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  • ‘स्किल मंच’ पर युवाओं ने गायकी और फाइन आर्ट्स में दिखाई प्रतिभा, योगी सरकार की कौशल विकास की मुहिम को मिला वैश्विक मंच

    ‘स्किल मंच’ पर युवाओं ने गायकी और फाइन आर्ट्स में दिखाई प्रतिभा, योगी सरकार की कौशल विकास की मुहिम को मिला वैश्विक मंच

    ग्रेटर नोएडा
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश के युवाओं को कौशल, रोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की झलक यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो-2026 के दूसरे दिन देखने को मिली। इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन (यूपीएसडीएम) के पवेलियन में ‘आओ करके सीखें’ थीम के तहत कौशल का ऐसा जीवंत प्रदर्शन किया गया, जहां दर्शक केवल हुनर को देखते ही नहीं, बल्कि खुद हाथ आजमाकर उसे सीखने का अनुभव भी ले रहे हैं।

    यूपीएसडीएम पवेलियन में 16 अलग-अलग कौशलों के लाइव प्रदर्शन और सहभागिता आधारित गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। पारंपरिक कारीगरी से लेकर आधुनिक कौशल तक, पवेलियन का प्रत्येक स्टॉल दर्शकों को कुछ नया सीखने और उसे स्वयं आजमाने का अवसर दे रहा है।

    मिट्टी से कलाकृति तक, खुद करके सीख रहे दर्शक
    पवेलियन में आयोजित लाइव प्रदर्शन लोगों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बने हुए हैं। पॉटरी और टेराकोटा स्टॉल पर दर्शक मिट्टी को अपने हाथों से आकार देकर कलाकृतियां तैयार कर रहे हैं। वहीं चिकनकारी स्टॉल पर लोग सुई-धागे के जरिए बारीक कारीगरी को समझने और खुद करने का प्रयास कर रहे हैं।
    खास बात यह है कि यहां कौशल को केवल प्रदर्शन के रूप में पेश नहीं किया जा रहा, बल्कि ‘देखिए, समझिए और खुद करके सीखिए’ की अवधारणा के साथ लोगों को सीधे इससे जोड़ा जा रहा है। विभिन्न ‘डू इट योरसेल्फ’ गतिविधियों के माध्यम से बच्चों से लेकर युवाओं और अन्य आगंतुकों तक को अलग-अलग कौशलों का प्रत्यक्ष अनुभव मिल रहा है

    ‘स्किल मंच’ पर युवाओं की प्रतिभा ने बांधा समां
    यूपीआईटीएस-2026 के दूसरे दिन ‘स्किल मंच’ भी युवाओं की प्रतिभा का प्रमुख केंद्र बना रहा। यहां युवाओं ने गायकी और फाइन आर्ट्स समेत विभिन्न रचनात्मक विधाओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। ‘हुनर’ थीम पर आयोजित गतिविधियों में युवाओं ने रंगों और रचनात्मकता के माध्यम से अपनी कल्पनाओं को आकार दिया। मंच पर प्रस्तुत प्रतिभाओं ने दर्शकों को आकर्षित किया और युवाओं की रचनात्मक क्षमता को सामने रखा। पहली बार शुरू किए गए इस मंच का उद्देश्य युवाओं को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ-साथ कौशल, करियर और रचनात्मक अवसरों से जोड़ना है।

    कौशल से रोजगार और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता यूपी
    योगी सरकार उत्तर प्रदेश में युवाओं को पारंपरिक शिक्षा के साथ रोजगारपरक कौशल उपलब्ध कराने और उन्हें उद्योग की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने पर जोर दे रही है। यूपीएसडीएम के माध्यम से युवाओं को विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षण देकर उनके लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर तैयार किए जा रहे हैं। यूपीआईटीएस जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर कौशल विकास को प्रदर्शित करने से प्रदेश के युवाओं के हुनर को व्यापक पहचान मिलने के साथ यह संदेश भी जा रहा है कि कौशल केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और उद्यमिता की मजबूत नींव है।

    पारंपरिक हुनर और आधुनिक कौशल का संगम
    यूपीएसडीएम पवेलियन में एक ओर चिकनकारी, पॉटरी और टेराकोटा जैसे पारंपरिक कौशल लोगों को आकर्षित कर रहे हैं, तो दूसरी ओर आधुनिक कौशल से जुड़ी गतिविधियां युवाओं को बदलते रोजगार बाजार की संभावनाओं से परिचित करा रही हैं। इस पहल के जरिए उत्तर प्रदेश की पारंपरिक कारीगरी को संरक्षित करने के साथ उसे नई पीढ़ी और नए बाजार से जोड़ने का प्रयास भी दिखाई दे रहा है। यूपीएसडीएम पवेलियन की ‘आओ करके सीखें’ थीम ने कौशल विकास को देखने के बजाय उसे अनुभव करने का अवसर दिया है। यही वजह है कि दूसरे दिन पवेलियन में लगातार दर्शकों की आवाजाही बनी रही।

  • सीबीजी, वेस्ट टू एनर्जी और बायोफ्यूल से कचरे का होगा बेहतर उपयोग, शहरों की सुधरेगी क्वालिटी आफ लाइफ

    सीबीजी, वेस्ट टू एनर्जी और बायोफ्यूल से कचरे का होगा बेहतर उपयोग, शहरों की सुधरेगी क्वालिटी आफ लाइफ

