Author: Admin

  • ‘संविधान नहीं, अखिलेश खतरे में हैं’: विपक्षी एकता के आह्वान पर सपा प्रमुख पर ओपी राजभर का हमला

    ‘संविधान नहीं, अखिलेश खतरे में हैं’: विपक्षी एकता के आह्वान पर सपा प्रमुख पर ओपी राजभर का हमला

    ‘संविधान नहीं, अखिलेश खतरे में हैं’: विपक्षी एकता के आह्वान पर सपा प्रमुख पर ओपी राजभर का हमला

    ‘राज्यसभा चुनाव भाईचारे का नहीं, दौलत का चुनाव’: अखिलेश पर बरसे ओम प्रकाश राजभर

    अखिलेश के पीडीए पर राजभर का तंज, बोले- ‘परिवारवाद के बाद अब ‘अपराधी’ आने वाले हैं’

    ‘चार बार यादव को CM बनाया, मुस्लिम चेहरे पर नहीं सोचा’: अखिलेश पर राजभर का जोरदार हमला

    ‘सपा मुखिया को पता है सरकार नहीं आने वाली’: राज्यसभा चुनाव पर अखिलेश को राजभर का जवाब

    लखनऊ
     राज्यसभा चुनाव के बीच समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा विपक्षी एकता के आह्वान पर योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने जोरदार पलटवार किया है। राजभर ने कहा कि 2017 से अखिलेश यादव लगातार कह रहे हैं कि संविधान खतरे में है। जबकि सच यह है कि संविधान सुरक्षित है और खतरे में खुद अखिलेश यादव हैं।

    ‘चार बार यादव को बनाया मुख्यमंत्री, मुस्लिम की नहीं आई याद’

    ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि 20 प्रतिशत आबादी वाले मुसलमानों ने वोट देकर चार बार यादव को मुख्यमंत्री बनाया लेकिन अखिलेश यादव के मन में एक बार भी यह विचार नहीं आया कि कम से कम किसी मुसलमान को मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित किया जाए। राजभर ने सपा अध्यक्ष की राजनीति पर भी सवाल उठाया।

    ‘सपा के लिए भाईचारे का नहीं, दौलत का चुनाव’

    अखिलेश यादव के ‘भाईचारे के चुनाव’ वाले बयान पर ओपी राजभर ने तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह भाईचारे का चुनाव नहीं, बल्कि दौलत का चुनाव है। वहीं पीडीए को लेकर राजभर ने कहा कि इसमें परिवारवाद हावी है। राजभर ने रामगोपाल, दौलतमंद का जिक्र करते हुए कहा कि बस अब ‘अपराधी’ का नाम घोषित किया जाना बाकी है। 

    2022 में मेरी वजह से सीटें बढ़ीं- राजभर

    राजभर ने सपा-कांग्रेस गठबंधन को लेकर कहा कि दोनों 2017 के विधानसभा चुनाव में भी मिलकर लड़ चुके हैं। उन्होंने कहा कि यादव और मुस्लिम वोट के साथ कांग्रेस का वोट भी गठबंधन में शामिल था, लेकिन सपा 47 सीटों पर ही जीत सकी।

    मंत्री राजभर ने 2022 के विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय वह सपा के साथ थे और पार्टी 125 सीटों तक पहुंची। उन्होंने दावा किया कि अंबेडकरनगर की पांचों सीटें, आजमगढ़ की दस सीटें, गाजीपुर की सात सीटें, बलिया, मऊ समेत कुल 62 सीटों पर सपा को जीत सुभासपा की वजह से मिली।

    ‘अब अखिलेश को पता है सरकार नहीं आने वाली’- राजभर

    ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि आज अखिलेश यादव को सहारा देने वाला कोई नहीं है। उन्हें पता चल चुका है कि उनकी सरकार नहीं आने वाली है। इसी वजह से वे अपने लिए व्यवस्था करने में जुटे हुए हैं।

  • ‘लवरेज’ में प्रेम की चार कहानियां, रिश्तों और विश्वास के अनसुने पहलुओं को पर्दे पर दिखाएगी मनोज कृष्ण की फिल्म

    ‘लवरेज’ में प्रेम की चार कहानियां, रिश्तों और विश्वास के अनसुने पहलुओं को पर्दे पर दिखाएगी मनोज कृष्ण की फिल्म

    प्रेम को किसी एक परिभाषा, रिश्ते या सामाजिक सीमा में बांधा जा सकता है? क्या प्रेम केवल आकर्षण है, या किसी दूसरे मन की पीड़ा को समझने और उसे स्वीकार करने का साहस भी? लेखक-निर्देशक मनोज कृष्ण की स्वतंत्र फिल्म ‘लवरेज’ इन्हीं सवालों के साथ दर्शकों के बीच आने को तैयार है.

    हाल ही में मुंबई में आयोजित फिल्म के विशेष प्रीमियर में शिशिर शर्मा, कला निर्देशक जयंत देसमुख, तारिक उमर खान, राजकुमार कनौजिया और राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार विजेता निर्देशक-छायाकार शुभ्रांशु दास सहित सिनेमा और रचनात्मक क्षेत्र से जुड़े लेखक, समीक्षक पत्रकार उपस्थित रहे.

    क्या है फिल्म की कहानी?
    अदहन क्रिएशन के बैनर तले बनी ‘लवरेज’ चार अलग-अलग कहानियों का संग्रह है. दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, कोलकाता और मथुरा के आसपास फिल्माई गई ये कहानियां समाज के अलग-अलग वर्गों और जीवन-स्थितियों को दर्शाती हैं. इनके परिवेश अलग हैं, लेकिन इन्हें जोड़ने वाला सूत्र है, प्रेम और मनुष्य की जुड़ाव की आवश्यकता.

