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  • UN में शहबाज शरीफ के दावे पर भारतीय राजनयिक का रिएक्शन, कैमरे में कैद हुआ पल

    UN में शहबाज शरीफ के दावे पर भारतीय राजनयिक का रिएक्शन, कैमरे में कैद हुआ पल

    नई दिल्ली
    संयुक्त राष्ट्र महासभा यानी की UN में भारतीय राजनयिक की पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ पर एक प्रतिक्रिया इंटरनेट पर वायरल हो गई। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूएन में भाषण दे रहे थे, इस दौरान उन्होंने भारत के खिलाफ झूठा नैरेटिव फैलाने की कोशिश की। शहबाज शरीफ ने झूठ बोलते हुए कहा कि मई 2025 में भारत से टकराव में पाकिस्तान की जीत हुई थी। इस दौरान यूएन का कैमरा भारतीय राजनयिक रेंटला श्रीनिवास की तरफ मुड़ा और वो अपनी सीट पर बैठकर हंसते नजर आए।

    कौन हैं राजनयिक आर श्रीनिवास
    आर श्रीनिवास ने अपने राजनयिक करियर की शुरुआत त्रिनिदाद और टोबैगो में भारत के उच्चायोग में अताशे के तौर पर काम किया। बता दें कि दूतावास में अताशे एक खास राजनयिक अधिकारी होता है, जो किसी खास सब्जेक्ट जैसे व्यापार, संस्कृति या रक्षा का विशेषज्ञ होता है। इसके अलावा वह पोर्ट ऑफ स्पेन के भारतीय उच्चायोग में अताशे और इसके साथ ही 'इंडियन टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन प्रोग्राम' (ITEC) के कोऑर्डिनेटर रह चुके हैं।

    किस पद पर हैं आर श्रीनिवास
    रेंटला श्रीनिवास नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय में विदेश सचिव के प्रधान निजी सचिव (PPS) के तौर पर काम कर चुके हैं। हाल ही में उन्होंने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र (UN) में भारत के स्थायी मिशन में 'सेकंड सेक्रेटरी' के तौर पर काम करते हुए भारत का प्रतिनिधित्व किया है। बता दें कि पीपीएस का मतलब 'प्रिंसिपल प्राइवेट सेक्रेटरी' होता है। यह भारत सरकार के मंत्रालयों में एक वरिष्ठ प्रशासनिक और सेक्रेटेरियल पद है।

    UN में शहबाज शरीफ ने क्या कहा?
    शहबाज शरीफ ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान परमाणु हथियार वाले दो देशों के बीच तनाव को रोकने में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका की तारीफ की। शरीफ ने कहा कि ट्रंप का सही समय पर किया गया दखल एक ऐसे निर्णायक मोड़ पर आया, जब भारत-पाकिस्तान पूर्ण युद्ध के कगार पर खड़े थे। कौन जानता है कि अगर राष्ट्रपति ट्रंप ने इस नाजुक क्षण में कदम न उठाया होता तो कितनी तबाही मची होती। शहबाज शरीफ ने इस दौरान सिंधु जल संधि और कश्मीर का मुद्दा भी उठाया।

  • ट्रंप का बड़ा दांव! US डीजल एक्सपोर्ट पर लग सकता है बैन, दुनिया में बढ़ेगा ईंधन संकट का खतरा

    ट्रंप का बड़ा दांव! US डीजल एक्सपोर्ट पर लग सकता है बैन, दुनिया में बढ़ेगा ईंधन संकट का खतरा

     वाशिंगटन

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने डीजल के निर्यात पर रोक लगाने की बात कही है. दरअसल, अमेरिका में ईंधन की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं. इससे घरेलू स्तर पर लोगों की परेशानी बढ़ी है. ट्रंप प्रशासन अब कीमतों को कम करने के रास्ते तलाश रहा है। 

    इसी बीच डीजल निर्यात पर रोक का प्रस्ताव सामने आया है. अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने भी कहा है कि प्रशासन निर्यात पर कुछ प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहा है. दरअसल, अमेरिका दुनिया में डीजल के सबसे बड़े निर्यातकों में शामिल है. वह वैश्विक डीजल सप्लाई का करीब 20 फीसदी हिस्सा उपलब्ध कराता है. ऐसे में अमेरिका से डीजल का निर्यात कम होने पर दुनिया के दूसरे देशों में इसकी कीमत बढ़ सकती है। 

    इस समय वैश्विक ईंधन बाजार पहले से दबाव में है. मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होने वाली तेल सप्लाई भी प्रभावित हुई है. वहीं, रूस के डीजल निर्यात पर रोक और यूक्रेन के रूसी तेल ठिकानों पर हमलों ने भी स्थिति को मुश्किल बनाया है। 

    ऑस्ट्रेलिया पर क्यों पड़ेगा ज्यादा असर?
    ऑस्ट्रेलिया विकसित देशों में प्रति व्यक्ति डीजल की सबसे ज्यादा खपत करने वाले देशों में है. हालांकि, ऑस्ट्रेलिया आम तौर पर अमेरिका से डीजल आयात नहीं करता. मार्च में एक इमरजेंसी खेप जरूर अमेरिका से वहां पहुंची थी। 

    इसके बावजूद ऑस्ट्रेलिया पर असर पड़ सकता है. इसकी वजह वैश्विक बाजार है. अगर अमेरिका डीजल का निर्यात रोकता है तो दुनिया भर में इसकी कीमत तेजी से बढ़ सकती है. इससे ऑस्ट्रेलिया में भी ईंधन महंगा होगा. हालात ज्यादा बिगड़े तो वहां ईंधन की राशनिंग तक की नौबत आ सकती है। 