    ग्रेटर नोएडा
    वेस्ट मैनेजमेंट आज एक बड़ी बिजनेस अपॉर्चुनिटी भी बन सकता है। सीबीजी, वेस्ट-टू-एनर्जी, बायोफ्यूल और रिसाइक्लिंग एवं री-प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों में अपशिष्ट का उपयोग कर नए उद्योगों और रोजगार के अवसर पैदा किए जा सकते हैं। नगर विकास मंत्री ए.के. शर्मा ने नोएडा स्थित एक्सपो मार्ट में आयोजित उत्तर प्रदेश के चौथे इंटरनेशनल ट्रेड शो में नगर विकास विभाग की ओर से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन विषय पर आयोजित सेमिनार में ये बातें कहीं। उन्होंने नगरों को और अधिक स्वच्छ, सुंदर एवं स्वस्थ बनाने के लिए नवीनतम तकनीक के माध्यम से ठोस अपशिष्ट के वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित प्रबंधन पर विशेष बल दिया। उन्होंने बताया कि स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में उत्तर प्रदेश के कई शहरों ने देश में उल्लेखनीय स्थान प्राप्त किया है।

    नगर विकास मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार नागरिकों को बेहतर सुविधाएं और स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

    नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ने कहा कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन केवल स्वच्छता से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि यह हमारे शहरों के स्वास्थ्य, पर्यावरण, अर्थव्यवस्था और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। प्रभावी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के माध्यम से हम शहरों को स्वच्छ रखने के साथ ही पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में भी महत्वपूर्ण कार्य कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्वच्छ भारत अभियान ने देश में स्वच्छता को जनआंदोलन का स्वरूप दिया है। अब हमारा प्रयास है कि इस जनआंदोलन को और अधिक वैज्ञानिक, व्यवस्थित और स्थायी बनाया जाए। इसके लिए आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रबंधन व्यवस्था और जनभागीदारी को साथ लेकर आगे बढ़ने की आवश्यकता है।

    शर्मा ने लखनऊ के शिवरी स्थित सॉलिड वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट और प्रेरणास्थल की सफलता का उल्लेख करते हुए कहा कि नगरीय क्षेत्रों से प्रतिदिन बड़ी मात्रा में ठोस अपशिष्ट निकलता है। यदि इसका वैज्ञानिक ढंग से प्रबंधन किया जाए तो यही अपशिष्ट एक बड़े अवसर में परिवर्तित हो सकता है।

  • योगी सरकार की सख्ती का असर, 2.30 करोड़ की अवैध हेरोइन-स्मैक के साथ चार तस्कर गिरफ्तार

    योगी सरकार की सख्ती का असर, 2.30 करोड़ की अवैध हेरोइन-स्मैक के साथ चार तस्कर गिरफ्तार

    लखनऊ/हाथरस
     योगी सरकार में उत्तर प्रदेश को नशामुक्त बनाने के लिए अवैध मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को बड़ी सफलता मिली है। एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) की आगरा ऑपरेशनल यूनिट ने हाथरस में कार्रवाई करते हुए चार तस्करों को गिरफ्तार किया है। टीम ने उनके कब्जे से एक किलोग्राम से अधिक हेरोइन और स्मैक बरामद हुआ है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 2.30 करोड़ रुपये है।

    एएनटीएफ आगरा की टीम ने हाथरस के थाना सिकंदराराऊ क्षेत्र में बिजलीघर नगला जलेल पुल के पास कार्रवाई की। गिरफ्तार आरोपियों के पास से हेरोइन और स्मैक के अलावा एक बलेनो कार, चार मोबाइल फोन और नकदी बरामद हुई। बरामदगी के संबंध में थाना सिकंदराराऊ, हाथरस में मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत विधिक कार्रवाई की गई है।

    चार सक्रिय तस्कर गिरफ्तार
    गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मथुरा के वृंदावन निवासी सुदामा और मोनू कुशवाहा, मथुरा में रह रहे लखीमपुर खीरी निवासी अमित कुमार शुक्ला और मथुरा निवासी प्रीतम सिंह के रूप में हुई है। पूछताछ में आरोपियों ने मादक पदार्थों की खरीद और फुटकर बिक्री से जुड़े होने की बात स्वीकार की।

    वृंदावन और आस-पास होती थी सप्लाई
    पूछताछ के अनुसार आरोपी कासगंज निवासी एक व्यक्ति से हेरोइन और स्मैक खरीदकर लाते थे। इसके बाद मादक पदार्थों की छोटी-छोटी पुड़िया बनाकर वृंदावन और आस-पास के क्षेत्रों में महंगे दामों पर बेचते थे। बिक्री से होने वाले मुनाफे को आपस में बांटते थे।

  • महानदी उफान पर, शबरी पुल से 6 फीट ऊपर पानी; शिवरीनारायण का संपर्क कटा

    महानदी उफान पर, शबरी पुल से 6 फीट ऊपर पानी; शिवरीनारायण का संपर्क कटा

    जांजगीर-चाम्पा.

    प्रदेश में बीते तीन दिनों तक हुई लगातार बारिश से तमाम नदियां उफान पर है. नगर के शवरी पुल पर 6 फ़ीट ऊपर पानी बह रहा है, जिसकी वजह से जांजगीर का शिवरीनारायण का सम्पर्क टूट गया है. महानदी के तट तोड़कर बहने से नगर के बिलासपुर रोड और केरा रोड में पानी भर गया है.

