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  • एक लाख विद्यार्थियों को सीएम योगी ने दी स्टडी टेबल, बच्चों ने निराले अंदाज में जताया आभार

    एक लाख विद्यार्थियों को सीएम योगी ने दी स्टडी टेबल, बच्चों ने निराले अंदाज में जताया आभार

    लखनऊ

    किसी ने फूलों से चिट्ठी सजाई, किसी ने अपनी नई स्टडी टेबल का चित्र बनाया तो किसी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तस्वीर के साथ ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ का संदेश उकेरा। देवीपाटन मंडल में एक लाख बच्चों को मिली स्टडी टेबल अब उनके घर में पढ़ाई का अपना छोटा सा कोना बन रही है। इस पहल से खुश बच्चों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपने हाथों से पत्र लिखकर धन्यवाद दिया है। इन मासूम चिट्ठियों में सरकारी योजना के आंकड़ों से इतर बच्चों की वह खुशी दिखाई देती है, जो घर में पढ़ाई के लिए अपनी स्टडी टेबल मिलने से उनके जीवन में आई है।

    स्वाती ने लिखा- स्टडी टेबल पाकर काफी प्रसन्न हूं

    स्टडी टेबल पाने वाली स्वाती ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजे अपने पत्र में खुशी जाहिर की है। उसने लिखा कि उसे स्टडी टेबल और पढ़ने की सामग्री दी गई है, जिसके लिए वह दिल से धन्यवाद करती है। स्वाती ने बताया कि वह प्रतिदिन स्टडी टेबल पर पढ़ाई करती है और मिली सामग्री का उपयोग करती है। उसने अपने पत्र को फूलों से सजाने के साथ नीचे स्टडी टेबल, किताब और पेंसिल का चित्र भी बनाया है।

    सबा की खुशी- अब मेरी पीठ भी दर्द नहीं करती

    कक्षा छह की छात्रा सबा की चिट्ठी स्टडी टेबल से उसकी रोजमर्रा की पढ़ाई में आए बदलाव को बयां करती है। मुख्यमंत्री को धन्यवाद देते हुए सबा ने लिखा कि पहले उसे घर पर पढ़ाई करने में बहुत असुविधा होती थी। अब स्टडी टेबल मिलने से उसे पढ़ने में सहूलियत हुई है। अपनी मासूम भाषा में उसने लिखा कि अब उसकी पीठ भी दर्द नहीं करती। पत्र के साथ सबा ने स्टडी टेबल का चित्र भी बनाया और ‘सब पढ़ें-सब बढ़ें’ का संदेश लिखा।

    नुजहत फातिमा ने लिखा- अब पहले से अधिक एकाग्र होकर पढ़ रही हूं
    कक्षा सात की नुजहत फातिमा ने मुख्यमंत्री के नाम नीले चार्ट पेपर पर ‘आभार पत्र’ तैयार किया। नुजहत ने लिखा कि स्टडी टेबल मिलने से उसे पढ़ाई का अच्छा वातावरण मिला है। इससे पढ़ाई में उसकी रुचि बढ़ी है और वह पहले की तुलना में अधिक एकाग्र होकर पढ़ पा रही है। उसने यह भी लिखा कि गृहकार्य पूरा करने और पढ़े हुए पाठ को दोहराने में वह स्टडी टेबल का इस्तेमाल कर रही है। पत्र में रंगीन पेंसिलों के साथ पढ़ती हुई छात्रा का चित्र बनाकर उसने मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताया।

    बच्चों ने कागज पर उतारी खुशी, CM योगी के बनाए चित्र

    बच्चों के आभार पत्र केवल शब्दों तक सीमित नहीं हैं। कई छात्र-छात्राओं ने पूरी रचनात्मकता के साथ पोस्टर तैयार किए हैं। एक बच्चे ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बड़ा चित्र बनाया और दोनों ओर ‘बेटी बचाओ’ और ‘बेटी पढ़ाओ’ लिखा। नीचे स्टडी टेबल प्राप्त करती छात्रा का चित्र बनाया गया है। एक अन्य पोस्टर में स्कूल के गेट पर छात्रा को टेबल सौंपते दिखाते हुए लिखा गया ‘बेटी पढ़ेगी, आगे बढ़ेगी, उत्तर प्रदेश का नाम बढ़ाएगी।’ एक बच्चे ने बड़े अक्षरों में ‘Thank You’ लिखकर मुख्यमंत्री, छात्रा और स्टडी टेबल को एक साथ चित्रित किया।

    एक लाख मेधावी बच्चों के घर पहुंची पढ़ाई की मेज

    मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल ने बताया कि देवीपाटन मंडल के चार जिलों में ‘शिक्षा की उड़ान’ स्टडी टेबल वितरण अभियान के तहत एक लाख टेबल बांटने का लक्ष्य रखा गया था, जिसे शत-प्रतिशत पूरा किया गया है। अभियान का उद्देश्य घर पर अनुशासित पढ़ाई की संस्कृति विकसित करने के साथ सरकारी विद्यालयों में शैक्षणिक उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करना है। मेधावी विद्यार्थियों को स्टडी टेबल उपलब्ध कराकर कक्षा के बाहर भी निरंतर और एकाग्र अध्ययन के लिए जगह उपलब्ध कराने की पहल की गई है। उन्होंने बताया कि ग्रामीण परिवेश के बच्चों को स्टडी टेबल दी गई है, जो अब उनका पर्सनल स्टडी स्पेस बन चुका है। 