    अमेरिका में भी बढ़ सकती है परेशानी
    डीजल निर्यात पर पूरी तरह रोक लगाने से अमेरिका को भी नुकसान हो सकता है. देश में डीजल की सप्लाई जरूरत से ज्यादा हो सकती है. इससे घरेलू कीमतें घट सकती हैं. लेकिन ज्यादा सप्लाई होने पर अमेरिकी रिफाइनरियों को उत्पादन कम करना पड़ सकता है. इसी वजह से व्हाइट हाउस ने फिलहाल पूरी तरह निर्यात रोकने के बजाय दूसरे विकल्पों पर विचार किया है। 

    ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने कहा है कि अमेरिकी कंपनियों को घरेलू बाजार की ओर ज्यादा ईंधन भेजने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है. इसके लिए टैक्स में छूट जैसे वित्तीय उपाय किए जा सकते हैं. इसके अलावा अमेरिका डीजल निर्यात के लिए कोटा भी तय कर सकता है. यानी देश से बाहर जाने वाले डीजल की मात्रा सीमित की जा सकती है. इस फैसले का इस्तेमाल व्यापार वार्ता में भी किया जा सकता है। 

  • यूपी के बुजुर्गों के लिए बड़ी खुशखबरी, वृद्धावस्था पेंशन अब ₹1500 महीना

    यूपी के बुजुर्गों के लिए बड़ी खुशखबरी, वृद्धावस्था पेंशन अब ₹1500 महीना

     लखनऊ
    उत्तर प्रदेश में बुजुर्गों के लिए योगी सरकार ने सामाजिक सुरक्षा के मोर्चे पर बड़ा कदम उठाया है. वृद्धावस्था पेंशन की राशि बढ़ाकर ₹1,500 प्रतिमाह कर दी गई है. पहले पात्र बुजुर्गों को ₹1,000 प्रतिमाह की दर से पेंशन मिलती थी. यानी अब सालाना पेंशन राशि बढ़कर ₹18,000 हो गई है.

    तीन महीने की ₹3,000 पेंशन अब दो किस्तों में
    पेंशन भुगतान की व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है. सितंबर 2026 से सामने आई नई व्यवस्था के अनुसार तीन महीने की कुल ₹3,000 पेंशन अब एक साथ मिलने के बजाय ₹1,500-₹1,500 की दो किस्तों में बैंक खाते में भेजी जा रही है. भुगतान DBT के जरिए सीधे लाभार्थियों के खाते में किया जा रहा है.

    सरकार ने बजट में भी बढ़ाया इंतजाम
    बुजुर्गों की पेंशन के लिए सरकार ने अनुपूरक बजट 2026-27 में भी बड़ा प्रावधान किया है. राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना के लिए ₹1,500 करोड़ की अतिरिक्त व्यवस्था की गई है. समाज कल्याण विभाग के लिए कुल ₹1,655 करोड़ का अतिरिक्त प्रावधान किया गया है.

    किसे मिलेगा पेंशन का लाभ?
    वृद्धावस्था पेंशन के लिए पात्रता और आवेदन की प्रक्रिया के तहत बुजुर्गों की उम्र, आर्थिक स्थिति और अन्य निर्धारित शर्तें देखी जाती हैं. पेंशन का लाभ लेने के लिए रिकॉर्ड में आधार, बैंक खाता और अन्य जरूरी विवरण सही होना महत्वपूर्ण है.

    पेंशन नहीं आई तो ये काम जरूर करें
    अगर नई किस्त खाते में नहीं पहुंची है तो सबसे पहले e-KYC, आधार-बैंक लिंकिंग, NPCI मैपिंग और बैंक खाते की जानकारी जांचनी चाहिए. इनसे जुड़ी गड़बड़ी होने पर भुगतान अटक सकता है. पेंशन का स्टेटस ऑनलाइन चेक किया जा सकता है और समस्या होने पर समाज कल्याण विभाग से संपर्क किया जा सकता है.

    बुजुर्गों के लिए क्या बदला?
        पेंशन: ₹1,000 से बढ़कर ₹1,500 प्रतिमाह
        सालाना सहायता: ₹18,000
        तीन महीने की राशि: ₹3,000
        नई भुगतान व्यवस्था: ₹1,500 + ₹1,500 की दो किस्तें
        वृद्धावस्था पेंशन के लिए अनुपूरक बजट में ₹1,500 करोड़
        भुगतान: DBT के जरिए बैंक खाते में

    इस तरह 2026 में यूपी के पात्र बुजुर्गों के लिए सबसे अहम बदलाव पेंशन राशि बढ़ने और भुगतान व्यवस्था में बदलाव का है.

  • केन-बेतवा लिंक से बदलेगी MP-UP की तस्वीर, 2030 तक पूरा होगा देश का पहला नदी जोड़ो प्रोजेक्ट

    केन-बेतवा लिंक से बदलेगी MP-UP की तस्वीर, 2030 तक पूरा होगा देश का पहला नदी जोड़ो प्रोजेक्ट

    छतरपुर 
     मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में पेयजल व सिंचाई के लिए पानी की पर्याप्त व्यवस्था करने के लिए देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट पर काम तीव्र गति से चल रहा है. ये परियोजना 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य. वहीं, एक ऐसी परियोजना भी है, जिस पर मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश के दो जिलों के किसानों के बीच 7 दशक से तनाव व्याप्त है। 

    बांध हमारा तो पानी तुम्हारा क्यों?
    सिंचाई के मौसम में रनगुवां डैम का पानी लेने के लिए छतरपुर व बांदा जिले के किसान आमने-सामने आ जाते हैं. दोनों जिलों के किसानों के बीच ये विवाद करीब 7 दशक से चल रहा है. अब फिर रबी फसल की सिंचाई का मौसम सामने है, ऐसे में दोनों जिलों के किसान फिर आमने-सामने हैं और प्रशासन इनके सामने असहाय की मुद्रा में. ये डैम बना तो छतरपुर जिले में है लेकिन अधिकांश पानी पर हक बांदा जिले का है। 

