर्थिक आत्मनिर्भरता ने उनके भीतर निर्णय लेने का आत्मविश्वास भी बढ़ाया है। आज वे अपने परिवार की जरूरतों में सहयोग देने के साथ अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार और समूह आधारित गतिविधियों से जुड़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

    बिहान ने दिया अवसर, साय सरकार की योजनाओं से मिली आगे बढ़ने की राह

    छत्तीसगढ़ में राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन-बिहान के माध्यम से महिला स्व-सहायता समूहों को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और आजीविका गतिविधियों से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में इन प्रयासों को आगे बढ़ाया जा रहा है। बबली यादव की कहानी इसी व्यवस्था का स्थानीय उदाहरण है, जहां समूह से जुड़ाव, ऋण की सुविधा और आजीविका के अवसर ने एक ग्रामीण महिला को अपने पैरों पर खड़े होने का रास्ता दिया।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘लखपति दीदी’ और महिला नेतृत्व वाले विकास के विजन से जुड़ी कहानी

    श्रीमती बबली यादव की सफलता उस व्यापक सोच से भी जुड़ती है, जिसमें ग्रामीण महिलाओं को केवल योजनाओं का लाभार्थी नहीं, बल्कि आर्थिक गतिविधियों की सक्रिय भागीदार बनाने पर जोर दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को विकसित भारत की मजबूत कड़ी बताते हुए ‘लखपति दीदी’ के माध्यम से महिलाओं की आय और आर्थिक आत्मनिर्भरता बढ़ाने पर जोर दिया है।

    केंद्र सरकार के दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत महिला स्व-सहायता समूहों को वित्तीय, तकनीकी और बाजार से जुड़ी सहायता के माध्यम से आजीविका मजबूत करने पर जोर दिया जाता है। मिशन में ग्रामीण महिलाओं को सामुदायिक संस्थाओं के माध्यम से संगठित कर ऋण और अन्य संसाधनों तक पहुंच उपलब्ध कराने की व्यवस्था है।

    यही सोच गांव की महिलाओं के जीवन में धीरे-धीरे बदलाव ला रही है। बबली यादव ने समूह से मिली ताकत को अपने स्थानीय ज्ञान और मेहनत से जोड़ा और अलग-अलग गतिविधियों को अपनी आजीविका का आधार बनाया।

    आवास और महतारी वंदन से मिला सामाजिक-आर्थिक संबल

    श्रीमती बबली यादव को प्रधानमंत्री आवास योजना और महतारी वंदन योजना का लाभ भी मिला है। इन योजनाओं से मिले सहयोग ने उनके परिवार की बुनियादी जरूरतों को मजबूत आधार दिया है। एक ओर जहां आवास ने परिवार को सुरक्षित आश्रय का संबल दिया, वहीं दूसरी ओर नियमित आर्थिक सहायता ने घरेलू जरूरतों को पूरा करने में सहयोग किया।

    बबली कहती हैं कि शासन की योजनाओं और बिहान से जुड़ने के बाद उन्हें आगे बढ़ने का अवसर मिला। उनके अनुसार, यदि महिलाओं को सही मार्गदर्शन, समूह का साथ और आर्थिक गतिविधि शुरू करने का अवसर मिले तो वे न केवल अपने परिवार को संभाल सकती हैं, बल्कि दूसरों के लिए भी रोजगार और प्रेरणा का माध्यम बन सकती हैं।

    छोटी शुरुआत से बड़ी पहचान तक

    बबली यादव की कहानी बताती है कि आत्मनिर्भरता के लिए हमेशा बड़े कारोबार से शुरुआत करना जरूरी नहीं है। एक कंप्यूटर और फोटो कॉपी मशीन से शुरू हुआ काम, उसके बाद मशरूम उत्पादन और महुआ खरीदी से जुड़ी गतिविधियां, इन छोटे-छोटे प्रयासों ने मिलकर उनकी आय को मजबूत किया।

    आज बबली के लिए उनके घर का छोटा-सा व्यवसाय केवल कमाई का जरिया नहीं, बल्कि आत्मविश्वास की पहचान बन चुका है। उनके हाथों में अब सिर्फ काम नहीं, बल्कि अपने परिवार और गांव की दूसरी महिलाओं के लिए नई संभावनाओं की उम्मीद भी है।

    बबली यादव की सफलता इस बात की मिसाल है कि जब महिला को समूह का साथ, वित्तीय अवसर, प्रशिक्षण और सरकारी योजनाओं का सहयोग मिलता है, तो वह अपनी परिस्थितियों को बदलने की क्षमता रखती है। चुकतीपानी की बबली अब केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं कर रहीं, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं को भी यह संदेश दे रही हैं कि मेहनत, अवसर और आत्मविश्वास के साथ आत्मनिर्भरता की राह गांव से भी शुरू की जा सकती है।

