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  • यूपी में डूब क्षेत्र के हजारों घरों को मिलेगी राहत, अब मिल सकेगा अस्थायी नियमित बिजली कनेक्शन

    यूपी में डूब क्षेत्र के हजारों घरों को मिलेगी राहत, अब मिल सकेगा अस्थायी नियमित बिजली कनेक्शन

    लखनऊ
     यमुना-हिंडन नदी के डूब क्षेत्र में रहने वालों को अब मजबूरी में अवैध बिजली कनेक्शन के भरोसे नहीं रहना होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर स्टेट ट्रांसफार्मेशन कमीशन (राज्य परिवर्तन आयोग) ने डूब क्षेत्र के हजारों निवासियों को अस्थायी नियमित बिजली कनेक्शन देने का रास्ता निकाला है। इस संबंध में जल्द ही आदेश जारी करने की तैयारी है।

    दरअसल, 16 वर्ष पुराने तत्कालीन मुख्य सचिव अतुल कुमार गुप्ता के एक शासनादेश के कारण पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन ने गौतमबुद्धनगर के नोएडा और गाजियाबाद के छिजारसी, चोटपुर, शिव विहार, कनावटी आदि यमुना-हिंडन नदी के डूब क्षेत्र में वर्ष 2010 से बिजली कनेक्शन देने पर रोक लगा रखी है।

    मुख्यमंत्री के निर्देश पर स्टेट ट्रांसफार्मेशन कमीशन ने वैध कनेक्शन देने का निकाला रास्ता
    वैसे तो इस क्षेत्र में निर्माण ही नहीं हो सकता है लेकिन हजारों घर अवैध तरीके से बन चुके हैं। जांच में डूब क्षेत्र के 13 हजार से अधिक घरों (संपत्तियों) में अवैध कनेक्शन के जरिए बड़े पैमाने पर बिजली की चोरी हो रही है। प्रति वर्ष 16 करोड़ रुपये से ज्यादा की बिजली चोरी का मामला हाल ही में मुख्यमंत्री के समक्ष आयोग के सीईओ (मुख्य कार्यपालक अधिकारी) मनोज कुमार सिंह ने उठाते हुए कहा था कि निजी व्यक्तियों के माध्यम से पूरे क्षेत्र में अवैध तरीके से बिजली आपूर्ति कर 11 रुपये यूनिट तक की वसूली की जा रही है।

    विद्युत वितरण निगम के कार्मिकों की मिलीभगत से हो रही वसूली का एक भी पैसा कॉरपोरेशन को नहीं मिल रहा है। योगी ने इस पर कॉरपोरेशन प्रबंधन पर नाराजगी जताते हुए डूब क्षेत्र के निवासियों को वैध कनेक्शन देने का रास्ता निकालने के निर्देश दिए थे।

    सिंह ने बताया चूंकि बिजली मूलभूत आवश्यकता है इसलिए न्यायालय व प्रशासनिक आदेश के साथ ही ऊर्जा विभाग की रिपोर्ट आदि पर सभी पहलुओं से विचार-विमर्श करते हुए सशर्त कनेक्शन देने का रास्ता निकाला गया है। इस पर मुख्यमंत्री की सहमति मिलते ही आदेश जारी कर दिया जाएगा।

    सिंह ने बताया कि जब तक डूब क्षेत्र के अनाधिकृत निर्माण के खिलाफ कार्यवाही नहीं की जाती है तब तक वहां के निवासियों को अंतरिम रूप से अस्थाई नियमित बिजली कनेक्शन बाकायदा कैंप लगाकर दिए जाएंगे। पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम व नोएडा पावर कंपनी अपने-अपने डूब क्षेत्र में कनेक्शन देने का पूरा डाटा अलग रखेगा।

    संपत्ति के निवासियों/कब्जाधारियों द्वारा बिजली के नेटवर्क के विकास और कनेक्शन लागत का खर्च उठाने पर कनेक्शन इस शर्त के साथ दिया जाएगा कि कनेक्शन को कभी निवास का कोई वैधानिक अधिकार/स्वामित्व का प्रमाण पत्र नहीं माना जाएगा। कोर्ट आदि के आदेश पर परिसर/संपत्तियों को खाली करना होगा।

    प्रशासन द्वारा निर्माण हटाए जाने की स्थिति में कनेक्शन काटने के लिए उपभोक्ता से पूछने की आवश्यकता नहीं होगी। बाढ़ आने पर मुआवजा नहीं मांगा जा सकेगा। पर्यावरणीय क्षति मुआवजे आदि का भुगतान उपभोक्ता को ही करना होगा।

    सिंह का मानना है कि नेटवर्क विकसित कर कनेक्शन देने से विद्युत दुर्घटनाएं रुकने के साथ ही बिजली चोरी पर अंकुश लगेगा। उपभोक्ताओं को भी बिजली के लिए ज्यादा बिल नहीं देना पड़ेगा।

  • मोहसिन नकवी का सपना चकनाचूर, जन-गण-मन पर सावधान खड़ी रही पाकिस्तान टीम, भारत का दबदबा

    मोहसिन नकवी का सपना चकनाचूर, जन-गण-मन पर सावधान खड़ी रही पाकिस्तान टीम, भारत का दबदबा