    डैम पर पूरा नियंत्रण उत्तर प्रदेश के पास
    बीते दो साल छोड़ दिए जाएं तो मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश का बुंदेलखंड इलाका सूखे के लिए बदनाम रहा है. इसलिए यहां पानी को लेकर हमेशा युद्ध जैसी स्थिति रहती है. छतरपुर में आधा दर्जन से अधिक बांध होने के बावजूद सिंचाई साधनों की कमी है. रनगुवां बांध छतरपुर जिले में होने के बावजूद इसका पानी उत्तर प्रदेश के खेतों के लिए अमृत बना हुआ है. छतरपुर जिले के किसान हर साल सिंचाई के पानी के लिए तरसते हैं। 

    छतरपुर जिला मुख्यालय से 45 किलोमीटर दूर राजनगर इलाके से निकली केन की सहायक पर रनगुवां डैम बना है. इस डैम का निर्माण 1957 में एमपी और यूपी के संयुक्त उपक्रम के रूप में किया गया. ये बांध भले ही मध्य प्रदेश के छतरपुर सीमा में है लेकिन इसका प्रशासनिक नियंत्रण और रखरखाव उत्तर प्रदेश का बांदा जिले का सिंचाई विभाग करता है। 

    किसानों में फिर रोष, आंदोलन की चेतावनी
    छतरपुर के रनगुवां के किसान कमलेश रैकवार कहते हैं "बांध उनके क्षेत्र में होने के बावजूद उनके हक का पानी उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती गांवों में जाता है. यूपी के बांदा जिले को पानी ज्यादा दिया जाता है, जिससे यहां के किसानों की फसलें सूखने लगती हैं. हमारे हिस्से का पानी भी यूपी के किसान निकालते हैं. हम लोगों की खेती समय से नहीं हो पाती। 

    कम बारिश होने की स्थिति में बांध में पानी का स्तर कम होता है, तब यह विवाद उग्र होने लगता है. छतरपुर जिले के किसान संघ के अध्यक्ष अयोध्या प्रसाद पटेल कहते हैं "यह विवाद पीढ़ियों से चला आ रहा है. कई बार यह मुद्दा किसानों ने उठाया है. छतरपुर जिले की सीमा में बांध बना है लेकिन यहां किसानों को पानी नहीं मिल रहा. अब किसानों के पास आंदोलन के अलावा कोई चारा नहीं है. किसानों को उनके हक का पानी मिलेगा। 

    52 साल पहले हुआ था दोनों राज्यों के बीच एग्रीमेंट
    रनगुवां डैम के पानी के बंटवारे को लेकर एग्रीमेंट 1 अगस्त 1972 को हुआ था. उस समय मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री प्रकाश चंद सेठी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलपति त्रिपाठी ने इस अनुबंध पर हस्ताक्षर किए थे. अनुबंध के अनुसार रनगुवां डैम का 30 प्रतिशत पानी मध्य प्रदेश के छतरपुर और 70 प्रतिशत पानी यूपी के बांदा को मिल रहा है। 

    रनगुवां के किसान मुन्ना अहिरवार कहते हैं "जब सिंचाई का सीजन शुरू होता है तो यूपी वाले पानी रोक देते हैं. हम लोगों की फसल चौपट हो जाती है. कई बार आवाज उठाई लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ." छतरपुर के जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री राकेश वर्मा कहते हैं राजनगर इलाके में बने रनगुवां बांध से राजनगर इलाके के 35 गांवों मे सिंचाई होती है. यूपी के बांदा जिले के लगभग 95 गांवों की खेती को रनगुवा बांध पानी देता है. रनगुवा बांध की लंबाई 2 हजार 72 मीटर और ऊंचाई 27.400 मीटर है. इसकी जलभराव क्षमता 155 MCM है। 

    केन-बेतवा लिंक परियोजना पूरी होने पर खत्म होगा विवाद
    रनगुवां डैम के पानी वितरण को लेकर मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश के किसानों के बीच दशकों से चला आ रहा तनाव केन-बेतवा लिंक परियोजना का काम पूरा होने के बाद खत्म होने की संभावना है. इस परियोजना पर काम तेज गति से चल रहा है. छतरपुर के ADM विनय द्विवेदी कहते हैं " केन-बेतवा लिंक परियोजना से सूखे बुन्देलखंड में पानी के संकट से लोगों को छुटकारा मिलेगा. किसानों के खेतों में हरियाली लहराएगी. परियोजना वर्ष 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य है. परियोजना की कुल लागत ₹44,605 करोड़ रुपये है. परियोजना के तहत केन नदी पर 96.7 मीटर ऊंचा और 2 से 2.5 किमी चौड़ा डैम बनेगा। 

    सिंचाई के अलावा पेयजल संकट सुलझेगा
    केन-बेतवा लिंक परियोजना से मध्य प्रदेश के 10 जिलों में 8.11 लाख हेक्टेयर और उत्तरप्रदेश के 4 जिलों में 2.51 लाख हेक्टेयर मिलाकर कुल 10.62 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होगी. दोनों राज्यों के करीब 65 लाख लोगों को पेयजल की सुविधा मिलेगी. MP के छतरपुर, पन्ना, टीकमगढ़, सागर, दमोह, दतिया, विदिशा, शिवपुरी, रायसेन और UP जिले बांदा, महोबा, झांसी और ललितपुर जिलों के लिए केन-बेतवा लिंक परियोजना वरदान साबित होगी। 

  • उज्ज्वल निकम का किरदार निभाने से घबराए थे राजकुमार राव, बोले- ‘जिस चीज से डर लगे, उसे जरूर करना चाहिए’

    उज्ज्वल निकम का किरदार निभाने से घबराए थे राजकुमार राव, बोले- ‘जिस चीज से डर लगे, उसे जरूर करना चाहिए’

    मुंबई 
     अभिनेता राजकुमार राव और वामिका गब्बी आगामी फिल्म 'प्रहार: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ उज्ज्वल निकम' में नजर आएंगे। दोनों कलाकारों सरकारी वकील उज्ज्वल निकम (राजकुमार राव) और पत्नी ज्योति निकम (वामिका गब्बी) का किरदार निभाने को लेकर अपनी शुरुआती घबराहट के बारे में बताया। दोनों कलाकार उज्ज्वल निकम के साथ 'कौन बनेगा करोड़पति 18' में पहुंचे। इस दौरान शो के होस्ट और बॉलीवुड मेगास्टार अमिताभ बच्चन ने असल जिंदगी के किरदारों को पर्दे पर निभाने की मुश्किलों का जिक्र किया। 

