रांची
 जरा कल्पना कीजिए… एक ऐसी जगह, जहां 24 घंटे सुरक्षा की व्यवस्था हो। चार सुरक्षा गार्ड और सात सुपरवाइजर लगातार ड्यूटी पर हों। पूरा परिसर ऊंची चहारदीवारी से घिरा हो और सुरक्षा के नाम पर हर साल करीब 34 करोड़ रुपये खर्च किए जाते हों। इसके बावजूद चोर रात के अंधेरे में करीब 2400 किलो वजनी ट्रांसफार्मर उठाकर निकल जाएं और किसी को भनक तक न लगे।

रुक्का जलशोध संस्थान में कुछ ऐसा ही हुआ है। राजधानी की जलापूर्ति व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण इस प्लांट में चोर 500 केवीए का ट्रांसफार्मर लेकर फरार हो गए। ट्रांसफार्मर नव निर्मित प्लांट के पास लगा था। इसके साथ ही कई अन्य उपकरणों के भी गायब होने की सूचना है। चोरी गए सामान की कीमत करीब 30 लाख रुपये आंकी जा रही है। फिलहाल विभागीय स्तर पर इसका आकलन कराया जा रहा है।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि 2400 किलो की मशीन चोरों ने आखिर उठाई कैसे और इतनी सुरक्षा के बीच उसे परिसर से बाहर ले कैसे गए?
2400 किलो का ट्रांसफार्मर ऐसे ही नहीं उठ गया होगा

500 केवीए के ट्रांसफार्मर का वजन करीब 2400 किलो बताया जा रहा है। यानी करीब 24 क्विंटल। यह कोई ऐसी चीज नहीं है जिसे कोई व्यक्ति कंधे पर उठाकर या हाथ में लेकर भाग जाए।

ट्रांसफार्मर में करीब 450 किलो तेल और 500 किलो से अधिक तांबा भी होता है। यही वजह है कि कबाड़ बाजार में इसकी कीमत भी अच्छी-खासी हो सकती है। तांबे की स्क्रैप कीमत करीब 650 रुपये प्रति किलो के आसपास बताई जा रही है।

यानी चोरों को इसे निकालने के लिए वाहन, लोगों और समय—तीनों की जरूरत पड़ी होगी। सवाल यह है कि यह सब हुआ और प्लांट की सुरक्षा में तैनात किसी व्यक्ति को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई?

चार गार्ड, सात सुपरवाइजर… फिर भी चोर बेखौफ
रुक्का जलशोध संस्थान में सुरक्षा के लिए चार सुरक्षा गार्ड और सात सुपरवाइजर की ड्यूटी रहती है। प्लांट के चारों ओर चहारदीवारी है। परिसर के अंदर कर्मचारियों और इंजीनियरों के लिए आवास भी बनाए गए हैं। इसके बावजूद चोर आए, ट्रांसफार्मर को अपने कब्जे में लिया, उसे बाहर ले जाने की तैयारी की और फिर लेकर फरार भी हो गए।

न गार्ड ने देखा, न सुपरवाइजर को पता चला और न ही किसी अन्य कर्मचारी को इसकी भनक लगी। यही बात इस चोरी को सामान्य चोरी से अलग बनाती है और सुरक्षा व्यवस्था पर सबसे बड़ा सवाल खड़ा करती है।

सुरक्षा पर हर साल 34 करोड़ रुपये, फिर भी 24 क्विंटल की मशीन गायब
रुक्का प्लांट की सुरक्षा पर विभाग हर साल करीब 34 करोड़ रुपये खर्च करता है। इसके बावजूद प्लांट से 24 क्विंटल वजन वाला ट्रांसफार्मर चोरी हो जाना सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

अब सवाल यह भी है कि सुरक्षा के लिए इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद क्या केवल गार्ड की तैनाती ही सुरक्षा व्यवस्था है? क्या रात में नियमित पेट्रोलिंग होती है? क्या महत्वपूर्ण उपकरणों की निगरानी की जाती है? क्या प्रवेश और निकास पर वाहनों की जांच होती है?
इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा।

परिसर में बने हैं आवास, फिर भी नहीं रहते इंजीनियर
प्लांट कर्मियों के अनुसार नियम के मुताबिक इंजीनियरों को प्लांट से करीब आठ किलोमीटर की परिधि में रहना चाहिए। इसके लिए परिसर में एसडीओ और जेई के आवास भी उपलब्ध हैं। लेकिन फिलहाल इन आवासों में कोई इंजीनियर नहीं रहता। ऐसे में रात के समय प्लांट की निगरानी कितनी प्रभावी है, इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं।

34 करोड़ के रखरखाव ठेके के बीच सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
रुक्का जलशोध संस्थान के संचालन, रखरखाव और जलापूर्ति व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने एजेंसी को करीब 34 करोड़ रुपये का ठेका दिया है। इसके तहत एजेंसी को औसतन करीब 3.14 लाख रुपये प्रतिदिन का भुगतान किया जाता है। इतने बड़े ठेके के बावजूद प्लांट के महत्वपूर्ण विद्युत उपकरण की चोरी ने रखरखाव के साथ-साथ सुरक्षा की निगरानी पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस के सामने भी बड़ा सवाल- 2400 किलो का ट्रांसफार्मर गया कैसे?

प्लांट के आपरेशन और मेंटेनेंस का काम देख रही पाठक इंजीनियरिंग कारपोरेशन की ओर से ओरमांझी थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए आवेदन दिया गया है।

अब पुलिस यह पता लगाने में जुटेगी कि चोर प्लांट के आसपास किस रास्ते से पहुंचे और इतनी भारी मशीन को किस रास्ते से बाहर ले गए। यह भी जांच का विषय होगा कि ट्रांसफार्मर को खोलकर उसके हिस्से अलग किए गए या उसे किसी वाहन की मदद से पूरा ही बाहर ले जाया गया। ट्रांसफार्मर के साथ अन्य उपकरणों के गायब होने की सूचना ने मामले को और गंभीर बना दिया है।

पहले भी तकनीकी समस्या को लेकर चर्चा में रहा है प्लांट
रुक्का प्लांट पहले भी तकनीकी और संचालन संबंधी समस्याओं को लेकर चर्चा में रहा है। वर्ष 2023 में यहां लो-वोल्टेज की समस्या सामने आई थी। बिजली विभाग की टीम ने ट्रांसफार्मर के टैप में सुधार कर समस्या को दूर किया था। अब ट्रांसफार्मर की चोरी ने प्लांट की सुरक्षा व्यवस्था को सवालों के घेरे में ला दिया है।

विभाग करा रहा चोरी गए सामान का आकलन
मैकेनिकल रांची के अधीक्षण अभियंता शंकर दास ने बताया कि ट्रांसफार्मर समेत कई उपकरणों की चोरी की सूचना मिली है। प्लांट के आपरेशन और मेंटेनेंस का काम देखने वाली एजेंसी की ओर से चोरी के संबंध में प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए आवेदन दिया गया है। विभागीय स्तर पर चोरी गए सामान का मूल्यांकन कराया जा रहा है।

मंत्री बोले- घटना सामान्य नहीं, मुख्यालय से जाएगी जांच टीम
पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने कहा कि रुक्का फिल्ट्रेशन प्लांट में चोरी की घटना सामान्य नहीं है। सुरक्षा गार्ड के रहते हुए ट्रांसफार्मर समेत विभिन्न उपकरणों की चोरी की विस्तृत जांच कराई जाएगी। जांच के लिए मुख्यालय से टीम भेजी जाएगी।