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  • 8वें वेतन आयोग में ₹72 हजार तक बेसिक पे की मांग, फिटमेंट फैक्टर 4 करने का प्रस्ताव

    8वें वेतन आयोग में ₹72 हजार तक बेसिक पे की मांग, फिटमेंट फैक्टर 4 करने का प्रस्ताव

    नई दिल्ली
    8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की उम्मीदें लगातार बढ़ रही हैं। आयोग देश के अलग-अलग शहरों में कर्मचारी संगठनों, यूनियनों और अन्य हितधारकों के साथ बैठकें कर रहा है। इन बैठकों में न्यूनतम बेसिक सैलरी, फिटमेंट फैक्टर, सालाना इंक्रीमेंट, भत्तों और पेंशन में बदलाव जैसे मुद्दों पर चर्चा हो रही है। इसी बीच दो प्रमुख कर्मचारी संगठनों, NC-JCM (National Council-Joint Consultative Machinery) और BPMS (Bharatiya Pratiraksha Mazdoor Sangh) ने अपनी मांगें रखी हैं। इनमें न्यूनतम बेसिक सैलरी को ₹69,000 से ₹72,000 तक करने के प्रस्ताव शामिल हैं।

    सैलरी ₹69,000 और फिटमेंट 3.833 की डिमांड
    NC-JCM ने 8वें वेतन आयोग के सामने न्यूनतम बेसिक पे ₹69,000 करने और फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) को 3.833 रखने की डिमांड की है। संगठन मौजूदा 3% सालाना इंक्रीमेंट को बढ़ाकर 6% करने का भी प्रस्ताव दे रहा है। इसके अलावा वेतन मैट्रिक्स में बदलाव और कुछ पे लेवल को आपस में मिलाने की डिमांड भी शामिल है। संगठन ने न्यूनतम वेतन तय करने के लिए पोषण संबंधी जरूरतों को आधार बनाने का सुझाव दिया है। इसमें भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) से जुड़ी 3,490 कैलोरी की जरूरत का उल्लेख किया गया है, खासकर शारीरिक मेहनत वाले कामों के लिए।

    बेसिक सैलरी ₹72,000 और फिटमेंट 4 का प्रस्ताव
    दूसरी ओर BPMS ने न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹72,000 और फिटमेंट फैक्टर 4 करने का प्रस्ताव रखा है। संगठन भी सालाना इंक्रीमेंट को 3% से बढ़ाकर 6% करने के पक्ष में है। इसके साथ ही उसने न्यूनतम वेतन तय करने के तरीके में बदलाव की मांग की है। BPMS चाहता है कि वेतन निर्धारण में प्रति व्यक्ति आय की वृद्धि को भी ध्यान में रखा जाए। संगठन के ज्ञापन के मुताबिक, भारत की प्रति व्यक्ति शुद्ध राष्ट्रीय आय 2016-17 में ₹1,03,219 से बढ़कर 2024-25 में ₹1,92,774 हो गई। संगठन ने इस वृद्धि को अपनी मांग के समर्थन में पेश किया है। उसने वेतन गणना में परिवार के सदस्यों की संख्या तीन से बढ़ाकर 5 मानने का भी सुझाव दिया है।

    फिटमेंट फैक्टर क्यों है अहम?
    यह वह मल्टीपायर है, जिसका इस्तेमाल मौजूदा बेसिक पे को संशोधित करके नई बेसिक सैलरी तय करने में किया जाता है। इसलिए कर्मचारी संगठनों की मांग है कि महंगाई और बढ़ते घरेलू खर्च को ध्यान में रखते हुए इसे तय किया जाए। हालांकि, फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि कर्मचारी की कुल सैलरी भी उसी अनुपात में बढ़ जाएगी। वास्तविक वेतन में बदलाव DA, HRA और अन्य भत्तों तथा अंतिम वेतन संरचना पर भी निर्भर करेगा।

    आयोग की अपकमिंग बैठकों में भी इन मुद्दों पर कर्मचारी संगठनों और पेंशनर्स को अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, बेंगलुरु में 7 और 8 अक्टूबर 2026 तथा मुंबई में 22 और 23 अक्टूबर को बैठकें होनी हैं। इन परामर्श बैठकों का उद्देश्य अलग-अलग वर्गों की मांगों और सुझावों को समझना है। इसके बाद आयोग उपलब्ध आंकड़ों और प्रस्तावों का आकलन करेगा।

    केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि ₹69,000 या ₹72,000 की न्यूनतम बेसिक सैलरी और 3.833 या 4 के फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) की मांगें अभी कर्मचारी संगठनों के प्रस्ताव हैं, अंतिम फैसला नहीं। वास्तविक वेतन वृद्धि आयोग की सिफारिशों और केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद ही स्पष्ट होगी। इसलिए, कर्मचारियों को इन प्रस्तावित आंकड़ों को संभावित मांग के रूप में देखना चाहिए, न कि तय होने वाली सैलरी के रूप में।

     

  • ग्वालियर नगर निगम के ₹200 करोड़ ग्रीन बॉन्ड पर संकट, निवेशकों का पैसा लौटाना चुनौती

    ग्वालियर नगर निगम के ₹200 करोड़ ग्रीन बॉन्ड पर संकट, निवेशकों का पैसा लौटाना चुनौती

    ग्वालियर.