    आलम यह है निचली बस्तियों में पानी भरने के बाद लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रखा गया है. वार्ड एक में पानी भरने की वजह से वार्ड के लोगों को संस्कृतिक भवन में रखा गया है. मेला ग्राउंड में भी पानी गया है. पानी के भराव की वजह से लोग नाव में सवार होकर आना-जाना कर रहे है. स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए एसडीआरएफ की टीम तैनात किया है. इसके साथ बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के लोगों के लिए खाने-पीने और रहने के लिए अलग-अलग स्थानों में इंतजाम किया है. देर शाम तक शबरी सेतु के ऊपर ढाई फीट तक पानी बह रहा था जिससे गिधौरी बलौदाबाजार से शिवरीनारायण का सड़क संपर्क पूरी तरह से कटा रहा।

    सुबह 9 बजे बेरिकेट्स लगाकर पुल पर आना-जाना पूरी तरह से बंद करवा दिया गया था। एहतियात के लिए मोटरबोट और गोताखोरों को पुल के पास ही तैनात किया गया है। लगातार जल स्तर बढ़ने से क्षेत्र के छोटे-बड़े नालों के ऊपर से भी पानी बहने लगा था जिससे चारों दिशाओं से शिवरीनारायण का सड़क संपर्क टूट गया। बिलासपुर से शिवरीनारायण पहुंच मार्ग में मेन रोड़ में देवरी मोड़ के पास नाला से ऊपर पानी बहने से आना-जाना बंद हो गया।

    केरा से शिवरीनारायण मार्ग में नगारीडीह के पास कंजीनाला, केरा रोड मेंं कनस्दा से पहले पुराने पुल, दुरपा से पहले ललारी पुल भी उफान पर होने से संपर्क कट गया। तुस्मा पुल में पानी बहने से खैरताल से शिवरीनारायण मार्ग का भी संपर्क टूट गया था। हालांकि नगर के किसी बस्ती में पानी नहीं घुसा था। देर रात महानदी का जलस्तर बढ़ते क्रम में था जिससे शिवरीनारायण से लेकर चन्द्रपुर तक नदी तटों में बाढ़ की संभावना बनी हुई है। महानदी नदी के किनारे लगे ग्राम तनौद के नवापारा मोहल्ला पानी से डूब गया जिससे करीब चार दर्जन मवेशी और दो जेसीबी मशीन डूब गई।

  • दुनिया पर कर्ज का पहाड़! 365 ट्रिलियन डॉलर पहुंचा ग्लोबल डेट, 6 महीने में बढ़ा ₹10 ट्रिलियन

    दुनिया पर कर्ज का पहाड़! 365 ट्रिलियन डॉलर पहुंचा ग्लोबल डेट, 6 महीने में बढ़ा ₹10 ट्रिलियन

    नई दिल्ली
    दुनिया कर्ज तले दबती जा रही है और ग्लोबल ऋण अब 365 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया है. फाइनेंशिय कमेंट्री पब्लिकेशन 'द कोबेसी लेटर' ने इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल फाइनेंस (IIF) के लेटेस्ट डेटा का हवाला देते हुए ग्लोबल कर्ज के बोझ को उजागर किया है. 2026 की पहली छमाही में इस रिकॉर्ड लेवल तक पहुंचे कर्ज में, सिर्फ छह महीनों में ही 10 ट्रिलियन डॉलर से अधिक का उछाल आया है.

    आठ साल में यहां पहुंचा दुनिया का कर्ज
    वैश्विक ऋण (Global Debt) के आईआईएफ चार्ट को देखें, तो साफ पता चलता है कि बीते कई सालों में इसमें लगातार बढ़ोतरी होती गई है. वित्त वर्ष 2018 में लगभग 250 ट्रिलियन डॉलर से बढ़कर अब दुनिया का कर्ज 2026 की पहली छमाही तक ही लगभग 365 ट्रिलियन डॉलर का स्तर छू रहा है.

    कर्ज के आंकड़े में हालिया वृद्धि खासतौर पर उभरते बाजारों में देखने को मिली है. कोबेसी लेटर के मुताबिक, उभरते बाजारों का कर्ज 2026 की पहली छमाही में 6.5 ट्रिलियन डॉलर बढ़कर रिकॉर्ड 110 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया. इस इजाफे में सरकारों और नॉन-फाइनेंशियल कंपनियों का योगदान सबसे ज्यादा रिकॉर्ड किया गया है.

    रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन को छोड़कर उभरते बाजारों और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में कुल कर्ज लगभग 38 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है, जो दुनिया की सबसे बड़ी उन्नत अर्थव्यवस्थाओं के बाहर बढ़ती वित्तपोषण की जरूरतों को उजागर करता है.

    उभरते बाजार क्यों हैं केंद्र में?
    365 ट्रिलियन डॉलर पर पहुंचे दुनिया के कर्ज में उभरती अर्थव्यवस्थाएं केंद्र में हैं. दरअसल, सरकारों ने पब्लिक खर्च, इंफ्रास्ट्रक्चर और राजकोषीय घाटे के वित्तपोषण के लिए कर्ज लेना जारी रखा, जबकि कंपनियों ने भी निवेश और संचालन के वित्तपोषण के लिए कर्ज पर जोर दिया है. अब इसका असर ये हो रहा है कि सरकारों और कंपनियों को अपनी इनकम का एक बड़ा हिस्सा मौजूदा दायित्वों को पूरा करने में लगाना पड़ सकता है.

    एक्सपर्ट्स के मुताबिक, उभरते बाजारों के लिए कर्ज की यह समस्या तब और भी जटिल हो सकती है, जब कर्ज विदेशी मुद्राओं में लिया गया हो. घरेलू मुद्रा के कमजोर होने से डॉलर या यूरो में लिए गए कर्ज को चुकाने की स्थानीय मुद्रा लागत बढ़ सकती है.

    सबसे बड़ी चिंता तो ये सता रही
    ग्लोबल कर्ज बढ़ने के बीच सबसे बड़ी चिंताओं पर गौर करें, तो इनमें सिर्फ कर्ज का आंकड़ा नहीं, बल्कि उस कर्ज को चुकाने में कितना खर्च आता है, यह है. Kobeissi Letter में अनुमान जताया गया है कि विकसित अर्थव्यवस्थाओं ने पिछले वर्ष सरकारी ऋण पर 3.3 ट्रिलियन डॉलर से अधिक का ब्याज चुकाया और ब्याज का यह आंकड़ा वैश्विक खर्च के अनुमानों से कहीं अधिक रहा. इनमें एआई पर खर्च 2.6 ट्रिलियन डॉलर, डिफेंस पर 3.1 ट्रिलियन डॉलर, क्लीन एनर्जी पर 2.3 ट्रिलियन डॉलर शामिल हैं.