  • यूपीआईटीएस-2026: संभल के हॉर्न-बोन क्राफ्ट और सोनपापड़ी का दुनिया में बजेगा डंका, सात फर्मों को मिले स्टॉल

    यूपीआईटीएस-2026: संभल के हॉर्न-बोन क्राफ्ट और सोनपापड़ी का दुनिया में बजेगा डंका, सात फर्मों को मिले स्टॉल

    यूपीआईटीएस-2026: संभल के हॉर्न-बोन क्राफ्ट और सोनपापड़ी का दुनिया में बजेगा डंका, सात फर्मों को मिले स्टॉल

    ओडीओपी और ओडीओसी योजना के तहत वैश्विक पटल पर चमकेगा संभल का हुनर, एमएसएमई हॉल में भी दिखेगी जिले की मजबूत धमक

    संभल
     प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने और स्थानीय दस्तकारी को सात समंदर पार पहचान दिलाने की दिशा में प्रदेश सरकार का महत्वाकांक्षी आयोजन 'यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो' 25 से 29 सितंबर तक ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में आयोजित होने जा रहा है। इस अंतरराष्ट्रीय महामंच पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के संभल जनपद के हुनर का जलवा बिखरेगा। प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी 'एक जनपद-एक उत्पाद', 'एक जनपद-एक व्यंजन' तथा एमएसएमई नीति के तहत संभल की सात प्रमुख औद्योगिक इकाइयों व दस्तकारों को विभिन्न हॉल में स्टॉल आवंटित कर दिए गए हैं। कुल 1.10 लाख वर्ग मीटर से अधिक के विशाल प्रदर्शनी क्षेत्र में आयोजित होने वाले इस पांच दिवसीय मेले में 2,400 से अधिक प्रदर्शक भाग लेंगे, जिसमें संभल के विश्वविख्यात 'हॉर्न एवं बोन क्राफ्ट' और लजीज सोनपापड़ी का स्वाद अंतरराष्ट्रीय खरीदारों (बायर्स) के सामने पेश किया जाएगा।

    हॉल-9 में दिखेगी सींग व हड्डी की नायाब नक्काशी
    संभल का हॉर्न एवं बोन क्राफ्ट वैश्विक स्तर पर अपनी अनूठी पहचान रखता है। यूपीआईटीएस-2026 के हॉल नंबर 9 (ओडीओपी पवेलियन) में संभल के तीन प्रमुख दस्तकारों को स्थान दिया गया है। इनमें मोहम्मद आरिफ को स्टॉल नंबर एच9-0116/ और शाह आलम को स्टॉल नंबर एच9-02/72 आवंटित किया गया है, जो हॉर्न व बोन से बने हस्तशिल्प उत्पादों का प्रदर्शन करेंगे। वहीं, अमेजिंग क्राफ्ट होम के विकास जैन को स्टॉल नंबर एच9-03/126, 127, 128 और 129 यानी चार स्टॉलों का बड़ा स्पेस मिला है, जहां वे काष्ठ शिल्प (वुडन हैंडीक्राफ्ट्स) का भव्य प्रदर्शन करेंगे।

    एमएसएमई और एक्सपोर्ट पवेलियन में भी संभल का दबदबा
    जिले के उद्यमियों ने केवल पारंपरिक ओडीओपी तक सीमित न रहकर आधुनिक कला और निर्यात क्षेत्र में भी कदम बढ़ाए हैं। हॉल नंबर 10 (एमएसएमई) में जुबैर उमर (फर्म: जुबैर उमर मिस्टर जुबैर) को स्टॉल नंबर एच10-08/457 मिला है, जहां वे हॉर्न-बोन के साथ रेजिन आर्ट और वुडन क्राफ्ट का अनूठा सम्मिश्रण प्रस्तुत करेंगे। इसके अलावा हॉल नंबर 14 (ओडीओपी) में हैंडीक्राफ्ट्स वेलफेयर एसोसिएशन के बैनर तले नीलकंठ ओवरसीज के कमल कौशल वार्ष्णेय को स्टॉल एच14-14/44 तथा शहादत हुसैन को स्टॉल एच14-14/42 आवंटित किया गया है। हॉल नंबर 11 में डेकोर वर्ल्ड एक्सपो के मोहम्मद आकिब यूपी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के तहत जिले के एक्सपोर्ट क्वालिटी उत्पादों को प्रदर्शित करेंगे।