    नगर निगम बीते दो साल से महापौर विहीन चल रही है। यही कारण है कि निगम में अधिकारी-कर्मचारी अपनी मनमानी कर रहे हैं। इसका असर निगम की आय का मुख्य स्त्रोत संपत्तिकर वसूली पर साफ दिखाई दे रहा है। वित्तीय वर्ष 2021-22 में संपत्तिकर वसूली का निगमायुक्त द्वारा 200 करोड़ रुपए का लक्ष्य दिया गया है।

    इसमें से अभी तक सिर्फ 55.60 करोड़ की ही संपत्तिकर वसूली की जा सकी है, जो कि बीते वर्ष से भी कम है। साथ ही इसमें 6.32 करोड़ रुपए गारबेज शुल्क से वसूल की गई राशि भी शामिल है। वहीं जिन अधिकारियों पर संपत्तिकर वसूली की जिम्मेदारी है वह पूरे साल तो चैन से अपने कार्यालयों में बैठे रहते हैं और दिसंबर-जनवरी का महीना आते ही संपत्तिकर वसूली के लिए सक्रियता दिखाना शुरू कर देते हैं। यदि इसी तरह संपत्तिकर वसूली के लिए कर संग्रहक, सहायक संपत्तिकर अधिकारी व उपायुक्त सक्रियता दिखाए तो संपत्तिकर का दिया गया लक्ष्य समय पर पूरा हो सकता है। बता दें कि निगम सीमा क्षेत्र में 3.10 लाख संपत्तियां और 1.21 लाख संपत्तियां नामांकित हैं। वहीं डेढ़ लाख से अधिक ऐसे लोग है जो भूमि, भवन स्वामी होने के बाद भी निगम को संपत्तिकर नहीं देता है। वहीं निगम भी ऐसे लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करता है।

    किराये पर लगाए लड़कों से कराई जा रही हैं वसूली
    निगम सीमा क्षेत्र के क्षेत्रीय कार्यालय पर पदस्थ कर संग्रहक व सहायक संपत्तिकर अधिकारी द्वारा खुद न वसूली करते हुए कई जगह पर लड़के लगा रखे हैं। इनसे वह खुलेआम संपत्तिकर की वसूली करवाते हैं। इतना ही नहीं वार्ड में पदस्थ कर संग्रहक (टीसी) व सहायक संपत्तिकर (एपीटीओ) ने इन्हें अपने टैबलेट भी दे रखे हैं और इन्ही के माध्यम से यह घर-घर जाकर वसूली करके पैसा अपने पास रखते हंै। यही हाल क्षेत्रीय क्रमांक-17 पर भी देखा जा रहा है जहां अभी हाल ही ट्रांसफर होकर आए कर संग्रहक खुद वसूली न करते हुए किसी अन्य से वसूली करा रहे हैं। बताया जा रहा है कि वसूली करने वाला उनका बेटा है। यही हाल अन्य क्षेत्रीय कार्यलय पर भी देखा जा रहा है।

    इन पर है संपत्तिकर वसूली की जिम्मेदारी –
    ग्वालियर पूर्व विधानसभा

    – एपीएस भदौरिया उपायुक्त
    – वसूली अब तक-26.72 करोड़

    ग्रामीण विधानसभा
    – अतिबल सिंह यादव उपायुक्त
    – वसूली अब तक-8.91 करोड़

    ग्वालियर विधानसभा
    – अमर सत्य गुप्ता उपायुक्त
    – वसूली अब तक- 8.56 करोड़

    ग्वालियर दक्षिण विधानसभा
    – सतपाल सिंह चौहान उपायुक्त
    – वसूली अब तक- 11.50 करोड़

    लक्ष्य पूरा न करने वालों पर होगी कार्रवाई
    मैंने संपत्तिकर वसूली को लेकर सभी विधानसभा क्षेत्र के अपर आयुक्त, उपायुक्त, सहायक सम्पत्तिकर व कर संग्रहक को साफ शब्दों में हर हाल में दिए गए लक्ष्य को पूरा करने के लिए कहा गया है। जो कर संग्रहक व सहायक संपत्तिकर अधिकारी वसूली नहीं कर रहा है उन पर हम तत्काल कार्रवाई भी कर रहे हैं। संपत्तिकर में तय किए गए लक्ष्य को हम हर हाल में पूरा करने के लिए प्रयासरत है।
    किशोर कान्याल, आयुक्त नगर निगम

  • जिस घर में जन्मे, छोटे से बड़े हुए, खेले-कूदे…,’ कहते-कहते भावुक हुए सीएम डॉ. यादव, अपने ही घर पर आखिर क्यों चलाई गैंती?