    ये आंकड़े इस तस्वीर को साफ करने के लिए काफी हैं, कि कैसे कर्ज चुकाने की लागत तेजी से सरकारी वित्त पर एक बड़ा बोझ बन गई है. जी7 देशों में वार्षिक सरकारी ब्याज भुगतान में भी भारी वृद्धि हुई है, कोबेसी लेटर के अनुसार इसमें साल-दर-साल 85% का इजाफा हुआ है.

    वैश्विक ऋण-से-जीडीपी अनुपात घटा
    Global Debt लगातार बढ़ रहा है, खास बात ये है कि वैश्विक ऋण-से-जीडीपी अनुपात महामारी काल के उच्चतम स्तर से नीचे रहने के बावजूद यह ग्रोथ हुई है. हालांकि, अनुपात में दिखने वाला यह सुधार एक महत्वपूर्ण कारक को छिपाता है, महंगाई ने नॉमिनल जीडीपी को ऊपर उठाया है, न कि विश्व में ऋण में व्यापक कमी आई है. हालिया कर्ज के आंकड़े एक महत्वपूर्ण अंतर की ओर इशारा करते हैं. वो ये है कि वैश्विक ऋण-से-जीडीपी अनुपात में 2021 के अपने उच्चतम स्तर से गिरावट आने का मतलब यह नहीं है कि दुनिया ने ऋणमुक्ति हासिल कर ली है.

    कोबेसी लेटर में कहा गया है कि वैश्विक जीडीपी के लगभग 310% के बराबर ऋण भार अभी भी बहुत अधिक है. हालांकि, यह अनुपात कोरोना काल में अपने हाई से करीब 25% नीचे है. लेकिन इस गिरावट का यह अर्थ कतई नहीं निकाला जाना चाहिए कि सरकारों, कंपनियों और परिवारों ने अपने ऋण का काफी हद तक भुगतान कर दिया है.

    एक्सपर्ट ने समझाया पूरा माजरा
    एक्सपर्ट ने इसमें बताया है कि ग्लोबल नॉमिनल जीडीपी में ग्रोथ आंशिक रूप से महंगाई के कारण हुई. इसका गणित समझें, तो जब कीमतें बढ़ती हैं, तो आर्थिक उत्पादन का नॉमिनल मूल्य बढ़ता है, भले ही वस्तुओं और सेवाओं की वास्तविक मात्रा उसी गति से न बढ़े. इससे ऋण-से-जीडीपी अनुपात अधिक प्रबंधनीय लग सकता है. साफ शब्दों में समझें, तो अगर नॉमिनल जीडीपी कर्ज की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ती है, तो डॉलर के संदर्भ में विश्व पर अधिक ऋण हो सकता है, जबकि उसका ऋण अनुपात कम हो जाता है.

  • मोदी-योगी सरकार ने  बदली काशी की तस्वीर, 13 वर्षों में 52.71 करोड़ पर्यटकों ने किया भ्रमण

    मोदी-योगी सरकार ने बदली काशी की तस्वीर, 13 वर्षों में 52.71 करोड़ पर्यटकों ने किया भ्रमण

    वाराणसी
    गंगा के अर्धचन्द्राकार घाट, मंदिरों की घंटियां, संकरी गलियों की अपनी-अलग पहचान और सदियों पुरानी परंपराएं काशी को दुनिया के दूसरे शहरों से अलग बनाती हैं। यही वजह है कि देश-दुनिया के लोगों के लिए काशी हमेशा से आस्था और आकर्षण का केंद्र रही है।  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने समय के साथ यहां सुविधाओं का विस्तार किया। प्राचीन विरासत को सहेजते हुए आधुनिक सुविधाओं के विस्तार ने काशी को देश-विदेश के पर्यटकों के लिए सुरक्षित और आकर्षक गंतव्य बनाया है। यही वजह है कि यहां पर्यटकों की संख्या साल-दर साल बढ़ती जा रही है।
    पर्यटन विभाग के अनुसार वर्ष 2014 से जुलाई 2026 तक  52 करोड़, 71 लाख 41 हजार 814 भारतीय और विदेशी पर्यटकों ने काशी का भ्रमण किया। इनमें 52 करोड़ 40 लाख 46 हजार 803  भारतीय और 30 लाख 95 हजार 11 विदेशी पर्यटक शामिल हैं। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2014 में जितने पर्यटक काशी आए, वर्ष 2016 के जुलाई माह तक ही उससे 4 करोड़ 10 लाख 70 हजार 422  अधिक लोग आ चुके हैं।

    पर्यटकों की बढ़ती संख्या से काशी की अर्थव्यवस्था को मिली नई रफ्तार  
    पर्यटकों की लगातार बढ़ती संख्या काशी की बदलती तस्वीर को दर्शाती है, जिसका सीधा असर काशी की स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन उद्योग पर भी पड़ा है। पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने से होटल, गेस्ट हाउस, रेस्तरां, नाव संचालन, फूल-माला, पूजा सामग्री , टैक्सी-ऑटो, टूर एवं ट्रैवल सेवाओं के साथ-साथ स्थानीय बाजारों और हस्तशिल्प उत्पादों की मांग में वृद्धि हुई है। इससे पर्यटन से जुड़े छोटे कारोबारियों, दुकानदारों, नाविकों, गाइडों, कारीगरों और सेवा क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर बने हैं।  इस तरह पर्यटन अब केवल धार्मिक और सांस्कृतिक अनुभव तक सीमित नहीं है, बल्कि काशी की स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने वाले महत्वपूर्ण क्षेत्रों में शामिल हो रहा है।   