    नागोया
    नागोया में एशियन गेम्स 2026 के पोडियम पर एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने करोड़ों भारतीयों का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया, जबकि पाकिस्तानी खेमे की सारी हेकड़ी निकालकर रख दी। भारत ने फाइनल मुकाबले में पाकिस्तान को 19 रनों से हराकर लगातार दूसरी बार एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल अपने नाम किया। जीत के बाद जब विक्ट्री सेरेमनी में भारत का तिरंगा झंडा सबसे ऊपर लहराया और स्टेडियम में 'जन-गण-मन' की गूंज हुई, तो रजत पदक जीतने वाली पूरी पाकिस्तानी क्रिकेट टीम को मजबूरी में सिर झुकाकर भारतीय राष्ट्रगान के सम्मान में सावधान मुद्रा में खड़ा होना पड़ा।

    नकवी की चालबाजी और पाकिस्तान के सपने चकनाचूर
    इस शर्मनाक पल से पहले पाकिस्तानी मीडिया और पीसीबी अध्यक्ष मोहसिन नकवी कई तरह के हवा-हवाई सपने देख रहे थे। चर्चाएं थीं कि नकवी मेडल सेरेमनी के दौरान गोल्ड मेडल बांटने की फिराक में थे ताकि अगर भारतीय टीम इसे लेने से इनकार करे तो भारत पर गाज गिरे। साथ ही पाकिस्तान यह मानकर बैठा था कि वे भारत को हराकर अपना राष्ट्रगान बजवाएंगे और भारतीय खिलाड़ियों को उसके सम्मान में खड़ा होना पड़ेगा। लेकिन भारतीय जांबाज खिलाड़ियों ने मैदान पर अपनी विस्फोटक परफॉर्मेंस से पाकिस्तान के इन तमाम मंसूबों और गंदे मंसूबों को पलक झपकते ही चकनाचूर कर दिया।

    2022 से जारी है भारतीय क्रिकेट की बेजोड़ बादशाहत
    पोडियम पर महिला टीम की ही तरह पुरुष टीम का भी स्वर्णिम परचम लहराना यह साफ दिखाता है कि भारतीय क्रिकेट अब पाकिस्तान से मील आगे निकल चुका है। साल 2022 के टी20 वर्ल्ड कप (मेलबर्न), 2023 के वनडे वर्ल्ड कप (अहमदाबाद), एशिया कप और अब 2026 एशियन गेम्स तक चाहे पुरुष टीम हो या महिला टीम, भारत ने हर मंच पर पाकिस्तान को बुरी तरह रौंदा है। पाकिस्तान का भारत को हराने का सपना एक बार फिर नागोया की सरजमीं पर हमेशा-हमेशा के लिए दफन हो गया।

     

  • एशियन गेम्स में 2 गोल्ड जीतने वाली नीरू ढांडा होंगी भारत की महिला ध्वजवाहक, समापन समारोह में करेंगी नेतृत्व

    एशियन गेम्स में 2 गोल्ड जीतने वाली नीरू ढांडा होंगी भारत की महिला ध्वजवाहक, समापन समारोह में करेंगी नेतृत्व

     नागोया
     ट्रैप निशानेबाज नीरू ढांडा रविवार को एशियाई खेलों के समापन समारोह में भारत की ध्वजवाहक होंगी। नीरू ने एशियाई खेलों में दो स्वर्ण पदक और एक टीम रजत पदक जीतकर शानदार प्रदर्शन किया। 27 वर्षीय नीरू एशियाई खेलों में अपना तीसरा पदक जीतने के एक दिन बाद भारत लौट गई थीं।

    अब वह समापन समारोह में भारतीय दल का नेतृत्व करने के लिए शनिवार सुबह नागोया वापस जाएंगी। खेलों भारतीय अभियान की उप प्रमुख अंजलि भागवत ने शुक्रवार को बताया कि नीरू समापन समारोह में महिला ध्वजवाहक होगी। वह कल सुबह नागोया लौट रही हैं।

    पुरुष ध्वजवाहक के बारे में फैसला कल किया जाएगा। नीरू ने महिलाओं की व्यक्तिगत ट्रैप स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने के बाद मनीषा कीर और आशिमा अहलावत के साथ मिलकर महिलाओं की टीम स्पर्धा में रजत पदक हासिल किया। इसके बाद उन्होंने काइनन चेनाई के साथ जोड़ी बनाकर ट्रैप मिक्स्ड टीम में स्वर्ण पदक जीता।

  • रोहित शर्मा ने बतौर ओपनर पूरे किए 10 हजार रन, सचिन तेंदुलकर का वर्ल्ड रिकॉर्ड टूटा

    रोहित शर्मा ने बतौर ओपनर पूरे किए 10 हजार रन, सचिन तेंदुलकर का वर्ल्ड रिकॉर्ड टूटा

    चंडीगढ़
    भारत के दिग्गज बल्लेबाज रोहित शर्मा ने शनिवार को न्यू चंडीगढ़ में वेस्टइंडीज के खिलाफ तीसरे वनडे में दो रन बनाते ही इतिहास रच डाला। वह वनडे क्रिकेट में बतौर ओपनर सबसे तेज 10 हजार रन कंप्लीट करने वाले प्लेयर बन गए हैं। उन्होंने 202 पारियों में यह कीर्तिमान हासिल किया। 'हिटमैन' के नाम से मशहूर रोहित ने महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर का वर्ल्ड रिकॉर्ड ध्वस्त किया है। सचिन ओपनर के रूप में 214 पारियों में 10 हजारी बने थे। उनके बाद वेस्टइंडीज के पूर्व धाकड़ ओपनर क्रिस गेल (268 पारी) और श्रीलंका के पूर्व खतरनाक सलामी बल्लेबाज सनथ जयसूर्या (303 पारी) हैं। वनडे इतिहास में सिर्फ चार क्रिकेटर ही बतौर ओपनर 10 हजार या उससे अधिक रनों का आंकड़ा पार कर पाए हैं।