    जिस घर में जन्मे, छोटे से बड़े हुए, खेले-कूदे…,’ कहते-कहते भावुक हुए सीएम डॉ. यादव, अपने ही घर पर आखिर क्यों चलाई गैंती?

    भोपाल/उज्जैन
     मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री जन-कल्याण के लिए कितना समर्पित हैं, वे सादगी कितनी पसंद करते हैं इसका अंदाजा इस बात से लग जाता है कि उन्होंने सिंहस्थ महाकुंभ, उज्जैन के समग्र विकास के लिए अपने पैतृक निवास और जन्मस्थान को भी समर्पित कर दिया। उन्होंने खुद गैंती चलाकर मकान का हिस्सा तोड़ा। पैतृक घर जनता को समर्पित करते वक्त प्रदेश के मुखिया डॉ. यादव भावुक नजर आए। उनका मानना है कि जहां जन्म हुआ हो, उस घर को तोड़ना पड़े तो मन पर असर होता है। लेकिन, विकास के लिए यह बलिदान दिया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का यह कदम उज्जैन के विकास और जन-सुविधाओं के विस्तार के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

    गौरतलब है कि सीएम डॉ. यादव 27 सितंबर को अपने पुश्तैनी घर पहुंचे। उन्होंने यहां अपने पैतृक घर के बाहर पूजा-अर्चना की और फिर गैंती लेकर विकास की नई नींव रखी। इसे लेकर उन्होंने मीडिया से कहा कि  जिस घर में छोड़े से बड़े हुए हों, खेले-कूदे हों, उसको तोड़ना पड़े तो मन पर प्रभाव होना स्वाभाविक है। अगर सिंहस्थ के लिए जरूरी है तो हमें यह बलिदान देना ही चाहिए। हम सब मिलकर वो कर रहे हैं। पूरा देश इस बात को देख रहे हैं कि लोग अपने मकान को आनंद से तोड़ रहे हैं। ताकि, दूसरों को मदद मिले।

    उज्जैन ने पेश किया उदाहरण
    सीएम डॉ. यादव ने मीडिया से कहा कि जब मैं पहली बार साइंस कॉलेज से चुनाव जीतकर आया, तब जॉइंट सेक्रेटरी का चुनाव लड़ा, फिर प्रेसिडेंट का चुनाव लड़ा और उसके बाद भी जब-जब चुनाव लड़ा, हर चुनाव में मेरे सामने एक बात रही। आने वाले समय को ध्यान में रखते हुए हमें अपने आचरण और कार्यों से उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए। मैं मानता हूं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस दृष्टि से एक उत्कृष्ट उदाहरण हैं। वे व्यक्तिगत हितों से परे रहकर नियम, कानून और सुशासन के लिए आवश्यक सभी विषयों को प्राथमिकता देते हैं। उनके सार्वजनिक जीवन से हमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है। उज्जैन के लोगों ने अपना मकान खुद पीछे हटाया, ये आदर्श उदाहरण है। उज्जैन की आबादी 8 लाख है, लेकिन 40 करोड़  लोगों के आने का बोझ है। सबने योगदान दिया । मैं अपनी सरकार को भी धन्यवाद देता हूं। जिसने बिना भेदभाव के चाहे वो हिंदू, मुसलमान, सिख, ईसाई, पारसी, सबने अपने देवस्थान तक पीछे किए। इससे सरकार पर विश्वास बनता है।। यही उज्जैन का आदर्श है, इसी से सरकार पर भरोसा बनता है।

    सार्वजनिक हित पहले
    बता दें, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सार्वजनिक हित को सर्वोपरि माना है। सिंहस्थ की तैयारियों के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का अपना पैतृक मकान भी परियोजना की निर्धारित सीमा में आ रहा है। उन्होंने अपने घर पर कुदाल चलाकर यह संदेश दिया है कि विकास योजना का असर व्यक्तिगत संपत्ति तक भी पहुंचा है। सड़क चौड़ीकरण की प्रक्रिया में उनके परिवार की संपत्ति भी उसी प्रशासनिक प्रक्रिया के दायरे में है, जो अन्य प्रभावित भवनों पर लागू है। सीएम डॉ. यादव ने दशकों पुरानी पारिवारिक यादों से जुड़े घर के बावजूद सिंहस्थ के लिए जरूरी शहरी बदलाव को सार्वजनिक हित के रूप में देखा। पैतृक मकान का प्रभावित होना उस बड़े बदलाव का हिस्सा है, जिसके तहत सिंहस्थ-2028 से पहले पुराने उज्जैन की सड़क, यातायात और शहरी अधोसंरचना को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जा रहा है।