    बहराइच में सबसे ज्यादा 34,260 टेबल का वितरण

    मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल के अनुसार अभियान में सबसे अधिक बहराइच में 34,260 टेबल दी गईं। इसके बाद गोंडा में 27,650, बलरामपुर में 26,984 और श्रावस्ती में 11,106 स्टडी टेबल का वितरण किया गया। इस तरह मंडल ने एक लाख टेबल का निर्धारित लक्ष्य पूरा किया।

    मेधावी छात्रों के साथ कस्तूरबा की सभी छात्राओं को लाभ

    उन्होंने बताया कि ‘शिक्षा की उड़ान’ अभियान में सरकारी विद्यालयों के सर्वोच्च प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को स्टडी टेबल देने की व्यवस्था की गई। इसके साथ ही कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की सभी छात्राओं को लाभार्थियों में शामिल किया गया है। इसे सतत अभियान के रूप में तैयार किया गया है, ताकि भविष्य में भी टॉपर विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया जा सके।

  • UP में 775% ज्यादा बारिश से तबाही, 56 मौतें और 1021 मकान क्षतिग्रस्त; फसलों को भी भारी नुकसान

    UP में 775% ज्यादा बारिश से तबाही, 56 मौतें और 1021 मकान क्षतिग्रस्त; फसलों को भी भारी नुकसान

    लखनऊ
     यूपी में पिछले 48 घंटों से ज्यादा समय से बारिश जारी है। तेज हवाओं और बारिश ने कई जिलों में भारी तबाही मचाई है। कई किसानों की खेतों में खड़ी धान की फसलें बर्बाद हो गई हैं। कई जगहों पर मकान ही गिर गए हैं।

    जिसको देखते हुए यूपी सरकार ने सभी अफसरों को फील्ड में रहकर पीड़ितों को हर संभव मदद के निर्देश दिए गए हैं। राहत आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने रविवार को प्रभावित जनपदों के जिलाधिकारियों एवं अपर जिलाधिकारियों से संवाद कर राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा करते हुए राहत कार्यों को प्रभावी ढंग से संचालित करने के निर्देश दिए। राहुल आयुक्त ने सभी डीएम, एडीएम एवं आपदा विशेषज्ञों को फील्ड में रहकर राहत एवं बचाव कार्यों की प्रभावी निगरानी करने तथा उच्च प्राथमिकता के आधार पर राहत सामग्री एवं सहायता राशि का वितरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

    राहत आयुक्त ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि राहत एवं बचाव कार्यों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने जिलाधिकारियों को अतिवृष्टि से प्रभावित परिवारों से व्यक्तिगत रूप से मिलकर उनकी समस्याओं की जानकारी लेने तथा आवश्यक सहायता तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने राहत एवं बचाव कार्यों के लिए समय-सीमा निर्धारित करते हुए कार्यवाही सुनिश्चित करने को कहा है।

    यूपी में सामान्य से 775 प्रतिशत अधिक वर्षा
    राहत आयुक्त ने बताया कि 25 सितम्बर से 27 सितम्बर की सुबह तक प्रदेश में 66.5 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जबकि इस अवधि में सामान्य वर्षा 7.6 मिमी है। इस प्रकार प्रदेश में वर्षा सामान्य से 775 प्रतिशत अधिक दर्ज की गई। उन्होंने बताया कि प्रदेश के 75 जनपदों में से 56 जनपदों में अत्यधिक वर्षा दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि फर्रूखाबाद में सामान्य से 7385 प्रतिशत, कन्नौज में 5664 प्रतिशत, शाहजहांपुर में 4408 प्रतिशत, हमीरपुर में 4240 प्रतिशत तथा महोबा में 4100 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गई है।

    56 जनहानि, 107 पशुहानि एवं 1021 मकानों के क्षतिग्रस्त होने की सूचना
    राहत आयुक्त ने बताया कि पिछले 60 घंटों में अतिवृष्टि एवं आंधी-तूफान के कारण प्रदेश में 56 जनहानि, 107 पशुहानि तथा 1021 मकानों के क्षतिग्रस्त होने की सूचना प्राप्त हुई है। इसके अतिरिक्त 46 व्यक्तियों के घायल होने की सूचना है। जनहानि के मामलों में सीतापुर में 7, लखीमपुर खीरी में 5, बहराइच में 5, बलरामपुर में 5, अयोध्या में 4 तथा गोरखपुर में 4 जनहानि की सूचना प्राप्त हुई है। घायलों में हरदोई में 7, मैनपुरी में 5, श्रावस्ती में 5 तथा बाराबंकी में 5, जबकि सीतापुर एवं लखीमपुर खीरी में 3-3 घायल होने की सूचना है। पशुहानि के मामलों में हरदोई में 28, सीतापुर में 16, कन्नौज में 14, बहराइच में 7, कानपुर देहात में 7 तथा उन्नाव में 6 पशुहानि की सूचना प्राप्त हुई है। मकान क्षति के मामलों में हरदोई में 272, सीतापुर में 108, चंदौली में 75, औरैया में 60, गोंडा में 54, हमीरपुर में 51, शाहजहांपुर में 47 तथा बहराइच में 44 मकान क्षतिग्रस्त होने की सूचना है।