    ओडीओसी में घुलेगी संभल की मशहूर सोनपापड़ी की मिठास
    हस्तशिल्प के साथ-साथ इस बार संभल के लजीज स्वाद को भी वैश्विक मंच दिया गया है। 'एक जिला, एक व्यंजन' योजना के तहत हॉल नंबर 16 में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए संभल के दक्ष स्वीट सेंटर के संचालक राजेंद्र कुमार को स्थान दिया गया है। यहां देश-विदेश से आने वाले मेहमानों और ट्रेडर्स को संभल की मशहूर सोनपापड़ी का मुरीद बनाया जाएगा। 

    वैश्विक बाजार में संभल के हुनर को मिलेगा नया मुकाम
    "यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो संभल के उद्यमियों और दस्तकारों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने उत्पादों की पहचान स्थापित करने का एक स्वर्णिम अवसर है। ओडीओपी और ओडीओसी योजना के तहत चयनित इकाइयों को वैश्विक मंच उपलब्ध कराने के लिए स्टॉल आवंटित किए जा चुके हैं। प्रशासन का पूरा प्रयास है कि हमारे पारंपरिक हॉर्न-बोन हस्तशिल्प और स्थानीय मिठास को देश-विदेश के बड़े खरीदारों से सीधे ऑर्डर्स मिलें, जिससे जिले के निर्यात को नई गति और कारीगरों को बेहतर आय मिल सके।"
    — मुकेश कुमार, उपायुक्त उद्योग, जिला उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केंद्र, संभल

  • DNA टेस्ट में नहीं हुआ मिलान, MP हाईकोर्ट ने 10 साल की सजा पलटी

    DNA टेस्ट में नहीं हुआ मिलान, MP हाईकोर्ट ने 10 साल की सजा पलटी

    जबलपुर 
     मानसिक रूप से असक्षम युवती के साथ दुष्कर्म के मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. यहां सुनवाई के दौरान दुष्कर्म पीड़िता के बच्चे से आरोपी का डीएनए मिलान नहीं हुआ, जिसके बाद आरोपी को हाईकोर्ट से राहत मिली है. हाईकोर्ट जस्टिस देवनारायण मिश्रा की एकलपीठ ने इस मामले में सुनवाई की। 

    मानसिक अक्षम युवती से दुष्कर्म के आरोप
    लखनादौन जिला सिवनी निवासी छोटू टेकाम पर पड़ोस में रहने वाली मानसिक रूप से असक्षम युवती के साथ दुष्कर्म के आरोप लगे थे. जिसके बाद उसे जिला न्यायालय द्वारा दस साल की सजा से दंडित किया गया था. इस सजा के खिलाफ आरोपी की ओर से हाईकोर्ट में अपील दायर की गई थी. अपील में कहा गया था कि अभियोजन के अनुसार युवती के माता-पिता कार्य के लिए नागपुर गए थे और जब नागपुर से लौटे तो उन्होंने पाया कि उनकी मानसिक रूप से अक्षम बेटी गर्भवती हो गई है। 

    आरोपी को हुई थी 10 साल की हुई थी सजा
    याचिका में बताया गया कि बेटी के गर्भवती होने पर उसके मां-बाप ने पड़ोसी होने के कारण आरोपी के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करवा दी. युवती ने भी अपने बयान में उसके खिलाफ गवाही दी, जिसके बाद पुलिस ने उसके खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया और जिला न्यायालय ने विभिन्न धाराओं के तहत अधिकतम दस साल की सजा से दंडित कर दिया. इस दौरान अपीलकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि पीड़ित द्वारा जन्म दिए गए बच्चे और आरोपी का डीएनए ही आपस में नही मिलता, जिससे स्पष्ट है कि वह उस बच्चे का जैविक पिता नही है। 

    पीड़िता के बच्चे से डीएनए मिलान नहीं हुआ, दोषमुक्त करार
    एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि डीएनए रिपोर्ट के अनुसार पीड़ित व नवजात बच्चे का डीएनए आपस में मिलते है, लेकिन दुष्कर्म के आरोपी का डीएनए नवजात बच्चे के डीएनए से नहीं मिलता. ऐसे हाईकोर्ट जस्टिस देवनारायण मिश्रा की एकलपीठ ने तकनीकी साक्ष्य नहीं होने के कारण अपीलकर्ता को संदेह के आधार पर दोषमुक्त करार दिया है. एकलपीठ ने वैज्ञानिक साक्ष्य नहीं होने के कारण अपीलकर्ता को संदेह का लाभ देते हुए उसे दोषमुक्त कर दिया। 