    मार्ग का होना है चौड़ीकरण
    उल्लेखनीय है कि उज्जैन की खजूर वाली मस्जिद से अब्दालपुरा, जीवाजीगंज थाना होते हुए गणेश चौक तक लगभग 730 मीटर लंबे मार्ग को 15 मीटर चौड़ा किए जाने की कार्यवाही प्रारंभ की गई है। मार्ग चौड़ीकरण एवं विकास कार्य के लिए राज्य शासन द्वारा प्रदत्त लगभग 9.80 करोड़ रुपए की राशि व्यय की जाएगी। यह मार्ग शहर के महत्वपूर्ण एवं व्यस्त संपर्क मार्गों में शामिल है। सिंहस्थ महापर्व के दौरान श्रद्धालुओं एवं वाहनों की संख्या में संभावित वृद्धि को देखते हुए मार्ग का चौड़ीकरण यातायात व्यवस्था को अधिक सुगम एवं व्यवस्थित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण होगा।

  • अमेरिका-चीन में 30 अरब डॉलर के सामान पर टैरिफ कटौती, ट्रेड काउंसिल बनाने पर सहमति

    अमेरिका-चीन में 30 अरब डॉलर के सामान पर टैरिफ कटौती, ट्रेड काउंसिल बनाने पर सहमति

    वाशिंगटन
    अमेरिका और चीन के बीच करीब 30 अरब डॉलर के सामान पर टैरिफ लगाने को लेकर सहमति बन गई है। दोनों देश आगे की आर्थिक बातचीत के लिए एक ट्रेड काउंसिल भी बनाएंगे। यह फैसला चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के तीन दिन के अमेरिका दौरे और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात के बाद हुआ। शी का यह दौरा 2015 के बाद वाशिंगटन का पहला दौरा था। वाइट हाउस के अनुसार, इस समझौते में अमेरिका से चीन जाने वाले सामान शामिल हैं। इनमें खेती का सामान, लकड़ी और कॉस्मेटिक्स हैं। चीन के छोटे उपकरण, खिलौने और सजावट के सामान पर भी बेहतर टैरिफ मिलेगा।

    चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों देश कुआलालंपुर में हुई पिछली बातचीत को आगे बढ़ाएंगे और व्यापार पर चर्चा जारी रखेंगे। यह समझौता मौजूदा ट्रेड डील को दो महीने बढ़ाने के बाद आया है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि इससे बड़े समझौते पर काम करने का समय मिलेगा।

    वाइट हाउस में लंबी मुलाकात और डिनर
    ट्रंप और शी ने गुरुवार को वाइट हाउस में कई घंटे बात की। इसके बाद दोनों ने सरकारी अधिकारियों और बिजनेस लीडर्स के साथ डिनर किया। इसमें अल्फाबेट के सुंदर पिचाई, माइक्रोसॉफ्ट के सत्या नडेला, एनवीडिया के जेन्सेन हुआंग और ओपनएआई के सैम ऑल्टमैन भी शामिल थे। दोनों नेताओं ने स्थिरता और सहयोग पर जोर दिया। शी ने कहा कि दोनों देशों को एक-दूसरे के फायदे वाला सहयोग बढ़ाना चाहिए और प्रतिस्पर्धा को सीमा में रखना चाहिए।

    एआई पर भी बात होगी
    व्यापार के साथ-साथ दोनों देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर भी बातचीत शुरू करने पर राजी हुए। इसमें मौकों और जोखिम दोनों पर चर्चा होगी। नवंबर में एआई पर एक और दौर होने की उम्मीद है। अधिकारी एआई से जुड़ी घटनाओं पर बात करने का एक चैनल भी बनाएंगे। वाइट हाउस के अनुसार, दोनों नेता इस बैठक में 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' की जगह 'सुपर इंटेलिजेंस' शब्द इस्तेमाल करने पर सहमत हुए। चीन ने इस शब्द का स्वागत किया और और बातचीत की अपील की।

    अन्य समझौते भी हुए
    शी के दौरे में सिर्फ व्यापार और एआई ही नहीं थे। दोनों देश एशिया-पैसिफिक आर्थिक सहयोग और जी-20 समिट जैसी बड़ी बैठकें आयोजित करने में एक-दूसरे की मदद करेंगे। ट्रंप और शी एक-दूसरे के देश में होने वाली बैठकों में शामिल होने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने यह भी तय किया कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर अलग-अलग देशों या संस्थाओं द्वारा लगाए गए ट्रांजिट टोल नहीं होने चाहिए।

    क्या है टैरिफ विवाद?
    अमेरिका-चीन टैरिफ विवाद दोनों बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच लंबे व्यापार तनाव से जुड़ा है। अमेरिका ने चीन के साथ व्यापार घाटा, व्यापार के तरीके और बौद्धिक संपदा के मुद्दों को टैरिफ लगाने की वजह बताया था। अमेरिका ने 2018 में चीनी सामान पर कई टैरिफ लगाना शुरू किया था। इसके बाद चीन ने अमेरिकी सामान पर जवाबी टैरिफ लगाए। बीजिंग ने अमेरिकी कदमों को एकतरफा और नियमों के खिलाफ बताया। चीन ने कुछ रेयर अर्थ एलिमेंट पर निर्यात नियंत्रण और कुछ अमेरिकी कंपनियों पर रोक भी लगाई।