    राजकुमार ने बताया कि जब निर्देशक अविनाश अरुण ने उन्हें उज्ज्वल निकम के रोल के लिए संपर्क किया था, तो वे शुरू में काफी नर्वस थे, खासकर उम्र, शारीरिक बनावट और आवाज में अंतर की वजह से। अभिनेता राजकुमार ने अपना अनुभव शेयर करते हुए कहा, "सर, जब फिल्म के डायरेक्टर ने बताया कि ये फिल्म बन रही है, तो मैं डर गया कि मैं उज्ज्वल जी का किरदार कैसे निभाऊंगा क्योंकि उम्र का फर्क है, शारीरिक बनावट का फर्क है और आवाज का फर्क है। पर मैं ऐसा मानता हूं कि जिस चीज से डर लगता है, उसे जरूर करना चाहिए, तभी आप खुद को आगे बढ़ाते हो, नहीं तो एक कलाकार के तौर पर आप हमेशा अपने कम्फर्ट जोन में ही रहोगे।"

    राजकुमार ने बताया कि उन्होंने उज्ज्वल निकम के हावभाव और आवाज को समझने के लिए घंटों तक उनके वीडियो देखे। इस किरदार के लिए उन्होंने अपना वजन भी बढ़ाया ताकि वे सरकारी वकील जैसे दिख सकें। उन्होंने कहा, "तो मैंने हमारे निर्देशक अविनाश अरुण से कहा कि फिल्म करते हैं, पर मैं उज्ज्वल जी से नहीं मिल पाया क्योंकि वो काफी बिजी रहते हैं, पर मैंने यूट्यूब पर घंटों-घंटों तक उनके वीडियो देखे। उज्ज्वल जी की आवाज को पकड़ना बहुत मुश्किल था और फिर मैंने शारीरिक बनावट के लिए वजन बढ़ाया।"

    वहीं वामिका गब्बी ने बताया कि वह भी ज्योति निकम का किरदार निभाने से पहले हिचकिचा रही थीं। उन्होंने कहा, "सर, इनकी तरह मैं भी डर गई थी और मैंने तो पहले फिल्म के लिए मना कर दिया था, क्योंकि एक तो मुझे 50 साल की महिला का किरदार निभाना था और मेरी तो अभी तक शादी भी नहीं हुई और वहां तो 22-23 साल के बच्चे हैं। हालांकि एक अभिनेता के तौर पर कम्फर्ट जोन से बाहर निकलना जरूरी है। यह सोचकर मैंने यह चुनौती स्वीकार करने का फैसला किया।"

    उन्होंने कहा, "जिस चीज से डर लगे वो करना चाहिए और मैंने भी सोचा कि मैं भी देख लूं कि मैं कितने पानी में हूं। पर ज्योति मैम इतनी प्यारी हैं कि बाद में मुझे एहसास हुआ कि मैं कितने मजबूत इंसान का किरदार निभा रही हूं।"

  • पाकिस्तान पर IMF का दबाव! ₹7 अरब डॉलर के लोन के लिए 174 बदलावों की शर्त

    पाकिस्तान पर IMF का दबाव! ₹7 अरब डॉलर के लोन के लिए 174 बदलावों की शर्त

    नई दिल्‍ली

    इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड (IMF) ने पाकिस्‍तान को बड़ा झटका दिया है. आईएमएफ ने पड़ोसी मुल्‍क पाकिस्‍तान के सामने कुछ ऐसी शर्त रख दी है, जिसे पूरा किए बिना उसे एक भी पैसे नहीं मिलेंगे. रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के साथ कठिन वार्ता के एक और दौर के लिए तैयार है। 

    IMF का कहना है कि पाकिस्‍तानी सरकार को 7 अरब डॉलर का कर्ज अनलॉक करने के लिए संसद के सामने 174 विधायी संशोधनों को पेश करना होगा और उसे लागू कराने की कोशिश करनी होगी. प्रस्‍तावित कानूनी बदलावों में टैक्‍सेशन, एनर्जी सेक्‍टर, प्राइवेटाइजेशन और सॉवरेन वेल्‍थ फंड समेत अन्‍य सेक्‍टर शामिल हैं।  

    इन चर्चाओं के दौरान IMF पाकिस्‍तान के सुधारों और उसकी ग्रोथ की भी जांच कर सकता है, जिसमें 15 संरचनात्‍मक मानदंड, साथ ही राजकोषीय बदलाव, फाइनेंस और अन्‍य उपाय शामिल हैं। 

    पाकिस्‍तान ने 174 बदलावों पर क्‍या कहा? 
    विधायी प्रक्रिया का पैमाना राष्ट्रीय सभा की एक समिति के सामने रखा गया है, जहां पाकिस्तान के वित्त सचिव इम्दादुल्लाह बोसल ने कहा कि IMF की शर्तों से जुड़े 174 संशोधनों को संसद के सामने रखना होगा. बोसल ने फाइनेंस और रेवेन्‍यू संबंधी राष्‍ट्रीय सभा की स्‍थायी समिति को बताया कि IMF कुल 174 संशोधनों को पास करवाना चाहता है। 

    हालांकि, वित्त सचिव ने यह बात बरकरार रखी कि प्रस्तावित संशोधनों पर निर्णय लेने का विशेषाधिकार संसद के पास होगा. ये बदलाव पाकिस्तान के आर्थिक ढांचे के कई क्षेत्रों को कवर करते हैं, जिनमें टैक्‍सेशन, एनर्जी, प्राइवेटाइजेशन और सॉवरेन वेल्‍थ फंड शामिल हैं।  