    स्त्री अनुभवों को केंद्र में रखती ये फिल्म तन के आकर्षण से आगे बढ़कर मन के प्रति प्रेम की महत्ता तलाशती है. इसमें ममता है, अपनापन है और संदेह से भटकते प्रेम की व्यथा भी. कहानियां सवाल उठाती हैं कि जहां विश्वास की जगह संशय और अपनत्व की जगह अधिकार ले लेता है, वहां प्रेम का स्वरूप कैसे बदल जाता है. प्रेम को समझने के लिए समर्पण और विश्वास चाहिए, लेकिन क्या समाज दूसरे व्यक्ति की स्वतंत्रता और उसके मन को स्वीकार करने के लिए तैयार है?

    ‘लवरेज’ एक फिल्म होने के साथ प्रेम पर एक वैचारिक संवाद भी है. इसकी अधूरी कहानियों में जीवन की पूरी दास्तान सुनाई देती है; क्योंकि हर रिश्ते को मनचाहा अंत नहीं मिलता, फिर भी उसमें जिया गया स्नेह, संघर्ष और इंतजार अर्थहीन नहीं हो जाता.

    क्यों खास है फिल्म?
    स्वतंत्र सिनेमा की शक्ति इसी स्वाभाविकता में है. वो जीवन को उसकी उलझनों, खामोशियों और असहज प्रश्नों के साथ सामने रख सकता है. ‘लवरेज’ मौलिक कहानियों की इसी महत्ता को रेखांकित करती है, ऐसी कहानियां जो परिचित जीवन में छिपे अनसुने अनुभवों को आवाज देती हैं.

    फिल्म में चार गीत हैं, जिनमें से तीन को मशहूर गायिका मधुश्री भट्टाचार्य ने स्वर दिया है. कथा, पटकथा और गीत मनोज कृष्ण के हैं; कोलकाता की कहानी में गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की रचना भी शामिल है. संगीत रॉबी बादल ने तैयार किया है.

    फिल्म के अंत में मधुश्री की आवाज़ में गूंजता गीत- पूछती फिर रही लड़कियां… महिलाओं के विरुद्ध हिंसा की पीड़ा और प्रतिरोध को स्वर देता है. गीत ऑडियंस से जवाब मांगता है, स्त्री की गरिमा, सुरक्षा और स्वतंत्रता पर उठे सवालों का जवाब पितृसत्ता देगी, या मौन बनी रहेगी? फिल्म दर्शकों को इस प्रश्न के साथ लौटाती है.

    पत्रकारिता और लेखन से निर्देशन में आए मनोज कृष्ण की यह पहली फिल्म है. सर्कल क्रिएशन स्टूडियो में तैयार ‘लवरेज’ को टीएनवी फिल्म्स रिलीज करने जा रही है. टीएनवी के निदेशक प्रज्ञेश कुमार सिंह के अनुसार, कंपनी मौलिक कहानियों और सिनेमा में नए प्रयोग करने वाले स्वतंत्र फिल्मकारों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध है. फिल्म जल्द देशभर के सिनेमाघरों में दर्शकों तक पहुंचाने की तैयारी है.

    बता दें कि फिल्म में चंदन रॉय, नंद किशोर पंत, बसंत, रवि, राजेश रमन, सिमरन, दिव्या और राजश्री अहम भूमिका में हैं.

  • रोज की सादी दाल से हो गए हैं बोर तो बनाएं पंजाबी दाल तड़का, स्वाद ऐसा कि बार-बार मांगेंगे

    रोज की सादी दाल से हो गए हैं बोर तो बनाएं पंजाबी दाल तड़का, स्वाद ऐसा कि बार-बार मांगेंगे

    दाल भारतीय खाने का एक अहम हिस्सा है और ज्यादातर घरों में इसे रोज बनाया जाता है. अगर आप रोज की सादी दाल से कुछ अलग और टेस्टी ट्राई करना चाहते हैं तो पंजाबी दाल तड़का बना सकते हैं. इसमें चना दाल और तूर दाल को मसालों के साथ पकाया जाता है और ऊपर से लहसुन, जीरा और सूखी लाल मिर्च का तड़का लगाया जाता है. इसका स्वाद काफी चटपटा और खुशबूदार होता है. इसे आप रोटी, नान, पराठे या चावल के साथ सर्व कर सकते हैं. तो आइए जानते हैं घर पर पंजाबी दाल तड़का कैसे बना सकते हैं और इसे बनाने के लिए किन-किन चीजों की जरूरत होती है.

    इंग्रेडिएंट्स (Ingredients)
    दाल के लिए
    1/2 कप चना दाल
    1/2 कप तूर दाल
    1/2 छोटी चम्मच हल्दी पाउडर
    1/2 छोटी चम्मच नमक
    1 कप पानी

    ग्रेवी के लिए
    2 बड़े चम्मच तेल
    1 छोटी चम्मच जीरा
    1 छोटी चम्मच अदरक-लहसुन का पेस्ट
    1 बारीक कटा हुआ प्याज
    1 बारीक कटा हुआ टमाटर
    एक चौथाई छोटी चम्मच नमक
    1 छोटी चम्मच धनिया पाउडर
    1/2 कप दाल का पानी
    1/2 छोटी चम्मच कसूरी मेथी
    1 बारीक कटी हुई हरी मिर्च
    1/2 छोटी चम्मच गरम मसाला

    तड़के के लिए
    2 बड़े चम्मच तेल
    आधा छोटी चम्मच जीरा
    1 छोटी चम्मच बारीक कटा हुआ लहसुन
    2 साबुत सूखी लाल मिर्च
    1/2 छोटी चम्मच बारीक कटा हुआ अदरक
    1/2 छोटी चम्मच लाल मिर्च पाउडर
    2 बड़े चम्मच बारीक कटा हुआ हरा धनिया

    पंजाबी दाल तड़का बनाएंगे कैसे?