    इसके बाद दोनों तरफ टैरिफ बढ़ाने के कई दौर चले। चीन अमेरिका को आयात से ज्यादा निर्यात करता है, इसलिए उसके पास टैरिफ लगाने के लिए कम सामान थे। इसलिए उसने निर्यात नियंत्रण जैसे अन्य तरीके भी अपनाए। 2025 में भी यह सिलसिला चला। चीन ने अमेरिकी कदमों को धमकी और दबाव बताया था।

  • CG में मेडिकल के साथ डेंटल PG छात्रों की भी बढ़ी छात्रवृत्ति

    CG में मेडिकल के साथ डेंटल PG छात्रों की भी बढ़ी छात्रवृत्ति

    रायपुर.

    मेडिकल और डेंटल के पीजी छात्रों की सालों पुरानी मांग को पूरी करते हुए आखिरकार छत्तीसगढ़ शासन ने उनकी छात्रवृत्ति में वृद्धि कर ही दी है. शासन ने केवल छात्रवृत्ति में बढ़ोतरी ही नहीं की है, बल्कि अब तक मेडिकल पीजी छात्रों की तुलना में कम छात्रवृत्ति पाने के दर्द को दूर करते हुए उन्हें समकक्ष ला दिया है. शासन द्वारा तय नई दर एक अक्टूबर 2026 से प्रभावशील होगी.

    छत्तीसगढ़ शासन के चिकित्सा शिक्षा विभाग ने चिकित्सा शिक्षा से प्राप्त प्रस्ताव के आधार पर शासकीय चिकित्सा एवं दंत महाविद्यालयों में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में अध्ययनरत् चिकित्सकों की शिष्या वृत्ति में वृद्धि की है. इस संबंध में विभाग की ओर से 26 सितंबर को आयुक्त, संचालनालय चिकित्सा शिक्षा को पत्र जारी किया है. इसमें पीजी मेडिकल छात्र प्रथम वर्ष के छात्र को दी जा रही 67,500 रुपए के स्थान पर 85,050 रुपए, द्वितीय वर्ष के छात्रों को 71,450 रुपए के स्थान पर 90,027 रुपए और तृतीय वर्ष के छात्र को 74,600 रुपए के स्थान पर 93,996 रुपए देने का प्रावधान किया गया है. इसी तरह पीजी डेंटल छात्र प्रथम वर्ष के छात्र को 53,500 रुपए की जगह 85,050 रुपए, पीजी डेंटल द्वितीय वर्ष के छात्र को 56,700 रुपए की बजाए 90,027 रुपए और पीजी डेंटल तृतीय वर्ष के छात्र को 59,200 रुपए के स्थान पर 93,996 रुपए देने का प्रावधान किया गया है.

    लड़ाई खत्म नहीं हुई, जारी है – जेडीयू अध्यक्ष —
    जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. यशवंत सिंह और जेडीए रायपुर अध्यक्ष डॉ. पीयूष श्रीवास्तव ने छात्रवृद्धि में बढ़ोतरी का स्वागत किया है. इसके साथ उन्होंने दोहराया कि उनकी लड़ाई खत्म नहीं हुई है, उनकी 17 सूत्रीय मांग अधूरी है, जिसकी वजह से उनका आंदोलन जारी है.

    पुराने और नए स्टाइपेंड के आधार पर वृद्धि प्रतिशत में —-
    पाठ्यक्रम    पुराना    नया    मासिक वृद्धि    वृद्धि %

    PG मेडिकल प्रथम वर्ष    ₹67,500    ₹85,050    ₹17,550    26.00%
    PG मेडिकल द्वितीय वर्ष    ₹71,450    ₹90,027    ₹18,577    26.00%
    PG मेडिकल तृतीय वर्ष    ₹74,600    ₹93,996    ₹19,396    26.00%
    PG डेंटल प्रथम वर्ष    ₹53,500    ₹85,050    ₹31,550    58.97%
    PG डेंटल द्वितीय वर्ष    ₹56,700    ₹90,027    ₹33,327    58.78%
    PG डेंटल तृतीय वर्ष    ₹59,200    ₹93,996    ₹34,796    58.78%

  • बंगाल SIR पर घमासान, शुभेंदु अधिकारी ने 27 लाख नाम कटने के लिए ममता को ठहराया जिम्मेदार

    बंगाल SIR पर घमासान, शुभेंदु अधिकारी ने 27 लाख नाम कटने के लिए ममता को ठहराया जिम्मेदार

    नई दिल्ली
    एसआईआर के मुद्दे पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग पर सवाल उठने के बाद बीजेपी रक्षात्मक मोड में आ गई है। वहीं पश्चिम बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी ने बंगाल के एसआईआर में 27 लाख नाम कटने का जिम्मेदार पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को ही ठहरा दिया है। इससे पहले ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर चुनाव में धांधली और एसआईआर के जरिए चुनाव जीतने का आरोप लगाया था। उन्होंने विपक्षी एकता का आह्लान करते हुए कहा कि अब यह आंदोलन तब तक नहीं थमेगा जबतक कि ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं दे देते।