    15 नियम-कायदों की भी होगी जांच
    ये विधायी बदलाव ऐसे समय में आए हैं जब पाकिस्तान और आईएमएफ ने चौथी समीक्षा के तहत बातचीत कर रहे हैं. इस समीक्षा में 15 संरचनात्‍मक मापदंडों को शामिल किया जाएगा और अर्थव्‍यवस्‍था के खास सेक्‍टर में सुधारों की ग्रोथ का आकलन किया जाएगा। 

    ऊर्जा क्षेत्र, सरकारी स्वामित्व वाले कारोबार (SOE) और प्राइवेट से संबंधित उपायों के साथ-साथ टैक्‍स सुधार भी जांच के दायरे में आने वाले क्षेत्रों में शामिल होंगे. राजकोषीय सुदृढ़ीकरण, राज्‍य फाइनेंस और मितव्ययिता उपायों पर भी चर्चा होगी। 

    बिजली वितरण कंपनियां और शुगर पॉलिसी
    बिजली वितरण कंपनियों के निजीकरण का मुद्दा भी समीक्षा वार्ता में शामिल होने की उम्मीद है, क्योंकि इस्लामाबाद अपने ऊर्जा क्षेत्र और राज्य के स्वामित्व वाले उद्यमों से संबंधित प्रतिबद्धताओं को पूरा करने की कोशिश कर रहा है. इस मुद्दे ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि अगर लाभ कमाने वाली डिस्‍ट्रीब्‍यूशन कंपनियों का निजीकरण कर दिया जाता है तो घाटे में चल रही डिस्‍ट्रीब्‍यूटर कंपनियों का क्या होगा। 

    चीनी नीति में बदलाव भी आईएमएफ के मानदंडों में शामिल हैं. पाकिस्तानी अखबार डॉन के अनुसार, संघीय सरकार ने उदारीकरण के लिए एक मसौदा नीति जारी की है, जिस पर तीन प्रांतों ने सहमति जताई है और एक ने आपत्ति जताई है. चर्चा के दायरे में आने वाले अन्य क्षेत्रों में इस्लामी बैंकिंग से संबंधित सुधार और टैक्‍सेशन सिस्‍टम में और बदलाव शामिल हैं। 

  • दिवाली-दशहरा पर रेलवे की बड़ी सौगात! 102 फेरे चलेंगी स्पेशल ट्रेनें, आज से बुकिंग शुरू

    दिवाली-दशहरा पर रेलवे की बड़ी सौगात! 102 फेरे चलेंगी स्पेशल ट्रेनें, आज से बुकिंग शुरू

     नई दिल्‍ली
    अगर आप दशहरा-दिवाली पर घर जाना चाहते हैं तो भारतीय रेलवे आपके लिए कुछ फेस्टिवल स्‍पेशल चलाने जा रहा है. यह ट्रेनें 102 फेरे लगाएंगी और आपको अपने शहर तक छोड़ेंगी. इन ट्रेनों में बुकिंग आज  यानी 27 सितंबर से शुरू हो रही है। 

    ऐसे में अगर आप त्‍योहारों पर घर जाना चाहते हैं तो आपको टेंशन लेने की आवश्‍यकता नहीं है, बल्कि फटाफट बुकिंग शुरू कर देनी चाहिए. त्‍योहारों के लिए बढ़ती भीड़ को देखते हुए रेलवे ने ये फैसला लिया है. 102 फेरे लगाने वाली ट्रेनें  सोलापुर मंडल से गुजरने वाले अलग-अलग रूटों पर चलाई जाएंगी. इन ट्रेनों से मुंबई, चेन्नई, लातूर, कोल्हापुर और कलबुरगी समेत कई प्रमुख शहरों के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को अतिरिक्त सुविधा मिलेगी। 

    मुंबई-चेन्नई के बीच स्पेशल ट्रेनें
    CSMT मुंबई-चेन्नई बीच वीकली स्पेशल ट्रेन के 6 फेरे चलाए जाएंगे. यह ट्रेन 14 अक्टूबर से 18 नवंबर तक हर बुधवार को मुंबई से रात 12:35 बजे रवाना होगी और उसी दिन रात 11:30 बजे चेन्‍नई पहुंच जाएगी. वापसी में चेन्नई-CSMT मुंबई स्पेशल 15 अक्टूबर से 19 नवंबर तक हर गुरुवार को सुबह 4 बजे चेन्नई से रवाना होगी और अगले दिन सुबह 4 बजे मुंबई आ जाएगी। 

    इसका स्‍टॉपेज- दादर, ठाणे, कल्याण, लोनावला, पुणे, दौंड, कुर्डुवाड़ी, सोलापुर, कलबुरगी, वाडी, रायचूर, मं‍त्रालयम रोड, अडोनी, गुंतकल, गूटी, ताड़ीपत्री, ये‍र्रागुंटला, कडप्पा, रेनिगुंटा, अरक्कोनम और पेरंबूर। 

    मुंबई-लातूर के बीच 26 फेरे लगाएगी फेस्टिवल स्‍पेशल ट्रेनें 
    मुंबई और लातूर के बीच यात्रियों के लिए मुंबई-लातूर द्वि-साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन चलाए जाने का ऐलान किया गया है. यह ट्रेन 13 अक्टूबर से 24 नवंबर तक हर मंगलवार और गुरुवार को चलाई जाएगी. इसके कुल 13 फेरे जारी होंगे. CSMT मुंबई से ट्रेन रात 12:35 बजे रवाना होकर उसी दिन सुबह 11:40 बजे लातूर पहुंचेगी। 

    वापसी में लातूर-सीएसएमटी मुंबई स्‍पेशल भी 13 बार जाएगी. यह ट्रेन 13 अक्‍टूबर से 24 नवंबर तक हर मगंलवार और गुरुवार को शाम 4.30 बजे लातूर से चलेगी और अगले दिन सुबह 4.10 बजे सीएसएमटी मुंबई पहुंचेगी। 