    फसल क्षति का तत्काल आकलन कर सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश
    राहत आयुक्त ने फसल क्षति का तत्काल सर्वेक्षण एवं आकलन कर नियमानुसार मुआवजा प्रदान करने की कार्यवाही सर्वाेच्च प्राथमिकता पर सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं, उनके लिए आवश्यकता के अनुसार वैकल्पिक आवास की व्यवस्था तत्काल सुनिश्चित की जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि जहां आवश्यक हो, पात्र प्रभावित परिवारों को नियमानुसार आवास योजनाओं से लाभान्वित कराने की कार्रवाई की जाए। राहत आयुक्त ने यह भी निर्देश दिए कि जनप्रतिनिधियों को राहत एवं बचाव कार्यों तथा प्रशासन द्वारा की जा रही कार्रवाई से नियमित रूप से अवगत कराया जाए। राहत आयुक्त ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वर्तमान परिस्थितियों में राहत एवं बचाव कार्यों में त्वरितता, संवेदनशीलता एवं समन्वय के साथ कार्य करते हुए प्रभावित परिवारों को हरसंभव आवश्यक सहायता समय से उपलब्ध कराई जाए।

    बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अनावश्यक आवागमन से बचें
    राहत आयुक्त ने बताया कि जलभराव वाले क्षेत्रों में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए राहत एवं बचाव दलों द्वारा लगातार रेस्क्यू अभियान चलाया जा रहा है। रेस्क्यू किए गए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने के साथ ही आवश्यक सहायता एवं राहत उपलब्ध कराई जा रही है। आमजन से अपील है कि जल प्रभावित एवं बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अनावश्यक आवागमन से बचें। जलभराव, नदियों एवं नालों के तेज बहाव वाले क्षेत्रों से दूरी बनाए रखें तथा प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। आपातकालीन सहायता हेतु राहत आयुक्त कार्यालय की हेल्पलाइन 1070 पर संपर्क करें।

  • CEC को हटाना आसान नहीं, जानिए संविधान में क्या है प्रक्रिया और संसद का क्या है रोल

    CEC को हटाना आसान नहीं, जानिए संविधान में क्या है प्रक्रिया और संसद का क्या है रोल

     नई दिल्ली
     भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) को हटाना इतना आसान नहीं है और सरकार भी चाहे तो सीधे तौर पर सीईसी को नहीं हटा सकती। ऐसा इसलिए है क्योंकि मुख्य चुनाव आयुक्त को सुप्रीम कोर्ट के जजों की तरह ही विशेषाधिकार प्राप्त होते हैं।

    सीईसी को हटाने की प्रक्रिया काफी जटिल है। निर्वाचन आयोग (ECI) के कामकाज में सरकार के सीधे दखल को रोकने के लिए कई प्रावधान किए गए हैं। आजाद भारत के इतिहास में कभी भी किसी मुख्य चुनाव आयुक्त को उनके पद से नहीं हटाया गया है। हालांकि, इसकी कोशिशें तो हुईं लेकिन ऐसा हो न सका। आइए पीछे के पन्नों को पलटकर देखते हैं…

    1992… टीएन शेषन के खिलाफ मांग
    1992 में वामपंथी दलों ने तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन को हटाने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू करने की मांग की। यह कोशिश किसी औपचारिक प्रस्ताव के रूप में आगे नहीं बढ़ सकी क्योंकि इसे पेश करने के लिए जरूरी संसदीय समर्थन नहीं मिल पाया।

    2006… चुनाव आयुक्त नवीन चावला के खिलाफ एनडीए की याचिका
    मार्च 2006 में नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (एनडीए) ने राष्ट्रपति को याचिका देकर चुनाव आयुर्त नवीन चावला को हटाने की मांग की।

    2009… नवीन चावला के खिलाफ मुख्य चुनाव आयुक्त की सिफारिश
    2009 में तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त एन. गोपालस्वामी ने पक्षपातपूर्ण व्यवहार और राजनीतिक झुकाव के आरोपों का हवाला देते हुए चुनाव आयुक्त नवीन चावला को हटाने की औपचारिक सिफारिश की। बाद में तत्कालीन यूनाइटेड प्रोग्रेसिव अलायंस (यूपीए) सरकार ने इस सिफारिश को खारिज कर दिया।

    मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया
    सीईसी को हटाने की प्रक्रिया पूरी तरह से उन संवैधानिक प्रावधानों के तहत होती है जो चुनाव आयोग की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए हैं।

    अनुच्छेद 324(5)
    संविधान का अनुच्छेद 324(5) यह तय करता है कि मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से केवल उसी तरीके और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है, जैसे सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाया जाता है।