    स्वीकार नहीं कर पाए बीजेपी की जीत
    सीएम अधिकारी ने कहा कि कुछ समाचार संगठन बंगाल में भाजपा की जीत को अब तक स्वीकार नहीं कर पाए हैं और वे झूठी एवं भ्रामक खबरें फैला रहे हैं। उन्होंने कहा कि बंगाल विधानसभा चुनाव में हार से निराश विपक्षी दल मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर अफवाहें फैला रहे।

    कांग्रेस केरल में कर रही एसआईआर का समर्थन- CM
    मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि केरल में कांग्रेस को एसआईआर से कोई दिक्कत नहीं है और यह समर्थन भी कर रही है। उन्होंने कहा, हां उसने विधानसभा चुनाव जीता है, लेकिन बंगाल में चुनाव हारने के बाद वह यहां इस प्रक्रिया का विरोध कर रही है। सीएम ने कहा कि बंगाल में एसआईआर के दौरान 27 लाख नाम हटने के लिए ममता बनर्जी जिम्मेदार हैं, भाजपा या निर्वाचन आयोग नहीं।

    भाजपा नेता ने निर्वाचन आयोग की इस प्रक्रिया के विरोध को लेकर पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय से राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के बावजूद उनकी पार्टी और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) अब ''एक ही सुर में बोल रही हैं।''

    अधिकारी ने वाम मोर्चा के शासनकाल से जुड़े राजनीतिक हिंसा के मामलों का भी जिक्र किया, जिनमें साईबाड़ी और नंदीग्राम की घटनाएं शामिल हैं। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस और माकपा के बीच कथित राजनीतिक समझौते को लेकर भी सवाल उठाया।

    केरल के सीएम ने भी चुनाव आयोग पर उठाए सवाल
    सीएम शुभेंदु अधिकारी ने भले ही कहा कि कांग्रेस केरल में एसआईआर का विरोध नहीं कर रही है लेकिन केरलम के सीएम वीडी सतीशन ने रविवार को सीईसी ज्ञानेश कुमार को बीजेपी का एजेंट बता दिया। तीशन ने कहा कि कुमार को अब पद पर नहीं रहना चाहिए। मुख्यमंत्री ने फेसबुक और 'एक्स' पर साझा किए गए पोस्ट में कहा कि केरलम के पूर्व मुख्य सचिव जिजी थॉमसन ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त के बारे में जो दावे किए हैं, वे बेहद गंभीर हैं।

  • SIR विवाद पर CM रेखा गुप्ता का विपक्ष पर हमला, राहुल गांधी पर देशद्रोह का केस दर्ज करने की मांग

    SIR विवाद पर CM रेखा गुप्ता का विपक्ष पर हमला, राहुल गांधी पर देशद्रोह का केस दर्ज करने की मांग

    नई दिल्ली
    चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े हालिया विवाद के बीच दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कांग्रेस और विपक्षी दलों पर हमला बोला है. मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष देश में एक ऐसा झूठा माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है, जिसका हकीकत से कोई दूर-दूर तक वास्ता नहीं है.

    मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मीडिया से बातचीत करते हुए विपक्षी दलों को आड़े हाथों लिया और कहा कि उनका एकमात्र मकसद जनता को भ्रमित करना है.  उन्होंने मांग की कि राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं पर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया जाए.

    उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष अपनी नाकामियों, देश के खिलाफ किए गए कृत्यों और चल रहे विकास कार्यों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए ऐसे बेतुके मुद्दे खड़े कर रहा है, जिनका कोई आधार नहीं है.

    सीएम रेखा ने सवाल उठाया कि आज विपक्ष चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त पर सवाल उठा रहा है, उन पर बेबुनियाद आरोप लगा रहा है और गिरफ्तारियों की मांग कर रहा है, जबकि उनके अपने शासनकाल में चुनाव आयोग कैसे काम करता था, ये किसी से छिपा नहीं है. उस दौर में आयोग पूरी तरह से सरकारों के इशारों पर चलता था.

    पारदर्शी तरीके से काम कर रहा है चुनाव आयोग
    चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की तारीफ करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज आयोग पूरी निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ अपने कर्तव्यों का पालन कर रहा है. वर्तमान व्यवस्था में आयोग के तीनों कमिश्नर हर फैसले पर पूरी तरह से एकमत होकर फैसला लेते हैं.

    चुनाव आयोग ने पहले ही सभी तथ्यों को पूरी पारदर्शिता के साथ जनता के सामने रख दिया है, जिससे ये साफ हो जाता है कि हर फैसला सर्वसम्मति से लिया गया है. आयोग का कामकाज बेहद तारीफ के काबिल और निष्पक्ष है.