    सुव्यवस्थित विकास के साथ बढ़ा काशी का आकर्षण
    वर्ष 2014 में केंद्र में मोदी सरकार और वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के गठन के बाद काशी में विकास और पर्यटन को नई गति मिली। सड़क, रेल और हवाई कनेक्टिविटी के विस्तार, बेहतर सार्वजनिक सुविधाओं, स्वच्छता, घाटों के विकास और प्रमुख धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों के सौंदर्यीकरण से काशी का पर्यटन अनुभव लगातार समृद्ध हुआ है। पर्यटकों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पर्यटन अवसंरचना तथा कानून-व्यवस्था को मजबूत किया गया, वहीं नए पर्यटन अनुभवों का भी विस्तार हुआ । काशी विश्वनाथ धाम के विकास से मंदिर क्षेत्र में श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए सुविधाएं बढ़ीं, घाटों के सौंदर्यीकरण, बेहतर साफ-सफाई, सारनाथ के विकास और गंगा में रिवर क्रूज जैसी गतिविधियों ने पर्यटन के दायरे को और व्यापक किया। आज काशी में धार्मिक, आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और विरासत पर्यटन के साथ आधुनिक सुविधाओं का संगम दिखाई देता है। सदियों पुरानी परंपराएं नए कलेवर में पर्यटकों को आकर्षित कर रही हैं। विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर काशी की यह बदलती तस्वीर बताती है कि विरासत को सहेजते हुए आधुनिक सुविधाओं का विस्तार पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकता है।  

    वर्जन
     "हमारा प्रयास है कि काशी की सदियों पुरानी परंपराओं को सुरक्षित रखते हुए पर्यटकों को आधुनिक पर्यटन से जोड़ा जाए, ताकि दुनिया भर के पर्यटक यहां आकर केवल दर्शन ही नहीं, बल्कि काशी की संस्कृति, विरासत और जीवन शैली का भी अनुभव लेकर लौटें।"

     जयवीर सिंह
    पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ,उत्तर प्रदेश
     वर्ष 2014 से जुलाई 2026 तक वाराणसी में पर्यटकों की संख्या

    -वर्ष-भारतीय पर्यटक-विदेशी पर्यटक-कुल पर्यटक

    -2014 –52,02,236 –2,87,761–54,89,997

    -2015 –54,13,927–3,02,370– 57,16,297

    -2016 –56,00,146 –3,12,519– 59,12,665

    -2017– 59,47,355–34,860–62,82,215

    -2018 –60,95,890 –3,49,270 –64,45,160

    -2019 – 64,47,775– 3,50,000– 67,97,775

    -2020 – 8,76,303–1,06,189 –9,82,492

    -2021–30,75,913 –2,566 – 30,78,479

    -2022 –7,11,47,310– 83,741–7,12,31,051

    -2023–8,52,71,729 – 2,01,904 – 8,54,73,633

    -2024–10,97,87,811– 3,09,932 –11,00,97,743

    -2025 –17,27,52,530 – 3,21,358 –17,30,73,888

    – 2026 जुलाई तक  – 4,64,27,878–1,32,541– 4,65,60,419

  • CM मोहन यादव ने पैतृक मकान में चलाई गेती, सिंहस्थ 2028 के मेगा प्लान का आगाज

    CM मोहन यादव ने पैतृक मकान में चलाई गेती, सिंहस्थ 2028 के मेगा प्लान का आगाज

    उज्जैन.

    सिंहस्थ महापर्व 2028 की तैयारियों के तहत शहर में सड़क चौड़ीकरण का काम तेज हो गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को अपने पैतृक मकान पर स्वयं गेती चलाकर सड़क चौड़ीकरण के लिए भवन हटाने की शुरुआत की।

    इसके साथ ही खजूर वाली मस्जिद से अब्दालपुरा, जीवाजीगंज थाना होते हुए गणेश चौक तक मार्ग के चौड़ीकरण की कार्यवाही प्रारंभ हो गई।

    730 मीटर लंबे मार्ग का होगा चौड़ीकरण
    करीब 730 मीटर लंबे मार्ग को 15 मीटर चौड़ा किया जाएगा। मार्ग चौड़ीकरण एवं विकास कार्य के लिए राज्य शासन द्वारा करीब 9.80 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है।

    सिंहस्थ में सुगम यातायात के लिए महत्वपूर्ण कदम
    यह मार्ग शहर के महत्वपूर्ण और व्यस्त संपर्क मार्गों में शामिल है। सिंहस्थ महापर्व के दौरान उज्जैन में श्रद्धालुओं और वाहनों की संख्या बढ़ने की संभावना को देखते हुए मार्ग का चौड़ीकरण यातायात व्यवस्था को सुगम और व्यवस्थित बनाने में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • राहुल गांधी के गढ़ रायबरेली से अखिलेश की PDA रथयात्रा, सपा-कांग्रेस रिश्तों पर बढ़ी हलचल

    राहुल गांधी के गढ़ रायबरेली से अखिलेश की PDA रथयात्रा, सपा-कांग्रेस रिश्तों पर बढ़ी हलचल

    लखनऊ
    समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 24 सितंबर 2026 को कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली से अपनी पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) रथयात्रा की शुरुआत की है। अखिलेश यादव ने रायबरेली का चुनाव राहुल गांधी को सीधे चुनौती देने के लिए किया है। अखिलेश ने इस यात्रा की शुरुआत अमेठी से इसलिए नहीं की क्योंकि उससे वह राहुल गांधी को सीधा संदेश नहीं दे पाते। वर्तमान में राहुल गांधी रायबरेली से लोकसभा के सांसद हैं। कांग्रेस पार्टी की स्थिति अमेठी और रायबरेली में भी अच्छी नहीं है। 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी की अमेठी और रायबरेली लोकसभा सीट की 10 विधानसभा सीटों में से सात पर ज़मानत जब्त हो गई थी। राहुल गांधी 2024 में सिर्फ सपा के समर्थन के कारण ही रायबरेली से चुनाव लड़ने की हिम्मत कर सके थे।
     