    इसका स्‍टॉपेज- दादर, ठाणे, कल्याण, लोनावला, पुणे, उरुली, दौंड, भीगवां, जेजुरी, कुर्डुवाड़ी, बार्शी टाउन, धाराशिव और हरंगुल। 

    कोल्हापुर-कलबुरगी फेस्टिवल स्‍पेशल 
    रेलवे कोल्हापुर और कलबुरगी के बीच भी 64 फेरे लगाएगी. यह स्पेशल ट्रेन शुक्रवार को छोड़कर हर दिन चलेगी. कोल्हापुर-कलबुरगी स्पेशल 10 अक्टूबर से 15 नवंबर तक हर दिन सुबह 6:10 बजे कोल्हापुर से रवाना होगी और शाम 4:10 बजे कलबुरगी पहुंचेगी. इस दिशा में कुल 32 फेरे होंगे। 

    कलबुरगी-कोल्हापुर स्पेशल 10 अक्टूबर से 15 नवंबर तक हर दिन, शुक्रवार को छोड़कर, शाम 6:10 बजे कलबुरगी से चलेगी और अगले दिन सुबह 5:40 बजे कोल्हापुर पहुंचेगी. इस दिशा में भी 32 फेरे चलाई जाएंगी। 

    स्टॉपेज- हाटकनगले, जयसिंगपुर, मिरज जंक्शन, अरग, बेलांकी, सुलगारे, कवठे महांकाल, लंगरपेठ, ढालगांव, म्हसोबा डोंगरगांव, जावले, वासुद, सांगोला, पंढरपुर, मोडनिंब, कुर्डुवाड़ी जंक्शन, सोलापुर और कलबुरगी जंक्शन। 

  • MP में युवाओं के लिए बड़ा मौका! ‘सीखो-कमाओ योजना’ में 1 साल की ट्रेनिंग के साथ कमाई भी

    MP में युवाओं के लिए बड़ा मौका! ‘सीखो-कमाओ योजना’ में 1 साल की ट्रेनिंग के साथ कमाई भी

    भोपाल
     मध्य प्रदेश में अब 'सीखो-कमाओ योजना' के जरिए मोहन सरकार की युवाओं को रोजगार देने की तैयारी है. डिग्री डिप्लोमा के बाद नौकरी तलाश रहे नौजवान इस योजना के जरिए एक साल की ट्रेनिंग ले सकेंगे. खास बात ये है कि ट्रेनिंग के दौरान भी इन्हें कमाने का अवसर मिलेगा. इस योजना के लिए आयु सीमा 18 से 29 वर्ष है. 15 अक्टूबर तक ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवाया जा सकता है। 

    ऑन द जॉब ट्रेनिंग, एक साल की ट्रेनिंग में इतना स्टाइपेंड
    पॉवर प्रोडक्शन के क्षेत्र में व्यावहारिक प्रशिक्षण का ये मौका है. मध्य प्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड ने मुख्यमंत्री सीखो-कमाओ योजना में ये मौका दिया है. इसमें 559 ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग पद उपलब्ध कराए हैं. डिग्री, डिप्लोमा के अलावा अन्य निर्धारित शैक्षणिक योग्यता के बाद नौकरी की तलाश कर रहे नौजवान इस योजना के जरिए कंपनी के विभिन्न कार्यालयों एवं विद्युत गृहों में एक वर्ष का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त कर सकेंगे. ट्रेनिंग लेने पर प्रशिक्षण अवधि के दौरान 8 हजार रुपये से लेकर 10 हजार रुपये प्रतिमाह तक स्टाइपेंड भी दिया जाएगा। 

    यहां होगी ट्रेनिंग और ऐसे मिलेगा नौकरी का मौका
    मुख्यमंत्री सीखो-कमाओ योजना के अंतर्गत युवाओं को जबलपुर स्थित पावर कंपनी मुख्यालय के साथ प्रदेश में स्थित विभिन्न जल एवं ताप विद्युत गृहों में कार्य करते हुए व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने का अवसर मिलेगा. योजना के अंतर्गत इलेक्ट्रीशियन, इन्फॉर्मेशन एंड कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी एवं सिस्टम मेंटेनेंस, कंप्यूटर ऑपरेटर एवं प्रोग्रामिंग असिस्टेंट, स्टेनो (हिन्दी/अंग्रेजी), सिविल इंजीनियरिंग, मानव संसाधन, अकाउंट्स सहित विभिन्न कार्यश्रेणियों में प्रशिक्षण के अवसर उपलब्ध कराए गए हैं. इससे युवाओं को अपनी शैक्षणिक योग्यता के अनुरूप विद्युत उत्पादन एवं कंपनी के विभिन्न कार्यक्षेत्रों की कार्यप्रणाली को नजदीक से समझने का अवसर मिलेगा। 

    एक वर्ष की प्रशिक्षण अवधि, प्रशिक्षण के बाद स्टाइपेंड
    ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद निर्धारित पात्रता के अनुसार अभ्यर्थियों का चयन किया जाएगा. चयनित प्रशिक्षणार्थियों को उनके द्वारा चयनित कार्यश्रेणी व जिले के अनुरूप कंपनी के विभिन्न विद्युत गृहों एवं कार्यालयों में प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा. प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ होने के एक माह बाद प्रशिक्षणार्थियों को पात्रता के अनुसार 8 हजार से 10 हजार प्रतिमाह स्टाइपेंड का भुगतान प्रारंभ होगा. प्रशिक्षण की कुल अवधि एक वर्ष निर्धारित है। 

    18-29 वर्ष के मध्य प्रदेश के स्थानीय निवासी कर सकते हैं आवेदन
    योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक का मध्य प्रदेश का स्थानीय निवासी होना आवश्यक है. अभ्यर्थी की आयु 18 से 29 वर्ष के मध्य होनी चाहिए. शैक्षणिक योग्यता के अंतर्गत निर्धारित कार्यश्रेणी के अनुसार 12वीं, आईटीआई, डिप्लोमा अथवा स्नातक उत्तीर्ण होना आवश्यक है. मुख्यमंत्री सीखो-कमाओ योजना के अंतर्गत आवेदन प्रक्रिया 23 सितंबर 2026 से प्रारंभ हो चुकी है. इच्छुक एवं पात्र अभ्यर्थी 15 अक्टूबर की रात 11:59 बजे तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। 