    • पंजाबी दाल तड़का बनाने के लिए सबसे पहले चना दाल और तूर दाल को अच्छी तरह धोकर लगभग 2 घंटे के लिए अलग-अलग भिगो दें. इसके बाद दोनों दालों को प्रेशर कुकर में डालें. इसमें हल्दी, नमक और पानी डालकर 3 से 4 सीटी आने तक पकाएं. दाल अच्छी तरह गल जानी चाहिए.
    • अब एक कड़ाही में तेल गर्म करें और उसमें जीरा डालकर चटकाएं. इसके बाद अदरक-लहसुन का पेस्ट डालकर कुछ सेकंड भूनें. अब इसमें बारीक कटा प्याज डालें और हल्का सुनहरा होने तक पकाएं.
    • प्याज के भुनने के बाद टमाटर, नमक, धनिया पाउडर, हरी मिर्च और गरम मसाला डालें. सभी चीजों को अच्छी तरह मिलाकर तब तक भूनें, जब तक टमाटर नरम होकर मसाले अच्छी तरह पक न जाएं. इसके बाद कसूरी मेथी डालकर मिला दें.
    • अब इसमें आधा कप दाल का पानी और उबली हुई दाल डालें. जरूरत के हिसाब से थोड़ा पानी मिलाकर दाल को धीमी आंच पर 5 से 7 मिनट तक पकाएं, ताकि मसालों का स्वाद दाल में अच्छी तरह मिल जाए.
    • अब दाल के लिए तड़का तैयार करें. इसके लिए एक छोटे पैन में तेल गर्म करें. इसमें जीरा, बारीक कटा लहसुन, अदरक और साबुत सूखी लाल मिर्च डालकर सुनहरा होने तक भूनें. आखिर में लाल मिर्च पाउडर और हरा धनिया डालें.
    • तैयार तड़के को गरमा-गरम दाल के ऊपर डालें. बस तैयार है पंजाबी स्टाइल दाल तड़का. इसे जीरा राइस, सादी रोटी, तंदूरी रोटी, नान या पराठे के साथ सर्व करें.
    •  
  • यूपी में ‘स्वच्छता ही सेवा-2026’ अभियान बना जन आंदोलन

    यूपी में ‘स्वच्छता ही सेवा-2026’ अभियान बना जन आंदोलन

    यूपी में 'स्वच्छता ही सेवा-2026' अभियान बना जन आंदोलन 

    ‘स्वच्छता में सहभाग, स्वच्छ भारत-विकसित भारत’ की थीम पर चला राष्ट्रव्यापी अभियान  

    21 हजार से अधिक जनभागीदारी कार्यक्रमों में करीब 27 लाख नागरिकों ने लिया हिस्सा

    157 घंटे के महासफाई अभियान से सार्वजनिक स्थलों पर स्वच्छता को मिली गति

    स्वच्छ पाठशाला के जरिए 2.16 लाख बच्चों को स्वच्छता अभियान से जोड़ा गया

    स्वच्छ भारत दिवस पर सफाई मित्रों, स्वच्छ सारथी क्लब और स्वयं सहायता समूहों का सम्मान

    लखनऊ
    'स्वच्छता ही सेवा' राष्ट्रव्यापी अभियान ने उत्तर प्रदेश में जन आंदोलन का रूप लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस (17 सितंबर) से लेकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती (2 अक्टूबर) तक चलाए गए इस अभियान की थीम ‘स्वच्छता में सहभाग, स्वच्छ भारत विकसित भारत’ रही। नगर निगमों और नगर पंचायतों को स्वच्छ बनाने के साथ नागरिकों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने और उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शुरू किए गए इस राष्ट्रीय अभियान को उत्तर प्रदेश में बड़ी सफलता मिली है।

    अभियान का शुभारंभ समस्त निकायों में मेयर, पार्षदों, जनप्रतिनिधियों और करीब 12 लाख नागरिकों की सहभागिता के साथ श्रमदान से हुआ। 21 हजार से अधिक जनभागीदारी कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें करीब 27 लाख नागरिकों ने प्रतिभाग किया। स्वच्छ वातावरण प्रोत्साहन समितियों, स्वच्छ सारथी क्लबों और स्वयं सहायता समूहों समेत लगभग 47 लाख नागरिकों ने अभियान में सहभागिता और सहयोग किया है।

    जारी रहेगा विशेष स्वच्छता अभियान
    उत्तर प्रदेश में ‘स्वच्छता ही सेवा’ को विस्तार देते हुए 17 अक्टूबर 2026 तक विशेष स्वच्छता अभियान चलाया जा रहा है। इसके अंतर्गत ऐसे स्थानों को स्वच्छ किया जा रहा है, जहां नियमित रूप से अपेक्षित सफाई नहीं हो पाती। करीब 1.22 लाख स्वच्छता लक्षित इकाइयां (CTU) चिह्नित की गई हैं, जिनमें लगभग 1.10 लाख का विलोपन नागरिकों की सहभागिता से किया जा चुका है। अभियान के दौरान करीब 25 हजार सार्वजनिक स्थलों, 6,788 बाजारों, 13,919 मोहल्लों, 9,440 शौचालयों और 6,769 कार्यालयों में विशेष सफाई अभियान चलाकर स्वच्छता सुनिश्चित की गई है। 

    स्वच्छ पाठशाला से बच्चों में संस्कार
    स्वच्छ पाठशाला कार्यक्रम के तहत करीब 13 हजार कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें 3,640 स्वच्छ सारथी क्लबों से संबंधित करीब 2.16 लाख बच्चों को अभियान से जोड़ा गया। बच्चों के माध्यम से स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए 8,358 प्रतियोगिताएं एवं जागरूकता गतिविधियां आयोजित की गईं।

    सफाई मित्रों की सुरक्षा और सम्मान पर जोर
    स्वच्छता मित्र सुरक्षा शिविर के तहत 4,202 शिविर आयोजित किए गए, जिनमें करीब 99 हजार सफाई मित्रों ने भाग लिया। लगभग 40 हजार सफाई मित्रों को सम्मानित किया गया। वहीं करीब 88 हजार सफाई मित्रों का स्वास्थ्य परीक्षण, 63 हजार को पीपीई किट का वितरण और करीब 1.77 लाख को विभिन्न सरकारी योजनाओं से लाभान्वित किया गया।