    रोहित शर्मा इस लिस्ट में चौथे नंबर पर
    39 वर्षीय वनडे क्रिकेट में बतौर ओपनर सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ियों की लिस्ट में फिलहाल चौथे स्थान पर हैं। उनसे आगे गेल हैं, जिन्होंने 10179 रन बटोरे। जयसूर्या 12740 रनों के साथ दूसरे नंबर हैं। सचिन ने 15310 रन बनाए। टॉप 10 लिस्ट में तीन भारतीय शामिल हैं। भारत के पूर्व कप्तान सौर गांगुवी ने सलामी बल्लेबाज के रूप में 9146 रन जुटाए। बता दें कि रोहित ने वेस्टइंडीज के खिलाफ दूसरे वनडे में शतक जमाया था। उन्होंने गुवाहाटी में 75 गेंदों में 101 रन बनाए, जिसमें 10 चौके और 6 सिक्स थे। यह उनके वनडे करियर का 35वां शतक था।

    वनडे क्रिकेट इतिहास में बतौर ओपनर सबसे ज्यादा रन

    15310 – सचिन तेंदुलकर (भारत)

    12740 – सनथ जयसूर्या (श्रीलंका)

    10179 – क्रिस गेल (वेस्टइंडीज)

    10000 – रोहित शर्मा (भारत)

    9200 – एडम गिलक्रिस्ट (ऑस्ट्रेलिया)

    9146 – सौरव गांगुली (भारत)

    8648 – डेसमंड हेन्स क्रिस गेल (वेस्टइंडीज)

    8357 – तमीम इकबाल (बांग्लादेश)

    8156 – सईद अनवर (पाकिस्तान)

    8083 – हाशिम अमला (साउथ अफ्रीका)

    रोहित ने पहली बार कब ओपनिंग की?
    रोहित ने सितंबर 2007 में वनडे डेब्यू किया था। हालांकि, रोहित को लंबे समय बाद ओपनिंग करना का चांस मिला। उन्होंने वनडे में पहली बार पारी की शुरुआथ जनवरी 2011 में साउथ अफ्रीका दौरे पर की। रोहित ने तीन मैचों में ओपनिंग की लेकिन कुछ कास प्रभाव नहीं छोड़ पाए। वह उसके बाद टीम से अंदर-बाहर होते रहे। रोहित को फिर जनवरी 2013 में ओपनर के तौर पर आजमाने का फैसला किया गया, जिसके बाद 'हिटमैन' ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। वह टेस्ट और टी20 इंटरनेलनल से संन्यास ले चुके हैं और भारत के लिए सिर्फ वनडे में एक्टिव हैं।

  • फटे और रूखे होंठों से मिलेगा छुटकारा, घर पर ऐसे बनाएं चुकंदर का नेचुरल लिप बाम

    फटे और रूखे होंठों से मिलेगा छुटकारा, घर पर ऐसे बनाएं चुकंदर का नेचुरल लिप बाम

    होंठ हमारे चेहरे का एक ऐसा हिस्सा हैं, जिनकी खूबसूरती पूरे चेहरे की रंगत को निखार देती है. लेकिन बदलते मौसम में होंठों का खास ख्याल रखना जरूरी हो जाता है. ठंडी और सूखी हवा, तेज धूप, कम पानी पीना या होंठों को बार-बार चाटने की आदत की वजह से होंठ रूखे और बेजान नजर आने लगते हैं. कई बार इनमें दरारें भी पड़ जाती हैं और होंठों से पपड़ी निकलने लगती है. ऐसे में होंठों को मुलायम और मॉइश्चराइज रखने के लिए लोग लिप बाम का इस्तेमाल करते हैं.

    मार्केट में अलग-अलग तरह के लिप बाम आसानी से मिल जाते हैं लेकिन आप नेचुरल तरीके से अपने होंठों का ख्याल रखना चाहते हैं तो घर पर चुकंदर की मदद से आसानी से लिप बाम बना सकते हैं. यह न सिर्फ होंठों को गहराई से मॉइश्चराइज रखता है, बल्कि उन्हें नेचुरल गुलाबी रंग भी देता है. तो आइए जानते हैं घर पर आसानी से चुकंदर का लिप बाम कैसे बना सकते हैं और इसे बनाने के लिए किन-किन चीजों की जरूरत होगी.  

    इंग्रेडिएंट्स (Ingredients)
    1 मीडियम साइज चुकंदर
    1 चम्मच नारियल तेल
    1 चम्मच बादाम का तेल
    1 चम्मच कद्दूकस किया हुआ बी वैक्स (मधुमोम) या वैसलीन
    1-2 बूंद विटामिन E ऑयल (ऑप्शनल)

    चुकंदर का लिप बाम घर पर कैसे बनाएं?
        लिप बाम बनाने के लिए सबसे पहले चुकंदर को अच्छी तरह धोकर उबाल लें. जब चुकंदर नरम हो जाए तो इसे निकालकर ठंडा होने दें. ठंडा होने के बाद चुकंदर को छीलकर अच्छी तरह पीस लें.
        अब एक छोटे बर्तन में पिसा हुआ चुकंदर, नारियल तेल, बादाम का तेल, बी वैक्स और विटामिन E ऑयल डालें. अगर बी वैक्स उपलब्ध नहीं है तो इसकी जगह थोड़ी वैसलीन इस्तेमाल कर सकते हैं. सभी चीजों को अच्छी तरह मिलाएं और धीमी आंच पर गर्म करें. मिश्रण को तब तक गर्म करें, जब तक सभी चीजें अच्छी तरह मिलकर एकसार न हो जाएं.
        अब गैस बंद कर दें और तैयार मिश्रण को थोड़ा ठंडा होने दें. इसके बाद इसे किसी साफ और छोटे कंटेनर में डालकर फ्रिज में रख दें. ठंडा होने के बाद आपका होममेड चुकंदर लिप बाम तैयार है. इसे जरूरत के अनुसार होंठों पर लगा सकते हैं.