    ऑनलाइन पोर्टल से ही होगा आवेदन
    इच्छुक अभ्यर्थियों को मुख्यमंत्री सीखो-कमाओ योजना के ऑनलाइन पोर्टल https://mmsky.mp.gov.in/Web/Candidate/Registration के माध्यम से आवेदन करना होगा. योजना में पंजीयन के लिए समग्र आईडी एवं आधार की ई-केवाईसी आवश्यक है. अभ्यर्थियों को ध्यान रखना होगा कि मुख्यमंत्री सीखो-कमाओ योजना के अंतर्गत उपलब्ध ये पद प्रशिक्षण हेतु हैं तथा इन्हें नियमित नौकरी अथवा स्थायी रोजगार के रूप में नहीं माना जाएगा. आवेदन से संबंधित किसी भी प्रकार की कठिनाई अथवा जानकारी के लिए अभ्यर्थी अपने संबंधित जिला स्तरीय आईटीआई से संपर्क कर सकते हैं। 

  • FD Rule Change: 1 अक्टूबर से बदलेंगे फिक्स्ड डिपॉजिट के नियम

    FD Rule Change: 1 अक्टूबर से बदलेंगे फिक्स्ड डिपॉजिट के नियम

    नई दिल्ली
     देश में सबसे सुरक्षित निवेशों में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) को अहम माना जाता है। इसमें समय के साथ जमा राशि पर मिलने वाला ब्याज भी पहले से तय होता है। इस बीच बैंक एफडी में निवेश करने वालों और खासकर के संबंधित बैंक के लिए एक बड़ी खबर है।

    केंद्रीय बैंक यानी कि आरबीआई ने बीते दिनों बैंक एफडी को लेकर उसके नियमों में संशोधन किया था, जिसे एक अक्टूबर 2026 से लागू किया जाएगा। बैंक एफडी की ब्याज दरों में पारदर्शिता लाने और ग्राहकों के लिए और भी सहूलियत बनाने के लिए 1 अक्टूबर से एफडी के नियमों में बड़ा बदलाव होगा। आइए जानते हैं यह पूरा बदलाव क्या है और इससे क्या असर पड़ेगा।

    बैंक एफडी के लिए आरबीआई का नया नियम क्या है?

        बीते दिनों केंद्रीय बैंक यानी कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंक एफडी से जुड़े नियमों में बदलाव को लेकर दिशानिर्देश जारी किया था, जिसे एक 1 अक्टूबर 2026 से लागू कर दिया जाएगा।

        इस नियम के तहत बैंक की अलग-अलग ब्रांच में एक ही अवधि (समय) के लिए बनी एफडी योजना और उसपर मिलने वाली सालाना ब्याज दर एक सामान होगी। यह शहर या जगह के आधार पर अलग-अलग नहीं होगी। मतलब कि देश के सभी ब्रांचों में संबंधित बैंक की एफडी दर सामान होगी।

        इस नियम के तहत यह भी साफ किया गया है कि बैंकों को एफडी पर दी जाने वाली ब्याज दर को ग्राहकों को मौखिक रूप से नहीं बल्कि अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर पहले से ही बताना होगा। 

    मतलब कि किसी भी बैंक को अपनी एफडी योजना के रेट कार्ड को लोगों के लिए पहले से ही अपनी वेबसाइट पर सार्वजनिक करना होगा।

        बल्क डिपॉजिट के लिए भी नए नियम लागू होंगे। बल्क डिपॉजिट यानी कि 3 करोड़ रुपये या उससे अधिक की राशि की एफडी के लिए बैंकों को हर रोज अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर नई दरें अपडेट करनी होगी। इसकी टाइमिंग हर रोज सुबह 10 बजे रहेगी। ग्रेस टाइम के साथ इसे हर हाल में सुबह 10:10 बजे तक अपडेट कर देना ही होगा।

    1 अक्टूबर से मौजूदा एफडी पर क्या असर पड़ेगा?
    मिली जानकारी के अनुसार, एफडी को लेकर यह जो भी नया नियम एक अक्टूबर से लागू होने जा रहा है, इससे मौजूदा एफडी पर कोई बड़ा असर या असर नहीं पड़ेगा। आपकी जो भी एफडी पहले से चल रही है, वह उसी तय ब्याज दर, समय या तय नियमों के साथ जारी रहेगी।

    इस नए नियम से एफडी को लेकर ग्राहकों और बैंकों के बीच पारदर्शिता पहले से अधिक हो जाएगी। लोगों को एफडी की ब्याज दर जानने के लिए बैंक नहीं जाना होगा, खासकर के बल्क डिपॉजिट की रोजाना तय हो रही ब्याज दर के लिए इधर-उधर भटकने की जरूरत नहीं होगी। बल्कि, ग्राहकों को संबंधित बैंक की आधिकारिक वेबसाइट पर सुबह 10 बजते ही नई रेट की जानकारी मिल जाएगी।
    बैंक एफडी की ब्याज दरें कैसे तय करता है?