    2022 के विधानसभा चुनाव आंकड़ों के अनुसार, अमेठी लोकसभा सीट के तहत आने वाली 5 विधानसभा सीटों का प्रदर्शन इस प्रकार रहा था। तिलोई में भाजपा/अपना दल को 99,472 वोट (48.54%), सपा को 71,643 वोट (35%), कांग्रेस को 21,978 वोट (10.7%) और बसपा को 6,120 वोट (2.99%) मिले। सलोन में भाजपा/अपना दल को 87,715 वोट (43.79%), सपा को 85,604 वोट (42.7%), कांग्रेस को 11,439 वोट (5.71%) और बसपा को 9,335 वोट (4.66%) मिले। जगदीशपुर में भाजपा/अपना दल को 89,315 वोट (43.94%), सपा को 27,971 वोट (13.8%), कांग्रेस को 66,491 वोट (32.7%) और बसपा को 10,198 वोट (5.02%) प्राप्त हुए। गौरीगंज में भाजपा/अपना दल को 72,077 वोट (35.53%), सपा को 79,040 वोट (39%), कांग्रेस को 28,964 वोट (14.3%) और बसपा को 9,872 वोट (4.87%) मिले। अमेठी विधानसभा में भाजपा/अपना दल को 70,121 वोट (36.93%), सपा को 88,217 वोट (46.5%), कांग्रेस को 14,080 वोट (7.42%) और बसपा को 10,202 वोट (5.37%) हासिल हुए। इस प्रकार अमेठी लोकसभा क्षेत्र में भाजपा/अपना दल को 4,18,700 वोट (41.82%), सपा को 3,52,475 वोट (35.2%), कांग्रेस को 1,42,956 वोट (14.3%) और बसपा को 45,727 वोट (4.57%) मिले।

    रायबरेली लोकसभा सीट के तहत आने वाली विधानसभा सीटों पर प्रदर्शन इस प्रकार रहा था। बछरावां में भाजपा/अपना दल को 62,935 वोट (30.04%), सपा को 65,747 वोट (31.4%), कांग्रेस को 56,835 वोट (27.1%) और बसपा को 13,730 वोट (6.55%) मिले। हरचंदपुर में भाजपा/अपना दल को 78,009 वोट (38.69%), सपा को 92,498 वोट (45.9%), कांग्रेस को 16,230 वोट (8.05%) और बसपा को 7,335 वोट (3.64%) मिले। रायबरेली विधानसभा सीट पर भाजपा/अपना दल को 1,02,429 वोट (44.51%), सपा को 95,254 वोट (41.4%), कांग्रेस को 14,954 वोट (6.5%) और बसपा को 9,331 वोट (4.06%) प्राप्त हुए। सरेनी में भाजपा/अपना दल को 62,359 वोट (28.78%), सपा को 66,166 वोट (30.5%), कांग्रेस को 42,702 वोट (19.7%) और बसपा को 38,155 वोट (17.6%) हासिल हुए। ऊंचाहार में भाजपा/अपना दल को 75,893 वोट (35.79%), सपा को 82,514 वोट (38.9%), कांग्रेस को 9,985 वोट (4.71%) और बसपा को 34,692 वोट (16.4%) मिले। रायबरेली लोकसभा सीट का कुल योग देखें तो भाजपा/अपना दल को 3,81,625 वोट (35.67%), सपा को 4,02,179 वोट (37.6%), कांग्रेस को 1,40,706 वोट (13.2%) और बसपा को 1,03,243 वोट (9.65%) मिले।

    अखिलेश यादव के इस कदम के जवाब में उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने बयान दिया है कि यदि अखिलेश यादव रायबरेली और अमेठी जा सकते हैं, तो कांग्रेस भी समाजवादी पार्टी के गढ़ जैसे कन्नौज, इटावा और सैफई का रुख कर सकती है। अजय राय के इस बयान के जवाब में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और जसवंतनगर से विधायक शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि जसवंतनगर और इटावा में कांग्रेस को एक भी वोट नहीं मिलेगा। अजय राय और शिवपाल यादव की जुबानी जंग से पूर्व कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और समाजवादी पार्टी सांसद इकरा हसन के बीच भी बयानबाजी हो रही है।

    कन्नौज और इटावा जिलों की छह में से चार विधानसभा सीटों पर कांग्रेस पार्टी ने 2022 में चुनाव लड़ा था, जहां उसका प्रदर्शन बहुत कमजोर रहा। छिबरामऊ से कांग्रेस प्रत्याशी विजय कुमार को 1,194 वोट (0.42%) मिले और वह 7वें स्थान पर रहे। कन्नौज से विनीता देवी को 1,786 वोट (0.66%) मिले और वह 5वें स्थान पर रहीं। इटावा से मोहम्मद राशिद को 1,476 वोट (0.6%) मिले तथा वह 5वें स्थान पर रहे। भरथना से स्नेह लता दोहरे को 1,854 वोट (0.75%) मिले और वह 5वें स्थान पर रहीं।

    अखिलेश यादव का यह कदम कांग्रेस पार्टी के साथ सीटों के तालमेल से पूर्व ही अपनी ताकत का अहसास करवाने का प्रयास है। कांग्रेस और सपा गठबंधन के बीच भविष्य के सीट-बंटवारे की चर्चाओं के बीच राहुल गांधी के गढ़ से इस यात्रा को शुरू करने को लेकर राजनीतिक गलियारों में विभिन्न कयास लगाए जा रहे हैं कि सपा राज्य में खुद को मजबूत स्थिति में दिखाना चाहती है। कांग्रेस पार्टी की स्थिति उत्तर प्रदेश में काफी कमजोर है। 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी केवल दो सीट जीत सकी थी। इसके अलावा कांग्रेस पार्टी चार सीटों पर दूसरे पायदान पर रही। कांग्रेस पार्टी ने राज्य में 399 सीटों पर चुनाव लड़कर 387 सीटों पर ज़मानत जब्त करवाई थी।