    चुकंदर से बने लिप बाम के फायदे
    चुकंदर होंठों को हल्का नेचुरल टिंट देने में मदद कर सकता है. वहीं, नारियल और बादाम का तेल होंठों की ड्राइनेस कम करने और उन्हें मुलायम रखने में मदद करते हैं. बी वैक्स या वैसलीन होंठों पर एक परत बनाने में मदद करता है, जिससे नमी लंबे समय तक बनी रह सकती है.

    इन बातों का रखें ध्यान
    इस लिप बाम को इस्तेमाल करने से पहले पैच टेस्ट जरूर करें. अगर लगाने के बाद जलन, खुजली या किसी तरह की एलर्जी महसूस हो तो इसका इस्तेमाल बंद कर दें. आप चाहें तो ताजे साबुत चुकंदर की जगह चुकंदर पाउडर का भी इस्तेमाल कर सकते हैं.

    होममेड लिप बाम में प्रिजर्वेटिव नहीं होते, इसलिए इसे कम मात्रा में बनाएं और साफ, सूखे कंटेनर में रखें. लंबे समय तक स्टोर करने के बजाय इसे थोड़े समय में इस्तेमाल कर लेना बेहतर है.

  • MP के 50 लाख श्रमिकों का बढ़ा महंगाई भत्ता, रोजाना ₹6 की बढ़ोतरी से मिलेगा फायदा

    MP के 50 लाख श्रमिकों का बढ़ा महंगाई भत्ता, रोजाना ₹6 की बढ़ोतरी से मिलेगा फायदा

    भोपाल 

    प्रदेश के सरकारी और निजी सेक्टर में काम करने वाले करीब 50 लाख श्रमिकों को एक अक्टूबर से 6 रुपए प्रतिदिन के मान से बढ़ा हुआ परिवर्तनशील महंगाई भत्ता दिया जाएगा।श्रम विभाग ने प्रदेश के श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन दरों में बदलाव कर दिया है। 27 मार्च 2027 तक लागू रहने वाली इन नई दरों में बदलाव में सरकारी क्षेत्रों के 10 लाख और निजी सेक्टर खासतौर पर उद्योगों में काम कने वाले करीब 40 लाख श्रमिकों को न्यूनतम वेतन अधिनियम, 1948 के अंतर्गत यह लाभ मिलेगा, इसमें परिवर्तनशील महंगाई भत्ता भी शामिल है।

    श्रमायुक्त ने यह बदलाव महंगाई सूचकांक के आधार पर किया है। श्रमायुक्त शीतला पटले द्वारा जारी आदेश में नई न्यूनतम वेतन दरें प्रतिदिन श्रम के आधार पर तय की गई हैं, जिसमें 67 सामान्य नियोजन में काम करने वाले श्रमिकों को 26 दिन के आधार पर न्यूनतम वेतन इस तरह दिया जाएगा।

    इन 67 कैटेगरी में काम करने वालों को इसी आधार पर आने वाले समय में वेतन मिलेगा। अकुशल श्रमिक को महीने में 12575, अर्द्धकुशल श्रमिक को 13571, कुशल श्रमिक को 15294 और उच्च कुशल श्रमिक को 16919 रुपए प्रतिमाह वेतन मिलेगा जो 26 दिन के मान से दिया जाएगा।

    मुद्रणालय (प्रिंटिंग प्रेस) और कृषि सेक्टर में काम करने वालों का वेतन
    लिपिकीय वर्ग में अकुशल श्रमिक को ₹484, श्रेणी 1 को ₹588, श्रेणी 2 को ₹522 रुपए 26 दिन के मान से मासिक वेतन मिलेगा। उच्च कुशल श्रमिक को ₹651 मिलेंगे और इसमें भी श्रेणी एक को 648 रुपए, श्रेणी दो के श्रमिक को 634 और श्रेणी तीन के श्रमिक को 588 रुपए मिलेंगे। अर्द्धकुशल कैटेगरी में श्रेणी एक के श्रमिक को 588 और श्रेणी दो के श्रमिक को 522 रुपए प्रति दिन मिलेंगे।

    अगरबत्ती श्रमिकों के लिए नई दरें:

    अगरबत्ती रोलिंग (1000 अगरबत्ती रोल करने पर)- कुल ₹74.75

    सुगंधित (सेंटेड) स्टिक- कुल ₹75

    छह माह पहले बढ़ाए थे 9 रुपए प्रतिदिन
    श्रम विभाग ने 1 अप्रैल 2026 से नई न्यूनतम वेतन दरें लागू की थीं। इसमें परिवर्तनशील महंगाई भत्ते के कारण श्रमिकों के वेतन में औसतन ₹9 प्रतिदिन यानी करीब ₹234 मासिक की बढ़ोतरी हुई थी। इसका फायदा सरकारी विभागों के करीब 10 लाख और निजी सेक्टर व उद्योगों के लगभग 40 लाख श्रमिकों को हुआ था।