    बैंक एफडी की ब्याज दरें जमा राशि के आधार पर तय करता है। वह आमतौर पर जमा राशि के आधार पर अलग-अलग एफडी पर ब्याज रेट देता है। बैंक खुदरा जमा (जो 3 करोड़ रुपये से कम होती हैं) पर एक ही ब्याज दर लागू किए हुए होता है, जबकि बल्क डिपॉजिट यानी कि 3 करोड़ रुपये या उससे अधिक की राशि पर ब्याज दरें अलग-अलग होती हैं।

    मालूम हो कि 22 अक्टूबर 1997 से, आरबीआई ने बैंकों को अलग-अलग अवधि वाली घरेलू मियादी जमाओं (टर्म डिपॉजिट) पर अपनी ब्याज दरें तय करने की आजादी दे दी थी।

        एफडी का पूरा नाम क्या है?
        एफडी का पूरा नाम फिक्स्ड डिपॉजिट है, जिसे हिंदी में सावधि जमा कहते हैं।
        एफडी की विशेषता क्या है?
        एफडी की विशेषता में सुरक्षित रिटर्न, तय ब्याज दर और तय समय समेत अन्य शामिल हैं।
        FD में कितना पैसा जमा कर सकते हैं?
        FD में अधिकतम पैसे जमा करने की कोई सीमा नहीं है। हालांकि, न्यूनतम आप 1000 रुपये से निवेश शुरू कर सकते हैं।
        सीनियर सिटीजन को FD पर कितना ब्याज मिलता है?
        सीनियर सिटीजन को FD पर 8.50% तक का ब्याज मिलता है।
        पोस्ट ऑफिस में सीनियर सिटीजन में कितना ब्याज मिलता है?
        पोस्ट ऑफिस में सीनियर सिटीजन स्कीम में 8.2 फीसदी का सालाना ब्याज मिलता है।

  • MP में बनेगी Water Transport Authority, क्रूज-बोट से जल परिवहन तक बदलेंगे नियम

    MP में बनेगी Water Transport Authority, क्रूज-बोट से जल परिवहन तक बदलेंगे नियम

    भोपाल
     मध्यप्रदेश में अब पानी के रास्ते सफर का पूरा सिस्टम बदलने की तैयारी है। बड़े तालाब, नदियों और बांधों में चलने वाले क्रूज, बोट और दूसरे जल परिवहन साधनों के लिए अलग अथॉरिटी बनाई जाएगी। इसके जरिए यह तय होगा कि पानी के जहाजों का रजिस्ट्रेशन कौन करेगा, संचालन के नियम क्या होंगे और जल परिवहन की जिम्मेदारी किस विभाग के पास रहेगी।

    अभी राज्य में जल परिवहन का इस्तेमाल मुख्य रूप से पर्यटन गतिविधियों के लिए किया जाता है। नई व्यवस्था के बाद इसे पर्यटन से आगे ले जाकर व्यवस्थित इनलैंड वॉटर ट्रांसपोर्ट सिस्टम के रूप में विकसित करने की तैयारी है।

    क्रूज-बोट के लिए अलग नियम होंगे
    अथॉरिटी बनने के बाद क्रूज, बोट और अन्य जलयान मनमाने तरीके से संचालित नहीं होंगे। इनके संचालन और रजिस्ट्रेशन के लिए नियम तय किए जाएंगे। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि अलग-अलग जल क्षेत्रों में किस तरह के जलयान चल सकेंगे और उनकी संचालन व्यवस्था किस विभाग के अधीन होगी।

    मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी
    अथॉरिटी के गठन और नियमों का खाका तैयार करने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई है। इस कमेटी में वित्त, परिवहन, जल संसाधन, नर्मदा घाटी विकास, विधि और पर्यटन विभाग के अधिकारियों के साथ इनलैंड वॉटरवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IWAI) के प्रतिनिधि भी शामिल हैं। यानी नई व्यवस्था तैयार करते समय परिवहन के साथ पर्यटन और जल संसाधन से जुड़े पहलुओं को भी साथ रखा जा रहा है।

    सबसे बड़ा सवाल. कौन करेगा संचालन?
    नई अथॉरिटी के सामने अहम काम यह तय करना होगा कि जलयानों का रजिस्ट्रेशन और संचालन किस विभाग के जिम्मे रहेगा। अलग-अलग राज्यों में इसकी व्यवस्था अलग है। उत्तर प्रदेश और असम जैसे राज्यों में परिवहन विभाग की भूमिका है, जबकि गुजरात और तटीय क्षेत्रों में मरीन विभाग इस तरह की जिम्मेदारी संभालता है। मध्यप्रदेश में किस मॉडल को अपनाया जाए, इस पर कमेटी की सिफारिश के आधार पर आगे फैसला होगा।

    पर्यटन से ट्रांसपोर्ट तक बढ़ेगा दायरा
    अभी भोपाल के बड़े तालाब समेत प्रदेश के कई जल क्षेत्रों में बोट और क्रूज मुख्य रूप से पर्यटन का हिस्सा हैं। नई अथॉरिटी का उद्देश्य केवल पर्यटकों के लिए जलयान चलाना नहीं होगा। इसके जरिए इनलैंड वॉटर ट्रांसपोर्ट को एक अलग परिवहन माध्यम के तौर पर विकसित करने की संभावनाएं भी देखी जाएंगी। इससे भविष्य में जल मार्गों का इस्तेमाल यात्री या अन्य परिवहन गतिविधियों के लिए किए जाने का रास्ता तैयार हो सकता है।

    दूसरे राज्यों तक भी पहुंच सकता है जल परिवहन
    नई व्यवस्था का दायरा मध्यप्रदेश की सीमाओं तक सीमित रखने की योजना नहीं है। अथॉरिटी बनने के बाद अंतरराज्यीय जल परिवहन की संभावनाओं पर भी काम किया जा सकता है। इसके लिए दूसरे राज्यों के साथ जल मार्गों की कनेक्टिविटी, नियम और संचालन व्यवस्था जैसे पहलुओं पर आगे रूपरेखा तैयार होगी।

    अब पानी पर भी बनेगा ट्रांसपोर्ट का सिस्टम
    मध्यप्रदेश में बड़ी नदियों और जलाशयों का नेटवर्क है। ऐसे में नई अथॉरिटी के गठन से पहली बार जल परिवहन को लेकर एक केंद्रीकृत नियामक व्यवस्था तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ेगा। क्रूज और पर्यटन बोट से शुरू होने वाली यह व्यवस्था आगे यात्री परिवहन और अंतरराज्यीय जल कनेक्टिविटी तक पहुंचती है या नहीं, यह अथॉरिटी के नियम और सरकार के अगले फैसलों पर निर्भर करेगा।