  • विराट कोहली के निशाने पर 10 बड़े रिकॉर्ड, WI के खिलाफ सचिन के 4 रिकॉर्ड पर नजर

    विराट कोहली के निशाने पर 10 बड़े रिकॉर्ड, WI के खिलाफ सचिन के 4 रिकॉर्ड पर नजर

     नई दिल्ली

    विराट कोहली के 100 शतक पूरे होंगे या नहीं यह बात हर कोई जानना चाहता है। किंग कोहली के नाम इंटरनेशनल क्रिकेट में 85 शतक दर्ज हैं, वह टी20 और टेस्ट क्रिकेट से रिटायरमेंट ले चुके हैं और अब सिर्फ वनडे में ही एक्टिव हैं। 2027 वर्ल्ड कप तक भारत को कई वनडे मैच खेलने हैं। ऐसे में फैंस उम्मीद कर रहे हैं कि टूर्नामेंट खत्म होते-होते कोहली शतकों का शतक पूरा करें और फिर ही अपना रिटायरमेंट अनाउंस करें। भारत को अगली वनडे सीरीज वेस्टइंडीज के खिलाफ 27 सितंबर से खेलनी है। इस सीरीज में विराट कोहली के निशाने पर सचिन तेंदुलकर के 4 वर्ल्ड रिकॉर्ड समेत कुल 10 रिकॉर्ड्स होंगे। आइए इन रिकॉर्ड्स पर एक नजर डालते हैं-

        विराट कोहली को वनडे क्रिकेट में 15 हजार रन का आंकड़ा छूने के लिए 59 रन चाहिए। किंग कोहली इस मुकाम तक पहुंचने वाले सबसे तेज बल्लेबाज बन जाएंगे। सचिन तेंदुलकर के नाम यह वर्ल्ड रिकॉर्ड 377 पारियों में दर्ज हैं, जबकि कोहली ने अभी तक 302 पारियां ही खेली है।

        लिस्ट ए में सबसे ज्यादा 60 शतक लगाने का वर्ल्ड रिकॉर्ड सचिन तेंदुलकर के नाम है। वहीं विराट कोहली 59 शतकों के साथ दूसरे पायदान पर हैं। 2 सेंचुरी और लगाते ही कोहली सचिन तेंदुलकर का यह रिकॉर्ड तोड़ देंगे।

        वेस्टइंडीज के खिलाफ 2 शतक लगाते ही वह इस टीम के खिलाफ सबसे ज्यादा सेंचुरी लगाने वाले बल्लेबाज बन जाएंगे।

        विराट कोहली (41) घर पर सबसे ज्यादा सेंचुरी लगाने के रिकॉर्ड से 2 शतक दूर हैं। यह वर्ल्ड रिकॉर्ड भी 42 शतकों के साथ सचिन तेंदुलकर के नाम है।

        वेस्टइंडीज के खिलाफ जीते हुए मैचों में सबसे ज्यादा सेंचुरी के रिकॉर्ड से भी कोहली एक शतक दूर है।

        सचिन तेंदुलकर के नाम घर पर सबसे ज्यादा 6976 वनडे रन बनाने का वर्ल्ड रिकॉर्ड है। विराट कोहली (6867) उनके इस रिकॉर्ड से 110 रन ही पीछे हैं।

        इंटरनेशनल क्रिकेट में वेस्टइंडीज के खिलाफ सबसे ज्यादा रन बनाने के रिकॉर्ड से कोहली 271 रन दूर हैं।

        वेस्टइंडीज के खिलाफ जीत में सबसे ज्यादा रन के रिकॉर्ड से कोहली 142 रन दूर है।

        नंबर-3 पर 13 हजार वनडे रन का आंकड़ा छूने वाले पहले खिलाड़ी बनने के लिए कोहली को 180 रनों की दरकार है।

        एशिया में 17000 इंटरनेशनल रन पूरा करने के लिए किंग कोहली को 215 रन चाहिए।

    विराट कोहली के वनडे करियर की बात करें तो, अभी तक खेले 314 मैचों की 302 पारियों में 58.59 की औसत के साथ उन्होंने 14941रन बनाए हैं। इस दौरान उन्होंने इस फॉर्मेट में सबसे ज्यादा 54 शतक लगाए हैं, जबकि 79 हाफ सेंचुरी ठोकी है।

  • भारत-वेस्टइंडीज T20 के लिए होलकर स्टेडियम तैयार, मैदान पर दिखेगा चेक्स पैटर्न

    भारत-वेस्टइंडीज T20 के लिए होलकर स्टेडियम तैयार, मैदान पर दिखेगा चेक्स पैटर्न

    इंदौर 

     इंदौर के क्रिकेट प्रेमियों के लिए 11 अक्टूबर का दिन बेहद रोमांचक होने वाला है, क्योंकि इस दिन स्थानीय होलकर स्टेडियम में भारत और वेस्टइंडीज के बीच टी-20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबला खेला जाएगा। मैच को लेकर तैयारियां अब अपने अंतिम चरण में हैं।