    अनुच्छेद 124(4)
    अनुच्छेद 124(4) के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के जज को तब तक नहीं हटाया जा सकता जब तक कि राष्ट्रपति का आदेश न हो। यह आदेश संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित प्रस्ताव के बाद ही जारी किया जा सकता है। इस प्रस्ताव के लिए सदन के कुल सदस्यों के बहुमत और उपस्थित तथा वोट देने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत का समर्थन जरूरी है।

    साथ ही, यह प्रस्ताव उसी सत्र में राष्ट्रपति को सौंपा जाना चाहिए और यह साबित होना चाहिए कि जज ने दुर्व्यवहार किया है या वह अपनी जिम्मेदारी निभाने में असमर्थ है।

    सीईसी को हटाने की प्रक्रिया शुरू करने और उसे पूरा करने के काम में पांच अलग-अलग चरण शामिल हैं।

    पहला चरण… नोटिस जमा करना
    मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए राज्यसभा के चेयरमैन या लोकसभा के स्पीकर को एक औपचारिक नोटिस दिया जाता है। इस नोटिस को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाने के लिए लोकसभा में कम से कम 100 सदस्य या राज्यसभा में कम से कम 50 सदस्य का समर्थन जरूरी है।

    दूसरा चरण… जांच समिति का गठन
    अगर नोटिस स्वीकार कर लिया जाता है तो पीठासीन अधिकारी हटाने के खास आधारों की जांच के लिए तीन सदस्यों वाली एक खास समिति बनाता है। इस समिति में सुप्रीम कोर्ट के जज या चीफ जस्टिस, हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस और पीठासीन अधिकारी की राय में कानून के एक जाने-माने जानकार शामिल होने चाहिए।

    तीसरा चरण… जांच और रिपोर्टिंग
    गठित समिति आरोपों की जांच करती है और अपनी औपचारिक जांच रिपोर्ट चेयरमैन या स्पीकर को सौंपती है।

    चौथा चरण… संसदीय वोटिंग
    अगर जांच समिति मुख्य चुनाव आयुक्त को साबित हो चुके दुर्व्यवहार या अक्षमता का दोषी पाती है तो मामले को वोटिंग के लिए संसद में लाया जाता है। इस प्रस्ताव को पास करने के लिए विशेष बहुमत की जरूरत होती है-

    सदन के कुल सदस्यों के बहुमत का समर्थन और दोनों सदनों में मौजूद और वोट करने वाले सदस्यों में से कम से कम दो-तिहाई का बहुमत।

    पांचवां चरण… राष्ट्रपति का आदेश
    अगर हटाने का बिल या प्रस्ताव संसद के दोनों सदनों से सफलतापूर्वक पास हो जाता है तो इसे राष्ट्रपति के सामने पेश किया जाता है। इसके बाद राष्ट्रपति मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने का आधिकारिक आदेश जारी करते हैं।
    संसद में मौजूदा संख्या-बल

    मौजूदा संसदीय समीकरणों के तहत संसद के दोनों सदनों में जरूरी दो-तिहाई बहुमत हासिल करना किसी भी एक विपक्षी गुट के लिए एक ऐसी गणितीय बाधा है जिसे पार करना नामुमकिन है।

    क्यों है असंभव?
    लोकसभा में 360 का आंकड़ा छूने के लिए विपक्ष की मौजूदा कुल संख्या से कहीं ज्यादा सीटों की जरूरत है। अगर हम बीजेपी की 240 सीटों को भी हटा दें तो सिर्फ 300 सदस्य ही बचते हैं। इसलिए 360 तक पहुंचना मुमकिन नहीं है।

    इसी तरह राज्यसभा में 162 के आंकड़े तक पहुंचना गणितीय रूप से सीमित है। अगर हम बीजेपी की 116 सीटों को भी हटा दें तो सिर्फ 127 गैर-बीजेपी सदस्य बचते हैं। डीएमके (22 लोकसभा, 8 राज्यसभा) को विपक्षी गठबंधन इंडी के बजाय अन्य की श्रेणी में रखा गया है।

    ऐसे में सवाल उठता है कि संख्याबल में कमी के बावजूद विपक्ष हटाने का प्रस्ताव क्यों ला रहा है?

  • बालाघाट में अवैध खनन पर बवाल, लाठी-डंडे चले; 15 ग्रामीण घायल

    बालाघाट में अवैध खनन पर बवाल, लाठी-डंडे चले; 15 ग्रामीण घायल

    बालाघाट.