    25 लाख घरों तक पहुंचा स्वच्छता संदेश
    जन भागीदारी के तहत करीब 25 लाख घरों को स्वच्छता आंदोलन से जोड़ा गया। लोगों को कचरे के स्रोत पर ही पृथक्करण और स्वच्छता की जिम्मेदारी में सक्रिय भागीदारी के लिए जागरूक किया गया।

    आरआरआर कॉन्सेप्ट से स्वच्छता के साथ समृद्धि
    स्वच्छता से समृद्धि कार्यक्रम के तहत आरआरआर (रिड्यूस, रीयूज व रीसाइकिल) कॉन्सेप्ट पर 3,461 कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसके साथ ही विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर स्वच्छता से जुड़ी 17,486 गतिविधियां आयोजित की गईं, जिनमें एक लाख से अधिक नागरिकों ने भागीदारी की।

    2 अक्टूबर को मनाया गया स्वच्छ भारत दिवस
    अभियान के तहत 2 अक्टूबर को स्वच्छ भारत दिवस उत्सव के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर विभिन्न निकायों में जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में स्वच्छता के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले सफाई मित्रों, स्वच्छ सारथी क्लब के सदस्यों, ब्रांड एंबेसडरों और स्वयं सहायता समूहों को सम्मानित किया गया।

  • BHEL को मिला 80 वंदे भारत ट्रेनों का मेगा ऑर्डर, भोपाल में बनेंगी मोटर; 176 kmph होगी रफ्तार

    BHEL को मिला 80 वंदे भारत ट्रेनों का मेगा ऑर्डर, भोपाल में बनेंगी मोटर; 176 kmph होगी रफ्तार

    भोपाल
    देश में अर्ध-तेज गति वाली रेल सेवाओं के विस्तार में भोपाल की भूमिका अब और ज्यादा मजबूत होने जा रही है। भारतीय रेल नेटवर्क पर दौड़ने वाली आधुनिक ट्रेनों को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। BHEL-टीटागढ़ वैगन्स लिमिटेड (Titagarh Wagons Ltd) समूह को 80 वंदे भारत ट्रेनसेट के निर्माण के लिए 23,000 करोड़ रुपये से अधिक का भारी-भरकम ऑर्डर मिला है। इस मेगा प्रोजेक्ट में ट्रेनों के निर्माण के साथ-साथ अगले 35 साल तक उनके रखरखाव की बड़ी जिम्मेदारी भी शामिल है।

    भोपाल यूनिट तैयार करेगी ट्रेनों का मोटर और विद्युत तंत्र
    इस महत्वाकांक्षी परियोजना में BHEL की भोपाल इकाई मुख्य रूप से ट्रेनों के मोटर तैयार करने का काम करेगी। इसके अलावा, कंपनी की भोपाल, बेंगलुरु और झांसी इकाइयां मिलकर इन आधुनिक ट्रेनों के लिए जरूरी प्रणोदन और विद्युत तंत्र का निर्माण करेंगी। ये सभी प्रणालियां ट्रेन के सुचारू संचालन के लिए बेहद जरूरी होती हैं। यही तंत्र ट्रेन में बिजली की आपूर्ति और उसे तेज गति प्रदान करने का काम करते हैं, इसलिए इन्हें तकनीकी रूप से ट्रेन का 'इलेक्ट्रिक हार्ट' भी कहा जा सकता है।

    बड़ा प्रोजेक्ट और लंबी जिम्मेदारी
    BHEL-टीटागढ़ वैगन्स समूह को 80 वंदे भारत ट्रेनसेट के लिए 23,000 करोड़ रुपये से अधिक का ऑर्डर मिला है। इस अनुबंध में ट्रेनों के निर्माण के साथ-साथ 35 साल तक का लंबा रखरखाव भी शामिल है।

    176 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार के लिए तैयार होंगी ट्रेनें
    नई पीढ़ी की इन वंदे भारत ट्रेनों को अधिकतम 176 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार के लिए डिजाइन किया जाएगा, जबकि इनका नियमित परिचालन 160 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से किया जाएगा। इस पूरी परियोजना की सबसे खास बात यह है कि इसमें केवल ट्रेन डिब्बों का निर्माण ही शामिल नहीं है, बल्कि उनके एकीकरण, परीक्षण और दीर्घकालिक रखरखाव का जिम्मा भी संयुक्त रूप से उठाया जाएगा।

    तीन इकाइयों की विशेषज्ञता का होगा इस्तेमाल
    इस परियोजना के जरिए BHEL अपनी अलग-अलग निर्माण इकाइयों की विशेषज्ञता का पूरा इस्तेमाल करेगा। भोपाल के साथ-साथ बेंगलुरु और झांसी की यूनिट्स भी मिलकर काम करेंगी। ट्रेनसेट पूरी तरह तैयार होने के बाद उनके परीक्षण और मेंटेनेंस का काम दोनों कंपनियां मिलकर संभालेंगी, जिससे रेलवे सफर को और अधिक सुरक्षित और आरामदायक बनाया जा सके।

  • शुक्र आज से होंगे वक्री, 42 दिन तक इन 4 राशियों को मिल सकता है धन और करियर में फायदा

    शुक्र आज से होंगे वक्री, 42 दिन तक इन 4 राशियों को मिल सकता है धन और करियर में फायदा

    ज्योतिष में शुक्र को प्रेम, विवाह, सौंदर्य, सुख-सुविधा, कला और भौतिक सुखों का कारक ग्रह माना जाता है.  ऐसे में जब शुक्र अपनी चाल बदलकर वक्री अवस्था में आता है तो इन सभी क्षेत्रों से जुड़े मामलों में बदलाव देखने को मिल सकते हैं. साल 2026 में शुक्र आज यानी 3 अक्टूबर को वक्री हो रहे हैं और करीब 42 दिनों तक इसी अवस्था में रहेंगे.  ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान कुछ राशियों के लिए पुराने मामलों की समीक्षा और रुके हुए कामों को दोबारा देखने का समय हो सकता है.