    दर्शकों और टीवी स्क्रीन पर मैच देखने वालों को एक नया अनुभव देने के लिए इस बार मैदान की आउटफील्ड पर घास को एक खास 'चेक्स' (चौकड़ी) पैटर्न में काटा जा रहा है। इस रोमांचक मुकाबले के लिए दोनों देशों की टीमें 10 अक्टूबर को चार्टर्ड प्लेन के जरिए इंदौर पहुंचेंगी।

    28 सितंबर से शुरू होगी पिच पर रोलिंग
        किसी भी क्रिकेट मैच का सबसे अहम हिस्सा उसकी पिच होती है, जिसे लेकर मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (एमपीसीए) कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता। रविवार के दिन बीसीसीआई के पिच क्यूरेटर तापोष चटर्जी ने स्टेडियम का दौरा किया और मैदान तथा पिच की स्थिति का जायजा लिया।

        के दौरान एमपीसीए के पिच क्यूरेटर मनोहर जामले ने उन्हें बताया कि बारिश के बावजूद पिच का शुरुआती बेस पहले ही तैयार कर लिया गया है। फिलहाल ग्राउंड स्टाफ का पूरा ध्यान काली मिट्टी वाली इस पिच की घास को और अधिक स्वस्थ बनाने पर है। तैयारी को पुख्ता करने के लिए 28 सितंबर से पिच पर रोलिंग का काम शुरू कर दिया जाएगा।

    एक व्यक्ति अधिकतम चार टिकट ले सकेगा
    आम दर्शकों के लिए सबसे सस्ता टिकट ₹1,000, जबकि सबसे महंगा पैवेलियन टिकट ₹12,500 का होगा। मैच के सभी टिकट सिर्फ ऑनलाइन मिलेंगे। अन्य कैटेगरी के टिकटों के रेट भी जारी किए जाएंगे।

    जोमैटो होगा आधिकारिक टिकटिंग पार्टनर
    MPCA ने मैच के लिए जोमैटो को आधिकारिक ऑनलाइन टिकटिंग पार्टनर बनाया है। टिकटों की बिक्री सिर्फ ऑनलाइन होगी। स्टेडियम के काउंटर से ऑफलाइन टिकट नहीं मिलेंगे।

    टिकटों की खरीद की सीमा भी तय की गई है। एक व्यक्ति अधिकतम 4 टिकट खरीद सकेगा। ये टिकट एक ही कैटेगरी के या अलग-अलग कैटेगरी के हो सकते हैं।

    होलकर स्टेडियम में आखिरी इंटरनेशनल मैच 18 जनवरी 2026 को भारत और न्यूजीलैंड के बीच तीसरा वनडे खेला गया था। इस मुकाबले में न्यूजीलैंड ने भारत को 41 रन से हराया था। इस जीत के साथ न्यूजीलैंड ने पहली बार भारत में वनडे सीरीज अपने नाम की थी।

    होलकर स्टेडियम में आखिरी इंटरनेशनल मैच 18 जनवरी 2026 को भारत और न्यूजीलैंड के बीच तीसरा वनडे खेला गया था। इस मुकाबले में न्यूजीलैंड ने भारत को 41 रन से हराया था। इस जीत के साथ न्यूजीलैंड ने पहली बार भारत में वनडे सीरीज अपने नाम की थी।

    सबसे सस्ता टिकट एक हजार रुपये का है

    क्रिकेट मैच का आनंद लेने के लिए दर्शकों को इस बार एक हजार रुपये से लेकर 12 हजार 500 रुपये तक खर्च करना होंगे। मैच का सबसे सस्ता टिकट एक हजार रुपये का है, वहीं टिकट की अधिकतम दर 12,500 रुपये की है। मैच के टिकटों की बिक्री ऑनलाइन की जाएगी। एमपीसीए शीघ्र ही टिकट बुकिंग की दिनांक और समय घोषित करेगा।

    टिकट दर
        साउथ पवैलियन लोअर – 6,500
        साउथ पवैलियन लोअर (लाइव हास्पिटैलिटी)- 12,500
        साउथ पवैलियन पहली मंजिल – 8,500
        साउथ पवैलियन पहली मंजिल (फूड बाक्स हास्पिटैलिटी) – 11,000
        साउथ पवैलियन दूसरी मंजिल – 7,500
        साउथ पवैलियन तीसरी मंजिल – 5,500
        ईस्ट गैलरी ग्राउंड फ्लोर – 1,000
        ईस्ट गैलरी पहली मंजिल (प्रीमियम) – 1,700
        ईस्ट गैलरी पहली मंजिल (रेगुलर) – 1,400
        ईस्ट गैलरी दूसरी मंजिल – 1,250
        वेस्ट गैलरी ग्राउंड प्लोर – 1,100
        वेस्ट गैलरी पहली मंजिल (प्रीमियम) – 1,800
        वेस्ट गैलरी पहली मंजिल (रेगुलर) – 1,500
        वेस्ट गैलरी दूसरी मंजिल – 1,350

