इंदौर
सस्टेनेबल लिविंग सिटी प्रोग्राम के तहत इंदौर में 9 हजार सफाईकर्मियों के घर सोलर से रोशन करने के लिए नगर निगम और यूनिटी ऑफ नेशनल एक्शन फॉर क्लाइमेट चेंज काउंसिल के बीच एमओयू हुआ है। अगले माह से घरों में सोलर सिस्टम लगाने का काम शुरू होगा
इसके लिए काउंसिल ने सर्वे भी किया है। 180 देशों में काम कर रही इस संस्था ने देश के सबसे साफ शहर इंदौर को इस प्रोजेक्ट के लिए चुना है। काउंसिल के प्रबंध निदेशक अभिजीत खेमकर ने बताया कि दो से तीन किलोवाट के सिस्टम घरों में लगाए जाएंगे।
बाजार में इस सिस्टम की लागत दो से ढाई लाख तक आती है, लेकिन हम इन परिवारों को 1.48 लाख में ही यह सिस्टम लगाकर दे रहे हैं, ताकि कम बिजली बिलों के कारण उनकी बचत हो सके। सिस्टम लगाने पर खर्च होने वाली राशि भी बैंकों से लोन के रूप में मिलेगी। एक परिवार को पांच सौ रुपये महीना की किस्त भरना होगी।
25 साल में 270 करोड़ की बचत काउंसिल के पदाधिकारियों ने कहा कि यदि सफाईकर्मी अपने घरों पर सोलर सिस्टम लगाते हैं तो 25 साल में 270 करोड़ रुपये की बचत इन परिवारों को होगी। केंद्र सरकार की हर घर सोलर योजना के तहत इन परिवारों को पायलट प्रोजेक्ट के तहत चुना गया है, क्योंकि सफाईकर्मियों के कारण इंदौर स्वच्छता में कई वर्षों से सिरमौर रहा है। काउंसिल की मध्य प्रदेश इकाई के अध्यक्ष शिशिर पंडित ने कहा कि हमारी कोशिश है कि इंदौर देश का पहला सस्टेनेबल नेट-जीरो शहर बने। यह शहर सोलर सिटी में तब्दील हो सकता है।
