    3 अक्टूबर से 14 नवंबर तक वक्री रहेंगे शुक्र
    पंचांग आधारित गणना के अनुसार, शुक्र 3 अक्टूबर 2026 को दोपहर करीब 12:45 बजे वक्री होंगे.  इसके बाद 14 नवंबर 2026 को सुबह करीब 5:57 बजे मार्गी हो जाएंगे.  यानी शुक्र की वक्री अवस्था करीब 42 दिनों तक रहेगी.

    वैदिक ज्योतिष के अनुसार, शुक्र इस दौरान तुला राशि में वक्री गति शुरू करेंगे.  बाद में उनकी स्थिति में बदलाव होगा,14 नवंबर को वे कन्या राशि में मार्गी होंगे.

    वक्री शुक्र का क्या मतलब है?
    ज्योतिष में किसी ग्रह के वक्री होने का अर्थ उसकी दिखाई देने वाली गति का पीछे की ओर प्रतीत होना है.  इसे सामान्य तौर पर ग्रह से जुड़े विषयों की समीक्षा और पुराने मामलों पर दोबारा विचार करने से जोड़ा जाता है.

    शुक्र प्रेम और रिश्तों के साथ धन, लग्जरी, कला और व्यक्तिगत पसंद से भी जुड़े माने जाते हैं.  इसलिए शुक्र वक्री के दौरान पुराने रिश्तों, अधूरे भावनात्मक मामलों, खर्च करने की आदतों और आर्थिक फैसलों को लेकर व्यक्ति दोबारा सोच सकता है.

    इन 4 राशियों को मिल सकता है फायदा
    मिथुन राशि
    मिथुन राशि के जातकों के लिए शुक्र वक्री की अवधि रचनात्मक काम और व्यक्तिगत संबंधों से जुड़े मामलों में नए विचार ला सकती है.  पुराने संपर्क दोबारा काम आ सकते हैं, पहले से अधूरे पड़े किसी प्रोजेक्ट को फिर से शुरू करने का मौका मिल सकता है.  निवेश या पैसे से जुड़े मामलों में जल्दबाजी के बजाय अच्छी तरह जांच करना बेहतर माना जाएगा.

    कर्क राशि
    कर्क राशि के जातकों के लिए घर-परिवार और सुख-सुविधाओं से जुड़े मामलों पर ध्यान बढ़ सकता है.  घर की सजावट, प्रॉपर्टी या वाहन से जुड़ी कोई पुरानी योजना दोबारा सामने आ सकती है.  हालांकि, बड़ी खरीदारी करने से पहले बजट और जरूरत दोनों पर विचार करना जरूरी होगा.

    धनु राशि
    धनु राशि के जातकों के लिए शुक्र वक्री की अवधि आर्थिक मामलों में पुराने संपर्कों से फायदा दिला सकती है.  पहले अटकी हुई कोई पेमेंट या काम दोबारा चर्चा में आ सकता है.  करियर में भी पुराने अनुभवों का इस्तेमाल करके आगे बढ़ने का मौका मिल सकता है.

    कुंभ राशि
    कुंभ राशि के लोगों के लिए यह समय उच्च शिक्षा, यात्रा, करियर और नए अनुभवों से जुड़े मामलों पर दोबारा विचार करने वाला हो सकता है.  किसी पुराने प्लान को नए तरीके से शुरू करने का अवसर मिल सकता है.  रिश्तों में भी बातचीत के जरिए पुरानी गलतफहमियां दूर करने का मौका मिल सकता है.

    शुक्र वक्री में किन बातों का रखें ध्यान?
    शुक्र वक्री के दौरान ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार प्रेम और रिश्तों से जुड़े फैसलों में जल्दबाजी से बचने की सलाह दी जाती है.  पुराने रिश्ते या भावनाएं दोबारा सामने आ सकती हैं, इसलिए भावनात्मक स्थिति को समझकर ही कोई बड़ा फैसला लेना बेहतर माना जाता है.

    आर्थिक मामलों में भी इस अवधि को समीक्षा का समय माना जाता है.  अनावश्यक शॉपिंग, महंगी चीजों की खरीदारी या बिना जांच-पड़ताल के बड़े निवेश से बचना उचित हो सकता है.  अपने बजट, खर्च और पुराने वित्तीय फैसलों की समीक्षा करना उपयोगी रहेगा.

    19 अक्टूबर से 29 अक्टूबर तक खास अवधि
    2026 में शुक्र की वक्री अवस्था के बीच 19 अक्टूबर से 29 अक्टूबर तक शुक्र के अस्त होने की अवधि भी बताई गई है.  इसके बाद 6 नवंबर को शुक्र वक्री अवस्था में कन्या राशि में प्रवेश करेंगे, 14 नवंबर को मार्गी होंगे.

    ज्योतिषीय दृष्टि से इसलिए अक्टूबर के दूसरे हिस्से से नवंबर के मध्य तक का समय शुक्र से जुड़े मामलों में विशेष माना जा रहा है.  हालांकि किसी व्यक्ति की कुंडली में इसका प्रभाव उसकी जन्म राशि, लग्न और अन्य ग्रहों की स्थिति के आधार पर अलग हो सकता है.