  • IND vs WI: विराट कोहली पहली ही गेंद पर गोल्डन डक, जेडन सील्स ने मिडिल स्टंप उखाड़कर मचाया तहलका

    IND vs WI: विराट कोहली पहली ही गेंद पर गोल्डन डक, जेडन सील्स ने मिडिल स्टंप उखाड़कर मचाया तहलका

    न्यू चंडीगढ़
    न्यू चंडीगढ़ के पीसीए स्टेडियम में भारत और वेस्टइंडीज के बीच खेले जा रहे तीसरे और अंतिम वनडे मुकाबले में कैरेबियाई तेज गेंदबाज जेडन सील्स ने एक जादुई गेंद पर भारतीय दिग्गज विराट कोहली को गोल्डन डक पर पवेलियन भेज दिया। शानदार फॉर्म में चल रहे विराट कोहली का इस तरह पहली ही गेंद पर आउट होना भारतीय फैंस के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं था। विराट कोहली काफी अच्छे फॉर्म में हैं, लेकिन किसी ने उम्मीद नहीं की होगी कि विराट कोहली की पारी का अंत कुछ ऐसा होगा। बता दें कि विराट कोहली अपने इंटरनेशनल करियर में 41वीं बार डक पर आउट हुए हैं।

    2025 ऑस्ट्रेलिया दौरे के बाद पहला डक!
    शुभमन गिल के आउट होने के बाद विराट कोहली जल्दी ही क्रीज पर उतरे थे। जेडन सील्स ने मिडिल स्टंप की लाइन पर फुल लेंथ गेंद फेंकी, जो टप्पा खाने के बाद सीधी रही। विराट ने इसे फ्लिक करने का प्रयास किया, लेकिन पूरी तरह बीट हो गए और गेंद सीधे जाकर उनके मिडिल स्टंप से टकराई। यह देर 2025 में हुए ऑस्ट्रेलिया दौरे के बाद पहली बार है जब विराट कोहली वनडे में डक पर आउट हुए हैं। ऑस्ट्रेलिया में विराट लगातार दो मैचों में शून्य पर आउट हुए थे।

    शुभमन गिल ने जीता टॉस, अंशुल कंबोज का डेब्यू
    सीरीज के इस अंतिम मुकाबले में भारतीय कप्तान शुभमन गिल ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का निर्णय लिया। शुरुआती दोनों वनडे मुकाबलों को 8-8 विकेट से जीतकर सीरीज पर पहले ही 2-0 से कब्जा जमा चुकी भारतीय टीम ने तीसरे मैच के लिए अपनी प्लेइंग-11 में तीन बड़े बदलाव किए। अंशुल कंबोज को वनडे में डेब्यू करने का मौका मिला है। वहीं नितीश कुमार रेड्डी की प्लेइंग-11 में वापसी हुई है। इसके अलावा तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज को टीम में शामिल किया गया है।

    वेस्टइंडीज की शर्मनाक क्लीन स्वीप से बचने की कोशिश
    सीरीज पहले ही जेब में होने के बावजूद, वेस्टइंडीज ने जेडन सील्स की इस तूफानी गेंद से भारतीय टॉप-ऑर्डर को शुरुआती झटके देकर मैच में रोमांच बरकरार रखा है। वेस्टइंडीज की टीम इस मुकाबले को किसी भी हाल में अपने नाम करना चाहेगी, ताकि वे क्लीन स्वीप के शर्म से बच सके। पिछले वनडे में 400 से ज्यादा रन बनाने के बाद भी वेस्टइंडीज को हार का सामना करना पड़ा था।

     

  • योगी सरकार में अपराधियों पर शिकंजा, 23 हजार से अधिक इनामी गिरफ्तार, 15,233 करोड़ की अवैध संपत्ति जब्त

    योगी सरकार में अपराधियों पर शिकंजा, 23 हजार से अधिक इनामी गिरफ्तार, 15,233 करोड़ की अवैध संपत्ति जब्त

    योगी सरकार में अपराधियों पर शिकंजा, 23 हजार से अधिक इनामी गिरफ्तार, 15,233 करोड़ की अवैध संपत्ति जब्त

    साइबर अपराध पर कार्रवाई से लेकर माफिया की संपत्ति जब्ती तक, यूपी पुलिस का दिखा एक्शन मोड

    साइबर अपराध की रोकथाम में यूपी सबसे आगे निकला, 874.58 करोड़ रुपये की धनराशि फ्रीज कराई

    इनामी अपराधियों की गिरफ्तारी और माफिया नेटवर्क पर प्रहार, बीमारू से सुरक्षित प्रदेश बना यूपी

    लखनऊ

     उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाने और संगठित अपराध पर अंकुश लगाने के लिए योगी सरकार में पुलिस और प्रशासन ने कई स्तरों पर कार्रवाई की है। साइबर अपराध के मामलों में 874 करोड़ 58 लाख रुपये से अधिक की धनराशि फ्रीज या होल्ड कराई गई। वहीं 23,601 इनामी अपराधियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। वहीं गैंगस्टर एक्ट के तहत 15,233 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की अवैध चल-अचल संपत्तियां जब्त की गई हैं।