    भरवेली थाना क्षेत्र के ग्राम रट्टा में रविवार को दो गुटों में खूनी संघर्ष हो गया। गांव से होकर बहने वाले नाले से रेत और गिट्टी के अवैध खनन के खिलाफ ग्रामीणों ने गांव के दमाहे परिवार के खिलाफ धावा बोल दिया।

    इसमें 15 से अधिक लोग घायल हुए हैं, जिन्हें उपचार के लिए जिला अस्पताल भेजा गया है। ग्रामीणों के आक्रोश और खूनी संघर्ष की सूचना मिलते ही पूरा गांव छावनी में बदल गया। मौके पर एएसपी निहित उपाध्याय, सीएसपी मयंक तिवारी, भरवेली टीआई भूपेंद्र पंद्रो, कोतवाली टीआई अजय गुर्जर सहित भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। देर तक माहौल तनावपूर्ण रहा। मौके पर 300 से अधिक पुलिसबल रहा। इसमें एसएएफ की फोर्स भी तैनात की गई। दरअसल, मामला गांव के दमाहे परिवार द्वारा लंबे समय से रेत और गिट्टी के अवैध खनन करने से जुड़ा है। इसके खिलाफ ग्रामीण वर्षों से विरोध दर्ज करा रहे हैं।

  • विराट कोहली का बड़ा सपना, 2027 वर्ल्ड कप फाइनल में मैच जिताऊ पारी खेलकर भारत को दिलाना चाहते हैं खिताब

    विराट कोहली का बड़ा सपना, 2027 वर्ल्ड कप फाइनल में मैच जिताऊ पारी खेलकर भारत को दिलाना चाहते हैं खिताब

    नई दिल्ली
    भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और दिग्गज बल्लेबाज विराट कोहली का सपना वनडे विश्व कप 2027 जीतना है। वह 2027 विश्व कप के फाइनल में लक्ष्य का पीछा करते हुए मैच विजयी पारी खेलना और भारत को चैंपियन बनाना चाहते हैं। जियोस्टार से बातचीत के दौरान कोहली ने कहा, 'मैं हमेशा से ऐसा व्यक्ति रहा हूं, जो हर गेम में वह खिलाड़ी बनना चाहता है जो गेम जिताए। मैं ऐसा ही बना हूं। यह मुझसे कभी दूर नहीं जाएगा। इसलिए, मेरा लक्ष्य टीम के लिए ज्यादा से ज्यादा गेम जीतना है। मेरा सपना है कि फाइनल में स्कोर चेज करते हुए मैच जिताने वाली पारी खेलूं। अगर ऐसा होता है, तो बहुत अच्छा होगा। विश्व कप का खिताब जीतना सबसे ज्यादा जरूरी है।'

    कोहली ने जोर देकर कहा कि ट्रॉफी जीतने के लिए मैदान में उतरना सबसे संतोषजनक बात होगी, लेकिन बड़ा लक्ष्य हमेशा बड़ा ही रहता है। अगर मुझे ऐसा करने का मौका मिलता है, तो एक व्यक्ति के तौर पर बीच में रहकर, एक बल्लेबाज के तौर पर इससे ज्यादा संतोषजनक कुछ नहीं होता। आप खुद को टीम को मुश्किल से निकालते हुए देखते हैं। यही आपको इस लेवल पर कॉम्पिटिशन करने के लिए प्रेरित करता है। मैं उस प्रतियोगी सोच को जाने नहीं देना चाहता।

    2023 की हार का दुख अभी भी कायम
    वनडे विश्व कप 2023 के फाइनल में मिली हार को याद करते हुए कोहली ने कहा, 'उस हार का दुख है। कई दिनों तक समझना बहुत मुश्किल था। 2025 में आईपीएल जीतने से पहले, मुझे 2016 के फाइनल की यादें आती थीं। वर्ल्ड कप फाइनल के बारे में भी मुझे ऐसा ही लगता है। मैं 54 रन पर खेल रहा था और मैंने खुद को एक बड़ी सेंचुरी के लिए तैयार किया था। अगर मैं 140-150 रन बना लेता, तो हम वह गेम जीतने की स्थिति में होते।'

    2023 में माहौल बढ़िया था
    कोहली ने कहा, 'पूरा वर्ल्ड कप बहुत बढ़िया था। माहौल जबरदस्त था। टीम के अंदर, आप भाईचारा देख सकते थे। हर कोई एक-दूसरे के लिए खेलकर खुश था। हार्दिक जैसे खिलाड़ी को जल्दी खोने के बाद भी, हमने कभी इस बारे में बात नहीं की कि आगे क्या होगा, हालांकि वह जो लाता है, उसके हिसाब से यह एक बड़ा नुकसान था। लेकिन शमी आया, और आप जानते हैं कि वह क्या कर सकता है। इसलिए, सभी को लग रहा था कि यह हमारा वर्ल्ड कप है। पूरी तरह से एक अलग ऊर्जा थी, लेकिन जब खेल इस तरह बदल जाता है, तो इसे समझना बहुत मुश्किल होता है।'

    मैं सबसे बेहतर बल्लेबाज नहीं- कोहली
    क्रिकेट का सबसे बेहतरीन बल्लेबाज माने जाने के सवाल पर कोहली ने कहा, 'मैं खुद को अब तक का सबसे अच्छा बल्लेबाज नहीं मानता। खेल के अलग-अलग समय पर अलग-अलग खिलाड़ी रहे हैं। उन्होंने कुछ कमाल की चीजें की हैं, लेकिन हो सकता है कि उन्होंने उस तरह के नंबर जमा न किए हों, और कुछ के नंबर मुझसे कहीं बेहतर हैं। मुझे लगता है कि हर किसी का मुख्य लक्ष्य असर डालना होता है। मैं इतने लंबे समय तक खेलने के लिए खुशकिस्मत रहा हूं। जब आप अच्छा करने के लिए प्रतिबद्ध होते हैं, तो अक्सर अच्छा प्रदर्शन करते हैं। मैं देश के लिए खेलने के लिए उत्साहित हूं, जो एक बड़ा सम्मान है।'