    राहुल गांधी पर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज करने की मांग
    विपक्ष के तेवर पर नाराजगी जताते हुए सीएम रेखा गुप्ता ने सीधे तौर पर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और दूसरे विपक्षी नेताओं पर हमला बोला. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं द्वारा जिस तरह की गतिविधियां चलाई जा रही हैं और अनर्गल बयान दिए जा रहे हैं, वो देशद्रोह से कम नहीं है.

    मुख्यमंत्री ने मांग की है कि ऐसे नेताओं के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज किया जाना चाहिए ताकि देश की संस्थाओं पर उंगली उठाने वालों को कड़ा संदेश मिल सके.

  • सरधना के किसान का 29 लाख रुपये से अधिक पहुंचा फूल उत्पादन का कारोबार

    सरधना के किसान का 29 लाख रुपये से अधिक पहुंचा फूल उत्पादन का कारोबार

    ग्रेटर नोएडा
     इंडिया एक्सपो मार्ट में चल रहे उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो में मेरठ की खेती और कृषि आधारित उद्यमिता लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। उद्यान विभाग के आउटलेट पर मेरठ के किसानों की पॉलीहाउस में तैयार फसल, फूल और शहद के उत्पादों को देखकर देश-विदेश से आए खरीदार और आगंतुक जानकारी ले रहे हैं। जरबेरा और गुलाब के फूलों के साथ कमल ककड़ी, शिमला मिर्च और बैंगन जैसी फसलों ने लोगों का ध्यान खींचा है। खास बात यह है कि प्रदर्शनी में उत्पादों के प्रदर्शन के साथ किसानों को नए बाजार और कारोबार के अवसर भी मिल रहे हैं।
    सरधना तहसील के खेड़ा गांव निवासी रविन्द्र कुमार पांच एकड़ क्षेत्र में पॉलीहाउस के माध्यम से फल और सब्जियों का उत्पादन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि उद्यान विभाग की योजनाओं का लाभ लेकर उन्होंने संरक्षित खेती को अपनाया। इससे उनके कृषि कारोबार का सालाना आंकड़ा 29 लाख रुपये से अधिक पहुंच गया है। उनके पॉलीहाउस में 300 से 400 ग्राम तक वजन वाली पीली, हरी और लाल शिमला मिर्च तैयार हो रही है। इस फसल की दिल्ली की आजादपुर मंडी में मांग है।

    ट्रेड शो ने बढ़ाई फूलों की मांग, कंपनियों ने संपर्क किया
    रविन्द्र कुमार ने बताया कि वह पिछले वर्ष भी ट्रेड शो में शामिल हुए थे। प्रदर्शनी में अपने उत्पादों को बाजार और खरीदारों के सामने रखने से उन्हें नई पहचान मिली। इस बार भी कई इवेंट कंपनियों ने जरबेरा और गुलाब के फूलों की आपूर्ति के लिए उनसे संपर्क किया है। कुछ कंपनियों की ओर से समझौता ज्ञापन (एमओयू) के लिए भी बातचीत की गई है। उनका कहना है कि सरकार की योजनाओं से किसानों को पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक तकनीक और बाजार आधारित उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है।

    उत्तर प्रदेश सरकार के उद्यान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह ने भी उद्यान विभाग के आउटलेट का निरीक्षण कर किसानों के उत्पाद देखे और उनका उत्साहवर्धन किया। आउटलेट पर मेरठ की फसलों के साथ कृषि से जुड़े अन्य उत्पाद भी प्रदर्शित किए गए हैं।

    मेरठ के शहद को मिला अंतरराष्ट्रीय बाजार
    उद्यान विभाग के आउटलेट पर मेरठ के रेनट्रॉव नैचुरल के शहद उत्पाद भी लोगों की रुचि का केंद्र बने हुए हैं। युवा उद्यमी राखी अघेरा और उनके भाई भारत अघेरा ने बताया कि पिछले वर्ष उनकी कंपनी को इंडोनेशिया, मलेशिया और वियतनाम से 46 टन शहद का आर्डर मिला था। ट्रेड शो में इस बार भी उन्हें नए कारोबार और बेहतर आर्डर मिलने की उम्मीद है।

    आउटलेट की व्यवस्था में लगे वरिष्ठ उद्यान निरीक्षक संजय सिंह ने कहा कि मेरठ के किसानों और कृषि उद्यमियों के लिए ट्रेड शो केवल उत्पादों के प्रदर्शन का मंच नहीं, बल्कि सीधे खरीदारों और कारोबारी संस्थानों से संपर्क का अवसर भी बन रहा है। पॉलीहाउस की सब्जियों और फूलों से लेकर शहद तक, मेरठ के उत्पाद यहां खेती को बाजार से जोड़ने की नई तस्वीर पेश कर रहे हैं।

  • महापौर पर समस्याओं की अनदेखी का आरोप, कांग्रेस ने 7 दिन में समाधान नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी

    महापौर पर समस्याओं की अनदेखी का आरोप, कांग्रेस ने 7 दिन में समाधान नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी

    मुरैना
     शहर के वार्ड क्रमांक 24, 28 और 29 में गंदे पानी की निकासी और लगातार जलभराव की समस्या को लेकर रविवार को कांग्रेस ने नगर निगम के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। शहर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गजेंद्र जाटव ने मौके पर नगर निगम आयुक्त सत्येंद्र धाकरे को बुलाकर वार्डवासियों की समस्या से अवगत कराया।
    वार्डवासियों ने बताया कि क्षेत्र में लंबे समय से जलभराव और गंदे पानी की निकासी की समस्या बनी हुई है। इसको लेकर कई बार महापौर शारदा सोलंकी से शिकायत की गई, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका। नागरिकों का आरोप है कि शिकायत करने पर उन्हें निगम आयुक्त से संपर्क करने की बात कही गई।
    मौके पर पहुंचे निगम आयुक्त ने वार्डवासियों की समस्याएं सुनीं और निराकरण के लिए सात दिन का समय मांगा। आयुक्त के आश्वासन के बाद कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि तय समय में समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ तो शहर जिला कांग्रेस कमेटी आंदोलन करेगी।
    शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष गजेंद्र जाटव ने कहा कि वार्डों में जलभराव के कारण लोगों को परेशानी हो रही है। यदि सात दिन में समस्या का स्थायी निराकरण नहीं किया गया तो कांग्रेस जनता के साथ मिलकर आंदोलन करेगी।
    इस दौरान पूर्व शहर जिलाध्यक्ष दीपक शर्मा, संगठन महासचिव कुलदीप यादव, सेवादल अध्यक्ष प्रदीप रजक, ब्लॉक अध्यक्ष दक्षिण आसिफ कुरैशी, वार्ड 29 के पार्षद बलवीर दोनेरिया, पूर्व पार्षद नरेश यादव, पूर्व पार्षद नरेश कारखुर, अरुण प्रताप सिंह कुशवाह, ब्रजेश पिरोंजी, मदन मोहन कुलश्रेष्ठ, आकाश घनघोरिया, हमीद खां, ओमप्रकाश खस, शिव सिंह खटीक सहित कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।

  • रायपुर में सनसनीखेज वारदात, पति ने पत्नी और दो नाबालिग बच्चों की हत्या की

    रायपुर में सनसनीखेज वारदात, पति ने पत्नी और दो नाबालिग बच्चों की हत्या की

    रायपुर.

    रायपुर में शनिवार देर रात ट्रिपल मर्डर की घटना सामने आई है। पति ने अपनी पत्नी और 2 नाबालिग बच्चों की धारदार चाकू से हत्या कर दी। इसके बाद आरोपी ने खुद पर भी चाकू से वार कर लिया, जिससे वह घायल हो गया।

    आरोपी को इलाज के लिए मेकाहारा में भर्ती कराया गया है। मामला माना थाना क्षेत्र के डूमरतराई का है। आरोपी की पहचान भुनेश्वर साहू (34) के रूप में हुई है। वह जिला बालोद का रहने वाला है और डूमरतराई के साहू पारा में किराए के मकान में रहता था। शुरुआती जांच में सामने आया है कि पत्नी के कैरेक्टर पर शक के चलते उसने हत्या की है।

    पत्नी और दोनों बच्चों की हत्या के बाद खुद पर किया वार
    जानकारी के मुताबिक, आरोपी भुनेश्वर साहू ने रात 1:30 बजे विवाद के बाद पहले पत्नी खिलेश्वरी साहू पर हमला किया। इसके बाद उसने दोनों बच्चों आशीष साहू (10) और ज्ञान साहू (8) पर हमला किया। तीनों की मौत के बाद उसने खुद पर भी चाकू से वार किए। पड़ोसियों को घटना की जानकारी मिलते ही उन्होंने पुलिस को सूचित किया। माना पुलिस रात में ही मौके पर पहुंची तो दोनों बच्चों की मौत हो चुकी थी। महिला की हालत बेहद गंभीर थी। वहीं पति भी घायल हालत में पड़ा हुआ था। पत्नी को अस्पताल में डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

    सब्जी मंडी में काम करते थे पति-पत्नी
    पुलिस ने बताया का परिवार करीब 2 साल पहले किराए के मकान में रहने आया था। पति और पत्नी सब्जी मंडी में काम करते थे। 2 महीने पहले पति ने काम छोड़ दिया था। पड़ोसियों के मुताबिक चरित्र शंका को लेकर दोनों के बीच अक्सर विवाद होता था। शनिवार रात भी दोनों के बीच झगड़ा हुआ था।

    अंबेडकर अस्पताल में आरोपी का इलाज जारी
    पुलिस ने घायल आरोपी को इलाज के लिए अंबेडकर अस्पताल में भर्ती कराया है। उसका इलाज जारी है। जबकि पुलिस ने तीनों शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए मेकाहारा भेज दिया है और घटनास्थल को सील कर दिया गया है। फिलहाल, पुलिस घटना के कारणों और वारदात से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है।