    साइबर अपराध पर कार्रवाई में देश में पहला स्थान
    यूपी पुलिस साइबर अपराध की रोकथाम के लिए प्रदेश के सभी 75 जिलों में साइबर क्राइम थाने संचालित कर रही है। इसके साथ ही सभी जनपदों के पुलिस थानों में साइबर सेल और हेल्प डेस्क की स्थापना की गई है। साइबर अपराध पोर्टल और हेल्पलाइन नंबर 1930 के माध्यम से अगस्त 2019 से जून 2026 तक 874 करोड़ 58 लाख रुपये से अधिक की धनराशि फ्रीज या होल्ड कराई गई। इन उपलब्धियों के आधार पर मार्च 2026 में साइबर अपराध संबंधी रैंकिंग में उत्तर प्रदेश, देश में पहले स्थान पर रहा।

    अपराधियों पर कार्रवाई, अवैध संपत्तियों पर भी शिकंजा
    20 मार्च 2017 से अब तक पुलिस मुठभेड़ों में 303 अपराधी मारे गए, जबकि 12,202 घायल हुए। इसी अवधि में 23,601 इनामी अपराधियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। गैंगस्टर एक्ट के तहत 87,835 अपराधियों और राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत 995 अपराधियों पर कार्रवाई की गई। गैंगस्टर एक्ट के अंतर्गत 152 अरब 33 करोड़ रुपये से अधिक (यानी करीब 15,233 करोड़ रुपये) मूल्य की अवैध चल-अचल संपत्तियां जब्त की गईं।

    चिह्नित माफिया और गिरोहों के खिलाफ भी कार्रवाई
    प्रदेश स्तर पर चिह्नित 68 माफिया और उनके गिरोह के सदस्यों एवं सहयोगियों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई। इनके विरुद्ध कुल 909 मुकदमे दर्ज किए गए, जबकि 651 लोगों को गिरफ्तार किया गया।

  • फोकस भटका तो तुरंत करेगा अलर्ट! Naurable One में लगे हैं 12 EEG सेंसर

    फोकस भटका तो तुरंत करेगा अलर्ट! Naurable One में लगे हैं 12 EEG सेंसर

    आज के समय में बहुत से लोग हैं, जो अपना कॉन्सेंट्रेट बढ़ाने के लिए अलग-अलग ट्रिक का इस्तेमाल करते हैं. अब एक न्यूराबेल नाम की कंपनी ने एक नया हेडफोन लॉन्च किया है. न्यू हेडफोन फोकस को बेहतर करने का काम करेगा. यह ध्यान भटकने पर तुरंत अलर्ट देगा. इस न्यू हेडफोन का नाम Naurable One है.

    Naurable One को खासतौर से स्टूडेंट और रिसर्च करने वाले स्टूडेंट के लिए तैयार किया गया है. कंपनी ने बताया है कि यह पहला एक ऐसा ब्रेन स्कैनिंग हेडफोन है. इसके अंदर 12 इलेक्ट्रोनएनसेफलॉग्रफी (EEG) सेंसर को नायलन इयरकपस के अंदर इंस्टॉल किया है. ये सेंसर ब्रेन का स्कैनिंग का काम करते हैं.

    Naurable One हेडफोन की कीमत 499 अमेरिकी डॉलर है और इस महीने से इसकी सेल अमेरिका में शुरू होगी. अन्य देशों में कब तक लॉन्च होगा, उसको लेकर अभी जानकारी शेयर नहीं की है.

    ब्रेन स्कैनिंग से होगा खुलासा  
    हेडफोन स्कैनिंग के जरिए जांच पाता है कि ब्रेन कब फोकस होकर काम कर रहा है और कब उसका ध्यान भटक रहा है. ध्यान भटकने पर हेडफोन तुरंत फोकस करने में मदद करता है.  

    उदाहरण के तौर पर समझें तो एक स्टूडेंट फोकस होकर पढ़ रहा है और उसके बाद अगर उसका ध्यान भटकता है तो हेडफोन उसका अलर्ट देगा, जिसके बाद स्टूडेंट तुरंत अपना फोकस पढ़ाई पर लगा सकेगा.

    मेडिटेशन में भी मददगार है ये हेडफोन
    Naurable One, की अन्य खूबी यह है कि इसको मेडिटेशन में भी इस्तेमाल किया जा सकता है. जब डिवाइस को महसूस होगा कि यूजर फ्लो स्टेट में है और उनका पूरी तरह ध्यान केंद्रित रहा है. इसके बाद जैसे ही यूजर का ध्यान भटकने लगेगा, तो यह दोबारा शुरू हो जाएगा.

    कंपनी एक न्यू मोबाइल ऐप भी लॉन्च करने जा रही है, जो दिमाग से जुड़े 8 मेट्रिक्स को ट्रैक कर सकता है. इनमें ब्रेन एज, चार्ज, स्पीड, फोकस, वर्कलोड, स्ट्रेस और स्लीपीनेस और अल्फा पीक फ्रीक्वेंसी शामिल है.

    EEG सेंसर को ऑफ करने का भी फीचर
    कंपनी ने बताया है कि अगर यूजर चाहे तो EEG सेंसर को ऑफ करके Naurable One हेडफोन को एक सामान्य हेडफोन की तरह भी इस्तेमाल किया जा सकता है. इन हेडफोन के अंदर 40mm बेरिलियम ड्राइवर्स और 6 माइक्रोफोन का इस्तेमाल किया गया है.

    मिलते हैं कई कमाल के फीचर्स
    हेडफोन के अंदर ए्क्टिव नॉय कैंसिलेशन (ANC) और ट्रांसपेरेंसी मोड का सपोर्ट मिलता है. बैटरी बैकअप को लेकर कंपनी का दावा है कि EEG ऑन होने पर 12 घंटे तक इसको इस्तेमाल किया जा सकेगा. डेटा को लेकर कंपनी बता चुकी है कि यूजर के डेटा सेफ रहेगा और उसको किसी थर्ड पार्टी को सेल नहीं किया जाएगा.