  • दिल्ली पुलिस का बड़ा एक्शन, ऑपरेशन कवच-15.0 में 256 आरोपी गिरफ्तार; 214 NDPS केस दर्ज

    दिल्ली पुलिस का बड़ा एक्शन, ऑपरेशन कवच-15.0 में 256 आरोपी गिरफ्तार; 214 NDPS केस दर्ज

    नई दिल्ली
     दिल्ली पुलिस ने मादक पदार्थों की तस्करी और उससे जुड़े नेटवर्क के खिलाफ चलाए गए ‘ऑपरेशन कवच-15.0’ के तहत नशीले और मन:प्रभावी पदार्थों (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत 214 मामले दर्ज कर एक नाबालिग समेत 256 अपराधियों को पकड़ा।

    48 घंटों तक चला अभियान
    दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस के अनुसार, यह अभियान 24 सितंबर को शाम छह बजे से 26 सितंबर को शाम छह बजे तक 48 घंटे तक चलाया गया, जिसके बाद एक अक्टूबर को शाम छह बजे तक बाद की कार्रवाई की गई। इस दौरान दिल्ली ने 1,708 स्थानों पर एक साथ कार्रवाई की।पुलिस ने एक बयान में बताया कि अभियान में सभी जिला पुलिस इकाइयों के अलावा अपराध शाखा, स्वापक निरोधी कार्यबल (एएनटीएफ) और विशेष प्रकोष्ठ शामिल रहे।

    पुलिस ने ऑपरेशन में की ये बरामदगी
    पुलिस ने बताया कि कार्रवाई के दौरान 111.748 किलोग्राम गांजा, 3.959 किलोग्राम स्मैक/हेरोइन, 107.43 ग्राम कोकीन, 684.22 ग्राम एमडीएमए, 1.057 किलोग्राम चरस, एम्फेटामाइन की 55 गोलियां, अल्प्राजोलम की गोलियां, बुप्रेनॉर्फिन की 162 गोलियां, ट्रामाडोल के 8,026 कैप्सूल व 104 ग्राम मॉर्फिन समेत विभिन्न मादक पदार्थ बरामद किए गए।

    15 भगोड़े अपराधियों को किया गिरफ्तार
    पुलिस के मुताबिक, अभियान के दौरान 15 भगोड़े अपराधियों को गिरफ्तार या पकड़ा गया, जबकि एनडीपीएस मामलों में वांछित, फरार सात आरोपियों का भी पता लगाकर उन्हें गिरफ्तार किया गया। पुलिस एक अधिकारी ने बताया कि इसके अलावा बुरे चरित्र (बीसी) के 140 व्यक्तियों और हिस्ट्रीशीटर की जांच की गई तथा मादक पदार्थ गतिविधियों में संलिप्त पाए गए लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई।

    दो अफ्रीकी नागरिकों को भी पकड़ा
    उन्होंने ने बताया कि विभिन्न मामलों में विदेशी नागरिक भी पकड़े गए। इनमें तीन नाइजीरियाई नागरिकों को कोकीन और एमडीएमए की तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया गया, जबकि एक अन्य मामले में दो अफ्रीकी नागरिकों को भी पकड़ा गया।

    जब्त किए गए चार वाहन
    पुलिस ने बताया कि मादक पदार्थों के अलावा विभिन्न मामलों में नकदी, वाहन और अन्य उपकरण भी जब्त किए गए। कार्रवाई के दौरान कुल 23.08 लाख रुपये नकद बरामद किए गए। इसके साथ ही तीन कार व एक एक स्कूटी समेत चार वाहन जब्त किए गए। पुलिस ने वजन मापने की तीन इलेक्ट्रॉनिक मशीनें, एक नकदी गिनने की मशीन तथा मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े अन्य सामान भी बरामद किए।

    क्या है ऑपरेशन कवच का उद्देश्य
    पुलिस ने कहा कि कार्रवाई का उद्देश्य केवल तस्करों और आपूर्तिकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई करना ही नहीं, बल्कि मादक पदार्थों की आपूर्ति श्रृंखला, वित्तीय नेटवर्क और उससे जुड़े लाभार्थियों की पहचान कर पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करना भी है।

  • करेले की कड़वाहट भूल जाएंगे, ऐसे बनाएं मसालेदार करेला मसाला; रोटी-पराठे के साथ लगेगा लाजवाब

    करेले की कड़वाहट भूल जाएंगे, ऐसे बनाएं मसालेदार करेला मसाला; रोटी-पराठे के साथ लगेगा लाजवाब

    करेले की भुजिया और भरवां करेला तो घरों में अक्सर बनाया जाता हैं, लेकिन क्या आपने कभी करेला मसाला खाया है, यह ग्रैवी वाली सब्जी बहुत मजेदार लगती है. सबसे अच्छी बात यह है कि इसको बनाने में भी भरवां करेले की तरह समय नहीं लगता है. इस सब्जी को आप सिंपल घर के मसालों से झटपट तैयार कर सकते हैं और इसका स्वाद भी लाजवाब लगता है.

    करेला की कड़वाहट का सोचकर बच्चे और बड़े भी इसे खाने से बचते हैं. लेकिन अगर करेले को सही तरीके से पकाया जाए, तो इसकी सब्जी बेहद टेस्टी बन सकती है. करेला मसाला ऐसी ही एक मसालेदार और चटपटी सब्जी है, जिसमें प्याज, टमाटर और कई मसालों का स्वाद मिलता है. आइए घर पर करेला मसाला बनाने का आसान तरीका जानते हैं.

    करेला मसाला बनाने के लिए सामग्री
        500 ग्राम करेला
        1 बड़ा प्याज
        2 मिडियम टमाटर
        1 इंच अदरक
        5-6 लहसुन की कलियां
        2 हरी मिर्च
        1 छोटा चम्मच जीरा
        1 छोटा चम्मच कश्मीरी लाल मिर्च पाउडर
        1½ छोटा चम्मच धनिया पाउडर
        ½ छोटा चम्मच हल्दी पाउडर
        ½ छोटा चम्मच गरम मसाला
        1 छोटा चम्मच चाट मसाला
        1 छोटा चम्मच अमचूर पाउडर
        1 छोटा चम्मच चीनी
        स्वादानुसार नमक
        तलने और ग्रेवी के लिए तेल
        जरूरत के अनुसार गर्म पानी
        गार्निश के लिए हरा धनिया (बारीक कटा हुआ)

    करेले काटकर लें
    सबसे पहले करेले को बीच में काट लें और उसके अंदर के सारे बीज बाहर निकाल लें. इस दौरान करेले के पीस नहीं करने हैं, उनको ऐसे काटे की वो फूल की तरह लगे. करेले को काटने के बाद नमक और हल्दी के पानी में कुछ देर के लिए भिगोकर रख दीजिए.