    टिकट बिक्री की तारीख का ऐलान बाकी
    MPCA ने टिकटों की कीमतें घोषित कर दी हैं, लेकिन ऑनलाइन बिक्री किस तारीख और किस समय शुरू होगी, इसकी जानकारी अभी नहीं दी गई है। एसोसिएशन की ओर से टिकटिंग प्लेटफॉर्म की तैयारियां पूरी होने के बाद बिक्री की तारीख घोषित की जाएगी।

    5 मैचों की सीरीज का तीसरा मुकाबला
    भारत और वेस्टइंडीज के बीच 5 मैचों की T20 सीरीज खेली जाएगी। सीरीज का तीसरा मुकाबला 11 अक्टूबर को इंदौर के होलकर स्टेडियम में होगा। यह होलकर स्टेडियम में खेला जाने वाला 5वां T20 इंटरनेशनल मैच होगा।

     

  • मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज वितरित करेंगे 3,567 नियुक्ति पत्र

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज वितरित करेंगे 3,567 नियुक्ति पत्र

    लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज मंगलवार यानी 22 सितंबर को 3,567 नवचयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान करेंगे।लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित भव्य कार्यक्रम में प्रदेश के सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों को योग्य शिक्षक और कुशल प्रशासक मिलेंगे। चयनित अभ्यर्थियों में 319 प्रधानाचार्य, 258 प्रधानाध्यापक, 618 प्रवक्ता (पीजीटी) तथा 2372 सहायक अध्यापक (टीजीटी) शामिल हैं।

    उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा पारदर्शी परीक्षा प्रणाली के माध्यम से अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के लिए चयनित इन अभ्यर्थियों को जुपिटर हॉल में आयोजित समारोह में नियुक्ति पत्र सौंपे जाएंगे। इस दौरान उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और माध्यमिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गुलाब देवी समेत अन्य नेता एवं अधिकारी मौजूद रहेंगे। 

     

  • MP हाईकोर्ट में 35 हजार से ज्यादा अवमानना केस, बढ़ी मामलों के निराकरण की चुनौती

    MP हाईकोर्ट में 35 हजार से ज्यादा अवमानना केस, बढ़ी मामलों के निराकरण की चुनौती

    जबलपुर
     हाई कोर्ट में एक मुकदमे का आदेश होने के बाद भी विवाद समाप्त नहीं हो रहा है। आदेश का पालन नहीं होने पर वही पक्षकार दोबारा हाई कोर्ट पहुंच रहा है और अवमानना याचिका के रूप में उसी विवाद की दूसरी न्यायिक पारी शुरू हो रही है।अवमानना प्रकरणों की 35 हजार से अधिक संख्या ने न्यायालय के सामने लंबित मामलों के निराकरण की चुनौती को और जटिल बना दिया है।

    मूल याचिका में न्यायालय जहां अधिकार और विवाद का फैसला करता है, वहीं आदेश के बाद अवमानना याचिका में यह देखना पड़ता है कि संबंधित विभाग, अधिकारी या संस्था ने न्यायालय के निर्देश का पालन किया या नहीं। इस प्रक्रिया में नोटिस, जवाब, अनुपालन रिपोर्ट, व्यक्तिगत उपस्थिति और कई बार समय-सीमा तय करने जैसी न्यायिक कवायद करनी पड़ती है।

    हाई कोर्ट में पहले से ही लंबित मामलों का बड़ा बोझ
    हाई कोर्ट में पहले से ही लंबित मामलों का बड़ा बोझ है। मार्च 2025 के अंत में न्यायालय में लंबित प्रकरणों की संख्या 4.71 लाख से अधिक थी। ऐसे में आदेशों के समय पर पालन नहीं होने से उत्पन्न अवमानना प्रकरण न्यायालय के अतिरिक्त समय और संसाधनों की मांग करते हैं।

    इसका असर सीधे तौर पर मूल मामलों के निराकरण की गति पर पड़ने की स्थिति बनती है। हाल के मामलों में भी न्यायालय को अधिकारियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाना पड़ा है।

    न्यायालय ने नोटिस से आगे बढ़कर वारंट तक जारी किए
    कई मामलों में आदेश के बावजूद अनुपालन रिपोर्ट पेश नहीं होने अथवा संबंधित अधिकारियों की उपस्थिति नहीं होने पर न्यायालय ने नोटिस से आगे बढ़कर वारंट तक जारी किए हैं। सितंबर में जस्टिस विवेक जैन की एकलपीठ ने एक अवमानना प्रकरण में तत्कालीन प्रमुख सचिव राजस्व और सागर के तत्कालीन कलेक्टर के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए थे।