  • प्रीपेड यूजर्स के लिए बड़ी खबर, अब 28 नहीं 30 दिन की वैलिडिटी वाला रिचार्ज मिलेगा

    प्रीपेड यूजर्स के लिए बड़ी खबर, अब 28 नहीं 30 दिन की वैलिडिटी वाला रिचार्ज मिलेगा

    नई दिल्ली
    भारतीय जनता पार्टी से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने प्रीपैड मोबाइल यूजर्स को बधाई दी है। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) द्वारा लाए गए बदलावों के बारे में बात करते हुए चड्ढा ने कहा कि अब इससे देश के तमाम यूजर्स को लाभ होगा और उन्हें 28 दिन की जगह 30 दिन का रिचार्ज करवाने की सुविधा मिलेगी। इससे उन यूजर्स को भी लाभ होगा, जो केवल इनकमिंग सुविधा के लिए फोन का इस्तेमाल करते हैं। उनके लिए इनकमिंग और मैसेज पैकेज उपलब्ध कराए जाएंगे। भाजपा सांसद ने कहा कि उन्होंने फरवरी में ही इस मुद्दे को संसद में उठाया था। इसके बाद अब सरकार ने उनकी बात पर अमल करते हुए यह नियम लाया है।

    सोशल मीडिया साइट इंस्टाग्राम पर एक रील शेयर करते हुए राज्यसभा सांसद ने कहा कि यह एक सच्चा उदाहरण है कि कैसे एक सांसद ने लोगों की बात को संसद में रखा और सरकार ने उस पर ध्यान देकर फैसला किया। उन्होंने कहा, "11 मार्च 2026 को मैंने प्रीपैड मोबाइल यूजर्स की कुछ समस्याओं को संसद में उठाया था। साथ ही साथ यह भी कहा था कि कुछ लोग डेटा यूज नहीं करते हैं केवल इनकमिंग सुविधाओं को लिए फोन का उपयोग करते हैं। मुझे बताते हुए यह खुशी है कि सरकार ने आपकी उन सभी मांगों को मान लिया है। TRAI ने टेलीकॉम उपभोक्ता संरक्षण (13वां संसोधन) रेग्यूलेशन 2026 को लागू कर दिया है। इसके तहत सबसे पहले अब 28 दिन का रिचार्ज नहीं बल्कि 30 दिन का रिचार्ज मिलेगा।"

    राघव चड्ढा बोले- अब जितनी सुविधा लेंगे, उतना ही पैसा लगेगा
    चड्ढा ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा, "जिन उपभोक्ताओं को डेटा वाले रिचार्ज नहीं चाहिए थे। उन्हें अब केवल इनकमिंग और मैसेज वाले रिचार्ज करने के लिए मिलेंगे। यानी कि अब जितनी सुविधा चाहिए, उतना ही पैसा लिया जाएगा। इसके लिए मैं सरकार को इसके लिए बधाई देता हूं। आप सभी को बधाई देता हूं। यह राजनीति का सही उदाहरण है कि कैसे एक सांसद ने संसद में लोगों की मांग को उठाया और सरकार ने उसे पूरा किया।"

    बता दें, राघव चड्ढा फरवरी 2026 में आम आदमी पार्टी के साथ थे। उस समय उन्होंने जमीन से जुड़े कई मुद्दे उठाए थे। इसके बाद आप के साथ हुए मतभेद के बाद उन्हें पार्टी नेता के पद से हटा दिया गया। इसके बाद उन्होंने अपने साथी सांसदों के साथ भाजपा का दामन थाम लिया था।

    क्या है प्रीपैड यूजर्स के लिए सरकार के बदलाव?
    भारत में लंबे समय से नागरिकों द्वारा प्रीपैड प्लान्स में बदलाव की मांग चली आ रही थी। इसी को ध्यान में रखकर TRAI ने नए नियम जारी कर दिए हैं। इसके तहत टेलीकॉम कंपनियों को अब पूरे महीने यानी की 30 दिन की वैलेडिटी वाले प्लान पेश करने होंगे।

    इसके अलावा जिन ग्राहकों को डेटा इंटरनेट की जरूरत नहीं है। उनके लिए बिना डेटा वाले केवल कॉलिंग और मैसेज के सस्ते स्पेशल टैरिफ वाउचर उपलब्ध कराए जाएंगे।

  • कांग्रेस नेता को धमकी देकर रंगदारी मांगने का आरोप, शोएब ढेबर समेत 2 गिरफ्तार

    कांग्रेस नेता को धमकी देकर रंगदारी मांगने का आरोप, शोएब ढेबर समेत 2 गिरफ्तार

    रायपुर.

    लॉरेंस बिश्नोई गैंग से कांग्रेस नेता आनंद कुकरेजा को धमकी मिलने के मामले में पुलिस ने दो आरोपियों की गिरफ्तारी की है. पूर्व महापौर एजाज ढेबर के भतीजे शोएब ढेबर और वेनिंगटन होटल के कर्मचारी पुलिस गिरफ्त में हैं.