    कांग्रेस पार्टी 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा के साथ गठबंधन करके चुनाव लड़ी थी और छह सीटें जीतने में सफल हुई थी, जिसमें अमेठी और रायबरेली की लोकसभा सीटें भी शामिल हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस अमेठी लोकसभा सीट से भाजपा की स्मृति ईरानी से चुनाव हार गई थी। 2019 में चुनाव हारने के डर से राहुल गांधी ने पहले ही केरल के वायनाड से नामांकन दाखिल कर दिया था। सपा को डर है कि अगर कांग्रेस पार्टी मजबूत हो गई तो उसका मुस्लिम जनाधार खिसक जाएगा और पार्टी कमजोर हो जाएगी, इसलिए सपा कांग्रेस को उसकी औकात में रखना चाहती है। दूसरी तरफ, कांग्रेस पार्टी का प्रयास है कि वह सपा को कमजोर करे जिससे कि कांग्रेस पार्टी मजबूत हो सके। दोनों पार्टियों में मुस्लिम वोट बैंक के लिए आपस में प्रतिद्वंदिता है, जिसके तहत सहयोग के साथ ही अंदर ही अंदर आपसी प्रतिस्पर्धा भी देखी जाती है।

    कांग्रेस पार्टी का एक प्रयास यह भी है कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की तरह ही उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव को कमजोर किया जाए। ममता बनर्जी को कमजोर करने के लिए कांग्रेस पार्टी ने उनके साथ कोई गठबंधन नहीं किया था और कम से कम छह सीटों पर ममता बनर्जी को हराने का काम किया था। कांग्रेस पार्टी का प्रयास है कि 2029 के लोकसभा चुनाव के पूर्व सभी क्षेत्रीय क्षत्रपों को हराकर नेस्तनाबूत किया जाए, जिससे कि भाजपा और मोदी के खिलाफ राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी का सीधा मुकाबला हो सके।

  • SIR विवाद पर विपक्ष का बड़ा प्लान, 30 सितंबर को दिल्ली में जुटेगा INDIA गठबंधन

    SIR विवाद पर विपक्ष का बड़ा प्लान, 30 सितंबर को दिल्ली में जुटेगा INDIA गठबंधन

    नई दिल्ली
    वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर विपक्षी INDIA गठबंधन ने आक्रामक रुख अपना लिया है। न्यूज एजेंसी पीटीआई के अनुसार, चुनाव आयोग के खिलाफ आगे की साझा रणनीति बनाने के लिए विरोधी दल 30 सितंबर को दिल्ली के 'कॉन्स्टिट्यूशन क्लब' में एक बड़ी बैठक करने जा रहे हैं।

    तृणमूल कांग्रेस (TMC) की प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पहल के बाद बुलाई गई इस बैठक में देशभर में संयुक्त विरोध प्रदर्शन और संसद में नया प्रस्ताव लाने जैसे अहम मुद्दों पर फैसला होगा।

    ज्ञानेश कुमार को जाना ही होगा: टीएमसी-लेफ्ट आए एक साथ
    पश्चिम बंगाल में एक-दूसरे के धुर विरोधी माने जाने वाले टीएमसी और वामपंथी दल (CPIM) इस मुद्दे पर एक मंच पर आ गए हैं। ममता बनर्जी ने इस बाबत कांग्रेस नेता राहुल गांधी और सीपीआई(एम) के वरिष्ठ नेता एम.ए. बेबी से फोन पर बात की है।

    टीएमसी के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव और सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने स्पष्ट कहा, "सबसे पहली शर्त है- ज्ञानेश कुमार को पद छोड़ना होगा। इसके अलावा सीईसी की नियुक्ति प्रक्रिया और एसआईआर (SIR) नाम के फर्जीवाड़े जैसे अहम मुद्दे हमारे एजेंडे में हैं। हम पूरी एकजुटता और तत्परता के साथ काम करेंगे।"

    CPI(ML)-लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने इस बैठक का स्वागत करते हुए कहा कि एसआईआर प्रक्रिया को तुरंत रोका जाए, क्योंकि लाखों वैध मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से काट दिए गए हैं।

    30 सितंबर की इस संयुक्त बैठक से ठीक एक दिन पहले, 29 सितंबर को कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की भी अहम बैठक बुलाई गई है, जिसमें पार्टी अपनी रणनीति को अंतिम रूप देगी।

    ज्ञानेश कुमार के खिलाफ तीसरा 'रिमूवल नोटिस' लाने की तैयारी
    विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) में एक नया 'रिमूवल नोटिस' (पद से हटाने का कानूनी प्रस्ताव) पेश करने का ड्राफ्ट तैयार कर रहे हैं।

    कानूनी विशेषज्ञों से हरी झंडी मिलने के बाद इसे संसद में पेश किया जाएगा। चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष का यह तीसरा ऐसा प्रयास होगा। विपक्ष का यह हमला उस मीडिया रिपोर्ट के बाद और तेज हुआ है, जिसमें दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने एसआईआर प्रक्रिया से जुड़े फैसलों पर 14 बार अपनी असहमति और आपत्तियां दर्ज कराई थीं।

    चुनाव आयोग की सफाई: "फैसले सर्वसम्मति से लिए गए"
    विपक्ष के बढ़ते हमलों और आंतरिक मतभेदों की खबरों के बीच चुनाव आयोग (ECI) ने शनिवार को एक बयान जारी कर सफाई दी है।