    आदेश के बाद भी खत्म नहीं होता मुकदमा
    अवमानना कानून का उद्देश्य न्यायालय के आदेश की गरिमा और प्रभावशीलता बनाए रखना है। इसलिए अवमानना याचिकाओं की आवश्यकता से इनकार नहीं किया जा सकता। असल समस्या उस स्थिति में पैदा होती है जब किसी आदेश के पालन के लिए बार-बार न्यायालय की निगरानी आवश्यक हो जाती है।

    यदि विभागीय स्तर पर आदेश मिलते ही उसकी अनुपालन प्रक्रिया शुरू हो और समय-सीमा के भीतर रिपोर्ट न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत हो जाए तो बड़ी संख्या में अवमानना याचिकाओं की नौबत टाली जा सकती है।

     

  • यूपी बना एक्सपोर्ट इंजन, आबकारी निर्यात नीति से खेत से विदेशी बाजार तक जुड़ी पूरी चेन

    यूपी बना एक्सपोर्ट इंजन, आबकारी निर्यात नीति से खेत से विदेशी बाजार तक जुड़ी पूरी चेन

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश में योगी सरकार की त्रिवर्षीय आबकारी निर्यात नीति 2026-29 का असर अब प्रदेश की पूरी एक्सपोर्ट चेन में दिखाई दे रहा है। खेतों में तैयार होने वाले गन्ने, शीरे और अनाज से लेकर फैक्ट्री, पैकेजिंग, भंडारण और परिवहन तक आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिल रही है। वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी अप्रैल-जून में यूपी के आबकारी निर्यात में पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 45.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इस दौरान राष्ट्रीय वृद्धि 18.3 प्रतिशत रही।

    नई इकाइयों और पुराने प्लांट को मिला संबल
    निर्यात की संभावनाओं के साथ प्रदेश में नई औद्योगिक गतिविधियां भी बढ़ी हैं। उन्नाव में यूनाइटेड ब्रुअरीज और हरदोई में माउंट एवरेस्ट ब्रुअरीज नई इकाइयां स्थापित कर रही हैं। फर्रुखाबाद में वुडपेकर ग्रीनएग्री न्यूट्रिएंट्स ने इकाई स्थापित की है। वहीं एलाइड ब्लेंडर्स एंड डिस्टिलर्स ने मुरादाबाद की बंद इकाई को दोबारा शुरू किया है। गोरखपुर की कियान डिस्टिलरी ने एथेनॉल उत्पादन के साथ पेय आसवनी और ब्रुअरी के लिए आवेदन किया है। रैडिको खेतान भी अन्य राज्यों से सीतापुर और रामपुर संयंत्रों में निर्यात उत्पादन स्थानांतरित कर रही है।

    10.2 से बढ़कर 12.6 प्रतिशत हो गई हिस्सेदारी
    अप्रैल-जून 2026 में देश से करीब 10.17 करोड़ अमेरिकी डॉलर का आबकारी निर्यात हुआ। इसमें उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी करीब 127.8 लाख डॉलर रही, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 87.9 लाख डॉलर थी। इस तरह प्रदेश ने करीब 39.9 लाख डॉलर की अतिरिक्त वृद्धि हासिल की। राष्ट्रीय निर्यात में यूपी की हिस्सेदारी भी 10.2 प्रतिशत से बढ़कर 12.6 प्रतिशत हो गई। प्रदेश इस अवधि में महाराष्ट्र और पंजाब के बाद तीसरे स्थान पर रहा।

    बस्ती का शीरा पहुंचा वैश्विक बाजार
    आबकारी मंत्री नितिन अग्रवाल ने बताया कि यूपी की बढ़ती एक्सपोर्ट चेन में कृषि आधारित उत्पाद भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। बस्ती से 25 हजार कुंतल शीरे का विदेश निर्यात किया गया, जिससे करीब पांच लाख अमेरिकी डॉलर की विदेशी मुद्रा प्राप्त हुई। शीरा अलग शुल्क वर्गीकरण में आता है, इसलिए यह राशि उपरोक्त आंकड़ों से अतिरिक्त है। इससे स्पष्ट होता है कि प्रदेश के कृषि उत्पाद प्रसंस्करण के बाद वैश्विक बाजार की आपूर्ति श्रृंखला में शामिल हो रहे हैं।