    आरोप है कि लॉरेंस विश्नोई गैंग का गुर्गा बनकर कांग्रेस नेता से रंगदारी मांगी गई थी.  मामला तेलीबांधा थाना क्षेत्र का है. पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने कथित तौर पर अन्य लोगों को भी धमकी दी थी. पुलिस अब इस पूरे मामले में आरोपियों की भूमिका और उनसे जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटा रही है. जांच के दौरान कुछ अन्य लोगों की भी गिरफ्तारी हो सकती है. जानकारी के मुताबिक, हाल में ढेबर परिवार को भी बिश्नोई गैंग से धमकी भरा कॉल आया था और भारी भरकम पैसे की डिमांड की गई थी.

    पुलिस को शक है कि इन आरोपियों द्वारा ही यह कृत्य किया गया है, जिसकी जांच जारी है. पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि धमकी देने के पीछे और कौन-कौन लोग शामिल थे. आरोपियों का नेटवर्क किन लोगों तक फैला हुआ है. बहरहाल, पुलिस ने शोएब ढेबर और होटल कर्मचारी को गिरफ्तार करने के बाद मामले की जांच तेज कर दी. मामले से संबंधित विस्तृत जानकारी और अब तक की जांच का खुलासा देर शाम तक किया जा सकता है. आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद मामले में और तथ्य स्पष्ट होंगे.

  • एशियन गेम्स में अनाहत सिंह ने रचा इतिहास, स्क्वैश में भारत को दिलाया सिल्वर मेडल

    एशियन गेम्स में अनाहत सिंह ने रचा इतिहास, स्क्वैश में भारत को दिलाया सिल्वर मेडल

    नागोया
     भारत की 18 वर्षीय स्कॉश खिलाड़ी अनाहत सिंह ने रविवार को विमेंस सिंगल्स में सिल्वर मेडल अपने नाम किया। इसी के साथ जूनियर वर्ल्ड चैंपियन अनाहत, भारत की पहली विमेंस सिंगल्स सिल्वर मेडलिस्ट बनीं। हालांकि, उन्हें फाइनल में मलेशिया की मौजूदा चैंपियन शिवसंगरी सुब्रमण्यम के हाथों 4-11, 4-11, 7-11 से हार का सामना करना पड़ा।

    इस हार के साथ अनाहत ओलंपिक के लिए सीधे क्वालीफाई करने का पहला मौका भी चूक गईं, क्योंकि सिंगल्स इवेंट के विजेता को 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक के लिए कोटा मिलना तय था, जहां स्कॉश पहली बार शामिल हो रहा है।

    मलेशिया की खिलाड़ी से हारीं अनाहत
    नागोया किंजो फुतो एरिना में प्रतिभाशाली भारतीय खिलाड़ी का मुकाबला मलेशिया की कहीं ज्यादा अनुभवी खिलाड़ी से था। अनाहत को अपनी प्रतिद्वंद्वी के शानदार खेल का मुकाबला करने में मुश्किल हुई और उन्होंने पहला गेम 4-11 से गंवा दिया। इसके बाद मलेशियाई खिलाड़ी ने अपने मजबूत अटैक और डिफेंस से अगले दो गेम पर भी अपना दबदबा बनाए रखा। अनाहत को कोई खास मौका नहीं मिला और वह दूसरा गेम भी 4-11 के अंतर से हार गईं, जबकि मौजूदा चैंपियन ने शानदार खेल दिखाते हुए तीसरा गेम 11-7 से जीता।

    सेमीफाइनल में किया था कमाल
    अनाहत ने सेमीफाइनल में वर्ल्ड नंबर 6 सतोमी वातानाबे को दो गेम से पिछड़ने के बाद हराया था, जिसके साथ वह एशियन गेम्स के विमेंस सिंगल्स स्कॉश फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय बनी थीं। इससे पहले, भारत के अभय सिंह को भी सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा था। मलेशिया के मौजूदा चैंपियन ईन यो एनजी ने शानदार खेल दिखाते हुए मेंस सिंगल्स स्कॉश फाइनल में भारतीय खिलाड़ी को 11-9, 11-5, 11-5 से मात दी।

    अभय ने जीता सिल्वर मेडल
    रविवार को यह स्कॉश में भारत का दूसरा पदक रहा। अभय, सौरव घोषाल के बाद इस इवेंट में सिल्वर मेडल जीतने वाले दूसरे भारतीय पुरुष खिलाड़ी बने। हालांकि, फाइनल में हारने की वजह से अभय एलए 2028 ओलंपिक के लिए सीधे क्वालीफाई करने से चूक गए।

  • इंदौर में बेकाबू सिटी बस ने 4 लोगों को रौंदा, एक की मौत; 3 गंभीर

    इंदौर में बेकाबू सिटी बस ने 4 लोगों को रौंदा, एक की मौत; 3 गंभीर

    इंदौर.

    मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के प्रसिद्ध राजबाड़ा क्षेत्र में एक दर्दनाक सड़क हादसा सामने आया है। रविवार को एक बेकाबू सिटी बस ने राह चलते चार लोगों को जोरदार टक्कर मार दी।

    इस भीषण दुर्घटना में एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। पुलिस फिलहाल सभी पीड़ितों की शिनाख्त करने में जुटी हुई है।

    घायलों का उपचार जारी
    एमजी रोड थाना प्रभारी विजय सिसौदिया से मिली जानकारी के अनुसार, यह हादसा सिटी बस चालक की गफलत और लापरवाही के कारण घटित हुआ। अनियंत्रित बस अचानक सड़क से गुजर रहे पैदल यात्रियों पर चढ़ गई, जिससे चारों लोग उसकी चपेट में आ गए।

  • RTI विवाद पर विजय सरकार का यू-टर्न, कानून-व्यवस्था विभाग को छूट देने वाला आदेश वापस

    RTI विवाद पर विजय सरकार का यू-टर्न, कानून-व्यवस्था विभाग को छूट देने वाला आदेश वापस

    चेन्नई
    तमिलनाडु में अभिनेता से राजनेता बने विजय थलापति के नेतृत्व वाली टीवीके (TVK) सरकार को कड़े विरोध के बाद आखिरकार अपना एक बड़ा फैसला वापस लेना पड़ा है।

    सरकार ने उस आदेश को रद कर दिया है, जिसके तहत 'पब्लिक डिपार्टमेंट' यानी सार्वजनिक कानून-व्यवस्था विभाग को सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम, 2005 के दायरे से बाहर करने की कोशिश की गई थी। इस फैसले पर चौतरफा आलोचनाओं के बाद सरकार ने यह कदम उठाया है।

    क्या था पूरा मामला और क्यों हुआ विरोध?
    इस बात को ऐसे समझा जा सकता है कि मानव संसाधन प्रबंधन विभाग की तरफ से 21 सितंबर 2026 को जारी किए गए सरकारी आदेश के तहत आरटीआई अधिनियम की धारा 24 की उप-धारा (4) का हवाला देते हुए कानून-व्यवस्था विभाग को एक 'खुफिया और सुरक्षा संगठन' मानकर आरटीआई के दायरे से छूट देने का प्रयास किया गया था।

    बता दें कि सार्वजनिक कानून-व्यवस्था के दायरे में कई संवेदनशील विषय आते हैं, जैसे कि पुलिस फायरिंग और हिरासत में हुई मौतों व पुलिस टॉर्चर की जांच रिपोर्ट। सांप्रदायिक और जातिगत संघर्षों से जुड़ी रिपोर्टें और राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामलों को वापस लेने के अनुरोध और मानहानि के मामलों से जुड़ी अभियोजन मंजूरी।

    विपक्ष का क्या था तर्क?
    बात अब इस फैसले के विरोध की करें तो आलोचकों और विपक्षी नेताओं का कहना था कि अगर इस विभाग को आरटीआई से बाहर कर दिया जाता, तो जनता से ये तमाम महत्वपूर्ण जानकारियां छिप जातीं, जिससे पारदर्शी शासन पर सवाल खड़े होते।

    फैसले के विरोध में खुलकर सामने आए विपक्ष
    दूसरी ओर सरकार के इस फैसले के खिलाफ विपक्ष और विभिन्न दलों के नेता खुलकर विरोध में उतर आए थे। सीपीएम (CPM) सांसद वेंकटेशन ने कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा था कि यह कदम तमिलनाडु को एक पुलिस राज में बदलने की खुली कोशिश है और सरकार को तुरंत यह आदेश वापस लेना चाहिए।

    कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने इस कदम की आलोचना करते हुए कहा कि आरटीआई कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार का एक ऐतिहासिक फैसला था, जिसका उद्देश्य देश में 'लोकतांत्रिक जवाबदेही' को मजबूत करना था। उन्होंने कहा कि इस तरह महत्वपूर्ण सूचनाओं को जनता से छिपाना सही मिसाल नहीं है।

    विरोध के बाद राज्य सरकार का यू-टर्न
    गौरतलब है कि शुरुआत में बचाव की मुद्रा अपनाते हुए टीवीके मंत्रियों ने तर्क दिया था कि इस फैसले से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। मंत्री सीटीआर निर्मल कुमार ने सफाई दी थी कि इस कदम का उद्देश्य केवल सामुदायिक संघर्षों से जुड़े विवरणों को सुरक्षित रखना था, क्योंकि लोग इसे लेकर लगातार आरटीआई मांग रहे थे। वहीं मंत्री राजमोहन ने कहा था कि सरकार पारदर्शिता के प्रति प्रतिबद्ध है।

    हालांकि, बढ़ते राजनीतिक दबाव और जनता की नाराजगी को भांपते हुए मंत्री सीटीआर निर्मल कुमार ने पहले ही संकेत दे दिए थे कि अगर आम जनता में असंतोष है, तो इस मामले पर मुख्यमंत्री के साथ चर्चा करके पुनर्विचार किया जाएगा। आखिरकार, विपक्ष के कड़े विरोध के बाद सरकार ने शासनादेश को रद्द करते हुए अपना यह विवादास्पद फैसला वापस ले लिया है।