    चुनाव आयोग ने कहा कि SIR से जुड़े सभी आदेश तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से जारी किए गए थे।

    आयोग ने कहा कि किसी संवैधानिक संस्था के भीतर अलग-अलग राय या टिप्पणियां होना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। 24 जून 2025 को जारी एसआईआर आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने 27 मई 2026 के आदेश में जायज ठहराया था।

    आयोग ने बताया कि जिन लोगों को नोटिस मिले हैं, उन्हें व्यक्तिगत रूप से सुनवाई केंद्रों पर जाने की जरूरत नहीं है। बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) खुद घर-घर जाकर दस्तावेज कलेक्ट करेंगे। दिल्ली में दावों और आपत्तियों की सीमा बढ़ाकर 30 अक्टूबर और महाराष्ट्र में 12 अक्टूबर कर दी गई है।

  • अलीगढ़ में बारिश-तेज हवा का कहर, धान की पकी फसल खेतों में बिछी

    अलीगढ़ में बारिश-तेज हवा का कहर, धान की पकी फसल खेतों में बिछी

    अलीगढ़
    यूपी के अलीगढ़ में शुक्रवार की रात को आसमान से गिरी हल्की बौछार आधी रात के बाद रिमझिम बारिश में बदल गई। इस दौरान तेज ठंडी हवाओं ने जहां एक तरफ गर्मी से राहत दी तो वहीं ये हवाएं किसानों पर आफत बनकर टूटी। कई ग्रामीण इलाकों में किसानों की पकी फसल जमींदोज हो गई। धान, बाजरा और ज्वार की फसल में नुकसान बताया गया है।

    रिमझिम बारिश गर्मी से राहत प्रदान करने वाली तो रहीं लेकिन इस बारिश ने किसान का हिसाब बिगाड़ दिया। इस समय अधिकतर खेतों में धान की फसल खड़ी है। कुछ की फसल पक चुकी है तो कुछ पर बालियां आ रही हैं। ऐसे में तेज हवा ने फसल को जमीन पर बिछा दिया। इस प्राकृतिक आपदा में किसान कुछ न कर सके। सिर पर हाथ रखे किसान अपने नुकसान का आंकलन कर रहे हैं। जिले में धान का रकबा 1 लाख 64 हजार हेक्टेयर है। लगभग सभी जगहों से नुकसान की सूचनाएं आ रही हैं। कृषि विभाग की टीम भी बारिश के दौरान विभिन्न ब्लॉक में भ्रमणशील रही। इस दौरान अकराबाद, गोंडा, गभाना, हरदुआगंज, गंगीरी में फसल नुकसान की बात कही जा रही है।

    वहीं धनीपुर में भी खेतों में धान जमीन पर आ गया है। धान पानी में डूबने से गुणवत्ता प्रभावित होती है। बाबूपुर के किसान चौ. नवाब सिंह ने बताया कि उनकी पांच एकड़ में लगी धन की फसल जमीन पर बिछ गई है। मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार रविवार को भी इसी तरह बारिश की स्थिति रह सकती है। ऐसे में किसानों को आशंका सता रही है कि बचा हुआ धान भी न गिर जाए। धान के अलावा किसानों की बाजरा और ज्वार की फसल में भी नुकसान बताया गया है। जिला कृषि अधिकारी धीरेंद्र सिंह चौधरी ने बताया कि टीम जगह-जगह जाकर खेतों की स्थिति देख रही है। खेतों की स्थिति को सूचीबद्ध किया जा रहा है।

    तेज हवा व बारिश से फसल को नुकसान
    गभाना में शनिवार को सुबह से तेज हवा के साथ पड़ी बारिश धान की फसल के लिए नुकसानदायक रही। धान के साथ ही बाज़रा की फसल खेतों में गिर गई। तहसील क्षेत्र में सैकड़ों एकड़ धान की फसल जमीन पर लेट गई है। किसानों को इस बात की आशंका सता रही है कि, कही फिर इसी तरह तेज बारिश हो गई तो खेत में पानी लग जायेगा और गिरी फसलों की बालियां अंकुरित होने लगेंगी। किसान लालपुर निवासी ललित, पनिहावर निवासी वीरपाल, भरतरी निवासी हीरेश कुमार मलिकपुरा निवासी शेरपाल सिंह का कहना है कि यह बारिश नुकसानदायक है। किसानों ने प्रशासन से जांच कर कर मुआवजे की मांग की है।

    किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें
    चंडौस में शनिवार सुबह से रही लगातार बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों में पानी भरने से जहां धान की फसल जलमग्न हो गई है, वहीं तेज बारिश के चलते कई खेतों में खड़ी फसल गिर गई। इससे किसानों को नुकसान की आशंका है। ताजपुर के किसान रुकनपाल् सिंह तोमर पुत्र जोगिंदर सिंह तोमर की करीब 10 बीघा धान की फसल बारिश के कारण खेत में गिर गई। किसान के अनुसार फसल गिरने से उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है।

    मंडी में धान की बंपर आवक बारिश से भाव धड़ाम
    खैर में कृषि उत्पादन मंडी समिति में धान की बंपर आवक के बीच शनिवार को हुई बारिश ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी। बारिश से मंडी में खुले में पड़ा धान भीग गया। वहीं धान के भाव में भी अचानक गिरावट आ गई। शुक्रवार तक करीब चार हजार रुपये क्विंटल तक बिक रहा धान शनिवार को घटकर 3000 से 3500 रुपये क्विंटल तक पहुंच गया। भाव गिरने से किसानों को आर्थिक नुकसान की चिंता सताने लगी है। वहीं मंडी में धान की खरीद भी प्रभावित हुई।