  • महाभारत युद्ध की असली कहानी द्रौपदी से भी पहले शुरू हुई, सत्यवती और भीष्म की प्रतिज्ञा बनी बड़ी वजह

    महाभारत युद्ध की असली कहानी द्रौपदी से भी पहले शुरू हुई, सत्यवती और भीष्म की प्रतिज्ञा बनी बड़ी वजह

    महाभारत की कई रोचक और रहस्यमयी कहानियां हम बचपन से सुनते आ रहे हैं. इस महाकाव्य में युद्ध, राजनीति, रिश्ते, प्रतिज्ञाएं, प्रेम, त्याग और महत्वाकांक्षा की ऐसी कई कहानियां हैं, जिनका असर आगे की घटनाओं पर पड़ा. आमतौर पर महाभारत युद्ध की चर्चा होती है तो द्रौपदी के अपमान, हस्तिनापुर के सिंहासन को लेकर विवाद और दुर्योधन के अहंकार को इसके प्रमुख कारणों में गिना जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस महायुद्ध की जड़ें इससे भी बहुत पहले की घटनाओं में खोजी जाती हैं?

    पौराणिक कथाओं में महाभारत के युद्ध के पीछे कई कारण बताए गए हैं. इनमें एक कथा ऐसी भी है, जो इस पूरे घटनाक्रम को राजा शांतनु, माता गंगा और सत्यवती से जोड़ती है. तो आखिर सत्यवती का महाभारत के युद्ध से क्या संबंध था? कैसे एक प्रतिज्ञा ने हस्तिनापुर के उत्तराधिकार की पूरी कहानी बदल दी? आइए जानते हैं.

    राजा महाभिषेक को मिला था ब्रह्मा जी का श्राप

    पौराणिक मान्यता के अनुसार, महाभारत की कहानी की एक महत्वपूर्ण कड़ी राजा महाभिषेक से जुड़ी हुई है. कहा जाता है कि महाभिषेक एक धर्मात्मा और तपस्वी राजा थे. एक बार उनकी तपस्या और धार्मिक आचरण से प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने उन्हें ब्रह्मलोक आने का अवसर दिया था.

    उसी दौरान ब्रह्मा जी की सभा में देवी गंगा भी उपस्थित थीं. तभी तेज हवा के कारण गंगा के वस्त्र का एक हिस्सा खिसक गया. सभा में मौजूद सभी देवताओं ने अपनी नजरें झुका लीं, लेकिन महाभिषेक की नजरें गंगा पर ही टिकी रहीं. इससे ब्रह्मा जी क्रोधित हुए और उन्होंने महाभिषेक को मनुष्य योनि में जन्म लेने का श्राप दे दिया था. कथा के अनुसार, देवी गंगा को भी मनुष्य रूप में पृथ्वी पर जन्म लेने का श्राप मिला. यही श्राप आगे चलकर महाभारत की कहानी में एक महत्वपूर्ण मोड़ बनता है.

    महाभिषेक बने राजा शांतनु
    श्राप के प्रभाव से महाभिषेक ने पृथ्वी पर राजा शांतनु के रूप में जन्म लिया. शांतनु हस्तिनापुर के पराक्रमी राजा बने. एक दिन शिकार करते हुए उनकी नजर एक बेहद सुंदर स्त्री पर पड़ी. वह कोई और नहीं बल्कि देवी गंगा थीं. शांतनु गंगा के रूप पर मोहित हो गए और उन्होंने उनसे विवाह का प्रस्ताव रखा था.

    गंगा ने विवाह के लिए एक शर्त रखी. उन्होंने कहा कि शांतनु कभी उनसे कोई सवाल नहीं करेंगे और न ही उनके किसी काम में बाधा डालेंगे. जिस दिन उन्होंने ऐसा किया, उसी दिन गंगा उन्हें छोड़कर चली जाएंगी. शांतनु ने यह शर्त स्वीकार कर ली और दोनों का विवाह हो गया था.

    गंगा ने अपनी सात संतानों को नदी में बहा दिया
    कुछ समय बाद गंगा ने एक पुत्र को जन्म दिया. लेकिन पुत्र के जन्म के बाद वह उसे लेकर नदी के किनारे गईं और उसे नदी में प्रवाहित कर दिया. यह देखकर शांतनु का हृदय टूट गया, लेकिन विवाह के समय दिए गए वचन के कारण वह गंगा से कुछ पूछ नहीं सके. इसके बाद एक-एक करके उनके सात पुत्र हुए और गंगा ने सभी को नदी में प्रवाहित कर दिया. शांतनु के लिए यह सब देखना बेहद पीड़ादायक था, लेकिन वह अपने वचन से बंधे हुए थे.

    आठवें पुत्र को बचाने के लिए टूट गया शांतनु का वचन
    जब गंगा ने आठवें पुत्र को जन्म दिया और उसे भी नदी में ले जाने लगीं, तो इस बार शांतनु खुद को रोक नहीं सके. उन्होंने गंगा से पूछ लिया कि वह अपने ही बच्चों को नदी में क्यों बहा रही हैं. शांतनु का वचन टूट चुका था. तब गंगा ने उन्हें बताया कि वह उनके आठवें पुत्र को अपने साथ ले जा रही हैं. यही पुत्र आगे चलकर देवव्रत के नाम से प्रसिद्ध हुआ. गंगा ने देवव्रत का पालन-पोषण किया और उन्हें युद्ध, राजनीति, शास्त्र और धर्म की शिक्षा दिलाई. कई वर्षों बाद गंगा अपने पुत्र देवव्रत को शांतनु के पास वापस लेकर आईं. देवव्रत एक महान योद्धा और विद्वान बन चुके थे. यही देवव्रत आगे चलकर भीष्म पितामह कहलाए.