    मसाले की ग्रेवी तैयार करें
    अब दूसरी कड़ाही में थोड़ा तेल गर्म करें. इसमें जीरा डालें और चटकने दें. फिर बारीक कटा प्याज डालकर हल्का सुनहरा होने तक भूनें. अब इसमें अदरक, लहसुन और हरी मिर्च डालकर कुछ देर भूनें. उसके बाद इन सभी चीजों को मिक्सर जार में डालकर पेस्ट बना लें.

    टमाटर की प्यूरी बना लें
    प्याज के बाद मिक्सर जार में कटे हुए टमाटर डालें और इसकी प्यूरी तैयार कर लें. उसके बाद कहाड़ी में तेल गर्म करें और उसमें जीरा डालकर भून लें. अब इसमें प्याज का पेस्ट और टमाटर की प्यूरी मिला दें.

    मसाले डालकर भूनें
    अब हल्दी, कश्मीरी लाल मिर्च, धनिया पाउडर, गरम मसाला, चाट मसाला और अमचूर पाउडर डालें. स्वादानुसार नमक और 1 छोटा चम्मच चीनी भी डालें. सभी मसालों को अच्छी तरह मिलाकर 2 से 3 मिनट भूने लें.

    करेले फ्राई कर लें
    जब तक मसाला भूनन रहा है, तब तक आप दूसरी कहाड़ी में तेल गर्म करके उसमें करेले फ्राई कर लें. करेले अच्छी तरह से क्रिस्पी हो जाए तो उनको प्लेट में निकालकर साइड में रख लें.

    करेले को ग्रेवी में मिलाएं
    जब मसाला तेल छोड़ने लगे तब तले हुए करेले डालकर अच्छी तरह मिलाएं. जरूरत के अनुसार थोड़ा गर्म पानी डालें और कड़ाही को ढककर कुछ मिनट लो फ्लेम पर पकाएं.

    इस तरीके से सर्व करें करेला मसाला
    जब ग्रेवी गाढ़ी हो जाए, तो गैस बंद कर दें. ऊपर से बारीक कटा हरा धनिया डालकर गार्निश कर दें. गरमागरम करेला मसाला को आप रोटी, पराठे या दाल-चावल के साथ साइड डिश की तरह सर्व कर सकते हैं. करेले को नमक के पानी में इसलिए डिबोकर रखा जाता है, ताकि उसका कड़वापन थोड़ा कम हो जाए.

  • मुख्यमंत्री योगी की मंशा को धरातल पर उतारने में जुटा मंडी परिषद, किसानों के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता

    मुख्यमंत्री योगी की मंशा को धरातल पर उतारने में जुटा मंडी परिषद, किसानों के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता

    मुख्यमंत्री योगी की मंशा को धरातल पर उतारने में जुटा मंडी परिषद, किसानों के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता 

    निदेशक कृषि उत्पादन मंडी परिषद ने नवनियुक्त मंडी सचिवों से किया संवाद  
     
    गांधी जी एवं शास्त्री जी की जयंती पर उनके चित्रों पर किया माल्यार्पण  

    नवनियुक्त मंडी सचिवों की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए दी जाएगी विशेष ट्रेनिंग

    किसानों की समस्याओं के त्वरित निस्तारण और मंडी व्यवस्था में पारदर्शिता पर दिया जोर

    लखनऊ, 
     मुख्यमंत्री योगी सरकार की किसान हितैषी नीतियों और मंशा के अनुरूप राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद द्वारा मंडी व्यवस्था को और अधिक प्रभावी एवं किसान केंद्रित बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं। यह जानकारी निदेशक मंडी परिषद जितेंद्र प्रताप सिंह ने दी। उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर अपने कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में उनके चित्र पर माल्यार्पण कर नमन किया। 

      इस अवसर पर निदेशक राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद ने कहा कि गांधी जी ने सत्य और अहिंसा का मार्ग दिखाया, वहीं लाल बहादुर शास्त्री जी ने सादगी, ईमानदारी और देशभक्ति की मिसाल कायम की। दोनों महान विभूतियों का जीवन और आदर्श आज भी प्रासंगिक हैं। इस अवसर पर उन्होंने नवनियुक्त मंडी सचिवों से संवाद किया और मंडी व्यवस्था को बेहतर बनाने के साथ ही किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का संदेश दिया। 

        निदेशक ने बताया कि प्रदेश में मंडी व्यवस्था को और अधिक प्रभावी एवं किसान हितैषी बनाने के उद्देश्य से नवनियुक्त मंडी सचिवों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान मंडी सचिवों को मंडी संचालन, विभागीय कार्यप्रणाली, किसानों से संबंधित समस्याओं के त्वरित समाधान, राजस्व एवं अन्य प्रक्रियाओं के साथ-साथ मंडी व्यवस्थाओं के प्रभावी संचालन की जानकारी दी जाएगी। मंडी सचिवों को अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी संवेदनशीलता, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ करने पर विशेष जोर दिया जाएगा।

              निदेशक ने कहा कि मंडियां किसानों के लिए केवल कृषि उपज की बिक्री का केंद्र नहीं हैं, बल्कि किसानों को बेहतर सुविधाएं और उचित वातावरण उपलब्ध कराने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। उन्होंने मंडी सचिवों को निर्देशित किया कि मंडियों में आने वाले किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। उन्होंने किसानों की शिकायतों और समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध निस्तारण करने तथा मंडी व्यवस्था से जुड़े प्रत्येक कार्य में पारदर्शिता बनाए रखने पर जोर दिया।

         जितेंद्र प्रताप सिंह ने मंडी सचिवों से कहा कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में किसानों और आढ़तियों से नियमित संवाद स्थापित करें। मंडी व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं की जानकारी लेकर उनका समयबद्ध समाधान कराया जाए। कृषि उपज की खरीद-बिक्री से संबंधित व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी की जाए, ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

             उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार का जोर किसान हितों की रक्षा के साथ-साथ सरकारी व्यवस्थाओं को अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बनाने पर है। मंडी सचिव इस व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं, इसलिए उन्हें अपने दायित्वों को पूरी गंभीरता से निभाना होगा। प्रशिक्षण में विशेष रूप से ऐसे किसानों की समस्याओं पर ध्यान देने के लिए मंडी सचिवों को तैयार किया जाएगा, जो किसी कारणवश आर्थिक अथवा अन्य कठिनाइयों से प्रभावित हैं। किसानों को मंडियों में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना और उनकी समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना विभाग की प्राथमिकता होनी चाहिए।

       निदेशक विपणन टी.के. शीबू ने बताया कि प्रदेश में मंडी व्यवस्था को और अधिक प्रभावी, पारदर्शी एवं किसान हितैषी बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। मंडियों में किसानों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ उनकी समस्याओं का समयबद्ध एवं प्राथमिकता के आधार पर समाधान सुनिश्चित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मंडी सचिवों की भूमिका किसानों और मंडी प्रशासन के बीच महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में है। इस अवसर पर मंडी परिषद के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

  • तुलसी का पौधा घर की इन 7 जगहों पर भूलकर भी न रखें, वास्तु में माना जाता है अशुभ

    तुलसी का पौधा घर की इन 7 जगहों पर भूलकर भी न रखें, वास्तु में माना जाता है अशुभ

    हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे को बेहद पवित्र माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार तुलसी को माता लक्ष्मी का स्वरूप और भगवान विष्णु को प्रिय माना गया है. यही वजह है कि कई घरों में रोजाना तुलसी की पूजा की जाती है और शाम के समय इसके पास दीपक जलाया जाता है.

    वास्तु शास्त्र में भी तुलसी के पौधे को घर में रखने के लिए कुछ दिशाओं और स्थानों को शुभ माना गया है. वहीं, कुछ जगहों पर तुलसी का पौधा लगाने से बचने की सलाह दी जाती है. मान्यता है कि गलत स्थान पर तुलसी रखने से इसके शुभ प्रभाव कम हो सकते हैं. आइए जानते हैं घर की किन 7 जगहों पर तुलसी का पौधा नहीं रखना चाहिए.

    दक्षिण दिशा में न रखें तुलसी
    वास्तु के अनुसार तुलसी का पौधा दक्षिण दिशा में लगाने से बचना चाहिए. धार्मिक मान्यता में दक्षिण दिशा का संबंध यमदेव से माना जाता है. इसलिए तुलसी के लिए इस दिशा को उपयुक्त नहीं माना जाता.

    वास्तु मान्यताओं के अनुसार तुलसी के पौधे के लिए उत्तर, पूर्व और ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा को शुभ माना जाता है.

    बेडरूम में तुलसी का पौधा न रखें
    तुलसी को पूजनीय और पवित्र पौधा माना जाता है. इसलिए इसे बेडरूम में रखने की सलाह नहीं दी जाती. धार्मिक परंपरा में तुलसी के लिए ऐसा स्थान चुनने की बात कही जाती है, जो साफ-सुथरा और शांत हो.

    बाथरूम या शौचालय के पास न लगाएं
    तुलसी का पौधा बाथरूम या शौचालय के आसपास भी नहीं रखना चाहिए. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन स्थानों को तुलसी जैसे पवित्र पौधे के लिए उचित नहीं माना जाता. इसलिए तुलसी को हमेशा ऐसी जगह रखना चाहिए, जहां साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जा सके.

    अंधेरी जगह पर तुलसी न रखें
    तुलसी के पौधे को ऐसी जगह नहीं रखना चाहिए जहां पर्याप्त रोशनी या हवा न पहुंचती हो. बंद कमरे या घर के किसी अंधेरे कोने में तुलसी रखने से पौधे की सेहत भी प्रभावित हो सकती है. इसलिए ऐसी जगह चुनना बेहतर माना जाता है, जहां पौधे को पर्याप्त प्राकृतिक रोशनी और हवा मिल सके.

    चूल्हे के बिल्कुल पास न रखें
    वास्तु मान्यताओं के अनुसार तुलसी का पौधा रसोई में चूल्हे के बिल्कुल पास नहीं रखना चाहिए. ज्यादा गर्मी और धुआं पौधे को नुकसान पहुंचा सकता है. इसलिए अगर तुलसी को रसोई के आसपास रखा भी जाए तो उसे चूल्हे से पर्याप्त दूरी पर रखना चाहिए.

    कूड़ेदान या गंदगी वाली जगह से दूर रखें
    तुलसी को पवित्र पौधा माना जाता है. इसलिए इसे कूड़ेदान, गंदगी या किसी ऐसे स्थान के पास नहीं रखना चाहिए जहां साफ-सफाई न रहती हो. धार्मिक परंपराओं में तुलसी के आसपास का स्थान साफ रखने और नियमित रूप से इसकी देखभाल करने पर जोर दिया जाता है.

    सीढ़ियों के नीचे न लगाएं
    घर में सीढ़ियों के नीचे तुलसी का पौधा लगाने से भी बचना चाहिए. ऐसी जगह पर अक्सर पर्याप्त रोशनी और हवा नहीं मिलती. इसके अलावा लगातार आवाजाही के कारण पौधे की देखभाल भी ठीक से नहीं हो पाती. इसलिए तुलसी के लिए ऐसी जगह चुनने की सलाह दी जाती है जहां वह खुली जगह में रहे और उसकी नियमित देखभाल की जा सके.

    तुलसी के लिए कौन सी दिशा शुभ मानी जाती है?
    वास्तु मान्यताओं के अनुसार तुलसी के पौधे के लिए उत्तर, पूर्व और ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा को शुभ माना जाता है. इन दिशाओं में तुलसी का पौधा रखने की परंपरा कई घरों में देखने को मिलती है.

    तुलसी को नियमित रूप से पानी देना, उसके आसपास साफ-सफाई रखना और शाम के समय दीपक जलाना भी धार्मिक परंपराओं से जुड़ा हुआ है.