    बोतलों की सप्लाई में भी आया बड़ा उछाल
    अप्रैल-जुलाई 2026 के बीच यूपी की इकाइयों ने अन्य राज्यों को पिछले वर्ष की समान अवधि से 1.64 करोड़ अधिक बोतलें भेजीं। यह करीब 45.7 प्रतिशत की वृद्धि है। आबकारी आयुक्त डॉ. आदर्श सिंह ने बताया कि निर्यात बढ़ने का असर गन्ना, शीरा और अनाज से लेकर कांच की बोतल, पैकेजिंग, ढक्कन, लेबलिंग, भंडारण और परिवहन तक पड़ता है। इस तरह त्रिवर्षीय आबकारी निर्यात नीति ने प्रदेश में खेत से फैक्ट्री और फैक्ट्री से विदेशी बाजार तक जुड़ी व्यापक एक्सपोर्ट चेन को गति दी है।

  • रेशम उत्पादन में भारत की बड़ी तैयारी, किसानों की आय ₹12 लाख करने का लक्ष्य

    रेशम उत्पादन में भारत की बड़ी तैयारी, किसानों की आय ₹12 लाख करने का लक्ष्य

    नई दिल्ली
    भारत की गारमेंट इंडस्ट्री दुनियाभर में मशहूर है। यहां के कई फैबरिक अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में काफी डिमांड में रहते हैं, जिसमें से सिल्क भी प्रमुख है। केंद्र सरकार ने देश में रेशम (Silk) का प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए खास तैयारी कर ली है। सरकार का लक्ष्य 2030-31 तक देश का रेशम उत्पादन बढ़ाकर 60,000 टन करना है। साथ ही 2028-29 तक भारत को दुनिया का सबसे बड़ा रेशम उत्पादक देश बनाने का संकल्प लिया गया है। साथ ही ग्लोबल मार्केट में डिमांड के अनुसार गुणवत्ता बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है।

    किसानों की आय ₹12 लाख करने की तैयारी
    बेंगलुरु में केंद्रीय रेशम बोर्ड (CSB) फाउंडर्स डे के दौरान केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि देश में रेशम उत्पादन 2014 के 26,000 टन से बढ़कर वर्तमान में 42,000 टन तक पहुंच गया है। सरकार रेशम किसानों की आय बढ़ाने और सेरीकल्चर (रेशम पालन) क्षेत्र के विस्तार के लिए लगातार काम कर रही है।

    उन्होंने कहा  शहतूत की पत्तियों का प्रोडक्शन बढ़ाने और कोकून पालन के सायकल में बढ़ोतरी के जरिए उत्पादन बढ़ाया जाएगा। सरकार का प्रयास है कि रेशम किसानों की सालाना आय ₹10 लाख से ₹12 लाख तक पहुंचाई जाए।

    चीन का घटता प्रोडक्शन भारत के लिए मौका
    गिरिराज सिंह ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय रेशम की मांग बढ़ रही है, जबकि चीन में प्रोडक्शन घटने की खबरें हैं। ऐसे में भारत के पास ग्लोबल मार्केट में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का बड़ा अवसर है। उन्होंने वैज्ञानिकों द्वारा विकसित नई तकनीकों, उन्नत संकर (हाइब्रिड) किस्मों और आधुनिक मशीनरी को सीधे किसानों तक पहुंचाने पर जोर दिया।

    AI और मशीन लर्निंग का होगा इस्तेमाल
    टेक्सटाइ मिनिस्ट्री में ज्वाइंट सेकेट्री (सिल्क) और केंद्रीय रेशम बोर्ड की उपाध्यक्ष पद्मिनी सिंगला ने कहा कि 2030-31 तक 60,000 मीट्रिक टन रेशम उत्पादन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए उच्च उत्पादकता वाले रेशम कीटों की किस्में और आधुनिक मशीनरी लाई जा रही हैं। इसके साथ ही क्वालिटी जांच और प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), GIS और मशीन लर्निंग जैसी तकनीकों का उपयोग किया जाएगा।

    MSMEs को सब्सिडी और सरकारी मदद
    सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने कहा कि कर्नाटक देश के कुल रेशम उत्पादन में नंबर वन राज्य है। सरकार इस क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए बुनियादी ढांचे के विकास और इंडस्ट्री के विकास पर विशेष ध्यान दे रही है।
    उन्होंने कहा कि माडर्न टेक्नोलॉजी और हाई डेंसिटी प्रोडक्शन मेथड को अपनाकर ग्लोबल एक्सपोर्ट मानकों के अनुरूप रेशम उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे घरेलू उत्पादन बढ़ेगा और आयात पर निर्भरता कम होगी। सरकार MSME के तहत रजिस्ट्रेशन कराने वाले उद्यमियों को सब्सिडी और गुणवत्ता सुधार योजनाओं के माध्यम से भी सहायता प्रदान कर रही है।