    सत्यवती के लिए भीष्म ने ली ऐसी प्रतिज्ञा
    समय बीता और एक दिन राजा शांतनु की नजर सत्यवती पर पड़ी. सत्यवती को कई कथाओं में पहले मत्स्यगंधा के नाम से भी जाना जाता है. उनके शरीर से मछली जैसी गंध आने के कारण उन्हें यह नाम मिला था. पौराणिक कथा के अनुसार, बाद में ऋषि पराशर के वरदान से उनके शरीर की दुर्गंध समाप्त हुई और उनसे सुगंध आने लगी.

    इसी प्रसंग से उनके जीवन में एक और महत्वपूर्ण घटना जुड़ी. ऋषि पराशर और सत्यवती के पुत्र के रूप में महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ. आगे चलकर सत्यवती राजा शांतनु के जीवन में आईं और शांतनु उनसे विवाह करना चाहते थे. लेकिन सत्यवती के पिता की इच्छा थी कि उनकी बेटी से पैदा होने वाला पुत्र ही हस्तिनापुर के सिंहासन का उत्तराधिकारी बने. यह स्थिति शांतनु के लिए कठिन थी, क्योंकि उनके बड़े पुत्र देवव्रत पहले से ही युवराज थे. अपने पिता की इच्छा और प्रेम को समझते हुए देवव्रत ने ऐसा फैसला लिया, जिसने इतिहास बदल दिया. उन्होंने आजीवन ब्रह्मचर्य का व्रत लिया और यह प्रतिज्ञा की कि वह कभी हस्तिनापुर के सिंहासन पर अपना अधिकार नहीं जताएंगे. उनकी इस भयंकर प्रतिज्ञा के कारण ही देवव्रत को भीष्म कहा गया.

    सत्यवती के पुत्रों से आगे बढ़ा हस्तिनापुर का वंश
    शांतनु और सत्यवती के दो पुत्र हुए- चित्रांगद और विचित्रवीर्य. चित्रांगद की मृत्यु युद्ध में हो गई. इसके बाद विचित्रवीर्य हस्तिनापुर के राजा बने. उनका विवाह अंबिका और अंबालिका से हुआ, लेकिन उनके कोई संतान नहीं हुई. कुछ समय बाद विचित्रवीर्य की भी मृत्यु हो गई. अब हस्तिनापुर के सामने सबसे बड़ी समस्या वंश और उत्तराधिकार की थी.

    सत्यवती ने अपने पहले पुत्र महर्षि वेदव्यास को बुलाया. पौराणिक कथा के अनुसार, नियोग परंपरा के माध्यम से अंबिका और अंबालिका से संतान उत्पन्न हुई. अंबिका से धृतराष्ट्र और अंबालिका से पांडु का जन्म हुआ. एक अन्य दासी से विदुर का जन्म हुआ. यहीं से महाभारत की आगे की कहानी की नींव तैयार होती है.

    धृतराष्ट्र और पांडु के पुत्रों से शुरू हुआ नया संघर्ष
    धृतराष्ट्र के पुत्र कौरव कहलाए और पांडु के पुत्र पांडव. समय के साथ दोनों पक्षों के बीच सिंहासन को लेकर विवाद बढ़ता गया. दुर्योधन और पांडवों के बीच बचपन से ही प्रतिस्पर्धा थी, जो आगे चलकर राजनीतिक संघर्ष में बदल गई.

    हस्तिनापुर के सिंहासन का अधिकार, दुर्योधन की महत्वाकांक्षा, शकुनि की रणनीतियां, जुए का खेल, द्रौपदी का अपमान, वनवास और अंततः राज्य के अधिकार को लेकर विवाद- इन सभी घटनाओं ने कुरुक्षेत्र के युद्ध की जमीन तैयार की. इसलिए महाभारत युद्ध को किसी एक घटना का परिणाम मानना पूरी कहानी को बहुत छोटा कर देना होगा.

    क्या सत्यवती थीं महाभारत युद्ध की वजह?
    सत्यवती को सीधे तौर पर महाभारत युद्ध का कारण कहना उचित नहीं होगा. हालांकि, महाभारत की वंशावली और घटनाक्रम में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण थी. शांतनु से उनका विवाह, देवव्रत की भीष्म प्रतिज्ञा, उनके पुत्रों का हस्तिनापुर का उत्तराधिकार और आगे धृतराष्ट्र-पांडु के वंश का जन्म, इन घटनाओं ने उस राजवंश की दिशा तय की, जिसमें आगे चलकर कौरव और पांडव पैदा हुए. यानी पौराणिक कथा के नजरिए से देखें तो महाभारत युद्ध की कहानी बहुत पहले शुरू हो चुकी थी.

    यह केवल दुर्योधन के लालच या द्रौपदी के अपमान की कहानी नहीं थी. इसके पीछे पीढ़ियों से चले आ रहे फैसले, प्रतिज्ञाएं, पारिवारिक मोह, सत्ता का संघर्ष और उत्तराधिकार का विवाद भी जुड़े हुए थे.